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बिहार में सरकारी जमीन और बकाश्त भूमि पर बड़ा फैसला, सभी जान लें!

पटना: बिहार सरकार ने सरकारी जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री सह भूमि एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधान परिषद में स्पष्ट किया कि राज्यभर में अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।

विधान परिषद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। सभी जिलों को अतिक्रमण से जुड़े मामलों की ऑनलाइन निगरानी और कार्रवाई के लिए आवश्यक आईडी और पासवर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब तक राज्य में 4,000 से अधिक मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। हालांकि, फिलहाल इस विषय पर किसी नए विशेष कानून को लाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

बकाश्त भूमि पर भी बनेगी स्पष्ट नीति

सदन में बकाश्त भूमि से जुड़े प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि इस विषय पर निर्णय लेने के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने इसे संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि बिना पूरी समीक्षा के कोई भी कदम उठाना उचित नहीं होगा।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक बकाश्त भूमि को रैयती भूमि का दर्जा नहीं मिलता, तब तक उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए परिवर्तित नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में बकाश्त भूमि के संपरिवर्तन की अनुमति फिलहाल लागू नहीं है।

सरकार का संदेश साफ

सरकार का रुख स्पष्ट है कि सरकारी जमीन की सुरक्षा और भूमि प्रबंधन को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ बकाश्त भूमि के मामलों में संतुलित और कानूनी प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

इस फैसले से जहां एक ओर अवैध कब्जों पर अंकुश लगाने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर भूमि से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की दिशा में भी तेजी आने की संभावना है।

दिल की सेहत का रखें ध्यान, अपनाएं ये 5 आदतें!

हेल्थ डेस्क। दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसकी सेहत हमारे समग्र स्वास्थ्य का मुख्य आधार है। आज की तेज‑तर्रार जीवनशैली, अनियमित खानपान और तनाव की वजह से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर और कुछ आसान आदतों को नियमित करके आप अपने दिल को मजबूत और स्वस्थ रख सकते हैं।

1. संतुलित आहार

दिल को स्वस्थ रखने के लिए आहार सबसे बड़ा हथियार है। ताजगी भरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, नट्स और ओमेगा‑3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थ जैसे मछली और अलसी के बीज को अपनी डाइट में शामिल करें। तली‑भुनी चीजों, प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा नमक का सेवन कम करें।

2. नियमित व्यायाम

सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की हल्की से मध्यम एरोबिक एक्टिविटी, जैसे तेज़ चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या तैराकी, दिल की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और रक्त प्रवाह को बेहतर करती है। व्यायाम से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी नियंत्रित रहता है।

3. तनाव को करें नियंत्रित

तनाव और चिंता सीधे तौर पर दिल की सेहत पर असर डालते हैं। ध्यान, योग, प्राणायाम या रोज़ाना 10‑15 मिनट की मेडिटेशन से मन को शांत रखें। सकारात्मक सोच और संतुलित जीवनशैली तनाव को कम करने में मदद करती है।

4. धूम्रपान और शराब से दूरी

धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देता है। अगर आप दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इनसे पूरी तरह बचें।

5. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं

दिल की बीमारियों की शुरुआती पहचान के लिए समय‑समय पर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल की जांच कराना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित चेक‑अप दिल की सुरक्षा में मदद करता है।

डॉक्टरों की छुट्टी, अब AI करेगा सोनोग्राफी और MRI

नई दिल्ली: तकनीक और स्वास्थ्य सेवा का संगम अब नए मुकाम पर पहुंच गया है। Wipro ने हाल ही में अपने AI Summit में अपनी नई इनोवेशन AI Medical System पेश की, जिसने चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है। यह सिस्टम अब सोनोग्राफी, MRI और अन्य जटिल मेडिकल टेस्ट को पूरी तरह AI की मदद से संचालित करने में सक्षम है।

AI Medical System कैसे काम करेगा?

इस प्रणाली में AI खुद परीक्षण करेगा और बताएगा की बीमारी का खतरा कितना है। समस्या किस स्तर पर है। संभावित उपचार विकल्प क्या हो सकते हैं। इस तरह, AI Medical System न सिर्फ जटिल टेस्ट को सरल और तेज़ बनाएगा, बल्कि डॉक्टरों की अनुपस्थिति वाले इलाकों में भी मरीजों को समय पर जांच की सुविधा देगा।

ग्रामीण और सस्ती स्वास्थ्य सेवा में बदलाव

ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां डॉक्टरों की कमी है, इस तकनीक को गेम‑चेंजर माना जा रहा है। इसके अलावा, यह सामान्य मेडिकल जांचों की तुलना में काफी सस्ती होगी, जिससे हर वर्ग के लोग परीक्षण करा सकेंगे। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा लाभ होगा।

डॉक्टरों की जगह लेता AI भविष्य की दिशा

AI Medical System से स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल और स्मार्ट क्रांति आने की संभावना है। मरीजों को लंबी दूरी तय करने या डॉक्टर की तुरंत उपलब्धता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक मेडिकल टेस्ट को सुलभ, तेज और किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

लिवर को सुपरहेल्दी बनाएं! बस अपनाएं ये 4 चीजें

हेल्थ डेस्क। लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को शुद्ध करने, पाचन में मदद करने और शरीर से टॉक्सिन्स निकालने का काम करता है। अगर लिवर स्वस्थ न हो, तो इससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे फैटी लिवर, सिरोसिस और डायबिटीज़। लेकिन सही खानपान और जीवनशैली अपनाकर आप अपने लिवर को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं।

1. हरी सब्जियां और पत्तेदार साग

हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी और ब्रोकली लिवर के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इनमें एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो लिवर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करती है। रोज़ाना हरी सब्जियां खाने से लिवर की कार्यक्षमता बढ़ती है और वजन भी नियंत्रण में रहता है।

2. लहसुन और प्याज

लहसुन और प्याज में प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। यह फैटी लिवर और सूजन जैसी समस्याओं को कम करने में भी सहायक हैं। भोजन में नियमित रूप से लहसुन और प्याज शामिल करने से लिवर की सुरक्षा बढ़ती है।

3. ओमेगा-3 फैटी एसिड

ओमेगा-3 फैटी एसिड लिवर के लिए सुपरफूड हैं। मछली, अखरोट और अलसी के बीज में ओमेगा-3 की पर्याप्त मात्रा होती है। ये लिवर की सूजन को कम करते हैं और फैटी लिवर की समस्या को रोकने में मदद करते हैं।

4. हर्बल टी और हाइड्रेशन

ग्रीन टी और हर्बल टी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स लिवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं। साथ ही पर्याप्त पानी पीना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि यह शरीर और लिवर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है।

मोदी सरकार की नई योजना, नागरिकों को राहत, ऐसे लें लाभ

नई दिल्ली। देश में सड़क हादसों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्र की भारत सरकार ने नागरिकों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की है। इस पहल का नाम PM Rahat Scheme है। यह योजना खास तौर पर सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर और बिना आर्थिक बोझ के इलाज उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है।

क्या है PM Rahat Scheme?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति को पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी न झेलनी पड़े। इस योजना के तहत पात्र व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा देश की किसी भी सड़क पर हुए हादसे के लिए लागू होगी।

इलाज की अवधि कैसे तय होगी?

सामान्य स्थिति में 24 घंटे तक स्टेबिलाइजेशन (स्थिरीकरण) उपचार।

गंभीर स्थिति में 48 घंटे तक विस्तारित आपात उपचार।

आवश्यकता होने पर 7 दिनों तक कैशलेस इलाज की सुविधा।

112 नंबर से जुड़ी है योजना

यह योजना इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम यानी 112 (ERSS 112) से जुड़ी है। दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित, प्रत्यक्षदर्शी या कोई भी व्यक्ति 112 पर कॉल कर सकता है। कॉल के बाद नजदीकी अधिकृत अस्पताल की जानकारी दी जाएगी। एंबुलेंस तुरंत भेजी जाएगी। पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे घायल को गोल्डन ऑवर के दौरान तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सकेगी, जो जीवन बचाने में बेहद महत्वपूर्ण होती है।

खर्च कौन उठाएगा?

यदि दुर्घटना में शामिल वाहन बीमित है, तो इलाज का भुगतान बीमा कंपनी के फंड से किया जाएगा। यदि वाहन बीमित नहीं है या मामला हिट-एंड-रन का है, तो खर्च सरकार वहन करेगी। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी 10 दिनों के भीतर स्वीकृत दावों का भुगतान सुनिश्चित करेगी, ताकि अस्पतालों को समय पर धन मिल सके और इलाज में कोई बाधा न आए।

क्यों है यह योजना अहम?

भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं। कई बार आर्थिक तंगी के कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। PM Rahat Scheme ऐसे मामलों में त्वरित और सुनिश्चित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एम्स गोरखपुर में 'डाटा एंटी ऑपरेटर' समेत कई पदों पर भर्ती

गोरखपुर: All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) गोरखपुर ने तकनीकी और सहायक कर्मचारियों के विभिन्न पदों पर भर्ती की घोषणा की है। संस्थान में कुल 3 रिक्तियां हैं, जिनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, फार्मासिस्ट / नर्सिंग ऑफिसर और तकनीशियन के पद शामिल हैं।

योग्यता और पात्रता

शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक, कंप्यूटर एप्लिकेशन में डिप्लोमा, B. Pharma या B.Sc होनी चाहिए।

आयु सीमा: अधिकतम 32 वर्ष।

वेतनमान

चयनित उम्मीदवारों को मासिक 30,000 से 40,000 रुपये तक वेतन मिलेगा। इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए नोटिश देखें।

आवेदन प्रक्रिया

इच्छुक उम्मीदवार ऑफलाइन आवेदन के माध्यम से 16 फरवरी 2026 से 22 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से जुड़ी सभी जानकारी और फॉर्म AIIMS गोरखपुर की आधिकारिक वेबसाइट aiimsgorakhpur.edu.in पर उपलब्ध है।

महत्वपूर्ण तिथियां

आवेदन प्रारंभ: 16 फरवरी 2026

आवेदन समाप्ति: 22 फरवरी 2026

अंतिम तिथि (आधिकारिक): 23 फरवरी 2026

इस भर्ती के माध्यम से योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों को प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान में काम करने का अवसर मिलेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन से पहले योग्यता और पात्रता की पूरी जानकारी वेबसाइट पर जरूर देखें।

CM योगी ने दिया तोहफा, खातों में पहुंचे 1-1 लाख रुपये

न्यूज डेस्क। योगी आदित्यनाथ ने शहरी गरीबों के लिए बड़ी राहत की सौगात दी है। लखीमपुर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत हजारों परिवारों के सपनों को नई उड़ान मिली है। वन क्लिक प्रणाली के माध्यम से 5100 पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में एक-एक लाख रुपये की पहली किस्त सीधे हस्तांतरित की गई।

पक्के घर की उम्मीद हुई मजबूत

जिला नगरीय विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित इस योजना से उन परिवारों को सीधा लाभ मिला है, जो लंबे समय से अपने पक्के मकान का इंतजार कर रहे थे। खातों में धनराशि पहुंचते ही लाभार्थियों में उत्साह का माहौल है। कई परिवारों ने निर्माण की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

निर्माण के लिए स्पष्ट मानक

प्रशासन ने आवास निर्माण को लेकर कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे।

1 .प्रत्येक आवास का क्षेत्रफल न्यूनतम 30 वर्गमीटर और अधिकतम 45 वर्गमीटर निर्धारित किया गया है।

2 .मकान का निर्माण केवल भूतल पर ही मान्य होगा; ऊपरी मंजिल बनाने की अनुमति नहीं है।

3 .छत आरसीसी की ही डलवाना अनिवार्य है, जिससे भवन मजबूत और टिकाऊ बने।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो जारी की गई धनराशि की वसूली की जाएगी। निर्माण कार्य की समय-समय पर निगरानी भी की जाएगी।

पूरी तरह निशुल्क योजना

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पूरी तरह निशुल्क है। किसी भी लाभार्थी को किसी अधिकारी या बिचौलिए को पैसे देने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई योजना के नाम पर पैसे मांगता है, तो इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को देने की अपील की गई है।

शहर में बढ़ेगी निर्माण गतिविधि

एक साथ बड़ी संख्या में धनराशि जारी होने से शहरी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। प्रशासन का कहना है कि पात्र परिवारों को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस पहल से न सिर्फ हजारों परिवारों को सुरक्षित आशियाना मिलेगा, बल्कि शहरी विकास की रफ्तार भी तेज होगी।

रूस से आई खुशखबरी, भारत को फायदा, चीन सन्न!

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग एक नए चरण में प्रवेश करता दिख रहा है। दोनों देश मिलकर आधुनिक टैंक तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को और गहरा करने जा रहे हैं। खबर है कि रूस ने भारत को अत्याधुनिक T-90MS टैंक के उत्पादन में तकनीकी सहयोग देने पर सहमति जताई है। इससे भारतीय सेना की मारक क्षमता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन दोनों को मजबूती मिलेगी।

मौजूदा ढांचे में होगा उत्पादन

भारत में पहले से T-90 भीष्म टैंकों का निर्माण हो रहा है। अब प्रस्ताव है कि इसी उत्पादन सुविधा में T-90MS का निर्माण शुरू किया जाए। इससे नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। बचाई गई राशि को रक्षा अनुसंधान, आधुनिकीकरण और अन्य सामरिक परियोजनाओं में लगाया जा सकता है।

दरअसल, 2019 में भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत 464 T-90MS टैंकों के लाइसेंस उत्पादन के लिए लगभग 2.8 अरब डॉलर के समझौते को मंजूरी दी थी। अब इस परियोजना को वास्तविक उत्पादन चरण में ले जाने की तैयारी हो रही है।

सुरक्षा के लिहाज से और मजबूत

T-90MS में गोला-बारूद भंडारण को नए सिरे से डिजाइन किया गया है, जिसमें ब्लोआउट पैनल शामिल हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में विस्फोट का असर सीमित करने में मदद मिलती है और चालक दल की सुरक्षा बढ़ती है। यह टैंक भविष्य में भारतीय सेना के मौजूदा टी-90 भीष्म बेड़े की जगह ले सकता है। 

2020 में गलवान घाटी में चीन के साथ तनाव के बाद टी-90 भीष्म टैंकों को लद्दाख के अग्रिम इलाकों में तैनात किया गया था। ऐसे में T-90MS का आगमन भारत की उत्तरी सीमाओं पर सामरिक संतुलन को और मजबूत कर सकता है। भारत और रूस के बीच यह सहयोग केवल रक्षा सौदा नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी का भी प्रतीक है।

यूपी में ये सड़क होंगी दमदार और स्मार्ट, लोगों के लिए खुशखबरी!

न्यूज डेस्क। लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जल्द ही इस रूट पर सफर तेज और आरामदायक होने वाला है। अप्रैल 2026 में एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक शुरू होने के बाद मई में लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत और सुधार का काम शुरू होगा, जिसके लिए लगभग 107 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

योजना और निर्माण का असर

एनएचएआइ ने इस मार्ग को जाम-मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत मुख्य चौराहों पर नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। नवाबगंज तिराहा और दही चौकी पर फ्लाईओवर बनेंगे, जबकि त्रिभुवन खेड़ा पर अंडरपास तैयार होगा। इसके अलावा, फुटओवर ब्रिज और सर्विस लेन भी बनाई जाएगी। सभी काम को एक साल के अंदर पूरा करना लक्ष्य है।

पर्यावरण और सुरक्षा का ध्यान

निर्माण कार्य के दौरान वन विभाग की जमीन पर लगे पेड़ शिफ्ट किए जाएंगे और कुछ पेड़ काटने की जरूरत होगी। इसके बदले परियोजना प्राधिकरण पौधरोपण करेगा और निर्माण के बाद पांच साल तक इनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित करेगा।

आधुनिक सुविधाएं

सड़क पर बेहतर ड्रेनेज और लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। अंडरपास में रोशनी लगातार बनी रहेगी और बारिश का पानी तुरंत बाहर निकल सकेगा। इससे यात्रियों को दिन-रात निर्बाध और सुरक्षित सफर का अनुभव मिलेगा। इस सुधार के बाद लखनऊ-कानपुर हाईवे तेज़, सुविधाजनक और ट्रैफिक से मुक्त बन जाएगा, जिससे रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ा आराम मिलेगा।

मुंबई में बंपर भर्ती: 235 पदों के लिए आवेदन शुरू

न्यूज डेस्क। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने 2026 के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया की घोषणा की है। इस भर्ती के तहत सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, उप योजनाकार और अन्य तकनीकी एवं प्रशासनिक पदों के लिए कुल 235 रिक्तियां उपलब्ध हैं। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 18 फरवरी 2026 से 20 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों से विभिन्न शैक्षणिक योग्यताओं की मांग की गई है। पदों के अनुसार डिग्री, डिप्लोमा, एलएलबी या एसएससी के साथ आईटीआई धारक आवेदन कर सकते हैं। इससे तकनीकी और प्रशासनिक दोनों तरह के कार्यों में दक्ष पेशेवरों को अवसर मिलेगा।

वेतन और नौकरी का स्वरूप

एमएमआरडीए में चयनित उम्मीदवारों को ₹19,900 से ₹1,77,500 प्रति माह का वेतन मिलेगा। यह पूरी तरह पूर्णकालिक नौकरी है और मुंबई महानगर क्षेत्र में विकास परियोजनाओं में काम करने का सुनहरा अवसर देती है।

आवेदन प्रक्रिया

एमएमआरडीए ने आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा है। उम्मीदवार एमएमआरडीए की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 मार्च 2026 है, इसलिए इच्छुक उम्मीदवारों को जल्दी आवेदन करने की सलाह दी जाती है।

आवेदन के लिए कदम:

वेबसाइट पर जाएँ और संबंधित भर्ती पेज खोलें।

आवेदन फॉर्म भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।

सबमिट करने से पहले विवरण ध्यानपूर्वक जांच लें।

फाइनल सबमिशन के बाद आवेदन की प्रति सुरक्षित कर लें।

बिहार सरकार की नई पहल: गरीब परिवारों के लिए खुशखबरी, उठायें लाभ

पटना। बिहार सरकार ने गरीब परिवारों के लिए बिजली का खर्च कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अब बीपीएल परिवार अपनी छत पर मुफ्त सौर पैनल लगवा सकेंगे। इसका मतलब यह है कि दिन के समय घर के पंखे, बल्ब और अन्य उपकरण सीधे सूरज की ऊर्जा से चल सकेंगे और बिजली बिल का झंझट लगभग खत्म हो जाएगा।

सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना ही नहीं, बल्कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देना भी है। इस योजना से न केवल बिजली का खर्च घटेगा, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसी सरकारी कार्यालय का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। मोबाइल एप 'सुविधा' के जरिए इच्छुक परिवार घर बैठे आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन करने के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:

1 .गूगल प्ले स्टोर से “सुविधा एप” डाउनलोड करें।

2 .एप में “सौर पैनल स्थापना हेतु सहमति (कुटीर ज्योति)” विकल्प चुनें।

3 .इसके बाद अब उपभोक्ता संख्या दर्ज करके ओटीपी से सत्यापन करें।

4 .बीपीएल कार्ड या अन्य पात्रता प्रमाण पत्र और पहचान पत्र अपलोड करें।

5 .इसके बाद अपना छत का फोटो या क्षेत्रफल विवरण भरकर आवेदन जमा करें।

वहीं, जो परिवार स्मार्टफोन का उपयोग नहीं कर सकते, वे नजदीकी प्रमंडल कार्यालय या वसुधा केंद्र पर जाकर मुफ्त सहायता ले सकते हैं। साथ ही साथ अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवा सकते हैं। इसको लेकर दिशा निर्देश जारी किया गया हैं।

सौर पैनल लगाने के बाद इन परिवारों की ग्रिड बिजली पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी और मासिक खर्च न्यूनतम रहेगा। यह पहल बिहार सरकार की ओर से गरीब परिवारों के लिए सिर्फ वित्तीय राहत नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा और बिजली बिल की चिंता से छुटकारा मिलेगा।

भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे H125 हेलीकॉप्टर, जानकर होंगे खुश

नई दिल्ली। भारत और फ्रांस रक्षा क्षेत्र में सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में अब एच-125 हल्का उपयोगी हेलीकॉप्टर भारत में ही तैयार किया जाएगा। यह कदम न केवल सैन्य क्षमता को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश को विमानन निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान भी दिलाएगा।

कर्नाटक के वेमागल में इसका निर्माण केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना में फ्रांस की प्रमुख विमान निर्माण कंपनी एयरबस हेलीकॉप्टर्स और भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स मिलकर काम करेंगी। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस पहल की शुरुआत कर इसे रणनीतिक सहयोग का नया आयाम दिया है। बताया जा रहा है कि इस योजना में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

सबसे ऊंची चोटी पर उतरने वाला हेलीकॉप्टर

एच-125 की सबसे बड़ी खासियत इसकी ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है। यह वही हेलीकॉप्टर है जिसने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर उतरकर और वहां से दोबारा उड़ान भरकर इतिहास रचा। सामान्य तौर पर अधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने से हेलीकॉप्टरों की क्षमता प्रभावित होती है, लेकिन एच-125 इस चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

हर मौसम में भरोसेमंद

इस हेलीकॉप्टर को इस तरह तैयार किया गया है कि अत्यधिक गर्मी, कड़ाके की ठंड और कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में भी यह प्रभावी ढंग से काम कर सके। सैन्य जरूरतों के अनुरूप इसके विशेष संस्करण तैयार किए जाएंगे। कम ध्वनि और कम ऊष्मा संकेत जैसी विशेषताएं इसे रणनीतिक अभियानों में बढ़त दिलाती हैं। पायलट के अलावा इसमें पांच से छह जवान बैठ सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इसे हथियारों से भी सुसज्जित किया जा सकता है, जिससे यह परिवहन, निगरानी और सीमित आक्रामक अभियानों में उपयोगी बनता है।

कई देशों की सेनाओं में तैनात

फ्रांस, अमेरिका और ब्राजील सहित अनेक देशों में यह हेलीकॉप्टर पहले से उपयोग में है। वहां इसका प्रयोग सेना के साथ-साथ पुलिस, राहत एवं बचाव कार्यों और चिकित्सकीय आपात स्थितियों में भी किया जाता है। इसकी देखरेख पर अपेक्षाकृत कम खर्च आता है, जिससे लंबे अभियानों में यह किफायती साबित होता है।

भारतीय सेना को मिलेगा ताकत

भारतीय सशस्त्र बलों के पास पहले से ही अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर मौजूद हैं, लेकिन एच-125 के शामिल होने से हल्के और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन की क्षमता और मजबूत होगी। विशेष रूप से पर्वतीय सीमाओं और दूरस्थ क्षेत्रों में त्वरित तैनाती के लिए यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

8वां वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 18 बड़े सवाल!

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर लंबे समय से इंतज़ार जारी है, लेकिन अब प्रक्रिया धीरे-धीरे ठोस रूप लेती दिखाई दे रही है। सरकार ने MyGov प्लेटफॉर्म पर एक समर्पित वेबसाइट शुरू की है, जहां 18 महत्वपूर्ण सवालों के जरिए मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों से सुझाव मांगे गए हैं। 

यही सवाल आगे चलकर उस ढांचे की बुनियाद बनेंगे, जो तय करेगा कि आने वाले वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, भत्ते और सेवा शर्तें किस दिशा में जाएंगी। यदि आप इसपर कुछ सुझाव देना चाहिए हैं तो ऑनलाइन के द्वारा MyGov प्लेटफॉर्म पर सुझाव दे सकते हैं।

1. क्या 7वें वेतन आयोग का ढांचा पर्याप्त है?

सबसे पहला सवाल मौजूदा पे मैट्रिक्स की उपयोगिता पर है। क्या प्रमोशन के बाद मिलने वाला वेतन बढ़ोतरी संतोषजनक है? क्या शुरुआती वेतन और करियर ग्रोथ के बीच का अंतर बहुत ज्यादा है? इन बिंदुओं पर फिर से समीक्षा हो सकती है।

2. फिटमेंट फैक्टर पर पुनर्विचार

कर्मचारियों की नजर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी रहती है। क्या वर्तमान दर महंगाई के दबाव को संतुलित कर पा रही है? क्या न्यूनतम वेतन सम्मानजनक जीवन स्तर के अनुरूप है? यह अहम बहस का विषय है।

3. न्यूनतम वेतन तय करने का फार्मूला

क्या वेतन तय करते समय उपभोक्ता खर्च, परिवार का आकार और शहर-गांव के खर्च में अंतर को संतुलित तरीके से शामिल किया जाना चाहिए? नया आयोग इन मानकों को अपडेट कर सकता है।

4. महंगाई भत्ता (DA) की भूमिका

क्या DA को मूल वेतन में मिलाया जाए? या इसे अलग रखकर महंगाई के अनुसार नियमित समायोजन किया जाए? रियल-टाइम महंगाई के प्रभाव को बेहतर तरीके से कैसे दर्शाया जाए, यह भी विचाराधीन है।

5. HRA और अन्य भत्ते

बढ़ती हाउसिंग लागत, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च को देखते हुए क्या मौजूदा भत्ते पर्याप्त हैं? खासकर महानगरों और छोटे शहरों के बीच खर्च का अंतर एक बड़ा मुद्दा है।

6. परफॉर्मेंस आधारित वेतन

क्या वरिष्ठता के बजाय कार्य प्रदर्शन के आधार पर वेतन वृद्धि होनी चाहिए? KPI आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू की जा सकती है या नहीं, इस पर भी राय मांगी गई है।

7. पेंशन व्यवस्था

ओल्ड पेंशन स्कीम और NPS के बीच बहस जारी है। क्या न्यूनतम पेंशन की गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए? सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा बड़ा मुद्दा है।

8. प्रमोशन और MACP

समयबद्ध प्रमोशन और लंबे समय तक एक ही पद पर रुकने की समस्या (स्टैगनेशन) को कैसे दूर किया जाए, यह भी प्रमुख सवालों में शामिल है।

9. कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारी

“समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत लागू हो या नहीं? और क्या उन्हें सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिलना चाहिए?

10. महिला कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान

चाइल्ड केयर, फ्लेक्सिबल वर्किंग और कार्य-जीवन संतुलन से जुड़े सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं।

11. स्वास्थ्य सुविधाएं

CGHS की क्षमता, कैशलेस इलाज और व्यापक मेडिकल कवर की जरूरत पर भी चर्चा हो रही है।

12. ट्रांसफर नीति

क्या ट्रांसफर पॉलिसी में पारिवारिक जीवन और पेशेवर जरूरतों के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है?

13. रिटायरमेंट की उम्र

बढ़ती जीवन प्रत्याशा और कार्य क्षमता को देखते हुए क्या सेवानिवृत्ति आयु में बदलाव पर विचार होना चाहिए?

14. स्किल अपग्रेडेशन

डिजिटल युग में AI और नई तकनीकों के अनुरूप कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत को भी रेखांकित किया गया है।

15. टैक्स और टेक-होम सैलरी

असल में कर्मचारियों के हाथ में कितनी सैलरी आती है? टैक्स स्लैब और कटौतियों का वास्तविक असर क्या है?

16. क्षेत्रीय असमानता

मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में खर्च के अंतर को कैसे संतुलित किया जाए?

17. शिकायत निवारण प्रणाली

क्या एक तेज, पारदर्शी और डिजिटल ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम विकसित किया जा सकता है?

18. आपकी प्रमुख अपेक्षा क्या है?

आखिरी सवाल खुला है, कर्मचारी 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद रखते हैं? यही प्रतिक्रियाएं नए ढांचे को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाएंगी।

बिहार में 'बुजुर्गों' को बड़ी खुशखबरी, 1 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू

पटना। बिहार में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है। 1 अप्रैल से राज्य में ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी है, जिसके तहत 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को जमीन की रजिस्ट्री के लिए निबंधन कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

डिजिटल आवेदन से मिलेगी सुविधा

नई व्यवस्था के तहत इच्छुक बुजुर्गों को ई-निबंधन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए 400 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। जैसे ही आवेदन में उम्र 80 वर्ष या उससे अधिक दर्ज की जाएगी, पोर्टल पर घर से रजिस्ट्री का विकल्प उपलब्ध हो जाएगा।

आवेदक अपनी सुविधा के अनुसार तारीख और समय चुन सकेंगे। तय समय पर निबंधन विभाग की टीम मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट, लैपटॉप और बायोमैट्रिक सत्यापन उपकरण के साथ संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचेगी और वहीं डिजिटल तरीके से रजिस्ट्री पूरी की जाएगी।

तकनीकी तैयारी अंतिम चरण में

इस सुविधा को शुरू करने के लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जा रहे हैं। फरवरी में तकनीकी अपडेट और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू करने की योजना है। सभी निबंधन कार्यालयों को आवश्यक डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

पहले क्यों होती थी परेशानी?

अब तक यदि कोई बुजुर्ग अस्वस्थ होता था, तो उसे मेडिकल प्रमाणपत्र के साथ आवेदन देना पड़ता था। इसके बाद अधिकारी की अनुमति से घर जाकर मैनुअल प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसमें समय अधिक लगता था और कई बार पहचान संबंधी जोखिम भी बने रहते थे। नई व्यवस्था इन जटिलताओं को खत्म करेगी और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व सुरक्षित बनाएगी।

तुरंत मिलेगा डिजिटल दस्तावेज

रजिस्ट्री पूरी होते ही खरीदार और विक्रेता दोनों के मोबाइल पर डिजिटल लिंक भेजा जाएगा। वहां से दस्तावेज आसानी से डाउनलोड किए जा सकेंगे। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और समय की बचत होगी।

क्या होगा फायदा?

बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति मिलेगी।

पारदर्शी और सुरक्षित जमीन लेन-देन होगा। 

फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।

डिजिटल और तेज प्रक्रिया। 

बिहारवासियों के लिए खुशखबरी: पैतृक जमीन पर घर बनाने वालों के लिए बिजली कनेक्शन हुआ आसान

पटना। बिहार में उन परिवारों के लिए राहत की खबर है, जो अपने पैतृक जमीन पर घर बना रहे हैं। अब दादा या पिता की जमीन पर नया घर बनाने वालों को बिजली कनेक्शन लेने के लिए पुराने कागजी झंझट से गुजरने की जरूरत नहीं होगी।

वंशानुगत हक के आधार पर कनेक्शन

बिजली विभाग ने निर्देश दिए हैं कि पैतृक जमीन पर नया कनेक्शन केवल वंशानुगत हक यानी परिवार की क्रमिक भूमि मालिकाना हक के आधार पर जारी किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब LPC या अन्य नामांतरण दस्तावेज दिखाने की बाध्यता समाप्त हो गई है। यह बदलाव उन परिवारों के लिए वरदान साबित होगा, जो पहले बिजली कनेक्शन न मिल पाने के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।

नए नियम क्या बदलेंगे?

1 .अगर कोई अपने पिता या दादा की जमीन पर घर बना रहा है, तो सीधे वंशानुगत हक के आधार पर कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकता है।

2 .पहले जैसे इंजीनियर आवेदनकर्ता के नाम की रसीद मांगते थे, अब वह आवश्यकता समाप्त हो गई है।

3 .यदि एक ही परिसर में पहले से बिजली कनेक्शन मौजूद है और दूसरा कनेक्शन चाहिए, तो पारिवारिक बंटवारा पत्र या पंजीकृत किरायानामा दिखाना होगा।

4 .अलग कनेक्शन तभी मिलेगा जब अलग रास्ता और चूल्हा हो।

मुफ्त बिजली योजना के बाद नियम सख्त

राज्य में लागू 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना के कारण कई लोग एक ही परिसर में कई कनेक्शन लेने लगे थे। इस वजह से नियम सख्त किए गए हैं। नए निर्देशों से जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलेगी और बिजली का दुरुपयोग कम होगा।

ऑनलाइन आवेदन और समय सीमा

बिजली कनेक्शन के लिए अब आवेदन ऑनलाइन करना होगा। आवेदन में फोटो, आधार और जमीन से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे। शिकायत होने पर संबंधित डिवीजन के विद्युत अभियंता से संपर्क किया जा सकता है। शहरी इलाकों में सात दिन और ग्रामीण इलाकों में पंद्रह दिन के भीतर कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। यह व्यवस्था पूरे बिहार में लागू है और इसकी निगरानी राज्य की बिजली आपूर्ति एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

Holi 2026: इस बार होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया

धर्म डेस्क। होली इस साल 2026 में भी धूमधाम से मनाया जाएगा। फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होली का पर्व आता है, जिसमें पहले होलिका दहन होता है और अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। इस वर्ष ग्रहों की स्थिति और भद्राकाल के कारण होलिका दहन और रंगों वाली होली की तारीखों को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन है।

होलिका दहन 2026 की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च 2026 की शाम 05:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च 2026 की शाम 05:07 बजे समाप्त होगी। इसका मतलब है कि होलिका दहन 03 मार्च 2026 को किया जाएगा।

भद्राकाल और होलिका दहन पर असर

हिंदू धर्म में होलिका दहन के समय भद्राकाल को ध्यान में रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस साल 3 मार्च को भद्राकाल सुबह 01:25 बजे से 04:30 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में किसी भी शुभ कार्य को करना वर्जित होता है। इसलिए होलिका दहन भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही करना शुभ माना जाएगा।

भद्रा पूंछ: 03 मार्च 2026, सुबह 01:25 – 02:35

भद्रा मुख: 03 मार्च 2026, सुबह 02:35 – 04:30

इस दिन चंद्र ग्रहण का भी है साया

इस बार यानी 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के दिन साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ग्रहण 3 मार्च 2026 को भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 2:16 PM से शुरू होकर शाम 7:52 PM तक चलेगा। भारत के विभिन्न हिस्सों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा।

खुशखबरी की सौगात! बिहार में आई 24 पदों पर भर्ती, सैलरी भी शानदार

पटना। बिहार के युवाओं के लिए रोजगार की बड़ी खबर है। Telecommunications Consultants India Limited (TCIL) ने 24 विभिन्न पदों के लिए भर्ती का ऐलान किया है। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए है जिनके पास B.E/B.Tech, MCA, BCA, B.Com या विज्ञान स्नातक की डिग्री है।

भर्ती के पद और योग्यता

TCIL ने तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों में विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इनमें प्रमुख पद हैं:

Operation Lead Engineer

Specialist Engineer

Portal Administrator

Network & Monitoring Engineer

Helpdesk Engineer

Video Conferencing Coordinator

Store In-Charge

योग्यता:

इंजीनियर पदों के लिए B.E/B.Tech/MCA या समकक्ष डिग्री। Helpdesk पदों के लिए विज्ञान स्नातक या BCA। Store In-Charge पद के लिए B.Sc/B.Com/BCA।

सैलरी और आयु सीमा

उम्मीदवारों की आयु सीमा पद के अनुसार 43 से 52 वर्ष तक है। वेतनमान पद के अनुसार 22,546 रुपये से लेकर 90,185 रुपये प्रति माह तक।

आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां

इस भर्ती के लिए आवेदन Walk-in इंटरव्यू के माध्यम से होंगे। उम्मीदवारों को 21 और 22 फरवरी 2026 को इंटरव्यू के लिए उपस्थित होना होगा। नोटिफिकेशन 17 फरवरी 2026 को जारी किया गया था। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी योग्यता और अनुभव के अनुसार तैयार होकर Walk-in इंटरव्यू में भाग लें। अधिक जानकारी और विस्तृत विवरण के लिए उम्मीदवार TCIL की आधिकारिक वेबसाइट tcil.net.in पर जा सकते हैं।

साल में दो बार स्कॉलरशिप, यूपी के छात्रों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। यूपी सरकार ने छात्रों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। अब पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति के तहत पात्र छात्रों को साल में दो बार स्कॉलरशिप मिलने की संभावना है। इसके अलावा, सरकार सेमेस्टर वाइज भुगतान और डिजिटल सुविधा प्रदान करने की तैयारी कर रही है, ताकि छात्र आसानी से अपनी स्कॉलरशिप प्राप्त कर सकें।

तकनीक से होगी सुविधा आसान

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने विधान परिषद में बताया कि छात्रों की सुविधा के लिए एक विशेष मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए छात्र अपनी छात्रवृत्ति की स्थिति और भुगतान सीधे देख सकेंगे। मंत्री ने कहा कि छात्रों को सेमेस्टर के आधार पर भुगतान देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसका मतलब है कि छात्र पाठ्यक्रम के दौरान लगातार छात्रवृत्ति का लाभ ले सकेंगे। इस पहल से शिक्षा में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को समय पर वित्तीय मदद मिलेगी।

पिछले सालों की समीक्षा और आगे की योजना

निर्दल समूह के सदस्य राजबहादुर सिंह चंदेल और सपा के आशुतोष सिन्हा ने छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर प्रश्न किए। उनके सवालों के जवाब में मंत्री ने बताया कि समाज कल्याण, जनजाति विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने पिछले वर्षों में समय पर छात्रवृत्ति वितरित की है। मंत्री ने यह भी साफ किया कि अब सभी पात्र छात्रों को निश्चित रूप से छात्रवृत्ति मिलना सुनिश्चित किया जाएगा। एक बार छात्रवृत्ति चालू हो जाने के बाद यह पूरी पढ़ाई के दौरान जारी रहेगी।

छात्रों को क्या होगा लाभ

सेमेस्टर वाइज भुगतान से छात्र आसानी से लाभ प्राप्त करेंगे।

डिजिटल एप से छात्रों को उनकी स्कॉलरशिप की स्थिति सीधे पता चलेगी।

यह कदम शिक्षा में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

यूपी सरकार की यह पहल छात्रों के लिए वित्तीय मदद को आसान और नियमित बनाने के साथ-साथ शिक्षा में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देगी।

एक महिला कितनी बार कर सकती है IVF? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं

हेल्थ डेस्क। आईवीएफ (IVF) आज के समय में बच्चों की चाह रखने वाले दंपतियों के लिए एक प्रमुख विकल्प बन चुका है। लेकिन अक्सर सवाल उठता है की एक महिला कितनी बार IVF कर सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी या कानूनी कोई सख्त सीमा नहीं है, लेकिन आम तौर पर 3 से 6 चक्र को सुरक्षित और व्यावहारिक माना जाता है। सफलता दर कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे महिला की उम्र, स्वास्थ्य, अंडों की गुणवत्ता और पहले के IVF प्रयासों का परिणाम।

विशेषज्ञों की मुख्य बातें

1. सफलता की संभावना:

अधिकांश महिलाओं को पहले 2-3 प्रयासों में सफलता मिल जाती है। यदि 3 प्रयासों के बाद भी गर्भधारण नहीं होता, तो इसे “बार-बार IVF विफलता” माना जाता है और इसके बाद आगे के विकल्पों पर विचार किया जाता है।

2. उम्र का असर:

40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में सफल IVF के लिए डोनर अंडों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा सकती है।

3. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य:

अत्यधिक प्रयास से शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और भावनात्मक तनाव का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए प्रत्येक प्रयास के पहले डॉक्टर से परामर्श जरूरी है।

4. चक्रों के बीच ब्रेक:

एक IVF चक्र के बाद कम से कम 1-2 महीने का ब्रेक लेना शरीर को रिकवर करने के लिए फायदेमंद होता है। यह समय महिला के हार्मोनल और शारीरिक संतुलन को बहाल करता है।

व्यक्तिगत सलाह जरूरी

हर महिला का शरीर और परिस्थितियाँ अलग होती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि IVF कराने से पहले अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत मार्गदर्शन लिया जाए। सही योजना, समय और विशेषज्ञ की देखरेख से सफलता की संभावना बढ़ाई जा सकती है

आज सोने-चांदी ने दिखाया रौद्र रूप! जानें क्या है नया भाव

नई दिल्ली। दो दिनों की सुस्ती के बाद घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी ने बुधवार सुबह दमदार वापसी की। Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर शुरुआती कारोबार में चांदी की कीमतों में 5,000 रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जबकि सोना भी 1,500 रुपये से ज्यादा महंगा हो गया। निवेशकों की सक्रियता और वैश्विक संकेतों के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव तेज बना हुआ है।

चांदी में जोरदार उछाल

एमसीएक्स पर 5 मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने पिछले सत्र में करीब 2,28,783 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद होने के बाद आज मजबूती के साथ शुरुआत की। कारोबार की शुरुआत 2,32,929 रुपये पर हुई और कुछ ही समय में यह 5,000 रुपये से अधिक चढ़कर लगभग 2,33,870 रुपये के स्तर तक पहुंच गई। सुबह करीब 9:27 बजे यह करीब 4,962 रुपये की बढ़त के साथ 2,33,745 रुपये पर ट्रेड करती दिखी। यह तेजी संकेत देती है कि गिरावट के दौरान खरीदारी करने वाले निवेशकों ने बाजार में दोबारा एंट्री ली है।

सोने में भी मजबूती

सोना भी पीछे नहीं रहा। 2 अप्रैल डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,51,418 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। आज इसकी शुरुआत 1,53,303 रुपये पर हुई। शुरुआती कारोबार में यह करीब 1,888 रुपये की तेजी के साथ ऊपरी स्तर तक पहुंचा। सुबह 9:30 बजे तक सोना लगभग 1,533 रुपये यानी करीब 1 फीसदी की बढ़त के साथ 1,52,951 रुपये पर कारोबार कर रहा था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में फिर से सोने का रुख किया है, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

घरेलू तेजी के उलट, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं में हल्की कमजोरी देखी गई। वैश्विक स्तर पर सोना लगभग 0.2 फीसदी की गिरावट के साथ 4,867 डॉलर प्रति औंस पर रहा, जबकि चांदी भी करीब 0.2 फीसदी फिसलकर 73.30 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड करती दिखी।

आगे क्या रहेगी दिशा?

आने वाले दिनों में सोने-चांदी की चाल कई कारकों पर निर्भर करेगी, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की नीतियां इनमें प्रमुख हैं। फिलहाल, बाजार में उतार-चढ़ाव तेज है और निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। गिरावट के बाद आई यह तेजी बताती है कि कीमती धातुओं में अभी भी निवेशकों की दिलचस्पी बरकरार है।

भारत की ताकत का रौद्र रूप! कावेरी इंजन का टेस्ट रन

नई दिल्ली। भारत ने अपनी एयरोस्पेस तकनीक में एक बार फिर बड़ा कदम रखा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु स्थित GTRE का दौरा कर कावेरी इंजन के नए आफ्टरबर्नर सेक्शन का फुल टेस्ट रन देखा। यह प्रदर्शन दिखाता है कि भारत अब विदेशी इंजनों पर निर्भर नहीं रहेगा और अपनी लड़ाकू विमानों की ताकत बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम हो रहा है।

ब्रह्मोस की ताकत के साथ नया आफ्टरबर्नर

नए आफ्टरबर्नर को BrahMos Aerospace के सहयोग से तैयार किया गया है। यह तकनीक इंजन में अतिरिक्त ईंधन जलाकर उसे ज़बरदस्त शक्ति देती है। इसका मतलब है कि भारत के फाइटर जेट्स अब सुपरसोनिक रफ्तार और तेज युद्धक मोड़ आसानी से ले सकेंगे।

कावेरी इंजन की ताकत

कावेरी का ड्राई वर्जन ग्राउंड टेस्ट में 49 किलो न्यूटन (kN) थ्रस्ट दे चुका है। पहले वाला आफ्टरबर्नर लगभग 73 kN तक का थ्रस्ट देता था, जबकि नए वर्जन का लक्ष्य 81-83 kN है। इसे भविष्य में मानव रहित और मानवयुक्त लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल करने की योजना है।

आत्मनिर्भर भारत

रक्षा मंत्री ने दौरे के दौरान कहा कि नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत सामग्री का इस्तेमाल प्रोजेक्ट को और तेज़ करेगा। कावेरी इंजन में हो रही प्रगति भारत की डिफेंस ताकत को नई ऊँचाई देगी और देश को वायु सेना में आत्मनिर्भर बनाएगी।

भविष्य की उड़ान

यह कदम दिखाता है कि भारत अब केवल रंगों और तकनीक में ही नहीं, बल्कि सुपरसोनिक लड़ाकू शक्ति में भी अपनी जगह बना रहा है। कावेरी इंजन के साथ भारतीय जेट्स जल्द ही नए मुकाम को छूने वाले हैं।

Holi 2026: जानें कब मनाई जाएगी होली – 3 या 4 मार्च?

धर्म डेस्क। होली, जिसे रंगों का त्योहार कहा जाता है, भारत में हर उम्र के लोगों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह सिर्फ रंगों और मस्ती का पर्व नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में इसका विशेष धार्मिक महत्व भी है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन से जुड़ी परंपराओं में सबसे प्रमुख है होलीका दहन, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसके अगले दिन लोग आपस में रंग और गुलाल लगाकर होली खेलते हैं।

Holi 2026 की तिथियाँ

होलीका दहन: 03 मार्च 2026

रंगों वाली होली: 04 मार्च 2026

होली का यह त्योहार न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक मेल-जोल और भाईचारे को बढ़ाने का भी अवसर है। लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के साथ रंगों और मिठाइयों का आनंद लेते हैं।

होली मनाने की परंपराएं

होली के दिन लोग सामूहिक रूप से होली खेलते हैं, जिसमें रंग, गुलाल और पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

होली से पहले होलीका दहन किया जाता है, जिसमें आग के चारों ओर इकट्ठा होकर बुराई का प्रतीक होलिका जलाई जाती है। इस दिन विशेष पकवान जैसे गुजिया, ठंडाई और रंग-बिरंगे व्यंजन तैयार किए जाते हैं।

इस तरह, Holi 2026 का त्योहार 3 और 4 मार्च को पूरे उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह समय न सिर्फ रंगों में डूबने का है, बल्कि परंपरा और संस्कृति के महत्व को समझने का भी अवसर है।

मॉर्निंग या शाम, इन 5 अंगों की सूजन है गंभीर संकेत

हेल्थ डेस्क। सूजन, जिसे मेडिकल टर्म में 'एडिमा' कहा जाता है, अक्सर शरीर के किसी हिस्से में असामान्य तरल पदार्थ जमा होने की वजह से होती है। कई बार यह सिर्फ थकान या मौसम परिवर्तन का संकेत हो सकता है, लेकिन अगर यह लगातार बनी रहे, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या की चेतावनी भी हो सकती है। मॉर्निंग या शाम को शरीर के कुछ अंगों में सूजन विशेष रूप से खतरनाक संकेत दे सकते हैं।

1. पैरों और टखनों की सूजन

अगर दिनभर या शाम को पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे रही है, तो यह हार्ट, किडनी या लीवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। दिल की पंपिंग क्षमता कम होने पर खून और तरल पदार्थ पैरों की नसों में जमा हो जाते हैं।

2. हाथों और उंगलियों की सूजन

हाथों या उंगलियों में सुबह-सुबह सूजन और जकड़न महसूस होना ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे रुमेटॉयड आर्थराइटिस का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, थायरॉइड या किडनी की समस्या भी इसके पीछे हो सकती है।

3. चेहरे की सूजन

मुख और आंखों के आसपास की सूजन अक्सर किडनी की कार्यक्षमता कम होने का संकेत देती है। खासकर सुबह-सुबह पफी आंखें और फुला हुआ चेहरा नजर आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

4. पेट की सूजन

अगर पेट में अचानक या लगातार सूजन महसूस हो रही है, तो यह लीवर, पित्ताशय या हार्ट की समस्या का संकेत हो सकता है। पेट में जलन या दर्द के साथ सूजन हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

5.एड़ियों के पीछे की सूजन

यह सूजन खासतौर पर शाम को बढ़ती है और यह वैनस इंजरी या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं की चेतावनी दे सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने या भारी वजन उठाने के बाद सूजन सामान्य है, लेकिन लगातार बनी रहे तो जांच जरूरी है।

यूपी सरकार की नई पहल! महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण और तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार जल्द ही विमेन एआई मिशन (Women AI Mission) लॉन्च करने जा रही है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स में प्रशिक्षित करना है। जिससे प्रदेश में महिलाओं की रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य

सरकार ने योजना बनाई है कि 2047 तक एक करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके तहत प्रशिक्षित महिलाएं स्थानीय स्तर पर विभिन्न तकनीकी और डेटा-संबंधी कंपनियों में रोजगार पा सकेंगी। पहले ही लखनऊ में एआई सिटी बनाने की घोषणा की जा चुकी है, ताकि प्रदेश को डिजिटल और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

 प्रशिक्षण की व्यवस्था

महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, मौजूदा एआई लैब नेटवर्क और पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें गूगल, मेटा और ओपन एआई जैसी कंपनियों के सहयोग लिए जाएंगे। इसके लिएराज्य के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग जिम्मेदारी संभाली है। इसके अलावा, मंडल और जिला स्तर पर एआई सेंटर्स स्थापित किए जाएंगे, जहां महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।

स्त्री उद्योग केंद्र और निवेश योजना

सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष स्त्री उद्योग केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा है। ये केंद्र महिला उद्यमियों और तकनीकी पेशेवरों के लिए सुरक्षित और संरचित वातावरण प्रदान करेंगे। योजना के तहत आईटी और एआई सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कुल 50,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।

प्रदेश में महिलाओं के लिए बढ़ेंगे अवसर

यूपी सरकार का यह मिशन महिलाओं को विभिन्न उद्योगों में सक्रिय योगदान देने के अवसर देगा। इससे प्रदेश के आईटी और एआई क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, नई कंपनियों और स्टार्टअप्स के उद्भव को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील इंपैक्ट: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते का असर भारतीय कृषि निर्यात पर साफ दिखने लगा है। खासकर बासमती चावल के निर्यात में तेजी आई है, जिससे किसानों और निर्यातकों को उम्मीद की किरण मिली है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के एक सदस्य ने अमेरिका के खरीदार के साथ 5,000 मीट्रिक टन बासमती चावल की आपूर्ति के लिए समझौता किया है। यह डील हालिया ट्रेड डील के तुरंत बाद सामने आई और इसे निर्यातकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

निर्यातकों के लिए नया अवसर

IREF का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक संकेत है। अमेरिका में बासमती चावल की मांग लगातार बढ़ रही है और यह सौदा नए व्यापार के रास्ते खोल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे समझौते भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत स्थिति दिलाते हैं।

टैरिफ में कटौती से बढ़ी संभावनाएं

भारत और अमेरिका के बीच हालिया समझौते में अमेरिका ने भारतीय कृषि उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। इससे भारतीय एग्रीकल्चर उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बनेंगे और निर्यातकों के लिए व्यापारिक माहौल सुधरेगा।

निर्यात के आंकड़े संकेत दे रहे हैं

एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 तक अमेरिका को भारत का कुल चावल निर्यात 3,26,400 मीट्रिक टन रहा, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 2,88,363 मीट्रिक टन था। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल की मांग लगातार बढ़ रही है।

किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए फायदे

ट्रेड डील और बासमती निर्यात में बढ़ोतरी से किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। अधिक मांग और बेहतर कीमतों से उनकी आय बढ़ेगी। इसके अलावा, निर्यातकों को नए बाजार और अवसर मिलेंगे, जिससे भारतीय कृषि निर्यात को वैश्विक मंच पर मजबूती मिलेगी।

भारत-अमेरिका की बड़ी तैयारी? चीन की बढ़ी टेंशन, जापान खुश!

नई दिल्ली: हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर भारत और अमेरिका एक बार फिर से रणनीतिक तालमेल बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। 2026 की शुरुआत में अब अमेरिका ने क्वॉड को फिर से सशक्त बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

पश्चिमी कमांड दौरे का महत्व

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि भारत के पश्चिमी कमांड में पहुंचे और वहां भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान मुख्य फोकस क्षेत्र की सुरक्षा, सीमा विवाद और संयुक्त संचालन पर रहा। भारत और अमेरिका ने पिछले साल के अनुभवों और ऑपरेशन में सुधार के उपायों पर भी चर्चा की।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे का मकसद केवल औपचारिकता नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है। अमेरिका चाहता है कि भारत समुद्र, भूमि, हवा और साइबर सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में उसका भरोसेमंद साझीदार बने।

रिश्तों में बढ़ रही नई गर्माहट

पिछले साल अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा किया था। इससे अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग प्रभावित हुआ। हालांकि 2026 में टैरिफ में कटौती और लंबित व्यापार समझौतों पर सहमति से दोनों देशों के बीच रिश्तों में फिर से गर्माहट आई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि व्यापारिक विश्वास बढ़ने से रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के रास्ते भी खुलते हैं।

हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका

भारत की भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर और पूर्वी समुद्री मार्गों में केंद्रीय शक्ति बनाती है। इसकी स्वतंत्र नीति और मजबूत नौसैनिक क्षमता क्वॉड को राजनीतिक और रणनीतिक रूप से प्रभावी बनाती है। यदि भारत और अमेरिका के रिश्ते स्थिर रहते हैं, तो क्वॉड अधिक भरोसेमंद और सक्रिय दिखेगा। वहीं, अगर रिश्तों में तनाव बढ़े तो समूह की गति धीमी पड़ सकती है।

चीन की बढ़ती बेचैनी

क्वॉड को चीन के दबदबे को संतुलित करने वाले मंच के रूप में देखा जाता है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ती गतिविधियों और बेल्ट एंड रोड परियोजना के विस्तार ने चीन को क्षेत्र में अधिक सक्रिय बना दिया है। जानकारों का कहना है कि क्वॉड द्वारा समुद्री सुरक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग बढ़ाना चीन के दावे को चुनौती देता है। यही वजह है कि चीन लगातार क्वॉड की गतिविधियों पर संदेह जताता रहा है।

यूपी सरकार ने खोला खजाना, किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कई अहम योजनाओं के लिए बजट स्वीकृत किया है। राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार करना और कृषि ढांचे को मजबूत बनाना है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इन स्वीकृतियों से प्रदेश में खेती-किसानी को नई गति मिलेगी।

एक्सटेंशन और टेक्नोलॉजी पर सबसे बड़ा फोकस

सरकार ने ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन’ (SMAE) के तहत 34.44 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि मंजूर की है। यह योजना National Mission on Agriculture Extension and Technology के अंतर्गत संचालित होती है। इसका उद्देश्य किसानों तक नई कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और आधुनिक खेती पद्धतियों की जानकारी पहुंचाना है।

क्षमता विकास और उत्पादन बढ़ाने पर जोर

कृषि क्षेत्र की क्षमता और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए भी 29.49 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह धनराशि विभिन्न विकास कार्यों में खर्च की जाएगी, जिससे किसानों को प्रशिक्षण, जागरूकता और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि लागत कम हो और पैदावार बढ़े।

मशीनरी और ढांचे के लिए अलग बजट

खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए नई मशीनों और उपकरणों की खरीद पर भी ध्यान दिया गया है। इसके लिए 4.17 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आधुनिक संसाधनों का विस्तार होगा। इसके अलावा आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या के अंतर्गत देवरिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण केंद्र के अधूरे निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 1.81 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

प्रशासनिक और संस्थागत मजबूती

योजनाओं के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए 0.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं राज्य कृषि प्रबंध संस्थान रहमानखेड़ा को गैर-वेतन मद में 0.10 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है। सरकार का मानना है कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था के बिना योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए निगरानी और प्रबंधन पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।