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LPG उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी, अब कम हुआ वेटिंग पीरियड, जल्दी मिलेगा सिलेंडर

नई दिल्ली। देशभर के LPG उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव के कारण गैस सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही थी, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। एजेंसियों और सरकार के प्रयासों से वेटिंग पीरियड कम किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से सिलेंडर मिलने लगा है।

क्यों बढ़ गया था इंतजार?

वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालात बिगड़ने से क्रूड ऑयल और LPG की सप्लाई प्रभावित हुई। इसका असर भारत में भी देखने को मिला, जहां कई जगहों पर सिलेंडर की डिलीवरी के लिए लोगों को 40-45 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा था। इस स्थिति ने आम जनता में चिंता बढ़ा दी, खासकर बड़े परिवारों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी ज्यादा बढ़ गई।

सप्लाई सुधार से मिली राहत

सरकार और गैस एजेंसियों ने स्थिति को संभालने के लिए तेजी से कदम उठाए। घरेलू LPG सिलेंडर की आपूर्ति को प्राथमिकता दी गई और डिलीवरी सिस्टम को मजबूत किया गया। इसके परिणामस्वरूप अब डिलीवरी दर में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है और अधिकांश उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिलने लगा है।

बुकिंग और डिलीवरी हुआ मजबूत

ऑनलाइन बुकिंग में बढ़ोतरी के साथ-साथ डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) सिस्टम को भी तेज किया गया है। इस व्यवस्था के तहत उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक कोड भेजा जाता है, जिससे डिलीवरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनती है। इसी वजह से डिलीवरी की गति और विश्वसनीयता दोनों में सुधार हुआ है।

रिकॉर्ड स्तर पर हुई गैस की डिलीवरी

हाल ही में एक ही दिन में लाखों सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए गए, जो इस बात का संकेत है कि एजेंसियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। कई स्थानों पर डिस्ट्रीब्यूटर अब रविवार को भी काम कर रहे हैं, ताकि किसी को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

कमर्शियल सिलेंडर की स्थिति भी बेहतर

केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि कमर्शियल LPG की आपूर्ति भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। सरकार ने इस सेगमेंट में भी आवंटन बढ़ाया है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायों को राहत मिली है। सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में LPG की सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो सकती है और वेटिंग पीरियड लगभग खत्म हो जाएगा। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि घबराकर अतिरिक्त बुकिंग या स्टॉक न करें, क्योंकि इससे सप्लाई चेन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

8वें वेतन आयोग से बड़ा अपडेट, हर कर्मचारी के लिए जानना जरूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए लंबे समय से इंतजार का विषय बने 8वें वेतन आयोग को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। आयोग ने अब आधिकारिक रूप से सुझाव और मांगें आमंत्रित करना शुरू कर दिया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।

सुझाव भेजने की अंतिम तारीख बढ़ी

आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मेमोरेंडम (सुझाव) जमा करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल तक निर्धारित है। पहले कई लोगों में यह भ्रम था कि अंतिम तिथि 20 अप्रैल है, लेकिन अब यह साफ कर दिया गया है कि 20 अप्रैल की समय सीमा केवल उन यूनियनों के लिए थी जो शुरुआती बैठकों में भाग लेना चाहती थीं। अब बाकी संगठन और कर्मचारी भी अपने सुझाव आसानी से भेज सकते हैं।

देशभर में होंगी बैठकें

वेतन आयोग सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न राज्यों में जाकर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से सीधा संवाद भी करेगा। दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बैठकें आयोजित की जाएंगी, जहां लोग अपनी मांगें और सुझाव सीधे आयोग के सामने रख सकेंगे। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यापक बनने की उम्मीद है।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों और संगठनों की कई अहम मांगें सामने आई हैं:

बेसिक सैलरी को बढ़ाकर ₹69,000 करने की मांग

फिटमेंट फैक्टर 3.833 करने का प्रस्ताव

वार्षिक इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग

पेंशन को अंतिम वेतन का 67% और फैमिली पेंशन 50% करने का सुझाव

मौजूदा 18 पे लेवल को घटाकर 7 करने का प्रस्ताव

इन मांगों से साफ है कि कर्मचारी अपनी आय और सुविधाओं में बड़ा सुधार चाहते हैं।

कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह अपडेट?

सुझाव देने की प्रक्रिया शुरू होना इस बात का संकेत है कि वेतन संरचना में बदलाव की दिशा में काम तेज हो रहा है। कर्मचारियों के पास यह मौका है कि वे अपनी जरूरतों और अपेक्षाओं को सीधे आयोग तक पहुंचा सकें।

यूपी में 'ग्रेजुएट्स' के लिए खुशखबरी, आई 1 बड़ी भर्ती, जानें डिटेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। होमगार्ड मुख्यालय, लखनऊ के अंतर्गत ब्लॉक ऑर्गेनाइजर और प्लाटून कमांडर के पदों पर भर्ती निकाली गई है। यह भर्ती खास तौर पर ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए है, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी सेवा में आने का मौका मिलेगा।

कितने पदों पर होगी भर्ती?

इस भर्ती अभियान के तहत कुल 295 पदों को भरा जाएगा। इसमें:

ब्लॉक ऑर्गेनाइजर के 243 पद

प्लाटून कमांडर के 52 पद शामिल हैं

सैलरी और पे-स्केल

ब्लॉक ऑर्गेनाइजर: लेवल-5 के तहत ₹29,200 से ₹92,300

प्लाटून कमांडर: लेवल-6 के तहत ₹35,400 से ₹1,12,400

योग्यता और उम्र सीमा

इन पदों के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन पास होना जरूरी है। आयु सीमा 21 से 40 वर्ष, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी

आवेदन प्रक्रिया

उम्मीदवार इस भर्ती के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया आधिकारिक वेबसाइट के जरिए पूरी करनी होगी।

आवेदन शुरू होने की तारीख: 16 जून 2026

आवेदन की अंतिम तिथि: 6 जुलाई 2026

ग्रहों की हलचल से मचेगा गदर, 4 राशियों के लिए सुनहरा समय, हर क्षेत्र में मिलेगी तरक्की

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल में होने वाले बदलाव का सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है। आने वाले समय में कुछ प्रमुख ग्रहों की स्थिति में बदलाव ऐसा योग बना रही है, जिसे बेहद शुभ माना जा रहा है। इस ग्रह परिवर्तन का असर खासतौर पर 4 राशियों पर देखने को मिलेगा, जिनके लिए यह समय तरक्की, धन लाभ और सफलता लेकर आ सकता है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। करियर में लंबे समय से चल रही रुकावटें अब दूर हो सकती हैं। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। बिजनेस करने वालों को नए अवसर मिलेंगे और निवेश से लाभ हो सकता है। आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे बड़े फैसले लेने में आसानी होगी।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से मजबूत बनने का है। अचानक धन लाभ या रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए वेतन वृद्धि के योग बन रहे हैं। परिवार में खुशहाली का माहौल रहेगा और जीवन में स्थिरता आएगी। प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने का भी योग बन सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय सफलता का नया अध्याय लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा। उच्च अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आपकी छवि मजबूत होगी। बिजनेस में विस्तार के अवसर मिल सकते हैं। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और आपकी पहचान मजबूत होगी।

धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह समय भाग्य के साथ का संकेत दे रहा है। लंबे समय से अटके काम अब पूरे हो सकते हैं। शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर में सफलता मिलने के योग हैं। यात्रा के योग बन सकते हैं, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और नए आय के स्रोत खुल सकते हैं।

यूपी में होमगार्ड्स को बड़ी राहत, योगी सरकार ने दी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होमगार्ड स्वयं सेवकों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिससे अब कई होमगार्ड्स के लिए फिर से ड्यूटी पर लौटने का रास्ता खुल गया है।

जमानत पर रिहा होने के बाद भी मिल सकेगी ड्यूटी

नई व्यवस्था के तहत अब वे होमगार्ड स्वयं सेवक, जो किसी मामले में आरोपी हैं लेकिन जमानत पर रिहा हैं, ड्यूटी कर सकेंगे। पहले ऐसे मामलों में अक्सर उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाता था या ड्यूटी नहीं दी जाती थी। अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति हिरासत में नहीं है, तो उसे ड्यूटी पर लगाया जा सकता है।

आरोप पत्र दाखिल होने पर भी नहीं रुकेगी सेवा

सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए यह भी तय किया है कि जिन होमगार्ड्स के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, वे भी ट्रायल के दौरान ड्यूटी कर सकेंगे। इससे उन हजारों स्वयं सेवकों को राहत मिलेगी, जो केवल आरोपों के कारण काम से दूर हो जाते थे।

पुरानी वर्गीकरण व्यवस्था खत्म

पहले नियमों में सजा की अवधि के आधार पर मामलों को बांटा जाता था। जैसे 7 साल तक और उससे अधिक सजा वाले अपराध। कई मामलों में इस आधार पर स्वतः सेवा समाप्ति हो जाती थी। अब इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार केवल आरोप के आधार पर किसी होमगार्ड को सेवा से नहीं हटाया जाएगा।

बहाली का निर्णय केस की स्थिति पर निर्भर

सरकार ने साफ किया है कि बहाली का फैसला जमानत की स्थिति, केस की प्रकृति और ट्रायल की प्रगति को देखते हुए लिया जाएगा। यानी हर मामले का मूल्यांकन अलग-अलग तरीके से होगा, जिससे निष्पक्षता बनी रहे।

अंतिम फैसला कोर्ट के निर्णय पर

हालांकि यह राहत अस्थायी है। अगर किसी मामले में दोष सिद्ध हो जाता है, तो संबंधित होमगार्ड को सेवा से हटा दिया जाएगा। यानी अंतिम निर्णय न्यायालय के फैसले पर ही निर्भर रहेगा।

बहाली से पहले होगा सत्यापन और मेडिकल टेस्ट

ड्यूटी पर लौटने से पहले संबंधित होमगार्ड स्वयं सेवकों का सत्यापन और मेडिकल परीक्षण किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे भर्ती के समय किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल योग्य और फिट व्यक्ति ही सेवा में लौटें।

यूपी में ASO के 929 पदों पर भर्ती: युवाओं के लिए बड़ा मौका, 11 मई तक करें आवेदन

लखनऊ। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक अहम अवसर सामने आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सहायक सांख्यिकी अधिकारी (ASO) के पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के तहत कुल 929 पद भरे जाएंगे, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को रोजगार का मौका मिलेगा।

आवेदन प्रक्रिया शुरू, अंतिम तारीख तय

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 11 मई 2026 निर्धारित की गई है, इसलिए उम्मीदवारों को समय रहते फॉर्म भरने की सलाह दी गई है।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों के पास UPSSSC PET 2025 का वैध स्कोर होना चाहिए। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से सांख्यिकी, गणित, अर्थशास्त्र या कॉमर्स विषय में मास्टर डिग्री होनी चाहिए।

आयु सीमा और छूट

ASO पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

श्रेणीवार पदों का विवरण

इस भर्ती में विभिन्न श्रेणियों के लिए पदों का बंटवारा किया गया है। अनारक्षित वर्ग के लिए 311 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 300 पद, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 211 पद और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 62 पद तय किए गए हैं। वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 12 पद निर्धारित हैं।

ऐसे करें आवेदन

उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और निर्धारित शुल्क जमा करें। अंत में फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें।

बिहार में भीषण गर्मी का कहर: 26 जिलों में लू का अलर्ट, पारा 44 डिग्री के पार

पटना। बिहार इन दिनों तेज गर्मी की चपेट में है और हालात फिलहाल सुधरते नजर नहीं आ रहे। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में लू का असर और तेज हो सकता है।

26 जिलों में अलर्ट, सतर्क रहने की सलाह

मौसम विभाग ने राज्य के 26 जिलों में लू जैसी स्थिति को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। इनमें पूर्वी और पश्चिमी चंपारण से लेकर पटना, गया, भोजपुर, रोहतास, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और मुंगेर जैसे जिले शामिल हैं। इन इलाकों में दिन के समय तेज गर्म हवाएं चलने और तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

'वॉर्म नाइट' से बढ़ी परेशानी

सिर्फ दिन ही नहीं, रात में भी लोगों को राहत मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 'वॉर्म नाइट' की स्थिति बनी रहेगी, यानी रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहेगा। इससे लोगों को गर्मी से उबरने का मौका नहीं मिल पा रहा है और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

अगले दो दिन और मुश्किल भरे

पूर्वानुमान के अनुसार अगले 48 घंटों में तापमान में और इजाफा हो सकता है। राजधानी पटना में पारा 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि यह इस महीने के अब तक के अधिकतम स्तर से थोड़ा कम रह सकता है, लेकिन उमस और गर्म हवाओं के कारण परेशानी बनी रहेगी।

कई जगह रिकॉर्ड के करीब तापमान

पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में तापमान 43 डिग्री के पार दर्ज किया गया। डेहरी और आसपास के इलाकों में पारा सबसे ज्यादा रहा, जबकि कुछ स्थानों पर 45 डिग्री के करीब तापमान पहुंच गया। दूसरी ओर, न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है।

रोज एक चम्मच देसी घी खाएं, मिलेंगे 7 जबरदस्त फायदे

हेल्थ डेस्क। भारतीय रसोई में देसी घी सिर्फ स्वाद बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी माना जाता है। आयुर्वेद में भी घी को सुपरफूड का दर्जा दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सीमित मात्रा में रोजाना एक चम्मच देसी घी का सेवन किया जाए, तो यह शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचा सकता है।

1. पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत

देसी घी आंतों को चिकनाई देता है, जिससे खाना आसानी से पचता है। यह कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत दिलाने में मददगार माना जाता है।

2. इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक

घी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और अच्छे फैट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, जिससे शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है।

3. दिमाग के लिए फायदेमंद

घी में पाए जाने वाले हेल्दी फैट्स मस्तिष्क के विकास और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। यह याददाश्त और फोकस को भी सुधार सकता है।

4. त्वचा और बालों में निखार

रोजाना घी खाने से त्वचा में नमी बनी रहती है और बाल भी मजबूत होते हैं। यह प्राकृतिक मॉइश्चराइजर की तरह काम करता है।

5. जोड़ों के दर्द में राहत

घी शरीर के जोड़ों को लुब्रिकेट करता है, जिससे जकड़न और दर्द में कमी आ सकती है। खासतौर पर बढ़ती उम्र में यह काफी फायदेमंद होता है।

6. ऊर्जा का अच्छा स्रोत

देसी घी शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है। यह दिनभर एक्टिव रहने में मदद करता है और कमजोरी को दूर करता है।

7. हार्मोन बैलेंस में मददगार

घी में मौजूद स्वस्थ वसा हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं, जो खासतौर पर महिलाओं के लिए लाभकारी हो सकता है।

कितना और कैसे करें सेवन?

रोजाना एक चम्मच घी पर्याप्त है। इसे दाल, रोटी या चावल के साथ लिया जा सकता है। हालांकि, जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर ही सेवन करना चाहिए।

सुबह-सुबह पेट साफ नहीं होता? ये 6 चीजें करेंगी कमाल

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में कब्ज एक आम समस्या बन चुकी है। अनियमित खानपान, कम पानी पीना और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। इसका असर सिर्फ पाचन पर ही नहीं, बल्कि पूरे दिन की ऊर्जा और मूड पर भी पड़ता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

1. दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से

सुबह उठते ही खाली पेट एक या दो गिलास गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को सक्रिय करने का सबसे आसान तरीका है। यह आंतों को गति देता है और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में मदद करता है।

2. पपीता: प्राकृतिक पाचन सहायक

पपीता पेट के लिए बेहद फायदेमंद फल माना जाता है। इसमें मौजूद एंजाइम भोजन को पचाने में मदद करता है और मल त्याग को आसान बनाता है। नियमित सेवन से कब्ज की समस्या कम हो सकती है।

3. फाइबर से भरपूर ओट्स और दलिया

नाश्ते में ओट्स या दलिया शामिल करना पेट की सेहत के लिए अच्छा विकल्प है। इनमें मौजूद फाइबर आंतों की सफाई करता है और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है।

4. दही: अच्छे बैक्टीरिया का स्रोत

दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाते हैं। इससे पाचन मजबूत होता है और पेट से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

5. अलसी के बीज का सेवन

अलसी के बीज फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इन्हें रात में भिगोकर या सुबह दही में मिलाकर खाने से पेट साफ होने में मदद मिलती है और कब्ज से राहत मिलती है।

6. नींबू पानी का असर

गर्म पानी में नींबू मिलाकर पीना शरीर को डिटॉक्स करने का सरल उपाय है। यह पाचन क्रिया को तेज करता है और पेट को हल्का रखने में मदद करता है।

यूपी सरकार का 'मास्टरस्ट्रोक'! 4 लाख किसानों को बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खेती को ज्यादा टिकाऊ और कम लागत वाला बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी खरीफ सीजन से पहले राज्य सरकार हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना चला रही है, जिसका सीधा फायदा लाखों किसानों को मिलने वाला है।

किसानों को क्या मिलेगा?

योजना के तहत करीब 4 लाख मिनीकिट किसानों में वितरित किए जाएंगे, जिन पर 50% सब्सिडी दी जा रही है। हर मिनीकिट को इस तरह तैयार किया गया है कि किसान एक साथ कई फसलों का लाभ उठा सकें। इसमें ढैंचा के साथ मक्का, उड़द, ग्वार, भिंडी, लोबिया और ज्वार के बीज शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार करीब 45,000 क्विंटल ढैंचा बीज अलग से भी बांट रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान हरी खाद का उपयोग कर सकें।

क्यों खास है 'हरी खाद'?

ढैंचा जैसी फसल को उगाकर बाद में खेत में ही जोत दिया जाता है, जिससे यह प्राकृतिक खाद का काम करती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, पानी सोखने की क्षमता सुधरती है और रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम हो जाती है। अनुमान है कि इससे यूरिया और डीएपी जैसे खादों पर किसानों का खर्च 20-30% तक घट सकता है।

किसानों को कैसे होगा फायदा?

इस योजना से किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। एक तरफ उन्हें सस्ते दाम पर बीज मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ फसल विविधीकरण का मौका भी मिलेगा। भिंडी, लोबिया और ज्वार जैसी फसलें अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती हैं, जिससे किसान सिर्फ धान-गेहूं के पारंपरिक चक्र तक सीमित नहीं रहेंगे।

किसान कैसे उठाएं इसका लाभ?

किसानों को अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या बीज गोदाम से संपर्क करना होगा। साथ ही 'पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल' पर पंजीकरण अपडेट रखना जरूरी है, ताकि योजना का लाभ आसानी से मिल सके।

बिहार में बनेगी 4-लेन सड़क, 5 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल सामने आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से पटना-भोजपुर-सासाराम फोरलेन सड़क परियोजना पर काम अब जल्द शुरू होने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से राज्य के कई जिलों की तस्वीर बदल सकती है।

कब शुरू होगा निर्माण?

परियोजना के लिए ओमान की गल्फर इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ समझौता किया जा चुका है। फिलहाल कंपनी बैंक से फाइनेंस जुटाने की प्रक्रिया में है, जिसमें लगभग चार महीने का समय लगेगा। उम्मीद है कि सितंबर तक निर्माण कार्य जमीन पर उतर जाएगा।

दो चरणों में होगा काम

इस 120 किलोमीटर लंबे फोरलेन हाईवे को दो हिस्सों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में पटना से भोजपुर तक लगभग 46 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में आरा से सासाराम तक करीब 74 किलोमीटर का निर्माण होगा। पूरी परियोजना को अब 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सफर होगा तेज और आसान

अभी पटना से सासाराम की यात्रा में करीब चार घंटे लगते हैं, लेकिन इस एक्सेस-कंट्रोल्ड फोरलेन सड़क के बनने के बाद यही दूरी लगभग दो घंटे में तय की जा सकेगी। इससे न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी।

किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?

यह सड़क पटना से शुरू होकर भोजपुर होते हुए सासाराम तक जाएगी। इसके जरिए अरवल और रोहतास जैसे जिलों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही पीरो, नौबतपुर, सहार, हसन बाजार, संझौली और नोखा जैसे कस्बों के लोगों के लिए आवागमन आसान हो जाएगा।

कनेक्टिविटी में होगा बड़ा सुधार

यह नया कॉरिडोर कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को आपस में जोड़ेगा, जिससे बिहार के अंदर और बाहर यात्रा करना ज्यादा सुगम होगा। खासतौर पर पटना से बनारस की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह मार्ग काफी फायदेमंद साबित होगा।

भारत की इकोनॉमी पर UN की मुहर, ग्रोथ स्पीड देख दुनिया हैरान

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी खींचतान ने दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। ऐसे समय में भारत एक मजबूत और भरोसेमंद आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। यही वजह है कि अब संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी भारत की आर्थिक रफ्तार पर भरोसा जताया है।

संयुक्त राष्ट्र से जुड़े UN ESCAP की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में लगभग 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। यह अनुमान ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के कई बड़े देश धीमी आर्थिक वृद्धि और महंगाई से जूझ रहे हैं।

भारत क्यों बना भरोसे का केंद्र?

भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा फैक्टर है देश की घरेलू मांग, खासकर ग्रामीण इलाकों में बढ़ती खपत। इसके अलावा सरकार की नीतियां जैसे कर ढांचे में सुधार और बुनियादी ढांचे पर जोर भी विकास को गति दे रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र भारत की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है। आईटी, वित्तीय सेवाएं और डिजिटल सेक्टर लगातार अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, कुछ वैश्विक कारणों से चुनौतियां भी सामने आईं जैसे अमेरिकी टैरिफ बढ़ने के बाद निर्यात में गिरावट लेकिन इसके बावजूद भारत ने संतुलन बनाए रखा।

विदेशी निवेश में भी भारत आगे

वैश्विक स्तर पर जहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वहीं भारत निवेशकों के लिए आकर्षक बाजार बना हुआ है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत उन देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा नए निवेश प्रस्ताव आए हैं। यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा कर रही हैं।

भारत को लेकर आगे क्या संकेत?

रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। नियंत्रित मुद्रास्फीति, बढ़ती नौकरियां (खासकर ग्रीन सेक्टर में), और स्थिर नीतियां भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी बना सकती हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील? जल्द मिल सकती है खुशखबरी, चीन की नजर

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील पर अब निर्णायक मोड़ आता दिख रहा है। वॉशिंगटन में दोनों देशों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हो चुका है, जहां अंतिम बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। संकेत मिल रहे हैं कि अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो जल्द ही एक बड़े व्यापार समझौते का ऐलान हो सकता है।

इस अहम बातचीत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे हैं, जबकि अमेरिका की ओर से मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब सिर्फ कुछ तकनीकी और छोटे पहलुओं पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है।

क्यों अहम है यह समझौता?

भारत और अमेरिका, दोनों ही वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े खिलाड़ी हैं। एक ओर अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, तो दूसरी ओर भारत तेजी से उभरती आर्थिक ताकत बन चुका है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन पर भी असर डाल सकता है।

क्या होगा इस डील से फायदा?

इस प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और टैरिफ को कम करना है। यदि यह डील लागू होती है, तो भारतीय और अमेरिकी बाजारों में एक-दूसरे के उत्पादों की पहुंच आसान हो जाएगी। इससे कारोबार बढ़ेगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

पहले से तय हो चुकी है दिशा

इस डील की नींव पहले ही रखी जा चुकी है। फरवरी 2025 में दोनों देशों ने व्यापार समझौते को लेकर काम शुरू किया था, जिसके बाद लगातार कई दौर की बातचीत हुई। अब जो बैठक चल रही है, उसे अंतिम चरण माना जा रहा है।

नेताओं और अधिकारियों के संकेत

अमेरिकी पक्ष से भी इस बातचीत को सकारात्मक बताया गया है। वहीं भारत की ओर से भी संकेत मिले हैं कि समझौते का प्रारंभिक हिस्सा लगभग पूरा हो चुका है और इसमें देश के हितों का ध्यान रखा गया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि भारत ने इस डील में अपने लिए संतुलित और फायदेमंद शर्तें सुनिश्चित की हैं।

इस डील पर चीन की भी नजर क्यों?

इस संभावित समझौते पर चीन समेत कई देशों की नजर बनी हुई है। भारत-अमेरिका की नजदीकी बढ़ने से वैश्विक व्यापार समीकरण बदल सकते हैं, जिसका असर अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।

3 दमदार योग का असर: कल इन 5 राशियों के लिए आएगी खुशखबरी

राशिफल। 23 अप्रैल 2026, गुरुवार का दिन ज्योतिष के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन एक साथ तीन शक्तिशाली योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और गुरु पुष्य योग। यह दुर्लभ संयोग पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा और कई राशियों के लिए भाग्य के नए दरवाजे खोल सकता है।

योग और समय

सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन

अमृत सिद्धि योग: रात 08:57 बजे से 24 अप्रैल सुबह 05:47 बजे तक

गुरु पुष्य योग: रात 08:57 बजे से 24 अप्रैल सुबह 05:47 बजे तक

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए यह दिन करियर और धन के मामले में अच्छा संकेत दे रहा है। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी या प्रमोशन के संकेत मिल सकते हैं। व्यापार में निवेश करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और निर्णय सही साबित होंगे।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों को आर्थिक लाभ मिलने की प्रबल संभावना है। अगर आप नया काम शुरू करना चाहते हैं, तो यह समय बेहद शुभ है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और किसी पुराने विवाद का समाधान हो सकता है। निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने के योग बन रहे हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए यह योग सफलता के नए रास्ते खोल सकता है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और आपकी मेहनत रंग लाएगी। सरकारी कामों में सफलता मिलने के संकेत हैं। अगर कोई बड़ा फैसला लेना है, तो यह दिन आपके पक्ष में रहेगा।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए यह समय भाग्य का पूरा साथ देने वाला है। करियर में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। व्यापार में नए सौदे फायदेमंद साबित होंगे। रिश्तों में मधुरता आएगी और जीवन में संतुलन बना रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए यह दिन स्थिरता और प्रगति लेकर आएगा। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। नौकरी में बॉस से तारीफ मिल सकती है। घर-परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

बिहार सरकार का फैसला: अब PDS दुकानों पर मिलेगा कोयला, LPG संकट से राहत

पटना। बिहार सरकार ने आम लोगों की रसोई से जुड़ी समस्या को देखते हुए एक नया कदम उठाया है। अब जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों पर सिर्फ राशन और केरोसिन ही नहीं, बल्कि खाना बनाने के लिए कोयला भी दिया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है और कई इलाकों में सिलेंडर की कमी महसूस की जा रही है।

सरकार का मानना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाना बनाने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए कोयले को एक विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में, जहां पहले से ही लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना आम बात है, वहां यह व्यवस्था तुरंत राहत दे सकती है।

किन लोगों को मिलेगा लाभ?

यह सुविधा मुख्य रूप से उन परिवारों को दी जाएगी जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत आते हैं। यानी राशन कार्डधारकों को PDS दुकानों के जरिए कोयला उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें बाजार से महंगे दाम पर खरीदने की जरूरत न पड़े।

वितरण पर रहेगी नजर

सरकार ने साफ किया है कि कोयले के वितरण की निगरानी सख्ती से की जाएगी। जिला स्तर से लेकर राज्य मुख्यालय तक इसकी व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी, ताकि कोई गड़बड़ी न हो और सही लाभ सही लोगों तक पहुंचे।

केरोसिन सप्लाई अभी चुनौती

हालांकि केरोसिन देने की बात भी कही गई है, लेकिन कई जगहों पर इसकी आपूर्ति लंबे समय से बाधित है। डीलरों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त स्टॉक नहीं मिल रहा, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही स्थिति सुधरेगी।

कोयले के बाजार में बढ़े दाम

कोयले की मांग अचानक बढ़ने से इसकी कीमत भी ऊपर चली गई है। पहले जहां यह सस्ता मिलता था, अब लोगों को ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल लोगों को राहत दे सकती है।

यूपी में खुशखबरी: 650 एकड़ में तैयार होगा नया इंडस्ट्रियल हब, कई जिलों को मिलेगा फायदा

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने संभल जिले में 650 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना पर काम तेज कर दिया है। इस परियोजना से न सिर्फ निवेश बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

संभल में बनेगा मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक हब

संभल में प्रस्तावित यह औद्योगिक क्षेत्र इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक 650 एकड़ भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। संभल पहले से ही हड्डी, सींग और धातु से बने हस्तशिल्प उत्पादों के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां नया इंडस्ट्रियल एरिया बनने से स्थानीय उद्योगों को बड़ा बाजार मिलने की संभावना है।

एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

संभल में पहले से ही कई छोटे और मध्यम उद्योग (MSME) सक्रिय हैं, लेकिन वे व्यवस्थित ढंग से विकसित नहीं हो पाए थे। अब इस नई योजना के तहत इन इकाइयों को आधुनिक सुविधाओं के साथ एक संगठित प्लेटफॉर्म दिया जाएगा, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों में वृद्धि हो सकेगी।

बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी ताकत

यह औद्योगिक क्षेत्र रणनीतिक रूप से ऐसे स्थान पर विकसित किया जा रहा है, जहां से कनेक्टिविटी बेहद मजबूत होगी। इसे गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ा जाएगा। इसके अलावा संभल-अनूपशहर मार्ग और स्थानीय रेलवे नेटवर्क से भी इसकी कनेक्टिविटी बेहतर की जा रही है। इससे माल की आवाजाही आसान होगी और लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी।

आसपास के जिलों को भी फायदा

इस परियोजना का लाभ केवल संभल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुरादाबाद, बदायूं, अलीगढ़ और अमरोहा जैसे नजदीकी जिलों को भी मिलेगा। यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षक केंद्र बन सकता है।

बिहार कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: महंगाई भत्ते में 2% बढ़ोतरी की तैयारी

पटना। बिहार के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जल्द ही राहत भरी खबर आ सकती है। राज्य सरकार महंगाई भत्ते (डीए) में 2 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो सातवें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों का डीए बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

58% से बढ़कर 60% हो सकता है डीए

फिलहाल बिहार में सरकारी कर्मचारियों को 1 जुलाई 2025 से 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। इससे पहले यह 55 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गया था। अब प्रस्तावित 2% बढ़ोतरी के बाद यह आंकड़ा 60 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। यह दर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर हो सकती है, क्योंकि बिहार अक्सर केंद्र के डीए पैटर्न का पालन करता है।

10 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा

आपको बता दें की इस संभावित फैसले का सीधा लाभ राज्य के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशन पाने वालों को मिलेगा। इससे उनकी मासिक आय में बढ़ोतरी होगी और बढ़ती महंगाई के बीच कुछ राहत मिलेगी।

खजाने पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ

डीए में बढ़ोतरी से जहां कर्मचारियों को फायदा होगा, वहीं राज्य सरकार पर आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा। अनुमान है कि 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी से सरकार पर सालाना करीब 1100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। पहले भी अक्टूबर 2025 में 3 प्रतिशत की वृद्धि से राज्य के खजाने पर करीब 918 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा था।

केंद्र के फैसले का असर

केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी से अपने कर्मचारियों के लिए डीए में 2 प्रतिशत की वृद्धि की थी। आमतौर पर बिहार सरकार इसी पैटर्न का अनुसरण करती है, इसलिए राज्य में भी इसी तरह की घोषणा की उम्मीद की जा रही है। जल्द ही यहां के कर्मचारियों को खुशखबरी मिलेगी।

केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी: क्या अब डॉक्टरों और दवा कंपनियों पर लगेगी सख्ती?

नई दिल्ली। देश में दवाओं की मार्केटिंग को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने संकेत दिया है कि वह दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को दिए जाने वाले महंगे उपहार और विदेश यात्राओं जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है।

सरकार ने मांगा समय, कोर्ट ने दी अगली तारीख

सरकार ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने और नीति तैयार करने में लगभग दो महीने का समय लग सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 28 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दी है।

कहां से शुरू हुआ मामला

यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा वर्ष 2021 में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई थी कि दवा कंपनियों की मार्केटिंग से जुड़े नियमों को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और मरीजों का हित सुरक्षित रहे।

डॉक्टरों को लुभाने के आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई दवा कंपनियां डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, स्पॉन्सर्ड विदेश यात्राएं और अन्य लाभ देकर अपनी दवाएं लिखवाने के लिए प्रेरित करती हैं। इससे मरीजों को अक्सर महंगी दवाएं दी जाती हैं, जबकि सस्ते विकल्प भी उपलब्ध होते हैं।

जेनेरिक दवाओं पर जोर

पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि डॉक्टरों को प्रिस्क्रिप्शन में जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे मरीजों का खर्च कम होगा और स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ बनेंगी।

नियम तो हैं, लेकिन सख्ती नहीं

सरकार ने पहले ही 'यूनिफॉर्म कोड ऑफ फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज' बनाया हुआ है, जिसमें साफ तौर पर कंपनियों को डॉक्टरों को उपहार या अन्य लाभ देने से रोका गया है। लेकिन यह कोड अभी तक कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, जिसके कारण इसका प्रभाव सीमित है।

बिहार में ‘इंस्ट्रक्टर’ की बंपर भर्ती: 726 पदों पर मौका, 15 मई तक करें आवेदन

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर सामने आई है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने इंस्ट्रक्टर (प्रशिक्षक) के पदों पर बड़ी भर्ती निकाली है। इस भर्ती के तहत कुल 726 पद भरे जाएंगे, जिससे तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों को शानदार अवसर मिलेगा।

भर्ती से जुड़ी मुख्य जानकारी

इस भर्ती अभियान के माध्यम से विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को राज्य सरकार के अधीन कार्य करने का मौका मिलेगा।

पद का नाम: प्रशिक्षक (इंस्ट्रक्टर)

कुल पद: 726

वेतन: ₹34,800 प्रति माह

शैक्षिक योग्यता

इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास निम्न में से कोई एक योग्यता होना आवश्यक है: स्नातक (Graduation), डिप्लोमा, आईटीआई (ITI), तकनीकी योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती खास अवसर मानी जा रही है।

आयु सीमा

न्यूनतम आयु: 18 वर्ष, अधिकतम आयु: 37 वर्ष, सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु में छूट भी दी जाएगी।

आवेदन की तिथियां

आवेदन शुरू होने की तारीख: 15 अप्रैल 2026

आवेदन की अंतिम तारीख: 15 मई 2026

कैसे करें आवेदन

इच्छुक अभ्यर्थी बिहार तकनीकी सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी सही तरीके से भरना अनिवार्य है।

बिहार में गर्मी का असर: स्कूलों में नई टाइमिंग लागू

पटना। बिहार में गर्मी अब अपने चरम की ओर बढ़ रही है। कई जिलों में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित होने लगी है। तेज धूप और लू के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों के समय में बदलाव करने का फैसला लिया है।

इन जिलों में बदला गया समय

राज्य के प्रमुख जिलों पटना, बक्सर, आरा, शेखपुरा और बेगूसराय में स्कूलों की नई टाइमिंग लागू कर दी गई है।

पटना में कक्षा 5 तक के स्कूल सुबह से 11:30 बजे तक चलेंगे। कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई 12:30 बजे तक होगी। 

बक्सर में कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल दोपहर 12 बजे तक सीमित कर दिए गए हैं। 

आरा और शेखपुरा में स्कूल सुबह 11:30 बजे तक ही संचालित होंगे। 

बेगूसराय में कक्षाएं 12:30 बजे तक चलेंगी। 

बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले

प्रशासन का कहना है कि दोपहर के समय गर्मी और लू का खतरा सबसे अधिक रहता है। ऐसे में स्कूल से घर लौटते समय बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसी वजह से स्कूलों का समय घटाकर सुबह के घंटों में पढ़ाई पूरी करने पर जोर दिया गया है। यह कदम बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि वे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकें।

आगे और जिलों में हो सकता है बदलाव

यदि गर्मी का प्रकोप इसी तरह जारी रहा, तो अन्य जिलों में भी स्कूलों के समय में बदलाव किया जा सकता है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार नए निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

केंद्र सरकार का बड़ा बयान: LPG सप्लाई पर नई खुशखबरी, टेंशन दूर

नई दिल्ली। दुनिया भर में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिख रहा है। ऐसे माहौल में लोगों के मन में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य बनी हुई है और आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।

घरेलू गैस सप्लाई लगभग पूरी तरह सामान्य

सरकार के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। इसी का परिणाम है कि डिलीवरी का स्तर लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि मौजूदा हालात के बावजूद घरों तक गैस पहुंचाने में कोई बड़ी बाधा नहीं आ रही। ऑनलाइन बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जो यह दिखाती है कि लोग समय पर गैस बुक कर रहे हैं और सिस्टम ठीक से काम कर रहा है।

DAC सिस्टम से डिलीवरी हुई मजबूत

डिलीवरी को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) प्रणाली को और मजबूत किया है। अब सिलेंडर देने से पहले उपभोक्ता के मोबाइल पर भेजा गया कोड जरूरी हो गया है। इस व्यवस्था के कारण गैस वितरण में गड़बड़ी की संभावना कम हुई है और डिलीवरी का प्रतिशत करीब 92 फीसदी तक सुधरा है।

कमर्शियल गैस की सप्लाई भी पटरी पर

घरेलू गैस के साथ-साथ व्यवसायिक उपयोग वाली एलपीजी की स्थिति भी बेहतर हो रही है। सरकार ने कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई को धीरे-धीरे सामान्य स्तर के करीब पहुंचा दिया है। हाल के दिनों में रोजाना हजारों मीट्रिक टन गैस की आपूर्ति की जा रही है, जिससे होटल, ढाबा और अन्य व्यवसायों को राहत मिली है।

रविवार को भी जारी है सप्लाई

स्थिति को देखते हुए कई गैस एजेंसियों ने छुट्टी के दिन भी काम शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य यही है कि किसी भी उपभोक्ता को इंतजार न करना पड़े और हर घर तक समय पर सिलेंडर पहुंचे।

छोटे सिलेंडरों की मांग बढ़ी

पिछले कुछ हफ्तों में 5 किलो वाले छोटे सिलेंडरों की बिक्री में तेजी आई है। लाखों की संख्या में ये सिलेंडर खरीदे जा चुके हैं, जिससे यह साफ है कि लोग वैकल्पिक विकल्पों को भी अपनाने लगे हैं।

PNG कनेक्शन का रुझान बढ़ा

गैस की मांग को संतुलित करने के लिए लोग पाइप्ड गैस (PNG) की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। लाखों नए कनेक्शन दिए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में लोगों ने इसके लिए आवेदन किया है। कुछ उपभोक्ताओं ने तो अपने एलपीजी कनेक्शन भी बंद कर दिए हैं, जिससे सप्लाई सिस्टम पर दबाव कम हुआ है।

बिहार पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर, जानें नया अपडेट

पटना। बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। इस बार चुनाव कई मायनों में खास होने जा रहा है, क्योंकि पहली बार मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह आधुनिक बनाते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होने की उम्मीद है।

पहली बार मल्टी पोस्ट ईवीएम का इस्तेमाल

बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए एस-3 मॉडल की मल्टी पोस्ट ईवीएम की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मशीन पारंपरिक ईवीएम से अलग है और एक साथ कई पदों पर मतदान की सुविधा देती है। पंचायत चुनाव में एक ही समय पर कई पदों के लिए वोटिंग होती है, इसलिए इस नई तकनीक को लागू किया जा रहा है ताकि प्रक्रिया आसान और व्यवस्थित बन सके।

अप्रैल में जिलों तक पहुंचेंगी मशीनें

निर्वाचन आयोग के अनुसार, अप्रैल महीने के भीतर सभी जिलों को ईवीएम उपलब्ध करा दी जाएंगी। इसके बाद इन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जाएगा और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रखा जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो सके।

जिलाधिकारियों के साथ बैठक

राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने सभी जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। इस बैठक में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की गई और समय पर सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ईवीएम की सुरक्षा और प्रबंधन में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

फर्स्ट लेवल चेकिंग पर खास जोर

आयोग ने निर्देश दिया है कि ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाए। इससे मशीनों की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी। इसके साथ ही 2011 की जनगणना के आधार पर वार्डवार जनसंख्या का सत्यापन कर उसे अपडेट करने का काम भी तेज किया जा रहा है।

हर बूथ पर होंगी 6 बैलेट यूनिट

मल्टी पोस्ट ईवीएम की खासियत यह है कि इसमें एक कंट्रोल यूनिट के साथ कई बैलेट यूनिट जुड़ी होती हैं। पंचायत चुनाव में एक साथ 6 पदों के लिए मतदान होना है, इसलिए हर मतदान केंद्र पर 6 बैलेट यूनिट लगाई जाएंगी। मतदाता अलग-अलग पदों के लिए अलग यूनिट में वोट डालेंगे, जबकि पूरा नियंत्रण एक ही मशीन से किया जाएगा।

नवंबर-दिसंबर में संभावित चुनाव

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में पंचायत चुनाव नवंबर या दिसंबर 2026 में कराए जा सकते हैं। चुनाव से पहले वोटर लिस्ट तैयार करने और पंचायत स्तर पर प्रारूप प्रकाशित करने की प्रक्रिया जारी है। सभी जिलाधिकारियों को जिला निर्वाचन पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, ताकि चुनाव की तैयारियां समय पर पूरी हो सकें।

CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला: कर्मचारियों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा निर्णय लेते हुए सस्पेंड किए गए राजस्व कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 224 निलंबित कर्मचारियों की बहाली का फैसला लिया है, जिससे लंबे समय से प्रभावित सरकारी कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है।

ढाई महीने बाद मिला राहत का फैसला

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 11 फरवरी से 19 अप्रैल 2026 के बीच निलंबित किए गए कर्मचारियों को फिर से बहाल किया जाएगा। विभाग के अपर सचिव महेंद्र पाल ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इस फैसले को लागू करने के निर्देश दिए हैं। करीब ढाई महीने से सस्पेंड चल रहे इन कर्मचारियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

हड़ताल अवधि होंगे अर्जित अवकाश

सरकार ने एक और अहम बदलाव करते हुए कर्मचारियों की हड़ताल अवधि को लेकर नया फैसला किया है। पहले इस अवधि को असाधारण अवकाश माना जा रहा था, लेकिन अब इसे अर्जित अवकाश में बदल दिया गया है। यदि किसी कर्मचारी के पास अर्जित अवकाश उपलब्ध नहीं है, तो उसे अग्रिम अवकाश देने की भी व्यवस्था की गई है। इस निर्णय से कर्मचारियों को आर्थिक और सेवा संबंधी नुकसान से बचाने की कोशिश की गई है।

हड़ताल के कारण हुआ था निलंबन

दरअसल, अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य भर के राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। इसके चलते सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 224 कर्मचारियों और 47 अंचल अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इन पर सरकारी कार्यों में लापरवाही, अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी, राजस्व वसूली में कमी और अतिक्रमण हटाने जैसे कार्यों में ढिलाई के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा डालने की बात भी सामने आई थी।

केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी: किसानों को जल्द मिलेगी खुशखबरी

नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों किसानों के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम-किसान सम्मान निधि एक बड़ी राहत साबित हो रही है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन बराबर किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।

हाल ही में 22वीं किस्त 13 मार्च 2026 को किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद अब किसानों की नजरें अगली यानी 23वीं किस्त पर टिकी हुई हैं।

23वीं किस्त कब आ सकती है?

सरकारी नियमों के अनुसार पीएम किसान योजना की किस्तें लगभग हर चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि 23वीं किस्त जुलाई 2026 के आसपास किसानों को मिल सकती है। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। इसलिए यह केवल संभावित समय-सीमा मानी जा रही है, जो पिछली किस्तों के पैटर्न पर आधारित है।

किसानों के लिए जरूरी बातें

पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तों का पालन करना जरूरी है:

लाभार्थी का नाम आधिकारिक सूची में होना चाहिए

बैंक खाता आधार से लिंक होना जरूरी है

ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी होना अनिवार्य है

भूमि रिकॉर्ड सही और अपडेटेड होना चाहिए

अगर इनमें कोई भी कमी रहती है, तो किस्त अटक सकती है या भुगतान में देरी हो सकती है।

सरकार की योजना और उद्देश्य

पीएम-किसान सम्मान निधि का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहयोग देना है, ताकि वे खेती से जुड़े खर्च आसानी से पूरा कर सकें और उनकी आय में स्थिरता आए। यह योजना किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों के लिए सीधा नकद समर्थन प्रदान करती है।

रूस ने दिया पूरा साथ, भारत के लिए खुशखबरी, दुनिया हैरान

नई दिल्ली। दुनिया के ऊर्जा बाजार में इस समय भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर गहरा असर डाला है। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बाधा आने से वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

रूस बना भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा सहयोगी

इस संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव किया है। मध्य पूर्व से कम हुई आपूर्ति की भरपाई रूस से आयात बढ़ाकर की गई है। विशेष रूप से समुद्र में मौजूद रूसी कच्चे तेल की खरीद में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। 

नतीजतन, रूस से भारत का तेल आयात लगभग दोगुना होकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस बदलाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है और वैश्विक बाजार में रूस की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं

वैश्विक संकट के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित बनाए रखा है। रिफाइनरियों और सरकारी नीतियों के चलते देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई प्रभावित नहीं हुई है। सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू बाजार में किसी तरह की कमी या कीमतों में तेज उछाल न आए।

वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव

इस पूरी स्थिति ने दुनिया के तेल आपूर्ति ढांचे को भी बदल दिया है। जहां पहले मध्य पूर्व देशों का दबदबा अधिक था, वहीं अब सप्लाई में विविधता बढ़ी है।

रूस प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। 

सऊदी अरब और इराक की स्थिति में उतार-चढ़ाव।

अफ्रीकी देशों जैसे अंगोला की हिस्सेदारी बढ़ी है। 

संयुक्त अरब अमीरात भी प्रमुख सप्लायर बना हुआ है। 

इस बदलाव के कारण ओपेक देशों की कुल हिस्सेदारी में भी गिरावट दर्ज की गई है।

केंद्र सरकार ने बढ़ाई डेडलाइन: कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक अहम राहत की घोषणा की है। 8th Pay Commission से जुड़े सुझाव जमा करने की अंतिम तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है, जिससे लाखों कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

सुझाव भेजने के लिए 30 अप्रैल तक का समय

सरकारी जानकारी के अनुसार, अब हितधारक 30 अप्रैल 2026 तक अपने सुझाव और राय आधिकारिक प्रक्रिया के तहत भेज सकते हैं। यह निर्णय उस भ्रम को दूर करने के लिए लिया गया है, जो हाल के दिनों में अंतिम तिथि को लेकर बना हुआ था। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 20 अप्रैल की तारीख केवल शुरुआती दौर की बैठकों में भाग लेने वाले संगठनों के लिए थी, न कि सभी सुझावों की अंतिम सीमा।

परामर्श प्रक्रिया बनेगा अधिक समावेशी

8वें वेतन आयोग का उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन संरचना में आवश्यक सुधारों पर विचार करना है। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भागीदारी आधारित होगी, ताकि सभी वर्गों की राय को शामिल किया जा सके। इसके लिए विभिन्न कर्मचारी संघों और विशेषज्ञ समूहों के साथ लगातार चर्चा की जा रही है।

वेतन आयोग का उद्देश्य क्या है?

वेतन आयोग का गठन आम तौर पर हर कुछ वर्षों में किया जाता है ताकि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी संरचना को बदलते आर्थिक हालात के अनुसार अपडेट किया जा सके। इसके मुख्य उद्देश्य हैं: महंगाई के अनुसार वेतन में संतुलन, कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना, पेंशन और भत्तों की व्यवस्था को बेहतर बनाना, निजी क्षेत्र के मुकाबले प्रतिस्पर्धा बनाए रखना।

देशभर में जारी हैं परामर्श बैठकें

सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में परामर्श बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों का मकसद अधिक से अधिक हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, ताकि अंतिम सिफारिशें व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार की जा सकें।

कर्मचारियों में उम्मीदें बढ़ीं

डेडलाइन बढ़ने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। अब उन्हें अपने सुझाव और मांगें बेहतर तरीके से आयोग तक पहुंचाने का अवसर मिल गया है, जिससे भविष्य में वेतन और पेंशन ढांचे में संभावित सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।

योगी सरकार में बदली शिक्षा की तस्वीर, बच्चों के लिए आई बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कई वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यह बदलाव सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों की स्थिति और बच्चों की पढ़ाई में साफ नजर आ रहा है।

1 .स्कूल चलो अभियान से बढ़ा नामांकन

सरकार की स्कूल चलो अभियान पहल के जरिए बड़ी संख्या में बच्चों को स्कूलों से जोड़ा गया है। इस अभियान के तहत लाखों बच्चों का नामांकन हुआ है और हर साल नए बच्चों के दाखिले में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे साफ है कि अब ज्यादा बच्चे स्कूल की ओर रुख कर रहे हैं।

2 .स्कूल से बाहर बच्चों की वापसी

सरकार ने ऐसे बच्चों की पहचान की जो किसी कारणवश पढ़ाई से दूर हो गए थे। विशेष प्रयासों के जरिए इन बच्चों को दोबारा स्कूलों में दाखिला दिलाया गया और उन्हें पढ़ाई से जोड़ा गया। इससे शिक्षा की मुख्यधारा और मजबूत हुई है।

3 .आर्थिक मदद से मिली राहत

छात्रों को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर और स्टेशनरी के लिए आर्थिक सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। इससे गरीब परिवारों पर बोझ कम हुआ है और बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ी है।

4 .स्कूलों की हालत में बड़ा सुधार

सरकारी स्कूलों में अब पहले से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कई स्कूलों में बेंच-डेस्क, साफ शौचालय, पीने का पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। पहले जहां इन सुविधाओं की भारी कमी थी, अब स्थिति काफी बेहतर हो गई है।

5 .स्मार्ट शिक्षा की ओर कदम

अब कई स्कूलों में डिजिटल पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षकों को भी आधुनिक तरीके से पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे बच्चों की समझने की क्षमता बढ़ रही है और पढ़ाई अधिक प्रभावी हो रही है।

6 .पोषण और शिक्षकों के लिए राहत

मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है, जिससे उनका स्वास्थ्य और स्कूल में उपस्थिति दोनों बेहतर हुए हैं। साथ ही शिक्षकों और अन्य शिक्षा कर्मियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।

7 .हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने की कोशिश

सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को भी स्कूलों से जोड़ा जा रहा है और उन्हें समान अवसर दिए जा रहे हैं।