विभागीय निर्देशों के अनुसार, यह प्रशिक्षण संबंधित शिक्षक भर्ती की पात्रता शर्तों के अनुरूप मान्य नहीं माना गया है। इसी आधार पर राज्यभर में ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है और आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस निर्णय का असर करीब 3,000 शिक्षकों पर पड़ सकता है।
विभाग ने जिलों को जारी किए निर्देश
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की पहचान करें, जिनकी नियुक्ति 18 माह के एनआईओएस डीएलएड के आधार पर हुई है। इसके लिए भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कर विस्तृत सूची तैयार करने को कहा गया है, ताकि आगे की प्रशासनिक कार्रवाई समय पर पूरी की जा सके।
किस आधार पर हो रही है कार्रवाई?
शिक्षा विभाग का कहना है कि 7 दिसंबर 2023 को जारी विभागीय आदेश और विद्यालय अध्यापक भर्ती विज्ञापन संख्या 22/2024 में स्पष्ट पात्रता शर्तें निर्धारित की गई थीं। इन शर्तों के अनुसार, एनआईओएस से प्राप्त 18 माह का डीएलएड प्रमाणपत्र विद्यालय अध्यापक पद के लिए वैध योग्यता नहीं माना गया है। इसी कारण विभाग अब ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्तियों की समीक्षा कर रहा है।
प्रखंड स्तर पर तैयार होगी सूची
जिला शिक्षा विभागों को निर्देश दिया गया है कि सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच करें। सत्यापन पूरा होने के बाद सूची जिला स्तर पर भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भर्ती नियमों का पालन सुनिश्चित करना और पात्रता संबंधी विवादों का समाधान करना बताया जा रहा है।
प्रभावित शिक्षकों में बढ़ी चिंता
इस कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद संबंधित शिक्षकों में चिंता का माहौल है। जिन अभ्यर्थियों ने एनआईओएस के 18 माह के डीएलएड के आधार पर नौकरी हासिल की थी, वे अब अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। कई शिक्षक संगठन भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।






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