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भारत के लिए खुशखबरी! विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर पहुंचा 696.98 अरब डॉलर के पार

नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बार फिर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves of India) बढ़कर 696.98 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक बाजारों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

RBI के ताजा आंकड़े

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के अनुसार, 8 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.29 अरब डॉलर से अधिक बढ़ा है। इससे पहले वाले सप्ताह में इसमें गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन अब स्थिति फिर से मजबूत होती दिख रही है।

विदेशी मुद्रा में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार विदेशी मुद्रा संपत्तियों में भी सुधार देखा गया है, जो भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राएं शामिल रहती हैं।

सोने के भंडार में भी तेजी

भारत के गोल्ड रिजर्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि देश वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपने आर्थिक सुरक्षा कवच को और मजबूत कर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक सोने का भंडार 5.637 अरब डॉलर बढ़कर 120.853 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

SDR और IMF स्थिति में सुधार

स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की स्थिति में भी हल्का सुधार देखने को मिला है, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत है।

सूर्य देव होंगे मेहरबान! 5 राशियों की चमकेगी लकीर, बढ़ेगा धन-भाग्य

राशिफल। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सूर्य देव का प्रभाव कुछ राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आया है। सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान और सफलता का कारक माना जाता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में पांच राशियों के जातकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय प्रगति देने वाला साबित हो सकता है। नौकरी और कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिलने के संकेत हैं। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के स्वामी सूर्य माने जाते हैं, इसलिए इस राशि पर इसका प्रभाव अधिक शुभ रहेगा। भाग्य का पूरा साथ मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ और रुके हुए कामों में तेजी आ सकती है। मान-सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं।

धनु राशि

धनु राशि के लिए यह समय करियर के लिहाज से अच्छा माना जा रहा है। नौकरी में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं। आय में बढ़ोतरी और यात्राओं से लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। नए आय स्रोत बन सकते हैं और निवेश से लाभ मिल सकता है। पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मकता बनी रहेगी।

कर्क राशि

कर्क राशि के लिए भी समय अनुकूल रहने की संभावना है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और मानसिक तनाव में कमी आ सकती है। रुके हुए कार्य गति पकड़ सकते हैं।

यूपी में शिक्षकों की कमी होगी दूर, सरकार ने शुरू की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। खासकर नगरीय क्षेत्रों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की भर्ती को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

भर्ती की तैयारी तेज

बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से रिक्त पदों का विवरण एकत्र कर लिया है और अब इन पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजने की तैयारी चल रही है। इससे जल्द ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

लंबे समय से बनी थी कमी

नगरीय क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं हुई थीं, जिसके कारण कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी देखी जा रही थी। इसका सीधा असर पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा था।

भर्ती व्यवस्था कैसी रहेगी?

नियमों के अनुसार नगरीय विद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया सीमित रही है और अधिकतर पद तबादलों के माध्यम से भरे जाते रहे हैं। लेकिन अब स्थिति को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया को सक्रिय किया जा रहा है ताकि खाली पदों को जल्दी भरा जा सके।

क्या होगा फायदा?

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। 

स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी। 

स्कूलों में शैक्षणिक माहौल बेहतर बनेगा। 

छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा। 

EPFO का बड़ा प्लान, नौकरीपेशा लोगों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। इस नए प्रस्ताव के तहत भविष्य में पीएफ (Provident Fund) निकालने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो सकती है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट के बाद PF का पैसा सीधे बैंक खाते में ऑटोमैटिक ट्रांसफर हो सकता है।

क्या है EPFO का नया प्लान?

EPFO फिलहाल अपने सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमेटेड बनाने पर काम कर रहा है। अभी तक एडवांस या आंशिक निकासी के मामलों में कुछ ऑटो-सेटलमेंट सुविधा मिलती है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर फाइनल PF विड्रॉल तक लागू करने की योजना है। इसका मतलब यह होगा कि अगर किसी सदस्य की KYC और जरूरी जानकारी सही और अपडेटेड है, तो PF क्लेम अपने आप प्रोसेस हो जाएगा और पैसे सीधे खाते में पहुंच सकते हैं।

अभी क्यों होती है देरी?

वर्तमान व्यवस्था में PF निकालने के लिए कई स्तर पर जांच करनी पड़ती है। इसमें कर्मचारी की KYC, नौकरी का रिकॉर्ड, बैंक डिटेल्स और अन्य दस्तावेजों का वेरिफिकेशन शामिल होता है। इसी प्रक्रिया की वजह से कई बार क्लेम निपटने में दिन या हफ्ते लग जाते हैं। लेकिन नए ऑटो-सेटलमेंट सिस्टम से यह प्रक्रिया काफी तेज और सरल हो सकती है।

कर्मचारियों को क्या फायदा?

इस नई व्यवस्था से नौकरीपेशा लोगों को कई बड़े लाभ मिल सकते हैं: PF का पैसा जल्दी बैंक खाते में ट्रांसफर होगा, कागजी प्रक्रिया और दस्तावेजों की जरूरत कम होगी, क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना घटेगी, प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और आसान बनेगी, कई मामलों में मैनुअल मंजूरी पर निर्भरता कम होगी। 

नौकरी बदलने पर भी राहत

EPFO सिर्फ PF निकालने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि नौकरी बदलने के दौरान PF ट्रांसफर को भी ऑटोमेट करने पर विचार कर रहा है। अभी कर्मचारियों को इसके लिए अलग से ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, लेकिन नए सिस्टम में PF बैलेंस UAN से लिंक होकर अपने आप नए खाते में ट्रांसफर हो सकता है।

पानी-पानी होगा बिहार! 38 जिलों में आंधी-बारिश के आसार, मौसम विभाग ने दी चेतावनी

पटना। बिहार में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और पूरे राज्य में तेज आंधी-तूफान और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के सभी 38 जिलों के लिए अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण उत्तर-पूर्व बिहार में प्री-मानसून गतिविधियां काफी सक्रिय हो गई हैं।

16 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार राज्य के 16 जिलों में स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है, इसलिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इन जिलों में बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, अरवल, औरंगाबाद, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका और जमुई शामिल हैं।

बाकी जिलों में येलो अलर्ट

राज्य के अन्य 22 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां मध्यम से तेज बारिश और आंधी की स्थिति बन सकती है। हालांकि यहां स्थिति ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्रों की तुलना में थोड़ी कम गंभीर बताई जा रही है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है।

मानसून समय से पहले आएगा

इस बार राहत की बात यह है कि मानसून अपने तय समय से पहले बिहार पहुंच सकता है। सामान्यतः मानसून 12 से 15 जून के बीच राज्य में प्रवेश करता है, लेकिन इस बार इसके 8 से 10 जून के बीच आने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि केरल में भी मानसून समय से पहले दस्तक देगा, जिसका असर पूरे देश के मौसम पर पड़ेगा।

मौसम विभाग की लोगों को सलाह

मौसम विभाग ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। आंधी और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों पर न रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है।

बिहार में 'असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर' की बंपर भर्ती, नोटिश हुआ जारी

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (Bihar Police Sub-Inspector Services Commission) ने असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (तकनीकी) के पदों पर नई भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के तहत कुल 22 पदों को भरा जाएगा।

यह भर्ती विज्ञापन संख्या 07/2026 के अंतर्गत जारी की गई है, जिसमें योग्य अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। आवेदन के लिए वेबसाइट पोर्टल bpssc.bihar.gov.in पर विजिट करें।

भर्ती से जुड़ी मुख्य जानकारी

इस भर्ती में चयनित उम्मीदवारों को लेवल-5 के तहत वेतन दिया जाएगा, जो सरकारी नियमों के अनुसार आकर्षक सैलरी पैकेज माना जाता है।

पद का नाम: असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (तकनीकी)

कुल पद: 22

वेतनमान: लेवल-5

शैक्षणिक योग्यता

इस पद के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित तकनीकी क्षेत्र में डिप्लोमा होना आवश्यक है। योग्यताओं में शामिल हैं: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग। इसके साथ उम्मीदवार का न्यूनतम 50% अंक होना जरूरी है, जबकि SC/ST वर्ग के लिए 45% अंक की छूट दी गई है।

आयु सीमा

सामान्य पुरुष उम्मीदवार के लिए अधिकतम 37 वर्ष, सामान्य महिला एवं OBC (पुरुष/महिला) के लिए अधिकतम 40 वर्ष, जबकि SC/ST (पुरुष/महिला) के लिए अधिकतम 42 वर्ष निर्धारित किया गया है।

आवेदन की तारीखें

आवेदन शुरू होने की तारीख: 21 मई 2026

आवेदन की अंतिम तारीख: 21 जून 2026

यूपी में 'B.Sc' वालों के लिए बंपर भर्ती, नोटिश हुआ जारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission) ने गन्ना विभाग में बड़ी भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के तहत गन्ना पर्यवेक्षक के कुल 1182 पदों पर नियुक्ति की जाएगी।

इस भर्ती को B.Sc डिग्री धारकों के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें शैक्षणिक योग्यता के तौर पर विज्ञान स्नातक (B.Sc) उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती विज्ञापन संख्या 13-परीक्षा/2026 के तहत जारी की गई है। यह सभी पद स्थायी नियुक्ति के अंतर्गत आते हैं और चयनित उम्मीदवारों को सरकारी सेवा का लाभ मिलेगा।

आवेदन प्रक्रिया और तारीखें

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू होगी और 28 जुलाई 2026 तक चलेगी। उम्मीदवार केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही आवेदन कर सकते हैं।

योग्यता और जरूरी शर्तें

इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास B.Sc डिग्री होना आवश्यक है। इसके अलावा अभ्यर्थी का PET-2025 परीक्षा में वैध स्कोर कार्ड होना भी अनिवार्य किया गया है। बिना PET स्कोर कार्ड के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

वेतनमान और सुविधाएं

चयनित उम्मीदवारों को लेवल-4 वेतनमान के तहत वेतन दिया जाएगा। न्यूनतम वेतन: ₹25,500, अधिकतम वेतन: ₹81,100, इसके साथ ही सरकारी सेवा के अन्य भत्ते और सुविधाएं भी मिलेंगी।

कहां करें आवेदन?

उम्मीदवार आवेदन केवल यूपीएसएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट UPSSSC Official Website पर जाकर ही कर सकते हैं।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: ट्रैफिक नियम तोड़ा तो 45 दिन में भरें जुर्माना

पटना। बिहार में ट्रैफिक व्यवस्था को और सख्त और अनुशासित बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को जुर्माना भरने के लिए पहले के मुकाबले कम समय मिलेगा। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब चालान की राशि जमा करने की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 45 दिन कर दी गई है।

45 दिन में नहीं भरा जुर्माना तो होगी सख्त कार्रवाई

नए नियम के अनुसार यदि वाहन चालक 45 दिन के भीतर जुर्माना नहीं भरता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें वाहन से जुड़े सभी दस्तावेज जैसे आरसी (RC), इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके अलावा ऐसे वाहन मालिक भविष्य में अपनी गाड़ी की खरीद-बिक्री भी नहीं कर पाएंगे।

फर्जी प्रमाण पत्र पर भी होगी सख्ती

परिवहन विभाग ने यह भी साफ किया है कि कई बार चालान नहीं भरने के बावजूद लोग फर्जी या गलत तरीके से प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) बनवा लेते हैं। यदि जांच में ऐसी गाड़ियां पकड़ी जाती हैं तो न सिर्फ प्रमाण पत्र रद्द किया जाएगा, बल्कि संबंधित सेंटर पर भी कार्रवाई होगी।

नियम तोड़ने वालों को प्रशिक्षण

सरकार केवल सजा ही नहीं बल्कि सुधार पर भी ध्यान दे रही है। बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों को जिला परिवहन कार्यालय में प्रशिक्षण लेना होगा। यदि कोई चालक बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है और प्रशिक्षण के बाद भी सुधार नहीं करता, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी जब्त किया जा सकता है।

आने वाले समय में और सख्ती

विभाग का कहना है कि आने वाले समय में ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर निगरानी और भी सख्त की जाएगी। नियम तोड़ने वालों पर त्वरित कार्रवाई, डिजिटल मॉनिटरिंग और समय पर जुर्माना वसूली को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि सड़क हादसों में कमी लाई जा सके।

केंद्र सरकार ने दी राहत, किसानों के लिए 3 बड़ी खुशखबरी, टेंशन दूर

नई दिल्ली। हाल ही में प्याज की गिरती कीमतों को लेकर किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही थी। महाराष्ट्र के एक किसान का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आ गया, जिसमें 25 बोरी प्याज बेचने के बावजूद किसान को बेहद कम कीमत मिली।

इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब किसानों को उनकी उपज के लिए उचित और स्थिर कीमत देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।

नेफेड के जरिए होगी 12.35 रुपये प्रति किलो खरीद

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि अब नेफेड (NAFED) के माध्यम से प्याज की खरीद 12.35 रुपये प्रति किलो की दर से शुरू की जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम उचित मूल्य मिल सके और बाजार में गिरावट का सीधा नुकसान उन्हें न हो।

किसानों को बाजार में मिल रही थी कम कीमत

हाल के दिनों में कई जगहों पर प्याज के दाम इतने गिर गए थे कि किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही थी। कुछ मामलों में तो स्थिति ऐसी रही कि बिक्री के बाद किसानों के हाथ लगभग कुछ भी नहीं बच रहा था। वहीं दूसरी ओर, बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्याज की कीमतें काफी अधिक बनी हुई हैं, जिससे यह असंतुलन और साफ दिखाई दे रहा था।

सरकार ने दिए पारदर्शी खरीद के निर्देश

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और किसान-केंद्रित होनी चाहिए। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खरीद का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे और बीच के बिचौलियों की भूमिका कम हो।

गन्ना और कपास किसानों के लिए भी कदम

बैठक के दौरान गन्ना किसानों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। सरकार ने आश्वासन दिया है कि केंद्र और राज्य मिलकर इसका समाधान निकालेंगे। इसके अलावा कपास उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 'कॉटन मिशन' की शुरुआत की गई है, जिसके तहत कपास किसानों को आने वाले समय में नई सुविधाएं देने की योजना है।

सुबह उठते ही भीगी किशमिश खाएं, शरीर को मिलेंगे 8 जबरदस्त फायदे

हेल्थ डेस्क। स्वस्थ रहने के लिए सही खानपान सबसे जरूरी माना जाता है। आयुर्वेद में सूखे मेवों का विशेष महत्व बताया गया है, जिनमें किशमिश को एक शक्तिशाली और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किशमिश को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाया जाए, तो यह शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी हो सकता है।

भीगी किशमिश में प्राकृतिक शुगर, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं।

भीगी किशमिश के 8 बड़े फायदे

1. खून की कमी में मददगार

भीगी किशमिश आयरन का अच्छा स्रोत होती है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद कर सकती है। इससे एनीमिया की समस्या में राहत मिल सकती है।

2. पाचन तंत्र को मजबूत बनाए

इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सुधारता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होता है।

3. शरीर को तुरंत ऊर्जा दे

भीगी किशमिश में प्राकृतिक शुगर होती है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है और दिनभर एक्टिव रखने में मदद करती है।

4. दिल के लिए फायदेमंद

यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

5. हड्डियों को मजबूत बनाए

किशमिश में कैल्शियम और बोरॉन जैसे मिनरल्स होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

6. त्वचा को बनाए चमकदार

इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को डिटॉक्स करते हैं, जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनी रहती है।

7. वजन नियंत्रित करने में मदद

भीगी किशमिश भूख को नियंत्रित करने में मदद करती है, जिससे ओवरईटिंग कम होती है और वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है।

8. इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए

यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकती है, जिससे संक्रमण और बीमारियों से बचाव होता है।

कैसे करें सेवन?

रात में 8 से 10 किशमिश को पानी में भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। चाहें तो इसे हल्के गर्म पानी के साथ भी लिया जा सकता है।

सूर्य का खास असर, सर्वार्थ सिद्धि योग में 5 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में शुभ योगों का विशेष महत्व माना गया है। जब ग्रहों की स्थिति अनुकूल होती है और सर्वार्थ सिद्धि जैसे योग बनते हैं, तो उसका असर कई राशियों के जीवन पर सकारात्मक रूप से देखने को मिलता है। माना जा रहा है कि 17 मई को बनने वाला यह विशेष संयोग कुछ लोगों के लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व

सर्वार्थ सिद्धि योग को बेहद शुभ माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। चाहे नया काम शुरू करना हो, निवेश करना हो या किसी महत्वपूर्ण निर्णय की शुरुआत करनी हो, यह समय अनुकूल माना जाता है।

अमृत सिद्धि योग का भी बन रहा संयोग

इस दिन एक और महत्वपूर्ण योग अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो सुबह 05:44 AM से शुरू होकर रात 12:30 AM तक प्रभावी रहेगा। अमृत सिद्धि योग को भी शुभ कार्यों, नई शुरुआत और सफलता के लिए उत्तम समय माना जाता है। ऐसे में दोनों योगों का एक साथ बनना ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किन 5 राशियों को मिल सकता है लाभ?

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसर लेकर आ सकता है। करियर में प्रगति और रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं।

2. सिंह राशि

सूर्य का प्रभाव सिंह राशि पर विशेष रूप से शुभ माना जाता है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और सामाजिक प्रतिष्ठा में सुधार हो सकता है।

3. धनु राशि

धनु राशि के लोगों के लिए यह समय आर्थिक लाभ और नई योजनाओं की शुरुआत के लिए अनुकूल रह सकता है।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए भाग्य का साथ मिलने की संभावना है। कामकाज में सफलता और अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

5. कुंभ राशि

कुंभ राशि के लिए यह समय करियर और व्यापार में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है। नए अवसर मिलने की संभावना है।

सूर्य का प्रभाव क्या दर्शाता है?

ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माना जाता है। जब सूर्य की स्थिति अनुकूल होती है, तो व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।

योगी सरकार का एक्शन, 200 निजी अस्पतालों पर कार्रवाई, मचा हड़कंप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले निजी अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की गई है। इस फैसले के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में हलचल मच गई है।

आयुष्मान योजना में सख्त मानक लागू

सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के लिए मानकों को और सख्त कर दिया है। अब किसी भी अस्पताल को सूचीबद्ध होने के लिए 35 महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। इनमें अस्पताल का वैध पंजीकरण, फायर सेफ्टी एनओसी, आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, योग्य डॉक्टरों की उपलब्धता और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं।

200 अस्पतालों ने नहीं मानी शर्तें

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में पाया गया कि करीब 200 निजी अस्पतालों ने तय समय सीमा के भीतर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं कीं। इन अस्पतालों को कई बार मौका दिए जाने के बावजूद वे मानकों के अनुरूप व्यवस्था नहीं कर पाए, जिसके बाद सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया।

कई जिलों के अस्पताल शामिल

यह कार्रवाई राज्य के विभिन्न जिलों में की गई है, जिनमें आगरा, लखनऊ, प्रयागराज, गाजियाबाद, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली और अन्य कई जिले शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल उन अस्पतालों को सिस्टम से बाहर करना है जो मरीजों को तय मानकों के अनुसार सेवा नहीं दे रहे थे।

100 अस्पतालों का भुगतान रोका गया, 100 निलंबित

कार्रवाई के तहत 100 निजी अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है, जबकि लगभग 100 अस्पतालों को आयुष्मान योजना से निलंबित कर दिया गया है। इस कदम से स्पष्ट संकेत दिया गया है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी।

बिहार सरकार का बड़ा कदम, जमीन मालिकों के लिए 6 नई खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों और राजस्व व्यवस्था को तेजी से सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने लंबित आवेदनों के निपटारे, डिजिटल रिकॉर्ड और किसानों से जुड़े मामलों को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। इस पहल से राज्य के लाखों जमीन मालिकों और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

1. लंबित आवेदनों का तेजी से होगा निपटारा

सरकार ने पिछले राजस्व महा-अभियान के दौरान प्राप्त सभी लंबित आवेदनों को जल्द से जल्द निपटाने का फैसला लिया है। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि लोगों को लंबे समय से अटके मामलों में राहत मिल सके।

2. 31 मई तक सभी आवेदन होंगे ऑनलाइन

बैठक में यह निर्देश दिया गया कि अब तक स्कैन किए गए आवेदनों के अलावा बाकी सभी मामलों को 31 मई तक ऑनलाइन अपलोड किया जाए। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनेगी।

3. जमाबंदी सुधार पर विशेष फोकस

सरकार ने 6.60 लाख जमाबंदियों में सुधार का लक्ष्य तय किया है। जमाबंदी सुधार पूरा होने के बाद किसानों को योजनाओं का लाभ और रिकॉर्ड अपडेट करने में आसानी होगी।

4. ई-मापी मामलों का जल्द समाधान

करीब 48 हजार जमीन मापी से जुड़े मामले लंबित हैं, जिन्हें 30 जून तक हर हाल में निपटाने का निर्देश दिया गया है। इससे जमीन विवाद और अटकी प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

5. डिजिटल भूमि रिकॉर्ड में बड़ी प्रगति

राज्य में भूमि अभिलेखों का तेजी से डिजिटलीकरण किया जा रहा है। अब तक लगभग 33 करोड़ पन्नों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है। इससे नागरिकों को जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।

6. गांवों के पुराने खतियान की खोज शुरू

सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि राज्य के करीब 8 हजार गांवों के कैडेस्ट्रल खतियान उपलब्ध नहीं हैं। इन्हें खोजने के लिए सरकार जनता से सहयोग लेगी और पुराने दस्तावेजों को एकत्र किया जाएगा।

मर्दों के लिए एनर्जी बूस्टर हैं ये 4 जूस, कमजोरी को करेंगे दूर

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, कमजोरी और एनर्जी की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है। खासकर पुरुषों में काम का दबाव, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण शरीर जल्दी थक जाता है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक जूस शरीर को ऊर्जा देने और फिट रखने में मदद कर सकते हैं। कुछ फलों और सब्जियों के जूस ऐसे होते हैं जो शरीर में नई ऊर्जा भरते हैं, खून बढ़ाने में मदद करते हैं और स्टैमिना को बेहतर बनाते हैं।

1. चुकंदर का जूस

चुकंदर का जूस शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें आयरन और नाइट्रेट भरपूर मात्रा में होता है, जो खून बढ़ाने और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सुधारने में मदद करता है। नियमित सेवन से थकान कम होती है और शरीर में नई ऊर्जा महसूस होती है।

2. गाजर का जूस

गाजर का जूस विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह न केवल आंखों के लिए अच्छा है बल्कि शरीर की इम्युनिटी और स्टैमिना बढ़ाने में भी मदद करता है। यह जूस शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और कमजोरी दूर करने में सहायक होता है।

3. आंवला जूस

आंवला को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना गया है। इसका जूस शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। यह शरीर की थकान कम करता है और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में मदद करता है।

4. अनार का जूस

अनार का जूस खून बढ़ाने और दिल को स्वस्थ रखने के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की कमजोरी दूर करते हैं और एनर्जी लेवल को बढ़ाते हैं। नियमित सेवन से शरीर में ताजगी और ताकत बनी रहती है।

शनि देव की कृपा से 4 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा, शुरू होंगे शुभ दिन

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्यायप्रिय ग्रह माना जाता है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जब भी शनि की स्थिति अनुकूल होती है, तो कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। इस समय शनि देव की विशेष कृपा कुछ राशियों पर मानी जा रही है, जिससे उनके लिए अच्छे दिनों की शुरुआत हो सकती है।

किन 4 राशियों को मिलेगा लाभ?

1. मकर राशि

मकर राशि पर शनि देव का विशेष प्रभाव माना जाता है। इस समय इस राशि के जातकों को करियर में स्थिरता और नई जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना भी बन रही है।

2. कुंभ राशि

कुंभ राशि के लिए यह समय आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से बेहतर माना जा रहा है। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं और आय के स्रोत बढ़ने की संभावना है।

3. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय धन लाभ और पारिवारिक स्थिरता का संकेत दे रहा है। पुराने निवेश से फायदा मिलने और रुका हुआ पैसा वापस आने की संभावना बन सकती है।

4. तुला राशि

तुला राशि के लिए यह समय भाग्य के सहयोग और प्रगति का संकेत देता है। कामकाज में सफलता मिलने और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने के योग बन सकते हैं।

शनि देव का प्रभाव क्या दर्शाता है?

शनि देव को अनुशासन, धैर्य और कर्म का प्रतीक माना जाता है। उनका प्रभाव व्यक्ति को मेहनत और ईमानदारी के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। शुभ स्थिति में शनि देव जीवन में स्थिरता, सफलता और आर्थिक मजबूती का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 1 बड़ी खबर, नए निर्देश जारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ा एक अहम बदलाव सामने आया है। Central Government Health Scheme (CGHS) के तहत जारी नए आदेश ने कर्मचारियों के बीच चर्चा और चिंता दोनों बढ़ा दी है। यह बदलाव खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने माता-पिता और सास-ससुर दोनों को मेडिकल सुविधा में शामिल रखना चाहते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 13 मई, 2026 को जारी किए गए इस नए निर्देश के बाद CGHS के आश्रितों को लेकर नियम और स्पष्ट कर दिए गए हैं।

क्या बदला है नया नियम?

नए प्रावधान के अनुसार अब केंद्र सरकार के कर्मचारी एक साथ अपने माता-पिता और सास-ससुर दोनों को CGHS लाभार्थी के रूप में शामिल नहीं कर पाएंगे। कर्मचारी को अब इनमें से केवल एक विकल्प चुनना होगा या तो अपने माता-पिता को CGHS में शामिल करें या फिर सास-ससुर को आश्रित के रूप में चुनें। एक बार किया गया यह चयन भविष्य में बदला नहीं जा सकेगा, जिससे यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

‘वन-टाइम चयन’ से बढ़ी मुश्किल

नए नियम की सबसे बड़ी बात यह है कि यह चयन स्थायी माना जाएगा। यानी एक बार जो निर्णय लिया गया, वही अंतिम होगा। यदि चुने गए आश्रितों में से किसी का निधन हो जाता है, तो भी दूसरे विकल्प को शामिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यही वजह है कि इसे लेकर कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

कौन-कौन हो सकते हैं CGHS के आश्रित?

CGHS नियमों के तहत कुछ विशेष शर्तों के साथ परिवार के सदस्य लाभार्थी बन सकते हैं। सामान्य तौर पर इनमें शामिल हैं पति या पत्नी, बच्चे (निर्धारित आयु सीमा तक), माता-पिता या सास-ससुर (इनमें से केवल एक पक्ष), आश्रित भाई-बहन या अन्य पात्र परिजन। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि आश्रित व्यक्ति कर्मचारी के साथ रहता हो और उसकी आय एक निर्धारित सीमा से कम हो।

कर्मचारियों की सैलरी से कितनी कटौती होती है?

CGHS सुविधा के लिए कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने एक निश्चित राशि काटी जाती है, जो उनके वेतन स्तर पर निर्भर करती है। लेवल 1 से 5 तक ₹250 प्रति माह, लेवल 6 वालों से ₹450 प्रति माह, लेवल 7 से 11 तक ₹650 प्रति माह, जबकि लेवल 12 और उससे ऊपर से ₹1,000 प्रति माह। यह राशि स्वास्थ्य सुविधाओं के संचालन और उपचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उपयोग की जाती है।

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए भी यह नियम है लागू

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी CGHS सुविधा का लाभ मिलता है। जिन शहरों में CGHS केंद्र उपलब्ध नहीं हैं, वहां पेंशनर्स को दो विकल्प दिए जाते हैं। फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) लेना या नजदीकी CGHS केंद्र में रजिस्ट्रेशन कराना। 

सीएम सम्राट के 7 बड़े फैसले: बिहारवासियों के लिए खुशखबरी पर खुशखबरी

पटना। बिहार की राजनीति में पिछले एक महीने के दौरान कई ऐसे फैसले सामने आये हैं, जिन्होंने आम लोगों के बीच नई उम्मीद जगाई है। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी ने सत्ता संभालते ही यह संकेत देने की कोशिश की कि उनकी सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रशासनिक सुधार, कानून व्यवस्था, शिक्षा, महिला सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर तेज़ी से काम करेगी।

1. सैटेलाइट टाउनशिप

बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप बसाने की योजना राज्य के शहरी विकास की बड़ी पहल मानी जा रही है। इन टाउनशिप को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा, जहां चौड़ी सड़कें, पार्क, बाजार और व्यवस्थित आवासीय क्षेत्र होंगे।

2.पुलिस दीदी योजना

महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार ने ‘पुलिस दीदी योजना’ शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत महिला पुलिसकर्मियों को स्कूटी देकर स्कूलों और कॉलेजों के आसपास तैनात किया जाएगा। इस योजना का मकसद छेड़खानी, सड़क पर होने वाली बदसलूकी और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर लगाम लगाना है। साथ ही छात्राओं में सुरक्षा और आत्मविश्वास का माहौल तैयार करना भी सरकार की प्राथमिकता है।

3. सहयोग हेल्पलाइन

सरकार ने प्रशासन को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिए 'सहयोग हेल्पलाइन', 'सहयोग पोर्टल' और पंचायत स्तर पर 'सहयोग शिविर' शुरू करने का फैसला किया है। अब लोगों को अपनी शिकायत लेकर दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पंचायत स्तर पर ही समस्याओं की सुनवाई होगी और 30 दिनों के भीतर समाधान का लक्ष्य रखा गया है। तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारी पर सख्त कदम उठाने की बात कही गई है।

4. हर प्रखंड में मॉडल स्कूल

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल स्कूल विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही जिन प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां नए कॉलेज खोलने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इससे ग्रामीण इलाकों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज़ नहीं जाना पड़ेगा।

5. निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती

अक्सर निजी स्कूलों की मनमानी फीस और अनावश्यक शुल्क को लेकर अभिभावकों में नाराजगी रहती है। सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए फीस संरचना को सार्वजनिक करना अनिवार्य करने का फैसला लिया है। अब स्कूल किताब और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए किसी एक दुकान का दबाव नहीं बना सकेंगे। साथ ही फीस बकाया होने पर छात्रों को परीक्षा या रिजल्ट से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

6. बिहार के संवेदकों को मिलेगा ज्यादा मौका

राज्य सरकार ने 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी निर्माण कार्यों में बिहार के संवेदकों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इस फैसले से स्थानीय ठेकेदारों और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा मिलेगा।

7. जमीन के लिए ई-निबंधन व्यवस्था से पारदर्शिता

जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए ई-निबंधन व्यवस्था लागू की गई है। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है। सबसे राहत भरा फैसला 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री सुविधा है। इससे बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

केंद्र सरकार का एक और बड़ा फैसला, सरकार ने लगाया टैक्स

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाने का निर्णय लिया है, जबकि डीजल पर पहले से लागू लेवी को घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर 16 रुपये प्रति लीटर टैक्स तय किया गया है। नई दरें 16 मई से लागू कर दी गई हैं।

क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स एक ऐसा अतिरिक्त कर है, जिसे सरकार उन कंपनियों पर लगाती है जिन्हें अचानक और अप्रत्याशित रूप से भारी मुनाफा होने लगता है। यह मुनाफा कंपनी की मेहनत, उत्पादन क्षमता या नई रणनीति की वजह से नहीं होता, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण मिलता है।

उदाहरण के तौर पर यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं, युद्ध या संकट के कारण सप्लाई प्रभावित होती है या वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ती है, तो तेल कंपनियों को सामान्य से कहीं अधिक कमाई होने लगती है। ऐसे समय में सरकार अतिरिक्त कमाई का एक हिस्सा टैक्स के रूप में लेती है। इसे ही विंडफॉल टैक्स कहा जाता है।

सरकार यह टैक्स क्यों लगाती है?

सरकार का तर्क होता है कि वैश्विक संकट के दौरान कुछ कंपनियों को असामान्य लाभ मिलता है, इसलिए उस लाभ का एक हिस्सा देश और जनता के हित में इस्तेमाल होना चाहिए। इस टैक्स से मिलने वाली राशि का उपयोग सरकार कई योजनाओं, सब्सिडी और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में करती है। साथ ही इससे यह संदेश भी जाता है कि संकट के समय केवल कंपनियां ही फायदा न उठाएं, बल्कि उसका लाभ आम जनता तक भी पहुंचे।

जनता के लिए क्या मायने?

फिलहाल सरकार के इस फैसले का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर तुरंत दिखाई नहीं देगा, लेकिन पेट्रोलियम सेक्टर की नीतियों में बदलाव हमेशा अर्थव्यवस्था और महंगाई से जुड़ा मुद्दा माना जाता है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो आने वाले समय में इसका असर ईंधन कीमतों और परिवहन लागत पर भी दिख सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।

8th Pay Commission: Level-1 से Level-10 तक कितनी बढ़ेगी सैलरी?

नई दिल्ली। केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि नया वेतन आयोग लागू होने के बाद उनकी सैलरी में आखिर कितना इजाफा होगा। खासतौर पर Level-1 से लेकर Level-10 तक के कर्मचारियों में फिटमेंट फैक्टर और नई बेसिक सैलरी को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर फिटमेंट फैक्टर का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन संभावित आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

सरकारी कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय करने में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम भूमिका निभाता है। यह एक गुणक होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक पे को नई सैलरी में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। इसी के आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी 7 हजार रुपये से बढ़कर 18 हजार रुपये हो गई थी। अब 8वें वेतन आयोग में 1.92, 2.08 और 2.86 जैसे संभावित फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा हो रही है।

कर्मचारियों की कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

Level-1 कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी 18 हजार रुपये है। अगर 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो यह बढ़कर 34,560 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर सैलरी 37,440 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 51,480 रुपये तक पहुंच सकती है।

Level-2 कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक पे 19,900 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से यह 38,208 रुपये हो सकती है। वहीं 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर 41,392 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 56,914 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

Level-3 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी फिलहाल 21,700 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह 41,664 रुपये हो सकती है। 2.08 फैक्टर पर 45,136 रुपये और 2.86 फैक्टर पर 62,062 रुपये तक बढ़ सकती है।

Level-4 कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी 25,500 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर के अनुसार यह 48,960 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर 53,040 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 72,930 रुपये तक पहुंच सकती है।

Level-5 कर्मचारियों की बेसिक पे 29,200 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर यह 56,064 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर 60,736 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 83,512 रुपये तक बढ़ सकती है।

Level-6 कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी 35,400 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर यह 67,968 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर 73,632 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 1,01,244 रुपये तक पहुंच सकती है।

Level-7 कर्मचारियों की बेसिक पे 44,900 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह 86,208 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर 93,392 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 1,28,414 रुपये तक पहुंच सकती है।

Level-8 कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी 47,600 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से यह 91,392 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर 99,008 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 1,36,136 रुपये तक पहुंच सकती है।

Level-9 कर्मचारियों की बेसिक पे 53,100 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह 1,01,952 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर पर 1,10,448 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 1,51,866 रुपये तक पहुंच सकती है।

Level-10 कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी 56,100 रुपये है। 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर यह 1,07,712 रुपये हो सकती है। 2.08 फिटमेंट फैक्टर के अनुसार 1,16,688 रुपये और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर 1,60,446 रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

बिहार सरकार का फैसला, सरकारी विभागों में अब सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन चलेंगे

पटना। बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का फैसला किया है। अब राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में किराये पर चलने वाली पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की जगह चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल किए जाएंगे।

दो सरकारी निगमों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यवस्था और संचालन के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है। ये दोनों संस्थाएं एग्रीगेटर के रूप में काम करेंगी और वाहन निर्माता कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर सरकारी विभागों को जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराएंगी। सरकार ने पहले चरण में दो से तीन हजार इलेक्ट्रिक वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।

उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया फैसला

यह निर्णय विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वाहन निर्माता कंपनियों और पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान टाटा मोटर्स, एमजी मोटर, हुंडई, मारुति सुजुकी और टीवीएस जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। बैठक में बिहार इलेक्ट्रिक वाहन संशोधन नीति 2026 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सरकारी जरूरतों के अनुसार तैयार होंगे वाहन

सरकार ने वाहन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे इलेक्ट्रिक वाहन विकसित करें जो बोलेरो, स्कॉर्पियो-एन और आर्टिगा जैसी श्रेणी के मजबूत और लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों का विकल्प बन सकें। सरकारी कामकाज में लगातार यात्रा और कठिन रास्तों का सामना करना पड़ता है, इसलिए सरकार चाहती है कि इलेक्ट्रिक वाहन केवल पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं बल्कि उपयोग और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर साबित हों।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पूरे राज्य में बनेंगे चार्जिंग स्टेशन

इलेक्ट्रिक वाहनों के सफल संचालन के लिए मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने पर भी सरकार का विशेष फोकस है। बैठक में निर्देश दिया गया कि सरकारी परिसरों, सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख इलाकों में बड़े पैमाने पर ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएं। इसके अलावा पेट्रोलियम कंपनियों को भी अपने पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य रूप से ईवी चार्जर लगाने के लिए कहा गया है।

केंद्र सरकार ने सोने-चांदी पर बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी, 13 मई से ही लागू

नई दिल्ली। सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इनकी इंपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है। 13 मई से लागू इस फैसले के तहत सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि लगातार बढ़ रहे आयात से देश का व्यापार घाटा तेजी से बढ़ रहा है, जिस पर नियंत्रण जरूरी हो गया था।

क्यों बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी?

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में सोने की मांग मुख्य रूप से आभूषणों और निवेश के लिए होती है। वहीं चांदी का इस्तेमाल उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। पिछले कुछ समय में सोने और चांदी का आयात तेजी से बढ़ा है। इससे बड़ी मात्रा में डॉलर विदेश जा रहे हैं, जिसका असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ाने से विदेशी खरीद महंगी होगी और आयात में कमी आ सकती है। इससे व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

व्यापार घाटे ने बढ़ाई सरकार की चिंता

हाल के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में सोने और चांदी के भारी आयात की वजह से भारत का व्यापार घाटा तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। विशेष रूप से चांदी का आयात काफी तेजी से बढ़ा है। पिछले वित्त वर्ष में चांदी का आयात मूल्य के लिहाज से लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं वजन के हिसाब से भी इसमें बड़ा उछाल देखा गया। सरकार को डर है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर देश की आर्थिक स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है।

यूएई नहीं, अब भी स्विट्जरलैंड सबसे बड़ा सप्लायर

अक्सर यह चर्चा होती रही है कि यूएई के साथ हुए व्यापार समझौते के बाद भारत में सोने का आयात तेजी से बढ़ा है। लेकिन सरकार के मुताबिक स्थिति कुछ अलग है। आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल सोना आयात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी अब भी स्विट्जरलैंड की है। इसके बाद यूएई और दक्षिण अफ्रीका का स्थान आता है। सरकार का कहना है कि यूएई के साथ हुए समझौते के तहत जितना रियायती कोटा तय किया गया था, उसका बहुत छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल हुआ है।

सरकार के इस फैसले का खरीदारों के लिए क्या है संकेत?

इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना टैक्स समेत करीब 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच चुका है, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रही है।

चीन-पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन! भारत और UAE साथ करेंगे रक्षा उत्पादन

नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने रक्षा क्षेत्र में अपनी साझेदारी को नई ऊंचाई देते हुए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के दौरान हुए इस समझौते को दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस नई साझेदारी के तहत भारत और यूएई अब रक्षा उपकरणों, आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड हथियार प्रणालियों के संयुक्त निर्माण पर मिलकर काम करेंगे। इससे दोनों देशों की सैन्य क्षमता और रक्षा उद्योग को बड़ा फायदा मिल सकता है।

क्या है यह नई रक्षा साझेदारी?

भारत और यूएई के बीच हुए इस समझौते को 'रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए रणनीतिक ढांचा' नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ हथियार खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और संयुक्त विकास को बढ़ावा देना भी है। इसमें सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, सुरक्षित संचार प्रणाली और विशेष अभियानों में सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल किए गए हैं।

अबू धाबी में हुई अहम बैठक

अबू धाबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद इस रणनीतिक ढांचे की घोषणा की गई। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और संयुक्त उत्पादन बेहद जरूरी है।

किन क्षेत्रों में होगा संयुक्त उत्पादन?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश छोटे हथियारों, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, नौसैनिक प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा तकनीकों पर मिलकर काम कर सकते हैं। इसके अलावा सटीक गोला-बारूद और आधुनिक निगरानी प्रणाली जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की तैयारी है। भारत की रक्षा कंपनी ICOMM और यूएई की CARACAL के बीच छोटे हथियारों के संयुक्त निर्माण को इस दिशा में शुरुआती मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

भारत के रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा फायदा

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। सरकार 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है। यूएई के निवेश और तकनीकी सहयोग से भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि रक्षा निर्यात भी बढ़ा सकता है।

बिहार में बढ़ सकता है भू-लगान, जमीन मालिकों के लिए बड़ा अपडेट

पटना। बिहार में जमीन मालिकों के लिए आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार भू-लगान की दरों में वृद्धि करने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने मंथन शुरू कर दिया है। शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने विभागीय अधिकारियों को भू-लगान बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार करने का निर्देश दिया।

क्यों बढ़ सकता है भू-लगान?

सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में भूमि से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। इसी को देखते हुए भू-लगान की दरों में संशोधन पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी नई दरों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन सरकार के संकेतों से साफ है कि आने वाले समय में जमीन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

लंबित आवेदनों के निपटारे पर जोर

बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लगान राजस्व महाअभियान के दौरान प्राप्त सभी आवेदनों का जल्द निष्पादन किया जाए। अब तक लगभग 81 प्रतिशत आवेदनों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है। सरकार ने 31 मई तक सभी आवेदनों को डिजिटल रूप से अपलोड करने का लक्ष्य रखा है। सरकार का उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

6.60 लाख जमाबंदियों में होगा सुधार

राज्य में चल रहे एग्रिस्टैक अभियान के तहत सरकार ने 6.60 लाख जमाबंदियों में सुधार का लक्ष्य तय किया है। मंत्री ने कहा कि जमाबंदी सुधार कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि इसके पूरा होने के बाद ही किसान रजिस्ट्री अभियान में तेजी आ सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमि रिकॉर्ड सही और अपडेट होंगे तो किसानों को सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।

मापी के हजारों मामले अब भी लंबित

बैठक में यह भी सामने आया कि हड़ताल की वजह से जमीन मापी के करीब 48 हजार मामले लंबित हो गए हैं। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी लंबित मामलों का निपटारा 30 जून तक किया जाए। भूमि विवाद और मापी से जुड़े मामलों के लंबित रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार इस प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दे रही है।

तेजी से हो रहा रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि अब तक करीब 33 करोड़ पन्नों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है। यह बिहार में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में जमीन से जुड़े अधिकतर कार्य ऑनलाइन माध्यम से ही पूरे किए जा सकें।

शनि का बड़ा असर शुरू, 5 राशियों के जीवन में होने वाले हैं चौंकाने वाले बदलाव

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्म, न्याय और अनुशासन का ग्रह माना जाता है। जब भी शनि अपनी चाल बदलते हैं या किसी राशि पर विशेष दृष्टि डालते हैं, तो उसका प्रभाव जीवन के कई क्षेत्रों करियर, धन, स्वास्थ्य और संबंधों पर देखने को मिलता है।

इस समय शनि की स्थिति कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ संकेत दे रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में 5 राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव और प्रगति के योग बन सकते हैं। हालांकि यह प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और कर्मों पर भी निर्भर करता है, फिर भी सामान्य ज्योतिषीय गणना के आधार पर कुछ राशियों के लिए यह समय बेहतर माना जा रहा है।

किन 5 राशियों को मिल सकता है लाभ?

1. मकर राशि

शनि मकर राशि के स्वामी माने जाते हैं, इसलिए इस राशि पर उनका विशेष प्रभाव रहता है। इस समय मकर राशि के जातकों को करियर में स्थिरता और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है।

2. कुंभ राशि

कुंभ राशि पर भी शनि का गहरा प्रभाव होता है। आने वाले समय में इस राशि के लोगों को आर्थिक लाभ और नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरी बदलने या प्रमोशन के योग भी बन सकते हैं।

3. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने और निवेश से लाभ मिलने की संभावना बन रही है। पारिवारिक जीवन में भी स्थिरता आ सकती है।

4. कन्या राशि

कन्या राशि के लिए शनि का प्रभाव मेहनत का अच्छा परिणाम देने वाला माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है।

5. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह समय संतुलन और प्रगति का हो सकता है। भाग्य का साथ मिलने से अटके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि हो सकती है।

बिहार के स्कूलों में लागू होगा नया सिस्टम, प्राइवेट स्कूलों पर भी शिकंजा

पटना। बिहार में शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइन के बाद राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नई स्कूल मैनेजमेंट कमिटी का गठन किया जाएगा। इस बदलाव के बाद स्कूलों के संचालन में अभिभावकों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

अभिभावकों की भूमिका होगी मजबूत

नई व्यवस्था के तहत स्कूलों को कई अहम निर्णय लेने से पहले अभिभावकों की राय लेनी होगी। इससे स्कूल प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और परिवारों को अपने बच्चों की पढ़ाई से जुड़े फैसलों में सीधा अधिकार मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे स्कूल और अभिभावकों के बीच भरोसा मजबूत होगा और शिक्षा व्यवस्था अधिक जिम्मेदार बनेगी।

किताब और यूनिफॉर्म खरीद पर रोक

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी स्कूल अब अभिभावकों को किसी विशेष दुकान, ब्रांड या विक्रेता से किताब, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी जरूरी सामग्री खरीद सकेंगे। स्कूल केवल यूनिफॉर्म का पैटर्न और जरूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा बार-बार यूनिफॉर्म या किताबों के पैटर्न में बदलाव पर भी रोक लगाने की तैयारी है। अगर किसी बदलाव की जरूरत होगी तो इसके लिए अभिभावक संघ की सहमति जरूरी होगी।

अतिरिक्त सामग्री पर भी लगेगी रोक

नई गाइडलाइन के अनुसार स्कूल अब छात्रों और अभिभावकों पर अतिरिक्त किताबें या अनावश्यक शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे। कई बार निजी स्कूलों पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे महंगी और गैर-जरूरी सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डालते हैं। अब ऐसी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फीस व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव

निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अब कोई भी स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। फीस बढ़ाने के लिए तय प्रक्रिया और नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा री-एडमिशन फीस और अन्य अनावश्यक शुल्क वसूलने पर भी रोक लगाई जाएगी। सभी निजी स्कूलों को अपनी फीस, किताबों और यूनिफॉर्म से जुड़ी पूरी जानकारी नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावकों को पहले से पूरी जानकारी मिल सके।

नई कमिटी से बढ़ेगी जवाबदेही

नई स्कूल मैनेजमेंट कमिटी का मुख्य उद्देश्य स्कूलों की जवाबदेही बढ़ाना है। इसमें अभिभावकों की भागीदारी से निर्णय प्रक्रिया अधिक लोकतांत्रिक बनेगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी, बल्कि शिक्षा का स्तर भी बेहतर होगा।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की ओर कदम

बिहार सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, नियंत्रित और अभिभावक-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लग सकता है और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने की उम्मीद है।

बिहार पुलिस में बड़ी भर्ती, सिपाही से दारोगा तक 37,978 पदों पर बहाली

पटना। बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में अब तक का एक बड़ा भर्ती अभियान शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत सिपाही से लेकर दारोगा तक हजारों पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जिससे लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ा अवसर मिलेगा।

आपको बता दें की राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा दिया है। सरकार का उद्देश्य बढ़ती आबादी के अनुपात में पुलिस बल को मजबूत करना और अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाना है।

कुल 48 हजार से ज्यादा पदों का सृजन

सरकारी जानकारी के अनुसार बिहार पुलिस में कुल 48,447 नए पद सृजित किए गए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में पद सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे, जबकि कुछ पदों पर प्रोन्नति दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया से पुलिस विभाग में नई ऊर्जा आने और कार्य क्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

37,978 पदों पर होगी सीधी भर्ती

इन नए पदों में से 37,978 पदों पर सीधी बहाली की जाएगी। इनमें सबसे अधिक पद सिपाही स्तर के हैं, जो युवाओं के लिए सबसे बड़ा अवसर माना जा रहा है। सिपाही और समकक्ष श्रेणी में कुल 27,510 पद शामिल हैं, जिनमें सामान्य सिपाही और चालक सिपाही के पद भी हैं।

दारोगा पदों पर भी बड़ा बदलाव

पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) के कुल 20,937 पद निर्धारित किए गए हैं। सरकार ने इसमें संतुलित भर्ती नीति अपनाते हुए आधे पद सीधी नियुक्ति और आधे पद प्रोन्नति से भरने का फैसला किया है। इससे विभाग में अनुभव और नए चेहरों दोनों का संतुलन बना रहेगा। सहायक अवर निरीक्षक (ASI) को पदोन्नति के जरिए दारोगा बनने का अवसर मिलेगा।

डायल-112 सेवा होगी और मजबूत

राज्य सरकार आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112 को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसके दूसरे चरण में लगभग 19,288 नए पदों पर भर्ती की जाएगी। इस सेवा के तहत सिपाही, हवलदार, चालक, एएसआई, एसआई और इंस्पेक्टर स्तर तक के पद शामिल हैं। इसका उद्देश्य त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया प्रणाली को और प्रभावी बनाना है।

युवाओं के लिए बड़ा अवसर

इस भर्ती अभियान को बिहार के युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका माना जा रहा है। लंबे समय से पुलिस भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को अब बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल पुलिस बल मजबूत होगा, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था भी और अधिक सुदृढ़ होगी।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, सरकार ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को एक बार फिर बड़ी राहत दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने इसे पहले की तरह 7.10 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है। इस फैसले से लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है, खासकर उन लोगों को जो घर खरीदने या निर्माण की योजना बना रहे हैं।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार नई ब्याज दर 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। यानी पूरे वित्त वर्ष के दौरान कर्मचारी इसी दर पर हाउस बिल्डिंग एडवांस का लाभ उठा सकेंगे।

क्या होता है हाउस बिल्डिंग एडवांस

हाउस बिल्डिंग एडवांस केंद्र सरकार कर्मचारियों को दिया जाने वाला विशेष ऋण है। इसका उपयोग कर्मचारी नया घर खरीदने, मकान निर्माण कराने या पुराने घर की मरम्मत के लिए कर सकते हैं। यह सुविधा सामान्य बैंक लोन की तुलना में कम ब्याज दर पर उपलब्ध होती है, इसलिए सरकारी कर्मचारियों के बीच इसकी मांग काफी अधिक रहती है।

बाजार दरों से सस्ता विकल्प

मौजूदा समय में कई बैंकों में होम लोन की ब्याज दरें 8 प्रतिशत या उससे ज्यादा चल रही हैं। ऐसे में 7.10 प्रतिशत की दर पर मिलने वाला HBA कर्मचारियों के लिए काफी किफायती माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दर स्थिर रहने से कर्मचारियों की मासिक किस्त यानी EMI पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा। इससे मध्यम आय वर्ग के कर्मचारियों को अपने घर का सपना पूरा करने में आसानी होगी।

वित्त मंत्रालय के निर्देश पर फैसला

सरकार ने यह फैसला वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की सिफारिशों के आधार पर लिया है। मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देश के बाद आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी की। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों को सस्ती दर पर आवास ऋण उपलब्ध कराने से उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और आवासीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

सरकार के फैसले से कर्मचारियों में बढ़ेगा भरोसा

सरकारी कर्मचारियों के लिए HBA लंबे समय से भरोसेमंद योजना मानी जाती रही है। कम ब्याज दर, आसान प्रक्रिया और स्थिर किस्तों के कारण कई कर्मचारी बैंक लोन की बजाय इस योजना को प्राथमिकता देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में यदि बाजार में ब्याज दरें और बढ़ती हैं, तब भी HBA कर्मचारियों के लिए राहत का बड़ा विकल्प बना रह सकता है।