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रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! पोस्टिंग को लेकर नए नियम लागू

नई दिल्ली। रेलवे में नौकरी करने वाले पति-पत्नी के लिए राहत की खबर है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बनाने के उद्देश्य से रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े दिशा-निर्देशों को अपडेट किया है। नए प्रावधानों में पति-पत्नी को एक ही स्टेशन या संभव होने पर आसपास के स्थान पर तैनाती देने पर जोर दिया गया है।

रेलवे बोर्ड ने अराजपत्रित कर्मचारियों के स्थानांतरण और तैनाती से संबंधित अलग-अलग समय पर जारी निर्देशों को एक जगह समेकित करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जहां प्रशासनिक रूप से संभव हो, कर्मचारियों को परिवार से दूर रहकर नौकरी करने की परेशानी कम हो और बच्चों की देखभाल जैसी जिम्मेदारियां भी आसानी से निभाई जा सकें।

नई व्यवस्था में पति-पत्नी दोनों रेलवे कर्मचारी हैं तो क्या होगा?

अगर पति और पत्नी दोनों रेलवे में कार्यरत हैं और एक ही सीनियरिटी यूनिट में आते हैं, तो प्रशासन उनकी पोस्टिंग एक ही स्टेशन पर करने की संभावना तलाशेगा। हालांकि, तैनाती तय करते समय एक अहम शर्त का ध्यान रखा जाएगा। दोनों में से किसी एक कर्मचारी को दूसरे के सीधे अधीनस्थ पद पर तैनात नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर प्रशासनिक निष्पक्षता और सेवा संबंधी व्यवस्था को बनाए रखना है।

अलग-अलग सीनियरिटी यूनिट होने पर क्या व्यवस्था होगी?

यदि पति-पत्नी रेलवे की अलग-अलग सीनियरिटी यूनिट में काम कर रहे हैं, तो ऐसी जगह पोस्टिंग देने की कोशिश की जाएगी जहां दोनों के लिए उपयुक्त पद उपलब्ध हों। हालांकि, हर मामले में एक ही स्टेशन पर तैनाती संभव नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में प्रशासन उपलब्ध पदों और कर्मचारी की सेवा संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी द्वारा कैटेगरी बदलने के अनुरोध पर भी लागू नियमों के तहत विचार किया जा सकता है।

पोस्टिंग नहीं मिलने पर कर्मचारी क्या कर सकता है?

नए प्रावधानों में शिकायतों के निपटारे को लेकर भी व्यवस्था रखी गई है। यदि किसी कर्मचारी को पति-पत्नी की संयुक्त पोस्टिंग से संबंधित अनुरोध के बावजूद सुविधा नहीं मिलती है, तो संबंधित प्रशासन को निर्णय का उचित कारण बताना होगा। इसके अलावा, कर्मचारी की शिकायत पर अंतिम निर्णय उसी अधिकारी से कम से कम एक स्तर ऊपर का अधिकारी करेगा, जिसने मूल फैसला लिया था। इससे शिकायतों की समीक्षा के लिए एक अतिरिक्त प्रशासनिक स्तर उपलब्ध होगा।

ट्रांसफर और शिकायतों का रखा जा सकता है रिकॉर्ड

पति-पत्नी की पोस्टिंग से जुड़े मामलों की निगरानी बेहतर तरीके से करने के लिए ट्रांसफर अनुरोधों और शिकायतों का अलग रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कितने कर्मचारियों ने संयुक्त पोस्टिंग के लिए आवेदन किया और उनके मामलों में क्या निर्णय लिया गया। यह व्यवस्था प्रशासन को ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा करने में भी मदद कर सकती है।

किन रेलवे कर्मचारियों पर लागू होंगे ये निर्देश?

नए दिशा-निर्देश मुख्य रूप से अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों से जुड़े हैं। यानी ऐसे कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामलों में इन प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा। वहीं, राजपत्रित अधिकारियों के लिए पहले से लागू स्थानांतरण और तैनाती संबंधी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनके मामलों में मौजूदा प्रावधान ही लागू रहेंगे।

पुराने मामलों पर नहीं होगा दोबारा विचार

रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों का निपटारा पहले ही पुराने नियमों के तहत किया जा चुका है, उन्हें नए दिशा-निर्देशों के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी नए प्रावधान मुख्य रूप से आगे आने वाले मामलों में लागू होंगे।

परिवार के साथ रहने में मिलेगी मदद

रेलवे में बड़ी संख्या में कर्मचारी अलग-अलग शहरों और स्टेशनों पर तैनात रहते हैं। पति-पत्नी दोनों के रेलवे में काम करने की स्थिति में अलग-अलग जगह पोस्टिंग होने से परिवार को कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नए दिशा-निर्देशों में एक ही स्टेशन या आसपास पोस्टिंग की संभावना पर जोर दिए जाने से कर्मचारियों को परिवार के साथ रहने का बेहतर अवसर मिल सकता है।

27 या 28 अगस्त कब है रक्षाबंधन? दूर करें कन्फ्यूजन, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

धर्म डेस्क। रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही राखी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बढ़ गया है। इस बार कई लोग यह जानना चाहते हैं कि भाई-बहन के प्रेम का पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा या 28 अगस्त को। तारीख को लेकर भ्रम की मुख्य वजह सावन पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि ग्रहण और उससे जुड़े सूतक काल का रक्षाबंधन पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं।

पंचांग के अनुसार इस बार रक्षाबंधन 27 अगस्त को मनाया जाएगा। बहनें इसी दिन शुभ समय में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। वहीं, 28 अगस्त को होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका असर त्योहार की पूजा और राखी बांधने पर नहीं माना जाएगा।

28 अगस्त को लगेगा चंद्र ग्रहण

सावन पूर्णिमा के अवसर पर इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण पड़ने वाला है। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण 28 अगस्त की सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:32 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। चंद्र ग्रहण के कारण ही रक्षाबंधन की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल पैदा हुआ है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दिखाई देने और न दिखाई देने का भी विशेष महत्व माना जाता है।

27 अगस्त की रात से सूतक की चर्चा

चंद्र ग्रहण के करीब नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू होने की सामान्य धार्मिक मान्यता है। इस आधार पर 27 अगस्त की रात करीब 9:53 बजे से सूतक काल शुरू होने की बात कही जा रही है। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारतीय क्षेत्र में सूतक काल को मान्य नहीं माना जाएगा। इसी वजह से रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण संबंधी नियमों का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

27 अगस्त को ही मनाया जाएगा रक्षाबंधन

पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह 5:38 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 6:18 बजे तक रहेगी। इस दौरान 27 अगस्त को राखी बांधने के लिए उपयुक्त समय उपलब्ध है। भद्रा से संबंधित समय को ध्यान में रखते हुए रक्षाबंधन का पर्व 27 अगस्त को ही मनाना शुभ माना गया है। यानी बहनें 27 अगस्त को अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना कर सकती हैं।

पानी-पानी होगा बिहार! आज 18 जिलों में भारी बारिश और ठनका का अलर्ट

पटना। बिहार में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही हैं। राज्य के कई हिस्सों में आज बादल छाए रहने के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 18 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में इन जिलों के लोगों को मौसम खराब होने के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

इन जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी बिहार के कई जिलों में आज मौसम ज्यादा सक्रिय रह सकता है। सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इन सभी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

इसके अलावा खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका और जमुई में भी बादल गरजने के साथ बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी है।

दक्षिण-पश्चिम बिहार के कुछ जिलों में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है। बक्सर, भोजपुर, अरवल, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद में बारिश के साथ ठनका गिरने की आशंका जताई गई है। इन जिलों को भी येलो अलर्ट की सूची में रखा गया है।

पश्चिमी जिलों में छिटपुट बारिश के आसार

सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण में भी कुछ स्थानों पर हल्की या छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने फिलहाल कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है। मौसम का यह बदलाव राज्य में अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। कहीं तेज बारिश की संभावना है तो कहीं मौसम सामान्य रहने का अनुमान है।

13 अगस्त तक जारी रहेगा बारिश का दौर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 13 अगस्त तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छिटपुट बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। इस दौरान कई इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वातावरण में नमी और बादलों की आवाजाही के कारण कुछ स्थानों पर अचानक बारिश तेज हो सकती है। वहीं, एक-दो जगहों पर भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है।

ठनका के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

वज्रपात की आशंका वाले इलाकों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, खेत या जलाशयों के आसपास जाने से बचना चाहिए। पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे खड़े होने के बजाय सुरक्षित और पक्की जगह पर रहना बेहतर है।

चंद्र-मंगल मिलकर बदलेंगे 4 राशियों का भाग्य! खुलेंगे तरक्की के नए द्वार

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। जब दो ग्रह एक ही राशि में आकर एक साथ प्रभाव डालते हैं, तो उसका असर सभी राशियों पर अलग-अलग देखने को मिलता है। 9 अगस्त से 11 अगस्त 2026 तक चंद्रमा और मंगल की युति बन रही है। चंद्रमा के मिथुन राशि में प्रवेश करने के बाद वहां पहले से मौजूद मंगल के साथ उनका संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस संयोग से महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण हो रहा है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए चंद्र-मंगल की युति आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम ला सकती है। लंबे समय से अटके किसी काम को गति मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में अपनी मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर होंगे और नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए यह युति तरक्की के नए रास्ते खोल सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिभा और मेहनत की सराहना होगी। पद और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी के अवसर बन सकते हैं। व्यापार में किसी नई डील या प्रोजेक्ट से फायदा मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय के अतिरिक्त स्रोत बनाने की दिशा में प्रयास सफल हो सकते हैं।

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए चंद्र-मंगल का यह संयोग धन और करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। नौकरी में बदलाव या बेहतर अवसर की तलाश कर रहे जातकों को कोई अच्छा विकल्प मिल सकता है। ऑफिस में आपकी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, जिसका भविष्य में फायदा मिलेगा। आर्थिक मामलों में भी राहत मिल सकती है। परिवार में भी माहौल सकारात्मक रह सकता है।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों को इस शुभ योग का फायदा करियर और आर्थिक स्थिति दोनों में मिल सकता है। लंबे समय से चल रही परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है। नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। परिवार में भी सुख-शांति बनी रहने की संभावना है। किसी पुराने लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

बिहार में 4 बड़ी भर्तियों का मौका! युवाओं के लिए खुशखबरी पर खुशखबरी, ऐसे करें आवेदन

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अगस्त महीना कई अच्छे मौके लेकर आया है। पुलिस, वन विभाग, तकनीकी पदों और पटना हाईकोर्ट में भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। इन भर्तियों के जरिए अलग-अलग विभागों में कुल 247 पदों पर नियुक्ति का रास्ता खुला है। हालांकि, हर भर्ती के लिए योग्यता, आयु सीमा और आवेदन की अंतिम तारीख अलग है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित भर्ती की शर्तों को ध्यान से देखना जरूरी है।

1. बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनने का मौका

बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC) ने स्पेशल ब्रांच में पुलिस सब-इंस्पेक्टर के 150 पदों पर भर्ती निकाली है। यह भर्ती गृह विभाग के पुलिस शाखा के तहत होगी। उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा के जरिए किया जाएगा।

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 9 जुलाई से शुरू हुई थी और 9 अगस्त 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। आवेदन शुल्क सभी वर्गों के लिए 100 रुपये निर्धारित किया गया है। ऐसे युवा जो पुलिस विभाग में अधिकारी के पद पर करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह महत्वपूर्ण अवसर है।

2. फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 16 पद

बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 16 पदों के लिए भी भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 16 जुलाई से 16 अगस्त 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे।

वन विभाग में अधिकारी के पद पर नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थी अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती में आवेदन करने से पहले शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और चयन प्रक्रिया से जुड़ी शर्तों को जरूर जांचना चाहिए।

3. BTSC में तकनीकी पदों पर भर्ती

बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) ने टेक्नीशियन (बेंच केमिस्ट) और असिस्टेंट बैक्टीरियोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के तहत कुल 13 पद भरे जाएंगे।

ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 24 जुलाई से चल रही है और उम्मीदवार 23 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। तकनीकी और संबंधित विषयों की योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए यह सरकारी नौकरी पाने का अच्छा अवसर हो सकता है।

4. पटना हाईकोर्ट में 68 पदों पर मौका

सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए पटना हाईकोर्ट में भी भर्ती निकली है। हाईकोर्ट ने एक्स-कैडर असिस्टेंट के 68 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं।

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 28 जुलाई से 27 अगस्त 2026 तक किया जा सकता है। उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक भर्ती नोटिफिकेशन में दी गई योग्यता, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और अन्य शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लेना चाहिए।

महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! हर महीने मिलेंगे ₹2,500, जानें कौन कर सकता है आवेदन

नई दिल्ली। दिल्ली की महिलाओं के लिए आर्थिक मदद से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक सहायता दिया जायेगा। योजना का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को नियमित आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें।

योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 1 अगस्त 2026 से हुई। शुरुआती दिनों में ही बड़ी संख्या में महिलाओं ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आवेदन किया है। ऐसे में अगर आप भी इस योजना के लिए आवेदन करना चाहती हैं, तो पहले इसकी पात्रता और जरूरी शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

आवेदन के लिए क्या है पात्रता

दिल्ली लक्ष्मी योजना में आर्थिक सहायता के लिए कुछ पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। योजना के अनुसार 21 से 60 वर्ष की उम्र वाली महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। इसके साथ परिवार की सालाना आय ₹2.5 लाख तक होना जरूरी बताया गया है।

इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ

जो महिलाएं पहले से किसी अन्य आर्थिक सहायता योजना या पेंशन का लाभ ले रही हैं, वे पात्र नहीं मानी जाएंगी। इसके अलावा इनकम टैक्स भरने वाली महिलाएं और सरकारी कर्मचारी भी योजना के दायरे से बाहर रखी गई हैं। परिवार में तीन से अधिक जीवित बच्चे होने की स्थिति में भी महिला को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

परिवार की सालाना बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा परिवार के पास कार होने या परिवार के किसी सदस्य के सरकारी नौकरी में होने जैसी स्थितियों में भी पात्रता प्रभावित हो सकती है। आपराधिक रिकॉर्ड से संबंधित शर्तें भी योजना में शामिल बताई गई हैं।

ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया क्या है?

योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले संबंधित आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा। वहां Citizen Login का विकल्प चुनकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। दिए गए विवरण में किसी तरह की गलती होने पर सत्यापन के दौरान परेशानी हो सकती है। इसलिए फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारी को ध्यान से जांच लेना चाहिए।

केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी, मेडिकल छात्रों के लिए आई खुशखबरी

नई दिल्ली। मेडिकल क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार देश में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने अगले चार वर्षों में 5,000 नई PG मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब मेडिकल क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। सरकार का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ छात्रों के लिए पोस्टग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग के अवसरों का विस्तार करना है।

देश में अभी 86,360 PG मेडिकल सीटें

केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, देशभर में फिलहाल कुल 86,360 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें उपलब्ध हैं। आने वाले वर्षों में नई सीटें जुड़ने के बाद मेडिकल छात्रों के लिए विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों में प्रवेश के अवसर और बढ़ेंगे। इससे खासतौर पर उन छात्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें MBBS के बाद PG मेडिकल कोर्स में सीट हासिल करने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

चार साल में जोड़ी जाएंगी 5 हजार सीटें

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में बताया कि सरकार ने मेडिकल शिक्षा के विस्तार से जुड़ी योजना के तीसरे चरण को मंजूरी दी है। योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 से 2028-29 के बीच 5,000 अतिरिक्त PG मेडिकल सीटें विकसित की जानी हैं। इसके लिए मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों, पोस्टग्रेजुएट संस्थानों और सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।

मेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

नई सीटें बढ़ाने के साथ सरकार मेडिकल शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है। इसके तहत राज्य और केंद्र सरकार के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों तथा संबंधित संस्थानों को अपग्रेड करने की योजना है। मेडिकल छात्रों की ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त अस्पताल सुविधाएं, क्लिनिकल केस और शिक्षण संसाधन उपलब्ध होना जरूरी है। इसलिए सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ संस्थानों की क्षमता में सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है।

प्रति सीट वित्तीय सहायता की सीमा बढ़ी

सरकार ने इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता में भी बढ़ोतरी की है। प्रति PG मेडिकल सीट के लिए लागत सीमा को बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। इससे मेडिकल कॉलेजों में नई सीटों के लिए आवश्यक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, अस्पताल सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यूपी में स्कूल बसों पर सख्ती! नए नियम लागू, बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करते हुए नियमों के पालन को सख्त कर दिया है। अब 12 साल तक की उम्र के बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहनों में परिचारक या परिचारिका की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य बच्चों को वाहन में सुरक्षित तरीके से बैठाने और उतारने की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

इसके साथ ही स्कूल बस चालकों के चरित्र सत्यापन और स्वास्थ्य परीक्षण को भी जरूरी किया गया है। परिवहन विभाग ने विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया है कि बच्चों के परिवहन में सिर्फ उन्हीं वाहनों का इस्तेमाल किया जाए, जो निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों।

स्कूल प्रबंधन की तय होगी जिम्मेदारी

स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही सामने आने पर स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा जा सकता है। परिवहन विभाग की ओर से विद्यालयों को पत्र भेजकर सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को लाने और ले जाने वाले वाहनों की स्थिति ठीक हो और चालक निर्धारित नियमों के अनुसार योग्य हो।

12 साल तक के बच्चों के साथ अटेंडेंट जरूरी

नई व्यवस्था में छोटे बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। 12 वर्ष तक के बच्चों को ले जाने वाले स्कूल वाहन में परिचारक या परिचारिका रखना जरूरी होगा। यह कर्मचारी बच्चों को वाहन में चढ़ाने, उतारने और यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा पर नजर रखने का काम करेगा। इससे छोटे बच्चों के साथ होने वाली लापरवाही की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।

ड्राइवर का होगा वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट

स्कूल वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का चरित्र सत्यापन कराना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच भी करानी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को ले जाने वाले चालक सुरक्षित ड्राइविंग के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हों तथा उनके बारे में जरूरी पृष्ठभूमि जांच पूरी हो।

बसों में हर महीने सुरक्षा उपकरणों की होगी जांच

स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज को जिम्मेदारी दी जाएगी। उसे नियमित रूप से वाहनों की स्थिति की जांच करनी होगी। हर महीने यह देखा जाएगा कि बस में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, इमरजेंसी अलार्म और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं या नहीं। अगर कोई उपकरण खराब है या उपलब्ध नहीं है तो उसे तत्काल ठीक या उपलब्ध कराना होगा।

फिटनेस खत्म तो बच्चों को नहीं ले जा सकेंगे स्कूल

स्कूल बसों के जरूरी दस्तावेजों की वैधता पर भी विशेष नजर रखनी होगी। वाहन की फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य अनिवार्य कागजात वैध होना जरूरी होगा। यदि किसी वाहन की फिटनेस अवधि समाप्त हो गई है या उसके जरूरी दस्तावेज वैध नहीं हैं, तो उसे बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

बिहार सरकार का बड़ा कदम, नागरिकों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के कई इलाकों में जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने और लोगों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कभी वन्यजीव लोगों पर हमला कर देते हैं, तो कई बार किसानों के पालतू पशु शिकार बन जाते हैं। हाथी जैसे बड़े वन्यजीवों के कारण घर और फसलों को नुकसान पहुंचने की समस्या भी सामने आती है।

ऐसी घटनाओं से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए बिहार सरकार ने मुआवजे की व्यवस्था को स्पष्ट किया है। वन विभाग के प्रावधानों के तहत मानव क्षति, पालतू पशुओं के नुकसान, मकान और फसल को हुई क्षति के लिए निर्धारित सहायता राशि देने का प्रावधान है।

पहली खुशखबरी: जान जाने पर 10 लाख तक सहायता

वन्यजीव के हमले में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने या स्थायी रूप से दिव्यांग होने की स्थिति में 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 1.44 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायल होने पर 24 हजार रुपये की सहायता दी जा सकती है। इस व्यवस्था में बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू, गौर, जंगली सूअर, लकड़बग्घा, सियार, भेड़िया, गैंडा, जंगली कुत्ता, मगरमच्छ और घड़ियाल समेत निर्धारित वन्यजीवों से होने वाली शारीरिक क्षति को शामिल किया गया है।

दूसरी खुशखबरी: पालतू पशु के मारे जाने पर भी मुआवजा

जंगली जानवरों के हमले में केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि किसानों के पालतू पशुओं को भी नुकसान पहुंचता है। इसे देखते हुए पशुधन के नुकसान पर भी निर्धारित आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। प्रावधान के अनुसार, भैंस, गाय या बैल की मृत्यु पर 24 हजार रुपये की सहायता दी जा सकती है। वहीं भेड़ या बकरी के मामले में निर्धारित सहायता राशि अलग है।

तीसरी खुशखबरी: मकान टूटने और फसल बर्बाद होने पर भी मदद

हाथी, गौर और गैंडा जैसे बड़े वन्यजीव कई बार ग्रामीण इलाकों में घरों को नुकसान पहुंचा देते हैं। ऐसे मामलों में भी सरकार की ओर से अलग-अलग श्रेणी के अनुसार सहायता राशि का प्रावधान है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए 96 हजार रुपये तक की सहायता निर्धारित है। वहीं मिट्टी की दीवार और खपड़ा या कोरुगेटेड शीट की छत वाले पूरी तरह नष्ट मकान के लिए 48 हजार रुपये तक की मदद का प्रावधान है। पक्के मकान के गंभीर नुकसान पर 48 हजार रुपये, कच्चे मकान के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने पर 24 हजार रुपये और सामान्य क्षति पर 12 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है।

चौथी खुशखबरी: फसलों के नुकसान पर भी मिलेगी आर्थिक सहायता

जंगली जानवरों द्वारा खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की स्थिति में किसानों के लिए भी राहत का प्रावधान किया गया है। हाथी, घोड़ापड़ास और जंगली सूअर द्वारा फसल को नुकसान पहुंचाए जाने पर 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान है। इससे वन्यजीवों के कारण फसल बर्बाद होने वाले किसानों को आर्थिक नुकसान की भरपाई में मदद मिल सकती है।

बिहार पंचायत चुनाव को लेकर अपडेट, ग्रामीणों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में 2026 के पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज होने के साथ ही गांवों की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव से पहले पंचायतों का परिसीमन कराया जाएगा और इसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायत चुनाव की आगे की कार्रवाई बढ़ेगी।

इसका मतलब साफ है कि चुनाव से पहले कई पंचायतों की सीमाएं बदल सकती हैं। कुछ नए पंचायत क्षेत्र अस्तित्व में आ सकते हैं, जबकि कुछ पंचायतों का क्षेत्र घट या बढ़ सकता है। इसका सीधा असर मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनावी समीकरणों पर पड़ने की संभावना है।

करीब 7 हजार की आबादी का फॉर्मूला चर्चा में

परिसीमन को लेकर करीब 7 हजार की आबादी के आसपास एक पंचायत बनाने का फॉर्मूला चर्चा में है। हालांकि यह आंकड़ा अंतिम रूप से किस तरह लागू होगा, इसकी पुष्टि आधिकारिक आदेश और अधिसूचना के बाद ही होगी। अगर किसी पंचायत की आबादी तय सीमा से काफी अधिक है तो उसके कुछ हिस्से को अलग करके नई पंचायत का गठन किया जा सकता है। दूसरी ओर, कम आबादी वाली पंचायतों में आसपास के क्षेत्रों को जोड़कर नया पंचायत क्षेत्र तैयार किया जा सकता है।

पंचायतों की सीमाएं बदलने से क्या होगा?

परिसीमन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संभावित बदलावों में नई ग्राम पंचायत का गठन, दो पंचायतों का विलय, पंचायत क्षेत्र का विस्तार या कमी, वार्डों की सीमा में परिवर्तन, वार्डों की संख्या में बदलाव, आरक्षित और सामान्य सीटों के स्वरूप में बदलाव शामिल हैं। इसके साथ ही मतदाता सूची और मतदान केंद्रों में भी बदलाव की स्थिति बन सकती है।

पुराने उम्मीदवारों का बदल सकता है चुनावी क्षेत्र

परिसीमन का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से किसी खास पंचायत या वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यदि किसी पंचायत का क्षेत्र बदल गया या उसका कुछ हिस्सा दूसरी पंचायत में शामिल हो गया तो उम्मीदवारों को अपना चुनावी क्षेत्र बदलना पड़ सकता है। वहीं आरक्षण की नई व्यवस्था आने के बाद कई दावेदारों की चुनावी तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।

आरक्षण का नया रोस्टर बदलेगा समीकरण

परिसीमन के बाद आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। पिछले चुनाव में जिस पंचायत या सीट पर कोई विशेष वर्ग आरक्षित था, जरूरी नहीं कि अगली बार भी वही स्थिति बनी रहे। नई व्यवस्था में सीटें अनुसूचित जाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, महिलाओं या अन्य वर्गों के लिए अलग-अलग तरीके से आरक्षित हो सकती हैं। ऐसे में पिछले चुनाव के आधार पर अपनी उम्मीदवारी तय करने वाले लोगों को नई सूची आने के बाद रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

जून-जुलाई के आसपास चुनाव की संभावना

पंचायत चुनाव की अंतिम तारीख आधिकारिक तौर पर घोषित होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। मौजूदा प्रक्रिया के मुताबिक पहले परिसीमन पूरा होगा। इसके बाद पिछड़े वर्गों के आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और रिपोर्ट का चरण आएगा। परिसीमन में करीब 6 से 7 महीने और आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया में लगभग 2 से 3 महीने लगने का अनुमान बताया जा रहा है। ऐसे में पंचायत चुनाव जून-जुलाई के आसपास होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अंतिम कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।

10 से 20 अगस्त तक शुभ योग: 4 राशियों के लिए खुशखबरी, हर काम में लाभ

राशिफल। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 10 से 20 अगस्त 2026 के बीच ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कुछ राशियों के लिए अनुकूल रह सकती है। इस अवधि में बनने वाले शुभ संयोग का असर करियर, कारोबार, धन और पारिवारिक जीवन पर देखने को मिल सकता है। जिन लोगों के काम लंबे समय से अटके हुए हैं, उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।

इस दौरान कुछ राशि के जातकों को नौकरी में नई जिम्मेदारी, कारोबार में लाभ और आर्थिक मामलों में राहत मिलने के संकेत माने जा रहे हैं। आइए जानते हैं वे 4 राशियां, जिनके लिए 10 से 20 अगस्त का समय खास रह सकता है।

मेष राशि:

मेष राशि के जातकों के लिए यह अवधि आत्मविश्वास बढ़ाने वाली रह सकती है। पिछले कुछ समय से किसी काम को पूरा करने में परेशानी आ रही थी तो उसमें अब गति आने की संभावना है। नौकरी करने वालों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिल सकती है। अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर होंगे और आपकी मेहनत को पहचान मिल सकती है। प्रमोशन या करियर में आगे बढ़ने से जुड़े अवसर भी सामने आ सकते हैं।

मिथुन राशि:

मिथुन राशि वालों के लिए 10 से 20 अगस्त के बीच आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं। आय के नए स्रोत सामने आ सकते हैं और पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अच्छा रह सकता है। कार्यस्थल पर आपकी बात को महत्व मिलेगा और किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिल सकती है।

तुला राशि:

तुला राशि के जातकों के लिए यह अवधि करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। वहीं पहले से नौकरी कर रहे लोगों को नई जिम्मेदारी या पद में बदलाव का अवसर मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और आमदनी तथा खर्च के बीच बेहतर संतुलन बनाने में सफलता मिलेगी। परिवार के किसी सदस्य के साथ लंबे समय से चल रही गलतफहमी भी दूर हो सकती है।

धनु राशि:

धनु राशि के जातकों के लिए 10 से 20 अगस्त के बीच भाग्य का साथ मिलने की संभावना मानी जा रही है। शिक्षा, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े लोगों के लिए समय सकारात्मक रह सकता है। जो युवा नई नौकरी या बेहतर अवसर की तलाश में हैं, उन्हें अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। दूर स्थान से कोई महत्वपूर्ण अवसर या समाचार प्राप्त हो सकता है।

8वें वेतन आयोग से बड़ी मांग! रिटायरमेंट की उम्र 65 साल करने की उठी आवाज

नई दिल्ली। केंद्रीय सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी सेवा शर्तों और रिटायरमेंट से जुड़े कई अहम प्रस्ताव रखे हैं। शिक्षकों की मांग है कि वेतन और भत्तों में सुधार के साथ-साथ पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं, प्रमोशन और छुट्टियों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया जाए। इनमें सबसे प्रमुख मांग रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 साल करने की है।

शिक्षकों का कहना है कि अनुभवी शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ शिक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक मिल सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी मांगें फिलहाल आयोग के सामने रखी गई हैं। 65 साल की रिटायरमेंट उम्र को लेकर अभी कोई सरकारी फैसला नहीं हुआ है।

पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग

केंद्रीय सरकारी शिक्षकों के संगठन ने पेंशन व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात आयोग के सामने रखी है। मांग की गई है कि NPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) में जाने का विकल्प दिया जाए। शिक्षकों का तर्क है कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

60 की जगह 65 साल हो रिटायरमेंट उम्र

शिक्षकों की मांगों में सबसे ज्यादा चर्चा सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने को लेकर है। संगठन की ओर से प्रस्ताव रखा गया है कि केंद्रीय सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 60 साल से बढ़ाकर 65 साल की जाए। अगर भविष्य में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो शिक्षकों को पांच साल अतिरिक्त सेवा का अवसर मिल सकता है। 

प्रमोशन के नियमों में बदलाव की मांग

शिक्षकों ने करियर में आगे बढ़ने के अवसरों को लेकर भी अपनी मांग रखी है। खासतौर पर प्रिंसिपल पद पर प्रमोशन में 50 फीसदी कोटा निर्धारित करने की मांग सामने आई है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। प्रमोशन की प्रक्रिया में सुधार होने से शिक्षकों को बेहतर करियर प्रोग्रेशन मिल सकता है।

पुरुष शिक्षकों के लिए CCL की मांग

छुट्टियों से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग भी शिक्षकों ने की है। इसमें पुरुष शिक्षकों को चाइल्ड केयर लीव (CCL) की सुविधा देने का मुद्दा शामिल है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी केवल महिला कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसलिए पुरुष शिक्षकों को भी निर्धारित परिस्थितियों में ऐसी छुट्टी की सुविधा मिलनी चाहिए।

अभी नहीं हुआ है कोई अंतिम फैसला

शिक्षकों की ओर से 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई मांगों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से कोई भी प्रस्ताव अभी लागू नहीं हुआ है। आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों की मांगों और सुझावों पर विचार करेगा। इसके बाद अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा। सरकार द्वारा सिफारिशों पर निर्णय लिए जाने के बाद ही रिटायरमेंट आयु, पेंशन, प्रमोशन और छुट्टियों जैसे मुद्दों पर अंतिम तस्वीर सामने आएगी।

केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल! 2.57 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ेगी बेसिक पे?

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है, क्योंकि इसी के आधार पर नए वेतन ढांचे में कर्मचारियों की बेसिक पे तय होने की संभावना है। फिलहाल 2.57 फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं।

BankBazaar के अनुमान के अनुसार, अगर 8वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो कुछ स्तरों पर कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी मौजूदा वेतन की तुलना में करीब 68 फीसदी तक बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी सरकार द्वारा तय फिटमेंट फैक्टर और नए वेतन ढांचे पर निर्भर करेगी।

नए वेतन आयोग में क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसका इस्तेमाल नए वेतन आयोग में मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करने के लिए किया जाता है। आसान भाषा में समझें तो मौजूदा बेसिक सैलरी को प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके नई बेसिक पे का अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि, नई बेसिक पे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कुल ग्रॉस सैलरी भी उसी अनुपात में बढ़ेगी। महंगाई भत्ता, HRA और दूसरे भत्तों की गणना नए नियमों के आधार पर होगी।

2.57 फिटमेंट फैक्टर पर Level 8 की सैलरी

मान लीजिए किसी Level 8 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे ₹47,600 है। दिए गए अनुमान में उसकी मौजूदा ग्रॉस सैलरी करीब ₹90,440 मानी गई है। अगर 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो अनुमानित नई बेसिक पे इस तरह निकलेगी: ₹47,600 × 2.57 = ₹1,22,332

इसके आधार पर अनुमानित ग्रॉस सैलरी करीब ₹1,51,692 तक पहुंच सकती है। यानी मौजूदा अनुमानित ग्रॉस सैलरी के मुकाबले करीब 68 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक अनुमानित गणना है। वास्तविक वेतन में बदलाव सरकार द्वारा तय नियमों के बाद ही पता चलेगा।

2.0 और 2.38 फैक्टर पर कितना फायदा?

अगर फिटमेंट फैक्टर 2.0 माना जाए तो Level 8 कर्मचारी की बेसिक पे करीब ₹95,200 हो सकती है। अनुमानित ग्रॉस सैलरी करीब ₹1,18,048 रहने का अनुमान है। वहीं, 2.38 फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक पे लगभग ₹1,13,288 हो सकती है और अनुमानित ग्रॉस सैलरी करीब ₹1,40,477 तक पहुंच सकती है। इस अनुमान के मुताबिक ग्रॉस सैलरी में करीब 31 फीसदी से 55 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है।

अभी इंतजार करना होगा फैसले का

यह आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं। 8वें वेतन आयोग की सिफारिश, केंद्र सरकार की मंजूरी और नए वेतन ढांचे के बाद ही कर्मचारियों की वास्तविक सैलरी तय होगी। इसलिए फिलहाल 2.57 फिटमेंट फैक्टर को संभावित गणना के तौर पर ही देखना सही होगा।

40 की उम्र के बाद कमजोरी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये 5 ड्राई फ्रूट्स

हेल्थ डेस्क। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ऊर्जा, मांसपेशियों की ताकत और पोषण संबंधी जरूरतों में बदलाव आने लगता है। खासकर 40 की उम्र के बाद पुरुषों के लिए संतुलित डाइट लेना और भी जरूरी हो जाता है। रोजमर्रा की भागदौड़, काम का तनाव और अनियमित खान-पान के बीच शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में डाइट में पौष्टिक चीजों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

बादाम:

बादाम को पोषक तत्वों से भरपूर ड्राई फ्रूट माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम और विटामिन ई जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। 40 के बाद इसे डाइट में शामिल करने से रोजाना के पोषण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। बादाम को भिगोकर या सामान्य रूप से खाया जा सकता है।

अखरोट:

अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक पौध-आधारित रूप, अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA), पाया जाता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं। 40 के बाद संतुलित आहार के हिस्से के रूप में अखरोट को शामिल किया जा सकता है। इसे नाश्ते में या सलाद और ओट्स के साथ लिया जा सकता है।

किशमिश:

किशमिश सूखे अंगूर होते हैं और इनमें प्राकृतिक शर्करा के साथ फाइबर तथा कुछ खनिज पाए जाते हैं। यह तुरंत ऊर्जा देने वाले स्नैक के रूप में उपयोगी हो सकती है। हालांकि किशमिश में प्राकृतिक शुगर और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना बेहतर है।

चिलगोजा:

चिलगोजा यानी पाइन नट्स में असंतृप्त वसा, प्रोटीन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर को ऊर्जा देने वाली संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकता है। चिलगोजा महंगा ड्राई फ्रूट है, लेकिन इसे कम मात्रा में भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसे सीधे खाने के अलावा सलाद या दूसरे हेल्दी स्नैक्स में भी मिलाया जा सकता है।

खजूर:

खजूर में प्राकृतिक शर्करा, फाइबर और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी प्राकृतिक मिठास इसे मीठे स्नैक्स के बेहतर विकल्पों में शामिल कर सकती है। वर्कआउट या ज्यादा शारीरिक गतिविधि वाले लोगों के लिए खजूर ऊर्जा देने वाले स्नैक के रूप में उपयोगी हो सकता है। हालांकि इसमें शुगर और कैलोरी अधिक होती है, इसलिए सीमित मात्रा में सेवन करना बेहतर है।

महिलाओं में सबसे ज्यादा होती है इन 3 चीजों की कमी! शरीर देता है ये 5 बड़े संकेत, आज ही संभल जाएं

हेल्थ डेस्क। महिलाओं की सेहत में खान-पान की भूमिका बेहद अहम होती है। घर और काम की जिम्मेदारियों के बीच कई बार महिलाएं अपनी डाइट पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पातीं। इसका असर शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी के रूप में दिखाई दे सकता है। खासकर आयरन, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी महिलाओं में आम समस्या हो सकती है।

1. आयरन की कमी

महिलाओं में आयरन की जरूरत महत्वपूर्ण होती है, खासकर मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्तस्राव के कारण। शरीर में आयरन की कमी होने पर हीमोग्लोबिन कम हो सकता है और एनीमिया की समस्या हो सकती है।

डाइट में क्या शामिल करें: पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, राजमा, तिल और आयरन से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थों के साथ आयरन युक्त भोजन लेने से आयरन के अवशोषण में मदद मिल सकती है।

2. कैल्शियम की कमी

कैल्शियम हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी मिनरल है। उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में हड्डियों की मजबूती बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। डाइट में लंबे समय तक कैल्शियम की कमी रहने पर हड्डियों की सेहत प्रभावित हो सकती है।

डाइट में क्या शामिल करें: दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और कैल्शियम युक्त अन्य खाद्य पदार्थों को डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

3. विटामिन डी की कमी

विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के इस्तेमाल और हड्डियों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। धूप में पर्याप्त समय न बिताने और डाइट में इसकी कमी के कारण कुछ लोगों में विटामिन डी का स्तर कम हो सकता है। विटामिन डी की कमी की पुष्टि ब्लड टेस्ट से की जाती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं।

शरीर देता है ये 5 संकेत

अगर शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो रही हो तो कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

1. लगातार थकान और कमजोरी: पर्याप्त नींद के बावजूद हर समय थका हुआ महसूस होना आयरन की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।

2. चक्कर या सांस फूलना: खासकर एनीमिया की स्थिति में थोड़ी मेहनत के बाद भी सांस फूलने या चक्कर आने की शिकायत हो सकती है।

3. बाल और नाखून कमजोर होना: पोषण की कमी का असर बालों और नाखूनों की स्थिति पर भी पड़ सकता है।

4. हड्डियों या मांसपेशियों में परेशानी: कैल्शियम और विटामिन डी की कमी होने पर हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

5. बार-बार सुस्ती महसूस होना: लगातार ऊर्जा की कमी और काम करने में मन न लगना भी पोषण की कमी का संकेत हो सकता है, हालांकि इसके पीछे तनाव, नींद की कमी या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

कल सोमवार को बनेगा शिव योग! 4 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन-समृद्धि के खुलेंगे रास्ते

राशिफल। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन शिव योग का संयोग बनने से धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व और बढ़ जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शिव योग में किए गए शुभ कार्य, पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां विशेष फलदायी हो सकती हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव कुछ राशि वालों के जीवन में देखने को मिल सकता है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए शिव योग उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रह सकता है। लंबे समय से अटके किसी काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को भी नए संपर्कों से फायदा मिलने के योग बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना है और आय के नए स्रोत तलाशने में सफलता मिल सकती है। परिवार में भी माहौल सकारात्मक रहने की उम्मीद है।

2. कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में अनुकूल रह सकता है। अचानक किसी पुराने निवेश या रुके हुए धन से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आपके काम की सराहना हो सकती है। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। महादेव की कृपा पाने के लिए सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

3. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए शिव योग तरक्की के नए रास्ते खोल सकता है। नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि को लेकर सकारात्मक समाचार मिल सकता है। जो लोग व्यापार करते हैं, उन्हें कोई लाभदायक सौदा मिल सकता है। आर्थिक रूप से भी समय अच्छा रह सकता है। धन कमाने के साथ बचत पर ध्यान देना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। विद्यार्थियों के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है। पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ सकती है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों को अच्छे परिणाम की उम्मीद रह सकती है।

4. मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए शिव योग मेहनत का अच्छा परिणाम लेकर आ सकता है। पिछले कुछ समय से चल रही परेशानियों में कमी आने के संकेत हैं। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन इसके साथ आपकी प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना है। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए लाभकारी साबित हो सकती है। परिवार के साथ धार्मिक यात्रा या किसी शुभ कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर भी मिल सकता है।

बिहार में बनेगा नया बाइपास रोड, 3 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में यातायात को सुगम बनाने के लिए नए बाइपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इससे खास तौर पर अरवल, जमुई और पश्चिम चंपारण जिले के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। बाइपास बनने के बाद शहरों और कस्बों से गुजरने वाले भारी वाहनों का दबाव कम होगा और लोगों को आने-जाने में कम समय लग सकता है।

अरवल में 12 किलोमीटर का फोरलेन बाइपास

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अरवल जिले में एनएच-139 पर नौबतपुर-हरिहरगंज के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाइपास के निर्माण को मंजूरी दी है। इस सड़क के तैयार होने से स्थानीय और लंबी दूरी के वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। बाइपास का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मुख्य आबादी वाले इलाकों में वाहनों की आवाजाही का दबाव कम किया जा सकेगा। इससे जाम की समस्या घटने और यात्रा को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

जमुई के झाझा में भी बाइपास को मंजूरी

जमुई जिले के झाझा क्षेत्र के लिए भी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। यहां मांगोबंदर, केंदुआ, टोलसोना और नरगंजो जैसे इलाकों में बाइपास निर्माण की योजना है। इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। खासकर बाजार और आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिलने पर स्थानीय यातायात व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

पश्चिम चंपारण के भैरोगंज को भी राहत

पश्चिम चंपारण जिले के भैरोगंज में भी बाइपास निर्माण को हरी झंडी मिली है। यह परियोजना क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर करने के साथ-साथ वाहनों के आवागमन को व्यवस्थित करने में मददगार हो सकती है। भारी वाहनों को आबादी वाले रास्तों से अलग मार्ग मिलने पर स्थानीय लोगों को जाम और यातायात से जुड़ी परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।

लोगों को क्या होगा फायदा?

नए बाइपास बनने से केवल वाहनों की आवाजाही आसान नहीं होगी, बल्कि इसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने की संभावना है। इसके अलावा लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों को शहर या बाजार के अंदर जाने की जरूरत कम होगी। इससे समय और ईंधन की बचत भी हो सकती है।

LPG ग्राहकों के लिए खुशखबरी, केंद्र सरकार ने दी अहम जानकारी

नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की सप्लाई को लेकर केंद्र सरकार ने अहम जानकारी साझा की है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में लगातार हो रहे बदलावों के बीच भारत ने LPG की आपूर्ति के लिए अपने स्रोतों में बदलाव किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, इस समय अमेरिका भारत को LPG उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश बन गया है।

मंत्री के बयान के अनुसार, कुछ समय पहले तक भारत की LPG जरूरतों में अमेरिका की हिस्सेदारी काफी सीमित थी। बाद में ऊर्जा आयात के स्रोतों को व्यापक बनाने की रणनीति के तहत अमेरिका से खरीद बढ़ाने की योजना बनाई गई। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव के साथ अमेरिकी LPG की हिस्सेदारी और बढ़ गई।

पहले अमेरिका से कम होती थी LPG की खरीद

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर रहा है। LPG के मामले में भी अलग-अलग देशों से आपूर्ति की जाती रही है। सरकार की नीति रही है कि किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न हो और ऊर्जा के कई स्रोत बनाए जाएं। इसी रणनीति के तहत अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया गया। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, शुरुआत में इस फैसले को लेकर कई सवाल भी उठाए गए थे।

बदला ऊर्जा आयात का समीकरण

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, साल की शुरुआत में अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया था। उस समय क्षेत्रीय तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मौजूदा स्तर का संकट नहीं था। इसके बाद फरवरी में युद्ध की स्थिति पैदा हुई और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर देखने को मिला। ऐसे समय में अमेरिका से बढ़ी LPG आपूर्ति भारत के लिए एक वैकल्पिक स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण साबित हुई।

कई देशों से ऊर्जा खरीद रहा भारत

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा खरीद को एक ही देश तक सीमित रखने के बजाय कई स्रोतों में बांटने की कोशिश की है। खाड़ी क्षेत्र के देशों के अलावा रूस से भी भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन और गैस की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है।

ऊर्जा भंडार भी मजबूत रखने पर जोर

भारत दुनिया के प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान पर्याप्त भंडार होना बेहद जरूरी माना जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में भारत के पास करीब 75 दिनों के आसपास का पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है। यह भंडार वैश्विक सप्लाई में अचानक आने वाली बाधा के दौरान देश को कुछ समय तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

कमल की तरह खिलेंगे भाग्य! इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन की होगी बरसात

राशिफल। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सावन में ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलाव का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। कुछ राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ माना जा सकता है। इस दौरान कुछ जातकों को करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं, तो कुछ के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के योग बन सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए सावन का समय उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रह सकता है। लंबे समय से अटके किसी काम में गति आने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जिसका भविष्य में लाभ मिलेगा। आर्थिक मामलों में भी समय अनुकूल रह सकता है। आय के अतिरिक्त साधन मिलने के संकेत हैं।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए सावन आर्थिक दृष्टि से लाभदायक रह सकता है। आय में वृद्धि के नए रास्ते खुल सकते हैं और पुराना अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अच्छी खबर मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और क्षमता की तारीफ होगी। परिवार में भी सुख-शांति का माहौल बना रह सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए सावन का समय करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। कामकाज में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं और अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। जो लोग कारोबार करते हैं, उनके लिए नए सौदे या साझेदारी के अवसर सामने आ सकते हैं। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होने के संकेत हैं। परिवार के किसी सदस्य से जुड़ी अच्छी खबर भी मिल सकती है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए सावन में धन और सफलता के नए अवसर बन सकते हैं। लंबे समय से किसी योजना पर काम कर रहे हैं तो उसमें सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापारियों के लिए नए ग्राहक और नए सौदे लाभ का कारण बन सकते हैं। सामाजिक स्तर पर भी मान-सम्मान बढ़ सकता है।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए सावन का समय भाग्य का साथ देने वाला साबित हो सकता है। मेहनत के अनुरूप परिणाम मिलने की संभावना है। नौकरी और कारोबार दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। आय में बढ़ोतरी के साथ बचत पर भी ध्यान देने का अवसर मिलेगा। विदेश या दूर स्थान से जुड़े किसी काम में सफलता मिल सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी समय सकारात्मक रह सकता है।

G20 में भारत का दबदबा! चीन-अमेरिका भी पीछे, दुनिया हैरान

नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय अर्थव्यवस्था ने न सिर्फ अपना आकार बढ़ाया है, बल्कि G20 की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच विकास की रफ्तार के मामले में भी मजबूत प्रदर्शन किया है। 

IMF, वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक और वर्ल्ड बैंक से जुड़े आंकड़ों के आधार पर की गई तुलना में 2014 से 2026 के बीच भारत G20 की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वाला देश रहा है। इन आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में भारत की डॉलर के आधार पर औसत सालाना आर्थिक वृद्धि करीब 6.1 फीसदी रही। इस सूची में चीन लगभग 5.9 फीसदी के साथ दूसरे और अमेरिका 5.3 फीसदी की औसत वृद्धि के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

चीन और अमेरिका से आगे निकली भारत की ग्रोथ

G20 की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति इस अवधि में काफी मजबूत हुई है। 2014 से 2026 के बीच औसत डॉलर ग्रोथ के मामले में भारत शीर्ष पर रहा। भारत के बाद चीन और अमेरिका का स्थान रहा। इसके अलावा सऊदी अरब, तुर्किये, इंडोनेशिया, मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और कनाडा जैसे देश भी इस तुलना में शामिल हैं। यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस अवधि में वैश्विक अर्थव्यवस्था कई बड़े झटकों से गुजरी।

4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंची अर्थव्यवस्था

भारत की आर्थिक ताकत बढ़ने का अंदाजा उसके कुल GDP के आकार से भी लगाया जा सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2026 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार दोगुने से भी अधिक हुआ है और अब यह करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच रही है।

अर्थव्यवस्था के आकार में इस विस्तार से वैश्विक बाजार में भारत का महत्व बढ़ा है। बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण निवेश, व्यापार और वैश्विक आर्थिक नीतियों से जुड़े फैसलों में भारत की भूमिका भी पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हुई है।

ग्लोबल इकॉनमी में मजबूत हुई भारत की भूमिका

तमाम आर्थिक चुनौतियों के बीच 2014 से 2026 के दौरान G20 की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत का प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। आर्थिक आकार बढ़ने, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।

हालांकि आने वाले वर्षों में इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए रोजगार, उत्पादकता, निर्यात, निजी निवेश और महंगाई जैसे क्षेत्रों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होगा। फिर भी मौजूदा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में पहले के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावशाली स्थिति में पहुंच चुका है।

बिहार में शिक्षकों के लिए खुशखबरी, अब घर बैठे मिलेगी छुट्टी

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। छुट्टी के आवेदन को लेकर अब उन्हें बार-बार कार्यालय जाने या संबंधित अधिकारी से संपर्क करने की जरूरत कम हो सकती है। शिक्षा विभाग शिक्षकों के अवकाश से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की तैयारी कर रहा है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षक अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर से घर बैठे छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन कहां पहुंचा, उस पर क्या कार्रवाई हुई और छुट्टी स्वीकृत हुई या नहीं, इसकी जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना है।

आवेदन से लेकर मंजूरी तक डिजिटल प्रक्रिया

प्रस्तावित व्यवस्था में छुट्टी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी जाएगी। शिक्षक संबंधित पोर्टल पर लॉगिन करके अपनी छुट्टी का आवेदन जमा करेंगे। आवेदन इसके बाद संबंधित नियंत्रण अधिकारी तक डिजिटल माध्यम से पहुंचेगा। अधिकारी को निर्धारित समय के भीतर आवेदन पर निर्णय लेना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य छुट्टी से जुड़े काम में लगने वाले समय को कम करना और आवेदन की स्थिति को पारदर्शी बनाना है।

हर जिले के लिए तैयार होगा अलग पोर्टल

शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार, शिक्षकों के अवकाश आवेदन के लिए जिले के आधार पर पोर्टल तैयार किए जाएंगे। इन पोर्टल की निगरानी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के स्तर से की जाएगी। शिक्षक अपने नियंत्रण अधिकारी के आधार पर पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया में मोबाइल नंबर दर्ज करना जरूरी होगा, ताकि आवेदन जमा होने और उस पर निर्णय होने की जानकारी सीधे शिक्षक तक पहुंच सके।

आवेदन के 24 घंटे में मिलेगा निर्णय

नई व्यवस्था में आवेदन को अनिश्चित समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कम करने के लिए समय सीमा निर्धारित करने की तैयारी है। ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को 24 घंटे के भीतर फैसला लेने का प्रावधान प्रस्तावित है। छुट्टी स्वीकृत हुई या आवेदन अस्वीकार किया गया, इसकी जानकारी भी शिक्षक को मोबाइल के माध्यम से भेजी जाएगी। इससे आवेदन का अपडेट लेने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

छुट्टियों का पूरा हिसाब पोर्टल पर रहेगा

डिजिटल सिस्टम में केवल नया आवेदन ही नहीं, बल्कि शिक्षक के अवकाश का रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने की योजना है। शिक्षक पहले कितने दिन की छुट्टी ले चुके हैं और उनके खाते में कितने दिन का अवकाश बचा है, इसकी जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे।

मेडिकल लीव समेत अलग-अलग प्रकार के अवकाश का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप से दर्ज किया जा सकता है। आवेदन करते समय शिक्षक को यह बताना होगा कि वह किस श्रेणी की छुट्टी लेना चाहता है। इसके बाद उपलब्ध अवकाश और लागू नियमों के आधार पर आवेदन पर निर्णय होगा।

यूपी में सरकारी नौकरी का मौका, युवाओं के लिए बंपर खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने वर्ष 2026 के लिए अलग-अलग विभागों में कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस अभियान के तहत कुल 47 रिक्त पदों को भरा जाएगा।

इन पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। योग्य उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट के माध्यम से निर्धारित अवधि में अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 3 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 3 सितंबर 2026 तक फॉर्म भर सकेंगे।

किन पदों पर होगी नियुक्ति?

UPPSC की ओर से जारी विज्ञापन संख्या A-2/E-1/2026 और A-3/E-1/2026 के तहत अलग-अलग विभागों में नियुक्तियां की जानी हैं। भर्ती में तकनीकी, कंप्यूटर और प्रबंधन से जुड़े पदों को शामिल किया गया है। वैकेंसी में Architectural Assistant, Estate Manager, Microbiologist, Manager (System), Senior Programmer, Programmer Grade-2 और Computer Operator Grade-B जैसे पद शामिल हैं।

कुल 47 पदों के लिए आवेदन

इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 47 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। हालांकि, हर पद के लिए शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता अलग निर्धारित की गई है। इसलिए अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले संबंधित पद की योग्यता और आवश्यक शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी होगा।

3 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

UPPSC की इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 3 अगस्त 2026 से हुई है। इच्छुक उम्मीदवारों के पास आवेदन जमा करने के लिए 3 सितंबर 2026 तक का समय है। आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी विवरण सावधानीपूर्वक भरने होंगे। फॉर्म जमा करने से पहले दर्ज की गई जानकारी को अच्छी तरह जांच लेना भी जरूरी है।

यूपी में बनेगा नई 4-लेन सड़क, इन जिलों के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी

न्यूज डेस्क। पूर्वांचल में सड़क कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) देवरिया बाईपास को कुशीनगर फोरलेन से सीधे जोड़ने की तैयारी कर रहा है। सिक्टौर के आसपास इस कनेक्शन को विकसित करने के लिए डिजाइन तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नई सड़क कड़ी तैयार होने के बाद गोरखपुर शहर से लखनऊ की ओर जाने वाले वाहन चालकों को नौसढ़ और ट्रांसपोर्टनगर के व्यस्त रास्तों से होकर गुजरने की मजबूरी कम हो सकती है। इससे यात्रा का समय बचने के साथ इन प्रमुख इलाकों में वाहनों का दबाव भी घटने की उम्मीद है।

देवरिया बाईपास से जुड़ेगा कुशीनगर फोरलेन

फिलहाल कालेसर जीरो प्वाइंट से कुशीनगर की ओर जाने के लिए फोरलेन सड़क उपलब्ध है। यह मार्ग रामनगर कड़जहां होते हुए देवरिया बाईपास के सिक्टौर क्षेत्र तक पहुंचता है। NHAI अब इसी नेटवर्क को इस तरह जोड़ने की योजना बना रहा है कि देवरिया बाईपास और कुशीनगर फोरलेन के बीच वाहनों की आवाजाही अधिक सीधी हो सके। इसके लिए तकनीकी डिजाइन तैयार की जाएगी और उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

लिंक एक्सप्रेसवे तक पहुंचना होगा आसान

देवरिया बाईपास और कुशीनगर फोरलेन का कनेक्शन तैयार होने का एक बड़ा फायदा लिंक एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में हो सकता है। गोरखपुर से लखनऊ या दक्षिणांचल की तरफ जाने वाले वाहन चालकों के लिए लिंक एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण मार्ग है।

कुशीनगर से गोरखपुर आने वालों को भी फायदा

इस परियोजना का लाभ सिर्फ लखनऊ की ओर जाने वाले वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। कुशीनगर की तरफ से गोरखपुर आने वाले वाहन भी शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से बचते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। फिलहाल कूड़ाघाट और मोहद्दीपुर जैसे व्यस्त इलाकों से होकर गुजरने पर यातायात का सामना करना पड़ता है। देवरिया बाईपास से बेहतर कनेक्शन मिलने के बाद इन इलाकों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है।

बिहार में बनेगा नया बाइपास, इन जिलों के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी; सफर होगा आसान

पटना। बिहार में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नए बाइपास तैयार करने की योजना पर काम तेज हो गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहरों और कस्बों के बीच यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे लोगों को जाम से राहत मिलने के साथ लंबी दूरी की यात्रा भी पहले के मुकाबले आसान हो सकती है।

अरवल में फोरलेन बाइपास को मंजूरी

केंद्र सरकार की ओर से अरवल जिले के लिए महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को स्वीकृति मिली है। एनएच-139 पर नौबतपुर-हरिहरगंज मार्ग के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबा फोरलेन बाइपास बनाया जाएगा। इस सड़क के तैयार होने के बाद मुख्य शहर से गुजरने वाले यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

जमुई और पश्चिम चंपारण में परियोजनाएं

जमुई जिले के झाझा क्षेत्र में भी बाइपास निर्माण की योजना को मंजूरी मिली है। इसके तहत मांगोबंदर, केंदुआ, टोलसोना और नरगंजो जैसे क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिम चंपारण के भैरोगंज में भी बाइपास बनाने की स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं का मकसद शहर और बाजार क्षेत्र से भारी यातायात को बाहर निकालना और स्थानीय सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाना है।

कई जगहों पर पहले से चल रहा निर्माण

बिहार में कुछ बाइपास परियोजनाएं पहले ही निर्माण के चरण में हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी ऐसी योजनाओं में छपरा-रिविलगंज, आरा, बक्सर-चौसा और शेखपुरा के बाइपास शामिल हैं। इसके अलावा जमुई, खैरा, कटोरिया, बांका, पंजवारा और लखपुरा में भी बाइपास परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। वहीं रानीगंज, औरंगाबाद-दाउदनगर, पूर्णिया और मधुबनी-बेनीपट्टी-उच्चैठ क्षेत्र भी इस सूची में शामिल हैं।

नाबार्ड की मदद से भी बनेंगे कई बाइपास

बिहार पथ निर्माण विभाग ने ग्रामीण और प्रमुख सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए नाबार्ड के साथ वित्तीय सहयोग से जुड़ा समझौता किया है। इस व्यवस्था के तहत मिलने वाली ऋण राशि का इस्तेमाल विभिन्न सड़क परियोजनाओं के साथ कई बाइपास बनाने में किया जाना प्रस्तावित है।

केंद्र सरकार की नौकरी करने का मौका, युवाओं के लिए बंपर खुशखबरी

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भर्ती का नया अवसर जारी किया है। आयोग ने अलग-अलग केंद्रीय सरकारी विभागों और लद्दाख प्रशासन के लिए विभिन्न पदों पर नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 34 रिक्त पदों को भरा जाएगा।

इच्छुक और योग्य उम्मीदवार UPSC की आधिकारिक ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 8 अगस्त 2026 से शुरू हो रही है। अधिकांश पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 28 अगस्त 2026 तय की गई है, जबकि लद्दाख प्रशासन से संबंधित पदों के लिए उम्मीदवारों को कुछ अतिरिक्त समय दिया गया है।

किन पदों पर होगी भर्ती?

UPSC की ओर से जारी विज्ञापन संख्या 10/2026 के तहत अलग-अलग विभागों में कुल सात प्रकार के पदों पर भर्ती की जा रही है। इनमें तकनीकी, प्रशासनिक और अनुसंधान से जुड़े पद शामिल हैं। भर्ती में Assistant Executive Engineer (Civil), Assistant Executive Engineer (Electronics), Assistant Director (Engineering), Superintendent Translation (Hindi Branch), Research Officer, Horticulture Development Officer और Soil Conservation Assistant जैसे पद शामिल हैं।

34 पदों के लिए निकली वैकेंसी

इस भर्ती अभियान में कुल 34 पद शामिल किए गए हैं। अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित पद की पात्रता शर्तों को ध्यान से देखना जरूरी है। तकनीकी पदों के लिए संबंधित इंजीनियरिंग या अन्य निर्धारित विषय में योग्यता मांगी जा सकती है, जबकि रिसर्च, ट्रांसलेशन और हॉर्टिकल्चर से जुड़े पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में शैक्षणिक योग्यता और अनुभव आवश्यक हो सकता है।

8 अगस्त से शुरू होगा आवेदन

UPSC की भर्ती प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन 8 अगस्त 2026 से शुरू होगा। अभ्यर्थी आयोग की ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के माध्यम से फॉर्म भर सकेंगे। सामान्य पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 28 अगस्त 2026 है। वहीं, लद्दाख प्रशासन के अंतर्गत आने वाले पदों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 4 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

आवेदन से पहले जरूर जांचें पात्रता

UPSC की भर्ती में अलग-अलग पदों के लिए पात्रता अलग होने के कारण उम्मीदवारों को केवल वैकेंसी की संख्या देखकर आवेदन नहीं करना चाहिए। जिस पद के लिए आवेदन करना है, उसकी शैक्षणिक योग्यता, आवश्यक अनुभव, आयु सीमा और अन्य शर्तों को पहले जांचना जरूरी है।

बिहार में बनेगी 3 नई रेल लाइन, इन जिलों के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में रेल यात्रा पहले के मुकाबले तेज और आसान होने वाली है। भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में रेलवे से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर करीब 4,600 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। रेल मंत्रालय ने संसद में दी गई जानकारी में इन योजनाओं की प्रगति और उनसे होने वाले संभावित फायदे की जानकारी दी है।

1 .भागलपुर से रामपुरहाट तक बढ़ेगी रेल क्षमता

भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट रेल मार्ग को मजबूत करने की दिशा में सबसे बड़ी परियोजना सामने आई है। करीब 177 किलोमीटर लंबे मौजूदा सिंगल रेल ट्रैक को डबल करने की योजना है। इस काम के लिए लगभग 3,169 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

परियोजना के लिए जरूरी जमीन से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। दोहरी लाइन बनने के बाद इस रूट पर एक साथ ज्यादा ट्रेनों को संचालित करना संभव होगा। इससे बिहार के भागलपुर क्षेत्र का झारखंड और पश्चिम बंगाल से रेल संपर्क और मजबूत हो सकता है।

2 .सबौर से गोनूधाम तक बनेगी नई बायपास लाइन

भागलपुर के रेल परिचालन को सुचारु बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण योजना पर काम होगा। सबौर और गोनूधाम के बीच 13.38 किलोमीटर की बायपास रेल लाइन बनाई जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 303.20 करोड़ रुपये है।

इस नई लाइन का फायदा यह होगा कि कुछ ट्रेनों को भागलपुर में दिशा बदलने या इंजन की स्थिति बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा व्यवस्था में इंजन रिवर्सल की वजह से परिचालन में अतिरिक्त समय लगता है। गोनूधाम को जंक्शन के रूप में विकसित कर उसे सबौर से जोड़े जाने की योजना है।

3 .भागलपुर-जमालपुर रूट पर तीसरी पटरी

भागलपुर से जमालपुर के बीच रेल यातायात को देखते हुए तीसरी लाइन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। अब करीब 53 किलोमीटर के हिस्से में तीसरी रेल लाइन बिछाने की योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस परियोजना के लिए रेलवे ने लगभग 1,156 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया भी जारी है। इस रूट की खासियत यह है कि यहां यात्री ट्रेनों के अलावा बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी चलती हैं। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को अलग-अलग रास्ता देने में मदद मिलेगी। इससे एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर किया जा सकता है।

45+ पुरुष आज से खाना शुरू कर दें ये 5 फल, शरीर में दिखेगा गजब का बदलाव!

हेल्थ डेस्क। 45 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों के लिए खान-पान पर ध्यान देना पहले से ज्यादा जरूरी हो जाता है। इस उम्र में शरीर को पर्याप्त विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की जरूरत होती है। रोजमर्रा की डाइट में मौसमी और ताजे फलों को शामिल करके शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व दिए जा सकते हैं। सेब, केला, अनार, संतरा और पपीता ऐसे ही फल हैं, जिन्हें संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

1. सेब

सेब में फाइबर के साथ कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है। 45+ पुरुष इसे नाश्ते या शाम के समय हेल्दी स्नैक के तौर पर ले सकते हैं। सेब का सेवन छिलके समेत करने पर फाइबर की मात्रा भी अच्छी मिलती है, बशर्ते फल को अच्छी तरह धोया गया हो।

2. केला

केला ऊर्जा देने वाला आसानी से उपलब्ध फल है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और पोटैशियम समेत कई पोषक तत्व होते हैं। नियमित व्यायाम या शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों के लिए केला एक सुविधाजनक स्नैक हो सकता है। इसे सुबह नाश्ते के साथ या एक्सरसाइज के बाद लिया जा सकता है। हालांकि, ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को इसकी मात्रा अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

3. अनार

अनार को एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फलों में गिना जाता है। इसमें पॉलीफेनॉल जैसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। संतुलित आहार में अनार को शामिल करना शरीर को विविध पोषक तत्व देने का अच्छा तरीका हो सकता है। इसे साबुत दानों के रूप में खाना जूस पीने से बेहतर विकल्प है, क्योंकि इससे फाइबर भी मिलता है।

4. संतरा

संतरा विटामिन C का अच्छा स्रोत है और इसमें पानी की मात्रा भी पर्याप्त होती है। विटामिन C शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए जरूरी पोषक तत्व है। 45+ पुरुष इसे दिन के किसी भी समय स्नैक के रूप में खा सकते हैं। संतरे का जूस पीने की बजाय पूरा फल खाना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे फाइबर भी प्राप्त होता है।

5. पपीता

पपीता फाइबर, विटामिन और अन्य पोषक तत्वों से युक्त फल है। इसमें पानी की मात्रा भी अच्छी होती है, जिससे यह गर्म मौसम में हल्का और पौष्टिक विकल्प बन सकता है। पपीते को नाश्ते या भोजन के बीच में खाया जा सकता है। संतुलित मात्रा में इसका सेवन डाइट में विविधता लाने में मदद करता है।