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बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को राहत, सरकार ने दी खुशखबरी!

पटना। बिहार में नया बिजली कनेक्शन लेने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत आवेदन से लेकर शुल्क जमा करने और मीटर लगाने तक की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। अब उपभोक्ताओं को कनेक्शन के खर्च का हिसाब जानने के लिए अलग-अलग मदों के अनुमान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

150 किलोवाट तक के कनेक्शन में बड़ा बदलाव

नई व्यवस्था के मुताबिक, 150 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन के लिए परिसर का पहले होने वाला भौतिक सत्यापन समाप्त कर दिया गया है। इससे पात्र आवेदकों को कनेक्शन लेने की प्रक्रिया में सुविधा मिल सकती है। यह बदलाव केंद्र सरकार और बिहार विद्युत विनियामक आयोग के निर्देशों के अनुरूप बताया गया है।

अब अलग-अलग खर्चों का झंझट खत्म

पहले बिजली कनेक्शन के लिए तार, पोल, अन्य सामग्री, मजदूरी और निगरानी से जुड़े खर्चों का अलग-अलग अनुमान तैयार किया जाता था। नई व्यवस्था में इन मदों की जगह लोड के आधार पर निर्धारित मानक शुल्क रखा गया है। उपभोक्ता सुविधा ऐप या संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करते समय देय शुल्क की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। निर्धारित राशि जमा होने के बाद बिजली कंपनी सर्विस तार और मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी करेगी।

नए बिजली कनेक्शन के लिए शुल्क?

दी गई शुल्क तालिका के अनुसार, अलग-अलग क्षमता वाले कनेक्शन के लिए दरें इस प्रकार हैं:

सिंगल फेज, 3 किलोवाट तक: 900 रुपये प्रति किलोवाट।

3 से 7 किलोवाट तक: पहले 3 किलोवाट के लिए 2,700 रुपये और प्रत्येक अतिरिक्त किलोवाट पर 1,000 रुपये।

थ्री फेज, 5 से 19 किलोवाट तक: पहले 5 किलोवाट के लिए 4,500 रुपये और प्रत्येक अतिरिक्त किलोवाट पर 1,500 रुपये।

एचटी कनेक्शन, 45 किलोवाट या अधिक: 7,000 रुपये प्रति किलोवाट।

आवेदन करने से पहले अपने कनेक्शन की श्रेणी और लागू शुल्क की पुष्टि संबंधित बिजली कंपनी के आधिकारिक पोर्टल से जरूर करें।

उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

नई व्यवस्था से बिजली कनेक्शन के लिए लगने वाला समय और कागजी प्रक्रिया कम करने में मदद मिल सकती है। शुल्क पहले से स्पष्ट होने पर लोगों को खर्च का अनुमान लगाने में भी आसानी होगी। ऑनलाइन आवेदन और भुगतान की सुविधा से प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन सकती है।

बिहार में शिक्षा को लेकर बड़ी खुशखबरी! 40 लाख बच्चों को मिलेंगी मुफ्त किताबें

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए अच्छी खबर है। राज्य के शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 और 2 के करीब 40 लाख विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराने की तैयारी की है। खास बात यह है कि बच्चों को हिंदी के साथ उनकी स्थानीय भाषा में भी पढ़ने का अवसर मिलेगा। इससे शुरुआती कक्षाओं में पढ़ाई को समझना आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

इस योजना के तहत मैथिली, भोजपुरी, सुरजापुरी, बज्जिका, अंगिका और मगही भाषाओं में किताबें तैयार की जाएंगी। शिक्षा विभाग ने पाठ्यक्रम बनाने और पुस्तकों की छपाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

1.20 करोड़ किताबों की छपाई की तैयारी

योजना के तहत करीब 1.20 करोड़ किताबें छापने का लक्ष्य रखा गया है। इन पर लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पुस्तकों में हिंदी, अंग्रेजी और गणित विषय शामिल होंगे। अंग्रेजी और गणित की पढ़ाई का मौजूदा आधार बरकरार रहेगा, जबकि हिंदी के साथ स्थानीय भाषा का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

बच्चों को अपनी भाषा में समझ आएगी पढ़ाई

ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से बच्चे घर पर स्थानीय भाषाएं बोलते हैं। स्कूल पहुंचने पर उन्हें मानक हिंदी में पढ़ाई समझने में शुरुआती कठिनाई हो सकती है। ऐसे में परिचित भाषा में पाठ मिलने से बच्चों को विषय समझने और कक्षा में भाग लेने में मदद मिल सकती है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों की भाषा और उनके आसपास के परिवेश को शुरुआती शिक्षा से जोड़ना है। किताबों में स्थानीय लोककथाओं, बालगीतों, पहेलियों और सांस्कृतिक परंपराओं को भी जगह देने की योजना है।

इलाके के हिसाब से तैयार होगी पाठ्य सामग्री

अलग-अलग क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाओं को ध्यान में रखकर पुस्तकें तैयार की जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, मिथिलांचल के बच्चों के लिए मैथिली और भोजपुर क्षेत्र के बच्चों के लिए भोजपुरी से जुड़ी सामग्री उपयोगी होगी। इसी तरह मगध, अंग क्षेत्र और बज्जिका भाषी इलाकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। किताबों में रंगीन चित्रों और खेल-आधारित गतिविधियों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बच्चे पढ़ाई को बोझ समझने के बजाय रुचि के साथ सीख सकें।

कब मिलेंगी बच्चों को किताबें?

फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से पाठ्यक्रम तैयार करने और छपाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। किताबों के वितरण की तारीख और पूरी कार्ययोजना से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला! पेट्रोल निर्यात पर टैक्स खत्म, 31 अक्टूबर से लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की नई अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी को शून्य कर दिया गया है। वहीं, डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है। नई दरें 31 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं। सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और तेल कंपनियों के मुनाफे में हो रहे बदलाव को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

पेट्रोल, डीजल और ATF पर अब कितना लगेगा टैक्स?

नई व्यवस्था के तहत तीनों ईंधन पर निर्यात शुल्क की दरों में बदलाव किया गया है।

पेट्रोल: निर्यात शुल्क 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

डीजल: ड्यूटी 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

हवाई ईंधन (ATF): शुल्क 10.50 रुपये से बढ़कर 11 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

इससे पहले 16 अक्टूबर को इन उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा की गई थी। अब नई दरों के लागू होने से पेट्रोल निर्यातकों को शुल्क में राहत मिली है, जबकि डीजल और ATF का निर्यात करने वाली कंपनियों पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा।

क्या देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?

इस फैसले को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल घरेलू कीमतों का है। निर्यात शुल्क में किए गए बदलाव का देश के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ता है। घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती हैं। इसलिए केवल निर्यात शुल्क हटने के आधार पर पेट्रोल सस्ता होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

सरकार ने क्यों बदलीं निर्यात शुल्क की दरें?

सरकार ने मार्च 2026 में ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया के संकट के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लगाने की व्यवस्था शुरू की थी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और रिफाइंड ईंधन के मुनाफे में बदलाव को देखते हुए सरकार समय-समय पर इन दरों की समीक्षा करती है। इस बार पेट्रोल पर शुल्क खत्म किया गया है, जबकि डीजल और हवाई ईंधन पर ड्यूटी बढ़ाई गई है।

तेल कंपनियों पर क्या पड़ेगा इसका असर?

पेट्रोल निर्यात पर शुल्क समाप्त होने से निर्यात करने वाली कंपनियों को राहत मिल सकती है। इसके उलट, डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ने से इन उत्पादों के निर्यात की लागत बढ़ेगी।

2 नवंबर से शुरू होंगे अच्छे दिन! गजकेसरी योग से 5 राशियों को धन लाभ, हर काम में मिलेगी सफलता

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में गजकेसरी योग को शुभ योगों में गिना जाता है। मान्यता है कि जब कुंडली में चंद्रमा और बृहस्पति की विशेष स्थिति बनती है, तब इस योग का निर्माण होता है। इसे ज्ञान, सम्मान, आर्थिक उन्नति और तरक्की से जोड़कर देखा जाता है। 2 नवंबर को बनने वाले इस योग को लेकर ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ राशियों के लिए समय अनुकूल रह सकता है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय शिक्षा, करियर और आर्थिक मामलों में नए अवसर लेकर आ सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है। पहले किए गए निवेश से लाभ मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए घर, वाहन और संपत्ति से जुड़े मामलों में अनुकूल समय रह सकता है। आमदनी के नए रास्ते खुलने और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। परिवार में सुख-सुविधाएं बढ़ाने की योजना बना सकते हैं। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

3. कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए धन और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। बातचीत और व्यवहार के जरिए रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। आर्थिक मामलों में राहत मिलने के संकेत भी हैं।

4. सिंह राशि

सिंह राशि में गुरु और चंद्रमा की युति बनने के कारण इस राशि के जातकों के लिए यह योग विशेष महत्व रखता है। आत्मविश्वास बढ़ने और कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को वेतन वृद्धि या तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों को भी आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।

5. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए नौकरी और कारोबार में प्रगति के अवसर बन सकते हैं। कार्यस्थल पर मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने और वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिलने की संभावना है। नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।

पुरुषों के शरीर में दिखें ये 4 बदलाव तो हो जाएं सावधान! प्रोस्टेट कैंसर के हो सकते हैं संकेत

हेल्थ डेस्क। पुरुषों की सेहत से जुड़ी कई ऐसी समस्याएं होती हैं, जिन्हें शुरुआत में मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी परेशानी भी इन्हीं में शामिल है। प्रोस्टेट पुरुषों के प्रजनन तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस ग्रंथि में कैंसर होने पर शुरुआती दौर में कई बार स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन बीमारी बढ़ने पर शरीर कुछ बदलावों के जरिए संकेत दे सकता है। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है।

प्रोस्टेट कैंसर के 5 संभावित संकेत

1. बार-बार पेशाब आना

अगर रात में कई बार पेशाब के लिए उठना पड़ता है या दिनभर सामान्य से ज्यादा बार पेशाब आता है, तो इसकी वजह प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या हो सकती है। हालांकि यह लक्षण प्रोस्टेट के बढ़ने या अन्य बीमारियों में भी दिखाई देता है।

2. पेशाब की धार कमजोर होना

पेशाब शुरू करने में परेशानी, धार का कमजोर होना या पेशाब करते समय रुक-रुककर आना भी एक संभावित संकेत है। कुछ लोगों को पेशाब पूरा खाली न होने का एहसास भी हो सकता है।

3. पेशाब या वीर्य में खून आना

पेशाब में खून दिखाई देना या वीर्य में खून आना गंभीरता से लेने वाला लक्षण है। इसके पीछे संक्रमण सहित कई कारण हो सकते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में बिना देरी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

4. कमर, कूल्हे या हड्डियों में दर्द

अगर लगातार कमर, कूल्हे या हड्डियों में दर्द बना रहता है, तो इसकी जांच जरूरी है। प्रोस्टेट कैंसर के कुछ उन्नत मामलों में कैंसर हड्डियों तक फैल सकता है और दर्द की वजह बन सकता है।

किन पुरुषों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने के साथ अधिक होता है। परिवार में पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर रहा हो, तो जोखिम बढ़ सकता है। कुछ आनुवंशिक कारण भी इस बीमारी की आशंका को प्रभावित करते हैं। इसलिए अधिक उम्र के पुरुषों और पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को डॉक्टर से अपनी व्यक्तिगत जांच और स्क्रीनिंग की जरूरत पर चर्चा करनी चाहिए।

खुशखबरी का बड़ा ऐलान! यूपी के 5 जिलों से शुरू होंगे रोजगार जोन, फिर पूरे प्रदेश में खुलेगा रास्ता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए 1,725 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गई है। इसके तहत युवाओं को उनकी योग्यता और बाजार की मांग के अनुसार ट्रेनिंग देने के लिए स्किल एवं रोजगार जोन विकसित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना की शुरुआत की। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को हुनर सिखाकर उन्हें नौकरी के अवसरों से जोड़ा जाए।

पहले 5 जिलों में बनेंगे रोजगार जोन

योजना को शुरुआती दौर में प्रदेश के पांच जिलों में लागू किया जाएगा। इसके बाद इसका विस्तार धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों तक करने की तैयारी है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले या आसपास के क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण हासिल करने का मौका मिल सकेगा।

हालांकि, पहले चरण में चुने गए पांच जिलों के नाम अभी घोषित नहीं किए गए हैं। इसी तरह केंद्रों की शुरुआत और आवेदन प्रक्रिया को लेकर भी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

युवाओं को मिलेगी रोजगारपरक ट्रेनिंग

इस योजना का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार के योग्य बनाना भी है। इसके लिए ऐसे कौशल पर ध्यान दिया जाएगा, जिनकी कंपनियों और उद्योगों में मांग है।

प्रशिक्षण संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर रहेगा, ताकि ट्रेनिंग पूरी करने वाले युवाओं को नौकरी तलाशने में सहायता मिल सके। हालांकि, कौन-कौन से कोर्स चलेंगे और प्रवेश के लिए क्या योग्यता होगी, इसकी जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

क्या ट्रेनिंग के बाद मिलेगी नौकरी?

योजना को लेकर युवाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल नौकरी को लेकर है। फिलहाल सरकार की ओर से प्रशिक्षण के बाद नौकरी की गारंटी या चयन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में कंपनियों के साथ साझेदारी, प्लेसमेंट और रोजगार मेलों की व्यवस्था इस योजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

सभी 75 जिलों तक होगा विस्तार

कुल 1,725 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने की उम्मीद है। पांच जिलों से शुरुआत के बाद सभी 75 जिलों तक रोजगार जोन पहुंचाने की योजना है।

अब युवाओं की नजर इस बात पर रहेगी कि पहले चरण के जिलों की घोषणा कब होती है और प्रशिक्षण के लिए आवेदन कब शुरू किए जाते हैं। अगर योजना तय लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो प्रदेश के युवाओं को अपने आसपास ही रोजगारपरक हुनर सीखने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

यूपी पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर, ग्राम प्रधान ध्यान दें!

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर हलचल तेज होने लगी है। इस बार चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए सरकार ने जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में बलिया के कलेक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण से जुड़े आंकड़ों और सामाजिक स्थिति पर चर्चा हुई।

79 पिछड़ी जातियों की स्थिति पर मंथन

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिले से जुटाए गए आंकड़ों की समीक्षा की गई। इसमें पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को समझने पर जोर दिया गया। खास तौर पर प्रदेश की 79 पिछड़ी जातियों की स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। आयोग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों में ओबीसी वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व मिल रहा है और आरक्षण की व्यवस्था को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है।

OBC आरक्षण को लेकर क्या है व्यवस्था?

बैठक में अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित है। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। आयोग अलग-अलग जिलों से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन कर रहा है, ताकि वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर सरकार को सुझाव दिए जा सकें।

पंचायत चुनाव से पहले यह बैठक?

आयोग का गठन उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है। इसका काम पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करके स्थानीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में आरक्षण को लेकर सरकार को संस्तुति देना है। इस प्रक्रिया से ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत चुनावों में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, अभी किसी नई आरक्षण सूची या सीटों में बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।

ग्राम प्रधानों की भी रहेगी नजर

आयोग की यह बैठक पंचायत चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब अलग-अलग जिलों से मिलने वाले आंकड़ों के विश्लेषण और आयोग की अंतिम संस्तुति पर सबकी नजर रहेगी। इसके बाद सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों से पंचायत चुनाव में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए ग्राम प्रधान और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए आने वाले सरकारी अपडेट महत्वपूर्ण रहेंगे।

केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी, कर्मचारियों के लिए 2 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को राहत देने की दिशा में बड़ी तैयारी की है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों सदस्यों के लिए दो नई सुविधाएं शुरू करने जा रहा है। इससे पुराने निष्क्रिय PF खातों में फंसी छोटी रकम निकालना आसान होगा। वहीं, कर्मचारियों को अब PF से जुड़ी कई सेवाओं के लिए WhatsApp का विकल्प भी मिलेगा।

इन दोनों सुविधाओं की शुरुआत केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया 1 नवंबर 2026 को EPFO के 74वें स्थापना दिवस के अवसर पर करेंगे।

पहली खुशखबरी: बिना क्लेम खाते में आएगा PF का पैसा

EPFO की नई व्यवस्था के तहत ऐसे पात्र निष्क्रिय PF खातों का ऑटोमैटिक सेटलमेंट किया जाएगा, जिनमें 1,000 रुपये या उससे कम राशि जमा है। यानी संबंधित कर्मचारियों को अपना पैसा निकालने के लिए अलग से क्लेम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अक्सर नौकरी बदलने या लंबे समय तक PF खाते का इस्तेमाल नहीं करने के कारण छोटी रकम पुराने खातों में पड़ी रह जाती है। कई कर्मचारी क्लेम की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। अब ऑटोमैटिक सेटलमेंट की व्यवस्था से ऐसे खातों का निपटारा आसान हो सकेगा। 

दूसरी खुशखबरी: WhatsApp पर मिलेंगी PF की सेवाएं

EPFO की दूसरी नई सुविधा डिजिटल सेवाओं से जुड़ी है। इसके तहत सदस्य WhatsApp के माध्यम से भी PF से संबंधित सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस पहल से कर्मचारियों को सामान्य जानकारी और सेवाओं के लिए बार-बार EPFO कार्यालय जाने की परेशानी कम हो सकती है। हालांकि, WhatsApp पर कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध होंगी और उनका इस्तेमाल करने का तरीका क्या रहेगा, इसकी पूरी जानकारी लॉन्च के समय मिलने की उम्मीद है।

7.98 करोड़ तक पहुंची सदस्यों की संख्या

EPFO के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2014-15 में योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या 3.49 करोड़ थी। 16 सितंबर 2026 तक यह बढ़कर करीब 7.98 करोड़ हो गई। वहीं, सितंबर 2026 तक योगदान देने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 7.68 लाख पहुंच चुकी थी। सामाजिक सुरक्षा के विस्तार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 प्रतिशत था, जो 2026 में बढ़कर 68.4 प्रतिशत हो गया।

कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?

EPFO की ये दोनों पहल PF सेवाओं को आसान और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। छोटी रकम वाले पात्र निष्क्रिय खातों का ऑटोमैटिक निपटारा होने से कर्मचारियों को क्लेम की लंबी प्रक्रिया से राहत मिल सकती है। वहीं, WhatsApp सेवा शुरू होने से PF से जुड़ी जानकारी और सुविधाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। अब कर्मचारियों की नजर इन सेवाओं के लॉन्च और इनके इस्तेमाल से जुड़े आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर रहेगी।

खुशखबरी का आगाज! यूपी में 1 बड़ी भर्ती शुरू, युवाओं को मौका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC), प्रयागराज ने प्रिंसिपल और हेडमास्टर के पदों पर बड़ी भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के जरिए कुल 2,647 पदों को भरा जाएगा। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इस भर्ती की खास बात यह है कि चयनित अभ्यर्थियों को हर महीने 56,100 रुपये से लेकर 2,09,200 रुपये तक वेतन मिल सकता है। आवेदन प्रक्रिया 23 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुकी है।

2,647 पदों पर होगी नियुक्ति

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी भर्ती के तहत प्रिंसिपल और हेडमास्टर के कुल 2,647 पद निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े इन पदों पर नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए यह अच्छा अवसर है।

शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा

आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास B.Ed, B.Tech/B.E, B.P.Ed या किसी भी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। हालांकि, पद के अनुसार निर्धारित योग्यता और अन्य शर्तों को आधिकारिक नोटिफिकेशन में जरूर देखना चाहिए। इस भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष और अधिकतम आयु 62 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिल सकती है।

2 लाख रुपये से ज्यादा सैलरी

प्रिंसिपल और हेडमास्टर के पदों पर चयनित उम्मीदवारों को 56,100 रुपये से 2,09,200 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। पद और लागू वेतनमान के अनुसार सैलरी निर्धारित होगी।

कब तक कर सकते हैं आवेदन?

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 से हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 22 नवंबर 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

कहां करें आवेदन?

इच्छुक उम्मीदवार उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म भरने से पहले भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन ध्यान से पढ़ लें और अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा तथा अन्य जरूरी शर्तों की जांच कर लें। अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा करना बेहतर रहेगा।

LPG उपभोक्ताओं को झटका! सिलेंडर की कीमतों में इजाफा, जानिए नया रेट

नई दिल्ली। दिवाली के त्योहार के बीच आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों (OMC) ने 1 नवंबर 2026 से कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इस बदलाव का असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों पर पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

कमर्शियल सिलेंडर के कितने बढ़े दाम?

तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में महानगरों के हिसाब से इजाफा किया है। दिल्ली और मुंबई में 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि चेन्नई में कीमत 11.50 रुपये बढ़ाई गई है। 1 नवंबर से लागू नए रेट के मुताबिक चारों महानगरों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं:

दिल्ली: 10 रुपये बढ़कर 2,820 रुपये।

मुंबई: 10 रुपये बढ़कर 2,774.50 रुपये।

कोलकाता: 10 रुपये बढ़कर 2,964 रुपये।

चेन्नई: 11.50 रुपये बढ़कर 2,994.50 रुपये।

दूसरे महीने महंगा हुआ कमर्शियल गैस सिलेंडर

कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं के लिए यह लगातार दूसरा महीना है, जब कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले 1 अक्टूबर को भी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम 62.50 रुपये बढ़ाए गए थे। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी से होटल, रेस्टोरेंट और खाने-पीने का कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आने वाले समय में कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर, जानिए रेट

कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने के बावजूद घरेलू गैस उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में 1 नवंबर को कोई बदलाव नहीं किया गया है। चारों महानगरों में घरेलू गैस सिलेंडर के मौजूदा दाम इस प्रकार हैं:

दिल्ली: 942 रुपये

कोलकाता: 968 रुपये

मुंबई: 941.50 रुपये

चेन्नई: 957.50 रुपये

आम लोगों की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा असर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। होटल और ढाबा संचालकों का खर्च बढ़ सकता है। वहीं, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर रहने से फिलहाल आम परिवारों को अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

केंद्र सरकार का 1 बड़ा फैसला, आज से देशभर में लागू, नागरिकों को खुशखबरी!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मोबाइल उपभोक्ताओं को अनजान कॉल की पहचान करने में मदद देने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू करने की पहल की है। इसका नाम कॉलर नेम प्रजेंटेशन (CNAP) है। इस सुविधा के तहत मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आने पर नंबर के साथ कॉल करने वाले का नाम भी दिखाई दे सकता है। इससे लोगों को फर्जी कॉल और साइबर ठगी से बचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अब अनजान नंबर से कॉल आने पर मिलेगी पहचान

अभी तक अगर किसी व्यक्ति के मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आता है, तो यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कॉल कौन कर रहा है। लेकिन CNAP सुविधा के जरिए कॉल करने वाले के नाम की जानकारी स्क्रीन पर दिखाई जा सकती है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति आपको फोन करता है और उसका नंबर आपके मोबाइल में सेव नहीं है, तो स्क्रीन पर सिम कार्ड के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा नाम दिखाई दे सकता है। वहीं, अगर नंबर पहले से सेव है, तो आपके फोन में सेव नाम दिखाई देगा।

4G और 5G उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा

कॉलर नेम प्रजेंटेशन सुविधा को टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। शुरुआती चरण में इसका लाभ 4G और 5G यूजर्स को देने की योजना है। इसके बाद 2G और 3G नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया हो सकती है। इसकी उपलब्धता टेलीकॉम कंपनी और नेटवर्क पर निर्भर करेगी।

विदेशी कॉल की पहचान करना आसान

इस व्यवस्था से विदेश से आने वाली कॉल को पहचानने में भी मदद मिल सकती है। इंटरनेशनल कॉल होने पर नेटवर्क के अनुसार स्क्रीन पर इसकी जानकारी दिखाई दे सकती है। इससे उपभोक्ता अनजान और संदिग्ध कॉल को लेकर ज्यादा सतर्क रह सकेंगे।

साइबर ठगी रोकने में मिलेगी मदद

आजकल साइबर ठग फोन करके खुद को बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताते हैं और लोगों से ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या दूसरी गोपनीय जानकारियां हासिल करने की कोशिश करते हैं। CNAP सुविधा से कॉल करने वाले की पहचान समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, स्क्रीन पर नाम दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि कॉल पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए उपभोक्ताओं को किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! नए साल में 4% बढ़ सकता है DA?

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर नए साल में अच्छी खबर मिल सकती है। जुलाई से दिसंबर 2026 की छमाही के लिए 3 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद महंगाई भत्ता 60% से बढ़कर 63% हो गया है। अब कर्मचारियों की निगाहें जनवरी से जून 2027 की किस्त पर टिकी हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगली बार DA में 4 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो महंगाई भत्ता बढ़कर 67% पहुंच जाएगा।

क्यों बढ़ सकता है 4 फीसदी DA?

महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का फैसला औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर तय होता है। इस सूचकांक में महंगाई के बदलाव को देखते हुए DA की गणना की जाती है। दिए गए अनुमान के मुताबिक, अगर अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान सूचकांक सितंबर के 155.5 स्तर पर ही बना रहता है, तो जनवरी 2027 की किस्त के लिए 12 महीने का औसत करीब 152 रह सकता है। इस आधार पर गणना में लगभग 4.85 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी निकलती है। हालांकि, अंतिम बढ़ोतरी सरकार की गणना और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

63% से बढ़कर 67% हो सकता है DA

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 63% बताया गया है। अगर जनवरी 2027 में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी मिलती है, तो यह बढ़कर 67% हो जाएगा। इससे कर्मचारियों की मासिक सैलरी में भी इजाफा होगा। हालांकि, अभी यह केवल अनुमान है और इसे सरकार की ओर से घोषित फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

क्या 7वें वेतन आयोग के तहत होगी आखिरी बढ़ोतरी?

केंद्रीय कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि जनवरी 2027 की DA बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग के मौजूदा ढांचे के तहत आखिरी संशोधनों में से एक हो सकती है। इसकी वजह 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है। इस हिसाब से मई 2027 के आसपास रिपोर्ट आने की समयसीमा बनती है।

8वें वेतन आयोग से बदल सकता है सैलरी का ढांचा

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और भत्तों की व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। नई वेतन संरचना में महंगाई भत्ते को संशोधित बेसिक पे में शामिल किए जाने की संभावना भी चर्चा में है। हालांकि, इस बारे में अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी और आधिकारिक आदेश के बाद ही होगा।

कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए खुशखबरी! 4 राज्यों में DA बढ़ोतरी का ऐलान

न्यूज डेस्क। केंद्र सरकार के बाद अब कई राज्य सरकारों ने भी अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का लाभ देना शुरू कर दिया है। तमिलनाडु, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने इस संबंध में अलग-अलग घोषणाएं की हैं। इन फैसलों से लाखों सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनर्स को राहत मिलने वाली है। हालांकि, हर राज्य में बढ़ोतरी की दर और भुगतान का तरीका अलग रखा गया है।

मध्यप्रदेश में 2% की बढ़ोतरी

मध्यप्रदेश सरकार ने अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की है। कर्मचारियों को बढ़े हुए DA का लाभ जनवरी 2026 से मिलेगा, जबकि पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 से बढ़ी हुई महंगाई राहत दी जाएगी। जनवरी से सितंबर तक के नौ महीने के बकाया DA का भुगतान तीन बराबर मासिक किस्तों में किया जाएगा। वहीं, बढ़ा हुआ भत्ता अक्टूबर के वेतन के साथ नकद दिया जाएगा।

तमिलनाडु में 3% बढ़ा महंगाई भत्ता

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 31 अक्टूबर 2026 को सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के DA में 3 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की। इसके बाद महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी। राज्य सरकार के इस फैसले से करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। इस पर सरकार को हर साल लगभग 1,858 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।

राजस्थान के कर्मचारियों को लाभ

राजस्थान सरकार ने भी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की वृद्धि की है। इसके बाद राज्य कर्मचारियों का DA 63 प्रतिशत हो गया है। इस फैसले से 7 लाख से अधिक कर्मचारी और 5 लाख से ज्यादा पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। बढ़ा हुआ DA 1 जुलाई 2026 से देय होगा। कर्मचारियों को नवंबर के वेतन के साथ दिसंबर में बढ़ी हुई राशि का नकद भुगतान किया जाएगा। वहीं, जुलाई से अक्टूबर तक के चार महीने का बकाया GPF खाते में जमा किया जाएगा। पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई महंगाई राहत नकद मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में 58% से बढ़कर 60% हुआ DA

छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत देते हुए DA और DR में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके बाद महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दर 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगी। नई दरें 1 नवंबर 2026 से लागू होंगी। इस फैसले से प्रदेश के करीब 5.35 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। इनमें लगभग 3.85 लाख सरकारी कर्मचारी और 1.50 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं।

लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा

चारों राज्यों के फैसलों से सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों को महंगाई से कुछ राहत मिलेगी। हालांकि, किसे कितना अतिरिक्त पैसा मिलेगा, यह उसकी मौजूदा बेसिक सैलरी या पेंशन और संबंधित राज्य के भुगतान नियमों पर निर्भर करेगा। कर्मचारियों को अपने विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार भुगतान की जानकारी देखनी चाहिए।

खुशखबरी का इंतजार खत्म! यूपी में एक साथ 3 बड़ी भर्तियां, युवाओं को मौका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश में अलग-अलग विभागों में भर्ती के लिए तीन बड़े नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं। इनमें UPSSSC की दो भर्तियां और UPPSC की एक भर्ती शामिल है। तीनों भर्तियों को मिलाकर कुल 3,441 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। योग्य उम्मीदवार निर्धारित तारीखों के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पहली भर्ती: 1,784 पदों पर निकली वैकेंसी

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने विज्ञापन संख्या 26-Exam/2026 के तहत 1,784 पदों पर भर्ती निकाली है। इसमें सहायक कोषागार लेखाकार, भूमि अर्जन अमीन, भंडारपाल, सहकारी पर्यवेक्षक, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी समेत कई पद शामिल हैं।

इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों का UPSSSC PET 2025 में शामिल होना जरूरी है। इसके अलावा पद के अनुसार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता भी पूरी करनी होगी। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 से शुरू होगी और 1 दिसंबर 2026 तक चलेगी। सभी वर्गों के लिए आवेदन प्रोसेसिंग फीस 25 रुपये रखी गई है।

दूसरी भर्ती: जूनियर इंजीनियर के 1,156 पद

UPSSSC ने विज्ञापन संख्या 24-Exam/2026 के तहत संयुक्त जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) मुख्य परीक्षा के लिए भी भर्ती निकाली है। इस भर्ती के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में कुल 1,156 पद भरे जाएंगे। इनमें सहायक मैकेनिकल इंजीनियर, मैकेनिक, सहायक स्टोरकीपर, जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल), टेक्निकल असिस्टेंट समेत कई तकनीकी पद शामिल हैं।

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 3 नवंबर से 25 नवंबर 2026 तक किए जा सकेंगे। सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आवेदन प्रोसेसिंग फीस 25 रुपये है। मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग PET 2025 के नॉर्मलाइज्ड स्कोर के आधार पर होगी।

तीसरी भर्ती: समीक्षा अधिकारी के 501 पद

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी सहित अन्य पदों के लिए विज्ञापन संख्या A-4/E-1/2026 जारी किया है। इस भर्ती के तहत कुल 501 पदों को भरा जाएगा।

इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 26 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुके हैं। आवेदन करने और परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 26 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में दी गई योग्यता और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

आवेदन से पहले जरूर देखें जरूरी जानकारी

तीनों भर्तियों में पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और चयन प्रक्रिया अलग-अलग है। खासतौर पर UPSSSC की दोनों भर्तियों में PET 2025 की पात्रता जरूरी है। इसलिए उम्मीदवार आवेदन करने से पहले संबंधित आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन पढ़ लें और अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना फॉर्म भरें।

आधिकारिक वेबसाइट: UPSSSC के लिए upsssc.gov.in और UPPSC के लिए uppsc.up.nic.in पर भर्ती से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

खुशखबरी की बंपर घोषणा! बिहार में एक साथ 2 नई भर्तियां, ऐसे करें आवेदन

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में एक साथ दो अलग-अलग विभागों में भर्ती निकली है। इन भर्तियों के तहत कुल 78 पदों को भरा जाएगा। खास बात यह है कि दोनों भर्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया 2 नवंबर 2026 से शुरू होने जा रही है। हालांकि, आवेदन करने का तरीका दोनों में अलग-अलग रखा गया है। एक भर्ती के लिए ऑफलाइन फॉर्म जमा करना होगा, जबकि दूसरी भर्ती में ईमेल के जरिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

इन पदों पर 10वीं पास से लेकर डिप्लोमा और ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवारों को मौका मिल सकता है। ऐसे में योग्य अभ्यर्थियों के लिए यह नौकरी पाने का अच्छा अवसर है। आइए जानते हैं दोनों भर्तियों से जुड़ी जरूरी जानकारी।

1. बेगूसराय में 73 डीलर पदों पर भर्ती

बिहार के बेगूसराय जिले में जिला आपूर्ति कार्यालय की ओर से जन वितरण प्रणाली (PDS) डीलर के 73 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस भर्ती में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी गई है। यानी मैट्रिक पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

भर्ती की मुख्य जानकारी:

विभाग: जिला आपूर्ति कार्यालय, बेगूसराय

पद का नाम: जन वितरण प्रणाली डीलर

कुल पद: 73

शैक्षणिक योग्यता: 10वीं पास

न्यूनतम आयु: 18 वर्ष

आवेदन शुरू होने की तारीख: 2 नवंबर 2026

आवेदन की अंतिम तारीख: 30 नवंबर 2026

आवेदन का तरीका: इस भर्ती के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑफलाइन आवेदन करना होगा। भर्ती से संबंधित आवेदन फॉर्म, जरूरी दस्तावेज और अन्य शर्तों की जानकारी बेगूसराय जिले की आधिकारिक वेबसाइट begusarai.nic.in पर देखी जा सकती है।

2. मुंगेर में 5 पदों पर भर्ती

दूसरी भर्ती मुंगेर जिले में महिला एवं बाल विकास निगम (WCDC) के अंतर्गत निकाली गई है। इस भर्ती में कुल 5 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें केस वर्कर, साइको-सोशल काउंसलर, पैरा लीगल पर्सन और पैरा मेडिकल पर्सन जैसे पद शामिल हैं। इस भर्ती में अलग-अलग पदों के अनुसार डिप्लोमा, ग्रेजुएशन या संबंधित प्रोफेशनल डिग्री की योग्यता मांगी गई है। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष निर्धारित है।

भर्ती की मुख्य जानकारी:

विभाग: महिला एवं बाल विकास निगम, मुंगेर

पद: केस वर्कर, साइको-सोशल काउंसलर, पैरा लीगल पर्सन और पैरा मेडिकल पर्सन

कुल पद: 5

योग्यता: डिप्लोमा, ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल डिग्री

आयु सीमा: 18 से 42 वर्ष

वेतन: 8,000 से 22,000 रुपये प्रतिमाह

आवेदन शुरू: 2 नवंबर 2026

अंतिम तारीख: 16 नवंबर 2026

आवेदन का माध्यम: ईमेल

इस भर्ती में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन ईमेल के माध्यम से भेजना होगा। आवेदन से जुड़ी विस्तृत जानकारी और जरूरी निर्देश मुंगेर जिले की आधिकारिक वेबसाइट munger.nic.in पर उपलब्ध होंगे।

खुशखबरी का धमाकेदार ऐलान! यूपी में 1 बड़ी भर्ती, ऐसे करें आवेदन

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। लखीमपुर खीरी के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में विभिन्न पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 158 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा।

प्रिंसिपल से लेकर चपरासी तक के पद शामिल

इस भर्ती में प्रिंसिपल, पीजीटी, कंप्यूटर साइंस टीचर, केयरटेकर, ऑफिस सुपरिंटेंडेंट, लैब असिस्टेंट, चपरासी, चौकीदार, रसोइया और सहायक रसोइया समेत कई पद रखे गए हैं। इसके अलावा कक्षा 6 से 8 तक के लिए पूर्णकालिक और अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस भर्ती के लिए केवल महिला उम्मीदवार आवेदन कर सकती हैं। पद के अनुसार 12वीं, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, B.Ed, B.Tech, M.Sc, M.A और संबंधित डिप्लोमा की योग्यता मांगी गई है। अभ्यर्थियों की आयु सीमा 25 से 45 वर्ष निर्धारित बताई गई है। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 6,433 रुपये से लेकर 30,000 रुपये प्रतिमाह तक मानदेय मिल सकता है। ये नियुक्तियां शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संविदा आधार पर होंगी।

30 नवंबर तक आवेदन

योग्य महिला उम्मीदवारों को आवेदन फॉर्म ऑफलाइन भरकर रजिस्टर्ड पोस्ट या स्पीड पोस्ट के जरिए संबंधित कार्यालय में भेजना होगा। आवेदन पहुंचने की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 शाम 5 बजे निर्धारित की गई है।

भर्ती से जुड़ी पूरी जानकारी, पदवार योग्यता और आवेदन फॉर्म के लिए लखीमपुर खीरी की आधिकारिक वेबसाइट kheri.nic.in पर उपलब्ध नोटिफिकेशन देखें। आवेदन भेजने से पहले अपनी योग्यता और संबंधित पद की शर्तों को ध्यान से जांच लें।

खुशखबरी का मेगा धमाका! बिहार के 9 जिलों में रोजगार मेला, नौकरी पाने का सुनहरा मौका

पटना। बिहार के नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य के युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग और नियोजन एवं प्रशिक्षण निदेशालय की ओर से नियोजन सह व्यावसायिक मार्गदर्शन मेला-2026 आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत 2 से 6 नवंबर तक 9 जिलों में रोजगार मेले लगाए जाएंगे। यहां तकनीकी और गैर-तकनीकी योग्यता रखने वाले युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।

सुबह 10:30 से शाम 4 बजे तक लगेगा मेला

रोजगार मेले का आयोजन निर्धारित जिलों में सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक किया जाएगा। इसमें अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी कौशल वाले अभ्यर्थी हिस्सा ले सकते हैं। विभाग की तैयारी के अनुसार, निजी क्षेत्र की कंपनियां भी मेले में शामिल होकर योग्य उम्मीदवारों का चयन करेंगी।

किस जिले में कब लगेगा रोजगार मेला?

रोजगार मेले का प्रस्तावित कार्यक्रम इस प्रकार है:

2 नवंबर: बक्सर और गोपालगंज

3 नवंबर: जहानाबाद और सारण (छपरा)

4 नवंबर: सीवान और कैमूर (भभुआ)

5 नवंबर: नालंदा

6 नवंबर: अररिया और पटना

ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन

रोजगार मेले में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को विभाग के आधिकारिक पोर्टल detjob.bihar.gov.in पर पहले से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके अलावा आयोजन स्थल पर भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज लेकर निर्धारित तारीख पर पहुंचें। रोजगार मेले से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18002965656 पर संपर्क किया जा सकता है।

निजी क्षेत्र में रोजगार का मौका

इस पहल का उद्देश्य बिहार के युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे में नौकरी की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह मेला उपयोगी साबित हो सकता है। उम्मीदवार अपने जिले की निर्धारित तारीख देखकर समय पर रजिस्ट्रेशन जरूर करा लें।

FD ग्राहकों के लिए खुशखबरी! ICICI बैंक अब देगा पहले से ज्यादा ब्याज

नई दिल्ली। अगर आप ICICI बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। बैंक ने 3 करोड़ रुपये से कम की कुछ चुनिंदा FD की ब्याज दरों में 10 बेसिस पॉइंट तक बढ़ोतरी की है। नई दरों के बाद आम ग्राहकों को अधिकतम 6.60 फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों को 7.20 फीसदी तक ब्याज मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक ब्याज FD की अवधि पर निर्भर करेगा।

आम ग्राहकों के लिए नई ब्याज दरें

ICICI बैंक ने लंबी अवधि की कुछ FD पर ब्याज बढ़ाया है। अब 2 साल 1 दिन से 3 साल तक की जमा पर 6.55 फीसदी ब्याज मिलेगा, जो पहले 6.45 फीसदी था। वहीं, 3 साल 1 दिन से 5 साल और 5 साल 1 दिन से 10 साल तक की FD पर दर 6.50 फीसदी से बढ़ाकर 6.60 फीसदी कर दी गई है। पांच साल की टैक्स सेवर FD पर भी नई दर 6.60 फीसदी है।

वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा ज्यादा फायदा

सीनियर सिटीजन के लिए भी बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव किया है। अब 2 साल 1 दिन से 3 साल की FD पर 7.05 फीसदी और 3 साल 1 दिन से 5 साल की FD पर 7.20 फीसदी ब्याज मिलेगा। वहीं, 5 साल 1 दिन से 10 साल की FD और टैक्स सेवर FD पर 7.10 फीसदी से बढ़ाकर 7.20 फीसदी ब्याज कर दिया गया है।

₹5 लाख जमा करने पर कितना मिलेगा?

नई दरों का फायदा लंबी अवधि की FD में साफ दिखाई देता है। दिए गए अनुमान के मुताबिक, आम ग्राहक अगर 5 लाख रुपये की FD पांच साल के लिए 6.60 फीसदी ब्याज पर कराते हैं, तो मैच्योरिटी पर करीब 6.93 लाख रुपये मिल सकते हैं। पुरानी 6.50 फीसदी दर के हिसाब से यह रकम करीब 6.90 लाख रुपये होती।

इसी तरह वरिष्ठ नागरिकों को पांच साल की FD पर 7.20 फीसदी ब्याज के हिसाब से करीब 7.14 लाख रुपये मिल सकते हैं। ये अनुमान तिमाही कंपाउंडिंग और टैक्स से पहले की गणना पर आधारित हैं।

FD कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

FD में निवेश करने से पहले उसकी अवधि, ब्याज भुगतान का तरीका और समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाली पेनल्टी जरूर जांच लें। ब्याज पर लागू टैक्स का भी ध्यान रखें। निवेश करने से पहले ICICI बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी चुनी हुई अवधि की नवीनतम दरों और शर्तों की पुष्टि कर लें।

यूपी में 6 लेन का बनेगा एक्सप्रेस-वे, इन जिलों के लिए खुशखबरी

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बाराबंकी से बहराइच के बीच छह लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-927 की इस परियोजना पर करीब 6,969.04 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे दोनों जिलों के बीच सफर आसान होने के साथ व्यापार और माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

101.51 किलोमीटर लंबा होगा हाईवे

प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 101.51 किलोमीटर होगी। एनएचएआई के मुताबिक, इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाना है। परियोजना का उद्देश्य प्रमुख आर्थिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को बेहतर सड़क संपर्क देना है। इस सड़क से नेपालगंज सीमा के रास्ते भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक आवाजाही को भी सुविधा मिल सकती है। ऐसे में यह मार्ग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निर्माण और जमीन अधिग्रहण पर खर्च

परियोजना में सड़क निर्माण पर 3,485.49 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं, जबकि जमीन अधिग्रहण के लिए 1,574.85 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। इसके अलावा वन विभाग की करीब 70 हेक्टेयर जमीन से जुड़े मुआवजे और पर्यावरणीय कार्यों पर भी खर्च किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण के दौरान वन विभाग के पेड़ काटने पड़ने पर उसके बदले दस गुना पौधे लगाए जाएंगे। विभाग की जमीन पर करीब 35 हजार पेड़-पौधे बताए गए हैं, जिनमें लगभग 9,300 पेड़ शामिल हैं।

इन इलाकों को मिल सकता है फायदा

छह लेन का यह हाईवे बनने से बाराबंकी और बहराइच के बीच आवागमन सुगम होने की उम्मीद है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। हालांकि, परियोजना के निर्माण और पूरा होने की समय-सीमा से जुड़ी जानकारी के लिए एनएचएआई की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है।

किसानों के लिए खुशखबरी! बिहार में 115.08 एकड़ जमीन पर लगेंगी नई चीनी मिलें

न्यूज डेस्क। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर में बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन का इस्तेमाल अब औद्योगिक विकास के लिए किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस दिशा में अहम फैसला लेते हुए कुल 266 एकड़ जमीन के उपयोग को मंजूरी दी है। इससे इलाके में नई औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद है।

चीनी मिल के लिए 115.08 एकड़ जमीन

राज्य मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के अनुसार, 115.08 एकड़ जमीन पर चीनी मिल स्थापित करने की योजना है। वहीं, बची हुई 151.58 एकड़ जमीन उद्योग विभाग को सौंपी जाएगी, ताकि वहां दूसरी तरह की औद्योगिक इकाइयां लगाई जा सकें।

निवेश और रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

यह पहल सरकार के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ के लक्ष्य से जुड़ी है। जमीन उपलब्ध होने से निवेशकों को उद्योग लगाने का अवसर मिल सकता है। इससे मोतीपुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

कृषि आधारित उद्योगों को भी मिलेगा मौका

मोतीपुर कृषि प्रधान क्षेत्र है। ऐसे में यहां खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित उद्योग, गोदाम और लॉजिस्टिक्स जैसी इकाइयों के विकास की संभावनाएं हैं। हालांकि, चीनी मिल और अन्य उद्योगों की स्थापना कब तक होगी, इसकी जानकारी आगे की परियोजना प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

LPG ग्राहकों की हुई मौज! सिलिंडर भरवाने के लिए मिलेगा ₹600 का लोन, जानें कैसे

न्यूज डेस्क। रसोई गैस खत्म होने के बाद अगर आपके पास तुरंत पैसे नहीं हैं, तो भारतगैस से जुड़ी ₹600 तक के लोन की सुविधा आपके काम आ सकती है। इस सुविधा के तहत पात्र ग्राहकों को सिलिंडर भरवाने के लिए छोटी रकम उधार लेने और बाद में चुकाने का विकल्प दिया जाता है। हालांकि, इसका लाभ उपलब्धता और लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।

बिना ब्याज के मिल सकता है ₹600 तक का लोन

बताई गई सुविधा के अनुसार, ग्राहक ₹600 तक की रकम बिना ब्याज के ले सकते हैं। यानी ₹600 उधार लेने पर निर्धारित शर्तों के तहत इतनी ही रकम वापस करनी होगी। इसका उद्देश्य जरूरत के समय ग्राहकों को भुगतान के लिए अतिरिक्त समय देना है।

हर सप्ताह देने होंगे ₹100

इस योजना की बताई गई भुगतान व्यवस्था के मुताबिक, ₹600 का लोन लेने पर हर सप्ताह ₹100 की किस्त चुकानी होगी। इस तरह छह सप्ताह में पूरी रकम वापस की जा सकती है। हालांकि, किस्तों और भुगतान की वास्तविक शर्तों की पुष्टि करना जरूरी है।

कैसे उठा सकते हैं लाभ?

इस सुविधा के बारे में जानकारी लेने के लिए अपने नजदीकी भारतगैस वितरक से संपर्क करें। आवेदन करने से पहले यह जरूर पता करें कि आपके क्षेत्र में यह विकल्प उपलब्ध है या नहीं, कौन ग्राहक पात्र हैं और भुगतान के क्या नियम हैं।

केंद्र सरकार का 1 बड़ा फैसला! देशभर के बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। पेंशन पाने वाले बुजुर्गों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक राष्ट्रव्यापी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान चलाने जा रही है। इसके तहत देश के 2,000 शहरों और जिलों में पेंशनर्स को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में मदद दी जाएगी। इसका उद्देश्य पेंशन जारी रखने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

फेस ऑथेंटिकेशन से बनेगा सर्टिफिकेट

इस अभियान में ‘जीवन प्रमाण’ सुविधा के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनवाया जा सकेगा। पेंशनर्स मोबाइल फोन पर फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। इससे कई लोगों को बैंक या सरकारी कार्यालय जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।

घर पर भी मिल सकती है मदद

जो बुजुर्ग उम्र या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण बाहर नहीं जा सकते, उनके लिए जरूरत के अनुसार घर पर सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। अभियान के दौरान स्वास्थ्य जांच, आधार अपडेट और डिजिटल सर्टिफिकेट बनाने में सहायता जैसी सुविधाएं भी दी जा सकती हैं।

रेलवे पेंशनर्स के लिए भी विशेष व्यवस्था

अभियान में रेलवे पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को भी शामिल किया गया है। उनके लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे, ताकि वे आसानी से अपना डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकें। ध्यान दें की पेंशनर्स अभियान से जुड़ी जानकारी, अपने क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं और जरूरी प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित बैंक या आधिकारिक पेंशन विभाग से जरूर करें।

केंद्रीय कर्मचारियों को दिवाली गिफ्ट, सरकार ने दी 2 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी से जुड़ी बड़ी खबर है। दी गई जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (DR) में 3 फीसदी की वृद्धि को मंजूरी दी है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से प्रभावी बताई गई है। इससे लाखों कर्मचारियों की मासिक सैलरी और पेंशनधारकों की पेंशन में इजाफा हो सकता है।

1.17 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा

बताई गई जानकारी के अनुसार, इस फैसले से करीब 48.54 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनधारकों को लाभ मिल सकता है। महंगाई भत्ता कर्मचारियों को बढ़ती कीमतों के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है, जबकि पेंशनधारकों को इसी तरह महंगाई राहत का लाभ मिलता है।

इस बढ़ोतरी से सरकारी कर्मचारियों की हर महीने मिलने वाली रकम बढ़ेगी। वहीं, पात्र पेंशनधारकों को भी बढ़ी हुई महंगाई राहत के अनुसार अतिरिक्त भुगतान मिल सकता है। इस फैसले से सरकारी खजाने पर लगभग 10,016 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान बताया गया है।

बेसिक सैलरी के हिसाब से बढ़ेगी रकम?

DA में 3 फीसदी की वृद्धि से मिलने वाला अतिरिक्त पैसा कर्मचारी की बेसिक सैलरी पर निर्भर करेगा। उदाहरण के लिए, 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर महीने के 540 रुपये, 30,000 रुपये पर 900 रुपये और 50,000 रुपये पर 1,500 रुपये की बढ़ोतरी होगी।

चार महीने का एरियर भी मिल सकता है

अगर बढ़ोतरी 1 जुलाई से लागू होती है और भुगतान बाद में किया जाता है, तो जुलाई से अक्टूबर तक चार महीने का एरियर बन सकता है। इस हिसाब से 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 2,160 रुपये, 30,000 रुपये पर 3,600 रुपये और 50,000 रुपये पर 6,000 रुपये का एरियर होगा।

यूपी में तैयार होंगे 4 नए लिंक एक्सप्रेसवे, इन जिलों को खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए चार नए लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी है। करीब 322 किलोमीटर लंबे इन एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 17,542 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के प्रमुख एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ना और औद्योगिक विकास को गति देना है। इससे कई जिलों के लोगों, किसानों और कारोबारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

इन चार नए एक्सप्रेसवे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

आपको बता दें की योजना के तहत फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। वहीं, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे इन तीनों प्रमुख एक्सप्रेसवे के बीच बेहतर संपर्क बनाएगा।

इसके अलावा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड क्षेत्र को एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ेगा। चौथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम करेगा। इससे दिल्ली-NCR और यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान हो सकता है।

किसानों और कारोबारियों को फायदा

इन एक्सप्रेसवे का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर सड़क संपर्क से दूध, फल और सब्जियों जैसे कृषि उत्पादों को कम समय में बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे किसानों और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार

चारों लिंक एक्सप्रेसवे बनने से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच आवागमन और माल ढुलाई आसान होगी। इससे निवेशकों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी और नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिल सकता है। आने वाले समय में ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के सड़क और औद्योगिक नेटवर्क को नई मजबूती दे सकती हैं।

भारत के लिए बड़ी खुशखबरी! गरीबी घटाने में रचा इतिहास, 49.6 करोड़ लोग आए गरीबी रेखा से बाहर

नई दिल्ली। भारत के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की 'पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में गरीबी कम करने के मामले में बड़ी प्रगति की है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 से 2023 के बीच करीब 49.6 करोड़ लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी सीमा से ऊपर आए हैं। इस दौरान गरीबी दर 57.7 फीसदी से घटकर 16.1 फीसदी रह गई।

अति गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

विश्व बैंक की रिपोर्ट में अति गरीबी के आंकड़े भी राहत देने वाले हैं। 3 डॉलर प्रतिदिन के अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार, भारत में अति गरीबी की दर 2011 में 27.1 फीसदी थी, जो 2023 में घटकर केवल 2.6 फीसदी रह गई। ये आंकड़े देश में लोगों के जीवन स्तर में आए बदलाव को दर्शाते हैं।

रोजगार के अवसरों में हुआ सुधार

रिपोर्ट में गरीबी कम होने के पीछे रोजगार के बढ़ते अवसरों, घरेलू खपत में मजबूती और सरकारी सहायता योजनाओं को अहम वजह बताया गया है। खासतौर पर महिलाओं की कामकाज में बढ़ती भागीदारी ने परिवारों की आमदनी बढ़ाने में योगदान दिया है। खाद्य सब्सिडी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी योजनाओं से भी जरूरतमंद परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंची है।

बुनियादी सुविधाओं तक बढ़ी पहुंच

देश में बिजली, सरकारी सहायता और दूसरी जरूरी सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से भी लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी घटने के बावजूद कुछ चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। खासकर कम शिक्षा, सीमित संपत्ति और स्थायी रोजगार की कमी वाले परिवारों के सामने आर्थिक मुश्किलें मौजूद हैं। वहीं, वर्ष 2023 में सबसे अधिक कमाने वाले 10 फीसदी कर्मचारियों की औसत कमाई सबसे कम कमाने वाले 10 फीसदी कर्मचारियों से करीब 13 गुना थी।

आगे भी घट सकती है गरीबी

विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, 4.20 डॉलर प्रतिदिन के गरीबी मानक पर भारत की गरीबी दर 2026 में 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी हो सकती है। हालांकि, यह अनुमान है और वास्तविक आंकड़ों में बदलाव संभव है।

यूपी में शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने दिए नए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से वरिष्ठता सूची और पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों के मामले में बेसिक शिक्षा परिषद ने सख्ती दिखाई है। परिषद ने सभी जिलों के अधिकारियों को वरिष्ठता निर्धारण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए 7 नवंबर की समय-सीमा तय की गई है।

वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश

बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शिक्षकों की पदोन्नति से पहले अंतिम वरिष्ठता सूची प्रकाशित करना जरूरी है। इसके बाद निर्धारित नियमों के आधार पर पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की जाए।

कई जिलों में काम अधूरा होने पर नाराजगी

परिषद को जानकारी मिली थी कि कई जिलों में शिक्षकों की अद्यतन वरिष्ठता सूची अभी तक तैयार नहीं हुई है। इस पर परिषद ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन करते हुए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएं।

7 नवंबर तक पूरी करनी होगी प्रक्रिया

परिषद ने निर्देश दिया है कि अंतिम वरिष्ठता सूची के प्रकाशन से लेकर पात्रता सूची तैयार करने और पदोन्नति की कार्यवाही तक का काम 7 नवंबर तक पूरा किया जाए। आदेश की प्रतियां शासन के संबंधित अधिकारियों, महानिदेशक स्कूल शिक्षा और अन्य विभागीय अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।

इस निर्देश से प्रदेश के उन बेसिक शिक्षकों को उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिलों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर पदोन्नति की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है।

महिलाओं के लिए बड़ी राहत! AI से जल्दी पकड़ में आ सकता है ब्रेस्ट कैंसर

नई दिल्ली। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। कई बार शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते और गांठ भी महसूस नहीं होती। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बीमारी की जल्द पहचान करने में मददगार साबित हो सकता है। नई तकनीक मैमोग्राफी की तस्वीरों का विश्लेषण करके उन हिस्सों को पहचान सकती है, जिनमें असामान्य बदलाव होने की आशंका है।

मैमोग्राफी में AI कैसे करता है मदद?

मैमोग्राफी स्तन की एक्स-रे जांच होती है, जिससे कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सकता है। AI आधारित सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों को स्कैन करके संदिग्ध हिस्सों को चिह्नित करता है। इससे रेडियोलॉजिस्ट को छोटी असामान्यताओं पर ध्यान देने और आगे की जांच की जरूरत वाले मामलों को प्राथमिकता देने में मदद मिलती है।

शोध में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

'द लैंसेट डिजिटल हेल्थ' में प्रकाशित 2025 के एक अध्ययन में स्वीडन की एक लाख से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया था। अध्ययन के मुताबिक, AI की मदद से की गई स्क्रीनिंग में हर 1,000 महिलाओं पर 6.4 कैंसर के मामलों की पहचान हुई, जबकि सामान्य स्क्रीनिंग में यह आंकड़ा 5 था। इसके अलावा रेडियोलॉजिस्ट के काम का बोझ करीब 44 फीसदी तक कम हुआ।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

महिलाओं को स्तन में नई गांठ, निप्पल से असामान्य स्राव, निप्पल का अंदर धंसना, त्वचा पर गड्ढे पड़ना या स्तन के आकार में बदलाव जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, भले ही पिछली जांच सामान्य रही हो।