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बिहार में राशन कार्डधारकों के लिए बड़ी खबर, जानें पूरी डिटेल

न्यूज डेस्क। बिहार के राशन कार्डधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना आई है। राज्य सरकार ने सभी लाभुकों के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 28 फरवरी 2026 तक ई-केवाईसी नहीं कराने वाले लाभुकों के नाम राशन कार्ड से हटा दिए जाएंगे।

ई-केवाईसी अनिवार्य, नहीं तो कटेगा नाम

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आदेश के अनुसार, खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत आने वाले हर लाभुक के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य है। निर्धारित समय सीमा के बाद पेंडिंग मामलों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।

सिवान जिले का हाल

सिवान जिले के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 27 लाख 73 हजार 954 लाभुक हैं। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत लाभुक यानी 22 लाख 2 हजार 426 लोगों ने ई-केवाईसी करवा लिया है। हालांकि, अभी भी 5 लाख 71 हजार 528 लाभुकों का सत्यापन लंबित है। विभाग का अनुमान है कि कुछ कार्डधारक बाहर रह रहे हैं, कुछ का निधन हो चुका है और कुछ मामलों में दो जगह नाम दर्ज होने की भी संभावना है।

प्रशासन की अपील

राज्य प्रशासन ने सभी लाभुकों से आग्रह किया है कि जो लोग अभी तक ई-केवाईसी नहीं करा पाए हैं, वे तुरंत नजदीकी जन वितरण प्रणाली (PDS) केंद्र या संबंधित केंद्र पर जाकर प्रक्रिया पूरी करें। समय सीमा 28 फरवरी 2026 है, इसके बाद कोई अतिरिक्त अवसर नहीं मिलेगा।

भारत की 10 सबसे बेस्ट सरकारी नौकरी: बंपर सैलरी और बेहतरीन सुविधाएं

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी हमेशा से भारतीय युवाओं के लिए सुरक्षित और आकर्षक करियर विकल्प रही है। बंपर सैलरी, सामाजिक प्रतिष्ठा और बेहतरीन सुविधाओं के साथ, ये नौकरियाँ लंबे समय तक वित्तीय सुरक्षा भी प्रदान करती हैं। आइए जानते हैं भारत की 10 सबसे बेहतरीन सरकारी नौकरियों और उनके खास फायदे।

1. भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)

IAS भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवा मानी जाती है। यह UPSC के माध्यम से भरी जाती है। एक IAS अधिकारी देश के प्रशासन और नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही शानदार वेतन, हाउस रेंट एलाउंस, स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी आवास जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

2. भारतीय पुलिस सेवा (IPS)

IPS अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इस सेवा में पदोन्नति के अवसर, भत्ते, विशेष सुरक्षा सुविधाएं और सम्मानजनक करियर शामिल हैं।

3. भारतीय विदेश सेवा (IFS)

IFS अधिकारी भारत का प्रतिनिधित्व विदेशों में करते हैं। यह सेवा कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों में करियर बनाने का मौका देती है। विदेशी दौरे और आकर्षक पैकेज इसके प्रमुख लाभ हैं।

4. ISRO/DRDO वैज्ञानिक

ISRO और DRDO में वैज्ञानिक पद एक बेहतरीन R&D करियर विकल्प हैं। उच्च वेतन, परियोजनाओं में शामिल होने का अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता इसके प्रमुख फायदे हैं।

5. भारतीय राजस्व सेवा (IRS)

IRS अधिकारी इनकम टैक्स और कस्टम विभागों में काम करते हैं। यह पद उच्च वेतन, सरकारी भत्ते और स्थायी करियर सुरक्षा प्रदान करता है।

6. भारतीय वन सेवा (IFoS)

IFoS अधिकारी पर्यावरण संरक्षण और वन प्रबंधन में काम करते हैं। यह पद न केवल समाज के लिए उपयोगी है, बल्कि इसके साथ उत्कृष्ट वेतन और सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं।

7. IIT/IIM प्रोफेसर

देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में प्रोफेसर बनना एक सम्मानजनक और सुरक्षित करियर विकल्प है। वेतन के साथ-साथ रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर भी मिलते हैं।

8. रक्षा सेवा अधिकारी (NDA/CDS)

सेना, नौसेना और वायु सेना में कमीशन अधिकारी बनने के लिए NDA/CDS परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। यह नौकरी साहसिकता, अनुशासन और सम्मान के साथ उत्कृष्ट पैकेज देती है।

9. PSU अधिकारी (ONGC, BHEL, IOCL)

सार्वजनिक उपक्रमों में अधिकारी पद स्थायी और आकर्षक करियर विकल्प हैं। उच्च वेतन, भत्ते, पदोन्नति और नौकरी की सुरक्षा इसके प्रमुख लाभ हैं।

10. RBI ग्रेड A अधिकारी

RBI में ग्रेड A अधिकारी बैंकिंग और वित्तीय नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उच्च वेतन, सरकारी भत्ते, और सम्मानजनक पद इसे बैंकिंग क्षेत्र की सबसे बेहतरीन नौकरी बनाते हैं।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम में 731 पदों पर भर्ती, 25 मार्च तक आवेदन करें

नई दिल्ली। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने अपने अधिकारी और कनिष्ठ कार्यकारी पदों के लिए 2026 की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुल 731 पदों के लिए योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह अवसर उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो पेट्रोलियम क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।

पद और योग्यता

भर्ती विभिन्न पदों के लिए है, जिनमें अधिकारी और कनिष्ठ कार्यकारी शामिल हैं। उम्मीदवारों की योग्यता पद के अनुसार भिन्न है। आवश्यक शैक्षणिक योग्यता इस प्रकार है डिप्लोमा / स्नातक / बीई / बी.टेक, एमबीए / सीए / सीएमए / एम.एससी।

वेतन और लाभ

इन पदों के लिए अनुमानित वेतनमान ₹30,000 – ₹2,80,000 प्रति माह है। सालाना कुल पैकेज लगभग ₹10.88 लाख से ₹49.30 लाख तक हो सकता है।

आयु सीमा

आवेदन के लिए उम्मीदवार की आयु 25 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए, हालांकि पद के अनुसार आयु सीमा में बदलाव हो सकता है।

आवेदन प्रक्रिया

भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होंगे। उम्मीदवार HPCL की आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल www.hindustanpetroleum.com  के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन शुरू: 25 फरवरी 2026 (दोपहर 1 बजे)

आवेदन की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026 (रात 11:59 बजे तक)

महत्वपूर्ण जानकारी

आवेदन करते समय उम्मीदवारों को सभी दस्तावेज़ और शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार रखने होंगे। प्रत्येक पद के लिए योग्यता और अनुभव की शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें।

यूपी में खुशखबरी की घोषणा, 3 बड़ी भर्ती के लिए आवेदन शुरू

लखनऊ। यूपी के युवाओं और नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी है। राज्य में तीन बड़े भर्ती अभियान की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक योग्यताओं के लिए सरकारी पदों पर आवेदन किए जा सकते हैं। इन भर्तियों में शिक्षण, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र शामिल हैं।

1. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) भर्ती 2026

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में 2026 में कुल 54 पदों पर भर्ती हो रही है, जिसमें PGT, Peon और अन्य पद शामिल हैं। योग्य उम्मीदवार जिनके पास B.A, B.Ed, B.Tech/B.E, Any Post Graduate, M.A, M.Sc, MCA जैसी डिग्री है, वे ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन की शुरुआत: 19 फरवरी 2026

अंतिम तिथि: 18 मार्च 2026

आवेदन प्रक्रिया: ऑफलाइन, KGBV वेबसाइट https://balrampur.nic.in के माध्यम से

2. यूपी आंगनवाड़ी भर्ती 2026

यूपी आंगनवाड़ी में 214 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू हो चुकी है। इस पद के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम योग्यता 10वीं पास होना आवश्यक है।

ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 17 फरवरी 2026

अंतिम तिथि: 9 मार्च 2026

ऑनलाइन आवेदन: upanganwadibharti.in

3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM UP) भर्ती 2026

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश में 13 डिप्टी जनरल मैनेजर पदों के लिए भर्ती निकली है। योग्य उम्मीदवार जिनके पास MBBS/BDS, LLM या MBA/PGDBA/PGDBM की डिग्री है, वे आवेदन कर सकते हैं।

ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 23 फरवरी 2026

अंतिम तिथि: 15 मार्च 2026

ऑनलाइन आवेदन: NHM UP की आधिकारिक वेबसाइट

आवेदन और महत्वपूर्ण जानकारी

इन सभी भर्तियों के लिए उम्मीदवारों को समय पर आवेदन करना अनिवार्य है। ऑफलाइन आवेदन करने वाले KGBV उम्मीदवारों को आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ आवेदन फॉर्म भेजना होगा, जबकि NHM और आंगनवाड़ी भर्ती में ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: PF क्लेम अब सिर्फ 3 दिन में!

नई दिल्ली। देश के लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की खबर है। EPFO ने ऐसे निष्क्रिय खातों की पहचान शुरू कर दी है, जिनमें छोटी राशि जमा है और लंबे समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ। उद्देश्य साफ है कर्मचारियों की मेहनत की कमाई उन्हें बिना झंझट वापस दिलाना।

क्या है नई पहल?

अक्सर नौकरी बदलने के बाद कर्मचारी पुराने पीएफ खातों को ट्रांसफर या क्लेम करना भूल जाते हैं। ऐसे खातों में छोटी-छोटी रकम पड़ी रह जाती है, जो सालों तक इस्तेमाल नहीं होती। अब सरकार ने तय किया है कि 1,000 रुपये या उससे कम शेष राशि वाले निष्क्रिय खातों का पैसा संबंधित खाताधारकों के सत्यापित बैंक खातों में सीधे भेजा जाएगा।

सबसे बड़ी बात यह है की इसके लिए कर्मचारियों को किसी दफ्तर के चक्कर लगाने या अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया स्वचालित तरीके से की जाएगी।

‘इनऑपरेटिव’ खाता?

पीएफ नियमों के अनुसार यदि किसी खाते में लगातार 36 महीनों तक न तो कर्मचारी और न ही नियोक्ता की ओर से कोई अंशदान आता है, तो वह खाता ‘इनऑपरेटिव’ यानी निष्क्रिय माना जाता है। ऐसे लाखों खाते फिलहाल EPFO के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

पहले चरण में क्या होगा?

अभियान की शुरुआत छोटे बैलेंस वाले खातों से की जा रही है। जिन खातों में 1,000 रुपये या उससे कम राशि है, उन्हें प्राथमिकता दी गई है। इन खातों का सत्यापन कर रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इससे लाखों लोगों को अपनी भूली हुई बचत वापस मिल सकेगी।

EPFO 3.0 से क्या उम्मीद?

सरकार डिजिटल सिस्टम को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित “EPFO 3.0” व्यवस्था के तहत क्लेम प्रोसेस तेज, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाने पर जोर है। लक्ष्य यह है कि पीएफ से जुड़ी सेवाएं चाहे क्लेम हो, ट्रांसफर हो या अपडेट कम से कम समय में पूरी हों।

कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

भूले हुए पैसों की वापसी

क्लेम प्रक्रिया में तेजी

डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम

बिना आवेदन के सीधा बैंक ट्रांसफर

यह पहल न सिर्फ कर्मचारियों की बचत को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि सरकारी प्रक्रियाओं को सरल और भरोसेमंद बनाने की कोशिश भी है। अगर आपका भी कोई पुराना पीएफ खाता है, तो बैंक और केवाईसी विवरण अपडेट रखना फायदेमंद रहेगा ताकि आपकी रकम समय पर आपके खाते में पहुंच सके।

6 ग्रहों का दुर्लभ संयोग: 3 राशियों के आएंगे अच्छे दिन

राशिफल। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आकाश मंडल में एक विशेष ग्रह संयोग बन रहा है, जिसमें छह प्रमुख ग्रह एक साथ प्रभाव डालते दिखाई देंगे। ऐसे संयोग कम ही बनते हैं और जब बनते हैं तो उनका असर व्यापक रूप से विभिन्न राशियों पर देखा जाता है। 

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस बार का यह दुर्लभ योग खासतौर पर तीन राशियों सिंह, मकर और मीन के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। हालांकि ग्रहों का प्रभाव व्यक्तिगत कुंडली पर भी निर्भर करता है, फिर भी सामान्य राशिफल के आधार पर इन तीन राशियों के लिए यह समय उन्नति और राहत का संकेत दे रहा है।

सिंह राशि:

सिंह राशि के जातकों के लिए यह ग्रह संयोग आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी का संकेत है। कार्यक्षेत्र में लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। उच्च अधिकारियों से सराहना मिलने की संभावना है, जिससे पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

व्यापार से जुड़े लोगों को नए संपर्कों से लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं और रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना बन रही है। पारिवारिक जीवन में भी सामंजस्य रहेगा। यदि कोई बड़ा निर्णय लेने की सोच रहे हैं, तो यह समय अनुकूल साबित हो सकता है।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए यह संयोग मेहनत का फल दिलाने वाला साबित हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को स्थिरता और प्रगति के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय से चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और कार्यस्थल पर आपका प्रभाव बढ़ेगा।

व्यवसायियों के लिए नए निवेश या विस्तार की योजनाएं सफल हो सकती हैं। आर्थिक मामलों में सावधानी रखते हुए उठाए गए कदम लाभदायक रहेंगे। परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा और पुराने विवाद सुलझ सकते हैं। स्वास्थ्य में भी सुधार के संकेत हैं।

मीन राशि:

मीन राशि के लिए यह ग्रह योग भाग्यवर्धक माना जा रहा है। अचानक लाभ या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन रहे हैं। शिक्षा, कला, लेखन या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिल सकती है।

विदेश से जुड़े कार्यों या यात्राओं के अवसर बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी और बचत बढ़ने की संभावना है। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। मानसिक शांति और आध्यात्मिक रुचि में भी वृद्धि हो सकती है।

केंद्र सरकार की नई तैयारी, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार खाद सब्सिडी की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहा ने संकेत दिया है कि उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी भविष्य में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा सकती है। इसके लिए अधिकारियों को एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

1.70 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी पर मंथन

फिलहाल उर्वरक सब्सिडी की राशि कंपनियों को दी जाती है, ताकि किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराई जा सके। यह राशि 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। सरकार का मानना है कि यदि यही रकम सीधे किसानों को दी जाए तो व्यवस्था अधिक पारदर्शी और लक्षित बन सकती है।

वर्तमान में 45 किलो यूरिया की बोरी लगभग 266–267 रुपये में और 50 किलो डीएपी (DAP) की बोरी करीब 1,350 रुपये में किसानों को मिलती है। असल बाजार कीमत इससे कहीं अधिक है, जिसका अंतर सरकार सब्सिडी के जरिए वहन करती है।

डायवर्जन और कालाबाजारी पर रोक का प्रयास

सरकार को समय-समय पर शिकायतें मिलती रही हैं कि पर्याप्त आपूर्ति और भारी सब्सिडी के बावजूद किसानों को जरूरत के समय खाद उपलब्ध नहीं हो पाती। कुछ मामलों में सब्सिडी वाली यूरिया के अन्य क्षेत्रों में डायवर्जन या दुरुपयोग की बात भी सामने आती रही है।

ऐसे में सीधे लाभ अंतरण (DBT) के जरिये राशि किसानों के खातों में भेजने का प्रस्ताव इस समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। इस विषय पर नीति विमर्श के लिए Indian Council of Agricultural Research (ICAR) सहित संबंधित संस्थाओं से विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।

आगे की राह क्या हैं?

सरकार का उद्देश्य सब्सिडी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, लक्षित और प्रभावी बनाना है। यदि सीधा हस्तांतरण मॉडल लागू होता है, तो इससे कालाबाजारी और डायवर्जन पर अंकुश लग सकता है। लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों पर तत्काल आर्थिक बोझ न बढ़े।

खाद सब्सिडी को लेकर यह प्रस्ताव कृषि क्षेत्र में एक बड़े ढांचागत बदलाव की दिशा में संकेत देता है। आने वाले समय में व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, लेकिन इतना तय है कि सरकार किसानों तक सहायता सीधे और प्रभावी तरीके से पहुंचाने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है।

यूपी के किसानों को तोहफा, 25 फरवरी से बुकिंग शुरू

न्यूज डेस्क। प्रदेश में खेती को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। होली के अवसर पर राज्य सरकार ने कृषि यंत्रों पर अनुदान देने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत पात्र किसान 25 फरवरी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे।

यह पहल Sub-Mission on Agricultural Mechanization (SMAM) योजना के अंतर्गत लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य खेती में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना और श्रम लागत कम करना है।

25 फरवरी से 4 मार्च तक खुला रहेगा पोर्टल

कृषि विभाग के अनुसार, ऑनलाइन टोकन जनरेट करने और बुकिंग की प्रक्रिया 25 फरवरी की सुबह से शुरू होकर 4 मार्च की रात 12 बजे तक चलेगी। तय समय सीमा के बाद पोर्टल स्वतः बंद हो जाएगा। ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन पूरा कर लें।

किन कृषि यंत्रों पर मिलेगा अनुदान?

योजना के तहत आधुनिक कृषि उपकरणों को शामिल किया गया है, जिनमें कृषि ड्रोन, एकल कृषि यंत्र, अन्य उन्नत मशीनरी। इन यंत्रों पर सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार सब्सिडी दी जाएगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक मशीनें खरीदने में सहूलियत मिलेगी, जो पहले लागत के कारण संभव नहीं हो पाता था।

कैसे करें पंजीकरण?

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो। किसान Agriculture Department Uttar Pradesh की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवश्यक दस्तावेज के रूप में आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, खतौनी, आधार से लिंक मोबाइल नंबर देने होंगे।

चयन कैसे होगा?

विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार चयन प्रक्रिया “पहले आओ-पहले पाओ” या लॉटरी प्रणाली के आधार पर की जा सकती है। अंतिम निर्णय संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा।

भारत, अमेरिका और चीन साथ-साथ, रूस खुश क्यों?

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के चार वर्ष पूरे होने के मौके पर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। 24 फरवरी को यूक्रेन ने UN में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें रूस से तत्काल, पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की गई थी। प्रस्ताव का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाना था, लेकिन मतदान के नतीजों ने वैश्विक राजनीति की जटिलता को उजागर कर दिया।

क्या रहे मतदान के आंकड़े?

193 सदस्य देशों वाली महासभा में 107 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। 12 देशों ने इसका विरोध किया, जबकि 51 देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी। सबसे ज्यादा चर्चा उन देशों को लेकर हुई जिन्होंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, इनमें भारत, अमेरिका और चीन जैसे बड़े वैश्विक खिलाड़ी शामिल थे। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका अब तक यूक्रेन का प्रमुख समर्थक रहा है। ऐसे में उसका मतदान से दूर रहना कूटनीतिक संकेतों से भरा कदम माना गया।

भारत का रुख: संवाद ही समाधान

भारत का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, लेकिन युद्ध का अंत बातचीत से। नई दिल्ली ने न तो रूस के खिलाफ खुलकर मोर्चा लिया है और न ही यूक्रेन का अंध समर्थन किया है। भारत की प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान और संतुलित विदेश नीति रही है।

अमेरिका का बदला संकेत ने चौकाया

अमेरिका का मतदान से अलग रहना कई मायनों में चौंकाने वाला रहा। माना जा रहा है कि वॉशिंगटन अब सीधे टकराव की बजाय वार्ता की दिशा में संभावनाएं तलाशना चाहता है। लंबे समय से यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य सहायता देने के बाद अमेरिकी नीति-निर्माताओं के भीतर यह बहस तेज हुई है कि आगे की रणनीति क्या हो। यदि अमेरिका बातचीत की राह पर जोर देता है, तो यह रूस के लिए राहत का संकेत हो सकता है, क्योंकि उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव कुछ हद तक कम पड़ सकता है।

चीन की भी रणनीतिक दूरी, संतुलन साधा

चीन ने भी मतदान से दूरी बनाकर संतुलन साधने की कोशिश की। बीजिंग रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को कमजोर नहीं करना चाहता, वहीं वह खुद को वैश्विक शांति के पक्षधर के रूप में भी प्रस्तुत करता रहा है। ऐसे में उसका तटस्थ रुख उसकी दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

रूस के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

यद्यपि प्रस्ताव पारित हो गया, लेकिन अमेरिका, भारत और चीन जैसे प्रभावशाली देशों का मतदान से दूर रहना रूस के लिए एक मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक राहत माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया कि वैश्विक सहमति पूरी तरह यूक्रेन के पक्ष में एकजुट नहीं है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल प्रस्ताव का पारित होना ही निर्णायक नहीं होता, बल्कि यह भी मायने रखता है कि प्रमुख शक्तियां किस रुख के साथ खड़ी हैं। इस संदर्भ में मॉस्को के लिए यह स्थिति अनुकूल मानी जा रही है।

ट्रंप को झटका! भारत जारी रख सकता है रूसी तेल की खरीद

नई दिल्ली। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। अदालत ने IEEPA के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को निरस्त कर दिया, जिससे राष्ट्रपति की आपात आर्थिक शक्तियों के इस्तेमाल पर सीमाएं तय हो गईं। विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से भारत पर रूसी तेल की खरीद कम करने का अमेरिकी दबाव कुछ हद तक कमजोर पड़ सकता है।

क्या था मामला?

ट्रंप प्रशासन ने पहले भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था और रूस से तेल खरीद को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। वॉशिंगटन का तर्क था कि रूस से ऊर्जा खरीद मॉस्को की युद्ध क्षमता को अप्रत्यक्ष समर्थन देती है। हालांकि बाद में एक कार्यकारी आदेश के जरिए शुल्क में आंशिक कमी की गई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह संकेत गया है कि व्यापारिक टैरिफ को गैर-व्यापारिक या रणनीतिक दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल करना आसान नहीं होगा। इससे भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा नीति तय करने में अधिक लचीलापन मिल सकता है।

भारत की ऊर्जा रणनीति?

भारत की ऊर्जा नीति मुख्यतः तीन स्तंभों पर आधारित मानी जाती है कीमत, आपूर्ति की स्थिरता और स्रोतों का विविधीकरण। रूस फिलहाल भारत के लिए रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध करा रहा है, जिससे आयात बिल नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

डेटा एजेंसियों के अनुसार हाल के महीनों में रूस से आयात में उतार-चढ़ाव जरूर आया है, लेकिन विशेषज्ञों का आकलन है कि भारत प्रतिदिन 8 से 10 लाख बैरल तक रूसी तेल की खरीद जारी रख सकता है, यदि कीमतें अनुकूल रहीं।

क्या अमेरिकी तेल विकल्प बन सकता है?

ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी कच्चा तेल पूरी तरह रूसी आपूर्ति की जगह नहीं ले सकता। भौगोलिक दूरी, परिवहन लागत और रिफाइनरियों की तकनीकी जरूरतें भी अहम भूमिका निभाती हैं। भारत के रिफाइनर रूसी ग्रेड के तेल को प्रोसेस करने के लिए पहले ही अनुकूलन कर चुके हैं, जिससे लागत लाभ और बढ़ जाता है।

तेल खरीद को लेकर भारत का आगे क्या?

अमेरिकी न्यायिक फैसले के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा संबंधों में नई संतुलन रेखाएं खिंच सकती हैं। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में अमेरिकी प्रशासन किस तरह की नीतियां अपनाता है।फिलहाल संकेत यही हैं कि भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में लचीलापन बनाए रखते हुए रूस से रियायती तेल खरीद जारी रख सकता है।

खुशखबरी का बड़ा धमाका! बिहार में 3 नई भर्तियों का ऐलान

पटना। बिहार में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी का बड़ा अवसर सामने आया है। राज्य में इस साल तीन बड़ी सरकारी भर्तियों की घोषणा की गई है, जिनमें अलग-अलग योग्यता वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। ये भर्तियां न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ाती हैं, बल्कि सरकारी सेवा में करियर बनाने का सुनहरा मौका भी देती हैं।

1. BPSC असिस्टेंट प्रोसीक्यूशन ऑफिसर भर्ती 2026

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) ने 2026 में असिस्टेंट प्रोसीक्यूशन ऑफिसर के लिए 300 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। इस पद के लिए LLB पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले योग्यता और दस्तावेज़ों की पूरी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट से अवश्य ले लें।

ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 27 फरवरी 2026

अंतिम तिथि: 20 मार्च 2026

आवेदन पोर्टल: bpsc.bihar.gov.in

2. CSBC बिहार कांस्टेबल (ऑपरेटर) भर्ती 2026

केंद्रीय चयन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल (CSBC) ने कांस्टेबल (ऑपरेटर) के पदों पर 993 रिक्तियों के लिए भर्ती निकाली है। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए है जो पुलिस या सुरक्षा सेवा में करियर बनाने के इच्छुक हैं। इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों को शारीरिक योग्यता, शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा का ध्यान रखना होगा।

ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 1 मार्च 2026

अंतिम तिथि: 31 मार्च 2026

आवेदन पोर्टल: csbc.bihar.gov.in 

3. BPSC सिविल जज भर्ती 2026

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन ने सिविल जज के पदों के लिए भी भर्ती निकाली है। इस भर्ती में 173 पदों पर आवेदन किया जा सकता है। यह अवसर कानून के क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए उपयुक्त है।

ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 25 फरवरी 2026

अंतिम तिथि: 18 मार्च 2026

आवेदन पोर्टल: bpsc.bihar.gov.in

आवेदन करते समय ध्यान देने योग्य बातें

सभी आवेदन ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन से पहले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन पढ़ें और योग्यता, आयु, शुल्क आदि की जानकारी अवश्य लें। आवेदन के दौरान सही और सत्यापित दस्तावेज़ अपलोड करना अनिवार्य है। आवेदन की अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए समय रहते आवेदन करें।

बिहार में सहायक अभियोजन अधिकारी की बंपर भर्ती, 300 पदों पर सुनहरा अवसर

पटना। बिहार में कानून स्नातकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सहायक अभियोजन अधिकारी (Assistant Prosecution Officer) के 300 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 2026 का ऐलान कर दिया है। यह अवसर उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्होंने एलएलबी की डिग्री पूरी की है और अधिवक्ता पंजीकरण के लिए पात्र हैं।

भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 फरवरी 2026 से शुरू होकर 20 मार्च 2026 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से पहले उम्मीदवारों को नोटिफिकेशन में दी गई सभी शर्तों और दस्तावेज़ों की जानकारी अवश्य पढ़ लेनी चाहिए।

भर्ती का विवरण

पद का नाम: सहायक अभियोजन अधिकारी (अभियोजन पदाधिकारी)

कुल पद: 300

वेतन: वेतन स्तर-9

योग्यता: विधि स्नातक (LLB) और अधिवक्ता पंजीकरण के लिए पात्र। 

आयु सीमा: 01 अगस्त 2026 को 21 से 37 वर्ष (यूआर पुरुष), नियमानुसार छूट लागू।

आवेदन प्रक्रिया

इस भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। उम्मीदवारों को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे और आवेदन शुल्क जमा करना होगा। अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए समय पर आवेदन करना बेहद जरूरी है।

क्यों है यह अवसर खास?

सहायक अभियोजन अधिकारी के पद पर चयनित उम्मीदवार राज्य के विभिन्न अभियोजन कार्यालयों में कार्य करेंगे और न्यायिक मामलों के निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह न केवल सरकारी नौकरी का स्थिर अवसर है, बल्कि कानून क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए अनुभव और प्रतिष्ठा का जरिया भी है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: इन 5 बड़ी मांगों पर टिकी नजरें

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाएँ तेज हो गई हैं। दिल्ली में हाल ही में आयोजित नेशनल काउंसिल जेसीएम (NC-JCM) की बैठक में कर्मचारी संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगों को पेश करने की तैयारी की है। इस बैठक में फिटमेंट फैक्टर, पुरानी पेंशन योजना और अन्य सुविधाओं को लेकर कई मुद्दे उठ सकते हैं।

1. सैलरी में बड़ा उछाल

सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की हो सकती है। वर्तमान में इसे 3.35 करने का प्रस्ताव है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सरकार इसे मान लेती है तो केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा संभव है, जिससे आर्थिक सुरक्षा में सुधार होगा।

2. सालाना इंक्रीमेंट की बढ़ोतरी

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सालाना इंक्रीमेंट की दर को भी 3% से बढ़ाकर 7% किया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को नियमित आय में वृद्धि का लाभ मिलेगा और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

3. फैमिली यूनिट में भी बदलाव

फैमिली यूनिट की मौजूदा संख्या 3 है। कर्मचारी संगठनों ने इसे 5 करने का सुझाव दिया है। यदि यह मान लिया जाता है तो महंगाई के बीच कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी और उनकी बेसिक सैलरी में करीब 66% तक का इजाफा संभव होगा।

4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली

कर्मचारी संगठनों ने डिफेंस और अन्य विभागों में लागू NPS और UPS को हटाकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग रखी है। इससे रिटायर होने वाले कर्मचारियों को स्थायी और सुरक्षित पेंशन की गारंटी मिलेगी।

5. लीव एनकैशमेंट और सीजीएचएस सुविधाएँ

रिटायरमेंट पर लीव एनकैशमेंट को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही, सीजीएचएस की सुविधा ना होने पर फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह करने की अपील भी चार्टर में शामिल है।

इसके अलावा कर्मचारी संगठनों ने प्रमोशन की गारंटी और लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) को कैश में बदलने की मांग भी उठाई है। सुझाव है कि 30 साल की सेवा में कम से कम 5 प्रमोशन गारंटीड दिए जाएं।

सरकार ने कर्मचारियों को दिया तोहफा: 3% बढ़ा महंगाई भत्ता

मुंबई। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के अवसर से पहले राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा तोहफा दिया है। फडणवीस सरकार ने महंगाई भत्ता (Dearness Allowance/DA) में 3% की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने विधानसभा में इस फैसले की जानकारी दी।

डीए बढ़ोतरी का विवरण

सरकार के फैसले के अनुसार, डीए को 3% बढ़ाकर 58% कर दिया गया है और यह वृद्धि जुलाई 2025 से प्रभावी होगी।

नकद भुगतान: संशोधित डीए इस महीने से सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में नकद भुगतान के रूप में मिलेगा।

बकाया भुगतान: जुलाई 2025 से अक्टूबर 2025 तक का बकाया मार्च 2026 में गुड़ी पड़वा के अवसर पर वितरित किया जाएगा। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक का बकाया अलग आदेश के जरिए जारी किया जाएगा।

इन कर्मचारियों को लाभ

इस फैसले से राज्य के लगभग 5.16 लाख कर्मचारियों और लगभग 8.72 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। यह कदम कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए वित्तीय राहत का काम करेगा, खासकर महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत के समय।

कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है?

आपको बता दें की डीए में यह 3% की वृद्धि सीधे कर्मचारियों की आमदनी बढ़ाएगी और उन्हें महंगाई का सामना करने में मदद करेगी। साथ ही, बकाया राशि का एक साथ नकद भुगतान भी कर्मचारियों के लिए उत्सव के समय में आर्थिक राहत देगा।

आज गुरु का असर: इन 5 राशियों पर पड़ेगा विशेष लाभ

राशिफल। आज के दिन ग्रहों की स्थिति में विशेष बदलाव दिखाई दे रहे हैं, जिससे विशेषकर गुरु ग्रह (बृहस्पति) का प्रभाव इन पांच राशियों पर सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार आज इन राशियों के लोगों के जीवन में धन, करियर, शिक्षा और व्यक्तिगत संबंधों में लाभ के योग बन रहे हैं।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक लाभ और नई योजनाओं की सफलता लेकर आएगा। यदि आप निवेश या व्यापार के क्षेत्र में कोई कदम उठाने की सोच रहे हैं, तो आज का समय अनुकूल है। गुरु ग्रह का प्रभाव आपके निर्णय क्षमता को बढ़ाएगा और पुराने बाधित कार्यों में गति आएगी।

2. सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए आज परिवार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभ का दिन है। पारिवारिक मामलों में विवाद कम होंगे और संबंधों में सुधार होगा। कामकाजी क्षेत्रों में गुरु का प्रभाव आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और वरिष्ठ अधिकारियों से सराहना मिलने के योग हैं।

3. धनु राशि

धनु राशि के जातकों को आज शिक्षा और करियर के क्षेत्र में लाभ मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह समय परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता देने वाला है। नौकरीपेशा लोग नए प्रोजेक्ट या जिम्मेदारियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे। गुरु की कृपा से नए अवसर भी सामने आएंगे।

4. मकर राशि

मकर राशि के लिए आज का दिन आर्थिक मामलों में लाभ और व्यवसाय में विस्तार के अवसर लाएगा। यदि आप नया निवेश करने या व्यापार में विस्तार की योजना बना रहे हैं, तो आज निर्णय लेने के लिए अनुकूल दिन है। गुरु का प्रभाव आपको जोखिम भरे फैसले सही तरीके से लेने में मदद करेगा।

5. कुम्भ राशि

कुम्भ राशि के जातकों के लिए आज रिश्तों और सामाजिक संपर्कों में लाभ के योग हैं। मित्रों और सहयोगियों से मदद मिलने की संभावना है। गुरु ग्रह का असर आपके सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाएगा और कठिन कार्यों को भी आसानी से हल करने की क्षमता देगा।

बिहार में इन शिक्षकों की जा सकती है नौकरी, निर्देश जारी

पटना। बिहार में डिप्लोमा आधारित कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्तियों की जांच अब और सख्त हो जाएगी। शिक्षा विभाग के मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने जिले में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की पूरी जानकारी 24 घंटे के अंदर उपलब्ध कराएँ।

क्या है मुख्य आदेश

मुख्यालय ने फॉर्मेट जारी किया है जिसमें शिक्षकों की संख्या, कार्यस्थल और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई सहित विवरण मांगा गया है। साथ ही यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वर्तमान में कितने शिक्षक सेवा में हैं। निर्देशों में चेतावनी भी दी गई है कि समय पर रिपोर्ट न भेजने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

डिप्लोमा आधारित शिक्षकों की स्थिति

पूर्व में भेजी गई सूची के अनुसार राज्य भर में 114 डिप्लोमा आधारित कंप्यूटर शिक्षकों की पहचान की गई थी। बिहार सरकार और शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों के उल्लंघन को सहन नहीं किया जाएगा।

बीपीएससी से बहाल शिक्षकों की भी होगी जांच

होली के बाद बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से बहाल सभी 6,653 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी। जिले में यह प्रक्रिया प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से पूरी की जाएगी। प्रत्येक शिक्षक के सर्टिफिकेट नंबर का विवरण अनिवार्य रूप से लिया जाएगा और इसके आधार पर जांच कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी।

इन शिक्षकों ओर आगे की कार्रवाई क्या हो सकती है?

मुख्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध पाई जाती है, तो संबंधित शिक्षक और अधिकारी दोनों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

8वें वेतन आयोग की चर्चा, यूपी-बिहार में कब होगा एलान

पटना। केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही यूपी, बिहार और अन्य राज्यों में कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने की संभावना है। राज्य अपने आयोग के माध्यम से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लाभान्वित करते हैं, लेकिन इसमें केंद्रीय आयोग की सिफारिशों की बराबरी रखते हुए आर्थिक स्थिरता और बजट संतुलन का ध्यान रखा जाता है।

यूपी और बिहार में वेतन आयोग कब लागू होगा?

केंद्रीय वेतन आयोग लागू होने के बाद ही राज्यों के कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी का लाभ मिल सकता है। यूपी और बिहार जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया अलग-अलग होती है। हर राज्य की आर्थिक स्थिति और बजट क्षमता अलग होने के कारण राज्य अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार स्टेट वेतन आयोग बनाते हैं।

राज्यों की वेतन आयोग प्रक्रिया

राज्य वेतन आयोग की प्रक्रिया केंद्रीय आयोग जैसी ही होती है। इसमें एक चेयरमैन और सदस्य नियुक्त किए जाते हैं, रिपोर्ट तैयार होती है, मंत्रियों का समूह उस पर विचार करता है और अंततः राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेती है। कई राज्यों में फिटमेंट फैक्टर केंद्रीय आयोग के समान होता है, हालांकि कुछ राज्यों में थोड़ा कम या ज्यादा रखा जा सकता है।

असम में तैयारी शुरू

असम सरकार ने हाल ही में आठवां वेतन आयोग 2026 (8th Pay Commission) गठित कर दिया है। इससे राज्य में लाखों सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। वित्त विभाग के आदेश के अनुसार इस आयोग की अगुवाई पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दास करेंगे, जबकि इसमें सात अन्य सदस्य भी शामिल होंगे।

बिहार में LL.B वालों के लिए बंपर वैकेंसी, 18 मार्च तक आवेदन

पटना। बिहार में एलएल.बी. डिग्री धारकों के लिए सुनहरा अवसर: BPSC ने 173 सिविल जज पदों पर भर्तियों का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (Bihar Public Service Commission) द्वारा आयोजित की जा रही है और उम्मीदवार 25 फरवरी 2026 से 18 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पद और योग्यता

इस भर्ती के तहत कुल 173 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पद का नाम सिविल जज (जूनियर डिविजन) है। आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज से LL.B. की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अलावा, उम्मीदवार के पास न्यूनतम 3 साल की लगातार वकालत का अनुभव होना चाहिए।

आयु सीमा

उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 22 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु में छूट की जानकारी के लिए नोटिश देखें।

आवेदन शुल्क: 

बता दें की General/OBC के लिए आवेदन शुल्क 100/- रुपया, जबकि SC/ST के लिए 100/- रुपया निर्धारित किया गया हैं।

आवेदन प्रक्रिया:

आवेदन केवल ऑनलाइन मोड में स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवार बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.inपर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 मार्च 2026 है।

नौकरी का प्रकार

यह पूर्णकालिक (Full-Time) नौकरी है।

बिहार में न्याय व्यवस्था में योगदान देने का यह एक शानदार मौका है। जो लोग LL.B. कर चुके हैं और वकालत का अनुभव रखते हैं, उनके लिए यह भर्ती अपने करियर को नई दिशा देने का अवसर साबित हो सकती है।

कर्मचारी पेंशन योजना: 50 साल से पहले पेंशन लेने के नियम और प्रक्रिया

नई दिल्ली। यदि आप प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे हैं और आपकी सैलरी से EPF कटता है, तो रिटायरमेंट के बाद आपको मासिक पेंशन लेने का अधिकार भी मिलता है। यह पेंशन कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत दी जाती है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। इसके अलावा यह जानना भी आवश्यक है कि कितने साल काम करने पर पेंशन मिलेगी, कब से पेंशन शुरू होगी और बीच में नौकरी बदलने पर क्या नियम लागू होंगे।

EPS पेंशन पाने की न्यूनतम सेवा अवधि

EPS के तहत पेंशन का लाभ पाने के लिए कम से कम 10 साल तक EPF में योगदान देना अनिवार्य है। यदि यह अवधि पूरी नहीं होती, तो आप जमा राशि निकाल सकते हैं, लेकिन पेंशन का हकदार नहीं बनेंगे। पेंशन 58 साल की उम्र से शुरू होती है। यदि कोई कर्मचारी कार्यकाल के दौरान या बाद में निधन हो जाता है, तो यह पेंशन उसके परिवार या नामांकित सदस्य को मिलती है।

रिटायरमेंट के बाद पेंशन की प्रक्रिया

58 साल की उम्र पूरी होने पर पेंशन प्राप्त करने के लिए EPFO में Form 10D भरकर जमा करना होता है। कुछ परिस्थितियों में Form 10C या कंपोजिट क्लेम फॉर्म भी आवश्यक हो सकता है। पेंशन के प्रकार इस प्रकार हैं: सामान्य रिटायरमेंट पेंशन, समय से पहले कम दर वाली पेंशन, विकलांगता पेंशन, परिवार या नॉमिनी पेंशन

50 साल की उम्र में पेंशन लेना

EPS के तहत आप 50 साल की उम्र के बाद पेंशन शुरू कर सकते हैं, लेकिन इसमें कटौती लागू होती है:

55 साल पर शुरू करने पर 12% की कटौती

52 साल पर शुरू करने पर 24% की कटौती

50 साल से कम उम्र में पेंशन नहीं मिलती

इसका मतलब है कि जितनी जल्दी पेंशन ली जाएगी, उतनी अधिक कटौती होगी।

नौकरी बीच में छोड़ने पर स्थिति

यदि आपने 10 साल की सेवा पूरी कर ली है और नौकरी बीच में बदलते हैं, तो नई नौकरी में पेंशन स्कीम सर्टिफिकेट जमा कराना जरूरी है। इससे आपकी पुरानी पेंशन सेवा नई नौकरी में जोड़ दी जाएगी। यदि आप 50 साल से पहले नौकरी छोड़ देते हैं, तो पेंशन केवल 58 साल की उम्र के बाद शुरू होगी।

अमेरिका ने फिर दिया झटका, भारत पर लगाया 126% टैक्स

नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत से सोलर एनर्जी पैनल के आयात पर 126% का शुरुआती शुल्क लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार यह कदम उन देशों के उत्पादकों पर लागू किया गया है जिन्हें अमेरिकी कंपनियों की तुलना में सरकारी मदद मिलने का फायदा हुआ है। इसी तरह इंडोनेशिया के लिए 86% से 143% और लाओस के लिए 81% शुल्क तय किया गया है।

घरेलू उद्योग को बढ़ावा

अमेरिका का कहना है कि यह शुल्क घरेलू सोलर कंपनियों की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है। लेकिन उच्च शुल्क विदेशी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच को कठिन बना सकता है और इस कदम से लागत में वृद्धि की संभावना भी बनती है।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति

नए शुल्क अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में रद्द किए गए बड़े ग्लोबल टैरिफ से अलग हैं। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने 10% का नया टैरिफ भी लागू किया था, जिसे बाद में 15% तक बढ़ाने की संभावना जताई गई है। इसी महीने की शुरुआत में भारत के साथ व्यापार समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करना था।

भारत से सोलर आयात का परिदृश्य

2025 की पहली छमाही में अमेरिका ने कुल सोलर मॉड्यूल इंपोर्ट का 57% हिस्सा भारत, इंडोनेशिया और लाओस से प्राप्त किया। भारत से सोलर आयात का मूल्य 2024 में लगभग 792.6 मिलियन डॉलर रहा, जो 2022 के मुकाबले लगभग 9 गुना अधिक है। इस दौरान कई डेवलपर्स ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से पैनल मंगाना शुरू किया था।

बाजार और कंपनियों पर क्या असर?

विशेषज्ञ बताते हैं की इतनी ऊंची शुल्क दर भारतीय सोलर पैनल कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। वहीं, अमेरिकी सोलर समूह एलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड ने इस कदम के समर्थन में कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना जरूरी है। इस निर्णय से भारत की सोलर इंडस्ट्री को अमेरिकी बाजार में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाली टॉप 5 कंपनियां, लिस्ट में 1 सरकारी भी शामिल

नई दिल्ली। भारत में कॉरपोरेट जगत में कर्मचारियों पर होने वाला खर्च किसी कंपनी की क्षमता, विस्तार और मानव संसाधन पर उसके भरोसे को दर्शाता है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि देश की पांच बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन पर सबसे ज्यादा खर्च करती हैं। खास बात यह है कि इस सूची में चार कंपनियां आईटी सेक्टर से हैं, जबकि एकमात्र सरकारी कंपनी बैंकिंग क्षेत्र की है।

1. Tata Consultancy Services (TCS)

आईटी क्षेत्र की दिग्गज टीसीएस कर्मचारियों के वेतन पर लगभग 1,45,788 करोड़ रुपये खर्च करती है। कंपनी में करीब 5.93 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। टीसीएस वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की अग्रणी कंपनी है और अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों व स्किल डेवलपमेंट पहलों के लिए जानी जाती है। बड़ी कार्यबल और विविधता इसकी खास पहचान है।

2. Infosys

इंफोसिस कर्मचारियों के वेतन पर करीब 85,950 करोड़ रुपये खर्च करती है। कंपनी में 3.30 लाख से अधिक कर्मचारी हैं। डिजिटल सेवाओं और कंसल्टिंग में तेजी से विस्तार कर रही यह कंपनी भारत के आईटी सेक्टर की मजबूत स्तंभ मानी जाती है।

3. State Bank of India (SBI)

टॉप-5 में शामिल एकमात्र गैर-आईटी और सरकारी कंपनी एसबीआई है। यह बैंक कर्मचारियों के वेतन पर लगभग 70,395 करोड़ रुपये खर्च करता है। मार्च 2025 तक बैंक में 2.36 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। मजबूत वेतन ढांचा और उच्च नौकरी सुरक्षा इसे बैंकिंग क्षेत्र का प्रमुख नियोक्ता बनाते हैं।

4. HCL Technologies

एचसीएल टेक्नोलॉजीज वेतन मद में करीब 66,755 करोड़ रुपये खर्च करती है। कंपनी में 2.26 लाख से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। नोएडा मुख्यालय वाली यह कंपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आईटी सेवाओं में तेजी से विस्तार कर रही है।

5. Wipro

विप्रो कर्मचारियों की सैलरी पर लगभग 53,347 करोड़ रुपये खर्च करती है। 2 लाख से अधिक कर्मचारियों वाली यह कंपनी एंट्री-लेवल अवसरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कर्मचारी सुविधाओं के लिए जानी जाती है।

8वें वेतन आयोग: लेवल 1 से 18 तक अलग हो सकता है फिटमेंट फैक्टर?

नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। हर कर्मचारी जानना चाहता है कि नई सिफारिशों के बाद उसकी बेसिक सैलरी कितनी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर की गणना और लागू करने का तरीका पिछली बार से अलग हो सकता है।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

एक प्रकार का 'मल्टीप्लायर' या गुणांक है जिसका उपयोग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मूल वेतन  और पेंशन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। 

इसका सीधा सूत्र है:

संशोधित मूल वेतन = वर्तमान मूल वेतन × फिटमेंट फैक्टर 

2.5 फिटमेंट फैक्टर पर संभावित असर

यदि 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 2.5 का गुणांक लागू किया जाए, तो नई बेसिक सैलरी 45,000 रुपये के आसपास पहुंच सकती है। इसके अलावा एचआरए, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्ते अलग से मिलेंगे, जिससे कुल वेतन और बढ़ेगा।

3.2 फिटमेंट फैक्टर की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठनों के कुछ प्रतिनिधि, जिनमें मंजीत सिंह पटेल भी शामिल हैं, 3.2 फिटमेंट फैक्टर की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वेतन और महंगाई के अंतर को पाटने के लिए यह जरूरी है। अगर 3.2 लागू होता है तो एंट्री लेवल की बेसिक सैलरी करीब 57 से 58 हजार रुपये तक पहुंच सकती है।

क्या सभी लेवल पर एक जैसा फैक्टर?

संभावना जताई जा रही है कि पे मैट्रिक्स के सभी 18 लेवल पर एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू न किया जाए। निचले लेवल (1 से 5) के कर्मचारियों के लिए ज्यादा गुणांक और ऊपरी लेवल के लिए अलग दर तय की जा सकती है, ताकि वेतन अंतर कम हो सके। इससे शुरुआती वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपेक्षाकृत अधिक राहत मिल सकती है।

कर्मचारियों के लिए आगे क्या है उम्मीद ?

अब निगाहें आयोग की आगामी बैठकों पर टिकी हैं। 25 फरवरी को प्रस्तावित बैठक में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों को विस्तार से रख सकते हैं। अंतिम सिफारिशों के बाद ही स्पष्ट होगा कि फिटमेंट फैक्टर कितना तय किया जाता है और कर्मचारियों की सैलरी में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी। फिलहाल इतना तय है कि फिटमेंट फैक्टर ही 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सबसे अहम आधार बनेगा और इसी से लाखों कर्मचारियों की आय में संभावित बदलाव तय होगा।

रोज पिएं नारियल पानी, मिलेंगे 7 जबरदस्त फायदे

हेल्थ डेस्क। तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच लोग अब प्राकृतिक और सेहतमंद विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है नारियल पानी, जिसे प्राकृतिक ऊर्जा पेय भी कहा जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर नारियल पानी रोजाना पीने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं। आइए जानते हैं इसके सात प्रमुख फायदे।

1. शरीर को रखे हाइड्रेट

नारियल पानी में प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को जल्दी पूरा करते हैं। गर्मी या अधिक पसीना आने की स्थिति में यह बेहद फायदेमंद है।

2. पाचन में सुधार

इसमें मौजूद फाइबर और एंजाइम पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं। नियमित सेवन से गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

3. दिल के लिए लाभकारी

नारियल पानी में पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है। इससे हृदय संबंधी जोखिम कम हो सकते हैं।

4. वजन घटाने में सहायक

कम कैलोरी और फैट-फ्री होने के कारण यह वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है। मीठे और गैस वाले पेय पदार्थों की जगह नारियल पानी बेहतर विकल्प हो सकता है।

5. त्वचा को बनाए चमकदार

नारियल पानी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे त्वचा साफ और दमकती हुई नजर आती है।

6. किडनी के लिए फायदेमंद

यह शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता बेहतर रहती है।

7. तुरंत ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत

थकान या कमजोरी महसूस होने पर नारियल पानी तुरंत ऊर्जा देता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा और मिनरल्स शरीर को ताजगी प्रदान करते हैं।

बिहार में बड़ी खुशखबरी! 407 कंप्यूटर शिक्षकों की होगी भर्ती

पटना। बिहार में शिक्षक बहाली की तैयारी एक बार फिर तेज हो गई है। बीपीएससी की शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-4) के तहत राज्य में 45 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें 407 पद कंप्यूटर शिक्षकों के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिससे तकनीकी शिक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आपको बता दें की यह जानकारी विधानसभा में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 8553 कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है और अब नई बहाली से स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को और बढ़ावा मिलेगा।

विज्ञान विषयों को प्राथमिकता

टीआरई-4 के तहत भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषय के शिक्षकों की नियुक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो और छात्रों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार मिल सके।

संतुलित पोस्टिंग पर जोर

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों की तैनाती जिला पदाधिकारी (डीएम) की अध्यक्षता वाली समिति के माध्यम से की जा रही है। जिलों को निर्देश दिए जाएंगे कि छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित रखा जाए, ताकि किसी विद्यालय में शिक्षकों की कमी और कहीं अधिकता जैसी स्थिति न बने।

आपदा शिक्षा और कॉलेज स्तर पर पहल

राज्य के स्कूलों में आपदा प्रबंधन से संबंधित अध्याय पहले से पढ़ाया जा रहा है। कॉलेजों में भी इस विषय को बढ़ावा देने के लिए University Grants Commission (यूजीसी) की गाइडलाइन के अनुरूप आवश्यक सुझाव जारी किए जाएंगे।

सरकार ने दी खुशखबरी, खाद्य तेलों की कीमतें होगी कम

नई दिल्ली। महंगाई से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती करने का फैसला लिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में तेल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है। माना जा रहा है कि 31 मई के बाद खुदरा बाजार में नई दरें लागू हो सकती हैं।

क्या बदला है?

सरकार ने कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। यानी आयात करने वाली कंपनियों को अब पहले की तुलना में कम टैक्स देना होगा। इससे उनकी लागत घटेगी और उसका असर सीधे बाजार भाव पर दिखाई दे सकता है।

उपभोक्ताओं को कितना फायदा?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए आयात शुल्क में कमी का असर सीधा रसोई तक पहुंचता है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतों में प्रति लीटर कुछ रुपये की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि यह गिरावट अलग-अलग ब्रांड और राज्यों में अलग हो सकती है।

किन देशों से आता है तेल?

देश में इस्तेमाल होने वाला पाम ऑयल मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात किया जाता है। वहीं सूरजमुखी तेल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यूक्रेन और रूस से आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सरकारी नीतियों का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ता है।

उद्योग और किसानों की नजर

खाद्य तेल उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस फैसले को सकारात्मक बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे बाजार में स्थिरता आएगी। हालांकि कुछ कृषि जानकारों का मानना है कि सस्ता आयात बढ़ने से घरेलू तिलहन उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा का दबाव झेलना पड़ सकता है।

फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए यह खबर राहत भरी है। यदि वैश्विक बाजार में कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो आने वाले समय में खाने के तेल के दाम संतुलित रहने की संभावना है।

यूपी में नए एक्सप्रेस-वे की तैयारी तेज, इन जिलों को खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ी परियोजना की तैयारी जोरों पर है। गोरखपुर से शामली तक ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। यह परियोजना पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे जोड़ने के उद्देश्य से बनाई जा रही है और इसकी कुल लंबाई लगभग 700 किलोमीटर होगी।

मार्ग और गुजरने वाले जिले

नई एक्सप्रेस-वे गोरखपुर से शुरू होकर बस्ती, अयोध्या, लखनऊ, सीतापुर होते हुए लखीमपुर से पीलीभीत तक जाएगी। इसके बाद बीसलपुर, बरेली के नवाबगंज और बहेड़ी तहसील क्षेत्र से होते हुए रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ होते हुए शामली तक पहुँचेगी।

जमीन की कीमतों पर असर

इस परियोजना के कारण मार्ग में पड़ने वाले गांवों में जमीन की कीमतों में तेजी आई है। लोग इसे निवेश का अवसर मान रहे हैं और कई स्थानों पर जमीन खरीद-बिक्री में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

एनएचएआइ की तैयारी

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने बरेली, पीलीभीत और लखीमपुर जिलों के प्रशासन को पत्र भेजकर सुझाव दिया है कि चयनित ग्रामों में भू-परिवर्तन करते समय सतर्कता बरतें। इससे परियोजना निर्माण में कोई अवरोध न आए और स्थानीय लोगों के हितों का ध्यान रखा जा सके।

परियोजना का महत्व

इस एक्सप्रेस-वे के बनने से उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच यात्रा और माल परिवहन का समय काफी घट जाएगा। इसके साथ ही व्यापार, उद्योग और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सड़क परियोजना राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में अहम योगदान देगी।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को 10 लाख तक मदद!

न्यूज डेस्क। केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। अब केंद्र सरकार के कर्मचारी सीजीएचएस (सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। यह राशि पहले 5 लाख रुपये तक थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है।

बदलाव की मुख्य बातें

पहले विभाग प्रमुखों के पास पांच लाख रुपये तक के इलाज की स्वीकृति देने का अधिकार था। लगभग दस साल बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है। यह कदम कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने और उन्हें महंगे इलाज में राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

नए आदेश के अनुसार, यदि इलाज का खर्च 10 लाख रुपये से अधिक हो, तो केंद्र की ओर से नामित अधिकारी से विशेष अनुमति लेनी पड़ेगी। यह व्यवस्था कर्मचारियों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अलग नियम

आल इंडिया ऑडिट अकाउंट्स पेंशनर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष चंद्र पांडेय ने बताया कि यह सुविधा केवल वर्तमान कर्मचारियों के लिए है। पेंशनभोगियों के लिए अभी कोई नया निर्देश नहीं जारी किया गया है।

इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी और उन्हें इलाज के खर्च के बोझ से राहत मिलेगी। जानकारों का मानना है कि यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा सुधार है और कर्मचारियों की जीवनशैली और मानसिक संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।