केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) को जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार यह पता लगाएगी कि क्या ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म एयरलाइंस द्वारा तय शुल्क से अधिक कैंसिलेशन फीस वसूल रहे हैं। साथ ही यह भी जांच होगी कि यात्रियों को बुकिंग के समय सभी चार्ज की पूरी जानकारी दी जाती है या नहीं।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ा मामला
यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फ्लाइट टिकट बुक करने के बाद टिकट कैंसिल करने पर उनसे भारी राशि काटी जा रही थी, जबकि एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर कैंसिलेशन शुल्क काफी कम दिखाया गया था। इस घटना के बाद यात्रियों ने भी सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें साझा करनी शुरू कर दीं, जिसके बाद सरकार ने मामले में हस्तक्षेप किया।
सरकार का पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
सीसीपीए अब यह जांच करेगी कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन से जुड़े नियमों को कितनी पारदर्शिता के साथ ग्राहकों के सामने रखते हैं। यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
सरकार के इस कदम से यात्रियों को मनमाने कैंसिलेशन चार्ज से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकती है। इससे उपभोक्ताओं के अधिकार मजबूत होंगे और कंपनियों को भी शुल्क संबंधी नियम स्पष्ट रूप से बताने होंगे।

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