गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 में राज्य की 10 चीनी मिलों ने किसानों से बड़ी मात्रा में गन्ना खरीदा था। इसके बदले किसानों को हजारों करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। विभाग की सख्ती और निगरानी के कारण अधिकांश किसानों को समय पर भुगतान मिल गया है।
किसानों को मिला बड़ी राशि का भुगतान
जानकारी के मुताबिक चीनी मिलों ने 9 अप्रैल 2026 तक किसानों से कुल 572.66 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की। इसके बदले किसानों को कुल 213783.58 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। विभाग का कहना है कि अब तक किसानों को 211481.43 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का लगभग 99.14 प्रतिशत है। शेष बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया भी जारी है।
सरकार ने पहले ही दिए थे निर्देश
गन्ना उद्योग विभाग ने गन्ना खरीद शुरू होने के साथ ही सभी चीनी मिलों को साफ निर्देश दिए थे कि किसानों का भुगतान समय पर किया जाए। सरकार का उद्देश्य था कि किसानों को अपने उत्पाद का पैसा जल्दी मिले ताकि उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। विभाग लगातार भुगतान की निगरानी करता रहा और समय-समय पर मिल प्रबंधन से रिपोर्ट भी ली जाती रही।
किसानों को मिली बड़ी राहत
समय पर भुगतान मिलने से गन्ना किसानों को काफी राहत मिली है। खेती में बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच समय पर पैसा मिलने से किसानों को अगली फसल की तैयारी में मदद मिल रही है। किसानों का कहना है कि भुगतान में तेजी आने से उन्हें कर्ज और अन्य खर्चों को संभालने में आसानी हुई है।
चीनी मिलों ने दिखाई सक्रियता
सरकार के दबाव और निगरानी के चलते चीनी मिल संचालकों ने भी भुगतान प्रक्रिया में तेजी दिखाई। विभाग का कहना है कि मिलों ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए देय राशि जारी करने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
कृषि क्षेत्र को मिलेगा मजबूती
जानकारों का मानना है कि समय पर भुगतान से किसानों का भरोसा बढ़ेगा और गन्ना उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे राज्य के कृषि और चीनी उद्योग दोनों को फायदा हो सकता है।

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