कपड़ा उद्योग लंबे समय से कर रहा था मांग
देश का कपड़ा उद्योग काफी समय से आयात शुल्क हटाने की मांग कर रहा था। उद्योग जगत का कहना है कि घरेलू बाजार में कच्चे कपास की कमी और बढ़ती कीमतों की वजह से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इससे कपड़ा मिलों और निर्यातकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से कहा था कि यदि आयात शुल्क कम या खत्म किया जाता है, तो विदेशों से सस्ता और अच्छी गुणवत्ता वाला कपास भारत आ सकेगा।
मंत्रालयों के बीच चल रही चर्चा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय और कृषि मंत्रालय इस प्रस्ताव पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि आयात शुल्क हटाने से किसानों, उद्योग और बाजार पर क्या असर पड़ेगा। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर सरकार के कई मंत्रालयों के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
कपास की कमी बनी चुनौती
कपड़ा उद्योग इस समय कच्चे माल की कमी से जूझ रहा है। अनुमान के मुताबिक चालू वर्ष में देश को लगभग 337 लाख गांठ कपास की जरूरत होगी, जबकि उत्पादन करीब 292 लाख गांठ रहने की संभावना है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो रहा है। यही वजह है कि बाजार में कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
निर्यात को भी मिलेगा फायदा
जानकारों का मानना है कि शुल्क हटने से भारतीय कपड़ा उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत हो सकता है। कम लागत पर उत्पादन होने से भारतीय कपड़ों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को भी फायदा मिलेगा। भारत पहले से ही दुनिया के बड़े टेक्सटाइल उत्पादक देशों में शामिल है और यह फैसला उद्योग को नई गति दे सकता है।
किसानों पर भी रहेगी नजर
सरकार इस बात का भी ध्यान रख रही है कि आयात शुल्क हटाने से घरेलू कपास किसानों को नुकसान न हो। इसलिए फैसला लेते समय किसानों और उद्योग दोनों के हितों को संतुलित करने की कोशिश की जा रही है।

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