HappyNews@ Media Team

This channel publishes all kinds of news related to the world.you will always be grateful if you always keep such a relationship with me.

HappyNews @ Science and Technology

Click here for every news from science and stay with HappyNews.

Happy News @ प्रेरक विचार

Click here for a relayed news with a motivational idea and stay with HappyNews.

HappyNews @ Politics

Click here for news related to politics and stay with HappyNews.

HappyNews @ Lifestyle and Relationship

Click here for the motive thought with image and stay with HappyNews.

पानी-पानी होगा बिहार! कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट, 40 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

पटना। बिहार में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। 14 अगस्त 2026 को राज्य के कई हिस्सों में बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कुछ स्थानों पर बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है।

मौसम में यह बदलाव बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र में बने मौसम सिस्टम के प्रभाव से देखने को मिल सकता है। तटीय पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के पास बना निम्न दबाव क्षेत्र अब गहरे दबाव में तब्दील हो गया है। इसके अगले चरण में गंगा के मैदानी इलाकों से होकर पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने की संभावना है। इसका असर बिहार के मौसम पर भी दिखाई दे सकता है।

इन इलाकों में बारिश के साथ वज्रपात का खतरा

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और सारण में कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मौसम खराब होने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दक्षिण-पश्चिम बिहार में रोहतास, कैमूर, भोजपुर, बक्सर, अरवल और औरंगाबाद में भी कुछ स्थानों पर वर्षा होने के आसार हैं। वहीं दक्षिण-मध्य बिहार के पटना, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, गया, लखीसराय, शेखपुरा और बेगूसराय में भी बारिश हो सकती है।

इसके अलावा उत्तर-मध्य बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। उत्तर-पूर्व बिहार के सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और सहरसा में भी कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है।

दक्षिण-पूर्व बिहार के जमुई, मुंगेर, बांका, खगड़िया और भागलपुर में भी मौसम बदलने के संकेत हैं और एक-दो स्थानों पर बारिश होने की संभावना जताई गई है।

40 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकती हैं हवाएं

बारिश के साथ बिहार के कुछ हिस्सों में मौसम का मिजाज अचानक बदल सकता है। मेघगर्जन और वज्रपात के दौरान करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे में खुले मैदान, खेत या पेड़ के नीचे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

शनि देव की बदलेगी चाल, 5 राशियों पर बरसेगी कृपा, अच्छे दिन होंगे शुरू

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्म, न्याय, अनुशासन और मेहनत का कारक ग्रह माना जाता है। शनि की चाल या नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से देखने को मिलता है। 20 अगस्त 2026 की शाम 7 बजकर 45 मिनट पर शनि देव नक्षत्र परिवर्तन करते हुए बुध के स्वामित्व वाले रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। शनि देव इस नक्षत्र में 9 अक्टूबर 2026 तक रहेंगे। शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन से कुछ राशियों को करियर, धन, कारोबार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

1. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि का रेवती नक्षत्र में प्रवेश शुभ परिणाम दे सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या पदोन्नति का अवसर मिल सकता है। लंबे समय से किसी काम में आ रही रुकावट दूर होने की संभावना है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए संपर्कों का लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय के नए स्रोत बनने के योग बन सकते हैं।

2. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए शनि का नक्षत्र परिवर्तन करियर के लिहाज से लाभकारी रह सकता है। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलने से महत्वपूर्ण काम पूरे हो सकते हैं। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं, उन्हें कोई अच्छा अवसर मिल सकता है। व्यापारियों को किसी नई डील या प्रोजेक्ट से फायदा होने के संकेत हैं। निवेश से जुड़े मामलों में भी सोच-समझकर उठाए गए कदम लाभ दे सकते हैं।

3. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए शनि का रेवती नक्षत्र में गोचर आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। अटके हुए पैसे वापस मिलने की संभावना बन सकती है। आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं। नौकरी में मेहनत का उचित फल मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। व्यापार करने वाले जातकों को नए ग्राहक और नए कारोबारिक संपर्क मिल सकते हैं। परिवार में भी सुख-शांति का माहौल रहने की उम्मीद है।

4. मकर राशि

मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए यह नक्षत्र परिवर्तन इस राशि के जातकों के लिए विशेष महत्व रखता है। करियर में स्थिरता आने के साथ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का परिणाम मिलने का समय आ सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और बचत बढ़ाने में सफलता मिल सकती है। कारोबार में भी धीरे-धीरे विस्तार के अवसर मिल सकते हैं।

5. कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों को शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन से कई क्षेत्रों में लाभ मिलने की संभावना है। नौकरी और कारोबार में तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हो सकती है। किसी पुराने निवेश या अटके हुए काम से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। प्रतियोगी परीक्षा या नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को भी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, किसानों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

पटना: खरीफ फसलों की खेती कर रहे बिहार के किसानों के लिए राहत की खबर है। फसलों की सिंचाई पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए राज्य सरकार ने डीजल अनुदान योजना के तहत सहायता देने का प्रावधान किया है। डीजल पंपसेट से खेतों की सिंचाई करने वाले पात्र किसानों को अनुदान की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।

प्रति एकड़ मिलेगा 750 रुपये तक का लाभ

योजना के तहत डीजल से सिंचाई करने पर किसानों को 75 रुपये प्रति लीटर की दर से अनुदान मिलेगा। सरकार ने एक एकड़ भूमि के लिए अधिकतम 10 लीटर डीजल की खपत को मानक माना है। इस हिसाब से किसान को एक सिंचाई के लिए 750 रुपये प्रति एकड़ तक की सहायता मिल सकती है। एक किसान अधिकतम 8 एकड़ जमीन के लिए इस योजना का लाभ उठा सकता है। इससे डीजल से सिंचाई करने वाले किसानों को खेती की बढ़ती लागत से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

फसल के अनुसार अलग-अलग सीमा

अनुदान की अधिकतम सीमा फसल और सिंचाई की संख्या के आधार पर तय की गई है। धान की नर्सरी और जूट की फसल के लिए अधिकतम दो सिंचाई पर 1,500 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान मिल सकता है। वहीं धान, मक्का, दलहन, तिलहन, मौसमी सब्जियों तथा सुगंधित और औषधीय पौधों की फसलों के लिए अधिकतम तीन सिंचाई का प्रावधान है। इन फसलों में किसानों को 2,250 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान मिल सकता है।

30 अक्टूबर तक की सिंचाई पर लाभ

कृषि विभाग के अनुसार योजना का लाभ निर्धारित अवधि में खरीदे गए डीजल और की गई सिंचाई के लिए ही मिलेगा। 30 अक्टूबर 2026 तक की गई सिंचाई के लिए किसान आवेदन कर सकेंगे। एक आवेदन केवल एक सिंचाई से संबंधित होगा।

ऑनलाइन करना होगा आवेदन

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को बिहार कृषि विभाग की वेबसाइट या डीबीटी कृषि पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच के बाद पात्र किसानों को अनुदान की राशि डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।

सोते समय अचानक चढ़ती है नस? खाना शुरू कर दें ये 5 चीजें

हेल्थ डेस्क। रात में सोते समय पैर की मांसपेशियों में अचानक तेज ऐंठन या नस चढ़ना काफी परेशान करने वाला हो सकता है। यह समस्या कुछ लोगों में कभी-कभार होती है, जबकि कुछ लोगों को बार-बार इसका सामना करना पड़ता है। शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना और कुछ पोषक तत्वों की कमी इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं।

1. केला

केले में पोटैशियम के साथ मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, केवल केला खाने से बार-बार होने वाली ऐंठन का इलाज नहीं माना जा सकता।

2. दही

दही कैल्शियम और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। कैल्शियम मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रोजाना उचित मात्रा में दही या अन्य डेयरी उत्पाद लेना फायदेमंद हो सकता है।

3. पालक

पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में मैग्नीशियम समेत कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें नियमित भोजन में शामिल करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिल सकता है।

4. सूखे मेवे और बीज

बादाम, काजू, कद्दू के बीज और अन्य नट्स-सीड्स में मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में स्नैक के तौर पर लिया जा सकता है। ज्यादा मात्रा में खाने से कैलोरी बढ़ सकती है, इसलिए संतुलन जरूरी है।

5. पानी और इलेक्ट्रोलाइट वाले खाद्य पदार्थ

पर्याप्त पानी पीना भी बेहद जरूरी है। गर्मी, ज्यादा पसीना आने या शारीरिक मेहनत के बाद शरीर में तरल पदार्थों की कमी होने पर मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या बढ़ सकती है। पानी के साथ संतुलित आहार में फल और सब्जियां शामिल करना मददगार हो सकता है।

पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज, शरीर में छिपी हो सकती है ये गंभीर बीमारी

हेल्थ डेस्क। पैरों या टखनों में सूजन होना कई बार लंबे समय तक खड़े रहने, ज्यादा नमक खाने या लगातार बैठने की वजह से हो सकता है। लेकिन अगर सूजन बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ दर्द, सांस फूलना और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में यह शरीर के भीतर चल रही स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है।

1 .दिल से जुड़ी समस्या का संकेत

जब हृदय शरीर में रक्त को पर्याप्त रूप से पंप नहीं कर पाता, तो शरीर के निचले हिस्से में तरल जमा होने से पैरों और टखनों में सूजन हो सकती है। अगर सूजन के साथ सांस फूलना, जल्दी थकान या लेटने पर सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

2 .किडनी की परेशानी हो सकती है

किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाती है। किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे पैरों, टखनों और कभी-कभी चेहरे पर भी सूजन दिखाई दे सकती है। पेशाब में बदलाव या असामान्य थकान जैसे लक्षण भी साथ नजर आ सकते हैं।

3 .लिवर की बीमारी से भी संबंध

लिवर की गंभीर बीमारी में शरीर में तरल पदार्थ जमा होने और प्रोटीन के स्तर में बदलाव के कारण पैरों में सूजन हो सकती है। कुछ लोगों में पेट फूलने या पेट में पानी जमा होने की समस्या भी दिखाई दे सकती है।

4 .नसों की समस्या भी हो सकती है वजह

लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने से पैरों में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा पैरों की नसों से जुड़ी समस्या में भी सूजन, भारीपन या दर्द महसूस हो सकता है। अगर केवल एक पैर में अचानक सूजन आए और साथ में दर्द या लालिमा हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर पैरों में सूजन अचानक बढ़ गई है, एक पैर में ज्यादा है, इसके साथ सांस फूल रही है, सीने में दर्द हो रहा है या चक्कर जैसी समस्या हो रही है, तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें। वहीं लगातार बनी रहने वाली या बार-बार होने वाली सूजन की वजह जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

यूपी में कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग? सरकार के फैसले का इंतजार

लखनऊ: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर 8वें वेतन आयोग पर बनी हुई है। वहीं उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी भी यह जानना चाहते हैं कि राज्य में नया वेतनमान कब लागू होगा। फिलहाल यूपी सरकार की ओर से 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक तारीख या अंतिम फैसला जारी नहीं किया गया है। ऐसे में अभी लागू होने की निश्चित समयसीमा बताना संभव नहीं है।

यूपी में क्या है स्थिति?

उत्तर प्रदेश में 8वें वेतन आयोग को लागू करने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना या कैबिनेट फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए कर्मचारियों को नई सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और वेतन बढ़ोतरी से जुड़ी जानकारी के लिए सरकार के फैसले का इंतजार करना होगा।

हालांकि, पिछले वेतन आयोगों के आधार पर आगे की प्रक्रिया का अंदाजा लगाया जा सकता है। 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को यूपी सरकार ने दिसंबर 2016 में मंजूरी दी थी और संशोधित वेतनमान 1 जनवरी 2017 से प्रभावी किया गया था। उस समय 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ था।

पहले केंद्र के बाद हुआ था फैसला

6वें वेतन आयोग के मामले में भी उत्तर प्रदेश ने केंद्र के फैसले के बाद अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। राज्य में सिफारिशों को अगस्त 2008 में लागू किया गया और संशोधित वेतन का भुगतान दिसंबर 2008 से शुरू हुआ। हालांकि, इसका प्रभाव 1 जनवरी 2006 से माना गया था।

8वें वेतन आयोग पर क्या हो सकता है?

पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए संभावना है कि केंद्र स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद यूपी सरकार भी अपने कर्मचारियों के वेतनमान पर विचार करे। लेकिन केंद्र का फैसला राज्य में स्वतः लागू नहीं होता। इसके लिए यूपी सरकार को वित्तीय स्थिति का आकलन करने के साथ कैबिनेट और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

सिंह राशि में सूर्य का गोचर! इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर में मिलेगी तरक्की

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य आत्मविश्वास, मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता और करियर से जुड़ा ग्रह है। 17 अगस्त 2026 को सुबह 8:03 बजे सूर्य कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सूर्य यहां 17 सितंबर तक रहेंगे। अपनी ही राशि में सूर्य का गोचर कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बन सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। कारोबारियों को नए अवसर मिलने की संभावना है। संतान से जुड़ी कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए यह गोचर आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। परिवार में आपका प्रभाव बढ़ेगा और समाज में मान-सम्मान मिल सकता है। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। घर, वाहन या संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलने की संभावना है। लंबे समय से अटका कोई काम भी पूरा हो सकता है।

3. सिंह राशि

सूर्य आपकी ही राशि में गोचर करने जा रहे हैं, इसलिए इसका प्रभाव आपके लिए विशेष माना जा रहा है। आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत हो सकती है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। कारोबार में भी महत्वपूर्ण फैसले लेने का अवसर मिलेगा। हालांकि अहंकार और गुस्से से बचना जरूरी होगा।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर करियर में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी या पदोन्नति मिलने की संभावना है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर हो सकते हैं। व्यापार में कोई नया सौदा लाभ पहुंचा सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के अवसर मिलेंगे। काम के सिलसिले में यात्रा भी हो सकती है।

5. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों को भाग्य का साथ मिल सकता है। उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर से जुड़े मामलों में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है। नौकरी में तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। विदेश से जुड़े काम करने वालों को लाभ मिल सकता है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी।

6. धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर करियर और आर्थिक मामलों में लाभकारी रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत को पहचान मिलेगी। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। कारोबारियों को किसी बड़े प्रोजेक्ट या नए संपर्क से फायदा मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ निवेश के अवसर भी मिल सकते हैं।

7. कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य का गोचर साझेदारी और करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और कारोबार में नए साझेदार से लाभ होने की संभावना है। समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। हालांकि इस दौरान किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर रहेगा।

महिलाओं की बल्ले-बल्ले! यूपी में निकली नौकरी, ऐसे करें आवेदन!

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए नौकरी का अच्छा मौका सामने आया है। मुजफ्फरनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकत्री के पदों पर भर्ती निकाली गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 146 पदों को भरा जाएगा। इच्छुक और पात्र महिला अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।

13 अगस्त से शुरू हुआ आवेदन

आंगनवाड़ी कार्यकत्री भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 13 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है। आवेदन करने की अंतिम तारीख 2 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। अभ्यर्थियों को सलाह है कि अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा कर लें।

मुजफ्फरनगर जिले में होगी भर्ती

यह भर्ती उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के लिए है। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति जिले में आंगनवाड़ी कार्यकत्री के पद पर की जाएगी। भर्ती से जुड़ी विस्तृत जानकारी और पात्रता की शर्तें आधिकारिक अधिसूचना में दी गई हैं।

ऑनलाइन करना होगा आवेदन

इस भर्ती के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थी आधिकारिक भर्ती पोर्टल upanganwadibharti.in पर जाकर आवेदन कर सकती हैं। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को नोटिफिकेशन में दी गई योग्यता, जरूरी दस्तावेज और अन्य शर्तों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

146 पदों पर होगी नियुक्ति

इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 146 आंगनवाड़ी कार्यकत्री पदों पर नियुक्ति की जानी है। भर्ती का नोटिस 12 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। यह भर्ती बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अंतर्गत जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय, मुजफ्फरनगर द्वारा कराई जा रही है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, DA में हो सकती है 3% बढ़ोतरी!

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जुलाई-दिसंबर 2026 की अवधि के लिए सरकार महंगाई भत्ते में 3 फीसदी तक बढ़ोतरी कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों का DA मौजूदा 60 फीसदी से बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगा। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

1 जुलाई 2026 से लागू हो सकता है बढ़ा हुआ DA

महंगाई भत्ते में होने वाला संशोधन आमतौर पर साल में दो बार किया जाता है। पहला बदलाव जनवरी और दूसरा जुलाई से प्रभावी होता है। जुलाई 2026 के संशोधन का लाभ भी 1 जुलाई 2026 से लागू होने की उम्मीद है। सरकार द्वारा घोषणा बाद में किए जाने पर कर्मचारियों को एरियर का लाभ भी मिल सकता है।

AICPI-IW के आंकड़ों से बढ़ी उम्मीद

DA में बढ़ोतरी का निर्धारण औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। जुलाई 2025 से जून 2026 तक के आंकड़ों को जुलाई 2026 के DA संशोधन के लिए आधार बनाया जा रहा है।

जून 2026 में CPI-IW में 1.1 अंक की वृद्धि दर्ज की गई और यह 151.9 अंक पर पहुंच गया। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर 12 महीने का औसत करीब 149.54 रहा। सातवें वेतन आयोग के फॉर्मूले के अनुसार गणना करने पर DA करीब 63 फीसदी के आसपास बैठता है। इसी वजह से 3 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

1.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा

अगर सरकार DA में 3 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी देती है, तो इसका लाभ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। इससे कर्मचारियों की मासिक सैलरी और पेंशन में महंगाई भत्ते के हिस्से में बढ़ोतरी होगी। पेंशनर्स के लिए भी इसी अनुपात में Dearness Relief (DR) बढ़ने की उम्मीद है। इससे उनकी पेंशन में भी अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है।

अक्टूबर-नवंबर में हो सकता है ऐलान

केंद्र सरकार आमतौर पर जुलाई वाले DA संशोधन की घोषणा कुछ महीने बाद करती है। ऐसे में जुलाई-दिसंबर 2026 के लिए DA बढ़ोतरी का ऐलान अक्टूबर या नवंबर में होने की संभावना जताई जा रही है। 2026 में दिवाली 8 नवंबर को है, इसलिए त्योहार के आसपास घोषणा होने की उम्मीद की जा रही है।

बांझपन ने रोक दी मां-बाप बनने की राह? IVF से पूरी हो सकती है आपकी उम्मीद!

हेल्थ डेस्क। आज के समय में बांझपन यानी इनफर्टिलिटी की समस्या कई दंपतियों के लिए चिंता का कारण बन रही है। लंबे समय तक कोशिश के बावजूद गर्भधारण न होने पर कपल्स मानसिक तनाव से भी गुजरते हैं। ऐसे मामलों में IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक ऐसी सहायक प्रजनन तकनीक है, जो कुछ परिस्थितियों में माता-पिता बनने की संभावना बढ़ाने में मदद कर सकती है।

IVF क्या होता है?

IVF में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर प्रयोगशाला में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। गर्भधारण होने और स्वस्थ बच्चे के जन्म की गारंटी IVF में भी नहीं होती, लेकिन कई मामलों में यह एक प्रभावी विकल्प हो सकता है।

डॉक्टर दे सकते हैं सलाह?

IVF की जरूरत हर बांझपन के मामले में नहीं होती। फैलोपियन ट्यूब में रुकावट, शुक्राणुओं से जुड़ी कुछ समस्याएं, एंडोमेट्रियोसिस या लंबे समय तक दूसरे उपचारों से सफलता न मिलने जैसी परिस्थितियों में डॉक्टर IVF पर विचार कर सकते हैं। उम्र और दंपति की स्वास्थ्य स्थिति भी उपचार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

IVF की प्रक्रिया कैसे होती है?

सबसे पहले दवाओं की मदद से महिला के अंडाशय में एक से अधिक अंडाणु विकसित किए जाते हैं। इसके बाद अंडाणुओं को निकालकर प्रयोगशाला में शुक्राणुओं के साथ निषेचित किया जाता है। तैयार भ्रूण में से उपयुक्त भ्रूण को गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। इसके बाद गर्भधारण की जांच की जाती है।

सफलता कई बातों पर निर्भर

IVF की सफलता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। महिला की उम्र, अंडाणुओं की गुणवत्ता, पुरुष के शुक्राणुओं की स्थिति, भ्रूण की गुणवत्ता और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण इसका असर डाल सकते हैं। इसलिए इंटरनेट पर बताए गए किसी निश्चित सफलता प्रतिशत को हर कपल पर लागू नहीं किया जा सकता।

डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी

बांझपन का मतलब यह नहीं है कि माता-पिता बनना संभव नहीं होगा। लेकिन IVF कराने से पहले दंपति को विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर समस्या के कारण के आधार पर दवाओं, सर्जरी, IUI या IVF जैसे विकल्पों में से उपयुक्त उपचार सुझा सकते हैं।

हड्डियां हो रही हैं कमजोर? आज से खाएं ये 5 चीजें, शरीर में भर जाएगी ताकत!

हेल्थ डेस्क। उम्र बढ़ने, खान-पान में पोषक तत्वों की कमी और शारीरिक गतिविधि कम होने के कारण हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कैल्शियम के साथ विटामिन डी, प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। ऐसे में रोजाना की डाइट में कुछ पौष्टिक चीजों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

1. दूध और दही

दूध और दही कैल्शियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। नियमित मात्रा में इनका सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है। दही में मौजूद अन्य पोषक तत्व भी शरीर के लिए उपयोगी होते हैं।

2. रागी

रागी को कैल्शियम से भरपूर अनाजों में गिना जाता है। इसे आटे, रोटी, डोसा या दलिया के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है। नियमित संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर रागी हड्डियों के लिए फायदेमंद विकल्प हो सकता है।

3. तिल

तिल में कैल्शियम और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे सलाद, चटनी, लड्डू या सब्जियों में थोड़ी मात्रा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर है।

4. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, मेथी और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम, विटामिन और दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। इन्हें नियमित रूप से खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिल सकता है और हड्डियों के स्वास्थ्य को सहारा मिल सकता है।

5. बादाम

बादाम में कैल्शियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। रोजाना सीमित मात्रा में बादाम को डाइट में शामिल करना हड्डियों समेत पूरे शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है।

भारत में जल्द दिखेंगे प्लास्टिक के नोट! संसद में वित्त मंत्री ने दी बड़ी जानकारी

नई दिल्ली। भारत में करेंसी को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार ने ₹10 और ₹20 के पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कुल 200 करोड़ प्लास्टिक नोट तैयार किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी है।

₹10 और ₹20 के होंगे प्लास्टिक नोट

प्रस्ताव के मुताबिक ₹10 के 100 करोड़ और ₹20 के 100 करोड़ पॉलीमर नोट छापे जाएंगे। यह योजना भारतीय रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के आधार पर आगे बढ़ाई गई है। सरकार ने आरबीआई एक्ट, 1934 की धारा 25 के तहत इसके लिए मंजूरी दी है। इन नोटों को शुरुआत में देशभर में एक साथ जारी करने के बजाय सीमित क्षेत्रों में परीक्षण के तौर पर उतारा जा सकता है। ट्रायल के दौरान इनके इस्तेमाल, टिकाऊपन और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी।

पुराने कागजी नोट बंद नहीं होंगे

प्लास्टिक नोटों के आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागज के नोट अचानक चलन से बाहर हो जाएंगे। नए पॉलीमर नोट कागजी नोटों के साथ ही इस्तेमाल किए जाएंगे। इसलिए लोगों को अपने पास मौजूद ₹10 और ₹20 के नोटों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

क्यों लाए जा रहे हैं पॉलीमर नोट?

प्लास्टिक करेंसी को कागजी नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ माना जाता है। पानी, नमी और रोजमर्रा के इस्तेमाल से इन पर कम असर पड़ता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ सकती है और बार-बार पुराने नोटों को बदलने की जरूरत भी कम हो सकती है। इसके अलावा पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा विशेषताएं शामिल की जा सकती हैं, जिससे नकली नोट तैयार करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में इस तरह की करेंसी का इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है।

कब तक आ सकते हैं बाजार में?

आरबीआई की योजना के मुताबिक पायलट प्रोजेक्ट को अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रायल के नतीजे संतोषजनक रहने पर भविष्य में पॉलीमर नोटों के बड़े स्तर पर इस्तेमाल का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, आम लोगों के लिए इन नोटों की उपलब्धता की निश्चित तारीख और अंतिम लागत अभी स्पष्ट नहीं की गई है।

कमल की तरह खिलेगा भाग्य! इन 4 राशियों पर मेहरबान होंगे ग्रह, धन-दौलत में होगा इजाफा

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की बदलती चाल का असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। आने वाला समय कुछ राशि के जातकों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। इन लोगों के जीवन में लंबे समय से चली आ रही परेशानियां कम हो सकती हैं और धन, करियर व परिवार से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आइए जानते हैं वे 4 राशियां, जिनका भाग्य कमल की तरह खिल सकता है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए आने वाला समय नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। मेहनत का उचित परिणाम मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना है। परिवार में भी सुख-शांति का माहौल रहेगा। रुके हुए काम पूरे होने से मन प्रसन्न रहेगा।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों को करियर के क्षेत्र में अच्छी खबर मिल सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अवसर मिल सकता है, जबकि व्यापार करने वालों को लाभ के नए रास्ते मिल सकते हैं। अचानक धन लाभ के योग बन सकते हैं। पुराने तनाव और परेशानियों से राहत मिलने की संभावना है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय सफलता दिलाने वाला हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और क्षमता की तारीफ होगी। आय के स्रोत बढ़ सकते हैं और आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम में परिवार का सहयोग मिलेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और कई अटके काम गति पकड़ सकते हैं।

4. तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए समय अनुकूल रहने वाला है। धन संबंधी मामलों में फायदा मिल सकता है और निवेश से भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या पदोन्नति का अवसर मिल सकता है। दांपत्य और पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी और मानसिक तनाव कम होगा।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, जमीन मालिकों के लिए आई खुशखबरी

पटना। बिहार में ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप की जमीन के मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य मंत्रिमंडल ने जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण से जुड़ी रोक को लेकर अहम फैसला लिया है। अब विकास योजना के अंतिम प्रकाशन के बाद संबंधित जमीन के लेन-देन पर लगी रोक प्रभावी नहीं रहेगी। इससे जमीन मालिक तय नियमों के तहत अपनी जमीन बेच या दूसरे के नाम कर सकेंगे।

12 शहरों में विकसित हो रही टाउनशिप

राज्य सरकार ने बिहार में कुल 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है। इनमें पटना, सोनपुर, छपरा, सीतामढ़ी, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, मुंगेर, गयाजी और डेहरी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में विकास योजना के मुताबिक ही जमीन का इस्तेमाल और निर्माण किया जाएगा।

पाटलिपुत्र टाउनशिप में पहले ही मिली अनुमति

पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के मामले में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक पहले ही हटाई जा चुकी है। यहां विकास योजना का प्रारूप प्रकाशित हो चुका है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि टाउनशिप के पूरे क्षेत्र में जमीन के क्रय-विक्रय और हस्तांतरण पर अब रोक नहीं है।

हालांकि, जमीन खरीदने के बाद निर्माण करने के लिए संबंधित विकास योजना और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसमें भू-उपयोग, सड़क, भवन निर्माण, खुले स्थान और अन्य विकास कार्यों से जुड़े मानक शामिल हैं।

बिहार में शिक्षक बनने का मौका! STET 2026 के आवेदन 17 अगस्त से शुरू

पटना। बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 17 अगस्त 2026 से शुरू होने जा रही है। परीक्षा आयोजित करने को लेकर शिक्षा विभाग की मंजूरी मिलने के बाद आवेदन की तारीख तय की गई है। अभ्यर्थियों को आवेदन से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है, जिसे जल्द जारी किया जाएगा।

14 अगस्त को जारी होगी महत्वपूर्ण जानकारी

परीक्षा आयोजन से संबंधित विज्ञापन 14 अगस्त को जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। इसमें आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, शुल्क, परीक्षा से जुड़े नियम और अन्य जरूरी दिशा-निर्देशों की जानकारी मिलने की उम्मीद है। अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक विज्ञापन को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जाती है।

साल में एक बार होती है STET परीक्षा

माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन बिहार में शिक्षक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पात्रता परीक्षा के तौर पर किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह परीक्षा साल में एक बार आयोजित की जाती है। पिछली STET परीक्षा 14 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच हुई थी, जबकि इसका परिणाम 5 जनवरी 2026 को घोषित किया गया था।

पिछली परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी हुए थे शामिल

वर्ष 2025 में आयोजित STET में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा में राज्यभर से 4,42,214 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें से 2,56,301 अभ्यर्थी सफल रहे। परीक्षा का कुल उत्तीर्णता प्रतिशत 62.56 फीसदी बताया गया था। पिछली परीक्षा में कुल 16 विषयों को शामिल किया गया था।

यूपी में मृतक की उम्र साबित करना हुआ आसान, अब ये 5 कागजात होंगे मान्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का लाभ लेने वाले शहरी क्षेत्र के आवेदकों के लिए राहत भरी खबर है। अब योजना के तहत मृतक की उम्र साबित करने के लिए परिवार या कुटुंब रजिस्टर और हाईस्कूल प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने पर आवेदन अटकने की स्थिति नहीं रहेगी। शासन ने ऐसे मामलों में पांच अन्य दस्तावेजों को भी आयु प्रमाण के तौर पर स्वीकार करने का निर्णय लिया है।

इन 5 दस्तावेजों से साबित होगी उम्र

शहरी क्षेत्र में यदि मृतक का परिवार रजिस्टर में विवरण दर्ज नहीं है और हाईस्कूल स्तर का शैक्षिक प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक अन्य दस्तावेजों के माध्यम से आयु का सत्यापन करा सकेगा। इसके लिए राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और पैन कार्ड को मान्य किया गया है।

परिवार रजिस्टर नहीं होने से आती थी दिक्कत

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत पात्र परिवार को परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना में आवेदन के दौरान मृतक की उम्र का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। पहले जारी व्यवस्था के अनुसार मृतक की आयु प्रमाणित करने के लिए परिवार या कुटुंब रजिस्टर की प्रमाणित प्रति अथवा जन्मतिथि दर्ज शैक्षिक प्रमाणपत्र को प्राथमिक आधार माना गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार रजिस्टर उपलब्ध होने के कारण यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान थी, लेकिन शहरी क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं होने से आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।

नई व्यवस्था के तहत स्वघोषणा देना भी जरूरी

नई व्यवस्था के तहत निर्धारित पांच दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर मृतक की उम्र का सत्यापन कराया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए आवेदक को निर्धारित प्रारूप में स्वघोषणा पत्र भी देना होगा। स्वघोषणा में यह स्पष्ट करना होगा कि मृतक का हाईस्कूल स्तर का शैक्षिक प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है और संबंधित नगरीय क्षेत्र में परिवार या कुटुंब रजिस्टर भी मौजूद नहीं है। इसके बाद उपलब्ध मान्य दस्तावेज के आधार पर आयु का सत्यापन किया जा सकेगा।

सिर्फ शहरी आवेदकों को मिलेगा लाभ

समाज कल्याण विभाग के अनुसार यह सुविधा फिलहाल नगरीय क्षेत्र के आवेदकों के लिए लागू की गई है। यानी वार्ड या अन्य शहरी क्षेत्र में रहने वाले ऐसे परिवार, जिनके पास पुराने नियमों में निर्धारित आयु प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, वे नई व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे।

किसानों की बल्ले-बल्ले! यूपी सरकार के बड़े फैसले से मिलेगा सीधा लाभ

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मिर्जापुर जिले के देवरी में प्रदेश का पहला और देश का दूसरा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रैगन फ्रूट स्थापित किया जाएगा। शासन ने उद्यान विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। परियोजना की शुरुआत के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।

यह केंद्र किसानों के लिए केवल प्रशिक्षण स्थल नहीं होगा, बल्कि ड्रैगन फ्रूट की आधुनिक खेती, पौध तैयार करने, अनुसंधान और बेहतर उत्पादन की तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। ड्रैगन फ्रूट के लिए देश का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बेंगलुरु में स्थापित किया गया है। अब मिर्जापुर में बनने वाला केंद्र देश में इस तरह की दूसरी प्रमुख सुविधा होगी।

15 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा केंद्र

प्रस्तावित सेंटर को करीब 40 बीघा भूमि पर विकसित किया जाएगा। पूरी परियोजना पर लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यहां आधुनिक कृषि तकनीक के इस्तेमाल के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर काम किया जाएगा।

किसानों को मिलेंगे प्रमाणित पौधे

इस केंद्र की सबसे बड़ी खासियत किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पौध उपलब्ध कराना होगी। किसानों को प्रमाणित और रोगमुक्त ड्रैगन फ्रूट के पौधे मिल सकेंगे। इससे खराब गुणवत्ता वाले पौधों के कारण होने वाले नुकसान को कम करने और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

मिर्जापुर बन रहा ड्रैगन फ्रूट का हब

मिर्जापुर में पहले से ही ड्रैगन फ्रूट की खेती का विस्तार हो रहा है। ऐसे में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से जिले में इस फसल की खेती को और गति मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता और गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहेगा।

बृहस्पति-बुध की युति: 4 राशियों के जातकों को मिल सकता है बड़ा लाभ

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति और बुध दोनों को ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, वाणी और आर्थिक मामलों से जोड़कर देखा जाता है। 15 अगस्त 2026 के आसपास बनने वाली बृहस्पति-बुध की युति का प्रभाव कई राशियों पर पड़ सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस ग्रह संयोग से कुछ जातकों के लिए करियर, कारोबार, धन और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक अवसर बन सकते हैं।

1. मिथुन राशि

मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं, इसलिए बुध और बृहस्पति का प्रभाव इस राशि के जातकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी या कोई महत्वपूर्ण अवसर मिल सकता है। कारोबार करने वालों के लिए नए संपर्क बन सकते हैं और किसी पुराने प्रोजेक्ट से फायदा मिलने की संभावना है। आर्थिक मामलों में भी स्थिति बेहतर हो सकती है।

2. कन्या राशि

कन्या राशि के स्वामी भी बुध हैं। ऐसे में यह ग्रह युति इस राशि के लोगों के लिए करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम देने वाली मानी जा सकती है। प्रतियोगी परीक्षा या उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। नौकरी में प्रमोशन या नई भूमिका की संभावना बन सकती है। कारोबारियों को भी योजनाओं में सफलता मिलने के संकेत हैं।

3. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए बृहस्पति-बुध की युति धन और करियर के लिहाज से लाभकारी हो सकती है। अटके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं और आय के नए स्रोत मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। व्यापार करने वालों को नए सौदे या ग्राहकों से लाभ हो सकता है। हालांकि बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।

4. धनु राशि

धनु राशि के स्वामी बृहस्पति हैं। इस कारण गुरु और बुध की युति का प्रभाव इस राशि के जातकों के लिए विशेष माना जा सकता है। कार्यक्षेत्र में सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। विद्यार्थियों के लिए भी यह समय पढ़ाई और ज्ञान से जुड़े मामलों में सकारात्मक रह सकता है। विदेश यात्रा या दूर स्थान से जुड़े अवसर भी बन सकते हैं।

हार्ट अटैक आने से पहले दिख सकते हैं ये 5 लक्षण, समय रहते हो जाएं सावधान

हेल्थ डेस्क। हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक कम या बंद हो जाती है। कई मामलों में इसके लक्षण अचानक और तेज होते हैं, लेकिन कुछ लोगों में शरीर पहले से चेतावनी संकेत भी दे सकता है। इन संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है, क्योंकि शुरुआती मदद से गंभीर नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है।

1. सीने में दबाव या जकड़न

सीने के बीच या बाईं ओर दबाव, भारीपन, जकड़न, जलन या दर्द हार्ट अटैक का प्रमुख चेतावनी संकेत हो सकता है। कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे सीने पर भारी वजन रखा हो। यह परेशानी कुछ मिनट तक रह सकती है या बीच-बीच में वापस आ सकती है।

2. सांस लेने में परेशानी

बिना ज्यादा मेहनत किए सांस फूलना या सामान्य गतिविधि के दौरान अचानक सांस लेने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत हो सकता है। यह लक्षण सीने में दर्द के साथ या उसके बिना भी दिखाई दे सकता है। ऐसी स्थिति को केवल थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

3. हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े में दर्द

हार्ट अटैक का दर्द हमेशा केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। दर्द या असहजता एक या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन, जबड़े या ऊपरी पेट तक फैल सकती है। खासतौर पर अगर इसके साथ सीने में दबाव या सांस फूलने की समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

4. अचानक पसीना और कमजोरी

बिना गर्मी या व्यायाम के अचानक ठंडा पसीना आना, कमजोरी महसूस होना या शरीर में असामान्य बेचैनी भी चेतावनी संकेत हो सकता है। कुछ लोगों को हार्ट अटैक से पहले चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है।

5. मितली, चक्कर या असामान्य थकान

कुछ मामलों में हार्ट अटैक से पहले मितली, उल्टी, चक्कर या असामान्य थकान जैसी शिकायत हो सकती है। महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह से पीड़ित लोगों में लक्षण कभी-कभी सामान्य से अलग या कम स्पष्ट हो सकते हैं। इसलिए नए या अचानक शुरू हुए ऐसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए।

लक्षण दिखें तो क्या करें?

अगर सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस फूलना, पसीना, चक्कर या शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इंतजार करके खुद ठीक होने का इंतजार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

यूपी सरकार का बड़ा कदम, छात्रों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए योगी सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। समाज कल्याण विभाग के अधीन चलने वाले जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में अब पढ़ाई के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इसी योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश के पांच सर्वोदय विद्यालयों में अत्याधुनिक स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए गए हैं।

पांच विद्यालयों से शुरू हुई डिजिटल शिक्षा

स्मार्ट क्लासरूम परियोजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई है। इसके लिए गाजियाबाद के निडोरी, बुलंदशहर के बदनौरा, मेरठ के हस्तिनापुर, बरेली और पीलीभीत के सर्वोदय विद्यालयों का चयन किया गया है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को पारंपरिक ब्लैकबोर्ड आधारित पढ़ाई के साथ डिजिटल माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।

नई व्यवस्था के तहत कक्षाओं को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस किया गया है। स्मार्ट बोर्ड और स्मार्ट पैनल के जरिए शिक्षक विषयों को वीडियो, ग्राफिक्स और दूसरे डिजिटल माध्यमों से समझा सकेंगे। इससे विद्यार्थियों के लिए कठिन विषयों को समझना आसान होने की उम्मीद है।

35 करोड़ रुपये की परियोजना

यह पहल कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है। परियोजना के लिए FIRST ORIGIN NextGen Edutech Pvt. Ltd. के साथ सहयोग किया गया है। पूरी परियोजना की लागत करीब 35 करोड़ रुपये बताई गई है।

पहले चरण में चयनित पांच विद्यालयों में एक-एक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किया गया है। इन कक्षाओं में स्मार्ट तकनीक के अलावा एयर कंडीशनर और वुडेन फ्लोरिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए बेहतर और सुविधाजनक अध्ययन वातावरण तैयार करना है।

प्रदेश में 103 सर्वोदय विद्यालय

समाज कल्याण विभाग के तहत फिलहाल उत्तर प्रदेश में 103 सर्वोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य विशेष रूप से ऐसे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिन्हें बेहतर शैक्षणिक संसाधनों तक आसानी से पहुंच नहीं मिल पाती।

यूपी में फिर सक्रिय होगा मानसून, इन जिलों में भारी बारिश के आसार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उमस और गर्मी से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम में एक बार फिर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव वाले क्षेत्र और मानसूनी ट्रफ के उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ने से प्रदेश में बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार से खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां बढ़ेंगी और कई इलाकों में तेज बौछारों के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वी यूपी के कई जिलों में गुरुवार को मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, सोनभद्र, संतकबीरनगर, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी और प्रयागराज समेत आसपास के क्षेत्रों में बारिश के आसार हैं। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग ने ऐसे इलाकों में बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मानसून की बढ़ेगी सक्रियता

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का प्रभाव उत्तर प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। इसके साथ ही मानसूनी ट्रफ के प्रदेश की ओर खिसकने से बारिश का दायरा बढ़ सकता है। पिछले कई दिनों से बारिश कम होने के कारण कई शहरों में तापमान और उमस बढ़ गई थी। अब बारिश होने पर अधिकतम तापमान में गिरावट आने की संभावना है।

लखनऊ में शुक्रवार को तेज बारिश के आसार

राजधानी लखनऊ में गुरुवार को आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। हालांकि बीच-बीच में धूप भी निकलने की संभावना है। शुक्रवार को मौसम ज्यादा सक्रिय रहने का अनुमान है। सुबह हल्की से मध्यम बारिश के बाद शाम से रात के बीच तेज बारिश हो सकती है।

करीब 20 जिलों में सामान्य से ज्यादा रहा तापमान

पिछले दिनों बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने के कारण राजधानी समेत प्रदेश के करीब 20 जिलों में दिन का तापमान सामान्य से ऊपर पहुंच गया था। लगातार बढ़ती उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। अब बारिश का नया सिस्टम सक्रिय होने से मौसम में बदलाव की उम्मीद है।

मौसम विभाग ने लोगों से बारिश के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है। खासकर गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति में अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी होगा। आने वाले दिनों में पूर्वी यूपी के साथ प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

लिवर सिरोसिस क्या है? जानिए 5 बड़े संकेत, समय रहते पहचानना जरूरी

हेल्थ डेस्क। लिवर सिरोसिस एक गंभीर स्थिति है, जिसमें लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचने के कारण स्वस्थ ऊतक की जगह निशान (स्कार टिश्यू) बनने लगते हैं। धीरे-धीरे इससे लिवर की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसकी शुरुआत में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

1. लगातार थकान और कमजोरी

हर समय थकान महसूस होना, कमजोरी रहना या सामान्य काम करने में भी पहले की तुलना में अधिक परेशानी होना लिवर की बीमारी से जुड़ा संकेत हो सकता है। हालांकि थकान के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

2. भूख कम होना और वजन घटना

बिना कोशिश के वजन कम होना, भूख में कमी, मतली या उल्टी जैसे लक्षण भी सिरोसिस में दिखाई दे सकते हैं। अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

3. पेट या पैरों में सूजन

लिवर की बीमारी बढ़ने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इससे पेट फूलने या पैरों, टखनों और पंजों में सूजन की समस्या हो सकती है।

4. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना

त्वचा या आंखों के सफेद हिस्से का पीला होना यानी पीलिया लिवर की गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसके साथ पेशाब का रंग गहरा होने जैसी समस्या भी दिखाई दे सकती है।

5. भ्रम या सोचने-समझने में बदलाव

सिरोसिस गंभीर होने पर कुछ लोगों में भ्रम, ध्यान लगाने में परेशानी, याददाश्त में बदलाव या व्यवहार में परिवर्तन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर लगातार थकान, वजन कम होना, पेट या पैरों में सूजन, पीलिया, असामान्य खुजली या मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। सिरोसिस की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं होती, डॉक्टर जरूरत के अनुसार मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, ब्लड टेस्ट और इमेजिंग जांच कर सकते हैं।

गुरुवार को 4 राशियों का भाग्योदय! धन-करियर में मिल सकती है बड़ी खुशखबरी

राशिफल। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार आज गुरुवार का दिन कुछ राशियों के लिए खास रह सकता है। गुरु ग्रह को ज्ञान, धन, शिक्षा, करियर और समृद्धि का कारक माना जाता है। ऐसे में ग्रहों की स्थिति से मेष, मिथुन, तुला और धनु राशि के जातकों को शुभ परिणाम मिलने की संभावना है। नौकरी, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए आज का दिन नई उम्मीद लेकर आ सकता है। नौकरी में जिम्मेदारी बढ़ने के साथ कोई अच्छा अवसर मिल सकता है। कारोबारियों को रुका हुआ काम आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। धन से जुड़े मामलों में भी राहत मिल सकती है। किसी पुराने संपर्क से फायदा मिलने की संभावना है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन करियर के लिहाज से अच्छा रह सकता है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सकारात्मक खबर मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी। व्यापार में नए लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ दे सकता है। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होने के संकेत हैं।

तुला राशि

तुला राशि वालों को आज धन और कामकाज से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। लंबे समय से अटका कोई भुगतान मिलने की संभावना है। नौकरी में तरक्की या नई जिम्मेदारी का रास्ता खुल सकता है। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए गुरुवार का दिन विशेष लाभकारी रह सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। कारोबार में लाभ की स्थिति बन सकती है और आय के नए स्रोत सामने आ सकते हैं। किसी महत्वपूर्ण योजना पर काम शुरू करने के लिए दिन अनुकूल रह सकता है।

यूपी सरकार ने दी 1 बड़ी सौगात, किसानों के लिए आई खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आलू किसानों के लिए सरकार ने राहत देने वाली पहल की है। फसल तैयार होने के बाद भंडारण और बाजार में कीमत गिरने की चिंता से जूझने वाले किसानों को अब आर्थिक मदद देने की तैयारी है। उद्यान विभाग के मुताबिक, किसानों को आलू के भंडारण शुल्क में प्रति किलो 1 रुपये की सहायता दी जाएगी और यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।

इस योजना के लिए सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे किसानों को फसल को सुरक्षित रखने के दौरान आने वाले खर्च का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

बाजार भाव गिरने पर भी मिलेगी राहत

आलू की कीमतों में उतार-चढ़ाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती रहता है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने भाव स्थिरता के लिए भी व्यवस्था की है। भामाशाह भाव स्थिरता कोष के तहत पात्र किसानों को डेढ़ रुपये प्रति किलो की दर से भावांतर भुगतान दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य बाजार में कीमत कम होने की स्थिति में किसानों को होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम करना है।

दूसरे राज्यों में तलाशे जा रहे नए बाजार

सरकार की कोशिश सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। किसानों की उपज को दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जनवरी 2026 में भुवनेश्वर में खरीदार और विक्रेताओं के बीच सम्मेलन आयोजित किया गया था।

इस पहल के जरिए उत्तर प्रदेश के आलू के लिए ओडिशा समेत दूसरे राज्यों में नए बाजार तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों की टीम भी अलग-अलग राज्यों में जाकर संभावित खरीदारों और बाजारों की जानकारी जुटा रही है।

उत्पादन से बिक्री तक मदद का दावा

उद्यान विभाग का कहना है कि पिछले कई वर्षों से आलू किसानों की समस्याओं को कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का जोर भंडारण लागत कम करने, बाजार भाव में गिरावट के दौरान राहत देने और किसानों को नए बाजार उपलब्ध कराने पर है।

इन योजनाओं के लागू होने से किसानों को फसल कटाई के बाद होने वाले खर्च और बाजार की अनिश्चितता से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ उनकी उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।

पेंशन से जुड़ी बड़ी खबर, इन कर्मचारियों के लिए आई खुशखबरी!

नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए पेंशन से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। अब जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, अर्बन कंपनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगार भी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के जरिए अपने रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसमें महज 99 रुपये से योगदान की शुरुआत की जा सकती है।

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एनपीएस व्यवस्था को लेकर जानकारी साझा की है। इसके मुताबिक, इस मॉडल में कामगार अपनी सुविधा और कमाई के अनुसार योगदान जारी रख सकते हैं। पीएफआरडीए की ओर से योगदान की कोई तय न्यूनतम या अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

गिग वर्कर्स के लिए बनाया गया खास मॉडल

प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पेंशन व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से PFRDA ने अक्टूबर 2025 में एनपीएस ई-श्रमिक (प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर) मॉडल पेश किया था। इसके तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सर्विस देने वाले वर्कर्स को एनपीएस के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई है।

इस मॉडल में पेंशन खाते में योगदान की जिम्मेदारी अलग-अलग तरीके से तय की जा सकती है। वर्कर और प्लेटफॉर्म दोनों मिलकर योगदान कर सकते हैं। इसके अलावा केवल वर्कर भी पैसा जमा कर सकता है या उसकी ओर से प्लेटफॉर्म/एग्रीगेटर पूरा योगदान कर सकता है।

99 रुपये से शुरू होगी बचत

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत कम राशि से शुरुआत करने की सुविधा है। प्लेटफॉर्म वर्कर्स 99 रुपये से एनपीएस में योगदान शुरू कर सकते हैं। इसके बाद वे अपनी आर्थिक क्षमता के हिसाब से निवेश जारी रख सकते हैं। हालांकि पीएफआरडीए ने न्यूनतम और अधिकतम योगदान की कोई अनिवार्य सीमा तय नहीं की है, लेकिन वर्कर और प्लेटफॉर्म आपसी सहमति से प्रत्येक योगदान की न्यूनतम राशि तय कर सकते हैं। इससे कम या अनियमित आमदनी वाले कामगारों को भी रिटायरमेंट के लिए धीरे-धीरे फंड तैयार करने का विकल्प मिलता है।

कैसे खुलेगा एनपीएस अकाउंट?

एनपीएस में शामिल होने के लिए सबसे पहले वर्कर की जरूरी KYC जानकारी ली जाएगी। इसमें नाम, पता, पैन, मोबाइल नंबर और बैंक खाते जैसी जानकारी शामिल होगी। KYC की प्रक्रिया आधार आधारित ई-केवाईसी या पीएफआरडीए द्वारा स्वीकृत अन्य माध्यमों से पूरी की जा सकती है।

वर्कर की सहमति के बाद उसका परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर यानी PRAN बनाया जाएगा। शुरुआती तौर पर प्लेटफॉर्म की ओर से निवेश योजना और पेंशन फंड का चयन किया जा सकता है। हालांकि खाता खुलने के बाद वर्कर को अपनी पसंद के अनुसार इन विकल्पों में बदलाव करने का अधिकार रहेगा।

रिटायरमेंट के लिए बनेगा लंबी अवधि का फंड

गिग वर्कर्स की आमदनी अक्सर काम और बुकिंग पर निर्भर करती है। ऐसे में नियमित पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का अभाव उनके लिए बड़ी चुनौती रहा है। एनपीएस के इस मॉडल से उन्हें कामकाजी जीवन के दौरान छोटी-छोटी रकम निवेश कर भविष्य के लिए रिटायरमेंट फंड तैयार करने का मौका मिलेगा।

यानी आज की कमाई का एक छोटा हिस्सा भविष्य के लिए सुरक्षित करके गिग वर्कर्स अपने बुढ़ापे की आर्थिक जरूरतों को बेहतर तरीके से संभालने की तैयारी कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य प्लेटफॉर्म आधारित कामगारों को औपचारिक पेंशन व्यवस्था से जोड़ना है।

यूपी में इन 'शिक्षकों' को बड़ी खुशखबरी, मिलेगा समान वेतन और लाभ!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दिव्यांग और विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत की खबर आई है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि योग्य विशेष और रिसोर्स शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान और निर्धारित सेवा लाभ दिए जाएं। कोर्ट ने सरकार को इस आदेश को लागू करने के लिए चार महीने की समयसीमा दी है।

यह फैसला जस्टिस इरशाद अली की एकल पीठ ने विपिन मिश्रा समेत 24 शिक्षकों की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति एकीकृत शिक्षा यानी IEDC योजना के तहत जिला स्तर पर गठित चयन समितियों के माध्यम से रिसोर्स टीचर के रूप में की गई थी। इन शिक्षकों का कहना था कि लंबे समय से काम करने के बावजूद उन्हें नियमित शिक्षकों की तुलना में बेहद कम मानदेय मिल रहा है।

नियमित शिक्षकों जैसा ही काम, लेकिन कम भुगतान

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक वे सरकारी स्कूलों में विशेष जरूरत वाले बच्चों की शिक्षा के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। इनमें बच्चों की शैक्षिक क्षमता का आकलन, काउंसिलिंग, पुनर्वास संबंधी सहायता और उनकी प्रगति पर लगातार नजर रखना शामिल है।

शिक्षकों का तर्क था कि जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र काफी हद तक नियमित विशेष शिक्षकों के समान होने के बावजूद उन्हें संविदा कर्मियों की तरह करीब 6 हजार रुपये का मानदेय दिया जा रहा था। इसी असमानता को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने माना, योग्यता और सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता संबंधित पद के लिए जरूरी योग्यता रखते हैं और लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोर्ट ने IEDC योजना के प्रावधानों का भी उल्लेख किया, जिसमें विशेष शिक्षकों को संबंधित श्रेणी के नियमित शिक्षकों के अनुरूप वेतनमान देने की व्यवस्था का हवाला दिया गया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संविदा आधार पर नियुक्त होने के कारण किसी योग्य कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। समान कार्य और जिम्मेदारी की स्थिति में वेतन से जुड़े अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार वेतन के साथ मिलेंगे दूसरे सेवा लाभ

हाईकोर्ट के आदेश का असर केवल वेतनमान तक सीमित नहीं रहेगा। अदालत ने संबंधित शिक्षकों को सालाना वेतन वृद्धि, अनुमन्य अवकाश, महिला शिक्षकों के लिए मातृत्व लाभ और सेवा की निरंतरता समेत अन्य निर्धारित सेवा सुविधाएं देने का भी निर्देश दिया है।

राज्य सरकार को अदालत के आदेश का पालन करने के लिए चार महीने का समय मिला है। अब इस अवधि में संबंधित विभाग को विशेष और रिसोर्स शिक्षकों की सेवा शर्तों और वेतनमान को लेकर जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, सभी 75 जिलों में लागू, बच्चों के लिए खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने छोटे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अहम कदम उठाया है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों की सीखने से जुड़ी अलग-अलग जरूरतों को शुरुआती स्तर पर समझना और उन्हें समय पर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराना है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए समग्र शिक्षा की ओर से करीब 2.98 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। इसमें मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित किया गया है। पहले चरण में एआरपी को मास्टर ट्रेनर के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इसके बाद यही मास्टर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे।

विशेष जरूरत वाले बच्चों पर रहेगा फोकस

1 सितंबर से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शुरुआती पहचान, शुरुआती हस्तक्षेप, समावेशी शिक्षा और दिव्यांगता समावेशन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।

प्रशिक्षण को गतिविधि आधारित और व्यावहारिक रखा जाएगा, ताकि कार्यकर्ता और शिक्षक सीखी गई बातों को बच्चों के साथ आसानी से लागू कर सकें। साथ ही दोनों स्तरों के कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

हर बच्चे को बेहतर सीखने का मौका

प्रशिक्षण के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और यूनिसेफ के सहयोग से तैयार सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों की जरूरतों को कम उम्र में ही समझकर उन्हें सही सहायता दी जा सके। खासकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समय पर सहयोग मिलने से उनकी आगे की शिक्षा की नींव मजबूत होगी।

इस अभियान में बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग मिलकर काम करेंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और शत-प्रतिशत भागीदारी की निगरानी भी की जाएगी, ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सके।