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यूपी में 'स्टाफ नर्स' की बंपर भर्ती, युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी

ग्रेटर नोएडा। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश के Government Institute of Medical Sciences (GIMS), Greater Noida में स्टाफ नर्स के पदों पर भर्ती निकली है। संस्थान ने वर्ष 2026 के लिए 100 स्टाफ नर्स पदों पर भर्ती का शॉर्ट नोटिस जारी किया है। इस भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

100 पदों पर होगी भर्ती

GIMS की इस भर्ती में कुल 100 स्टाफ नर्स पद शामिल हैं। यह सरकारी नौकरी का अवसर है, इसलिए नर्सिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों को संस्थान में नर्सिंग सेवाओं से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी जाएगी। GIMS एक सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की देखभाल से जुड़ी विभिन्न सेवाएं संचालित होती हैं।

7 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन

भर्ती के लिए जारी शॉर्ट नोटिस के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 7 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में दी गई पात्रता और अन्य शर्तों को ध्यान से देखना चाहिए। 

स्टाफ नर्स के पद पर सैलरी भी आकर्षक

स्टाफ नर्स पद के लिए दिए गए विवरण के अनुसार बेसिक पे 44,900 रुपये है। इसके साथ 4600 रुपये ग्रेड पे का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा सरकारी नियमों के अनुसार लागू होने वाले अन्य लाभ और भत्ते भी मिल सकते हैं। वास्तविक वेतन और सेवा से जुड़े लाभों की जानकारी उम्मीदवारों को आधिकारिक भर्ती विज्ञापन से जरूर जांचनी चाहिए।

इस पद के लिए कौन कर सकता है आवेदन?

स्टाफ नर्स भर्ती में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित नर्सिंग योग्यता और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य आवश्यक मानकों की अंतिम जानकारी आधिकारिक भर्ती नोटिफिकेशन में दी जाएगी।

कल बनेंगे 4 दुर्लभ राजयोग! इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन-दौलत के खुलेंगे रास्ते

राशिफल। ज्योतिष के लिहाज से 11 अगस्त 2026 का दिन खास माना जा रहा है। ग्रहों की स्थिति से इस दिन हंस राजयोग, शशि आदित्य राजयोग, गजकेसरी राजयोग और बुधादित्य राजयोग का संयोग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, एक साथ कई शुभ योगों का बनना कुछ राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है।

इन राजयोगों के प्रभाव से करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में लाभ मिलने की संभावना मानी जा रही है। हालांकि ज्योतिषीय फल व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करते हैं।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक रह सकता है। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और काम की सराहना मिलने के योग बन सकते हैं। लंबे समय से किसी अवसर की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। परिवार में भी माहौल अच्छा रहने की संभावना है।

2. मिथुन राशि

चार राजयोगों का यह संयोग मिथुन राशि के लिए भी लाभकारी माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या पद से जुड़ा अवसर मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत वरिष्ठ अधिकारियों की नजर में आ सकती है। व्यापारियों को नए सौदे या ग्राहकों से लाभ मिलने के संकेत हैं।

3. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए राजयोगों का प्रभाव मान-सम्मान और करियर के लिहाज से अच्छा रह सकता है। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। नौकरी में प्रमोशन या बेहतर अवसर की उम्मीद रखने वालों को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। कारोबार में नई योजना पर काम शुरू करने का मौका मिल सकता है।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक लाभ और सामाजिक संपर्कों के लिहाज से शुभ माना जा रहा है। अचानक कोई लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी में बदलाव की योजना बना रहे लोगों को बेहतर अवसर मिल सकता है। कारोबार में नए लोगों से जुड़ना फायदेमंद साबित हो सकता है।

5. धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए चार राजयोगों का संयोग भाग्य का साथ बढ़ाने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना है। उच्च शिक्षा या नौकरी के सिलसिले में यात्रा का अवसर भी मिल सकता है। परिवार के सदस्यों का सहयोग भी प्राप्त होगा।

लिवर खराब होने के 5 बड़े संकेत! शरीर में दिखें ये लक्षण तो तुरंत हो जाएं सावधान

हेल्थ डेस्क। लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने और कई जरूरी रसायनों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। लिवर में किसी तरह की समस्या होने पर शुरुआत में हमेशा स्पष्ट लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। लेकिन बीमारी बढ़ने पर शरीर कुछ संकेत जरूर दे सकता है।

1. आंखों और त्वचा का पीला पड़ना

अगर आंखों का सफेद हिस्सा या त्वचा सामान्य से पीली दिखाई देने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसे पीलिया कहा जाता है। लिवर या पित्त से जुड़ी कुछ समस्याओं में शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ सकता है, जिसके कारण त्वचा और आंखों में पीलापन दिखाई देता है।

2. लगातार थकान और कमजोरी

बिना ज्यादा मेहनत के लगातार थकान महसूस होना भी शरीर में किसी समस्या का संकेत हो सकता है। लिवर की बीमारी में कुछ लोगों को कमजोरी, ऊर्जा की कमी और सामान्य काम करने में भी ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। अगर पर्याप्त नींद और आराम के बावजूद लंबे समय तक थकान बनी रहती है, तो इसे केवल काम का दबाव मानकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना बेहतर है।

3. पेट में सूजन या असहजता

लिवर की गंभीर बीमारी में पेट के अंदर तरल पदार्थ जमा होने की वजह से पेट फूलने या सूजन की समस्या हो सकती है। इसे Ascites कहा जाता है। इसके अलावा पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन भी कुछ लिवर संबंधी समस्याओं में महसूस हो सकता है। अगर पेट की सूजन लगातार बढ़ रही हो या इसके साथ दर्द और सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

4. पेशाब का रंग गहरा होना

पेशाब का सामान्य रंग पानी की मात्रा के अनुसार हल्के पीले से गहरे पीले तक हो सकता है। लेकिन अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद पेशाब लगातार बहुत गहरा या भूरा दिखाई दे रहा है और इसके साथ आंखों या त्वचा में पीलापन भी है, तो यह लिवर या पित्त से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

5. त्वचा में खुजली और आसानी से चोट के निशान

लिवर की कुछ बीमारियों में शरीर में लगातार खुजली हो सकती है। इसके अलावा लिवर की गंभीर समस्या होने पर खून का थक्का जमने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा आसानी से चोट के निशान पड़ सकते हैं या खून बहने की समस्या हो सकती है। अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार नीले निशान पड़ रहे हों या मामूली चोट में भी ज्यादा खून निकल रहा हो, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

यूपी पंचायती राज विभाग की तैयारी, गांव-गांव को मिलेगी बड़ी खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों का कामकाज प्रशासकों के जरिए चलाया जा रहा है। अब पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति जल्द दूर हो सकती है।

पंचायती राज विभाग ने पंचायतों में तैनात प्रशासकों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इन दिशा-निर्देशों की फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुमोदन के लिए भेजी गई है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।

अधिकार स्पष्ट नहीं होने से आ रही थी परेशानी

प्रदेश में पहली बार निवर्तमान ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि प्रशासक के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उन्हें कौन-कौन से काम करने का अधिकार है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं थी।

पहले से मंजूर विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में पंचायतों के पहले से स्वीकृत विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में पहले से मंजूर प्रस्तावों पर काम जिलाधिकारी की अनुमति के बाद शुरू कराया जा सकेगा। इससे उन योजनाओं को दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ होगा, जो प्रशासकों के अधिकार स्पष्ट नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।

नई योजनाओं के लिए भी तय होगी प्रक्रिया

जिला पंचायतों में विकास से जुड़ी नई कार्ययोजनाओं को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे नई परियोजनाओं पर फैसला लेने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी। वहीं ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना को जिलाधिकारी की ओर से अनुमोदित किया जाएगा। इससे पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को लेकर निर्णय लेने में स्पष्टता आने की उम्मीद है।

नीतिगत फैसलों में जिलाधिकारी की भूमिका

प्रस्तावित नियमों में ग्राम पंचायतों के नीतिगत मामलों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। ऐसे मामलों में निर्णय जिलाधिकारी के स्तर से लिए जाने की व्यवस्था होगी। इससे प्रशासकों को अपने अधिकार क्षेत्र को समझने में आसानी होगी और ऐसे मामलों में अनिश्चितता कम होगी, जिनका सीधा असर पंचायत की नीतियों या नई योजनाओं पर पड़ता है।

पानी-पानी होगा यूपी! इन 10 जिलों में भारी बारिश के आसार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता फिलहाल बनी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें कमी आने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में अगले दो दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी वर्षा भी देखने को मिल सकती है। हालांकि इसके बाद प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने की संभावना है।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र अब कमजोर हो चुका है। इसके कारण बारिश की तीव्रता में आगे कमी आने की उम्मीद है। वहीं मानसूनी द्रोणी अपनी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है और अनूपगढ़, दिल्ली व आगरा होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रही है।

इन 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के दक्षिणी और कुछ अन्य हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। जिन जिलों में भारी बारिश के आसार बताए गए हैं, उनमें बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, सोनभद्र, सहारनपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर शामिल हैं। इन जिलों में रहने वाले लोगों को बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।

दक्षिणी यूपी में दो दिन तक बना रहेगा असर

मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, अगले दो दिनों तक प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में मानसूनी प्रवाह अपेक्षाकृत सक्रिय रहेगा। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना है। वहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में मानसून की गतिविधियां सीमित रह सकती हैं। यानी हर जिले में एक जैसी बारिश देखने को नहीं मिलेगी। कुछ इलाकों में बादल छाए रहने और हल्की या मध्यम बारिश की संभावना हो सकती है।

मंगलवार को भी कुछ इलाकों में बारिश

सोमवार के बाद मंगलवार को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने के आसार हैं। हालांकि इसके बाद मौसम की सक्रियता में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, बारिश का यह दौर बहुत लंबे समय तक जारी रहने की उम्मीद नहीं है। अगले कुछ दिनों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं और कई क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता कम हो सकती है।

8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की 5 बड़ी मांगें! सैलरी से पेंशन तक हो सकता है बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें इस समय 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई हैं। आयोग का गठन हो चुका है और अलग-अलग कर्मचारी संगठनों तथा पेंशन प्रतिनिधियों से बातचीत का दौर जारी है। इन बैठकों में कर्मचारी वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा से जुड़े कई मुद्दे आयोग के सामने रख रहे हैं।

सरकारी विभागों की ओर से कर्मचारियों से संबंधित जरूरी आंकड़े भी पोर्टल पर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आयोग विभिन्न संगठनों से सुझाव लेने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। इसके बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी और सरकार की मंजूरी के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करने की मांग

कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम बेसिक पे बढ़ाना शामिल है। एनसी-जेसीएम की ओर से न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग रखी गई है। संगठनों का तर्क है कि मौजूदा महंगाई, परिवार की जरूरतों और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए न्यूनतम वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी जरूरी है। अगर आयोग इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाता है तो सबसे निचले वेतन स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

2. फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने की मांग

8वें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी बड़ी मांग रखी गई है। कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग कर रहे हैं। फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक पे को नए वेतन ढांचे में निर्धारित करने में मदद मिलती है। कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव के अनुसार यदि 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

3. हर साल कम से कम 6 फीसदी वेतन वृद्धि

कर्मचारी संगठनों की एक अन्य प्रमुख मांग वार्षिक वेतन वृद्धि को लेकर है। मांग है कि कर्मचारियों के वेतन में हर साल कम से कम 6 फीसदी की बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाए। संगठनों का कहना है कि नियमित वेतन वृद्धि से कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक राहत मिल सकती है। साथ ही लंबे समय तक सेवा करने वाले कर्मचारियों के वेतन में भी क्रमिक सुधार होगा।

4. HRA और दूसरे भत्तों में बदलाव

कर्मचारी संगठनों ने हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA और अन्य भत्तों को लेकर भी बदलाव की मांग रखी है। प्रस्ताव में न्यूनतम HRA स्लैब को 30 फीसदी तक करने की मांग शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि बड़े शहरों और अन्य क्षेत्रों में मकान का किराया लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा HRA व्यवस्था को वर्तमान खर्चों के अनुरूप संशोधित करने की जरूरत है। इसके अलावा अलग-अलग भत्तों, परिवार से जुड़े कैलकुलेशन और सेवा शर्तों में बदलाव की मांग भी आयोग के सामने रखी गई है।

5. OPS बहाली और पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव

पेंशन कर्मचारियों की मांगों का एक बड़ा हिस्सा है। कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पेंशन से जुड़े नियमों को अधिक लाभकारी बनाने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा देने की मांग भी उठाई जा रही है। पेंशनर्स संगठनों की ओर से भी आयोग के सामने अपनी अलग-अलग समस्याएं और सुझाव रखे जा रहे हैं।

रिपोर्ट के बाद क्या होगा?

कर्मचारी संगठनों से सुझाव और मांगें लेने के बाद 8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। इसके बाद सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नई वेतन व्यवस्था को लागू करने के लिए आवश्यक नियम और आदेश जारी किए जाएंगे।

यूपी में 6-लेन बनेगा ये सड़क, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रयागराज-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-128A) के जौनपुर से मुहम्मदपुर वाले हिस्से को फोरलेन से बढ़ाकर सिक्स लेन करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए प्रारंभिक सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है।

सड़क को चौड़ा करने से पहले प्रस्तावित सिक्स लेन का नक्शा तैयार किया जाएगा। इसी उद्देश्य से भोपाल की एक निजी एजेंसी की टीम मौके पर पहुंचकर सड़क और आसपास के क्षेत्र का सर्वे कर रही है। सर्वे के आधार पर आगे की योजना और निर्माण की रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद है।

जौनपुर से मुहम्मदपुर तक हो रहा सर्वे

प्रस्तावित चौड़ीकरण के दायरे में जौनपुर से मुहम्मदपुर तक का मार्ग शामिल है। सर्वे टीम सड़क की मौजूदा स्थिति, आसपास के निर्माण और अन्य जरूरी बिंदुओं का आकलन कर रही है। इस मार्ग में जिवली, बरदह, ठेकमा, भीरा, गंभीरपुर और कोटिला समेत कई कस्बे और प्रमुख बाजार आते हैं। इन क्षेत्रों में सड़क के दोनों तरफ मौजूद निर्माण और यातायात की स्थिति का भी सर्वे किया जा रहा है।

मकान मालिकों और दुकानदारों को सलाह

सर्वे के दौरान हाईवे के किनारे रहने वाले लोगों और दुकानदारों को संभावित चौड़ीकरण को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। टीम की ओर से लोगों से सड़क की सीमा के आसपास मौजूद अतिक्रमण को हटाने की तैयारी रखने को कहा गया है। हालांकि, संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई या जमीन से जुड़े किसी भी कदम के लिए नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों को आधिकारिक रूप से नोटिस जारी किए जाएंगे।

कई जगह मौजूदा सड़क में भी हैं समस्याएं

स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा फोरलेन व्यवस्था में अभी भी कई कमियां मौजूद हैं। कुछ बाजारों में सड़क अपेक्षाकृत संकरी है। वहीं कई स्थानों पर धार्मिक स्थलों, बिजली के खंभों और अन्य संरचनाओं के कारण यातायात प्रभावित होता है। कुछ हिस्सों में नालियों की सफाई नहीं होने और सड़क किनारे मिट्टी जमा रहने से भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार इन कारणों से कई जगह दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

पहले मौजूदा कमियां दूर करने की मांग

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सिक्स लेन का काम शुरू करने से पहले मौजूदा फोरलेन परियोजना की खामियों को भी दूर किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि सड़क का चौड़ीकरण तभी पूरी तरह प्रभावी होगा, जब जल निकासी, अतिक्रमण, बिजली के खंभे और बाजारों में यातायात जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए। स्थानीय लोगों ने यह भी उम्मीद जताई है कि प्रस्तावित सिक्स लेन बनने के बाद हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और यात्रा का समय कम करने में मदद मिलेगी।

LPG सिलेंडर को लेकर बड़ी खुशखबरी, लोगों की टेंशन हुई दूर!

नई दिल्ली। रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बाद डिलीवरी का इंतजार करने वाले उपभोक्ताओं के लिए इंडियनऑयल ने एक नई सुविधा शुरू की है। कंपनी ने 'इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ' नाम से सेवा शुरू की है, जिसके तहत ग्राहकों को हल्के वजन वाला 10 किलोग्राम का कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।

इस सेवा की खासियत तेज डिलीवरी बताई जा रही है। कंपनी के अनुसार, बुकिंग के कुछ घंटों के भीतर सिलेंडर ग्राहक के घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इससे खासकर उन परिवारों को सुविधा मिल सकती है, जिन्हें भारी सिलेंडर उठाने में परेशानी होती है या जिनकी गैस खपत कम है।

क्या है इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ?

'इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ' इंडियनऑयल की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा 10 किलो का कंपोजिट गैस सिलेंडर है। पारंपरिक स्टील सिलेंडर की तुलना में इसका वजन कम रखा गया है, जिससे इसे उठाना और एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना आसान होता है।

इन परिवारों के लिए उपयोगी

10 किलोग्राम क्षमता वाला यह सिलेंडर खासतौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी हो सकता है, जहां एलपीजी की खपत अपेक्षाकृत कम है। छोटे परिवारों के लिए कम क्षमता का सिलेंडर होने से इसे संभालना भी आसान रहेगा। कंपनी की ओर से इस सेवा में तेज डिलीवरी और डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है। इससे ग्राहक घर बैठे सिलेंडर की बुकिंग कर सकेंगे और संबंधित डिजिटल माध्यम से अपनी बुकिंग की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

इन माध्यमों से कर सकते हैं बुकिंग

ग्राहक 'इंडेन एक्सट्रालाइट नाउ' के तहत नए कनेक्शन या रिफिल के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए IndianOil ONE ऐप, IndianOil Customer Portal और इंडियनऑयल के WhatsApp नंबर 7588888824 का उपयोग किया जा सकता है। डिजिटल माध्यम से आवेदन और रिफिल बुकिंग की सुविधा होने से ग्राहकों को एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।

चुनिंदा जगहों पर उपलब्ध होगी सुविधा

इंडियनऑयल के मुताबिक यह सेवा उसके इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क और चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। यानी हर क्षेत्र में यह सुविधा एक समान रूप से उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है। इस पहल का उद्देश्य एलपीजी ग्राहकों को तेज डिलीवरी के साथ हल्का, सुविधाजनक और आधुनिक सिलेंडर विकल्प उपलब्ध कराना है।

केंद्र सरकार ने दी जानकारी, कर्मचारियों के पेंशन को लेकर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी संसद में दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल Unified Pension Scheme (UPS) में संशोधन करने या इसे किसी दूसरी पेंशन योजना से बदलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। 

सरकार के इस जवाब के बाद UPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए मौजूदा स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। पेंशन को लेकर लंबे समय से कर्मचारियों के बीच अलग-अलग व्यवस्थाओं की तुलना और चर्चा होती रही है। ऐसे समय में सरकार की ओर से संसद में दिया गया यह जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संसद में सरकार ने क्या बताया?

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि सरकार के पास वर्तमान में UPS में किसी तरह का बदलाव करने अथवा इसे किसी अन्य पेंशन व्यवस्था से प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल UPS अपने मौजूदा प्रावधानों के तहत जारी रहेगी। हालांकि, भविष्य में नीति या नियमों में कोई बदलाव होगा या नहीं, यह सरकार के आगामी निर्णयों पर निर्भर करेगा।

1 अप्रैल 2025 से लागू हुई UPS

Unified Pension Scheme को केंद्र सरकार ने National Pension System (NPS) के तहत एक विकल्प के तौर पर पेश किया था। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2025 से लागू हुई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक निश्चित आय उपलब्ध कराना है। UPS में कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद नियमित पेंशन के साथ कुछ परिस्थितियों में परिवार के लिए भी पेंशन का प्रावधान रखा गया है।

25 साल की सेवा पर 50% पेंशन

UPS की प्रमुख विशेषता इसकी सुनिश्चित पेंशन व्यवस्था है। इसके तहत 25 वर्ष की सर्विस पूरी करने वाले पात्र कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत बेसिक पे के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन मिलने का प्रावधान है। वहीं जिन कर्मचारियों की सर्विस 25 वर्ष से कम है, लेकिन कम से कम 10 वर्ष की है, उनकी पेंशन सेवा अवधि के आधार पर निर्धारित की जाती है।

कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को भी लाभ

UPS में कर्मचारी के निधन की स्थिति को भी ध्यान में रखा गया है। पात्रता और लागू नियमों के अनुसार कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को पारिवारिक पेंशन मिलने का प्रावधान है। इससे रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी के परिवार की आय को लेकर एक निश्चित स्तर की वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

पित्त की थैली में पथरी बना सकते हैं ये 6 फूड्स! रोज खाने की आदत तुरंत बदलें

हेल्थ डेस्क। आजकल खान-पान की खराब आदतों और अनियमित जीवनशैली के कारण पित्त की थैली में पथरी की समस्या बढ़ती नजर आ रही है। पित्त की थैली लिवर के नीचे मौजूद एक छोटी थैली होती है, जिसमें पित्त जमा रहता है। जब पित्त में मौजूद कुछ पदार्थों का संतुलन बिगड़ता है, तो धीरे-धीरे छोटे या बड़े पत्थर जैसे कण बन सकते हैं।

हर व्यक्ति में पथरी बनने का कारण केवल खान-पान नहीं होता। मोटापा, तेजी से वजन कम होना, कुछ स्वास्थ्य स्थितियां और आनुवंशिक कारण भी इसकी वजह बन सकते हैं। हालांकि, डाइट में ज्यादा फैट और कम फाइबर वाली चीजों का लगातार सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए रोज की थाली में कुछ खाद्य पदार्थों की मात्रा सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

1. तला-भुना खाना

पूरी, पकौड़े, समोसे, कचौड़ी, फ्रेंच फ्राइज और दूसरी डीप फ्राइड चीजों में वसा की मात्रा अधिक हो सकती है। इनका बार-बार सेवन पाचन तंत्र पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है और ज्यादा फैट वाली डाइट पित्त की पथरी के जोखिम से जुड़ी मानी जाती है। ऐसे खाद्य पदार्थों को रोज खाने के बजाय कभी-कभार और सीमित मात्रा में लेना बेहतर है।

2. ज्यादा फैट वाला रेड मीट

रेड मीट और इससे बने कुछ प्रोसेस्ड उत्पादों में सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक हो सकती है। ज्यादा वसायुक्त मांस का नियमित सेवन संतुलित डाइट के बजाय शरीर में अतिरिक्त फैट की मात्रा बढ़ा सकता है। अगर आप नॉन-वेज खाते हैं तो कम वसा वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना और पकाने के तरीके पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है।

3. प्रोसेस्ड मीट

सॉसेज, बेकन, सलामी और अन्य प्रोसेस्ड मीट में अक्सर फैट और नमक की मात्रा ज्यादा होती है। इनका नियमित और अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे खाद्य पदार्थों की जगह ताजा और कम वसा वाले प्रोटीन स्रोतों को डाइट में शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

4. फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स

मक्खन, क्रीम, फुल-फैट चीज और अधिक वसा वाले डेयरी उत्पादों में फैट की मात्रा काफी हो सकती है। अगर आपकी डाइट में इनका सेवन बहुत ज्यादा है तो मात्रा कम करना बेहतर रहेगा। दूध और डेयरी उत्पाद लेते समय कम वसा वाले विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

5. बेकरी और पैकेज्ड फूड

केक, पेस्ट्री, कुकीज, बिस्किट और कई पैकेज्ड स्नैक्स में फैट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी अधिक हो सकती है। इन्हें रोज खाने की आदत वजन बढ़ने और असंतुलित डाइट की वजह बन सकती है। इनकी जगह फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना ज्यादा बेहतर है।

6. ज्यादा चीनी वाले खाद्य और पेय

मीठे पेय, मिठाइयां और अधिक चीनी वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन भी संतुलित आहार का हिस्सा नहीं माना जाता। ज्यादा चीनी वाली डाइट वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से पित्त की पथरी के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए मीठे खाद्य पदार्थों और शुगर वाले ड्रिंक्स का सेवन सीमित रखना समझदारी है।

मंगल का शुभ प्रभाव कल से शुरू! 4 राशियों के लिए बनेंगे धन और तरक्की के नए योग

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि, संपत्ति, पराक्रम और नेतृत्व क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है। मंगल की चाल में बदलाव का असर सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कल से मंगल का प्रभाव कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ रह सकता है।

मंगल का मजबूत प्रभाव इन राशियों के जातकों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ करियर और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर पैदा कर सकता है। आर्थिक मामलों में भी लाभ के योग बन सकते हैं। आइए जानते हैं वे 4 राशियां कौन-सी हैं, जिनके लिए मंगल का यह प्रभाव फायदेमंद रह सकता है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए मंगल का प्रभाव उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। लंबे समय से किसी अवसर का इंतजार कर रहे जातकों को सकारात्मक समाचार मिल सकता है। कारोबार करने वालों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।

2. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल का प्रभाव करियर के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकता है। नौकरी में पद और जिम्मेदारी बढ़ने के योग बन सकते हैं। अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर होंगे और आपके काम की सराहना हो सकती है। व्यापारियों को भी नए संपर्कों से फायदा मिल सकता है।

3. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ही हैं, इसलिए मंगल का प्रभाव इस राशि के जातकों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ सकता है और जातक महत्वपूर्ण फैसले लेने में अधिक सक्षम महसूस कर सकते हैं। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

4. धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए मंगल का प्रभाव भाग्य का साथ दिलाने वाला हो सकता है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। प्रतियोगी परीक्षा या करियर से जुड़े प्रयासों में सफलता के संकेत मिल सकते हैं। कारोबार में नई डील या प्रोजेक्ट मिलने की संभावना बन सकती है।

बिहार सरकार का बड़ा कदम, किसानों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत और उम्मीद भरी खबर है। सरकार अब सब्जी उत्पादन को केवल खेतों तक सीमित रखने के बजाय उसे बेहतर बाजार और मजबूत सप्लाई सिस्टम से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए सहकारिता विभाग ने सब्जी क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए 106.39 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

सरकार की योजना है कि किसान की उपज खेत से निकलने के बाद खराब न हो और उसे उचित बाजार तक पहुंचाने में कम से कम परेशानी आए। इसके लिए पंचायत और प्रखंड स्तर पर संग्रहण केंद्र, आधारभूत सुविधाएं, परिवहन और मार्केटिंग नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।

पहली खुशखबरी: 350 पंचायतों में बनेंगे संग्रहण केंद्र

सब्जी उत्पादकों के लिए सबसे अहम पहल पंचायत स्तर पर होने जा रही है। योजना के तहत प्रदेश की 350 पंचायतों में सब्जी संग्रहण केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर स्थानीय किसानों की सब्जियां एकत्र की जा सकेंगी। इसके बाद उपज को जरूरत के अनुसार बड़े बाजारों तक भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों को अपनी फसल लेकर दूर-दराज के बाजारों में जाने की जरूरत कम हो सकती है।

दूसरी खुशखबरी: 50 प्रखंडों में तैयार होगा आधारभूत ढांचा

सरकार ने पंचायतों के साथ प्रखंड स्तर पर भी सुविधाएं विकसित करने का फैसला किया है। इसके तहत 50 प्रखंड स्तरीय आधारभूत संरचनाएं तैयार करने की योजना है। इन सुविधाओं का इस्तेमाल सब्जियों के संग्रहण, परिवहन और बाजार से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित करने में किया जा सकेगा। पंचायत स्तर पर आने वाली उपज को प्रखंड स्तर की व्यवस्था से जोड़कर आगे बड़े बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा।

तीसरी खुशखबरी: 534 सहकारी समितियों को मिलेगी आर्थिक मदद

सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने के लिए 534 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों (PVCS) को कार्यशील पूंजी देने का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक पात्र समिति को 2 लाख रुपये की कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे समितियां किसानों से सब्जी खरीदने, उसे एकत्र करने और बाजार तक पहुंचाने जैसी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकेंगी। इसके अलावा 9 सब्जी संघों को भी प्रति संघ 10 लाख रुपये की कार्यशील पूंजी देने का प्रावधान है।

चौथी खुशखबरी: हर यूनियन में खुलेंगे नए PVCS

सहकारी नेटवर्क के विस्तार को लेकर भी सरकार ने लक्ष्य तय किया है। संबंधित अधिकारियों को अगले 30 दिनों के भीतर प्रत्येक यूनियन में पांच नए PVCS को सुचारु रूप से संचालित करने का निर्देश दिया गया है। नए सहकारी केंद्र सक्रिय होने के बाद ज्यादा से ज्यादा सब्जी उत्पादकों को स्थानीय स्तर पर एक संगठित व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश होगी। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सामूहिक बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट! HRA का ये नियम जरूर जानें

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम सामने आया है। खासतौर पर उन कर्मचारियों को इस नियम की जानकारी होना जरूरी है, जिनमें पति-पत्नी दोनों केंद्र सरकार की सेवा में हैं।

सरकारी नियमों के मुताबिक, अगर पति या पत्नी में से किसी एक को सरकारी आवास आवंटित हो जाता है और वह उसमें रह रहा है, तो उसी अवधि में दूसरे कर्मचारी को अलग से HRA का लाभ नहीं दिया जा सकता। इसका उद्देश्य एक ही सरकारी आवास के आधार पर दोहरा वित्तीय लाभ रोकना है।

एक सरकारी क्वार्टर पर दो HRA नहीं

HRA कर्मचारियों को किराये के मकान से जुड़े खर्च में आर्थिक राहत देने के लिए दिया जाता है। लेकिन जब किसी कर्मचारी को सरकार की ओर से रहने के लिए आवास उपलब्ध करा दिया जाता है, तो उस अवधि के लिए किराये के मकान का भत्ता लेने का आधार खत्म हो जाता है। ऐसे में अगर पति-पत्नी दोनों केंद्रीय कर्मचारी हैं और उनमें से एक को सरकारी क्वार्टर मिला है, तो दूसरे कर्मचारी के नाम से उसी आवास या स्टेशन के लिए अलग HRA का भुगतान नहीं किया जाएगा।

पति-पत्नी दोनों केंद्र सरकार में नौकरी करते हैं तो क्या होगा?

मान लीजिए पति और पत्नी दोनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और उनकी पोस्टिंग एक ही शहर या स्टेशन पर है। अगर पति को सरकारी आवास आवंटित हुआ और वह उसमें रह रहा है, तो पत्नी को उसी अवधि में HRA का अलग दावा करने की अनुमति नहीं होगी। इसी तरह अगर सरकारी आवास पत्नी को मिला है, तो पति के HRA दावे पर भी संबंधित नियम लागू होंगे। इसलिए ऐसे कर्मचारियों को अपने विभाग को आवास से जुड़ी सही जानकारी देना जरूरी है।

अलग-अलग शहर में पोस्टिंग होने पर स्थिति अलग हो सकती है

अगर पति-पत्नी दोनों की तैनाती अलग-अलग शहरों में है, तो स्थिति उनकी व्यक्तिगत पोस्टिंग और आवास व्यवस्था पर निर्भर करेगी। ऐसे मामलों में प्रत्येक कर्मचारी के लिए HRA की पात्रता संबंधित स्टेशन, सरकारी आवास मिलने या न मिलने और लागू नियमों के आधार पर तय होगी। इसलिए अलग-अलग जगह पोस्टिंग वाले कर्मचारियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि दोनों को हर स्थिति में HRA मिलेगा। उन्हें अपने विभाग या संबंधित कार्यालय से लागू प्रावधानों की पुष्टि करनी चाहिए।

कर्मचारियों के HRA से संबंधित गलत क्लेम की हो सकती है रिकवरी

कर्मचारियों को HRA से संबंधित जानकारी देते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर किसी कर्मचारी को सरकारी आवास आवंटित हो चुका है, तो उसे अपने विभाग को इसकी जानकारी देनी चाहिए। गलत जानकारी देकर या पात्रता नहीं होने के बावजूद HRA लेने पर बाद में अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी की स्थिति बन सकती है। इससे बचने के लिए कर्मचारियों को आवास आवंटन, पोस्टिंग और HRA से संबंधित सभी विवरण विभागीय रिकॉर्ड में सही रखना चाहिए।

केंद्र सरकार के 2 बड़े फैसले, आम लोगों से किसानों तक को खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में देश के ऊर्जा और सड़क ढांचे को मजबूत करने के लिए दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में GOBARdhan योजना और असम के गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को हरी झंडी दी गई। दोनों परियोजनाओं की संयुक्त लागत करीब 32,701 करोड़ रुपये है।

इन फैसलों का असर ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय, जैविक कचरे के उपयोग और पूर्वोत्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर पड़ने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य एक ओर देश में स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को बढ़ावा देना है, वहीं दूसरी ओर असम में आधुनिक हाईवे नेटवर्क का विस्तार करना है।

1. GOBARdhan योजना: किसानों और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ा फैसला

केंद्र सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की GOBARdhan योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य गोबर, कृषि अवशेष, प्रेसमड, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास का इस्तेमाल करके Compressed Biogas (CBG) और जैविक खाद का उत्पादन बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि इससे एक तरफ कचरे का बेहतर उपयोग होगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे।

2. गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर: असम को मिलेगा आधुनिक हाईवे

केंद्र सरकार ने असम में 135.871 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर 8,970.20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह हाईवे NH-15 पर चार लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा और इसे Build-Operate-Transfer (BOT) Toll Mode के तहत तैयार किया जाएगा।

परियोजना में करीब 58.7 किलोमीटर के 5 बाईपास, 15 बड़े और 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास और करीब 210 किलोमीटर सर्विस रोड बनाए जाएंगे। तेजपुर बाईपास पर भारतीय वायुसेना के सहयोग से करीब 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा भी विकसित की जाएगी। इसके अलावा वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक Elephant Underpass बनाया जाएगा।

केंद्र सरकार के संस्थान में बंपर भर्ती, युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी!

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारत सरकार के उपक्रम NTPC Limited ने डिप्टी मैनेजर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 135 पद भरे जाएंगे। नियुक्तियां इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (C&I) क्षेत्रों में की जाएंगी।

135 पदों पर होगी भर्ती

NTPC की ओर से जारी भर्ती अभियान का विज्ञापन नंबर 10/26 है। इसके तहत डिप्टी मैनेजर के कुल 135 पद निर्धारित किए गए हैं। अलग-अलग इंजीनियरिंग डिसिप्लिन के उम्मीदवारों के लिए रिक्तियां उपलब्ध हैं। भर्ती में मुख्य रूप से Electrical, Mechanical और C&I (Control & Instrumentation) विषयों को शामिल किया गया है। इसलिए संबंधित क्षेत्र में योग्यता और अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने का अच्छा अवसर हो सकता है।

12 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 12 अगस्त 2026 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार 26 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवारों को सलाह है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक भर्ती विज्ञापन में अपनी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को ध्यान से जांच लें।

अलग-अलग NTPC लोकेशन पर मिल सकती है पोस्टिंग

भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति NTPC की विभिन्न लोकेशंस पर की जा सकती है। यानी नौकरी का अवसर केवल किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा। उम्मीदवारों को आवेदन से पहले भर्ती से संबंधित पोस्टिंग और सेवा शर्तों की जानकारी आधिकारिक विज्ञापन से जरूर देखनी चाहिए।

पथरी होने के 5 बड़े संकेत! शरीर में दिखें ये लक्षण तो तुरंत हो जाएं सावधान

हेल्थ डेस्क। किडनी में पथरी की समस्या आजकल काफी आम हो गई है। शरीर में कैल्शियम, ऑक्सलेट और दूसरे खनिज पदार्थों के छोटे-छोटे क्रिस्टल जमा होकर धीरे-धीरे कठोर पत्थर का रूप ले सकते हैं। पथरी छोटी होने पर कई बार कोई खास लक्षण नजर नहीं आता, लेकिन जब यह मूत्र की नली में फंसती है तो तेज दर्द समेत कई परेशानियां शुरू हो सकती हैं।

1. कमर या पेट के किनारे अचानक तेज दर्द

किडनी स्टोन का सबसे आम संकेत तेज दर्द माना जाता है। यह दर्द अक्सर कमर के एक तरफ या पसलियों के नीचे शुरू होकर पेट के निचले हिस्से और जांघ के जोड़ तक पहुंच सकता है। कई लोगों में दर्द लगातार रहने के बजाय कुछ समय के अंतराल पर तेज और कम होता रहता है। पथरी के मूत्रनली में आगे बढ़ने पर दर्द की जगह भी बदल सकती है।

2. पेशाब करते समय जलन या दर्द

पेशाब के दौरान जलन, चुभन या दर्द होना भी पथरी का संकेत हो सकता है। खासकर जब पथरी मूत्राशय के करीब पहुंच जाती है, तब पेशाब करते समय असहजता बढ़ सकती है। हालांकि, पेशाब में जलन केवल पथरी के कारण नहीं होती। यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) जैसी दूसरी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। इसलिए लगातार समस्या रहने पर जांच कराना जरूरी है।

3. पेशाब में खून आना

अगर पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या भूरा दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पथरी मूत्रनली की अंदरूनी सतह को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसकी वजह से पेशाब में खून आ सकता है। हर बार पेशाब में खून आने का कारण पथरी ही हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए ऐसा लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

4. बार-बार पेशाब लगना

पथरी की स्थिति और उसके स्थान के आधार पर बार-बार पेशाब आने की इच्छा हो सकती है। कुछ मामलों में पेशाब करते समय रुकावट या कम मात्रा में पेशाब आने की समस्या भी हो सकती है। अगर पथरी मूत्र के प्रवाह में रुकावट पैदा कर रही हो, तो यह गंभीर स्थिति बन सकती है। खासकर जब पेशाब बहुत कम हो जाए या बिल्कुल न आए, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

5. मतली, उल्टी और बुखार

किडनी और मूत्र प्रणाली में तेज दर्द के साथ कुछ लोगों को मतली और उल्टी की समस्या हो सकती है। वहीं अगर पथरी के साथ संक्रमण भी हो जाए तो बुखार और ठंड लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पथरी के साथ तेज बुखार, ठंड लगना, बहुत ज्यादा दर्द या लगातार उल्टी होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।

यूपी सरकार का बड़ा कदम, इन छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पढ़ाई कर रहे पिछड़ा वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत पात्र विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 11 अगस्त 2026 से होगी।

पुराने छात्रों के लिए 25 अगस्त तक मौका

विभाग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, जो विद्यार्थी पहले से इस छात्रवृत्ति योजना का लाभ ले रहे हैं, वे 11 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक अपना आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। वहीं, जो विद्यार्थी पहली बार योजना में आवेदन करने जा रहे हैं, उनके लिए आवेदन की अवधि ज्यादा रखी गई है। नए छात्र 11 अगस्त से 21 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

किन छात्रों को मिलेगा लाभ?

यह योजना मुख्य रूप से पिछड़ा वर्ग के उन विद्यार्थियों के लिए है, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। पात्रता के लिए विद्यार्थी के माता-पिता या अभिभावक की सभी स्रोतों से वार्षिक आय 2 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। योजना के दायरे में कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थी शामिल हैं। इसके अलावा इंटरमीडिएट, स्नातक और अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को भी दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ दिया जाता है।

बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी रकम

छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिए सत्यापन के बाद सहायता राशि विद्यार्थियों के बैंक खातों में सीधे भेजी जाएगी। इससे बीच में किसी तरह की अनियमितता की संभावना कम करने और लाभार्थियों तक सीधे पैसा पहुंचाने में मदद मिलेगी। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों से आवेदन करते समय सभी जरूरी जानकारी सही भरने और दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक अपलोड करने की अपील की है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, मिल रहा मौका

नई दिल्ली। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अहम खबर सामने आई है। आयोग कर्मचारी संगठनों से सीधे बातचीत कर उनकी मांगों और सुझावों को समझने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को जयपुर में विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में कर्मचारी संगठन आयोग के सामने वेतन, भत्तों, सेवा शर्तों और कर्मचारियों से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों को रख सकेंगे। हालांकि, जयपुर की यह बैठक सभी कर्मचारी संगठनों के लिए नहीं होगी। आयोग ने इसके लिए कुछ खास पात्रताएं तय की हैं।

किन संगठनों को मिलेगा बैठक का मौका?

आयोग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, जयपुर बैठक में वही संगठन शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं जो निर्धारित शर्तों को पूरा करते हों। इसके लिए संगठन का राजस्थान में स्थित या पंजीकृत केंद्रीय कर्मचारी संगठन होना जरूरी है। इसके अलावा फेडरेशन और यूनियन भी आवेदन कर सकते हैं।

ऑनलाइन करना होगा आवेदन

योग्य कर्मचारी संगठनों को बैठक में शामिल होने के लिए आयोग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपॉइंटमेंट रिक्वेस्ट भेजनी होगी। आवेदन करते समय संगठन को मेमोरेंडम जमा करने के दौरान प्राप्त हुआ Unique Memo ID भी दर्ज करना अनिवार्य होगा। आयोग पात्र संगठनों में से जिन प्रतिनिधियों को बैठक के लिए चयनित करेगा, उन्हें बैठक की तारीख, समय और स्थान की जानकारी उनके ईमेल के माध्यम से दी जाएगी।

18 अगस्त तक आवेदन का मौका

जयपुर में होने वाली बैठक में शामिल होने के इच्छुक पात्र संगठनों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 18 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। ऐसे में योग्य कर्मचारी संगठनों को समय सीमा के भीतर अपना आवेदन पूरा करना होगा। आवेदन करते समय संगठन को यह सुनिश्चित करना होगा कि दी गई जानकारी सही हो और मेमोरेंडम से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो।

वेतन और भत्तों पर सुझाव का मौका

8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया में कर्मचारी संगठनों की राय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और संबंधित हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठन वेतन, भत्ते, सेवा शर्तों, पेंशन और कर्मचारियों से जुड़े अन्य मुद्दों पर अपनी मांग और सुझाव आयोग के सामने रख सकते हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से दिए गए सुझावों का अध्ययन आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करते समय कर सकता है।

बिहार सरकार का आदेश, जमीन मालिकों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में जमीन रखने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। अगर आपकी जमीन पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के प्रस्तावित क्षेत्र में आती है, तो अब आप उसे बेच या दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कर सकते हैं। सरकार ने टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए पहले लगी रोक को हटा दिया है।

हालांकि, जमीन मालिकों को बिक्री से पहले कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा। सरकार की ओर से तय प्रक्रिया के तहत जमीन बेचने से पहले संबंधित विभाग को इसकी सूचना देना आवश्यक होगा। इसके साथ ही जमीन के हस्तांतरण का कारण भी बताना पड़ेगा।

जमीन बेचने से पहले देनी होगी सूचना

टाउनशिप के प्रस्तावित दायरे में आने वाली जमीन के मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि वे जमीन की बिक्री या हस्तांतरण से पहले नगर विकास एवं आवास विभाग को इसकी जानकारी देंगे। जमीन मालिक को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह अपनी जमीन क्यों बेचना या हस्तांतरित करना चाहता है। यानी अब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन लेन-देन करने से पहले निर्धारित सरकारी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।

क्यों लगाई गई थी खरीद-बिक्री पर रोक?

पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की योजना सामने आने के बाद संबंधित क्षेत्रों की जमीन में लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी थी। सरकार को आशंका थी कि टाउनशिप परियोजना की जानकारी का फायदा उठाकर कुछ लोग बड़े पैमाने पर जमीन की सट्टेबाजी कर सकते हैं। जमीन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए बिचौलियों की सक्रियता और अवैध लेन-देन की आशंका भी जताई गई थी। इसी कारण टाउनशिप के प्रस्तावित क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई थी।

1 अगस्त को जारी हुई अधिसूचना

नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से 1 अगस्त को औपचारिक अधिसूचना जारी कर खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई। अब जमीन मालिक निर्धारित शर्तों को पूरा करते हुए अपनी संपत्ति का लेन-देन कर सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक तरफ जमीन मालिकों को उनकी संपत्ति के इस्तेमाल और बिक्री की सुविधा देना है, तो दूसरी तरफ टाउनशिप परियोजना से जुड़े संभावित अनियमित लेन-देन पर नजर रखना भी है।

CM सम्राट के 4 बड़े एलान, बिहार के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी और छात्रों की शिकायतों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार का कहना है कि छात्रों को ऐसी व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिसमें उन्हें परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह या अन्याय महसूस न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग परीक्षाओं के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को गंभीरता से लेने की जरूरत है। सरकार अब परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान देगी। इसके लिए राज्य स्तर पर अलग-अलग समितियों और व्यवस्थाओं को तैयार किया जाएगा।

1. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनेगी राज्य स्तरीय समिति

सरकार ने राज्य के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एक राज्य स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना और बच्चों के सीखने की क्षमता में लगातार सुधार करना है। समिति शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का अध्ययन कर आवश्यक सुझाव देगी। सरकार की कोशिश है कि स्कूल केवल पढ़ाई कराने की जगह बच्चों के लिए बेहतर सीखने और विकास का केंद्र बनें।

2. परीक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े सुधार

परीक्षाओं को लेकर सरकार का सबसे बड़ा फोकस सुधार और पारदर्शिता पर है। इसके लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति बनाई जाएगी। यह समिति बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल स्तर पर होने वाले मूल्यांकन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उपाय सुझाएगी।

परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। इसका मकसद विद्यार्थियों की केवल याददाश्त नहीं, बल्कि उनकी समझ, ज्ञान और विश्लेषण क्षमता का बेहतर मूल्यांकन करना है।

मुख्यमंत्री ने परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि दुनिया में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों का अध्ययन कर बिहार की परीक्षा प्रणाली में भी जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।

3. छात्रों के लिए लगाए जाएंगे विशेष सहयोग शिविर

सरकार छात्रों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए विशेष सहयोग शिविर आयोजित करेगी। इन शिविरों में मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और संबंधित अधिकारी छात्रों के साथ संवाद करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों से उनकी समस्याएं, सुझाव और परीक्षा या शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां सीधे जानी जाएंगी। सरकार का प्रयास होगा कि सामने आने वाली समस्याओं का समाधान संबंधित स्तर पर किया जा सके।

4. छात्र कल्याण के लिए बनेगा अलग निदेशालय

छात्रों से जुड़े कल्याणकारी कार्यों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए संबंधित विभागों में निदेशालय गठित करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग योजनाओं और छात्र हित से जुड़े कार्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों से संबंधित योजनाओं का लाभ समय पर मिले और उनकी समस्याओं के समाधान में विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो, इसके लिए एक व्यवस्थित तंत्र जरूरी है।

केंद्र सरकार के संस्थान में नौकरी करने का मौका, युवाओं के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने केंद्र सरकार के अधीन विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए असिस्टेंट, जूनियर पर्सनल असिस्टेंट (JPA), अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) और स्टेनोग्राफर के पदों को भरा जाएगा।

इस भर्ती का आयोजन ISRO Centralised Recruitment Board (ICRB) की ओर से किया जा रहा है। कुल 244 रिक्त पदों के लिए योग्य अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 16 अगस्त 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

244 पदों पर होगी भर्ती

ISRO की इस भर्ती में कुल 244 पद शामिल किए गए हैं। भर्ती के तहत असिस्टेंट, जूनियर पर्सनल असिस्टेंट, अपर डिवीजन क्लर्क और स्टेनोग्राफर जैसे पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के वेतन ढांचे के अनुसार वेतन और अन्य निर्धारित सुविधाएं मिलेंगी।

आवेदन करने की तिथि

ISRO ICRB की ओर से जारी विज्ञापन संख्या ISRO:ICRB:01(A-JPA):2026 के तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 जुलाई 2026 से शुरू हुई है। उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के लिए 16 अगस्त 2026 रात 11:55 बजे तक का समय है।

कहां से करना होगा आवेदन?

इस भर्ती के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवारों को ISRO की आधिकारिक वेबसाइट isro.gov.in पर जाकर भर्ती से संबंधित नोटिफिकेशन और आवेदन लिंक देखना होगा।

नौकरी पाने का अच्छा मौका

ISRO देश के प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। ऐसे में यहां विभिन्न प्रशासनिक और कार्यालयी पदों पर नौकरी पाने का अवसर युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। असिस्टेंट, JPA, UDC और स्टेनोग्राफर जैसे पदों के लिए योग्य उम्मीदवार आवेदन करके सरकारी सेवा में जाने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

आवेदन की अंतिम तारीख: 16 अगस्त 2026, रात 11:55 बजे

यूपी के इन बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी! हर महीने मिलेंगे 600 रुपये

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। गंभीर और बहु दिव्यांग बच्चों को स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी को कम करने के लिए पहली बार एस्कार्ट एलाउंस देने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पात्र दिव्यांग छात्रों को हर महीने 600 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।

इस योजना का लाभ प्रदेश के करीब 14,152 दिव्यांग विद्यार्थियों को दिया जाएगा। छात्रों को यह सहायता एक महीने या दो महीने तक नहीं, बल्कि 10 महीने तक मिलेगी। इस हिसाब से प्रत्येक पात्र छात्र को शैक्षणिक अवधि में कुल 6,000 रुपये की मदद मिल सकती है। इस योजना के लिए प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड की ओर से करीब 8.49 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराया गया है।

स्कूल पहुंचने का खर्च होगा कम

दिव्यांग बच्चों के लिए नियमित रूप से स्कूल पहुंचना कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। गंभीर दिव्यांगता या चलने-फिरने में परेशानी के कारण उन्हें स्कूल तक लाने और छुट्टी के बाद वापस घर पहुंचाने के लिए अभिभावकों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। एस्कार्ट भत्ते से इसी आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है।

इन दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

एस्कार्ट एलाउंस के लिए निर्धारित पात्रता के तहत गंभीर दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। इनमें पूर्ण दृष्टि दिव्यांग, बौद्धिक दिव्यांग, सेरेब्रल पाल्सी और बहु दिव्यांग बच्चों के अलावा जेई तथा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से प्रभावित पात्र विद्यार्थी भी शामिल होंगे। यह सहायता परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में अध्ययनरत पात्र दिव्यांग छात्रों के लिए लागू होगी।

अभिभावकों के खाते में आएगी रकम

एस्कार्ट भत्ते की राशि विद्यार्थियों के अभिभावकों के आधार लिंक बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। इससे सहायता राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी। स्कूली शिक्षा महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी किया गया है। संबंधित स्तर पर पात्र विद्यार्थियों की पहचान और योजना का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

नियमित उपस्थिति पर रहेगा जोर

एस्कार्ट एलाउंस का एक अहम उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना ही नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति बढ़ाना भी है। कई बार आने-जाने की सुविधा और खर्च की समस्या के कारण बच्चे नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच पाते। ऐसे में सरकार की यह सहायता अभिभावकों के लिए आर्थिक राहत के साथ बच्चों की शिक्षा जारी रखने में भी मददगार साबित हो सकती है।

केंद्र सरकार का हलफनामा, SC-ST वालों के लिए बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष स्पष्ट किया है। केंद्र ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि मौजूदा संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के तहत SC-ST आरक्षण पर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता।

सरकार ने उन जनहित याचिकाओं का विरोध किया है, जिनमें SC और ST आरक्षण के दायरे में क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। याचिकाओं में यह तर्क दिया गया है कि आरक्षण का लाभ उन परिवारों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए, जो वास्तव में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।

केंद्र का क्या कहना है?

केंद्र सरकार के अनुसार, मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर SC और ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू की जा सके। सरकार ने कहा कि क्रीमी लेयर की व्यवस्था मुख्य रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) से जुड़े आरक्षण के संदर्भ में विकसित हुई है।

याचिकाकर्ताओं ने क्या मांग की है?

इस मामले में दाखिल याचिकाओं में आरक्षण के लाभ को लेकर अलग व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि किसी SC या ST परिवार का कोई सदस्य पहले ही संवैधानिक पद या किसी बड़े सरकारी पद तक पहुंच चुका है, तो उसके बच्चों को भी आरक्षण का लाभ लगातार मिलता रहना जरूरी नहीं होना चाहिए।

SC-ST सूची में बदलाव पर केंद्र ने क्या कहा?

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की संवैधानिक सूची से जुड़े अधिकारों को भी स्पष्ट किया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत SC और ST की सूची में किसी जाति या जनजाति को शामिल करने अथवा हटाने की प्रक्रिया में संसद की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का कहना है कि राज्य स्तर पर किसी समुदाय की सामाजिक स्थिति को देखते हुए सूची में मनमाने तरीके से बदलाव नहीं किया जा सकता। सूची से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना जरूरी है।

पहचान सिर्फ आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं

केंद्र ने अपने पक्ष में आरक्षण से जुड़े पुराने न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया है। सरकार के मुताबिक SC, ST और OBC की पहचान केवल किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर नहीं की जाती। इन वर्गों की पहचान के पीछे ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ापन जैसे व्यापक आधार होते हैं। केंद्र ने इंदिरा साहनी मामले यानी मंडल आयोग से जुड़े ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया है। सरकार का तर्क है कि SC-ST आरक्षण को केवल आय के पैमाने से जोड़ना संवैधानिक व्यवस्था की मूल प्रकृति को प्रभावित कर सकता है।

कल्याणकारी योजनाओं में आय सीमा का भी जिक्र

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि SC, ST और SEBC वर्गों के लिए संचालित कई कल्याणकारी योजनाओं में पहले से ही आय संबंधी पात्रता तय की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अपेक्षाकृत अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।

सरकार ने याचिकाकर्ताओं के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन योजनाओं में बदलाव की आवश्यकता है और प्रस्तावित व्यवस्था से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को वास्तविक रूप से कितना लाभ मिलेगा।

बिहार में इस सड़क का होगा चौड़ीकरण, इन जिलों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में सड़क और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए हैं। राज्य में बढ़ते यातायात दबाव और सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण और नए बाईपास निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन के विस्तार के साथ मुजफ्फरपुर पूर्वी बाईपास के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की गई है।

इसके अलावा पटना से झारखंड सीमा तक एक प्रमुख सड़क मार्ग को फोरलेन करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इन परियोजनाओं के अमल में आने से बिहार के कई जिलों में आवागमन आसान होने के साथ व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

मुजफ्फरपुर-बरौनी सड़क के चौड़ीकरण पर जोर

भारत माला परियोजना के तहत मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन सड़क के चौड़ीकरण को लेकर प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया गया है। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर जल्द तैयार करने और इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इस सड़क के चौड़ीकरण से उत्तर बिहार के प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है। मुजफ्फरपुर और बरौनी के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने से यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

मुजफ्फरपुर में बनेगा पूर्वी बाईपास

मुजफ्फरपुर के लिए प्रस्तावित पूर्वी बाईपास भी इस योजना का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य शहर के भीतर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर से बेहतर संपर्क स्थापित करना है। बाईपास बनने से भारी वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से होकर गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। इससे शहर में जाम की समस्या घटाने और यात्रा के समय को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नौबतपुर से झारखंड सीमा तक फोरलेन

दूसरी बड़ी परियोजना नौबतपुर से झारखंड सीमा तक सड़क को फोरलेन करने से जुड़ी है। यह मार्ग एनएच-139 से संबंधित है, जो पटना को वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सड़क नेटवर्क का हिस्सा है। इस मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाओं को देखते हुए सड़क के चौड़ीकरण की जरूरत बताई गई है। प्रस्ताव में नौबतपुर से झारखंड सीमा तक फोरलेन निर्माण के साथ औरंगाबाद, ओबरा और अंबा बाईपास को भी शामिल करने की मांग की गई है।

8th Pay Commission: 65 साल रिटायरमेंट और पुरानी पेंशन पर बढ़ी उम्मीद?

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के बीच उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के संगठनों ने भी वेतन, पेंशन, रिटायरमेंट की उम्र, प्रमोशन, छुट्टियों और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े कई अहम प्रस्ताव आयोग के सामने रखे हैं। अगर इन मांगों पर विचार होता है तो आने वाले समय में शिक्षकों की सेवा शर्तों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) के तहत आने वाले केंद्रीय सरकारी स्कूल शिक्षकों के संगठन की नई दिल्ली में बैठक हुई। इसमें केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय समेत विभिन्न सरकारी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और सेवा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

देशभर के शिक्षकों के लिए समान सुविधाओं की मांग

शिक्षकों के संगठन की प्रमुख मांगों में देशभर में केंद्रीय सरकारी शिक्षकों के लिए वेतन, भत्ते और अन्य सेवा सुविधाओं में एकरूपता शामिल है। संगठन का कहना है कि समान जिम्मेदारी और समान प्रकृति का काम करने वाले शिक्षकों को अलग-अलग नियमों के कारण सुविधाओं में अंतर नहीं होना चाहिए। बैठक में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, दिल्ली MCD और NDMC स्कूलों सहित दिल्ली सरकार तथा केंद्र शासित प्रदेशों के सरकारी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने अपने मुद्दे रखे।

60 से बढ़ाकर 65 साल करने की मांग

शिक्षकों की सबसे अहम मांगों में से एक रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाना है। संगठन चाहता है कि सरकारी शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए। शिक्षकों का तर्क है कि लंबे अनुभव वाले अध्यापकों की विशेषज्ञता का लाभ शिक्षा व्यवस्था को अधिक समय तक मिल सकता है। उनका मानना है कि अनुभवी शिक्षक विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के साथ-साथ नए शिक्षकों को भी बेहतर प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग

पेंशन को लेकर भी शिक्षकों ने बड़ा मुद्दा उठाया है। संगठन ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ को लेकर कर्मचारियों में कई तरह की चिंताएं हैं।

प्रमोशन व्यवस्था में बदलाव की मांग

शिक्षकों ने करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रमोशन व्यवस्था में बदलाव की भी मांग रखी है। संगठन की ओर से प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति के लिए 50 प्रतिशत प्रमोशनल कोटा निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा 25 प्रतिशत पदों को परीक्षा के माध्यम से प्रमोशन देने की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। शिक्षकों का मानना है कि इससे योग्य और अनुभवी शिक्षकों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिल सकेंगे।

छुट्टियों को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव

शिक्षकों ने छुट्टियों की व्यवस्था में सुधार की मांग भी की है। प्रस्ताव के अनुसार शिक्षकों को एक साल में 14 कैजुअल लीव, 30 अर्न्ड लीव और 20 मेडिकल लीव देने की मांग की गई है। इसके साथ ही पुरुष शिक्षकों को भी चाइल्ड केयर लीव (CCL) का लाभ देने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि परिवार और बच्चों से जुड़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए छुट्टियों की व्यवस्था को अधिक समान और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए।

कैशलेस इलाज और स्वास्थ्य सुविधा

शिक्षकों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग भी 8वें वेतन आयोग के सामने रखी है। दिल्ली सरकार के शिक्षकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद DGEHS या CGEHS में से किसी एक स्वास्थ्य योजना का विकल्प देने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, सेवा के दौरान सभी केंद्रीय सरकारी शिक्षकों को कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! पोस्टिंग को लेकर नए नियम लागू

नई दिल्ली। रेलवे में नौकरी करने वाले पति-पत्नी के लिए राहत की खबर है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बनाने के उद्देश्य से रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े दिशा-निर्देशों को अपडेट किया है। नए प्रावधानों में पति-पत्नी को एक ही स्टेशन या संभव होने पर आसपास के स्थान पर तैनाती देने पर जोर दिया गया है।

रेलवे बोर्ड ने अराजपत्रित कर्मचारियों के स्थानांतरण और तैनाती से संबंधित अलग-अलग समय पर जारी निर्देशों को एक जगह समेकित करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जहां प्रशासनिक रूप से संभव हो, कर्मचारियों को परिवार से दूर रहकर नौकरी करने की परेशानी कम हो और बच्चों की देखभाल जैसी जिम्मेदारियां भी आसानी से निभाई जा सकें।

नई व्यवस्था में पति-पत्नी दोनों रेलवे कर्मचारी हैं तो क्या होगा?

अगर पति और पत्नी दोनों रेलवे में कार्यरत हैं और एक ही सीनियरिटी यूनिट में आते हैं, तो प्रशासन उनकी पोस्टिंग एक ही स्टेशन पर करने की संभावना तलाशेगा। हालांकि, तैनाती तय करते समय एक अहम शर्त का ध्यान रखा जाएगा। दोनों में से किसी एक कर्मचारी को दूसरे के सीधे अधीनस्थ पद पर तैनात नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर प्रशासनिक निष्पक्षता और सेवा संबंधी व्यवस्था को बनाए रखना है।

अलग-अलग सीनियरिटी यूनिट होने पर क्या व्यवस्था होगी?

यदि पति-पत्नी रेलवे की अलग-अलग सीनियरिटी यूनिट में काम कर रहे हैं, तो ऐसी जगह पोस्टिंग देने की कोशिश की जाएगी जहां दोनों के लिए उपयुक्त पद उपलब्ध हों। हालांकि, हर मामले में एक ही स्टेशन पर तैनाती संभव नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में प्रशासन उपलब्ध पदों और कर्मचारी की सेवा संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी द्वारा कैटेगरी बदलने के अनुरोध पर भी लागू नियमों के तहत विचार किया जा सकता है।

पोस्टिंग नहीं मिलने पर कर्मचारी क्या कर सकता है?

नए प्रावधानों में शिकायतों के निपटारे को लेकर भी व्यवस्था रखी गई है। यदि किसी कर्मचारी को पति-पत्नी की संयुक्त पोस्टिंग से संबंधित अनुरोध के बावजूद सुविधा नहीं मिलती है, तो संबंधित प्रशासन को निर्णय का उचित कारण बताना होगा। इसके अलावा, कर्मचारी की शिकायत पर अंतिम निर्णय उसी अधिकारी से कम से कम एक स्तर ऊपर का अधिकारी करेगा, जिसने मूल फैसला लिया था। इससे शिकायतों की समीक्षा के लिए एक अतिरिक्त प्रशासनिक स्तर उपलब्ध होगा।

ट्रांसफर और शिकायतों का रखा जा सकता है रिकॉर्ड

पति-पत्नी की पोस्टिंग से जुड़े मामलों की निगरानी बेहतर तरीके से करने के लिए ट्रांसफर अनुरोधों और शिकायतों का अलग रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कितने कर्मचारियों ने संयुक्त पोस्टिंग के लिए आवेदन किया और उनके मामलों में क्या निर्णय लिया गया। यह व्यवस्था प्रशासन को ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा करने में भी मदद कर सकती है।

किन रेलवे कर्मचारियों पर लागू होंगे ये निर्देश?

नए दिशा-निर्देश मुख्य रूप से अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों से जुड़े हैं। यानी ऐसे कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामलों में इन प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा। वहीं, राजपत्रित अधिकारियों के लिए पहले से लागू स्थानांतरण और तैनाती संबंधी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनके मामलों में मौजूदा प्रावधान ही लागू रहेंगे।

पुराने मामलों पर नहीं होगा दोबारा विचार

रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों का निपटारा पहले ही पुराने नियमों के तहत किया जा चुका है, उन्हें नए दिशा-निर्देशों के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी नए प्रावधान मुख्य रूप से आगे आने वाले मामलों में लागू होंगे।

परिवार के साथ रहने में मिलेगी मदद

रेलवे में बड़ी संख्या में कर्मचारी अलग-अलग शहरों और स्टेशनों पर तैनात रहते हैं। पति-पत्नी दोनों के रेलवे में काम करने की स्थिति में अलग-अलग जगह पोस्टिंग होने से परिवार को कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नए दिशा-निर्देशों में एक ही स्टेशन या आसपास पोस्टिंग की संभावना पर जोर दिए जाने से कर्मचारियों को परिवार के साथ रहने का बेहतर अवसर मिल सकता है।

27 या 28 अगस्त कब है रक्षाबंधन? दूर करें कन्फ्यूजन, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

धर्म डेस्क। रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही राखी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बढ़ गया है। इस बार कई लोग यह जानना चाहते हैं कि भाई-बहन के प्रेम का पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा या 28 अगस्त को। तारीख को लेकर भ्रम की मुख्य वजह सावन पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि ग्रहण और उससे जुड़े सूतक काल का रक्षाबंधन पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं।

पंचांग के अनुसार इस बार रक्षाबंधन 27 अगस्त को मनाया जाएगा। बहनें इसी दिन शुभ समय में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। वहीं, 28 अगस्त को होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका असर त्योहार की पूजा और राखी बांधने पर नहीं माना जाएगा।

28 अगस्त को लगेगा चंद्र ग्रहण

सावन पूर्णिमा के अवसर पर इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण पड़ने वाला है। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण 28 अगस्त की सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:32 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। चंद्र ग्रहण के कारण ही रक्षाबंधन की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल पैदा हुआ है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दिखाई देने और न दिखाई देने का भी विशेष महत्व माना जाता है।

27 अगस्त की रात से सूतक की चर्चा

चंद्र ग्रहण के करीब नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू होने की सामान्य धार्मिक मान्यता है। इस आधार पर 27 अगस्त की रात करीब 9:53 बजे से सूतक काल शुरू होने की बात कही जा रही है। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारतीय क्षेत्र में सूतक काल को मान्य नहीं माना जाएगा। इसी वजह से रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण संबंधी नियमों का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

27 अगस्त को ही मनाया जाएगा रक्षाबंधन

पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह 5:38 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 6:18 बजे तक रहेगी। इस दौरान 27 अगस्त को राखी बांधने के लिए उपयुक्त समय उपलब्ध है। भद्रा से संबंधित समय को ध्यान में रखते हुए रक्षाबंधन का पर्व 27 अगस्त को ही मनाना शुभ माना गया है। यानी बहनें 27 अगस्त को अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना कर सकती हैं।