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8वें वेतन आयोग: शिक्षकों की सैलरी ₹1.34 लाख करने की मांग

नई दिल्ली। देश में शिक्षकों के वेतन ढांचे को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में राजधानी में हुई बैठकों में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों को मजबूती से उठाया। उनका कहना है कि मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसमें व्यापक सुधार जरूरी है।

शुरुआती वेतन को लेकर नया फॉर्मूला

शिक्षक संगठनों ने एंट्री-लेवल (लेवल-6) के वेतन को नए सिरे से तय करने की मांग रखी है। उनका सुझाव है कि फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 2.6 से 3.8 के बीच किया जाए। अगर ऐसा होता है, तो शुरुआती वेतन करीब ₹1.30 लाख से ₹1.34 लाख तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा हर साल 6-7% वेतन वृद्धि का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिससे कर्मचारियों की आय महंगाई के साथ संतुलित रह सके। एक अहम मुद्दा यह भी रहा कि महंगाई भत्ता 50% होने पर उसे मूल वेतन में शामिल कर लिया जाए।

भत्तों में बड़े बदलाव की मांग

बैठकों में केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि भत्तों के ढांचे को भी अपडेट करने पर जोर दिया गया।

शहरों के आधार पर HRA को 12%, 24% और 36% तक बढ़ाने का सुझाव। 

ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बेसिक का 12–15% करने और न्यूनतम सीमा तय करने की मांग। 

बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) को बढ़ाकर ₹7,000 प्रति माह प्रति बच्चा करने का प्रस्ताव। 

इन प्रस्तावों का मकसद शिक्षकों की वास्तविक खर्च क्षमता को बेहतर बनाना है।

सेवा के बाद भी सुरक्षा पर फोकस

शिक्षक संगठनों ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सुविधाओं को भी मजबूत करने की जरूरत बताई।

रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष करने की मांग। 

ग्रेच्युटी की सीमा को काफी बढ़ाने का सुझाव। 

पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने पर जोर। 

उनका मानना है कि इससे शिक्षकों को भविष्य को लेकर ज्यादा भरोसा मिलेगा।

क्या कहती है तस्वीर?

फिलहाल 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शिक्षकों की ओर से उठ रही आवाजें इस दिशा में दबाव जरूर बना रही हैं। अगर इन मांगों पर विचार होता है, तो आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में बड़ा आर्थिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

8वें वेतन आयोग: ग्रुप-D और ग्रुप-C कर्मचारियों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच लंबे समय से 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन विभिन्न स्तरों पर चल रही अटकलों और संभावित प्रस्तावों ने खासकर ग्रुप-C और ग्रुप-D कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। यदि यह आयोग लागू होता है, तो लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिल सकता है।

क्या है वेतन आयोग?

वेतन आयोग केंद्र सरकार द्वारा गठित एक समिति होती है, जो कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन की सिफारिश करती है। हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू करने की परंपरा रही है।

ग्रुप-C और ग्रुप-D कर्मचारियों के लिए 5 बड़ी संभावित खुशखबरी

1. बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा

रिपोर्ट के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.0 या उससे अधिक किया जा सकता है। इससे ग्रुप-C और D कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

2. महंगाई भत्ते (DA) में बेहतर समायोजन

नई सिफारिशों में DA को बेसिक सैलरी में मर्ज कर नई संरचना तैयार की जा सकती है, जिससे कर्मचारियों को ज्यादा स्थायी लाभ मिलेगा।

3. HRA और अन्य भत्तों में वृद्धि

हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और मेडिकल भत्तों में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे कर्मचारियों की कुल आय में सुधार होगा।

4. पेंशनर्स को भी फायदा

ग्रुप-C और D से रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में भी संशोधन संभव है। इससे बुजुर्ग पेंशनर्स को आर्थिक राहत मिलेगी।

5. न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी

8वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 26,000 रुपये या उससे अधिक किए जाने की चर्चा है, जो निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत होगी।

क्या है मौजूदा स्थिति?

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन कर्मचारियों के संगठनों की मांग और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

राजयोग का असर: शिव योग और गजकेसरी योग से इन 5 राशियों को बड़ा लाभ

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की विशेष स्थिति से बनने वाले योग व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जब शिव योग और गजकेसरी योग एक साथ बनते हैं, तो इसे बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। यह संयोग व्यक्ति को धन, सम्मान, सफलता और मानसिक शांति प्रदान करता है। 5 मई को यह दुर्लभ राजयोग 5 राशियों के लिए विशेष लाभकारी साबित होने वाला है।

क्या है शिव योग और गजकेसरी योग?

शिव योग मन की शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा देता है, जबकि गजकेसरी योग चंद्रमा और बृहस्पति की युति से बनता है, जो बुद्धि, धन और प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है। जब ये दोनों योग एक साथ बनते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलाव आते हैं।

इन 5 राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

1. मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए यह योग करियर में बड़ी सफलता लेकर आएगा। नौकरी में प्रमोशन और नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और रुके हुए काम पूरे होंगे।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों को धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। व्यापार में मुनाफा बढ़ेगा और निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

3. कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए यह समय भाग्यशाली रहेगा। गजकेसरी योग के प्रभाव से समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और करियर में नई ऊंचाइयां हासिल होंगी।

4. सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों को इस योग से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी और बड़े फैसले लेने में सफलता मिलेगी। आर्थिक रूप से भी मजबूती आएगी।

5. धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह योग बेहद शुभ संकेत दे रहा है। शिक्षा, नौकरी और व्यापार, तीनों क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। विदेश से जुड़े कामों में भी लाभ होने की संभावना है।

दुनिया की 10 सबसे ताकतवर सेनाएं कौन-सी? जानिए भारत किस स्थान पर

नई दिल्ली। आज के दौर में किसी भी देश की ताकत सिर्फ उसकी अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि उसकी सैन्य क्षमता से भी तय होती है। आधुनिक हथियार, उन्नत तकनीक, प्रशिक्षित सैनिक और मजबूत रणनीति। ये सभी मिलकर किसी राष्ट्र को वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनाते हैं। हाल ही में जारी वैश्विक सैन्य शक्ति सूचकांक 2026 ने दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं की तस्वीर साफ कर दी है।

क्या है वैश्विक सैन्य शक्ति सूचकांक?

यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का मूल्यांकन है, जिसमें अलग-अलग देशों की सैन्य ताकत को कई मानकों पर परखा जाता है। इसमें रक्षा बजट, हथियारों की संख्या, तकनीकी क्षमता, सैन्य संसाधन और भौगोलिक स्थिति जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है। इस सूचकांक में कम अंक का मतलब ज्यादा ताकत माना जाता है।

अमेरिका सबसे आगे

इस सूची में अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है। इसके पीछे उसका विशाल रक्षा बजट, अत्याधुनिक हथियार और वैश्विक स्तर पर मजबूत सैन्य उपस्थिति प्रमुख कारण हैं।

रूस और चीन

इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर रूस है, जो अपने बड़े सैन्य संसाधनों और हथियारों के भंडार के लिए जाना जाता है। तीसरे स्थान पर चीन है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में अपनी सैन्य तकनीक और ताकत को तेजी से बढ़ाया है।

भारत चौथे स्थान पर

भारत इस सूची में चौथे स्थान पर है, जो देश के लिए गर्व की बात है। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और वह लगातार अपने रक्षा क्षेत्र को मजबूत कर रहा है। आधुनिक मिसाइल प्रणाली, मजबूत नौसेना और उन्नत वायुसेना इसकी बड़ी ताकत हैं।

अन्य प्रमुख देश

इसमें पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया है, जिसकी सेना आधुनिक तकनीक के लिए जानी जाती है। छठे स्थान पर फ्रांस है, जो यूरोप की प्रमुख सैन्य शक्तियों में शामिल है। जबकि सातवें स्थान पर जापान है, जो तकनीकी रूप से बेहद उन्नत है। आठवें स्थान पर ब्रिटेन है, जिसकी सेना का वैश्विक प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है।

टॉप 10 में तुर्किये और इटली

नौवें स्थान पर तुर्किये है, जो क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में उभरा है। वहीं दसवें स्थान पर इटली है, जो यूरोप में अपनी रणनीतिक भूमिका निभाता है।

क्या विजय बनेंगे तमिलनाडु के नए ‘हीरो’? सर्वे रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति इस बार एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर सामने आए ताज़ा सर्वे ने राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों की झलक दे दी है। इस बार मुकाबला पारंपरिक नहीं, बल्कि दिलचस्प त्रिकोणीय बनता दिख रहा है, जिसमें द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) और अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम प्रमुख भूमिका में हैं।

तीसरी ताकत के रूप में उभरी विजय की पार्टी

सर्वे के अनुसार, डीएमके गठबंधन अभी भी बढ़त में नजर आ रहा है और उसे लगभग 125 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है। वहीं एआईएडीएमके गठबंधन करीब 45 सीटों तक सिमटता दिख रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा विजय की पार्टी को लेकर है, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर ही लगभग 63 सीटों के आसपास पहुंचती दिख रही है।

यह संकेत देता है कि राज्य की जनता अब पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प की तलाश में है। विजय की लोकप्रियता और उनकी नई राजनीतिक छवि ने खासकर युवाओं और शहरी वोटरों को प्रभावित किया है।

वोट शेयर में भी मजबूत पकड़

अगर वोट प्रतिशत की बात करें, तो डीएमके को लगभग 39 प्रतिशत समर्थन मिलने का अनुमान है। वहीं विजय की पार्टी को करीब 30 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है, जो किसी नई पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एआईएडीएमके को लगभग 27 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है।

बदलते समीकरणों का संकेत

इस सर्वे से यह साफ है कि भले ही डीएमके बढ़त बनाए हुए है, लेकिन विजय की पार्टी ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। पहले जहां मुकाबला सीधा दो दलों के बीच होता था, अब तीसरी ताकत के आने से वोट बंटवारा और सत्ता की रणनीति दोनों प्रभावित हो रही हैं।

क्या ‘हीरो’ बन पाएंगे विजय?

राजनीति में विजय की एंट्री को लेकर शुरू में संशय था, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने कम समय में ही मजबूत पकड़ बना ली है। हालांकि सत्ता तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी लंबा सफर तय करना होगा, लेकिन इतना जरूर है कि उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूती से दर्ज करा दी है।

विटामिन D की कमी से पुरुषों की सेहत पर खतरा, जानिए चौंकाने वाले नुकसान

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में पुरुषों की सेहत से जुड़ी एक बड़ी समस्या तेजी से सामने आ रही है विटामिन D की कमी। यह समस्या अब केवल हड्डियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित कर रही है। खासकर पुरुषों में इसके गंभीर प्रभाव देखने को मिल रहे हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

विटामिन D को अक्सर 'सनशाइन विटामिन' कहा जाता है, क्योंकि इसका मुख्य स्रोत धूप है। लेकिन बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस में रहना और खानपान में पोषण की कमी के कारण पुरुषों में इसकी कमी तेजी से बढ़ रही है।

हड्डियों और मांसपेशियों पर असर

विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान महसूस होती है। लंबे समय तक कमी रहने पर फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ सकता है।

हार्मोन और टेस्टोस्टेरोन पर प्रभाव

पुरुषों के लिए विटामिन D का संबंध टेस्टोस्टेरोन हार्मोन से भी जुड़ा है। इसकी कमी से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे ऊर्जा स्तर में गिरावट, यौन स्वास्थ्य में कमी और मूड स्विंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

दिल और इम्यून सिस्टम पर खतरा

कम विटामिन D स्तर हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर करता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता असर

विटामिन D की कमी का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। पुरुषों में अवसाद, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई शोध बताते हैं कि इसका संबंध डिप्रेशन से भी जुड़ा हो सकता है।

बिहार में जल्द लागू होंगे नए लेबर कोड, श्रमिकों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में श्रमिकों के हितों को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही नए लेबर कोड लागू किए जाएंगे, जिससे राज्य के लाखों श्रमिकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

हाल ही में पटना स्थित दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विभाग के सचिव दीपक आनंद ने बताया कि सरकार प्रवासी श्रमिकों के लिए एक व्यापक डेटा बैंक तैयार करने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य राज्य के अंदर और बाहर काम कर रहे श्रमिकों की सटीक जानकारी जुटाना है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

प्रवासी श्रमिकों का पंजीकरण होगा अनिवार्य

सरकार की योजना के तहत अब अन्य राज्यों या विदेशों में काम कर रहे श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। इससे न केवल उनकी पहचान सुनिश्चित होगी, बल्कि आपात स्थिति में उन्हें सरकारी सहायता भी तुरंत उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह कदम खासकर उन श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाते हैं।

नए श्रम कानूनों पर तेज़ी से काम

विभाग के अनुसार, नई श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इन नए नियमों के लागू होने के बाद श्रमिकों के अधिकारों, सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार होने की संभावना है।

निर्माण श्रमिकों को सीधा लाभ

कार्यक्रम में अधिकारियों ने निर्माण श्रमिकों से अपील की कि वे बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में अधिक से अधिक संख्या में पंजीकरण कराएं। इस बोर्ड के माध्यम से श्रमिकों को 16 प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलता है, जिसमें आर्थिक सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।

न्यूनतम मजदूरी को लेकर सख्ती

श्रम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी नियोजकों के लिए न्यूनतम मजदूरी देना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इससे श्रमिकों के शोषण पर रोक लगेगी और उन्हें उनके काम के अनुसार उचित पारिश्रमिक मिलेगा।

बिहार में क्लर्क और परिचारी की ऑनलाइन हाजरी अनिवार्य

पटना। बिहार के स्कूलों में कार्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अहम कदम उठाया है। अब तक जहां केवल शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाती थी, वहीं अब क्लर्क (लिपिक) और परिचारियों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत इन सभी कर्मियों की हाजरी ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी।

तीन दिन में मांगा गया पूरा डेटा

इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए संबंधित अधिकारियों ने सभी स्कूलों से निर्देश दिया है कि वे अपने यहां कार्यरत लिपिक और परिचारियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराएं। इस डेटा के आधार पर ही आगे की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था शुरू की जाएगी।

वेतन और सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी हाजरी

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब कर्मचारियों का वेतन भुगतान और सेवा से जुड़े रिकॉर्ड उनकी ऑनलाइन उपस्थिति से ही तय होंगे। यानी अगर किसी कर्मचारी की हाजरी पोर्टल पर दर्ज नहीं होगी, तो इसका सीधा असर उसके वेतन और सेवा अभिलेखों पर पड़ सकता है। इससे स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के संकेत

विभाग ने इस व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित स्कूल प्रमुखों और कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इससे साफ है कि सरकार इस सिस्टम को पूरी गंभीरता से लागू करना चाहती है।

बिहार में बिगड़ेगा मौसम! 24 जिलों में अलर्ट हुआ जारी

पटना। बिहार में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और मौसम विभाग ने 24 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान लोगों को दिनभर बदलते मौसम का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें तेज हवाएं, बादलों की गरज और हल्की बारिश शामिल है।

मौसम विभाग के अनुसार, प्रभावित जिलों में हवा की रफ्तार करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही आकाश में घने बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। जिन जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, उनमें उत्तर और पूर्वी बिहार के कई प्रमुख जिले शामिल हैं, जहां मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

क्यों बदला मौसम का रुख?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी भरी हवाएं। इन दोनों के मिलेजुले असर से मई के महीने में भी मानसून जैसे हालात बन गए हैं। आने वाले 2 से 3 दिनों तक राज्य में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना रह सकता है।

इन जिलों में अलर्ट जारी 

मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, 

पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, 

मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, 

सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर, बांका और जमुई।

सावधानी जरूरी

तेज हवाओं और बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खुले स्थानों पर सावधानी बरतें और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।

शुभेंदु बनेंगे भवानीपुर के दादा? या ममता मारेगी बाजी, सर्वे रिपोर्ट

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। 2026 के चुनावी संग्राम में मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और सियासी वर्चस्व का बन गया है। आमने-सामने हैं ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी, दो ऐसे चेहरे, जिनका रिश्ता कभी सहयोग का था, लेकिन अब वही टकराव की सबसे बड़ी कहानी बन चुका है।

नंदीग्राम से शुरू हुई कहानी

2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की लड़ाई ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। उस चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद करीबी मुकाबले में हराकर राजनीतिक इतिहास रच दिया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि सत्ता की राजनीति में बड़ा संदेश भी था कि बंगाल की सियासत में बदलाव की लहर उठ चुकी है।

भवानीपुर में सीधी चुनौती

अब 2026 में यह टकराव और भी बड़ा हो गया है। शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान कर सीधी चुनौती दे दी है। उनका दावा है कि जिस तरह उन्होंने नंदीग्राम में जीत हासिल की, उसी तरह भवानीपुर में भी इतिहास दोहराया जाएगा।

डबल फ्रंट पर मुकाबला

इस बार शुभेंदु अधिकारी दो मोर्चों पर सक्रिय हैं नंदीग्राम और भवानीपुर। जहां नंदीग्राम में वे 'भूमिपुत्र'की छवि के साथ अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहते हैं, वहीं भवानीपुर में ममता बनर्जी को उनके अपने क्षेत्र में चुनौती देकर बड़ा सियासी दांव खेल रहे हैं।

नतीजे तय करेंगे भविष्य

आपको बता दें की 4 मई को जब ईवीएम खुलेंगी, तब यह साफ होगा कि क्या शुभेंदु अधिकारी फिर से इतिहास रच पाएंगे या ममता बनर्जी अपनी पिछली हार का बदला लेकर अपना किला बचा लेंगी। पूरे देश की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 31 जिलों के लिए आई खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब सिर्फ प्रमुख तीर्थस्थलों तक सीमित रहने के बजाय सरकार कम प्रसिद्ध देवी मंदिरों को भी पर्यटन के मानचित्र पर लाने की तैयारी कर रही है। इसी कड़ी में ‘शक्ति चक्र’ नाम से एक नया धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जो 31 जिलों को जोड़ते हुए श्रद्धालुओं के लिए नया आकर्षण बनेगा।

प्रमुख तीर्थों के साथ अब नए केंद्रों पर फोकस

अब तक अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण उत्तर प्रदेश देश-विदेश के पर्यटकों के बीच खास पहचान बना चुका है। लेकिन अब सरकार उन मंदिरों को भी विकसित करना चाहती है, जो आस्था के केंद्र तो हैं, पर अभी व्यापक पहचान नहीं बना पाए हैं।

क्या है ‘शक्ति चक्र’ योजना?

'शक्ति चक्र' एक विशेष पर्यटन परिपथ होगा, जिसमें राज्य के सीमावर्ती 31 जिलों में स्थित माता के मंदिरों को जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन का विस्तार करना और श्रद्धालुओं को नए तीर्थ स्थलों से जोड़ना है। इस सर्किट में शामिल मंदिरों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।

पहले चरण में सुविधाओं का विकास

परियोजना के पहले चरण में मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसमें सड़क संपर्क सुधारना, साफ-सफाई, लाइटिंग, पेयजल, पार्किंग और पर्यटक सूचना केंद्र जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और इन स्थलों पर आवाजाही बढ़ेगी।

दूसरे चरण में होगा व्यापक प्रचार

दूसरे चरण में इन सभी मंदिरों को एकीकृत कर 'शक्ति चक्र' के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म, पर्यटन मेले और धार्मिक आयोजनों के जरिए इसे बड़े स्तर पर पेश किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु इन स्थलों तक पहुंच सकें।

धार्मिक पर्यटन में यूपी की नई पहचान

सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को धार्मिक पर्यटन का और बड़ा केंद्र बना सकती है। 'शक्ति चक्र' के जरिए न सिर्फ श्रद्धालुओं को नए आध्यात्मिक स्थल मिलेंगे, बल्कि राज्य की छिपी धार्मिक विरासत भी सामने आएगी।

सर्वार्थ सिद्धि योग का असर: 4 राशियों की किस्मत होगी चमकदार, मिलेगा बड़ा लाभ

राशिफल। 4 अप्रैल 2026 का दिन ज्योतिष के नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन बनने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:08 बजे से शुरू होकर रात 09:35 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। नए काम की शुरुआत, निवेश, खरीदारी या महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए यह समय अनुकूल माना गया है।

1. मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए यह योग नई शुरुआत का संकेत लेकर आ रहा है। लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं। नौकरी या बिजनेस में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और धन लाभ के योग बन रहे हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे आप बड़े फैसले लेने में सफल रहेंगे।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए यह दिन करियर में प्रगति का रहेगा। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना होगी और प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में लाभ के संकेत हैं। परिवार में खुशहाली का माहौल रहेगा और किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग सफलता का द्वार खोल सकता है। लंबे समय से चल रही परेशानियां खत्म होंगी। धन लाभ के अच्छे योग बन रहे हैं और निवेश से फायदा मिल सकता है। सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी और आपके काम की सराहना होगी।

4. मकर राशि

मकर राशि के लिए यह योग विशेष रूप से शुभ रहने वाला है। करियर में उन्नति और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। साथ ही, नए अवसर आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

भारत के फैसले से चीन खुश? सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली। भारत सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) नियमों में अहम बदलाव करते हुए एक संतुलित और व्यावहारिक कदम उठाया है। इस फैसले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इससे चीन से जुड़े निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना आसान हो जाएगा। नए नियम 1 मई से लागू हो चुके हैं और इन्हें निवेश माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है नया बदलाव?

सरकार ने Foreign Exchange Management Act के तहत नियमों में संशोधन किया है। अब यदि किसी विदेशी कंपनी में चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, तो वह कंपनी भारत में ऑटोमैटिक रूट के तहत निवेश कर सकती है। यानी पहले जहां ऐसे मामलों में सरकारी मंजूरी जरूरी होती थी, अब वह बाध्यता खत्म हो गई है, बशर्ते कंपनी सीधे तौर पर चीन या किसी सीमावर्ती देश में पंजीकृत न हो।

सीधे चीनी निवेश पर अभी भी सख्ती

यह समझना जरूरी है कि यह छूट सीधे चीन या भारत से सटे देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों को नहीं दी गई है। ऐसी कंपनियों को अब भी पहले की तरह सरकारी अनुमति लेनी होगी। यानी सरकार ने पूरी तरह दरवाजे नहीं खोले हैं, बल्कि सीमित और नियंत्रित ढील दी है।

कोरोना काल की सख्ती में आंशिक राहत

साल 2020 में कोविड-19 के दौरान भारत ने पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर कड़े नियम लागू किए थे। उस समय आशंका थी कि आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाकर विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं। इसलिए हर निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी।

इन निवेशों पर भी RBI की निगरानी बनी रहेगी

इन निवेशों पर पूरी तरह छूट नहीं है। कंपनियों को Reserve Bank of India के तय नियमों के अनुसार रिपोर्टिंग और अन्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। इससे पारदर्शिता और निगरानी बनी रहेगी।

भारत सरकार का बीमा सेक्टर के लिए भी बड़ा फैसला

सरकार ने बीमा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया है। अब बीमा कंपनियों और इंटरमीडियरी में 100% तक विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट से संभव होगा। हालांकि Life Insurance Corporation of India में विदेशी निवेश की सीमा 20% ही रखी गई है।

यूपी में पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव: इन जिलों में तेज आंधी-बारिश के आसार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। बीते कुछ दिनों की तेज धूप और बढ़ती गर्मी के बाद अब लोगों को राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में जल्द ही एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है, जिसका असर आने वाले दिनों में साफ दिखाई देगा। इससे कई जिलों में आंधी, तेज हवाएं और बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

रविवार शाम से बदलने लगेंगे हालात

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल तापमान में हल्की बढ़ोतरी जारी रहेगी, लेकिन रविवार शाम से मौसम का मिजाज बदलना शुरू हो जाएगा। राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में बादल छाने लगेंगे और अगले दो से तीन दिनों के भीतर बारिश की संभावना है। इस बदलाव से तपती गर्मी से परेशान लोगों को काफी राहत मिल सकती है।

4 मई से सक्रिय होगा नया सिस्टम

वैज्ञानिकों के मुताबिक, 4 मई से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। खासकर तराई और पूर्वी इलाकों में इसका असर अधिक रहने की संभावना है।

मई में सामान्य से ज्यादा बारिश के संकेत

मौसम विभाग के अनुसार, मई महीने में प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। इससे गर्मी का असर कुछ हद तक कम रहेगा। हालांकि कुछ इलाकों में तापमान सामान्य या उससे अधिक भी रह सकता है।

लोगों के लिए क्यों है राहत की खबर?

आने वाले दिनों में मौसम का यह बदलाव गर्मी से राहत लेकर आएगा। आंधी-बारिश के इस दौर से जहां तापमान नीचे आएगा, जिससे आम लोगों को भी राहत महसूस होगी। हालांकि तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कृषि मंत्री का बड़ा ऐलान: इन किसानों के लिए नई खुशखबरी

न्यूज डेस्क। किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियों को और मजबूत कर दिया है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। खासतौर पर मध्य प्रदेश में चल रही खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि हर किसान की उपज खरीदी जाएगी और प्रक्रिया को पूरी तरह सुगम बनाया जा रहा है।

खरीदी प्रक्रिया को बनाया जा रहा सरल

सरकार का फोकस इस बार खरीदी प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने पर है। इसके लिए लगातार समीक्षा बैठकों के जरिए व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि किसानों को समय पर भुगतान और उपज का उठाव सुनिश्चित हो सके।

स्लॉट बुकिंग की समस्या का समाधान

शुरुआत में किसानों को स्लॉट बुकिंग में दिक्कतें आ रही थीं, लेकिन अब सिस्टम को बेहतर बनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक दूर कर दिया गया है। अधिकांश किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं और बाकी किसानों के लिए भी प्रक्रिया जारी है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी किसानों को सुविधा मिल जाएगी।

पट्टे पर खेती करने वालों को भी राहत

इस बार सरकार ने लीज पर खेती करने वाले किसानों को भी राहत दी है। जमीन के मालिक की पुष्टि के बाद ऐसे किसानों की फसल भी खरीदी जा रही है। इससे उन किसानों को बड़ा सहारा मिला है, जो खुद की जमीन के बिना खेती करते हैं।

बारदाना और संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि बारदानों की कमी न हो। जरूरत के अनुसार नए और पुराने दोनों तरह के बारदानों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही तौल कांटों की संख्या बढ़ाई गई है और एक केंद्र पर खरीदी की सीमा को बढ़ाकर 2250 क्विंटल तक कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी।

कंट्रोल रूम से मिलेगी तुरंत मदद

किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए कलेक्ट्रेट स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। यहां किसान अपनी समस्याएं दर्ज कराकर तुरंत समाधान पा सकते हैं।

चेन्नई सुपरकिंग्स की दहाड़ शुरू: MI ढेर, 8 विकेट से जीता मुकाबला

खेल समाचार: चेन्नई सुपरकिंग्स (CSK) ने अपने घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए मुंबई इंडियंस (MI) को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। आईपीएल 2026 के 44वें मुकाबले में चेन्नई का दबदबा शुरुआत से लेकर अंत तक साफ नजर आया। इस जीत के साथ CSK ने दो अहम अंक हासिल किए और प्वाइंट्स टेबल में छठे स्थान पर पहुंच गई, जबकि मुंबई इंडियंस लगातार हार के बाद नौवें स्थान पर संघर्ष करती नजर आई।

MI की पारी फीकी

पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई इंडियंस ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 159 रन बनाए। शुरुआत बेहद खराब रही और टीम ने सिर्फ 1 रन पर विल जैक्स का विकेट गंवा दिया। इसके बाद नमन धीर और रयान रिकेल्टन ने पारी को संभालते हुए 58 रन की साझेदारी की।

CSK की गेंदबाजी

चेन्नई की ओर से गेंदबाजी में अंशुल कंबोज सबसे सफल रहे, जिन्होंने 3 विकेट झटके। नूर अहमद ने 2 विकेट लिए, जबकि रामकृष्ण घोष और जेमी ओवरटन को 1-1 सफलता मिली।

CSK की शानदार रनचेज

159 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी CSK की शुरुआत थोड़ी लड़खड़ाई जब संजू सैमसन सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद ऋतुराज गायकवाड़ और उर्विल पटेल ने 49 रन की साझेदारी कर पारी को स्थिर किया। उर्विल पटेल ने 24 रन बनाए, जबकि कप्तान गायकवाड़ ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए पारी को आगे बढ़ाया। अंत में कार्तिक शर्मा के साथ मिलकर उन्होंने 98 रन की नाबाद साझेदारी कर टीम को जीत दिला दी। गायकवाड़ 67 रन और कार्तिक शर्मा 54 रन बनाकर नाबाद रहे।

MI की गेंदबाजी रही बेअसर

मुंबई इंडियंस की ओर से जसप्रीत बुमराह और एएम गजनफर को 1-1 विकेट मिला, लेकिन बाकी गेंदबाज चेन्नई की मजबूत बल्लेबाजी को रोकने में नाकाम रहे।

सूर्य देव की कृपा से मालामाल होंगी ये 5 राशियां, रविवार को बड़ा योग

राशिफल। रविवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जाता है क्योंकि यह सूर्य देव को समर्पित होता है। इस बार रविवार को ग्रह-नक्षत्रों का ऐसा संयोग बन रहा है, जिसे कई राशियों के लिए बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। 

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का प्रभाव कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, जिससे आर्थिक लाभ, करियर में उन्नति और आत्मविश्वास में वृद्धि के योग बनते हैं। हालांकि यह प्रभाव सभी राशियों पर समान नहीं होता, लेकिन कुछ विशेष राशियों पर इसका असर अधिक देखने को मिल सकता है।

1. मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए यह समय करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और कार्यस्थल पर मान-सम्मान बढ़ने की संभावना है।

2. सिंह राशि

सूर्य देव की इस विशेष स्थिति से सिंह राशि वालों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और नए अवसर हाथ लग सकते हैं।

3. धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। निवेश और व्यापार में लाभ के योग बन रहे हैं, साथ ही यात्रा से भी फायदा हो सकता है।

4. तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए यह योग संतुलन और स्थिरता लेकर आ सकता है। रुके हुए धन की प्राप्ति और नए प्रोजेक्ट्स में सफलता के संकेत हैं।

5. मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए यह समय मेहनत का फल देने वाला साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या नई जिम्मेदारियों के योग बन रहे हैं।

सीएम योगी की सख्त चेतावनी: सभी जिलों में कड़ी निगरानी के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेयजल परियोजनाओं के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही कार्य पूरा होने के बाद सड़कों की मरम्मत और गड्ढों को तुरंत भरने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना राज्य के करोड़ों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और समयबद्धता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

1. खुदाई कार्य में सुरक्षा मानकों का सख्त पालन अनिवार्य

सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत जहां भी खुदाई का काम किया जाए, वहां सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

2. काम पूरा होते ही सड़क मरम्मत का आदेश

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि खुदाई के बाद सड़कों और गड्ढों को तुरंत भरना अनिवार्य होगा। अधूरी या टूटी सड़कें छोड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

3. DM को स्थलीय निरीक्षण की जिम्मेदारी

अब हर जिले में जिलाधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर जाकर कार्य की गुणवत्ता और प्रगति की जांच करेंगे, ताकि काम में पारदर्शिता बनी रहे।

4. लापरवाही पर ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई

कार्यदायी संस्थाओं या ठेकेदारों द्वारा किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई की जाएगी।

5. शिकायतों के लिए टोल-फ्री व्यवस्था सक्रिय

सरकार ने जल समाधान पोर्टल और टोल-फ्री नंबर 18001212164 के जरिए शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत किया है, जिससे नागरिक अपनी समस्याएं सीधे दर्ज करा सकें।

सीएम सम्राट के 5 बड़े आदेश: बिहारवासियों के लिए आई खुशखबरी

पटना। बिहार में शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई अहम निर्णय लिए हैं। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने राज्य की प्रमुख परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। इन फैसलों से राज्य के विकास कार्यों में तेजी आने और आम लोगों को सुविधाओं का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

1. 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप पर तेज काम का आदेश

मुख्यमंत्री ने राज्य में प्रस्तावित 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया है। इन टाउनशिप के विकसित होने से शहरीकरण को नई दिशा मिलेगी और नए आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्र विकसित होंगे।

2. पटना मेट्रो परियोजना में तेजी लाने के निर्देश

पटना मेट्रो के निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को जल्द दूर करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजना में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी और कार्य को तेजी से पूरा किया जाए, ताकि लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।

3. जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान का निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान (फेज-1) परियोजना की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ स्थल निरीक्षण भी किया। इस परियोजना के पूरा होने से पटना के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा।

4. पटना एयरपोर्ट को मेट्रो से जोड़ने की योजना

शहर में यातायात सुविधा को बेहतर बनाने के लिए पटना एयरपोर्ट को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम तेज किया गया है। इसके लिए पर्सनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे एयरपोर्ट तक पहुंचना और आसान हो जाएगा।

5. 'सहयोग कार्यक्रम अभियान' की शुरुआत

19 मई से राज्य में 'सहयोग कार्यक्रम अभियान' शुरू किया जाएगा। इसके तहत हर पंचायत में महीने में दो दिन कैंप लगाकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाएगा। इससे प्रशासनिक सेवाएं और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेंगी। 

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं की मौज! सरकार ने दी 4 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। योगी सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। नए नियमों के बाद अब बिजली कटने की अचानक होने वाली समस्या और रिचार्ज की परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी।

1. बैलेंस खत्म होने पर भी 30 दिन की राहत

नए नियम के अनुसार 1 किलोवाट लोड वाले उपभोक्ताओं को बैलेंस खत्म होने के बाद भी 30 दिनों तक बिजली आपूर्ति मिलती रहेगी। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अचानक अंधेरे का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे समय पर रिचार्ज की व्यवस्था कर सकेंगे।

2. 2 किलोवाट उपभोक्ताओं को ओवरड्राफ्ट

2 किलोवाट तक के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को अब ₹200 तक की नेगेटिव बैलेंस सुविधा मिलेगी। यानी जरूरत पड़ने पर वे सीमित राशि तक उधार में बिजली का उपयोग कर सकेंगे।

3. रात और छुट्टियों में बिजली कटौती पर रोक

नई व्यवस्था में शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक बिजली कटौती नहीं की जाएगी। साथ ही रविवार, दूसरे शनिवार और सरकारी छुट्टियों के दिन भी बिजली नहीं काटी जाएगी, ताकि लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित न हो।

4. SMS अलर्ट से मिलेगी पहले से जानकारी

बिजली काटने से पहले उपभोक्ताओं को मोबाइल पर पांच बार SMS अलर्ट भेजा जाएगा। इससे उपभोक्ता समय रहते सतर्क हो सकेंगे और रिचार्ज कर पाएंगे।

बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को लाभ

राज्य में करीब 83 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 67 लाख उपभोक्ताओं को इन नए नियमों से सीधा फायदा मिलेगा। इनमें 1 किलोवाट और 2 किलोवाट वाले उपभोक्ता सबसे अधिक शामिल हैं।

मर्दों के लिए खतरे की घंटी: दिखें ये 5 संकेत तो बढ़ सकता है प्रोस्टेट

हेल्थ डेस्क। पुरुषों की सेहत से जुड़ी एक आम लेकिन गंभीर समस्या है बढ़ा हुआ प्रोस्टेट, जिसे मेडिकल भाषा में Benign Prostatic Hyperplasia (BPH) कहा जाता है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है, खासकर 40-50 वर्ष के बाद। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह पेशाब से जुड़ी गंभीर परेशानियों का कारण बन सकता है।

1. बार-बार पेशाब आने की समस्या: अगर रात में या दिन में सामान्य से ज्यादा बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस हो रही है, तो यह प्रोस्टेट बढ़ने का शुरुआती संकेत हो सकता है।

2. पेशाब करने में दिक्कत: पेशाब शुरू करने में देरी होना या बार-बार रुक-रुक कर पेशाब आना भी प्रोस्टेट की समस्या का संकेत माना जाता है।

3. कमजोर धार का आना: अगर पेशाब की धार पहले की तुलना में कमजोर हो गई है, तो यह प्रोस्टेट के बढ़ने का संकेत हो सकता है।

4. पेशाब पूरी तरह न निकलना: पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ, यह भी एक महत्वपूर्ण लक्षण है।

5. रात में बार-बार नींद टूटना: रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना न सिर्फ नींद को खराब करता है, बल्कि यह प्रोस्टेट की समस्या का संकेत भी हो सकता है।

डॉक्टरों का क्या है कहना?

डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। शुरुआती अवस्था में इलाज और जीवनशैली में बदलाव से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

यूपी में बनेंगे 4 लिंक एक्सप्रेस-वे, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर सरकार अब मिशन मोड में काम कर रही है। हाई-स्पीड रोड नेटवर्क को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चार नए लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जा सके।

किन एक्सप्रेसवे पर फोकस?

सरकार जिन चार प्रमुख लिंक एक्सप्रेसवे को प्राथमिकता दे रही है, उनमें शामिल हैं:

फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे

जेवर लिंक एक्सप्रेसवे

पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे

झांसी लिंक एक्सप्रेसव

इन एक्सप्रेसवे का उद्देश्य बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़ना है, जिससे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच यात्रा तेज, आसान और सुरक्षित हो सके।

50 हजार करोड़ की परियोजनाएं

राज्य सरकार लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं पर एक साथ काम कर रही है। इसमें एक्सप्रेसवे के अलावा औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक हब और शहरी विकास से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं। एक्सप्रेसवे निर्माण की लागत औसतन 50 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी जा रही है, जो इन परियोजनाओं के बड़े पैमाने को दर्शाती है।

जमीन अधिग्रहण में तेजी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न हो। यदि मुआवजा दरों में संशोधन की आवश्यकता हो, तो उसका प्रस्ताव तुरंत भेजा जाए। किसानों और जमीन मालिकों के साथ सीधे संवाद पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि उन्हें उचित मुआवजा मिले और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

अन्य एक्सप्रेसवे भी होंगे तेज

इन चार लिंक एक्सप्रेसवे के अलावा विंध्य एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे और नोएडा-जेवर एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं के लिए भी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे प्रदेश में एक मजबूत और व्यापक सड़क नेटवर्क तैयार होगा।

बिहार के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: 25 नई चीनी मिलों से बदलेगी तस्वीर

पटना। बिहार सरकार ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग को नई दिशा देने के लिए अहम कदम उठाए हैं। लंबे समय से ठप पड़े इस सेक्टर को फिर से मजबूत बनाने के लिए सरकार अब तेज़ी से काम कर रही है। नई चीनी मिलों की स्थापना और बंद पड़ी मिलों को चालू करने की योजना से किसानों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

1. बिहार में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना होगी

राज्य सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत 25 नई चीनी मिलें लगाने का फैसला किया है। इससे गन्ना उत्पादन वाले क्षेत्रों में किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। नजदीक में मिलें होने से परिवहन लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।

2. बंद पड़ी मिलों को शुरू करने की योजना

बिहार में कई चीनी मिलें वर्षों से बंद पड़ी हैं। सरकार इन्हें दोबारा चालू करने की दिशा में काम कर रही है। इससे पहले से मौजूद संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्पादन क्षमता में तेजी से इजाफा हो सकेगा।

3. जमीन चयन की जिम्मेदारी जिलों को

नई मिलों के लिए हर जिले को करीब 100 एकड़ जमीन चिन्हित करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिन जिलों ने अभी तक प्रस्ताव नहीं भेजा है, उन्हें जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि परियोजना में देरी न हो।

4. रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

नई चीनी मिलों की स्थापना से ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और छोटे उद्योगों को भी गति मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

तेज़ी से आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही सभी जिलों से जमीन से जुड़े प्रस्ताव मिल जाएंगे, उसके बाद परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई गई है, जो पूरे काम की निगरानी कर रही है।

यूपी में वेतन बढ़ोतरी का ऐलान: इन कर्मचारियों की जेब होगी भारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उनके मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का निर्णय लिया है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलने वाला है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं माना जा रहा।

अब मिलेगा ₹18,000 मानदेय

सरकार ने शिक्षामित्रों का मासिक मानदेय बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया है। पहले यह राशि ₹10,000 थी, यानी सीधे ₹8,000 की बढ़ोतरी की गई है। यह नई दर अप्रैल महीने से लागू मानी जाएगी और बढ़ी हुई राशि मई की शुरुआत में ही उनके बैंक खातों में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

लाखों शिक्षामित्रों को फायदा

प्रदेश में करीब 1.42 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जो प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी माने जाते हैं। इस फैसले से इन सभी को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार का बड़ा बजट प्रावधान

इस बढ़ोतरी को लागू करने के लिए सरकार ने करीब 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है। इससे साफ है कि सरकार इस फैसले को गंभीरता से लागू करने के लिए वित्तीय रूप से भी तैयार है।

सम्मान समारोह से बढ़ेगा मनोबल

5 मई को गोरखपुर में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान कुछ शिक्षामित्रों को प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

हर जिलों में भी होंगे कार्यक्रम

राज्य के हर जिले में समानांतर रूप से सम्मान समारोह आयोजित करने के लिए अलग से बजट जारी किया गया है। प्रत्येक जिले को इस आयोजन के लिए वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर भी शिक्षामित्रों का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

चीन का डगमगाता साम्राज्य, भारत का उदय तेज: अमेरिका भी देख रहा नया खेल

नई दिल्ली। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन आज अपने ही रियल एस्टेट संकट से जूझ रही है। जिस प्रॉपर्टी मार्केट को कभी विकास और निवेश का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता था, वही अब गहरे संकट में फंस चुका है। घरों की कीमतें गिरकर 2005 के स्तर पर पहुंच गई हैं, यानी चीन में लगभग 20 साल पहले की स्थिति में लौट गई हैं।

चीन में कैसे बना था प्रॉपर्टी का बुलबुला

2000 के बाद चीन में शहरीकरण और आसान बैंक लोन ने रियल एस्टेट को निवेश का सबसे आकर्षक विकल्प बना दिया था। लोग इसे शेयर बाजार से भी सुरक्षित मानने लगे थे। सरकार ने भी विकास और निर्माण को बढ़ावा दिया, जिससे हर शहर में बड़ी-बड़ी रिहायशी परियोजनाएं शुरू हुईं। लेकिन यह पूरा ढांचा अब संकट में आ गया है।

सरकारी सख्ती ने बढ़ाई गिरावट

2020 में चीन सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों पर कर्ज को नियंत्रित करने के लिए 'थ्री रेड लाइन्स' नीति लागू की। इसका असर यह हुआ कि डेवलपर्स के पास नकदी की भारी कमी हो गई। कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए, खरीदारों ने भुगतान रोक दिया और बाजार में भरोसा टूट गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अब चीन का रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय तक सुस्ती में रह सकता है। विशेषज्ञ इसे जापान की 1990 के दशक की लंबी मंदी से तुलना कर रहे हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

चीन का यह संकट केवल उसकी सीमा तक सीमित नहीं है। वैश्विक निवेशक और अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। अमेरिका समेत कई देश इसे चीन की आर्थिक कमजोरी के संकेत के रूप में देख रहे हैं। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

भारत के लिए क्या सीख?

भारत का रियल एस्टेट बाजार फिलहाल स्थिर और बढ़ती कीमतों वाला है, लेकिन विशेषज्ञ इसे चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। कई शहरों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी सीख यह है कि बाजार को केवल निवेश और सट्टेबाजी से नहीं, बल्कि वास्तविक आवासीय जरूरतों से संचालित होना चाहिए। अगर मांग कृत्रिम रूप से बढ़ाई गई तो भविष्य में असंतुलन पैदा हो सकता है।

अमेरिका-यूरोप फिर आमने-सामने: ट्रंप का 25% टैरिफ वार, मचा हड़कंप

न्यूज डेस्क। अमेरिका और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यूरोप से आने वाली कारों और ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है, जिससे वैश्विक ऑटो उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में हलचल मच गई है।

'मेक इन अमेरिका' नीति के तहत बड़ा कदम

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम घरेलू उद्योग को मजबूत करने और विदेशी कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका में पहले से ही ऑटो सेक्टर में भारी निवेश हो रहा है और यह नई नीति उस गति को और बढ़ाएगी। उनका यह भी कहना है कि यदि यूरोपीय कंपनियां अमेरिका में ही उत्पादन करती हैं, तो उन्हें इस टैरिफ से राहत दी जा सकती है।

यूरोप की तीखी प्रतिक्रिया और चेतावनी

यूरोपीय यूनियन ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। EU के व्यापार प्रतिनिधियों ने इसे द्विपक्षीय विश्वास पर चोट बताया है और कहा है कि अमेरिका एक भरोसेमंद साझेदार की तरह व्यवहार नहीं कर रहा। यूरोपीय आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका पहले हुए समझौते की अनदेखी करता है, तो EU भी अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्पों पर विचार करेगा। इस बयान ने संकेत दिया है कि जवाबी टैरिफ या अन्य प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

पहले हुए समझौते पर संकट

दोनों पक्षों के बीच पहले हुए व्यापार समझौते में ऑटोमोबाइल सेक्टर पर 15 प्रतिशत टैरिफ तय किया गया था। इस नए फैसले ने उस समझौते की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि लगातार बदलती व्यापार नीतियां वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता पैदा कर रही हैं, जिसका असर सप्लाई चेन और उत्पादन लागत पर पड़ सकता है।

सुपर खुशखबरी: यूपी में आई 1 बड़ी भर्ती, 27 मई तक आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने B.Ed. सहायक प्रोफेसर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 107 रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिससे राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सकेगा।

आवेदन प्रक्रिया शुरू, अंतिम तारीख 27 मई

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवारों को 27 मई 2026 तक आवेदन करना होगा। आयोग ने साफ किया है कि अंतिम तारीख के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए उम्मीदवारों को समय रहते प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।

योग्यता और पात्रता मानदंड

इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ B.Ed. डिग्री होना अनिवार्य है। केवल योग्य और निर्धारित शैक्षणिक मानदंडों को पूरा करने वाले अभ्यर्थी ही इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

उम्मीदवारों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी, जो 28 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। इस परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार मेरिट सूची से किया जाएगा।

वेतन और सुविधाएं

चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा, जो ₹15,600 से ₹39,100 तक होगा। इसके साथ ₹6,000 का ग्रेड पे भी शामिल रहेगा। यह नौकरी न केवल स्थिरता प्रदान करेगी, बल्कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक मजबूत करियर बनाने का अवसर भी देगी।

आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन

उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए UPESSC की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाना होगा। वहां रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने और शुल्क जमा करने के बाद फॉर्म सबमिट करना होगा। आवेदन का प्रिंटआउट सुरक्षित रखना जरूरी है।