हेल्थ डेस्क। पुरुष अक्सर नौकरी, कारोबार और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। गलत खान-पान, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और नियमित स्वास्थ्य जांच न कराने जैसी आदतें आगे चलकर गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती हैं। हृदय रोग से लेकर कैंसर, स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारी और डायबिटीज तक कई ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनका समय पर पता लगना बेहद जरूरी है।
पुरुषों की जान की दुश्मन हैं ये 5 गंभीर बीमारियां
1. हृदय रोग:
हृदय रोग दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है। इसमें दिल की धमनियों में रुकावट और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और असंतुलित खान-पान इसके जोखिम को बढ़ाते हैं। कई बार बीमारी के शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते।
बचाव: नियमित व्यायाम करें, संतुलित भोजन लें, तंबाकू से दूर रहें और ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें। सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलने और ठंडा पसीना आने जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
2. कैंसर
कैंसर कई प्रकार का होता है और शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर सकता है। पुरुषों में फेफड़ों, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल यानी बड़ी आंत से जुड़े कैंसर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चिंताएं हैं। तंबाकू का सेवन फेफड़ों समेत कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। वहीं, प्रोस्टेट कैंसर का खतरा आम तौर पर उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है।
बचाव: तंबाकू से पूरी तरह बचें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और अपनी उम्र तथा व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर से स्क्रीनिंग के बारे में सलाह लें। लगातार खांसी, बिना वजह वजन घटना, मल त्याग में बदलाव या पेशाब संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सकीय जांच कराएं।
3. स्ट्रोक:
स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या रक्तस्राव होने लगता है। हाई ब्लड प्रेशर इसका एक प्रमुख जोखिम कारक है। इसके अलावा डायबिटीज, धूम्रपान और कुछ हृदय रोग भी खतरा बढ़ा सकते हैं।
बचाव: ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें, नियमित व्यायाम करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें। अचानक चेहरा टेढ़ा होने, एक हाथ में कमजोरी आने या बोलने में परेशानी होने पर तुरंत आपातकालीन सहायता लें। ऐसे लक्षणों में देरी करना खतरनाक हो सकता है।
4. सीओपीडी:
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) फेफड़ों की दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें सांस लेने में परेशानी हो सकती है। धूम्रपान इसका प्रमुख जोखिम कारक है। लंबे समय तक धूल, धुएं और वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से भी जोखिम बढ़ सकता है। लगातार खांसी, बलगम बनना और थोड़ी मेहनत में सांस फूलना इसके संभावित लक्षण हैं।
बचाव: बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों से दूर रहें। धूल और धुएं से बचाव करें तथा लगातार सांस संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
5. डायबिटीज:
टाइप-2 डायबिटीज में शरीर रक्त में शुगर के स्तर को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाता। लंबे समय तक शुगर बढ़ी रहने से हृदय, किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ पुरुषों में यह यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकती है। ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और थकान इसके संभावित संकेत हैं, हालांकि कई लोगों में शुरुआती लक्षण नहीं दिखते।
बचाव: संतुलित आहार लें, नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें और वजन को नियंत्रित रखने की कोशिश करें। जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर की जांच कराएं। यदि डायबिटीज है, तो दवाओं और नियमित जांच के जरिए शुगर को नियंत्रित रखना जरूरी है।