अब ऑफलाइन दस्तावेज नहीं होंगे स्वीकार
नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री के लिए पुराने तरीके से कागजी दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। आवेदकों को जरूरी दस्तावेज और प्रमाणपत्र ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच और सत्यापन भी डिजिटल तरीके से किया जाएगा। इससे प्रक्रिया में तेजी आने और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
मोबाइल पर मिलेगा रजिस्ट्री डीड का लिंक
पेपरलेस सिस्टम की सबसे बड़ी सुविधा यह होगी कि रजिस्ट्री पूरी होने के बाद लोगों को डीड की कॉपी लेने के लिए कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। विभाग की ओर से पंजीकृत दस्तावेज की डिजिटल कॉपी का लिंक आवेदक के मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। इसे जरूरत के समय डाउनलोड कर सुरक्षित रखा जा सकेगा।
सभी जिला कार्यालयों में पूरा हुआ ट्रायल
रजिस्ट्री विभाग ने राज्य के सभी जिला निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस सिस्टम का परीक्षण पूरा कर लिया है। ट्रायल सफल होने के बाद अब इसे पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया से काम में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक देरी कम होगी।
कम होगा समय और कागजी काम
नई ऑनलाइन व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है। अभी जहां दस्तावेज संभालने और रिकॉर्ड खोजने में परेशानी होती है, वहीं डिजिटल रिकॉर्ड होने से भविष्य में सत्यापन और जानकारी निकालना आसान होगा। इसके अलावा लोगों को बार-बार फोटो कॉपी और अन्य कागजात जमा करने की परेशानी से भी राहत मिलेगी।
ई-गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम
बिहार सरकार इस बदलाव को डिजिटल प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मान रही है। ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के कारण जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और व्यवस्थित हो सकती है। 15 जुलाई के बाद बिहार में संपत्ति रजिस्ट्री का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है, जिससे आम लोगों को तेज और सुविधाजनक सेवा मिलने की उम्मीद है।














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