1. अमेरिका
अमेरिका लंबे समय से रॉकेट इंजन तकनीक में आगे रहा है। सरकारी एजेंसियों के साथ निजी कंपनियां भी अलग-अलग तरह के लिक्विड और मीथेन आधारित इंजन विकसित कर रही हैं। इसी तकनीक की मदद से अमेरिका भारी पेलोड को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाले लॉन्च सिस्टम संचालित करता है।
2. रूस
रूस की रॉकेट इंजन तकनीक का इतिहास काफी पुराना है। सोवियत दौर से विकसित इंजन तकनीक ने अंतरिक्ष अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रूस आज भी अपने लॉन्च वाहनों के लिए स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम तैयार करता है।
3. चीन
चीन ने अपने लॉन्ग मार्च लॉन्च व्हीकल परिवार के लिए विभिन्न रॉकेट इंजन विकसित किए हैं। उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम में तरल ईंधन और आधुनिक प्रोपल्शन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
4. जापान
जापान भी उन्नत रॉकेट इंजन तकनीक रखने वाले देशों में शामिल है। उसके H-IIA और बाद के लॉन्च सिस्टम में स्वदेशी इंजन तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। जापान का अंतरिक्ष कार्यक्रम उच्च दक्षता वाले प्रोपल्शन सिस्टम पर लगातार काम करता रहा है।
5 . फ्रांस
फ्रांस की भूमिका यूरोपीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में खास है। Ariane 6 का मुख्य इंजन Vulcain 2.1 फ्रांस में ArianeGroup द्वारा विकसित किया गया है। यह तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का इस्तेमाल करता है और 1371 kN तक थ्रस्ट देता है।
6 .भारत
भारत ने भी क्रायोजेनिक और सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के क्षेत्र में अपनी क्षमता विकसित की है। ISRO का CE20 इंजन LVM3 के ऊपरी चरण को शक्ति देता है और 2026 में इसका 22 टन थ्रस्ट पर सफल परीक्षण किया गया। वहीं सेमी-क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम में भी लगातार परीक्षण चल रहे हैं।






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