सरकार का मानना है कि मासिक बिलिंग से किसानों पर एकमुश्त भुगतान का दबाव कम होगा और बिजली उपभोग की नियमित निगरानी भी संभव होगी। हालांकि, किसानों के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
मौसमी बिलिंग खत्म, अब हर महीने आएगा बिजली बिल
अब तक बिहार में सिंचाई के लिए उपयोग होने वाले ट्यूबवेल, बोरवेल और पंपसेट जैसे कृषि विद्युत कनेक्शनों पर मौसमी या अंतराल आधारित बिल जारी किए जाते थे। कई किसानों को लगभग तीन महीने बाद एक साथ बिजली बिल मिलता था।
नई व्यवस्था के तहत Irrigation Agriculture Service–Category I (IAS-I) श्रेणी के सभी उपभोक्ताओं के लिए मासिक बिलिंग अनिवार्य कर दी गई है। इसके बाद हर महीने बिजली की खपत के आधार पर बिल जारी होगा। इस संबंध में दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) ने सभी संबंधित अधिकारियों और बिजली आपूर्ति इकाइयों को आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
राज्य सरकार का कहना है कि मासिक बिलिंग लागू होने से किसानों को एक साथ बड़ी रकम जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। छोटे-छोटे बिल होने से भुगतान आसान होगा और बिजली बिल बकाया रहने की संभावना भी कम होगी। इसके साथ ही बिजली कंपनियों को भी उपभोग का रिकॉर्ड नियमित रूप से मिलेगा, जिससे राजस्व प्रबंधन और बिलिंग प्रणाली अधिक पारदर्शी बन सकेगी।
लगभग 8 लाख किसानों पर होगा असर
बिहार में कृषि फीडरों से जुड़े करीब 8 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता इस नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे। इनमें वे किसान शामिल हैं जो सिंचाई के लिए बिजली से चलने वाले पंपसेट, ट्यूबवेल या बोरवेल का उपयोग करते हैं। सरकार का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर मासिक बिलिंग लागू होने से बिजली व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा।





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