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यूपी सरकार की नई पहल, किसानों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी, उठाएं लाभ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए कमाई का एक नया रास्ता खुलने जा रहा है। अब किसान पारंपरिक खेती के साथ तालाब में मोती उत्पादन करके भी अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार की मोती संवर्धन योजना के तहत गोरखपुर में तैयारियां की जा रही हैं। जिले में योजना के संचालन के लिए 18 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को मोती उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ना और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

गोरखपुर में 18 लाख रुपये का बजट

योजना के लिए गोरखपुर में 18 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। फिलहाल विभाग को शासन से धनराशि मिलने का इंतजार है। बजट उपलब्ध होने के बाद लाभार्थियों का लक्ष्य तय कर आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मत्स्य विभाग अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने के लिए जागरूकता बढ़ाने की तैयारी में है।

किसानों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण

मोती उत्पादन की जानकारी देने के लिए सितंबर 2026 में गोरखपुर मंडल के 15 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया था। चरगावां स्थित कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने सीप का चयन, उसमें न्यूक्लियस प्रत्यारोपित करने और तालाब के रखरखाव की वैज्ञानिक विधि समझाई।

अपनी क्षमता के अनुसार लगा सकेंगे इकाई

योजना के तहत किसान तीन तरह की उत्पादन इकाइयां स्थापित कर सकेंगे। इनमें 2,000 सीप क्षमता वाली इकाई की अनुमानित लागत 1.50 लाख रुपये, 5,000 सीप वाली इकाई की लागत 3.50 लाख रुपये और 15,000 सीप क्षमता वाली इकाई की लागत 10 लाख रुपये रखी गई है। इससे किसान अपने संसाधनों और तालाब की क्षमता के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे।

पूरे प्रदेश के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान

वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश सरकार ने मोती संवर्धन योजना के लिए कुल 3 करोड़ रुपये का बजट रखा है। योजना के तहत लाभार्थियों का चयन जिला स्तर पर गठित समिति करेगी और आवेदन विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन लिए जाएंगे। सरकार की इस पहल से कम उपयोग में आने वाले जल स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और किसानों को खेती के अलावा कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिल सकता है।

मौसम का महाअलर्ट! तूफान 'मुरसु' मचाएगा कोहराम, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली। चक्रवाती तूफान अर्नब के बाद बंगाल की खाड़ी में एक और मौसमी सिस्टम विकसित हो रहा है। इसे संभावित रूप से 'मुरसु' नाम दिया जाएगा। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, यह सिस्टम मजबूत होकर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है और 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तट के पास पहुंच सकता है। इसके चलते ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

ओडिशा में प्रशासन अलर्ट, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी

संभावित खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए तलहटी में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की योजना बनाई गई है। संवेदनशील इलाकों के निवासियों से भी सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग ने ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। यानम में भी तेज बारिश हो सकती है। इसके अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अगले सप्ताह की शुरुआत में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। केरल और माहे में भी तेज बारिश का अनुमान है।

उत्तर भारत में फिलहाल राहत

पूर्वी और दक्षिणी भारत में जहां बारिश का खतरा बढ़ रहा है, वहीं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकतर इलाकों में फिलहाल मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग इस नए सिस्टम की दिशा और ताकत पर लगातार नजर रख रहा है। इसकी वास्तविक तीव्रता और संभावित रास्ते को लेकर आगे के अपडेट महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करना चाहिए।

241 दिन तक शनिदेव रहेंगे मार्गी, 3 राशियों की चमकेगी किस्मत!

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव की चाल को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि शनि की स्थिति में बदलाव का असर सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ता है। फिलहाल शनिदेव मीन राशि में वक्री अवस्था में हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 11 दिसंबर 2026 से वे मार्गी हो जाएंगे और करीब 241 दिनों तक सीधी चाल चलेंगे। इस बदलाव को तीन राशियों के लिए शुभ माना जा रहा है।

तुला राशि: 

शनि की मार्गी चाल तुला राशि के जातकों के लिए राहत और तरक्की के अवसर ला सकती है। नौकरीपेशा लोगों को काम में सफलता मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सुधार और रुके हुए काम पूरे होने की उम्मीद है।

वृषभ राशि: 

इस राशि के लोगों के लिए धन और करियर के लिहाज से समय अनुकूल रह सकता है। आय के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ तरक्की के रास्ते भी खुल सकते हैं। कारोबार करने वालों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

मकर राशि: 

शनिदेव की सीधी चाल मकर राशि के जातकों को मेहनत का अच्छा परिणाम दिला सकती है। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। लंबे समय से अटके कामों में भी गति आ सकती है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि का मार्गी होना इन तीन राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, वास्तविक परिणाम व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करते हैं।

यूपी के गांवों में खुशखबरी की तैयारी, 58 हजार पंचायतों में होगा बड़ा काम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांवों के विकास को लेकर योगी सरकार नई तैयारी कर रही है। प्रदेश की करीब 58 हजार ग्राम पंचायतों में अब तकनीक आधारित नियोजन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत गांवों की जरूरतों, उपलब्ध सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के आंकड़ों के आधार पर विकास का रोडमैप तैयार होगा। सरकार का उद्देश्य है कि हर ग्राम पंचायत की विकास योजना वहां की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाए।

इसके लिए विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) पोर्टल तैयार किया गया है। ग्राम्य विकास आयुक्त प्रमोद कुमार उपाध्याय ने सभी जिलाधिकारियों को इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को दो चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले प्रदेश मुख्यालय पर प्रशिक्षण होगा, जबकि अगले एक सप्ताह के भीतर विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों को भी तकनीकी जानकारी दी जाएगी।

घरौनी और फार्मर रजिस्ट्री में भी यूपी ने बनाए बड़े आंकड़े

ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के मामले में भी प्रदेश में काम किया जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत अब तक 1.05 करोड़ से अधिक घरौनियों का निर्माण और वितरण किया जा चुका है। वहीं फार्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत 1.44 करोड़ से ज्यादा किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।

फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों की पहचान और उनसे जुड़ी जानकारियां एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इससे कृषि योजनाओं का लाभ देने के लिए पात्रता सत्यापित करने में सुविधा मिल सकती है। दूसरी ओर, घरौनी से ग्रामीण परिवारों की संपत्तियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने में मदद मिल रही है।

गांवों की जरूरत के हिसाब से बनेगी विकास योजना

नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में साक्ष्य आधारित और सैचुरेशन आधारित प्लानिंग पर जोर रहेगा। यानी गांव में सड़क, पेयजल, आवास और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को ध्यान में रखकर विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। वीजीपीपी पोर्टल के जरिए योजनाओं को डिजिटल तरीके से तैयार करने और उनकी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने की कोशिश होगी।

इस पहल के बाद प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों को विकास की योजना बनाने में तकनीक का सहारा मिलेगा। हालांकि, इसका वास्तविक असर प्रशिक्षण पूरा होने और योजनाओं के धरातल पर लागू होने के बाद दिखाई देगा।

यूपी के युवाओं की बल्ले-बल्ले! 1 लाख से ज्यादा पदों पर सीधी भर्ती की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। योगी सरकार अगले छह महीने में एक लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस, होमगार्ड और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग समेत विभिन्न विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य करीब 1.07 लाख युवाओं को नौकरी देने का है।

इस भर्ती योजना में यूपी पुलिस के करीब 36 हजार पद, होमगार्ड के 41 हजार पद और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से लगभग 30 हजार पद शामिल हैं। इन भर्तियों के जरिए प्रदेश के युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।

अग्निवीरों को मिलेगा 20 प्रतिशत आरक्षण

योगी सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए भी बड़ा फैसला किया है। चार साल की सैन्य सेवा पूरी करके लौटने वाले अग्निवीरों को प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पुलिस, पीएसी, होमगार्ड, वन विभाग और कारागार विभाग में नौकरी के अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, अग्निवीरों को सेना में चार साल के दौरान अनुशासन, प्रशिक्षण और सुरक्षा का अनुभव मिलता है। इसी अनुभव का लाभ प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था में लिया जाएगा। सरकार उन्हें भर्ती प्रक्रिया में सीधी नियुक्ति का अवसर देने की तैयारी कर रही है।

इस तरह यूपी में एक तरफ एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व अग्निवीरों के लिए भी सरकारी सेवाओं के दरवाजे खोलने की तैयारी की जा रही है।

यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बढ़ी सैलरी, जानें नया मानदेय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दिवाली से पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने दोनों के मासिक मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इस फैसले से प्रदेश की करीब 2.91 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को लाभ मिलने की बात कही गई है।

नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब हर महीने 8,000 रुपये के बजाय 12,000 रुपये मिलेंगे। वहीं, सहायिकाओं का मानदेय 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी सितंबर 2026 से लागू होगी और बढ़ा हुआ भुगतान अक्टूबर के मानदेय में किए जाने की जानकारी दी गई है।

परिवार को 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज

सरकार ने मानदेय बढ़ाने के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा की भी घोषणा की है। इसके तहत उन्हें 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इससे कर्मचारियों को आर्थिक मदद के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिल सकेगी।

सीएम योगी ने दीपोत्सव के लिए किया आमंत्रित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी 49वीं पाती में अयोध्या के दीपोत्सव का उल्लेख करते हुए लोगों से परिवार और मित्रों के साथ पहुंचने की अपील की। उन्होंने दीपोत्सव को भारतीय संस्कृति, त्याग और मर्यादा से जुड़ा पर्व बताया। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के प्रति भरत के समर्पण का उदाहरण देते हुए कहा कि सत्ता का अर्थ केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है।

सीएम योगी के मुताबिक, सरयू तट और राम की पैड़ी पर दीपों की सजावट अयोध्या को भव्य रूप देगी। दीपोत्सव से कुम्हारों, फूल विक्रेताओं, होटल संचालकों और अन्य स्थानीय कारोबारियों को भी रोजगार व आमदनी के अवसर मिलते हैं।

ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी! संकट के समय सहारा बन रही यूपी सरकार

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में आर्थिक संकट से जूझ रहे ग्रामीण परिवारों की मदद के लिए योगी सरकार की ओर से पहल की जा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित जोखिम निवारण निधि जरूरतमंद परिवारों को आपात स्थिति में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का माध्यम बन रही है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, अब तक 36,330 ग्राम संगठनों को इस निधि के लिए 415 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।

इस योजना का उद्देश्य बीमारी, दुर्घटना और प्राकृतिक आपदा जैसी मुश्किल परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना है। खाद्य संकट, अस्पताल में भर्ती होने, आगजनी, बाढ़, सूखा और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है। इसमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के साथ पात्र गैर-समूह परिवारों को भी सहायता देने का प्रावधान है।

ग्राम संगठन के पास रहता है डेढ़ लाख रुपये का फंड

योजना के तहत प्रत्येक ग्राम संगठन को एक बार डेढ़ लाख रुपये की जोखिम निवारण निधि उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर इसी राशि से पात्र परिवारों को स्थानीय स्तर पर आर्थिक मदद दी जाती है। समूह के सदस्य को 5,000 रुपये तक सहायता मिल सकती है। विशेष परिस्थितियों में ग्राम संगठन के पदाधिकारियों की सहमति से यह मदद अनुदान के रूप में भी दी जा सकती है।

महिला स्वयं सहायता समूहों को भी मिल रहा बढ़ावा

इस पहल में महिला स्वयं सहायता समूह और ग्राम संगठन अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनके जरिए संकट से प्रभावित परिवारों की पहचान कर उन्हें सहायता पहुंचाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को रोजगार और आजीविका के लिए ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मिशन की शुरुआत से अब तक 9.75 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के लिए 11,378 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, पेंशनभोगियों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को राहत देने के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार, माता-पिता पर आश्रित विधवा और तलाकशुदा बेटियों को उनके CGHS कार्ड में शामिल करने की अनुमति दी गई है। खास बात यह है कि मूल सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद भी निर्धारित शर्तें पूरी होने पर बेटियों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

पुराने नियमों से मिल सकती है राहत

पहले मूल कार्डधारक की मृत्यु के बाद, जब उनके जीवनसाथी को पारिवारिक पेंशन मिलने लगती थी, तब CGHS कार्ड में नए आश्रित सदस्य को जोड़ने या दोबारा शामिल करने में नियमों की बाधा आती थी। इससे उन बेटियों के लिए इलाज की सुविधा प्रभावित हो सकती थी, जो आर्थिक रूप से अपने माता-पिता पर निर्भर थीं। नए फैसले से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

किन बेटियों को मिलेगा लाभ?

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए बेटी का विधवा या कानूनी रूप से तलाकशुदा होना जरूरी होगा। साथ ही, उसकी अपनी स्वतंत्र आय नहीं होनी चाहिए और वह पेंशनभोगी पर निर्भर होनी चाहिए। इसके अलावा, CGHS के तहत लागू अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा करना होगा। कार्ड में नाम जोड़ने से पहले संबंधित दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।

सरकार के इस कदम से उन पेंशनभोगी परिवारों को मदद मिल सकती है, जो अपनी आश्रित बेटियों के इलाज के खर्च को लेकर चिंतित रहते हैं। पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के लिए संबंधित CGHS कार्यालय से आधिकारिक जानकारी लेना उचित रहेगा।

ओल्ड पेंशन स्कीम पर बड़ा अपडेट! कर्मचारियों के लिए आई खुशखबरी

न्यूज डेस्क। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग कर रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए जम्मू-कश्मीर से राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार ने कुछ पात्र कर्मचारियों को नई पेंशन योजना (NPS) से पुरानी पेंशन योजना में जाने का एकमुश्त विकल्प दिया है। इसका लाभ उन कर्मचारियों को मिल सकता है, जिनकी भर्ती के लिए विज्ञापन 24 दिसंबर 2009 से पहले जारी हुआ था, भले ही उनकी नियुक्ति इसके बाद हुई हो।

इस संबंध में जम्मू-कश्मीर के वित्त विभाग ने 29 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया था। पात्र कर्मचारियों को OPS चुनने के लिए आदेश की तारीख से तीन महीने का समय दिया गया है। यानी आवेदन करने की अंतिम समयसीमा 29 दिसंबर 2026 है। ऐसे में इच्छुक कर्मचारियों को तय प्रक्रिया के तहत समय रहते अपना विकल्प देना होगा।

DDO के पास जमा करना होगा आवेदन

पुरानी पेंशन योजना का विकल्प चुनने के लिए पात्र कर्मचारियों को अपना आवेदन संबंधित विभाग के ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) के पास जमा करना होगा। वहां से दस्तावेजों की जांच के बाद आवेदन प्रशासनिक विभाग को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने पर कर्मचारी का पुराना NPS खाता बंद कर दिया जाएगा और उसे सामान्य भविष्य निधि (GPF) से जोड़ दिया जाएगा।

दूसरे राज्यों के कर्मचारियों में बढ़ी उम्मीद

जम्मू-कश्मीर सरकार के इस फैसले के बाद दूसरे राज्यों के उन कर्मचारियों में भी उम्मीद जगी है, जो पुरानी भर्ती प्रक्रिया के तहत नौकरी में आए थे, लेकिन उन्हें NPS के दायरे में रखा गया। ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल के अनुसार, इस फैसले से दिल्ली और अन्य राज्यों के ऐसे कर्मचारियों की मांग को भी एक आधार मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल यह आदेश जम्मू-कश्मीर के पात्र कर्मचारियों के लिए है।

OPS और NPS में क्या है अंतर?

पुरानी पेंशन योजना में पेंशन का भुगतान सरकारी व्यवस्था के तहत होता था, जबकि नई पेंशन योजना अंशदान आधारित है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान शामिल होता है। जम्मू-कश्मीर में 1 जनवरी 2010 या उसके बाद सेवा में आए कर्मचारियों के लिए NPS लागू किया गया था। अब पुराने भर्ती विज्ञापनों के आधार पर पात्र कर्मचारियों को OPS चुनने का एक मौका दिया गया है।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, ग्रामीणों के लिए आई 1 बड़ी खुशखबरी, परेशानी दूर

नई दिल्ली। ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम करने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार ने शिकायतों के निपटारे की नई व्यवस्था लागू की है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इनके तहत शिकायतों का समाधान 15 दिनों के भीतर करना होगा। सरकार का उद्देश्य शिकायत प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।

पंचायत से जिला स्तर तक बनेगी व्यवस्था

नए नियमों के अनुसार, राज्य सरकारों को ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायत निवारण की व्यवस्था करनी होगी। हर स्तर पर नियुक्त अधिकारी शिकायत प्राप्त करने, उसका रिकॉर्ड रखने, जांच करने और समाधान की जिम्मेदारी संभालेंगे। जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों शिकायत

ग्रामीण नागरिक अपनी शिकायत कई माध्यमों से दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए संबंधित अधिकारी के पास सीधे जाकर, स्पीड पोस्ट, केंद्र सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म, टेलीफोन हेल्पलाइन या राज्य सरकार की ओर से तय अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यदि शिकायत ऑफलाइन मिलती है, तो संबंधित अधिकारी को उसे उसी दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करना होगा। ऐसा संभव नहीं होने पर अगले कार्यदिवस में उसकी ऑनलाइन एंट्री करनी होगी।

शिकायत दर्ज होने पर मिलेगा रजिस्ट्रेशन नंबर

नियमों के तहत शिकायत मिलने के बाद आवेदक को पावती देना अनिवार्य होगा। इसमें शिकायत का रजिस्ट्रेशन नंबर, प्राप्ति की तारीख और संबंधित अधिकारी का पद दर्ज रहेगा। ऑनलाइन शिकायत करने वालों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से और ऑफलाइन आवेदन करने वालों को लिखित पावती मिलेगी।

खास बात यह है कि शिकायत के प्रारूप में कमी, भाषा या आवेदन की प्रक्रिया से जुड़ी किसी त्रुटि के आधार पर शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण रोजगार योजना के लाभार्थियों और आम नागरिकों को अपनी समस्याएं रखने तथा उनका समयबद्ध समाधान पाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

खुशखबरी का इंतजार खत्म! बिहार में 2 सरकारी भर्तियां शुरू, फटाफट करें आवेदन

पटना। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बिहार से अच्छी खबर है। राज्य में शिक्षक और सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर के कुल 32,963 पदों पर भर्ती प्रक्रिया निकाली गई है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4.0 के तहत 32,388 पदों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं। वहीं, बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) ने सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर के 575 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है।

1 .BPSC TRE-4.0 में 32,388 शिक्षक पद

बिहार लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 14/2026 के तहत शिक्षक भर्ती परीक्षा 4.0 का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के जरिए शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूल शिक्षकों के 32,388 पद भरे जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 3 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।

2 .सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर के 575 पद

दूसरी भर्ती बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद की ओर से निकाली गई है। बोर्ड ने विज्ञापन संख्या Sa.Sa.-17/Vividh-01-289/2026-1299(17) के तहत सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर के कुल 575 पदों पर आवेदन मांगे हैं। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 2 नवंबर 2026 से शुरू हो चुके हैं। योग्य उम्मीदवार 23 नवंबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन से पहले जरूर देखें नोटिफिकेशन

दोनों भर्तियों के लिए शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण और चयन प्रक्रिया अलग-अलग निर्धारित की गई है। ऐसे में उम्मीदवार आवेदन करने से पहले संबंधित भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ लें। आवेदन के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी सही भरें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

3 नवंबर को चमकेगी 5 राशियों की किस्मत! ब्रह्म योग और गजकेसरी राजयोग से मिलेगी खुशखबरी

राशिफल। 3 नवंबर का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। इस दिन ब्रह्म योग और गजकेसरी राजयोग का संयोग बनने की चर्चा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ऐसे शुभ योगों का प्रभाव कुछ राशियों के लिए सकारात्मक रह सकता है। इस दौरान करियर, धन और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में अच्छे अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा सकती है।

ज्योतिष शास्त्र में ब्रह्म योग को शुभ कार्यों और सकारात्मक परिणामों से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, गजकेसरी राजयोग का संबंध गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति से माना जाता है। मान्यता है कि यह योग ज्ञान, मान-सम्मान, आर्थिक उन्नति और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने वाला होता है।

इन 5 राशियों के लिए रह सकता है खास दिन

मेष राशि: इस राशि के जातकों को कामकाज में नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद रहेगी। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसले लेना फायदेमंद हो सकता है।

वृषभ राशि: वृषभ राशि वालों के लिए धन से जुड़े मामलों में राहत के संकेत माने जा रहे हैं। रुका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। परिवार में खुशियों का माहौल रह सकता है और किसी पुराने परिचित से अच्छी खबर मिल सकती है।

मिथुन राशि: इस राशि के जातकों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को नई योजना पर काम शुरू करने का अवसर मिल सकता है। बातचीत और संपर्कों के जरिए लाभ मिलने की संभावना रहेगी।

सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए मान-सम्मान और कार्यक्षेत्र के लिहाज से दिन अनुकूल रह सकता है। अधिकारियों से सहयोग मिल सकता है। कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना भी बन सकती है।

धनु राशि: धनु राशि के जातकों के लिए यह दिन नई योजनाओं और सकारात्मक बदलावों का संकेत दे सकता है। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। आर्थिक मामलों में भी परिस्थितियां बेहतर होने की उम्मीद रहेगी।

यूपी में आई 1 बड़ी खुशखबरी, 12वीं पास युवाओं के लिए जॉब ही जॉब

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे 12वीं पास युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत स्टोर कीपर कम क्लर्क, फार्म क्लर्क, स्टेनोग्राफर समेत विभिन्न पदों पर कुल 1,784 रिक्तियां भरी जाएंगी।

भर्ती के लिए योग्यता और आयु सीमा

इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी है। अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिल सकती है।

कितना मिलेगा वेतन?

चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार हर महीने 19,900 रुपये से लेकर 21,700 रुपये तक वेतन दिया जाएगा। अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और चयन प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में उपलब्ध है।

कब से शुरू होंगे आवेदन?

UPSSSC की इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार 1 दिसंबर 2026 तक आवेदन कर सकेंगे।

कहां और कैसे करें आवेदन?

आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाना होगा। वहां भर्ती से संबंधित लिंक के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म भरकर जरूरी जानकारी और दस्तावेज जमा करने होंगे। आवेदन करने से पहले नोटिफिकेशन में दिए गए पदवार योग्यता और अन्य शर्तों को ध्यान से पढ़ लें।

कुल पद: 1,784

योग्यता: 12वीं पास

आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष

वेतन: ₹19,900 से ₹21,700 प्रतिमाह

आवेदन शुरू: 10 नवंबर 2026

अंतिम तारीख: 1 दिसंबर 2026

वेबसाइट: upsssc.gov.in

बिहार सरकार की शानदार योजना, बेटियों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार बेटियों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना चला रही है। इस योजना के तहत बच्चियों के जन्म से लेकर उनकी पढ़ाई के अलग-अलग पड़ावों पर आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकना, कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाना और लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

जन्म से पढ़ाई तक मिलती है सहायता

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की शुरुआत वर्ष 2018-19 में हुई थी। इसके तहत एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को लाभ दिया जा सकता है। बच्ची के जन्म पर 2,000 रुपये, एक साल की उम्र और आधार पंजीकरण के बाद 1,000 रुपये तथा दो साल की उम्र में पूर्ण टीकाकरण होने पर 2,000 रुपये दिए जाते हैं।

इसके अलावा छात्राओं को सेनेटरी नैपकिन के लिए सालाना 300 रुपये की सहायता मिलती है। स्कूल की पढ़ाई, ड्रेस, इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर पर भी निर्धारित नियमों के अनुसार अलग-अलग राशि दी जाती है। दिए गए विवरण के मुताबिक, जन्म से लेकर पढ़ाई तक कुल सहायता करीब 50 हजार रुपये तक हो सकती है।

कौन ले सकता है योजना का लाभ?

इस योजना के लिए बच्ची का बिहार का मूल निवासी होना जरूरी है। एक परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही पात्र हैं। साथ ही बेटी के नाम पर आधार से जुड़ा बैंक खाता होना चाहिए, ताकि सहायता राशि सीधे खाते में भेजी जा सके।

कैसे करें आवेदन?

बच्ची के जन्म से लेकर शुरुआती उम्र तक मिलने वाली सहायता के लिए आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क किया जा सकता है। स्कूल स्तर पर लाभ लेने के लिए संबंधित विद्यालय में नामांकन जरूरी है। वहीं, इंटर और स्नातक की पढ़ाई से जुड़ी सहायता के लिए आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होता है।

आवेदन करने से पहले पात्रता, जरूरी दस्तावेज और अलग-अलग चरणों में मिलने वाली सहायता राशि की जानकारी आधिकारिक पोर्टल से जरूर जांच लें।

यूपी के राज्यकर्मियों को 1 बड़ी खुशखबरी, मिलेगा बोनस!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को दीपावली से पहले बोनस मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वित्त विभाग ने बोनस से जुड़ी फाइल तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दी है। प्रस्ताव के अनुसार, 12.50 लाख से अधिक कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सकता है। बोनस की अधिकतम सीमा 7,000 रुपये बताई गई है।

बोनस पर खर्च होंगे करीब 2,500 करोड़ रुपये

राज्य सरकार को केंद्र से करों में हिस्सेदारी के रूप में अग्रिम राशि मिलने के बाद बोनस भुगतान के लिए करीब 2,500 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद बोनस जारी करने का आदेश आ सकता है। हालांकि, कर्मचारियों को भुगतान आदेश जारी होने के बाद ही किया जाएगा।

डीए बढ़ोतरी का लाभ बाद में मिलने की संभावना

बोनस के साथ कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) में 3 प्रतिशत बढ़ोतरी का भी इंतजार है। वित्त विभाग ने इसकी फाइल तैयार की है, लेकिन बढ़े हुए डीए का लाभ दीपावली से पहले मिलने वाले अक्टूबर के वेतन में शामिल नहीं हो पाएगा। इसकी वजह यह है कि वेतन बिल पहले ही तैयार किए जा चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक, बढ़े हुए डीए का भुगतान नवंबर के वेतन के साथ दिसंबर में मिलने की संभावना है। जुलाई से अक्टूबर तक का एरियर भविष्य निधि खाते या अन्य निर्धारित बचत माध्यमों से दिया जा सकता है। इसको लेकर तैयारी की जा रही।

यूपी पंचायत चुनाव में बड़ा बदलाव! ग्राम प्रधान के लिए जरूरी खबर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के नियमों को स्पष्ट कर दिया गया है। योगी सरकार की कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत अब किसी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए संबंधित क्षेत्र में लगातार कम से कम छह महीने रहना जरूरी होगा।

केवल गांव में मकान या जमीन होना काफी नहीं

नई व्यवस्था के अनुसार, मतदाता को संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र में छह महीने तक रहने के साथ वहां निवास करने की मंशा भी दिखानी होगी। केवल गांव में जमीन, मकान या रिश्तेदारी होने से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का दावा स्वीकार नहीं होगा। सामान्य निवास की जांच उपलब्ध दस्तावेजों और निर्धारित मानकों के आधार पर की जाएगी।

इन दस्तावेजों से साबित करना होगा निवास

निवास प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड, बिजली बिल, टेलीफोन बिल या अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सकते हैं। संबंधित अधिकारी इनकी जांच के बाद तय करेंगे कि आवेदक वास्तव में उस ग्राम पंचायत का सामान्य निवासी है या नहीं।

दो गांवों की वोटर लिस्ट में नहीं रहेगा नाम

अगर कोई व्यक्ति अपना निवास बदलकर दूसरे गांव में छह महीने से रह रहा है और वहां मतदाता बनना चाहता है, तो उसे पुराने गांव की मतदाता सूची से अपना नाम हटवाना होगा। इसका मकसद एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों में दर्ज होने से रोकना है।

पंचायत चुनाव पर क्या होगा असर?

इस नियम से मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों को सामान्य निवास तय करने का स्पष्ट आधार मिलेगा। अब नाम जोड़ने के लिए छह महीने के निवास, वहां रहने की मंशा और संबंधित दस्तावेजों की जांच अहम होगी। इससे पंचायत चुनाव के दौरान मतदाता सूची को लेकर होने वाले विवाद कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार की धांसू योजना! 10वीं, 12वीं और ITI पास युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देश के युवाओं को काम का अनुभव दिलाने और रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना चला रही है। इस योजना के तहत युवाओं को बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप करने का मौका मिलता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें हर महीने 9,000 रुपये तक स्टाइपेंड मिलने की जानकारी दी गई है। इस योजना का संचालन कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय करता है।

कौन कर सकता है आवेदन?

दी गई जानकारी के अनुसार, 18 से 25 वर्ष तक के युवा इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। 10वीं, 12वीं, ITI, डिप्लोमा या ग्रेजुएशन पास उम्मीदवार अपनी पात्रता के अनुसार अवसर तलाश सकते हैं। हालांकि, कुछ पेशेवर डिग्री हासिल कर चुके उम्मीदवारों को योजना से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा, आवेदक के परिवार की सालाना आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए और परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल पर पात्रता की शर्तें जरूर जांच लें।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन करते समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक, फोटो, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और मोबाइल नंबर जैसे दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है।

कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?

इच्छुक युवा प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के आधिकारिक पोर्टल pminternship.mca.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके बाद मांगी गई व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और पसंदीदा राज्य व जिले का विवरण भरना होगा। आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के जरिए जरूरी सत्यापन पूरा करने के बाद फॉर्म जमा किया जा सकता है।

योजना का उद्देश्य युवाओं को कंपनियों में व्यावहारिक अनुभव दिलाना है, ताकि वे भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए तैयार हो सकें। आवेदन करने से पहले स्टाइपेंड, आयु सीमा और अन्य पात्रता संबंधी नियमों की आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि जरूर करें।

बिहार सरकार की खास योजना, बुजुर्गों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी, उठाएं लाभ!

पटना। बिहार सरकार बुजुर्गों को आर्थिक सहारा देने के लिए मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना चला रही है। इसके तहत पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने ₹1,100 की पेंशन दी जाती है। इस राशि से बुजुर्गों को रोजमर्रा के खर्चों में मदद मिल सकती है।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

इस योजना के लिए बिहार का निवासी होना और उम्र कम से कम 60 वर्ष होना जरूरी है। सभी वर्गों के पात्र बुजुर्ग आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, निर्धारित नियमों के अनुसार दूसरी पेंशन योजना का लाभ लेने वाले लोग इसके पात्र नहीं हो सकते।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन करते समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मतदाता पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है।

कैसे करें आवेदन?

इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक बुजुर्ग SSPMIS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिन लोगों को ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी हो, वे अपने प्रखंड के RTPS काउंटर पर जाकर भी आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

आवेदन जमा होने के बाद संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। पात्रता की पुष्टि होने पर पेंशन की राशि बैंक खाते में भेजी जाती है। आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर योजना की मौजूदा शर्तों और पेंशन राशि की जानकारी जरूर जांच लें।

यूपी वालों के लिए खुशखबरी! नया राशन कार्ड बनवाने का मौका, तैयार रखें ये जरूरी कागजात

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जिन परिवारों के पास अभी राशन कार्ड नहीं है, वे पात्रता पूरी करने पर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। राशन कार्ड के जरिए पात्र परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार मुफ्त या रियायती दरों पर अनाज मिलता है। इसके अलावा, दी गई जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने राशन कार्ड धारकों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत पात्र लोगों को सालाना 5 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिल सकती है।

राशन कार्ड के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन करने से पहले परिवार की महिला मुखिया का आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी या पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो और परिवार के किसी सदस्य का मोबाइल नंबर तैयार रखें। इसके साथ राशन कार्ड में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के आधार कार्ड, परिवार के सदस्यों के नाम वाली पारिवारिक रजिस्टर की नकल और मुखिया का आय प्रमाण पत्र भी मांगा जा सकता है।

कौन कर सकता है आवेदन?

आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए और परिवार के पास पहले से राशन कार्ड नहीं होना चाहिए। दी गई जानकारी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार की सालाना आय 2 लाख रुपये से कम और शहरी क्षेत्रों में 3 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। परिवार की मुखिया सामान्यतः 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिला होती है। अंतिम पात्रता संबंधित सरकारी नियमों के अनुसार तय होगी।

कैसे करें नए राशन कार्ड के लिए आवेदन?

पात्र परिवार नजदीकी जन सेवा केंद्र या ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। फॉर्म जमा करने से पहले सभी विवरण अच्छी तरह जांच लें और आवेदन का रेफरेंस नंबर सुरक्षित रखें।

इसके बाद संबंधित अधिकारी आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। जांच पूरी होने और पात्रता सही पाए जाने पर राशन कार्ड जारी किया जा सकता है। आवेदन की मौजूदा प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि आधिकारिक पोर्टल या जन सेवा केंद्र से जरूर कर लें।

10वीं, ITI पास युवाओं के लिए खुशखबरी! आ गई बंपर भर्ती, ऐसे करें आवेदन

नई दिल्ली। 10वीं और ITI पास युवाओं के लिए नौकरी पाने का अच्छा अवसर आया है। Garden Reach Shipbuilders & Engineers Limited (GRSE) ने Journeyman और Driver (Vehicle) के पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के तहत कुल 58 रिक्त पद भरे जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित तारीखों के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

भर्ती से जुड़ी जरूरी जानकारी

इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का 10वीं या ITI पास होना जरूरी है। आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष रखी गई है। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार हर महीने 20,110 रुपये से लेकर 70,390 रुपये तक वेतन मिल सकता है।

कब से कब तक होंगे आवेदन?

GRSE भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 30 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तारीख 28 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को आखिरी तारीख से पहले अपना फॉर्म जमा करना होगा।

कहां करें आवेदन?

उम्मीदवार GRSE की आधिकारिक वेबसाइट grse.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ लें। उसमें पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और आवेदन संबंधी सभी शर्तों की जानकारी दी गई है।

कुल पद: 58

पद: Journeyman और Driver (Vehicle)

योग्यता: 10वीं, ITI

अधिकतम आयु: 32 वर्ष

वेतन: ₹20,110 से ₹70,390 प्रतिमाह

आवेदन की अंतिम तारीख: 28 नवंबर 2026

आधिकारिक वेबसाइट: grse.in

यूपी सरकार की बड़ी घोषणा, दिव्यांगजनों के लिए खुशखबरी! हर मंडल में लगेगा दीपावली मेला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक खास पहल की है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग प्रदेश के सभी मंडलों में दीपावली मेले आयोजित करेगा। इन मेलों में दिव्यांगजनों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित सामान और अन्य उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही उन्हें अपने उत्पाद बेचने का अवसर भी मिलेगा।

मेले के आयोजन के लिए तय हुआ बजट

सरकार ने लखनऊ मंडल को छोड़कर प्रदेश के प्रत्येक मंडल में मेले के आयोजन के लिए 3 लाख रुपये निर्धारित किए हैं। वहीं, लखनऊ मंडल के लिए 7 लाख रुपये का बजट रखा गया है। विभाग ने सभी मंडलों और जिलों के अधिकारियों को आयोजन की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बाकी मंडलों और जनपदों से आयोजन संबंधी प्रस्ताव जल्द भेजने को कहा गया है।

दिव्यांगजनों को मिलेगा हुनर दिखाने का मौका

इन मेलों के जरिए दिव्यांगजन अपने बनाए उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगे। इससे उन्हें सामान की बिक्री बढ़ाने, नए ग्राहक बनाने और आमदनी के अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के निदेशक राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, प्रदेश सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके हुनर के आधार पर आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है।

यूपी में बनेगा 100KM का नया एक्सप्रेसवे, इन जिलों के लिए खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक नए एक्सप्रेसवे की तैयारी है। केंद्र सरकार ने बाराबंकी से बहराइच तक करीब 101 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 के निर्माण को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर लगभग 6,969.04 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। शुरुआत में इसे चार लेन का बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में छह लेन तक बढ़ाया जा सकता है।

लखनऊ से बहराइच का सफर होगा आसान

इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद लखनऊ से बहराइच पहुंचने में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लगने का अनुमान है। अभी इस रूट पर कई जगह सड़कें संकरी हैं और तीखे मोड़ों के कारण जाम की समस्या रहती है। नया मार्ग भीड़भाड़ वाले इलाकों से अलग बनाया जाएगा, जिससे यात्रा पहले के मुकाबले तेज और सुरक्षित हो सकेगी।

इन जिलों और इलाकों को मिलेगा फायदा

बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे से बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर और फखरपुर जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती के लोगों को भी आवागमन में सुविधा होगी। इस परियोजना से तराई और पूर्वांचल के इलाकों का लखनऊ से संपर्क मजबूत होगा।

48 किलोमीटर का बाईपास भी बनेगा

परियोजना के तहत करीब 48.28 किलोमीटर लंबा बाईपास और स्थानीय वाहनों के लिए सर्विस लेन बनाने की भी योजना है। इससे मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-27, 330एन और 730 सहित कई दूसरे मार्गों से भी बेहतर संपर्क स्थापित हो सकेगा।

रोजगार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

एक्सप्रेसवे बनने से केवल यात्रा ही आसान नहीं होगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। नेपाल सीमा के नजदीक होने के कारण सीमावर्ती कारोबार और पर्यटन को भी फायदा मिल सकता है। किसानों के लिए फल और सब्जियां बड़ी मंडियों तक पहुंचाना आसान होगा। निर्माण और इससे जुड़ी गतिविधियों से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे 1,574 करोड़

इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनुमान के मुताबिक, इसके लिए करीब 1,574 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना के रास्ते में आने वाली वन भूमि के बदले नियमानुसार पौधरोपण और मुआवजे की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

केंद्र सरकार ने दी सौगात, बिहार के पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के लाखों पेंशनभोगियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से राहत भरी खबर है। अब बुजुर्गों को अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए बार-बार बैंक या सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। केंद्र सरकार नवंबर में पांचवां राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत बिहार के सभी जिलों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां पेंशनभोगियों को प्रमाणपत्र बनवाने में मदद मिलेगी।

1 से 30 नवंबर तक चलेगा अभियान

डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान 1 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य पेंशनभोगियों को घर के पास ही डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराना है। खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगों और ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलेगी, जिन्हें शारीरिक परेशानी के कारण बैंक या कार्यालय तक पहुंचने में दिक्कत होती है। जरूरत पड़ने पर उनके घर जाकर भी प्रमाणपत्र बनाने की सुविधा दी जाएगी।

मोबाइल से चेहरे की पहचान कर बनेगा प्रमाणपत्र

इस व्यवस्था की खास बात यह है कि पेंशनभोगी अपने एंड्रॉयड या आईओएस स्मार्टफोन से भी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवा सकेंगे। इसके लिए फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का इस्तेमाल होगा। मोबाइल कैमरे के सामने चेहरा दिखाने के बाद पहचान का सत्यापन किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने पर डिजिटल प्रमाणपत्र तैयार हो सकेगा।

बिहार के सभी जिलों में लगेंगे विशेष शिविर

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की ओर से राज्य के अलग-अलग जिलों और शहरों में शिविर आयोजित किए जाएंगे। यहां पेंशनभोगियों को डिजिटल प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया में सहायता मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को भी काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है।

पेंशन जारी रखने के लिए जरूरी है जीवन प्रमाणपत्र

दरअसल, पेंशन का भुगतान जारी रखने के लिए हर साल जीवन प्रमाणपत्र जमा करना आवश्यक होता है। उम्र अधिक होने या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण कई पेंशनभोगियों को यह काम पूरा करने में कठिनाई होती है। ऐसे में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी।

बिहार के 8 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेस-वे, सरकार ने दी खुशखबरी!

पटना। बिहार के लोगों के लिए सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी खबर है। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के निर्माण की तैयारी तेज हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब करीब 73 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने परियोजना की संशोधित रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही मंजूरी के लिए संबंधित समिति के पास भेजा जाएगा।

73 हजार करोड़ रुपये से बनेगा एक्सप्रेस-वे

पहले इस परियोजना की लागत का अलग आकलन किया गया था, लेकिन नए सिरे से तैयार रिपोर्ट में खर्च बढ़ गया है। अनुमानित लागत में करीब 45 हजार करोड़ रुपये निर्माण कार्य पर खर्च होंगे, जबकि बाकी रकम जमीन अधिग्रहण और अन्य जरूरी कामों में लगाई जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण पीपीपी मॉडल के तहत किया जाना है।

बिहार के इन 8 जिलों को मिलेगा फायदा

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे बिहार के आठ जिलों से होकर गुजरेगा। इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इन जिलों के लोगों को आवागमन के लिए बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

चार राज्यों के बीच आसान होगा सफर

इस एक्सप्रेस-वे की शुरुआत उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित जगदीशपुर से होगी। इसके बाद यह देवरिया होते हुए बिहार में प्रवेश करेगा और आगे सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। इसके बनने से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा।

जल्द मिल सकती है निर्माण को मंजूरी

परियोजना की संशोधित रिपोर्ट को पहले सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPP-AC) के सामने रखा जाएगा। वहां से सहमति मिलने के बाद इसे केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।

बेटियों के लिए केंद्र सरकार की 3 बड़ी योजनाएं, हर परिवार के लिए खुशखबरी!

नई दिल्ली। बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं और अभियान चलाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य अभिभावकों को आर्थिक रूप से मदद पहुंचाने के साथ ही लड़कियों को पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ने के अवसर देना है। इनमें सुकन्या समृद्धि योजना, सीबीएसई उड़ान योजना और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान प्रमुख हैं।

1. सुकन्या समृद्धि योजना

इस योजना के तहत 10 साल से कम उम्र की बच्ची के नाम पर बैंक या पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाया जा सकता है। इसमें हर साल न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा करने का विकल्प है। निवेश की अवधि 15 साल है और खाते की मैच्योरिटी बच्ची के 21 साल की उम्र पूरी करने पर होती है। 18 साल के बाद उच्च शिक्षा या शादी जैसे उद्देश्यों के लिए नियमानुसार आंशिक निकासी भी की जा सकती है। इस योजना में टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है।

2. सीबीएसई उड़ान योजना

सीबीएसई की उड़ान योजना का मकसद छात्राओं को इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ाना है। इसके तहत पात्र छात्राओं को प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए सहायता दी जाती है। दिए गए विवरण के अनुसार, आवेदन के लिए छात्रा का 11वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय लेना जरूरी है। साथ ही 10वीं में कम से कम 70 प्रतिशत अंक और परिवार की सालाना आय 6 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।

3. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान

केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में इस अभियान की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना, लिंगानुपात में सुधार करना और उनकी शिक्षा व सुरक्षा को बढ़ावा देना है। यह अभियान सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजना नहीं है, बल्कि बेटियों के अधिकारों और शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर देता है।

इन तीनों पहलों का मकसद बेटियों को बेहतर अवसर देना और उनके भविष्य को मजबूत बनाना है। हालांकि, इनके लाभ और पात्रता से जुड़ी शर्तें अलग-अलग हैं।

यूपी सरकार की शानदार योजना शुरू, शिक्षकों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना चला रही है। इसके तहत पात्र शिक्षकों और उनके आश्रितों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र शिक्षकों को पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कराने के साथ ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

किन शिक्षकों को मिलेगा लाभ?

इस योजना में माध्यमिक शिक्षा विभाग के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त स्कूलों के पात्र शिक्षकों को भी इसका लाभ दिया जाता है। संबंधित शिक्षकों के आश्रित परिवार के सदस्य भी योजना में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, जो शिक्षक पहले से आयुष्मान भारत या केंद्र अथवा राज्य सरकार की किसी अन्य स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें इस योजना के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

कैसे करें आवेदन?

योजना का लाभ पाने के लिए पात्र शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन कर हेल्थ कार्ड बनवाना होगा। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर जानकारी दर्ज कर अंतिम अनुमोदन प्राप्त करना जरूरी है। इसके बाद ई-केवाईसी पूरी करके कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है।

आयुष्मान ऐप से ऐसे पूरी करें ई-केवाईसी

शिक्षक आयुष्मान ऐप के जरिए भी ई-केवाईसी कर सकते हैं। सबसे पहले ऐप खोलकर बेनिफिशियरी विकल्प चुनें और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ओटीपी के माध्यम से लॉगिन करें। इसके बाद योजना, राज्य और जिले की जानकारी भरकर परिवार के सदस्यों को सर्च करें।

जिस सदस्य की ई-केवाईसी करनी है, उसके नाम के सामने दिए गए विकल्प पर क्लिक करें। फिर आधार ऑथेंटिकेशन, आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी और लाइव फोटो के जरिए प्रक्रिया पूरी करें। ई-केवाईसी पूरी होने के बाद संबंधित सदस्य का हेल्थ कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है। योजना से जुड़ी जानकारी और सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-1800-4444 पर संपर्क किया जा सकता है।

8th Pay Commission: पेंशनर्स को मिल सकती 3 बड़ी खुशखबरी? पढ़ें पूरी खबर

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के साथ लाखों पेंशनर्स की निगाहें भी सरकार के फैसले पर टिकी हैं। इस बार पेंशन में बढ़ोतरी के अलावा फैमिली पेंशन और न्यूनतम पेंशन को लेकर भी कई अहम मांगें उठाई गई हैं। अगर कर्मचारी संगठनों के प्रस्तावों पर सरकार सकारात्मक फैसला लेती है, तो रिटायर्ड कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

पेंशनर्स को मिल सकती हैं ये 3 बड़ी खुशखबरी

पेंशनर्स संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग न्यूनतम बेसिक पेंशन को बढ़ाकर 45,000 रुपये करने की है। दूसरी मांग आखिरी बेसिक सैलरी का 67 फीसदी पेंशन देने की है। वहीं, तीसरी मांग फैमिली पेंशन को बढ़ाकर आखिरी वेतन का 50 फीसदी करने की है। हालांकि, ये अभी मांगें हैं, सरकार ने इन्हें मंजूरी नहीं दी है।

अभी कितनी मिलती है पेंशन?

मौजूदा ओल्ड पेंशन स्कीम के नियमों के तहत पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय की अंतिम बेसिक सैलरी या पिछले 10 महीनों की औसत बेसिक सैलरी, जो अधिक हो, उसका 50 फीसदी पेंशन के रूप में मिलता है। वहीं, सामान्य फैमिली पेंशन की दर अंतिम बेसिक सैलरी का 30 फीसदी है। संगठनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर पेंशनर्स को ज्यादा आर्थिक सुरक्षा दी जानी चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ सकती है पेंशन?

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। यदि उदाहरण के तौर पर 2.0, 2.25 या 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो मौजूदा बेसिक पेंशन में संभावित बदलाव इस प्रकार हो सकता है।

25,000 रुपये की बेसिक पेंशन 2.0 फैक्टर पर 50,000 रुपये, 2.25 पर 56,250 रुपये और 2.57 पर 64,250 रुपये हो सकती है। इसी तरह 50,000 रुपये की पेंशन बढ़कर क्रमशः 1 लाख, 1,12,500 रुपये और 1,28,500 रुपये हो सकती है। वहीं, 75,000 रुपये की बेसिक पेंशन इन अनुमानों के मुताबिक 1.50 लाख, 1,68,750 रुपये और 1,92,750 रुपये तक पहुंच सकती है।

कब होगा पेंशनर्स को फायदा?

फिलहाल पेंशनर्स को इन प्रस्तावों पर सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार है। ध्यान देने वाली बात यह है कि फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बताई गई रकम केवल गणितीय अनुमान हैं, इन्हें पेंशन में होने वाली तय बढ़ोतरी नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक पेंशन कितनी बढ़ेगी, यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।