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यूपी में कब आएगा मॉनसून? मौसम विभाग का बड़ा अपडेट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है, जहां कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। झुलसा देने वाली इस गर्मी के बीच मौसम विभाग (IMD) ने मॉनसून को लेकर एक राहतभरी जानकारी दी है। विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब देश के कई हिस्सों में सक्रिय हो चुका है और जल्द ही इसका असर उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की संभावना है।

देश में मॉनसून की शुरुआत, आगे बढ़ा सिस्टम

मौसम विभाग के अनुसार, 16 मई 2026 के आसपास दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही अंडमान-निकोबार क्षेत्र और आसपास के इलाकों में भी मॉनसून की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। यह संकेत है कि मौसम प्रणाली धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।

केरल में 26 मई के आसपास पहुंचेगा मॉनसून

IMD के अनुमान के मुताबिक, मॉनसून 26 मई 2026 के आसपास केरल में दस्तक दे सकता है। हालांकि इसमें कुछ दिनों का अंतर संभव है, लेकिन इसके बाद मॉनसून देश के अन्य हिस्सों की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।

जून में यूपी तक पहुंचने की संभावना

केरल में प्रवेश के बाद मॉनसून सामान्य रूप से उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है। इसी क्रम में जून महीने के दौरान इसके उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मॉनसून के सक्रिय होने के बाद प्रदेश में गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल गर्मी से राहत नहीं

हालांकि मॉनसून की यह खबर राहत देने वाली है, लेकिन फिलहाल यूपी के लोगों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिलने वाली है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों, खासकर 20 से 22 मई के बीच, प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

तापमान में और बढ़ोतरी

IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर दक्षिणी और पश्चिमी यूपी के जिलों में गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं। दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहने की संभावना जताई गई है।

8वें वेतन आयोग: रेलवे ड्राइवर की क्या होगी नई सैलरी?

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों में उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासकर रेलवे में कार्यरत लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट की सैलरी में बड़े इजाफे की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से लेकर कुल इन-हैंड सैलरी तक में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

वर्तमान बेसिक सैलरी क्या है?

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के अनुसार असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) की शुरुआती बेसिक सैलरी लगभग ₹19,900 (लेवल-2) है। इसके अलावा लोको पायलट को कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं, जिससे कुल मासिक आय बढ़ जाती है।

फिटमेंट फैक्टर से तय होगी नई सैलरी

8वें वेतन आयोग में सबसे बड़ा बदलाव फिटमेंट फैक्टर को लेकर माना जा रहा है। इसी आधार पर नई बेसिक सैलरी तय होगी। 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर ALP की बेसिक सैलरी लगभग ₹38,000 तक पहुंच सकती है। जबकि 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर यह बढ़कर करीब ₹51,000 से अधिक हो सकती है।

कर्मचारी यूनियनों की मांग यदि मानी जाती है (लगभग 3.83 फिटमेंट फैक्टर), तो शुरुआती बेसिक सैलरी ₹55,000 से ₹60,000 के आसपास पहुंच सकती है।

पद के अनुसार संभावित इन-हैंड सैलरी

रेलवे में लोको पायलट को केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि कई भत्ते जैसे किलोमीटर अलाउंस, नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम और HRA आदि भी मिलते हैं। इन्हें जोड़ने के बाद कुल सैलरी में बड़ा इजाफा संभव है।

असिस्टेंट लोको पायलट (ALP): ₹65,000 - ₹78,000

गुड्स ट्रेन लोको पायलट: ₹80,000 - ₹95,000

पैसेंजर ट्रेन लोको पायलट: ₹1,10,000 - ₹1,25,000

मेल/एक्सप्रेस/वंदे भारत लोको पायलट: ₹1,40,000 - ₹1,65,000+

नोट: दरअसल यह गणना वर्तमान में चल रही कर्मचारी यूनियनों की मांगों और विशेषज्ञों के अनुमानों पर आधारित है। सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने पर ही सटीक आंकड़े स्पष्ट होंगे।

कल बनेगा 'अमृत सिद्धि योग', 4 राशियों के लिए खुलेंगे सुख-समृद्धि के द्वार

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कल एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है, जिसे ‘अमृत सिद्धि योग’ कहा जाता है। यह योग कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, नए अवसर और पुराने अटके हुए कार्यों में सफलता का संकेत देता है। इस विशेष योग का प्रभाव कुछ राशियों पर अधिक शुभ माना जा रहा है, जिससे उनके जीवन में सुख-समृद्धि के नए द्वार खुल सकते हैं।

क्या है अमृत सिद्धि योग?

अमृत सिद्धि योग को ज्योतिष में अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल जल्दी और बेहतर मिलने की मान्यता है। इसे सफलता, उन्नति और बाधाओं के अंत का योग भी कहा जाता है। इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ माना जाता है।

इन 4 राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। रुके हुए कार्यों में गति आएगी और धन लाभ के नए अवसर बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को भी अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है।

2. कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए यह योग मानसिक शांति और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है। लंबे समय से चली आ रही चिंताओं में कमी आएगी और किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने के संकेत हैं।

3. कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय करियर के लिहाज से शुभ माना जा रहा है। कार्यस्थल पर सम्मान बढ़ सकता है और नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। मेहनत का पूरा फल मिलने के संकेत हैं।

4. धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह योग भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। यात्रा, शिक्षा और नए अवसरों में लाभ मिलने की संभावना है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं।

CM सम्राट चौधरी का प्लान: जमीन मालिकों को मिलेगा 4 गुना मुआवजा

पटना। बिहार में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत राज्य के 11 प्रमुख शहरों के आसपास आधुनिक सुविधाओं से लैस नई सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस कदम से न सिर्फ शहरी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि किसानों और जमीन मालिकों को भी बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा।

11 शहरों के आसपास बनेंगी नई टाउनशिप

सरकारी योजना के अनुसार पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, छपरा और सोनपुर सहित कुल 11 शहरों के आसपास नए टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा गया, पूर्णिया, सीतामढ़ी, मुंगेर और सहरसा जैसे शहर भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे। भविष्य में सासाराम को भी इस योजना में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

संकट की स्थिति में चार गुना मुआवजा

मुख्यमंत्री ने इस समस्या को देखते हुए बड़ा राहतभरा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी जमीन मालिक को आकस्मिक जरूरत जैसे शादी, स्वास्थ्य आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा के लिए पैसों की आवश्यकता होती है, तो वे सीधे जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। ऐसे मामलों में सरकार भूमि अधिग्रहण के निर्धारित मूल्य का चार गुना भुगतान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में करेगी।

जमीन खरीद-बिक्री पर लगी रोक

इन क्षेत्रों में मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इस फैसले के बाद स्थानीय किसानों और जमीन मालिकों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, खासकर तब जब उन्हें पारिवारिक जरूरतों के लिए तुरंत पैसों की आवश्यकता होती है।

किसानों को मिलेगा दो विकल्प

इस परियोजना के तहत जमीन मालिकों को दो विकल्प दिए जाएंगे। पहला, वे विकसित टाउनशिप में हिस्सा ले सकते हैं, जिसमें उन्हें उनकी जमीन के बदले विकसित प्लॉट या शेयर मिलेगा। दूसरा विकल्प यह है कि वे चाहें तो सरकार से नकद मुआवजा लेकर अपनी जमीन छोड़ सकते हैं, जो मौजूदा दर से चार से पांच गुना तक हो सकता है।

बिहार सरकार का फैसला, MBBS डॉक्टरों को बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य में अब एमबीबीएस डॉक्टरों को विशेष अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) प्रशिक्षण देने की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इस फैसले का उद्देश्य न सिर्फ डॉक्टरों की क्षमता बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण और छोटे इलाकों में जांच सुविधाओं की कमी को भी दूर करना है।

पीसीपीएनडीटी कानून के तहत नई पहल

यह पूरी व्यवस्था गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम के नियमों के तहत लागू की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि अल्ट्रासाउंड सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और कानूनी दायरे में रखते हुए विस्तार दिया जाए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जा सके।

6 महीने का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

सरकार द्वारा तय किए गए नए नियमों के अनुसार, एमबीबीएस डॉक्टरों को स्तर-1 अल्ट्रासाउंड प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसकी अवधि छह महीने होगी। इस दौरान डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन के साथ-साथ पेट और श्रोणी (पेल्विस) क्षेत्र की जांच की बारीकियां सिखाई जाएंगी।

क्या-क्या सिखाया जाएगा प्रशिक्षण में?

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉक्टरों को कई महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी, जैसे गर्भावस्था से जुड़ी सामान्य अल्ट्रासाउंड जांच, पेट के अंदरूनी अंगों की स्थिति का मूल्यांकन, महिलाओं के पेल्विक क्षेत्र की जांच, रिपोर्ट तैयार करने और उसका विश्लेषण करने की तकनीक। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद डॉक्टर निर्धारित मानकों के अनुसार अल्ट्रासाउंड जांच करने के लिए योग्य माने जाएंगे।

संस्थानों और सीटों का होगा निर्धारण

राज्य सरकार ने प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों के चयन और हर संस्थान में सीटों की संख्या तय करने की प्रक्रिया को भी मंजूरी दे दी है। इससे प्रशिक्षण प्रणाली को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद

इस कदम को बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे न केवल मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिलेगी, बल्कि डॉक्टरों को भी नई तकनीकी दक्षता हासिल होगी। साथ ही PCPNDT कानून के पालन को और मजबूत किया जा सकेगा।

पुरानी पेंशन पर 1 बड़ा फैसला, इन कर्मचारियों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। देश में आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर एक अहम और राहत भरा अपडेट सामने आया है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठक में कुछ विशेष श्रेणी के कर्मचारियों को OPS के दायरे में शामिल करने पर सहमति बनी है। इस फैसले को कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर उन परिवारों के लिए जो अनुकंपा नियुक्ति के तहत सरकारी सेवा में आए हैं।

उच्च स्तरीय बैठक में हुआ महत्वपूर्ण निर्णय

रिपोर्ट के अनुसार, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कर्मचारी संगठनों ने लंबे समय से इस मुद्दे को उठाया था, जिसे अब गंभीरता से लिया गया है।

2003-2004 के मामलों पर फोकस

बैठक में खास तौर पर उन मामलों पर विचार किया गया जिनमें किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु वर्ष 2003 में हुई थी और उनके आश्रितों को 2004 में अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी। ऐसे कर्मचारियों को अब पुरानी पेंशन योजना के तहत लाभ देने की दिशा में सहमति बनी है, बशर्ते वे सेवा नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करते हों।

लंबे समय से चली आ रही मांग

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह मांग कई वर्षों से लंबित थी और इस पर कई बार पेंशन विभाग के साथ बातचीत भी हुई थी। हालांकि, पहले इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं हो पा रहा था। अब सरकार की इस पहल को एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो कर्मचारियों के हित में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

आधिकारिक आदेश का इंतजार

फिलहाल इस फैसले को लेकर विस्तृत कार्यवृत्त (मिनट्स) जारी किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद संबंधित विभागों में इसका क्रियान्वयन शुरू किया जाएगा। कर्मचारी वर्ग अब आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहा है, ताकि उन्हें इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

सम्राट सरकार की तैयारी: बिहार में इन्हे मिलेगी सरकारी नौकरी

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत अब चयनित खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देने की तैयारी की जा रही है। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को न केवल प्रोत्साहन देना है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और स्थिर करियर भी उपलब्ध कराना है। इस दिशा में 2026 के लिए विशेष भर्ती विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सभी विभागों से मांगी गई रिक्त पदों की जानकारी

राज्य सरकार ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए सभी विभागों और सरकारी कार्यालयों से खाली पदों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कितने और किस स्तर के पदों पर खिलाड़ियों की नियुक्ति की जा सकती है। जैसे ही रिक्तियों का डेटा प्राप्त होगा, उसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

2026 में आएगा विशेष भर्ती विज्ञापन

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति के लिए अलग से विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। यह भर्ती प्रक्रिया राज्य की खेल नीति के तहत की जा रही है, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में अवसर मिल सके।

नियमावली के तहत सीधी नियुक्ति

इस प्रक्रिया में 'बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2025' का पालन किया जाएगा। नियमों के अनुसार खिलाड़ियों की नियुक्ति सीधी भर्ती वाले पदों पर की जाएगी। प्रोन्नति कोटे वाले पद इसमें शामिल नहीं होंगे। चयनित खिलाड़ियों को राज्य सरकार के असैनिक संवर्ग के विभिन्न मूल पदों पर नियुक्त किया जाएगा।

खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य

सरकार का मानना है कि इस पहल से राज्य के युवा खिलाड़ियों को खेल के प्रति अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उन्हें यह भरोसा मिलेगा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उन्हें सरकारी नौकरी जैसी स्थायी सुविधा भी प्राप्त हो सकती है। इससे खेलों में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता दोनों में सुधार होने की उम्मीद है।

पुरुषों में तेजी से बढ़ रहा बांझपन, जानिए इसके 5 सबसे बड़े कारण

हेल्थ डेस्क। आजकल पुरुषों में बांझपन यानी मेल इन्फर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले जहां संतान न होने की समस्या का कारण महिलाओं को माना जाता था, वहीं अब डॉक्टरों का कहना है कि करीब 40 से 50 प्रतिशत मामलों में पुरुषों की फर्टिलिटी भी जिम्मेदार होती है। बदलती जीवनशैली, तनाव और खानपान की गलत आदतें पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डाल रही हैं।

1. खराब लाइफस्टाइल

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन कर रहे हैं। इससे शरीर में पोषण की कमी होने लगती है, जिसका सीधा असर स्पर्म क्वालिटी और स्पर्म काउंट पर पड़ता है। इसके अलावा देर रात तक जागना और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी फर्टिलिटी घटाने का बड़ा कारण बन रही है।

2. तनाव और मानसिक दबाव

लगातार काम का दबाव, आर्थिक चिंता और निजी जीवन का तनाव पुरुषों के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देता है। डॉक्टरों के मुताबिक अत्यधिक तनाव टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को प्रभावित करता है, जिससे स्पर्म बनने की प्रक्रिया कमजोर हो जाती है। लंबे समय तक तनाव में रहने वाले पुरुषों में बांझपन का खतरा अधिक देखा जा रहा है।

3. धूम्रपान और शराब का सेवन

सिगरेट, तंबाकू और शराब का सेवन पुरुषों की प्रजनन क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। धूम्रपान से स्पर्म की गुणवत्ता खराब होती है, जबकि अत्यधिक शराब हार्मोन असंतुलन पैदा करती है। कई शोधों में यह सामने आया है कि नशे की आदत रखने वाले पुरुषों में स्पर्म काउंट तेजी से घटता है।

4. मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता

मोटापा भी पुरुषों में बांझपन का बड़ा कारण बनता जा रहा है। अधिक वजन होने से शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे स्पर्म उत्पादन प्रभावित होता है। लंबे समय तक बैठकर काम करने और व्यायाम न करने से यह समस्या और बढ़ जाती है। विशेषज्ञ नियमित एक्सरसाइज और संतुलित आहार अपनाने की सलाह देते हैं।

5. मोबाइल-लैपटॉप और बढ़ती गर्मी का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखकर काम करना या मोबाइल फोन को जेब में रखना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे शरीर के उस हिस्से का तापमान बढ़ता है, जो स्पर्म उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। लगातार गर्म वातावरण में रहने वाले पुरुषों में भी फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं अधिक देखी गई हैं।

पुरुषों को सबसे ज्यादा परेशान करती हैं ये 5 रोग, हो जाएं सावधान

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खानपान और बढ़ते तनाव का असर पुरुषों की सेहत पर तेजी से दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसी बीमारियां हैं जिनका खतरा पुरुषों में अधिक देखा जाता है। समय पर ध्यान न देने पर ये समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि नियमित जांच, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं पुरुषों में आमतौर पर देखी जाने वाली 5 प्रमुख बीमारियों के बारे में।

1. हृदय रोग

पुरुषों में हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। धूम्रपान, तनाव, जंक फूड और व्यायाम की कमी इसके बड़े कारण माने जाते हैं। सीने में दर्द, सांस फूलना और थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

2. डायबिटीज

बदलती जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मधुमेह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पुरुषों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा ज्यादा देखा जाता है। अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और कमजोरी इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं।

3. लिवर संबंधी बीमारी

अत्यधिक शराब सेवन, तला-भुना भोजन और खराब खानपान की आदतें लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। फैटी लिवर की समस्या आजकल कम उम्र के पुरुषों में भी तेजी से बढ़ रही है। समय रहते जांच और खानपान में सुधार जरूरी माना जाता है।

4. मानसिक तनाव और डिप्रेशन

पुरुष अक्सर मानसिक तनाव को खुलकर साझा नहीं करते, जिससे समस्या बढ़ सकती है। काम का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां और अनियमित दिनचर्या मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। लगातार चिंता, चिड़चिड़ापन और नींद की कमी इसके संकेत हो सकते हैं।

5. मोटापा से होने वाली कई बीमारियां

मोटापा कई दूसरी बीमारियों की जड़ माना जाता है। पेट के आसपास बढ़ती चर्बी हार्ट डिजीज, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती है। नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। पुरुष इसे नजरअंदाज न करें।

21 मई को बनेगा 2 शक्तिशाली योग: 5 राशियों की चमक सकती है किस्मत

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 21 मई का दिन बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन गुरु पुष्य नक्षत्र के साथ अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। इन शुभ योगों को धन, सफलता, खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस शुभ संयोग का असर कई राशियों के जीवन पर सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। खासतौर पर पांच राशियों के लिए यह समय आर्थिक लाभ, करियर में तरक्की और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है।

मेष राशि

मेष राशि के लोगों के लिए यह योग शुभ परिणाम देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी और व्यापार में लाभ मिलने के संकेत हैं। धन संबंधी मामलों में भी स्थिति मजबूत हो सकती है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए 21 मई का दिन नई खुशियां लेकर आ सकता है। निवेश और खरीदारी के लिए समय अच्छा माना जा रहा है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और करियर में नई उपलब्धि मिलने की संभावना है।

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों को इस शुभ योग का विशेष लाभ मिल सकता है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। व्यापार से जुड़े लोगों को बड़ा फायदा मिल सकता है।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक मजबूती लेकर आ सकता है। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा और नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

धनु राशि

धनु राशि पर गुरु ग्रह का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। शिक्षा, नौकरी और व्यापार के क्षेत्र में शुभ समाचार मिलने के संकेत हैं। नए कार्य शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल माना जा रहा है।

यूपी सरकार की घोषणा, स्कूलों में शुरू हुई गर्मी की छुट्टियां

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई जिलों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। बुंदेलखंड के बांदा जिले में तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसके बाद मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में रेड अलर्ट जारी किया है। तेज धूप और लू को देखते हुए सरकार ने स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों की घोषणा कर दी है।

15 जून तक बंद रहेंगे परिषदीय स्कूल

बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। बुधवार से छुट्टियां शुरू हो गई हैं और अब स्कूल 16 जून को दोबारा खुलेंगे। प्रदेश में करीब 1.34 लाख परिषदीय स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 1.45 करोड़ छात्र पढ़ाई करते हैं। भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया है।

यूपी बोर्ड स्कूलों में भी अवकाश

यूपी बोर्ड से संचालित माध्यमिक विद्यालयों में भी गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। इन स्कूलों में 21 मई से 30 जून तक अवकाश रहेगा। छुट्टियों से पहले शिक्षकों ने छात्रों को होमवर्क और वर्कबुक का कार्य देकर घर भेजा। कई स्कूलों में विद्यार्थियों को गर्मी में स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह भी दी गई।

जनगणना कार्य में लगे हैं शिक्षक

इस बार गर्मी की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना कार्य में व्यस्त रहेंगे। प्रदेश में जल्द शुरू होने वाली जनगणना प्रक्रिया के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसी कारण कई स्कूलों में इस बार अतिरिक्त गतिविधियां और समर कैंप आयोजित नहीं किए जा रहे हैं।

निजी स्कूलों में भी छुट्टियां

सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड से जुड़े कई निजी स्कूलों ने भी गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी हैं। अधिकांश निजी स्कूल जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में दोबारा खुलेंगे। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बढ़ते तापमान और लू के खतरे को देखते हुए बच्चों को घर पर सुरक्षित रखना जरूरी है।

मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू चलने की चेतावनी दी है। लोगों को दोपहर में घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। जानकारों का कहना है कि लगातार बढ़ता तापमान बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है, इसलिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत

नई दिल्ली। देशभर के गन्ना किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने चीनी उत्पादन सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने गन्ने का नया मूल्य 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जिससे किसानों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान मिलेगा।

कितना तय हुआ नया गन्ना मूल्य

सरकार द्वारा तय किया गया 365 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी दर के आधार पर लागू होगा। यदि रिकवरी दर इससे अधिक होती है तो किसानों को अतिरिक्त प्रीमियम भी दिया जाएगा। वहीं रिकवरी दर कम होने पर भुगतान में कुछ कमी का प्रावधान रखा गया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि जिन चीनी मिलों की रिकवरी दर 9.5 प्रतिशत से कम होगी, वहां किसानों के भुगतान में कोई कटौती नहीं की जाएगी। ऐसे किसानों को भी 338.30 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

किसानों को दोगुना से ज्यादा लाभ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार गन्ना उत्पादन की लागत करीब 182 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि नया FRP 365 रुपये तय किया गया है। यानी किसानों को उत्पादन लागत से 100 प्रतिशत से अधिक लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ेगा।

करोड़ों लोगों को मिलेगा फायदा

गन्ना उद्योग देश का एक बड़ा कृषि आधारित क्षेत्र माना जाता है। इससे करीब 5 करोड़ गन्ना किसान और उनके परिवार जुड़े हुए हैं। इसके अलावा चीनी मिलों और परिवहन जैसे क्षेत्रों में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। सरकार का कहना है कि नया मूल्य तय होने से किसानों के साथ-साथ पूरे चीनी उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

भुगतान व्यवस्था पर भी सरकार का फोकस

सरकार ने बताया कि पिछले सीजन में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का बड़ा हिस्सा जारी किया जा चुका है। अधिकांश किसानों को उनका भुगतान समय पर देने का प्रयास किया जा रहा है। मौजूदा सीजन में भी बड़ी मात्रा में गन्ना भुगतान किसानों के खातों में भेजा जा चुका है। सरकार का दावा है कि किसानों के हितों की रक्षा और समय पर भुगतान उसकी प्राथमिकता में शामिल है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, बच्चों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने स्कूली बच्चों के भारी बस्ते की समस्या को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी निजी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को एनसीईआरटी की स्कूल बैग पॉलिसी का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। सरकार का उद्देश्य बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक बोझ कम करना और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। 

1. बच्चे के वजन के हिसाब से बैग का वजन

नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी छात्र के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बच्चे का वजन 25 किलोग्राम है तो उसका बैग अधिकतम 2.5 किलोग्राम तक ही होना चाहिए। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों की पीठ और कंधों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होगा।

2. बच्चों के बैग की नियमित जांच करेंगे शिक्षक

कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के बैग की नियमित जांच की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है। शिक्षक समय-समय पर यह देखेंगे कि बच्चे जरूरत से ज्यादा सामान तो नहीं ला रहे हैं। अगर बैग अधिक भारी पाया गया तो अभिभावकों को इसकी जानकारी दी जाएगी।

3. स्कूलों में लगानी होगी वजन मापने की मशीन

शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में वजन मापने की मशीन लगाना अनिवार्य कर दिया है। इससे समय-समय पर बच्चों और उनके बैग का वजन जांचा जा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए जरूरी है और इससे नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

4. टाइम-टेबल में होगा बड़ा बदलाव

स्कूलों को ऐसा टाइम-टेबल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे बच्चों को रोजाना सभी किताबें और कॉपियां लेकर स्कूल न आना पड़े। केवल जरूरी विषयों की पुस्तकें ही बैग में रखने की व्यवस्था की जाएगी। इससे बच्चों का बैग हल्का रहेगा और अनावश्यक बोझ कम होगा।

5. खेल और गतिविधियों पर भी दिया जाएगा जोर

नई गाइडलाइन में पढ़ाई के साथ खेल, कला और शारीरिक गतिविधियों को भी पर्याप्त समय देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि केवल किताबों का दबाव बच्चों के मानसिक तनाव को बढ़ाता है। संतुलित गतिविधियों से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।

बिहार में बिछेंगी 2 नई रेल लाइनें, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दिल्ली-हावड़ा मेन रेल लाइन को और मजबूत बनाने की दिशा में रेलवे ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। आरा जंक्शन होकर गुजरने वाले इस व्यस्त रेलखंड पर अब दो नई रेल लाइनें बिछाने की योजना बनाई जा रही है।  इस परियोजना पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

दो से चार लाइन वाला बनेगा रेलखंड

फिलहाल इस रूट पर केवल दो रेल लाइनें मौजूद हैं, जिसके कारण ट्रेनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यात्रियों को अक्सर ट्रेनों की देरी और परिचालन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रेलवे की नई योजना पूरी होने के बाद यह रेलखंड चार लाइन वाला बन जाएगा। इससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी और लेटलतीफी में कमी आने की उम्मीद है।

सोन नदी पर बनेगा नया रेल पुल

इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कोईलवर में सोन नदी पर बनने वाला नया रेल पुल है। यह पुल मौजूदा रेल पुल के समानांतर बनाया जाएगा। पूर्व मध्य रेलवे ने इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है और तकनीकी जांच की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। नए पुल के निर्माण के बाद पुराने और नए पुल को मिलाकर कुल चार रेल लाइनें उपलब्ध हो जाएंगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु और तेज हो सकेगी।

एक साथ गुजर सकेंगी कई ट्रेनें

अभी सोन नदी पर सीमित रेल लाइन होने के कारण कई बार ट्रेनों को रोकना पड़ता है। खासकर मालगाड़ियों और लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के कारण परिचालन प्रभावित होता है। चार लाइन बनने के बाद अलग-अलग ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इससे मालगाड़ियों के कारण एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार प्रभावित नहीं होगी और यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवा मिल सकेगी।

कई जिलों को मिलेगा फायदा

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लाभ आरा, बक्सर, बिहिया, डुमरांव और पटना समेत पूरे शाहाबाद क्षेत्र को मिलेगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से व्यापार, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में पूर्व मध्य रेलवे के लिए काफी अहम साबित होगी। रेलवे बोर्ड और केंद्रीय कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

CM सम्राट चौधरी का ऐलान: जमीन मालिकों को बड़ी खुशखबरी

बिहार। बिहार सरकार की नई सेटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि जिन लोगों की जमीन नई टाउनशिप परियोजनाओं में शामिल की गई है, उन्हें जरूरत पड़ने पर सरकार चार गुना तक मुआवजा उपलब्ध कराएगी। सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के साथ जमीन मालिकों के हितों की भी पूरी सुरक्षा की जाएगी।

जरूरत पड़ने पर मिलेगी आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी परिवार में बेटी की शादी, बीमारी या अन्य आपात स्थिति आती है तो प्रभावित जमीन मालिक संबंधित जिले के डीएम को आवेदन दे सकते हैं। आवेदन की जांच के बाद सरकार जमीन की कीमत के अनुसार चार गुना तक राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजेगी। सरकार ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के निर्देश दिए हैं ताकि लोगों को समय पर सहायता मिल सके।

11 शहरों के आसपास बनेंगी नई टाउनशिप

राज्य सरकार बिहार के कई बड़े शहरों के आसपास नई सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की तैयारी कर रही है। जिन शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है उनमें पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, पूर्णिया, दरभंगा, छपरा, सोनपुर, सीतामढ़ी, मुंगेर और सहरसा प्रमुख हैं। इसके अलावा सासाराम के आसपास भी नई टाउनशिप बसाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने इन प्रस्तावित क्षेत्रों का नक्शा भी जारी कर दिया है।

जमीन की खरीद-बिक्री पर फिलहाल रोक

सरकार ने जिन क्षेत्रों को टाउनशिप विकास के लिए चिन्हित किया है, वहां जमीन की खरीद-बिक्री और ट्रांसफर पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध एक वर्ष तक लागू रहेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम जमीन की कीमतों में अनियमितता रोकने और किसानों तथा रैयतों को नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया है। हालांकि इस फैसले के कारण कई लोगों को फिलहाल जमीन बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मास्टर प्लान तैयार होने के बाद हटेगी रोक

सरकार के अनुसार नई टाउनशिप का मास्टर प्लान तैयार होने के बाद जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी जाएगी। इसके बाद विकास कार्य तेजी से शुरू किए जाएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि टाउनशिप विकसित करने वाली एजेंसियां जमीन मालिकों को परियोजना में हिस्सेदारी देने का विकल्प भी देंगी। यदि कोई जमीन मालिक हिस्सेदारी नहीं लेना चाहता है, तो उसे चार से पांच गुना तक मुआवजा दिया जा सकता है।

10 दिन में बवासीर से आराम दिला सकती हैं ये 4 घरेलू चीजें

हेल्थ डेस्क। आजकल खराब खानपान, कम पानी पीना और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत के कारण बवासीर यानी पाइल्स की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी में दर्द, जलन, सूजन और मल त्याग के दौरान परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती अवस्था में सही खानपान और घरेलू उपाय अपनाकर काफी राहत पाई जा सकती है।

कुछ प्राकृतिक चीजें पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद करती हैं, जिससे बवासीर के लक्षणों में आराम मिल सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 4 घरेलू चीजों के बारे में जो इस समस्या में लाभकारी मानी जाती हैं।

1. इसबगोल

इसबगोल फाइबर से भरपूर होता है और कब्ज दूर करने में मदद करता है। बवासीर की सबसे बड़ी वजहों में कब्ज भी शामिल है। रात में सोने से पहले गुनगुने पानी या दूध के साथ इसबगोल लेने से मल नरम रहता है और दर्द कम हो सकता है।

2. छाछ

छाछ पेट को ठंडक देने और पाचन सुधारने में मदद करती है। इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया आंतों को स्वस्थ रखते हैं। हल्का भुना जीरा और थोड़ा काला नमक मिलाकर छाछ पीने से पेट साफ रहने में मदद मिल सकती है। इससे पट में कब्ज नहीं बनता है और बवासीर ठीक होती है।

3. एलोवेरा

एलोवेरा को प्राकृतिक रूप से सूजन और जलन कम करने वाला माना जाता है। एलोवेरा का सेवन सीमित मात्रा में करने या डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपयोग करने से आराम मिल सकता है। कई लोग बाहरी जलन कम करने के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं।

4. पपीता

पपीता पाचन के लिए बेहद लाभकारी फल माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज कम करने में मदद करते हैं। रोजाना पपीता खाने से मल त्याग आसान हो सकता है और पेट हल्का रहता है। साथ ही साथ बवासीर से भी आसाम मिलता हैं।

यूपी में इन 'कर्मचारियों' को बड़ी खुशखबरी, बढ़ी सैलरी लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की कार्यशालाओं में कार्यरत आउटसोर्स तकनीकी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे कर्मचारियों को आखिरकार सरकार और निगम प्रशासन की ओर से बड़ा तोहफा मिला है। 

अब इन कर्मचारियों के वेतन में तीन हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें 19 मई से लागू हो चुकी हैं, जिससे प्रदेश के करीब चार हजार कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं।

अनुभव के आधार पर तय हुई नई श्रेणियां

परिवहन निगम ने कर्मचारियों को उनके अनुभव के अनुसार तीन वर्गों में बांटा है। दो वर्ष तक काम करने वाले कर्मचारियों को अकुशल श्रेणी में रखा गया है। वहीं दो से पांच वर्ष तक का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को अर्द्धकुशल श्रेणी में शामिल किया गया है। पांच वर्ष से अधिक अनुभव वाले कर्मचारियों को कुशल श्रेणी का दर्जा दिया गया है। निगम प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था श्रम विभाग के आदेश के अनुसार लागू की गई है और किसी भी कर्मचारी को तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं किया जाएगा।

अलग-अलग जिलों में अलग मिलेगा भुगतान

प्रदेश में जिलों की श्रेणी के अनुसार कर्मचारियों का पारिश्रमिक तय किया गया है। गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जैसे प्रथम श्रेणी के जिलों में कर्मचारियों को सबसे अधिक मानदेय मिलेगा। नगर निगम वाले जिलों के लिए अलग दरें तय की गई हैं, जबकि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अन्य जिलों के लिए अलग भुगतान संरचना लागू होगी।

प्रथम श्रेणी जिले: गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर

इन जिलों में अकुशल कर्मचारियों को अब लगभग 13,690 रुपये मिलेंगे। अर्द्धकुशल कर्मचारियों का मानदेय बढ़कर 15,059 रुपये हो गया है, जबकि कुशल कर्मचारियों को 16,868 रुपये तक भुगतान मिलेगा।

द्वितीय श्रेणी जिले: नगर निगम वाले क्षेत्र

नगर निगम क्षेत्रों में कार्यरत अकुशल कर्मचारियों को 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल कर्मचारियों को 14,306 रुपये और कुशल कर्मचारियों को 16,025 रुपये तक मानदेय दिया जाएगा।

तृतीय श्रेणी वाले जिलों के लिए मानदेय

अन्य प्रथम और द्वितीय श्रेणी जिलों में अकुशल कर्मचारियों को 12,356 रुपये, अर्द्धकुशल कर्मचारियों को 13,590 रुपये तथा कुशल कर्मचारियों को 15,224 रुपये तक भुगतान मिलेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।

निगम प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश

परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित सेवा प्रबंधक जिम्मेदार माने जाएंगे। बढ़े हुए मानदेय का अतिरिक्त वित्तीय भार निगम स्वयं वहन करेगा।

बिहार सरकार का फैसला, जमीन मालिकों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में फर्जी जमीन रजिस्ट्री और भू माफियाओं की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है। इस नई व्यवस्था से अब जमीन खरीदने या बेचने से पहले उसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को धोखाधड़ी से बचाने में मदद मिलेगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी।

ऑनलाइन पोर्टल शुरू

नई व्यवस्था के तहत जमीन खरीदने या बेचने वाले व्यक्ति को संबंधित जमीन के दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इसके बाद संबंधित अंचलाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से कागजात की जांच करेंगे। जांच पूरी होने के बाद जमीन की स्थिति, प्रकृति और वैधता की जानकारी ई-मेल के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी। इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जमीन के असली रिकॉर्ड की पुष्टि पहले ही हो जाएगी। इससे नकली दस्तावेजों के आधार पर होने वाली फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगेगी और विवादित जमीन की खरीद-बिक्री से लोग बच सकेंगे।

भू माफियाओं पर लगेगी रोक

सरकार की इस पहल को भू माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। कई मामलों में देखा गया है कि फर्जी कागजात तैयार कर जमीन की अवैध बिक्री कर दी जाती थी। अब ऑनलाइन जांच और प्रशासनिक सत्यापन के कारण ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि सरकार ने यह सुविधा वैकल्पिक रखी है। यानी इच्छुक लोग जांच करवाकर सुरक्षित रजिस्ट्री करा सकते हैं, जबकि बिना जांच के भी रजिस्ट्री की प्रक्रिया जारी रहेगी।

घर बैठे होगी जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री

राज्य सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को भी बड़ी राहत दी है। अब 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। 21 मई से शुरू हो रही नई सुविधा के तहत निबंधन विभाग की टीम सीधे उनके घर पहुंचकर पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करेगी। टीम आवश्यक दस्तावेज और उपकरण लेकर जाएगी तथा मौके पर ही सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। खास बात यह है कि यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क होगी। इससे बुजुर्गों को लंबी लाइन और कार्यालय के चक्कर से राहत मिलेगी।

बिहार में अब पेपरलेस होगी रजिस्ट्री प्रक्रिया

बिहार सरकार निबंधन विभाग को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। ई-निबंधन के बाद अब दस्तावेजों की मैन्युअल प्रक्रिया को कम किया जा रहा है। आने वाले समय में आवेदन, दस्तावेज अपलोड और ई-स्टांपिंग जैसी सुविधाएं पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। साथ ही बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी और लोगों का समय व खर्च दोनों बचेंगे।

बिहार सरकार का फैसला, 75% मिलेगा अनुदान, उठायें लाभ!

पटना। बिहार सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य में ई-वाहनों की संख्या बढ़ाने और चार्जिंग सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वालों को भारी अनुदान देने की घोषणा की है। 

नई योजना के तहत सार्वजनिक और निजी स्तर पर चार्जिंग स्टेशन लगाने वाले लोगों और संस्थानों को उपकरण खरीद पर 75 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य में कुल वाहन बिक्री में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

एसी और डीसी चार्जर पर मिलेगी सहायता

परिवहन विभाग के अनुसार, ई-वाहनों के लिए अलग-अलग क्षमता के चार्जर लगाने पर अनुदान दिया जाएगा। धीमे और मध्यम क्षमता वाले एसी चार्जर लगाने वालों को विशेष लाभ मिलेगा। योजना के तहत पहले 450 एसी चार्जर लगाने पर अधिकतम 75 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं तेज क्षमता वाले एसी चार्जर के लिए पहले 450 यूनिट पर अधिकतम 2.25 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मध्यम क्षमता वाले डीसी चार्जर लगाने वालों को भी अधिकतम 2.25 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में चार्जिंग नेटवर्क तेजी से विकसित होगा।

सरकारी संस्थानों को भी मिलेगा लाभ

राज्य सरकार ने इस योजना का लाभ सरकारी संस्थानों को भी देने का निर्णय लिया है। राज्य के निगम, बोर्ड, नगर निकाय और लोक उपक्रम अपनी जमीन पर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकेंगे। ऐसे संस्थानों को भी सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करना है। इससे दूर-दराज के इलाकों में भी ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

आवासीय परिसरों में बढ़ेंगी सुविधाएं

सरकार ने आवासीय भवनों और हाउसिंग सोसायटी को भी योजना में शामिल किया है। कल्याण संघों और सरकारी गृह समितियों को निजी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि इसके लिए न्यूनतम पांच कार पार्किंग की सुविधा होना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि यदि लोगों को अपने घर या आवासीय परिसर में चार्जिंग सुविधा मिलेगी तो वे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए अधिक प्रेरित होंगे।

कल से गुरु होंगे मेहरबान, 5 राशियों के जीवन में आएंगे अच्छे दिन

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को ज्ञान, धन, सफलता और शुभ फल का कारक माना जाता है। जब गुरु की स्थिति मजबूत होती है तो कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। कल से गुरु के प्रभाव में होने वाले परिवर्तन का असर विशेष रूप से पांच राशियों पर शुभ माना जा रहा है। इन राशियों के लोगों को करियर, व्यापार, धन और पारिवारिक जीवन में अच्छे संकेत मिल सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि के लोगों के लिए आने वाला समय उत्साह और सफलता लेकर आ सकता है। रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है। नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जबकि व्यापारियों को लाभ के नए अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है।

मिथुन राशि

गुरु का शुभ प्रभाव मिथुन राशि वालों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। शिक्षा और करियर से जुड़े मामलों में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और लंबे समय से चल रही परेशानियों में राहत मिल सकती है।

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय काफी लाभकारी माना जा रहा है। समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है। नौकरी में पदोन्नति या नई उपलब्धि मिलने के संकेत हैं। व्यापार में भी अच्छी प्रगति देखने को मिल सकती है।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए गुरु का प्रभाव आर्थिक मामलों में राहत लेकर आ सकता है। धन लाभ के योग बन रहे हैं। परिवार और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। कोई पुराना रुका हुआ काम पूरा होने से मन प्रसन्न रहेगा।

धनु राशि

धनु राशि पर गुरु की विशेष कृपा रहने वाली है क्योंकि गुरु इस राशि के स्वामी माने जाते हैं। करियर और व्यापार में बड़ी सफलता मिलने के संकेत हैं। नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं और आय के स्रोत बढ़ने की संभावना है। मानसिक शांति और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी।

यूपी में शिक्षकों के लिए फरमान, गर्मी की छुट्टियों में भी रहेगी ड्यूटी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए इस बार गर्मी की छुट्टियां पूरी तरह आरामदायक नहीं रहने वाली हैं। राज्य सरकार की ओर से जनगणना और विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े कार्यों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके चलते इस बार ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी शिक्षकों को लगातार सरकारी जिम्मेदारियां निभानी पड़ेंगी।

गर्मी की छुट्टियों का कार्यक्रम जारी

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 20 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। वहीं माध्यमिक विद्यालयों में 21 मई से 30 जून तक छुट्टियां रहेंगी। हालांकि छुट्टियों के दौरान भी शिक्षकों को मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए शिक्षकों की सेवाएं जरूरी हैं। प्रदेश में 22 मई से 20 जून तक जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें पांच लाख से अधिक गणनाकर्मियों की तैनाती की जा रही है। इनमें बड़ी संख्या शिक्षकों की है।

परीक्षाओं और जनगणना में ड्यूटी

जनगणना कार्य के अलावा कई शिक्षकों को विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े कार्यों में भी लगाया जा रहा है। परीक्षा केंद्रों की निगरानी, मूल्यांकन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण शिक्षकों की व्यस्तता बढ़ने वाली है। इसी वजह से इस बार परिषदीय विद्यालयों में समर कैंप आयोजित नहीं किए जाएंगे। पिछले वर्ष बच्चों के लिए खेल, कला, संगीत और गतिविधि आधारित कार्यक्रम चलाए गए थे, लेकिन इस बार भीषण गर्मी और सरकारी कार्यों के दबाव को देखते हुए विभाग ने यह निर्णय लिया है।

तबादला प्रक्रिया पर भी असर संभव

जनगणना कार्य के चलते शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों की प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से दूसरे जिलों में स्थानांतरण का इंतजार कर रहे शिक्षकों को अब और देरी की चिंता सताने लगी है। शिक्षकों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यों के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे कई कर्मचारियों को पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती

एक ओर सरकार जनगणना और प्रशासनिक कार्यों को समय पर पूरा करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की नाराजगी भी बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो सकती है।

यूपी सरकार ने दी सौगात: किसानों के लिए 3 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन को लेकर किसानों के लिए बड़ी राहत भरी घोषणा की है। राज्य सरकार इस बार किसानों को बड़े स्तर पर प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने जा रही है, ताकि खेती की लागत कम हो और उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके। सरकार ने खरीफ फसलों के लिए लगभग 1,99,910 क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य तय किया है।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी विक्रय केंद्रों तक 31 मई तक हर हाल में बीज पहुंचा दिए जाएं, ताकि किसानों को समय पर बीज मिल सके और बुवाई में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

किसानों को समय पर मिलेगा बीज

सरकारी आंकड़ों के अनुसार लक्ष्य के मुकाबले अब तक 75,429 क्विंटल बीज विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जा चुका है। इनमें से 2636 क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को वितरित भी किए जा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराकर फसल उत्पादन बढ़ाया जाए। प्रमाणित बीजों के उपयोग से पैदावार में सुधार के साथ रोगों का खतरा भी कम होता है।

धान समेत कई फसलों के लिए लक्ष्य

इस बार धान के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार ने 80 हजार क्विंटल धान बीज वितरण का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 64,228 क्विंटल बीज पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा अन्य फसलों के लिए भी बड़े पैमाने पर बीज वितरण किया जाएगा। 

मूंगफली के लिए 57,446 क्विंटल, उर्द के लिए 23,958 क्विंटल और अरहर के लिए 21,225 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य तय किया गया है। मूंग, तिल और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए भी हजारों क्विंटल बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे किसानों को विविध खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

मोटे अनाजों को भी मिलेगा बढ़ावा

सरकार मोटे अनाज यानी श्री अन्न की खेती को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत ज्वार, बाजरा, रागी, सावा, कोदो, काकुन और कुटकी जैसी फसलों के बीज भी अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। बाजरा के लिए 1972 क्विंटल और रागी के लिए 1500 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि मोटे अनाज पोषण के साथ-साथ कम पानी में भी अच्छी पैदावार देते हैं, इसलिए किसानों को इनकी खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

पोर्टल पर करना होगा आवेदन

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि अनुदान पर प्रमाणित बीज प्राप्त करने के लिए जल्द से जल्द सरकारी पोर्टल पर आवेदन करें। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है ताकि किसानों को पारदर्शी और आसान सुविधा मिल सके। सरकार की इस योजना से प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

यूपी में बनें 'ग्राम प्रधान', पंचायत चुनाव की तैयारी तेज!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला पंचायत सदस्य बनने की तैयारी कर रहे लोगों के बीच चुनाव को लेकर चर्चा बढ़ गई है। इसी बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने समर्पित ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी देकर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को नई दिशा दे दी है।

ओबीसी आयोग का गठन

प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित ओबीसी आयोग का गठन किया है। आयोग पंचायतों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की स्थिति का अध्ययन करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा।

चुनाव में हो सकती है देरी

हालांकि पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस साल चुनाव होने की संभावना कम मानी जा रही है। सरकार द्वारा गठित आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। इसके बाद आरक्षण तय होगा, आपत्तियां मांगी जाएंगी और उनका निस्तारण किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है।

प्रदेश में हैं हजारों पंचायतें

उत्तर प्रदेश में पंचायत व्यवस्था का दायरा काफी बड़ा है। प्रदेश में 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें, 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। इन सभी स्तरों पर चुनाव होना है। वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 26 मई 2026 तक मान्य है। इसके बाद नई पंचायतों का गठन होना जरूरी होगा, लेकिन चुनाव प्रक्रिया लंबी होने के कारण देरी की संभावना जताई जा रही है।

क्या बढ़ सकता है वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल?

रिपोर्ट के अनुसार पंचायती राज विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर वर्तमान ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का सुझाव दिया है। संभावना जताई जा रही है कि चुनाव होने तक प्रशासक समिति बनाकर मौजूदा प्रतिनिधियों को ही कामकाज सौंपा जा सकता है।

8वें वेतन आयोग: रिटायर कर्मचारियों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों पेंशनभोगियों और रिटायर कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। हाल ही में हुई NC-JCM की वार्षिक बैठक में पेंशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कैबिनेट सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन ने कर्मचारी संगठनों को भरोसा दिलाया कि कई अहम मांगों को 8वें वेतन आयोग के पास विचार के लिए भेजा जाएगा। इस बैठक के बाद रिटायर कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच नई उम्मीद जगी है।

हर 5 साल में पेंशन संशोधन की मांग

कर्मचारी संगठनों ने मांग उठाई कि पेंशन में हर पांच साल पर संशोधन किया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में केवल वेतन आयोग के दौरान बदलाव होने से महंगाई के मुकाबले पेंशन पर्याप्त नहीं रह जाती। इस पर कैबिनेट सेक्रेटरी ने भरोसा दिलाया कि इस प्रस्ताव को 8वें वेतन आयोग के सामने रखा जाएगा। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो पेंशनर्स को नियमित अंतराल पर राहत मिल सकती है।

फैमिली पेंशन में कटौती रोकने की मांग

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि मृतक कर्मचारी या पेंशनर के परिवार को मिलने वाली फैमिली पेंशन में अधिक कटौती नहीं होनी चाहिए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार को केवल सीमित प्रतिशत पेंशन मिलती है, जिससे आर्थिक कठिनाई बढ़ती है। सरकार ने इस मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए इसे वेतन आयोग के पास भेजने की बात कही है।

दिव्यांग आश्रित बच्चों को राहत की उम्मीद

शारीरिक रूप से दिव्यांग आश्रित बच्चों के लिए फैमिली पेंशन लेने में आने वाली दिक्कतों का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। वर्तमान में कई मामलों में ‘कोई आय नहीं’ प्रमाण पत्र मांगा जाता है, जिसे प्राप्त करना काफी मुश्किल होता है। कर्मचारी पक्ष ने इस शर्त को हटाने की मांग की है। बताया गया कि कैबिनेट सेक्रेटरी ने संबंधित विभाग को इस मामले में व्यावहारिक समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं।

कुछ कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना

बैठक में पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। कर्मचारी संगठनों ने मांग रखी कि जिन पदों की भर्ती प्रक्रिया 22 दिसंबर 2003 से पहले शुरू हुई थी, उन कर्मचारियों को OPS का लाभ दिया जाए, भले ही उनकी नियुक्ति बाद में हुई हो। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों को भी OPS के दायरे में लाने पर सहमति बनती दिखाई दी। इससे हजारों कर्मचारियों को भविष्य में बड़ा लाभ मिल सकता है।

परिवार की परिभाषा में बदलाव की मांग

कर्मचारी संगठनों ने फैमिली पेंशन के लिए परिवार की परिभाषा में संशोधन की मांग भी उठाई है। इसमें विधवा बहू और आश्रित बहू को भी पारिवारिक पेंशन का अधिकार देने की बात कही गई है। सरकार ने इस मामले की कानूनी समीक्षा कराने का आश्वासन दिया है। यदि नियमों में बदलाव होता है तो कई परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।

पेट की गंदगी साफ करने में असरदार हैं ये 4 चीजें, सुबह मिलेगा हल्कापन

हेल्थ डेस्क। आजकल बदलती जीवनशैली और गलत खानपान के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कब्ज, गैस, अपच और पेट भारी रहने जैसी परेशानियां लोगों के लिए आम समस्या बन चुकी हैं। कई बार पेट सही तरीके से साफ नहीं होने पर दिनभर थकान और बेचैनी महसूस होती है। 

ऐसे में कुछ घरेलू चीजें पेट को प्राकृतिक तरीके से साफ रखने में मदद कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार खानपान में थोड़े बदलाव और कुछ प्राकृतिक चीजों का सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 4 चीजों के बारे में जो पेट की सफाई में मददगार मानी जाती हैं।

1. गुनगुना पानी और नींबू

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें नींबू मिलाने से शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिल सकती है। यह पेट की गंदगी बाहर निकालने और कब्ज की समस्या कम करने में सहायक माना जाता है।

2. इसबगोल

इसबगोल फाइबर से भरपूर होता है और पेट साफ रखने में काफी उपयोगी माना जाता है। रात में सोने से पहले गुनगुने पानी या दूध के साथ इसका सेवन करने से कब्ज में राहत मिल सकती है। यह आंतों की सफाई में भी मदद करता है।

3. पपीता

पपीता पाचन के लिए बेहद लाभकारी फल माना जाता है। इसमें मौजूद एंजाइम भोजन को पचाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से पपीता खाने से पेट हल्का रहता है और गैस व अपच की समस्या कम हो सकती है।

4. दही

दही में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। रोजाना दही खाने से पेट की गर्मी कम हो सकती है और आंतों का संतुलन बेहतर बना रहता है। इससे पेट साफ रहने में भी मदद मिलती है।

खानपान और दिनचर्या का भी रखें ध्यान

केवल घरेलू चीजों पर निर्भर रहने के बजाय सही दिनचर्या अपनाना भी जरूरी है। ज्यादा तला-भुना और बाहर का भोजन कम करें, पर्याप्त पानी पिएं और नियमित व्यायाम करें। यदि लंबे समय तक कब्ज, पेट दर्द या पाचन संबंधी समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही खानपान और स्वस्थ आदतों से पेट को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

यूपी में कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, वेतन और ग्रेच्युटी पर बनी समिति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सहकारी ग्राम विकास बैंकों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से वेतनमान, एसीपी और ग्रेच्युटी जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए अब बैंक प्रबंधन ने एक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

सातवें वेतनमान की मांग तेज

सहकारी ग्राम विकास बैंक के कर्मचारी काफी समय से सातवां वेतनमान लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें राज्य कर्मचारियों की तरह वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों ने एसीपी सुविधा लागू करने, 20 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी देने और पिछले कई वर्षों का कस्टमरी बोनस जारी करने की भी मांग उठाई है।

बैंक की आर्थिक स्थिति का आकलन

इन सभी मांगों को लागू करने से पहले बैंक की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए मुख्य महाप्रबंधक रत्नाकर सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति यह जांच करेगी कि कर्मचारियों की मांगों को लागू करने से बैंक पर कितना वित्तीय भार पड़ेगा और इसे किस प्रकार पूरा किया जा सकता है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

आंदोलन 15 दिनों के लिए स्थगित

समिति गठन के बाद कर्मचारियों की संघर्ष समिति ने अपना आंदोलन फिलहाल 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे समिति की रिपोर्ट और प्रबंधन के अगले फैसले का इंतजार करेंगे। सोमवार को बैंक मुख्यालय में बैंक प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में संघर्ष समिति के कई पदाधिकारी शामिल रहे और कर्मचारियों की 15 प्रमुख मांगों पर बातचीत की गई।

कर्मचारियों को फैसले का इंतजार

अब कर्मचारियों की नजर समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि समिति सकारात्मक सिफारिश देती है तो हजारों कर्मचारियों को वेतन वृद्धि, बेहतर सेवा लाभ और आर्थिक राहत मिल सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान से उनकी कार्यक्षमता और मनोबल दोनों में सुधार होगा।

यूपी के इस विभाग में ट्रांसफर के 5 नए नियम लागू, कर्मचारी खुश!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की तबादला नीति में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। अब केवल सेवाकाल पूरा होने के आधार पर चिकित्सीय कार्यों में लगे डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों का अनिवार्य रूप से जिला या मंडल से बाहर तबादला नहीं किया जाएगा।

किन अधिकारियों पर लागू होंगे नए नियम

अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्य चिकित्साधिकारी और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी यदि किसी जिले में तीन वर्ष या किसी मंडल में पांच वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं तो उनका स्थानांतरण किया जाएगा।  इसी तरह संयुक्त निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक यदि किसी जिले या मंडल में पांच वर्ष से अधिक समय तक कार्यरत हैं तो उनका भी तबादला किया जाएगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीधे मरीजों की सेवा से जुड़े डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को केवल सेवाकाल पूरा होने के आधार पर अनिवार्य रूप से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

आकांक्षी जिलों के लिए विशेष व्यवस्था

सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए आकांक्षी जिलों में विशेष प्रावधान किए हैं। चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे जिलों में सभी पदों पर पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को दो वर्ष पूरा होने के बाद विकल्प के आधार पर स्थानांतरण दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है।

जिले के अंदर भी हो सकेंगे तबादले

नई नीति के अनुसार मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन कार्यरत अधीक्षक और एमओआईसी को तीन वर्ष पूरा होने पर उसी जिले के दूसरे अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में तैनात किया जा सकता है। इससे विभाग के अंदर प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने और सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी।

गंभीर बीमारी में मिलेगी राहत

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लिपिकीय और नर्सिंग स्टाफ को पूर्व तैनाती स्थल पर दोबारा नियुक्ति केवल गंभीर बीमारी जैसी विशेष परिस्थितियों में ही दी जाएगी। इसके अलावा प्रशासनिक आवश्यकता होने पर किसी भी समय तबादले किए जा सकेंगे, लेकिन इसके लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।

नई नीति से क्या होगा फायदा

नई तबादला नीति का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना और कर्मचारियों को अनावश्यक स्थानांतरण से राहत देना है। लंबे समय से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इस बात की मांग कर रहे थे कि सिर्फ सेवाकाल पूरा होने के आधार पर उन्हें दूरस्थ जिलों में न भेजा जाए।