राज्यपाल के निर्देश पर बनी कमेटी
इस नई नीति के मसौदे को तैयार करने के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन के निर्देश पर एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन कर सुझाव देगी।
एक महीने में देना होगा सुझाव
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और अनुशंसाएं प्रस्तुत करनी होंगी। इन सुझावों के आधार पर अंतिम निर्णय कुलाधिपति द्वारा लिया जाएगा। नई नीति लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों के बीच शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को एक स्पष्ट ढांचा मिलेगा।
आरक्षण का पालन अनिवार्य
नई व्यवस्था में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्थानांतरण प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर का पूरा पालन हो। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी।
कुछ विश्वविद्यालय रहेंगे बाहर
यह नीति सभी विश्वविद्यालयों पर लागू नहीं होगी। पटना विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और बिहार कृषि विश्वविद्यालय को इस दायरे से बाहर रखा गया है। कारण यह है कि इन संस्थानों के अपने अलग अधिनियम और प्रशासनिक ढांचे हैं।














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