नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें आठवें वेतन आयोग पर टिकी हैं। करीब 10 साल बाद वेतन में संशोधन की उम्मीद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम बेसिक सैलरी, ग्रेच्युटी और एरियर को लेकर हो रही है। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और इसे अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसलों पर सबकी निगाहें रहेंगी।
1. फिटमेंट फैक्टर बढ़ा तो सैलरी में हो सकता है बड़ा उछाल
आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम मुद्दों में से एक है। सातवें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था। अब कर्मचारी संगठनों की ओर से इसे बढ़ाकर 2.86 से 3.83 तक करने की मांग की जा रही है। फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल नए वेतन ढांचे में मूल वेतन तय करने के लिए किया जाता है। यदि सरकार अधिक फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है, तो कर्मचारियों के बेसिक पे में बड़ा बदलाव संभव है।
2. ₹18,000 से बढ़ सकती है न्यूनतम बेसिक सैलरी
फिलहाल सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 प्रति माह है। आठवें वेतन आयोग में इसे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। अलग-अलग अनुमानों में न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹26,000, ₹40,000, ₹50,000 या उससे अधिक होने की संभावनाएं जताई गई हैं। वहीं, कुछ कर्मचारी संगठन इससे भी ज्यादा वेतन की मांग कर रहे हैं।
3. ग्रेच्युटी की सीमा ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख करने की मांग
सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने बड़ा प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इसकी अधिकतम सीमा ₹25 लाख है। कर्मचारी पक्ष की ओर से इसे बढ़ाकर ₹75 लाख करने की मांग की गई है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
4. 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद
आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों के बीच एरियर की भी चर्चा है। सातवें वेतन आयोग के बाद नए वेतन संशोधन के लिए 1 जनवरी 2026 को संभावित प्रभावी तारीख के रूप में देखा जा रहा है। यदि सरकार नई सिफारिशों को इस तारीख से लागू करती है, लेकिन वास्तविक भुगतान बाद में शुरू होता है, तो पात्र कर्मचारियों को नियमों के अनुसार बकाया राशि मिल सकती है।
5. हर 10 साल के बजाय 5 साल में वेतन संशोधन की मांग
कर्मचारी संगठनों की एक और अहम मांग है कि वेतन और पेंशन में बदलाव के लिए हर बार 10 साल तक इंतजार न करना पड़े। कुछ संगठनों ने वेतन संशोधन की अवधि घटाकर पांच साल करने का प्रस्ताव दिया है। इस मांग के पीछे तर्क है कि महंगाई और जीवनयापन की लागत लगातार बदलती रहती है। ऐसे में कम अंतराल पर वेतन की समीक्षा होने से कर्मचारियों को आर्थिक बदलावों के अनुरूप राहत मिल सकती है।
कब तक आएगी आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट?
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई हैं। आयोग को गठन के 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपनी हैं। 3 नवंबर 2025 से गणना करने पर यह समयसीमा मई 2027 के आसपास पूरी होती है। इसके बाद सरकार आयोग की सिफारिशों की समीक्षा करेगी और लागू किए जाने वाले बदलावों पर फैसला लेगी।