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गणित: विज्ञान की रीढ़, बिना इसके अधूरी हर खोज

नई दिल्ली। गणित को अक्सर Mother of All Sciences कहा जाता है, क्योंकि यही वह विषय है जो हर वैज्ञानिक खोज की बुनियाद बनता है। विज्ञान की कोई भी शाखा गणित के बिना पूर्ण नहीं मानी जा सकती। इसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है।

1 .विज्ञान की भाषा है गणित

गणित वह भाषा है, जिसमें विज्ञान अपने नियम और सिद्धांत व्यक्त करता है। किसी भी वैज्ञानिक खोज को प्रमाणित करने के लिए गणितीय गणनाएं अनिवार्य होती हैं।

2 .भौतिकी की नींव गणित पर टिकी

गति, बल, ऊर्जा, गुरुत्वाकर्षण, स्पेस टाइम जैसे भौतिकी के सभी नियम गणितीय सूत्रों पर आधारित हैं। न्यूटन से लेकर आइंस्टीन तक हर महान वैज्ञानिक ने गणित को आधार बनाया।

3 .रसायन विज्ञान में सटीकता का आधार

केमिस्ट्री में रासायनिक समीकरण, परमाणु संरचना और अभिक्रियाओं की गणना गणित के बिना संभव नहीं है। सही अनुपात और मापन ही सफल प्रयोग की कुंजी हैं।

4 .जीव विज्ञान में भी गणित की अहम भूमिका

आधुनिक बायोलॉजी में डीएनए विश्लेषण, जनसंख्या अध्ययन और मेडिकल रिसर्च में गणितीय मॉडल का व्यापक उपयोग हो रहा है। बिना गणित के मेडिकल रिसर्च पूर्ण नहीं हो सकता।

5 .आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी का आधार

आज के दौर में AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस पूरी तरह गणितीय एल्गोरिदम पर निर्भर हैं। बिना गणित के आधुनिक तकनीक की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

6 .वैज्ञानिक सोच और तर्कशक्ति का विकास सिर्फ गणित से

गणित न केवल गणना सिखाता है, बल्कि तर्क, विश्लेषण और समस्या समाधान की क्षमता भी विकसित करता है, जो हर वैज्ञानिक के लिए जरूरी गुण हैं।

भारत के टॉप 10 रिसर्च संस्थान: वैज्ञानिक बनने के लिए बेस्ट

नई दिल्ली। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत ने बीते दशकों में जो प्रगति की है, उसका श्रेय देश के अग्रणी शोध संस्थानों को जाता है। ये संस्थान न सिर्फ वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की साख भी मजबूत करते हैं। अगर आपका सपना है एक वैज्ञानिक बनने का, तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। यहां हम बता रहे हैं भारत के 10 ऐसे प्रमुख रिसर्च संस्थानों के बारे में, जहां से निकलकर कई महान वैज्ञानिकों ने दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है।

1. भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु

1909 में स्थापित, IISc विज्ञान और इंजीनियरिंग रिसर्च का सबसे प्रतिष्ठित केंद्र है। यह संस्थान भौतिकी, रसायन विज्ञान, बायोलॉजी, कंप्यूटर साइंस और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में अग्रणी है। इस संस्थान ने देश को कई वैज्ञानिक दिए हैं।

2. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs)

देशभर में फैले IIT संस्थान केवल इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि रिसर्च में भी बेहतरीन योगदान दे रहे हैं। IIT बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, खड़कपुर और कानपुर जैसे कैंपस रिसर्च के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हैं। इस संस्थान से कई बड़े वैज्ञानिक निकले है।

3. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई

1945 में स्थापित यह संस्थान मूलभूत विज्ञान (Fundamental Sciences) जैसे गणित, भौतिकी और जीवविज्ञान में विश्व स्तरीय शोध कार्य करता है।

4. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई

भारत के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र बिंदु, BARC न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में, बल्कि चिकित्सा, पर्यावरण और रक्षा रिसर्च में भी अग्रणी है।

5. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO), बेंगलुरु

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO का योगदान किसी से छिपा नहीं है। रिसर्च से लेकर रॉकेट लॉन्च तक, यह संस्थान वैज्ञानिकों के लिए चुनौती और प्रेरणा दोनों है।

6. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (NISER), भुवनेश्वर

NISER, परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा संचालित एक उभरता हुआ रिसर्च संस्थान है, जो युवा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण और रिसर्च का बेहतरीन माहौल देता है।

7. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISERs)

देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित IISER संस्थान विज्ञान की शिक्षा और रिसर्च को जोड़ने का प्रयास करते हैं। ये संस्थान खासतौर से स्नातक से लेकर पीएचडी स्तर तक वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर केंद्रित हैं।

8. सीएसआईआर (CSIR) की प्रयोगशालाएं

Council of Scientific and Industrial Research के अंतर्गत देशभर में 30 से अधिक प्रयोगशालाएं हैं, जो औद्योगिक, रासायनिक, जैविक और पर्यावरणीय शोध में अग्रणी हैं।

9. इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट (IARI), नई दिल्ली

कृषि विज्ञान में अनुसंधान के लिए यह संस्थान भारत का प्रमुख केंद्र है। फसल सुधार, जैव तकनीक और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में यह अग्रणी भूमिका निभाता है।

10. सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC)

यह संस्थान भारत में सुपरकंप्यूटिंग और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी है। यदि आप कंप्यूटर साइंस में रिसर्च करना चाहते हैं, तो यह बेहतरीन विकल्प है।

भारत से अमेरिका तक: ये देश बना रहे अगली पीढ़ी के क्वांटम कंप्यूटर?

नई दिल्ली: 21वीं सदी में तकनीकी क्रांति का सबसे रोमांचक मोड़ क्वांटम कंप्यूटिंग है। पारंपरिक कंप्यूटर जहां बाइनरी कोड (0 और 1) के आधार पर कार्य करते हैं, वहीं क्वांटम कंप्यूटर क्वबिट्स (Qubits) पर आधारित होते हैं, जो एक साथ कई अवस्थाओं में रह सकते हैं। इसका मतलब है कि ये कंप्यूटर बेहद जटिल समस्याओं को कुछ ही पलों में हल कर सकते हैं, जिनमें पारंपरिक सुपरकंप्यूटर भी वर्षों लगाते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक आज दुनिया की कई महाशक्तियाँ और तकनीकी रूप से अग्रणी देश क्वांटम कंप्यूटिंग की होड़ में लगे हैं। आइए जानते हैं कि कौन-कौन से देश इस क्षेत्र में अगली पीढ़ी के क्वांटम कंप्यूटर विकसित कर रहे हैं। 

1. अमेरिका – नवाचार का देश

अमेरिका क्वांटम टेक्नोलॉजी में सबसे आगे माना जाता है। Google, IBM, Microsoft और Intel जैसी कंपनियाँ इस दिशा में अरबों डॉलर निवेश कर रही हैं। Google ने 2019 में दावा किया था कि उसने "क्वांटम सुप्रीमेसी" हासिल की है। वहीं, अमेरिकी सरकार भी National Quantum Initiative Act के तहत रिसर्च को बढ़ावा दे रही है।

2. चीन – तेजी से उभरती ताकत

चीन ने हाल के वर्षों में क्वांटम टेक्नोलॉजी में जबरदस्त प्रगति की है। 2020 में उसने दुनिया का पहला क्वांटम संचार उपग्रह लॉन्च किया। वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ चाइना ने Jiuzhang नामक क्वांटम कंप्यूटर विकसित किया है जो विशिष्ट गणनाओं में सुपरकंप्यूटर से भी तेज है। हालांकि अभी ये रिसर्च फेज में ही हैं।

3. भारत – भविष्य की तैयारी में जुटा

भारत ने भी क्वांटम क्षेत्र में महत्वाकांक्षी कदम उठाए हैं। 2020 में भारत सरकार ने ₹8000 करोड़ की लागत से National Mission on Quantum Technologies and Applications (NM-QTA) की घोषणा की। IISc, IITs और DRDO जैसी संस्थाएं इस दिशा में शोध कर रही हैं।

4. जर्मनी – औद्योगिक दृष्टिकोण से आगे

जर्मनी यूरोप का तकनीकी हब है और क्वांटम कंप्यूटिंग में यह भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। Fraunhofer Institute और IBM के सहयोग से देश ने अपना पहला क्वांटम कंप्यूटर स्थापित किया। जर्मन सरकार ने अरबों यूरो की फंडिंग से क्वांटम इनोवेशन को प्रोत्साहित किया है।

5. कनाडा – क्वांटम स्टार्टअप्स का गढ़

कनाडा क्वांटम टेक्नोलॉजी में शुरुआती लीडर्स में से रहा है। D-Wave Systems नामक कंपनी ने पहला कमर्शियल क्वांटम कंप्यूटर बनाया था। University of Waterloo और Perimeter Institute क्वांटम फिजिक्स के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं।

6. जापान – उच्च तकनीकी क्षमता के साथ अग्रणी

जापान में क्वांटम रिसर्च पर लंबे समय से कार्य हो रहा है। टोक्यो यूनिवर्सिटी और NEC जैसी कंपनियां क्वांटम प्रोटोटाइप विकसित कर रही हैं। जापान की रणनीति लंबी अवधि की स्टेबल क्वांटम प्रणाली विकसित करने पर केंद्रित है।

भारत के 6 बेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट: वर्ल्ड क्लास लैब्स

नई दिल्ली: भारत में शैक्षिक और अनुसंधान के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं जो विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। इन संस्थानों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, विशेषज्ञ शिक्षक, और शोधकर्ता होते हैं, जो वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

1. भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) भारत के सबसे पुराने और प्रमुख अनुसंधान संस्थानों में से एक है। यह संस्थान 1909 में स्थापित हुआ था और इसका उद्देश्य उच्च स्तरीय विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी शिक्षा प्रदान करना है। यहाँ पर विभिन्न प्रकार के शोध किए जाते हैं, जैसे कि भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, और गणित में। IISc के शोधकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण खोजें की हैं, और यह संस्थान भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी स्थान रखता है। संस्थान में अत्याधुनिक लैब्स और रिसर्च सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इसे एक वर्ल्ड क्लास रिसर्च हब बनाती हैं।

2. आईआईटी मद्रास (IIT Madras)

आईआईटी मद्रास भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) परिवार का एक प्रमुख सदस्य है और भारत के सबसे अच्छे तकनीकी संस्थानों में से एक माना जाता है। यहाँ की शोध सुविधाएँ और प्रयोगशालाएँ अत्याधुनिक हैं, जो छात्रों और शोधकर्ताओं को नई-नई तकनीकों और नवाचारों में योगदान करने का अवसर देती हैं। IIT मद्रास के शोध केंद्रों में ऊर्जा, पर्यावरण, जैव प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम हो रहा है। यह संस्थान ग्लोबल रैंकिंग में हमेशा टॉप 100 में होता है, और यहाँ से निकले शोध पत्र और इनोवेशन दुनियाभर में प्रशंसा प्राप्त करते हैं।

3. आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur)

आईआईटी खड़गपुर भारत का पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है, जो 1951 में स्थापित हुआ था। यह संस्थान इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, विज्ञान, और मानविकी में विविध शोध कार्य करता है। यहाँ के शोध केंद्रों में जटिल गणनाओं, बायोइंजीनियरिंग, नैनो टेक्नोलॉजी, और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। IIT खड़गपुर में उच्च तकनीकी लैब्स और विशेषज्ञता से लैस शोध केंद्र हैं, जो छात्रों और शोधकर्ताओं को दुनियाभर में होने वाले अनुसंधान कार्यों से जोड़े रखते हैं।

4. आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi)

आईआईटी दिल्ली ने हमेशा उच्च-स्तरीय शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया है। यह संस्थान कई आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में अग्रणी है, जैसे कि स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, और इलेक्ट्रॉनिक्स। IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं ने कई महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी आविष्कार किए हैं, जिनका वैश्विक प्रभाव पड़ा है। यहाँ के प्रयोगशालाएँ और रिसर्च फैसिलिटी दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं और यहाँ से निकले शोध पेपर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होते हैं।

5. आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay)

आईआईटी बॉम्बे न केवल भारत, बल्कि एशिया के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक है। यह संस्थान इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान, और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। IIT बॉम्बे में अत्याधुनिक लैब्स, शोध केंद्र, और अनुसंधान सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ पर अनुसंधान कार्यों के लिए निजी और सरकारी संगठनों द्वारा वित्तीय मदद प्राप्त होती है। IIT बॉम्बे का शोध और नवाचार शिक्षा के क्षेत्र में भी अग्रणी है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और वास्तविक दुनिया के मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलता है।

6. आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur)

आईआईटी कानपुर, भारत के शीर्ष संस्थानों में से एक है और इसका अनुसंधान कार्य वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के साथ किया जाता है। यहाँ के शोध कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, जलवायु परिवर्तन, और बायोइंजीनियरिंग जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं। IIT कानपुर में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, उपकरण और सामग्री के साथ शोध कार्य किए जाते हैं, और यहाँ से कई क्रांतिकारी आविष्कार और अनुसंधान कार्य सामने आए हैं। यह संस्थान छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य और शिक्षा प्रदान करता है।

मानव मस्तिष्क और एआई: बुद्धिमत्ता की सीमाओं का मुकाबला

साइंस डेस्क: मानव मस्तिष्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) दोनों के बीच तुलना एक दिलचस्प और जटिल विषय है। हर दोनों के पास अपनी अनूठी क्षमताएँ हैं, लेकिन उनका कार्य करने का तरीका और उनके पास की सीमाएँ काफी अलग हैं।

1. मस्तिष्क की संरचना:

मानव मस्तिष्क एक जटिल जैविक संरचना है, जो 86 अरब से अधिक न्यूरॉन्स से बना है। इन न्यूरॉन्स के बीच ट्रिलियन (10^12) कनेक्शंस होते हैं। मस्तिष्क प्राकृतिक तरीके से सीखता है और अनुभवों के आधार पर अपने विचारों और प्रतिक्रियाओं को लगातार अपडेट करता रहता है। इसके अलावा, मस्तिष्क भावनाओं, समझ, और सृजनात्मकता का समर्थन करता है।

2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI):

एआई मानव मस्तिष्क से प्रेरित है और ये इंसान की तरह ही सोच सकता हैं। लेकिन एआई को डेटा पर आधारित एल्गोरिदम द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है। जब इसे सही तरीके से प्रशिक्षित किया जाता है, तो यह बहुत प्रभावी हो सकता है। जैसे-जैसे एआई विकसित हो रहा हैं ये मानव मस्तिष्क की तरह काम कर रहा हैं। कई रिसर्च ये बतलाती हैं की एआई अब बिना इंसान की सहायता से खुद को प्रशिक्षित करने लगा हैं।

3. सीमाएँ:

मानव मस्तिष्क: भावनाओं और मानसिकता का एक जटिल मापदंड हैं जो नैतिक निर्णय लेने में सक्षम हैं।  हालांकि मस्तिष्क अत्यधिक लचीला है, इसे थकान, भावनात्मक दबाव और शारीरिक सीमाएँ प्रभावित कर सकती हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता: एआई लगातार काम कर सकता है और थकता नहीं है, लेकिन यह डेटा और एल्गोरिदम पर निर्भर है, और वास्तविक दुनिया के अनुभवों को पूरी तरह से समझने में सीमित है। इसका निर्णय मानवीय मानसिकता, समाजिक या सांस्कृतिक अनुभवों से प्रभावित नहीं होता, जिससे कभी-कभी ये "अल्गोरिथ्मिक पूर्वाग्रह" का शिकार हो सकता है।

4. आगे की दिशा:

मानव मस्तिष्क के सशक्त पक्ष में उसकी अनुकूलन क्षमता, सृजनात्मकता और अन्यथा रचनात्मक सोच है। इसे बहुत ही जटिल कार्यों को हल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि कला, संगीत, या जटिल सामाजिक समस्याओं का समाधान।

एआई का विकास उन कार्यों में तीव्र गति से हो रहा है, जो गणनाओं या पैटर्न की पहचान से जुड़े हैं। जैसे मेडिकल निदान, वित्तीय सेवाएँ, और कुछ क्षेत्रों में ऑटोमेशन। आने वाले समय में आप टीचर, वकील, इंजीनियर, डॉक्टर, समेत अन्य कई  रूप में भी एआई को देख सकेंगे।

5. संभावनाएँ:

जब दोनों का सही तरीके से संयोजन किया जाता है, तो यह दोनों के सामर्थ्य को बढ़ा सकता है। उदाहरण के लिए, एआई को मानव मस्तिष्क की समझ और निर्णय लेने की क्षमता के साथ मिलाकर नई कार्यक्षमताएँ उत्पन्न की जा सकती हैं, जो तकनीकी और समाजिक दृष्टिकोण से लाभकारी हो सकती हैं।

अंत में, एआई और मानव मस्तिष्क दोनों के पास अपनी अलग-अलग सीमाएँ और संभावनाएँ हैं। जहां एआई बुद्धिमत्ता के विशिष्ट क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है, वहीं मानव मस्तिष्क अपनी अनुकूलनशीलता, रचनात्मकता और गहरी समझ में अद्वितीय है।

भारत ने बनाया है सबसे ताकतवर 'रॉकेट इंजन'

नई दिल्ली: रॉकेट इंजन एक प्रकार का इंजन होता है जो रॉकेट को ऊँचाई पर ले जाने और अंतरिक्ष में गति प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह इंजन रासायनिक ऊर्जा को थर्मल ऊर्जा में परिवर्तित करके गैसों को उच्च गति से बाहर निकालता है, जिससे रॉकेट को आगे बढ़ने का बल मिलता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अभी तक लड़ाकू विमान के लिए 'जेट इंजन' विकसित नहीं कर पाया हैं, लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने दुनिया का ताकतवर रॉकेट इंजन विकसित किया हैं। इसरो के द्वारा क्रायोजेनिक इंजन को भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट LVM3 के लिए बनाया गया है।

क्रायोजेनिक इंजन क्या हैं: यह एक विशेष प्रकार का रॉकेट इंजन होता है, जिसमें ईंधन और ऑक्सीडाइज़र को अत्यधिक कम तापमान पर रखा जाता है, जिससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। इस प्रकार के इंजनों में आमतौर पर तरल ऑक्सीजन (LOX) और तरल हाइड्रोजन (LH2) का उपयोग किया जाता है।

क्रायोजेनिक इंजन की मुख्य विशेषताएँ:

1 .उच्च थ्रस्ट: क्रायोजेनिक इंजन उच्च थ्रस्ट उत्पन्न करते हैं, जो उन्हें भारी उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों को लांच करने में सक्षम बनाता है।

2 .उच्च ईंधन दक्षता: ये इंजन उच्च विशिष्ट impulso (specific impulse) प्रदान करते हैं, जो उन्हें अधिक कुशल बनाता है।

3 .जटिलता: क्रायोजेनिक सिस्टम जटिल होते हैं और इन्हें बहुत सावधानी से डिज़ाइन और संचालन करना पड़ता है, क्योंकि तरल गैसें अत्यधिक ठंडी होती हैं।

5 .उपयोग: क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग कई प्रमुख रॉकेटों में किया जाता है, जैसे कि NASA का सैटर्न V और स्पेस शटल और भारतीय स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के रॉकेटों में भी इसका इस्तेमाल होता हैं।

अमेरिकी वैज्ञानिकों को मिला 2024 का नोबेल प्राइज

नई दिल्ली: अमेरिकी वैज्ञानिक विक्टर एंब्रोस और गेरी रुवकोन को मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार मिला हैं। इन्हें RNA इंटरफेरेंस के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। RNA इंटरफेरेंस एक महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है जो जीन अभिव्यक्ति को नियंत्रित करती है और यह चिकित्सा अनुसंधान में भी बेहद महत्वपूर्ण है। 

खबर के अनुसार नोबेल प्राइज देने वाली कमेटी ने कहा था कि इनकी दी गई mRNA टेक्नोलॉजी से बनी कोरोना वैक्सीन के जरिए दुनिया कोरोना महामारी से निकल पाई। उनके काम ने जीन थेरेपी और कैंसर अनुसंधान में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। 

बता दें की यह पुरस्कार वैज्ञानिक योगदान की उच्च मान्यता है। साल 2024 के मेडिसिन का नोबेल प्राइज विक्टर एंब्रोस और गेरी रुवकोन को मिला है। उन्हें ये प्राइज माइक्रो RNA की खोज के लिए दिया गया है। जल्द ही अन्य क्षेत्रों के नोबेल प्राइज की घोषणा होगी। 

दरअसल नोबेल प्राइज 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक विज्ञान, अर्थशास्त्र, साहित्य और शांति जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाले लोगों को दिया जायेगा। यह प्राइज प्राइज स्वीडन के स्टॉकहोम में दिए जा रहे हैं। अभी मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की घोषणा हुई हैं।

सिर्फ 5 देशों के पास 'जेट इंजन' बनाने की तकनीक

न्यूज डेस्क: जेट इंजन एक प्रकार का गैस टरबाइन इंजन है जो विमानों और फाइटर जेट में उपयोग होता है। यह इंजन एयरक्राफ्ट को उड़ान भरने, गति प्राप्त करने और ऊँचाई पर बनाए रखने के लिए आवश्यक थ्रस्ट उत्पन्न करता है। दुनिया में सिर्फ पांच देशों के पास ही जेट इंजन बनाने की तकनीक हैं। 

सिर्फ 5 देशों के पास 'जेट इंजन' बनाने की तकनीक।

1 .संयुक्त राज्य अमेरिका: अमेरिका के पास कई प्रमुख एयरोस्पेस कंपनियाँ हैं, जैसे जनरल इलेक्ट्रिक और प्रैट एंड व्हिटनी, जो जेट इंजन विकसित करती हैं।

2 .रूस : रूस का एयरोस्पेस उद्योग, विशेष रूप से एरोस्पेस इंजीनियरिंग में, जेट इंजन बनाने में सक्षम है, जैसे कि सुकॉई और मिकोयान आदि। 

3 .यूके :  आपको बता दें की ब्रिटेन की भी कई कंपनियाँ ऐसी हैं जो जेट इंजन बनाती हैं। जैसे रोल्स-रॉयस, जेट इंजन बनाने में विशेषज्ञता रखती हैं। 

4 .फ्रांस : फ्रांस भी जेट इंजन बनाने में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है, खासकर एयरोस्पेस उद्योग में। यहाँ की कुछ प्रमुख कंपनियाँ जेट इंजन बनाती हैं।

5 .चीन - चीन ने हाल के वर्षों में अपनी तकनीक में सुधार किया है और अब अपने खुद के जेट इंजन विकसित कर लिया हैं 

नोट : आपको बता दें की भारत में जेट इंजन बनाने के लिए कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। जल्द ही भारत स्वदेसी जेट इंजन तैयार कर लेगा।

ये 3 देश बना रहे हैं छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान

नई दिल्ली : आज के समय में दुनिया के कई देश पांचवी पीढ़ी के विमान बनाने के लिए करोड़ो रुपये खर्च कर रहे हैं। वहीं अमेरिका, रूस और चीन छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। यह विमान अंतरिक्ष के नजदीक उड़ान भरने में भी सक्षम होगा। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक  संयुक्त राज्य अमेरिका , रूस और चीन इस रेस में सबसे आगे हैं। जबकि छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए जापान , इटली , यूनाइटेड किंगडम , फ्रांस , जर्मनी , स्पेन और स्वीडन सहयोगी बहुराष्ट्रीय कार्यक्रमों में एक साथ शामिल हुए हैं।

बता दें की यह लड़ाकू विमान उच्च शक्ति वाले माइक्रोवेव और लेजर हथियार से लैस होंगे। ये विमान इतना स्टील्थ होगा की इसे रडार से नहीं पकड़ा जा सकेगा। इसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैनन जैसे अडवांस तकनीकों से लैस किया जायेगा। छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को 2030 के दशक तक आने की उम्मीद हैं। 

अमेरिकी कंपनी बोइंग, लॉकहीड मार्टिन ने छठी पीढ़ी के विमान विकास परियोजनाओं की घोषणा की है। वहीं, रूस छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का निर्माण करने जा रहा है, जिसका नाम मिग-41 रखा गया है। जबकि चीन भी इसतरह का विमान विकसित करने की योजना पर काम कर रहा हैं।

शरीर में DNA क्या होता है और ये कैसे बनता हैं?

साइंस डेक्स : आप किसी न किसी को ये कहते हुए सुना होगा की हमारे शरीर में DNA होता हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की DNA क्या होता हैं और ये हमारे शरीर में कैसे काम करता हैं तथा वैज्ञानिक किसी इंसान के शरीर में DNA का पता कैसे लगाते हैं।

DNA क्या हैं?

डीएनए ( DNA ) का पूरा नाम डिऑक्सी-राइबोन्यूक्लिक एसिड होता है। यह एक लंबा अणु है जिसमें आपका अद्वितीय आनुवंशिक कोड मौजूद होता है। यह अणुओं का एक ऐसा समूह है, जो माता-पिता से वंशानुगत गुणों या आनुवंशिक जानकारी को उनके संतानों में दर्ज करता हैं। 

बता दें की हमारे शरीर के हर कोशिका में डीएनए या आनुवंशिक कोड होता है जो आपको बनाता है। डीएनए सभी जीवन के विकास, प्रजनन और कामकाज के लिए निर्देश देता है। यह हमारे शरीर में माता-पिता से आता हैं, इसका निर्माण कई चीजों से मिलकर होता हैं। 

DNA कैसे बनता हैं?

वैज्ञानिकों की मानें तो डीएनए ( DNA ) न्यूक्लिक एसिड नाइट्रोजनस बेस, चीनी अणुओं और फॉस्फेट समूहों के संयोजन से बनते हैं जो अनुक्रमों की एक श्रृंखला में विभिन्न बांडों से जुड़े होते हैं। यह शरीर की मूल आनुवंशिक संरचना को भी परिभाषित करते हैं।

Career : ये कोर्स कर लिया तो सीधे NASA, ISRO में मिलेगी नौकरी

नई दिल्ली: आज के वर्तमान समय में बहुत से छात्र NASA, ISRO में नौकरी करना चाहते हैं ताकि ब्रह्माण्ड के रहस्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। साथ ही साथ स्पेस में घटने वाली घटनाओं के बारे में रिसर्च कर सकें। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे एक ऐसे कोर्स के बारे में जिस कोर्स की पढ़ाई करने के बाद आप NASA, ISRO में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। 

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग : अगर आप NASA, ISRO में नौकरी करना चाहते हैं तो आप 12वीं के बाद एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करें। एयरोस्पेस इंजीनियर बनने के लिए 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स होना जरूरी है। 

कैसे मिलेगा एडमिशन : अगर आप भारत के बेस्ट कॉलेज से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं तो आपको JEE एग्जाम पास करना होगा। इसके बाद अपनी मैरिट के आधार पर आप भारत के बेस्ट इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन ले सकते हैं। 

भारत के बेस्ट एयरोस्पेस इंजीनियरिंग कॉलेज?

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर। 

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़कपुर। 

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई। 

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, देहरादून। 

मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, तिरुवंतपुरम। 

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST), तिरुवनंतपुरम। 

अंतरिक्ष से आ रहा है कुछ अजीब सिग्नल, वैज्ञानिक भी हैरान

न्यूज डेस्क: आज के इस साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया कई तरह के ऐसे घटना घटित होते हैं जो वैज्ञानिक को भी हैरान कर देते हैं। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ऐसा सिग्नल खोजा है जो एक निश्चित अंतराल पर बार-बार अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर आ रहा है। हालांकि वैज्ञानिक इसके बारे में कुछ भी बताने से बच रहें। लेकिन वैज्ञानिकों ने इस सिग्नल का नाम एफआरबी (FRB) रखा है।
अंतरिक्ष से आ रही सिग्नल की मुख्य बातें। 
1 .वैज्ञानिकों के अनुसार, सिग्नल पृथ्वी से करीब 500 मिलियन (करीब 50 करोड़) प्रकाश वर्ष दूर से आ रहा है।

2 .कनाडा के सीएचआईएमई यानी (Canadian Hydrogen Intensity Mapping Experiment) के वैज्ञानिकों ने 409 दिनों तक इन रेडियो तरंगों के चक्र पर नजर रखी। 

3 .वैज्ञनिकों के लिए अभी भी ये तरंगें एक पहेली बनी हुई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर स्त्रोत पता लग जाएगा तो इस बात का भी खुलासा होगा कि ये तरंगे क्यों आ रही हैं। 

4 .रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने बताया कि पहले फास्ट रेडियो बर्स्ट तारों एवं धातुओं वाले एक छोटी गैलेक्सी से आया था। वहीं, दूसरा एफआरबी एक अन्य आकाश गंगा जैसी घुमावदार गैलेक्सी से आया था। 

5 .रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने बताया कि ये तरंगें अंतरिक्ष से चार दिनों तक एक घंटे तक आती रहती हैं।  

बुद्धिमान लोग अकेले रहना पसंद करते है: स्‍टडी

डेस्क: इस दुनिया में लोगों के दिमाग और उनकी जीवनशैली को जानने के लिए प्रतिदिन कई तरह के शोध किये जाते हैं। ताकि लोगों को इसके बारे में सही जानकारी मिल सके। आज इसी विषय में एक स्टडी के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे की क्या बुद्धिमान लोग अकेले रहना पसंद करते हैं। तो आईये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से। 
स्टडी: एक स्‍टडी के मुताबिक, बुद्धिमान लोग खुश होते हैं जब वह अकेले होते हैं। यह स्‍टडी वर्ल्‍ड इकनॉमिक फोरम के द्वारा की गई है। यह रिसर्च 18 से 28 वर्ष की उम्र के 15 हजार से ज्‍यादा लोगों की जानकारी जुटाने के लिए की गई थी। उनसे कई तरह के सवाल पूछा गया कि वे कहां रहते हैं। वे अपनी जिंदगी से कितने संतुष्‍ट हैं। वो क्या कहते हैं। उनका कैरियर कैसा हैं। जहां वे रहते हैं वहां की आबादी कितनी घनी है और सोशल रिलेशनशिप्‍स से उन्‍हें कितनी खुश मिलती है। 

इस स्टडी के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया की बुद्धिमान लोगों को बड़ा ग्रुप होने से नेगेटिव इफेक्‍ट्स महसूस होते हैं। ये लोग अकेला रहना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इनका ग्रुप और लोगों के मुलाबले बहुत कम होता हैं। स्‍टडी की मानें तो ज्‍यादातर बुद्धिमान व्यक्तियों को दोस्‍तों के साथ लगातार सोशलाइजेशन से जीवन से कम संतुष्टि महसूस होती है।   

क्‍योंकि ज्‍यादा बुद्धिजीवी लोग अपने काम पर फोकस रहते हैं और उसी पर समय बिताना उन्‍हें अच्‍छा लगता है। उनके दिमाग में काम के प्रति एक सच्ची निष्ठा बन जाती हैं। जिसके कारण ये लोग सिर्फ अपने काम पर फोकस करते हैं। 

चंद्रयान-2: सात सितंबर को 1:55 मिनट पर इतिहास रचेगा इसरो

साइंस डेस्क: भारत का चंद्रयान-2 चन्द्रमा की कक्षा में पहुंच गया हैं और अभी चंद्रयान-2 चांद की परिक्रमा कर रहा है। इसरो चीफ के सिवन ने बताया कि सुबह 9 बजे चांद की कक्षा में चंद्रयान-2 पहुंचा गया । उन्होंने कहा कि इस दौरान 30 मिनट तक उनकी धड़कनें तक रुक गईं थीं। लेकिन अभी चंद्रयान-2 पूरी तरह कंट्रोल में हैं और वो चांद की परिक्रमा कर रहा हैं। 

इसरो अध्यक्ष के सिवन ने बताया की सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 की साॉफ्ट लैंडिंग कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले लैंडर संबंधी दो कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। इसके बाद सात सितम्बर को 1:55 मिनट पर इसे चन्द्रमा की सतह पर लैंडिंग कराया जायेगा। 

बंगलूरू के नजदीक ब्याललू स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के एंटीना की मदद से बंगलूरू स्थित इसरो, टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के मिशन ऑपरेशन्स कांप्लेक्स (एमओएक्स) से चंद्रयान-2 की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वैज्ञानिक इसके हर पहलू पर नजर बनाएं हुए हैं ताकि बाद में किसी परेशानी का सामना करना ना पड़ें। 

इसरो चीफ के सिवन ने बताया कि सुबह 9 बजे प्रणोदन प्रणाली के जरिए चंद्रयान-2 को चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया। सिवान ने कहा यह पूरी प्रक्रिया 1,738 सेकेंड की थी और इसके साथ ही चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया। अभी वो चन्द्रमा की परिक्रमा अच्छी तरह से कर रहा हैं। .

चंद्रयान-2 को चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चंद्र ध्रुवों के ऊपर से गुजरना है। इसकी अंतिम कक्षा में पहुंचाने के लिए चार और कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)  ने कहा कि इसके बाद लैंडर विक्रम दो सितंबर को ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। इसके बाद सात सितंबर को 1:55 मिनट पर इसे चन्द्रमा की सतह पर उतारा जायेगा। 

चंद्रयान-2 मिशन भारत के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है। यह भारत के साथ साथ पूरी मानवता के लिए लाभकारी साबित होगा। 
 

अगर किसी को पसंद करते हैं तो इन 4 तरीकों से कहें अपनी बात

डेस्क: आज के समय में लोग कॉलेज या ऑफ़िस में में किसी ना किसी को पसंद जरूर करते हैं। लेकिन वो अपने दिल की बात उनसे कह नहीं पाते हैं। उनके अंदर इस बात का डर बना रहता हैं की वो कहीं नाराज ना हो जाएं। आज जानने की कोशिश करेंगे उन तरीकों के बारे में जिन तरीकों को अपना कर आप किसी का भी दिल जीत सकते हैं तथा अपने दिल की बात उनसे कह सकते हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से की अगर किसी को पसंद करते हैं तो इन 4 तरीकों से कहें अपनी बात। 
1 .अगर आप किसी को पसंद करते हैं तथा उन्हें अपने दिल की बात कहना चाहते हैं तो आप सबसे पहले खुद को तैयार करें। क्यों की प्यार का इज़हार कहने से पहले खुद का माइंडसेट बनाना बहुत ज़रूरी होता हैं। आप उन्हें कॉफी के लिए बुला सकते हैं और उनसे अपने दिल की बात कह सकते हैं। आप प्रेम का इज़हार सही मौके पर करें। आप अपने पार्टनर के जन्मदिन पर उनसे दिल की बात कहें। आपके लिए बेहतर रहेगा और ये लम्हा यादगार भी बन जायेगा। 

2 .अगर आप किसी को पसंद करते हैं और उनसे बातचीत होती हैं तो आप उन्हें इंप्रेस करने की कोशिश करें। आप उनकी बातों को ध्यान से सुने तथा उनके साथ हंसी मज़ाक करना बिल्कुल भी ना भूले। उन्ही परेशानी को अपनी परेशानी समझें। इससे आपके बीच धीरे धीरे आकर्षण बढ़ता जायेगा और वो आपके और करीब आ जाएगी। फिर आपको जब दिल की बात कहनी होगी तब आप सही समय देखकर उनसे अपने दिल की बात कह सकते हैं। 

3 .अगर आप किसी से दिल की बात कहना चाहते हैं तो आप उनसे सबसे पहले दोस्ती करें। किसी भी त्यौहार या महत्पूर्ण दिन पर उन्हें शुभकामनाएं देना ना भूले। इससे आपकी बातचीत धीरे धीरे आगे बढ़ने लगेगी और आपके बीच नजदीकियां भी बढ़ जाएगी। इसके बाद आप उनसे अपने दिल की बात आसानी से कह सकते हैं। लेकिन दिल की बात कहने में ज्यादा जल्दीबाजी ना दिखाए और सही मौके का इंतजार करें। ये आपके लिए अच्छा रहेगा। 

4 .आप अगर किसी को पसंद करते हैं तो आप उनके साथ कहीं बाहर घुमने जाएँ तथा मिलाने जुलने का सिलसिला शुरू करें। इससे आपके बीच एक दूसरे के लिए भावनात्मक लगाव उत्पन हो जायेगा। साथ ही साथ आपकी नजदीकियां बढ़ेगी। इसके आप आप उनसे अपने दिल की बात कह सकते हैं। इससे आपके जीवन में प्रेम की शुरूआत हो जाएगी और आपको आपका प्यार भी मिल जायेगा। 

IIT Bombay की रिसर्च हिट, QS वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप पर रहा भारत का ये संस्थान

डेस्क: QS वर्ल्ड रैंकिंग में लगातार आठवे साल अमेरिका का MIT टॉप पर रहा हैं। टॉप 10 में हर साल की तरह इस साल भी अमेरिकन यूनिवर्सिटी का दबदवा देखने को मिला। अगर यही बात भारतीय यूनिवर्सिटी की करें तो इसमें IIT Bombay की रिसर्च हिट सबसे हिट रही। QS वर्ल्ड रैंकिंग ने IIT Bombay को भारत का सबसे बेस्ट यूनिवर्सिटी माना। 
वर्ल्ड रैंकिंग में लगातार तीसरे साल जगह बनाकर IIT Bombay देश का नंबर बन आईआईटी बन चूका हैं। वैसी बात अगर और आईआईटी की करें तो उनके रैंकिंग में कुछ गिरावट देखि गयी हैं। हर साल टॉप पर रहने वाले IIT Delhi और IISC बंगलौर की रैंकिंग भी गिरी है। 

QS वर्ल्ड रैंकिंग में भारत के कुल 23 यूनिवर्सिटी शामिल हैं जिसमे IIT Bombay की रैंकिंग 152 है। अपने बेहतर शोध और कार्य की बदौलत IIT Bombay ने दुनिया के बेस्ट संस्थानों में अपनी धाक जमाई है। इस बार आईआईटी बॉम्बे पिछले साल की 162 रैंकिंग से दस स्टेप ऊपर आकर 152 वीं रैंक हासिल की हैं।

अगर पूरी दुनिया के यूनिवर्सिटी के रैंकिंग की बात करें तो इस रैंकिंग में भारत की कोई भी यूनिवर्सिटी दूर दूर तक दिखाई नहीं देता है। हमारे देश की सरकार को इसपर सोचने की ज़रूरत है। की आज जब पूरी दुनिया साइंस और टेक्नोलॉजी की तरफ बढ़ रही हैं। इस युग में हमारे देश का कोई भी यूनिवर्सिटी टॉप रैंकिंग में नहीं हैं। 

जुलाई में होगी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग, बड़ी कामयाबी की ओर बढ़ता इसरो

साइंस डेस्क: भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो जुलाई महीने में चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग करेगा। बहुत दिनों से लोग इस बात को जानने के लिए उतावे थे की इसरो कब अपने चंद्रयान-2 मिसन में कामयाब होगा। यह मिसन इसरों के लिए बहुत बड़ा मिसन के तौर पर देखा जा रहा हैं। क्यों की इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब इसरों चन्द्रमा पर रॉबोट उतारने में सफल होगा। 
इसरो के और से आयी मिडिया खबर के अनुसार इसरों 15 जुलाई सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर चंद्रयान-2 को लॉन्च करेगा। इसके बारे में जानकारी देते हुए इसरों चेयर मैन सिवान में बताया की चंद्रयान-2 में तीन हिंस्से होंगे। लैंडर, रोवर और ऑर्बिटर। रोवर एक रोबोटिक आर्टिकल हैं जिसका वजन 27 किलो हैं तो वही लैंडर का वजन 1.4 टन और ऑर्बिटर का वजन 2.5 टन हैं। 

इसरों की और से लॉन्च किये जाने वाला चंद्रयान-2 मिसन 1 साल 15 दिन का होगा। इस मिशन का कुल वजन 3877 किलो हैं। इस मिशन को GSLV से लॉन्च किया जायेगा। अगर इसरों इस मिशन को पूरा करने में सफलता हासिल करता हैं तो ये इसरों का अब तक का सबसे बेस्ट मिशन माना जायेगा। क्यों की इसरो इस तरह का अब तक एक भी मिशन लॉन्च नहीं किया हैं। 

जिस समय चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की जाएगी। उस समय चन्द्रमा पृथ्वी के काफी करीब होगा। उस समय पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी 3 लाख 84 हजार 400 किमी होगी। धरती से ज्यादा दुरी होने की वजह से रेडियो सिग्नल आने में देरी हो सकती हैं। 

चन्द्रमा पर चंद्रयान-2 को लैंड कराने में इसरो के वैज्ञानिकों को काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता हैं। लेकिन इसरों के वैज्ञानिक इस परेशानियों से निकलने में कामयाब हो सकते हैं और अपने देश के नाम को ऊंचा कर सकते हैं। यह मिशन इसरों के लिए बहुत बड़ा मिशन के तौर पर देखा जा रहा हैं। इस मिशन की सबसे खास बात यह हैं की ये मिशन पूरी तरह से देशी हैं। इसे भारत में ही बनाया गया हैं। 

रीसेट-2बी सैटेलाइट लॉन्च, इसरो की बड़ी कामयाबी

साइंस डेस्क: 22 मई की सुबह 5.30 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद से इसरों ने रीसेट-2 बी सैटेलाइट को लॉन्च करने में कामयाबी हासिल की। यह कामयाबी भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा हैं। इस सैटेलाइट की सबसे खास बात यह हैं की ये सैटेलाइट किसी भी मौसम में तस्वीर लेने में सछम हैं। 

रीसेट-2 बी सैटेलाइट को सफलता पूर्वक 555 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया गया। यह रीसेट-2 बी सैटेलाइट रीसेट सैटेलाइट सीरीज का चौथा सैटेलाइट हैं। यह सैटेलाइट ख़ुफ़िया निगरानी, आपदा प्रबंधन जैसे छेत्रों में मदद करेगा। 

इस रीसेट-2बी सैटेलाइट के साथ एक सिंथेटिक अपचर रडार इमेजर भेजा गया हैं। इससे सैटेलाइट की सेवाएं नियंतर बनी रहेगी। इसरो रीसेट सैटेलाइट सीरीज के छह उपग्रह को लॉन्च करने की प्लानिंग कर रहा हैं। बहुत जल्द इस सीरीज के और उपग्रहों के लॉन्च होने की खबर मिल सकती हैं। इससे भारत दुनिया के उन तमाम  देशों की श्रेणी में आ जायेगा। जिसके पास आपदा, सुरक्षा और रणनीति जैसी चीजों के लिए दूसरे देशों से सहायता लेना नहीं पड़ता हैं।  

इसरो के मुताबिक यह उपग्रह हर मौसम चाहे रात हो, दिन हो, बदल हो या बारिश हो रही हैं। किसी भी स्थिति में ये सही तस्वीर जारी करने में सछम हैं। इससे भारतीय सेना को भी सुरक्षा जैसे मामलों काफी मदद मिलेगी। इससे सेना की शक्ति में इजाफा के तौर पर भी देखा जा सकता हैं। इस उपग्रह से सीमाओं की निगरानी की जा सकती हैं। साथ हीं साथ यह उपग्रह को घुसपैठ को रोकने के लिए भी विकसित किया गया हैं जो हमारे देश के सुरक्षा के हिसाब से बेहतर हैं। 

इसरो के एक और मिशन की तैयारी की शुरू

साइंस डेस्क: भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो हर दिन एक नया नया मुकाम हासिल कर रहा हैं। जिसे देख पूरी दुनिया चकित हैं। इसरों 22 मई की सुबह श्रीहरिकोटा से रिसेट-2 बी उपग्रह का को लॉन्च करेगा। यह उपग्रह रिसेट सैटेलाइट सीरीज का चौथा उपग्रह होगा। इस उपग्रह की सेवा लगातार बनी रहे। इसके लिए इसरों 300 किलोग्राम के रिसेट-2 बी सैटेलाइट के साथ सिंथटिक अपचर रडार इमेजर को भेजेगा। 

भारतीय समय अनुसार 22 मई की सुबह 5:27 बजे इस उपग्रह को स्पेस में स्थापित किया जायेगा। अगर इसरो इस उपग्रह को स्थापित करने में कामयाब रहेगा तो इसे बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती हैं। 

इतना ही नहीं इसरों में निकट भविष्य को देखते हुए रिसेट जैसे कम से कम छह उपग्रह लॉन्च करने की योजना बनाई हैं। इस उपग्रह से आपदा राहत कार्य में लगे लोगों और सुरक्षाबलों को काफी मदद मिलेगी। ये सैटेलाइट 500 किमी की ऊंचाई से ही देश की छमता बढ़ाएंगे। 

यह रिसेट सैटेलाइट हर मौसम चाहे रात हो, बदाल को या बरसात हो रही हैं। सभी स्थिति में ये तस्वीर जारी कर सकता हैं। क्यों की इस सैटेलाइट में ऑप्टिकल इमेजिंग सिस्टम को लगाया गया हैं। भारतीय राडार इमेजिंग उपग्रहों की सीरीज में रीसेट-2 बी लॉन्चिंग 22 मई की सुबह होगी। इसरों की ओर से बताया गया हैं की अगर मौसम सही रहा तो ये उपग्रह सही समय पर लॉन्च होगी। इसे 555 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जायेगा। 

इस रीसेट 2-बी उपग्रह को पीएसएलबी-सी 46 से किया जायेगा। इस उपग्रह की सबसे खास बात यह हैं की ये उपग्रह पूरी तरह से देशी हैं और इसे भारत में ही बनाया गया हैं।   

अभी तक मात्र 4 वैज्ञानिकों को ही मिला हैं भारत रत्‍न

साइंस डेस्क: भारत रत्‍न हमारे देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान हैं। इस सम्मान को देने की स्थापना 2 जनवरी 1954 में  राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के द्वारा किया गया था। यह सम्मान अभी तक बहुत सारे भारतीयों को मिल चूका हैं। लेकिन अगर हम वैज्ञानिकों की बात करें तो अब तक मात्र चार वैज्ञानिक ही ऐसे हुए हैं जिन्हे भारत रत्‍न से सम्मानित किया गया हैं। आज उन्ही वैज्ञानिकों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे की वो वैज्ञानिक कौन हैं जिन्हे भारत रत्‍न मिला हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से

1 .सीवी रमन, भारत रत्‍न से सम्मानित होने वाले पहले वैज्ञानिक सीवी रमन थे। इन्हे 1954 में भारत रत्‍न से सम्मानित किया गया था। सीवी रमन को भौतिक शास्त्र के महान वैज्ञानिकों में से एक माना जाता हैं। आज भी पूरी दुनिया सीवी रमन के दिमाग का कायल हैं।   

2 .मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या, भारत रत्‍न से सम्मानित होने वाले दूसरे भारतीय वैज्ञानिक मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या थे।  इनके जन्म दिवस पर हर साल लोग इंजीनियर दिवस मनाते हैं। 100 वर्ष पूरे होने पर भारत सरकार ने इनके सम्मान के लिए डाक टिकट जारी किया था। 

3 .अब्दुल कलाम, भारत के महान वैज्ञानिकों में से एक एपीजे अब्दुल कलाम तीसरे ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्हे भारत रत्‍न से सम्मानित किया गया था। अब्दुल कलाम एक महान एयरोस्पेस वैज्ञानिक थे। आज भी पूरी दुनिया इनके दिमाग का कायल हैं। 

4 .सीएनआर राव, भारत रत्‍न पाने वाले चौथे वैज्ञानिक सीएनआर राव हैं। सीएनआर राव साल 1963 में आईआईटी कानपूर से जुड़े हैं। वर्तमान समय में सीएनआर राव को दुनिया के महान वैज्ञानिकों में से एक माना जाता हैं। इन्हे कई विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त की हैं।