लखनऊ में श्रम एवं सेवायोजन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास की सबसे बड़ी ताकत हैं। इसलिए सरकार उनकी शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन पर विशेष ध्यान दे रही है।
बाल श्रमिकों को मिलेगा शिक्षा का सहारा
बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत 8 से 18 वर्ष तक के कामकाजी बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया जाता है। साथ ही उन्हें आर्थिक सहायता भी दी जाती है ताकि वे पढ़ाई जारी रख सकें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाए।
लेबर अड्डों को बनाया जाएगा सुविधा केंद्र
सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक शहरों में लेबर अड्डों को श्रमिक सुविधा केंद्र के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। यहां श्रमिकों को सुरक्षित आवास, जरूरी सुविधाएं और रोजगार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले श्रमिकों के लिए व्यवस्थित रहने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
सेवामित्र व्यवस्था को मिलेगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने 'सेवामित्र व्यवस्था' को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। यह एक तकनीक आधारित व्यवस्था है, जिसके जरिए लोग मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि इससे कुशल कामगारों को रोजगार मिलने के साथ लोगों को भी आसानी से सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

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