सरकार की योजना है कि यह ई-गवर्नेंस पोर्टल अगस्त-सितंबर तक शुरू किया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए नगर कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
लोगों कप एक प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी कई सेवाएं
नई डिजिटल व्यवस्था के तहत नागरिकों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें होल्डिंग टैक्स जमा करना, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन, भवन निर्माण की अनुमति और शिकायत दर्ज कराने जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इससे लोगों का समय बचेगा और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
पांच साल में खर्च होंगे करीब 120 करोड़ रुपये
राज्य सरकार ने इस डिजिटल परियोजना को लागू करने के लिए अगले पांच वर्षों में करीब 119.90 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। इस राशि का इस्तेमाल डिजिटल सिस्टम तैयार करने, संचालन, रखरखाव और नगर निकायों की व्यवस्थाओं को ऑनलाइन जोड़ने में किया जाएगा।
सभी नगर निकाय होंगे डिजिटल सिस्टम से जुड़े
इस परियोजना के तहत राज्य के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे नगर निकायों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को सेवाएं समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
ऑनलाइन सुविधा से नागरिकों को बड़ी राहत
अभी कई नागरिक सेवाओं के लिए लोगों को संबंधित कार्यालयों में जाना पड़ता है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से आवेदन और भुगतान जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से कामकाज में तेजी आएगी और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया भी बेहतर होगी।
ई-गवर्नेंस से बदलेगी शहरी व्यवस्था
यह परियोजना शहरी विकास को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से जहां नागरिकों को सुविधा मिलेगी, वहीं नगर निकायों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। सरकार को उम्मीद है कि नई ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के बाद बिहार के शहरों में नागरिक सेवाओं का संचालन पहले से ज्यादा आसान और प्रभावी हो जाएगा।














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