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ब्लड कैंसर होने के 5 बड़े संकेत! शरीर में दिखें ये बदलाव तो तुरंत हो जाएं सावधान

हेल्थ डेस्क। ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो रक्त बनाने वाले ऊतकों और कोशिकाओं को प्रभावित करती है। इसके कई प्रकार होते हैं, जिनमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा प्रमुख हैं। शुरुआती दौर में इसके लक्षण कई सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं, इसलिए शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हालांकि, इनमें से कोई एक लक्षण दिखाई देने का मतलब ब्लड कैंसर होना नहीं है। कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच महत्वपूर्ण होती है।

1. लगातार थकान और कमजोरी

ब्लड कैंसर के कुछ प्रकारों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो सकती है, जिससे एनीमिया जैसी स्थिति बन सकती है। इसके कारण व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर या सामान्य काम करने पर भी अधिक थकावट महसूस हो सकती है। यदि पर्याप्त आराम के बावजूद लंबे समय तक कमजोरी बनी रहे, तो इसकी जांच कराना उचित है।

2. बार-बार संक्रमण होना

बार-बार संक्रमण होना या संक्रमण से ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लगना भी ध्यान देने योग्य संकेत हो सकता है। कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में सफेद रक्त कोशिकाओं की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।

3. बिना वजह वजन कम होना

बिना डाइट या व्यायाम में बदलाव के अचानक वजन कम होना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में ब्लड कैंसर के साथ भूख कम लगना या शरीर में बीमारी के कारण होने वाले बदलावों की वजह से वजन तेजी से घट सकता है। अगर वजन लगातार कम हो रहा है और कोई स्पष्ट कारण नहीं है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

4. आसानी से चोट लगना या खून आना

बिना किसी बड़ी चोट के शरीर पर बार-बार नीले या बैंगनी निशान पड़ना, नाक या मसूड़ों से असामान्य रक्तस्राव होना भी जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। ब्लड कैंसर के कुछ प्रकारों में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, जिससे खून जमने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

5. रात में अधिक पसीना और बुखार

बिना स्पष्ट कारण बार-बार बुखार आना या रात में इतना अधिक पसीना आना कि कपड़े या बिस्तर बदलना पड़े, कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में देखा जा सकता है। खासकर जब इसके साथ वजन कम होना, कमजोरी या लिम्फ नोड्स में सूजन जैसे अन्य लक्षण भी मौजूद हों, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

13 से 23 अगस्त तक महायोग का असर! इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन-करियर में लाभ

ज्योतिष डेस्क। अगस्त का यह समय कुछ राशि के जातकों के लिए बेहद खास रहने वाला है। 13 अगस्त से 23 अगस्त के बीच बनने वाले ग्रहों के विशेष संयोग का असर कई राशियों पर देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कुछ जातकों को करियर, धन, कारोबार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए 13 से 23 अगस्त का समय उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रह सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आगे बढ़ने की संभावना है।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए यह अवधि करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत और प्रदर्शन की सराहना हो सकती है। व्यापार में नए संपर्क भविष्य में लाभ का कारण बन सकते हैं।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रह सकता है। नौकरी में पद और प्रतिष्ठा बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने से महत्वपूर्ण काम आसानी से पूरे हो सकते हैं। कारोबार में विस्तार की योजना बना रहे लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों को 13 से 23 अगस्त के बीच भाग्य का साथ मिल सकता है। शिक्षा, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े लोगों के लिए समय सकारात्मक रह सकता है। मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है। परिवार के साथ संबंध मधुर होंगे। इस दौरान कोई महत्वपूर्ण यात्रा भी करनी पड़ सकती है, जो भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

5. धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह अवधि आर्थिक और करियर के लिहाज से अच्छी रह सकती है। नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी सकारात्मक खबर मिलने की संभावना है। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी बेहतर अवसर मिल सकता है।

रेलवे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! प्रमोशन को लेकर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली। रेलवे में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए प्रमोशन से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने निचले पद से ऊंचे पद पर पदोन्नति के लिए जरूरी न्यूनतम सेवा अवधि को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। नए निर्देशों के बाद कई कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए दो साल की सेवा पूरी होने तक इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बशर्ते निर्धारित मूल्यांकन अवधि के भीतर आवश्यक सेवा अवधि पूरी हो जाए।

प्रमोशन के नियम को लेकर क्या बदला?

निचले ग्रेड से उच्च ग्रेड में प्रमोशन के लिए अब तक न्यूनतम दो वर्ष की नियमित सेवा यानी रेजीडेंसी पीरियड की शर्त लागू रही है। समस्या यह थी कि इस दो साल की अवधि की गणना किस तारीख तक की जानी है, इसे लेकर कई स्तरों पर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।

कई बार प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होने की तारीख तक कर्मचारी के दो साल पूरे नहीं होते थे और इसी वजह से उसकी पात्रता पर सवाल उठ जाता था। अब रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सेवा अवधि को संबंधित वैकेंसी असेसमेंट पीरियड के भीतर पूरा किया जाना जरूरी होगा।

सिलेक्शन पोस्ट के लिए 15 महीने का चक्र

जिन पदों पर प्रमोशन चयन प्रक्रिया, लिखित परीक्षा या योग्यता के आधार पर होता है, उन्हें सिलेक्शन पोस्ट के रूप में माना जाता है। ऐसे मामलों में दो साल की आवश्यक सेवा अवधि को 15 महीने की वैकेंसी असेसमेंट अवधि के भीतर पूरा करना होगा। इससे उन कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है, जिनकी दो साल की सेवा प्रमोशन प्रक्रिया शुरू होने की तारीख तक पूरी नहीं हुई थी, लेकिन निर्धारित मूल्यांकन अवधि के दौरान वे आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर रहे हैं।

नॉन-सिलेक्शन पोस्ट में 12 महीने की अवधि

वहीं, जिन पदों पर प्रमोशन मुख्य रूप से वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर होता है, उन्हें नॉन-सिलेक्शन पोस्ट कहा जाता है। ऐसे मामलों में दो साल की सेवा की शर्त को 12 महीने के वैकेंसी असेसमेंट चक्र के भीतर पूरा करना होगा। इस व्यवस्था से प्रमोशन की पात्रता तय करने में पहले से चली आ रही तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति कम होने की उम्मीद है।

लगातार की गई एडहॉक सेवा भी हो सकती है शामिल

रेलवे बोर्ड के स्पष्टीकरण में एडहॉक सेवा को लेकर भी महत्वपूर्ण बात सामने आई है। यदि किसी कर्मचारी ने नियमित नियुक्ति से ठीक पहले बिना किसी ब्रेक के एडहॉक आधार पर सेवा की है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार उस सेवा अवधि को भी न्यूनतम दो साल की सेवा की गणना में शामिल किया जा सकेगा। इस प्रावधान से उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी नियमित नियुक्ति से पहले लगातार एडहॉक सेवा रही है।

जूनियर पात्र हुआ तो सीनियर को भी मिलेगा लाभ

नए स्पष्टीकरण का एक अहम पहलू वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों की पात्रता से जुड़ा है। यदि किसी जूनियर कर्मचारी को प्रमोशन के लिए पात्र माना जाता है, तो उससे वरिष्ठ कर्मचारी को भी प्रमोशन का लाभ मिल सकता है, भले ही उस वरिष्ठ कर्मचारी की निचले पद पर दो साल की कुल सेवा तकनीकी रूप से पूरी न हुई हो। इसका उद्देश्य प्रमोशन प्रक्रिया में वरिष्ठ कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखना और अनावश्यक विसंगति को रोकना है।

पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा नया नियम

रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से बंद हो चुके प्रमोशन मामलों को इस नए स्पष्टीकरण के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी नियम में किया गया यह बदलाव मुख्य रूप से वर्तमान और आने वाली प्रमोशन प्रक्रियाओं पर लागू होगा।

रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला! अनुकंपा नियुक्ति के नियम बदले, आश्रितों को मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली। रेलवे में अनुकंपा के आधार पर नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों के आश्रितों के लिए राहत की खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े शैक्षणिक योग्यता के नियम को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। नए निर्देशों से उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिनके आश्रित आवेदन के समय निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं कर पाए थे।

आवेदन के समय योग्यता पूरी न होने पर भी मौका

अब अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करते वक्त अगर आश्रित के पास निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नहीं है, तो केवल इसी आधार पर उसका दावा खत्म नहीं होगा। यदि वह तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक पढ़ाई पूरी कर लेता है और नियुक्ति की अन्य शर्तों को पूरा करता है, तो उसे नौकरी के लिए पात्र माना जा सकता है। इस बदलाव से खास तौर पर उन मामलों में राहत मिलेगी, जहां कर्मचारी की मृत्यु या मेडिकल रूप से अयोग्य घोषित होने के समय उसके परिवार का कोई आश्रित अभी पढ़ाई कर रहा था।

पहले क्या थी परेशानी?

पहले कई मामलों में आवेदन के समय निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं होने पर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती थी। कम उम्र या पढ़ाई पूरी नहीं होने के कारण आश्रितों के सामने नौकरी पाने को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। नए स्पष्टीकरण का उद्देश्य ऐसे मामलों में नियमों को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है।

पांच साल की समय-सीमा तय

रेलवे बोर्ड के नए निर्देशों के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारी की मृत्यु अथवा मेडिकल अनफिट होने की तारीख से पांच वर्ष के भीतर आश्रित को संबंधित पद के लिए जरूरी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हासिल करनी होगी। इसका मतलब यह है कि आवेदन के समय योग्यता अधूरी होने के बावजूद आश्रित को बाद में पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिल सकता है, लेकिन निर्धारित समय-सीमा का पालन करना जरूरी होगा।

नाबालिग आश्रितों के लिए अलग प्रावधान

अगर कर्मचारी की मृत्यु या मेडिकल अनफिट होने के समय आश्रित नाबालिग था, तो उसके लिए अलग समय-सीमा रखी गई है। ऐसे मामलों में आश्रित के 18 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद अगले दो वर्षों के भीतर आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हासिल करनी होगी। यानी नाबालिग आश्रितों को बालिग होने के बाद पढ़ाई पूरी करने के लिए भी निर्धारित समय दिया जाएगा।

सिर्फ पढ़ाई पूरी करना ही पर्याप्त नहीं

रेलवे बोर्ड की ओर से दी गई राहत का अर्थ यह नहीं है कि शैक्षणिक योग्यता हासिल करते ही नौकरी स्वतः मिल जाएगी। आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी अन्य सभी पात्रता और निर्धारित शर्तों को भी पूरा करना होगा। अधिकारी के अनुसार, यदि आश्रित निर्धारित अवधि के अंदर आवश्यक शैक्षणिक योग्यता हासिल कर लेता है और बाकी पात्रता मानकों पर भी खरा उतरता है, तो उसे अनुकंपा नियुक्ति के लिए योग्य माना जाएगा।

बिहार के शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी! 1 नवंबर से लागू होगा नया सिस्टम

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। अब छुट्टी लेने के लिए शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। राज्य सरकार 1 नवंबर से छुट्टी की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षक घर बैठे छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे।

सरकार की योजना के मुताबिक, छुट्टी के आवेदन पर अधिकतम 48 घंटे के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था की जाएगी। इससे शिक्षकों को आवेदन के बाद लंबे समय तक जवाब का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

ऑनलाइन होगी छुट्टी की पूरी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को छुट्टी के लिए डिजिटल माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित अधिकारी के पास ऑनलाइन पहुंचेगा और वहीं से उसकी जांच के बाद मंजूरी या अस्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे कागजी आवेदन और कार्यालयों में अनावश्यक भागदौड़ कम होने की उम्मीद है। साथ ही छुट्टी के आवेदनों की निगरानी भी आसान हो सकेगी।

देरी हुई तो अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने छुट्टी के आवेदन को समय पर निपटाने पर भी जोर दिया है। तय समय सीमा के भीतर आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने या अनावश्यक देरी करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पटना कॉलेजिएट स्कूल के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिक्षकों की सुविधाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी दी।

मॉडल स्कूलों में मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

वहीं, राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ छात्रों के लिए भी नई पहल की जा रही है। मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों को मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने की व्यवस्था की गई है। इन स्कूलों में छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर तैयारी का अवसर देना है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल का प्रभाव अगले दो-तीन वर्षों में बेहतर तरीके से दिखाई देगा।

बिहारवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जन्म-मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाना आसान!

पटना। बिहार में जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने इन प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों में नोटरी पब्लिक के शपथपत्र को मान्यता देने को लेकर अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इससे प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान लोगों को होने वाली अनावश्यक परेशानी कम हो सकती है।

सरकार के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि नियम के अनुसार नोटरी पब्लिक द्वारा तैयार किए गए शपथपत्र को स्वीकार करने में बेवजह अड़चन न आए। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जिन्हें प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अंचल कार्यालयों में प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

नोटरी के शपथपत्र को लेकर निर्देश

राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में पहले दिए गए प्रशासनिक निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अधिकृत नोटरी के समक्ष तैयार और दर्ज किए गए शपथपत्र को कानूनी प्रावधानों के अनुसार मान्यता दी जानी चाहिए। इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटरी पब्लिक से शपथपत्र तैयार कराया है, तो केवल नोटरी के सामने बनाए जाने के आधार पर उसे अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

लोगों को बार-बार कार्यालय जाने से राहत

जन्म, मृत्यु या वंशावली प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वाले लोगों को दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया में कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर शपथपत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर उन्हें दोबारा कार्यालय जाना पड़ सकता है। सरकार के निर्देश से ऐसी दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। यदि शपथपत्र नियमों के अनुरूप है, तो उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

आवेदन के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी

सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही, यदि किसी स्तर पर नोटरी पब्लिक के वैध शपथपत्र को लेकर समस्या सामने आती है, तो उसे दूर करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है। इस व्यवस्था से प्रमाण पत्र बनवाने वाले आम लोगों को प्रक्रिया समझने और दस्तावेज जमा करने में पहले की तुलना में आसानी होने की उम्मीद है।

मर्दों की कमजोरी छूमंतर! ये 4 जूस रोज पिएं, शरीर में भर जाएगी जबरदस्त एनर्जी

हेल्थ डेस्क। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खान-पान और पर्याप्त आराम न मिलने की वजह से कई पुरुष दिनभर थकान और कम ऊर्जा महसूस करते हैं। ऐसे में डाइट में पौष्टिक फलों और सब्जियों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। कुछ जूस शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट देने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, जूस को जरूरत से ज्यादा पीना भी सही नहीं है। फल का जूस बनाने पर उसका फाइबर कम हो जाता है और इसे आसानी से ज्यादा मात्रा में पी लिया जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार, फल खाने को जूस पीने से प्राथमिकता देना बेहतर है और जूस लेते समय 100% जूस तथा बिना अतिरिक्त चीनी वाला विकल्प चुनना चाहिए।

1. अनार का जूस

अनार में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व पाए जाते हैं। बिना अतिरिक्त चीनी वाला अनार का जूस संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। यह शरीर को तरल पदार्थ और पोषण देने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

2. चुकंदर का जूस

चुकंदर में प्राकृतिक नाइट्रेट पाए जाते हैं, जो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड से जुड़े रास्तों को प्रभावित करते हैं। इसलिए इसे व्यायाम करने वाले लोगों की डाइट में भी शामिल किया जाता है। हालांकि, इसे पीने के साथ संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।

3. संतरे का जूस

संतरा विटामिन C का अच्छा स्रोत है। घर पर ताजे संतरे से तैयार किया गया बिना चीनी का जूस शरीर को विटामिन C और तरल पदार्थ उपलब्ध करा सकता है। बेहतर विकल्प यह है कि जूस की जगह कई बार पूरा संतरा खाया जाए, क्योंकि पूरे फल में फाइबर भी मिलता है।

4. आंवले का जूस

आंवला विटामिन C और अन्य पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। इसे सीमित मात्रा में बिना अतिरिक्त चीनी के लिया जा सकता है। बाजार में मिलने वाले मीठे आंवला ड्रिंक के बजाय ताजा आंवले से तैयार पेय बेहतर विकल्प हो सकता है।

बिहार में गरीबों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी सौगात

पटना। बिहार के शहरी इलाकों में रहने वाले गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने शहरों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 598 नए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को मंजूरी दी है। इन केंद्रों का खास फायदा स्लम बस्तियों और जरूरतमंद लोगों को मिलेगा। इन 598 केंद्रों में 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWC) शामिल हैं।

सिर्फ 2 रुपये में ओपीडी की सुविधा

नए स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ काफी कम खर्च में मिलेगा। ओपीडी में इलाज के लिए केवल 2 रुपये का पर्चा शुल्क लिया जाएगा। केंद्रों पर मुफ्त दवाओं और जांच समेत कई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी। UPHC का संचालन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक, जबकि UHWC सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित किए जाएंगे।

एक ही जगह मिलेंगी कई सुविधाएं

इन केंद्रों पर सामान्य बीमारियों के इलाज के अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वास्थ्य परामर्श और संचारी रोगों की जांच जैसी सुविधाएं मिलेंगी। गैर-संचारी रोगों की जांच और दवा वितरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

स्लम इलाकों पर रहेगा विशेष फोकस

सरकार की योजना शहरी गरीबों तक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंचाने की है। जरूरत वाले स्लम क्षेत्रों में किराये के भवनों में स्वास्थ्य केंद्र चलाने के साथ स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जा सकेंगे। इससे लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी।

गरीब परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा

598 नए केंद्रों के जरिए शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक इलाज लोगों के करीब पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। खासकर कम आय वाले परिवारों के लिए कम शुल्क में ओपीडी इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बड़ी राहत साबित हो सकती है।

बिहार में राशन कार्ड को लेकर अपडेट, लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के उन परिवारों के लिए राहत की खबर है, जिनका नाम किसी कारण से राशन कार्ड की सूची से बाहर हो गया है। ऐसे पात्र परिवार अब दोबारा राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की व्यवस्था के तहत पात्रता पूरी करने वाले परिवारों को फिर से आवेदन का अवसर दिया जा रहा है।

आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। विभाग आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित परिवार की जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन करेगा। जांच में यदि परिवार सरकारी खाद्यान्न योजना के लिए पात्र पाया जाता है, तो उसका नाम दोबारा राशन कार्ड में शामिल किया जा सकता है।

ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

राशन कार्ड के लिए दोबारा आवेदन करने वाले लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन लोगों को खुद ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी है, वे नजदीकी साइबर कैफे या वसुधा केंद्र की सहायता ले सकते हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी आवेदन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। लाभुकों के लिए माय राशन ऐप भी एक विकल्प है, जिसके माध्यम से पात्र परिवार घर बैठे आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

आवेदन से पहले दस्तावेज रखें तैयार

आवेदन करते समय जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। परिवार के मुखिया के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड की जानकारी मांगी जा सकती है। इसके अलावा परिवार की फोटो और निवास से संबंधित प्रमाण भी तैयार रखना चाहिए। जरूरत के अनुसार आय प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी भी देनी पड़ सकती है। आवेदन से पहले संबंधित पोर्टल या विभाग की ओर से मांगे गए दस्तावेजों की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि बाद में आवेदन में कोई कमी न रह जाए।

फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान

ऑनलाइन आवेदन में परिवार के सदस्यों का नाम, आधार से जुड़ी जानकारी और अन्य विवरण सावधानी से भरना चाहिए। किसी दस्तावेज में नाम या दूसरी जानकारी अलग होने पर सत्यापन के दौरान परेशानी आ सकती है। इसलिए आवेदन जमा करने से पहले पूरे फॉर्म को दोबारा जांचना बेहतर होगा। सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करने के बाद ही आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट करें।

बिहार में मुखिया बनने की तैयारी में हैं? पहले जान लें पूरी पात्रता

पटना। बिहार में अगले पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में राजनीतिक हलचल धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल वर्ष 2026 के आखिर में पूरा होने की संभावना के बीच संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई गांवों में संभावित दावेदार लोगों से संपर्क साधने और अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।

हालांकि मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों को केवल जनसंपर्क और राजनीतिक समीकरण पर ध्यान देने के बजाय कानूनी पात्रता और अयोग्यता के नियमों को भी समझना जरूरी है। नियमों पर खरा नहीं उतरने की स्थिति में नामांकन के स्तर पर ही परेशानी हो सकती है।

परिसीमन के बाद बदल सकता है चुनावी समीकरण

आगामी पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाना है। आबादी और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार पंचायतों और वार्डों की संरचना में बदलाव हो सकता है। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या और आरक्षण व्यवस्था में भी बदलाव संभव है। इसका सीधा असर मुखिया पद के संभावित दावेदारों पर पड़ेगा। किसी पंचायत की सीट आरक्षित होने या सामान्य होने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

मुखिया चुनाव के लिए 21 साल उम्र जरूरी

मुखिया पद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र का व्यक्ति पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए उम्मीदवार नहीं बन सकता। इसके साथ ही मतदाता सूची से जुड़ी पात्रता भी महत्वपूर्ण है। चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को संबंधित चुनाव क्षेत्र से जुड़े मतदाता संबंधी नियमों का पालन करना होगा। इसलिए नामांकन से पहले मतदाता सूची में अपने नाम और अन्य विवरण की जांच करना समझदारी होगी।

सरकारी नौकरी करने वालों को ध्यान

सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों के लिए चुनाव लड़ने को लेकर अलग नियम लागू होते हैं। केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी सामान्य तौर पर अपने पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते। इसी तरह स्थानीय निकाय या ऐसे पदों पर काम करने वाले लोगों की पात्रता भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होती है। संभावित उम्मीदवारों को नामांकन से पहले अपनी नौकरी या पद की स्थिति की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए।

लाभ के पद से जुड़ा नियम भी अहम

यदि कोई व्यक्ति पंचायत के अधीन ऐसा पद रखता है जिससे उसे वेतन या अन्य लाभ प्राप्त होता है, तो यह चुनाव लड़ने की पात्रता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उम्मीदवार को यह देखना होगा कि उसके पास ऐसा कोई पद तो नहीं है, जिसे कानून के तहत चुनावी अयोग्यता का आधार माना जा सकता है।

नागरिकता और मानसिक स्वास्थ्य

मुखिया पद के लिए उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना आवश्यक है। इसके अलावा कानून में कुछ ऐसी परिस्थितियों का भी उल्लेख है, जिनमें व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकता है। उदाहरण के तौर पर सक्षम न्यायिक प्राधिकरण द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किए जाने की स्थिति में चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए नामांकन के समय उम्मीदवार की कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।

सजा और बर्खास्तगी का भी असर

सरकारी सेवा से गंभीर कदाचार के कारण बर्खास्त किए गए व्यक्ति के मामले में भी चुनावी अयोग्यता के प्रावधान लागू हो सकते हैं। वहीं आपराधिक मामले में अदालत से हुई दोषसिद्धि और सजा की प्रकृति के आधार पर भी चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना एक जैसी स्थिति नहीं है। इसलिए आपराधिक मामलों से जुड़े संभावित उम्मीदवारों को अपने मामले की कानूनी स्थिति के आधार पर नियमों की जांच करनी चाहिए।

दस्तावेजों की तैयारी पहले से रखें पूरी

चुनाव की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद दस्तावेज तैयार करने के लिए समय कम मिल सकता है। ऐसे में संभावित उम्मीदवारों को अपनी उम्र से जुड़े प्रमाण, मतदाता सूची में विवरण, नागरिकता और आरक्षण श्रेणी से संबंधित जरूरी दस्तावेजों की स्थिति पहले ही जांच लेनी चाहिए। साथ ही नामांकन के समय निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा मांगे जाने वाले दस्तावेज और शपथपत्र से जुड़ी आवश्यकताओं को भी ध्यान से समझना होगा।

अंतिम नियमों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से लें

बिहार पंचायत चुनाव को लेकर परिसीमन, आरक्षण, चुनाव कार्यक्रम और नामांकन की अंतिम शर्तें संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और निर्वाचन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार ही लागू होंगी। इसलिए संभावित उम्मीदवारों को किसी भी दावे या स्थानीय चर्चा के आधार पर अंतिम निर्णय लेने के बजाय आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

यूपी में इन कर्मचारियों को खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी सौगात!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगरीय निकायों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। वेतन भुगतान समेत जरूरी खर्चों को लेकर निकायों के सामने आने वाले आर्थिक संकट को कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ी धनराशि जारी की है। राज्य के सभी 762 नगरीय निकायों को कुल 1200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।

762 निकायों को अलग-अलग राशि जारी

नगरीय निकाय निदेशालय की ओर से सभी निकायों को धनराशि के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश भी भेजे गए हैं। उपलब्ध कराई गई राशि का वितरण निकायों की श्रेणी के अनुसार किया गया है।

17 नगर निगमों को 531 करोड़ रुपये

200 नगर पालिका परिषदों को 427 करोड़ रुपये

545 नगर पंचायतों को 242 करोड़ रुपये

इस तरह कुल 1200 करोड़ रुपये की राशि प्रदेश के नगरीय निकायों तक पहुंचाई गई है।

वेतन भुगतान में नहीं आएगी परेशानी

इस फैसले से नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों को सबसे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। कई बार निकायों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वेतन और दूसरे जरूरी खर्चों को लेकर परेशानी सामने आती है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई राशि से निकायों को अपने नियमित खर्च पूरे करने में सहूलियत होगी। खासतौर पर वेतन और अन्य स्थापना व्यय के भुगतान की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

ई-वेतन पोर्टल से होगा भुगतान

सरकार ने धनराशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भी जरूरी निर्देश दिए हैं। वेतन और अन्य अधिष्ठान व्यय के लिए ई-वेतन पोर्टल का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा निकायों को यह भी बताना होगा कि बैंक खातों से कितनी राशि निकाली गई और उसका इस्तेमाल किस काम में किया गया। खर्च की गई धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र भी निदेशालय को उपलब्ध कराना होगा।

जरूरत के हिसाब से ही पैसा निकालने का निर्देश

सरकार ने निकायों को निर्देश दिया है कि बैंक खातों से पूरी राशि एक साथ निकालने के बजाय आवश्यकता के अनुसार ही धनराशि निकाली जाए। जारी रकम का खर्च पंचम राज्य वित्त आयोग की निर्धारित शर्तों के अनुरूप किया जाना होगा। इससे सरकारी धन के सही इस्तेमाल और वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

नई नगर पंचायतों को भी अब मिलेगा बड़ा फायदा

जिन क्षेत्रों में नई नगर पंचायतों का गठन हुआ है, वहां भी इस धनराशि का उपयोग जरूरी व्यवस्थाएं तैयार करने में किया जा सकेगा। इनमें कार्यालय की स्थापना, कर्मचारियों से संबंधित प्रारंभिक व्यवस्थाएं और अन्य बुनियादी जरूरतें शामिल हैं। नई नगरीय इकाइयों में सफाई और स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था जैसे जरूरी कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

योगी सरकार ने खोला पिटारा, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी, 600 करोड़ रुपये मंजूर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए औद्योगिक विकास के मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। चित्रकूट में विकसित किए जा रहे रक्षा औद्योगिक गलियारे को अब एक बड़े निवेश की सौगात मिलने जा रही है। देश की प्रमुख रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) यहां अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए इकाई स्थापित करने की तैयारी में है।

कंपनी ने इस परियोजना के लिए करीब 600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इससे चित्रकूट के साथ-साथ पूरे बुंदेलखंड में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बनेगी अत्याधुनिक रक्षा इकाई

प्रस्तावित परियोजना के तहत चित्रकूट में रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े रक्षा उत्पादों के निर्माण की सुविधा विकसित की जाएगी। परियोजना के शुरुआती चरण में करीब 562.5 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जबकि आने वाली रक्षा परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए कुल निवेश को 600 करोड़ रुपये से अधिक तक ले जाने की योजना है।

क्यूआरएसएम और रडार सिस्टम का होगा निर्माण

बीईएल की प्रस्तावित इकाई में कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं के लिए उत्पादन सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इनमें क्यूआरएसएम, एयर डिफेंस सिस्टम और नेक्स्ट जेनरेशन रडार सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसके अलावा यहां अलग से एमआरओ यानी मेंटीनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल सुविधा विकसित करने की भी योजना है। इससे रक्षा उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत से जुड़ी गतिविधियां भी इसी क्षेत्र में संचालित की जा सकेंगी।

निवेश प्रस्ताव को मिली अहम मंजूरी

चित्रकूट में बीईएल के निवेश को लेकर मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति ने कंपनी को निवेश के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट (LoC) दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। हालांकि परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए इसे अब राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

बीईएल को मिल चुकी है जमीन

चित्रकूट के रक्षा औद्योगिक गलियारे में बीईएल को पहले ही करीब 75 हेक्टेयर भूमि आवंटित की जा चुकी है। ऐसे में प्रस्तावित निवेश को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी आधारभूत तैयारी पहले से मौजूद है। रक्षा क्षेत्र में इतनी बड़ी परियोजना आने से चित्रकूट की औद्योगिक पहचान को नई मजबूती मिल सकती है। साथ ही स्थानीय स्तर पर कारोबार, परिवहन, निर्माण और अन्य सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

यूपी के गांवों के लिए आई खुशखबरी! ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी सुविधा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राहत भरी खबर है। अब गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर हृदयाघात यानी हार्ट अटैक की आशंका वाले मरीजों को शुरुआती उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का फोकस ऐसे मरीजों को गोल्डन ऑवर में इलाज देने और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेषज्ञ केंद्र तक जल्द पहुंचाने पर है।

464 स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

हृदय रोगियों को समय पर प्राथमिक उपचार देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू की है। पहले चरण में प्रदेश के 75 जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े 464 स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य हार्ट अटैक के लक्षण सामने आने पर मरीज की तत्काल जांच और जरूरी उपचार शुरू करना है, ताकि गंभीर स्थिति से बचाया जा सके।

गोल्डन ऑवर में इलाज पर जोर

हार्ट अटैक के मामले में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मरीज को समय पर उपचार मिले और रेफरल की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। स्वास्थ्य विभाग अब गोल्डन ऑवर में मिलने वाली चिकित्सा सुविधा की नियमित निगरानी करेगा।

डायलिसिस की सुविधा भी होगी मजबूत

प्रदेश में किडनी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। जिन सरकारी अस्पतालों में पहले से डायलिसिस की व्यवस्था है, वहां जरूरत के अनुसार बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी। वहीं जिन जिला अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां डायलिसिस यूनिट शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

यहां डेंगू-मलेरिया को लेकर भी बड़ी तैयारी

बारिश के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। दवाओं, ऑक्सीजन, एंबुलेंस, जरूरी चिकित्सा सामग्री और अतिरिक्त बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी पर सख्ती

स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने अस्पतालों में चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। जिला अस्पतालों में रात्रिकालीन निरीक्षण नियमित रूप से करने और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

45 पार पुरुषों की रगों में भर देंगे जोश! ये 5 चीजें आज से खाना शुरू करें

हेल्थ डेस्क। 45 साल की उम्र के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। इस उम्र में मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों की मजबूती और ऊर्जा को बनाए रखने के लिए खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है। संतुलित डाइट में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल और हेल्दी फैट से भरपूर चीजों को शामिल करना पुरुषों की ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है।

1. अंडे

अंडे प्रोटीन के साथ कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। 45 के बाद मांसपेशियों की सेहत बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन जरूरी होता है। अपनी जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अंडे को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

2. अखरोट और बादाम

अखरोट, बादाम और अन्य बिना नमक वाले मेवों में हेल्दी फैट, प्रोटीन और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में इनका सेवन रोजाना की डाइट को पौष्टिक बनाने में मदद कर सकता है।

3. हरी सब्जियां

पालक, ब्रोकोली, मेथी और दूसरी हरी सब्जियों में फाइबर, विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं। नियमित रूप से अलग-अलग रंगों की सब्जियां खाना दिल और सामान्य स्वास्थ्य के लिए अच्छी आदत मानी जाती है।

4. दाल और चने

दाल, चना, राजमा और अन्य फलियां प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें भोजन में शामिल करने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है और संतुलित डाइट तैयार करने में मदद मिलती है।

5. मछली

अगर आप मांसाहारी भोजन करते हैं तो मछली को डाइट में शामिल किया जा सकता है। कई मछलियों में प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं। संतुलित मात्रा में इसका सेवन हृदय और सामान्य स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

यूपी में फ्री राशन पर एक्शन, राशनकार्ड धारकों के लिए बड़ा अपडेट

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में सरकारी राशन योजना का गलत तरीके से लाभ लेने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। चित्रकूटधाम मंडल के चार जिलों में जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे राशन कार्ड धारक सामने आए हैं, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।

शासन की ओर से कराई गई जांच में कुल 47,886 अपात्र राशन कार्ड धारकों की पहचान की गई है। इनमें वाहन मालिक, निर्धारित सीमा से अधिक आय वाले परिवार और बड़े कारोबारी भी शामिल हैं। संबंधित जिलों को सूची भेजकर सत्यापन के बाद अपात्र कार्ड निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

28 हजार से ज्यादा कार्ड रद्द

शासन के निर्देश के बाद मंडल के चारों जिलों में राशन कार्डों के सत्यापन और निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 28,586 राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। यह चिन्हित अपात्र कार्डों का करीब 59.69 प्रतिशत है। हालांकि सभी जिलों में कार्रवाई की रफ्तार एक जैसी नहीं है। कहीं बड़ी संख्या में कार्ड निरस्त किए गए हैं तो कहीं सत्यापन और कार्रवाई की प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है।

बांदा में सबसे ज्यादा कार्रवाई

मंडल में अपात्र राशन कार्डों पर कार्रवाई के मामले में बांदा आगे है। जिले में 14,439 अपात्र कार्ड चिन्हित किए गए थे। इनमें से अब तक 12,425 कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। वहीं हमीरपुर में करीब 66.90 प्रतिशत और महोबा में लगभग 67.72 प्रतिशत चिन्हित कार्डों पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है।

चित्रकूट में कार्रवाई बेहद धीमी

चित्रकूट जिले में कार्रवाई की रफ्तार सबसे धीमी बताई जा रही है। शासन की ओर से जिले को 9,507 अपात्र राशन कार्ड धारकों की सूची उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन अब तक केवल 76 कार्ड निरस्त किए गए हैं। इतनी कम संख्या में कार्रवाई होने के कारण जिले में सत्यापन प्रक्रिया की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब प्रशासन के सामने चिन्हित सभी मामलों की जांच पूरी कर पात्र और अपात्र लोगों की स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है।

कार से लेकर बड़े कारोबार तक वालों के नाम

जांच में ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जो सरकारी योजना के लिए तय आर्थिक और संपत्ति संबंधी मानकों के अनुरूप पात्र नहीं हैं। सूची में चार पहिया वाहन रखने वाले परिवारों के साथ ऐसे कारोबारी भी शामिल हैं, जिनका वार्षिक GST टर्नओवर 25 लाख रुपये से अधिक है। इसके अलावा कंपनी के निदेशक, पांच एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि वाले और निर्धारित संपत्ति सीमा से अधिक संसाधन रखने वाले लोगों को भी अपात्र सूची में शामिल किया गया है।

गलत तरीके से लाभ लेने वालों पर आगे भी होगी कार्रवाई

सरकार की मुफ्त राशन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में अपात्र लोगों के योजना का लाभ लेने से वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचने में परेशानी हो सकती है। इसी वजह से शासन स्तर पर राशन कार्डों का सत्यापन कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जांच के बाद जो लोग पात्रता मानकों को पूरा नहीं करते, उनके राशन कार्ड नियमानुसार निरस्त किए जाएं।

ग्रेजुएट्स युवाओं के लिए खुशखबरी, बिहार में 2 नई भर्ती शुरू, ऐसे करें अप्लाई

पटना। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बिहार के युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में अलग-अलग विभागों में दो नई भर्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। इनमें बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) की ओर से टेक्नीशियन (बेंच केमिस्ट) और असिस्टेंट बैक्टीरियोलॉजिस्ट के पद शामिल हैं। वहीं बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC) ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पदों पर भर्ती निकाली है।

1 .BTSC में 13 पदों पर मौका

BTSC ने टेक्नीशियन (बेंच केमिस्ट) और असिस्टेंट बैक्टीरियोलॉजिस्ट के कुल 13 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 24 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार इस भर्ती के लिए 23 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन BTSC की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

2 .BPSSC फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 16 पद

बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 16 पदों पर भर्ती का अवसर दिया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 16 जुलाई 2026 से शुरू किए गए हैं। इस भर्ती में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार 16 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन पूरी करनी होगी।

युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का अच्छा मौका

दोनों भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्ति का अवसर मिलेगा। खासतौर पर संबंधित विषयों में पढ़ाई कर चुके और सरकारी सेवा में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये भर्तियां महत्वपूर्ण हैं। अभ्यर्थियों को सलाह है कि आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार न करें। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय नाम, जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता और अन्य विवरण सावधानी से दर्ज करें। आवेदन शुल्क, जरूरी दस्तावेज और चयन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी संबंधित आयोग की अधिसूचना के अनुसार ही देखें।

क्या बढ़ेगा कर्मचारियों का पेंशन? केंद्र सरकार ने कर दिया साफ

नई दिल्ली। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन बढ़ाने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से पेंशनभोगी न्यूनतम पेंशन को मौजूदा ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई में मौजूदा पेंशन से रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।

इसी मांग को लेकर EPS-95 नेशनल एक्शन कमेटी की ओर से दिल्ली में प्रदर्शन भी किया गया था। पेंशनभोगियों का कहना है कि लंबे समय तक नौकरी करने के बाद सेवानिवृत्ति के पश्चात मिलने वाली राशि इतनी होनी चाहिए कि बुजुर्ग सम्मानजनक तरीके से जीवन गुजार सकें।

संसद में फिर उठा न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का मुद्दा

मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में भी EPS-95 की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का सवाल उठाया गया। सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सरकार से जानना चाहा कि क्या कर्मचारी पेंशन योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी करने की कोई योजना है। इस सवाल का जवाब श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे की ओर से दिया गया। सरकार ने अपने जवाब में EPS के फंड में होने वाले योगदान और पेंशन व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों की जानकारी सदन के सामने रखी।

EPS फंड में कैसे आता है पैसा?

कर्मचारी पेंशन योजना की वित्तीय व्यवस्था में नियोक्ता और केंद्र सरकार दोनों का योगदान होता है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार नियोक्ता की ओर से कर्मचारी के वेतन का 8.33 प्रतिशत हिस्सा EPS में जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार निर्धारित वेतन सीमा तक 1.16 प्रतिशत का योगदान बजट के माध्यम से करती है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि न्यूनतम ₹1,000 मासिक पेंशन की व्यवस्था इसी वित्तीय ढांचे और उपलब्ध फंड को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही है।

क्या अभी ₹7,500 होगी न्यूनतम पेंशन?

EPS-95 पेंशनभोगियों की सबसे बड़ी मांग फिलहाल न्यूनतम पेंशन को ₹7,500 करने की है। हालांकि सरकार के मौजूदा जवाब से ऐसा संकेत नहीं मिलता कि तत्काल इस राशि को बढ़ाकर ₹7,500 करने का कोई फैसला लिया गया है। सरकार पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति, उसकी स्थिरता और भविष्य में पड़ने वाले वित्तीय बोझ को ध्यान में रखकर इस व्यवस्था को संचालित कर रही है। इसलिए फिलहाल पेंशनभोगियों को ₹7,500 की न्यूनतम पेंशन लागू होने की घोषणा का इंतजार करना होगा।

देश में 85 लाख से ज्यादा EPS पेंशनर्स

EPS योजना के दायरे में आने वाले पेंशनभोगियों की संख्या काफी बड़ी है। संसद में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक देश में 85,84,604 पेंशनर्स कर्मचारी पेंशन योजना का लाभ ले रहे थे। इसी अवधि तक पेंशन के रूप में करीब ₹15,819.26 करोड़ की राशि वितरित की जा चुकी थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि न्यूनतम पेंशन में किसी भी बड़े बदलाव का सरकार के वित्तीय दायित्व पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है।

बिहार में जमीन रजिस्ट्री की नई व्यवस्था, सभी जिलों में होंगे लागू

पटना। बिहार में जमीन, प्लॉट और फ्लैट की रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले ज्यादा डिजिटल होने जा रही है। राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों में 17 अगस्त से पेपरलेस रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसके बाद दस्तावेज तैयार करने से लेकर शुल्क भुगतान, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल साइन जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएंगी।

निबंधन पूरा होने के बाद संबंधित व्यक्ति को दस्तावेज की डिजिटल कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। इसे व्हाट्सऐप या ई-मेल के जरिए भेजने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से लोगों को कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी और रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

141 निबंधन कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था

बिहार में कुल 141 निबंधन कार्यालय हैं। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में 11 जुलाई से 10 कार्यालयों में इस व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। इसके बाद 30 जुलाई को दूसरे चरण में 40 अन्य निबंधन कार्यालयों को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया। अब बाकी कार्यालयों में भी 17 अगस्त से पेपरलेस निबंधन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

रजिस्ट्री की प्रक्रिया में आएगी तेजी

मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव नवीन कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन की तैयारियों और इसकी प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि नई व्यवस्था को समय पर लागू करने के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। विभाग के मुताबिक डिजिटल प्रक्रिया से दस्तावेजों की सुरक्षा बेहतर होगी और रजिस्ट्री में लगने वाला समय भी कम किया जा सकेगा।

GIS तकनीक से होगा स्थल निरीक्षण

नई रजिस्ट्रेशन व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ दस्तावेज तक सीमित नहीं रहेगा। संपत्ति के स्थल निरीक्षण के लिए GIS तकनीक का उपयोग करने की तैयारी है। विभाग की ओर से सभी जिला निबंधन कार्यालयों को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। GIS आधारित निरीक्षण से संपत्ति की स्थिति और स्थल संबंधी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से जांचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक सब ऑनलाइन

निबंधन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए भी डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। विभाग ने पब्लिक ग्रीवेंस मॉड्यूल लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे। शिकायत की जांच, संबंधित विभाग की कार्रवाई और उसके निस्तारण की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बिहार में इन शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी सौगात

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि बिहार में नौकरी कर रहे उत्तर प्रदेश के मूल निवासी शिक्षकों के साथ तबादले के दौरान किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। उनका स्थानांतरण भी राज्य में लागू शिक्षक स्थानांतरण नियमावली के तहत ही किया जाएगा।

पोर्टल के जरिए होगा शिक्षकों का तबादला

सरकार की योजना के मुताबिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी। शिक्षक निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन करेंगे और उसी के आधार पर स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ इसमें पारदर्शिता बनाए रखना है। इससे शिक्षकों को अपनी स्थिति और आवेदन से जुड़ी जानकारी हासिल करने में भी आसानी होगी।

यूपी के शिक्षकों के साथ नहीं होगा भेदभाव

शिक्षा मंत्री ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मूल निवासी शिक्षकों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बिहार के विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक किसी भी राज्य से हों, उनके साथ समान व्यवहार किया जाएगा। मंत्री के मुताबिक यूपी से आए शिक्षक भी बिहार के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं। इसलिए तबादले के दौरान उनके साथ किसी भी प्रकार का पक्षपात करने का सवाल ही नहीं उठता।

सिफारिश और पैरवी से नहीं होगा फैसला

स्थानांतरण प्रक्रिया में राजनीतिक या व्यक्तिगत सिफारिशों की संभावना को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि किसी शिक्षक का तबादला किसी की पैरवी के आधार पर नहीं किया जाएगा। सभी शिक्षकों के आवेदन का निपटारा निर्धारित नियमों और तय प्रक्रिया के अनुसार होगा। इससे योग्य शिक्षकों को समान अवसर मिलने और पूरी प्रक्रिया पर भरोसा कायम रखने में मदद मिलेगी।

पारदर्शिता पर शिक्षा विभाग का जोर

शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। विभाग का उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिसमें किसी शिक्षक को यह शिकायत करने का मौका न मिले कि उसके साथ राज्य, क्षेत्र या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किया गया। ऑनलाइन पोर्टल और नियमावली के आधार पर होने वाले स्थानांतरण से प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है। इससे तबादले को लेकर उठने वाले विवादों और शिकायतों में भी कमी आ सकती है।

गुरु का प्रभाव लाएगा खुशखबरी, 4 राशियों को नौकरी-धन और कारोबार में फायदा

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को ज्ञान, शिक्षा, धन, करियर, संतान और सौभाग्य का कारक माना जाता है। जब गुरु की स्थिति अनुकूल होती है तो कई राशियों के जातकों को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। आने वाले समय में गुरु का प्रभाव कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार वृषभ, मिथुन, तुला और धनु राशि के जातकों को गुरु के प्रभाव से लाभ मिल सकता है। इन राशियों के लिए नौकरी, कारोबार, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं।

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरु का प्रभाव आर्थिक मामलों में सकारात्मक रह सकता है। आय बढ़ाने के नए रास्ते मिल सकते हैं और पहले से चल रही आर्थिक परेशानियों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण अवसर मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए ग्राहक मिलने और व्यापार का दायरा बढ़ने के योग बन सकते हैं।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि के लोगों के लिए गुरु का प्रभाव करियर में प्रगति के संकेत दे सकता है। नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को अच्छी खबर मिल सकती है। वहीं नौकरी कर रहे लोगों को पद, जिम्मेदारी या वेतन से जुड़ा कोई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

3. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए गुरु का प्रभाव भाग्य का साथ बढ़ाने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके हुए कामों में गति आ सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के नए अवसर सामने आ सकते हैं। व्यापार करने वालों को किसी महत्वपूर्ण सौदे से लाभ मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और काम की सराहना हो सकती है। करियर में आगे बढ़ने के लिए नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है।

4. धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का प्रभाव विशेष शुभ माना जा रहा है, क्योंकि गुरु को इस राशि का स्वामी ग्रह भी माना जाता है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ सकता है और महत्वपूर्ण फैसले लेने में सफलता मिल सकती है। नौकरी में प्रमोशन या बेहतर अवसर मिलने की संभावना बन सकती है। कारोबार में विस्तार की योजना सफल हो सकती है और आमदनी के नए स्रोत बन सकते हैं। आर्थिक रूप से भी समय बेहतर रहने की उम्मीद है।

खुशखबरी का ऐलान! यूपी में एकसाथ 4 बड़ी भर्ती, करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक साथ कई अवसर सामने आए हैं। अलग-अलग सरकारी विभागों में चार बड़ी भर्तियों के जरिए 1600 से अधिक पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें प्राचार्य, वैज्ञानिक सहायक, लैब सहायक, विभिन्न अन्य पदों के साथ पशुधन प्रसार अधिकारी के पद शामिल हैं।

इन भर्तियों में अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और आवेदन की अंतिम तारीख निर्धारित की गई है। ऐसे में अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले संबंधित भर्ती की आधिकारिक अधिसूचना में पात्रता और अन्य शर्तों को ध्यान से देखना चाहिए।

1. प्राचार्य के 111 पदों पर भर्ती

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की ओर से प्राचार्य के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस भर्ती में कुल 111 पद हैं। इनमें 89 पद सहशिक्षा महाविद्यालयों और 22 पद महिला महाविद्यालयों के लिए बताए गए हैं। भर्ती विज्ञापन संख्या 02/2026 के तहत होने वाली इस नियुक्ति में चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-14 के अनुसार वेतन दिया जाएगा। भर्ती में पात्रता, आयु सीमा, आवेदन शुल्क, परीक्षा पैटर्न, पाठ्यक्रम और चयन प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है।

2. वैज्ञानिक सहायक और लैब असिस्टेंट के 208 पद

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से वैज्ञानिक सहायक और लैब असिस्टेंट के पदों पर भी भर्ती निकाली गई है। इस भर्ती के माध्यम से 208 पद भरे जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और अभ्यर्थी 17 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

3. UPPSC की 47 पदों वाली भर्ती

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने भी वर्ष 2026 के लिए विभिन्न पदों पर भर्ती का नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 47 पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 3 अगस्त 2026 से शुरू होकर 3 सितंबर 2026 तक चलेगी। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती में शामिल होने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए।

4. पशुधन प्रसार अधिकारी के 1251 पद

यूपी में सबसे ज्यादा पदों वाली भर्ती पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर है। UPSSSC ने इस भर्ती के तहत 1,251 पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 9 सितंबर 2026 से शुरू होंगे। आवेदन करने की अंतिम तारीख 29 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों की आयु सीमा 21 से 40 वर्ष रखी गई है। इस भर्ती में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता मानदंड पूरा करना होगा।

यूपी में छात्रों के लिए खुशखबरी! कक्षा 9 से 12 तक की स्कॉलरशिप शुरू, ऐसे करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति से जुड़ी अहम खबर है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यूपी स्कॉलरशिप आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। पात्र छात्र 11 अगस्त 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक स्कॉलरशिप पोर्टल scholarship.up.gov.in के माध्यम से किया जाएगा।

नए और पुराने छात्रों के लिए अलग तारीख

कक्षा 10 और 12 के ऐसे विद्यार्थी जो पहले से छात्रवृत्ति प्राप्त कर रहे हैं, उनके लिए नवीनीकरण आवेदन की प्रक्रिया 11 से 25 अगस्त 2026 तक चलेगी। वहीं कक्षा 9 और 11 के नए छात्रों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 21 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। छात्रों को ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद जहां जरूरी हो, उसकी हार्ड कॉपी भी संबंधित स्कूल में जमा करनी होगी। केवल ऑनलाइन आवेदन कर देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।

इन वर्गों के छात्रों को मिलेगा लाभ

यूपी स्कॉलरशिप योजना के तहत पात्र सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाता है। आवेदन के दौरान छात्रों को अपनी शैक्षणिक और बैंक संबंधी जानकारी सही तरीके से भरनी होगी।

जनवरी तक मिल सकती है छात्रवृत्ति

नवीनीकरण वाले छात्रों की छात्रवृत्ति राशि 25 से 31 अक्टूबर 2026 के बीच भेजे जाने की उम्मीद है। वहीं पहली बार आवेदन करने वाले छात्रों के लिए भुगतान 25 से 31 जनवरी 2027 के बीच किया जा सकता है। कक्षा 12 के बाद ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, डिप्लोमा और ITI जैसे कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए दशमोत्तर छात्रवृत्ति की अलग प्रक्रिया होगी। इनके आवेदन 15 सितंबर 2026 से शुरू होंगे।

बैंक और आधार की जानकारी रखें सही

छात्रवृत्ति की रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। इसलिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बैंक खाता उनके नाम पर हो और आधार से लिंक हो। बैंक डिटेल में गलती होने पर भुगतान में परेशानी आ सकती है। छात्र आवेदन करने से पहले जरूरी दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना फॉर्म भर दें।

हार्ट को रखना है हेल्दी तो आज से करें ये 4 काम, दिल रहेगा मजबूत

हेल्थ डेस्क। आज की बदलती जीवनशैली में दिल को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी हो गया है। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और तनाव जैसी आदतें हार्ट हेल्थ को प्रभावित कर सकती हैं। अच्छी बात यह है कि रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ आसान बदलाव करके दिल को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

1. रोज करें शारीरिक गतिविधि

हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से एक्टिव रहना जरूरी है। रोज कुछ समय तेज चाल से पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में थोड़ा चलना भी अच्छी आदत है।

2. खाने में रखें संतुलन

दिल की सेहत के लिए डाइट पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दाल और अन्य पौष्टिक चीजों को शामिल करें। बहुत ज्यादा नमक, चीनी और संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर है। पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड की जगह ताजा भोजन को प्राथमिकता दें।

3. तनाव को करें कम

लगातार तनाव और खराब नींद का असर भी संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए पर्याप्त नींद लेने और तनाव कम करने के लिए अपनी दिनचर्या में आराम, योग, ध्यान या पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें। रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत भी मददगार हो सकती है।

4. धूम्रपान से बनाएं दूरी

धूम्रपान दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनके लिए इसे छोड़ना हार्ट हेल्थ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। साथ ही अत्यधिक शराब के सेवन से बचना भी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।

नियमित जांच भी है जरूरी

सिर्फ अच्छी आदतें अपनाना ही पर्याप्त नहीं है। समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी जरूरी स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए, खासकर यदि डॉक्टर ने इसकी सलाह दी हो। किसी भी असामान्य लक्षण या लगातार परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

8वें वेतन आयोग पर सरकार का बड़ा जवाब, पढ़ें पूरी डिटेल्स

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर लगातार सरकार और आयोग की गतिविधियों पर बनी हुई है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद उनकी सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव हो सकता है। इसी बीच संसद में सरकार से 8वें वेतन आयोग की स्थिति और आगे की प्रक्रिया को लेकर सवाल किया गया।

वित्त मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करके सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इसलिए सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका अंतिम फैसला आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही किया जाएगा।

संसद में केंद्र सरकार ने दी अहम जानकारी

मानसून सत्र के दौरान 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार से सवाल पूछा गया था। इसमें आयोग के गठन, कामकाज और कर्मचारियों की सैलरी से जुड़े संभावित बदलावों की जानकारी मांगी गई। वित्त मंत्रालय ने बताया कि आयोग का गठन सरकारी आदेश के माध्यम से किया गया था। निर्धारित समयसीमा के भीतर आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही सरकार उसकी सिफारिशों पर आगे निर्णय लेगी।

आयोग कर रहा है अलग-अलग संगठनों से चर्चा

8वें वेतन आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है और विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है। आयोग बैठकों के जरिए कर्मचारियों, पेंशनर्स और संबंधित संगठनों की मांगों को समझ रहा है। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। पुलक घोष को पार्ट-टाइम सदस्य और पंकज जैन को सदस्य-सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

35 लाख से ज्यादा कर्मचारियों पर पड़ेगा असर

8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों के बड़े वर्ग को प्रभावित करेगा। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च 2026 तक करीब 35.77 लाख केंद्रीय सिविलियन कर्मचारी इसके दायरे में हैं। इसके अलावा 31 दिसंबर 2025 तक करीब 33.76 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स भी इसके दायरे में बताए गए हैं। इन आंकड़ों में रक्षा विभाग से जुड़े पेंशनर्स शामिल नहीं हैं।

किन चीजों में बदलाव की उम्मीद?

वेतन आयोग कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा करने के साथ कई दूसरे महत्वपूर्ण मामलों पर भी सिफारिशें देगा। इसमें मूल वेतन, विभिन्न भत्तों और महंगाई भत्ते से जुड़े पहलुओं की समीक्षा शामिल हो सकती है। इसके अलावा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और पारिवारिक पेंशन से संबंधित मामलों पर भी आयोग अपनी सिफारिशें देगा। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि अंतिम रूप से वेतन या पेंशन में कितनी वृद्धि होगी।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खाएं ये 5 चीजें, पुरुषों की सेहत को मिलेगा फायदा

हेल्थ डेस्क। पुरुषों की फर्टिलिटी पर खानपान और लाइफस्टाइल का भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और स्वस्थ वजन बनाए रखना स्पर्म हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने से स्पर्म की संख्या, गतिशीलता और गुणवत्ता को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।

1. अखरोट और दूसरे नट्स

अखरोट जैसे नट्स में हेल्दी फैट और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। नट्स के साथ बादाम और अन्य बिना नमक वाले मेवों को भी संतुलित डाइट में शामिल करना बेहतर विकल्प है।

2. अंडे

अंडे प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। संतुलित आहार के हिस्से के रूप में अंडे पुरुषों की सामान्य पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, सिर्फ अंडे खाने से स्पर्म काउंट बढ़ने की गारंटी नहीं है।

3. मछली

मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। स्वस्थ डाइट में मछली को शामिल करना स्पर्म हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है। NHS से जुड़ी जानकारी के अनुसार समुद्री भोजन और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार बेहतर सीमेन क्वालिटी से जुड़ा पाया गया है।

4. टमाटर

टमाटर में लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। इसे पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के संदर्भ में भी अध्ययन किया गया है। हालांकि उपलब्ध शोध अभी निर्णायक नहीं है, इसलिए टमाटर को स्वस्थ और विविध डाइट का हिस्सा रखना बेहतर है, किसी इलाज का विकल्प नहीं।

5. फल और हरी सब्जियां

फल और सब्जियां विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट उपलब्ध कराती हैं। विशेषज्ञ स्वस्थ आहार में पर्याप्त फल-सब्जियां शामिल करने की सलाह देते हैं। बेरीज, खट्टे फल और हरी सब्जियों को नियमित डाइट में शामिल किया जा सकता है।

बिहार में जमीन खरीद रहे हैं तो सावधान! इन 5 चीजों की जांच किए बिना न करें सौदा

पटना। बिहार में जमीन या प्लॉट खरीदना बड़ी रकम से जुड़ा फैसला होता है। ऐसे में सिर्फ जमीन देखकर या विक्रेता की बात पर भरोसा करके सौदा करना भारी पड़ सकता है। जमीन खरीदने से पहले कागजात और सरकारी रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है। बिहार सरकार के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर जमाबंदी सहित कई जरूरी जानकारियां ऑनलाइन देखी जा सकती हैं।

1. जमाबंदी जरूर जांचें

सबसे पहले जमीन की जमाबंदी देखें। इसमें रैयत का नाम, खाता संख्या, खेसरा संख्या, जमीन का रकबा और चौहद्दी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है। बिहार भूमि पोर्टल पर जिला, अंचल और मौजा चुनकर रैयत के नाम, खाता या खेसरा नंबर से जमाबंदी खोजी जा सकती है।

2. जमीन के मालिकाना हक की करें जांच

जिस व्यक्ति से जमीन खरीद रहे हैं, उसके नाम और उपलब्ध जमीन के रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। पुराने दस्तावेजों और वर्तमान जमाबंदी में कोई अंतर हो तो उसे स्पष्ट किए बिना पैसा देना जोखिम भरा हो सकता है।

3. दाखिल-खारिज का रिकॉर्ड देखें

जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन की जानकारी भी जांचना जरूरी है। बिहार भूमि पोर्टल पर जमाबंदी के साथ नामांतरण से संबंधित विवरण उपलब्ध हो सकता है।

4. जमीन पर विवाद या बंधक तो नहीं?

सौदा पक्का करने से पहले यह भी पता करें कि जमीन किसी विवाद, मुकदमे या बंधक से जुड़ी तो नहीं है। बिहार के भूमि रिकॉर्ड में कुछ मामलों में जमीन से जुड़े मुकदमे और बंधक की जानकारी देखने के विकल्प भी उपलब्ध हैं।

5. खेसरा, रकबा और जमीन की स्थिति मिलाएं

कागजों में दर्ज खाता, खेसरा, रकबा और चौहद्दी को मौके पर मौजूद जमीन से मिलाना बेहद जरूरी है। सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर तुरंत सौदा न करें। जरूरत पड़ने पर संबंधित अंचल कार्यालय से रिकॉर्ड की पुष्टि कराएं।

खुशखबरी की घोषणा! यूपी में आई 1 बड़ी भर्ती, ऐसे करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UPSSSC ने पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1251 पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया सितंबर में शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय के भीतर आयोग की वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती एक अच्छा अवसर हो सकती है।

1251 पदों पर होगी भर्ती

UPSSSC की ओर से जारी भर्ती के तहत पशुधन प्रसार अधिकारी (Livestock Extension Officer) के कुल 1251 पद भरे जाएंगे। ये पद पशुपालन निदेशालय के अंतर्गत आते हैं। भर्ती से संबंधित विज्ञापन संख्या 17-परीक्षा/2026 है। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति उत्तर प्रदेश में की जाएगी।

9 सितंबर से शुरू होगा आवेदन

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 9 सितंबर 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए 29 सितंबर 2026 तक का समय दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को सलाह है कि आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार न करें। अंतिम दिनों में वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक होने के कारण आवेदन करने में परेशानी हो सकती है।

40 साल तक के उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन

भर्ती में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की उम्र 21 से 40 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिल सकती है। उम्मीदवार आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को जरूर जांच लें।

ऐसे करें ऑनलाइन के द्वारा आवेदन की प्रक्रिया पूरी 

अभ्यर्थियों को आवेदन करने के लिए सबसे पहले UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां भर्ती से संबंधित लिंक पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। आवेदन के दौरान उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और अन्य जरूरी विवरण भरने होंगे। इसके बाद मांगे गए दस्तावेज अपलोड कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।