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बिहार के गांवों में बना रहे हैं बड़ा मकान? जान लें नया नियम

पटना। बिहार के ग्रामीण इलाकों में अब बड़े मकान, अपार्टमेंट या बहुमंजिला भवन बनाने वालों को नए नियमों का सामना करना पड़ सकता है। गांवों में तेजी से बढ़ रहे बड़े निर्माण को व्यवस्थित करने के लिए जिला स्तर पर निगरानी और नक्शा स्वीकृति की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। हालांकि, छोटे और सामान्य मकानों को इससे राहत मिलने की बात कही गई है।

बड़े निर्माण की जिला स्तर पर होगी जांच

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़े निर्माण से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक विशेष कमेटी बनाई जा सकती है। डीडीसी की अध्यक्षता वाली इस समिति में पंचायती राज, जिला परिषद, राजस्व और विधि विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे। बड़े प्रोजेक्ट की योजना, स्वीकृति और निर्माण से जुड़े पहलुओं की जांच में समिति की अहम भूमिका हो सकती है।

500 वर्गमीटर से ज्यादा परियोजनाओं पर नजर

यदि किसी ग्रामीण क्षेत्र में 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में रियल एस्टेट परियोजना विकसित की जाती है, तो उसके पंजीकरण की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे प्रोजेक्ट में लेआउट, जरूरी अनुमतियों और निर्माण से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इससे बड़े ग्रामीण प्रोजेक्ट को एक तय व्यवस्था के तहत लाने में मदद मिलेगी।

छोटे मकानों को मिल सकती है राहत

हर ग्रामीण मकान पर ये नियम लागू नहीं होंगे। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार 500 वर्गमीटर तक की छोटी परियोजनाओं और सामान्य ग्राउंड प्लस दो मंजिला मकानों को अनिवार्य नक्शा स्वीकृति के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। मुख्य रूप से बड़े और अधिक मंजिल वाले निर्माण पर सख्ती की संभावना है।

गांवों में क्यों जरूरी हो रही ऐसी व्यवस्था?

शहरों से लगे ग्रामीण इलाकों में जमीन की कीमत बढ़ने के साथ अपार्टमेंट और बड़े भवनों का निर्माण भी बढ़ा है। कई स्थानों पर बिना पर्याप्त योजना के निर्माण होने से सड़क, पार्किंग, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है। नई प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे निर्माण को नियंत्रित कर ग्रामीण क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास करना है।

अंतिम नियम आने के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल इन प्रावधानों को लेकर अंतिम नियमावली और अधिसूचना का इंतजार है। कमेटी की शक्तियां, आवेदन की प्रक्रिया, नक्शा स्वीकृति और अन्य शर्तें आधिकारिक नियम जारी होने के बाद स्पष्ट होंगी। इसलिए ग्रामीण इलाकों में बड़ा निर्माण कराने वालों को अंतिम अधिसूचना आने तक आधिकारिक जानकारी पर नजर रखनी चाहिए।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 5 बड़ी खबर

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर इन दिनों आठवें केंद्रीय वेतन आयोग पर टिकी हुई है। आयोग अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके संगठनों से सुझाव और मांगें जुटा रहा है। आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई हैं और इसका गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय मिला है।

1. सलाहकारों की नियुक्ति के नियमों में बदलाव

आठवें वेतन आयोग ने 11 अगस्त को सलाहकारों की नियुक्ति से संबंधित दिशा-निर्देशों में आंशिक संशोधन किया है। इससे संकेत मिलता है कि आयोग अपनी विशेषज्ञ टीम और कामकाज से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

2. जयपुर में होगी बड़ी बैठक

राजस्थान के जयपुर में आयोग की बैठक 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित है। इसमें कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और अन्य संबंधित पक्षों को अपनी समस्याएं व सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। बैठक में शामिल होने के लिए सुझाव और आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 18 अगस्त बताई गई है।

3. चंडीगढ़ में 16 से 18 सितंबर तक चर्चा

आयोग चंडीगढ़ में 16 से 18 सितंबर 2026 के बीच बैठक करेगा। यहां भी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रख सकेंगे। इसके लिए आवेदन और सुझाव जमा करने की अंतिम तारीख 25 अगस्त है।

4. पुडुचेरी में 9 सितंबर को बैठक

पुडुचेरी में 9 सितंबर 2026 को आठवें वेतन आयोग की बैठक होगी। इस दौरान संबंधित पक्ष वेतन, पेंशन और सेवा से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय आयोग के सामने रख सकते हैं। बैठक के लिए सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 18 अगस्त निर्धारित है।

5. चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को बैठक

चेन्नई में आयोग 7 और 8 सितंबर 2026 को कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के साथ विचार-विमर्श करेगा। इस बैठक के जरिए भी अलग-अलग पक्ष अपनी मांगें और सुझाव आयोग तक पहुंचा सकेंगे। यहां सुझाव व आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 18 अगस्त है।

कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए क्या है मायने?

आठवें वेतन आयोग की मौजूदा गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि अभी प्रक्रिया शुरुआती आकलन और सुझाव लेने के चरण में है। आयोग विभिन्न राज्यों में जाकर कर्मचारियों और पेंशनर्स की वास्तविक समस्याओं को समझने की कोशिश कर रहा है। इन बैठकों में मिलने वाले सुझाव आगे तैयार होने वाली सिफारिशों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

CM सम्राट चौधरी की सौगात, नागरिकों के लिए बड़ी खुशखबरी!

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के धनरुआ प्रखंड स्थित नदवां गांव को कई विकास योजनाओं की सौगात दी है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गांव पहुंचे मुख्यमंत्री ने स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, खेल, बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुविधाओं से जुड़ी कई घोषणाएं कीं।

आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक भवन के लिए 12-12 लाख

महादलित टोले में आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए सरकार की ओर से 12-12 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे स्थानीय लोगों को बच्चों की देखभाल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

स्कूल के खेल मैदान पर खर्च होंगे 1.07 करोड़

नदवां हाई स्कूल के खेल मैदान के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 7 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा पंचायत सरकार भवन के निर्माण के लिए करीब 2.50 करोड़ रुपये और कन्या विवाह मंडप के लिए 50 लाख रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री ने नदवां हाई स्कूल को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की।

अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। खास तौर पर महादलित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति खुशहाल नहीं होगा, तब तक विकास को पूर्ण नहीं माना जा सकता।

महादलित टोले में स्वतंत्रता दिवस मनाया

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अगस्त को नदवां के महादलित टोले में स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ध्वजारोहण किया और स्थानीय लोगों को संबोधित किया। महादलित टोले में स्वतंत्रता दिवस मनाने की यह परंपरा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल से भी जुड़ी रही है, जिसे सम्राट चौधरी ने आगे बढ़ाया।

रोजगार और विकास पर भी सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने बिहार के व्यापक विकास को लेकर भी कई योजनाओं की जानकारी दी। इनमें चीनी मिलों को फिर से शुरू करने, तिरुपति बालाजी मंदिर के निर्माण, परीक्षाओं में पारदर्शिता, एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजनाएं शामिल हैं।

बुधदेव 18 अगस्त को होंगे अस्त, 3 राशियों के लिए आएगी बड़ी खुशखबरी

राशिफल। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 18 अगस्त 2026 को बुधदेव सिंह राशि में सूर्य के निकट आने के कारण अस्त हो जाएंगे। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध की स्थिति में बदलाव का असर अलग-अलग राशियों पर अलग तरह से पड़ सकता है। कर्क, वृश्चिक और तुला राशि के जातकों के लिए यह समय योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने पर सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए बुध के अस्त होने का समय कुछ मामलों में लाभदायक रह सकता है। नौकरी या कारोबार से जुड़े लोग अपनी योजनाओं पर व्यवस्थित तरीके से काम करेंगे तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसले लेना फायदेमंद रहेगा। पुराने कामों को पूरा करने का भी अच्छा मौका मिल सकता है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय नई योजनाओं पर ध्यान देने वाला हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत नजर आ सकती है और किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने की संभावना बन सकती है। निवेश या पैसों से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। सही रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर लाभ मिल सकता है।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए बुध का यह परिवर्तन सकारात्मक अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है या व्यापार में कोई उपयोगी संपर्क बन सकता है। बातचीत के जरिए कई अटके काम सुलझ सकते हैं। यदि आप किसी नई योजना पर काम कर रहे हैं तो उसे सही तरीके से लागू करने पर अच्छे नतीजे मिलने की उम्मीद है।

यूपी में राशन दुकानदारों को खुशखबरी, कमीशन में बंपर इजाफा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राशन दुकानदारों यानी कोटेदारों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कमीशन बढ़ाने का ऐलान किया। अब कोटेदारों को पहले के मुकाबले ज्यादा कमीशन मिलेगा। साथ ही राशन वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था भी शुरू की गई है।

90 से बढ़कर 125 रुपये हुआ कमीशन

सरकार ने राशन दुकानदारों का कमीशन 90 रुपये से बढ़ाकर 125 रुपये प्रति कुंतल कर दिया है। इस फैसले से प्रदेशभर के कोटेदारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े दुकानदारों की भूमिका को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

ई-पॉस से मिलेगा फीडबैक

राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ई-पॉस आधारित फीडबैक सिस्टम की शुरुआत भी की गई है। इससे राशन लेने वाले लाभार्थियों की प्रतिक्रिया दर्ज की जा सकेगी और वितरण व्यवस्था की निगरानी बेहतर तरीके से होगी। सीएम योगी ने कहा कि पहले राशन व्यवस्था में होने वाली गड़बड़ियों का असर कोटेदारों की छवि पर भी पड़ता था। उनकी सरकार ने बिचौलियों की भूमिका कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है।

गोदाम तक सीधे पहुंचेगा राशन

सरकार के अनुसार अब एफसीआई के गोदाम से राशन सीधे उचित दर की दुकानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। ई-पॉस मशीनों के जरिए वितरण प्रक्रिया को भी पहले से अधिक पारदर्शी बनाया गया है। इसके अलावा उचित दर की दुकानों को ‘अन्नपूर्णा भवन’ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है, जहां दुकान के साथ भंडारण की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

करोड़ों लोगों को मिल रहा मुफ्त राशन

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत प्रदेश में करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार के मुताबिक निराश्रित और दिव्यांग लाभार्थियों तक घर पर राशन पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है।

गुरुजी रहें सतर्क! बिहार में अब शुरू होगी गुप्त मॉनिटरिंग

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की पढ़ाने की शैली और कक्षा में बच्चों की पढ़ाई पर अब डिजिटल तरीके से नजर रखी जाएगी। शिक्षा विभाग इसके लिए एक विशेष डैशबोर्ड तैयार कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था नवंबर से शुरू होने की बात कही गई है।

दूसरे जिलों के शिक्षक करेंगे निगरानी

मॉनिटरिंग के लिए चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें अपने जिले से बाहर के स्कूलों में भेजा जाएगा। एक शिक्षक को एक दिन में करीब तीन स्कूलों का निरीक्षण करना होगा। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि कक्षा में शिक्षक क्या पढ़ा रहे हैं, किस तरीके से पढ़ा रहे हैं और विद्यार्थी पढ़ाई में कितनी भागीदारी कर रहे हैं। निरीक्षण की पूरी जानकारी डिजिटल डैशबोर्ड पर अपलोड की जाएगी।

बिना बताए होगा स्कूल का निरीक्षण

मॉनिटरिंग करने वाले शिक्षक जिस स्कूल में जाएंगे, इसकी जानकारी संबंधित विद्यालय को पहले से नहीं दी जाएगी। इससे कक्षा में पढ़ाई की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

एक स्कूल की दो बार होगी जांच

व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए काउंटर चेक भी किया जाएगा। एक शिक्षक के निरीक्षण के बाद उसी स्कूल में दूसरे शिक्षक को भेजकर दोबारा जांच कराई जाएगी। दोनों रिपोर्ट का मिलान किया जाएगा, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या गलत रिपोर्टिंग की संभावना कम हो।

नवंबर में तैयार होगा आईटी सिस्टम

शिक्षा मंत्री के अनुसार पूरी मॉनिटरिंग व्यवस्था एक विशेष आईटी सिस्टम के जरिए संचालित होगी। इसके लिए डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है। नवंबर तक सिस्टम तैयार होने के बाद मॉनिटरिंग शुरू करने की योजना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखना और जरूरत के अनुसार सुधार करना है।

बिहार की धरती में छिपा है खनिजों का भंडार, 8 जिलों के लिए खुशखबरी!

पटना। बिहार में खनिज संपदा के विकास की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। राज्य के कई जिलों में महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार मिलने के बाद अब इनके खनन और खनिज ब्लॉकों की नीलामी की तैयारी की जा रही है। इससे राज्य में निवेश बढ़ने के साथ राजस्व और रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

खनिज ब्लॉकों की नीलामी, निवेश की संभावनाओं और आगे की रणनीति को लेकर पटना में केंद्रीय और राज्य स्तर के अधिकारियों के बीच चर्चा प्रस्तावित है। बैठक में केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के साथ मंत्रालय के अधिकारी तथा बिहार के खान एवं भू-तत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार शामिल होंगे।

इन 8 जिलों में मिले खनिज

खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार रोहतास, गया, जमुई, बांका, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और भागलपुर में ग्लूकोनाइट, निकेल, क्रोमियम, तांबा, लेड-जिंक, दुर्लभ मृदा तत्व और अन्य महत्वपूर्ण खनिज मिले हैं। इनमें कई खनिजों की जरूरत बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में होती है। ऐसे में इनके व्यावसायिक इस्तेमाल से बिहार में उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है।

बढ़ेगा निवेश और रोजगार

खनिज ब्लॉकों की नीलामी से सरकार को रॉयल्टी और अन्य मदों के जरिए राजस्व मिलने की उम्मीद है। वहीं, खनन और खनिज आधारित उद्योग शुरू होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार का जोर खनिजों के उत्खनन के साथ उनके प्रसंस्करण और उनसे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी है। इससे आने वाले समय में बिहार की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पानी-पानी होगा बिहार! सभी 38 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

पटना। बिहार में एक बार फिर मानसून सक्रिय होता नजर आ रहा है। सावन की तीसरी सोमवारी पर मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 38 जिलों के लिए बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में तेज बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। कुछ जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है।

कई जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में येलो अलर्ट जारी किया है।

वहीं बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई और बांका समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। इन क्षेत्रों में मौसम ज्यादा खराब रहने की संभावना है।

इन जिलों में बारिश का ज्यादा असर

मौसम विभाग के अनुसार गया, नवादा और जमुई में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रह सकती हैं। ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचना बेहतर होगा।

बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से बदला मौसम

मौसम में बदलाव की प्रमुख वजह बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र माना जा रहा है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है। इसके उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना के कारण बिहार में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

18 और 19 अगस्त को भी बारिश का दौर रहेगा जारी

मौसम विभाग के अनुसार 18 अगस्त को भी बिहार में बारिश का असर बना रह सकता है। कई जिलों में येलो अलर्ट और अन्य क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट की स्थिति रहेगी। 19 अगस्त को प्रदेश के सभी हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान पश्चिमी और उत्तरी बिहार के कुछ इलाकों में मौसम ज्यादा सक्रिय रह सकता है। लगातार बारिश होने से तापमान में गिरावट आने की संभावना है। इससे पिछले कुछ दिनों से जारी गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिल सकती है।

कल मंगल का शुभ प्रभाव, 5 राशियों की किस्मत लेगी करवट, दुख-दर्द होंगे दूर

राशिफल। ज्योतिष के अनुसार कल मंगल का शुभ प्रभाव कुछ राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है। ऐसे में मंगल की अनुकूल स्थिति से कुछ जातकों को करियर, धन और पारिवारिक जीवन में राहत मिलने के संकेत मिल सकते हैं। हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियां आस्था और मान्यताओं पर आधारित होती हैं।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए समय उत्साह बढ़ाने वाला रह सकता है। रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं और नौकरी या कारोबार में नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। आर्थिक मामलों में भी सुधार की उम्मीद है।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों को मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और किसी पुराने तनाव से राहत मिलने के संकेत हैं। परिवार में भी सकारात्मक माहौल बना रह सकता है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ का मौका मिल सकता है। नौकरीपेशा जातकों के लिए नई उपलब्धि या जिम्मेदारी के रास्ते खुल सकते हैं।

4. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल का प्रभाव खास माना जा सकता है। लंबे समय से अटके कार्य पूरे होने की संभावना है। धन से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं और परिवार का सहयोग मिलेगा।

5. धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए कल का दिन नई उम्मीद लेकर आ सकता है। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। किसी महत्वपूर्ण योजना पर काम शुरू करने का मौका मिलेगा और पुराने दुख-दर्द से मानसिक राहत महसूस हो सकती है।

योगी सरकार का मास्टरप्लान, यूपीवासियों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार गो संरक्षण को नई पीढ़ी और युवाओं से जोड़ने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गो संरक्षण अभियान को ग्रामीण रोजगार, प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सरकार की योजना करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार करने की है।

1. युवाओं को जोड़ा जाएगा गो सेवा से

अभियान के तहत मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे गांवों में लोगों को जागरूक करेंगे। बच्चों और युवाओं को देसी गोवंश, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और गो आधारित उत्पादों के फायदे बताए जाएंगे। सरकार का जोर गो सेवा को नई पीढ़ी के लिए रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर है।

2. गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश

प्रदेश में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। सरकार ने प्रति गोवंश सहायता राशि को 30 से बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन किया है। कई आश्रय स्थलों में निगरानी के लिए सीसीटीवी की व्यवस्था भी की गई है।

3. पशुपालकों को मिलेगा रोजगार का सहारा

मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के जरिए करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं। सरकार का उद्देश्य पशुपालन को ग्रामीण परिवारों की नियमित आय का जरिया बनाना है।

4. गोबर से तैयार होंगे कमाई वाले उत्पाद

गोशालाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकंपोस्ट, धूपबत्ती, गमले और दीये जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन कामों में महिला स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

5. जिले के हिसाब से बनेगी रोजगार की योजना

हर जिले की क्षमता के अनुसार गोशालाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। जहां बायोगैस की संभावना अधिक होगी, वहां प्लांट लगाने पर जोर दिया जाएगा। अन्य जगहों पर जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जा सकती हैं। इससे गो संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की कोशिश होगी।

बिहार के किसानों को बड़ा तोहफा, सरकार ने दी 3 बड़ी खुशखबरी!

पटना। बिहार के किसानों के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। खेती से जुड़े जोखिम को कम करने, ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करने और अनाज भंडारण की व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए हैं। इनमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करना, सहकारी समितियों के जरिए माइक्रो-एटीएम की सुविधा बढ़ाना और समितियों में बड़े गोदामों का निर्माण शामिल है।

रबी सीजन से लागू होगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी मौसम से बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है।

योजना के तहत किसानों को उनकी कृषि लागत के अनुरूप क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। खास बात यह है कि किसानों को बीमा के लिए अपेक्षाकृत कम प्रीमियम देना होगा, जबकि प्रीमियम की लागत में केंद्र और राज्य सरकार भी अपना हिस्सा वहन करेंगी। किसानों से कितना प्रीमियम लिया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी।

गांवों में माइक्रो-एटीएम से बढ़ेगी बैंकिंग सुविधा

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी काम कर रही है। सहकार कार्यक्रम के तहत 186 दुग्ध सहकारी समितियों, 618 पैक्स, 19 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों और सात अन्य सहकारी संस्थाओं को बैंक मित्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

इन संस्थानों पर माइक्रो-एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीण लोगों को बैंकिंग से जुड़े कई छोटे कामों के लिए दूर स्थित बैंक शाखाओं पर निर्भरता कम होगी। विशेष अभियान चलाकर सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।

36 समितियों में बनेंगे अनाज के बड़े गोदाम

किसानों और सहकारी समितियों के लिए तीसरी बड़ी पहल अन्न भंडारण से जुड़ी है। अन्न भंडारण योजना के तहत राज्य की 36 समितियों में अलग-अलग क्षमता वाले गोदामों का निर्माण कराया जा रहा है। इन गोदामों की क्षमता 1000, 2000 और 2500 टन तक होगी। इससे स्थानीय स्तर पर अनाज को सुरक्षित रखने की क्षमता बढ़ेगी और फसल के भंडारण के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार होगा।

यूपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 47 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है। रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह से ही बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। लखनऊ, रायबरेली, झांसी, इटावा, कानपुर, फतेहपुर और बांदा समेत करीब 35 जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण कई इलाकों में मौसम सुहावना हो गया, वहीं किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को भी प्रदेश के 47 जिलों में भारी बारिश होने के आसार हैं। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कई जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

इन जिलों में भारी बारिश के आसार

मौसम विभाग ने अंबेडकर नगर, अयोध्या, बदायूं, बहराइच, बाराबंकी, बरेली, फतेहपुर, गाजीपुर, गोंडा, हरदोई, जौनपुर, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रतापगढ़, रामपुर, संभल, शाहजहांपुर, सीतापुर, श्रावस्ती, सुलतानपुर और वाराणसी समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

इसके अलावा अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बलिया, बलरामपुर, बस्ती, बिजनौर, चंदौली, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कौशांबी, लखनऊ, मऊ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, रायबरेली, सहारनपुर, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र और उन्नाव में भी तेज बारिश हो सकती है।

56 जिलों में आकाशीय बिजली का खतरा

बारिश के साथ प्रदेश के 56 जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका जताई गई है। इस दौरान लोगों को खुले मैदान, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम खराब होने पर घर के अंदर रहना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

मानसून की दोबारा सक्रियता से प्रदेश में बारिश का दौर अभी जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी होने वाले ताजा अलर्ट पर नजर रखना जरूरी होगा।

यूपी के लिए बड़ी खुशखबरी! केंद्र से मिलने लगी सबसे ज्यादा बिजली

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की बढ़ती बिजली जरूरतों के बीच राज्य के लिए राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय क्षेत्र की बिजली परियोजनाओं से राज्यों को होने वाले आवंटन में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर पहुंच गया है। राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक उत्तर प्रदेश को केंद्रीय परियोजनाओं से 11,520.5 मेगावाट बिजली आवंटित हुई है।

लगातार बढ़ रहा यूपी का केंद्रीय बिजली हिस्सा

आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से मिलने वाली बिजली में पिछले कुछ समय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 31 मार्च 2025 तक प्रदेश के हिस्से में 9,530.4 मेगावाट बिजली थी। यह आंकड़ा 31 मार्च 2026 को बढ़कर 10,881.2 मेगावाट हो गया। इसके बाद 30 जून 2026 तक केंद्रीय परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश के लिए आवंटन बढ़कर 11,520.5 मेगावाट पहुंच गया। यानी करीब डेढ़ साल के दौरान केंद्रीय हिस्से से मिलने वाली बिजली में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।

महाराष्ट्र से भी आगे निकला उत्तर प्रदेश

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 को उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से महाराष्ट्र की तुलना में 2,495.3 मेगावाट अधिक बिजली मिली। इससे केंद्रीय बिजली आवंटन में उत्तर प्रदेश की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केंद्रीय क्षेत्र से अधिक बिजली मिलने से प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

2008 में उठी थी बिजली आवंटन की मांग

उत्तर प्रदेश को केंद्रीय बिजली आवंटन में अधिक हिस्सा दिए जाने की मांग कोई नई नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2008 में ‘गाडगिल फार्मूले’ के आधार पर प्रदेश को बिजली आवंटित किए जाने का मुद्दा उठाया था। परिषद की ओर से रखे गए तर्क के आधार पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष ने भी केंद्र सरकार के सामने इस व्यवस्था के तहत बिजली आवंटन की मांग रखी थी। अब परिषद का कहना है कि लंबे समय से उठाए जा रहे इस मुद्दे का लाभ प्रदेश को मिलता दिखाई दे रहा है।

गाडगिल फार्मूले में जनसंख्या को अहम महत्व

बिजली आवंटन से जुड़े इस फार्मूले में कई मानकों को ध्यान में रखा जाता है। इनमें सबसे बड़ा भारांक जनसंख्या का है। कुल भारांक में करीब 60 प्रतिशत हिस्सा जनसंख्या से जुड़ा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति आय, सिंचाई और बिजली से संबंधित चल रही परियोजनाएं, राज्यों की विशेष परिस्थितियां और कर प्रयास जैसे मानकों को भी महत्व दिया जाता है। राज्यों की पिछले कुछ वर्षों की ऊर्जा खपत भी बिजली आवंटन तय करने में भूमिका निभाती है।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, LPG को लेकर आई बड़ी खुशखबरी!

नई दिल्ली। देश में LPG की सप्लाई को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विदेशों से LPG आयात में किसी तरह की रुकावट आने पर घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए सरकार ने पहली बार रिफाइनरी और गैस उत्पादन से जुड़ी कंपनियों के लिए अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसका मकसद संकट की स्थिति में घरेलू बाजार में LPG की उपलब्धता बनाए रखना है।

21 कंपनियों को दिया गया उत्पादन का लक्ष्य

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी व्यवस्था के तहत देश की 21 रिफाइनरी और अपस्ट्रीम कंपनियों को जरूरत पड़ने पर LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार रहना होगा। सभी कंपनियों के लिए मिलाकर प्रतिदिन करीब 63,810 टन LPG उत्पादन की क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था सामान्य परिस्थितियों में रोजाना लागू होने वाला आदेश नहीं है। जब देश में LPG की आपूर्ति प्रभावित होगी, तब सरकार संबंधित कंपनियों को निर्धारित मात्रा में उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दे सकेगी।

विदेशों पर निर्भरता कम करने की तैयारी

भारत में LPG की खपत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है। अंतरराष्ट्रीय तनाव या समुद्री मार्गों में किसी तरह की बाधा आने पर इसका असर घरेलू आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी अनुभव को देखते हुए सरकार ने देश के भीतर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की है। नई व्यवस्था के जरिए आपात स्थिति में घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता का असर कम करने की कोशिश की जाएगी।

रिलायंस को सबसे बड़ा लक्ष्य

सरकार के निर्धारित लक्ष्य में रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर स्थित घरेलू बाजार के लिए काम करने वाली रिफाइनरी को सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य मिला है। जरूरत पड़ने पर यहां से प्रतिदिन 18,000 टन तक LPG उत्पादन कराने की क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा नायरा एनर्जी, ओएनजीसी और गेल समेत कई अन्य कंपनियों को भी उनकी क्षमता के अनुसार उत्पादन लक्ष्य दिया गया है।

सिर्फ उत्पादन नहीं, सप्लाई जोर

सरकार ने कंपनियों को केवल LPG उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा है। संकट की स्थिति में गैस को सुरक्षित रखने, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और समय पर बाजार तक उपलब्ध कराने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार रखने पर भी जोर दिया गया है। रेल और सड़क टैंकरों के जरिए LPG की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने की तैयारी भी इस व्यवस्था का हिस्सा है।

हर छह महीने में होगी समीक्षा

LPG उत्पादन से जुड़ी इस व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। नई रिफाइनरी, गैस क्षेत्र, तकनीकी बदलाव या उत्पादन क्षमता में वृद्धि होने पर कंपनियों के लक्ष्य में भी बदलाव किया जा सकता है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य यही है कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संकट या आयात में रुकावट की स्थिति में घरेलू LPG सप्लाई प्रभावित न हो।

बिहार सरकार का फैसला, किसानों-युवाओं के लिए 2 बड़ी खुशखबरी!

पटना। बिहार में मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों और इस क्षेत्र में कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार मखाना प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए मखाना पोपिंग मशीन पर अनुदान दे रही है। इससे किसानों को अपनी उपज की प्रोसेसिंग के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी, वहीं युवा इस मशीन के जरिए कम लागत में व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

क्या है मखाना पोपिंग मशीन?

मखाना तैयार करने की पारंपरिक प्रक्रिया में काफी मेहनत और समय लगता है। काले रंग के कच्चे बीजों को भूनने और उनसे सफेद मखाना निकालने की प्रक्रिया लंबे समय तक हाथों से की जाती रही है। मशीन की मदद से यही काम कम समय में किया जा सकता है। इससे उत्पादन की प्रक्रिया तेज होती है और किसानों को अपनी उपज की प्रोसेसिंग के बाद बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

छोटी मशीन पर 1.60 लाख अनुदान

योजना के तहत अलग-अलग क्षमता वाली मशीनों पर अलग-अलग दर से सहायता का प्रावधान है। 5 से 10 किलो प्रति घंटे क्षमता वाली मशीन पर सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को 70 प्रतिशत या अधिकतम 1.40 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला किसानों के लिए अनुदान की दर 80 प्रतिशत तक रखी गई है। इस श्रेणी में अधिकतम 1.60 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान बताया गया है।

बड़ी मशीन पर 5 लाख तक की सब्सिडी

योजना में अधिक क्षमता वाली मशीन को भी शामिल किया गया है। करीब 20 किलो प्रति घंटे क्षमता वाली बड़ी मशीन पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को अधिकतम 4 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। वहीं SC, ST और महिला किसानों के लिए इस मशीन पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

कैसे मिलेगा इस योजना का पूरा लाभ?

सब्सिडी का लाभ लेने के इच्छुक किसान और अन्य पात्र लोग अपने नजदीकी उद्यान विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहां योजना की पात्रता, मशीन की क्षमता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

यूपी सरकार का फैसला, 78 हजार कोटेदारों के लिए खुशखबरी; राशन वितरण में भी नई व्यवस्था

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उचित दर विक्रेताओं यानी कोटेदारों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के 78 हजार से अधिक कोटेदारों के लाभांश में बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। इसके साथ ही राशन वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए डिजिटल फीडबैक सिस्टम की शुरुआत भी होगी।

कोटेदारों का लाभांश बढ़ेगा

सरकार के फैसले के मुताबिक उचित दर विक्रेताओं को अब पहले की तुलना में ज्यादा लाभांश मिलेगा। वर्तमान में मिलने वाला 90 रुपये प्रति कुंतल का लाभांश बढ़ाकर 125 रुपये प्रति कुंतल किया जाएगा। इससे प्रदेशभर के हजारों कोटेदारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। यह फैसला राशन वितरण व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले उचित दर विक्रेताओं की आय और कामकाज को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

ई-पॉस से दर्ज होगा कोटेदारों का फीडबैक

सरकार सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी व्यवस्था के तहत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली भी शुरू करेगी। नई व्यवस्था में कोटेदार अपने अनुभव, समस्याओं और सुझावों को डिजिटल माध्यम से दर्ज करा सकेंगे। इससे राशन की सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों की जानकारी विभाग तक सीधे पहुंचने में मदद मिलेगी। साथ ही व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।

राशन व्यवस्था को और बेहतर बनाने की तैयारी

सरकार का फोकस सार्वजनिक वितरण प्रणाली को तकनीक के जरिए मजबूत करने पर है। ई-पॉस मशीनों के माध्यम से पहले से ही राशन वितरण को डिजिटल बनाया गया है। अब विक्रेताओं के फीडबैक को भी इसी व्यवस्था से जोड़ने से विभाग को जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने में मदद मिल सकती है।

सीएम योगी का बड़ा तोहफा, यूपी के युवाओं के लिए 3 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई एकीकृत युवा नीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को ऐसी नीति बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें शिक्षा, रोजगार, कौशल, स्टार्टअप, खेल और डिजिटल सुविधाओं को एक साथ शामिल किया जाएगा। खास बात यह है कि नीति तैयार करने से पहले 16 से 35 वर्ष की उम्र के युवाओं से सीधे सुझाव लिए जाएंगे।

1. AI और नई टेक्नोलॉजी में करियर के अवसर

नई युवा नीति में AI, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों को खास महत्व दिया जाएगा। युवाओं के लिए इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े अवसर बढ़ाने की योजना है। इसके साथ ही हर जिले में स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए यूथ इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे अपना कारोबार शुरू करने वाले युवाओं को बेहतर माहौल और जरूरी मार्गदर्शन मिल सकेगा।

2. नौकरी और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर

युवाओं की सुविधा के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने की योजना है। इस प्लेटफॉर्म पर करियर गाइडेंस, छात्रवृत्ति, रोजगार मेले और युवाओं से जुड़ी विभिन्न सरकारी सेवाओं की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार की कोशिश है कि युवाओं को अलग-अलग योजनाओं और अवसरों की जानकारी के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।

3. युवाओं को खेल और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिलेगा बढ़ावा

युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए गांव से लेकर मंडल स्तर तक खेल सुविधाएं विकसित करने की योजना है। ग्राम पंचायतों में खेल मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, जिला स्तर पर खेल उत्कृष्टता केंद्र और मंडल स्तर पर हाई परफॉर्मेंस सेंटर बनाने पर जोर रहेगा।

इसके अलावा आधुनिक पुस्तकालय और अध्ययन केंद्रों की संख्या बढ़ाने की भी तैयारी है। मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना को विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तक विस्तार देने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। इसमें युवा IAS-IPS अधिकारियों और दूसरे विशेषज्ञों को मार्गदर्शन के लिए जोड़ा जा सकता है।

युवाओं से पूछकर तैयार होगी नीति

नई नीति की खास बात यह होगी कि इसे केवल सरकारी स्तर पर तैयार नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, शोधार्थियों, स्टार्टअप संचालकों, युवा प्रोफेशनल्स और अन्य क्षेत्रों से जुड़े युवाओं की राय ली जाएगी। सरकार युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी और समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की भागीदारी वाला राज्य युवा आयोग गठित करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य योजनाओं को जमीनी जरूरतों के मुताबिक बेहतर बनाना होगा।

यूपी के 18 बस स्टेशन होंगे हाईटेक, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बस यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने प्रदेश के 18 बस स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दूसरे चरण में शामिल 49 बस स्टेशनों में से 18 के विकास के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक कंपनियां अब 1 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकती हैं।

पीपीपी मॉडल पर तैयार होंगे प्रीमियम बस स्टेशन

इन बस स्टेशनों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इन्हें प्रीमियम बस स्टेशन के रूप में तैयार करने की योजना है। यहां यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ रिटेल स्टोर, फूड कोर्ट, होटल, ऑफिस स्पेस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की भी व्यवस्था हो सकती है। इन परियोजनाओं में 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावना जताई गई है। इससे बस यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ संबंधित शहरों में व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

90 साल तक की लीज पर मिल सकेगा स्टेशन

परिवहन निगम के अनुसार, निवेशकों को इन परियोजनाओं के लिए बस स्टेशन की जमीन 90 वर्ष तक की लीज पर देने का प्रावधान है। इससे विकसित होने वाले स्टेशन सिर्फ बसों के आने-जाने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि आधुनिक ट्रांजिट-कमर्शियल हब के तौर पर भी विकसित किए जा सकेंगे।

इन 18 जिलों में होगा विकास

दूसरे चरण के तहत जिन बस स्टेशनों को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है, उनमें अकबरपुर, अमेठी, बदायूं, भिगना, गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, गोला, सिधौली, माती, उन्नाव, हैदरगढ़, नहटौर, सराय अकील, बादशाहपुर, तर्वा, पीलीभीत और निचलौल शामिल हैं।

आवेदन की तारीख बढ़ाई गई

पहले टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख 10 अगस्त निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब 1 सितंबर 2026 कर दिया गया है। परियोजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी परिवहन निगम की वेबसाइट और ई-टेंडर पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है।

CM सम्राट चौधरी ने दिए निर्देश, बिहारवासियों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी!

पटना। बिहार में पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए हैं। सरकार का फोकस प्राकृतिक स्थलों को विकसित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है।

1. ट्रैकिंग और एडवेंचर गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

सरकार प्राकृतिक और पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए ट्रैकिंग रूट, बेसिक माउंटेनियरिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियां विकसित करने की योजना बना रही है। इससे युवाओं और एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों को नए विकल्प मिलेंगे।

2. स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर

ईको टूरिज्म के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। होटल, गाइड, परिवहन, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन से जुड़ी दूसरी सेवाओं में लोगों को काम मिल सकता है।

3. प्राकृतिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से सजाने की तैयारी

सरकार प्राकृतिक क्षेत्रों और जलाशयों को बेहतर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। यहां वेलनेस सेंटर, सफारी, पिकनिक स्पॉट, स्विमिंग पूल और योग ग्राम जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

4. पर्यटकों के लिए बढ़ेंगी खास सुविधाएं

पर्यटन स्थलों पर एडवेंचर स्पोर्ट्स, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कल्चरल कैंप और हेलीपैड जैसी सुविधाएं विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिहार आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव देना है।

5. बिहार की पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों में अभी पर्याप्त विकास नहीं हुआ है, उनकी क्षमता का आकलन कर चरणबद्ध तरीके से विकास किया जाए। साथ ही देश-विदेश में बिहार के पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग पर भी जोर रहेगा।

LPG सिलेंडर की अब नहीं होगी कोई कमी, केंद्र सरकार ने दी बड़ी खुशखबरी!

नई दिल्ली। देश में एलपीजी की सप्लाई को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और आयात में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने पहली बार सरकारी और निजी कंपनियों के लिए एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बनाए रखना और भविष्य में किसी भी आपूर्ति संकट से निपटना है।

21 कंपनियों को दिया गया उत्पादन लक्ष्य

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, देश की 21 रिफाइनरियों और कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए लक्ष्य दिया गया है। सभी कंपनियों को मिलाकर प्रतिदिन करीब 62,810 टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था में सबसे बड़ी जिम्मेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज को दी गई है। कंपनी को प्रतिदिन 18,000 टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। वहीं नायरा एनर्जी के लिए 4,480 टन तथा ओएनजीसी और गेल जैसी कंपनियों के लिए कुल 6,460 टन प्रतिदिन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विदेशों से आयात पर निर्भरता बड़ी चुनौती

भारत में एलपीजी की खपत काफी अधिक है और घरेलू उत्पादन से पूरी जरूरत पूरी नहीं होती। ऐसे में बड़ी मात्रा में एलपीजी दूसरे देशों से आयात करनी पड़ती है। पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर असर पड़ने से आयात व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसी अनुभव को देखते हुए सरकार घरेलू उत्पादन की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि विदेशों से आने वाली सप्लाई में परेशानी होने पर भी देश में सिलेंडर की उपलब्धता बनी रहे।

कंपनियों को स्टोरेज और सप्लाई भी मजबूत करनी होगी

सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को एलपीजी के भंडारण, परिवहन और वितरण से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी मजबूत रखने के लिए कहा गया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उत्पादन को तेजी से बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार रखने पर जोर है।

एलपीजी उत्पादन के तय लक्ष्यों की सरकार समय-समय पर समीक्षा करेगी। नई रिफाइनरी, तेल-गैस क्षेत्रों के विकास या तकनीकी बदलाव से यदि उत्पादन क्षमता बढ़ती है तो उसे भी भविष्य की योजना में शामिल किया जाएगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य यही है कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संकट या आयात में रुकावट आने पर घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की कमी, रिफिल की पाबंदी या सप्लाई में बड़ी बाधा का सामना न करना पड़े।

कल बनेंगे 2 शुभ योग, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन-करियर में लाभ!

राशिफल। 18 अगस्त 2026 को पंचांग के अनुसार शुक्ल योग का प्रभाव रहेगा। इसके बाद अगले दिन तड़के ब्रह्म योग की शुरुआत होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को शुभ माना जाता है और माना जाता है कि इनका सकारात्मक प्रभाव कुछ राशियों के करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है। हालांकि, यह ज्योतिषीय मान्यता है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय कामकाज के लिहाज से अच्छा रह सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी या किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में भूमिका मिल सकती है। व्यापार करने वालों को नए अवसर मिलने की संभावना है। रुका हुआ पैसा मिलने से आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए शुक्ल योग सकारात्मक परिणाम ला सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को अच्छा विकल्प मिल सकता है। व्यापार में नई डील या साझेदारी से फायदा होने की उम्मीद है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों को धन और प्रतिष्ठा के मामले में लाभ मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। निवेश से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं, हालांकि कोई भी आर्थिक फैसला सोच-समझकर लेना बेहतर रहेगा।

4. तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए यह समय नई शुरुआत का संकेत दे सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापारियों को नए ग्राहक और कारोबार बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

5. धनु राशि

धनु राशि के लोगों के लिए शुक्ल और ब्रह्म योग का प्रभाव करियर के लिहाज से लाभकारी माना जा सकता है। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और किसी महत्वपूर्ण योजना पर काम शुरू हो सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ परिवार में भी खुशी का माहौल बन सकता है।

खुशखबरी का डबल धमाका! यूपी में निकलीं 2 बड़ी भर्तियां, ऐसे करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने जूनियर इंजीनियर और वेटनरी फार्मासिस्ट के पदों पर भर्ती का रास्ता खोल दिया है। दोनों भर्तियों को मिलाकर 1,442 पदों पर उम्मीदवारों को आवेदन का मौका मिलेगा। इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित तारीखों के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

1 .जूनियर इंजीनियर के 134 पदों पर आई भर्ती

UPSSSC ने जूनियर इंजीनियर के 134 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया की घोषणा की है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 17 सितंबर 2026 से शुरू होंगे और उम्मीदवार 7 अक्टूबर 2026 तक फॉर्म भर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को ध्यान से देखना होगा।

2 .वेटनरी फार्मासिस्ट के 1308 पदों पर मौका

दूसरी बड़ी भर्ती पशुपालन विभाग में वेटनरी फार्मासिस्ट के 1,308 पदों के लिए है। इस भर्ती की खास बात यह है कि इसमें वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने PET-2025 में हिस्सा लिया है और उनके पास वैध PET स्कोर कार्ड है। वेटनरी फार्मासिस्ट भर्ती के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 14 सितंबर 2026 से शुरू होगा। आवेदन की अंतिम तारीख 5 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

कहां से करना होगा ऑनलाइन आवेदन?

दोनों भर्तियों के लिए आवेदन UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। उम्मीदवारों को आवेदन के दौरान जरूरी दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य जानकारी सही-सही भरनी होगी।

उम्मीदवारों के लिए जरूरी सलाह

आवेदन की तारीख नजदीक आने से पहले अभ्यर्थी संबंधित भर्ती का ऑफिशियल नोटिफिकेशन जरूर पढ़ लें। पात्रता, शुल्क, आरक्षण, परीक्षा पैटर्न और अन्य शर्तों की पूरी जानकारी नोटिफिकेशन में देखना जरूरी है। आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते फॉर्म भरना बेहतर रहेगा।

पेट में कैंसर होने के 5 बड़े संकेत, शरीर देता है ये चेतावनी!

हेल्थ डेस्क। पेट से जुड़ी कई समस्याएं सामान्य होती हैं और अक्सर खान-पान या पाचन संबंधी कारणों से होती हैं। लेकिन अगर पेट से जुड़ी कुछ परेशानियां लगातार बनी रहें, बार-बार लौटें या समय के साथ बढ़ती जाएं, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पेट के कैंसर के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य गैस, अपच या पेट की तकलीफ जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए लगातार बने रहने वाले बदलावों पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

1. लगातार अपच और पेट में असहजता

खाना खाने के बाद बार-बार अपच, पेट में भारीपन, जलन या असहजता महसूस होना पेट की समस्या का संकेत हो सकता है। यदि यह परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है और सामान्य उपायों से ठीक नहीं होती, तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

2. भूख कम होना और जल्दी पेट भरना

अगर पहले की तुलना में भूख लगातार कम हो गई है या थोड़ा सा खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे बदलाव कई कारणों से हो सकते हैं, इसलिए सही वजह जानने के लिए डॉक्टर से जांच जरूरी है।

3. बिना वजह वजन कम होना

बिना डाइटिंग या व्यायाम में बदलाव के अचानक वजन कम होना शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। पेट के कैंसर सहित कई अन्य बीमारियों में भी ऐसा देखा जा सकता है। लगातार वजन घट रहा हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

4. पेट में दर्द या उल्टी की समस्या

पेट में लगातार या बार-बार दर्द, मतली और उल्टी जैसी समस्या होने पर सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर जब परेशानी बढ़ती जाए, खाने के बाद अधिक हो या सामान्य इलाज के बावजूद ठीक न हो।

5. मल में खून या काले रंग का मल

मल का रंग काला होना या मल में खून दिखाई देना पाचन तंत्र में रक्तस्राव का संकेत हो सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में खुद से इलाज करने के बजाय जल्द डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

कब करानी चाहिए जांच?

इनमें से किसी एक लक्षण का होना कैंसर की पुष्टि नहीं करता। गैस्ट्रिक अल्सर, संक्रमण, एसिडिटी और दूसरी पाचन संबंधी समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें, तेजी से बढ़ें या वजन कम होने और खून आने जैसी समस्या साथ में हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

मंगल का तेज असर, 4 राशियों की बल्ले-बल्ले, धन और करियर में बनेंगे तरक्की के योग!

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम, भूमि, संपत्ति और नेतृत्व क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है। जब मंगल की स्थिति अनुकूल होती है तो व्यक्ति के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में बढ़ोतरी हो सकती है। आने वाले समय में मंगल के प्रभाव से कुछ राशियों के जातकों के लिए करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिस्थितियां बनने की संभावना है।

1. मेष राशि

मंगल मेष राशि के स्वामी ग्रह हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर इसका प्रभाव विशेष माना जाता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर हो सकते हैं। लंबे समय से अटके किसी काम में गति आने की संभावना है। कारोबार करने वाले लोगों को नई डील या प्रोजेक्ट मिलने के अवसर मिल सकते हैं।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए मंगल का प्रभाव करियर से जुड़े मामलों में उत्साह बढ़ा सकता है। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अच्छी खबर मिल सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद रहेगी। व्यापार में नए संपर्क बन सकते हैं, जो भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल का प्रभाव आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाला हो सकता है। कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना हो सकती है और कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। पदोन्नति या बेहतर अवसर की उम्मीद रखने वालों को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। व्यापारियों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।

4. मकर राशि

मकर राशि वालों को मंगल के प्रभाव से मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। नौकरी में बदलाव की योजना बना रहे लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता और निर्णय लेने की क्षमता अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर सकती है। कारोबारियों को रुके हुए काम आगे बढ़ाने में सफलता मिल सकती है। धन संबंधी मामलों में सुधार के साथ खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी।

बिहार में इन 'शिक्षकों' के लिए बड़ी खुशखबरी, नए निर्देश जारी!

पटना। बिहार के नवस्थापित 211 डिग्री कॉलेजों में संविदा के आधार पर चयनित सहायक प्राध्यापकों के लिए राहत की खबर है। राजभवन ने इन शिक्षकों के शोध और नौकरी से जुड़े मामलों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पात्र शिक्षक संविदा प्राध्यापक के रूप में काम करते हुए अपनी पीएचडी पूरी कर सकेंगे। इससे उन अभ्यर्थियों को खास फायदा होगा, जो शोध कार्य और शिक्षण सेवा को एक साथ जारी रखना चाहते हैं।

नौकरी के साथ जारी रख सकेंगे शोध

नए निर्देशों के मुताबिक, चयनित शिक्षक यदि फेलोशिप छोड़कर संविदा प्राध्यापक के पद पर कार्यभार संभालते हैं, तो उन्हें अपना शोध बीच में रोकने की जरूरत नहीं होगी। राजभवन ने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक बनने के बाद भी पात्र शोधार्थियों की पीएचडी की निरंतरता बनी रहे।

शोध पर्यवेक्षक का प्रमाण पत्र जरूरी

नौकरी के साथ शोध जारी रखने के लिए संबंधित अभ्यर्थी को अपने शोध पर्यवेक्षक यानी गाइड से प्रमाण पत्र लेना होगा। इस प्रमाण पत्र पर संबंधित विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे। प्रमाण पत्र में यह स्पष्ट किया जाएगा कि शोधार्थी ने अपने शोध से संबंधित आवश्यक प्रयोगशाला कार्य, फील्ड वर्क और डेटा संग्रह जैसे जरूरी हिस्से पर्याप्त रूप से पूरे कर लिए हैं। यदि शोध के इस चरण में नियमित रूप से शोध केंद्र पर मौजूद रहना आवश्यक नहीं है, तो शिक्षक अपनी नौकरी के साथ बाकी शोध कार्य पूरा कर सकेंगे।

गैर-फेलोशिप शोधार्थियों को भी राहत

जिन पंजीकृत शोधार्थियों को किसी प्रकार की फेलोशिप नहीं मिल रही है और उन्होंने अनिवार्य कोर्स वर्क पूरा कर लिया है, उन्हें भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकता है। ऐसे अभ्यर्थी शिक्षण कार्य के बाद मिलने वाले समय, अवकाश या गैर-शैक्षणिक घंटों में अपने शेष शोध कार्य को पूरा कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए विश्वविद्यालय और शोध से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

दस्तावेज सत्यापन में भी मिली राहत

राजभवन के निर्देशों में दस्तावेज सत्यापन से जुड़े मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही गई है। यदि किसी अभ्यर्थी का निर्धारित तारीख पर दस्तावेज सत्यापन नहीं हो पाया है, तो केवल इसी वजह से उसकी नियुक्ति समाप्त नहीं की जाएगी। बाद में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जा सकता है। हालांकि, जांच में यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता या अन्य आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करता पाया जाता है, तो संबंधित साक्ष्यों के साथ मामले को बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के समक्ष रखा जाएगा।

पुराने संस्थान की जिम्मेदारियों के लिए अतिरिक्त समय

ऐसे चयनित अभ्यर्थी जो पहले किसी दूसरे संस्थान में कार्यरत थे और वहां की जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी बाकी हैं, उन्हें कार्यभार ग्रहण करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की व्यवस्था भी की गई है। राजभवन के इन निर्देशों से नए डिग्री कॉलेजों में नियुक्त होने वाले शिक्षकों को नौकरी और उच्च शिक्षा के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

CM सम्राट की बड़ी घोषणा, बिहार के युवाओं और किसानों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गांधी मैदान से घोषणा की कि अगले छह महीनों में 10 चीनी मिलों को फिर से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों के साथ-साथ युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

गन्ना किसानों को मिलेगा बाजार

चीनी मिलों के संचालन से गन्ना उत्पादक किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार मिल सकेगा। मिलों में गन्ने की खरीद बढ़ने से किसानों को अपनी उपज के लिए खरीदार मिलने में आसानी होगी। साथ ही समय पर भुगतान की उम्मीद भी बढ़ेगी।

युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते

मिलों के दोबारा शुरू होने से सिर्फ कारखानों में ही नौकरियां नहीं बढ़ेंगी, बल्कि परिवहन, मजदूरी, मशीनरी, व्यापार और अन्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर युवाओं को काम के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है।

उद्योगों को दोबारा खड़ा करने पर जोर

राज्य सरकार बिहार में बंद औद्योगिक इकाइयों को फिर से सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। चीनी उद्योग को कृषि से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। मिलों के संचालन से गन्ना उत्पादन, प्रसंस्करण और स्थानीय कारोबार की पूरी श्रृंखला को गति मिलने की उम्मीद है।

सरकार का हर परिवार में उद्यमी बनाने का लक्ष्य

सरकार ने राज्य के करीब साढ़े तीन करोड़ परिवारों का उल्लेख करते हुए प्रत्येक परिवार से कम से कम एक उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य भी सामने रखा है। इसके जरिए युवाओं को नौकरी के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार का फैसला, ट्रैफिक के नए नियम लागू, वाहन चालकों के लिए जरूरी खबर

लखनऊ। वाहन चालकों और वाहन मालिकों के लिए 15 अगस्त 2026 से कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किये गए हैं। संशोधित प्रावधानों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता, वाहन पंजीकरण, बीमा, ट्रैफिक उल्लंघन और सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में नई व्यवस्था लागू होगी। इसका सीधा असर वाहन चालकों के साथ परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी पड़ेगा।

लाइसेंस खत्म होने के बाद भी 30 दिन की राहत

नए नियमों के मुताबिक ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद भी अगले 30 दिनों तक इसे प्रभावी माना जाएगा। इसके अलावा लाइसेंस धारक निर्धारित अवधि से एक साल पहले तक नवीनीकरण करा सकेंगे। हालांकि नवीनीकरण की प्रभावी तारीख पुराने लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद ही मानी जाएगी।

वाहन से जुड़े मामलों में बढ़ेगी अपील की अवधि

वाहन के पंजीकरण और स्वामित्व हस्तांतरण से संबंधित मामलों में अपील के लिए मिलने वाली समय सीमा को बढ़ाया गया है। वहीं दावा आवेदन और उसके निस्तारण से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है, जिससे संबंधित लोगों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।

पहली गलती पर चेतावनी, दोबारा उल्लंघन पर जुर्माना

सामान्य यातायात नियमों का पहली बार उल्लंघन करने वालों को कुछ मामलों में सीधे आर्थिक दंड की बजाय चेतावनी देने का प्रावधान किया गया है। अगर वही गलती दोबारा होती है तो 500 से 1,500 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हॉर्न और साइलेंसर से जुड़े नियमों में भी इसी तरह की व्यवस्था होगी। पहली बार गलती पर चेतावनी और दोबारा उल्लंघन करने पर 1,000 से 2,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

बिना बीमा वाहन चलाना पड़ेगा महंगा

बिना बीमा वाहन चलाने वालों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। पहली बार पकड़े जाने पर बीमा की मूल प्रीमियम राशि के तीन गुना और दोबारा उल्लंघन करने पर पांच गुना तक पेनाल्टी का प्रावधान बताया गया है।

खराब सड़क से हादसा हुआ तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई

नए प्रावधानों में सड़क की खराब स्थिति के कारण दुर्घटना होने पर जिम्मेदार कार्यदायी संस्था और ठेकेदार की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था की गई है। यदि सड़क की खामी के चलते किसी व्यक्ति की मृत्यु या दिव्यांगता होती है, तो संबंधित संस्था या ठेकेदार पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

ओवरलोड वाहनों का चालान अब कोर्ट में

ओवरलोडिंग के मामलों में भी बड़ी व्यवस्था लागू होगी। प्रवर्तन अधिकारी वाहन का चालान कर सकेंगे, लेकिन मौके पर जुर्माना वसूलने का अधिकार नहीं रहेगा। ऐसे मामलों का निस्तारण न्यायालय के माध्यम से किया जाएगा।