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यूपी में शिक्षक भर्ती: अटल आवासीय विद्यालय में 385 पदों पर आवेदन शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के लिए सुनहरा अवसर सामने आया है। अटल आवासीय विद्यालय समिति, उत्तर प्रदेश ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 385 शिक्षक पदों पर भर्ती का ऐलान किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत पीजीटी (Post Graduate Teacher) और टीजीटी (Trained Graduate Teacher) दोनों पदों के लिए आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं।

पदों का विवरण और वेतन

कुल पद: 385 (पीजीटी + टीजीटी)

पीजीटी वेतन: 65,000 रुपये प्रति माह

टीजीटी वेतन: 62,000 रुपये प्रति माह

अनुबंध की अवधि: एक शैक्षणिक वर्ष (आवश्यकतानुसार समिति द्वारा बढ़ाया या घटाया जा सकता है)

आवेदन की अंतिम तिथि: 18 मार्च 2026, शाम 5:00 बजे तक।

आधिकारिक वेबसाइट। 

अधिक जानकारी और आवेदन फॉर्म के लिए उम्मीदवार अधिकृत वेबसाइट www.upbocw.in पर जा सकते हैं।

योग्यता और पात्रता

पीजीटी पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में स्नातकोत्तर डिग्री और शिक्षक प्रशिक्षण की मान्यता होना आवश्यक है। टीजीटी पदों के लिए स्नातक डिग्री और संबंधित विषय में शिक्षक प्रशिक्षण अनिवार्य है। सेवानिवृत्त शिक्षक भी इस भर्ती प्रक्रिया में आवेदन कर सकते हैं।

चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण और आवश्यक अनुभव के आधार पर किया जाएगा। समिति द्वारा चयनित उम्मीदवारों को एक शैक्षणिक वर्ष के लिए अनुबंधित शिक्षक के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, ₹2 लाख तक का कर्ज होगा माफ

मुंबई। महाराष्ट्र के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में घोषणा की है कि किसानों के फसली कर्ज 2 लाख रुपए तक माफ किए जाएंगे। यह राहत योजना ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमाफी योजना’ के तहत दी जाएगी।

30 सितंबर 2025 तक का बकाया कर्ज माफ

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में बताया कि 30 सितंबर 2025 तक का बकाया फसली कर्ज इस योजना के तहत माफ किया जाएगा। इस कदम से राज्य के लाखों किसानों को सीधी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

नियमित कर्जदार किसानों को प्रोत्साहन

सरकार ने उन किसानों के लिए भी 50,000 रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है, जिन्होंने समय पर और नियमित रूप से अपने कर्ज का भुगतान किया है। यह कदम किसानों को सावधानी और अनुशासन के प्रति प्रोत्साहित करेगा।

ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

फडणवीस ने बजट भाषण में यह भी कहा कि 1,000 से अधिक आबादी वाले गांवों को कंक्रीट सड़कों से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा।

महिला कल्याण योजना जारी रहेगी

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में महिलाओं के लिए चल रही ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ को बजट 2026-27 में पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के साथ जारी रखा जाएगा। इससे ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी।

महाराष्ट्र की आर्थिक महत्वाकांक्षा

मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक योजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य 2047 तक अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाना है। यह कदम न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे राज्य की आर्थिक ताकत और विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

सीएम योगी का बड़ा फैसला: यूपी के हर ब्लॉक में बनेगा आधुनिक खेल मैदान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण इलाकों में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य युवाओं को उनके नजदीकी इलाके में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करना है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी ब्लॉकों में आधुनिक स्टेडियम और खेल परिसर बनाए जाएंगे।

आधुनिक स्टेडियम और सुविधाएं

सरकार द्वारा बनाये जा रहे स्टेडियम केवल खेल का मैदान नहीं होंगे, बल्कि संपूर्ण स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स होंगे। इनका ढांचा और सुविधाएं इस प्रकार होंगी:

सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक: कम से कम 200 मीटर का ट्रैक ताकि युवा ट्रैक और फील्ड इवेंट्स का अभ्यास कर सकें।

मल्टीपर्पज हॉल: इनडोर खेल और प्रतियोगिताओं के लिए।

ओपन जिम: हर ब्लॉक में फिटनेस और प्रशिक्षण के लिए ओपन जिम।

प्रशिक्षण सुविधाएं: पेशेवर कोच और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के माध्यम से खिलाड़ी तकनीकी और रणनीतिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

जिलाधिकारियों के लिए निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि स्टेडियम निर्माण में गुणवत्ता और समयसीमा को सर्वोपरि रखा जाए। खेल बजट का इस्तेमाल केवल बुनियादी ढांचे, प्रतियोगिताओं और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन में किया जाए। खेल विकास समितियों की बैठकें नियमित रूप से हों।

स्पोर्ट्स कॉलेज होंगे 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'

खेल प्रतिभा को निखारने के लिए स्पोर्ट्स कॉलेजों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में बदलने की योजना है। इन्हें मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से जोड़ा जाएगा। इसका मकसद खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ शैक्षणिक और तकनीकी मार्गदर्शन देना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनें।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वास्थ्य पर असर

इस पहल से खेल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण स्तर पर प्रशिक्षकों, कोचों और इवेंट मैनेजमेंट में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। फुटबॉल, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे उनकी शारीरिक फिटनेस और मानसिक क्षमता में सुधार होगा। यह पहल भविष्य में सेना और पुलिस जैसी भर्ती परीक्षाओं में भी युवाओं के प्रदर्शन को बेहतर बनाएगी।

8वें वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में कब आएगा बदलाव?

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़े अपडेट ने नई चर्चा शुरू कर दी है। लंबे समय से इस आयोग के लागू होने का इंतजार किया जा रहा है और अब स्थिति यह है कि नए वेतन आयोग के प्रभाव की संभावित तिथि धीरे-धीरे साफ होती दिखाई दे रही है।

1 जनवरी 2026 से हो सकता है लागू

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आठवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट जारी होने और सरकार द्वारा सिफारिशों को पूरी तरह अपनाने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन कर्मचारी और पेंशनभोगियों के लिए इस तिथि को आधार माना जा रहा है।

अभी प्रक्रिया में है काफी देरी

सरकार ने आयोग की कार्यप्रणाली शुरू करने के लिए डायरेक्टर की नियुक्ति जैसी पहल की है, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि प्रक्रिया अपेक्षित गति से नहीं चल रही। जनवरी 2026 के बाद भी आयोग की औपचारिक बैठकों और सिफारिशों पर चर्चा में देरी देखने को मिली है।

जनता से सुझाव मांगे गए

हाल ही में 8th CPC की आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की गई है। इस पोर्टल पर 18 सवाल रखे गए हैं और आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद आयोग अपने बैठक और रिपोर्टिंग कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाएगा।

क्या बदल सकता है कर्मचारियों का वेतन

8वें वेतन आयोग के लागू होने से केंद्रीय कर्मचारियों के बुनियादी वेतन, महंगाई भत्ते और अन्य भत्तों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके साथ ही, पेंशनभोगियों के लिए भी रिवाइज्ड पेंशन का लाभ मिलेगा। कर्मचारियों और संगठनों का मानना है कि वेतन सुधार समय पर लागू होना चाहिए ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे।

11 मार्च से गुरु होंगे मार्गी: 5 राशियों को मिलेगी सफलता और समृद्धि

राशिफल। ग्रहों की चाल का हमारे जीवन पर गहरा असर होता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि 11 मार्च 2026 से गुरु (बृहस्पति) मार्गी होंगे। गुरु ग्रह ज्ञान, सौभाग्य, आर्थिक स्थिति और करियर से जुड़े मामलों में शुभ प्रभाव डालता है। इस बदलाव का लाभ विशेष रूप से 5 राशियों को मिलेगा, जिनकी जिंदगी में अब सकारात्मक बदलाव आएंगे।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए गुरु मार्गी होने का समय लाभकारी रहेगा। इस अवधि में करियर और नौकरी में उन्नति के अवसर बढ़ेंगे। पुराने निवेशों से लाभ मिलने की संभावना है। छात्रों के लिए पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। परिवार में सौहार्द और सुख शांति बनी रहेगी।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि के लिए गुरु का मार्गी होना आर्थिक मामलों में शुभ संकेत लेकर आता है। नए निवेश और व्यवसाय में वृद्धि के अवसर मिलेंगे। साथ ही, परिवार और रिश्तों में सामंजस्य बढ़ेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय अनुकूल है। लंबे समय से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलेगी।

3. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए गुरु मार्गी होने से वित्तीय लाभ और करियर में तरक्की के मार्ग खुलेंगे। किसी बड़े प्रोजेक्ट में सफलता मिलने की संभावना है। व्यापारियों के लिए यह समय लाभकारी रहेगा। वैवाहिक जीवन और सामाजिक संबंधों में भी सकारात्मक बदलाव आएंगे।

4. कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु का मार्गी होना शिक्षा, करियर और आत्मविश्वास के लिए शुभ है। नए अवसरों को पहचानने की क्षमता बढ़ेगी। निवेश और संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है। छात्रों के लिए यह समय विशेष रूप से फायदेमंद रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक संतुलन भी मिलेगा।

5. धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए गुरु मार्गी होना व्यापार, नौकरी और शिक्षा के लिए अत्यंत शुभ है। लंबी दूरी की यात्रा या विदेश से जुड़े काम सफल रहेंगे। धन लाभ और संपत्ति में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी। परिवार और मित्रों के साथ संबंध मधुर रहेंगे।

बिहार में जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने के नए नियम – जानें पूरी प्रक्रिया

पटना। बिहार में जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और निवास  प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और विश्वसनीय बनाना है। अब नागरिकों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अधिक स्पष्ट जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों का विवरण देना अनिवार्य होगा।

आवेदन प्रक्रिया में बदलाव

नए नियमों के अनुसार, अब आरटीपीएस (RTPS) काउंटर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने पर केवल नाम भरना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदक को अपना नाम, पिता का नाम, माता का नाम, और यदि शादीशुदा है तो पति या पत्नी का नाम भी दर्ज करना होगा। इसके साथ ही आवेदन के समय यह बताना होगा कि उसके पास कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध हैं।

जाति प्रमाण पत्र के दस्तावेज

जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय आवेदक को यह स्पष्ट करना होगा कि उसके पास कौन सा दस्तावेज उपलब्ध है। मान्य दस्तावेजों में खतियान, दानपत्र, भूमि से संबंधित अभिलेख, भूमिहीनों को आवंटित जमीन से जुड़े दस्तावेज और अन्य राजस्व अभिलेख शामिल हैं। यदि कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, तो आवेदन में “राजस्व अभिलेख की अनुपलब्धता में स्थल निरीक्षण” का विकल्प चुनना होगा। इसके बाद संबंधित अधिकारी स्थल निरीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी करेंगे।

आय प्रमाण पत्र के ये दस्तावेज

आय प्रमाण पत्र के लिए अब केवल तीन प्रकार के दस्तावेज मान्य होंगे। वेतन या पेंशन पर्ची, आयकर रिटर्न (ITR) और अन्य संबंधित अभिलेख। इन दस्तावेजों के आधार पर अधिकारी आवेदक की आय का सत्यापन करेंगे और प्रमाण पत्र जारी करेंगे।

निवास प्रमाण पत्र के दस्तावेज

निवास प्रमाण पत्र के लिए भी दस्तावेजों की सूची तैयार की गई है। इसमें खतियान, दानपत्र, भूमि संबंधी दस्तावेज, राशन कार्ड, वोटर आईडी, बिजली बिल, टेलीफोन बिल और भूमिहीनों को आवंटित जमीन के अभिलेख शामिल हैं। आवेदन करते समय उपलब्ध दस्तावेजों को चयनित करना अनिवार्य होगा।

नई व्यवस्था के फायदे

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी प्रमाण पत्र बनने की घटनाओं पर रोक लगेगी और केवल योग्य नागरिक ही सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। आवेदन के समय आवेदक को उपलब्ध दस्तावेज चुनने होंगे, जिनके आधार पर अधिकारी आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

F-35 से F-22 तक: अमेरिका और इजरायल के सबसे घातक फाइटर जेट

न्यूज डेस्क। आधुनिक युद्ध में वायु शक्ति किसी भी देश की सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। आज के समय में कई देश अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को विकसित करने की होड़ में लगे हैं। इस क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल को दुनिया की सबसे मजबूत वायु सेनाओं में गिना जाता है। इन देशों के पास ऐसे अत्याधुनिक फाइटर जेट मौजूद हैं, जो अपनी गति, स्टील्थ तकनीक और मारक क्षमता के कारण बेहद खतरनाक माने जाते हैं।

F-35: आधुनिक तकनीक से लैस स्टील्थ फाइटर

दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में Lockheed Martin F-35 Lightning II का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे अमेरिकी कंपनी Lockheed Martin ने विकसित किया है। इसकी खासियत यह है कि यह रडार पर बहुत कम दिखाई देता है और दुश्मन के इलाके में चुपचाप प्रवेश कर सकता है।

इस विमान में अत्याधुनिक सेंसर, नेटवर्किंग क्षमता और सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइल प्रणाली मौजूद है। अमेरिका के साथ-साथ इजरायल की वायुसेना भी इस विमान का इस्तेमाल करती है, जिससे उसकी सैन्य शक्ति और मजबूत हुई है।

F-22 रैप्टर: आसमान का सबसे शक्तिशाली फाइटर

Lockheed Martin F-22 Raptor को दुनिया के सबसे ताकतवर एयर सुपीरियोरिटी फाइटर जेट में गिना जाता है। यह विमान बेहद तेज गति से उड़ान भरने, दुश्मन के विमानों का पीछा करने और अत्याधुनिक हथियारों से हमला करने में सक्षम है। इसकी स्टील्थ तकनीक और सुपरक्रूज़ क्षमता इसे अन्य विमानों से अलग बनाती है।

यह विमान खास तौर पर दुश्मन की वायु शक्ति को खत्म करने और आसमान पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। सबसे खास बात यह हैं की अमेरिका ने Lockheed Martin F-22 Raptor को आज तक दुनिया के किसी भी देश को नहीं बेचा हैं।

इजरायल की खास रणनीतिक क्षमता

इजरायल की वायुसेना तकनीकी रूप से काफी उन्नत मानी जाती है। उसने अमेरिकी तकनीक वाले कई आधुनिक विमानों को अपनी जरूरतों के अनुसार अपग्रेड किया है। उदाहरण के लिए F-15 Eagle और F-16 Fighting Falcon जैसे विमानों का इस्तेमाल भी इजरायल प्रभावी तरीके से करता रहा है। इजरायल ने अपने फाइटर जेट में विशेष इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक हथियार जोड़े हैं, जिससे उसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है।

आधुनिक युद्ध में बढ़ती भूमिका

आज के दौर में युद्ध केवल जमीन पर नहीं बल्कि हवा और साइबर क्षेत्र में भी लड़ा जाता है। ऐसे में स्टील्थ तकनीक, तेज रफ्तार और अत्याधुनिक हथियारों से लैस फाइटर जेट किसी भी देश की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन गए हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा विकसित और इस्तेमाल किए जा रहे ये आधुनिक लड़ाकू विमान दुनिया की सैन्य शक्ति के संतुलन को भी प्रभावित करते हैं।

नीतीश के 10 फैसले: जिसने बदल दी बिहार की तस्वीर

पटना। बिहार की राजनीति में कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो सिर्फ सरकारी घोषणा भर नहीं होते, बल्कि राज्य की सोच और व्यवस्था पर गहरा असर डालते हैं। लंबे समय से बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए, जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक ढांचे और विकास के मॉडल को प्रभावित किया। इन कदमों का असर गांव से लेकर शहर तक देखा गया।

सात निश्चय योजना

राज्य के विकास को गति देने के लिए “सात निश्चय” योजना की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत हर घर नल का जल, गली-नाली निर्माण, शौचालय, युवाओं के कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार जैसे कार्यक्रम लागू किए गए।

शराबबंदी का फैसला

साल 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई। इस निर्णय का उद्देश्य समाज में बढ़ती शराबखोरी से होने वाली समस्याओं को कम करना था। खासतौर पर महिलाओं ने इस फैसले का व्यापक समर्थन किया, क्योंकि इससे घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई गई।

हर घर बिजली अभियान

राज्य के सभी गांवों और घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंचने से शिक्षा, छोटे उद्योग और दैनिक जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।

जातीय सर्वेक्षण की पहल

हाल के वर्षों में राज्य में जातीय सर्वेक्षण कराकर सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत आंकड़ा तैयार किया गया। इस पहल ने सामाजिक न्याय और संसाधनों के समान वितरण को लेकर नई चर्चा को जन्म दिया।

जीविका समूहों का विस्तार

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया गया। “जीविका” कार्यक्रम के माध्यम से लाखों महिलाओं को छोटे व्यवसाय, बचत और बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा गया, जिससे उनकी आय और आत्मनिर्भरता में वृद्धि हुई।

साइकिल और पोशाक योजना

स्कूल जाने वाली छात्राओं को साइकिल और पोशाक उपलब्ध कराने की योजना ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की स्कूल उपस्थिति बढ़ी और शिक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ी।

महादलित आयोग का गठन

दलित समाज के सबसे कमजोर वर्गों की पहचान कर उनके विकास के लिए विशेष योजनाएं तैयार करने हेतु महादलित आयोग का गठन किया गया। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को मुख्यधारा में लाना था।

लोक सेवा अधिकार अधिनियम

सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए लोक सेवा अधिकार कानून लागू किया गया। इसके तहत विभिन्न सरकारी प्रमाण पत्र और सेवाएं तय समय के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। समय सीमा का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया।

पुलिस में महिलाओं के लिए आरक्षण

महिला सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से बिहार पुलिस में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। इस कदम से पुलिस बल में महिलाओं की संख्या बढ़ी और कई मामलों में पीड़ित महिलाओं के लिए शिकायत दर्ज कराना आसान हुआ।

पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण

स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पंचायत और नगर निकाय चुनावों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इस निर्णय के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति और प्रशासनिक फैसलों का हिस्सा बनीं, जिससे ग्रामीण स्तर पर महिला नेतृत्व को नई पहचान मिली।

शादी में आ रही है रुकावट? इन 3 मंत्रों से जल्द बन सकते हैं विवाह के योग

न्यूज डेस्क। कई बार ऐसा होता है कि योग्य होने के बावजूद शादी की बात बार-बार बनते-बनते रह जाती है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति, कुंडली दोष या अन्य कारणों से विवाह में देरी हो सकती है। ऐसे में पूजा-पाठ और मंत्र जाप को शुभ माना जाता है। 

मान्यता है कि कुछ विशेष मंत्रों का नियमित जाप करने से विवाह में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे कम हो सकती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलने के योग बनते हैं।

1. कात्यायनी मंत्र (शीघ्र विवाह के लिए)

कात्यायनी देवी को विवाह से जुड़ी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी माना जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से अविवाहित महिलाओं के लिए शुभ बताया गया है।

मंत्र: ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी।

नंद गोपसुतं देवि पतिम मे कुरु ते नमः।।

जाप विधि:

सुबह स्नान करने के बाद शांत मन से इस मंत्र का 108 बार जाप करें। नियमित रूप से इसका जप करने से अच्छे विवाह के योग बनने की मान्यता है।

2. पत्नी मनोरमां देही मंत्र (पुरुषों के लिए)

यह मंत्र अविवाहित पुरुषों के लिए बताया गया है। माना जाता है कि इसका जाप करने से मन के अनुरूप जीवनसाथी मिलने की संभावना बढ़ती है।

मंत्र: पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।

जाप विधि:

सुबह स्नान के बाद श्रद्धा से इस मंत्र का नियमित जाप करना शुभ माना जाता है।

3. गुरु मंत्र (विवाह में बाधाएं दूर करने के लिए)

ज्योतिष में बृहस्पति यानी गुरु ग्रह को विवाह का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में गुरु कमजोर हो तो विवाह में देरी हो सकती है।

मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः

जाप विधि:

गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीले फूल अर्पित करके इस मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है।

यूपी में 12वीं पास के लिए निकली भर्ती, इंटरव्यू से चयन!

वाराणसी। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक अच्छा अवसर सामने आया है। Homi Bhabha Cancer Hospital & Mahamana Pandit Madan Mohan Malaviya Cancer Centre, वाराणसी ने फायरमैन (मल्टी-टास्किंग) पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों का चयन सीधे वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा।

इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 6 पदों को भरा जाएगा। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार निर्धारित तिथि पर इंटरव्यू में शामिल होकर नौकरी पाने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

पद का नाम और संख्या

भर्ती के तहत फायरमैन (मल्टी-टास्किंग) के कुल 6 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। यह भर्ती अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर की जाएगी, जिसमें चयनित उम्मीदवारों को मासिक वेतन प्रदान किया जाएगा।

शैक्षणिक योग्यता

इस पद के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (10+2) या उसके समकक्ष परीक्षा पास होना आवश्यक है। इसके साथ ही उम्मीदवार के पास राज्य सरकार की फायर सर्विस अकादमी से कम से कम छह महीने का फायर ट्रेनिंग सर्टिफिकेट या फायर एंड सेफ्टी में डिप्लोमा होना चाहिए।

शारीरिक मानदंड

फायरमैन पद के लिए शारीरिक फिटनेस भी अनिवार्य है। उम्मीदवार की न्यूनतम लंबाई 167 सेंटीमीटर होनी चाहिए। वहीं सीना सामान्य स्थिति में 80 सेंटीमीटर और फुलाने पर 85 सेंटीमीटर होना चाहिए।

आयु सीमा और वेतन

इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की अधिकतम आयु 27 वर्ष निर्धारित की गई है। चयनित उम्मीदवारों को लगभग 23,218 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा।

इंटरव्यू की तिथि

इस भर्ती के लिए वॉक-इन इंटरव्यू 12 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित स्थान पर पहुंचकर इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं।

यूपी में बनेगा 249KM लंबा एक्सप्रेस-वे, इन जिलों को खुशखबरी

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में बेहतर सड़क नेटवर्क तैयार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार नई परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। इसी दिशा में 249 किलोमीटर लंबे चित्रकूट–वाराणसी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना न केवल यातायात को आसान बनाएगी बल्कि धार्मिक पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देगी।

यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाला एक आधुनिक मार्ग होगा। इसके बनने से चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा।

डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया

परियोजना के निर्माण से पहले इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। इस रिपोर्ट के माध्यम से एक्सप्रेसवे की रूपरेखा, लागत, मार्ग और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत निर्धारित की गई है और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी एक विशेषज्ञ कंपनी को दी गई है। उम्मीद है कि कुछ ही महीनों में यह रिपोर्ट तैयार हो जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।

फोर से सिक्स लेन का आधुनिक हाईवे

यह ग्रीनफील्ड हाईवे फोर से सिक्स लेन का एंट्री कंट्रोल्ड मार्ग होगा, जिससे यातायात तेज और सुरक्षित रहेगा। इसके पूरा होने के बाद चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी तक की यात्रा लगभग ढाई घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों को समय की बचत के साथ बेहतर सड़क सुविधा भी मिलेगी।

बुंदेलखंड क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

इस परियोजना का सबसे अधिक लाभ बुंदेलखंड क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। महोबा, बांदा और आसपास के जिलों के लोगों के लिए धार्मिक और आर्थिक केंद्रों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। साथ ही मध्य भारत के कई क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पीएम मोदी का नया 'ग्लोबल' प्लान', किसानों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का हमेशा से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। देश की बड़ी आबादी आज भी खेती और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों और बाजार की मांग को देखते हुए भारत अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ निर्यात-उन्मुख कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। 

इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि यदि भारतीय कृषि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे तो किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार भी पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में कृषि को केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अब जरूरत है कि किसान फसल विविधीकरण अपनाएं और ऐसी फसलों की खेती करें जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग हो।

उच्च मूल्य वाली फसलों पर जोर

सरकार की योजना है कि तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष जलवायु का लाभ उठाकर उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन बढ़ाया जाए। काजू, नारियल, चंदन, कोको और अगरवुड जैसी फसलें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत दिला सकती हैं। इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों में बादाम, अखरोट और चिलगोजा जैसे ड्राई फ्रूट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है। इससे स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

मत्स्य पालन और कृषि निर्यात

कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी एक बड़े निर्यात क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। समुद्री और मीठे पानी की मछलियों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। यदि इस क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाए तो यह किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की भूमिका

खेती को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा रहा है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसानों की पहचान और उनकी जमीन से संबंधित डेटा को डिजिटल रूप में तैयार किया जा रहा है। इससे सरकार को योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और बाजार से बेहतर जुड़ाव भी संभव होगा।

ग्रामीण उद्यमिता और महिलाओं की भागीदारी

ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए भी विशेष पहल की जा रही है। महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को बाजार से जोड़ने के लिए नए मंच तैयार किए जा रहे हैं। इससे गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकेगी।

13 मार्च को शनि होंगे अस्त, साढ़ेसाती से मुक्त होंगी ये 3 राशियां

राशिफल। 13 मार्च को शनि अस्त होने जा रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार शनि का अस्त होना कई राशियों के लिए राहत और सकारात्मक बदलाव लेकर आता है। खासकर उन लोगों के लिए जिन पर लंबे समय से साढ़ेसाती का प्रभाव था, अब उनकी परेशानियों में कमी आएगी और जीवन में स्थिरता लौटेगी। इस मौके पर मेष, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए शनि का अस्त राहत लेकर आएगा। लंबे समय से करियर और नौकरी में जो रुकावटें थीं, वे अब दूर होने लगेंगी। पुराने प्रोजेक्ट में सफलता मिलने के योग हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और निवेश लाभ देने लगेंगे। मानसिक तनाव कम होगा और स्वास्थ्य के मामले में भी राहत मिलेगी।

2. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय वित्तीय मामलों में सकारात्मक बदलाव लाएगा। साढ़ेसाती के दौरान हुई मुश्किलें अब कम होंगी और लंबे समय से रुके हुए काम में प्रगति दिखाई देगी। परिवार और रिश्तों में भी समझौता और सामंजस्य बनेगा। रोजगार और व्यवसाय में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

3. कुंभ राशि

कुंभ राशि के लोगों के लिए शनि का अस्त विशेष रूप से पेशेवर जीवन में लाभकारी रहेगा। नौकरीपेशा लोग पदोन्नति या नए अवसर पा सकते हैं। छात्रों के लिए पढ़ाई में मनोयोग बढ़ेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के अवसर बढ़ेंगे। आर्थिक मामलों में स्थिरता आएगी और अनावश्यक तनाव कम होगा।

कल से शनि का असर, इन 4 राशियों की किस्मत होगी चमकदार

राशिफल। कल शनि अपनी शुभ चाल में चलेंगे। ज्योतिष के अनुसार शनि का प्रभाव कई मामलों में लाभकारी साबित हो सकता है। खासकर उन राशियों के लिए जिनकी मेहनत और संघर्ष लंबे समय से रुकावटों के कारण अटक गई थी। आइए जानते हैं, कौन-सी 4 राशियां इस समय लाभान्वित होंगी और किन क्षेत्रों में उन्हें फायदा मिलेगा।

1. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि का प्रभाव उनके करियर और आर्थिक स्थिति में सुधार लेकर आएगा। लंबे समय से रुके हुए काम में अब प्रगति होगी और पुराने निवेश लाभ देने लगेंगे। नौकरीपेशा मिथुन राशि वालों को प्रमोशन या बोनस मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य के मामले में हल्की सावधानी रखने की जरूरत है, लेकिन मानसिक तनाव कम होगा।

2. कर्क राशि

कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय धन और परिवार से जुड़े मामलों में शुभ रहेगा। परिवार में सुख-शांति बढ़ेगी और पुराने विवाद खत्म होंगे। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे भविष्य में स्थिरता और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगे। आर्थिक लेन-देन में भी सतर्कता के साथ फायदा मिलेगा।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातक अब अपनी मेहनत का फल देखेंगे। शनि का प्रभाव विशेष रूप से व्यवसाय और शिक्षा में लाभ देगा। जो विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं या अन्य परीक्षा में मेहनत कर रहे हैं, उन्हें सफलता मिलने की संभावना है। व्यवसायियों के लिए नए कॉन्ट्रैक्ट और साझेदारी के अवसर खुलेंगे।

4. धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए शनि का असर उनके करियर और स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक रहेगा। लंबे समय से रुकी परियोजनाओं में प्रगति होगी और आर्थिक लाभ बढ़ेगा। यात्रा और नए संपर्कों के जरिए पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में भी संतुलन आएगा।

कर्मचारी की मौत: परिवार को कैसे मिलेगा PF, पेंशन और बीमा?

नई दिल्ली। किसी परिवार में मुख्य कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु हमेशा दर्दनाक होती है। ऐसे समय में भावनात्मक संकट के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ जाता है। अगर मृतक कर्मचारी किसी संगठन में काम कर रहा था और उसकी सैलरी से PF कटता था, तो परिवार को कुछ वित्तीय मदद मिल सकती है।

1. सबसे जरूरी: मृत्यु प्रमाण पत्र

PF, पेंशन या बीमा क्लेम शुरू करने से पहले सबसे पहला कदम है मृतक का डेथ सर्टिफिकेट बनवाना। यह सभी औपचारिकताओं में अनिवार्य दस्तावेज माना जाता है।

2. PF और पेंशन का लाभ

यदि कर्मचारी की नौकरी के दौरान PF कटता था, तो जमा राशि नॉमिनी को दी जाती है। इसके अलावा, कर्मचारी ने पांच साल या उससे अधिक समय तक काम किया है, तो पति या पत्नी को पेंशन मिल सकती है। बच्चों को भी निर्धारित उम्र तक पेंशन का लाभ मिलता है।

3. बीमा सहायता

नौकरी के दौरान मौत होने पर कर्मचारी जमा लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) योजना के तहत परिवार को आर्थिक मदद मिलती है। यह राशि 7 लाख रुपये तक हो सकती है, जिससे परिवार को तत्काल राहत मिलती है।

4. EPFO के ऑनलाइन क्लेम की प्रक्रिया

आज EPFO ने क्लेम प्रक्रिया आसान कर दी है। नॉमिनी के नाम का रिकॉर्ड और कर्मचारी का UAN आधार से लिंक होना जरूरी है। EPFO यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर लॉगिन करें। ‘Death Claim Filing by Beneficiary’ विकल्प चुनें। जरूरी जानकारी जैसे UAN, नॉमिनी का नाम, जन्मतिथि और आधार दर्ज करें। OTP वेरिफिकेशन के बाद PF, पेंशन और बीमा के फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके e-Sign के साथ जमा करें।

5. बैंक और लोन का ध्यान रखें

मृतक का एटीएम कार्ड इस्तेमाल न करें। बैंक खाते की राशि नॉमिनी के माध्यम से ही ट्रांसफर करवाई जाए। यदि लोन पर बीमा है, तो शेष राशि बीमा द्वारा चुका दी जाती है।

6. आर्थिक सुरक्षा और राहत

सही दस्तावेज और प्रक्रिया का पालन करने पर परिवार को वित्तीय राहत मिल सकती है। यह कठिन समय में परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनती है।

कर्मचारियों की चिंता दूर होगी या नहीं? 8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन पर अपडेट

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की चर्चा के साथ ही पेंशन सुधार का मुद्दा फिर से गर्म हो गया है। कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस लाने की मांग जोर-शोर से उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि नई पेंशन प्रणालियों में कर्मचारी की आय की निश्चितता नहीं है, इसलिए OPS जैसी स्थिर व्यवस्था फिर से लागू होनी चाहिए।

कर्मचारी संगठन सक्रिय

केंद्रीय कर्मचारियों और श्रमिकों के संगठन जैसे अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) और एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड के प्रतिनिधि OPS बहाली के लिए अपनी मांगें राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र को सौंप चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नेंशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) दोनों को छोड़कर OPS को फिर से लागू किया जाना चाहिए।

UPS का कम रुझान

सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 30 नवंबर 2025 तक केवल 1.22 लाख केंद्रीय कर्मचारियों ने UPS को अपनाया। जबकि कुल पात्र कर्मचारियों की संख्या लगभग 23–25 लाख थी। इसका मतलब है कि कर्मचारियों में नई पेंशन व्यवस्था के प्रति भरोसा बेहद कम है।

यूनियन का तर्क

यूनियन नेताओं का कहना है कि OPS में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का लगभग 50% पेंशन और महंगाई भत्ते (DA) की गारंटी मिलती थी। इसके विपरीत, NPS और UPS में पेंशन की राशि बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है, जिससे भविष्य की आय अस्थिर हो जाती है। यही कारण है कि अधिकांश कर्मचारियों ने UPS को अपनाने से परहेज किया।

सरकार का रुख

सरकार का कहना है कि फिलहाल OPS को बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उनका तर्क है कि NPS से सरकारी खजाने पर पेंशन का बोझ संतुलित रहता है। UPS जैसे विकल्प से कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन का भरोसा मिलता है और वित्तीय संतुलन भी बना रहता है।

IDBI Bank में बंपर भर्ती: 200 पदों पर आवेदन का मौका

नई दिल्ली। IDBI Bank ने 2026 में अपनी भर्ती प्रक्रिया की घोषणा कर दी है। बैंक ने असिस्टेंट मैनेजर के कुल 200 पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह अवसर उन उम्मीदवारों के लिए है जिनके पास किसी भी विषय में स्नातक डिग्री (Bachelor’s Degree) है।

आवेदन की तिथि और प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन शुरू: 8 मार्च 2026

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 19 मार्च 2026

ऐसे करें आवेदन। उम्मीदवारों को अपना आवेदन IDBI Bank की आधिकारिक वेबसाइट (idbi.bank.in) के माध्यम से जमा करना होगा।

पात्रता और योग्यता

किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री आवश्यक है। उम्मीदवारों की आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और अन्य मानदंड IDBI Bank की आधिकारिक अधिसूचना में विस्तार से दिए गए हैं।

चयन प्रक्रिया

चयन के लिए आमतौर पर ऑनलाइन परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा। योग्य उम्मीदवारों को बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी कैरियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

महत्वपूर्ण जानकारी

सभी आवेदन ऑनलाइन मोड में ही स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन शुल्क और अन्य विवरण के लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें।

आवेदन की अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए उम्मीदवार समय रहते आवेदन करें।

यह भर्ती बैंक में प्रबंधन स्तर की शुरुआत करने का अच्छा अवसर है। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक अधिसूचना और पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ें और उसी के अनुसार आवेदन करें।

देश में इन 9 राज्यों के राज्यपाल बदले, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपाल और उप-राज्यपाल नियुक्त किए हैं। यह बड़े प्रशासनिक बदलाव विशेषकर पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया है।

महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ

दिल्ली: नए उप-राज्यपाल बने तरनजीत सिंह संधू, जो पहले भारतीय राजदूत रह चुके हैं।

लद्दाख: दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया।

पश्चिम बंगाल: आर.एन. रवि, जो तमिलनाडु के राज्यपाल थे, अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने।

तेलंगाना: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया।

महाराष्ट्र: तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया।

बिहार: लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन बिहार के नए राज्यपाल बने।

तमिलनाडु: केरल के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया।

हिमाचल प्रदेश: लद्दाख के उप-राज्यपाल कविंदर गुप्ता हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल बने।

नागालैंड: नंद किशोर यादव को नया राज्यपाल नियुक्त किया गया।

जानकारों के अनुसार ऐसे बदलाव अक्सर चुनावों के समय राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए किए जाते हैं। नए राज्यपालों और उप-राज्यपालों की तैनाती से राज्य सरकारों और केंद्र के बीच समन्वय मजबूत होगा।

अमेरिका ने मार्क-48 टारपीडो से ईरानी युद्धपोत उड़ाया, जानें इसकी ताकत

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को हिला दिया है। मंगलवार को अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाकर उड़ा दिया। इसके लिए मार्क-48 टारपीडो का इस्तेमाल किया, जिससे यह शक्तिशाली पोत पूरी तरह तबाह हो गया।

IRIS Dena: ईरान का धाकड़ युद्धपोत

IRIS Dena ईरान के आधुनिक युद्धपोतों में से एक था। इसे भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और जहाज-रोधी हथियारों से लैस किया गया था। पोत पर हेलीकॉप्टर भी तैनात था, जो समुद्री गश्त और निगरानी में काम आता था। इस हमले में रिपोर्ट के अनुसार 87 नाविक मारे गए।

मार्क-48 टारपीडो: कैसे करता है काम

मार्क-48 टारपीडो अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इसे रेडियो मार्गदर्शन या ध्वनिक होमिंग सिस्टम के जरिए लक्ष्य तक पहुंचाया जाता है। इसका वजन लगभग 1,700 किलोग्राम है और यह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलता है। टारपीडो जहाज के नीचे जाकर विस्फोट करता है। इसमें 227 किलोग्राम TNT की शक्ति होती है, जो जहाज की नींव तोड़कर उसे दो या दो से अधिक हिस्सों में बिखेर देता है।

आधुनिक तकनीक और मारक क्षमता

मार्क-48 में MK-48 ADCAP प्रणाली लगी है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, सटीक मार्गदर्शन और शक्तिशाली प्रणोदन क्षमता देती है। एक्टिव और पैसिव सोनार का उपयोग कर यह सीधे जहाज की नींव पर निशाना साधता है। इस वजह से इसे दुनिया का सबसे खतरनाक टारपीडो माना जाता है।

बिहार सरकार दे रही भारी सब्सिडी, किसानों की बल्ले-बल्ले!

पटना। बिहार के गन्ना किसानों के लिए खुशी की खबर है। राज्य सरकार ने गन्ना यंत्रीकरण योजना में शामिल होने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 19 मार्च 2026 कर दिया है। इससे अब किसानों के पास योजना का लाभ लेने के लिए और समय उपलब्ध हो गया है। पहले यह तारीख 3 मार्च निर्धारित थी। सरकार का उद्देश्य गन्ना खेती में आधुनिक यंत्रों का उपयोग बढ़ाकर उत्पादन और कार्यकुशलता सुधारना है।

कौन लेगा लाभ

योजना के तीसरे और चौथे चरण में चयनित 324 किसानों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इन किसानों को पहले ही कृषि यंत्र खरीदने के लिए अनुमतियाँ जारी की जा चुकी हैं। सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक किसान योजना में शामिल होकर अपनी खेती को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएं।

सब्सिडी और प्रक्रिया

गन्ना यंत्रीकरण योजना में किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर 50 से 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, जिससे वित्तीय लेन-देन सरल और पारदर्शी बने।

खरीद की पूरी प्रक्रिया

किसान सुमेक पोर्टल पर सूचीबद्ध विक्रेताओं से यंत्र खरीद सकते हैं। पहले पूरी राशि का भुगतान करना होगा, उसके बाद यंत्र का सत्यापन करने के बाद ही अनुदान की राशि जारी होगी। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि योजना का लाभ सही तरीके से पहुंचे।

अनुदान वाले यंत्र

योजना के तहत कई आधुनिक उपकरणों पर सब्सिडी दी जा रही है, जैसे:

पावर टीलर, पावर वीडर, डिस्क हैरो

ट्रैक्टर-माउंटेड स्प्रेयर, मिनी ट्रैक्टर (4WD)

लेजर लेवलर, लैंड लेवलर, रैटून मैनेजमेंट डिवाइस

शुगरकेन कटर प्लांटर और हाइड्रोलिक डिस्क हैरो

इन यंत्रों के इस्तेमाल से गन्ना की खेती तेज़, आसान और अधिक लाभकारी होगी।

8वें वेतन आयोग में बड़ा बदलाव? कर्मचारियों ने मां-बाप को भी सैलरी गणना में जोड़ने की मांग की

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक 8वें वेतन आयोग के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच फरवरी 2026 में नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड), जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की बैठक में कर्मचारियों ने एक बड़ी मांग रखी: परिवार की गणना में मौजूद सदस्यों की संख्या को 3 से बढ़ाकर 5 किया जाए, ताकि माता-पिता को भी फैमिली यूनिट में शामिल किया जा सके।

1957 से नहीं हुआ बदलाव

पे कमीशन में फैमिली यूनिट का कॉन्सेप्ट 1957 में 15वीं इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस में शुरू किया गया था। तब से अब तक बेसिक सैलरी कैलकुलेशन में केवल तीन सदस्यों वाला परिवार (पति, पत्नी और दो बच्चे) माना जाता रहा है। कर्मचारियों का तर्क है कि आजकल माता-पिता की देखभाल बच्चों की जिम्मेदारी बन गई है, इसलिए फैमिली यूनिट को दो और सदस्यों के साथ बढ़ाने की जरूरत है।

सैलरी पर असर

अगर फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 की जाती है, तो फिटमेंट फैक्टर में भी बड़ा बदलाव हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दो अतिरिक्त यूनिट जोड़ने से बेसिक सैलरी में लगभग 66% तक की बढ़ोतरी संभव है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत मिनिमम बेसिक पे 18,000 रुपये है।

नई कैलकुलेशन के आधार पर अनुमान इस प्रकार है:

फिटमेंट फैक्टर 3.0 → नई मिनिमम सैलरी लगभग 54,000 रुपये

फिटमेंट फैक्टर 3.25 → नई मिनिमम सैलरी लगभग 58,500 रुपये

इसका मतलब है कि सिर्फ परिवार यूनिट बढ़ाने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों को बड़ी राहत मिल सकती है। पेंशनधारकों के लिए भी ज्यादा फिटमेंट फैक्टर का मतलब होगा रिवाइज्ड पेंशन में बढ़ोतरी, जिससे रिटायरमेंट के बाद जीवन अधिक सुरक्षित और आरामदायक बन सके।

कर्मचारी संगठन यह मानते हैं कि फैमिली यूनिट में माता-पिता को जोड़ना अब समय की मांग है। अगर केंद्र सरकार उनकी इस मांग को मानती है, तो 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यह कदम न केवल कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि उनके परिवार की आजीविका और जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखेगा।

अमेरिका ने भारत को दी बड़ी राहत: अब रूस से आएगा कच्चा तेल

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल आयात कम करने के दबाव को कम कर दिया है और अब भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल के शिपमेंट खरीदने की 30 दिनों की विशेष अनुमति दी है। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अमेरिकी छूट का क्या है महत्व?

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस फैसले को अल्पकालिक राहत के रूप में पेश किया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन तेल खेपों पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में ट्रांजिट में फंसी हुई हैं। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, “इस कदम से रूस को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, लेकिन वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।”

भारतीय रिफाइनरियों को फायदा

इस विशेष अनुमति का सबसे बड़ा फायदा भारत की सरकारी तेल कंपनियों को होगा। इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और मंगलोर रिफाइनरी (MRPL) अब रूस से तेल की डिलीवरी को तुरंत सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। खासकर HPCL और MRPL के लिए यह बड़ी वापसी है, क्योंकि ये कंपनियां पिछले साल नवंबर के बाद रूस से तेल नहीं खरीद रही थीं।

कीमतों में हुआ है बदलाव

हालांकि भारत को अब रूस से तेल मिल रहा है, लेकिन यह पहले जितना सस्ता नहीं है। फरवरी 2026 तक रूस का 'यूराल्स क्रूड' भारत को लगभग 13 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर मिलता था। लेकिन अब मार्च और अप्रैल में आने वाली खेपों के लिए कीमतें बढ़कर अंतरराष्ट्रीय 'ब्रेंट क्रूड' से 4-5 डॉलर प्रति बैरल अधिक हो गई हैं। इसका मतलब है कि तेल तो भारत को मिल रहा है, लेकिन पहले जैसी भारी छूट अब उपलब्ध नहीं है।

वैश्विक तेल बाजार पर असर

इस अमेरिकी निर्णय से वैश्विक तेल बाजार में अचानक कीमतों में उछाल से बचाव होगा और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित नहीं होगी। साथ ही भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम रहेगा। इस 30 दिन की खिड़की ने भारतीय कंपनियों को रूस से तेल खरीदने के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया है, जिससे घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

यूपी में इन 'कर्मचारियों' के लिए बड़ा झटका! नहीं मिलेगा प्रमोशन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए ताजा आदेश ने कई लोगों की योजनाओं पर असर डाला है। कर्मचारियों को अब एसीपी (असेंशियल सर्विस प्रमोशन) और प्रमोशन का लाभ तभी मिलेगा जब वे अपने चल-अचल संपत्ति का ब्योरा समय पर जमा करेंगे। जिन कर्मचारियों ने यह जानकारी नहीं दी, उन्हें इस साल प्रमोशन का लाभ नहीं मिलेगा और विदेश यात्रा की अनुमति भी मुश्किल हो जाएगी।

10 मार्च तक मोहलत

प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को अपनी संपत्ति संबंधी जानकारी जमा करने के लिए 10 मार्च तक की मोहलत दी हैं। यदि कोई कर्मचारी इस अवधि में अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जमा नहीं करते हैं तो उनकी तरक्की रुक सकती हैं।

कितने कर्मचारियों पर प्रभाव

प्रदेश में कुल साढ़े आठ लाख कर्मचारी हैं। इनमें से 47,816 कर्मचारियों ने 31 जनवरी तक अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जमा नहीं किया था। इन कर्मचारियों का फरवरी का वेतन रोक दिया गया था।

तकनीकी समस्याओं का हवाला

कर्मचारियों का कहना है कि कई लोगों ने कंप्यूटर और इंटरनेट की कमी के कारण जानकारी अपलोड नहीं कर पाई। इसके अलावा, विभाग में ऑनलाइन सिस्टम में खामियां भी रही और कई कर्मचारी बड़े पैमाने पर एसआईआर करने में व्यस्त थे।

कर्मचारी संगठनों का विरोध

नगर विकास, विकास प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग सहित कई कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। उप्र फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विस असोसिएशन ने गुरुवार को मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजते हुए इस प्रतिबंध को खत्म करने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर जानकारी देने के बावजूद भी यह रोक जारी रही, तो कर्मचारी आंदोलन को मजबूर होंगे और अदालत का रास्ता अपनाएंगे।

ईरान नहीं! इस 7 देशों के पास हैं सबसे ताकतवर बैलेस्टिक मिसाइल

नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध में किसी भी देश की सैन्य ताकत का बड़ा पैमाना उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता होती है। इन मिसाइलों की शक्ति का आकलन उनकी मारक दूरी, गति और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता के आधार पर किया जाता है। कई देश अपनी सुरक्षा रणनीति के तहत लंबी दूरी की मिसाइलों का विकास कर चुके हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं।

1 .रूस

रूस के पास दुनिया की सबसे उन्नत और शक्तिशाली मिसाइल प्रणालियों में से एक RS-28 सरमत है। इसे अक्सर “सैटन-II” के नाम से भी जाना जाता है। यह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल लगभग 18,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है और कई परमाणु वारहेड ले जाने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज इतनी अधिक है कि यह पृथ्वी के लगभग किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती है।

2 .अमेरिका

अमेरिका की रणनीतिक रक्षा प्रणाली में LGM-30G मिनुटमैन-III और ट्राइडेंट-II D5 जैसी मिसाइलें अहम भूमिका निभाती हैं। ट्राइडेंट-II को पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है, जिससे इसे पहचानना और रोकना बेहद कठिन हो जाता है। इन मिसाइलों की मारक दूरी करीब 12,000 से 13,000 किलोमीटर तक बताई जाती है।

3 .चीन

चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी मिसाइल तकनीक को काफी आधुनिक बनाया है। उसकी DF-41 (डोंगफेंग-41) मिसाइल मोबाइल लॉन्चर से दागी जा सकती है और बेहद तेज गति से लक्ष्य तक पहुंचती है। इसकी अनुमानित रेंज 12,000 से 15,000 किलोमीटर के बीच मानी जाती है, जिससे यह लंबी दूरी के लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है।

4 .उत्तर कोरिया

उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल परीक्षणों के कारण अक्सर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में रहता है। उसकी ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलों को लंबी दूरी तक मार करने वाली शक्तिशाली प्रणालियों में गिना जाता है। इनकी अनुमानित रेंज लगभग 15,000 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह दूरस्थ लक्ष्यों तक पहुंचने में सक्षम हैं।

5 .ब्रिटेन

दुनिया की प्रमुख मिसाइल शक्तियों में ब्रिटेन भी शामिल है। उसकी रणनीति पूरी तरह समुद्र आधारित परमाणु प्रणाली पर आधारित है। ब्रिटेन अपनी सुरक्षा के लिए ट्राइडेंट-II D5 मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल करता है, जिसे पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है। इसकी मारक क्षमता करीब 12,000 किलोमीटर से अधिक मानी जाती है।

6 .फ्रांस

फ्रांस की परमाणु सुरक्षा रणनीति में M51 मिसाइल का महत्वपूर्ण स्थान है। यह पनडुब्बियों से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है और फ्रांस की समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक प्रणाली का मुख्य हिस्सा है। इसकी मारक क्षमता लगभग 8,000 से 10,000 किलोमीटर तक मानी जाती है।

7 .भारत

भारत ने भी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अग्नि-V देश की सबसे शक्तिशाली परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों में से एक है। इसकी आधिकारिक मारक दूरी 5,000 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। इस मिसाइल ने भारत को उन देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है जिनके पास लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल क्षमता है। 

इजरायल-ईरान नहीं! इन 10 देशों के पास है सबसे बड़ी सैन्य हवाई ताकत

नई दिल्ली। दुनिया में जब भी किसी युद्ध या सैन्य टकराव की बात होती है तो अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर सबसे ताकतवर सेना किस देश के पास है। किसी भी देश की सैन्य शक्ति का आकलन केवल सैनिकों की संख्या से नहीं बल्कि उसकी हवाई ताकत से भी किया जाता है। 

लड़ाकू विमानों के साथ-साथ हेलिकॉप्टर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, नौसेना के विमान और निगरानी विमान भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साल 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर दुनिया के कई देशों ने अपनी एयर पावर को काफी मजबूत किया है।

1. अमेरिका

हवाई ताकत के मामले में अमेरिका अभी भी दुनिया में सबसे आगे माना जाता है। इसके पास 13 हजार से अधिक सैन्य विमान हैं। अमेरिकी वायुसेना, नौसेना, मरीन कॉर्प्स और आर्मी एविएशन मिलकर एक विशाल एयर फ्लीट तैयार करते हैं। दुनिया के किसी भी हिस्से में तेजी से सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता भी अमेरिका की बड़ी ताकत मानी जाती है।

2. रूस

रूस का सैन्य ढांचा अपनी विशाल सीमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके पास चार हजार से अधिक सैन्य विमान हैं। रूस के पास इंटरसेप्टर जेट, बॉम्बर और भारी ट्रांसपोर्ट विमान का बड़ा नेटवर्क है, जो उसे हवाई सुरक्षा के मामले में मजबूत बनाता है।

3. चीन

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अपनी सेना को आधुनिक बनाने पर काफी निवेश किया है। उसके पास तीन हजार से ज्यादा विमान मौजूद हैं। स्टील्थ तकनीक वाले आधुनिक फाइटर जेट और तेजी से बढ़ती उत्पादन क्षमता के कारण चीन की हवाई शक्ति लगातार मजबूत होती जा रही है।

4. भारत

भारत की एयर पावर उसके भौगोलिक स्वरूप को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। पहाड़ी इलाकों, समुद्री सीमाओं और रेगिस्तानी क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग प्रकार के विमान इस्तेमाल किए जाते हैं। लगभग 2200 से ज्यादा सैन्य विमान भारत के बेड़े में शामिल हैं और आने वाले समय में नए फाइटर जेट्स के जुड़ने की संभावना भी है।

5. दक्षिण कोरिया

दक्षिण कोरिया ने अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक विमानों पर काफी निवेश किया है। करीब 1500 से अधिक सैन्य विमान इसके पास हैं, जिससे यह दुनिया की प्रमुख हवाई शक्तियों में गिना जाता है।

6. जापान

जापान एक द्वीपीय देश है, इसलिए उसकी सुरक्षा रणनीति में समुद्री निगरानी और एयर डिफेंस को खास महत्व दिया जाता है। लगभग 1400 से अधिक विमानों के साथ जापान अपनी सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा में काफी सक्षम माना जाता है।

7. पाकिस्तान

दक्षिण एशिया में भारत के बाद पाकिस्तान के पास दूसरा बड़ा सैन्य विमान बेड़ा है। इसके पास लगभग 1300 से अधिक विमान हैं। आधुनिक फाइटर जेट्स और संयुक्त प्रोजेक्ट के जरिए पाकिस्तान ने अपनी वायुसेना को मजबूत करने की कोशिश की है।

8. मिस्र

अफ्रीका में मिस्र की सैन्य ताकत काफी प्रभावशाली मानी जाती है। तीन महाद्वीपों के बीच स्थित होने के कारण यह देश अपनी एयर फोर्स को मजबूत बनाए रखने पर लगातार ध्यान देता रहा है। इसके पास एक हजार से अधिक सैन्य विमान हैं।

9. तुर्किए

तुर्किए नाटो का अहम सदस्य है और उसने अपनी सैन्य तकनीक को लगातार विकसित किया है। लगभग 1000 से अधिक विमानों के साथ यह देश यूरोप और एशिया के बीच रणनीतिक भूमिका निभाता है। भविष्य में अपने स्वदेशी स्टील्थ फाइटर प्रोग्राम पर भी काम कर रहा है।

10. सऊदी अरब

मध्य पूर्व के इस समृद्ध देश ने अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक सैन्य तकनीक और उन्नत फाइटर जेट्स पर बड़ा निवेश किया है। करीब 900 से ज्यादा विमान इसके सैन्य बेड़े का हिस्सा हैं, जिससे यह क्षेत्र की प्रमुख हवाई शक्तियों में शामिल है।

यूपी में इन कर्मचारियों को सख्त फरमान, सैलरी का बदला तरीका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में समय पर डॉक्टर और स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमीट्रिक सिस्टम से दर्ज की जाएगी और इसी आधार पर उनका वेतन जारी किया जाएगा।

अस्पतालों में समय पर मौजूदगी होगी जरूरी

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। कई जगहों पर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों के समय पर अस्पताल न पहुंचने की शिकायतें मिलती रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब कर्मचारियों की अनुपस्थिति या देरी सीधे उनके वेतन पर असर डाल सकती है।

सीएचसी और पीएचसी में भी लागू होगा नियम

अब तक अधिकतर जिला अस्पतालों में बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था थी, लेकिन अब इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक भी अनिवार्य किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि जल्द से जल्द इन संस्थानों में भी यह व्यवस्था लागू की जाए।

वेतन से जोड़ी जाएगी उपस्थिति

नई व्यवस्था के तहत डॉक्टरों और कर्मचारियों की रोजाना उपस्थिति बायोमीट्रिक मशीन के जरिए दर्ज की जाएगी। इसी रिकॉर्ड के आधार पर उनका मासिक वेतन जारी किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को समय पर ड्यूटी करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और अस्पतालों की कार्यप्रणाली भी बेहतर होगी।

अधिकारियों को दिए गए निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों के प्रमुखों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) और चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन सभी कर्मचारियों की बायोमीट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों को भी इस व्यवस्था को जल्द लागू करने और उसे वेतन प्रणाली से जोड़ने के लिए कहा गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कार्रवाई

यह कदम राज्य सरकार की समीक्षा बैठक के बाद उठाया गया है। निर्देशों के अनुसार अब सभी जिला अस्पतालों, महिला और संयुक्त चिकित्सालयों के साथ-साथ सीएचसी और पीएचसी में भी बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की जा रही है।

आज बन रहा है वृद्धि योग: 5 राशियों की किस्मत चमकेगी, धन और सफलता के योग

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति से कई बार ऐसे शुभ योग बनते हैं जो कुछ राशियों के लिए बेहद लाभदायक साबित होते हैं। आज ग्रहों की चाल से “वृद्धि योग” बन रहा है, जिसे उन्नति, लाभ और सफलता का संकेत माना जाता है। इस योग का प्रभाव कई राशियों पर पड़ेगा, लेकिन खास तौर पर 5 राशियों के लिए आज का दिन प्रगति और धन लाभ के नए अवसर लेकर आ सकता है।

मेष राशि

मेष राशि के लोगों के लिए आज का दिन सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का अच्छा फल मिल सकता है। नौकरी करने वालों को अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलने के संकेत हैं। लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होने की संभावना है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए वृद्धि योग आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। निवेश से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं और किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। परिवार का सहयोग भी आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह योग सफलता और सम्मान दिला सकता है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। व्यापार में विस्तार के अवसर मिल सकते हैं। आपकी योजनाएं सफल हो सकती हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए आज का दिन कई मामलों में शुभ रहेगा। आर्थिक लाभ के संकेत मिल रहे हैं और रुके हुए पैसे वापस मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को नई उपलब्धि मिल सकती है। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा और मानसिक शांति बनी रहेगी।

मकर राशि

मकर राशि के लोगों के लिए वृद्धि योग करियर और व्यापार में तरक्की का रास्ता खोल सकता है। काम के क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होने के संकेत हैं। मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने से आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।