फ्रांस: 25 लाख कर्मचारियों के लिए अपना सिस्टम
फ्रांस ने इस दिशा में सबसे आक्रामक फैसला लिया है। वहां सरकारी कर्मचारियों को धीरे-धीरे अमेरिकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग टूल्स का इस्तेमाल बंद करना होगा। लक्ष्य है कि 2027 तक करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारी फ्रांस के अपने वीडियो कॉन्फ्रेंस प्लेटफॉर्म “Visio” का उपयोग करें। फ्रांस के सिविल सर्विस मंत्री डेविड अमिएल ने साफ कहा है कि वैज्ञानिक शोध, संवेदनशील जानकारियां और रणनीतिक नवाचारों को गैर-यूरोपीय कंपनियों के नियंत्रण में नहीं छोड़ा जा सकता।
जर्मनी: ओपन-सोर्स की ओर तेज कदम
जर्मनी के श्लेसविग-होल्सटीन राज्य ने पहले ही इस दिशा में ठोस कदम उठा लिया है। वहां करीब 44 हजार कर्मचारियों की ईमेल सेवाएं माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स सिस्टम पर शिफ्ट कर दी गई हैं। SharePoint की जगह अब Nextcloud का इस्तेमाल हो रहा है। इतना ही नहीं, जर्मन प्रशासन अब Windows ऑपरेटिंग सिस्टम की जगह Linux अपनाने पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है।
ऑस्ट्रिया की सेना का अलग रास्ता
ऑस्ट्रिया में यह बदलाव रक्षा क्षेत्र तक पहुंच चुका है। ऑस्ट्रियाई सेना ने रिपोर्ट तैयार करने और दस्तावेजी काम के लिए Microsoft Office की जगह LibreOffice को अपनाया है। इसकी बड़ी वजह यह है कि माइक्रोसॉफ्ट तेजी से अपने सिस्टम को क्लाउड-आधारित बना रहा है, जबकि LibreOffice अधिकतर ऑफलाइन काम करता है। सेना का मानना है कि ऑफलाइन सिस्टम संवेदनशील सैन्य दस्तावेजों के लिए ज्यादा सुरक्षित हैं और साइबर जासूसी के खतरे को कम करते हैं।
डेनमार्क भी इसी राह पर
डेनमार्क भी धीरे-धीरे अमेरिकी सॉफ्टवेयर विकल्पों से दूरी बनाकर ओपन-सोर्स समाधानों की ओर बढ़ रहा है। वहां सरकारी आईटी ढांचे में बदलाव को भविष्य की डिजिटल सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिका के लिए क्या मायने?
यूरोप का यह रुख अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए बड़ा संकेत है। अब मामला केवल लागत या सुविधा का नहीं, बल्कि डिजिटल आजादी और डेटा संप्रभुता का बन गया है। यदि यह ट्रेंड बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में अमेरिकी कंपनियों की सरकारी सेक्टर में पकड़ कमजोर हो सकती है।





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