अमेरिका के 5 बड़े ऐलान, भारत को खुशखबरी, चीन सन्न!

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद रूबियो ने कई ऐसे संकेत दिए, जिन्हें भारत के लिए बड़ी रणनीतिक और आर्थिक उपलब्धि माना जा रहा है। ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमेरिका का रुख भारत के पक्ष में दिखाई दिया।

रूस से तेल खरीद पर भारत को राहत

रूबियो ने साफ कहा कि रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका की नीति कभी भारत के खिलाफ नहीं रही। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर आर्थिक दबाव बनाना अमेरिका की व्यापक रणनीति का हिस्सा था। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका और अन्य देशों के साथ भी सहयोग बढ़ा सकता है। इससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा के नए विकल्प मिलने की संभावना बढ़ी है।

ईरान पर अमेरिका का सख्त रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री ने वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी के लिए ईरान की गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत और अमेरिका दोनों के लिए बेहद अहम है। हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह बयान भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत का बड़ा व्यापार समुद्री रास्तों से जुड़ा है।

परमाणु खतरे पर बातचीत जारी

रूबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर है और वह कूटनीतिक समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और अमेरिका किसी बड़े संघर्ष से बचना चाहता है। इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने की कोशिशों को बल मिल सकता है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और तेल आयात पर भी पड़ेगा।

भारत में बढ़ेगा रक्षा उत्पादन

भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी रक्षा क्षेत्र से जुड़ी मानी जा रही है। रूबियो ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां अब भारत में हथियार और रक्षा उपकरण बनाने में रुचि दिखा रही हैं। इससे 'मेक इन इंडिया' और रक्षा उत्पादन को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही रोजगार और तकनीकी निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

क्वॉड में भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्वॉड समूह में भारत की भूमिका की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की ओर देख रही है और इस साल होने वाली क्वॉड बैठक में भारत की मेजबानी महत्वपूर्ण होगी। इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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