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बिहार में प्राइवेट स्कूलों पर सख्ती: फीस वृद्धि और मनमानी पर एक्शन शुरू

न्यूज डेस्क। बिहार में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली और नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। तिरहुत प्रमंडल में हाल ही में सामने आए मामलों के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल ने कहा है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि निजी स्कूलों को तय नियमों का पालन हर हाल में करना होगा।

अभिभावकों से की गई अपील

प्रशासन ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि यदि किसी स्कूल द्वारा बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2019 के खिलाफ जाकर फीस वसूली की जाती है, तो इसकी शिकायत तुरंत जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को करें। इससे समय पर कार्रवाई संभव हो सकेगी।

फीस बढ़ोतरी पर रोक और पारदर्शिता

नए निर्देशों के अनुसार निजी स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यदि किसी परिस्थिति में फीस बढ़ाना आवश्यक भी हो, तो इसके लिए तय प्रक्रिया और सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना है।

स्कूलों के लिए जारी किये गए प्रमुख निर्देश

प्रशासन ने निजी विद्यालयों को कई सख्त नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत:

1 .सभी शुल्कों का पूरा विवरण स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। 

2 .री-एडमिशन फीस और अन्य प्रतिबंधित शुल्क लेने पर रोक रहेगी। 

3 .किताबों और यूनिफॉर्म की सूची सार्वजनिक करनी होगी। 

4 .अभिभावक किसी भी दुकान से सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। 

5 .स्कूल किसी विशेष दुकान या ब्रांड से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। 

6 .बार-बार किताबों और यूनिफॉर्म के पैटर्न बदलने पर रोक रहेगी। 

7 .फीस बकाया होने पर भी छात्रों को परीक्षा या कक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा। 

यूपी में लेखपाल की बंपर भर्ती: एडमिट कार्ड हुआ जारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। 21 मई को होने वाली मुख्य परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं। उम्मीदवार अब इन्हें ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं।

एडमिट कार्ड वेबसाइट पर उपलब्ध

अभ्यर्थी अपना प्रवेश पत्र आधिकारिक वेबसाइट UPSSSC आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और जरूरी शुल्क का पालन करना होगा। इसके अलावा उम्मीदवारों को आयोग के मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए भी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है।

44 जिलों में होगी परीक्षा

यह परीक्षा पूरे प्रदेश के 44 जिलों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। अभ्यर्थियों को समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचने की सख्त सलाह दी गई है ताकि किसी भी तरह की असुविधा न हो।

7,994 पदों पर भर्ती प्रक्रिया

यह भर्ती अभियान कुल 7,994 पदों को भरने के लिए आयोजित किया जा रहा है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा भी काफी अधिक रहने की संभावना है।

दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र पर दिए गए निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। परीक्षा केंद्र पर नियमों का पालन न करने पर अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यूपी में पेंशनर्स के लिए बड़ा बदलाव, सरकार ने लागू किए नए नियम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पेंशन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए वित्त विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। चित्रकूट कोषागार में सामने आए 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले के बाद सरकार ने पहली बार कोषागारों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। इस नए नियम का सीधा असर प्रदेश के करीब 12 लाख पेंशनर्स पर पड़ेगा।

घोटाले के बाद सरकार का बड़ा एक्शन

पिछले वर्षों में चित्रकूट कोषागार में मृत पेंशनरों के खातों में अवैध लेन-देन और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। जांच में लगभग 43.13 करोड़ रुपये के गबन की बात उजागर हुई, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां भी हुईं और सैकड़ों बैंक खाते सीज किए गए। इसी घटना को आधार बनाकर सरकार ने पूरी प्रणाली को मजबूत करने का फैसला लिया है।

बैंक खाता बदलने की प्रक्रिया आसान नहीं

नई व्यवस्था के तहत अब पेंशनर्स के बैंक खाते में किसी भी प्रकार का बदलाव सीधे मुख्य कोषाधिकारी (CTO) द्वारा नहीं किया जा सकेगा। पहले यह अधिकार स्थानीय स्तर पर ही इस्तेमाल हो जाता था, जिससे गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी। अब इस प्रक्रिया में कई स्तरों की जांच जरूरी होगी। मुख्य या वरिष्ठ कोषाधिकारी केवल संस्तुति देंगे, जबकि अंतिम अनुमोदन मंडलीय अपर निदेशक से लेना अनिवार्य होगा।

दस्तावेजों की जांच होगी अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार, बैंक खाता बदलने के लिए पेंशनर्स को कई दस्तावेज देने होंगे। इनमें नए और पुराने बैंक खाते की स्वप्रमाणित कॉपी शामिल होगी। यदि बैंक शाखा बदली जा रही है, तो पुरानी शाखा का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जरूरी होगा। इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पूरी प्रक्रिया डिजिटल और चरणबद्ध

आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित पटल सहायक पहले पेंशनर के रिकॉर्ड की जांच करेगा। इसके बाद मामला सहायक कोषाधिकारी और मुख्य कोषाधिकारी के पास जाएगा। सभी स्तरों से संस्तुति के बाद फाइल को ई-मेल के जरिए अपर निदेशक के पास भेजा जाएगा। अंतिम मंजूरी के बाद ही खाता परिवर्तन किया जा सकेगा।

पेंशन व्यवस्था में व्यापक सुधार

नई एसओपी सिर्फ बैंक खाता परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पेंशन भुगतान आदेश (PPO), पारिवारिक पेंशन, नियमित पेंशन भुगतान, पेंशन बकाया और जीवित प्रमाण पत्र जैसी सभी प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसका उद्देश्य पूरे सिस्टम को एकरूप और पारदर्शी बनाना है।

पारदर्शिता और सुरक्षा होगी मजबूत

कोषागार निदेशक वीके सिंह के अनुसार, यह पहली बार है जब कोषागारों के लिए विस्तृत एसओपी तैयार की गई है। इससे पहले सभी प्रक्रियाएं अलग-अलग शासनादेशों पर आधारित थीं, जिससे कई बार भ्रम की स्थिति बनती थी। अब सभी नियमों को एक ढांचे में समाहित कर दिया गया है।

पेट की गैस से परेशान? पीना शुरू करें ये 3 जादुई चीजें

हेल्थ डेस्क। आजकल बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान और तनाव के कारण पेट में गैस, अपच और भारीपन की समस्या आम हो गई है। यह समस्या भले ही छोटी लगे, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी को काफी असहज बना देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ प्राकृतिक और घरेलू पेय पदार्थों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

1. सौंफ का पानी

सौंफ का पानी पेट की गैस और अपच के लिए एक पारंपरिक और बेहद प्रभावी उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तेल पाचन तंत्र को शांत करते हैं और गैस बनने की प्रक्रिया को कम करते हैं। रात में एक चम्मच सौंफ को पानी में भिगोकर सुबह उस पानी को पीने से पेट हल्का महसूस होता है। यह पेट की सूजन और भारीपन को कम करने में भी मदद करता है।

2. अदरक की चाय

अदरक को आयुर्वेद में पाचन का मजबूत सहायक माना गया है। अदरक की चाय पेट में बनने वाली गैस को कम करने में मदद करती है और भोजन को जल्दी पचाने में सहायक होती है। अदरक में मौजूद प्राकृतिक तत्व पेट की मांसपेशियों को आराम देते हैं, जिससे गैस और ऐंठन की समस्या में राहत मिल सकती है। दिन में एक से दो बार अदरक की हल्की चाय पीना फायदेमंद हो सकता है।

3. अजवाइन का पानी

अजवाइन को पेट की समस्याओं के लिए रामबाण माना जाता है। इसका पानी पीने से गैस, एसिडिटी और पेट दर्द में राहत मिलती है। एक चम्मच अजवाइन को पानी में उबालकर या भिगोकर पीने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और पेट में जमा गैस बाहर निकलने में मदद मिलती है।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, बिहारवासियों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी सौगात की घोषणा की गई है। राज्य में देश का तीसरा राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) स्थापित किया जाएगा। इस फैसले से बिहार के शिक्षा, कृषि और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह कदम बिहार को फूड प्रोसेसिंग का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

हाजीपुर में बनेगा अत्याधुनिक संस्थान

यह नया NIFTEM संस्थान वैशाली जिले के हाजीपुर में स्थापित किया जाएगा। इसे लगभग 100 एकड़ भूमि में विकसित करने की योजना है। इससे पहले देश में दो NIFTEM संस्थान कार्यरत हैं। पहला हरियाणा के सोनीपत (कुंडली) में, दूसरा तमिलनाडु के तंजावुर में। अब बिहार तीसरे ऐसे प्रमुख संस्थान का केंद्र बनने जा रहा है।

किसानों और युवाओं को बड़ा फायदा

इस संस्थान के निर्माण से राज्य के किसानों, युवाओं और उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा। फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों में नए अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

क्या है NIFTEM?

NIFTEM (निफ्टेम) भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत संचालित एक प्रमुख उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थान है। यह संस्थान फूड टेक्नोलॉजी और एग्री-प्रोसेसिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञ शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करता है। इस संस्थान की स्थापना से बिहार में शिक्षा और उद्योग दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यह न केवल तकनीकी शिक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को कृषि आधारित उद्योगों का बड़ा केंद्र भी बना सकता है। 

रोज खाएं 1 सेब, 10 बड़ी बीमारियां रह सकती हैं कोसों दूर

हेल्थ डेस्क। सेब को स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद फल माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर, विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और कई बायोएक्टिव यौगिक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं। रोज एक सेब खाने की आदत कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक मानी जाती है। हालांकि यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है, लेकिन एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा जरूर है।

1. दिल की बीमारियां

सेब में मौजूद घुलनशील फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। इससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा घटता है और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं की संभावना कम हो सकती है।

2. हाई ब्लड प्रेशर

सेब में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। यह रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में सहायक होता है, जिससे हाइपरटेंशन का खतरा कम हो सकता है।

3. मोटापा

सेब में कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है। यह अनावश्यक खाने की आदत को कम करता है और वजन नियंत्रण में मदद करता है।

4. पाचन संबंधी समस्याएं

सेब में पेक्टिन नामक फाइबर पाया जाता है जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह कब्ज और अपच जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकता है।

5. कोलेस्ट्रॉल बढ़ना

सेब खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है। इससे रक्त संचार बेहतर होता है और दिल से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है।

6. स्ट्रोक का खतरा

एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनॉयड्स दिमाग की रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखते हैं, जिससे स्ट्रोक का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

7. सांस की समस्याएं

सेब में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे अस्थमा और सांस फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

8. कमजोर इम्यून सिस्टम

विटामिन C और अन्य पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं, जिससे बार-बार होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

9. हड्डियों की कमजोरी

सेब में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स हड्डियों की मजबूती में सहायक होते हैं। यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

10. त्वचा की समस्याएं

सेब में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। इससे मुंहासे, डल स्किन और समय से पहले झुर्रियों की समस्या कम हो सकती है।

केंद्र सरकार ने बढ़ाई सख्ती, चांदी के आयात पर नए नियम लागू

नई दिल्ली। भारत सरकार ने कीमती धातुओं के आयात को लेकर एक और बड़ा कदम उठाया है। अब चांदी के आयात पर सख्ती बढ़ाते हुए नई नीति लागू कर दी गई है, जिसके तहत चांदी की सिल्लियों की स्थिति को ‘मुक्त’ से बदलकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

सोने-चांदी के आयात पर सरकार का कड़ा रुख

सरकारी आदेश के अनुसार, सरकार सोने और चांदी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के बाहरी आर्थिक दबाव को कम करना और आयात पर निगरानी को मजबूत करना है। हाल के दिनों में सरकार ने इस दिशा में कई कड़े नियम लागू किए हैं, जिनमें आयात सीमा और अनुपालन शर्तों को और सख्त करना शामिल है।

सोने के आयात पर भी लगे नए नियम

सरकार ने सोने के आयात को लेकर भी नई पाबंदियां लगाई हैं। ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ (AA) स्कीम के तहत अब सोने के आयात की अधिकतम सीमा 100 किलो तय कर दी गई है। इसके साथ ही पहली बार आवेदन करने वाले आयातकों की यूनिट का फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि उत्पादन क्षमता और वास्तविकता की पुष्टि की जा सके।

निर्यात से जुड़ी शर्तें भी कड़ी

नई व्यवस्था के अनुसार, अब सोने के आयात की मंजूरी सीधे निर्यात प्रदर्शन से जुड़ गई है। यानी जब तक पिछले आवंटन के तहत तय निर्यात लक्ष्य का कम से कम 50% पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक नया आयात मंजूर नहीं होगा। इससे सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आयात केवल जरूरत आधारित हो और निर्यात क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे।

हर दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट

आयात प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाने के लिए सरकार ने अब आयातकों के लिए हर पखवाड़े परफॉर्मेंस रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य कर दिया है। यह रिपोर्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित होगी और इसमें आयात व निर्यात से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

शुल्क और टैक्स में भी बढ़ोतरी

सरकार पहले ही सोने-चांदी पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 15% कर चुकी है। इसके अलावा 3% IGST भी लागू है। इन कदमों का मकसद अनावश्यक आयात को रोकना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करना है।

क्यों उठाया गया यह कदम?

जानकारों के अनुसार, हाल के वर्षों में भारत का कीमती धातुओं का आयात तेजी से बढ़ा है। हालांकि मात्रा में गिरावट आई है, लेकिन मूल्य में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि इस तरह की सख्त नीतियों से आयात पर बेहतर नियंत्रण होगा और देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

यूपी सरकार की योजना, किसानों के लिए वरदान, उठायें लाभ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। इसी दिशा में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और लाभकारी पहल साबित हो रही है। यह योजना न केवल सिंचाई की समस्या का समाधान कर रही है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त कमाई के नए अवसर भी दे रही है।

जल संरक्षण और सिंचाई का मजबूत समाधान

खेत तालाब योजना का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी स्रोत उपलब्ध कराना है। लगातार घटते भूजल स्तर और बढ़ती सूखे की समस्या के बीच यह योजना बेहद उपयोगी साबित हो रही है। खेतों में बनाए जाने वाले तालाब बारिश का पानी इकट्ठा करते हैं, जिससे फसलों को समय पर पानी मिलता है और खेती की निर्भरता मौसम पर कम हो जाती है। इससे किसानों की फसल उत्पादन क्षमता में भी सुधार होता है।

सरकार दे रही 50% तक सब्सिडी

इस योजना के तहत किसानों को तालाब निर्माण पर भारी सब्सिडी दी जा रही है। एक मानक खेत तालाब के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 1,05,000 रुपये है, जिसमें सरकार 50% यानी 52,500 रुपये तक की सहायता देती है। यह सहायता सीधे किसानों के बैंक खाते में दी जाती है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी तालाब बनवाना आसान हो गया है।

खेती के साथ अतिरिक्त आय

यह योजना सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी बन रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, सिंघाड़े की खेती और मोती उत्पादन जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत बनते हैं और वे आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं। इसके अलावा सरकार स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक और पंपसेट पर भी सब्सिडी उपलब्ध करा रही है, जिससे खेती की लागत कम हो रही है।

आवेदन और प्रक्रिया की खास बातें

आवेदन के लिए किसान का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। 

आवेदन के 15 दिनों के भीतर सत्यापन किया जाता है। 

मंजूरी के बाद 30 दिनों के भीतर तालाब निर्माण पूरा करना होता है।

ऑनलाइन आवेदन के समय 1000 रुपये टोकन मनी जमा करनी होती है, जो बाद में वापस मिल जाती है।

यूपी में 'ग्राम प्रधानों' के लिए बड़ा अपडेट, जानें पूरी डिटेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल अब खत्म होने की कगार पर है और केवल कुछ ही दिन शेष बचे हैं। ऐसे में पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर सरकार और विभाग स्तर पर मंथन तेज हो गया है।

26 मई को खत्म होगा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल

प्रदेश में ग्राम पंचायतों का वर्तमान कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ग्राम पंचायतें औपचारिक रूप से पूर्व हो जाएंगी। ऐसे में पंचायतों के संचालन और प्रशासन को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि पंचायत व्यवस्था में किसी तरह का प्रशासनिक शून्य न बने और ग्रामीण विकास कार्यों में रुकावट न आए।

ग्राम प्रधानों को मिल सकती है जिम्मेदारी?

सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि ग्राम पंचायतों का कार्यभार इस बार ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में दिया जा सकता है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर लगातार यह बयान दे रहे हैं कि ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाना चाहिए। विभागीय स्तर पर भी इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस कदम को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे ग्राम प्रधानों की नाराजगी को कम करने की कोशिश की जा रही है।

पहले अधिकारी संभालते थे जिम्मेदारी

इससे पहले जब पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होता था, तब प्रशासनिक व्यवस्था के तहत एडीओ पंचायत और पंचायत सचिवों को ग्राम पंचायतों का संचालन सौंपा जाता था। लेकिन इस बार स्थिति अलग है और ग्राम प्रधानों को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है।

चुनाव और आरक्षण प्रक्रिया में देरी

ग्राम पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के पीछे कई प्रशासनिक कारण सामने आए हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कई बार टाला गया है और अब 10 जून को इसके अंतिम प्रकाशन की उम्मीद है। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी के कारण पंचायत चुनाव की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। इसी वजह से चुनाव समय पर नहीं कराए जा सके।

प्रधान संगठन भी कर रहे मांग

ग्राम प्रधान संगठन भी मांग कर रहे हैं कि यदि चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं तो मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाए। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी और प्रशासनिक व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलती रहेगी।

आने वाले दिनों में फैसला

ग्राम पंचायतों के भविष्य और प्रशासक नियुक्ति को लेकर सरकार जल्द बड़ा निर्णय ले सकती है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी कि पंचायतों का संचालन किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

ग्रहों का बड़ा खेल, 5 शुभ योग से 5 राशियों को मिलेगा धन लाभ और तरक्की

राशिफल। 18 मई 2026 का दिन ज्योतिष के नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन कई शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसका असर सभी राशियों पर देखने को मिल सकता है। पंचांग के अनुसार इस दिन सुकर्मा योग और धृति योग के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और गजकेसरी राजयोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ये योग धन लाभ, करियर में सफलता, नई शुरुआत और भाग्य वृद्धि के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए 18 मई का दिन बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं और रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। व्यापार में नई डील फाइनल होने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। निवेश से अच्छा फायदा मिल सकता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों पर गजकेसरी राजयोग का विशेष प्रभाव पड़ सकता है। करियर में बड़ी सफलता मिलने के योग हैं। नई नौकरी या प्रमोशन की खबर मिल सकती है। व्यापार में विस्तार के अवसर मिलेंगे और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने की संभावना है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए यह समय तरक्की और मान-सम्मान लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। नौकरी और कारोबार दोनों में लाभ मिलने के संकेत हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और परिवार का सहयोग मिलेगा। इस दौरान लिया गया कोई बड़ा फैसला भविष्य में लाभ दिला सकता है।

4. तुला राशि

तुला राशि के लोगों को किस्मत का पूरा साथ मिल सकता है। आर्थिक मामलों में राहत मिलेगी और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। जो लोग नया काम शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए समय शुभ रहेगा। वैवाहिक जीवन में खुशियां आएंगी और मानसिक तनाव कम होगा। यात्रा से भी लाभ मिलने के संकेत हैं।

5. मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए 5 शुभ योग सफलता के नए रास्ते खोल सकते हैं। नौकरी में उन्नति और व्यापार में मुनाफा बढ़ने की संभावना है। पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। परिवार में कोई शुभ समाचार मिल सकता है और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से राहत मिलने के संकेत हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, DA और एरियर को लेकर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को एक बार फिर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। भले ही सभी की नजरें 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हों, लेकिन उससे पहले सरकार महंगाई भत्ता (DA) बढ़ोतरी का बड़ा तोहफा दे सकती है। 

माना जा रहा है कि साल 2026 की दूसरी छमाही के लिए डीए बढ़ाने का फैसला आने वाले महीनों में लिया जा सकता है। इसके साथ ही कर्मचारियों को कई महीनों का एरियर मिलने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे उनकी सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

सितंबर-अक्टूबर में हो सकता है बड़ा ऐलान

केंद्र सरकार आमतौर पर साल में दो बार महंगाई भत्ते में संशोधन करती है। पहली बढ़ोतरी जनवरी से लागू होती है, जबकि दूसरी बढ़ोतरी जुलाई से प्रभावी मानी जाती है। हालांकि इस साल पहली छमाही का डीए अप्रैल में घोषित किया गया था। अब दूसरी छमाही के डीए को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार सितंबर या अक्टूबर 2026 तक नया ऐलान कर सकती है।

कर्मचारियों को मिलेगा एरियर

डीए बढ़ोतरी जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी। ऐसे में यदि सरकार सितंबर या अक्टूबर में घोषणा करती है तो कर्मचारियों को जुलाई से लेकर घोषणा होने तक का बकाया एरियर भी मिलेगा। यानी कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर या अक्टूबर तक का अतिरिक्त भुगतान एक साथ मिल सकता है। इससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

3 प्रतिशत डीए बढ़ने की संभावना

मीडिया रिपोर्ट्स और महंगाई के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इससे कर्मचारियों की मासिक सैलरी में सीधा इजाफा होगा।

8वें वेतन आयोग पर भी नजर

केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है और कर्मचारियों को इसकी सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। चर्चा है कि नए वेतन आयोग में महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में इसकी रिपोर्ट 2027 की शुरुआत में सरकार को सौंपी जा सकती है।

यूपी में बिछेगी नई रेल लाइन, 5 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित खलीलाबाद-बहराइच नई रेल लाइन परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना संतकबीरनगर से लेकर बहराइच तक लगभग 240 किलोमीटर लंबी होगी, जिससे प्रदेश के पांच जिलों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। रेलवे कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और रोजगार को भी नया बढ़ावा मिलेगा।

42 साल बाद सपना हो रहा साकार

इस रेल परियोजना की कहानी काफी पुरानी है। पहली बार वर्ष 1977 में इस रूट का सर्वे कराया गया था, लेकिन मंजूरी मिलने में चार दशक से अधिक का समय लग गया। आखिरकार केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में इस परियोजना को स्वीकृति देते हुए करीब 4939 करोड़ रुपये का बजट जारी किया। इसके बाद 2019 में परियोजना का शिलान्यास हुआ और अब निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इन 5 जिलों को मिलेगा बड़ा लाभ

नई रेल लाइन संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जिलों से होकर गुजरेगी। परियोजना के तहत कुल 32 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन और हाल्ट बनाए जाएंगे।

यह रेल मार्ग-

संतकबीरनगर के 54 गांव,

सिद्धार्थनगर के 93 गांव,

बलरामपुर के 65 गांव,

श्रावस्ती के 30 गांव,

और बहराइच के 19 गांवों से होकर निकलेगा। इससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को पहली बार बेहतर रेल सुविधा मिल सकेगी।

पहले चरण का काम तेजी से जारी

परियोजना के पहले चरण में खलीलाबाद से बांसी तक करीब 54 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है। इस हिस्से में कार्य तेजी से चल रहा है। रेल लाइन के लिए हजारों किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है और उन्हें मुआवजा भी दिया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, आने वाले महीनों में निर्माण कार्य और तेज किया जाएगा ताकि परियोजना तय समय में पूरी हो सके।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

इस रेल लाइन का सबसे बड़ा फायदा धार्मिक और पर्यटन स्थलों को मिलेगा। नई रेल कनेक्टिविटी से बौद्ध तीर्थ स्थल श्रावस्ती और प्रसिद्ध देवी पाटन मंदिर तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही, रेलवे लाइन बनने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

यूपी सरकार की बड़ी सौगात, 25 जिलों के किसानों को मिली खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने 25 जिलों में मक्का की सरकारी खरीद शुरू करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से हजारों किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा और मक्का की खेती को भी नया बढ़ावा मिलेगा। सरकार 15 जून से सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

मक्का बन रही किसानों की नई नकदी फसल

अब तक प्रदेश में गन्ना, तंबाकू और सब्जियों को प्रमुख नकदी फसल माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मक्का की खेती तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर ग्रीष्मकालीन हाइब्रिड मक्का की अच्छी पैदावार ने किसानों का रुझान इस ओर बढ़ाया है। कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण अब मक्का किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बनती जा रही है।

किसानों को मिलेगा लाभकारी मूल्य

सरकार इस बार किसानों को मक्का का लाभकारी मूल्य दिलाने पर जोर दे रही है। सरकारी खरीद के तहत किसानों को 2410 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिलने की संभावना है। इससे बाजार में कम दाम मिलने की समस्या से राहत मिलेगी।

20 हजार से अधिक किसानों को लाभ

प्रदेश में मक्का की खेती लगातार बढ़ रही है। केवल गोंडा जिले में ही करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती की जा रही है। इसकी पैदावार 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच रही है, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में 20 हजार से अधिक किसान मक्का उत्पादन से जुड़े हुए हैं और सरकारी खरीद शुरू होने से उन्हें सीधा फायदा मिलेगा।

इन जिलों में होगी मक्का की सरकारी खरीद

सरकार ने जिन 25 जिलों में मक्का खरीद का फैसला लिया है उनमें गोंडा, बहराइच, आगरा, अलीगढ़, मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, हाथरस, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, उन्नाव, हरदोई, बलिया, फतेहपुर और मिर्जापुर शामिल हैं।

खाद्य एवं विपणन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खरीद लक्ष्य और क्रय केंद्रों की सूची जल्द जारी की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि किसानों को उनकी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें समय पर भुगतान मिल सके।

केंद्र सरकार ने कर दिया ऐलान: पुरानी पेंशन पर 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के हजारों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग कर रहे कर्मचारियों को अब बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। रेलवे बोर्ड ने उन कर्मचारियों की अंतिम सूची तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं, जिनकी भर्ती का विज्ञापन 22 दिसंबर 2003 से पहले जारी हुआ था।

रेलवे बोर्ड ने मांगी अंतिम सूची

रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे से कहा है कि पात्र कर्मचारियों की सूची जल्द से जल्द तैयार कर भेजी जाए। इसके साथ ही अधिकारियों से एक शपथ पत्र भी मांगा गया है, जिसमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी पात्र कर्मचारी सूची से बाहर न रह जाए। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि सूची जमा होने के बाद यदि किसी पात्र कर्मचारी का मामला सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में रेलवे प्रशासन अब इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में जुट गया है।

कर्मचारियों के लिए मौका

रेलवे बोर्ड की ओर से जारी निर्देशों को उन कर्मचारियों के लिए अंतिम अवसर माना जा रहा है, जो अब तक किसी कारणवश पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं ले पाए थे। विशेष रूप से उन कर्मचारियों के मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्होंने 31 अगस्त 2023 तक अपना पेंशन विकल्प चुन लिया था लेकिन उनका मामला अब तक लंबित पड़ा हुआ है।

जल्द पूरी होगी प्रक्रिया

रेलवे बोर्ड की निदेशक (स्थापना) जी. प्रिया सुदर्शनी ने 15 मई को जारी आदेश में सभी जोनल रेलवे को आवश्यक डाटा तुरंत उपलब्ध कराने को कहा है। उद्देश्य यह है कि पात्र कर्मचारियों को जल्द से जल्द पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिल सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न जोनों में कर्मचारियों का डाटा तैयार करने और सत्यापन का काम जारी है। उम्मीद की जा रही है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

कर्मचारियों में खुशी

पुरानी पेंशन योजना को लेकर लंबे समय से कर्मचारी संगठन आवाज उठा रहे थे। रेलवे बोर्ड के ताजा निर्देश के बाद कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। माना जा रहा है कि इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।

यूपी में पुलिसकर्मियों को चेतावनी, रील बनाने पर अब होगी कार्रवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सोशल मीडिया पर रील और वीडियो पोस्ट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अब ड्यूटी के दौरान या पुलिस वर्दी में आपत्तिजनक वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर साझा करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों और इकाइयों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

पुलिस मुख्यालय ने जारी किए सख्त निर्देश

एडीजी कानून एवं व्यवस्था अमिताभ यश की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इंटरनेट मीडिया पर लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें पुलिसकर्मी वर्दी में रील, वीडियो और अन्य अनुचित सामग्री पोस्ट कर रहे हैं। इससे विभाग की छवि प्रभावित हो रही है और अनुशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यालय ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए।

सोशल मीडिया नीति का पालन जरूरी

पुलिस विभाग ने वर्ष 2023 में सोशल मीडिया उपयोग को लेकर एक नीति लागू की थी। इस नीति के तहत पुलिसकर्मियों को इंटरनेट मीडिया पर संयमित व्यवहार रखने और विभाग की गरिमा बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई पुलिसकर्मियों द्वारा नियमों की अनदेखी किए जाने के मामले सामने आने के बाद अब विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है।

आपत्तिजनक पोस्ट पर होगी निगरानी

पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने वाले वीडियो और रील की लगातार निगरानी की जाए। यदि कोई पुलिसकर्मी विभाग की छवि खराब करने वाली सामग्री पोस्ट करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित वीडियो और पोस्ट का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को भी कहा गया है ताकि जांच के दौरान उनका उपयोग किया जा सके।

नई भर्ती के बाद बढ़े ऐसे मामले

हाल के समय में उत्तर प्रदेश पुलिस में बड़ी संख्या में नई भर्तियां हुई हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई पुलिसकर्मियों के डांस वीडियो, फिल्मी गानों पर रील और अन्य आपत्तिजनक कंटेंट वायरल हुए थे। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने अब कड़ा कदम उठाया है। पुलिस विभाग का मानना है कि सोशल मीडिया पर अनुचित गतिविधियां जनता के बीच गलत संदेश पहुंचाती हैं। इसलिए अब अनुशासन और विभागीय मर्यादा बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सूर्य की तरह चमकेगी ये 5 राशियां, किस्मत देगी हर कदम पर साथ

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की बदलती चाल का असर सभी राशियों पर पड़ता है। आने वाले दिनों में कुछ राशियों पर सूर्य देव की विशेष कृपा देखने को मिल सकती है। इन राशियों के लोगों को करियर, व्यापार, धन और मान-सम्मान के मामले में अच्छी सफलता मिलने के संकेत हैं। लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं और किस्मत भी हर कदम पर साथ देती नजर आएगी।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई ऊर्जा और आत्मविश्वास लेकर आ सकता है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन रहे हैं। व्यापार से जुड़े लोगों को बड़ा लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार का सहयोग भी मिलेगा। जो लोग लंबे समय से किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए समय अनुकूल रहेगा। समाज में सम्मान बढ़ेगा और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं।

2. सिंह राशि

सिंह राशि वालों पर सूर्य देव की विशेष कृपा रहने के संकेत हैं। करियर में अच्छी सफलता मिल सकती है और मेहनत का पूरा फल मिलेगा। सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय लाभकारी साबित हो सकता है। आर्थिक मामलों में सुधार होगा और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है।

3. कन्या राशि

कन्या राशि के लोगों के लिए आने वाला समय तरक्की के नए रास्ते खोल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में रुका हुआ धन वापस मिलने के संकेत हैं। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा और मानसिक तनाव कम होगा। निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे और घर में सुख-शांति बनी रहेगी।

4. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक लाभ दिलाने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना है। कारोबार में विस्तार के अवसर मिल सकते हैं और नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। किस्मत का साथ मिलने से मुश्किल काम भी आसानी से पूरे होंगे। नौकरी में बदलाव का विचार कर रहे लोगों को अच्छा अवसर मिल सकता है। परिवार में शुभ समाचार मिलने के योग हैं।

5. मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद सकारात्मक रहने वाला है। करियर में उन्नति के साथ आय में वृद्धि होने के संकेत हैं। व्यापार में लाभ मिलेगा और पुराने निवेश फायदा दे सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोगों के बीच मान-सम्मान मिलेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। यात्रा के भी शुभ योग बन रहे हैं।

यूपी के किसानों को बंपर खुशखबरी, सरकार दे रही 50% सब्सिडी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने खरीफ सीजन में दलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। किसानों को अब उर्द, मूंग और अरहर जैसी फसलों के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य प्रदेश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और किसानों की आय बढ़ाना है।

दलहन खेती बढ़ाने पर फोकस

कृषि विभाग ने इस वर्ष दलहन फसलों के रकबे में बड़ी बढ़ोतरी का लक्ष्य तय किया है। पिछले साल जहां प्रदेश में करीब 8.59 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की खेती हुई थी, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर 11.70 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। सरकार विशेष रूप से उर्द, मूंग और अरहर की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। विभाग का मानना है कि दलहन फसलें किसानों के लिए कम लागत में बेहतर मुनाफा देने वाली साबित हो सकती हैं।

किसानों को मिलेगा अनुदान पर बीज

किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार हजारों क्विंटल बीज सब्सिडी पर वितरित करेगी। कृषि विभाग के अनुसार किसानों को उर्द का 23,958 क्विंटल बीज, अरहर का 21,225 क्विंटल बीज, और मूंग का 3,946 क्विंटल बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर दिया जाएगा। इस योजना से लाखों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

मूंगफली और मक्का किसानों को लाभ

दलहन के साथ-साथ सरकार मूंगफली और मक्का उत्पादन बढ़ाने पर भी काम कर रही है। मूंगफली किसानों को 57,446 क्विंटल बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को हाइब्रिड मक्का बीज भी दिया जाएगा।

प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

राज्य सरकार की यह योजना किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। कृषि विभाग का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों का उपयोग करेंगे तो उत्पादन में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

ईरान पर एक्शन की तैयारी में अमेरिका, दुनिया की बढ़ी चिंता और टेंशन

न्यूज डेस्क। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी गतिरोध और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित नए सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’ नाम से बड़ी कार्रवाई की योजना पर काम कर रहा है।

युद्धविराम टूटने का फिर बढ़ा खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच बनी अस्थायी शांति कभी भी टूट सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि स्थिति और बिगड़ती है तो अगले कुछ दिनों में ईरान के रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर नए हमले शुरू हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से सैन्य तैयारियों में जुटे हैं। दोनों देशों के बीच बड़े स्तर पर सैन्य अभ्यास भी चल रहे हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरा गई है।

स्पेशल फोर्स की तैनाती की चर्चा

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, संभावित अभियान के तहत विशेष सैन्य बलों की मदद से ईरान के गुप्त ठिकानों और परमाणु गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। दावा किया जा रहा है कि कुछ महीने पहले ही अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्स को पश्चिम एशिया में तैनात किया गया था।

ईरान ने भी बढ़ाई सैन्य तैयारी

अमेरिका की गतिविधियों के बीच ईरान ने भी अपनी सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी हैं। तेहरान ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम को फिर से सक्रिय किया जा रहा है और सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। ईरानी नेताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि देश पर हमला हुआ तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों को लेकर भी नई रणनीति तैयार की है।

दुनिया की फिर बढ़ी चिंता

जानकारों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संघर्ष शुरू होता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में वहां की घटनाएं वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती हैं।

भारत ने कर दिया खेल, चीन-रूस भी साथ, ट्रंप के उड़े होश!

नई दिल्ली। दुनिया भर में बढ़ते ट्रेड वॉर और अमेरिका की सख्त टैरिफ नीतियों के बीच भारत ने एक बड़ा आर्थिक दांव चल दिया है। ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर भारत अब ऐसा मजबूत व्यापारिक नेटवर्क तैयार करने में जुटा है, जो आने वाले समय में वैश्विक व्यापार की दिशा बदल सकता है। माना जा रहा है कि इस रणनीति से पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के आर्थिक दबदबे को चुनौती मिल सकती है।

ब्रिक्स देशों ने बनाई नई रणनीति

गुजरात के गांधीनगर में आयोजित ब्रिक्स देशों की अहम बैठक में सदस्य देशों ने आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान मजबूत सप्लाई चेन, स्थानीय व्यापार और नए आर्थिक अवसरों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में भारत ने प्रमुख भूमिका निभाते हुए सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में कई सुझाव दिए। उद्देश्य यह है कि ब्रिक्स देश बाहरी आर्थिक दबावों और टैरिफ प्रतिबंधों का मिलकर सामना कर सकें।

तेजी से बढ़ा ब्रिक्स देशों का व्यापार

बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में पिछले दो दशकों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2003 में जहां सदस्य देशों के बीच व्यापार 84 अरब डॉलर के आसपास था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है। हालांकि इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी अभी भी सीमित मानी जा रही है। यही वजह है कि अब सदस्य देश आपसी आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं।

पश्चिमी दबाव कम करने की तैयारी

ब्रिक्स समूह अब केवल राजनीतिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से एक मजबूत आर्थिक गठबंधन के रूप में उभर रहा है। भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देशों के साथ अब सऊदी अरब, ईरान और यूएई जैसे ऊर्जा संपन्न देश भी इसमें शामिल हो चुके हैं। यदि ये देश आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्रा और मजबूत सप्लाई नेटवर्क के जरिए बढ़ाते हैं तो डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे पश्चिमी देशों की आर्थिक नीतियों का असर भी सीमित किया जा सकेगा।

सर्विस सेक्टर और नए बाजारों पर फोकस

बैठक में सिर्फ वस्तुओं के व्यापार ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सेवाओं और निवेश सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की बात कही। इसके साथ ही व्यापार संतुलन सुधारने और एक-दूसरे के बाजारों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।

इस समय भारत की तेजी से बढ़ती वैश्विक भूमिका

भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और वह इस मंच को मजबूत आर्थिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। जानकारों के मुताबिक, भारत की रणनीति केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी मजबूत भूमिका स्थापित करना भी इसका बड़ा लक्ष्य है। आने वाले समय में यदि ब्रिक्स देशों की यह रणनीति सफल होती है, तो दुनिया के व्यापारिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

केंद्रीय कर्मचारियों के ग्रेच्युटी, प्रमोशन और पुरानी पेंशन पर मंथन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। 8वें वेतन आयोग को लेकर हुई अहम बैठक में कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, प्रमोशन, मेडिकल सुविधाओं और पुरानी पेंशन योजना जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक के बाद लाखों सरकारी कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मचारियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं।

8वें वेतन आयोग को लेकर हुई अहम बैठक

11 मई 2026 को नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) की 49वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने की। बैठक में सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, डाक और कार्मिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।

OPS को लेकर उठी मांग

बैठक में कर्मचारी संगठनों ने विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की, जिनकी भर्ती का विज्ञापन 22 दिसंबर 2003 से पहले जारी हुआ था। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए क्योंकि उनकी भर्ती प्रक्रिया पुराने नियमों के तहत शुरू हुई थी।

प्रमोशन में देरी पर जताई चिंता

कई विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया में देरी को लेकर भी नाराजगी सामने आई। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने बताया कि कुछ विभागों में प्रमोशन में तीन से पांच साल तक की देरी हो रही है। इस पर कैबिनेट सचिव ने संबंधित विभागों को समय पर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक कराने के निर्देश देने की बात कही।

मेडिकल सुविधाओं पर भी चर्चा

बैठक में कर्मचारियों और पेंशनर्स के मेडिकल खर्चों को लेकर भी अहम चर्चा हुई। कर्मचारी संगठनों ने CGHS के तहत मिलने वाली सुविधाओं को और बेहतर बनाने की मांग की। हियरिंग एड, डेंटल इम्प्लांट और डेन्चर जैसे खर्चों की पूरी प्रतिपूर्ति की मांग भी उठाई गई। सरकार की ओर से इन मामलों पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।

पेंशनर्स ने रखीं ये बड़ी मांगें

पेंशनर्स की ओर से हर पांच साल में पेंशन संशोधन करने और फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी गई। इसके अलावा फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाने और विधवा व आश्रित बहुओं को भी इसमें शामिल करने की मांग की गई।

आउटसोर्सिंग और भर्ती पर भी सवाल

कर्मचारी यूनियनों ने सरकारी विभागों में बढ़ती आउटसोर्सिंग पर चिंता जताई। उनका कहना था कि खाली पदों पर नियमित भर्ती की जाए ताकि युवाओं को स्थायी रोजगार मिल सके। साथ ही अनुकंपा नियुक्तियों की सीमा बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया को तेज करने की मांग भी उठाई गई।

कर्मचारियों को फैसलों का है इंतजार

इस बैठक के बाद अब कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग में उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। यदि इन मांगों पर सकारात्मक फैसला होता है तो इससे लाखों कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और सुविधाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

बिहार में 'अधिकारियों और कर्मचारियों' को नया फरमान, निर्देश जारी

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी सेवकों को बदलते समय और नई पीढ़ी की चुनौतियों को समझने के लिए विशेष प्रशिक्षण लेना होगा। सरकार ने प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत बिहार प्रशासनिक सेवा, सचिवालय सेवा और सचिवालय लिपिकीय सेवा से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए हर साल प्रशिक्षण लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

साल में 52 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को हर वर्ष कम से कम 52 घंटे का प्रशिक्षण पूरा करना होगा। यह प्रशिक्षण ऑनलाइन माध्यम से ‘कर्मयोगी पोर्टल’ के जरिए दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाना और उन्हें आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई नए और महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।

जेन जी की चुनौतियों पर भी होगा फोकस

इस बार प्रशिक्षण कार्यक्रम में नई पीढ़ी यानी जेन जी से जुड़ी चुनौतियों और व्यवहार को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। बदलते सामाजिक और डिजिटल माहौल में युवाओं की सोच, अपेक्षाएं और कार्यशैली को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि नई पीढ़ी के साथ बेहतर संवाद और समन्वय के लिए अधिकारियों को समय के अनुसार खुद को अपडेट करना जरूरी है।

इन अधिकारियों-कर्मचारियों पर लागू होंगे नियम

यह प्रशिक्षण बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से लेकर सचिवालय सेवा और लिपिकीय सेवा के कर्मचारियों तक लागू होगा। इसके तहत संयुक्त सचिव से लेकर विशेष सचिव स्तर तक के अधिकारी, अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, सचिवालय सेवा के उप सचिव से सचिव स्तर तक के अधिकारी तथा उच्च एवं निम्न वर्गीय लिपिकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होना होगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि अधिकारियों की नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। इसके अलावा आम जनता के साथ बेहतर व्यवहार, संवाद कौशल, प्रशासनिक दक्षता और कार्य संस्कृति सुधार जैसे विषय भी पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं।

गजकेसरी राजयोग से इन 4 राशियों को होगा बड़ा लाभ, धन-सफलता के योग

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में गजकेसरी राजयोग को बेहद शुभ और प्रभावशाली योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब चंद्रमा और देवगुरु बृहस्पति एक साथ किसी राशि में विराजमान होते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 18 मई को चंद्रमा वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से गुरु ग्रह मौजूद रहेंगे। इस युति से गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा।

मान्यता है कि इस शुभ योग के प्रभाव से कई राशियों को धन, करियर, सम्मान और सफलता के क्षेत्र में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। आइए जानते हैं उन 4 राशियों के बारे में जिनके लिए यह राजयोग विशेष लाभकारी माना जा रहा है।

1. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए यह राजयोग बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि यह योग आपकी ही राशि में बन रहा है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ेगा और लंबे समय से रुके काम पूरे होने के संकेत मिल रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है। व्यापार में भी अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और निवेश से फायदा मिल सकता है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा।

2. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए गजकेसरी राजयोग करियर और आय के मामले में शुभ परिणाम दे सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। धन लाभ के योग बन रहे हैं और रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और मान-सम्मान में वृद्धि होगी।

3. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का पूरा साथ लेकर आ सकता है। शिक्षा, नौकरी और व्यवसाय में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने की संभावना है। विदेश यात्रा या नए काम की शुरुआत के योग भी बन सकते हैं। आर्थिक मामलों में राहत मिलेगी और परिवार का सहयोग प्राप्त होगा।

4. कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए गजकेसरी राजयोग आर्थिक लाभ और करियर में तरक्की के संकेत दे रहा है। लंबे समय से चली आ रही परेशानियां कम हो सकती हैं। नई योजनाओं में सफलता मिलेगी और व्यापार में मुनाफा बढ़ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई उपलब्धि मिल सकती है। प्रेम संबंध और पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को राहत, सरकार ने दिए बड़े निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने बिजली से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। अब उपभोक्ताओं को बिल संशोधन, स्मार्ट मीटर शिकायत, नया कनेक्शन और अन्य बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार ने सभी विद्युत उपकेंद्रों पर विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं।

15 मई से 30 जून तक विशेष शिविर

ऊर्जा विभाग की ओर से 15 मई से 30 जून तक प्रदेशभर में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों का संचालन प्रभावी तरीके से किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

एक ही जगह पर मिलेगा पूरा समाधान

सरकार की योजना के तहत विद्युत उपकेंद्रों पर उपभोक्ताओं को कई सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराई जाएंगी। शिविरों में बिजली बिल जमा करने, बिल संशोधन कराने, नया बिजली कनेक्शन लेने, बिजली लोड बढ़वाने, मीटर बदलवाने और अन्य वाणिज्यिक समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इन शिविरों में अधिशासी अभियंता समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे ताकि शिकायतों का तुरंत निस्तारण हो सके।

स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी सुविधा

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर भी सरकार ने राहत दी है। अब उपभोक्ता चाहें तो अपने कनेक्शन को पोस्टपेड मोड में बदलवा सकेंगे। इसके अलावा स्मार्ट मीटर से जुड़े बिलों की शिकायतों का भी तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं वहां विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे ताकि उपभोक्ताओं को तकनीकी समस्याओं से राहत मिल सके।

बकाया बिल वालों से भी संपर्क करेगी विभाग

सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिल बकाया होने के कारण कट चुके हैं, उनसे संपर्क कर बिल जमा करने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर अपडेट करने का काम भी शिविरों के दौरान किया जाएगा ताकि भविष्य में बिजली संबंधी जानकारी सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच सके।

गोरखपुर को मिली बड़ी सौगात, सीएम योगी ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के लिए 16 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहर में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भव्य शिलान्यास किया। लंबे समय से चर्चा में रहे इस प्रोजेक्ट को पूर्वांचल के खेल विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा स्टेडियम

गोरखपुर में बनने वाला यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम करीब 46 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 393 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार होने वाले इस स्टेडियम में खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

युवाओं को मिलेगा अपने शहर में बड़ा मंच

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। अब गोरखपुर और आसपास के जिलों के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाओं के लिए बड़े महानगरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्टेडियम बनने के बाद यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट मुकाबले आयोजित किए जा सकेंगे।

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बनेगा आकर्षण का केंद्र

सरकार ने क्रिकेट स्टेडियम के साथ-साथ एक विशाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की भी योजना बनाई है। स्टेडियम के पास लगभग 60 एकड़ अतिरिक्त भूमि इसके लिए आरक्षित की गई है। इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में क्रिकेट के अलावा हॉकी, कुश्ती और अन्य खेलों के लिए भी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करना और युवाओं को विभिन्न खेलों में आगे बढ़ने का अवसर देना है।

पूर्वांचल की पहचान को अब मिलेगी नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से गोरखपुर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। खेल गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में भी तेजी आने की उम्मीद है। प्रदेश सरकार पहले ही खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठा चुकी है।

यूपी में 170 पदों पर नई भर्ती का ऐलान, युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने विधान भवन रक्षक और विधान भवन अग्निरक्षक के पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 170 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। लंबे समय से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा अवसर माना जा रहा है।

जून से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया

आयोग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इन पदों पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 09 जून से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि 29 जून तक आवेदन कर सकेंगे। वहीं आवेदन फॉर्म में किसी प्रकार की गलती होने पर सुधार करने के लिए 06 जुलाई तक का समय दिया जाएगा।

आवेदन के लिए जरूरी योग्यता

इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास PET-2025 का वैध स्कोरकार्ड होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अभ्यर्थी ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 12वीं कक्षा पास की हो। आयोग द्वारा निर्धारित अन्य पात्रताओं को पूरा करना भी जरूरी रहेगा। भर्ती प्रक्रिया में वही उम्मीदवार शामिल हो सकेंगे जो सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करेंगे।

मुख्य परीक्षा में पूछे जाएंगे ये विषय

मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। परीक्षा में कुल 100 प्रश्न होंगे। साथ ही गलत उत्तर देने पर नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान भी रखा गया है। प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-चौथाई अंक काटे जाएंगे। ऐसे में अभ्यर्थियों को सोच-समझकर उत्तर देना होगा।

ऐसे कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

उम्मीदवार आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म भर सकेंगे। सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद मांगी गई जानकारी भरकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

बिहार से गुजरेगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, 9 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

न्यूज डेस्क। बिहार के लिए एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना जल्द नई पहचान बन सकती है। वाराणसी से कोलकाता तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ बिहार को मिलने वाला है। यह हाईस्पीड कॉरिडोर राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों को उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से सीधे जोड़ेगा, जिससे यात्रा, व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

दक्षिण बिहार को मिलेगा सीधा फायदा

यह एक्सप्रेसवे खासतौर पर दक्षिण बिहार के जिलों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जैसे क्षेत्रों से बड़े शहरों तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी। बेहतर सड़क नेटवर्क बनने से यात्रियों के साथ-साथ कारोबारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी बड़ी राहत मिलेगी। नई सड़क परियोजना के चलते इन जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

आधे समय में पूरा होगा लंबा सफर

अभी वाराणसी से कोलकाता तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में लगभग 12 से 14 घंटे का समय लगता है। लेकिन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यही दूरी करीब 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे माल ढुलाई तेज होगी और ट्रांसपोर्ट लागत में कमी आएगी। 

कई राज्यों को जोड़ेगा कॉरिडोर

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र से शुरू होकर बिहार के कई हिस्सों से गुजरेगा। इसके बाद यह झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ते हुए कोलकाता तक पहुंचेगा। बिहार के बाद यह मार्ग झारखंड के महत्वपूर्ण औद्योगिक इलाकों से होकर निकलेगा, जिससे पूरे पूर्वी भारत में परिवहन नेटवर्क मजबूत होगा। पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों तक सीधी कनेक्टिविटी मिलने से व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है।

पर्यावरण को ध्यान में रखकर होगा निर्माण

परियोजना के कुछ हिस्सों में पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया के कारण काम धीमा पड़ा था। अब जरूरी स्वीकृतियां मिलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है। सरकार की ओर से जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है ताकि प्राकृतिक संतुलन प्रभावित न हो। वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

यूपी सरकार की 1 बड़ी सौगात, अनुदेशकों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अंशकालिक अनुदेशकों के लिए बड़ी पहल की है। प्रदेशभर में 17 मई को विशेष कार्यक्रम आयोजित कर अनुदेशकों को सम्मानित किया जाएगा और बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक वितरण किया जाएगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत राजधानी लखनऊ के लोकभवन सभागार से होगी, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय समारोह में शामिल होंगे।

सरकार ने पहले ही अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला लिया था, जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू माना गया है। अब इसी फैसले के तहत प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित कर अनुदेशकों को सम्मान देने की तैयारी की गई है।

सभी जिलों में होंगे कार्यक्रम

बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्यस्तरीय कार्यक्रम के साथ-साथ जिला स्तर पर भी भव्य आयोजन कराए जाएं। इन कार्यक्रमों में मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी। जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों और अंशकालिक अनुदेशकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

बढ़े हुए मानदेय का मिलेगा लाभ

सरकार के इस फैसले से लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे अंशकालिक अनुदेशकों को राहत मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रतीकात्मक चेक वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा कई जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसभाएं भी आयोजित होंगी। सरकार का कहना है कि यह पहल शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के सम्मान और मनोबल बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है।