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केंद्र सरकार ने दिया तोहफा: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी का ऐलान

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों के हित में एक अहम कदम उठाते हुए खेती के तरीके और सोच दोनों में बदलाव की दिशा तय की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि 'कृषि-वानिकी' का नाम बदलकर जल्द ही 'वृक्ष-आधारित खेती' किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि किसानों के बीच फैली गलतफहमियों को दूर करना और उन्हें आय के नए स्रोतों से जोड़ना है।

नाम बदलने के पीछे बड़ी सोच

अब तक कृषि-वानिकी शब्द में वन जुड़ा होने के कारण कई किसानों को यह डर रहता था कि पेड़ों को उगाने के बाद वे उनका व्यावसायिक उपयोग नहीं कर पाएंगे या कानूनी बाधाएं आ सकती हैं। इसी भ्रम को खत्म करने के लिए सरकार इसे आसान और स्पष्ट नाम 'वृक्ष-आधारित खेती' देने जा रही है। इससे किसानों को यह समझने में आसानी होगी कि वे अपनी जमीन पर पेड़ लगाकर भी आय कमा सकते हैं।

आय बढ़ाने के लिए नई रणनीति

सरकार का मानना है कि सिर्फ पारंपरिक खेती से किसानों की आमदनी में बड़ा इजाफा संभव नहीं है। इसी वजह से अब एकीकृत खेती मॉडल पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें फसल उत्पादन के साथ-साथ डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती को भी शामिल किया जाएगा। यह मॉडल खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

उर्वरकों के उपयोग पर चिंता

कृषि मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई जगह किसान जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस स्थिति को सुधारने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

क्षेत्रीय स्तर पर बनेगी नई योजना

खेती को और बेहतर बनाने के लिए अब राष्ट्रीय स्तर की एक बैठक के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार की जाएगी। वर्ष 2026 से देश के विभिन्न हिस्सों उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और उत्तर-पूर्व में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित होंगे। इससे हर क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और फसल के अनुसार सटीक योजना बनाई जा सकेगी।

उत्तर भारत की भूमिका अहम

उत्तर भारत को देश की कृषि ताकत का मजबूत आधार बताया गया। पंजाब और हरियाणा ने जहां हरित क्रांति में बड़ा योगदान दिया, वहीं उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों में फल, सब्जी और फूलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, जो कृषि विविधीकरण का संकेत है।

बीज और तकनीक पर जोर

कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए उन्नत बीजों और नई तकनीकों को जरूरी बताया गया है। बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए अब वैज्ञानिक तरीके से खेती करना समय की मांग बन गया है। इसके साथ ही राज्यों से कहा गया है कि वे अपनी परिस्थितियों के अनुसार दीर्घकालिक कृषि योजना तैयार करें।

केंद्रीय कर्मचारियों को खुशखबरी: वेतन, भत्ते और छुट्टियों में सुधार के आसार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की दिशा में लगातार बैठकों का आयोजन कर रहा है। हाल ही में देहरादून में बैठक के बाद अब दिल्ली में भी चर्चा का दौर शुरू होने जा रहा है। इसी बीच विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी-अपनी मांगें आयोग के सामने रखनी शुरू कर दी हैं।

न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर पर जोर

कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाने को लेकर है। लेवल-1 (ग्रुप D) के कर्मचारियों के लिए बेसिक सैलरी को 50,000 रुपये तक करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

शिक्षा भत्ता और नए अलाउंस की मांग

शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस में भी भारी वृद्धि की मांग की है। इसे मौजूदा राशि से बढ़ाकर करीब 7,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, इस सुविधा को 12वीं तक सीमित रखने के बजाय ग्रेजुएशन तक लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा, हर महीने करीब 2,000 रुपये ब्रॉडबैंड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े खर्चों के लिए देने की बात कही गई है।

HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस में बदलाव

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर भी कर्मचारियों ने संशोधन की मांग की है। वर्तमान दरों 10%, 20% और 30% को बढ़ाकर क्रमशः 12%, 24% और 36% करने का सुझाव दिया गया है। ट्रांसपोर्ट अलाउंस में भी वृद्धि की मांग की गई है, जिसमें इसे बेसिक वेतन के 12 से 15 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही न्यूनतम राशि को 9,000 रुपये से जोड़कर डीए के अनुसार बढ़ाने की बात कही गई है।

छुट्टियों और अन्य सुविधाओं में सुधार

कर्मचारी संगठनों ने लीव पॉलिसी में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है। हर साल 14 दिन की कैजुअल लीव, 30 दिन की अर्नड लीव और 20 दिन की मेडिकल लीव की मांग रखी गई है। रिटायरमेंट के समय अर्नड लीव एनकैशमेंट की सीमा को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने की बात भी कही गई है।

बोनस और वर्किंग सिस्टम पर सुझाव

नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस को बढ़ाकर 27,640 रुपये तक करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो फिलहाल इससे काफी कम है। इसके अलावा, 5 दिन का वर्क वीक लागू करने की भी मांग की गई है, जिसमें कुल 45 घंटे का कार्य समय तय करने की बात कही गई है।

पानी-पानी होगा बिहार! 21 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, गर्मी से मिलेगी राहत

पटना। बिहार में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम करवट लेने वाला है। अगले दो से तीन दिनों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंधी और बारिश के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग ने 21 जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है, जिससे साफ है कि कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश लोगों को गर्मी से राहत दे सकती है।

इन जिलों में बारिश और तेज हवा की चेतावनी

उत्तर और पूर्वी बिहार के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, शिवहर, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर और खगड़िया जैसे जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ सकता है। इन इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है।

वहीं पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में हल्की बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर खुले स्थानों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहने को कहा गया है।

कुछ जिलों में जारी रहेगी लू की मार

हालांकि पूरे राज्य में राहत नहीं मिलेगी। बक्सर, भोजपुर, भभुआ, रोहतास, औरंगाबाद और अरवल जैसे जिलों में अभी भी भीषण गर्मी का असर बना रहेगा। इन इलाकों में तापमान ऊंचा बना रहेगा और लू जैसी स्थिति लोगों को परेशान कर सकती है।

तापमान का क्या रहेगा हाल?

अगले तीन दिनों में उत्तर बिहार में अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि दक्षिण बिहार में यह 34 से 40 डिग्री तक जा सकता है। हाल के दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। राज्य में अधिकतम तापमान 33 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया, जिसमें डेहरी सबसे गर्म स्थान रहा, जहां पारा 44.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा झटका: सरकार ने फिर किया इनकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) के एरियर को लेकर एक बार फिर निराशाजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से कोविड काल के दौरान रोकी गई 18 महीनों की किस्तों के भुगतान की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को वित्त मंत्रालय के ताजा बयान से झटका लगा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल इन बकाया रकम को जारी करना संभव नहीं है।

कोविड काल का असर अब भी बना वजह

वित्त मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में बताया है कि महामारी के दौरान देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ा था। उस समय सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं और राहत योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ा, जिससे वित्तीय संतुलन बनाए रखना चुनौती बन गया। इसी वजह से जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 से लागू होने वाली DA/DR की तीन किस्तों को रोकने का फैसला लिया गया था।

बार-बार उठी मांग, लेकिन नहीं मिली मंजूरी

पिछले कई वर्षों से कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स द्वारा इन बकाया किस्तों के भुगतान की मांग लगातार की जाती रही है। विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को उठाया गया, यहां तक कि कानूनी आधार पर भी एरियर जारी करने की अपील की गई। बावजूद इसके, सरकार ने हर बार वित्तीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट के संदर्भ में भी नहीं बदला रुख

हाल ही में एक कर्मचारी संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए एरियर देने की मांग की गई थी। लेकिन वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि महामारी का आर्थिक प्रभाव केवल एक वर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि उसके बाद भी राजकोषीय दबाव बना रहा। ऐसे में एरियर का भुगतान व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है।

बिहार में नई रेल लाइन: 95% काम पूरा, यात्रियों के लिए खुशखबरी

न्यूज डेस्क। बिहार की राजधानी पटना और आसपास के इलाकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। नेउरा से जट डुमरी के बीच बन रही नई रेल लाइन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। करीब 18.2 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और उम्मीद है कि जल्द ही इस ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, इस रेलखंड पर विद्युतीकरण का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। अगले महीने रेलवे सेफ्टी कमिश्नर की टीम निरीक्षण के लिए पहुंचेगी। यदि जांच के दौरान सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई जाती हैं, तो जून 2026 से इस रूट पर ट्रेनें चलने लगेंगी। इससे पटना के आसपास के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

यात्रियों के लिए बड़ी राहत

नेउरा से जट डुमरी के बीच ट्रेन सेवा शुरू होने से लोगों की यात्रा काफी आसान हो जाएगी। खासकर बिहटा, दानापुर और मनेर जैसे इलाकों के यात्रियों को गया रूट पर जाने के लिए अब लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। समय की बचत के साथ-साथ यात्रा अधिक सुगम और किफायती हो जाएगी।

कई रूट्स से कनेक्टिविटी

इस नई रेल लाइन के शुरू होने से राजगीर, दनियावां और बिहटा जैसे क्षेत्रों के लिए पैसेंजर ट्रेनों की सुविधा भी बढ़ेगी। ग्रामीण इलाकों के लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें बड़े स्टेशनों तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह परियोजना स्थानीय स्तर पर आवागमन को तेज और सरल बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

तकनीकी काम अंतिम दौर में

फिलहाल नेउरा स्टेशन के पास नॉन-इंटरलॉकिंग का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा, ताकि ट्रेनों के संचालन में कोई बाधा न आए। जट डुमरी जंक्शन को भी विकसित किया जा रहा है, जहां भविष्य में हावड़ा और गया लाइन की कुछ ट्रेनों को शिफ्ट करने की योजना है।

स्टॉपेज और रूट में बदलाव

नई व्यवस्था के तहत गया से पटना आने वाली कुछ ट्रेनों का ठहराव जट डुमरी जंक्शन पर भी संभव हो सकेगा। इससे यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे और भीड़भाड़ वाले प्रमुख स्टेशनों पर दबाव भी कम होगा।

आयुष्मान योग का बड़ा असर: 6 राशियों के खुलेंगे भाग्य, सफलता के नए रास्ते

राशिफल। 28 अप्रैल 2026 को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर बनने वाला आयुष्मान योग बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग जीवन में सकारात्मक बदलाव, उन्नति और स्वास्थ्य लाभ का संकेत देता है। खासतौर पर धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह समय अत्यंत अनुकूल रहेगा। इस दिन किए गए शुभ कार्य लंबे समय तक अच्छे परिणाम दे सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए आयुष्मान योग नई ऊर्जा लेकर आएगा। रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। नौकरी और व्यवसाय में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों को धन लाभ के संकेत मिल रहे हैं। निवेश से फायदा हो सकता है। परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा और कोई शुभ समाचार मिल सकता है। करियर में स्थिरता आएगी।

सिंह राशि

सिंह राशि के लिए यह योग सफलता का द्वार खोल सकता है। पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और लोगों के बीच सम्मान बढ़ेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने के योग हैं। सेहत भी बेहतर रहेगी और मानसिक तनाव कम होगा।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए यह समय रिश्तों को मजबूत करने का रहेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। व्यापार में लाभ और नए सौदों से फायदा हो सकता है।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों को मेहनत का पूरा फल मिलेगा। नौकरी में तरक्की और आय में वृद्धि के संकेत हैं। लंबे समय से चल रही समस्याओं का समाधान मिल सकता है।

केंद्र सरकार का बड़ा कदम, देशवासियों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस (एलपीजी) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

दरअसल, भारतीय तेल कंपनियों ने अब पारंपरिक दीर्घकालिक समझौतों के अलावा स्पॉट मार्केट से भी एलपीजी खरीदना शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर तत्काल डिलीवरी के लिए मौजूदा बाजार दरों पर गैस खरीदी जा रही है, ताकि सप्लाई चेन पर किसी भी तरह का असर न पड़े।

सप्लाई बनाए रखने के लिए बड़ा प्लान

रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने अमेरिका समेत कई नए देशों से एलपीजी आयात बढ़ाया है। पहले जहां भारत की अधिकांश गैस खाड़ी देशों से आती थी, वहीं अब अमेरिका, रूस, नॉर्वे, कनाडा और अफ्रीकी देशों से भी सप्लाई ली जा रही है। इस कदम का मकसद किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और जोखिम को बांटना है।

घरेलू उत्पादन में भी इजाफा

आयात के साथ-साथ देश में एलपीजी के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में रोजाना करीब 80,000 टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से बड़ी हिस्सेदारी घरेलू उत्पादन से पूरी की जा रही है। हाल के समय में उत्पादन बढ़ाकर इसे और मजबूत किया गया है।

क्यों जरूरी था यह फैसला

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। यही वजह है कि भारत ने पहले से तैयारी करते हुए अतिरिक्त एलपीजी कार्गो बुक कर लिए हैं, जो आने वाले महीनों में देश पहुंचेंगे।

उपभोक्ताओं को खुशखबरी

सरकार के इस कदम का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को मिलेगा। वैश्विक संकट के बावजूद रसोई गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहेगी और लोगों को किसी तरह की कमी या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार की यह रणनीति दिखाती है कि बदलते वैश्विक हालात में भी भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बिहार सरकार का फैसला, आंगनबाड़ी सेविकाओं को बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में आंगनबाड़ी व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादवने घोषणा की है कि अगले दो महीनों के भीतर राज्य की सभी आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका को एंड्रॉयड स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जाएंगे। यह ऐलान ज्ञान भवन, पटना में आयोजित पोषण पखवाड़ा-2026 के समापन समारोह के दौरान किया गया।

डिजिटल सिस्टम से बच्चों की होगी बेहतर निगरानी

सरकार द्वारा लागू किए जा रहे डिजिटल सपोर्ट सिस्टम (DSS) के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अब 0 से 6 साल तक के बच्चों के विकास का वैज्ञानिक तरीके से आकलन कर सकेंगी। इसमें मोटर स्किल, भाषा, संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक व्यवहार, दृष्टि और श्रवण जैसे छह प्रमुख पहलुओं पर नजर रखी जाएगी। इससे बच्चों में विकास से जुड़ी किसी भी देरी की पहचान समय रहते हो सकेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं से बेहतर समन्वय

इस पहल के तहत आंगनबाड़ी, आशा और एएनएम के बीच तालमेल को मजबूत किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को आरबीएसके टीम के माध्यम से जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) तक भेजने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है, जिससे इलाज और देखभाल में तेजी आएगी।

व्हाट्सएप चैनल से मिलेगी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान 'हमारे बच्चे, हमारा परिवार' नाम से एक व्हाट्सएप कम्युनिटी चैनल भी लॉन्च किया गया। इसके जरिए अभिभावकों तक पोषण, देखभाल, शुरुआती शिक्षा और बच्चों के मानसिक विकास से जुड़ी अहम जानकारी पहुंचाई जाएगी।

बच्चों के शुरुआती विकास पर फोकस

दरअसल, बच्चे के जीवन के पहले छह वर्षों में उसके मस्तिष्क का लगभग 85% विकास हो जाता है। ऐसे में सही पोषण, संवाद और खेल आधारित शिक्षा बेहद जरूरी है। सरकार इसी दिशा में काम करते हुए मातृ एवं शिशु पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

बिहार के नालंदा यूनिवर्सिटी में आई भर्ती, आवेदन शुरू

न्यूज डेस्क। बिहार में सरकारी संस्थान में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। नालंदा विश्वविद्यालय ने वर्ष 2026 के लिए गैर-शिक्षण पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 9 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

किन पदों पर होगी भर्ती

इस भर्ती अभियान में प्रबंधक (आईटी), सहायक प्रबंधक (आईटी), प्रबंधक (गेस्ट हाउस), जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल), सहायक (वित्त) और सहायक (प्रशासन) जैसे पद शामिल हैं। ये सभी पद प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों से जुड़े हैं, जिनमें अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

आवेदन प्रक्रिया और तारीखें

इच्छुक उम्मीदवार 24 अप्रैल 2026 से आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 15 मई 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन और ईमेल के माध्यम से पूरी की जाएगी। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट Nalanda University Official Website पर जाकर नोटिफिकेशन देख सकते हैं और आवेदन से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

योग्यता और अनुभव

इन पदों के लिए बीई/बीटेक, एमसीए या एमएससी जैसी तकनीकी डिग्री रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। कुछ पदों के लिए संबंधित विषय में स्नातक डिग्री भी मान्य है। साथ ही, उम्मीदवारों के पास 3 से 8 वर्ष तक का कार्य अनुभव होना जरूरी बताया गया है।

क्यों खास है यह अवसर

नालंदा विश्वविद्यालय एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय स्तर का संस्थान है, जहां काम करने का मौका करियर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां चयनित उम्मीदवारों को बेहतर कार्य वातावरण और प्रोफेशनल ग्रोथ के अवसर मिल सकते हैं।

बिहार में बदलेगा मौसम: कई जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट, गर्मी से मिलेगी राहत

पटना। बिहार में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। जहां राजधानी पटना और दक्षिणी इलाकों में लोग उमस भरी गर्मी से परेशान हैं, वहीं उत्तर बिहार के कुछ हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य बना हुआ है। अब मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।

उमस भरी गर्मी के बीच बदलेगा मौसम

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान पटना और आसपास के क्षेत्रों में गर्म और नमी वाली हवाओं के कारण उमस बनी रहेगी। हालांकि, इसी बीच कई जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है।

इन क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने राज्य के उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व हिस्सों में कुछ स्थानों पर आंधी-पानी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में तेज हवा, बिजली गिरने और बारिश की घटनाएं हो सकती हैं।

तेज हवाओं की चेतावनी

पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों में मेघ गर्जन और वज्रपात के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

क्यों बदल रहा है मौसम?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पूर्वी बिहार और आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है। इसी सिस्टम के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में मौसम का रुख बदल रहा है।

30 अप्रैल तक जारी रहेगा असर

मौसम विभाग का अनुमान है कि 30 अप्रैल तक बिहार के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है।

कल बनेगा शक्तिशाली ‘ध्रुव’ योग: 5 राशियों की बदलेगी किस्मत, तरक्की के खुलेंगे रास्ते

राशिफल। 27 अप्रैल 2026, सोमवार का दिन ज्योतिष के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन रात 09:36 बजे तक शक्तिशाली ‘ध्रुव’ योग रहेगा। खास बात यह है कि इसी दिन मोहिनी एकादशी का व्रत, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, 12 साल बाद बन रहा त्रिपुष्कर योग और शुक्र का गोचर मिलकर इस दिन को और भी शुभ बना रहे हैं। ऐसे में कुछ राशियों के लिए यह समय बड़ी तरक्की और बदलाव लेकर आ सकता है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह योग नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। करियर में लंबे समय से रुके काम पूरे होंगे और अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए यह समय मान-सम्मान और पद में वृद्धि का योग बना रहा है। व्यापार में लाभ के अवसर मिल सकते हैं और परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को इस योग से विशेष लाभ मिलने की संभावना है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। धन लाभ के भी मजबूत संकेत हैं।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए यह दिन रिश्तों और करियर दोनों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। साझेदारी में किए गए कार्य सफल होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए ‘ध्रुव’ योग सफलता का द्वार खोल सकता है। निवेश से लाभ मिल सकता है और लंबे समय से चल रही समस्याओं का समाधान मिलेगा।

यूपी में स्मार्ट मीटर वालों को खुशखबरी, सरकार ने दी राहत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतों के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक किलोवाट और दो किलोवाट कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को राहत देते हुए नई व्यवस्था लागू की है, जिससे अब अचानक बिजली कटने की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकेगी।

1 किलोवाट उपभोक्ताओं को 30 दिन की मोहलत

नई व्यवस्था के तहत 1 किलोवाट कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए पूरे 30 दिन का समय दिया जाएगा। इससे पहले उपभोक्ताओं को कम समय मिलने के कारण असुविधा का सामना करना पड़ता था।

2 किलोवाट उपभोक्ताओं के लिए भी राहत

2 किलोवाट कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें बिजली कटने से पहले सूचना दिया जायेगा की अपना बैलेंस रिचार्ज करा लें।

बिजली कटने से पहले मिलेंगे 5 अलर्ट

सबसे अहम बदलाव यह है कि अब किसी भी उपभोक्ता की बिजली तब तक नहीं काटी जाएगी, जब तक उसके मोबाइल पर पांच बार एसएमएस अलर्ट नहीं भेजे जाते। इन मैसेज के जरिए उपभोक्ताओं को बार-बार सूचित किया जाएगा कि उनका बैलेंस खत्म होने वाला है।

उपभोक्ताओं की शिकायत पर लिया गया फैसला

दरअसल, स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि बिना पर्याप्त सूचना के बिजली काट दी जाती है। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि लोगों को समय रहते रिचार्ज करने का मौका मिल सके।

CM सम्राट का सख्त फरमान: बिहार में मनचलों की खैर नहीं

पटना। बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और ठोस कदम उठाया है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने 'पुलिस दीदी' यानी अभया ब्रिगेड को और ज्यादा सक्रिय व आधुनिक बनाने का फैसला लिया है। इस पहल का उद्देश्य छेड़खानी और उत्पीड़न की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

4700 वाहनों से मजबूत होगी पेट्रोलिंग

सरकार ने इस योजना के तहत 4700 स्कूटी और बाइक खरीदने को मंजूरी दी है। इनमें से 1500 स्कूटी महिला पुलिसकर्मियों को दी जाएंगी, जबकि 3200 बाइक अन्य पुलिस बल को मिलेंगी। इससे तंग गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी पुलिस की पहुंच आसान हो जाएगी और गश्त तेज होगी।

66.75 करोड़ रुपये का निवेश 

पूरी योजना पर करीब 66.75 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह सिर्फ वाहन खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद पुलिसिंग को तेज, स्मार्ट और प्रभावी बनाना है, ताकि किसी भी शिकायत पर तुरंत मौके पर पहुंचा जा सके।

स्कूल-कॉलेज के बाहर 'पिंक पेट्रोलिंग'

नई व्यवस्था के तहत स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के बाहर 'पिंक पेट्रोलिंग' शुरू की जाएगी। खासतौर पर उन जगहों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां छात्राओं की आवाजाही ज्यादा होती है। महिला पुलिसकर्मी वर्दी और सादे कपड़ों में तैनात रहेंगी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करेंगी।

छुट्टी के समय बढ़ेगी निगरानी

सरकार ने माना है कि छुट्टी के समय छात्राएं ज्यादा असुरक्षित महसूस करती हैं। इसी को देखते हुए इस दौरान गश्त बढ़ाई जाएगी और 'पिंक स्कूटी' के जरिए पुलिस दीदी मौके पर मौजूद रहेंगी, ताकि किसी भी तरह की घटना को रोका जा सके।

युवाओं के लिए खुशखबरी! यूपी वन विभाग में भर्ती, 10वीं/12वीं को मौका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission (UPSSSC) ने वन विभाग में बंपर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के तहत वन रक्षक (Forest Guard) और वन्य जीव रक्षक (Wildlife Guard) के कुल 708 पद भरे जाएंगे।

कब से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू होगी, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 तय की गई है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट UPSSSC Official Website के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। वहीं फीस जमा करने और आवेदन में सुधार की अंतिम तारीख 27 जुलाई 2026 रखी गई है।

शैक्षणिक योग्यता और पदों का विवरण

इन पदों के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से इंटरमीडिएट (10+2) पास होना अनिवार्य है। भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-2 पे स्केल के अनुसार ₹19,900 से ₹63,200 तक वेतन मिलेगा। यह सभी पद स्थायी प्रकृति के हैं, जिससे चयनित उम्मीदवारों को दीर्घकालिक नौकरी का लाभ मिलेगा।

किन पदों पर होगी भर्ती

वन रक्षक

वन्य जीव रक्षक

युवाओं के लिए मौका

यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास है जो कम शैक्षणिक योग्यता में सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं। वन विभाग में नौकरी न केवल स्थिर करियर देती है, बल्कि प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करती है।

CM योगी का आदेश: बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने स्मार्ट मीटर की तकनीकी जांच के लिए गठित चार सदस्यीय समिति के जरिए सैंपल मीटरों की जांच शुरू कर दी है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

लैब में होगी तकनीकी जांच

शनिवार को चयनित स्मार्ट मीटरों को विभागीय प्रयोगशाला भेजा गया, जहां जांच समिति की मौजूदगी में इनके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की बारीकी से जांच की जाएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कई जिलों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

जांच की निष्पक्षता पर सवाल

हालांकि, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि विभागीय लैब में जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि मीटर बनाने वाली कंपनियां जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती हैं।

पारदर्शिता की मांग तेज

उपभोक्ता संगठनों ने पावर कॉरपोरेशन से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने से पहले किन-किन स्तरों पर परीक्षण किया गया था और उनकी गुणवत्ता का आकलन कैसे किया गया। साथ ही यह भी मांग उठी है कि कंपोनेंट्स के स्रोत और मानकों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

सड़कों पर उतरे उपभोक्ता

स्मार्ट मीटर के खिलाफ कई जिलों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हो रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर के बीच चुनाव का अधिकार मिलना चाहिए, जैसा कि केंद्र के नियमों में प्रावधान है।

बिहार में बसेगी नई टाउनशिप: 11 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में शहरीकरण को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी पटना समेत 11 शहरों के आसपास ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बसाने की योजना पर काम तेज हो गया है। क्षेत्र चिन्हित करने के बाद अब सबसे अहम चरण भूमि अधिग्रहण और भू-स्वामियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

जमीन अधिग्रहण की होगी सख्त प्रक्रिया

नई टाउनशिप के लिए जमीन लेने से पहले प्रत्येक भू-स्वामी का सत्यापन किया जाएगा। बिहार शहरी आयोजना स्कीम के तहत जमीन के स्वामित्व, दस्तावेज और अन्य कानूनी पहलुओं की पूरी जांच की जाएगी। साथ ही भूमि मालिकों की संख्या और स्वीकृत हिस्सेदारी का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस प्रक्रिया में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और निबंधन विभाग की भी अहम भूमिका रहेगी।

डीएम की अगुवाई में बनेगी निगरानी समिति

परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के डीएम करेंगे। यह समिति टाउनशिप की योजना, सीमाओं के निर्धारण, जन सुविधाओं की निगरानी और भूमि पुनर्वितरण जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेगी। इसके अलावा, नगर निकायों के अधिकारी, नगर नियोजक, भू-अर्जन पदाधिकारी और कई विभागों के प्रतिनिधि भी इस समिति का हिस्सा होंगे।

टाउनशिप विकसित करने के लिए डेवलपर्स का होगा चयन

टाउनशिप विकसित करने के लिए निजी और सरकारी डेवलपर्स का चयन किया जाएगा। यह जिम्मेदारी नगर विकास विभाग द्वारा नामित विकास प्राधिकरण को सौंपी जाएगी, जो पूरी परियोजना की निगरानी भी करेगा।

जमीन मालिकों से मांगे जाएंगे सुझाव, शहरी विकास को मिलेगा बढ़ावा

सरकार इस परियोजना को पारदर्शी बनाने के लिए भूमि मालिकों और अन्य हितधारकों की राय भी लेगी। राजपत्र में प्रकाशन के बाद दो महीने के भीतर लोग अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद ही अंतिम योजना को मंजूरी दी जाएगी।

इन सैटेलाइट टाउनशिप के बनने से न केवल शहरों का दबाव कम होगा, बल्कि बेहतर आवास, सड़क, जल और अन्य सुविधाओं के साथ नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। खासतौर पर पटना और आसपास के क्षेत्रों में यह परियोजना तेजी से बढ़ती आबादी के लिए राहत साबित हो सकती है।

जापान को भारत का समर्थन, बौखलाया उठा चीन, ड्रैगन को डर!

नई दिल्ली। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अपनी रक्षा नीति में बड़े बदलाव के तहत जापान ने घातक हथियारों के निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील देने का फैसला किया है। इस कदम का भारत ने स्वागत किया है, जिसे नई दिल्ली ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने का अवसर बताया है। वहीं चीन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे क्षेत्रीय संतुलन के लिए चुनौती बताया है।

नीति बदलाव और भारत का समर्थन

जापान का यह निर्णय उसकी पारंपरिक शांति-आधारित रक्षा नीति से एक अहम बदलाव माना जा रहा है। भारत का मानना है कि उन्नत तकनीक और रक्षा क्षमताओं वाले देशों के साथ सहयोग से उसकी सुरक्षा तैयारियां मजबूत होंगी। दोनों देशों के बीच पहले से ही समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में तालमेल बढ़ रहा है।

चीन की 'रणनीतिक चेतावनी'

चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, बीजिंग इस कदम को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदलने की कोशिश के रूप में देख रहा है। चीनी विश्लेषकों ने भारत को जापान के साथ बढ़ते सैन्य सहयोग को लेकर आगाह किया है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जोखिम बताया है।

इंडो-पैसिफिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पहले से ही वैश्विक शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में जापान की नीति में बदलाव और भारत के साथ उसका बढ़ता सहयोग, क्षेत्र में सैन्यीकरण और रणनीतिक ध्रुवीकरण को तेज कर सकता है। चीन को आशंका है कि यह साझेदारी उसके प्रभाव को सीमित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

भारत-जापान संबंधों की मजबूती

भारत का रुख स्पष्ट है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा जरूरतों के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ाएगा। नई दिल्ली और टोक्यो के बीच 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' के तहत रक्षा सहयोग एक अहम स्तंभ बन चुका है। इससे दोनों देशों के बीच भरोसा और तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है।

यूपी में इस दिन से होगी बारिश: आंधी-पानी को लेकर अलर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। दोपहर होते ही सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है और तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच रहा है। ऐसे में लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदलने और बारिश की संभावना जताई है।

कब से बदलेगा मौसम?

मौसम विभाग के अनुसार 25 अप्रैल तक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क बना रहेगा। हालांकि 27 अप्रैल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में मौसम करवट ले सकता है। इस दौरान कहीं-कहीं हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी होने की संभावना है।

28 अप्रैल से 1 मई तक अलर्ट

प्रदेश में 28 अप्रैल से 1 मई के बीच आंधी और पानी का असर देखने को मिल सकता है। कई जिलों में तेज हवाएं, मेघ गर्जन और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। इससे तापमान में गिरावट आने और गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

इन जिलों में ज्यादा असर

पश्चिमी और मध्य यूपी के कई जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, झांसी, मैनपुरी, सीतापुर, हरदोई और बहराइच जैसे जिलों में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा 29 अप्रैल को लखनऊ, कानपुर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बाराबंकी, प्रतापगढ़, आजमगढ़ और देवरिया में भी मौसम बदल सकता है।

तापमान अभी भी रहेगा ऊंचा

राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में फिलहाल तापमान ऊंचा बना हुआ है। 26 अप्रैल को लखनऊ में अधिकतम तापमान करीब 43 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 28 डिग्री के आसपास रह सकता है।

क्या लोगों को मिलेगी राहत?

मौसम में बदलाव के साथ तेज हवाएं और हल्की बारिश से गर्मी की तीव्रता कुछ कम हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह राहत मिलने में अभी समय लग सकता है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

यूपी में बनेगा 90 किमी लंबा 6-लेन एक्सप्रेसवे, इन जिलों को बड़ी खुशखबरी

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी परियोजना पर काम तेज हो गया है। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से राज्य के कई जिलों को सीधा फायदा मिलने वाला है। करीब 90.8 किलोमीटर लंबे इस 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उद्देश्य अलग-अलग प्रमुख एक्सप्रेसवे को जोड़कर कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाना है।

किन एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा?

यह नया एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसका शुरुआती बिंदु इटावा जिले के कुदरैल गांव के पास होगा, जबकि अंतिम छोर हरदोई के सवायजपुर के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।

कितनी होगी लागत और समय सीमा?

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹7600 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। सरकार की योजना के मुताबिक, इसका निर्माण कार्य 30 से 36 महीनों के भीतर पूरा किया जा सकता है।

किन जिलों को मिलेगा फायदा?

यह एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद और हरदोई जिलों से होकर गुजरेगा। इसके निर्माण से इन इलाकों को तेज और बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी

परियोजना के लिए करीब 76 गांवों की जमीन का सर्वे और अधिग्रहण कार्य शुरू हो चुका है। प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

विकास को मिलेगी रफ्तार

इस एक्सप्रेसवे के बनने से न केवल लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। फर्रुखाबाद जैसे क्षेत्रों को सीधे आगरा, लखनऊ और दिल्ली से जोड़ने से निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

केंद्र सरकार का 1 बड़ा प्लान: अब ₹5,000 नहीं, हर महीने मिलेंगे ₹10,000

नई दिल्ली। असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली अधिकतम मासिक पेंशन को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस संबंध में पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) पहले ही अपनी सिफारिश सरकार को सौंप चुका है।

बढ़ती महंगाई के बीच बड़ा फैसला

अटल पेंशन योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी, जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर और छोटे कारोबारी को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देना था। फिलहाल इस योजना के तहत ₹1,000 से ₹5,000 तक मासिक पेंशन मिलती है।

लेकिन महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत को देखते हुए ₹5,000 की सीमा अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही। इसी वजह से इसे बढ़ाकर ₹10,000 करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि लाभार्थियों को बेहतर आर्थिक सहारा मिल सके।

योजना का दायरा और सरकार की सोच

सरकार ने इस योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है, जो इसकी दीर्घकालिक अहमियत को दर्शाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 9 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं। यदि पेंशन सीमा बढ़ती है, तो यह योजना मध्यम आय वर्ग के लिए भी ज्यादा आकर्षक बन सकती है, जो अब तक कम रिटर्न के कारण इससे दूरी बनाए हुए थे।

नियमों में बदलाव की भी संभावना

पेंशन राशि बढ़ाने के साथ-साथ कुछ नियमों में बदलाव भी संभव है: 

अंशदान बढ़ेगा: ₹10,000 पेंशन पाने के लिए मासिक जमा राशि अधिक देनी होगी। 

आयु सीमा में बदलाव: वर्तमान अधिकतम उम्र 40 वर्ष है, इसमें राहत दी जा सकती है। 

सुरक्षा बनी रहेगी: यह योजना सरकारी गारंटी के साथ आती है, जिससे निवेश सुरक्षित माना जाता है।

क्या है आगे की स्थिति?

फिलहाल इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला सरकार द्वारा लिया जाना बाकी है। लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के दायरे को मजबूत करने और असंगठित क्षेत्र के लोगों को अधिक स्थिर भविष्य देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

लिवर रहेगा फिट और मजबूत! आज से शुरू करें ये 4 हेल्दी ड्रिंक

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और बढ़ते जंक फूड के चलन का सबसे ज्यादा असर शरीर के अहम अंग लिवर पर पड़ता है। लिवर शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन सुधारने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

1. नींबू पानी

नींबू पानी लिवर को साफ रखने में मददगार माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन C शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में सहायक होता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना फायदेमंद हो सकता है।

2. ग्रीन टी

ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो लिवर को फ्री-रेडिकल्स से बचाने में मदद करती है। नियमित रूप से इसका सेवन लिवर की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है।

3. चुकंदर का जूस

चुकंदर में बीटेन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर की सफाई में मदद करते हैं। यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और लिवर की सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है।

4. हल्दी वाला दूध

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन लिवर को डिटॉक्स करने और सूजन कम करने में मदद करता है। रात में हल्दी वाला दूध पीना लिवर के लिए लाभकारी माना जाता है।

ध्यान रखने वाली बातें

इन ड्रिंक्स का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें और किसी भी स्वास्थ्य समस्या या बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

केंद्र सरकार का नया अपडेट: LPG को लेकर 4 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देश में LPG और PNG आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पूरे देश में आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य और सुचारू रूप से चल रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, तकनीकी सुधारों और निगरानी व्यवस्था के कारण गैस वितरण प्रणाली पहले से अधिक पारदर्शी और मजबूत हुई है।

1 .डिलीवरी सिस्टम में बड़ा सुधार

सरकार ने बताया कि अवैध गैस हेराफेरी को रोकने के लिए लागू किया गया डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) सिस्टम अब काफी प्रभावी साबित हो रहा है। इसके चलते देश में LPG सिलेंडर की आपूर्ति 94.5 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच चुकी है। वहीं ऑनलाइन LPG बुकिंग का स्तर लगभग 99 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो सिस्टम की स्थिरता को दर्शाता है।

2 .छोटे सिलेंडरों की बिक्री में तेजी

1 अप्रैल 2026 से अब तक 18.63 लाख से अधिक 5-किलो FTL सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। अकेले एक दिन में लगभग 80,000 छोटे सिलेंडरों की बिक्री हुई है, जो उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग और पहुंच को दर्शाता है। सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक हजारों जागरूकता शिविरों का आयोजन किया है, जिनमें लाखों उपभोक्ताओं को छोटे गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं।

3 .PNG कनेक्शन में तेज विस्तार

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2026 से अब तक 5.36 लाख से अधिक PNG कनेक्शन सक्रिय किए जा चुके हैं, जबकि 2.61 लाख नए कनेक्शनों का बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया गया है। इस तरह कुल PNG कनेक्शन संख्या बढ़कर लगभग 7.97 लाख हो गई है। इसके अलावा, लगभग 6.05 लाख उपभोक्ताओं ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है, जबकि हजारों उपभोक्ताओं ने अपने LPG कनेक्शन को PNG में बदलने की प्रक्रिया शुरू की है।

4 .PNG और CNG सप्लाई पर जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू और परिवहन क्षेत्र में PNG और CNG की 100% आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। आईजीएल, एमजीएल, गेल गैस और बीपीसीएल जैसी कंपनियां नेटवर्क विस्तार के साथ-साथ उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन भी दे रही हैं।

केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी: वाहन चालकों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देश में सड़क परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और तेज बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि दिसंबर तक देश के कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। इस फैसले से वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की परेशानी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

कैसे काम करेगा यह नया टोल सिस्टम?

यह नई व्यवस्था पूरी तरह तकनीक आधारित होगी, जिसमें कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे, FASTag आधारित RFID सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एनालिटिक्स शामिल होंगे। इस सिस्टम के तहत वाहन को टोल प्लाजा पर रोकने की जरूरत नहीं होगी। कैमरे और FASTag रीडर वाहन की पहचान कर अपने आप टोल शुल्क वसूल लेंगे। 

लॉजिस्टिक्स लागत कम करने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना बेहद जरूरी है। वर्तमान में भारत की लॉजिस्टिक्स लागत लगभग 16 प्रतिशत है, जिसे घटाकर एकल अंक में लाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के विकास से यह लागत पहले ही 10 प्रतिशत तक कम हुई है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की तुलना में भारत अभी भी इस क्षेत्र में सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ऊर्जा और ईंधन पर भी फोकस

कार्यक्रम में गडकरी ने यह भी कहा कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे देश पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने बायो-फ्यूल और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास पर जोर दिया। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताते हुए कहा कि इसे अधिक किफायती और व्यवहारिक बनाने की जरूरत है, ताकि यह आम लोगों के उपयोग में आ सके।

भारत की आर्थिक दिशा पर नजर

गडकरी ने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बाबुओं की भूमिका घटेगी? 50% सरकारी काम संभालेगा AI, नौकरशाही में नई क्रांति

न्यूज डेस्क। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तकनीकी दुनिया में एक ऐसा ऐलान किया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि वर्ष 2028 तक देश की लगभग 50 प्रतिशत सरकारी सेवाएं और प्रशासनिक कार्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। यह पहल शासन व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल परिवर्तन माना जा रहा है।

सरकार का बड़ा विजन: AI आधारित प्रशासन

इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी यूएई के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने दी। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में सरकारी विभागों का बड़ा हिस्सा पूरी तरह ऑटोनॉमस AI सिस्टम पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाना है।

क्या है एजेंटिक AI?

इस परियोजना में जिस तकनीक का उपयोग होगा, उसे एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहा जाता है। यह सामान्य AI से कहीं अधिक उन्नत प्रणाली है।

सामान्य AI केवल निर्देशों के आधार पर काम करता है

जबकि एजेंटिक AI बिना लगातार मानव हस्तक्षेप के खुद निर्णय लेकर कार्य पूरा कर सकता है। 

यह सिस्टम फाइलों को प्रोसेस करने से लेकर प्रशासनिक निर्णय तक स्वचालित रूप से कर सकता है। 

सरकार का मानना है कि इससे न केवल काम की गति बढ़ेगी, बल्कि मानवीय त्रुटियों में भी भारी कमी आएगी।

आम जनता के लिए क्या बदलेगा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा। इससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी, सेवाएं 24x7 उपलब्ध रहेंगी, आवेदन और प्रक्रिया अधिक सरल और स्वचालित हो जाएगी, व्यक्तिगत डेटा के आधार पर AI खुद आवश्यक सेवाएं सुझा सकेगा। सरल शब्दों में कहा जाए तो नागरिकों को केवल अपनी जरूरत बतानी होगी, बाकी पूरा प्रोसेस सिस्टम खुद संभाल लेगा।

बड़े स्तर पर निगरानी और लागू करने की योजना

इस परियोजना की निगरानी यूएई सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा की जाएगी। एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है, जो अलग-अलग मंत्रालयों में इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगले कुछ वर्षों में अधिकारियों और विभागों का प्रदर्शन भी AI अपनाने की क्षमता के आधार पर आंका जाएगा।

अमेरिका ने दी टेंशन, अब क्या करेगा भारत? चीन भी सन्न!

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़ा तनाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह अब रूस और ईरान से जुड़े तेल व्यापार पर दी गई छूट को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। इस फैसले से भारत समेत कई देशों की ऊर्जा रणनीति पर असर पड़ सकता है, जबकि चीन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

अमेरिका ने बदला रुख

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि समुद्र में मौजूद रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए दी गई छूट अब आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य प्रतिबंधों को और सख्त करना है, ताकि इन देशों की तेल निर्यात क्षमता पर असर डाला जा सके।  वहीं, ईरान को लेकर भी अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वहां से किसी भी प्रकार के तेल निर्यात को अनुमति नहीं दी जाएगी। अमेरिका का दावा है कि ईरानी तेल पर लगभग पूरी तरह से रोक लग चुकी है।

ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल

यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया पहले से ही मध्य पूर्व में तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण ऊर्जा संकट की आशंका से जूझ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। जानकारों के अनुसार, अगर कड़े प्रतिबंध लागू होते हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से तेज़ी से बढ़ सकती हैं।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में रूसी तेल पर छूट खत्म होने या प्रतिबंध सख्त होने से भारत की आयात रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि भारत पहले से ही कई देशों से विविध स्रोतों के जरिए तेल खरीद रहा है, जिससे कुछ हद तक संतुलन बना हुआ है।

चीन की स्थिति भी है चुनौतीपूर्ण

चीन भी दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है। अमेरिका के इस सख्त रुख से चीन की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि दोनों देश वैकल्पिक स्रोतों और दीर्घकालिक समझौतों पर काम कर रहे हैं।

यूपी सरकार की बड़ी घोषणा: इन लोगों के लिए 3 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने छोटे मकान और छोटी दुकान बनाने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए विकास शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब नक्शा पास कराते समय निर्धारित विकास शुल्क का केवल 50 प्रतिशत ही वसूला जाएगा। इस फैसले से शहरी क्षेत्रों में निर्माण कार्य करने वाले आम लोगों और छोटे व्यवसायियों को सीधा लाभ मिलेगा।

1. छोटे निर्माणकर्ताओं को बड़ी राहत

सरकार के नए निर्णय के अनुसार, छोटे मकान और छोटी दुकानों के नक्शा पास कराने पर अब आधा विकास शुल्क देना होगा। इसका उद्देश्य आम नागरिकों पर वित्तीय बोझ कम करना और शहरी विकास को बढ़ावा देना है।

2. शहरों के अनुसार तय हुई नई दरें

राज्य सरकार ने अलग-अलग शहरों के लिए विकास शुल्क की नई दरें निर्धारित की हैं। इन दरों में शहर की आर्थिक और शहरी स्थिति को ध्यान में रखा गया है। बड़े शहरों में शुल्क अधिक और छोटे शहरों में कम रखा गया है।

गाजियाबाद: सबसे अधिक 4165 रुपये प्रति वर्ग मीटर

लखनऊ, कानपुर, आगरा: 2462 रुपये प्रति वर्ग मीटर

वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ सहित कई शहर: 1450 रुपये प्रति वर्ग मीटर

अलीगढ़, गोरखपुर, बुलंदशहर आदि: 1020 रुपये प्रति वर्ग मीटर

अयोध्या और आसपास के क्षेत्र: सबसे कम 603 रुपये प्रति वर्ग मीटर

3. विकास शुल्क निर्धारण की नई व्यवस्था

प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी नई नियमावली के अनुसार विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद अब इन्हीं संशोधित दरों के आधार पर नक्शा पास करेंगे और शुल्क वसूलेंगे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां सरकार ने छूट दी है, वहां कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

सीएम सम्राट चौधरी की बड़ी घोषणा: बिहार को मिली 4 बड़ी सौगात

न्यूज डेस्क। जानकी नवमी के अवसर पर सीतामढ़ी में आयोजित भव्य समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्यवासियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस मौके पर उन्होंने सीतामढ़ी महोत्सव का उद्घाटन भी किया और कहा कि बिहार को विकास और समृद्धि की नई दिशा दी जा रही है।

1. मेडिकल कॉलेज का नाम होगा 'मां सीता मेडिकल कॉलेज'

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सीतामढ़ी में बन रहे नए मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का नाम अब 'मां सीता मेडिकल कॉलेज' रखा जाएगा। यह निर्णय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

2. पुनौरा धाम मंदिर 2028 तक होगा तैयार

सीएम ने बताया कि सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में बन रहा भव्य जानकी जन्मस्थली मंदिर अब 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा। पहले इसकी समय सीमा जून 2029 थी, लेकिन इसे छह महीने पहले करने का निर्णय लिया गया है।

3. राम जानकी पथ और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

सरकार ने सीतामढ़ी में सड़क और पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए राम जानकी पथ के निर्माण को तेज कर दिया है। इसके साथ ही क्षेत्र में पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है

4. रोजगार और पलायन रोकने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश लाकर युवाओं का पलायन रोका जाएगा। पिछले दो वर्षों में कई परियोजनाएं शुरू हुई हैं और 1.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश राज्य में आ चुका है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में 5 लाख करोड़ रुपये निवेश लाने का है।

विकास और समृद्ध बिहार का लक्ष्य

सीएम ने कहा कि बिहार अब बदलाव के रास्ते पर है और राज्य को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व सरकारों और वर्तमान केंद्र के सहयोग का भी उल्लेख करते हुए विकास की गति को और तेज करने की बात कही।