वर्तमान में बिहार के लगभग दस हजार स्वास्थ्य उपकेंद्र सक्रिय हैं, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, सामान्य बीमारियों की जांच और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे कार्य कर रहे हैं। इन उपकेंद्रों ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार और कुपोषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए नए उपकेंद्रों की आवश्यकता महसूस की गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रस्तावित उपकेंद्र आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित किए जाएंगे। इनमें स्वच्छ भवन, पीने का पानी, बिजली, आवश्यक दवाइयां, जांच किट और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के माध्यम से घर-घर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इससे ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे में सुधार आएगा और कई बीमारियों का समाधान प्राथमिक स्तर पर ही संभव हो सकेगा। इससे जिला और रेफरल अस्पतालों पर दबाव कम होगा और बिहार में स्वस्थ जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।

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