खनन विभाग की समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय पहले मौके पर जाकर स्थिति की जांच करें। बिना पर्याप्त तथ्यों के किसी किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने या जुर्माना लगाने से बचने को कहा गया है। इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पहले ऐसी परिस्थितियों में प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता था।
किसानों की सुविधा को दी गई प्राथमिकता
सरकार का मानना है कि खेत की मिट्टी का सीमित उपयोग यदि खेती या घरेलू जरूरतों के लिए किया जा रहा है, तो उसे अवैध खनन की श्रेणी में नहीं माना जाना चाहिए। इसी सोच के तहत अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वास्तविक किसानों और अवैध खनन करने वालों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए, ताकि किसी निर्दोष किसान को परेशानी न उठानी पड़े।
राजस्व बढ़ाने पर भी रहेगा फोकस
बैठक में खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 5,000 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया। सरकार ने अधिकारियों से कहा कि जिन जिलों से सबसे अधिक खनन राजस्व प्राप्त होता है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए और लक्ष्य के अनुरूप कार्य किया जाए। साथ ही जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थानीय समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
विभागीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों के कामकाज की भी समीक्षा की गई। राजस्व वसूली में कमी, लंबित मामलों और प्रशासनिक ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया गया कि लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि जवाबदेही तय करने के लिए नियमित समीक्षा जारी रहेगी।
ईंट-भट्ठा संचालकों को भी राहत
बैठक में ईंट-भट्ठा संचालकों के बकाया मामलों पर भी चर्चा हुई। सरकार एक विशेष वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत बकाया राशि का मूल भुगतान करने पर ब्याज में राहत दी जा सकती है। इससे लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे में आसानी होने की उम्मीद है।
अवैध खनन पर जारी रहेगी सख्ती
सरकार ने यह भी साफ किया कि किसानों को राहत देने का मतलब अवैध खनन पर नरमी नहीं है। व्यावसायिक निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली मिट्टी और अन्य खनिजों के मामले में नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। अवैध खनन या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।





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