सरकार का उद्देश्य लेनदेन प्रक्रिया को आसान बनाना और रिपोर्टिंग सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है। नए नियमों के तहत कई वित्तीय लेनदेन में पैन नंबर देने की अनिवार्यता को बदला गया है। कुछ मामलों में सीमा बढ़ाई गई है, जबकि कुछ जगहों पर पैन की जरूरत समाप्त कर दी गई है।
नकद जमा को लेकर बड़ा बदलाव
पहले बैंक में एक दिन में 50 हजार रुपये से ज्यादा नकद जमा करने पर पैन देना जरूरी होता था। लेकिन अब इस नियम में राहत दी गई है। वहीं सेविंग अकाउंट में सालाना नकद जमा की सीमा भी बढ़ा दी गई है। पहले यह सीमा 2.5 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।
संपत्ति खरीद-बिक्री में बढ़ी सीमा
सरकार ने प्रॉपर्टी लेनदेन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब संपत्ति खरीद-बिक्री में पैन की अनिवार्यता की सीमा 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 45 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा गिफ्ट डीड और जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे मामलों को भी नए नियमों में शामिल किया गया है।
होटल और रेस्तरां भुगतान में राहत
होटल और रेस्तरां में नकद भुगतान पर भी नियम बदले गए हैं। पहले 50 हजार रुपये से ज्यादा के भुगतान पर पैन जरूरी होता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति लेनदेन कर दी गई है।
बीमा और निवेश पर नई रिपोर्टिंग
नए नियमों के अनुसार बीमा प्रीमियम और कुछ बड़े निवेशों की जानकारी अब आयकर विभाग को दी जाएगी। पैन होने पर ज्यादा राशि तक लेनदेन की अनुमति होगी, जबकि बिना पैन के सीमा कम तय की गई है।
डेबिट कार्ड आवेदन में राहत
सरकार ने डेबिट कार्ड जारी कराने के आवेदन में पैन की अनिवार्यता भी खत्म कर दी है। इससे आम उपभोक्ताओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
वाहन खरीद पर भी असर
अब 5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले दोपहिया वाहन भी पैन नियम के दायरे में आएंगे। हालांकि कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर को इससे बाहर रखा गया है।
नया फॉर्म भी लागू
पुराने फॉर्म 60 में बदलाव करते हुए सरकार ने नया फॉर्म 97 लागू किया है। इसका उपयोग उन मामलों में किया जाएगा, जहां पैन उपलब्ध नहीं होगा।

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