भारत और रूस के बीच 1 बड़ी डील, चीन को लगा झटका

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर हुआ नया समझौता रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस साझेदारी से भारत को न सिर्फ आधुनिक तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर उपलब्धता मिलेगी, बल्कि रेयर अर्थ के मामले में चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।

रूस की सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom और भारत की Nexon Geochem के बीच मॉस्को में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत दोनों देश रेयर अर्थ तत्वों की खोज, प्रोसेसिंग और उत्पादन तकनीक पर मिलकर काम करेंगे।

क्या हैं रेयर अर्थ मिनरल्स?

रेयर अर्थ 17 विशेष तत्वों का समूह होता है, जिनका इस्तेमाल आधुनिक तकनीक में बड़े पैमाने पर किया जाता है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, मिसाइल सिस्टम, कंप्यूटर चिप और विंड टरबाइन जैसे हाई-टेक उत्पाद इन्हीं खनिजों पर निर्भर होते हैं। हालांकि ये तत्व धरती में मौजूद होते हैं, लेकिन इन्हें शुद्ध रूप में निकालना और प्रोसेस करना बेहद कठिन और महंगा काम है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश अभी भी चीन पर निर्भर हैं।

भारत को कैसे होगा फायदा?

इस समझौते से भारत को रेयर अर्थ की आपूर्ति में स्थिरता मिल सकती है। साथ ही देश में इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को प्रोसेसिंग तकनीक और संयुक्त उत्पादन सुविधाओं का लाभ मिलता है, तो आने वाले वर्षों में देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।

कई देशों के साथ बढ़ा रहा सहयोग

भारत केवल रूस ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, जापान, अर्जेंटीना और अन्य देशों के साथ भी महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर साझेदारी बढ़ा रहा है। इसका मकसद भविष्य की तकनीकी जरूरतों को सुरक्षित करना और चीन पर निर्भरता कम करना है।

चीन का दबदबा और भारत की चुनौती

रेयर अर्थ सेक्टर में चीन का लंबे समय से बड़ा दबदबा रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे रेयर अर्थ खनन और उनकी प्रोसेसिंग में चीन सबसे आगे है। यही कारण है कि भारत सहित कई देशों को तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब भारत वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। रूस के साथ यह समझौता उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई को सुरक्षित करना है।

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