डुअल-पल्स तकनीक से बढ़ी ताकत
Astra-Mk2 की सबसे बड़ी खासियत इसका नया डुअल-पल्स रॉकेट मोटर सिस्टम है। इस तकनीक में मिसाइल को दो चरणों में अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है, जिससे वह लंबी दूरी तक तेज रफ्तार और बेहतर नियंत्रण बनाए रखती है। नई डिजाइन में दूसरे पल्स की अवधि बढ़ाई गई है, जिससे मिसाइल अंतिम चरण में भी लक्ष्य का पीछा करने में सक्षम रहती है। यही कारण है कि इसकी प्रभावी मारक दूरी अब लगभग 200 किलोमीटर तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि पहले यह करीब 160 किलोमीटर मानी जाती थी।
2026 में अहम परीक्षण
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Astra-Mk2 के फ्लाइट ट्रायल 2026 की शुरुआत में किए जा सकते हैं। इन परीक्षणों में मिसाइल की गति, स्थिरता, सटीकता और विश्वसनीयता को परखा जाएगा। अगर ये ट्रायल सफल रहते हैं, तो सीमित अतिरिक्त परीक्षणों के बाद 2026 के मध्य तक इसके सीरियल प्रोडक्शन का रास्ता साफ हो सकता है। इससे वायुसेना को अपेक्षाकृत कम समय में एक आधुनिक हथियार प्रणाली मिल सकेगी।
भारतीय वायुसेना को मिलेगा बड़ा लाभ
करीब 200 किलोमीटर रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइल वायुसेना के लिए एक बड़ा रणनीतिक लाभ है। इससे भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन के विमान को काफी सुरक्षित दूरी से निशाना बना सकेंगे। Astra-Mk2, पहले से सेवा में मौजूद एस्ट्रा Mk-1 का पूरक होगी, जिसकी रेंज 100 किलोमीटर से अधिक है। नई मिसाइल को Su-30 MKI और स्वदेशी LCA तेजस जैसे लड़ाकू विमानों में शामिल करने की योजना है।

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