बाढ़ से बिगड़ी हालत
राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के अनुसार, राज्य की 37 तहसीलों में फैले 402 गांवों में करीब 84,000 से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पानी के बढ़ते स्तर ने जहां लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है, वहीं बड़ी मात्रा में कृषि भूमि और घरों को नुकसान हुआ है। अब तक 343 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 4,015 हेक्टेयर कृषि भूमि जलभराव की चपेट में आ गई है।
राहत और बचाव कार्य जारी
बता दें की सरकार के द्वारा बचाव कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। NDRF, SDRF और PAC की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 493 नावों और मोटरबोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अभी तक लगभग 76,632 खाद्य सामग्री के पैकेट बांटे जा चुके हैं।
सुरक्षित ठिकाने और भोजन की व्यवस्था
सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 905 बाढ़ आश्रय स्थल तैयार किए हैं, जहां फिलहाल 11,248 लोग शरण लिए हुए हैं। इसके अलावा, 29 सामुदायिक रसोइयों के जरिए ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि लोग भूख का सामना न करें। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो 757 चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी क्षेत्रों में सक्रिय हैं और 1,193 बाढ़ चौकियों के जरिए हालात पर नजर रखी जा रही है।
यूपी में बाढ़ से प्रभावित जिले
बाढ़ से जिन जिलों में सबसे अधिक असर पड़ा है उनमें कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, चित्रकूट, बांदा, बलिया, गाजीपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा और फतेहपुर प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से सड़क संपर्क बाधित हो गया है और कई गांवों में बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

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