केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: नैनो उर्वरकों के लिए सख्त नियम लागू

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ती नैनो तकनीक को देखते हुए केंद्र सरकार ने नैनो उर्वरकों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब इन उर्वरकों को बाजार में उतारने से पहले कंपनियों को कई सख्त नियमों का पालन करना होगा। सरकार का उद्देश्य किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाजार में उपलब्ध उर्वरकों की गुणवत्ता पर नियंत्रण रखना है।

सरकार ने उर्वरक नियंत्रण से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी नैनो उर्वरक को बिना वैज्ञानिक परीक्षण और आवश्यक प्रमाणन के बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा। इसके लिए कंपनियों को पहले सुरक्षा और प्रभाव से जुड़ा पूरा डेटा प्रस्तुत करना होगा।

सुरक्षा और गुणवत्ता के लिए जरूरी होगा वैज्ञानिक परीक्षण

नए नियमों के अनुसार, नैनो उर्वरक बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पाद की सुरक्षा और जैविक प्रभाव से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। इसके लिए उन्हें मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से प्रमाणित रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये उर्वरक किसानों, मिट्टी और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों।

प्रारंभिक अनुमति की अवधि घटाई गई

सरकार ने नैनो उर्वरकों के लिए मिलने वाली शुरुआती अनुमति की अवधि भी कम कर दी है। पहले कंपनियों को तीन साल तक की अनुमति मिलती थी, लेकिन अब यह अवधि घटाकर दो साल कर दी गई है। इस अवधि के दौरान कंपनियों को अपने उत्पाद के परिणाम और प्रभाव से जुड़ी विस्तृत जानकारी सरकार को देनी होगी। अगर तय समय में यह जानकारी नहीं दी जाती, तो अनुमति समाप्त हो सकती है।

मल्टी-लोकेशन ट्रायल अनिवार्य

किसी भी नैनो उर्वरक को मंजूरी देने से पहले अब अलग-अलग क्षेत्रों में परीक्षण करना जरूरी होगा। इन परीक्षणों में कम से कम दस फसलों पर प्रयोग किए जाएंगे। साथ ही अलग-अलग मौसम और कृषि-जलवायु क्षेत्रों में भी इनके परिणामों की जांच की जाएगी। ये परीक्षण कृषि अनुसंधान संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों की निगरानी में होंगे।

हर बैच की लैब में जांच

नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने नैनो उर्वरक के हर बैच की जांच करानी होगी। यह परीक्षण मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में किया जाएगा और उसकी रिपोर्ट संबंधित विभाग को देनी होगी। रिपोर्ट के बिना उत्पाद को बाजार में भेजने की अनुमति नहीं होगी।

उपयोग की जानकारी

सरकार ने यह भी तय किया है कि नैनो उर्वरकों के पैकेट पर सुरक्षा से जुड़ी चेतावनियां और उपयोग से संबंधित दिशा-निर्देश लिखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा किसानों के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका भी देनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि पारंपरिक उर्वरकों के साथ इनका संतुलित उपयोग कैसे किया जाए।

किसानों को दी जाएगी ट्रेनिंग

नए नियमों के अनुसार, नैनो उर्वरक बनाने वाली कंपनियों को किसानों को इनके सही उपयोग की जानकारी देना भी जरूरी होगा। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने होंगे ताकि किसान इन उत्पादों का सुरक्षित और प्रभावी तरीके से उपयोग कर सकें।

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