सेंटीमीटर तक होगी पैमाइश
करीब 6 लाख रुपये की लागत वाली इस मशीन को जमीन के निर्धारित सीमा बिंदुओं पर लगाकर नापी की जाती है। यह दूरी को सेंटीमीटर और इंच तक माप सकती है तथा करीब 2 सेंटीमीटर तक का अंतर बताने में सक्षम है। मशीन से पैमाइश के साथ फील्ड बुक तैयार कर उसका प्रिंट भी निकाला जा सकता है।
तहसीलों में होगा इस्तेमाल
नई तकनीक का इस्तेमाल तहसील स्तर पर जमीन की पक्की पैमाइश के लिए किया जाएगा। खासकर विवादित भूमि के मामलों में इससे अधिकारियों को काम तेजी से पूरा करने में मदद मिल सकती है। इससे किसानों और जमीन मालिकों को भी नापी के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
बारिश में सावधानी जरूरी
अधिकारियों के अनुसार बारिश के दौरान मशीन के इस्तेमाल में परेशानी आ सकती है। हालांकि सामान्य मौसम में यह तकनीक बड़े क्षेत्रफल की जमीन को कम समय में मापने में उपयोगी साबित हो सकती है। नई व्यवस्था से जमीन की पैमाइश में समय की बचत के साथ रिकॉर्ड तैयार करने और भूमि विवादों के समाधान में भी मदद मिलने की उम्मीद है।











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