नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़े ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए नए लेबर कोड के तहत कई अहम नियमों को नोटिफाई कर दिया है। इन बदलावों का असर देश के करोड़ों कर्मचारियों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे न सिर्फ सैलरी स्ट्रक्चर बदलेगा बल्कि काम करने के तरीके और कंपनियों की जिम्मेदारियों में भी बड़ा परिवर्तन होगा।
सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर उन्हें चार नए लेबर कोड में समेट दिया है, जो वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और कार्यस्थल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं।
1. काम के घंटे और साप्ताहिक नियम
नए नियमों के अनुसार कर्मचारियों के काम के घंटे को अधिकतम 12 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति सप्ताह तक सीमित किया गया है। इससे कार्य संस्कृति में संतुलन लाने और कर्मचारियों को अधिक अवकाश देने की कोशिश की गई है।
2. सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
नए प्रावधानों के तहत बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50% होगी। इसका सीधा असर PF और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा, क्योंकि ये दोनों इसी आधार पर तय होते हैं। हालांकि, इससे कुछ कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में कमी भी देखी जा सकती है।
3. PF और रिटायरमेंट लाभ
प्रोविडेंट फंड (PF) की गणना अब ज्यादा बेसिक वेतन पर होगी। इससे कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान बढ़ सकता है, लेकिन भविष्य में रिटायरमेंट फंड ज्यादा मजबूत होगा।
4. ग्रेच्युटी नियमों में बदलाव
फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को भी अब ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा, लेकिन इसके लिए कम से कम एक साल की सेवा जरूरी होगी। वहीं, स्थायी कर्मचारियों के लिए यह नियम पहले की तरह 5 साल पर लागू रहेगा।
5. वेतन भुगतान और समान वेतन नीति
नए नियमों में तय किया गया है कि:
न्यूनतम वेतन देना अनिवार्य होगा
समान काम के लिए समान वेतन मिलेगा
डेली वेज का भुगतान उसी दिन करना होगा
सैलरी का भुगतान तय समय सीमा में करना जरूरी होगा
ओवरटाइम पर दोगुना वेतन देना होगा
6. बोनस और अन्य वित्तीय लाभ
कर्मचारियों को निर्धारित सीमा के अनुसार 8.33% से 20% तक बोनस देना अनिवार्य होगा, जिससे वेतन संरचना में पारदर्शिता आएगी।
7. वर्कप्लेस और शिकायत निवारण प्रणाली
100 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में वर्क कमेटी बनाना जरूरी होगा। इसके अलावा, 20 या उससे अधिक कर्मचारियों पर शिकायत निवारण समिति (GRC) का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी जरूरी होगी।
8. छंटनी और कंपनी बंद करने के नियम
नए नियमों के अनुसार:
छंटनी से पहले 21 दिन का नोटिस देना अनिवार्य
बड़ी कंपनियों में सरकार की अनुमति जरूरी
छंटनी पर मुआवजा और वेतन सुरक्षा अनिवार्य
कंपनी बंद करने से पहले 90 दिन का नोटिस देना होगा
9. महिला कर्मचारियों और सुरक्षा प्रावधान
महिलाओं को सभी क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दी गई है, लेकिन नाइट शिफ्ट में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी। साथ ही खतरनाक क्षेत्रों में विशेष नियम लागू होंगे।
10. अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
10 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना जरूरी
फ्री हेल्थ चेकअप की सुविधा
कैंटीन, एम्बुलेंस और सुरक्षा समिति जैसी सुविधाएं अनिवार्य
ठेकेदार द्वारा भुगतान न करने पर कंपनी जिम्मेदार होगी।