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बिहार में बनेगा 350 KM का नया एक्सप्रेस-वे, इन जिलों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में सड़क अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ी पहल शुरू हो गई है। राज्य सरकार बक्सर से भागलपुर तक एक आधुनिक लगभग 350 किलोमीटर लंबे छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेस-वे के निर्माण की तैयारी कर रही है। यह परियोजना राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर सरकार की नई पहल

पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत कार्यरत बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और ट्रांजैक्शन एडवाइजर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए योग्य कंसल्टेंसी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।

लगभग 350 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेस-वे

प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे की लंबाई करीब 350 किलोमीटर रहने का अनुमान है। यह पूरी तरह नया ग्रीनफील्ड मार्ग होगा, यानी इसे मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के बजाय नए रूट पर विकसित किया जाएगा। इससे भविष्य में यातायात का दबाव कम करने और तेज गति से आवागमन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

छह महीने में डीपीआर तैयार करने का लक्ष्य

परियोजना के तहत चयनित एजेंसी को कार्य आवंटित होने के बाद छह महीने के भीतर डीपीआर तैयार करनी होगी, जबकि पूरे परामर्श कार्य को 12 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

इन जिलों को मिल सकता है बड़ा फायदा

प्रारंभिक स्तर पर जिन संभावित मार्गों पर विचार किया जा रहा है, उनमें बक्सर, डुमरांव, पीरो, अरवल, जहानाबाद, नवादा और भागलपुर शामिल हैं। यदि यही रूट अंतिम रूप लेता है, तो इन जिलों के लोगों को तेज और बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा। इस एक्सप्रेस-वे से कृषि, व्यापार, उद्योग और पर्यटन को भी नई गति मिलने की संभावना है। साथ ही माल परिवहन का समय कम होने से लॉजिस्टिक लागत में भी कमी आ सकती है।

हंस और भद्र राजयोग का महासंयोग! 5 राशियों पर होगी धन, सफलता और भाग्य की बरसात

राशिफल। 20 जुलाई से 26 जुलाई के बीच ग्रहों की विशेष स्थिति कई शुभ योगों का निर्माण कर रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में उभयचरी योग के साथ हंस राजयोग और भद्र राजयोग का संयुक्त प्रभाव देखने को मिलेगा। माना जाता है कि ऐसे शुभ संयोग व्यक्ति के करियर, धन, प्रतिष्ठा और निर्णय क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। विशेष रूप से पांच राशियों के लिए यह सप्ताह प्रगति और नए अवसर लेकर आ सकता है।

मेष राशि

यह सप्ताह मेष राशि के जातकों के लिए नई ऊर्जा और आत्मविश्वास लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का परिणाम मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है, जबकि व्यापारियों को नए ग्राहकों या लाभदायक सौदों से फायदा हो सकता है। आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत होगी और रुका हुआ धन मिलने के योग बन सकते हैं।

मिथुन राशि

भद्र राजयोग का प्रभाव मिथुन राशि के लोगों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापार में विस्तार की योजना सफल हो सकती है। आर्थिक लाभ के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ने के संकेत हैं। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने की संभावना है।

कर्क राशि

हंस राजयोग के प्रभाव से कर्क राशि के जातकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। निवेश से लाभ मिलने की संभावना रहेगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा। यदि किसी महत्वपूर्ण निर्णय का इंतजार था तो यह सप्ताह आपके पक्ष में परिणाम दे सकता है। स्वास्थ्य भी सामान्य रहने की उम्मीद है।

कन्या राशि

कन्या राशि के लिए यह समय करियर और कारोबार में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे सकता है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ बढ़ सकता है और पुराने निवेश अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। जो लोग नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह सप्ताह अनुकूल माना जा रहा है।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह आर्थिक और पेशेवर दृष्टि से लाभकारी रह सकता है। लंबे समय से अटके कार्यों में गति आएगी। कार्यक्षेत्र में आपकी योजनाओं को सफलता मिल सकती है और वरिष्ठों से सराहना प्राप्त हो सकती है। व्यापार में नए अनुबंध या साझेदारी लाभदायक साबित हो सकती है। परिवार में खुशी का वातावरण रहेगा और किसी शुभ कार्य की योजना बन सकती है।

बिहार पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट, ग्रामीणों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन (सीमा निर्धारण) कराने की तैयारी में है। ऐसे में पंचायत चुनाव पहले की तय समय-सीमा के बजाय परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस कदम का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या और बदलती भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पंचायतों का पुनर्गठन करना है।

2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन

सरकार ने पंचायतों के नए परिसीमन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाने का निर्णय लिया है। इससे पंचायतों की सीमाओं और संरचना का पुनर्निर्धारण किया जाएगा ताकि वर्तमान जनसंख्या के अनुसार स्थानीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इससे पहले राज्य में पंचायतों का व्यापक परिसीमन 1991 की जनगणना के आधार पर किया गया था, जिसके बाद नई पंचायतों का गठन किया गया था।

पंचायतों की संख्या बढ़ने की संभावना

नई परिसीमन प्रक्रिया के बाद बिहार में पंचायतों की संख्या बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि अधिक आबादी वाली पंचायतों को विभाजित कर नई ग्राम पंचायतों का गठन किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित करने और लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

जनसंख्या के अनुसार होगा नया ढांचा

नई व्यवस्था में पंचायतों और अन्य स्थानीय इकाइयों का गठन निर्धारित जनसंख्या मानकों के अनुसार किया जाएगा। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, वार्ड और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाएं जनसंख्या के आधार पर तय होंगी। इसका उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र में संतुलित प्रतिनिधित्व और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करना है।

प्राकृतिक सीमाओं को प्राथमिकता

परिसीमन के दौरान पंचायतों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक भौगोलिक संरचनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जहां नदी, नहर, झील, जंगल या पहाड़ जैसी प्राकृतिक सीमाएं उपलब्ध होंगी, वहीं उन्हें आधार बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में ऐसी प्राकृतिक सीमाएं नहीं होंगी, वहां सड़क, विद्यालय, अस्पताल, धार्मिक स्थल, श्मशान, कब्रिस्तान या अन्य स्थानीय पहचान वाले स्थलों के आधार पर सीमा निर्धारण किया जाएगा।

जिलाधिकारियों को अहम जिम्मेदारी

पूरी परिसीमन प्रक्रिया की निगरानी जिलाधिकारियों के नेतृत्व में की जाएगी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में वे पंचायतों की नई सीमाएं तय कराने, प्रस्तावों की जांच करने और पूरी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

यूपी सरकार की बड़ी तैयारी, ब्लॉक प्रमुखों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष (ब्लॉक प्रमुख) का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की तैयारी पूरी कर ली है। अब ब्लॉक प्रमुख अपने-अपने क्षेत्रों में प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे, जिससे विकास कार्यों और पंचायत से जुड़े प्रशासनिक कामों में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।

कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई व्यवस्था लागू

ब्लॉक प्रमुखों का निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के साथ ही सरकार ने अंतरिम व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत वर्तमान ब्लॉक प्रमुखों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है ताकि नए चुनाव होने तक क्षेत्र पंचायतों का कामकाज नियमित रूप से चलता रहे।

अवकाश के दिन भी विभाग में तैयारी

सरकार ने इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था की। आदेश जारी करने से जुड़े कार्यों को पूरा करने के लिए पंचायती राज विभाग के संबंधित अनुभागों में अवकाश के दिन भी काम किया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यकाल समाप्त होने और नई व्यवस्था लागू होने के बीच प्रशासनिक खालीपन की स्थिति न बने।

पहले ही ग्राम प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्ष बन चुके हैं प्रशासक

इससे पहले ग्राम पंचायतों और जिला पंचायतों के स्तर पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक का दायित्व देकर संबंधित संस्थाओं का संचालन जारी रखा गया है। अब ब्लॉक प्रमुखों के भी प्रशासक बनने के बाद पंचायत व्यवस्था के तीनों स्तर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत अंतरिम रूप से प्रशासकों के माध्यम से संचालित होंगे।

यह अंतरिम व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक नए पंचायत चुनाव संपन्न नहीं हो जाते या फिर अधिकतम छह माह की निर्धारित अवधि पूरी नहीं हो जाती। जो भी स्थिति पहले आएगी, उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, पढ़ें पूरी डिटेल्स

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक अहम मामला सामने आया है। प्रदेश में ऐसे उपभोक्ता, जो कम बिजली की खपत के कारण लाइफ लाइन श्रेणी के तहत रियायती दरों का लाभ पाने के पात्र हैं, उन्हें भी बड़ी संख्या में इस श्रेणी से बाहर किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। इसको लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए विद्युत नियामक आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

टैरिफ व्यवस्था के अनुसार जिन घरेलू उपभोक्ताओं की पूरे वित्तीय वर्ष में बिजली की कुल खपत 1200 यूनिट तक रहती है, वे लाइफ लाइन श्रेणी में आते हैं। इस श्रेणी के उपभोक्ताओं को सामान्य उपभोक्ताओं की तुलना में कम दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जाती है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिल सके।

लेकिन आरोप है कि बिजली कंपनियों ने कुछ महीनों में अधिक बिजली खपत होने के आधार पर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को लाइफ लाइन श्रेणी से बाहर कर दिया। इससे ऐसे उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बिजली बिल का बोझ बढ़ गया, जिनकी पूरे वर्ष की कुल खपत निर्धारित सीमा से कम है।

उपभोक्ता परिषद ने उठाया विरोध

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में स्पष्ट व्यवस्था है कि यदि किसी उपभोक्ता की पूरे वित्तीय वर्ष की बिजली खपत 1200 यूनिट से अधिक होती है, तभी उसे लाइफ लाइन श्रेणी से हटाकर सामान्य घरेलू श्रेणी में रखा जा सकता है। परिषद का तर्क है कि केवल लगातार तीन महीनों तक अधिक बिजली उपयोग होने के आधार पर किसी उपभोक्ता की श्रेणी बदलना नियमों की भावना के अनुरूप नहीं है।

गरीब उपभोक्ताओं पर बढ़ सकता है बोझ

परिषद के अनुसार कई ऐसे परिवार हैं जिनकी वार्षिक बिजली खपत 1000 यूनिट के आसपास है, लेकिन किसी विशेष मौसम या अन्य कारणों से कुछ महीनों में बिजली उपयोग बढ़ गया। ऐसे मामलों में यदि उनका विद्युत भार बढ़ाकर उन्हें दूसरी श्रेणी में डाल दिया जाता है, तो उन्हें अधिक बिल का भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि वे पूरे वर्ष के आधार पर अब भी लाइफ लाइन श्रेणी के पात्र हैं।

लाखों उपभोक्ता हो सकते हैं प्रभावित

उपभोक्ता परिषद का दावा है कि बिजली कंपनियों ने करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का विद्युत भार बढ़ाया है। इनमें लगभग 10 लाख ऐसे उपभोक्ता भी शामिल बताए जा रहे हैं जिनकी वार्षिक बिजली खपत 1200 यूनिट से कम है और जिन्हें लाइफ लाइन श्रेणी का लाभ मिलना चाहिए था। प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 1.78 करोड़ घरेलू उपभोक्ता लाइफ लाइन श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इस निर्णय का प्रभाव बड़ी संख्या में परिवारों पर पड़ सकता है।

सावन में 3 ग्रहों की बदलेगी चाल! इन 3 राशियों पर होगी धन, तरक्की और खुशियों की बरसात

राशिफल। भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना धार्मिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण माना जाता है, ज्योतिष के अनुसार यह कई ग्रहों के परिवर्तन के कारण भी खास रहने वाला है। 30 जुलाई 2026 से 28 अगस्त 2026 तक चलने वाले सावन माह में शुक्र, मंगल और बुध अपनी राशि बदलेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन ग्रहों के गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन वृष, तुला और मीन राशि के जातकों के लिए यह अवधि विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है।

वृष राशि

सावन में होने वाले ग्रह परिवर्तन वृष राशि के लोगों के लिए आर्थिक मामलों में सकारात्मक संकेत दे सकते हैं। आय के नए स्रोत बनने की संभावना रहेगी और रुका हुआ धन मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारी या पदोन्नति का अवसर मिल सकता है। व्यापारियों के लिए भी यह समय लाभदायक साबित हो सकता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और भविष्य की योजनाओं पर काम आगे बढ़ सकता है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए सावन का महीना करियर और व्यवसाय के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने के संकेत हैं। व्यापार में नए सौदे लाभ दिला सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बचत बढ़ाने का अवसर मिलेगा। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है।

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए यह समय भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। नौकरी में उन्नति और आय में वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं। यदि नया निवेश या नया काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो सोच-समझकर उठाया गया कदम लाभदायक साबित हो सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद रहेगी।

खुशखबरी का महाधमाका! यूपी में 3 बड़ी भर्ती शुरू, करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य में तीन अलग-अलग विभागों में भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि 12वीं पास से लेकर स्नातक तक के उम्मीदवार इन भर्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। वन विभाग, प्रशासनिक सेवा और लेखा विभाग में निकली इन रिक्तियों से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का अवसर मिलने वाला है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

1. वन रक्षक के 708 पदों पर भर्ती

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के 708 पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के लिए 12वीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और 20 जुलाई 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं। वन विभाग में सरकारी नौकरी की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह एक अच्छा अवसर माना जा रहा है।

2. यूपी पीसीएस के लगभग 500 पदों पर आवेदन

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने पीसीएस परीक्षा 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती के माध्यम से ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के लगभग 500 पदों को भरा जाएगा। आवेदन के लिए उम्मीदवार का स्नातक होना जरूरी है। ऑनलाइन आवेदन 25 जून 2026 से शुरू हैं और 27 जुलाई 2026 तक फॉर्म भरे जा सकते हैं। आवेदन में संशोधन की सुविधा 3 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

3. ऑडिटर और सहायक लेखाकार के 1,829 पद

UPSSSC ने विभिन्न सरकारी विभागों में ऑडिटर और सहायक लेखाकार के 1,829 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती में केवल वही अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने PET-2025 परीक्षा पास की हो और उनके पास वैध स्कोर कार्ड हो। आवेदन प्रक्रिया 14 जुलाई 2026 से शुरू होकर 3 अगस्त 2026 तक चलेगी।

नवपंचम योग से बदलेगी किस्मत! इन 4 राशियों को मिलेगी बड़ी खुशखबरी और आर्थिक लाभ

राशिफल। ज्योतिष में जब ग्रहों के बीच विशेष शुभ संबंध बनते हैं, तो उसे कई ज्योतिषी सकारात्मक परिणाम देने वाला समय मानते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 20 जुलाई 2026 को बनने वाला नवपंचम योग भी ऐसा ही एक विशेष संयोग माना जा रहा है। मान्यता है कि इस अवधि में कई लोगों के रुके हुए कार्यों में गति आ सकती है तथा करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक अवसर मिल सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए नवपंचम योग नई शुरुआत का संकेत दे सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या पदोन्नति से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापार करने वालों को नए ग्राहकों और लाभदायक सौदों का अवसर मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार होने के साथ बचत बढ़ाने के भी योग बन सकते हैं।

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। यदि किसी नए प्रोजेक्ट या व्यवसाय की योजना बना रहे हैं, तो उसमें आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और रुका हुआ धन मिलने के भी संकेत हैं। विद्यार्थियों के लिए भी यह समय पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुकूल माना जा सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों को इस योग के प्रभाव से कार्यक्षेत्र में सम्मान और सफलता मिल सकती है। अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने की संभावना रहेगी और मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। व्यापार में विस्तार के अवसर बन सकते हैं तथा निवेश से जुड़े मामलों में सोच-समझकर लिया गया निर्णय लाभदायक साबित हो सकता है। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए नवपंचम योग आर्थिक मजबूती और प्रगति का संकेत दे सकता है। नौकरी में उन्नति, वेतन वृद्धि या नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना बन सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ में वृद्धि के संकेत हैं। लंबे समय से रुकी हुई योजनाओं पर काम आगे बढ़ सकता है। परिवार का सहयोग मिलेगा और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अवसर भी प्राप्त हो सकता है।

बिहार में बड़ी खुशखबरी! जिला अस्पतालों में अब रातभर मिलेगी इमरजेंसी सेवा

पटना। बिहार सरकार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब जिला अस्पतालों में रात के समय भी इमरजेंसी चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी की गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद गंभीर मरीजों को देर रात भी आवश्यक उपचार मिल सकेगा, जिससे उन्हें तुरंत बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत कम होगी।

रात में भी उपलब्ध रहेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर

नई व्यवस्था के तहत जिला अस्पतालों में रात के समय विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी सुनिश्चित की जाएगी। जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, शिशु रोग तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रशिक्षित नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की भी तैनाती की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में इलाज तुरंत शुरू किया जा सके।

इमरजेंसी सेवाओं को मिलेगा और मजबूती

स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जांच सुविधाओं और जीवनरक्षक उपकरणों को भी बेहतर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर मरीजों का उपचार बिना किसी अनावश्यक देरी के शुरू हो सके।

रेफर करने की जरूरत होगी कम

अक्सर रात के समय विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को पटना या अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भेजना पड़ता है। इससे इलाज में देरी होती है और कई बार मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला अस्पतालों में ही प्राथमिक और आवश्यक उपचार मिलने से अनावश्यक रेफरल की संख्या कम होने की उम्मीद है।

इन मरीजों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा सड़क दुर्घटना में घायल लोगों, हार्ट अटैक के मरीजों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को मिलने की संभावना है। ऐसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और समय पर इलाज मिलने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

मेडिकल कॉलेज अस्पतालों पर भी घटेगा दबाव

जब जिला अस्पतालों में ही बेहतर इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध होंगी, तो बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा। इससे मेडिकल कॉलेज अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और वहां गंभीर मामलों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा सकेगा।

बिहार में ये जमीन होगी सरकारी, 6 जिलों के लिए आदेश जारी

पटना। बिहार सरकार ने ऐतिहासिक बेतिया राज की हजारों एकड़ भूमि को सरकारी नियंत्रण में लेने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल के तहत विभिन्न जिलों में फैली बेतिया राज की भूमि का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया गया है और दावों एवं आपत्तियों के निस्तारण की व्यवस्था भी तय कर दी गई है।

छह जिलों में फैली है बेतिया राज की जमीन

विभाग के अनुसार बेतिया राज की लगभग 22,813 एकड़ भूमि बिहार के छह जिलों में स्थित है। सबसे अधिक भूमि पश्चिम चंपारण जिले में दर्ज है, जबकि पूर्वी चंपारण में भी बड़ी मात्रा में जमीन मौजूद है।

जिलावार उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

पश्चिम चंपारण जिले में 15,556.39 एकड़

पूर्वी चंपारण जिले में 7,194.56 एकड़

गोपालगंज जिले में 35.58 एकड़

पटना जिले में 11.49 एकड़

सारण जिले में 8.47 एकड़

सीवान जिले में 7.29 एकड़

दावों की जांच के लिए होंगे विशेष अधिकारी

पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक संबंधित जिले में अपर समाहर्ता (एडीएम) स्तर के अधिकारी को विशेष पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यही अधिकारी भूमि से जुड़े दावों, आपत्तियों और दस्तावेजों की जांच करेंगे। यदि किसी व्यक्ति के पास बेतिया राज की भूमि से संबंधित पट्टा, बंदोबस्ती या अन्य वैध अभिलेख हैं, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा प्रस्तुत कर सकता है।

दस्तावेजों के आधार पर होगा फैसला

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक दावे की जांच उपलब्ध दस्तावेजों और लागू नियमों के आधार पर की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारी निर्णय देंगे। इसका उद्देश्य वास्तविक दावेदारों के अधिकारों की रक्षा करना और पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से निष्पक्ष बनाना है।

बिहार को मिली बड़ी खुशखबरी! 190 करोड़ से बदलेगी इस रेललाइन की तस्वीर

पटना। बिहार में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। गया-कोडरमा रेलखंड पर करीब 190 करोड़ रुपये की लागत से कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, रेल और सड़क यातायात को अधिक सुरक्षित बनाना तथा क्षेत्र के समग्र विकास को गति देना है।

पहाड़पुर रेलवे स्टेशन का होगा आधुनिक विकास

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पहाड़पुर रेलवे स्टेशन का व्यापक आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 28 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। स्टेशन परिसर में आधुनिक प्रवेश द्वार, बेहतर प्रतीक्षालय, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, यात्रियों के लिए उन्नत सुविधाएं और साफ-सुथरा वातावरण विकसित किया जाएगा। इससे स्टेशन की कार्यक्षमता के साथ यात्रियों का अनुभव भी पहले से बेहतर होने की उम्मीद है।

दिव्यांग यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं

रेलवे ने इस परियोजना में दिव्यांग यात्रियों की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी है। टनकुप्पा, गुरपा, दिलवा, बंधुआ, बंशीनाला और पहाड़पुर स्टेशनों पर रैंप, आसान प्रवेश मार्ग और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य सभी यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाना है।

तीन नए रोड ओवरब्रिज बनेंगे

परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा सड़क और रेल यातायात को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित है। लगभग 142 करोड़ रुपये की लागत से तीन नए रोड ओवरब्रिज (ROB) बनाए जाएंगे। ये आरओबी गुरपा-पहाड़पुर, पहाड़पुर-टनकुप्पा और टनकुप्पा-बंधुआ रेलखंड के बीच तैयार किए जाएंगे। इनके बनने के बाद रेलवे फाटकों पर लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलने के साथ दुर्घटनाओं का जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।

अंडरपास, फुट ओवरब्रिज

यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए टनकुप्पा स्टेशन के पास नया अंडरपास बनाया जाएगा। वहीं दिलवा और बंशीनाला स्टेशनों पर आधुनिक फुट ओवरब्रिज, रैंप और सीढ़ियों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा दिलवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म को भी ऊंचा किया जाएगा, जिससे यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में अधिक सुविधा मिलेगी।

बिहार में 4 नए एक्सप्रेस-वे को लेकर बड़ा अपडेट, पढ़ें पूरी डिटेल

पटना। बिहार में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों के बीच यात्रा का समय कम होगा और व्यापार, उद्योग तथा निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल कई परियोजनाएं प्रशासनिक मंजूरियों, डीपीआर और एलायनमेंट जैसी प्रक्रियाओं से गुजर रही हैं, जिसके कारण निर्माण कार्य पूरी रफ्तार नहीं पकड़ सका है।

आइए जानते हैं चार प्रमुख एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे पर मंजूरी का इंतजार

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को बिहार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। इस एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे का प्रस्ताव केंद्रीय स्तर पर स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है, लेकिन अंतिम मंजूरी का इंतजार अभी भी बना हुआ है। परियोजना का प्रारंभिक एलायनमेंट पहले ही तय किया जा चुका है, जबकि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। केंद्रीय मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे का रूट होगा तय

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे को सिद्धांत रूप में स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन इसका अंतिम रूट अभी तय होना बाकी है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से एलायनमेंट कमेटी बनाई जाएगी। रूट तय होने के बाद राज्य सरकार से आवश्यक अनुमोदन लिया जाएगा। इसके बाद ही डीपीआर और निर्माण संबंधी अन्य प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के रूट में होगा बदलाव

रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित मार्ग में बदलाव की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को ध्यान में रखते हुए इसके एलायनमेंट में संशोधन किया जाएगा। रूट में आवश्यक बदलाव पूरा होने के बाद ही परियोजना के अगले चरण की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे पर जमीन अधिग्रहण जारी

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे का बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कई जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि परियोजना को पूरी गति मिलने से पहले कई तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरियां मिलना अभी बाकी हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला! सरकारी स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा विभाग ने निपुण भारत मिशन के तहत नई कार्ययोजना लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य केवल किताबों का पाठ पूरा कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप आवश्यक ज्ञान और कौशल वास्तव में हासिल कर सके।

नई व्यवस्था के तहत बालवाटिका से लेकर कक्षा-5 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सीखने के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। इसके लिए सभी जिलों और मंडलों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि नीति का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित हो सके।

अब पढ़ाई का फोकस होगा सीखने के परिणाम पर

नई कार्ययोजना के बाद सरकारी स्कूलों में शिक्षा का तरीका पहले की तुलना में अधिक परिणाम आधारित होगा। अब केवल पाठ्यक्रम समाप्त करना ही प्राथमिकता नहीं होगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि विद्यार्थी विषय को कितनी अच्छी तरह समझ पा रहे हैं। सरकार चाहती है कि शुरुआती कक्षाओं में ही बच्चों की भाषा, गणित और सामान्य समझ मजबूत हो, ताकि आगे की पढ़ाई में उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के उद्देश्यों के अनुरूप मानी जा रही है।

कक्षा-3 से 5 तक विषयवार तय होंगे सीखने के लक्ष्य

नई गाइडलाइन के अनुसार कक्षा-3, 4 और 5 के विद्यार्थियों के लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन जैसे प्रमुख विषयों में कक्षावार सीखने के मानक तय किए जाएंगे। इन मानकों को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF), एनसीईआरटी की पुस्तकों और राष्ट्रीय मूल्यांकन मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। एससीईआरटी, डायट और शिक्षा विशेषज्ञों की मदद से तैयार यह व्यवस्था पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एक समान लागू होगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी।

हर बच्चे की प्रगति पर होगी नियमित निगरानी

नई योजना में विद्यार्थियों के नियमित मूल्यांकन पर विशेष ध्यान दिया गया है। शिक्षकों द्वारा समय-समय पर बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन किया जाएगा, जिससे यह पता चल सके कि कौन-सा विद्यार्थी अपेक्षित स्तर तक पहुंच पाया है और किसे अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। यदि किसी बच्चे में सीखने की कमी दिखाई देती है, तो उसके लिए विशेष कक्षाएं, अतिरिक्त अभ्यास और कैच-अप शिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी छात्र पढ़ाई में पीछे न रह जाए।

शिक्षकों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण

सरकार ने इस नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया है। विभिन्न कार्यशालाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों, मूल्यांकन प्रणाली और बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में लाइब्रेरी के बेहतर उपयोग, बालवाटिका स्तर पर स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम तथा अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

स्कूल स्तर तक होगी सख्त मॉनिटरिंग

नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर निगरानी की बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। समय-समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि तय किए गए सीखने के लक्ष्य समय पर पूरे हो सकें और शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होता रहे।

शिक्षा व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

यदि यह कार्ययोजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से अधिक मजबूत होगी। शुरुआती कक्षाओं में मजबूत आधार तैयार होने से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और आगे की पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने में भी मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, जेलों में कैदियों के लिए नए नियम लागू

पटना। बिहार सरकार ने जेल प्रशासन से जुड़ी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने जेलों में बंद कैदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए नई मुआवजा व्यवस्था लागू कर दी है। इस फैसले के बाद ऐसे मामलों में सहायता राशि तय नियमों के अनुसार दी जाएगी, जिससे पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अब तय नियमों के तहत मिलेगा मुआवजा

पहले जेल में किसी कैदी की अप्राकृतिक मौत होने पर मुआवजा देने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियों या संबंधित आयोगों की सिफारिश के आधार पर निर्णय लिया जाता था। अब नई नीति लागू होने के बाद प्रत्येक मामले में निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी और पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

मौत के कारण के आधार पर सहायता राशि

नई व्यवस्था में मुआवजे की राशि घटना की परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित की गई है। यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी कैदी की मृत्यु जेल कर्मचारियों की मारपीट या उत्पीड़न के कारण हुई है, तो उसके विधिक उत्तराधिकारी को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं यदि मृत्यु चिकित्सा संबंधी लापरवाही, जेल प्रशासन की लापरवाही, कैदियों के बीच हिंसक विवाद या किसी अन्य अप्राकृतिक कारण से होती है, तो संबंधित परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

आत्महत्या के मामलों के लिए भी अलग प्रावधान

नई नीति में जेल के भीतर आत्महत्या की घटनाओं को भी शामिल किया गया है। ऐसे मामलों में मृतक कैदी के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसे कठिन समय में परिवार को तत्काल आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है।

जेल कैदियों को जांच के बाद ही मिलेगा मुआवजा

किसी भी मामले में सहायता राशि जारी करने से पहले विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसके लिए जिला स्तर पर एक चार सदस्यीय समिति गठित होगी, जिसकी अध्यक्षता जिला अधिकारी (डीएम) करेंगे। समिति में पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन तथा संबंधित जेल के अधीक्षक शामिल रहेंगे। जांच के दौरान घटना के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी।

इन जेल कैदियों को अंतिम स्वीकृति के बाद होगा भुगतान

जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद मामला आगे की स्वीकृति के लिए संबंधित उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर आर्थिक सहायता की राशि जिला प्रशासन के माध्यम से जारी की जाएगी, ताकि भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी हो सके।

नई व्यवस्था में 30 दिनों के भीतर खाते में पहुंचेगी सहायता राशि

नई व्यवस्था के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मुआवजा स्वीकृत होने के बाद मृतक कैदी के विधिक उत्तराधिकारी या निकटतम परिजन के बैंक खाते में 30 दिनों के भीतर राशि भेज दी जाए। इससे परिवारों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

पानी-पानी होगा बिहार! राज्यभर में भारी बारिश का अलर्ट

पटना। बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है और राज्य के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार रविवार को भी प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही तेज हवा, मेघ गर्जन और वज्रपात को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता के कारण दक्षिण और मध्य बिहार के साथ-साथ उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए अलग-अलग स्तर का अलर्ट जारी किया है। दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-मध्य और दक्षिण-पूर्व बिहार के कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। विशेष रूप से बेगूसराय, गया, नवादा और जमुई में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने और मौसम से जुड़ी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

पटना समेत आसपास के जिलों में बारिश

राजधानी पटना और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, भभुआ, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, लखीसराय और शेखपुरा सहित कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है, इसलिए खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

मिथिलांचल में भी सक्रिय रहेगा मानसून

उत्तर बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में भी रविवार को बादलों का प्रभाव बना रहेगा। मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार तेज हवाओं और वज्रपात की घटनाएं भी हो सकती हैं, इसलिए किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

कोसी और सीमांचल में भी मौसम रहेगा खराब

कोसी और सीमांचल क्षेत्र में भी मानसून का असर देखने को मिलेगा। सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और सहरसा जिलों में बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। इन इलाकों में भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन सकती है और तापमान में भी गिरावट दर्ज होने की संभावना है।

रविवार बना बेहद शुभ, 3 राजयोग जैसे संयोग से 4 राशियों को मिलेगी बड़ी खुशखबरी

राशिफल। ज्योतिष के अनुसार रविवार का दिन कई शुभ ग्रह स्थितियों और तीन प्रभावशाली योगों के कारण विशेष माना जा रहा है। इन शुभ संयोगों का असर सभी राशियों पर अलग-अलग रहेगा, लेकिन चार राशियों के लिए यह दिन विशेष रूप से लाभदायक माना जा रहा है। करियर, धन, व्यापार, पारिवारिक जीवन और मान-सम्मान के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, ज्योतिषीय फल व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रह दशा पर भी निर्भर करते हैं।

मेष राशि

रविवार मेष राशि के जातकों के लिए उत्साह और सफलता लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। नौकरी करने वालों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। व्यापारियों को नए ग्राहकों से लाभ हो सकता है। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी और किसी पुराने निवेश से भी फायदा मिल सकता है। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए यह दिन सम्मान और उपलब्धियों से जुड़ा रह सकता है। यदि आप किसी नई योजना पर काम कर रहे हैं तो उसमें सकारात्मक परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं। नौकरी में पदोन्नति या प्रशंसा मिलने की संभावना है। व्यापार में आय के नए स्रोत बन सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और प्रभावशाली लोगों से मुलाकात भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए रविवार आर्थिक दृष्टि से शुभ रह सकता है। लंबे समय से अटके हुए धन की प्राप्ति होने के संकेत हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या बेहतर अवसर मिल सकता है। व्यापार में विस्तार की योजनाएं सफल हो सकती हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा और मानसिक तनाव में कमी आएगी।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए यह दिन भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। यदि किसी महत्वपूर्ण निर्णय का इंतजार कर रहे हैं तो परिणाम आपके पक्ष में आने की संभावना है। व्यापार में लाभ बढ़ सकता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार के सदस्यों का सहयोग मिलेगा तथा दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। यात्रा के भी शुभ योग बन सकते हैं, जो भविष्य में लाभ देने वाले साबित होंगे।

8वें वेतन आयोग की खुशखबरी! HRA में बड़ी बढ़ोतरी के संकेत, कर्मचारियों की जेब होगी और मजबूत

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। वेतन संशोधन के साथ-साथ सबसे अधिक चर्चा मकान किराया भत्ता (HRA) को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि यदि नए वेतन आयोग में बेसिक वेतन बढ़ता है, तो HRA की राशि भी पहले की तुलना में काफी अधिक हो सकती है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।

HRA बढ़ने की उम्मीद?

सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला HRA सीधे उनके मूल वेतन से जुड़ा होता है। इसलिए जब भी बेसिक सैलरी में संशोधन होता है, HRA की राशि भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है। 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाले मकान किराया भत्ते में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। खासकर महानगरों में कार्यरत कर्मचारियों को इसका अधिक लाभ मिलने की संभावना है।

वर्तमान में कैसे तय होता है HRA?

अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को शहरों की श्रेणी के अनुसार HRA दिया जाता है। बड़े महानगरों में कार्यरत कर्मचारियों को सबसे अधिक, मध्यम श्रेणी के शहरों में उससे कम और छोटे शहरों में सबसे कम HRA मिलता है। पिछले संशोधन के बाद इन दरों में पहले ही वृद्धि की जा चुकी है और कर्मचारी संगठन भविष्य में इन्हें और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

अलग-अलग वेतन स्तर पर कितना बढ़ सकता है लाभ?

यदि नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर अपेक्षा के अनुरूप बढ़ता है, तो विभिन्न पे-लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही HRA भी हजारों रुपये तक बढ़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल-4, लेवल-5 और लेवल-6 के कर्मचारियों को वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक HRA मिलने की संभावना जताई जा रही है। महानगरों में तैनात कर्मचारियों को सबसे अधिक लाभ मिल सकता है, जबकि अन्य शहरों में भी मासिक HRA में अच्छी बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।

इस वृद्धि को लेकर अभी करना होगा अंतिम फैसले का इंतजार

फिलहाल HRA में संभावित बढ़ोतरी को लेकर जो भी आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे अनुमानित फिटमेंट फैक्टर और मौजूदा वेतन संरचना के आधार पर लगाए जा रहे हैं। अभी 8वें वेतन आयोग ने अपनी अंतिम सिफारिशें सार्वजनिक नहीं की हैं और न ही केंद्र सरकार ने नई वेतन संरचना को मंजूरी दी है।

इसलिए HRA में कितनी बढ़ोतरी होगी, कौन-सा फिटमेंट फैक्टर लागू होगा और नई सैलरी कब से मिलेगी, इसका स्पष्ट जवाब आयोग की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के निर्णय के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल इतना तय है कि यदि बेसिक वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, तो HRA में भी अच्छा इजाफा देखने को मिल सकता है, जिससे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, किसानों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने रबी सीजन 2026-27 की तैयारियां शुरू करते हुए किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना लागू की है। इस पहल के तहत प्रदेश के पात्र किसानों को विभिन्न रबी फसलों के प्रमाणित बीज आधी कीमत यानी 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाना और खेती की लागत कम करना है।

किन फसलों के बीज पर मिलेगा लाभ?

इस योजना में रबी मौसम की कई प्रमुख फसलों को शामिल किया गया है। किसान गेहूं, चना, मसूर, मटर, जौ, सरसों, तोरिया सहित अन्य अधिसूचित रबी फसलों के प्रमाणित बीज अनुदानित दर पर प्राप्त कर सकेंगे। प्रमाणित बीजों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। यही वजह है कि सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

अलग-अलग फसलों के लिए तय की गई अंतिम तिथि

कृषि विभाग ने प्रत्येक फसल वर्ग के लिए आवेदन की अलग-अलग अंतिम तिथि निर्धारित की है।

तोरिया के लिए आवेदन: 16 अगस्त 2026 तक

दलहन और तिलहन फसलों के लिए: 10 सितंबर 2026 तक

गेहूं एवं अन्य रबी फसलों के लिए: 30 सितंबर 2026 तक

सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा कर लें।

ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार फसल का चयन कर बीज की बुकिंग कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद पात्र लाभार्थियों का चयन पूरी तरह ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। चयनित किसानों को निर्धारित अनुदान पर प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा फायदा?

इस योजना से किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले बीज मिलेंगे, जिससे बेहतर अंकुरण, अच्छी पैदावार और उत्पादन लागत में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही प्रमाणित बीजों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सावधान यूपी! मानसून मचाएगा तबाही, इन जिलों में बारिश, आंधी और ठनके का डबल अटैक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा गरज-चमक, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर

पूर्वी यूपी में बारिश का प्रभाव सबसे अधिक रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार बलिया, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, संत कबीर नगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश हो सकती है।

इन जिलों में भी होगी अच्छी बारिश

भारी बारिश का असर केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में भी तेज वर्षा होने के आसार हैं।

बिजली गिरने और तेज हवाओं का खतरा

बारिश के साथ प्रदेश के कई जिलों में मेघगर्जन और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, खेतों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी है। तेज हवा और बिजली गिरने की घटनाएं किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती हैं। ऐसे में मौसम सामान्य होने तक सुरक्षित स्थान पर रहना बेहतर होगा।

किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है ये 5 बड़े संकेत, समय रहते पहचानना है बेहद जरूरी

राशिफल। किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह खून को साफ करने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने तथा रक्तचाप को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन जब किडनी धीरे-धीरे खराब होने लगती है, तो शुरुआती दौर में इसके लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और लोग उन्हें सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

1. शरीर में सूजन आना

यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर बार-बार सूजन दिखाई देने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। किडनी ठीक से काम नहीं करने पर शरीर में अतिरिक्त पानी और नमक जमा होने लगता है, जिससे सूजन की समस्या हो सकती है।

2. पेशाब में बदलाव

किडनी की समस्या होने पर पेशाब से जुड़े कई बदलाव दिखाई दे सकते हैं। जैसे बार-बार पेशाब आना, बहुत कम पेशाब होना, पेशाब में झाग आना, रंग बदल जाना या पेशाब के साथ खून आना। ऐसे किसी भी बदलाव पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

3.थकान और कमजोरी

अगर पर्याप्त आराम करने के बाद भी हर समय थकान महसूस होती है या शरीर में कमजोरी बनी रहती है, तो यह भी किडनी की कार्यक्षमता कम होने का संकेत हो सकता है। किडनी की बीमारी में शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे एनीमिया और कमजोरी की समस्या हो सकती है।

4. भूख कम लगना और मतली

किडनी ठीक से काम नहीं करने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसका असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। बार-बार मतली आना, उल्टी जैसा महसूस होना, भूख कम लगना या मुंह का स्वाद बदल जाना ऐसे संकेत हो सकते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

5. त्वचा में खुजली और सांस लेने में परेशानी

किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में खनिज और अपशिष्ट पदार्थों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे त्वचा में लगातार खुजली की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने या अन्य कारणों से सांस लेने में तकलीफ भी महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षण होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

50 के बाद भी रहना है जवान और एक्टिव? आज से शुरू करें ये 4 जरूरी काम

हेल्थ डेस्क। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई प्राकृतिक बदलाव होने लगते हैं। 50 वर्ष की उम्र के बाद मांसपेशियों की ताकत कम होना, ऊर्जा में कमी, जोड़ों में दर्द और धीमा मेटाबॉलिज्म जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सही दिनचर्या और स्वस्थ आदतें अपनाकर इस उम्र में भी व्यक्ति लंबे समय तक सक्रिय, ऊर्जावान और फिट रह सकता है।

1. रोजाना हल्का व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें

50 की उम्र के बाद शरीर को सक्रिय रखना बेहद जरूरी होता है। रोजाना 30 से 45 मिनट तेज चाल से चलना, योग, साइकिलिंग या हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से मांसपेशियां मजबूत रहती हैं और हड्डियों की ताकत भी बनी रहती है। सप्ताह में दो से तीन दिन हल्के वजन वाले व्यायाम करने से शरीर का संतुलन बेहतर होता है और गिरने का जोखिम भी कम हो सकता है।

2. प्रोटीन और संतुलित आहार खाएं

उम्र बढ़ने के साथ शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन-डी और फाइबर की जरूरत बढ़ जाती है। भोजन में दालें, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें। अत्यधिक तला-भुना भोजन, अधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखने से वजन नियंत्रित रहता है और हृदय व मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है।

3. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं

50 वर्ष के बाद नियमित हेल्थ चेकअप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, आंखों की जांच, प्रोस्टेट संबंधी जांच (डॉक्टर की सलाह अनुसार) और अन्य जरूरी परीक्षण कराते रहने से बीमारियों का समय रहते पता चल सकता है। यदि पहले से कोई बीमारी है, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और सलाह का नियमित पालन करना जरूरी है।

4. पर्याप्त नींद और तनाव पर रखें नियंत्रण

अच्छी सेहत के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना बेहद जरूरी है। पर्याप्त नींद से शरीर की रिकवरी बेहतर होती है, मानसिक तनाव कम होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहती है। इसके अलावा ध्यान, प्राणायाम, परिवार के साथ समय बिताना और अपनी पसंद की गतिविधियों में शामिल होना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

20 से 30 जुलाई तक महासंयोग! इन 5 राशियों पर होगी धन, सफलता और भाग्य की बरसात

राशिफल। ज्योतिष के अनुसार 20 से 30 जुलाई के बीच बनने वाले कुछ शुभ ग्रह संयोगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग देखने को मिल सकता है। इस अवधि में कई लोगों को करियर, आर्थिक मामलों, व्यापार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विशेष रूप से पांच राशियों के लिए यह समय अपेक्षाकृत अधिक शुभ माना जा रहा है।

मेष राशि

20 से 30 जुलाई का समय मेष राशि के जातकों के लिए नई संभावनाएं लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने के योग बन सकते हैं। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना रहेगी। व्यापार में नए ग्राहकों या नए सौदों से लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बचत बढ़ाने का अवसर भी मिल सकता है। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए यह अवधि आत्मविश्वास और सफलता बढ़ाने वाली मानी जा रही है। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। यदि किसी नई योजना या निवेश पर काम कर रहे हैं तो सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ बढ़ सकता है और समाज में मान-सम्मान में वृद्धि हो सकती है। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को इस दौरान आर्थिक मामलों में राहत मिलने के संकेत हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने या आय के नए स्रोत बनने की संभावना बन सकती है। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन का समय हो सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिलने से भविष्य में उन्नति के रास्ते खुल सकते हैं। स्वास्थ्य भी सामान्य रहने की उम्मीद है।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए यह समय संतुलन और प्रगति का संकेत दे सकता है। व्यवसाय से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं और साझेदारी में चल रहे कार्यों में लाभ होने की संभावना है। नौकरी करने वालों के लिए पदोन्नति या वेतन वृद्धि से जुड़ी सकारात्मक खबर मिल सकती है। परिवार में किसी शुभ कार्य की योजना बन सकती है और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए 20 से 30 जुलाई का समय भाग्य का साथ देने वाला माना जा रहा है। करियर में नई उपलब्धियां हासिल हो सकती हैं। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने की संभावना है। व्यापार में लाभ बढ़ सकता है और आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत हो सकती है। निवेश से जुड़े मामलों में सोच-समझकर लिया गया निर्णय भविष्य में लाभदायक साबित हो सकता है। परिवार का सहयोग और मानसिक संतोष भी प्राप्त हो सकता है।

60 के बाद भी हड्डियां रहेंगी मजबूत! रोज खाएं ये 5 चीजें, बढ़ेगी ताकत और फिटनेस

हेल्थ डेस्क। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई प्राकृतिक बदलाव आते हैं, जिनमें हड्डियों का कमजोर होना भी शामिल है। 60 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों का घनत्व धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे फ्रैक्चर, जोड़ों में दर्द और चलने-फिरने में परेशानी का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लंबे समय तक हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-डी और अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर आहार हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं ऐसी पांच चीजों के बारे में जिन्हें रोजाना संतुलित मात्रा में आहार में शामिल किया जा सकता है।

1. दूध और दही

दूध और दही कैल्शियम के सबसे अच्छे स्रोतों में गिने जाते हैं। इनमें मौजूद प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि डॉक्टर ने किसी कारण से मना न किया हो, तो रोजाना एक से दो सर्विंग दूध या दही लेना लाभदायक हो सकता है।

2.पत्तेदार सब्जियां

पालक, मेथी, सरसों का साग और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन-के और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। इन्हें नियमित भोजन का हिस्सा बनाने से शरीर को कई अन्य पोषण संबंधी लाभ भी मिलते हैं।

3. बादाम और तिल

बादाम और तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, हेल्दी फैट और प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में इनका नियमित सेवन हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इन्हें नाश्ते या हल्के स्नैक के रूप में लिया जा सकता है।

4. दालें और सोयाबीन

दालें, राजमा, चना और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की मजबूती बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन लेना जरूरी होता है। मजबूत मांसपेशियां हड्डियों को भी बेहतर सहारा देती हैं और गिरने का जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं।

5. अंडा और वसायुक्त मछली

यदि आप अंडा या मछली खाते हैं, तो इन्हें संतुलित मात्रा में भोजन में शामिल किया जा सकता है। इनमें प्रोटीन के साथ विटामिन-डी भी पाया जाता है, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

LPG सिलेंडर चाहिए? नई व्यवस्था से नागरिकों को बड़ी खुशखबरी

न्यूज डेस्क। रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक नई और सुविधाजनक सेवा की शुरुआत की गई है। अब एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी को पहले से अधिक आसान बनाने के लिए क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए ऑन-डिमांड सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को कम समय में सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना है।

फिलहाल इस सेवा की शुरुआत पहले चरण में बेंगलुरु से की गई है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य शहरों तक भी विस्तार दिया जा सकता है।

ऐप के जरिए मिनटों में कर सकेंगे ऑर्डर

नई सुविधा के तहत उपभोक्ता क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के मोबाइल ऐप पर जाकर एलपीजी सिलेंडर का ऑर्डर दे सकेंगे। इसके लिए लंबी बुकिंग प्रक्रिया या पारंपरिक इंतजार की आवश्यकता नहीं होगी। कंपनी का कहना है कि ऑर्डर मिलने के बाद अधिकृत वितरकों के माध्यम से सिलेंडर की डिलीवरी की जाएगी। यह सेवा विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है जिन्हें कम समय में गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती है।

कौन-सा सिलेंडर मिलेगा?

नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को 10 किलोग्राम का कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। यह सिलेंडर पारंपरिक लोहे के सिलेंडर की तुलना में हल्का, जंग-रोधी और आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस बताया गया है। इसकी एक खास विशेषता पारदर्शी बाहरी परत है, जिससे उपभोक्ता आसानी से यह देख सकते हैं कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है। इसके अलावा 5 किलोग्राम का मेटल एलपीजी सिलेंडर भी विकल्प के रूप में उपलब्ध रहेगा।

किन लोगों को होगा फायदा?

यह सुविधा छात्रों, किराये के मकानों में रहने वाले लोगों, अविवाहित कामकाजी युवाओं, छोटे परिवारों और अतिरिक्त गैस सिलेंडर रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस सेवा का लाभ लेने के लिए पारंपरिक घरेलू एलपीजी कनेक्शन होना अनिवार्य नहीं रखा गया है, जिससे अधिक लोग इसका उपयोग कर सकेंगे।

पहली बार ऑर्डर करने पर क्या होगा?

जो उपभोक्ता पहली बार ऑर्डर करेंगे, उन्हें नया सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद जब भी रिफिल की जरूरत होगी, डिलीवरी के समय खाली एचपीसीएल सिलेंडर वापस करना होगा और उसके बदले भरा हुआ सिलेंडर दिया जाएगा। सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पहली डिलीवरी के दौरान पहचान सत्यापन (आईडी वेरिफिकेशन) और डिलीवरी की पुष्टि की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

अधिकृत वितरकों के जरिए होगी डिलीवरी

कंपनी के अनुसार सभी ऑर्डर अधिकृत गैस वितरकों के माध्यम से पूरे किए जाएंगे। सिलेंडर की डिलीवरी प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए की जाएगी, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिल सके।

क्या भविष्य में अन्य शहरों में भी मिलेगी सुविधा?

फिलहाल यह सुविधा केवल बेंगलुरु में शुरू की गई है। हालांकि यदि उपभोक्ताओं से अच्छा प्रतिसाद मिलता है, तो आने वाले समय में इस सेवा का विस्तार देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी किया जा सकता है। इससे एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता पहले की तुलना में और अधिक आसान तथा तेज हो सकती है।

शिव योग का चमत्कारी असर! इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगी खुशखबरी

राशिफल। ज्योतिष में शिव योग को शुभ योगों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब यह योग बनता है, तो कई लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, नए अवसर और शुभ परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ग्रहों की अनुकूल स्थिति का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ता है, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभदायक माना जा रहा है।

मेष राशि

शिव योग का प्रभाव मेष राशि के जातकों के लिए उत्साह और प्रगति लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। नौकरी करने वालों को अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है और नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन रहे हैं। व्यापार में लाभ बढ़ सकता है तथा आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए यह योग मान-सम्मान और सफलता का संकेत दे सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिलने की संभावना है। व्यापारियों के लिए नए सौदे और आय के अवसर बन सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात भविष्य के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए शिव योग आर्थिक और पारिवारिक दृष्टि से शुभ माना जा रहा है। रुका हुआ धन मिलने के योग बन सकते हैं। व्यवसाय में विस्तार की योजनाओं को गति मिल सकती है। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए भी यह समय पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन का संकेत देता है।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए यह योग भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ बढ़ सकता है और पुराने निवेश से भी फायदा मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा परिवार का सहयोग हर महत्वपूर्ण निर्णय में प्राप्त होगा।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! सैलरी, DA और पेंशन में बड़े बदलाव का रोडमैप तैयार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर अहम प्रगति हुई है। सरकार द्वारा आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी मिलने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आयोग किन-किन विषयों की समीक्षा करेगा और भविष्य में वेतन, महंगाई भत्ता (DA), पेंशन, ग्रेच्युटी और विभिन्न भत्तों में किस प्रकार के सुधारों की सिफारिश की जा सकती है। इन सिफारिशों का असर देशभर के एक करोड़ से अधिक लाभार्थियों पर पड़ने की उम्मीद है।

18 महीने में रिपोर्ट सौंपेगा आयोग

8वां वेतन आयोग एक निर्धारित अवधि के लिए गठित किया जाएगा। आयोग में अध्यक्ष, एक अंशकालिक सदस्य और एक सदस्य-सचिव शामिल होंगे। इसे अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो आयोग बीच में अंतरिम रिपोर्ट भी सरकार को सौंप सकता है।

वेतन और पे-मैट्रिक्स की होगी समीक्षा

आयोग का सबसे बड़ा फोकस कर्मचारियों के वेतन ढांचे को वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा। इसके तहत पे-मैट्रिक्स, बेसिक सैलरी और वेतन संरचना की समीक्षा की जाएगी ताकि सरकारी सेवाओं को अधिक आकर्षक बनाया जा सके और योग्य प्रतिभाओं को सरकारी नौकरी की ओर प्रोत्साहित किया जा सके।

DA, HRA और अन्य भत्तों में बदलाव

8वें वेतन आयोग के दायरे में महंगाई भत्ता (DA), पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) समेत कई अन्य भत्तों की समीक्षा भी शामिल रहेगी। इसके अलावा कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न नकद और गैर-नकद लाभों का भी आकलन किया जाएगा ताकि मौजूदा व्यवस्था को अधिक सरल और प्रभावी बनाया जा सके।

बोनस और इंसेंटिव पर रहेगा विशेष जोर

इस बार आयोग केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देगा। इसके तहत प्रदर्शन आधारित बोनस और इंसेंटिव व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विचार किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने के लिए नई सिफारिशें तैयार की जा सकती हैं, जिससे कार्य संस्कृति में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने का लक्ष्य पूरा हो सके।

पेंशनर्स, NPS और UPS कर्मचारियों को भी लाभ

आयोग पेंशनभोगियों के हितों की भी व्यापक समीक्षा करेगा। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी संबंधी प्रावधानों पर विचार किया जाएगा। वहीं पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी व्यवस्था का भी मूल्यांकन किया जाएगा ताकि भविष्य में संतुलित और व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जा सके।

आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर होंगी सिफारिशें

आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय केवल कर्मचारियों के हितों को ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति और सरकारी वित्तीय क्षमता को भी ध्यान में रखेगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वेतन संबंधी बदलावों का राज्यों के बजट, विकास योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र की वेतन व्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाएगा।

किन केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू होंगी सिफारिशें?

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, रक्षा बलों के कर्मियों, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों, भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग, सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों तथा अन्य पात्र केंद्रीय संस्थानों पर लागू होने की संभावना है। अंतिम दायरा सरकार द्वारा आयोग की सिफारिशें स्वीकार करने के बाद तय होगा।

लाखों कर्मचारियों की निगाहें आयोग की रिपोर्ट पर

फिलहाल 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है, लेकिन टर्म्स ऑफ रेफरेंस सामने आने के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों पर रहेगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर भविष्य में वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।

खुशखबरी का खुला पिटारा! यूपी में 1 बड़ी सरकारी भर्ती शुरू, बिना देर किए करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने फूड सेफ्टी ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से निर्धारित अंतिम तिथि तक आवेदन कर सकते हैं। यदि आप संबंधित शैक्षणिक योग्यता रखते हैं और सरकारी नौकरी की तलाश में हैं, तो यह आपके लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है।

आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 जून 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 27 जुलाई 2026 तक अपना आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम समय की परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

शैक्षणिक योग्यता

इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से बी.टेक/बी.ई. की डिग्री होना आवश्यक है। विस्तृत पात्रता, आयु सीमा और अन्य शर्तों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में देखी जा सकती है।

आवेदन शुल्क

विभिन्न श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क अलग-अलग निर्धारित किया गया है। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 125 रुपये, एससी और एसटी वर्ग के लिए 65 रुपये, दिव्यांग (PwD) अभ्यर्थी के लिए 25 रुपये, भूतपूर्व सैनिक के लिए 65 रुपये निर्धारित हैं। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।

ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

सबसे पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। भर्ती से संबंधित नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें। ऑनलाइन आवेदन लिंक पर क्लिक करें। मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान करें।आवेदन फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।