राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। उनका कहना है कि पुराने समय में जमीन से संबंधित दस्तावेजों के लिए लोगों को कार्यालयों में एक से दो हफ्ते तक का समय लग जाता था। अब नए डिजिटल सिस्टम की शुरुआत से यह प्रक्रिया तुरंत और सुविधाजनक हो जाएगी।
कैसे होगा काम:
अब सभी भू-अभिलेख पोर्टल पर उपलब्ध होंगे। आवेदनकर्ता को संबंधित दस्तावेज की डिजिटल कॉपी डाउनलोड करने के लिए केवल शुल्क का भुगतान करना होगा। भुगतान के बाद डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी तुरंत डाउनलोड की जा सकेगी। इस प्रक्रिया में न तो कोई स्टांप लेना पड़ेगा और न ही सरकारी दफ्तरों में समय गंवाना पड़ेगा।
किसानों को भी लाभ:
यह नई व्यवस्था विशेष रूप से किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। जमीन खरीद-बिक्री, लोन आवेदन या अन्य लेन-देन में दस्तावेज तुरंत उपलब्ध होने से समय की बचत होगी और भ्रष्टाचार में कमी आएगी। विभाग का कहना है कि अगर किसी दस्तावेज की प्रतिलिपि पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है, तो ऑनलाइन आवेदन करने पर इसे विभाग जल्द ही उपलब्ध कराएगा।
सरकारी कामकाज में पारदर्शिता:
डिजिटल प्रक्रिया से केवल नागरिकों की सुविधा ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। अभिप्रमाणित डिजिटल कापी को पूरी तरह मान्यता दी जाएगी और अब किसी भी कानूनी या प्रशासनिक कार्य के लिए इसे स्वीकार किया जाएगा। बिहार सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो आम लोगों को उनके हक के दस्तावेज आसानी से उपलब्ध कराएगा और सरकारी प्रक्रिया को तेज और भरोसेमंद बनाएगा।

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