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प्रशांत किशोर ने बढ़ाई बिहार की सियासी हलचल, चुनाव लड़ने पर किया इसारा?

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर चर्चा के केंद्र में हैं। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और इसी बीच प्रशांत किशोर के हालिया बयान ने नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है। हालांकि उन्होंने खुद चुनाव लड़ने के सवाल पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन उनके बयान से यह संकेत जरूर मिला कि पार्टी इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रही है।

बांकीपुर उपचुनाव पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी

बांकीपुर विधानसभा सीट खाली होने के बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। राजधानी पटना की यह सीट राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में जन सुराज भी इस चुनाव को अपनी ताकत दिखाने के अवसर के रूप में देख रही है।

सारण में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह सरकार के कामकाज पर जनता की राय जानने का माध्यम भी बनेगा। उनके अनुसार चुनाव के समय किए गए कई वादों को लेकर जनता जवाब चाहती है।

भाजपा को चुनौती देने का दावा

जन सुराज प्रमुख ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी बांकीपुर सीट पर पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में भाजपा के खिलाफ प्रभावी मुकाबला करने की क्षमता उनकी पार्टी में है। उनका मानना है कि पिछले चुनावों में विपक्षी दल भाजपा को चुनौती देने में सफल नहीं हो पाए, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

उम्मीदवार को लेकर जारी है सस्पेंस

सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या प्रशांत किशोर स्वयं चुनावी मैदान में उतरेंगे। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उम्मीदवार के चयन का अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और संगठन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के लिए जो रणनीति सबसे उपयुक्त होगी, उसी के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक बदलाव, 4 राज्यों के नए अध्यक्षों का ऐलान

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। पार्टी नेतृत्व ने अलग-अलग राज्यों में नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर आगामी चुनावों और संगठन विस्तार की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

1 .दिल्ली बीजेपी की कमान हर्ष मल्होत्रा को

दिल्ली भाजपा की जिम्मेदारी अब हर्ष मल्होत्रा को सौंपी गई है। उन्होंने वीरेंद्र सचदेवा की जगह ली है। हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली से लोकसभा सांसद हैं और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। इससे पहले वे पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं। पार्टी संगठन और जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें राजधानी की बड़ी जिम्मेदारी दी है।

2 .हरियाणा में डॉ. अर्चना गुप्ता को मिली जिम्मेदारी

हरियाणा भाजपा की नई अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता को बनाया गया है। उन्होंने मोहन लाल बड़ौली का स्थान लिया है। डॉ. अर्चना गुप्ता इससे पहले प्रदेश महामंत्री और जिला स्तर पर कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। पेशे से डॉक्टर होने के साथ-साथ संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

3 .पंजाब बीजेपी की कमान केवल सिंह ढिल्लों के हाथ

पंजाब में भाजपा ने वरिष्ठ नेता केवल सिंह ढिल्लों को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। बरनाला से विधायक रह चुके केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब की राजनीति का अनुभवी चेहरा माना जाता है।

4 .भाजपा ने त्रिपुरा में अभिषेक देबरॉय को अध्यक्ष बनाया

त्रिपुरा भाजपा का नया अध्यक्ष अभिषेक देबरॉय को बनाया गया है। अभिषेक देबरॉय पहली बार विधायक बनने के बाद तेजी से पार्टी संगठन में सक्रिय हुए। बूथ स्तर की रणनीति और संगठन पर पकड़ के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।

चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा फैसला

भाजपा के इस संगठनात्मक बदलाव को आने वाले चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नए नेतृत्व के जरिए राज्यों में संगठन को और मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।

बंगाल के नए CM होंगे शुभेंदु अधिकारी, कल लेंगे शपथ

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा ने पहली बार राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल कर सत्ता पर कब्जा जमाया है। पार्टी की इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का नया मुख्यमंत्री चुना गया है। कोलकाता में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी।

बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधिकारिक तौर पर शुभेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान किया। अब शनिवार को भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।

भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत

इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में भाजपा की यह जीत राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। पहली बार पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है।

विधायक दल की बैठक में बनी सहमति

भाजपा विधायक दल की बैठक विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई। बैठक में विधायक दल के नेता के लिए कई प्रस्ताव आए, लेकिन सभी प्रस्ताव केवल शुभेंदु अधिकारी के समर्थन में थे। इसके बाद अमित शाह ने कहा कि दूसरे नाम के लिए भी समय दिया गया, लेकिन कोई अन्य नाम सामने नहीं आया। ऐसे में सर्वसम्मति से शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता घोषित किया गया।

ममता बनर्जी को भी दी बड़ी चुनौती

इस चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत हासिल की। खास बात यह रही कि भवानीपुर सीट पर उन्होंने ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। इससे पहले भी नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को मात दे चुके हैं। यही वजह है कि बंगाल की राजनीति में उनका कद लगातार बढ़ता गया।

कल होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह

नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में किया जाएगा। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

तमिलनाडु में विजय की सरकार! ये पार्टियां समर्थन देने को तैयार

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कागजम (TVK) अब सत्ता के बेहद करीब दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता लगभग साफ हो चुका है और कई दल विजय की पार्टी को समर्थन देने के लिए तैयार हो गए हैं।

कांग्रेस के बाद इनका समर्थन

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस पहले ही TVK को समर्थन देने का एलान कर चुकी है। अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और वीसीके जैसी पार्टियां भी विजय के साथ आने को तैयार बताई जा रही हैं। इन दलों के समर्थन से तमिलनाडु की राजनीति का समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है।

पार्टी मुख्यालय के बाहर जश्न

चेन्नई में TVK मुख्यालय के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। समर्थक ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मना रहे हैं। विजय के समर्थकों का कहना है कि जनता बदलाव चाहती थी और अब तमिलनाडु में नई राजनीतिक शुरुआत होने जा रही है। सोशल मीडिया पर भी विजय के समर्थन में पोस्ट और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

फिल्मी स्टार से बड़े नेता बने

विजय लंबे समय से तमिलनाडु में युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहे हैं। फिल्मों में बड़ी सफलता के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और कम समय में अपनी अलग पहचान बना ली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ ने TVK को तेजी से मजबूत किया है।

तमिलनाडु की राजनीति में नया दौर?

अगर विजय की अगुवाई में सरकार बनती है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जाएगा। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा और सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है।

बंगाल का नया मुख्यमंत्री कौन? इस नाम पर मुहर तय

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शाम चार बजे होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद यह तय हो जाएगा कि बंगाल की सत्ता की कमान किस नेता के हाथ में जाएगी। कोलकाता के न्यूटाउन स्थित विश्वबंगला कन्वेंशन केंद्र में होने वाली इस बैठक पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस अहम बैठक में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच रहे हैं। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम के साथ नई सरकार की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।

शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में शुभेंदु अधिकारी का नाम सामने आ रहा है। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराने के बाद उनका राजनीतिक कद काफी बढ़ गया है। भाजपा के भीतर एक बड़ा वर्ग मानता है कि शुभेंदु अधिकारी बंगाल में पार्टी को मजबूती से आगे बढ़ा सकते हैं। प्रशासनिक अनुभव और तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में मजबूत पकड़ बनाने की क्षमता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व भी उन पर भरोसा जता सकता है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री पद की रेस में उनका पलड़ा सबसे भारी माना जा रहा है।

दो अन्य नामों पर भी चर्चा

शुभेंदु अधिकारी के अलावा पार्टी के दो और वरिष्ठ नेताओं के नामों पर भी चर्चा चल रही है। भाजपा ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो संगठन और सरकार दोनों को संतुलित तरीके से संभाल सके। क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

दो उपमुख्यमंत्री बनाने की तैयारी

राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में दो उपमुख्यमंत्री बनाने का फार्मूला अपना सकती है। इसके जरिए उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी। साथ ही अलग-अलग समाजों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

तापस राय को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए वरिष्ठ नेता तापस राय को विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण पार्टी उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दे सकती है।

बिहार की राजनीति में नया तूफान, निशांत के कंधों पर उम्मीदों का भारी बोझ

पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद की शपथ लेने के बाद उनकी सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री हो गई है। इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, जिसने उनकी भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

राजनीति में अचानक बड़ी एंट्री

लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार का यह कदम कई लोगों के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है। पटना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही उनकी राजनीतिक यात्रा की नई शुरुआत हुई। इसे जेडीयू में नई पीढ़ी के नेतृत्व के उभार के रूप में देखा जा रहा है, जहां भविष्य की राजनीति की बागडोर धीरे-धीरे नए चेहरों को सौंपी जा रही है।

इंजीनियरिंग से राजनीति तक

निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1981 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना में प्राप्त की और आगे चलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। तकनीकी क्षेत्र में रुचि होने के बावजूद उन्होंने कॉरपोरेट करियर की बजाय एक शांत जीवन को चुना। मां के निधन के बाद वे सार्वजनिक जीवन से और भी दूर हो गए थे।

कैबिनेट में शामिल होकर मिली बड़ी जिम्मेदारी

मार्च 2026 के आसपास यह लगभग तय हो गया कि निशांत कुमार अब सक्रिय राजनीति में उतरेंगे। कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्हें स्वास्थ्य विभाग जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि पार्टी उन्हें एक बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में तैयार कर रही है।

राजनीतिक विरासत और उम्मीदों का बड़ा दबाव

निशांत कुमार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी क्षमता साबित करने की है। एक ओर उनके ऊपर नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर जनता की उम्मीदें भी लगातार बढ़ रही हैं। राजनीति में अनुभव की कमी उनके लिए एक चुनौती साबित हो सकती है।

तमिलनाडु की राजनीति में हलचल, विजय थलापति बनेंगे मुख्यमंत्री?

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों जबरदस्त हलचल से गुजर रही है। फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख विजय अब सत्ता के बेहद करीब दिखाई दे रहे हैं। राज्य में सरकार बनाने की कोशिशों के बीच विजय लगातार राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे हुए हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद भी बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। लेकिन सरकार बनाने के लिए विजय छोटी पार्टियों और वामपंथी दलों को साथ लाने की कोशिश में लग गए हैं।

कांग्रेस साथ आई

तमिलनाडु की राजनीति में विजय की पार्टी तेजी से उभरती ताकत बनती जा रही है। कांग्रेस के समर्थन के बाद यह माना जा रहा था कि सरकार बनाने का रास्ता आसान हो जाएगा, लेकिन आंकड़ों का गणित अभी भी पूरी तरह उनके पक्ष में नहीं बैठ पा रहा है। बताया जा रहा है कि बहुमत तक पहुंचने के लिए उन्हें 5 से 6 विधायकों के अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है। ऐसे में अब हर छोटी पार्टी का महत्व बढ़ गया है और समर्थन के बदले कई दल अपनी शर्तें भी रखने लगे हैं।

विजय ने उतारा अपना ‘चाणक्य’

राजनीतिक संकट को देखते हुए विजय ने अब अपनी पार्टी के तेजतर्रार नेता सीटीआर निर्मल कुमार को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी के भीतर उन्हें विजय का खास रणनीतिकार माना जाता है। निर्मल कुमार को आधिकारिक तौर पर विभिन्न दलों से बातचीत करने और समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। वह लगातार नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और सरकार गठन के लिए माहौल बनाने में जुटे हैं।

क्या सच में मुख्यमंत्री बन पाएंगे विजय?

तमिलनाडु में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय सच में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि वह छोटे दलों और वामपंथी पार्टियों को साथ लाने में सफल हो जाते हैं, तो राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। विजय की लोकप्रियता पहले ही युवाओं के बीच काफी मजबूत मानी जाती है। फिल्मी स्टारडम के बाद अब वह राजनीति में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

तमिलनाडु में विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में इस समय बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल

विजय ने चेन्नई स्थित राजभवन पहुंचकर राज्यपाल आर. एन. रवि से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा सौंपा। इस दौरान उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी तय समय सीमा के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित कर देगी। इसे राज्य में नई सरकार गठन की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK

हाल ही में आए चुनाव परिणामों में TVK ने 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सभी को चौंका दिया है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से पार्टी अभी भी पीछे है, जिसके चलते उसे अन्य दलों के समर्थन की जरूरत है।

विजय बने विधायक दल के नेता

चुनाव परिणामों के बाद पार्टी विधायकों की बैठक में सर्वसम्मति से सी. जोसेफ विजय को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद ही उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया।

गठबंधन की राजनीति तेज

राज्य में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं। कांग्रेस ने TVK को शर्तों के साथ समर्थन देने के संकेत दिए हैं, जबकि वामपंथी दलों और कुछ क्षेत्रीय दलों में भी समर्थन को लेकर चर्चा चल रही है। इससे राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते नजर आ रहे हैं।

अन्य दलों का प्रदर्शन

चुनाव परिणामों में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 59 सीटें मिली हैं, जबकि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस, पीएमके और अन्य दलों ने भी कुछ सीटें हासिल की हैं, जिससे राज्य में गठबंधन की राजनीति और दिलचस्प हो गई है।

शपथ ग्रहण पर सस्पेंस

हालांकि विजय के द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया गया है, लेकिन शपथ ग्रहण को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। राज्यपाल की शर्तों और बहुमत के समीकरण पूरे होने के बाद ही अगली राजनीतिक तस्वीर साफ होगी।

तमिलनाडु में बड़ा सियासी बदलाव, विजय की TVK को कांग्रेस का साथ

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिलने की खबरों ने राज्य की सियासी हलचल बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस ने TVK को सरकार गठन में समर्थन देने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य में नई राजनीतिक स्थिति बनती दिख रही है।

आपको बता दें की इस विधानसभा चुनाव में विजय की TVK ने 107 सीटें, DMK ने 59 और AIADMK ने 47 सीटें हासिल की हैं, जबकि कांग्रेस के पास 5 विधायक हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए TVK को अन्य दलों के समर्थन की आवश्यकता बनी हुई है।

बहुमत के करीब TVK, कांग्रेस का समर्थन

इस चुनाव में TVK ने 234 सीटों में से 107 सीटों पर जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सभी को चौंका दिया है। हालांकि, बहुमत के लिए पार्टी अभी 11 सीटें पीछे है। ऐसे में कांग्रेस का समर्थन सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

कांग्रेस में हुई आंतरिक चर्चा

रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी TVK को समर्थन देने के पक्ष में थे, जबकि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चाहते थे कि अंतिम निर्णय राज्य इकाई की राय से लिया जाए। इसके बाद तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के साथ ऑनलाइन बैठक में समर्थन देने पर सहमति बनी।

शपथ ग्रहण में राहुल गांधी?

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राहुल गांधी TVK सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। यह समारोह चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस TVK सरकार में दो मंत्री पद की मांग कर सकती है। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

7 मई को शपथ की संभावना

बताया जा रहा है कि विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इसे लेकर तैयारी तेज कर दी गई है और TVK विधायकों को चेन्नई से बाहर न जाने के निर्देश दिए गए हैं।

तमिलनाडु में सियासी हलचल तेज: विजय के साथ ये पार्टियां बनाएगी सरकार?

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। अभिनेता से नेता बने विजय थालापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया है। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गई है, लेकिन सरकार बनाने की संभावनाएं अभी भी पूरी तरह खुली हुई हैं।

बहुमत से कुछ कदम दूर TVK

इस चुनाव में TVK को 107 सीटें मिली है, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। यानी पार्टी को सत्ता में आने के लिए करीब 11 सीटों का समर्थन और चाहिए। यही वजह है कि अब गठबंधन की राजनीति तेज हो गई है।

किन पार्टियों से बन सकता है गठबंधन

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि TVK छोटे दलों के साथ मिलकर आसानी से बहुमत हासिल कर सकती है। संभावित सहयोगी दलों में कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और PMK शामिल हो सकते हैं। इन दलों के समर्थन से TVK आसानी से सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है।

कांग्रेस ने भी कर दिया है अपना रुख साफ

चुनाव परिणाम आने के बाद राहुल गांधी ने विजय को फोन कर बधाई दी और समर्थन का संकेत भी दिया। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस, TVK के साथ खड़ी नजर आ सकती है। भले ही कांग्रेस को इस बार सीमित सीटें मिली हों, लेकिन गठबंधन की राजनीति में उसकी भूमिका अहम हो सकती है।

विजय को अन्य दलों का भी मिल सकता है साथ

छोटे दल जैसे CPI, CPI(M), PMK और VCK भी TVK के साथ आने के संकेत दे रहे हैं। इन पार्टियों का समर्थन मिलने पर एक मजबूत गठबंधन बन सकता है, जो सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

वहीं, चुनावी नतीजों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। अगर गठबंधन पर अंतिम मुहर लग जाती है, तो जल्द ही नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में इस पर अंतिम फैसला हो जाएगा।

बिहार में 7 मई को होगा मंत्रिमंडल विस्तार: ये नेता बनेंगे मंत्री?

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार 7 मई को होने जा रहा है। इसको लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और संभावित मंत्रियों के नामों पर चर्चा भी जोरों पर है।

गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण की तैयारी

मंत्रिमंडल विस्तार का शपथ ग्रहण समारोह राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया जाएगा। प्रशासन इसकी भव्य तैयारी में जुट गया है। सुरक्षा से लेकर मंच व्यवस्था तक हर स्तर पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि समारोह को बड़े स्तर पर आयोजित किया जा सके।

सरकार गठन के बाद दूसरा बड़ा कदम

नई सरकार का गठन पिछले महीने 16 तारीख को हुआ था। उस समय विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद विभागों का बंटवारा भी पूरा कर लिया गया था, जिससे अब मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

एनडीए में बढ़ेगा राजनीतिक संतुलन

माना जा रहा है कि इस विस्तार के जरिए एनडीए सरकार में सभी सहयोगी दलों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इससे सरकार के भीतर संतुलन मजबूत होगा और प्रशासनिक कामकाज को गति मिलेगी।

भव्य आयोजन में शामिल होंगे बड़े नेता

शपथ ग्रहण समारोह में कई केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता भी शामिल हो सकते हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

कौन बन सकता है मंत्री?

हालांकि अभी आधिकारिक नामों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार अनुभवी नेताओं और संगठन में सक्रिय चेहरों को मंत्री पद मिल सकता है। युवाओं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जाएगा।

बंगाल में BJP का CM कौन? इन 2 नामों की सबसे ज्यादा चर्चा, तीसरा चेहरा भी रेस में

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है की अगर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में आती है, तो मुख्यमंत्री कौन होगा? चुनावी माहौल के बीच यह चर्चा तेज हो गई है और पार्टी के भीतर से लेकर जनता तक कई नामों पर मंथन जारी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री कोई बाहरी नहीं, बल्कि बंगाल का ही बेटा होगा जो बंगाली भाषा, संस्कृति और जनता से गहराई से जुड़ा हो। ऐसे में अब नजरें उन चेहरों पर टिकी हैं, जो इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं।

रेस में सबसे आगे ये 2 बड़े नाम

1. शुवेंदु अधिकारी

बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाने वाले शुवेंदु अधिकारी CM पद की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे पहले TMC में थे और बाद में BJP में शामिल होकर पार्टी को मजबूत किया। उनका जनाधार खासकर ग्रामीण और पूर्वी मिदनापुर क्षेत्र में काफी मजबूत है। उनकी पहचान एक आक्रामक और जमीन से जुड़े नेता की है, जो ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

2. सुकांत मजूमदार

BJP के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार भी इस रेस में प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ और शांत लेकिन प्रभावी नेतृत्व शैली उन्हें एक संतुलित विकल्प बनाती है। पार्टी के अंदर उनकी छवि एक भरोसेमंद और अनुशासित नेता की है।

तीसरा नाम जो दे सकता है सरप्राइज

3. अग्निमित्रा पॉल

महिला नेतृत्व के तौर पर अग्निमित्रा पॉल का नाम भी तेजी से उभरा है। वे एक युवा और मुखर नेता हैं, जो महिला वोटर्स और शहरी वर्ग में खास पकड़ रखती हैं। अगर BJP 'सरप्राइज फैक्टर' अपनाती है, तो उनका नाम आगे आ सकता है।

क्या BJP देगी सरप्राइज?

BJP की रणनीति अक्सर चौंकाने वाली रही है। कई राज्यों में पार्टी ने ऐसे चेहरों को CM बनाया है, जिनकी पहले ज्यादा चर्चा नहीं थी। ऐसे में यह भी संभव है कि बंगाल में भी कोई नया और आम बंगाली चेहरा सामने लाया जाए।

तमिलनाडु में 'थलपति' विजय की आंधी, जानकार चौंक जाएंगे

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के ताज़ा रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेत दिया है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंका दिया है। लंबे समय से दो प्रमुख दलों के बीच सीमित रही राजनीति अब नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है।

रुझानों में बड़ी बढ़त

शुरुआती गिनती में विजय की पार्टी कई सीटों पर आगे चल रही है। खास बात यह है कि कई क्षेत्रों में उन्होंने पुराने और स्थापित दलों को कड़ी टक्कर दी है। इससे साफ है कि मतदाताओं ने इस बार बदलाव का मन बना लिया है। शुरुआती रुझानों में विजय की पार्टी TVK 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

पेरंबूर सीट से आगे विजय

विजय खुद चेन्नई की पेरंबूर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और शुरुआती दौर में बढ़त बनाए हुए हैं। इससे उनके व्यक्तिगत प्रभाव और लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

युवाओं और महिलाओं का साथ

इस चुनाव में विजय को युवाओं और महिलाओं का अच्छा समर्थन मिलता दिख रहा है। आर्थिक सहायता, रोजगार और आधुनिक व्यवस्था से जुड़े वादों ने लोगों को उनकी ओर आकर्षित किया है।

तीसरी ताकत के रूप में उभरती पार्टी

अब तक तमिलनाडु की राजनीति दो बड़े दलों के बीच सिमटी रहती थी, लेकिन इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है। विजय की पार्टी ने खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया है।

बाजार और सियासत दोनों पर असर

रुझानों का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजार में भी हलचल देखने को मिली है। इससे यह संकेत मिलता है कि सियासी बदलाव का प्रभाव कई स्तरों पर पड़ सकता है।

सावधान महिलाएं! हड्डियों को चुपके-चुपके खोखला कर रहे ये 5 बड़े रोग

हेल्थ डेस्क। महिलाओं में हड्डियों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बदलती जीवनशैली, पोषण की कमी और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद हड्डियों की मजबूती धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय रहते इन बीमारियों को पहचाना न जाए, तो आगे चलकर यह बड़ी समस्या बन सकती हैं।

1. ऑस्टियोपोरोसिस

यह महिलाओं में सबसे आम हड्डी रोग है। इसमें हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिससे मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद इसका खतरा ज्यादा होता है।

2. ऑस्टियोआर्थराइटिस

यह जोड़ों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें घुटनों, कूल्हों और हाथों में दर्द और जकड़न रहती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है।

3. रूमेटाइड आर्थराइटिस

यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। इससे सूजन, दर्द और चलने-फिरने में परेशानी होती है।

4. ऑस्टियोमलेशिया

विटामिन D की कमी के कारण हड्डियां नरम और कमजोर हो जाती हैं। इससे शरीर में दर्द और कमजोरी महसूस होती है।

5. स्लिप डिस्क

रीढ़ की हड्डी से जुड़ी इस समस्या में डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, जिससे पीठ में तेज दर्द और नसों पर दबाव पड़ता है। यह समस्या लंबे समय तक गलत बैठने या भारी वजन उठाने से बढ़ सकती है।

क्यों बढ़ रहा है खतरा?

जानकारों के अनुसार, कैल्शियम और विटामिन D की कमी, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूप में कम समय बिताना और हार्मोनल बदलाव हड्डियों को कमजोर करते हैं। इसके अलावा, अनियमित खानपान और तनाव भी इस समस्या को बढ़ाते हैं।

कैसे करें बचाव?

हड्डियों को मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां और सूखे मेवे कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। रोजाना धूप लेना, नियमित व्यायाम करना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी है।

क्या विजय बनेंगे तमिलनाडु के नए ‘हीरो’? सर्वे रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति इस बार एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर सामने आए ताज़ा सर्वे ने राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों की झलक दे दी है। इस बार मुकाबला पारंपरिक नहीं, बल्कि दिलचस्प त्रिकोणीय बनता दिख रहा है, जिसमें द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) और अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम प्रमुख भूमिका में हैं।

तीसरी ताकत के रूप में उभरी विजय की पार्टी

सर्वे के अनुसार, डीएमके गठबंधन अभी भी बढ़त में नजर आ रहा है और उसे लगभग 125 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है। वहीं एआईएडीएमके गठबंधन करीब 45 सीटों तक सिमटता दिख रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा विजय की पार्टी को लेकर है, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर ही लगभग 63 सीटों के आसपास पहुंचती दिख रही है।

यह संकेत देता है कि राज्य की जनता अब पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प की तलाश में है। विजय की लोकप्रियता और उनकी नई राजनीतिक छवि ने खासकर युवाओं और शहरी वोटरों को प्रभावित किया है।

वोट शेयर में भी मजबूत पकड़

अगर वोट प्रतिशत की बात करें, तो डीएमके को लगभग 39 प्रतिशत समर्थन मिलने का अनुमान है। वहीं विजय की पार्टी को करीब 30 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है, जो किसी नई पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एआईएडीएमके को लगभग 27 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है।

बदलते समीकरणों का संकेत

इस सर्वे से यह साफ है कि भले ही डीएमके बढ़त बनाए हुए है, लेकिन विजय की पार्टी ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। पहले जहां मुकाबला सीधा दो दलों के बीच होता था, अब तीसरी ताकत के आने से वोट बंटवारा और सत्ता की रणनीति दोनों प्रभावित हो रही हैं।

क्या ‘हीरो’ बन पाएंगे विजय?

राजनीति में विजय की एंट्री को लेकर शुरू में संशय था, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने कम समय में ही मजबूत पकड़ बना ली है। हालांकि सत्ता तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी लंबा सफर तय करना होगा, लेकिन इतना जरूर है कि उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूती से दर्ज करा दी है।

शुभेंदु बनेंगे भवानीपुर के दादा? या ममता मारेगी बाजी, सर्वे रिपोर्ट

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। 2026 के चुनावी संग्राम में मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और सियासी वर्चस्व का बन गया है। आमने-सामने हैं ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी, दो ऐसे चेहरे, जिनका रिश्ता कभी सहयोग का था, लेकिन अब वही टकराव की सबसे बड़ी कहानी बन चुका है।

नंदीग्राम से शुरू हुई कहानी

2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की लड़ाई ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। उस चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद करीबी मुकाबले में हराकर राजनीतिक इतिहास रच दिया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि सत्ता की राजनीति में बड़ा संदेश भी था कि बंगाल की सियासत में बदलाव की लहर उठ चुकी है।

भवानीपुर में सीधी चुनौती

अब 2026 में यह टकराव और भी बड़ा हो गया है। शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान कर सीधी चुनौती दे दी है। उनका दावा है कि जिस तरह उन्होंने नंदीग्राम में जीत हासिल की, उसी तरह भवानीपुर में भी इतिहास दोहराया जाएगा।

डबल फ्रंट पर मुकाबला

इस बार शुभेंदु अधिकारी दो मोर्चों पर सक्रिय हैं नंदीग्राम और भवानीपुर। जहां नंदीग्राम में वे 'भूमिपुत्र'की छवि के साथ अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहते हैं, वहीं भवानीपुर में ममता बनर्जी को उनके अपने क्षेत्र में चुनौती देकर बड़ा सियासी दांव खेल रहे हैं।

नतीजे तय करेंगे भविष्य

आपको बता दें की 4 मई को जब ईवीएम खुलेंगी, तब यह साफ होगा कि क्या शुभेंदु अधिकारी फिर से इतिहास रच पाएंगे या ममता बनर्जी अपनी पिछली हार का बदला लेकर अपना किला बचा लेंगी। पूरे देश की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

असम-बंगाल-तमिलनाडु में कमल की लहर, सर्वे रिपोर्ट ने BJP को दी खुशखबरी

नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए एग्जिट पोल ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े कई जगह सत्ताधारी दलों की वापसी तो कहीं कड़े मुकाबले के संकेत दे रहे हैं। इन रुझानों ने खासकर असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरणों को लेकर बहस तेज कर दी है।

असम: एनडीए की बढ़त बरकरार

असम में एग्जिट पोल के मुताबिक सत्तारूढ़ एनडीए मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। 126 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 64 सीटों की जरूरत होती है, और अधिकतर सर्वे में एनडीए को इस आंकड़े से काफी आगे दिखाया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि राज्य में सत्ताधारी गठबंधन लगातार तीसरी बार सरकार बना सकता है। वहीं विपक्षी दलों के लिए चुनौती बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल: कांटे की टक्कर

पश्चिम बंगाल में तस्वीर सबसे दिलचस्प नजर आ रही है। यहां 294 सीटों में बहुमत के लिए 148 सीटें जरूरी हैं। जनमत सर्वेक्षण में भाजपा+ 80-90, टीएमसी+ 195-205, प्रजा पोल में भाजपा+ 178-208, टीएमसी+ 85-110, जेवीसी में भाजपा+ 138-159, टीएमसी+ 131-152, मैट्राइज में भाजपा+ 146-161, टीएमसी+ 125-140, पीपल पल्स में भाजपा+ 95-110 और टीएमसी+ 177-187 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है।

तमिलनाडु: किसकी वापसी के संकेत

एक्सिस माय इंडिया में एडीएमके+ 22-23, डीएमके+ 92-110, टीवीके+ 98-120, प्रजा पोल में एडीएमके+ 61-81, डीएमके+ 148-168, टीवीके+ 1-9, जेवीसी में एडीएमके+ 128-147, डीएमके+ 75-95, टीवीके+ 8-15, मैट्राइज में एडीएमके+ 87-100, डीएमके+ 122-132, टीवीके+ 10-12, जबकि पीपल पल्स में एडीएमके+ 65-80, डीएमके+ 125-145, टीवीके+ 18-24 और अन्य 2-6 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है।

बंगाल में बड़ा उलटफेर तय! सर्वे में ‘BJP’ की चौंकाने वाली बढ़त

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग खत्म होते ही एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए हैं। इन रुझानों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। अधिकांश सर्वे में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं, जबकि भाजपा को मजबूत बढ़त मिलती नजर आ रही है।

क्या कहते हैं एग्जिट पोल?

कई प्रमुख सर्वे एजेंसियों के मुताबिक, इस बार भाजपा बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है। खास तौर पर 'प्रजा पोल' के आंकड़े सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, जिसमें भाजपा को 178 से 208 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। यदि ये आंकड़े नतीजों में बदलते हैं, तो राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस को इस सर्वे में 85 से 110 सीटों तक सिमटता हुआ दिखाया गया है।

अन्य सर्वे में भी भाजपा को बढ़त

मेट्राइज, पीमार्क, चाणक्य स्ट्रेटेजीज और पोल डायरी जैसे सर्वे भी भाजपा को बढ़त में दिखा रहे हैं। इन सर्वे के अनुसार भाजपा को 140 से 160 या उससे अधिक सीटें मिल सकती हैं, जो बहुमत के आंकड़े से ऊपर है।

एक सर्वे में अलग तस्वीर

हालांकि सभी एग्जिट पोल एक जैसा संकेत नहीं दे रहे हैं। 'पीपुल्स पल्स' का सर्वे इससे अलग तस्वीर पेश करता है। इसके मुताबिक तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सकती है और उसे 177 से 187 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा 95 से 110 सीटों तक रह सकती है।

अब नजर नतीजों पर

एग्जिट पोल केवल संभावित रुझान बताते हैं, अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही होगा। ऐसे में अब सबकी नजर चुनाव परिणामों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

असम में BJP की आ सकती है सुनामी? एग्जिट पोल सर्वे में बहुमत के संकेत

न्यूज डेस्क। असम विधानसभा चुनाव को लेकर सामने आए एग्जिट पोल ने राज्य की सियासत को गर्मा दिया है। अलग-अलग एजेंसियों के सर्वे में एक बात समान दिख रही है की इस बार भी BJP गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है और सरकार बनाने की ओर बढ़ता दिख रहा है।

चाणक्य स्ट्रैटजीज: मुकाबला, लेकिन बढ़त भाजपा को

चाणक्य स्ट्रैटजीज के सर्वे में भी भाजपा गठबंधन को 85 से 95 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस गठबंधन को 25 से 32 सीटें और अन्य को 6 से 12 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इससे साफ है कि मुकाबला जरूर है, लेकिन बढ़त भाजपा के पक्ष में है।

MATRIZE का सर्वे: साफ बहुमत की ओर इशारा

MATRIZE के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा गठबंधन को 88 से 98 सीटें मिलने का अनुमान है। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से बहुमत के करीब या उससे ऊपर जाता दिख रहा है। वहीं INC को 22 से 32 सीटों के बीच सिमटने की संभावना जताई गई है, जबकि अन्य दलों को 3 से 5 सीटें मिल सकती हैं।

एक्सिस माय इंडिया का सर्वे

एक्सिस माय इंडिया ने भी भाजपा गठबंधन को 88 से 100 सीटें मिलने का अनुमान दिया है। वहीं कांग्रेस को 24 से 36 सीटों के बीच रहने की संभावना बताई गई है।

पोल डायरी का अनुमान

पोल डायरी के अनुसार भाजपा गठबंधन 86 से 101 सीटों तक पहुंच सकता है, जो उसे बेहद मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। कांग्रेस गठबंधन 15 से 26 सीटों के बीच रह सकता है, जबकि अन्य को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं।

क्या कहती है तस्वीर?

चारों प्रमुख एग्जिट पोल पर नजर डालें तो एक स्पष्ट ट्रेंड सामने आता है की BJP गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है और वह बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकता है। दूसरी ओर INC को सीमित सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है।

तमिलनाडु में किसकी बनेगी सरकार? एग्जिट पोल सर्वे ने चौकाया, BJP मजबूत?

चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत इस समय एग्जिट पोल के आंकड़ों से गरमाई हुई है। विभिन्न एजेंसियों के सर्वे में अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है, जिससे यह साफ है कि मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। हालांकि अंतिम परिणाम 4 मई को सामने आएंगे।

MATRIZE का अनुमान

MATRIZE के एग्जिट पोल के मुताबिक DMK गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है। इस सर्वे में DMK प्लस को 122 से 132 सीटें मिलने का अनुमान है, जो स्पष्ट बहुमत की ओर इशारा करता है। वहीं AIADMK गठबंधन को 87 से 100 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। TVK को इस सर्वे में 10 से 12 सीट मिलती दिख रही।

चाणक्य स्ट्रैटजीज का सर्वे

चाणक्य स्ट्रैटजीज के अनुसार मुकाबला थोड़ा अलग नजर आता है। यहां BJP गठबंधन को 146 से 160 सीटें मिलने का अनुमान है। जबकि INC गठबंधन को 50 से 65 सीटें मिलने की संभावना है और अन्य के खाते में 6 से 12 सीटें जा सकती हैं।

एक्सिस माय इंडिया का अनुमान

एक्सिस माय इंडिया के सर्वे में भी भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है। यहां भाजपा को 92 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि कांग्रेस प्लस को 22 से 32 सीटें मिल सकती हैं। TVK को 98 से 120 सीटों का अनुमान है

पोल डायरी का आंकड़ा

पोल डायरी के मुताबिक भी भाजपा प्लस को 148 से 168 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। जबकि कांग्रेस प्लस को 61 से 81 सीटें और अन्य को  1 से 9 सीटें मिल सकती हैं।

क्या कहती है तस्वीर?

इन सभी एग्जिट पोल को देखें तो एक बात साफ है कि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े अलग कहानी बता रहे हैं। जहां कुछ सर्वे DMK गठबंधन को आगे दिखा रहे हैं, वहीं कई अन्य सर्वे BJP गठबंधन को मजबूत स्थिति में बता रहे हैं।