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LPG सिलेंडर को लेकर 5 बड़ी खबर, 1 जून से देशभर में लागू

नई दिल्ली। देश में एलपीजी (LPG) और पीएनजी (PNG) गैस उपभोक्ताओं को लेकर सरकार और तेल कंपनियां नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य गैस की आपूर्ति को बेहतर बनाना, दुरुपयोग रोकना और घरेलू उपभोक्ताओं तक सुविधाओं को अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाना है। ऐसे में 1 जून से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलाव चर्चा में हैं, जिनकी जानकारी हर गैस उपभोक्ता के लिए जरूरी है।

1. देश में LPG उपभोक्ताओं की संख्या 33.5 करोड़ के पार

पिछले एक दशक में देश में एलपीजी कनेक्शनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में देश में करीब 33.5 करोड़ LPG उपभोक्ता हैं। वहीं दूसरी ओर PNG उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1.64 करोड़ है। सरकार चाहती है कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां अधिक से अधिक लोग PNG का उपयोग करें ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके।

2. PNG कनेक्शन लेने के बाद LPG पर बढ़ी निगरानी

रिपोर्ट्स के अनुसार मार्च 2026 तक करीब 6.5 लाख नए PNG कनेक्शन जारी किए गए, लेकिन वास्तविक गैस खपत अपेक्षा से कम रही। इससे संकेत मिलता है कि कई परिवारों ने PNG कनेक्शन तो ले लिया, लेकिन LPG सिलेंडर का उपयोग जारी रखा हुआ है। इसी कारण अब दोनों कनेक्शनों के उपयोग पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।

3. एक परिवार-एक गैस कनेक्शन व्यवस्था पर जोर

तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ऐसे उपभोक्ताओं का डेटा मिलान कर रही हैं जिनके एक ही पते पर PNG और LPG दोनों कनेक्शन मौजूद हैं। इसका उद्देश्य घरेलू गैस की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनावश्यक सब्सिडी लाभ को रोकना है। जिन क्षेत्रों में PNG नेटवर्क पूरी तरह उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को निर्धारित नियमों का पालन करना पड़ सकता है।

4. LPG रिफिल बुकिंग के बीच बढ़ सकता है अंतराल

गैस की उपलब्धता को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने के लिए रिफिल बुकिंग अवधि में बदलाव की चर्चा है। शहरी क्षेत्रों में रिफिल बुकिंग का अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया जा सकता है  .ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन तक रखी जा सकती है। इसका उद्देश्य घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग को रोकना और वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक समय पर गैस पहुंचाना है।

5. सब्सिडी वाले सिलेंडरों की सीमा बरकरार

सरकारी व्यवस्था के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं को अभी भी एक वर्ष में 12 रियायती LPG सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद लिए जाने वाले अतिरिक्त सिलेंडरों के लिए बाजार मूल्य के अनुसार भुगतान करना होगा। साथ ही नए गैस कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा जमा, रेगुलेटर, पाइप और इंस्टॉलेशन शुल्क से जुड़े नियम भी लागू रहेंगे।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, 1 जून से होगा लागू

नई दिल्ली। देश के वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने कपास के आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क को अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है, जिससे उद्योग जगत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह व्यवस्था 1 जून 2026 से लागू होगी और 30 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य घरेलू वस्त्र उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना और उत्पादन लागत को नियंत्रित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निर्यात क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

कपड़ा उद्योग को मिलेगी बड़ी राहत

कपास वस्त्र उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है। जब इसकी कीमत बढ़ती है तो उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर कपड़ों और अन्य उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है। आयात शुल्क हटने के बाद कंपनियां विदेशों से कम लागत पर कपास खरीद सकेंगी, जिससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक किफायती बन सकेगी। विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों को इस फैसले से काफी फायदा होने की संभावना है।

बाजार में बढ़ेगी कपास की उपलब्धता

पिछले कुछ समय से कपास की उपलब्धता और कीमतों को लेकर उद्योग जगत में चिंता बनी हुई थी। सरकार का मानना है कि आयात शुल्क में छूट मिलने से बाजार में कपास की आपूर्ति बढ़ेगी और उद्योगों को आवश्यक मात्रा में कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा। कपास की पर्याप्त उपलब्धता से उत्पादन प्रभावित नहीं होगा और वस्त्र निर्माण से जुड़ी इकाइयों को अपनी क्षमता के अनुसार काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उत्पादन में स्थिरता आने की उम्मीद है।

उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है लाभ

जब उद्योगों की लागत कम होती है तो उसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है। यदि कपड़ा निर्माताओं की लागत घटती है तो आने वाले समय में कपड़ों और परिधान उत्पादों की कीमतों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि कीमतों में कमी बाजार की परिस्थितियों और मांग-आपूर्ति पर भी निर्भर करेगी।

किसानों के हितों का भी रखा गया ध्यान

सरकार ने इस निर्णय को सीमित अवधि के लिए लागू किया है ताकि घरेलू किसानों के हित प्रभावित न हों। नई कपास फसल के बाजार में आने से पहले तक ही यह छूट जारी रहेगी। इससे उद्योगों को तत्काल राहत मिलेगी, वहीं किसानों को अपनी नई फसल बेचते समय उचित मूल्य मिलने की संभावना भी बनी रहेगी।

बिहारवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी! राज्य में लगेंगी 19 नई फैक्ट्रियां

पटना। बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 19 नई औद्योगिक इकाइयों को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता साफ हो गया है। इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

928 करोड़ रुपये से अधिक का होगा निवेश

राज्य में प्रस्तावित नई औद्योगिक परियोजनाओं के जरिए करीब 928 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। इस निवेश से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, स्थानीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। अनुमान है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2200 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकेगा।

दरभंगा में बनेगी आधुनिक मखाना प्रोसेसिंग यूनिट

मिथिलांचल की पहचान माने जाने वाले मखाना उद्योग को भी इस योजना से नई ताकत मिलने वाली है। दरभंगा में एक आधुनिक मखाना प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जहां मखाने की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन का काम किया जाएगा। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी और मखाना उद्योग को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

नई फैक्ट्रियों से युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर

राज्य में नई फैक्ट्रियों के स्थापित होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है। उत्पादन इकाइयों में तकनीकी, प्रशासनिक और श्रमिक स्तर पर विभिन्न प्रकार की नौकरियों का सृजन होगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

बिहार में कई बड़ी कंपनियां करेंगी निवेश, परियोजनाओं को मंजूरी

बिहार में निवेश के लिए जिन कंपनियों की परियोजनाओं को मंजूरी मिली, उनमें 

ग्रीन एक्सेल प्राइवेट लिमिटेड, 

सोमायन रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड, 

बजरंगबली पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड, 

बीकेएसएस एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, 

अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड (बांका सीमेंट वर्क्स यूनिट), 

अशर्फी देवी कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड और टॉप टेन एंटरप्राइजेज सहित कई अन्य कंपनियां शामिल हैं।

1 जून को बनेगा 'लक्ष्मी नारायण योग', 5 राशियों पर बरसेगी धन-दौलत और सुख-समृद्धि

राशिफल। ज्योतिष में ग्रहों की युति का विशेष महत्व माना जाता है। जब शुभ ग्रह एक साथ किसी राशि में आते हैं तो कई सकारात्मक योगों का निर्माण होता है, जो विभिन्न राशियों के जातकों के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। 1 जून 2026 को मिथुन राशि में बुध और शुक्र ग्रह की युति होने जा रही है। ज्योतिष शास्त्र में इस संयोग को लक्ष्मी नारायण योग के रूप में देखा जाता है, जिसे धन, वैभव, सुख-सुविधाओं और उन्नति का कारक माना जाता है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि में ही यह योग बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को इसका सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ होने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ने की संभावना भी बन रही है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए लक्ष्मी नारायण योग लाभकारी साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों का सहयोग मिलेगा, जबकि व्यवसायियों को नए सौदे और लाभ मिलने के योग बन रहे हैं।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए यह योग भाग्य का साथ दिलाने वाला माना जा रहा है। आर्थिक मामलों में सुधार देखने को मिल सकता है। निवेश से लाभ मिलने की संभावना है और पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ सकती हैं। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए यह योग करियर और व्यवसाय के क्षेत्र में शुभ संकेत दे रहा है। नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल माना जा सकता है। आर्थिक लाभ के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होने की संभावना है। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों को इस योग के प्रभाव से रचनात्मक कार्यों और व्यवसाय में सफलता मिल सकती है। धन लाभ के अवसर बढ़ेंगे और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। निवेश और नई योजनाओं में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। प्रेम संबंधों और वैवाहिक जीवन में भी मधुरता बढ़ सकती है।

पेंशनर्स की लग सकती है लॉटरी! 8वें वेतन आयोग से मिल सकते हैं 7 बड़े फायदे

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी समय लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लागू होने पर लाखों पेंशनर्स को कई बड़े लाभ मिल सकते हैं। इससे न केवल मासिक पेंशन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि अन्य वित्तीय सुविधाओं में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

1. मासिक पेंशन में बड़ा इजाफा

8वें वेतन आयोग का सबसे बड़ा फायदा पेंशन राशि में संभावित बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है। फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि होने पर पेंशनर्स की मासिक आय में अच्छा खासा इजाफा हो सकता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

2. महंगाई से मिलेगी राहत

बढ़ती महंगाई के बीच वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियमित आय बेहद महत्वपूर्ण होती है। नई वेतन संरचना लागू होने के बाद पेंशन में वृद्धि से रोजमर्रा के खर्चों को संभालना आसान हो सकता है और महंगाई का असर कुछ हद तक कम होगा।

3. फैमिली पेंशन में भी बढ़ोतरी

यदि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो पारिवारिक पेंशन पाने वाले लाभार्थियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। इससे पेंशनर्स के आश्रित परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

4. एरियर मिलने की संभावना

जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है और उसकी सिफारिशें पिछली तारीख से प्रभावी की जाती हैं, तब कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर का लाभ मिलता है। ऐसे में पेंशनभोगियों को एकमुश्त राशि मिलने की उम्मीद भी बन सकती है।

5. न्यूनतम पेंशन में सुधार

विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था के तहत न्यूनतम पेंशन की सीमा बढ़ाई जा सकती है। इससे कम पेंशन पाने वाले लाखों वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक राहत मिलने की संभावना है।

6. आर्थिक सुरक्षा होगी मजबूत

पेंशन में बढ़ोतरी का सीधा असर वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा पर पड़ता है। स्वास्थ्य, दवा, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में आसानी होती है, जिससे जीवन स्तर बेहतर बन सकता है।

7. उपभोग क्षमता बढ़ने से अर्थव्यवस्था को भी लाभ

पेंशनर्स की आय बढ़ने पर उनकी खरीदारी क्षमता में भी वृद्धि होती है। इससे बाजार में मांग बढ़ सकती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक समर्थन मिल सकता है।

सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें

फिलहाल लाखों पेंशनर्स की नजरें केंद्र सरकार के आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं। यदि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें उम्मीदों के अनुरूप लागू होती हैं, तो यह पेंशनभोगियों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं होगी। हालांकि अंतिम लाभ आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर ही निर्भर करेगा।

बिहार वालों की हुई बल्ले-बल्ले! अब कम पैसों में शुरू करें अपना बिजनेस

पटना। बिहार में अपना कारोबार शुरू करने का सपना देख रहे युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्यमियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लाने की तैयारी कर रही है। इस पहल का उद्देश्य कम पूंजी वाले कारोबारियों को आर्थिक सहायता, तकनीकी सहयोग और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

छोटे उद्यमियों को मिलेगा बड़ा सहारा

बिहार में लाखों लोग छोटे स्तर पर उद्योग और व्यवसाय चला रहे हैं। इनमें खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प, वस्त्र निर्माण और अन्य घरेलू उद्योग प्रमुख हैं। नई MSME नीति लागू होने के बाद ऐसे उद्यमियों को कारोबार बढ़ाने के लिए अधिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इस नीति के जरिए सरकार उन लोगों को भी प्रोत्साहित करना चाहती है जो कम निवेश के साथ अपना नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को फायदा मिल सकता है।

आसान लोन और वित्तीय सहायता पर फोकस

कई छोटे उद्योग पूंजी की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते। नई नीति में इस समस्या को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्यमियों को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने, वित्तीय सहायता देने और कारोबार विस्तार के लिए प्रोत्साहन देने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा तकनीकी सुधार और आधुनिक मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं, जिससे छोटे उद्योगों की उत्पादकता बढ़ेगी।

इन क्षेत्रों को मिल सकता है सबसे ज्यादा लाभ

नई नीति का फायदा कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। इनमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, आटा और सत्तू उत्पादन, मसाला निर्माण, बेकरी, पशु आहार, डेयरी, वस्त्र उद्योग, हस्तकरघा, हस्तशिल्प, रेडिमेड कपड़ा निर्माण, फर्नीचर उद्योग, खिलौना निर्माण और सेवा क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कम लागत से व्यवसाय शुरू किया जा सकता है, इसलिए सरकार इन्हें विशेष प्रोत्साहन देने की तैयारी में है।

रविवार को सूर्यदेव बदलेंगे 5 राशियों की तकदीर, हर तरफ से आएंगी खुशखबरी

राशिफल। ज्योतिष में सूर्यदेव को आत्मबल, सफलता, नेतृत्व, मान-सम्मान और ऊर्जा का कारक माना जाता है। जब सूर्य की स्थिति अनुकूल होती है तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। आने वाला रविवार कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ संकेत लेकर आ रहा है। माना जा रहा है कि सूर्यदेव की कृपा से इन राशियों के लोगों को करियर, धन, परिवार और सामाजिक जीवन में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्यदेव हैं, इसलिए यह दिन आपके लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और व्यापारियों को नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए रविवार उत्साह और सफलता लेकर आ सकता है। करियर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं और किसी पुराने निवेश से लाभ प्राप्त हो सकता है। मित्रों और परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा।

धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह दिन भाग्य का साथ दिलाने वाला साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में लाभ पहुंचा सकती है। छात्रों को पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए रविवार कई नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी और व्यवसाय में प्रगति के संकेत हैं। आर्थिक मामलों में स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी।

मीन राशि

मीन राशि के जातकों को रविवार को शुभ समाचार मिलने की संभावना है। धन लाभ के नए रास्ते खुल सकते हैं और कार्यों में सफलता मिलने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा। मानसिक तनाव कम होगा और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होगा।

बिहार में शिक्षकों को बड़ा मौका, 1 जून से फिर शुरू होगी ट्रेनिंग

पटना। बिहार के शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। ऐसे शिक्षक जो पिछले शैक्षणिक सत्र में विभिन्न कारणों से प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे, उन्हें अब दोबारा मौका मिलने जा रहा है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने प्रशिक्षण से वंचित शिक्षकों के लिए विशेष व्यवस्था करते हुए उन्हें आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।

प्रशिक्षण से छूटे शिक्षकों को मिलेगा लाभ

पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान कई शिक्षक सरकारी जिम्मेदारियों, प्रशासनिक कार्यों या व्यक्तिगत कारणों के चलते प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर सके थे। ऐसे शिक्षकों की संख्या काफी अधिक थी, जिसके कारण शिक्षा विभाग ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया। अब इन सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण पूरा करने का अवसर दिया जाएगा ताकि उनकी पेशेवर दक्षता और शिक्षण कौशल में सुधार हो सके।

1 जून से शुरू होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रशिक्षण से वंचित शिक्षक 1 जून 2026 से अपने निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों पर पहुंचकर कार्यक्रम में भाग ले सकेंगे। यह पहल उन शिक्षकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी जो पूर्व में किसी कारणवश प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाए थे।

प्रशिक्षण संस्थानों को दिए गए निर्देश

एससीईआरटी ने जिला स्तर के अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी कर प्रशिक्षण कार्यक्रम की सभी तैयारियां समय पर पूरी करने को कहा है। संस्थानों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रशिक्षण का संचालन व्यवस्थित और बिना किसी रुकावट के हो। इसके लिए आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण सामग्री और अन्य व्यवस्थाएं पहले से उपलब्ध कराई जाएंगी।

शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर जोर

नई शिक्षा नीतियों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण बेहद जरूरी माना जाता है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को नई तकनीकों, नवाचारों और बेहतर शिक्षण विधियों की जानकारी मिलती है, जिससे छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होती है।

शिक्षकों में खुशी का माहौल

शिक्षा विभाग के इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है जो मजबूरी में प्रशिक्षण से दूर रह गए थे। अब उन्हें न केवल प्रशिक्षण पूरा करने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे अपने पेशेवर विकास को भी नई दिशा दे सकेंगे। माना जा रहा है कि इस पहल से राज्य के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

12वीं पास युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! यूपी में निकली बंपर भर्ती

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे 12वीं पास युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने हवलदार इंस्ट्रक्टर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 209 पदों को भरा जाएगा। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार निर्धारित तिथि के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

भर्ती से जुड़ी मुख्य जानकारी

पद का नाम: हवलदार इंस्ट्रक्टर

कुल पद: 209 पद।

योग्यता: मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास। 

आवेदन शुरू: 19 जून 2026

आवेदन की अंतिम तिथि: 09 जुलाई 2026

कौन कर सकता है आवेदन?

इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 (इंटरमीडिएट) उत्तीर्ण होना आवश्यक है। आयोग द्वारा जारी विस्तृत विज्ञापन में आयु सीमा, आरक्षण और अन्य पात्रता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसलिए अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना चाहिए।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

उम्मीदवार आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन के दौरान आवश्यक दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करने होंगे। आवेदन पत्र जमा करने से पहले सभी जानकारियों की जांच करना जरूरी होगा ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रहे।

LPG उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर, e-KYC कराएं वरना रुकेगी सब्सिडी

पटना। बिहार के लाखों एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। तेल कंपनियों ने गैस उपभोक्ताओं से जल्द से जल्द ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर ई-केवाईसी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को भविष्य में गैस सब्सिडी प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

जून तक मिला है मौका

जानकारी के अनुसार, उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी कराने के लिए जून तक का समय दिया गया है। इसके बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर सब्सिडी से जुड़ी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। बिहार में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्होंने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है। यही कारण है कि तेल कंपनियां लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं।

क्यों जरूरी है e-KYC?

सरकार और तेल कंपनियों का उद्देश्य एलपीजी वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है। ई-केवाईसी के जरिए वास्तविक उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित की जा रही है, जिससे फर्जी कनेक्शनों और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। इससे सब्सिडी का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

कैसे कराएं e-KYC?

उपभोक्ता अपने नजदीकी गैस एजेंसी पर जाकर आधार कार्ड और उपभोक्ता संख्या के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके अलावा कई कंपनियों ने मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी यह सुविधा उपलब्ध कराई है। इससे उपभोक्ता घर बैठे भी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

गैस उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह

हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों से गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे में अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे समय रहते अपनी ई-केवाईसी पूरी कर लें, ताकि भविष्य में सब्सिडी या अन्य सेवाओं से जुड़ी किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

तेल कंपनियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें और केवल अधिकृत गैस एजेंसी या कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी प्राप्त करें। समय पर ई-केवाईसी कराने से उपभोक्ता बिना किसी बाधा के एलपीजी सेवाओं और सब्सिडी का लाभ लेते रह सकेंगे।

बिहार के 12वीं पास युवाओं की बल्ले-बल्ले! आई बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने हवलदार इंस्ट्रक्टर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 122 रिक्त पदों को भरा जाएगा। ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली है और सरकारी सेवा में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक शानदार अवसर माना जा रहा है।

किन पदों पर होगी भर्ती?

यह भर्ती बिहार गृह रक्षा वाहिनी सेवा संवर्ग के अंतर्गत अधिनायक अनुदेशक (हवलदार इंस्ट्रक्टर) के पदों के लिए निकाली गई है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति गृह विभाग (विशेष शाखा) के अधीन की जाएगी। पदों का वेतनमान बिहार सरकार के पे मैट्रिक्स के लेवल-4 के अनुसार निर्धारित किया गया है।

आवेदन प्रक्रिया जारी

इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू हो चुकी है और 1 जून 2026 तक जारी रहेगी। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा कर लें।

क्या है योग्यता?

इस भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना आवश्यक है। विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है।

कैसे होगा चयन?

उम्मीदवारों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में लिखित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित होगी, जो 100 अंकों की होगी। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए बुलाया जाएगा। शारीरिक दक्षता परीक्षा भी 100 अंकों की होगी।

किसानों की चिंताओं के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। देश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े संगठनों की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद केंद्र सरकार ने गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के मसौदे को वापस लेने का निर्णय लिया है। सरकार का यह कदम किसानों की आशंकाओं और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से गन्ना उत्पादक राज्यों के लाखों किसानों को फिलहाल राहत मिलेगी।

क्यों वापस लिया गया मसौदा?

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में गन्ना नियंत्रण से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए एक नया मसौदा जारी किया था। इस मसौदे पर राज्य सरकारों, किसान संगठनों, चीनी मिलों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं। समीक्षा के दौरान सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए, जिनमें किसानों और उद्योग जगत ने कुछ प्रावधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। इन्हीं प्रतिक्रियाओं को देखते हुए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने मसौदे को फिलहाल वापस लेने और दोबारा विस्तृत समीक्षा करने का फैसला किया है।

किसानों की क्या थी चिंता?

गन्ना किसानों के बीच सबसे बड़ी चिंता उनके गन्ने के मूल्य और भुगतान व्यवस्था को लेकर थी। किसान संगठनों को आशंका थी कि प्रस्तावित बदलावों का असर भविष्य में किसानों के आर्थिक हितों पर पड़ सकता है। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में इस मसौदे को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। किसानों का मानना था कि किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले उनके हितों और मौजूदा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का गहन अध्ययन होना चाहिए।

गुड़ और खांडसारी उद्योग ने भी जताई आपत्ति

केवल किसान ही नहीं, बल्कि गुड़ और खांडसारी उद्योग से जुड़े लोगों ने भी मसौदे के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। उद्योग जगत का कहना था कि नए नियमों से उनकी कार्यप्रणाली और लागत पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार पर व्यापक विचार-विमर्श की मांग बढ़ने लगी थी।

अब आगे क्या होगा?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद जरूरत पड़ने पर एक संशोधित और अधिक संतुलित मसौदा तैयार किया जा सकता है। समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान में लागू गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 ही प्रभावी रहेगा।

Ank Jyotish: इस मूलांक के लोग होते हैं सबसे स्मार्ट, हर क्षेत्र में दिखाते हैं कमाल

Ank Jyotish: अंक ज्योतिष में व्यक्ति की जन्मतिथि के आधार पर उसके स्वभाव, व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें बताई जाती हैं। माना जाता है कि हर मूलांक का अपना विशेष प्रभाव होता है, जो व्यक्ति की सोच, व्यवहार और सफलता को प्रभावित करता है। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 5 के जातक सबसे स्मार्ट और तेज बुद्धि वाले माने जाते हैं। इन पर बुध ग्रह का प्रभाव रहता है, जिसके कारण इनमें अद्भुत समझदारी और निर्णय लेने की क्षमता देखने को मिलती है।

कैसे निकालें मूलांक?

किसी भी महीने की 5, 14 या 23 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 5 होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म 14 तारीख को हुआ है तो 1+4 = 5 होगा। इसी प्रकार 23 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक भी 5 माना जाता है।

तेज दिमाग और शानदार संवाद क्षमता

मूलांक 5 के लोग अपनी बुद्धिमत्ता और हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते हैं। ये किसी भी परिस्थिति को जल्दी समझ लेते हैं और उसका समाधान निकालने में माहिर होते हैं। इनकी संवाद शैली इतनी प्रभावशाली होती है कि लोग आसानी से इनकी बातों से प्रभावित हो जाते हैं।

हर क्षेत्र में हासिल करते हैं सफलता

अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 5 के जातक शिक्षा, व्यापार, मीडिया, मार्केटिंग, राजनीति और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। नई चीजें सीखने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता इन्हें दूसरों से अलग बनाती है।

जोखिम उठाने से नहीं घबराते

इस मूलांक के लोग साहसी और आत्मविश्वासी होते हैं। ये नए अवसरों को पहचानने और उनका लाभ उठाने में आगे रहते हैं। यही गुण इन्हें करियर और व्यवसाय में तेजी से आगे बढ़ने में मदद करता है।

सामाजिक जीवन में लोकप्रिय

मूलांक 5 के लोग मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव के होते हैं। इनके मित्रों और परिचितों का दायरा बड़ा होता है। अपनी सकारात्मक सोच और व्यवहार के कारण ये समाज में एक अलग पहचान बनाने में सफल रहते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

हालांकि मूलांक 5 के लोग बेहद बुद्धिमान होते हैं, लेकिन कभी-कभी जल्दबाजी में निर्णय लेने की आदत इन्हें नुकसान भी पहुंचा सकती है। इसलिए महत्वपूर्ण मामलों में धैर्य और सोच-समझकर फैसला लेना इनके लिए लाभदायक माना जाता है।

कमल की तरह खिलेंगे भाग्य! जून में 5 राशियों को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी

राशिफल। जून 2026 का महीना कई राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दौरान कुछ प्रमुख ग्रहों की स्थिति ऐसी रहेगी, जिससे कई लोगों को करियर, व्यापार, धन और पारिवारिक जीवन में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है। विशेष रूप से 5 राशियां ऐसी हैं, जिनके लिए जून का महीना अवसरों और उपलब्धियों से भरा हुआ माना जा रहा है।

मेष राशि

जून का महीना मेष राशि वालों के लिए नई शुरुआत का समय साबित हो सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है, जबकि व्यापारियों को नए ग्राहकों और नए प्रोजेक्ट्स का लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह महीना धन लाभ और उन्नति के अवसर लेकर आ सकता है। निवेश से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिलने के योग बन रहे हैं। व्यापार करने वालों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए जून सफलता और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला महीना हो सकता है। करियर में आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे और लंबे समय से चली आ रही परेशानियां धीरे-धीरे दूर हो सकती हैं। आर्थिक मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए जून का महीना कई शुभ संकेत लेकर आ रहा है। नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि जैसी खुशखबरी मिल सकती है। व्यवसाय से जुड़े लोगों को नए सौदे और साझेदारी का लाभ मिल सकता है। आर्थिक रूप से यह समय पहले की तुलना में अधिक मजबूत साबित हो सकता है।

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए जून का महीना भाग्य का पूरा साथ लेकर आ सकता है। करियर में प्रगति के नए रास्ते खुल सकते हैं और नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं। धन लाभ के अच्छे संकेत हैं और रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

IMD का बड़ा अलर्ट: 13 राज्यों में आंधी-पानी का खतरा, 100 की रफ्तार से आएगा तूफान

नई दिल्ली। देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे लोगों को राहत मिलने लगी है, लेकिन इसके साथ ही मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए आंधी, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। आगामी दिनों में उत्तर, मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है।

लू से राहत, लेकिन मौसम रहेगा चुनौतीपूर्ण

हाल के दिनों में तापमान में गिरावट और बदलते मौसम के कारण कई राज्यों में लू का प्रभाव कमजोर पड़ा है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राहत के साथ-साथ लोगों को तेज आंधी, बिजली गिरने और भारी बारिश जैसी परिस्थितियों के लिए भी तैयार रहना होगा। कई क्षेत्रों में तेज गति से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

उत्तर भारत में बारिश और आंधी का असर

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर धूल भरी आंधी चल सकती है, जबकि पहाड़ी इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका भी बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहने की सलाह दी है।

बिहार और झारखंड में भी बदलेगा मौसम

बिहार और झारखंड के कई जिलों में बारिश के साथ तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार कुछ इलाकों में भारी बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। किसानों और यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भारी बारिश की संभावना

आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी गतिविधियां तेज हो सकती हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी बादल छाए रहने, गरज-चमक और भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इससे कुछ क्षेत्रों में जलभराव और यातायात संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।

मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचना चाहिए।

बिहार को रेलवे की बड़ी सौगात, 3 नई रेल लाइनें बदलेंगी तस्वीर

पटना। बिहार में रेलवे नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रेल मंत्रालय ने राज्य की तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिससे आने वाले वर्षों में लाखों लोगों को बेहतर यात्रा सुविधाएं मिल सकेंगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहरों और ग्रामीण इलाकों के बीच संपर्क मजबूत होगा, वहीं पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

राज्य के कई जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

नई रेल परियोजनाओं का उद्देश्य उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ना है, जहां लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग की जा रही थी। प्रस्तावित रेल लाइनों के जरिए नालंदा, नवादा, गया, बोधगया, बिहारशरीफ और जहानाबाद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच आवागमन पहले से अधिक आसान हो जाएगा।

1 .पावापुरी-नवादा रेल लाइन से बढ़ेगा पर्यटन

पावापुरी और नवादा को जोड़ने वाली नई रेल लाइन क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभा सकती है। पावापुरी जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। रेल संपर्क बेहतर होने से पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय कारोबारियों और छोटे व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा।

2 .नालंदा से बोधगया तक सफर होगा आसान

इस्लामपुर-बोधगया रेल परियोजना को सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में माना जा रहा है। इसके जरिए ऐतिहासिक नालंदा क्षेत्र और विश्व प्रसिद्ध बोधगया के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित हो सकेगा। इससे देशी और विदेशी पर्यटकों को यात्रा में सुविधा मिलेगी तथा पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी।

3 .बिहारशरीफ और जहानाबाद के बीच मजबूत होगा संपर्क

बिहारशरीफ-जहानाबाद रेल लाइन के निर्माण से दोनों क्षेत्रों के बीच यात्रा का समय कम होगा। यह परियोजना ग्रामीण इलाकों को भी बेहतर रेल सुविधा प्रदान करेगी, जिससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए आने-जाने में आसानी होगी।

यूपी को पूरब से पश्चिम तक जोड़ेगा एक्सप्रेस-वे, 22 जिलों को खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य के पश्चिमी छोर शामली से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम तेजी पकड़ रहा है। लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे प्रदेश के 22 जिलों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

यात्रा होगी आसान, विकास को मिलेगा नया रास्ता

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे बनने के बाद पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगा। वर्तमान में जिन यात्राओं में कई घंटे लगते हैं, वे काफी कम समय में पूरी हो सकेंगी। इससे व्यापार, उद्योग, कृषि और पर्यटन को भी नई गति मिलने की संभावना है।

एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू

एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए विभिन्न जिलों में जमीन चिन्हित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। कई गांवों में खेतों के बीच सीमेंट के पोल लगाकर प्रस्तावित मार्ग की सीमा तय की जा रही है। प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके। इसी उद्देश्य से कुछ क्षेत्रों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर अस्थायी रोक भी लगाई गई है।

150 मीटर चौड़ा होगा हाई-स्पीड कॉरिडोर

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की चौड़ाई लगभग 150 मीटर रखी गई है। यह आधुनिक सुविधाओं से लैस हाई-स्पीड सड़क होगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और आरामदायक बन सकेगी। परियोजना का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देखरेख में किया जाएगा।

यूपी के 22 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 22 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ते हुए प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और संभल जिलों से गुजरते हुए यह मार्ग मध्य यूपी के रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ और बाराबंकी तक पहुंचेगा। इसके बाद पूर्वांचल के बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बस्ती, संतकबीरनगर और गोरखपुर को भी सीधे जोड़ेगा।

प्रदेश के विकास में मील का पत्थर

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच आर्थिक और सामाजिक संपर्क मजबूत होगा तथा विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को बेहतर कनेक्टिविटी और तेज आर्थिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

बिहार सरकार का नया फरमान, जमीन मालिकों के लिए 3 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनका सीधा लाभ लाखों जमीन मालिकों, रैयतों और किसानों को मिलने वाला है।

1.ऑनलाइन मिलेंगे जमीन के दस्तावेज

राज्य सरकार ने भूमि संबंधी दस्तावेजों को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि दस्तावेजों की ऑफलाइन प्रतियां जारी नहीं की जाएंगी। इस व्यवस्था से लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और घर बैठे जरूरी दस्तावेज प्राप्त किए जा सकेंगे।

2. भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों पर लगेगी लगाम

भूमि संबंधी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। परिमार्जन, दाखिल-खारिज, भू-लगान और भूमि मापी जैसे मामलों में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए ऑनलाइन प्रणाली को और मजबूत किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे अनियमितताओं की निगरानी आसान होगी। 

3. लंबित दाखिल-खारिज मामलों का होगा तेजी से निपटारा

जमीन मालिकों के लिए तीसरी बड़ी राहत लंबित मामलों के समाधान को लेकर है। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दाखिल-खारिज और अन्य भूमि संबंधी लंबित आवेदनों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। बताया गया है कि राज्य में बड़ी संख्या में आवेदन विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़े हुए हैं। अब इन मामलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि लोगों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े और भूमि संबंधी सेवाएं समय पर मिल सकें।

जमीन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम

दरअसल, बिहार में भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और प्रक्रियाओं का ऑनलाइन होना राज्य में भूमि प्रशासन को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाएगा। इससे जमीन मालिकों को सुविधा मिलेगी, सरकारी कामकाज में तेजी आएगी और विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी।

रविवार को बनेंगे 3 शक्तिशाली योग: 4 राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के नए रास्ते

राशिफल। ज्योतिष के अनुसार कल रविवार कई राशियों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। इस दिन आकाश में एक साथ तीन प्रभावशाली योगों का निर्माण हो रहा है, जिनका असर लोगों के जीवन, करियर, धन और पारिवारिक सुख पर देखने को मिल सकता है। 

मंगल की मजबूत स्थिति से बनने वाला रूचक राजयोग, सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य राजयोग तथा गुरु-शुक्र की युति से बनने वाला गजलक्ष्मी योग विशेष रूप से शुभ फल प्रदान करने वाले माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन तीनों योगों का संयुक्त प्रभाव कुछ राशियों के लिए तरक्की, धन लाभ और नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर रहेगा। रूचक राजयोग का प्रभाव आपकी नेतृत्व क्षमता को मजबूत करेगा। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जबकि व्यापारियों को लाभदायक सौदे मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बन सकती है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए बुधादित्य राजयोग बेहद शुभ साबित हो सकता है। करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे और कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना होगी। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

मिथुन राशि

मिथुन राशि में गुरु और शुक्र की युति से बना गजलक्ष्मी योग इस राशि के लोगों के लिए विशेष लाभकारी रहेगा। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और निवेश से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। व्यापार से जुड़े लोगों को बड़ा फायदा मिल सकता है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने के योग बन रहे हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह रविवार नई संभावनाएं लेकर आ सकता है। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार के साथ सुखद समय बिताने का अवसर मिलेगा।

यूपी में जमीन खरीदना अब और महंगा, यहां बढ़ा सर्किल रेट?

लखनऊ। यूपी में जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ा झटका है। राजधानी लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में कृषि भूमि की खरीद अब पहले की तुलना में काफी महंगी होने जा रही है। जिला प्रशासन ने कई गांवों में जमीन के सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव जारी किया है, जिससे जमीन की रजिस्ट्री पर खर्च बढ़ जाएगा। नई दरें लागू होने के बाद खरीदारों को अधिक स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा।

लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में बढ़े सर्किल रेट

जिला प्रशासन ने विभिन्न तहसीलों के कई गांवों में कृषि भूमि के सर्किल रेट में संशोधन करने का फैसला लिया है। कई स्थानों पर दरों में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि प्रस्तावित की गई है। मोहनलालगंज तहसील के कई गांव इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यहां कृषि योग्य जमीनों के सर्किल रेट में बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिससे जमीन खरीदने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

क्यों बढ़ाए गए सर्किल रेट?

पिछले कुछ वर्षों में लखनऊ के आसपास तेजी से शहरीकरण हुआ है। नगर निगम क्षेत्र के विस्तार के साथ ग्रामीण इलाकों में आवासीय परियोजनाएं, प्लॉटिंग, अपार्टमेंट और रो-हाउस परियोजनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में जमीनों की बाजार कीमतें लगातार बढ़ती गईं, जबकि सरकारी सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम बने रहे। प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया कि कई गांवों में जमीनों की खरीद-बिक्री सरकारी दरों से कहीं अधिक कीमत पर हो रही है। इसी वजह से बाजार मूल्य और सर्किल रेट के बीच की दूरी को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर

प्रस्तावित संशोधन के तहत मोहनलालगंज के अलावा सरोजनीनगर, मलिहाबाद, बख्शी का तालाब और सदर तहसील के कई गांवों में भी कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इन इलाकों में जमीन खरीदने वाले लोगों को अब पहले से ज्यादा स्टांप शुल्क देना पड़ सकता है। विशेष रूप से सड़क किनारे स्थित कृषि भूमि वाले गांवों में सर्किल रेट में अधिक वृद्धि की गई है, क्योंकि इन क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज रही है और जमीन की मांग लगातार बढ़ी है।

राजस्व बढ़ाने पर फोकस

प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार ने स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के राजस्व लक्ष्य में भी बढ़ोतरी की है। पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग ने लक्ष्य से अधिक राजस्व प्राप्त किया था। अब नए वित्तीय वर्ष के लिए और बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में सर्किल रेट और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच अंतर को कम करना जरूरी माना गया।

आपत्ति और सुझाव का मौका

नई दरों को लागू करने से पहले आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं। इच्छुक नागरिक निर्धारित तिथि तक संबंधित कार्यालयों या ईमेल के माध्यम से अपनी राय दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यूपी में ग्रेजुएट्स के लिए बंपर खुशखबरी, नई भर्ती का हुआ बड़ा एलान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे स्नातक युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने प्लाटून कमांडर और ब्लॉक ऑर्गेनाइजर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के माध्यम से कुल 295 स्थायी पदों को भरा जाएगा, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिलेगा।

यह भर्ती विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने PET-2025 परीक्षा में भाग लिया था। आयोग ने मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की घोषणा कर दी है और इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों के भीतर आवेदन कर सकेंगे।

295 पदों पर होगी भर्ती

भर्ती अभियान के तहत प्लाटून कमांडर और ब्लॉक ऑर्गेनाइजर के पद शामिल हैं। इनमें प्लाटून कमांडर के 52 पद और ब्लॉक ऑर्गेनाइजर के 243 पद निर्धारित किए गए हैं। दोनों पद उत्तर प्रदेश होमगार्ड मुख्यालय के अंतर्गत भरे जाएंगे। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर माना जा रहा है, क्योंकि चयनित अभ्यर्थियों को आकर्षक वेतनमान और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

इतना मिलेगा वेतन

प्लाटून कमांडर पद पर चयनित उम्मीदवारों को पे-लेवल 6 के तहत वेतन दिया जाएगा, जिसमें शुरुआती वेतन 35,400 रुपये से लेकर 1,12,400 रुपये तक हो सकता है। वहीं ब्लॉक ऑर्गेनाइजर पद के लिए पे-लेवल 5 निर्धारित किया गया है, जिसके तहत 29,200 रुपये से 92,300 रुपये तक का वेतन मिलेगा।

कौन कर सकता है आवेदन

इस भर्ती में वही उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने PET-2025 में भाग लिया हो और निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों। आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री होना आवश्यक है। इसके अलावा आयु सीमा और अन्य योग्यताओं का निर्धारण आयोग द्वारा जारी नियमों के अनुसार किया जाएगा।

चयन प्रक्रिया कैसी होगी

उम्मीदवारों का चयन मुख्य लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पदों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Test) और अन्य आवश्यक चरण आयोजित किए जाएंगे। अंतिम मेरिट सूची में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाएगी।

आवेदन प्रक्रिया कब से शुरू होगी

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 16 जून 2026 से शुरू होगी और उम्मीदवार 6 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन से पहले आयोग द्वारा जारी विस्तृत अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें।

बिहार में जमीन मालिकों को खुशखबरी, एक क्लिक पर मिलेंगे भूमि से जुड़े जरूरी दस्तावेज

पटना।  बिहार के लाखों जमीन मालिकों और रैयतों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने भूमि अभिलेखों को लेकर एक नई सुविधा शुरू की है, जिससे लोगों को जमीन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब भूधारी कई ऐसे दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां भी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे, जो अभी तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं थीं।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी जिलों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य भूमि संबंधी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।

ऑनलाइन आवेदन से मिलेगी दस्तावेजों की प्रति

नई व्यवस्था के तहत यदि किसी भूधारी को ऐसा भूमि अभिलेख चाहिए जो विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है, तो वह ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अंचल कार्यालय रिकॉर्ड रूम से आवश्यक दस्तावेज निकालेगा। इसके बाद अभिलेख को स्कैन कर डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा और आवेदक को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा।

पहले से ऑनलाइन हैं कई भूमि अभिलेख

राज्य सरकार पहले ही भूमि से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करा चुकी है। वर्ष 2026 की शुरुआत से भूमि अभिलेखों के लिए ऑफलाइन व्यवस्था को समाप्त करते हुए अधिकतर सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है। साथ ही, डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियों को भी वैध माना गया है, जिससे दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

पारदर्शिता और सुविधा को मिलेगा बढ़ावा

इस फैसले से भूमि प्रबंधन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में कमी आएगी। ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और जरूरत पड़ने पर लोग आसानी से अपनी जमीन से संबंधित दस्तावेज हासिल कर सकेंगे।

रैयतों को होगा सीधा लाभ

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और रैयतों को मिलेगा। उन्हें अब छोटे-छोटे कामों के लिए कार्यालयों के कई चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से घर बैठे दस्तावेज प्राप्त किए जा सकेंगे, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। सरकार की यह पहल बिहार में भूमि सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे आम लोगों को बेहतर और तेज सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

बिहार में B.Tech पास के लिए भर्ती, सैलरी 1 लाख से ज्यादा

पटना। बिहार के इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना ने प्रोजेक्ट आधारित पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को प्रतिष्ठित संस्थान में काम करने का अवसर मिलेगा, साथ ही आकर्षक वेतन का लाभ भी दिया जाएगा।

आपको बता दें की आईआईटी पटना द्वारा जारी सूचना के अनुसार प्रोजेक्ट इंजीनियर और प्रोजेक्ट असिस्टेंट के कुल तीन पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक आवेदन कर सकते हैं। 

किन पदों पर होगी भर्ती

भर्ती अभियान के तहत प्रोजेक्ट इंजीनियर और प्रोजेक्ट असिस्टेंट के पदों को भरा जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को प्रोजेक्ट आधारित कार्यों में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

शैक्षणिक योग्यता

इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास सिविल, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री होनी चाहिए। साथ ही न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक या 6.5 सीपीआई होना आवश्यक है।

मिलेगा आकर्षक वेतन

आईआईटी पटना में चयनित उम्मीदवारों को पद और अनुभव के आधार पर प्रति माह 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख 45 हजार रुपये तक वेतन दिया जाएगा। यही वजह है कि यह भर्ती इंजीनियरिंग क्षेत्र के युवाओं के लिए काफी आकर्षक मानी जा रही है।

कैसे करें आवेदन

आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन फॉर्म के बजाय ई-मेल के माध्यम से पूरी की जाएगी। अभ्यर्थियों को अपने दस्तावेज और आवेदन निर्धारित प्रारूप में भेजने होंगे। आवेदन से जुड़ी विस्तृत जानकारी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

महत्वपूर्ण तिथि

उम्मीदवारों को 4 जून 2026 तक अपना आवेदन जमा करना होगा। अंतिम तिथि के बाद भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

आधिकारिक वेबसाइट: iitp.ac.in

क्या 30 के बाद शादी करना सही है? महिलाओं के लिए जानिए पूरी बात

न्यूज डेस्क। समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि महिलाओं को कम उम्र में ही शादी कर लेनी चाहिए। हालांकि बदलते दौर में शिक्षा, करियर और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में 30 वर्ष की उम्र के बाद शादी करना अब असामान्य नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का मानना है कि शादी की सही उम्र का कोई एक निश्चित पैमाना नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति की मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक तैयारी पर निर्भर करता है।

बदल रही है सोच

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं ने शिक्षा और करियर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कई महिलाएं पहले अपने पेशेवर जीवन को मजबूत बनाना चाहती हैं और उसके बाद विवाह का निर्णय लेती हैं। यही कारण है कि 30 वर्ष के बाद शादी करने का चलन बढ़ रहा है।

परिपक्वता का मिलता है लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार 30 की उम्र के बाद व्यक्ति जीवन के प्रति अधिक परिपक्व और जिम्मेदार हो जाता है। इस उम्र तक लोग अपने लक्ष्यों, प्राथमिकताओं और रिश्तों को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं। इससे जीवनसाथी का चयन अधिक सोच-समझकर किया जा सकता है और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आने की संभावना बढ़ जाती है।

आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं महिलाएं

30 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते कई महिलाएं अपने करियर में अच्छी स्थिति हासिल कर लेती हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण फैसले लेने का आत्मविश्वास देती है। इससे विवाह के बाद भी व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाए रखना आसान हो सकता है।

परिवार और समाज का बदलता नजरिया

जहां पहले देर से शादी को लेकर सामाजिक दबाव अधिक देखा जाता था, वहीं अब परिवारों और समाज की सोच में भी बदलाव आ रहा है। लोग यह समझने लगे हैं कि विवाह केवल उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि सही समय और सही साथी मिलने पर किया जाना चाहिए।

शादी का फैसला उम्र नहीं, तैयारी तय करती है

सफल विवाह का संबंध केवल उम्र से नहीं होता। मानसिक परिपक्वता, भावनात्मक संतुलन, आर्थिक स्थिरता और सही जीवनसाथी का चयन अधिक महत्वपूर्ण कारक हैं। इसलिए 30 के बाद शादी करना गलत नहीं माना जा सकता, बल्कि कई मामलों में यह एक सोच-समझकर लिया गया परिपक्व निर्णय साबित हो सकता है।

40 के बाद मर्दों के लिए वरदान हैं 4 बीज, शरीर में बनी रहेगी ताकत और फुर्ती

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 40 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की ऊर्जा, मांसपेशियों की ताकत और रोग प्रतिरोधक क्षमता में धीरे-धीरे कमी आने लगती है। ऐसे में संतुलित आहार के साथ कुछ पौष्टिक बीज स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

1 .अलसी के बीज

अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माने जाते हैं। ये हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं और शरीर में सूजन की समस्या को कम कर सकते हैं। नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रखने में भी सहायता मिलती है।

2 .कद्दू के बीज

कद्दू के बीज में जिंक, मैग्नीशियम और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पुरुषों की संपूर्ण सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसके सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है और मांसपेशियों को मजबूती मिल सकती है।

3 .चिया सीड्स

चिया सीड्स फाइबर, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। ये पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी यह लाभकारी माना जाता है।

4 .सूरजमुखी के बीज

सूरजमुखी के बीज में विटामिन-ई और कई महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। ये शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री-रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकते हैं। साथ ही त्वचा और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माने जाते हैं।

कैसे करें सेवन?

इन बीजों को सुबह के नाश्ते में, सलाद में, दही के साथ या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। हालांकि किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।

यूपी सरकार की बड़ी तैयारी: ग्रामीण युवाओं के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण युवाओं को केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित न रखते हुए उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया के लिए पूरी तरह तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कौशल विकास मिशन के तहत एक नई और व्यापक योजना लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य युवाओं को आत्मविश्वासी, सक्षम और नेतृत्व क्षमता से भरपूर बनाना है।

डीडीयू-जीकेवाई के तहत नया प्रशिक्षण मॉडल

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने डीडीयू-जीकेवाई (DDU-GKY) के अंतर्गत चल रहे सभी आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों के लिए सालभर चलने वाली सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का नया कैलेंडर जारी किया है। अब प्रशिक्षण केवल तकनीकी नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और व्यवहारिक कौशल पर भी केंद्रित होगा।

ग्रामीण युवाओं को मिलेंगे 360 डिग्री स्किल्स

इस योजना का मुख्य फोकस युवाओं के संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता, डिजिटल ज्ञान और व्यक्तित्व विकास पर रहेगा। सरकार चाहती है कि ग्रामीण युवा भी बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर में आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें।

सालभर चलेंगी अलग-अलग गतिविधियां

नए कैलेंडर के अनुसार हर महीने विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी:

जनवरी: करियर काउंसलिंग और युवा दिवस

फरवरी: सांस्कृतिक कार्यक्रम

मार्च: महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम

अप्रैल: टैलेंट शो और आत्म-परिचय गतिविधियां

मई-जून: योग, खेल और स्वास्थ्य कार्यक्रम

जुलाई: ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू प्रैक्टिस

अगस्त-सितंबर: सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन

अक्टूबर-नवंबर: साइबर सुरक्षा और संविधान जागरूकता

दिसंबर: अंग्रेजी बोलचाल और रिज्यूमे लेखन

डिजिटल और कम्युनिकेशन स्किल पर जोर

युवाओं को मॉक इंटरव्यू, पब्लिक स्पीकिंग और डिजिटल साक्षरता जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़े और वे नौकरी बाजार में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

6 विशेष क्लबों का गठन अनिवार्य

हर प्रशिक्षण केंद्र में छह विशेष क्लब बनाए जाएंगे: सांस्कृतिक क्लब, खेल एवं फिटनेस क्लब, डिजिटल एवं आईटी क्लब, साहित्य एवं भाषा क्लब, पर्यावरण एवं सामाजिक जागरूकता क्लब, उद्यमिता एवं करियर विकास क्लब। इन क्लबों में महिला और दिव्यांग युवाओं की भागीदारी भी अनिवार्य की गई है।

पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था सख्त

हर गतिविधि की रिपोर्टिंग अब अनिवार्य कर दी गई है। प्रशिक्षण संस्थानों को जियोटैग फोटो, उपस्थिति रिकॉर्ड और प्रगति रिपोर्ट हर महीने मिशन मुख्यालय को भेजनी होगी।

ग्रामीण युवाओं के लिए बड़ा बदलाव

अधिकारियों का मानना है कि आज के समय में सिर्फ तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। संवाद कौशल, आत्मविश्वास और व्यवहारिक समझ भी उतनी ही जरूरी है। यह योजना ग्रामीण युवाओं को बड़े उद्योगों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार करेगी।

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी राहत!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा निर्णय लेते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का पूरा अधिकार रहेगा। इस फैसले के बाद अब बिजली कंपनियां किसी भी उपभोक्ता पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव नहीं बना सकेंगी।

क्या है पूरा मामला?

राज्य में लंबे समय से यह विवाद चल रहा था कि नए कनेक्शन और पुराने कनेक्शनों पर केवल प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं और उपभोक्ता परिषद ने इस पर आपत्ति जताई थी और इसे अनिवार्य करने के खिलाफ मामला उठाया गया था। इसके बाद यह मुद्दा विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा, जहां इस पर विस्तृत सुनवाई की गई।

आयोग का स्पष्ट आदेश

आयोग ने विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए कहा है कि उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर का चुनाव कर सकते हैं। किसी भी स्थिति में चयन का अधिकार उपभोक्ता के पास ही रहेगा।

बिजली कंपनियों पर लगेगी रोक

इस निर्णय के बाद बिजली वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं पर प्रीपेड मीटर लगाने का दबाव नहीं बना पाएंगी। अब किसी भी कनेक्शन को बिना उपभोक्ता की सहमति के प्रीपेड में बदला नहीं जा सकेगा। यह नियम नए और पुराने दोनों प्रकार के कनेक्शनों पर लागू होगा।

उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम

उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि यह देश का पहला ऐसा राज्य है जहां स्पष्ट रूप से उपभोक्ता को मीटर चयन का अधिकार दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा और बजट के अनुसार विकल्प चुनने की आज़ादी मिलेगी।

नए कनेक्शन पर भी लागू होगा नियम

आयोग ने साफ किया है कि चाहे नया कनेक्शन हो या पुराना, दोनों ही मामलों में उपभोक्ता को मीटर का प्रकार चुनने का अधिकार रहेगा। बिजली कंपनियों को अब नियमों और अधिनियम के अनुसार ही काम करना होगा। अब बिजली कंपनियां किसी उपभोक्ता के पोस्टपेड कनेक्शन को बिना अनुमति के प्रीपेड में नहीं बदल सकेंगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।