रेलवे बोर्ड ने अराजपत्रित कर्मचारियों के स्थानांतरण और तैनाती से संबंधित अलग-अलग समय पर जारी निर्देशों को एक जगह समेकित करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जहां प्रशासनिक रूप से संभव हो, कर्मचारियों को परिवार से दूर रहकर नौकरी करने की परेशानी कम हो और बच्चों की देखभाल जैसी जिम्मेदारियां भी आसानी से निभाई जा सकें।
नई व्यवस्था में पति-पत्नी दोनों रेलवे कर्मचारी हैं तो क्या होगा?
अगर पति और पत्नी दोनों रेलवे में कार्यरत हैं और एक ही सीनियरिटी यूनिट में आते हैं, तो प्रशासन उनकी पोस्टिंग एक ही स्टेशन पर करने की संभावना तलाशेगा। हालांकि, तैनाती तय करते समय एक अहम शर्त का ध्यान रखा जाएगा। दोनों में से किसी एक कर्मचारी को दूसरे के सीधे अधीनस्थ पद पर तैनात नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर प्रशासनिक निष्पक्षता और सेवा संबंधी व्यवस्था को बनाए रखना है।
अलग-अलग सीनियरिटी यूनिट होने पर क्या व्यवस्था होगी?
यदि पति-पत्नी रेलवे की अलग-अलग सीनियरिटी यूनिट में काम कर रहे हैं, तो ऐसी जगह पोस्टिंग देने की कोशिश की जाएगी जहां दोनों के लिए उपयुक्त पद उपलब्ध हों। हालांकि, हर मामले में एक ही स्टेशन पर तैनाती संभव नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में प्रशासन उपलब्ध पदों और कर्मचारी की सेवा संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी द्वारा कैटेगरी बदलने के अनुरोध पर भी लागू नियमों के तहत विचार किया जा सकता है।
पोस्टिंग नहीं मिलने पर कर्मचारी क्या कर सकता है?
नए प्रावधानों में शिकायतों के निपटारे को लेकर भी व्यवस्था रखी गई है। यदि किसी कर्मचारी को पति-पत्नी की संयुक्त पोस्टिंग से संबंधित अनुरोध के बावजूद सुविधा नहीं मिलती है, तो संबंधित प्रशासन को निर्णय का उचित कारण बताना होगा। इसके अलावा, कर्मचारी की शिकायत पर अंतिम निर्णय उसी अधिकारी से कम से कम एक स्तर ऊपर का अधिकारी करेगा, जिसने मूल फैसला लिया था। इससे शिकायतों की समीक्षा के लिए एक अतिरिक्त प्रशासनिक स्तर उपलब्ध होगा।
ट्रांसफर और शिकायतों का रखा जा सकता है रिकॉर्ड
पति-पत्नी की पोस्टिंग से जुड़े मामलों की निगरानी बेहतर तरीके से करने के लिए ट्रांसफर अनुरोधों और शिकायतों का अलग रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कितने कर्मचारियों ने संयुक्त पोस्टिंग के लिए आवेदन किया और उनके मामलों में क्या निर्णय लिया गया। यह व्यवस्था प्रशासन को ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा करने में भी मदद कर सकती है।
किन रेलवे कर्मचारियों पर लागू होंगे ये निर्देश?
नए दिशा-निर्देश मुख्य रूप से अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों से जुड़े हैं। यानी ऐसे कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामलों में इन प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा। वहीं, राजपत्रित अधिकारियों के लिए पहले से लागू स्थानांतरण और तैनाती संबंधी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनके मामलों में मौजूदा प्रावधान ही लागू रहेंगे।
पुराने मामलों पर नहीं होगा दोबारा विचार
रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों का निपटारा पहले ही पुराने नियमों के तहत किया जा चुका है, उन्हें नए दिशा-निर्देशों के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी नए प्रावधान मुख्य रूप से आगे आने वाले मामलों में लागू होंगे।
परिवार के साथ रहने में मिलेगी मदद
रेलवे में बड़ी संख्या में कर्मचारी अलग-अलग शहरों और स्टेशनों पर तैनात रहते हैं। पति-पत्नी दोनों के रेलवे में काम करने की स्थिति में अलग-अलग जगह पोस्टिंग होने से परिवार को कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नए दिशा-निर्देशों में एक ही स्टेशन या आसपास पोस्टिंग की संभावना पर जोर दिए जाने से कर्मचारियों को परिवार के साथ रहने का बेहतर अवसर मिल सकता है।









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