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बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर की नई नीति, जल्द होगी लागू

पटना। बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर एक बड़ी पहल की तैयारी चल रही है। राज्य के 13 विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर स्तर तक के शिक्षकों के अंतर-विश्वविद्यालय ट्रांसफर के लिए नई नीति जल्द लागू की जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य ट्रांसफर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना बताया जा रहा है।

राज्यपाल के निर्देश पर बनी कमेटी

इस नई नीति के मसौदे को तैयार करने के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन के निर्देश पर एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन कर सुझाव देगी।

एक महीने में देना होगा सुझाव

राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और अनुशंसाएं प्रस्तुत करनी होंगी। इन सुझावों के आधार पर अंतिम निर्णय कुलाधिपति द्वारा लिया जाएगा। नई नीति लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों के बीच शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को एक स्पष्ट ढांचा मिलेगा।

आरक्षण का पालन अनिवार्य

नई व्यवस्था में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्थानांतरण प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर का पूरा पालन हो। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी।

कुछ विश्वविद्यालय रहेंगे बाहर

यह नीति सभी विश्वविद्यालयों पर लागू नहीं होगी। पटना विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और बिहार कृषि विश्वविद्यालय को इस दायरे से बाहर रखा गया है। कारण यह है कि इन संस्थानों के अपने अलग अधिनियम और प्रशासनिक ढांचे हैं।

केंद्र सरकार का फैसला: ये नया कानून देशभर में लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को देशभर में लागू कर दिया है। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है।

क्या है महिला आरक्षण कानून

'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' नाम से पारित यह कानून सितंबर 2023 में संसद से मंजूर हुआ था। इसका उद्देश्य देश की विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था की गई है।

अधिसूचना में क्या कहा गया

कानून मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संविधान के 106वें संशोधन के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को वह तिथि तय की है, जिस दिन से यह अधिनियम लागू माना जाएगा। इसी के साथ यह कानून औपचारिक रूप से प्रभाव में आ गया है।

लागू होने के समय को लेकर असमंजस

हालांकि कानून लागू कर दिया गया है, लेकिन इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि जब संसद में इस कानून के लागू होने को लेकर अलग-अलग समयसीमा पर विचार जारी है, तो इसे अभी से प्रभावी क्यों घोषित किया गया।

परिसीमन और जनगणना से जुड़ी शर्त

इस कानून के लागू होने का असली आधार आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया है। 2027 की जनगणना के बाद ही निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा, जिसके बाद ही आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सकेगी। इसी कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक प्रभाव 2029 या उसके बाद के चुनावों में ही दिखेगा।

संसद और विधानसभाओं में होगा असर

फिलहाल संसद में इस विषय से जुड़े कुछ अन्य विधेयकों पर भी चर्चा चल रही है, जिनका उद्देश्य 2029 से महिला आरक्षण को लागू करना बताया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि कानून लागू होने के बावजूद इसकी वास्तविक शुरुआत एक लंबी प्रक्रिया के बाद ही संभव होगी।

शनि बदलेंगे चाल: 4 राशियों की चमकेगी किस्मत और मिलेगा जबरदस्त लाभ

ज्योतिष डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार 17 अप्रैल को वैशाख अमावस्या के दिन शनि देव अपनी चाल में महत्वपूर्ण परिवर्तन करने जा रहे हैं। इस दिन शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में गोचर करेंगे, जिसे ज्योतिष में एक दुर्लभ और प्रभावशाली संयोग माना जा रहा है। इस बदलाव का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन विशेष रूप से चार राशियों के लिए यह समय अत्यंत शुभ संकेत लेकर आया है।

सिंह राशि

सिंह राशि के लिए यह समय राहत और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चल रही अनबन खत्म होने के संकेत हैं। संबंधों में सुधार आएगा और मानसिक तनाव भी कम होगा। किसी अच्छी खबर की प्राप्ति से मन प्रसन्न रह सकता है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए यह गोचर करियर में नए अवसर खोल सकता है। नौकरी और व्यापार दोनों क्षेत्रों में प्रगति के योग बन रहे हैं। लंबे समय से रुके हुए कामों में गति आएगी और आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिल सकता है। मेहनत का पूरा फल मिलने की संभावना है।

मकर राशि

मकर राशि के लिए शनि का यह परिवर्तन आर्थिक दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है। व्यापार से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ मिल सकता है। रुके हुए कार्य पूरे होने के संकेत हैं और नई योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। साथ ही वाद-विवाद से दूरी बनाए रखने पर स्थिति और बेहतर हो सकती है।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए यह गोचर पारिवारिक और कानूनी मामलों में राहत देने वाला साबित हो सकता है। घर-परिवार में चल रही परेशानियां कम होंगी और आपसी मतभेद दूर हो सकते हैं। सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं भी दूर होने की संभावना है। साथ ही स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: देश की महिलाओं के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।

क्या है नया बदलाव

इस अधिनियम के लागू होने के बाद महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण की मांग को औपचारिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अधिसूचना में क्या कहा गया

कानून मंत्रालय की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1(2) के तहत केंद्र सरकार ने इसे लागू करने के लिए 16 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। इसी तारीख से यह कानून प्रभावी माना जाएगा।

लागू होने के समय को लेकर सवाल

हालांकि इस फैसले के साथ एक सवाल भी चर्चा में है कि जब इस कानून पर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर चर्चा अभी भी जारी है, तो इसे लागू करने की तिथि तुरंत क्यों तय की गई। इस पर सरकार की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण अभी सामने नहीं आया है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद

जानकारों का मानना है कि इस फैसले से देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि नीति-निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भूमिका और अधिक होनी चाहिए।

इस नई व्यवस्था को लेकर आगे की प्रक्रिया

आरक्षण के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए परिसीमन और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कुछ तकनीकी कदम भी जरूरी होंगे। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही संसद और विधानसभाओं में इसका प्रभाव पूरी तरह दिखाई देगा।

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को राहत, छुट्टियों में नहीं होगी बिजली कटौती

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बिजली विभाग ने साफ किया है कि अब कुछ खास दिनों और समय पर बिजली काटने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी। इससे आम उपभोक्ताओं को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

छुट्टियों और रात में नहीं कटेगी बिजली

बिजली विभाग के अनुसार अब हर रविवार, महीने के दूसरे शनिवार और सभी राजपत्रित अवकाश के दिन बकाया होने पर भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की जाएगी। इसके अलावा रात के समय भी राहत दी गई है। शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक बिजली कटौती नहीं होगी, जिससे उपभोक्ताओं को असुविधा से बचाया जा सकेगा।

बकाया भुगतान के लिए मिलेगा समय

नए नियम के तहत उपभोक्ताओं को बकाया भुगतान के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। विभाग ने बताया कि उपभोक्ताओं को अब तीन दिन की मोहलत मिलेगी, ताकि वे आसानी से अपना बिल जमा कर सकें।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर स्थिति स्पष्ट

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर फैली गलतफहमियों के बीच विभाग ने इसके फायदे भी बताए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन मीटरों के जरिए उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं और उन्हें पारदर्शी बिलिंग का लाभ मिलता है।

रिचार्ज पर मिल रही छूट

स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को रिचार्ज करने पर 2 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। यह सुविधा नियमित उपभोक्ताओं को समय पर भुगतान के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

नए कनेक्शन पर राहत

नई व्यवस्था में उपभोक्ताओं को एक और राहत दी गई है। अब नए बिजली कनेक्शन लेने पर सिक्योरिटी मनी जमा करने से छूट दी जा रही है, जिससे शुरुआती लागत कम हो जाएगी।

मोबाइल पर जानकारी

स्मार्ट मीटर से जुड़े उपभोक्ताओं को उनकी बिजली खपत की जानकारी अब आसानी से मिल सकेगी।

हर दिन और हर घंटे की खपत मोबाइल ऐप पर देखी जा सकेगी। 

उपभोक्ताओं को SMS अलर्ट भी भेजे जाएंगे। 

इससे खपत पर बेहतर निगरानी संभव होगी। 

केंद्र सरकार का बड़ा अपडेट, LPG सिलेंडर को लेकर खुशखबरी

नई दिल्ली। एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि देश में गैस सप्लाई पूरी तरह नियंत्रण में है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि सप्लाई सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है।

कई देशों से मजबूत की गई सप्लाई

सरकार के अनुसार, एलपीजी की आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से तैयारी कर ली गई है। अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से आयात सुनिश्चित किया गया है। करीब 800 हजार मीट्रिक टन एलपीजी भारत के लिए तय की जा चुकी है, जिससे आने वाले समय में किसी कमी की संभावना कम हो गई है।

घरेलू उत्पादन में तेज़ बढ़ोतरी

सरकार ने देश के अंदर भी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मार्च 2026 में जारी आदेश के बाद रिफाइनरियों ने उत्पादन बढ़ाया है, जिसके चलते अब रोजाना एलपीजी उत्पादन करीब 50 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। देश की कुल मांग लगभग 80 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन है, लेकिन आयात और घरेलू उत्पादन मिलाकर स्थिति संतुलित बताई जा रही है।

डिलीवरी सिस्टम सामान्य

मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में गैस सिलेंडर की सप्लाई और डिलीवरी पूरी तरह सामान्य है। हर दिन औसतन करीब 50 लाख सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। बुकिंग के बाद सिलेंडर मिलने में 5 से 6 दिन का समय लग रहा है, जो सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप है। कहीं भी गैस खत्म होने जैसी स्थिति नहीं है।

यूपी सरकार की घोषणा, नए स्टार्टअप्स के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में रजिस्टर होने वाले स्टार्टअप्स को शुरुआती वर्षों में सरकारी जांच-पड़ताल के दबाव से राहत दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे नए उद्यम आसानी से खड़े हो सकेंगे और कारोबार शुरू करने का माहौल बेहतर बनेगा।

कब से और कैसे मिलेगा लाभ

सरकार के आदेश के अनुसार, जैसे ही कोई स्टार्टअप इकाई स्थापित होकर ‘निवेश मित्र’ पोर्टल पर रजिस्टर हो जाती है, उसी दिन से उसे यह छूट मिलनी शुरू हो जाएगी। यह सुविधा अधिकतम 10 वर्ष तक या स्टार्टअप का दर्जा समाप्त होने तक (जो पहले हो) लागू रहेगी।

किन इकाइयों को मिलेगी छूट

यह राहत मुख्य रूप से गैर-खतरनाक श्रेणी के कारखानों, प्रतिष्ठानों और उत्कृष्टता केंद्रों को दी जाएगी। इन इकाइयों को श्रम विभाग में स्वप्रमाणन के तहत आवेदन करना होगा।

मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के

जहां कम जोखिम वाले उद्योगों को निरीक्षण से पूरी छूट दी गई है, वहीं मध्यम जोखिम वाली इकाइयों को सरकारी जांच के बजाय थर्ड पार्टी ऑडिट की सुविधा दी गई है। इससे निरीक्षण प्रक्रिया आसान और कम समय लेने वाली बनेगी।

कब हो सकता है निरीक्षण

सरकार ने स्पष्ट किया है कि छूट के बावजूद कुछ स्थितियों में जांच संभव होगी। यदि किसी इकाई के खिलाफ विश्वसनीय और लिखित शिकायत मिलती है या किसी प्रकार की दुर्घटना होती है। ऐसी स्थिति में श्रमायुक्त की अनुमति से निरीक्षण किया जा सकेगा।

कर्मचारियों और उद्योग दोनों को फायदा

इस नीति का असर सिर्फ स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे प्रदेश की हजारों नई और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि कम दखल और आसान नियमों से निवेश का माहौल बेहतर होगा और नए उद्यमियों को आगे आने का अवसर मिलेगा।

GDP रैंकिंग में भारत को झटका: छठे स्थान पर खिसका, फिर आगे निकला ब्रिटेन

नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर जारी ताजा अनुमानों में भारत की रैंकिंग में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नए आंकड़ों के मुताबिक, भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में छठे स्थान पर पहुंच गया है। इससे पहले भारत पांचवें नंबर पर था, लेकिन अब ब्रिटेन ने उसे पीछे छोड़ दिया है।

हालांकि, यह गिरावट केवल डॉलर के आधार पर की गई गणना में दिख रही है। वास्तविक विकास दर के मामले में भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

क्या बदला है तस्वीर में?

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024 में भारत लगभग 3.76 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ ब्रिटेन से थोड़ा आगे था। उस समय ब्रिटेन की जीडीपी करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर थी। लेकिन अगले ही साल तस्वीर बदल गई। भारत की अर्थव्यवस्था बढ़कर करीब 3.92 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची, वहीं ब्रिटेन ने तेज़ बढ़त लेते हुए 4 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। इसी अंतर के चलते रैंकिंग में बदलाव देखने को मिला।

2026 के अनुमानित वैश्विक क्रम

ताजा अनुमानों के अनुसार दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का क्रम इस प्रकार है: अमेरिका पहले नंबर पर, इसके बाद चीन दूसरे नंबर पर हैं। जर्मनी तीसरे और जापान चौथे नंबर पर, जबकि ब्रिटेन पांचवे और भारत छठे नंबर पर पहुंच गया हैं।

गिरावट के पीछे क्या कारण?

भारत की रैंकिंग में आई इस गिरावट के पीछे दो प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं। पहला कारण रुपये की कमजोरी हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था भले ही मजबूत गति से बढ़ रही हो, लेकिन जब इसे डॉलर में मापा जाता है तो रुपये की कमजोरी असर डालती है। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से कुल जीडीपी का मूल्य कम दिखाई देता है।

वहीं, दूसरा कारण आधार वर्ष में बदलाव हैं। दरअसल जीडीपी की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले बेस ईयर में बदलाव से भी आंकड़ों पर असर पड़ा है। इससे तुलना का पैमाना बदल जाता है और रैंकिंग प्रभावित हो सकती है।

क्या वाकई चिंता की बात है?

जानकार मानते हैं की यह गिरावट उतनी चिंताजनक नहीं है जितनी पहली नजर में लगती है। भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी तेज़ी से बढ़ रही है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। इसके अलावा, क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर भारत की स्थिति अभी भी काफी मजबूत मानी जाती है।

यूपी में 3 साल से जमे कर्मचारी हटेंगे, नई ट्रांसफर नीति तैयार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से एक ही जगह जमे अधिकारियों और कर्मचारियों के दिन अब बदलने वाले हैं। राज्य सरकार नई ट्रांसफर पॉलिसी लाने की तैयारी में है, जिसका सीधा असर प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा। मकसद साफ है सिस्टम में ठहराव खत्म करना और कामकाज को ज्यादा पारदर्शी बनाना।

सरकारी स्तर पर हुई बैठकों के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

अब तय समय के बाद ट्रांसफर

नई व्यवस्था में यह साफ कर दिया गया है कि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी एक ही जगह लंबे समय तक नहीं रहेगा। जिले में तीन साल और मंडल स्तर पर सात साल पूरा करने वालों को अनिवार्य रूप से हटाया जाएगा। खासतौर पर वे कर्मचारी जो सालों से एक ही सीट पर बैठे हैं, उन्हें बदलना सरकार की प्राथमिकता में है, ताकि प्रभाव और पकड़ जैसी शिकायतों पर लगाम लग सके।

गृह जिले में पोस्टिंग पर सख्ती

सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि निष्पक्षता बनी रहे। इसी वजह से उच्च अधिकारियों को उनके गृह जिले या गृह क्षेत्र में तैनाती से दूर रखा जाएगा। साथ ही, जिन कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं, उन्हें संवेदनशील पदों से हटाने की तैयारी है।

कितने तबादले होंगे, इसकी भी सीमा

सरकार इस प्रक्रिया को नियंत्रित रखना चाहती है, इसलिए एक तय सीमा भी रखी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के सीमित तबादले होंगे, जबकि निचले स्तर पर यह संख्या और कम रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर इसमें थोड़ी लचीलापन भी रखा गया है।

परिवार और दिव्यांग कर्मचारियों को राहत

इस बार नीति में सिर्फ सख्ती नहीं, बल्कि संवेदनशीलता भी दिख रही है। अगर पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में हैं, तो उन्हें पास-पास तैनात करने की कोशिश होगी। दिव्यांग कर्मचारियों को सामान्य तबादलों से छूट दी जाएगी। वहीं अगर वे खुद स्थान बदलना चाहें, तो उनकी पसंद को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे परिवार जिनके ऊपर विशेष देखभाल की जिम्मेदारी है, उन्हें भी राहत देने का प्रस्ताव है।

कर्मचारियों-पेंशनर्स ने मांगी DA-DR, सरकार पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का इंतजार इस बार लंबा खिंचता नजर आ रहा है। आमतौर पर मार्च में होने वाला ऐलान इस बार अप्रैल के मध्य तक भी नहीं हो पाया है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ने लगा है।

बढ़ती देरी से बढ़ी बेचैनी

जनवरी से जून 2026 की अवधि के लिए DA-DR संशोधन का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग तेज कर दी है। देश के कई हिस्सों में सरकारी दफ्तरों में लंच ब्रेक के दौरान विरोध प्रदर्शन की योजना भी बनाई गई है।

कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद

फिलहाल महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत के स्तर पर है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इसे बढ़ाकर करीब 60 प्रतिशत किया जा सकता है। यह वृद्धि महंगाई सूचकांक (AICPI) के आंकड़ों के आधार पर तय होती है, जो पिछले कुछ महीनों में बढ़ती कीमतों की ओर इशारा कर रहे हैं।

बड़ी संख्या में लोग प्रभावित

इस देरी का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में पेंशनर्स भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। अनुमान के मुताबिक करीब 1.2 करोड़ लोग जिनमें लगभग 50 लाख कर्मचारी और 65-70 लाख पेंशनर्स शामिल हैं इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

एरियर और मर्जर की मांग तेज

कर्मचारी संगठनों की मांग सिर्फ बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि बढ़े हुए DA-DR का एरियर भी जल्द दिया जाए। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई को देखते हुए DA को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग भी उठ रही है, ताकि उन्हें स्थायी राहत मिल सके।

CM सम्राट पर प्रशांत किशोर का तंज, “दसवीं कहां से की?”

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब उन्हें जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उन्होंने दसवीं कक्षा कब और कहां से उत्तीर्ण की।

जनता के साथ हुआ विश्वासघात

प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन जनता की सीधी पसंद का परिणाम नहीं है। उनका कहना है कि चुनाव एक चेहरे के नाम पर लड़ा गया, लेकिन बाद में नया चेहरा सामने लाया गया। इसे उन्होंने जनता के साथ विश्वासघात करार दिया।

शिक्षा को बनाया राजनीतिक मुद्दा

उन्होंने कहा कि बिहार जैसे ज्ञान और शिक्षा की ऐतिहासिक भूमि में मुख्यमंत्री की शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की पढ़ाई को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं है।

गौरवशाली परंपरा का उल्लेख

प्रशांत किशोर ने बिहार की प्राचीन शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह भूमि नालंदा और विक्रमशिला जैसे महान शिक्षण केंद्रों की रही है। ऐसे राज्य में नेतृत्व से जवाबदेही और स्पष्टता की अपेक्षा और अधिक होती है।

सत्तापक्ष का पलटवार

वहीं, सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड ने नई सरकार का बचाव किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नई सरकार विकास और सुशासन की नीति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी का कहना है कि राज्य में बुनियादी ढांचे, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं में लगातार सुधार हुआ है। महिलाओं के सशक्तिकरण और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी काम किया गया है।

घर में लगाएं दौड़ते घोड़े की तस्वीर, मिलेंगे 7 खास फायदे

नई दिल्ली। भारतीय परंपरा और वास्तु शास्त्र में घर की सजावट को सिर्फ सुंदरता तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि इसे सकारात्मक ऊर्जा और भाग्य से भी जोड़ा जाता है। इन्हीं में से एक है दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर, जिसे घर या ऑफिस में लगाने से कई तरह के लाभ मिलने की बात कही जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तस्वीर ऊर्जा, सफलता और प्रगति का प्रतीक मानी जाती है।

1. तरक्की और सफलता का प्रतीक

दौड़ते हुए घोड़े गति और प्रगति का संकेत देते हैं। इन्हें लगाने से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है और करियर में उन्नति के अवसर बढ़ सकते हैं।

2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार

ऐसी तस्वीरें घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाने में सहायक मानी जाती हैं। इससे वातावरण उत्साहपूर्ण और सक्रिय बना रहता है।

3. धन लाभ के योग

वास्तु के अनुसार दौड़ते घोड़े आर्थिक समृद्धि का भी संकेत देते हैं। सही दिशा में इन्हें लगाने से धन से जुड़े अवसर बढ़ सकते हैं।

4. आत्मविश्वास में वृद्धि

घोड़े शक्ति और साहस के प्रतीक होते हैं। उनकी तस्वीर देखने से आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार हो सकता है।

5. बाधाओं को दूर करें

ऐसा माना जाता है कि यह तस्वीर जीवन में आने वाली रुकावटों को कम करने और कार्यों में गति लाने में मदद करती है।

6. करियर में गति

नौकरी या व्यवसाय में ठहराव महसूस हो रहा हो, तो दौड़ते घोड़ों की तस्वीर लगाने से सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद की जाती है।

7. रिश्तों में तालमेल

घर के माहौल को बेहतर बनाने में भी यह तस्वीर मददगार मानी जाती है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ सकता है।

कहां लगाएं तस्वीर?

दौड़ते घोड़ों की तस्वीर को घर या ऑफिस की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि घोड़ों का मुख अंदर की ओर हो, जिससे सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करे।

योगी सरकार का बड़ा ऐलान, यूपीवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पेयजल आपूर्ति और जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में कुल 11 अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं पर लगभग 633.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

पेयजल परियोजनाओं पर बड़ा फोकस

बैठक में पेयजल से जुड़ी चार प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें ट्रेंच-2 और ट्रेंच-3 के अंतर्गत योजनाएं शामिल हैं। इन पर करीब 610.22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लगभग 80 हजार घरों को शुद्ध पेयजल कनेक्शन मिलने की उम्मीद है, जिससे हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें आसान होंगी।

इन शहरों को मिलेगा सीधा लाभ

पेयजल विस्तार योजनाओं में लखनऊ, वाराणसी और चित्रकूट जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

लखनऊ के बक्शी का तालाब और कई वार्डों में नई पेयजल योजनाएं लागू होंगी। 

वाराणसी के प्रभावित इलाकों में जल आपूर्ति का विस्तार किया जाएगा। 

चित्रकूट के राजापुर नगर पंचायत में नई योजना शुरू होगी। 

इन योजनाओं का मकसद तेजी से बढ़ते शहरी इलाकों में पानी की समस्या को दूर करना है।

सरोवर विकास पर भी जोर

जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सात सरोवर (तालाब) विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है, जिन पर लगभग 23.18 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें गोरखपुर, रायबरेली, भदोही, गाजियाबाद, लखनऊ और बाराबंकी के तालाबों का पुनर्विकास शामिल है। इससे न केवल जल संचयन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।

पर्यावरण और जल संकट से निपटने की तैयारी

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से एक तरफ जहां पेयजल संकट कम होगा, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। तालाबों के विकास से भूजल स्तर सुधारने और शहरी क्षेत्रों में जल संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

गांव की ये 3 देसी चीजें हैं ताकत का खजाना, कई बीमारियों पर भारी

हेल्थ डेस्क। बदलती लाइफस्टाइल और फास्ट फूड के बढ़ते चलन के बीच लोग एक बार फिर पारंपरिक खानपान की ओर लौट रहे हैं। गांवों में आसानी से मिलने वाली कई देसी चीजें आज भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। इनमें गूलर, सहजन और जलकुंभी साग खास तौर पर शामिल हैं, जो शरीर को पोषण देने के साथ कई बीमारियों से बचाव में भी मददगार साबित हो सकती हैं।

1 .गूलर

गूलर, जिसे जंगली अंजीर भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन A, विटामिन C और आयरन पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर में सूजन कम करने में भी सहायक माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग सब्जी और घरेलू उपचार के रूप में लंबे समय से किया जाता रहा है।

2 .सहजन

सहजन, जिसे मोरिंगा के नाम से भी जाना जाता है, पोषण का भंडार माना जाता है। इसमें विटामिन A, विटामिन C, विटामिन B-कॉम्प्लेक्स के साथ कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह हड्डियों को मजबूत बनाने, खून की कमी दूर करने और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में सहायक होता है। सहजन की फलियां ही नहीं, इसकी पत्तियां और फूल भी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माने जाते हैं।

3 .जलकुंभी साग

जलकुंभी साग भी ग्रामीण क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली एक पोषक सब्जी है। इसमें विटामिन A, विटामिन C, आयरन और फाइबर पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद करते हैं। यह पाचन सुधारने और खून बढ़ाने में सहायक माना जाता है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे साफ-सुथरे और सुरक्षित स्रोत से ही उपयोग करने की सलाह देते हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सैलरी में आएगा तूफानी उछाल!

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। 8वें वेतन आयोग और फिटमेंट फैक्टर को लेकर कर्मचारियों के बीच उम्मीदें बढ़ गई हैं। हाल ही में जेसीएम (JCM) की स्टाफ साइड बैठक में इस मुद्दे पर अहम चर्चा हुई, जिसमें न्यूनतम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर एक नया फॉर्मूला सामने आया है।

5 यूनिट वाले नए फॉर्मूले से बदला गणित

कर्मचारी संगठनों के अनुसार, इस बार फिटमेंट फैक्टर की गणना पुराने 3 यूनिट मॉडल के बजाय 5 यूनिट प्रणाली के आधार पर की गई है। इस नए दृष्टिकोण में केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की संरचना को ध्यान में रखा गया है। इसमें पत्नी, बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता को भी शामिल किया गया है, जिससे वास्तविक खर्च का बेहतर आकलन हो सके। इसी आधार पर गणना करने पर 3.833 का एक नया फिटमेंट फैक्टर सामने आया है, जिसे वैज्ञानिक और व्यावहारिक बताया जा रहा है।

बदलती जरूरतों के हिसाब से वेतन ढांचे की मांग

बैठक में यह भी कहा गया कि आज के समय में जीवनशैली काफी बदल चुकी है। पहले जहां बुनियादी जरूरतें सीमित थीं, वहीं अब शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, डिजिटल सुविधाएं और अन्य आधुनिक खर्च कर्मचारियों के बजट का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। इसी वजह से पुराना वेतन निर्धारण मॉडल 'डॉ. एक्रोयड फॉर्मूला' अब पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। कर्मचारी संगठन मानते हैं कि नए दौर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना में बदलाव जरूरी है।

JCM में बनी सहमति और आगे की प्रक्रिया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारी यूनियनों के बीच 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है। अब इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से वेतन आयोग के सामने पेश करने की तैयारी चल रही है। नेशनल काउंसिल (JCM) के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह मांग पूरी तरह तर्कसंगत और व्यावहारिक आधार पर तैयार की गई है। उनका तर्क है कि चूंकि वेतन संशोधन लंबे अंतराल पर होता है, इसलिए इसे वर्तमान आर्थिक जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।

JCM क्या है?

JCM यानी संयुक्त सलाहकार मशीनरी, केंद्र सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद का एक आधिकारिक मंच है। इसकी स्थापना 1966 में की गई थी। यह मंच कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर समाधान निकालने का काम करता है।

सीएम सम्राट का बड़ा ऐलान, महिला आरक्षण के साथ खड़ा है बिहार

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरा बिहार इस फैसले के साथ मजबूती से खड़ा है और यह कदम देश की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा।

महिलाओं को मिलेगा नया अधिकार और भागीदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अधिकार देने की दिशा में काम कर रही है। लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से महिलाओं की भागीदारी सीधे तौर पर बढ़ेगी और वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे देश में सामाजिक संतुलन मजबूत होगा और महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आगे आने का अवसर मिलेगा।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण को दी श्रद्धांजलि

गुरुवार को मुख्यमंत्री ने पटना के कदमकुआं स्थित जयप्रकाश नारायण आवास पहुंचकर जयप्रकाश नारायण और उनकी पत्नी प्रभावती देवी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने दोनों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं।

ऐतिहासिक स्थलों का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने महिला चरखा समिति परिसर का भी दौरा किया और वहां मौजूद विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। उन्होंने जयप्रकाश अध्ययन एवं शोध केंद्र, प्रभावती स्मृति कक्ष और सम्पूर्ण क्रांति सभागार का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थानों को संरक्षित रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही स्थान देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक आंदोलनों की पहचान हैं।

महिला आरक्षण से बदलेगी राजनीति

मुख्यमंत्री का मानना है कि महिला आरक्षण लागू होने से राजनीति में नई सोच और संतुलन आएगा। इससे नीतियों में समाज के हर वर्ग की जरूरतों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकेगा।

यूपी में नई तबादला नीति, कर्मचारियों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार कर्मचारियों के तबादलों को लेकर नई नीति लाने की तैयारी में है। उच्च स्तर पर हुई बैठकों में इस प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है और इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल तबादलों को व्यवस्थित करना ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना है।

1 .पति-पत्नी को साथ रखने पर विशेष ध्यान

नई नीति का सबसे अहम पहलू यह है कि यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें यथासंभव एक ही जिले में तैनाती देने की कोशिश की जाएगी। इससे पारिवारिक जीवन पर सकारात्मक असर पड़ेगा और कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर रहने की परेशानी से राहत मिलेगी।

2 .दिव्यांग कर्मचारियों और परिजनों को राहत

सरकार ने दिव्यांग कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भी विशेष प्रावधान प्रस्तावित किए हैं। जिन कर्मचारियों के आश्रित 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग हैं, उन्हें स्थानांतरण से छूट देने की बात कही गई है। साथ ही, गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को उनकी सुविधा के अनुसार तैनाती देने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।

3 .तय अवधि पूरी होने पर होगा तबादला

नई नीति के तहत एक ही जिले में तीन साल और एक ही मंडल में सात साल तक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों का तबादला किया जाएगा। इसके अलावा, जो कर्मचारी लंबे समय से एक ही पटल (डेस्क) पर कार्यरत हैं, उन्हें भी बदलकर दूसरे स्थान पर भेजा जाएगा, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बनी रहे।

4 .तबादला प्रक्रिया के लिए तय समयसीमा

प्रस्ताव में यह भी तय किया गया है कि विभागाध्यक्षों को तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। इससे प्रक्रिया समयबद्ध होगी और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।

संवेदनशील पदों पर सख्ती

नई नीति में ईमानदारी और पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी गई है। जिन कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा संदिग्ध मानी जाती है, उन्हें संवेदनशील पदों पर तैनात नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती न देने का प्रावधान भी रखा गया है। यदि उनका पद मंडल स्तर का है, तो उन्हें उसी मंडल में भी पोस्टिंग नहीं दी जाएगी।

बंगाल में गरजे सीएम योगी, ताबड़तोड़ रैलियों से बदला चुनावी माहौल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत इन दिनों बेहद गरमाई हुई है और इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी रण में उतरकर माहौल को और तेज कर दिया है। गुरुवार को उन्होंने बाराबनी, रामपुरहाट और बोलपुर जैसे अहम विधानसभा क्षेत्रों में लगातार जनसभाएं कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।

रैलियों में उमड़ा जनसैलाब

सीएम योगी की सभाओं में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हालात ऐसे थे कि लोग वाहनों, घरों की छतों और पेड़ों तक पर चढ़कर उन्हें देखने को उत्साहित नजर आए। इससे साफ संकेत मिला कि उनकी रैलियों ने चुनावी माहौल में नई ऊर्जा भर दी है।

टीएमसी पर तीखा हमला

जनसभाओं में सीएम योगी ने टीएमसी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में माफिया राज और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। उनके मुताबिक, रेत, कोयला और जमीन से जुड़े माफियाओं को संरक्षण मिला हुआ है, जिससे आम जनता परेशान है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे भयमुक्त होकर मतदान करें और किसी भी दबाव में न आएं।

डबल इंजन सरकार का जोरदार वादा

सीएम योगी ने अपने भाषणों में डबल इंजन सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो विकास की गति दोगुनी होगी। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने से योजनाओं का लाभ तेजी से जनता तक पहुंचेगा।

सीएम योगी ने कानून-व्यवस्था को बनाया बड़ा मुद्दा

उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वहां भी अपराध और अराजकता की स्थिति थी, लेकिन सख्त कार्रवाई के जरिए हालात बदले गए। इसी मॉडल को बंगाल में लागू करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य को भय और हिंसा से मुक्त किया जाएगा।

सांस्कृतिक पहचान पर भी जोर, जनता से सीधा संवाद 

सीएम योगी ने बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि महान संतों और स्वतंत्रता सेनानियों की रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान हालात में राज्य अपनी पुरानी पहचान से दूर होता जा रहा है और इसे फिर से स्थापित करने की जरूरत है।

अपने संबोधनों के दौरान उन्होंने भाजपा उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे और जनता से बदलाव का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि जनता साथ देती है, तो राज्य में विकास, सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।

कल से शनि का प्रचंड असर! 5 राशियों की किस्मत लेगी बड़ा मोड़

राशिफल। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार शनि की चाल में बदलाव का प्रभाव अब तेज होने जा रहा है। कर्मफलदाता माने जाने वाले शनि ग्रह का यह परिवर्तन कई राशियों के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है। विशेष रूप से पांच राशियां ऐसी हैं, जिन्हें करियर, धन और सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में लाभ मिलने की संभावना है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल रहने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो आगे चलकर पदोन्नति का कारण बनेंगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के आसार हैं और निवेश से लाभ मिल सकता है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए नए अवसरों के द्वार खुल सकते हैं। व्यापार और नौकरी दोनों क्षेत्रों में प्रगति संभव है। लंबे समय से अटके कार्य पूरे होने की संभावना है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। कार्यस्थल पर सराहना मिलने के साथ आय में वृद्धि के संकेत हैं। योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर लाभ और बढ़ सकता है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के लिए यह समय परिवर्तन के साथ लाभ भी लेकर आ सकता है। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। करियर में नई दिशा मिलने और पुराने कार्यों के पूर्ण होने की संभावना है।

मकर राशि

मकर राशि पर शनि का विशेष प्रभाव माना जाता है। इस दौरान करियर में उन्नति और सामाजिक सम्मान में वृद्धि हो सकती है। महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए समय अनुकूल है, जिसका लाभ भविष्य में मिलेगा।

केंद्रीय कर्मचारियों ने ठोकी ताल, 3% DA हाइक की मांग हुई तेज

नई दिल्ली। देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। जनवरी 2026 से लागू होने वाली DA बढ़ोतरी का अब तक ऐलान न होने से कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ आवाज तेज कर दी है। इसी कड़ी में 16 अप्रैल को देशभर में लंच ऑवर के दौरान विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

लंच ऑवर में देशव्यापी प्रदर्शन

कर्मचारी संगठनों के आह्वान पर विभिन्न सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों ने काम के बीच लंच ऑवर में एकजुट होकर विरोध जताया। Confederation of Central Government Employees and Workers के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने लंबित DA और महंगाई राहत (DR) को तुरंत लागू करने की मांग की।

कई बड़े विभागों की भागीदारी

इस विरोध में आयकर, डाक, कृषि समेत कई प्रमुख विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। इसके अलावा सर्वे और अनुसंधान से जुड़े संस्थानों के कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन में भाग लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है।

कितनी हो सकती है बढ़ोतरी?

महंगाई भत्ता AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर तय होता है। उपलब्ध संकेतों के अनुसार इस बार DA में 2% से 3% तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में DA 58% है, जो बढ़कर 60% या 61% तक पहुंच सकता है।

सैलरी पर क्या होगा असर?

यदि 2% की बढ़ोतरी होती है, तो ₹25,000 बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी को करीब ₹500 मासिक फायदा हो सकता है। वहीं 3% बढ़ोतरी की स्थिति में यही लाभ लगभग ₹750 तक पहुंच सकता है। उच्च वेतन वर्ग के कर्मचारियों को इससे और अधिक राहत मिलेगी।

एरियर की भी बड़ी उम्मीद

कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर सिर्फ बढ़ोतरी पर ही नहीं, बल्कि एरियर पर भी टिकी है। जैसे ही सरकार DA लागू करेगी, जनवरी 2026 से बकाया राशि एक साथ मिलने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक राहत मिल सकती है।

8वें वेतन आयोग में नए पे-स्केल: कर्मचारियों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों ने जो सुझाव दिए हैं, उनमें सबसे अहम प्रस्ताव मौजूदा पे-लेवल सिस्टम को आसान बनाना है। इस बदलाव का मकसद न सिर्फ वेतन संरचना को सरल करना है, बल्कि प्रमोशन और आय में सुधार के रास्ते भी खोलना है।

1. जटिल पे-लेवल सिस्टम होगा आसान

अभी 7वें वेतन आयोग में 18 अलग-अलग पे-लेवल हैं, जिससे वेतन और प्रमोशन की प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है। National Council JCM की ओर से इन्हें घटाकर केवल 7 बड़े पे-स्केल में बदलने का प्रस्ताव दिया गया है। इससे पूरी व्यवस्था अधिक स्पष्ट और समझने में आसान हो जाएगी।

2. प्रमोशन की प्रक्रिया होगी तेज

नए प्रस्ताव के तहत कई पे-लेवल को आपस में मिलाया जाएगा। जैसे पे-लेवल 2 और 3 को जोड़कर एक नया स्केल बनाया जाएगा, वहीं 4 और 5 को मिलाकर दूसरा स्केल बनेगा। इसी तरह उच्च स्तर के कई लेवल्स को एक साथ लाकर बड़े ग्रेड तैयार किए जाएंगे। इससे कर्मचारियों को लंबे समय तक एक ही स्तर पर अटके रहने की समस्या से राहत मिल सकती है।

3. करियर ग्रोथ के ज्यादा मौके

पे-स्केल के मर्ज होने से पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे। अभी छोटे-छोटे लेवल के कारण प्रमोशन में देरी होती है, लेकिन नए सिस्टम में बड़े ग्रेड बनने से करियर में आगे बढ़ना आसान होगा।

4. हर साल 6% इंक्रीमेंट का प्रस्ताव

कर्मचारी संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि नए वेतन ढांचे में हर साल 6% की वार्षिक वृद्धि दी जाए। मौजूदा व्यवस्था की तुलना में यह ज्यादा है और इससे कर्मचारियों की आय में लगातार सुधार होता रहेगा।

5. महंगाई से राहत और बेहतर आय

नए पे-स्केल और बढ़े हुए इंक्रीमेंट का सीधा फायदा कर्मचारियों की जेब पर पड़ेगा। इससे महंगाई के प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी और कुल आय में स्थिर बढ़ोतरी बनी रहेगी।

ग्रहों का खास योग: 18 से 28 अप्रैल तक 5 राशियों के लिए खुशखबरी ही खुशखबरी

ज्योतिष डेस्क। 18 से 28 अप्रैल के बीच बन रहा विशेष ग्रह संयोग कुछ राशियों के लिए राहत, प्रगति और नए अवसरों का समय लेकर आ रहा है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इस दौरान ग्रहों की स्थिति ऐसी बन रही है, जिससे कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासतौर पर 5 राशियां ऐसी हैं, जिन्हें इस अवधि में फायदा होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

मेष राशि

मेष राशि के लिए यह समय नई शुरुआत और आगे बढ़ने का अवसर लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुके काम गति पकड़ सकते हैं और कार्यक्षेत्र में नए मौके मिल सकते हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ लिए गए फैसले बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों को इस दौरान मानसिक शांति और पारिवारिक सुख का अनुभव हो सकता है। घर-परिवार का माहौल सकारात्मक रहेगा और छोटे-छोटे आर्थिक लाभ भी मिल सकते हैं, जिससे स्थिति धीरे-धीरे मजबूत होगी।

तुला राशि

तुला राशि के लिए यह समय संतुलन बनाकर आगे बढ़ने का है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पुराने विवाद सुलझने के संकेत हैं। आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी इस दौरान दिखाई दे रही है।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए यह अवधि भाग्य का साथ देने वाली साबित हो सकती है। करियर में प्रगति के अवसर मिल सकते हैं और रुकी हुई योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। यात्रा से भी लाभ मिलने के योग बन रहे हैं।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के लिए यह समय आर्थिक रूप से मजबूती देने वाला हो सकता है। आय में बढ़ोतरी के संकेत हैं और निवेश से फायदा मिल सकता है। साथ ही सामाजिक स्तर पर मान-सम्मान में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, नए नियम लागू

पटना। बिहार में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव लागू किया गया है। अब स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं को अधिक स्वतंत्रता मिल गई है। Central Electricity Authority के संशोधित नियमों के बाद उपभोक्ता यह तय कर सकेंगे कि वे अपने स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में चलाना चाहते हैं या पोस्टपेड में।

आपको बता दें की पोस्टपेड सिस्टम में उपभोक्ता पहले बिजली का उपयोग करते हैं और बाद में बिल का भुगतान करते हैं, जैसा कि पारंपरिक व्यवस्था में होता रहा है। वहीं प्रीपेड मीटर में पहले रिचार्ज करना होता है और उसी के अनुसार बिजली का उपयोग किया जाता है। इससे खर्च पर नियंत्रण रखने में आसानी होती है।

1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ नया प्रावधान

नए नियम के तहत पहले जहां स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में रखना अनिवार्य था, वहीं अब यह बाध्यता खत्म कर दी गई है। 1 अप्रैल 2026 से उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने का अधिकार दे दिया गया है। ताकि वो खुद फैसला कर सकें।

प्रीपेड मीटर में अतिरिक्त फायदे

हालांकि, प्रीपेड विकल्प चुनने वाले उपभोक्ताओं को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। प्रति यूनिट दर में हल्की छूट मिलने की संभावना, रिचार्ज पर अतिरिक्त लाभ, दिन के कुछ समय में सस्ती बिजली का फायदा, ज्यादा बैलेंस रखने पर ब्याज जैसा लाभ। इन सुविधाओं से उपभोक्ता अपने खर्च को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।

अफवाहों से दूर रहने की सलाह

अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। स्मार्ट मीटर पारदर्शिता बढ़ाने और सटीक बिलिंग सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए हैं।

लिवर खराब होने से बचाना है? आज से अपनाएं ये 5 आदतें

नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और बढ़ते तनाव के कारण लिवर से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सही आदतें अपनाई जाएं, तो लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन, डिटॉक्स और ऊर्जा संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी देखभाल बेहद जरूरी है।

1. संतुलित और हल्का भोजन करें

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन कम करना जरूरी है। हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त आहार को रोजाना भोजन में शामिल करना चाहिए। इससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।

2. पर्याप्त पानी पीना जरूरी

शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में पानी अहम भूमिका निभाता है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से लिवर का काम आसान होता है और वह बेहतर तरीके से शरीर को डिटॉक्स कर पाता है।

3. शराब और धूम्रपान से दूरी

लिवर की सेहत के लिए सबसे जरूरी है शराब से दूरी बनाना। अत्यधिक शराब सेवन से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसी तरह धूम्रपान भी शरीर पर नकारात्मक असर डालता है, जिससे लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

4. नियमित व्यायाम करें

रोजाना हल्का व्यायाम या तेज चाल से चलना भी लिवर के लिए फायदेमंद है। इससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम होती है, जो फैटी लिवर जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करती है।

5. समय पर जांच और सही दिनचर्या

लिवर से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए नियमित हेल्थ चेकअप जरूरी है। साथ ही पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना भी लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

वैभव लक्ष्मी राजयोग: 5 राशियों को मिलेगा धन, सुख और समृद्धि

ज्योतिष डेस्क। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 18 अप्रैल को बन रहा विशेष संयोग कई राशियों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन प्रीति योग रात 11:56 बजे तक प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी प्रेम, सहयोग और रिश्तों में मधुरता बढ़ाने वाला योग माना जाता है।

इसी के साथ चंद्रमा और शुक्र की युति से वैभव लक्ष्मी राजयोग का निर्माण हो रहा है। यह योग विशेष रूप से धन, ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत देता है। आइए जानते हैं उन 5 राशियों के बारे में, जिन्हें इस शुभ संयोग का विशेष लाभ मिल सकता है।

मेष राशि:

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद रह सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और रुके हुए धन की प्राप्ति के संकेत हैं। करियर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

वृषभ राशि:

वृषभ राशि वालों के लिए यह योग भौतिक सुख-सुविधाओं में इजाफा कर सकता है। घर-परिवार में खुशहाली बढ़ेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। निवेश से भी लाभ मिल सकता है।

कर्क राशि:

कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय संतुलन और लाभ लेकर आ सकता है। परिवार में सामंजस्य बढ़ेगा और धन लाभ के अवसर मिल सकते हैं। पुराने विवाद सुलझने के योग हैं।

तुला राशि:

तुला राशि वालों के लिए यह योग करियर में उन्नति के रास्ते खोल सकता है। कार्यक्षेत्र में पहचान बढ़ेगी और आय में सुधार होगा। व्यापार करने वालों को भी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

मकर राशि:

मकर राशि के जातकों के लिए यह समय स्थिरता और सम्मान दिलाने वाला हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए समय अनुकूल रहेगा।

बिहार में खत्म होगी शराबबंदी? क्या करेंगे CM सम्राट चौधरी

पटना। बिहार में शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। नई सरकार के गठन के बाद इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राज्य में इस नीति की समीक्षा या बदलाव संभव है।

सरकार के अंदर से उठने लगी आवाज

सत्ताधारी गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी कानून को लेकर गंभीर पुनर्विचार की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इस कानून का असर जमीन पर उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रहा है, इसलिए इसकी समीक्षा जरूरी हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठा चुके हैं और आगे भी इसे मजबूती से रखते रहेंगे।

मुख्यमंत्री पर टिकी नजरें

माधव आनंद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उम्मीद जताई है कि नई सरकार इस मुद्दे पर व्यावहारिक सोच के साथ फैसला लेगी। उनके मुताबिक, बिहार जैसे राज्य में पूरी तरह शराबबंदी लागू करना कई तरह की चुनौतियां पैदा कर रहा है, जिन पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

राजस्व और व्यवस्था पर सवाल

शराबबंदी को लेकर दो तरह की राय सामने आ रही है। एक पक्ष इसे सामाजिक सुधार की दिशा में कदम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे आर्थिक नुकसान और अवैध कारोबार बढ़ने की वजह बता रहा है। विपक्ष के साथ-साथ कुछ सहयोगी दलों के बयान से यह मुद्दा और गर्म हो गया है।

हालांकि इस बयान के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह विधायक का निजी विचार है। पार्टी का आधिकारिक रुख अभी भी शराबबंदी के समर्थन में ही है और फिलहाल नीति में बदलाव की कोई औपचारिक चर्चा नहीं है।

शुक्र के शुभ प्रभाव से चमकेंगी ये 5 राशियां, खुलेंगे धन और प्रेम के नए रास्ते

ज्योतिष डेस्क। शुक्र ग्रह को वैदिक ज्योतिष में धन, वैभव, प्रेम और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। इस शुक्रवार को शुक्र का शुभ प्रभाव कुछ राशियों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार वृषभ, तुला, मिथुन, सिंह और मकर राशि के जातकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव, आर्थिक सुधार और प्रेम संबंधों में मधुरता के योग बन रहे हैं।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से मजबूत संकेत दे रहा है। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। प्रेम संबंधों में स्थिरता आएगी और पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहेगी।

तुला राशि

तुला राशि पर शुक्र का विशेष प्रभाव होने से यह समय अत्यंत शुभ माना जा रहा है। करियर में प्रगति के अवसर मिल सकते हैं, नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। रिश्तों में समझ और सामंजस्य बढ़ेगा।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसर लेकर आ सकता है। व्यापार में लाभ के योग बन रहे हैं और नए संपर्कों से फायदा मिलेगा। प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं और मानसिक तनाव में कमी आएगी।

सिंह राशि

सिंह राशि के लिए यह समय आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से अनुकूल रह सकता है। धन लाभ के अवसर मिल सकते हैं और पुराने निवेश से फायदा होने की संभावना है। साथ ही मान-सम्मान में वृद्धि और संबंधों में सुधार के योग बन रहे हैं।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए यह समय स्थिरता और प्रगति लेकर आ सकता है। करियर में धीरे-धीरे सुधार होगा और आय में बढ़ोतरी के संकेत हैं। पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे।