सरकारी विभागों की ओर से कर्मचारियों से संबंधित जरूरी आंकड़े भी पोर्टल पर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आयोग विभिन्न संगठनों से सुझाव लेने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। इसके बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी और सरकार की मंजूरी के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करने की मांग
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम बेसिक पे बढ़ाना शामिल है। एनसी-जेसीएम की ओर से न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग रखी गई है। संगठनों का तर्क है कि मौजूदा महंगाई, परिवार की जरूरतों और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए न्यूनतम वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी जरूरी है। अगर आयोग इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाता है तो सबसे निचले वेतन स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
2. फिटमेंट फैक्टर 3.83 करने की मांग
8वें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी बड़ी मांग रखी गई है। कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग कर रहे हैं। फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक पे को नए वेतन ढांचे में निर्धारित करने में मदद मिलती है। कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव के अनुसार यदि 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है।
3. हर साल कम से कम 6 फीसदी वेतन वृद्धि
कर्मचारी संगठनों की एक अन्य प्रमुख मांग वार्षिक वेतन वृद्धि को लेकर है। मांग है कि कर्मचारियों के वेतन में हर साल कम से कम 6 फीसदी की बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाए। संगठनों का कहना है कि नियमित वेतन वृद्धि से कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक राहत मिल सकती है। साथ ही लंबे समय तक सेवा करने वाले कर्मचारियों के वेतन में भी क्रमिक सुधार होगा।
4. HRA और दूसरे भत्तों में बदलाव
कर्मचारी संगठनों ने हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA और अन्य भत्तों को लेकर भी बदलाव की मांग रखी है। प्रस्ताव में न्यूनतम HRA स्लैब को 30 फीसदी तक करने की मांग शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि बड़े शहरों और अन्य क्षेत्रों में मकान का किराया लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा HRA व्यवस्था को वर्तमान खर्चों के अनुरूप संशोधित करने की जरूरत है। इसके अलावा अलग-अलग भत्तों, परिवार से जुड़े कैलकुलेशन और सेवा शर्तों में बदलाव की मांग भी आयोग के सामने रखी गई है।
5. OPS बहाली और पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव
पेंशन कर्मचारियों की मांगों का एक बड़ा हिस्सा है। कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पेंशन से जुड़े नियमों को अधिक लाभकारी बनाने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा देने की मांग भी उठाई जा रही है। पेंशनर्स संगठनों की ओर से भी आयोग के सामने अपनी अलग-अलग समस्याएं और सुझाव रखे जा रहे हैं।
रिपोर्ट के बाद क्या होगा?
कर्मचारी संगठनों से सुझाव और मांगें लेने के बाद 8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। इसके बाद सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नई वेतन व्यवस्था को लागू करने के लिए आवश्यक नियम और आदेश जारी किए जाएंगे।














.jpg)

.png)
.png)









.png)
