नई दिल्ली। देश के करोड़ों गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने Sugarcane (Control) Order, 1966 में संशोधन के लिए नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसका उद्देश्य पुराने नियमों को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाना है।
पुराने नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी
यह ड्राफ्ट चीनी उद्योग से जुड़े कई अहम नियमों में सुधार का प्रस्ताव लेकर आया है। इसमें भुगतान प्रणाली, नई चीनी मिलों की स्थापना, एथेनॉल उत्पादन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों और मिलों के बीच लंबे समय से चल रहे विवादों को कम किया जाए और व्यवस्था को अधिक सुचारु बनाया जाए।
किसानों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी
प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम बात यह है कि गन्ना आपूर्ति के बाद किसानों को 14 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। यह नियम किसानों के नकदी प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करेगा। यदि कोई चीनी मिल समय पर भुगतान नहीं करती है, तो उस पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज लगाने का प्रावधान रखा गया है। इससे भुगतान में देरी की समस्या पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
बकाया राशि की वसूली होगी आसान
सरकार ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यदि किसी मिल द्वारा किसानों का भुगतान रोका जाता है, तो बकाया राशि की वसूली जिला प्रशासन द्वारा भू-राजस्व की तरह की जा सकेगी। इससे किसानों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
FRP व्यवस्था रहेगी जारी
वहीं, न्यूनतम गन्ना मूल्य यानी Fair and Remunerative Price (FRP) प्रणाली को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसका मतलब है कि किसानों को उनके गन्ने का एक निश्चित न्यूनतम मूल्य मिलता रहेगा, जिससे उनकी आय की सुरक्षा बनी रहेगी।
नई चीनी मिलों के लिए नए नियम
ड्राफ्ट के अनुसार, अब कोई भी नई चीनी मिल पहले से मौजूद मिल के 25 किलोमीटर के दायरे में स्थापित नहीं की जा सकेगी। इसका उद्देश्य कच्चे माल की अनावश्यक प्रतिस्पर्धा को रोकना और उद्योग में संतुलन बनाए रखना है। हालांकि, राज्य सरकारें केंद्र की अनुमति से इस दूरी में बदलाव का प्रस्ताव भी रख सकती हैं।
एथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
नई नीति में एथेनॉल उत्पादन को भी चीनी उद्योग प्रणाली में शामिल करने की दिशा दिखाई गई है। इससे चीनी मिलों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और गन्ने की मांग में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। यह कदम ऊर्जा मिश्रण नीति के अनुरूप भी माना जा रहा है।
सुझाव देने की अंतिम तारीख भी तय
सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 20 मई तक आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद अंतिम नियमों को लागू किया जाएगा।