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भारत के 2 बड़े फैसले! रूस से आएगी तुंगुस्का मिसाइल, कांपेंगे दुश्मन देश!

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। Ministry of Defence India ने हाल ही में दो अहम रक्षा समझौतों पर मुहर लगाई है, जिनकी कुल कीमत करीब 858 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन फैसलों से न केवल थल सेना बल्कि नौसेना की क्षमता में भी बड़ा इजाफा होने वाला है।

रूस से मिलेगा आधुनिक वायु रक्षा सिस्टम

भारत ने Rosoboronexport के साथ एक महत्वपूर्ण करार किया है। इस समझौते के तहत भारतीय सेना को तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली मिलेगी। यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखती है। इस सौदे से साफ है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता और लगातार अपनी रक्षा प्रणाली को आधुनिक बना रहा है।

भारत-रूस रक्षा संबंध होंगे और मजबूत

भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं। यह नया समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगा। बदलते वैश्विक हालात के बीच यह सहयोग भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

नौसेना को भी मिला बड़ा सहारा

दूसरा बड़ा समझौता Boeing India के साथ किया गया है। इसके तहत भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमानों के रखरखाव का काम देश के अंदर ही किया जाएगा। इस सौदे की कीमत करीब 413 करोड़ रुपये है।

समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत

पी-8आई विमान भारतीय नौसेना के सबसे अहम हथियारों में से एक हैं। इनका उपयोग समुद्र में निगरानी रखने, दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। इस समझौते के बाद इन विमानों की कार्यक्षमता और बढ़ेगी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पकड़ मजबूत होगी।

आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

इस पूरे समझौते की खास बात यह है कि रखरखाव का काम देश में ही किया जाएगा। इससे स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

सीएम योगी ने दिए निर्देश, यूपी के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है। योगी आदित्यनाथ ने नुकसान की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस मुश्किल समय में किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

नुकसान का होगा सटीक आकलन

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि फसलों को हुए नुकसान का सही और विस्तृत आकलन किया जाए। इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को मिलकर संयुक्त सर्वे करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि किसी भी किसान के साथ अन्याय न हो।

जिलाधिकारी खुद करेंगे निरीक्षण

सीएम ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया है कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें। उन्हें खुद खेतों में जाकर स्थिति का जायजा लेना होगा। इससे वास्तविक नुकसान का पता चल सकेगा और राहत कार्यों में तेजी आएगी।

मुआवजा जल्द देने पर जोर

सरकार का मुख्य फोकस यह है कि सर्वे पूरा होते ही किसानों को मुआवजा मिलने में देरी न हो। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट मिलते ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए और इसे तय समय के भीतर पूरा किया जाए।

अधिकारियों को दिए निर्देश

राहत कार्यों में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी सूचनाएं समय पर इकट्ठा कर शासन तक पहुंचाई जाएंगी, ताकि फैसले जल्दी लिए जा सकें।

किसानों को मिलेगा सहारा

इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी फसल खराब मौसम की वजह से बर्बाद हो गई है। सरकार की यह पहल उन्हें आर्थिक रूप से संभलने का मौका देगी।

भारत-रूस के बीच होने वाली है बड़ी डील, तैयारी शुरू

नई दिल्ली। दुनिया भर में जारी तनाव और युद्ध के हालात ने ऊर्जा बाजार के समीकरण बदल दिए हैं। ऐसे समय में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। इसी कड़ी में भारत और रूस के बीच एक बड़ी ऊर्जा डील की तैयारी तेज हो गई है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता

मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। खास तौर पर Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जो दुनिया में तेल सप्लाई का एक बड़ा रास्ता माना जाता है। इस स्थिति ने भारत जैसे देशों के सामने ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

रूस बना भरोसेमंद विकल्प

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से तेल के रूप में हासिल करता रहा है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अब रूस एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आ रहा है। दोनों देशों के बीच तरलीकृत प्राकृतिक गैस को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है, जो पिछले कुछ समय में पहली बार हो रही है।

कच्चे तेल के आयात में बढ़ोतरी

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत अब अपने कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी को काफी बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यह हिस्सा आने वाले समय में लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। रूस पहले से ही रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता रहा है, जो भारत के लिए महंगाई के दौर में राहत देने वाला साबित हो सकता है।

अमेरिका के साथ बढ़ सकता है तनाव

भारत और अमेरिका के बीच पहले भी रूसी तेल को लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं। ऐसे में अगर भारत रूस के साथ अपनी ऊर्जा साझेदारी बढ़ाता है, तो यह अमेरिका को खटक सकता है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

रुपये-रूबल में व्यापार की दिशा बड़ा कदम

दोनों देश व्यापार को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं। इससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी। ऊर्जा के अलावा भारत और रूस बिजली, विमानन और व्यापार जैसे अन्य क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है।

रूस से आई 1 बड़ी खुशखबरी, भारत की बढ़ेगी ताकत, चीन सन्न!

नई दिल्ली। भारत की रक्षा क्षमता को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे इंतजार के बाद अब रूस ने भारत को उन्नत वायु रक्षा प्रणाली की अगली खेप देने का भरोसा दिया है। इससे भारतीय वायुसेना की ताकत और भी बढ़ने वाली है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं।

क्या है यह नई खुशखबरी

रूस की ओर से संकेत मिले हैं कि अत्याधुनिक S-400 Air Defence System की चौथी इकाई इसी साल भारत को सौंप दी जाएगी। यह वही प्रणाली है जिसे भारत में “सुदर्शन चक्र” के नाम से भी जाना जाता है। इसके आने से देश की हवाई सुरक्षा कई गुना मजबूत हो जाएगी।

कब तक मिलेगा नया सिस्टम

माना जा रहा है कि मई महीने तक यह नई इकाई भारत को मिल सकती है। पहले ही तीन इकाइयां देश को मिल चुकी हैं और वे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा में तैनात हैं। अब चौथी के बाद पांचवीं इकाई भी इसी साल के अंत तक मिलने की संभावना है।

सौदे की पृष्ठभूमि

भारत ने साल 2018 में Russia के साथ इस प्रणाली के पांच हिस्सों के लिए बड़ा समझौता किया था। इस पूरे सौदे की कीमत करीब 35,000 करोड़ रुपये बताई जाती है। यह सौदा भारत की रक्षा रणनीति में एक अहम कदम माना जाता है।

कहां तैनात हैं मौजूदा सिस्टम

पहले से मौजूद तीन इकाइयों को देश के अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। इनमें सीमावर्ती क्षेत्र और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। इनकी सटीक तैनाती सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन माना जाता है कि ये देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कितनी ताकतवर है यह प्रणाली

S-400 Air Defence System दुनिया की सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों में गिनी जाती है। यह दुश्मन के लड़ाकू विमान, मिसाइल और अन्य हवाई खतरों को काफी दूर से ही पहचान कर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसकी मारक क्षमता और सटीकता इसे खास बनाती है।

पहले भी दिखा चुकी है दम

हाल के सैन्य अभियानों में इस प्रणाली की क्षमता सामने आ चुकी है। इसने यह साबित किया है कि भारत की हवाई सीमा को सुरक्षित रखने में यह बेहद प्रभावी हथियार है। इसकी मौजूदगी ही दुश्मन के लिए एक बड़ा डर पैदा करती है।

यूपी के स्कूलों में बड़ा बदलाव, 1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदलने जा रहा है। Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी भाषा, सोच और सामान्य ज्ञान को भी मजबूत बनाना है।

प्रार्थना सभा में पढ़े जाएंगे समाचार

अब स्कूलों की प्रार्थना सभा केवल औपचारिकता नहीं रहेगी। विद्यार्थी रोजाना प्रमुख समाचार पढ़ेंगे और उनसे जुड़े कठिन शब्दों का अर्थ समझेंगे। शिक्षक इस प्रक्रिया में मार्गदर्शन करेंगे, जिससे बच्चों की भाषा पर पकड़ मजबूत होगी और वे देश-दुनिया की घटनाओं से भी जुड़े रहेंगे।

भाषा और ज्ञान दोनों होंगे मजबूत

इस नई व्यवस्था से छात्रों को दोहरा लाभ मिलेगा। एक ओर उनकी पढ़ने और बोलने की क्षमता बेहतर होगी, वहीं दूसरी ओर सामान्य ज्ञान भी बढ़ेगा। नियमित रूप से समाचार पढ़ने से बच्चों में आत्मविश्वास भी विकसित होगा।

मोबाइल लाने पर पूरी तरह रोक

स्कूलों में विद्यार्थियों के मोबाइल लाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। माना जा रहा है कि कम उम्र में मोबाइल का अधिक उपयोग पढ़ाई पर नकारात्मक असर डालता है। इससे ध्यान भटकता है और आंखों व मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। इस कदम से बच्चों का ध्यान पढ़ाई और अन्य रचनात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ेगा।

पढ़ने की आदत को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि बच्चों में किताब और अखबार पढ़ने की आदत विकसित हो। आज के समय में जब अधिकांश बच्चे मोबाइल पर ज्यादा समय बिताते हैं, ऐसे में यह पहल उन्हें सही दिशा देने का काम करेगी।

तकनीक और पढ़ाई के बीच संतुलन

हालांकि मोबाइल पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन इसका मतलब तकनीक से दूरी नहीं है। विद्यार्थियों को सही तरीके से तकनीक का उपयोग सिखाया जाएगा। उन्हें विभिन्न शैक्षणिक माध्यमों और ऑनलाइन संसाधनों की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे पढ़ाई में उनका सही उपयोग कर सकें।

यूपी के इन 4 जिलों में बनेंगे छात्रवास, छात्रों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अब अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास बनाने की योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य दूर-दराज के विद्यार्थियों को बेहतर माहौल और रहने की सुविधा देना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकें।

योजना के तहत बड़ा फैसला

यह पहल केंद्र सरकार की PM-AJAY Yojana के तहत की जा रही है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 में कुल 12.30 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से आधी राशि जारी भी हो चुकी है। यह कदम शिक्षा में समान अवसर देने की दिशा में काफी अहम माना जा रहा है।

किन जिलों में बनेंगे छात्रावास

इस योजना के तहत चार जिलों में नए छात्रावास बनाए जाएंगे। इनमें जौनपुर, सुल्तानपुर और हाथरस में एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा, जबकि फिरोजाबाद में तीन छात्रावास विकसित किए जाएंगे। इससे अधिक संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे छात्रावास

इन छात्रावासों को केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि पढ़ाई के अनुकूल माहौल के रूप में तैयार किया जाएगा। यहां छात्रों के लिए साफ-सुथरे कमरे, भोजन की अच्छी व्यवस्था, पुस्तकालय, मनोरंजन कक्ष, सुरक्षा के लिए गार्ड कक्ष और अधीक्षक के लिए आवास जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी एक ही स्थान पर रहकर पढ़ाई और विकास दोनों कर सकें।

बिहार में बनेगा नया रेल बाईपास, इन जिलों के लिए खुशखबरी!

न्यूज डेस्क। बिहार में विकास कार्यों की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। अब रेल सुविधा को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय ने भागलपुर क्षेत्र में नए रेल बाईपास को मंजूरी दे दी है। यह योजना यहां के लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

भागलपुर को मिला बड़ा तोहफा

भागलपुर के लोग लंबे समय से बेहतर रेल सुविधा की मांग कर रहे थे। अब इस बाईपास के बनने से शहर में ट्रेनों की भीड़ कम होगी और यात्रा अधिक सुगम बनेगी। यह फैसला इलाके के विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कितनी लंबी होगी नई रेल लाइन

नई रेल लाइन सबौर से गोनूधाम हाल्ट तक बनाई जाएगी। इसकी कुल लंबाई करीब 13.38 किलोमीटर होगी। यह लाइन भागलपुर-साहिबगंज रेल मार्ग से जुड़कर पूरे क्षेत्र की रेल व्यवस्था को मजबूत करेगी। इस योजना पर लगभग 303 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।

लोगों को क्या मिलेगा फायदा

इस रेल बाईपास के बनने से कई तरह के लाभ होंगे। ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी। यात्रियों को समय की बचत होगी क्योंकि इंजन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सफर पहले से तेज और आरामदायक हो जाएगा।

भागलपुर में विकास की रफ्तार तेज

भागलपुर में सिर्फ रेल ही नहीं, सड़क निर्माण पर भी तेजी से काम हो रहा है। शहर के बीच से होकर लोहियापुल से अलीगंज बाईपास तक चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, जिसकी लंबाई करीब 4 किलोमीटर होगी। इसके अलावा भागलपुर-हंसडीहा मार्ग पर भी नई सड़क परियोजना पर काम जारी है।

शनि की चाल से मचेगा हड़कंप! इन 5 राशियों पर पड़ेगा जबरदस्त असर

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को कर्म और न्याय का देवता माना जाता है। जब शनि अपनी चाल बदलते हैं या किसी राशि पर विशेष दृष्टि डालते हैं, तो उसका असर सीधे लोगों के जीवन पर देखने को मिलता है। आने वाला समय कुछ राशियों के लिए बड़े बदलाव लेकर आ सकता है—कहीं सफलता के दरवाजे खुलेंगे तो कहीं चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

आइए जानते हैं उन 5 राशियों के बारे में, जिन पर शनि की चाल का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा:

1. मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए यह समय उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। करियर में अचानक बदलाव या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। मेहनत का फल जरूर मिलेगा, लेकिन धैर्य रखना बेहद जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसले लें।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का प्रभाव सकारात्मक संकेत दे रहा है। नौकरी और बिजनेस में तरक्की के योग बन रहे हैं। पुराने अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं। हालांकि, परिवार के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा।

3. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। काम में दबाव बढ़ सकता है और मानसिक तनाव भी महसूस हो सकता है। हालांकि नौकरी और बिजनेस में तरक्की के योग बन रहे हैं। 

4. सिंह राशि

सिंह राशि के लिए यह समय नई संभावनाएं लेकर आ सकता है। करियर में उन्नति और नए अवसर मिल सकते हैं। शनि की कृपा से आपकी मेहनत रंग लाएगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ने के भी संकेत हैं।

5. कुंभ राशि

कुंभ राशि पर शनि का विशेष प्रभाव रहने वाला है। यह समय आत्ममंथन और सुधार का है। स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें। सही योजना के साथ आगे बढ़ेंगे तो सफलता निश्चित है।

IIT वालों का दुनिया पर कब्जा! टॉप कंपनियों की कुर्सी पर भारतीयों का राज

नई दिल्ली। भारत के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान Indian Institutes of Technology (IIT) आज सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि ग्लोबल लीडरशिप की फैक्ट्री बन चुके हैं। यहां से निकलने वाले छात्र न केवल इंजीनियरिंग में माहिर होते हैं, बल्कि बड़े स्तर पर फैसले लेने और कंपनियों को नई दिशा देने की क्षमता भी रखते हैं। यही वजह है कि आज दुनिया की कई बड़ी कंपनियों की कमान भारतीय मूल के IIT ग्रेजुएट्स के हाथों में दिखाई देती है।

दुनिया में IITians का बढ़ता दबदबा

अमेरिका और अन्य देशों की बड़ी टेक और बिजनेस कंपनियों में भारतीय प्रतिभा का असर लगातार बढ़ रहा है। खास बात यह है कि इन सफल चेहरों में से कई की जड़ें IIT कैंपस से जुड़ी हैं। यहां की कठिन चयन प्रक्रिया और कड़ी ट्रेनिंग छात्रों को न सिर्फ तकनीकी रूप से मजबूत बनाती है, बल्कि उन्हें हर तरह की चुनौतियों से लड़ने के लिए भी तैयार करती है।

1. Sundar Pichai(IIT खड़गपुर)

Google और Alphabet Inc. के सीईओ सुंदर पिचाई IIT खड़गपुर के छात्र रहे हैं। उन्होंने अपनी सादगी और दूरदर्शी सोच के दम पर गूगल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। क्रोम और एंड्रॉइड जैसे प्रोडक्ट्स को वैश्विक सफलता दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही है।

2. Arvind Krishna(IIT कानपुर)

IBM के प्रमुख अरविंद कृष्णा IIT कानपुर से पढ़े हैं। उन्होंने कंपनी को क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मजबूत बनाया। उनके नेतृत्व में IBM ने तेजी से बदलती टेक दुनिया में खुद को फिर से स्थापित किया है।

3. Nikesh Arora(IIT (BHU)

Palo Alto Networks के सीईओ निकेश अरोड़ा IIT (BHU) से निकले हैं। अपनी आक्रामक रणनीति और तेज फैसलों के लिए मशहूर अरोड़ा ने साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में कंपनी को टॉप खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।

4. Vinod Khosla(IIT दिल्ली)

IIT दिल्ली के पूर्व छात्र विनोद खोसला Sun Microsystems के को-फाउंडर रहे हैं। बाद में उन्होंने वेंचर कैपिटल की दुनिया में कदम रखा और कई बड़े स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

5. Aravind Srinivas(IIT मद्रास)

नई पीढ़ी के उभरते चेहरे अरविंद श्रीनिवास IIT मद्रास से पढ़े हैं और Perplexity AI के संस्थापक हैं। उन्होंने AI आधारित सर्च टेक्नोलॉजी के जरिए टेक इंडस्ट्री में नई चुनौती पेश की है, जो भविष्य की दिशा को बदल सकती है।

IIT क्यों बन रहा है लीडरशिप का केंद्र?

IIT की खासियत सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यहां छात्रों को समस्या सुलझाने की क्षमता, दबाव में काम करने की आदत और बड़े स्तर पर सोचने की समझ दी जाती है। यही गुण उन्हें वैश्विक मंच पर अलग पहचान दिलाते हैं।

आज धड़ाम से गिरे सोने-चांदी के दाम, बाजार में मचा तूफान!

नई दिल्ली। त्योहार के मौके पर जहां आमतौर पर सोने-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, वहीं इस बार उल्टा ट्रेंड देखने को मिला। रामनवमी के दिन कीमती धातुओं के दामों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसने बाजार का माहौल ही बदल दिया।

एक दिन में कितना सस्ता हुआ सोना?

ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,43,715 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। एक दिन पहले यही कीमत करीब 1,46,205 रुपये थी। यानी सिर्फ 24 घंटे में लगभग 2,490 रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

अगर अलग-अलग कैरेट की बात करें तो—

23 कैरेट: लगभग 1,43,140 रुपये/10 ग्राम

22 कैरेट: करीब 1,31,643 रुपये/10 ग्राम

18 कैरेट: लगभग 1,07,786 रुपये/10 ग्राम

14 कैरेट: करीब 84,073 रुपये/10 ग्राम

इससे साफ है कि गिरावट केवल एक कैटेगरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे गोल्ड सेगमेंट में दबाव दिखा।

चांदी में भी बड़ी गिरावट

सोने के साथ चांदी भी कमजोर हुई है।

एक दिन पहले चांदी का भाव करीब 2,34,814 रुपये प्रति किलो था

अब यह घटकर करीब 2,25,700 रुपये प्रति किलो पर आ गया

यानि चांदी में करीब 9,114 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज हुई।

महीनेभर में कितना बदला ट्रेंड?

अगर मार्च की शुरुआत से तुलना करें, तो गिरावट और भी बड़ी दिखती है। महीने की शुरुआत में सोना लगभग 1,67,471 रुपये/10 ग्राम के आसपास था, लेकिन अब यह घटकर 1,43,715 रुपये रह गया यानी कुल मिलाकर करीब 23,756 रुपये की गिरावट

चांदी में भी इसी तरह बड़ा बदलाव आया। महीने की शुरुआत में कीमत करीब 2,89,848 रुपये/किलो था, लेकिन अब करीब 2,25,700 रुपये/किलो हो गया हैं यानि लगभग 64,148 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई हैं। 

गिरावट की वजह क्या है?

इस गिरावट के पीछे ग्लोबल मार्केट का असर साफ दिखाई देता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे डॉलर मजबूत हुआ है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर डॉलर में लगाना पसंद करते हैं। यही कारण है कि सोने और चांदी की मांग में कमी आई और कीमतों पर दबाव बना।

बिहार में बड़ी राहत: अब कम जमीन पर भी बन सकेंगी बिल्डिंग्स

पटना। बिहार के शहरों में जमीन की कमी और तेजी से बढ़ती आबादी ने सरकार को निर्माण नियमों में बदलाव के लिए प्रेरित किया है। अब राज्य में ऐसे नियम लागू करने की तैयारी है, जिससे कम क्षेत्रफल वाले प्लॉट पर भी बहुमंजिला और ज्यादा स्पेस वाली इमारतें खड़ी की जा सकेंगी।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, नगर विकास विभाग ने इसको लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह नए नियम पूरे राज्य में लागू कर दिए जाएंगे।

FAR बढ़ाने की तैयारी

इस बदलाव का केंद्र बिंदु है फ्लोर एरिया रेशियो (FAR)। अभी तक बिहार के शहरी इलाकों में FAR की सीमा लगभग 2.5 से 3 के बीच थी, जिसके कारण भवन निर्माण की ऊंचाई और आकार सीमित रह जाता था। नए प्रस्ताव के तहत इसे बढ़ाकर 5.5 से 6 तक करने की योजना है। इस बदलाव के लागू होने के बाद लोग अपनी छोटी जमीन पर भी पहले की तुलना में ज्यादा मंजिलें और बड़े स्पेस वाली बिल्डिंग बना सकेंगे।

निर्माण नियमों में मिलेगी ढील

नई नीति में केवल FAR ही नहीं बढ़ाया जा रहा, बल्कि भवन निर्माण से जुड़े अन्य नियमों में भी राहत दी जा रही है। खासतौर पर ‘सेटबैक’ नियमों में ढील देने का प्रस्ताव है, जिससे जमीन का ज्यादा हिस्सा निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। अब तक जहां केवल 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण की अनुमति थी, वहीं नए नियमों के तहत 60 से 70 प्रतिशत तक जमीन पर निर्माण संभव हो सकेगा। इससे छोटे प्लॉट पर भी बड़े फ्लैट्स, कॉम्प्लेक्स और दुकानों का निर्माण आसान हो जाएगा।

मध्यम वर्ग और व्यापारियों को फायदा

इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा मध्यम वर्ग और छोटे निवेशकों को होगा। शहरों में जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण अपना घर या व्यवसायिक भवन बनाना मुश्किल होता जा रहा था। नए नियमों के बाद लोग कम जमीन में ही बेहतर और बड़ा निर्माण कर पाएंगे। खासकर व्यापारियों के लिए यह बदलाव फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि अब व्यस्त बाजारों में भी मल्टी-स्टोरी शोरूम और कॉम्प्लेक्स बनाना आसान होगा।

वर्टिकल डेवलपमेंट की ओर कदम

सरकार का यह कदम शहरों को ‘वर्टिकल डेवलपमेंट’ की दिशा में ले जाने वाला माना जा रहा है। यानी अब शहर फैलने के बजाय ऊंचाई में विकसित होंगे। इससे जमीन की कमी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा और शहरी ढांचे को आधुनिक रूप मिलेगा।

डील या धमकी? ट्रंप की चाल से खौफ में ईरान—10 हजार सैनिक भेजने की तैयारी

न्यूज डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की रणनीति ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एक ओर डोनाल्ड ट्रंप बातचीत के जरिए हालात संभालने का संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी ने उनके रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका पश्चिम एशिया में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने पर विचार कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान के साथ बातचीत की संभावनाएं भी जारी हैं।

बातचीत के साथ सैन्य दबाव

ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को कुछ समय के लिए टालने का फैसला किया है। यह मोहलत सीमित अवधि के लिए दी गई है, जिससे कूटनीतिक बातचीत के लिए रास्ता खुला रहे। लेकिन इसी बीच सैन्य तैयारियों की खबरें यह संकेत देती हैं कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए विकल्प खुले रखना चाहता है। इसे “डिप्लोमेसी के साथ दबाव” की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

कितनी बड़ी है सैन्य तैयारी?

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित तैनाती में अमेरिकी सेना की विशेष इकाइयां शामिल हो सकती हैं, जिनमें एयरबोर्न डिवीजन, पैदल सेना और बख्तरबंद संसाधन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती सीधे युद्ध के लिए नहीं, बल्कि रणनीतिक बढ़त बनाने और संभावित टकराव की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए की जा रही है।

कहां हो सकती है तैनाती?

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अतिरिक्त सैनिकों को किस स्थान पर तैनात किया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम पश्चिम एशिया के संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिकी उपस्थिति मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है। कुछ विश्लेषक इसे ईरान के रणनीतिक हितों पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, ताकि बातचीत में अमेरिका की स्थिति मजबूत हो सके।

ईरान की प्रतिक्रिया और बढ़ता तनाव

दूसरी तरफ, ईरान भी अपने रुख में नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने हाल ही में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ाने का संकेत दिया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने यह साफ कर दिया है कि हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं और किसी भी समय स्थिति और बिगड़ सकती है।

दुनिया की नजर इस टकराव पर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतें और वैश्विक बाजार इस स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं।

यूपी में अब घर-दुकान खरीदने का बदला नियम, खरीदारों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब तक गैर-पंजीकृत परियोजनाओं में निवेश करने वाले हजारों खरीदारों को जो परेशानी झेलनी पड़ रही थी, उसे दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने नियमों में अहम बदलाव किया है। यह संशोधन 25 मार्च से लागू हो चुका है और इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो अब तक न्याय के लिए भटक रहे थे।

अब अपंजीकृत प्रोजेक्ट भी आएंगे दायरे में

नए नियमों के तहत अब वे प्रोजेक्ट भी रेरा के दायरे में आएंगे, जो पहले पंजीकृत नहीं थे। यानी अगर किसी खरीदार ने ऐसी योजना में घर या दुकान खरीदी है, जो रेरा में दर्ज नहीं थी, तो अब वह भी अपनी शिकायत सीधे प्राधिकरण के सामने रख सकता है। इस फैसले से उन हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब तक कब्जा, रिफंड या अन्य अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे थे।

क्या बदला है नियमों में?

संशोधन के जरिए रेरा ने अपने पुराने विनियमों में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदार भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। बता दें की अब ऐसे मामलों की सुनवाई रेरा की बेंच करेगी। पहले यह स्पष्ट नहीं था कि अपंजीकृत प्रोजेक्ट के खरीदार कहां जाएं, अब उन्हें सीधे कानूनी राहत पाने का रास्ता मिल गया है।

शिकायत प्रक्रिया हुई आसान

नए प्रावधानों के तहत खरीदारों को अब अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शिकायत सीधे रेरा के पोर्टल के जरिए दर्ज की जा सकेगी, मामलों की सुनवाई कर उचित फैसला दिया जाएगा, जरूरत पड़ने पर प्राधिकरण अतिरिक्त जानकारी भी मांग सकता है। यह कदम पूरी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में उठाया गया है।

फीस और ट्रांसफर नियमों में भी बदलाव

नए नियमों में प्रॉपर्टी ट्रांसफर से जुड़े शुल्क को भी तय कर दिया गया है, जिससे मनमानी वसूली पर रोक लगेगी। परिवार के सदस्य को ट्रांसफर पर अधिकतम ₹1,000 प्रोसेसिंग फीस। जबकि अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर करने पर अधिकतम ₹25,000 शुल्क। पुराने अनुबंध में संशोधन करके ही ट्रांसफर किया जाएगा, इससे खरीदारों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।

रेरा की जिम्मेदारी बढ़ी

इस बदलाव के साथ रेरा की भूमिका और भी अहम हो गई है। अब उसे न केवल पंजीकृत, बल्कि अपंजीकृत परियोजनाओं से जुड़े विवाद भी सुलझाने होंगे। जानकारों का मानना है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रमोटरों की जवाबदेही तय होगी।

असम और बंगाल में बीजेपी मजबूत? सर्वे में बड़ा खुलासा, 2026 चुनाव से पहले सियासी तस्वीर साफ

कोलकाता। 2026 में होने वाले असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले आए ताजा ओपिनियन पोल ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सर्वे के संकेत बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को असम में मजबूत बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में मुकाबला दिलचस्प और कांटे का हो सकता है।

असम: लगातार तीसरी बार सत्ता की ओर बीजेपी?

पूर्वोत्तर राज्य असम में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। विभिन्न सर्वेक्षणों के मुताबिक, बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए एक बार फिर स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता दिख रहा है। 126 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए को करीब 90 या उससे अधिक सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वोट शेयर के स्तर पर भी बीजेपी बढ़त बनाए हुए दिख रही है, जबकि कांग्रेस उसके पीछे बनी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में सरकार की योजनाएं और नेतृत्व का प्रभाव चुनावी समीकरण को बीजेपी के पक्ष में झुका रहा है। खासतौर पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की प्रशासनिक पकड़ और जनहित योजनाएं पार्टी के लिए मजबूत आधार बन रही हैं।

असम में विपक्ष के लिए चुनौती बरकरार

असम में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में मौजूद जरूर है, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि वह अभी भी सत्तारूढ़ गठबंधन से काफी पीछे चल रही है। विपक्षी एकजुटता की कमी भी बीजेपी को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

पश्चिम बंगाल: मुकाबला होगा दिलचस्प

दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की तस्वीर असम से बिल्कुल अलग नजर आती है। यहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला बनने के संकेत हैं। सर्वे के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी अभी भी बढ़त बनाए हुए है, लेकिन बीजेपी ने पिछले चुनावों की तुलना में अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे साफ है कि इस बार चुनावी जंग ज्यादा कड़ी हो सकती है।

बीजेपी का बढ़ता दायरा

पश्चिम बंगाल में बीजेपी खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित करने में सफल रही है। पार्टी भ्रष्टाचार, घुसपैठ और विकास जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है, जिससे उसे नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है। वहीं, पार्टी नेता सुवेंदु अधिकारी ने बड़ी जीत का दावा कर राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

टीएमसी की मजबूत पकड़ भी कायम

हालांकि बीजेपी चुनौती दे रही है, लेकिन टीएमसी की जमीनी पकड़ अभी भी मजबूत मानी जा रही है। खासकर महिला मतदाताओं और ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी का प्रभाव बना हुआ है, जो चुनावी नतीजों में निर्णायक साबित हो सकता है।

इस सर्वे रिपोर्ट का पूरा सार क्या हैं ?

असम: बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन स्पष्ट बहुमत की ओर

पश्चिम बंगाल: टीएमसी आगे, लेकिन बीजेपी दे रही कड़ी टक्कर

धमाका करेगा 8वां वेतन आयोग! कर्मचारियों की सैलरी में होगा जबरदस्त ब्लास्ट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत की खबरें सामने आ रही हैं। 8वां वेतन आयोग को लेकर जारी हलचल ने उम्मीदों को नई उड़ान दे दी है। अगर सब कुछ अनुमान के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो आने वाले समय में कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

आयोग पर तेज हुई प्रक्रिया

सरकार द्वारा आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद अब इसका काम भी रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है। आयोग की कमान पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है, जो विभिन्न पहलुओं पर सुझाव जुटाने में लगी हुई हैं।

जनभागीदारी बढ़ाने के लिए MyGov पोर्टल के जरिए सुझाव मांगे गए हैं, जहां कर्मचारियों और आम लोगों से वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े सवालों पर राय ली जा रही है। इससे साफ है कि इस बार वेतन ढांचे में बदलाव अधिक व्यापक हो सकता है।

सैलरी में कितनी बढ़ोतरी संभव?

सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इसे 3.0 से 3.25 के बीच रखा जाए। अगर ऐसा होता है, तो बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल आ सकता है। मौजूदा न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹34,000 से ₹50,000 के दायरे में जा सकता है। 

पेंशनर्स के लिए भी बड़ी राहत

यह आयोग सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेंशनर्स को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है। न्यूनतम पेंशन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना हैं। महंगाई के दबाव को देखते हुए पेंशन ढांचे में सुधार किया जायेगा। यह आयोग बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने पर फोकस रहेगा।

लागू कब होगा नया वेतन ढांचा?

आधिकारिक तौर पर इसे 1 जनवरी 2026 से लागू माना जा सकता है, लेकिन असल भुगतान में थोड़ा समय लगना तय है। आमतौर पर आयोग की रिपोर्ट, समीक्षा और मंजूरी की प्रक्रिया लंबी होती है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि नई सैलरी का लाभ 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत से मिलना शुरू हो सकता है।

एरियर बनेगा बड़ा बोनस

देरी की स्थिति में कर्मचारियों को एरियर का फायदा मिलेगा। यानी लागू होने की तारीख से लेकर भुगतान शुरू होने तक का पूरा बकाया एक साथ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रकम कई कर्मचारियों के लिए लाखों रुपये तक पहुंच सकती है, जो एक तरह से बड़ा वित्तीय बूस्ट साबित होगा।

क्यों खास है यह वेतन आयोग?

महंगाई, बढ़ते खर्च और बदलती आर्थिक जरूरतों के बीच यह वेतन आयोग बेहद अहम माना जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि बाजार में मांग को भी बढ़ावा मिल सकता है।

बंगाल की सत्ता का रास्ता: ये 5 मुद्दे बीजेपी के लिए बन सकते हैं गेमचेंजर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने में जुटी है, वहीं भारतीय जनता पार्टी राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।

बीजेपी इस बार केवल पारंपरिक चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह कई ऐसे मुद्दों को केंद्र में ला रही है जो सीधे जनता की भावनाओं और रोजमर्रा की समस्याओं से जुड़े हैं। माना जा रहा है कि ये पांच बड़े मुद्दे चुनावी तस्वीर बदल सकते हैं।

1. भ्रष्टाचार पर सीधा हमला

बीजेपी ने राज्य सरकार को घेरने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों को सबसे आगे रखा है। कथित घोटालों और भर्ती विवादों को लेकर पार्टी लगातार सवाल उठा रही है। इसका मकसद यह संदेश देना है कि मौजूदा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और बदलाव जरूरी है।

2. घुसपैठ और सीमावर्ती चिंता

सीमावर्ती राज्य होने के कारण अवैध घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। अमित शाह समेत बीजेपी के शीर्ष नेता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हैं। पार्टी का तर्क है कि बदलता जनसांख्यिकीय संतुलन भविष्य के लिए चुनौती बन सकता है, इसलिए इस पर सख्त नीति जरूरी है।

3. महिला सुरक्षा का सवाल

हाल के वर्षों में कुछ आपराधिक घटनाओं ने महिला सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। बीजेपी इसे एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में पेश कर रही है और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। पार्टी का दावा है कि वह महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

4. मतुआ समुदाय और नागरिकता का मुद्दा

राज्य की राजनीति में मतुआ समुदाय की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। बीजेपी नागरिकता से जुड़े वादों को इस वर्ग के बीच प्रमुखता से उठा रही है। सीमावर्ती और उत्तर बंगाल के इलाकों में यह मुद्दा चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।

5. बंगाल में विकास बनाम ‘परिवर्तन’ की लड़ाई

बीजेपी “परिवर्तन” के नारे के साथ खुद को एक विकल्प के रूप में पेश कर रही है। पार्टी का फोकस बुनियादी ढांचे, रोजगार और केंद्र की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष अपनी उपलब्धियों के आधार पर जनता से समर्थन मांग रहा है।

चुनाव में क्या बनेंगे निर्णायक फैक्टर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल का चुनाव केवल नारों से नहीं, बल्कि ज़मीनी संगठन, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं की प्राथमिकताओं से तय होगा। बीजेपी जिन मुद्दों को उठा रही है, वे निश्चित तौर पर बहस को दिशा दे रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाता ही करेंगे।

डॉलर के सामने कमजोर पड़ा रुपया: पहुंचा ₹94 के पार, बाजार में हलचल तेज

नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन भारतीय बाजार के लिए भारी दबाव लेकर आया। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों को जोरदार झटका लगा। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की दिशा बदल दी, जिसका सीधा असर रुपये और शेयर बाजार दोनों पर दिखा।

आपको बता दें की मुद्रा बाजार में सबसे बड़ा घटनाक्रम यह रहा कि भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले ₹94 के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में ही रुपये में तेज कमजोरी दर्ज की गई, जिसने बाजार की चिंता और बढ़ा दी।

तेल की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर आशंका गहराई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, ऐसे में तेल महंगा होने का असर सीधे देश की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। जैसे-जैसे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, वैसे-वैसे डॉलर की मांग भी बढ़ती है। यही वजह है कि रुपये पर दबाव बढ़ गया और वह रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया।

शेयर बाजार में भारी बिकवाली

मुद्रा बाजार की कमजोरी का असर शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया। सुबह के कारोबार में ही सेंसेक्स में बड़ी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती घंटों में ही यह 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशक इस समय जोखिम लेने से बच रहे हैं। अनिश्चित माहौल में वे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार में बिकवाली बढ़ गई है।

आम आदमी पर क्या असर?

रुपये की गिरावट और महंगे तेल का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहता। इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका हैं, रोजमर्रा की चीजों की लागत बढ़ने का खतरा हैं, महंगाई पर दबाव बना हुआ है यानी यह स्थिति धीरे-धीरे आम जीवन को भी प्रभावित कर सकती है। 

6 ग्रहों की महायोग युति: 5 राशियों की किस्मत में होगा बड़ा धमाका, धन-वर्षा के प्रबल योग

राशिफल। ज्योतिषीय दृष्टि से 29 मार्च 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन मीन राशि में एक साथ छह ग्रह सूर्य, चंद्रमा, शुक्र, शनि, राहु और बुध की दुर्लभ युति बनने जा रही है। ज्योतिष शास्त्र में इस प्रकार का महासंयोग अत्यंत प्रभावशाली और संवेदनशील माना जाता है, जिसका असर आम जनजीवन से लेकर आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों तक देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मीन राशि में बनने वाली यह युति भावनात्मक, आध्यात्मिक और आर्थिक स्तर पर बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। कुछ राशियों के लिए यह समय तरक्की और धन लाभ का कारण बन सकता है, जबकि कुछ के लिए सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

इन 5 राशियों पर विशेष प्रभाव

मेष राशि:

मेष राशि के जातकों के लिए यह युति आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकती है। अचानक धन लाभ, करियर में उन्नति और नए अवसर मिलने के संकेत हैं। हालांकि मानसिक तनाव से बचने के लिए संयम रखना जरूरी होगा।

वृषभ राशि:

वृषभ राशि के लोगों के लिए यह समय सामाजिक प्रतिष्ठा और नेटवर्किंग बढ़ाने वाला रहेगा। व्यापार में नई डील और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है।

कर्क राशि:

कर्क राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के योग बन रहे हैं। धार्मिक यात्राओं के संकेत भी मिल रहे हैं।

कन्या राशि:

कन्या राशि के लिए यह युति साझेदारी के मामलों में लाभकारी हो सकती है। व्यापारिक साझेदारी मजबूत होगी और जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। कानूनी मामलों में राहत मिलने की संभावना है।

मीन राशि:

मीन राशि में ही यह युति बन रही है, इसलिए इसका सबसे अधिक प्रभाव इसी राशि पर पड़ेगा। व्यक्तित्व में निखार, करियर में बड़ी सफलता और धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। हालांकि राहु और शनि के प्रभाव से मानसिक दबाव की स्थिति भी बन सकती है।

यूपी में 63KM लंबा एक्सप्रेस-वे तैयार, इन जिलों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राजधानी लखनऊ और औद्योगिक शहर कानपुर के बीच बनने वाला 63 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे अब लगभग तैयार है। अप्रैल के पहले सप्ताह से इस आधुनिक मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो जाएगी।

सफर होगा आधे समय से भी कम

अब तक लखनऊ से कानपुर पहुंचने में आमतौर पर 1.5 से 2 घंटे का समय लगता है, जो ट्रैफिक के अनुसार और भी बढ़ जाता है। लेकिन नए एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद यही दूरी महज 35 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी। यह बदलाव न केवल समय बचाएगा, बल्कि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित ड्राइविंग अनुभव भी देगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस हाईवे

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे को अत्याधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है। यह मार्ग अमौसी एयरपोर्ट क्षेत्र से शुरू होकर कानपुर के आजाद मार्ग तक जाएगा। इसमें 6-लेन की चौड़ी सड़क, एलिवेटेड सेक्शन, 120 किमी प्रति घंटे तक की डिजाइन स्पीड जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो यात्रा को तेज, सुरक्षित और आरामदायक बनाती हैं।

विकास को मिलेगी नई रफ्तार

यह एक्सप्रेस-वे केवल यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों शहरों के बीच आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति देगा। लखनऊ और कानपुर के बीच रोजाना आने-जाने वाले लोगों, व्यापारियों और उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर में यूपी की बढ़त

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार एक्सप्रेस-वे नेटवर्क को विस्तार दे रही है, जिससे राज्य देश में सड़क कनेक्टिविटी के मामले में अग्रणी बन चुका है। यह परियोजना भी उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।

जल्द हो सकता है लोकार्पण

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन अप्रैल में नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा सकता है। इसके लिए तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। लोगों को अब उस दिन का इंतजार है, जब इस नए हाईवे पर गाड़ियां रफ्तार भरना शुरू करेंगी।

आम जनता को बड़ी राहत

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे न सिर्फ दो बड़े शहरों को जोड़ेगा, बल्कि लाखों लोगों के दैनिक जीवन को आसान बनाएगा। कम समय में लंबी दूरी तय करने की सुविधा, ईंधन की बचत और सुरक्षित यात्रा, ये सभी फायदे इसे प्रदेश के लिए एक गेमचेंजर परियोजना बनाते हैं।

यूपी में 90% तक सब्सिडी, छोटे किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और छोटे व सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बकरी पालन को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। कम लागत और तेज मुनाफे के कारण बकरी पालन को पहले से ही “गरीबों का एटीएम” कहा जाता रहा है। अब सरकारी सहयोग मिलने से यह व्यवसाय और भी आकर्षक बन गया है।

क्यों खास है बकरी पालन?

बकरी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे कम जमीन और सीमित संसाधनों के साथ भी शुरू किया जा सकता है। इसमें शुरुआती निवेश कम होता है और आय के कई स्रोत होते हैं, दूध, मांस और मेमनों की बिक्री। इसके अलावा बकरियां कम खर्च में पल जाती हैं, जिससे मुनाफा बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

योजना की मुख्य बातें

सरकार की इस योजना के तहत छोटे स्तर पर बकरी पालन शुरू करने के लिए 5 मादा बकरी और 1 बकरा देने का प्रावधान है। खास बात यह है कि इस यूनिट पर सरकार 90% तक सब्सिडी दे रही है। योजना में बीमा और टीकाकरण की सुविधा भी शामिल है, जिससे पशुपालकों को जोखिम कम उठाना पड़ता है।

यह योजना राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत चलाई जा रही है, जिसमें समाज के कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति, महिलाएं, विधवा महिलाएं, भूमिहीन किसान, अत्यंत गरीब परिवार और दिव्यांगजन शामिल हैं।

सब्सिडी और वित्तीय सहायता

इस योजना के तहत: SC/ST और महिलाओं को 90% तक सब्सिडी (अधिकतम ₹7.5 लाख), सामान्य वर्ग को 70% तक सब्सिडी (अधिकतम ₹5 लाख), यह राशि बकरी खरीदने, शेड बनाने, चारा और दवाइयों जैसी जरूरतों पर खर्च की जा सकती है।

प्रशिक्षण और तकनीकी मदद

सरकार केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि नए पशुपालकों को प्रशिक्षण भी दे रही है। अनुभवी विशेषज्ञों के माध्यम से ट्रेनिंग और शुरुआती चरण में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसान बिना किसी परेशानी के इस व्यवसाय को शुरू कर सकें।

ऐसे करें आवेदन प्रक्रिया को पूरा

इच्छुक लाभार्थी पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर “Goat Farming Subsidy Scheme” के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन का प्रमाण और फोटो जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। इसके अलावा, नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है।

ईरान-इजरायल नहीं! इन 6 देशों के पास है SLBM मिसाइलें

नई दिल्ली। दुनिया में जब भी मिसाइल शक्ति की चर्चा होती है, तो अक्सर ईरान और इजरायल का नाम सामने आता है। लेकिन सच्चाई इससे अलग है। समुद्र के भीतर छिपकर दुश्मन पर हमला करने की क्षमता जिसे SLBM (Submarine-Launched Ballistic Missile) कहा जाता है सिर्फ कुछ ही देशों के पास मौजूद है।

यह तकनीक आधुनिक युद्ध प्रणाली का सबसे खतरनाक और निर्णायक हिस्सा मानी जाती है, क्योंकि इसे पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है, जिन्हें दुश्मन के लिए ढूंढ पाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में यह क्षमता किसी भी देश को “अदृश्य ताकत” प्रदान करती है।

अमेरिका:

संयुक्त राज्य अमेरिका इस क्षेत्र में दुनिया का सबसे ताकतवर देश माना जाता है। इसके पास Trident II (D5) जैसी अत्याधुनिक SLBM मिसाइलें हैं, जिन्हें Ohio-class पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है।

रूस:

रूस भी इस मामले में किसी से पीछे नहीं है। इसके पास RSM-56 Bulava जैसी आधुनिक SLBM मिसाइलें हैं, जो Borei-class पनडुब्बियों से लॉन्च होती हैं। 

चीन:

चीन पिछले कुछ वर्षों में अपनी नौसैनिक ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है। इसके पास JL-2 और JL-3 जैसी SLBM मिसाइलें हैं, जो Type 094 पनडुब्बियों से लॉन्च होती हैं।

फ्रांस:

फ्रांस यूरोप का एकमात्र ऐसा देश है, जिसके पास पूरी तरह स्वतंत्र SLBM क्षमता है। इसकी M51 मिसाइलें Triomphant-class पनडुब्बियों से लॉन्च होती हैं।

ब्रिटेन:

यूनाइटेड किंगडम भी इस सूची में एक अहम देश है। इसके पास Trident II (D5) मिसाइलें हैं, जिन्हें Vanguard-class पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है।

भारत:

भारत भी अब इस विशिष्ट क्लब में शामिल हो चुका है। भारत के पास K-15 (सागरिका) और K-4 जैसी स्वदेशी SLBM मिसाइलें हैं, जिन्हें INS Arihant पनडुब्बी से लॉन्च किया जाता है।

चंद्रमा का बड़ा गोचर: इन 5 राशियों की किस्मत पलटेगी, धन-भाग्य में जबरदस्त उछाल

राशिफल। 28 मार्च 2026, शनिवार का दिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेगा। चंद्रमा का यह गोचर भावनाओं, परिवार, धन और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालता है। कर्क राशि चंद्रमा की अपनी राशि मानी जाती है, इसलिए इसका प्रभाव और भी अधिक शुभ हो जाता है।

इस गोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन 5 राशियों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी रहने वाला है।

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। पुराने अटके हुए पैसे मिल सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी।

2. कर्क राशि

कर्क राशि में ही चंद्रमा का प्रवेश होने से इस राशि के जातकों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा, नई योजनाओं में सफलता मिलेगी और करियर में उन्नति के संकेत हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और मानसिक शांति बनी रहेगी।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय करियर और प्रतिष्ठा में वृद्धि का संकेत दे रहा है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह गोचर नए अवसर लेकर आएगा। व्यापार में लाभ और निवेश में सफलता के योग हैं। पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और पुराने विवाद सुलझ सकते हैं।

5. मीन राशि

मीन राशि के लोगों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला रहेगा। शिक्षा, करियर और प्रेम संबंधों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। धन लाभ के अवसर मिलेंगे और जीवन में स्थिरता आएगी।

बिहार में मौसम का बदलाव: 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, ओले गिरने और तेज आंधी की संभावना

पटना। बिहार में अचानक मौसम का मिजाज बदला है और 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, नए सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण राज्य के मौसम में अस्थिरता बढ़ गई है। इसके चलते तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना है, जिससे फसलों और सामान्य जीवन पर असर पड़ सकता है।

मुख्य बिंदु:

ऑरेंज अलर्ट वाले जिले: उत्तर-पश्चिम और उत्तर-मध्य बिहार के 12 जिलों   पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, गोपालगंज, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी और मुजफ्फरपुर में 40–50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और ओले गिरने का खतरा है।

येलो अलर्ट वाले जिले: पटना, गया, बेगूसराय और भागलपुर सहित दक्षिणी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से कुछ राहत मिलेगी।

तापमान में होगा बदलाव

पिछले दिनों बिहार में पारा 35–38 डिग्री के आसपास पहुंच गया था। नए मौसम सिस्टम के चलते अगले तीन दिनों में तापमान में 3–4 डिग्री की गिरावट आने की संभावना है, जिससे गर्मी का असर कम होगा।

कृषि और लोगों पर असर

उत्तर बिहार के जिलों में ओले गिरने की संभावना के चलते फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों को सावधानी बरतने और आवश्यक कदम उठाने की हिदायत दी है। यह अस्थिर मौसम 27 से 29 मार्च तक प्रभावी रहने की संभावना है। लोगों को तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम में होने इस अचानक बदलाव के कारण आम लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी मौसम के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।

बिहार सरकार का बड़ा कदम: EWS सर्टिफिकेट बनाना हुआ आसान

पटना। बिहार सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लोगों के लिए सर्टिफिकेट बनाने की प्रक्रिया सरल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस दिशा में ऐसी गाइडलाइन जारी की है, जो भ्रम, देरी और धांधली को पूरी तरह समाप्त करेगी। अब लोगों को बार-बार ब्लॉक या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

EWS सर्टिफिकेट क्या है?

EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट एक आधिकारिक दस्तावेज़ है, जिसके जरिए सामान्य वर्ग के गरीब लोग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं। इस सर्टिफिकेट के लिए आवेदक की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और उसके पास शहरी में 100 वर्ग गज तथा ग्रामीण में 240 वर्ग गज से अधिक संपत्ति नहीं होनी चाहिए। कृषि भूमि की सीमा 5 एकड़ तय की गई है।

28 सवाल-जवाब में पूरी प्रक्रिया

सरकार ने इस बार ’28 सवाल-जवाब’ वाली गाइडलाइन जारी की है, जिसमें आय की गणना, संपत्ति सीमा, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और वेरिफिकेशन की हर बात साफ तौर पर बताई गई है। इससे न केवल आम लोगों बल्कि अधिकारियों के लिए भी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो जाएगी।

अब हर जगह एक ही मानक लागू होगा

पहले अलग-अलग जिलों और अंचलों में अधिकारियों द्वारा नियमों की अलग-अलग व्याख्या होने से जनता को परेशानी होती थी। नई गाइडलाइन के बाद डीएम से लेकर राजस्व अधिकारी (CO) तक सभी एक ही फ्रेमवर्क पर काम करेंगे, जिससे प्रमाण पत्र जारी करने में कोई भी असमानता नहीं रहेगी।

EWS के लिए पात्रता और आय की गणना

EWS का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है। इसमें केवल वेतन नहीं, बल्कि कृषि, व्यवसाय और अन्य सभी स्रोतों से होने वाली कमाई शामिल होगी। पात्रता तय करने के लिए पति-पत्नी और उनके आश्रित बच्चों की संयुक्त आय को आधार बनाया जाएगा। माता-पिता की आय को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा।

EWS के लिए संपत्ति सीमा और सख्त कार्रवाई

शहरी क्षेत्रों में 100 वर्ग गज से बड़ा प्लॉट और ग्रामीण क्षेत्रों में 200 वर्ग गज से अधिक संपत्ति वाले लोग EWS लाभ के पात्र नहीं होंगे। इसी तरह, अगर किसी ने गलत जानकारी देकर सर्टिफिकेट बनवाया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पूरी जांच के बिना कोई प्रमाण पत्र न जारी किया जाए।

अमेरिकी डॉलर पर ट्रंप का सिग्नेचर! 165 साल में पहली बार होगा बदलाव

नई दिल्ली। अमेरिका अपने 250वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है और इसी अवसर पर देश में मुद्रा और सिक्कों को लेकर ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। अब अमेरिकी डॉलर नोटों पर पहली बार मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सिग्नेचर दिखाई देंगे। यह बदलाव 1861 से चली आ रही परंपरा को तोड़ता है, जब तक नोट्स पर केवल ‘ट्रेज़रर ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स’ के हस्ताक्षर ही होते थे।

ट्रेजरी विभाग की घोषणा

अमेरिकी ट्रेजरी ने बताया कि जून 2026 से नए 100 डॉलर के नोट छापे जाएंगे। इन नोटों पर राष्ट्रपति ट्रंप के सिग्नेचर के साथ वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर भी होंगे। अमेरिकी वित्त मंत्री के अनुसार यह कदम देश की आर्थिक प्रगति और ऐतिहासिक उपलब्धियों का प्रतीक है।

सोने के सिक्के पर भी ट्रंप

सिर्फ नोट ही नहीं, बल्कि 24 कैरेट के सोने के सिक्के पर भी ट्रंप की तस्वीर अंकित की जाएगी। इस सिक्के पर उन्हें ‘रिज़ॉल्यूट डेस्क’ पर झुके हुए और मुट्ठी बंद करते हुए दिखाया जाएगा। इससे पहले 1926 में अमेरिका के स्वतंत्रता के 150 साल पूरे होने पर जारी सिक्के पर जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर थी। हालांकि किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर पर सिक्के के लिए औपचारिक मंजूरी अभी बाकी है।

क्या है ऐतिहासिक महत्व?

इस बदलाव के साथ अमेरिकी मुद्रा प्रणाली में 165 साल पुरानी परंपरा टूट रही है। इसे अमेरिका की आर्थिक ताकत और इतिहास में उपलब्धियों को दर्शाने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के वित्तीय बाजारों में भी डॉलर की पकड़ और उसकी छवि पर असर पड़ सकता है।

नोट और सिक्कों का कार्यान्वयन?

नई छपाई जून से शुरू होगी और अन्य मूल्यवर्ग के नोटों पर भी धीरे-धीरे ट्रंप के सिग्नेचर अंकित किए जाएंगे। सोने के सिक्के की डिजाइन को अमेरिकी ‘कमीशन ऑफ फाइन आर्ट्स’ से अंतिम मंजूरी मिलते ही इसे जारी कर दिया जाएगा। इस कदम से अमेरिका ने अपने स्वतंत्रता वर्ष के जश्न को और यादगार बनाया है और दुनिया के सामने अमेरिकी मुद्रा में नए बदलाव की झलक पेश की है।

4 ग्रहों का महाशक्ति योग! 4 राशियों के जीवन में आएगी भारी खुशखबरी

राशिफल। इस समय खगोल विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र में एक खास योग बन रहा है जिसे चतुर्ग्रही योग कहा जाता है। मीन राशि में सूर्य, शनि, शुक्र और चंद्रमा की युति बन रही है, जो न केवल करियर और व्यापार में तरक्की के संकेत देती है बल्कि व्यक्तिगत जीवन में खुशियों का बड़ा पैगाम भी लेकर आती है। इस योग का प्रभाव विशेष रूप से मीन, वृषभ, धनु और तुला राशि वालों पर अधिक देखा जा रहा है।

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए यह योग जीवन में एक नई ऊर्जा लेकर आएगा। करियर में नए अवसर सामने आएंगे, प्रमोशन और बोनस के अवसर बन सकते हैं। व्यापार में निवेश करने का सही समय है, पुराने लेन-देन से लाभ मिलने की संभावना भी है। व्यक्तिगत जीवन में रिश्तों में मिठास बढ़ेगी और परिवारिक खुशियां बढ़ेंगी।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग आर्थिक और सामाजिक सफलता की ओर इशारा कर रहा है। नई नौकरी, प्रोजेक्ट या व्यवसायिक साझेदारी से लाभ होगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन मानसिक शांति के लिए ध्यान और योग करने की सलाह दी जाती है। इस समय निवेश योजनाओं में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं।

धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह योग रोमांचक बदलाव लाएगा। लंबी दूरी की यात्राएं या नए शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर सामने आएंगे। करियर में चुनौतीपूर्ण कामों में सफलता मिलेगी। यदि आप व्यापार में हैं, तो नए ग्राहक और नए अवसर हासिल होंगे। प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह योग घर और परिवार में सुख-शांति का संदेश देता है। पुराने विवाद समाप्त होंगे और वित्तीय मामलों में स्थिरता आएगी। करियर में वरिष्ठ अधिकारियों से सहयोग मिलेगा और नए अवसर मिलेंगे। निवेश और संपत्ति से जुड़े फैसले इस समय लाभदायक हो सकते हैं।

सैलरी बंपर बढ़ेगी! 8th Pay Commission लागू होते ही मिलेगी मोटी रकम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) की सिफारिशों पर काम शुरू कर दिया है, जिससे देश के लगभग 1.2 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी और भत्तों में संभावित रूप से ऐतिहासिक बढ़ोतरी हो सकती है। आयोग के गठन और उसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को पहले ही मंजूरी दे दी गई है।

गठन और प्रमुख सदस्य

जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की गई थी। आयोग की अध्यक्षता पूर्व न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसके साथ ही IIM बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य के रूप में और पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव पंकज जैन सदस्य-सचिव के रूप में नियुक्त किए गए हैं। पिछले 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं। इसी आधार पर विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं।

वर्तमान वेतन और भत्ते

केंद्रीय कर्मचारियों की वर्तमान न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, जबकि पेंशनभोगियों को न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये मिलती है। 7वें वेतन आयोग में उच्चतम वेतन 2,25,000 रुपये था, और कैबिनेट सचिव जैसे शीर्ष पदों पर यह 2,50,000 रुपये तक जाता था। इस समय महंगाई भत्ता (DA/DR) 58% है।

संभावित सैलरी हाइक

जानकारों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 2.86 तक जाने की संभावना है। यदि यह लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से सीधे 51,480 रुपये तक बढ़ सकती है। इससे कर्मचारियों को मूल वेतन में लगभग 186% की वृद्धि मिल सकती है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर 3 रखा जाए, जिससे न्यूनतम वेतन 54,000 रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्व

अगर यह सैलरी वृद्धि लागू होती है, तो न केवल कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा, बल्कि पेंशनभोगियों को भी औसत 20–30% तक बढ़ी हुई पेंशन मिलने की संभावना है। इससे सरकार के कर्मचारियों के जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार देखने को मिल सकता है।