HappyNews@ Media Team

This channel publishes all kinds of news related to the world.you will always be grateful if you always keep such a relationship with me.

HappyNews @ Science and Technology

Click here for every news from science and stay with HappyNews.

Happy News @ प्रेरक विचार

Click here for a relayed news with a motivational idea and stay with HappyNews.

HappyNews @ Politics

Click here for news related to politics and stay with HappyNews.

HappyNews @ Lifestyle and Relationship

Click here for the motive thought with image and stay with HappyNews.

खुशखबरी की घोषणा! यूपी में आई 1 बड़ी भर्ती, ऐसे करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UPSSSC ने पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1251 पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया सितंबर में शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय के भीतर आयोग की वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती एक अच्छा अवसर हो सकती है।

1251 पदों पर होगी भर्ती

UPSSSC की ओर से जारी भर्ती के तहत पशुधन प्रसार अधिकारी (Livestock Extension Officer) के कुल 1251 पद भरे जाएंगे। ये पद पशुपालन निदेशालय के अंतर्गत आते हैं। भर्ती से संबंधित विज्ञापन संख्या 17-परीक्षा/2026 है। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति उत्तर प्रदेश में की जाएगी।

9 सितंबर से शुरू होगा आवेदन

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 9 सितंबर 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए 29 सितंबर 2026 तक का समय दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को सलाह है कि आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार न करें। अंतिम दिनों में वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक होने के कारण आवेदन करने में परेशानी हो सकती है।

40 साल तक के उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन

भर्ती में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की उम्र 21 से 40 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिल सकती है। उम्मीदवार आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को जरूर जांच लें।

ऐसे करें ऑनलाइन के द्वारा आवेदन की प्रक्रिया पूरी 

अभ्यर्थियों को आवेदन करने के लिए सबसे पहले UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां भर्ती से संबंधित लिंक पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। आवेदन के दौरान उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और अन्य जरूरी विवरण भरने होंगे। इसके बाद मांगे गए दस्तावेज अपलोड कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

40 की उम्र में शुरू कर दें ये 5 काम, बुढ़ापे तक नहीं आएगी कमजोरी!

हेल्थ डेस्क। 40 की उम्र के बाद शरीर में कई बदलाव धीरे-धीरे नजर आने लगते हैं। पहले की तुलना में मेटाबॉलिज्म, मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक सक्रियता में बदलाव महसूस हो सकता है। ऐसे में इस उम्र के बाद जीवनशैली पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है। अच्छी आदतें समय रहते अपना ली जाएं तो आगे चलकर शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ केवल वजन नियंत्रित करना ही पर्याप्त नहीं है। मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों का स्वास्थ्य, नींद, खान-पान और मानसिक सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी वयस्कों को नियमित एरोबिक गतिविधि के साथ सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करने की सलाह देता है।

1. रोजाना शरीर को एक्टिव रखें

40 के बाद सबसे पहली आदत शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की बनानी चाहिए। रोज तेज चाल से पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार कोई दूसरी गतिविधि की जा सकती है। WHO के मुताबिक वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। नियमित एक्सरसाइज हृदय स्वास्थ्य, ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकती है।

2. मांसपेशियों की ताकत पर दें ध्यान

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियों की ताकत बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए केवल वॉक करने के बजाय सप्ताह में कुछ दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। शुरुआत में स्क्वैट, वॉल पुश-अप, सीढ़ियां चढ़ना या हल्के रेजिस्टेंस बैंड जैसे आसान अभ्यास किए जा सकते हैं। WHO भी प्रमुख मांसपेशी समूहों के लिए सप्ताह में कम से कम दो दिन स्ट्रेंथ एक्सरसाइज की सलाह देता है।

3. खाने की प्लेट को बनाएं संतुलित

40 के बाद खान-पान की आदतों में सुधार करना भी जरूरी है। रोज की डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, पर्याप्त प्रोटीन और स्वस्थ वसा जैसे पोषक तत्वों को जगह देनी चाहिए। बहुत ज्यादा मीठा, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और जरूरत से ज्यादा तला-भुना भोजन कम करना बेहतर विकल्प हो सकता है। संतुलित भोजन शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है।

4. नींद को न करें नजरअंदाज

काम और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच कई लोग नींद को सबसे पहले नजरअंदाज करते हैं। लेकिन शरीर की रिकवरी और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। इसलिए रोज सोने और जागने का समय लगभग निश्चित रखने की कोशिश करें। रात में सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करना भी नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकता है।

5. नियमित हेल्थ चेकअप की आदत डालें

40 की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य जरूरी जांच समय-समय पर कराते रहना उपयोगी हो सकता है। यदि परिवार में किसी बीमारी का इतिहास है या पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो जांच और स्क्रीनिंग की जरूरत व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेकर जांच का सही शेड्यूल तय करना बेहतर है।

पुरुषों के लिए खजूर के 5 बड़े फायदे, रोज खाने से मिलेंगे ये लाभ

हेल्थ डेस्क। खजूर सिर्फ स्वादिष्ट ड्राई फ्रूट ही नहीं है। खजूर में प्राकृतिक शुगर के साथ फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी6 और कई एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। एक सामान्य सर्विंग में अच्छी मात्रा में फाइबर और पोटैशियम मिलता है, जिसके कारण इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

1. शरीर को मिलती है जल्दी ऊर्जा

खजूर में प्राकृतिक शुगर और कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में होते हैं। इसलिए थकान या शारीरिक गतिविधि के दौरान यह शरीर को जल्दी ऊर्जा उपलब्ध कराने वाला स्नैक हो सकता है। जिम, दौड़ या अन्य व्यायाम करने वाले पुरुष इसे सीमित मात्रा में अपने डाइट प्लान में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, इसमें प्राकृतिक शुगर अधिक होने के कारण जरूरत से ज्यादा खाना उचित नहीं है।

2. पाचन के लिए फायदेमंद

खजूर में मौजूद डाइटरी फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। पर्याप्त फाइबर लेने से मल त्याग नियमित रखने और कब्ज जैसी समस्या से बचाव में मदद मिल सकती है। एक सर्विंग खजूर में करीब 7 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इसलिए भोजन में फाइबर की कमी को पूरा करने के लिए खजूर एक विकल्प हो सकता है।

3. दिल की सेहत के लिए बेस्ट

खजूर में पोटैशियम जैसे खनिज पाए जाते हैं। शरीर में पोटैशियम कई महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाता है। इसके अलावा खजूर में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भी स्वस्थ खानपान का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, केवल खजूर खाने से हृदय रोग का इलाज या बचाव सुनिश्चित नहीं होता। दिल को स्वस्थ रखने के लिए पूरी डाइट, नियमित व्यायाम और जीवनशैली का ध्यान रखना जरूरी है।

4. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

खजूर में कई तरह के पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मौजूद होते हैं। ये शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभाते हैं। USDA के शोध में भी खजूर की विभिन्न किस्मों में फेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस वजह से खजूर को फल और ड्राई फ्रूट आधारित संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है।

5. जरूरी मिनरल्स की पूर्ति में मदद

खजूर में पोटैशियम के अलावा मैग्नीशियम, कॉपर और मैंगनीज जैसे खनिज भी मिलते हैं। साथ ही इसमें विटामिन बी6 भी मौजूद होता है। ये पोषक तत्व शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं। इसलिए पुरुषों के लिए भी खजूर एक पोषक स्नैक का विकल्प हो सकता है, खासकर तब जब इसे संतुलित आहार के साथ लिया जाए।

सूर्य-चंद्र परिवर्तन राजयोग का असर, 4 राशियों की होगी बल्ले-बल्ले

राशिफल। ज्योतिष में सूर्य और चंद्रमा को बेहद महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। दोनों ग्रहों की स्थिति में बदलाव का असर व्यक्ति के करियर, धन, प्रतिष्ठा और पारिवारिक जीवन पर पड़ने की मान्यता है। इसी कड़ी में 13 अगस्त से सूर्य-चंद्र परिवर्तन राजयोग बनने की चर्चा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह संयोग कुछ राशियों के लिए खास तौर पर शुभ साबित हो सकता है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत पर अधिकारियों की नजर पड़ सकती है और किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का अवसर मिल सकता है। नौकरी बदलने या नई भूमिका की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिलने की संभावना है। कारोबार में भी नए संपर्क बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयास सफल हो सकते हैं।

2. मिथुन राशि

सूर्य-चंद्र परिवर्तन का प्रभाव मिथुन राशि के जातकों के लिए भी सकारात्मक माना जा रहा है। इस दौरान कामकाज से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण योजना आगे बढ़ सकती है। सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है। प्रतियोगी परीक्षाओं या नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए समय उत्साह बढ़ाने वाला हो सकता है। आय के नए स्रोत तलाशने में भी सफलता मिल सकती है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य हैं, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह परिवर्तन विशेष महत्व रख सकता है। आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में बढ़ोतरी महसूस हो सकती है। नौकरी में पद और प्रतिष्ठा बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। कारोबारियों को कोई बड़ा सौदा मिलने या पुराना अटका हुआ काम पूरा होने की संभावना है। संपत्ति से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने के योग माने जा रहे हैं।

4. धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला हो सकता है। लंबे समय से जिस काम के पूरा होने का इंतजार था, उसमें गति आने की उम्मीद है। नौकरी और व्यवसाय में नए अवसर मिल सकते हैं। यात्रा या किसी नए संपर्क के जरिए भविष्य में लाभ का रास्ता खुल सकता है। आर्थिक मामलों में भी स्थिति पहले की तुलना में बेहतर होने के संकेत हैं।

CM सम्राट का बड़ा फैसला, बिहार में इन पुलिस अधिकारियों की बढ़ी ताकत

पटना। बिहार में पर्व-त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। मेले और जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्रदान की गई हैं। 

सरकार के इस फैसले से संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही निवारक कार्रवाई करने में अधिक अधिकार मिल सकेंगे। गृह विभाग की आरक्षी शाखा की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन मौकों पर प्रभावी होगी, जब बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों, जुलूसों और मेलों में शामिल होते हैं।

किन पुलिस अधिकारियों को मिला अधिकार?

सरकार की ओर से दी गई शक्तियां रेंज और प्रक्षेत्र में तैनात आईजी और डीआईजी के अलावा जिलों में कार्यरत एसएसपी, एसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी को दी गई हैं। हालांकि, इस व्यवस्था में रेलवे से जुड़े ग्रामीण एसपी को शामिल नहीं किया गया है। इन अधिकारियों को अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी के तौर पर कुछ कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

त्योहारों के दौरान कर सकेंगे कार्रवाई

यह अधिकार प्रमुख पर्व-त्योहारों के दौरान आयोजित होने वाले जुलूस और मेलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इनमें सरस्वती पूजा, होली, रामनवमी, दुर्गापूजा, दीपावली, ईद, बकरीद, मुहर्रम, काली पूजा, छठ पूजा और शब-ए-बरात जैसे आयोजन शामिल हैं। इन मौकों पर भीड़ अधिक होने के कारण कई बार तनाव या विवाद की स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों को पहले से निवारक कदम उठाने में यह अधिकार मददगार हो सकता है।

BNSS की धाराओं के तहत मिलेगी शक्ति

पुलिस अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अध्याय 9 के तहत विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां दी गई हैं। यह प्रावधान धारा 125 से 143 तक लागू होता है। इन धाराओं के तहत किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड या मुचलका भरवाने जैसी निवारक कार्रवाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य किसी संभावित विवाद या शांति भंग की स्थिति को गंभीर रूप लेने से पहले नियंत्रित करना है।

शांति भंग की आशंका पर पहले से कार्रवाई

नए अधिकार का एक अहम पहलू यह है कि पुलिस अधिकारी केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने की आशंका है या उसके दोबारा अपराध करने की संभावना मानी जाती है, तो कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निवारक कदम उठाए जा सकते हैं। विशेष रूप से धारा 126 से 129 के तहत शांति भंग की आशंका वाले व्यक्तियों, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों या आदतन अपराधियों से मुचलका अथवा बांड लेने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।

दोषसिद्ध व्यक्ति के मामले में भी प्रावधान

किसी व्यक्ति को अपराध में दोषी ठहराए जाने की स्थिति में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बांड की मांग से संबंधित अधिकार भी कानून में निर्धारित हैं। धारा 125 के तहत इस तरह की कार्रवाई का अधिकार संबंधित न्यायिक प्राधिकारी को दिया गया है। वहीं, अन्य परिस्थितियों में कार्यपालक दंडाधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सरकार के नए फैसले से पुलिस और दंडाधिकारी स्तर की कार्रवाई के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।

बिहार में बिछेगी नई रेल लाइन, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में रेल यात्रियों की बढ़ती संख्या और मौजूदा रेल नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। पटना और आसपास के रेल क्षेत्रों में ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए कई स्तर पर नई रेल लाइनें विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजनाओं पर करीब 1323 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। नई और अतिरिक्त रेल पटरियां बनने के बाद मौजूदा रेल मार्गों पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी। इसका सीधा लाभ पटना और आसपास के क्षेत्रों से सफर करने वाले यात्रियों को मिलने की उम्मीद है।

बख्तियारपुर से फतुहा तक बढ़ेगी रेल क्षमता

परियोजना के शुरुआती चरण में बख्तियारपुर से फतुहा के बीच करीब 24 किलोमीटर नई रेल लाइन विकसित करने की योजना है। इस काम के लिए लगभग 931 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च बताया गया है। इस रेलखंड पर पहले से ट्रेनों की आवाजाही काफी अधिक है। अतिरिक्त लाइन उपलब्ध होने से रेलवे को ट्रेनों के संचालन के लिए नया विकल्प मिलेगा और मौजूदा पटरियों पर निर्भरता कम हो सकेगी। परियोजना के लिए करीब 6.6 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इसके अधिग्रहण से संबंधित मंजूरी भी रेलवे स्तर पर मिल चुकी है।

बख्तियारपुर-पुनारख के बीच भी बनेगी नई लाइन

दूसरे चरण में बख्तियारपुर और पुनारख के बीच रेल संपर्क को मजबूत किया जाएगा। इस हिस्से में लगभग 30 किलोमीटर लंबी रेल लाइन प्रस्तावित है। इसके निर्माण पर करीब 392 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। रेलवे बोर्ड की ओर से इस हिस्से के लिए आवश्यक जमीन अधिग्रहण को मंजूरी दिए जाने की जानकारी है। नई लाइन बनने के बाद पटना-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

राजेंद्र नगर से पटना साहिब तक बढ़ेगा ट्रैक नेटवर्क

परियोजना के तीसरे चरण में पटना शहर के महत्वपूर्ण रेलवे मार्गों पर अतिरिक्त पटरियां उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसके तहत राजेंद्र नगर टर्मिनल से पटना साहिब तक रेल क्षमता बढ़ाने की योजना है। इसके साथ ही दानापुर से पटना जंक्शन के बीच तीसरी और चौथी लाइन विकसित करने का प्रस्ताव है। आगे राजेंद्र नगर टर्मिनल से पटना साहिब के बीच तीसरी लाइन तथा पटना साहिब से फतुहा के बीच तीसरी और चौथी लाइन तैयार किए जाने की योजना बताई गई है। इससे पटना के प्रमुख रेल स्टेशनों के बीच ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध हो सकेगा।

बिहार में जमीन सर्वे को लेकर 5 बड़ी खुशखबरी, विवाद होंगे कम!

पटना। बिहार में जमीन के पुराने रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और भूमि विवादों पर लगाम लगाने के लिए चल रहा विशेष भूमि सर्वे अब तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि सर्वे के बाद जमीन से संबंधित दस्तावेज स्पष्ट और सुरक्षित हों, जिससे भविष्य में मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों को कम किया जा सके।

1. पांच छोटे जिलों में काम पूरा करने पर जोर

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने क्षेत्रफल के लिहाज से छोटे पांच जिलों में चल रहे सर्वे की प्रगति की समीक्षा की। इनमें जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर, अरवल और शेखपुरा शामिल हैं। इन जिलों में सर्वे का काम तय समय में पूरा कराने के लिए कर्मचारियों को अन्य अभियानों से अलग रखा गया है। सरकार ने इन क्षेत्रों में 15 अगस्त तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

2. लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही

सर्वे के दौरान जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। समीक्षा में कुछ मौजों के आवश्यक रिकॉर्ड नहीं मिलने पर अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्वे कार्य में अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिकॉर्ड तैयार होने के साथ ही उसे संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने और सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए लेवल-7 के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। सर्वे की प्रगति की अगली समीक्षा भी निर्धारित अंतराल के बाद की जाएगी।

3. बंटवारा नहीं हुआ तो भी नहीं रुकेगा सर्वे

परिवार की जमीन का अभी तक आपसी बंटवारा नहीं हुआ है तो इससे सर्वे की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। ऐसी स्थिति में जमीन का रिकॉर्ड उस व्यक्ति के नाम पर जारी रह सकता है, जिसके नाम पर संबंधित भूमि पहले से दर्ज है। यानी केवल पारिवारिक बंटवारा नहीं होने की वजह से जमीन का सर्वे रोकने की जरूरत नहीं होगी। बाद में नियमानुसार बंटवारे की स्थिति के आधार पर रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

4. चार चरणों में तैयार होगा जमीन का रिकॉर्ड

विशेष भूमि सर्वे एक साथ पूरा होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसे अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जाता है। शुरुआत में गांव की सीमा और जमीन का नक्शा तैयार किया जाता है। इसके बाद भूमि के वास्तविक दावेदारों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड तैयार करने का काम होता है। अगले चरण में तैयार दस्तावेजों और नक्शे को संबंधित लोगों के सामने रखा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को रिकॉर्ड में आपत्ति होती है तो उसे अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। जांच और सुनवाई के बाद अंतिम रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।

5. पुराने रिकॉर्ड की कमी के बावजूद आगे बढ़ रहा काम

बिहार में जमीन के पुराने दस्तावेजों की उपलब्धता भी सर्वे के सामने बड़ी चुनौती है। कई गांवों में दशकों पुराने कैडेस्ट्रल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण जमीन मालिकों से उनकी भूमि से संबंधित जानकारी और दस्तावेज लिए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में रैयत अपनी जमीन का विवरण स्वघोषणा के माध्यम से उपलब्ध करा सकते हैं। विभाग की ओर से जमीन से संबंधित जानकारी जमा करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।

करीब 90 साल बाद बड़े स्तर पर भूमि सर्वे

बिहार में लंबे अंतराल के बाद व्यापक स्तर पर जमीन का सर्वे कराया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत पहले चरण में वर्ष 2019 के आसपास हुई थी और अलग-अलग कारणों से इसकी समयसीमा में बदलाव होता रहा है। अब राज्यभर में भूमि सर्वे को पूरा करने के लिए दिसंबर 2027 तक का लक्ष्य रखा गया है। बिहार में बड़ी संख्या में रैयतों की जमीन का रिकॉर्ड इस प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

बिहार में 2 हजार मुखियाओं पर शिकंजा, 12 की कुर्सी खतरे में, मचा हड़कंप

पटना। बिहार की पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। गांवों में योजनाओं के लिए जारी होने वाली सरकारी रकम के इस्तेमाल में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका जांची जा रही है। अलग-अलग स्तर पर हुई पड़ताल के बाद 2 हजार से अधिक मुखिया विभाग की निगरानी में हैं।

मामला केवल कागजी जांच तक सीमित नहीं है। जिन पंचायतों में अनियमितताओं के गंभीर संकेत मिले हैं, वहां जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। 12 मुखियाओं पर पद गंवाने का खतरा मंडरा रहा है और इनके मामलों में विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

विकास योजनाओं के खर्च का हो रहा हिसाब

पंचायतों में सड़क, नाली, पानी, रोशनी और स्वच्छता से जुड़े कई काम सरकारी योजनाओं के जरिए कराए जाते हैं। इन्हीं योजनाओं के क्रियान्वयन में नियमों के पालन और खर्च की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। अधिकारियों की जांच में यह देखा गया कि स्वीकृत योजना के मुताबिक काम हुआ या नहीं, भुगतान सही तरीके से किया गया या नहीं और संबंधित पंचायत के रिकॉर्ड में सभी जरूरी जानकारी दर्ज है या नहीं। इसी जांच के आधार पर कई पंचायतों को सवालों के घेरे में लिया गया है।

सोलर लाइट बनी जांच का बड़ा मुद्दा

गांवों की गलियों को रोशन करने के लिए लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइट भी जांच में महत्वपूर्ण बिंदु बनी है। कुछ पंचायतों में उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी कार्यक्षमता को लेकर शिकायतें मिलीं। कहीं लाइटें जल्द खराब होने की बात सामने आई तो कहीं खरीद और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जरूरत महसूस हुई। अब अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि योजना के लिए जारी रकम का इस्तेमाल तय नियमों के मुताबिक हुआ था या नहीं।

कागजों में काम और जमीन पर स्थिति की होगी तुलना

जांच के दौरान केवल फाइलों को देखने के बजाय रिकॉर्ड और वास्तविक काम के बीच मिलान पर भी जोर दिया गया। पंचायतों से जुड़े कई मामलों में काम का अनुमान, माप से संबंधित रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित योजना वास्तव में कितनी पूरी हुई और उसके बदले कितनी रकम जारी की गई। इसी आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

8वें वेतन आयोग: पेंशन को 5 गुना बढ़ाने की मांग, रिटायर कर्मचारियों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच पेंशनर्स के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने आयोग के सामने कई अहम सुझाव रखे हैं। इनमें न्यूनतम पेंशन को मौजूदा स्तर से कई गुना बढ़ाने, कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा करने और पेंशन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं।

BPS के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में 8वें वेतन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी मांगें रखीं। संगठन ने न्यूनतम पेंशन को 9,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 45,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव दिया है। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो न्यूनतम पेंशन में पांच गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है।

45 हजार रुपये न्यूनतम पेंशन की मांग

भारत पेंशनर्स समाज का कहना है कि नई वेतन व्यवस्था में न्यूनतम पेंशन को मौजूदा 9 हजार रुपये के स्तर पर नहीं रखा जाना चाहिए। संगठन ने इसे बढ़ाकर 45 हजार रुपये करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही पेंशन को कर्मचारी की अंतिम सैलरी से जोड़ने की भी मांग की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, कर्मचारी की न्यूनतम पेंशन अंतिम वेतन की करीब 67 फीसदी और फैमिली पेंशन अंतिम वेतन की 50 फीसदी होनी चाहिए।

कम्यूटेड पेंशन 11 साल में बहाल करने की मांग

पेंशन की कम्यूटेशन व्यवस्था में भी बदलाव की मांग सामने आई है। BPS चाहता है कि 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए कम्यूट की गई पेंशन का हिस्सा मौजूदा 15 साल के बजाय 11 साल बाद या 71 वर्ष की उम्र में, जो भी पहले हो, बहाल किया जाए। इसके अलावा संगठन ने उम्र बढ़ने के साथ अतिरिक्त पेंशन देने की व्यवस्था को भी अधिक अनुकूल बनाने का सुझाव दिया है।

हर पांच साल में वेतन-पेंशन की समीक्षा की मांग

BPS ने वेतन आयोग की मौजूदा लंबी अवधि वाली व्यवस्था में बदलाव की भी मांग की है। संगठन चाहता है कि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में हर पांच साल में संशोधन किया जाए। इससे महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के अनुरूप वेतन और पेंशन को समय-समय पर अपडेट किया जा सकेगा। इसके अलावा 1 जनवरी 2026 के आसपास सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन में असमानता दूर करने और उचित पेंशन निर्धारण की मांग भी उठाई गई है।

रिटायर कर्मचारियों के लिए मेडिकल सुविधाओं पर जोर

पेंशनर्स के स्वास्थ्य खर्च को देखते हुए संगठन ने चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने की मांग भी रखी है। विशेष रूप से ऐसे पेंशनर्स के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा देने का सुझाव दिया गया है, जो CGHS के दायरे में नहीं आने वाले क्षेत्रों में रहते हैं। इसके साथ ही 5,000 रुपये के निश्चित मेडिकल अलाउंस और ग्रामीण तथा गैर-CGHS क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए बेहतर स्वास्थ्य कवरेज की मांग की गई है।

यूपी में जल्द खुलेंगे शिक्षक भर्ती के रास्ते, युवाओं के लिए आई बड़ी खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में खाली पड़े शिक्षक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को गति देने की तैयारी की जा रही है। भर्ती से जुड़ी अर्हता संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए शासन स्तर पर अधिकारियों के बीच मंथन शुरू हो गया है।

दरअसल, प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के काफी पद खाली हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए संबंधित संस्थानों की ओर से उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को अधियाचन ऑनलाइन भेजे जा रहे हैं। हालांकि, कुछ पदों की शैक्षणिक योग्यता और पात्रता को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण आयोग ने कई अधियाचन संबंधित विभागों को वापस कर दिए हैं। अब इन खामियों को दूर कर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कवायद हो रही है।

शासन ने बुलाई अहम बैठक

अर्हता से जुड़ी समस्याओं और शिक्षा विभाग से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए शासन ने बैठक बुलाई है। इसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिकारी भी शामिल होंगे। बैठक में अधियाचन से जुड़ी विसंगतियों की पहचान कर उनके समाधान की दिशा तय किए जाने की उम्मीद है।

प्रधानाचार्य के 2647 पदों पर भी अड़चन

एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के 2647 पदों पर भर्ती प्रस्तावित है। इन पदों की अर्हता को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण आयोग ने संबंधित अधियाचन वापस कर दिए हैं। अब पात्रता संबंधी बिंदुओं को स्पष्ट करने के बाद इन रिक्तियों को दोबारा भेजने की तैयारी की जा सकती है। इसके अलावा बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों और एडेड माध्यमिक विद्यालयों से संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों की भर्ती प्रस्तावित है।

असिस्टेंट प्रोफेसर के 2107 पद भी शामिल

उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े महाविद्यालयों में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें असिस्टेंट प्रोफेसर के 2107 पदों का अधियाचन अर्हता संबंधी विसंगतियों के चलते वापस किया गया है। बैठक में इन पदों के लिए पात्रता से जुड़े मुद्दों को भी सुलझाने पर चर्चा होने की संभावना है।

भर्ती का रास्ता साफ करने की कोशिश

शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार अब भर्ती प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर जोर दे रही है। यदि बैठक में अर्हता संबंधी सभी बिंदुओं पर सहमति बनती है और संशोधित अधियाचन जल्द आयोग को मिलते हैं, तो विभिन्न विभागों में रिक्त शिक्षक पदों पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है।

यूपी के 6 शहरों में अग्निवीरों की भर्ती, युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का शानदार मौका आने वाला है। प्रदेश में तीसरी अग्निवीर भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए राज्य के छह शहरों को चुना गया है। भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत 17 अगस्त 2026 से मेरठ में होगी और अलग-अलग चरणों में चलने वाली यह भर्ती रैली 14 अप्रैल 2027 तक जारी रहेगी।

बड़ी संख्या में युवाओं के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सोमवार को लोक भवन में अधिकारियों और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए कि भर्ती स्थलों पर अभ्यर्थियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

छह शहरों में आयोजित होगी भर्ती रैली

उत्तर प्रदेश में अग्निवीर भर्ती रैली का आयोजन मेरठ, बरेली, लखनऊ, वाराणसी, आगरा और अयोध्या में किया जाएगा। अलग-अलग शहरों में भर्ती की तारीखें निर्धारित की गई हैं। सरकार का अनुमान है कि भर्ती रैलियों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंच सकते हैं। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन को पहले से सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।

भर्ती रैली का पूरा कार्यक्रम

मेरठ: 17 अगस्त से 9 सितंबर 2026

बरेली: 14 सितंबर से 30 सितंबर 2026

लखनऊ: 11 जनवरी से 28 जनवरी 2027

वाराणसी: 2 फरवरी से 27 फरवरी 2027

आगरा: 4 मार्च से 24 मार्च 2027

अयोध्या: 29 मार्च से 14 अप्रैल 2027

अभ्यर्थियों के लिए सुविधाओं पर सरकार का फोकस

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भर्ती स्थलों पर पहुंचने वाले उम्मीदवारों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से तैयार रहें। इनमें आवागमन, ठहरने की व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा प्रमुख हैं। इसके अलावा बड़ी भीड़ को देखते हुए यातायात और भीड़ प्रबंधन की भी प्रभावी व्यवस्था करने को कहा गया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि भर्ती स्थल पर किसी तरह की अव्यवस्था पैदा न हो।

यूपी सरकार का बड़ा कदम, गरीब परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शहरी इलाकों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पक्के मकान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। योजना के तहत प्रदेश के 137 नगरीय निकायों में 73,184 नए आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।

नए आवासों को स्वीकृति मिलने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण यानी बीएलसी घटक के तहत प्रदेश में स्वीकृत मकानों की कुल संख्या 4,88,526 तक पहुंच जाएगी। सरकार का जोर जरूरतमंद परिवारों को समय पर आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने पर है।

137 नगरीय निकायों में बनेंगे नए आवास

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत स्वीकृत नए मकान प्रदेश के 137 नगरीय निकायों में बनाए जाएंगे। इससे शहरी क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके पास अपना पक्का घर नहीं है और जो आवास की जरूरत पूरी करने के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक

इन आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 की राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एसपी गोयल ने की। बैठक में स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण की समय-सीमा और गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, उनका काम तय समय के अनुसार आगे बढ़ाया जाए।

निर्माण में देरी बर्दाश्त नहीं

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवास निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाए। साथ ही समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।

यूपी में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1251 पदों पर भर्ती, युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने पशुपालन निदेशालय के तहत पशुधन प्रसार अधिकारी के 1251 पदों पर भर्ती के लिए मुख्य परीक्षा का विज्ञापन जारी कर दिया है। इस भर्ती के जरिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में जाने का मौका मिलेगा।

मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 9 सितंबर 2026 से शुरू होगी। इच्छुक अभ्यर्थी 29 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन से जुड़ी फीस के समायोजन और किसी गलती में सुधार के लिए 6 अक्टूबर तक का समय दिया जाएगा।

PET-2025 के स्कोर से होगी शॉर्टलिस्टिंग

पशुधन प्रसार अधिकारी की मुख्य परीक्षा में सभी उम्मीदवार सीधे शामिल नहीं हो सकेंगे। मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों का चयन प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET)-2025 के सामान्यीकृत यानी नॉर्मलाइज्ड स्कोर के आधार पर निर्धारित मेरिट के जरिए किया जाएगा। 

दो घंटे में देने होंगे 100 सवालों के जवाब

मुख्य लिखित परीक्षा का पैटर्न भी आयोग की ओर से बताया गया है। परीक्षा में अभ्यर्थियों को 2 घंटे में 100 प्रश्न हल करने होंगे। प्रत्येक प्रश्न का मूल्यांकन उसके निर्धारित अंकों के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में गलत उत्तर देने पर एक चौथाई अंक की निगेटिव मार्किंग भी होगी।

आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे भर्ती की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण और अन्य जरूरी जानकारियां सावधानी से दर्ज करनी होंगी।

यूपी सरकार का फैसला, 16 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने अवकाश यात्रा सुविधा (LTC) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत अब कर्मचारियों को एलटीसी का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 15 दिन के अर्जित अवकाश का इस्तेमाल करना अनिवार्य नहीं होगा। इसके साथ ही एलटीसी के दौरान स्वीकृत अर्जित अवकाश में से अधिकतम 10 दिन के अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी दी गई है।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 16.35 लाख राज्य कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। वित्त विभाग ने वेतन समिति-2016 की सिफारिशों पर विचार के लिए गठित मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की अनुशंसाओं के आधार पर इस संबंध में आदेश जारी किया है।

15 दिन की छुट्टी लेने की बाध्यता खत्म

पहले एलटीसी का इस्तेमाल करने के लिए कर्मचारियों के सामने एक महत्वपूर्ण शर्त थी। उन्हें अवकाश यात्रा सुविधा का लाभ लेने के लिए कम से कम 15 दिन के अर्जित अवकाश का उपयोग करना पड़ता था। इस अनिवार्यता के कारण कई कर्मचारियों के लिए एलटीसी का लाभ लेना मुश्किल हो जाता था।

अब सरकार ने इस शर्त को समाप्त कर दिया है। यानी कर्मचारी को केवल एलटीसी का लाभ लेने के लिए 15 दिन का अर्जित अवकाश खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। इससे कर्मचारियों को अपनी छुट्टियों का इस्तेमाल अपनी जरूरत के अनुसार करने में ज्यादा सुविधा मिलेगी।

10 दिन के अवकाश का हो सकेगा नकदीकरण

सरकार ने एलटीसी से जुड़ा दूसरा बड़ा बदलाव अवकाश नकदीकरण को लेकर किया है। नई व्यवस्था के तहत एलटीसी के लिए स्वीकृत अर्जित अवकाश में से अधिकतम 10 दिन का नकदीकरण किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि पात्र कर्मचारी एलटीसी के दौरान स्वीकृत छुट्टियों में निर्धारित सीमा तक अवकाश का नकद लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा उन कर्मचारियों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकती है, जो यात्रा के साथ अपनी छुट्टियों के आर्थिक लाभ का भी इस्तेमाल करना चाहते हैं।

पहले क्या थी व्यवस्था?

पुराने नियमों के मुताबिक एलटीसी का लाभ उठाने के लिए कर्मचारी को न्यूनतम 15 दिन का अर्जित अवकाश लेना जरूरी था। इसके अलावा एलटीसी के तहत अवकाश नकदीकरण की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। अब दोनों स्तरों पर बदलाव किया गया है। एक तरफ 15 दिन के अर्जित अवकाश के इस्तेमाल की बाध्यता हटा दी गई है, वहीं दूसरी तरफ अधिकतम 10 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान किया गया है।

केंद्र सरकार का नया कानून, नागरिकों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानून को संसद की मंजूरी दिला दी है। बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को राज्यसभा ने 10 अगस्त 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया, जबकि लोकसभा में इसे 5 अगस्त को मंजूरी मिल चुकी थी। नया कानून 1891 में बने करीब 135 साल पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट की जगह लेगा।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन से जुड़े मामलों में देखने को मिलेगा। डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को कानूनी सबूत के तौर पर मान्यता देने का प्रावधान किया गया है। इससे आम नागरिकों को कई स्तर पर राहत मिलने की उम्मीद है।

1. डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को मिलेगा कानूनी सबूत का दर्जा

नए कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड को अदालत में सबूत के तौर पर स्वीकार करने का रास्ता आसान होगा। इलेक्ट्रॉनिक बैंक स्टेटमेंट, कंप्यूटर रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी को भी कानूनी कार्यवाही में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

2. यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से जुड़े विवादों में राहत

आज बड़ी संख्या में लोग पैसे भेजने और प्राप्त करने के लिए यूपीआई, नेट बैंकिंग और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में गलत ट्रांजैक्शन, भुगतान को लेकर विवाद, बैंकिंग फ्रॉड या किसी लेन-देन की पुष्टि से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नए कानून के बाद इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड को अदालत के सामने पेश करना ज्यादा सुविधाजनक होगा।

3. बैंक रिकॉर्ड हासिल करने की प्रक्रिया होगी आसान

पुराने कानून का ढांचा उस दौर के हिसाब से तैयार किया गया था, जब बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागजी बही-खातों और रजिस्टरों में दर्ज होते थे। अब बैंकिंग व्यवस्था काफी हद तक डिजिटल हो चुकी है। नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और उसकी प्रमाणित डिजिटल कॉपी को कानूनी महत्व दिया गया है। इसका मतलब है कि किसी मामले में जरूरी बैंकिंग जानकारी उपलब्ध कराने के लिए केवल भौतिक दस्तावेजों पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी। इससे ग्राहकों और अदालतों, दोनों के लिए रिकॉर्ड से जुड़ी प्रक्रिया ज्यादा सुविधाजनक बन सकती है।

4. बैंक अधिकारियों की अनावश्यक कोर्ट पेशी से राहत

नए प्रावधानों का फायदा बैंकिंग संस्थानों को भी मिलेगा। अगर किसी मुकदमे में बैंक खुद पक्षकार नहीं है, तो केवल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए बैंक अधिकारियों को बार-बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने की जरूरत कम हो सकती है। इससे बैंक कर्मचारियों का समय बचेगा और अदालतों में दस्तावेज पेश करने की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा ग्राहकों को भी मिल सकता है, क्योंकि बैंकिंग रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक तकनीक आधारित हो जाएगी।

यूपी में नई OTS योजना लागू, शहरवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से संपत्ति कर का बकाया रखने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने पुराने गृहकर, जलकर और सीवरकर के बकाये के निपटारे के लिए एकमुश्त समाधान योजना यानी OTS लागू करने का फैसला किया है। इस योजना का उद्देश्य पुराने कर विवादों और लंबित बकाये को आसान तरीके से निपटाना है।

सरकार की यह योजना प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों में लागू की जाएगी। इसमें नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अंतर्गत आने वाले पात्र बकायेदार करदाता शामिल होंगे। योजना से एक ओर लोगों को अपना पुराना बकाया चुकाने का आसान विकल्प मिलेगा, वहीं नगर निकायों की राजस्व वसूली भी बेहतर होने की उम्मीद है।

15 अगस्त से शुरू होगी योजना

उत्तर प्रदेश सरकार की OTS योजना 15 अगस्त 2026 से 15 दिसंबर 2026 तक चलेगी। यानी बकायेदारों के पास अपने पुराने कर का निपटारा करने के लिए करीब चार महीने का समय रहेगा। सरकार ने संबंधित नगरीय निकायों को योजना की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर योजना शुरू होने के शुरुआती दिनों में प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इसका लाभ उठा सकें।

तीन किस्तों में जमा कर सकेंगे बकाया

योजना में बकायेदार करदाताओं के लिए भुगतान की सुविधा को आसान बनाया गया है। पात्र व्यक्ति अपना लंबित संपत्ति कर अधिकतम तीन किस्तों में जमा कर सकता है। नियम के अनुसार योजना शुरू होने के पहले 30 दिनों के भीतर कुल बकाये की एक-तिहाई रकम जमा करनी होगी। इसके बाद बाकी राशि को अगले दो महीनों में दो किस्तों में जमा करने की सुविधा दी जाएगी।

भुगतान का तरीका

पहली किस्त: कुल बकाये का एक-तिहाई हिस्सा, शुरुआती 30 दिनों में

दूसरी किस्त: बची राशि का एक हिस्सा अगले महीने

तीसरी किस्त: शेष बकाया अगले महीने

कुल भुगतान अवधि: अधिकतम तीन महीने

लिवर में जमा फैट कम करने में मदद कर सकते हैं ये 5 आहार, आज से ही डाइट में करें शामिल

हेल्थ डेस्क। बदलती जीवनशैली, कम शारीरिक गतिविधि और असंतुलित खान-पान के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से आम हो रही है। खासकर अधिक कैलोरी, मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने के जोखिम को बढ़ा सकता है। अच्छी बात यह है कि खान-पान और जीवनशैली में सुधार करके लिवर की सेहत को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।

फैटी लिवर में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पूरे खान-पान, नियमित व्यायाम और जरूरत पड़ने पर वजन कम करने की होती है। किसी एक खाद्य पदार्थ को इसका इलाज नहीं माना जा सकता। हालांकि, कुछ पौष्टिक चीजों को रोज की डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, मेथी, सरसों का साग और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां पोषक तत्वों और फाइबर से भरपूर होती हैं। इनमें कैलोरी अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर इन्हें नियमित रूप से खाया जा सकता है।

2. साबुत अनाज

ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस, जौ और साबुत गेहूं जैसे अनाज रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की तुलना में ज्यादा फाइबर प्रदान करते हैं। फाइबर युक्त भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी लेने की संभावना कम हो सकती है।

3. मछली और ओमेगा-3 

सैल्मन, सार्डिन और मैकेरल जैसी तैलीय मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। संतुलित मात्रा में इनका सेवन हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। जो लोग मछली नहीं खाते, वे अखरोट, अलसी और चिया सीड्स जैसे पौधों से मिलने वाले स्रोतों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

4. नट्स और बीज

बादाम, अखरोट और अन्य नट्स में हेल्दी फैट, फाइबर और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में स्नैक के तौर पर लिया जा सकता है। हालांकि नट्स में कैलोरी अधिक होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए। नमक या चीनी से लिपटे नट्स के बजाय सामान्य या कम प्रोसेस्ड विकल्प बेहतर रहते हैं।

5. फल और कम चीनी वाले खाद्य पदार्थ

सेब, संतरा, अमरूद, नाशपाती और बेरीज जैसे पूरे फलों में फाइबर और अन्य पोषक तत्व होते हैं। इन्हें जूस के बजाय साबुत फल के रूप में खाना बेहतर माना जाता है, क्योंकि जूस में फाइबर कम हो सकता है और थोड़े समय में अधिक मात्रा में शुगर का सेवन हो सकता है। फल खाते समय मात्रा और पूरी डाइट के संतुलन का ध्यान रखना भी जरूरी है।

6 ग्रहों का अद्भुत संयोग, 6 राशियों के आएंगे अच्छे दिन, होगी तरक्की

राशिफल। अगस्त 2026 का मध्य ज्योतिष और खगोल विज्ञान, दोनों के लिहाज से खास रहने वाला है। 12 अगस्त 2026 को सुबह सूर्योदय से पहले आसमान में छह ग्रह एक साथ एक दिशा में नजर आ सकते हैं। इस खगोलीय घटना में बृहस्पति, बुध, मंगल, यूरेनस, शनि और नेपच्यून शामिल होंगे। इसे आमतौर पर 'प्लैनेट परेड' या ग्रहों की परेड कहा जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रहों की ऐसी स्थिति को अलग-अलग राशियों के लिए शुभ-अशुभ प्रभावों से जोड़ा जाता है। इस संयोग का असर कुछ राशियों के जातकों के लिए करियर, धन, कारोबार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक माना जा रहा है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई शुरुआत के अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यक्षेत्र में अपनी मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद रहेगी। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है और लंबे समय से अटका कोई काम आगे बढ़ सकता है।

2. मिथुन राशि

छह ग्रहों के इस संयोग को मिथुन राशि के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जा सकता है। इस अवधि में नौकरी और करियर से जुड़े नए अवसर सामने आ सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षा या इंटरव्यू की तैयारी कर रहे युवाओं को भी सकारात्मक परिणाम की उम्मीद रहेगी।

3. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए यह खगोलीय संयोग आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा को बढ़ाने वाला माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और आपकी प्रतिभा की सराहना हो सकती है। जो लोग लंबे समय से नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं, उन्हें कोई अच्छा अवसर मिल सकता है। व्यापार में विस्तार की योजना बना रहे जातकों को भी लाभ मिलने के योग बन सकते हैं।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह अवधि धन और संबंधों के लिहाज से सकारात्मक रह सकती है। आय के अतिरिक्त स्रोत मिलने की संभावना बन सकती है। लंबे समय से अटका भुगतान मिलने से आर्थिक राहत मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या पदोन्नति से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है।

5. मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए यह समय करियर में आगे बढ़ने का मौका दे सकता है। कामकाज में आपकी मेहनत रंग ला सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है। जो लोग लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं।

6. कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह ग्रह संयोग कई सकारात्मक बदलावों का संकेत माना जा रहा है। नौकरी और कारोबार में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। विदेश या दूसरे शहर से जुड़े काम करने वालों को भी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ बचत पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

8वें वेतन आयोग पर सरकार ने संसद में दिया बड़ा अपडेट, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी को लेकर कही ये बात

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर अभी इंतजार जारी है। सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि आयोग ने अभी तक अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को नहीं सौंपी हैं। ऐसे में नई वेतन व्यवस्था कब से लागू होगी, फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, इन सवालों का जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।

वित्त मंत्रालय की ओर से 10 अगस्त को लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग जरूरत पड़ने पर किसी विशेष विषय पर अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकता है।

3 नवंबर 2025 को हुआ था आयोग का गठन

8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई इसकी अध्यक्ष हैं। आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े वेतन एवं लाभों की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों पर विचार करेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नया वेतनमान किस रूप में लागू किया जाएगा और कर्मचारियों को वास्तविक लाभ कब से मिलेगा।

लागू होने की तारीख पर स्थिति साफ नहीं

लोकसभा में सरकार से यह भी पूछा गया था कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें किस तारीख से प्रभावी होंगी। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि चूंकि आयोग ने अभी अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं की हैं, इसलिए प्रभावी तारीख को लेकर फिलहाल कोई अंतिम जानकारी नहीं दी जा सकती। इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारियों को अभी फिटमेंट फैक्टर, संशोधित बेसिक पे और भत्तों में संभावित बदलाव के लिए आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।

2.92 फिटमेंट फैक्टर की मांग चर्चा में

8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों और आयोग के बीच बैठकों का दौर भी जारी है। हाल में दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान रेलवे कर्मचारियों से जुड़े एक संगठन ने 2.92 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। यदि केवल उदाहरण के तौर पर 2.92 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाए तो गणना के आधार पर बेसिक पे करीब 52,560 रुपये हो सकती है।

डीए को बेसिक पे में जोड़ने की भी मांग

कर्मचारी संगठनों की ओर से महंगाई भत्ते यानी डीए को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग भी उठाई जा रही है। कर्मचारियों का तर्क है कि इससे संशोधित बेसिक वेतन बढ़ सकता है और भविष्य में कुछ भत्तों तथा सेवानिवृत्ति लाभों की गणना पर भी इसका असर पड़ सकता है। लेकिन डीए मर्जर को लेकर भी अभी केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इसी तरह फिटमेंट फैक्टर का अंतिम आंकड़ा भी तय नहीं हुआ है।

पेंशन और भत्तों पर भी रहेगी नजर

केंद्रीय कर्मचारियों के अलावा पेंशनर्स की नजर भी आयोग की सिफारिशों पर है। आयोग के दायरे में पेंशन और फैमिली पेंशन से जुड़े मामलों की समीक्षा भी शामिल है। इसलिए रिपोर्ट आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पेंशन से जुड़े नियमों में क्या बदलाव सुझाए जाते हैं। वहीं कर्मचारियों के लिए एचआरए, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों में संभावित बदलाव भी महत्वपूर्ण रहेंगे। इन पर अंतिम तस्वीर आयोग की सिफारिश और उसके बाद सरकार के फैसले से ही स्पष्ट होगी।

अभी कर्मचारियों को करना होगा इंतजार

फिलहाल 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और आयोग विभिन्न पक्षों से सुझाव एवं मांगें जुटा रहा है। संसद में सरकार के जवाब से इतना जरूर स्पष्ट है कि अभी आयोग की अंतिम सिफारिशें सरकार के पास नहीं पहुंची हैं। इसलिए सोशल मीडिया या विभिन्न रिपोर्टों में सामने आ रहे फिटमेंट फैक्टर और संभावित वेतन वृद्धि के आंकड़ों को अंतिम फैसला मानना सही नहीं होगा। कर्मचारियों और पेंशनर्स को आयोग की रिपोर्ट तथा केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

केंद्र सरकार ने दिया बड़ा अपडेट, पुरानी पेंशन योजना को लेकर कर्मचारियों को लगा झटका

नई दिल्ली। पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को फिर से लागू करने की मांग कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फिलहाल राहत की खबर नहीं है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय स्तर पर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। सरकार का कहना है कि OPS को बहाल करने से लंबे समय में सरकारी वित्त पर काफी बड़ा दबाव पड़ सकता है।

लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए बताया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को वापस लागू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकार के अनुसार, OPS में कर्मचारियों को मिलने वाले पेंशन लाभ की जिम्मेदारी सीधे सरकार पर आती है, जिससे भविष्य में राजकोष पर लगातार बढ़ता बोझ पड़ सकता है।

राज्यों के लिए फैसला अलग

केंद्र सरकार ने यह भी साफ किया है कि किसी राज्य में पुरानी पेंशन योजना लागू करने या उसे वापस लेने का निर्णय संबंधित राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी NPS से OPS की ओर लौटने के संबंध में केंद्र और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) को जानकारी दी है।

NPS की रकम लौटाने का प्रावधान नहीं

सरकार ने बताया कि मौजूदा नियमों में NPS के तहत जमा कर्मचारी और सरकार के योगदान तथा उस पर अर्जित रिटर्न को निकालकर संबंधित राज्य सरकार को वापस करने की व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि NPS से OPS में जाने की प्रक्रिया केवल प्रशासनिक या राजनीतिक निर्णय से पूरी नहीं हो सकती।

केंद्र ने कर्मचारियों को दिया UPS का विकल्प

केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना के बजाय कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS की व्यवस्था शुरू की है। यह योजना 1 अप्रैल 2025 से NPS के विकल्प के रूप में लागू है। इसका मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक निश्चित और भरोसेमंद पेंशन लाभ उपलब्ध कराना है।

NPS के तहत 3.65 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 7 जुलाई तक केंद्रीय कर्मचारियों के NPS से संबंधित करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति प्रबंधन के तहत थी। इतनी बड़ी राशि के कारण पेंशन व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव का वित्तीय प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदों पर फिलहाल ब्रेक

पुरानी पेंशन योजना को लेकर लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों की ओर से मांग उठती रही है। कर्मचारियों का एक वर्ग NPS की जगह OPS को अधिक सुरक्षित विकल्प मानता है, जबकि सरकार पेंशन व्यवस्था के दीर्घकालिक वित्तीय बोझ को लेकर चिंताएं जताती रही है। ऐसे में केंद्र सरकार के ताजा रुख से फिलहाल OPS की बहाली की उम्मीद कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों को निराशा हो सकती है।

यूपी सरकार की बड़ी तैयारी, गाय पालने वालों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में सरकार एक नई पहल को विस्तार देने की तैयारी कर रही है। बुलंदशहर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किए गए गोमूत्र डेयरी मॉडल को अब प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी आजमाने की योजना बनाई जा रही है।

इस मॉडल का उद्देश्य गोमूत्र को केवल अपशिष्ट के तौर पर देखने के बजाय उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैविक खेती से जोड़ना है। इसके तहत गांवों में संग्रहण केंद्र बनाए जा रहे हैं, जहां पशुपालकों से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। इससे गाय पालने वाले परिवारों को अतिरिक्त आमदनी का जरिया मिल सकता है।

10 रुपये प्रति लीटर की दर से हो रही खरीद

बुलंदशहर में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट के तहत गोमूत्र को करीब 10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। इसके लिए गांवों में निर्धारित स्थानों पर संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। यहां एकत्र किए गए गोमूत्र को आगे प्रसंस्करण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

15 गांवों से शुरू हुआ मॉडल

बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में एफपीओ के माध्यम से यह प्रयोग शुरू किया गया है। आसपास के करीब 15 गांवों को इस पहल से जोड़ा गया है। गोमूत्र के संग्रहण के लिए करीब 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत इन केंद्रों पर प्रतिदिन लगभग 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है।

करीब 300 महिलाएं इससे जुड़ीं

इस परियोजना में करीब 300 महिलाओं को जोड़े जाने की बात सामने आई है। महिलाओं की भागीदारी को इस योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है। गांवों में गोमूत्र संग्रह करने में मदद करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर 2 रुपये कमीशन देने की व्यवस्था की गई है।

गोमूत्र से तैयार किए जा रहे कृषि उत्पाद

एफपीओ द्वारा संग्रहित गोमूत्र को सीधे बाजार में भेजने के बजाय उससे कृषि उपयोग के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसमें विभिन्न जड़ी-बूटियों आदि को मिलाकर कीट नियंत्रक और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

20 रुपये प्रति लीटर तक कीमत बढ़ाने की योजना

गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। यदि यह व्यवस्था बड़े स्तर पर सफल होती है तो पशुपालकों के लिए गोमूत्र से अतिरिक्त आय का रास्ता खुल सकता है।

बिहार डीएलएड में नामांकन के लिए आवेदन शुरू, युवाओं के लिए खुशखबरी, ऐसे करें अप्लाई

पटना। बिहार में डीएलएड करने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने डीएलएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य के मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले के इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा।

नामांकन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी 16 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी पसंद के प्रशिक्षण संस्थानों का विकल्प भी देना होगा। इसी विकल्प और प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर आगे संस्थान का आवंटन किया जाएगा।

ऑनलाइन आवेदन करते समय देना होगा संस्थानों का विकल्प

डीएलएड में दाखिले के लिए अभ्यर्थियों को बिहार बोर्ड के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन पूरा करना होगा। आवेदन प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के साथ पसंद के प्रशिक्षण संस्थानों का चयन करना जरूरी होगा। अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए विकल्पों और प्रवेश परीक्षा में हासिल किए गए अंकों को ध्यान में रखते हुए समिति चयन सूची तैयार करेगी। इसलिए आवेदन करते समय संस्थानों का विकल्प सावधानी से भरने की सलाह दी गई है।

20 अगस्त को आएगी पहली चयन सूची

बिहार बोर्ड की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक डीएलएड नामांकन की पहली चयन सूची 20 अगस्त को जारी की जाएगी। इस सूची में जगह बनाने वाले अभ्यर्थियों को आवंटित संस्थान में जाकर दाखिला पूरा करने के लिए 20 से 24 अगस्त तक का समय मिलेगा। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों को 25 अगस्त तक पोर्टल पर उपलब्ध सीटों और नामांकन से जुड़ी जानकारी अपडेट करनी होगी।

दूसरी मेरिट लिस्ट 29 अगस्त को

पहली चयन प्रक्रिया के बाद बोर्ड दूसरी चयन सूची जारी करेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 अगस्त को दूसरी चयन सूची प्रकाशित होगी। इसमें चयनित अभ्यर्थियों को 29 अगस्त से 1 सितंबर तक संबंधित संस्थान में नामांकन कराने का अवसर दिया जाएगा। दूसरी सूची के बाद भी यदि कुछ प्रशिक्षण संस्थानों में सीटें खाली रह जाती हैं तो उन सीटों को भरने के लिए बोर्ड की ओर से आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

5 सितंबर को जारी होगी तीसरी सूची

डीएलएड नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में तीसरी चयन सूची 5 सितंबर को जारी की जाएगी। इस सूची में चयनित अभ्यर्थी 5 से 7 सितंबर के बीच आवंटित प्रशिक्षण संस्थान में दाखिला ले सकेंगे। इस तरह अभ्यर्थियों को आवेदन की अंतिम तारीख से लेकर चयन सूची और नामांकन की सभी तारीखों पर विशेष ध्यान देना होगा।

बिहार के पेंशनधारियों को खुशखबरी! सरकार ने खाते में भेजे पेंशन के पैसे

पटना। बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ लेने वाले बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने तय कार्यक्रम के अनुसार 10 अगस्त को पेंशन की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी है। इस बार बड़ी संख्या में पेंशनधारियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से भुगतान किया गया है।

सरकार ने पेंशन भुगतान के लिए हर महीने की 10 तारीख निर्धारित की है। इसी व्यवस्था के तहत 10 अगस्त को पात्र लाभार्थियों के खातों में 1100 रुपये की मासिक पेंशन भेजी गई। भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की गई, जिससे राशि सीधे बैंक खाते तक पहुंचती है।

1 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को भुगतान

राज्य में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में लोग आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 1 करोड़ 1 लाख 33 हजार पेंशनधारियों के खातों में इस चरण की राशि भेजी गई है। डीबीटी व्यवस्था के जरिए भुगतान होने से लाभार्थियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। राशि सीधे बैंक खाते में भेजे जाने के कारण भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

पहले 400 रुपये मिलते थे, अब 1100 रुपये

बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत पहले लाभार्थियों को हर महीने 400 रुपये की आर्थिक सहायता मिलती थी। राज्य सरकार ने पेंशन राशि में बढ़ोतरी करते हुए इसे 1100 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इस बढ़ी हुई राशि का उद्देश्य बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है।

बैंक खाते में पैसा आया या नहीं, ऐसे करें पता

पेंशन की रकम खाते में पहुंची है या नहीं, यह जानने के लिए सबसे पहले बैंक से जुड़े मोबाइल नंबर पर आया SMS चेक किया जा सकता है। भुगतान होने पर बैंक की ओर से खाते में राशि जमा होने की सूचना मिल सकती है। इसके अलावा लाभार्थी बैंक शाखा, ATM या नजदीकी ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) पर जाकर भी खाते का बैलेंस जांच सकते हैं। जिन लोगों के पास ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा है, वे उसके माध्यम से भी खाते में जमा राशि की जानकारी ले सकते हैं।

12 से 22 अगस्त तक बनेंगे शुभ योग, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन-करियर में लाभ

राशिफल। अगस्त का मध्य भाग ज्योतिष की दृष्टि से कई राशि वालों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 12 से 22 अगस्त 2026 के बीच ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलावों का असर अलग-अलग राशियों के जीवन पर पड़ सकता है। इस दौरान कुछ जातकों को करियर में नए अवसर, आर्थिक लाभ और रुके हुए कामों में सफलता मिलने के योग बन सकते हैं।

12 अगस्त को अमावस्या तिथि और उसके आसपास ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति में बदलाव रहेगा। वहीं 22 अगस्त के आसपास सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर इस अवधि में वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए समय अपेक्षाकृत अनुकूल रह सकता है।

1. वृषभ राशि

12 से 22 अगस्त के बीच वृषभ राशि वालों को अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत अधिकारियों की नजर में आ सकती है और नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को किसी अच्छे अवसर की जानकारी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में भी समय सकारात्मक रह सकता है। 

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए यह अवधि नए अवसर लेकर आ सकती है। करियर में लंबे समय से अटका कोई काम आगे बढ़ सकता है। नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारी या किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में काम करने का मौका मिल सकता है। व्यापारियों के लिए भी समय लाभकारी रह सकता है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए 12 से 22 अगस्त के बीच आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत हो सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी बात को महत्व मिल सकता है और वरिष्ठ अधिकारियों से सहयोग प्राप्त होने की संभावना है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह अवधि करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकती है। नौकरी में बदलाव की योजना बना रहे लोगों को कोई बेहतर विकल्प मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत और कार्यशैली की प्रशंसा हो सकती है। व्यापारियों के लिए नए संपर्क लाभदायक साबित हो सकते हैं।

5. मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए 12 से 22 अगस्त का समय मेहनत का फल देने वाला रह सकता है। करियर में नई दिशा मिलने के साथ किसी महत्वपूर्ण काम की जिम्मेदारी मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में विस्तार की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल रह सकता है।

बिहार में बिगड़ेगा मौसम, 20+ जिलों में भारी बारिश के आसार

पटना। बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले तीन दिनों तक बारिश, मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। खासतौर पर उत्तर बिहार, सीमांचल और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 11 से 13 अगस्त के बीच अलग-अलग जिलों में आंधी-तूफान के साथ बारिश और बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है। इस दौरान हवा की गति करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। विभाग ने किसानों और आम लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।

11 अगस्त को इन इलाकों में अलर्ट

मंगलवार, 11 अगस्त को बिहार के पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में मौसम का प्रभाव अधिक रहने की संभावना है। उत्तर-पूर्वी बिहार के सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में गरज-चमक के साथ वज्रपात और तेज हवा चलने की आशंका है। इन जिलों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। वहीं दक्षिण-पश्चिमी बिहार के बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और अरवल में भी मेघ गर्जन तथा आकाशीय बिजली को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। 

12 अगस्त को उत्तर बिहार में बढ़ेगी बारिश

12 अगस्त को मौसम का दायरा और बढ़ सकता है। उत्तर बिहार के लगभग सभी जिलों में मेघ गर्जन, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, गोपालगंज, सीवान, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में येलो अलर्ट जारी किया गया है। 

इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। साथ ही बारिश के दौरान बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। दूसरी ओर पटना, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, गया, नवादा औरंगाबाद और भागलपुर समेत कुछ जिलों में मौसम अपेक्षाकृत शांत रहने का अनुमान है।

13 अगस्त को सीमांचल में भारी बारिश की संभावना

13 अगस्त को भी उत्तर बिहार के कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इसके अलावा पूर्वी बिहार के मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर, बांका और जमुई में भी येलो अलर्ट रहेगा। खास तौर पर किशनगंज और कटिहार के आसपास के क्षेत्रों में तेज हवा, वज्रपात और भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। 

उत्तर और पूर्वी बिहार के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक जारी रहने की संभावना है। वहीं पटना, नालंदा, गया, औरंगाबाद और रोहतास जैसे दक्षिणी जिलों में 13 अगस्त को मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने का पूर्वानुमान है।

बिहार पंचायत चुनाव से पहले बदलेगा गांवों का सिस्टम, लोगों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर सरकार ने अहम जानकारी साझा की है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक, राज्य में पंचायतों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। परिसीमन पूरा होने के बाद ही पंचायत चुनाव से जुड़ी अगली प्रक्रिया शुरू होगी।

सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अभी चुनाव की निश्चित तारीख या पूरा कार्यक्रम घोषित करना संभव नहीं है। परिसीमन के बाद आरक्षण से जुड़ी सूची तैयार होगी और इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस पूरी प्रक्रिया में राज्य निर्वाचन आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

परिसीमन के बाद तय होगी चुनाव की आगे की राह

पंचायतों की सीमाओं को नए सिरे से तय करना चुनाव प्रक्रिया का अहम चरण माना जाता है। मंत्री के अनुसार, परिसीमन पूरा होने के बाद आरक्षण संबंधी प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देगा।

विभाग की ओर से निर्वाचन आयोग को जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि परिसीमन और आरक्षण से संबंधित काम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जल्द पूरा हो, ताकि इसके बाद पंचायत चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाया जा सके।

गांवों में सरकारी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर

पंचायती राज विभाग की ओर से सिर्फ चुनावी तैयारियों पर ही काम नहीं किया जा रहा है। सरकार पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक आसानी से पहुंचाने की दिशा में भी कदम उठा रही है।

मंत्री ने बताया कि ग्रामीणों को सरकारी काम के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों में जाने की परेशानी कम करने की योजना है। इसके तहत पंचायत स्तर पर कई सुविधाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

पंचायत भवन बनेंगे ग्रामीणों का सुविधा केंद्र

सरकार सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सरकार भवन तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इन भवनों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर विभिन्न सरकारी सेवाओं को एक जगह उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों के जरिए ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और जरूरी प्रशासनिक सेवाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी। इससे पंचायतों को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कामकाज को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

चुनाव के साथ पंचायतों को मजबूत करने की तैयारी

बिहार में एक ओर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए परिसीमन और आरक्षण जैसे जरूरी चरणों पर काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं को मजबूत बनाने की तैयारी भी चल रही है। पंचायत सरकार भवन, आरटीपीएस सेवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से लोगों को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

ब्रेन ट्यूमर के 5 बड़े संकेत, शरीर में दिखें ये लक्षण तो न करें नजरअंदाज

हेल्थ डेस्क। ब्रेन ट्यूमर ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क के अंदर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होने लगती है। हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता, लेकिन मस्तिष्क में जगह सीमित होने के कारण ट्यूमर का दबाव आसपास के हिस्सों पर असर डाल सकता है। इसके चलते शरीर में कुछ ऐसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण ट्यूमर के आकार, उसकी स्थिति और बढ़ने की गति के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार शुरुआती लक्षण सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे लगते हैं। इसलिए लगातार बने रहने वाले या धीरे-धीरे बढ़ रहे असामान्य लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

1. बार-बार या बढ़ता हुआ सिरदर्द

लगातार सिरदर्द होना ब्रेन ट्यूमर का संभावित संकेत हो सकता है, खासकर जब सिरदर्द पहले से अलग हो या समय के साथ बढ़ता जाए। कुछ लोगों में सुबह के समय सिरदर्द अधिक महसूस हो सकता है या खांसने, छींकने और जोर लगाने पर दर्द बढ़ सकता है। हालांकि, सिरदर्द के बहुत से सामान्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल सिरदर्द के आधार पर ब्रेन ट्यूमर का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

2. अचानक दिखाई देने में परेशानी

ब्रेन के कुछ हिस्सों पर दबाव पड़ने से दृष्टि से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। धुंधला दिखाई देना, दो चीजें दिखाई देना या नजर के क्षेत्र में बदलाव जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। अगर आंखों से जुड़ी परेशानी अचानक शुरू हुई है, बार-बार हो रही है या लगातार बनी हुई है तो इसकी जांच कराना जरूरी है। इसके पीछे ब्रेन ट्यूमर के अलावा कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

3.किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन

हाथ-पैर या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, सुन्नपन या संवेदना कम होना भी एक चेतावनी संकेत हो सकता है। खासकर यदि यह समस्या शरीर के एक तरफ अधिक महसूस हो या समय के साथ बढ़ती जाए। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनके पीछे ब्रेन ट्यूमर के अलावा स्ट्रोक और दूसरी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं।

4. बोलने और समझने में दिक्कत

ब्रेन के भाषा से जुड़े हिस्से प्रभावित होने पर व्यक्ति को बोलने में परेशानी, सही शब्द खोजने में कठिनाई या दूसरों की बात समझने में समस्या हो सकती है। बातचीत के दौरान बार-बार शब्द भूलना या बोलने का तरीका असामान्य होना भी ध्यान देने योग्य बदलाव है। अगर बोलने में परेशानी अचानक शुरू हुई है तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

5. दौरे पड़ना या व्यवहार में बदलाव

ऐसे व्यक्ति को अचानक दौरा पड़ना, शरीर में झटके आना या कुछ समय के लिए असामान्य व्यवहार करना भी मस्तिष्क से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में याददाश्त, एकाग्रता, व्यक्तित्व या व्यवहार में बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं। पहली बार दौरा पड़ने की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार न्यूरोलॉजिकल जांच और ब्रेन इमेजिंग जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।