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सीएम योगी ने दी सौगात: अब शिक्षा मित्रों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्रों के लिए राहत भरी खबर आई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य के लाखों शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी लागू कर दी है। अब उन्हें हर महीने 18 हजार रुपये का मानदेय मिलेगा, जो पहले 10 हजार रुपये था।

बड़ा बजट जारी

सरकार ने इस फैसले को लागू करने के लिए लगभग 250 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। यह राशि पूरे प्रदेश के जिलों में आवंटित कर दी गई है, ताकि शिक्षामित्रों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सके। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।

1.42 लाख शिक्षामित्रों को लाभ

इस निर्णय से करीब 1.42 लाख शिक्षामित्र सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

भुगतान की नई व्यवस्था क्या है?

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जारी धनराशि का उपयोग केवल मानदेय भुगतान के लिए ही किया जाएगा। जिलों को यह भी कहा गया है कि वे पूरी राशि एक साथ न निकालें, बल्कि हर महीने जरूरत के अनुसार ही भुगतान करें।

प्रदेश सरकार ने जवाबदेही भी तय

सरकार ने वित्तीय पारदर्शिता पर जोर देते हुए निर्देश दिया है कि अगली किस्त जारी होने से पहले संबंधित अधिकारी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करेंगे। किसी भी तरह की अनियमितता की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

बिहार विधानसभा में बड़ी जीत: सम्राट चौधरी ने फ्लोर टेस्ट में मारी बाजी

पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर अपनी सरकार की स्थिति को मजबूती दी है। सदन में ध्वनिमत के जरिए यह प्रस्ताव पारित हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार को पर्याप्त समर्थन प्राप्त है।

ध्वनिमत से मिला भरोसा

विधानसभा में संख्याबल पहले से ही सरकार के पक्ष में था, इसलिए मतदान की नौबत नहीं आई। ध्वनिमत के आधार पर ही सरकार ने बहुमत साबित कर दिया। एनडीए के पास कुल 201 विधायक हैं, जो बहुमत के लिए आवश्यक 122 के आंकड़े से कहीं अधिक है।

विपक्ष का भी मिला समर्थन

चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी तंज भरे अंदाज में ही सही, सरकार को समर्थन दिया। इससे सदन का माहौल राजनीतिक कटाक्षों के बीच भी अपेक्षाकृत सहज रहा।

शपथ के नौ दिन बाद विश्वासमत

सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और उसके कुछ ही दिनों बाद सदन में बहुमत साबित कर दिया। स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार सहित अन्य सदस्यों ने उन्हें बधाई दी।

विपक्ष पर तीखा हमला

बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के शासनकाल का जिक्र करते हुए अपनी राजनीतिक यात्रा पर बात की। साथ ही, तेजस्वी यादव पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि जो अपने घर में सम्मान नहीं दे सकता, वह समाज में क्या करेगा।

नीतीश कुमार का किया उल्लेख

सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व और विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हीं के मार्गदर्शन में राज्य को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए सरकार लगातार काम करेगी।

ताबड़तोड़ ऐलान: यूपी में दो बड़ी वैकेंसी, मौका हाथ से न जाने दें

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एक बार फिर नौकरी का सुनहरा अवसर सामने आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने एक साथ दो बड़ी भर्तियों का ऐलान कर दिया है, जिससे हजारों उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी पाने का मौका मिलेगा। खास बात यह है कि इन भर्तियों में 10वीं और 12वीं पास अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं।

1 .फॉरेस्ट गार्ड भर्ती 2026: 700+ पदों पर मौका

सबसे पहले बात करें फॉरेस्ट गार्ड भर्ती की, तो इस बार पूरे 708 पदों पर भर्ती होने जा रही है। अगर आपने सिर्फ 10वीं पास की है, तब भी आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू होगी और 20 जुलाई 2026 तक चलेगी। यानी आपके पास अच्छा-खासा समय है। यह नौकरी उन लोगों के लिए खास है जो जंगल, प्रकृति और फील्ड वर्क से जुड़कर काम करना चाहते हैं।

2 .हवलदार इंस्ट्रक्टर भर्ती: 200+ पद

वहीं दूसरी तरफ हवलदार इंस्ट्रक्टर के 209 पदों पर भी भर्ती निकली है। इसमें 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इसकी आवेदन प्रक्रिया 19 जून 2026 से शुरू होकर 9 जुलाई 2026 तक चलेगी। यानी अगर आप थोड़ी बेहतर योग्यता रखते हैं, तो ये आपके लिए एक और मजबूत विकल्प है।

ऐसे करें आवेदन

आपको बता दें की इन दोनों भर्तियों के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल UPSSSC (upsssc.gov.in) पर जाकर निर्धारित तिथियों के भीतर फॉर्म भर सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं।

यूपी सरकार की बड़ी तैयारी, इन 12 जिलों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे एक विशाल औद्योगिक गलियारा विकसित किया जा रहा है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को मजबूत करेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण नरेन्द्र मोदी 29 अप्रैल को करेंगे।

औद्योगिक क्लस्टर से बदलेगा आर्थिक परिदृश्य

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक क्लस्टर (IMLC) स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत कई जिलों में भूमि अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है और अब निवेशकों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।

इन जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

इस परियोजना के पहले चरण में मेरठ, उन्नाव, बदायूं, संभल, हरदोई और शाहजहांपुर में क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। यहां सैकड़ों एकड़ भूमि पर औद्योगिक इकाइयों के लिए प्लॉट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

12 जिलों में फैलेगा विकास का दायरा

गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से लेकर प्रयागराज तक 12 जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे माल परिवहन तेज होगा और उद्योगों के लिए लागत कम होगी। साथ ही, छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नया प्लेटफॉर्म मिलेगा।

रोजगार के नए अवसर

सरकार का अनुमान है कि इन औद्योगिक क्लस्टरों के विकसित होने के बाद 10 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सकता है। यह परियोजना प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी तेज करेगी।

निवेशकों के लिए सुविधाएं

IMLC में सड़क, बिजली, पानी और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे निवेशकों को उद्योग स्थापित करने में आसानी होगी और उत्पादन प्रक्रिया भी सुगम बनेगी।

शनि देव हुए मेहरबान! 5 राशियों पर बरसेगा भाग्य और धन

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्म और न्याय का देवता माना जाता है। जब शनि की स्थिति में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर मानव जीवन पर देखने को मिलता है। इस समय शनि का प्रभाव खास तौर पर सक्रिय माना जा रहा है, जिससे कई राशियों के लिए रुके हुए काम पूरे होने और मेहनत का फल मिलने के योग बन रहे हैं।

मीन राशि में शनि का गोचर

वर्तमान में शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में स्थित हैं। यह स्थिति करियर, धन और जीवन की स्थिरता पर गहरा प्रभाव डालती है। ऐसे में 5 राशियों के लिए यह समय बेहद शुभ संकेत दे रहा है।

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से मजबूत होने का है। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। बिजनेस में निवेश से अच्छा लाभ मिलेगा।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के करियर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। जो लोग लंबे समय से मेहनत कर रहे थे, उन्हें अब उसका परिणाम मिलने लगेगा। परिवार में भी सुख-शांति बनी रहेगी।

3. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए शनि का प्रभाव आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। व्यापार में विस्तार के योग हैं। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।

4. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के लिए यह समय धन लाभ और सफलता का संकेत दे रहा है। अचानक आर्थिक लाभ हो सकता है। करियर में नई ऊंचाइयां हासिल करने का मौका मिलेगा। निवेश से भी अच्छा फायदा मिल सकता है।

5. मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद खास माना जा रहा है। शनि की कृपा से रुके हुए काम पूरे होंगे। नौकरी में स्थिरता आएगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। मेहनत का पूरा फल मिलने के योग हैं।

जामुन की ताकत से दंग रह जाएंगे! 10 बीमारियां होंगी गायब

हेल्थ डेस्क। गर्मियों के मौसम में मिलने वाला जामुन सिर्फ स्वाद में ही नहीं, सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों में इसे कई रोगों के लिए उपयोगी बताया गया है। गहरे बैंगनी रंग का यह छोटा सा फल शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

1 .डायबिटीज कंट्रोल में मददगार

जामुन को मधुमेह रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसके बीज का पाउडर भी पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

2 .पाचन तंत्र को बनाता मजबूत

जामुन खाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक है। नियमित सेवन से आंतों की सेहत सुधरती है।

3 .खून की कमी दूर करने में सहायक

इस फल में आयरन अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। इससे एनीमिया जैसी समस्या में राहत मिल सकती है।

4 .दिल को रखे स्वस्थ

जामुन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय को मजबूत बनाते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है।

5 .त्वचा के लिए फायदेमंद

जामुन त्वचा को साफ और चमकदार बनाने में मदद करता है। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासों और दाग-धब्बों को कम करने में सहायक होते हैं।

6 .इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर

यह फल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, जिससे संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।

7 .वजन नियंत्रण में सहायक

कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने के कारण जामुन वजन कम करने में भी मददगार है। यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है।

8 .लिवर और किडनी के लिए लाभकारी

जामुन शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे लिवर और किडनी स्वस्थ रहते हैं।

9 .मुंह और दांतों की सेहत

जामुन के सेवन से मसूड़ों की समस्या और मुंह की दुर्गंध में भी राहत मिलती है। इसके पत्तों का उपयोग भी पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।

10 .आंखों की रोशनी में सुधार

जामुन में मौजूद पोषक तत्व आंखों के लिए भी फायदेमंद होते हैं और दृष्टि को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: अब UPI से तुरंत निकाल सकेंगे PF का पैसा

नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सामने आने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन जल्द ही पीएफ निकालने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अब UPI के माध्यम से सीधे अपने खाते में PF की राशि ट्रांसफर कर सकेंगे।

डिजिटल सिस्टम से बदलेगी प्रक्रिया

यह बदलाव EPFO के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म CITES 2.0 के तहत किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मई के अंत तक यह सुविधा शुरू हो सकती है। अभी तक PF निकालने के लिए लंबी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नई प्रणाली से यह झंझट काफी हद तक खत्म हो जाएगा।

कैसे काम करेगी नई सुविधा

नई सेवा शुरू होने के बाद कर्मचारी EPFO पोर्टल या मोबाइल ऐप पर लॉगिन करेंगे। इसके बाद UAN (Universal Account Number) और OTP वेरिफिकेशन के जरिए अपनी पहचान सुनिश्चित करेंगे। फिर वे अपनी UPI ID दर्ज कर जितनी राशि निकालनी है, उसे चुनेंगे और कुछ ही समय में पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंच जाएगा।

75% तक ही निकाल सकेंगे पैसा

नए नियमों के तहत कर्मचारी अपने कुल PF बैलेंस का अधिकतम 75% ही निकाल पाएंगे। कम से कम 25% राशि खाते में रखना अनिवार्य होगा, ताकि रिटायरमेंट के लिए कुछ बचत बनी रहे।

आने वाले समय में और बदलाव

सरकार PF से जुड़ी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत नई योजनाएं और नियम लाने की तैयारी है, जिससे पेंशन और बीमा से जुड़ी सुविधाएं भी बेहतर होंगी।

बिहार में जमीन रजिस्ट्री नियमों में बड़ा बदलाव, खरीदारों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए एक अहम और राहत भरा बदलाव सामने आया है। अब जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनने जा रही है। राज्य सरकार ने निबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई रणनीति लागू करने का फैसला किया है, जिससे खरीदारों को जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी पहले ही मिल सकेगी।

रजिस्ट्री से पहले मिलेगी पूरी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उसकी विस्तृत जांच अनिवार्य होगी। इससे खरीदार को पहले ही पता चल जाएगा कि जिस जमीन को वह खरीद रहा है, वह विवादित है या नहीं। इस कदम का उद्देश्य फर्जीवाड़े और विवादित जमीन के सौदों पर रोक लगाना है।

10 दिनों में होगी जमीन की पूरी जांच

आवेदन मिलने के बाद संबंधित अंचल के अधिकारी सीओ और राजस्व कर्मचारी 10 दिनों के भीतर जमीन की जांच कर अपनी रिपोर्ट देंगे। इस प्रक्रिया से रजिस्ट्री से पहले ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना कम होगी।

13 जरूरी जानकारियां देना अनिवार्य

नई प्रणाली में आवेदक को जमीन से जुड़ी 13 महत्वपूर्ण जानकारियां देनी होंगी। इसमें खाता, खेसरा, थाना, मौजा, रकबा, चौहद्दी और रैयत का नाम जैसी डिटेल शामिल हैं। इन्हीं आधारों पर जांच की जाएगी और रिपोर्ट तैयार होगी।

धोखाधड़ी पर लगेगी रोक

अब तक कई मामलों में बिना पूरी जांच के जमीन की खरीद-फरोख्त हो जाती थी, जिससे बाद में विवाद सामने आते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों में काफी कमी आने की उम्मीद है। खरीदार सुरक्षित तरीके से निवेश कर सकेंगे।

अधिकारियों को प्रशिक्षण

नई प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रमंडल स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीओ और राजस्व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे नई व्यवस्था को सही तरीके से लागू कर सकें।

यूपी में पुरानी पेंशन पर अपडेट, इन कर्मचारियों को खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है, जिसने लंबे समय से इंतजार कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल विशेष अपीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि देरी के लिए दिए गए कारण पर्याप्त नहीं हैं।

क्या है पूरा मामला

यह मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) के उन जूनियर इंजीनियरों से जुड़ा है, जिन्हें 1984 से 1989 के बीच डेली वेजेज या वर्कचार्ज आधार पर नियुक्त किया गया था। बाद में इन्हें नियमित किए जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।

कोर्ट का सख्त रुख

खंडपीठ, जिसमें अरुण भंसाली और जसप्रीत सिंह शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार की अपीलें निर्धारित समयसीमा के काफी बाद दाखिल की गई थीं। देरी 90 दिनों से लेकर करीब 200 दिनों तक की थी। सरकार ने फाइलों के मूवमेंट, विभागीय प्रक्रियाओं और अन्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने इन्हें उचित नहीं माना। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रशासनिक सुस्ती को देरी का आधार नहीं बनाया जा सकता।

कर्मचारियों को क्या मिला फायदा

इस फैसले के बाद संबंधित जूनियर इंजीनियरों को वर्ष 2006 के बजाय 2001 से नियमित माना जाएगा। इसका सीधा असर उनकी सेवा शर्तों पर पड़ेगा और वे पुरानी पेंशन योजना के दायरे में आ जाएंगे।

इनके लिए OPS का रास्ता हुआ साफ

वर्ष 2004 के बाद नई पेंशन प्रणाली लागू होने के कारण कई कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। लेकिन इस निर्णय के बाद इन कर्मचारियों के लिए OPS का रास्ता खुल गया है, जिससे उन्हें रिटायरमेंट के बाद बेहतर वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी।

न्यायालय की अहम टिप्पणी से लाभ 

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यदि सरकारी विभागों की देरी को आसानी से स्वीकार कर लिया जाए, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और आम लोगों के अधिकारों पर भी असर पड़ेगा। इसलिए समयसीमा का पालन सभी के लिए जरूरी है।

बिहार में किसानों के लिए खुशखबरी! सरकार दे रही पैसा, उठायें लाभ

पटना। बिहार में बाढ़ और अत्यधिक बारिश से प्रभावित किसानों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत योजना शुरू की है। 'कृषि इनपुट अनुदान' के तहत उन किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को नुकसान से उबारना और अगली फसल के लिए तैयार करना है।

किन किसानों को मिलेगा लाभ

इस योजना का फायदा उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनकी फसल कम से कम 33 प्रतिशत या उससे अधिक नष्ट हुई है। इसमें पंजीकृत रैयत और गैर-रैयत दोनों तरह के किसान शामिल किए गए हैं। आवेदन के समय आधार सत्यापन अनिवार्य होगा, ताकि लाभ सीधे सही व्यक्ति तक पहुंच सके।

सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि

सरकार ने इस योजना को पारदर्शी बनाने के लिए सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने का फैसला किया है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी।

कितनी मिलेगी सहायता राशि

फसल और भूमि के प्रकार के अनुसार अनुदान की दर तय की गई है:

असिंचित (बारिश आधारित) भूमि: ₹8,500 प्रति हेक्टेयर

सिंचित भूमि: ₹17,000 प्रति हेक्टेयर

बहुवर्षीय फसल (जैसे गन्ना): ₹22,500 प्रति हेक्टेयर

इसके अलावा न्यूनतम सहायता राशि भी तय की गई है, ताकि छोटे किसानों को भी पर्याप्त मदद मिल सके। यह अनुदान अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक के लिए दिया जाएगा।

किन जिलों के किसान होंगे शामिल

यह योजना राज्य के कई बाढ़ प्रभावित जिलों में लागू की गई है, जिनमें सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिले शामिल हैं। कुल 13 जिलों के 88 प्रखंडों और 1400 से अधिक पंचायतों को कवर किया गया है।

किसानों के लिए आवेदन की समयसीमा

किसानों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 5 मई तय की गई है। इसलिए पात्र किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

बिहार को मिली बड़ी सौगात! पुनपुन में विकसित होगी पाटलिपुत्र टाउनशिप

पटना। बिहार की राजधानी पटना के आसपास शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। शहर से करीब 13 किलोमीटर दूर पुनपुन क्षेत्र में 'पाटलिपुत्र टाउनशिप' विकसित करने की योजना तैयार की गई है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ राजधानी के विस्तार का आधार बनेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में आधुनिक शहरी ढांचे का नया केंद्र भी बन सकता है।

पटना में बड़े पैमाने पर जमीन चिन्हित

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 1010 एकड़ का कोर एरिया तय किया गया है, जहां टाउनशिप का मुख्य विकास होगा। इसके अलावा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगभग 81,730 एकड़ का एक विशाल 'स्पेशल एरिया' भी चिन्हित किया गया है। इसमें कई प्रखंडों के सैकड़ों गांवों को शामिल किया गया है, जिससे यह प्रोजेक्ट एक बड़े क्षेत्रीय विकास मॉडल के रूप में उभरेगा।

सुविधाओं से लैस होगा नया शहर

पाटलिपुत्र टाउनशिप को एक आधुनिक और स्मार्ट शहर के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें फिनटेक सिटी, स्पोर्ट्स सिटी, लॉजिस्टिक हब और ज्यूडिशियल एकेडमी जैसी सुविधाएं शामिल की जाएंगी। इसका उद्देश्य रोजगार के अवसर बढ़ाना और निवेश को आकर्षित करना है।

कनेक्टिविटी बनेगी बड़ी ताकत

यह टाउनशिप रणनीतिक रूप से ऐसी जगह विकसित की जा रही है, जहां से प्रमुख स्थानों तक पहुंच आसान होगी। पटना रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और शहर के मुख्य व्यावसायिक इलाकों से इसकी दूरी संतुलित है, जिससे आवागमन सुगम रहेगा। साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल मार्ग से जुड़ाव इसे और मजबूत बनाएगा।

कई गांवों का होगा विकास

इस परियोजना में एक दर्जन से अधिक राजस्व गांव सीधे तौर पर कोर एरिया में शामिल हैं, जबकि सैकड़ों गांव स्पेशल एरिया का हिस्सा होंगे। इससे ग्रामीण इलाकों में भी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय लोगों को विकास का सीधा लाभ मिलेगा।

यूपी में 9वीं-10वीं के छात्रों को राहत: अब पत्राचार से भी कर सकेंगे पढ़ाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम फैसला लिया गया है। अब कक्षा 9 और 10 के छात्र भी पत्राचार (कॉरेस्पॉन्डेंस) शिक्षा के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। यह सुविधा पहले केवल इंटरमीडिएट स्तर तक सीमित थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है।

शिक्षा का दायरा हुआ व्यापक

माध्यमिक शिक्षा विभाग के इस निर्णय से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो किसी कारणवश नियमित स्कूल नहीं जा पाते। नए आदेश के अनुसार, आगामी शैक्षणिक सत्र से हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9 और 10) के लिए भी पंजीकरण शुरू किया जाएगा। यह कदम शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किन छात्रों को मिलेगा फायदा?

यह सुविधा खासतौर पर उन छात्रों के लिए उपयोगी होगी जो आर्थिक, सामाजिक या व्यक्तिगत कारणों से नियमित स्कूल नहीं जा पाते। अब वे घर बैठे पढ़ाई कर सकेंगे और बोर्ड परीक्षा की तैयारी भी कर पाएंगे।

पंजीकरण होगा अनिवार्य

पत्राचार शिक्षा के तहत पढ़ाई करने वाले छात्रों को संस्थान में पंजीकरण कराना जरूरी होगा। साथ ही उन्हें निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन करना होगा, ताकि वे परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।

विभाग ने दिए निर्देश

शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी मंडलों और जिलों के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। जल्द ही पंजीकरण प्रक्रिया और अन्य जरूरी जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी।

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को राहत: स्मार्ट मीटर गड़बड़ी पर सख्त हुआ आयोग, जुर्माने की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियामक तंत्र अब सक्रिय नजर आ रहा है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिचार्ज के बाद तय समय में बिजली आपूर्ति बहाल न होना नियमों का उल्लंघन है।

दो घंटे में कनेक्शन जरूरी

नियमों के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म होने के कारण कट जाता है, तो रिचार्ज के बाद अधिकतम दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति फिर से शुरू हो जानी चाहिए। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां यह समयसीमा पार हो गई।

पावर कॉरपोरेशन को नोटिस

इसी लापरवाही को लेकर आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न प्रतिदिन एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाए। इस संबंध में 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

लाखों उपभोक्ता प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1.93 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के कनेक्शन निर्धारित दो घंटे के भीतर बहाल नहीं हो पाए। कई दिनों में तो केवल 77 प्रतिशत कनेक्शन ही समय पर जुड़ पाए, जो तय मानकों से काफी कम है।

स्मार्ट मीटर पर पहले भी उठे सवाल

स्मार्ट मीटर को लेकर पहले भी लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में नाराजगी जताई थी और तकनीकी जांच के निर्देश दिए थे। जांच के चलते फिलहाल पुराने मीटरों को बदलने की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है।

उम्र के हिसाब से कितना होना चाहिए BP? जानिए सही ब्लड प्रेशर चार्ट

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। अक्सर लोग यह नहीं जानते कि उनकी उम्र के हिसाब से ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए। सही जानकारी न होने के कारण कई बार बीमारी देर से पकड़ में आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, उम्र के साथ शरीर में बदलाव आते हैं, इसलिए BP की सामान्य सीमा भी थोड़ी बदल सकती है।

क्या होता है सामान्य ब्लड प्रेशर?

ब्लड प्रेशर दो संख्याओं में मापा जाता है। सिस्टोलिक (ऊपरी) और डायस्टोलिक (निचला)। सामान्यतः 120/80 mmHg को आदर्श माना जाता है, लेकिन यह हर उम्र में एक जैसा नहीं रहता।

उम्र के अनुसार ब्लड प्रेशर चार्ट

बच्चे (6–12 वर्ष)

इस आयु वर्ग में सामान्य BP लगभग 90/60 से 110/70 mmHg के बीच माना जाता है। बच्चों में BP आमतौर पर कम रहता है और इसे लेकर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती, जब तक कोई असामान्य लक्षण न हों।

किशोर (13–18 वर्ष)

इस उम्र में BP 100/70 से 120/80 mmHg तक सामान्य माना जाता है। हार्मोनल बदलाव के कारण हल्का उतार-चढ़ाव हो सकता है।

युवा (19–35 वर्ष)

इस आयु में 110/70 से 120/80 mmHg तक का BP आदर्श होता है। अगर BP लगातार 130/80 के आसपास रहने लगे तो सावधानी बरतनी चाहिए।

मध्यम आयु (36–55 वर्ष)

इस उम्र में 120/80 से 130/85 mmHg तक BP सामान्य माना जा सकता है। तनाव, खानपान और जीवनशैली का इस पर बड़ा असर पड़ता है।

वरिष्ठ नागरिक (56 वर्ष से ऊपर)

इस आयु वर्ग में 130/85 से 140/90 mmHg तक BP स्वीकार्य माना जाता है, लेकिन इससे अधिक होने पर डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

कब समझें खतरे की घंटी?

अगर BP लगातार 140/90 mmHg से ऊपर रहता है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। वहीं बहुत कम BP (90/60 से नीचे) भी कमजोरी, चक्कर और अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

कैसे रखें BP कंट्रोल में?

संतुलित और कम नमक वाला आहार लें

नियमित व्यायाम करें

तनाव को कम करने के उपाय अपनाएं

धूम्रपान और शराब से दूरी रखें

समय-समय पर BP की जांच कराते रहें। 

खुशखबरी का महाधमाका: यूपी में एक साथ 2 बड़ी भर्तियां, युवाओं के लिए सुनहरा मौका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर सामने आया है। राज्य में एक साथ दो अहम भर्तियों का ऐलान हुआ है, जिससे हजारों उम्मीदवारों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुल गए हैं। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा बोर्ड ने अलग-अलग पदों पर बड़ी संख्या में वैकेंसी जारी की हैं।

1 .UPSSSC में 929 पदों पर भर्ती

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (ASO) और असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर (ARO) के कुल 929 पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है, जो 11 मई 2026 तक चलेगी। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री होना जरूरी है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

2 .सहकारी सेवा बोर्ड में 2085 वैकेंसी

वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा बोर्ड ने 2085 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 25 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 15 मई 2026 तक चलेगी। इस भर्ती में ग्रेजुएशन, बीकॉम, बीबीए, इंजीनियरिंग डिग्री या डिप्लोमा और कंप्यूटर योग्यता (CCC/O Level) रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। अलग-अलग पदों के लिए योग्यता भी अलग निर्धारित की गई है।

इन भर्तियों के लिए आयु सीमा और अन्य शर्तें

इन भर्तियों के लिए उम्मीदवारों की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच रखी गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। दोनों भर्तियों को मिलाकर कुल 3000 से ज्यादा पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जो यूपी के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर है। लंबे समय से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह सुनहरा मौका माना जा रहा है।

ब्रह्मोस-NG का जलवा: भारत की इस नई ताकत से दुनिया हैरान

नई दिल्ली। भारत ने अपनी रक्षा क्षमता को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए आधुनिक मिसाइल तकनीक में बड़ा कदम बढ़ाया है। BrahMos Aerospace द्वारा विकसित ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) मिसाइल को देश की अगली पीढ़ी का 'स्मार्ट ब्रह्मास्त्र' माना जा रहा है। यह अपने पुराने संस्करण की तुलना में अधिक हल्की, तेज और तकनीकी रूप से उन्नत है।

कॉम्पैक्ट डिजाइन, ज्यादा मारक क्षमता

ब्रह्मोस-NG को खासतौर पर कॉम्पैक्ट और हल्का बनाया गया है, जिससे इसकी तैनाती और उपयोग में लचीलापन बढ़ गया है। इसका आकार छोटा होने के कारण इसे अधिक प्लेटफॉर्म पर आसानी से लगाया जा सकता है। यह बदलाव आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जहां तेजी और सटीकता सबसे अहम होती है।

लड़ाकू विमानों की बढ़ी ताकत

नई मिसाइल का सबसे बड़ा फायदा भारतीय वायुसेना को मिलने वाला है। Sukhoi Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमान अब पहले की तुलना में अधिक संख्या में ब्रह्मोस-NG मिसाइलें ले जा सकेंगे। इसके अलावा HAL Tejas और मिग-29K जैसे विमानों पर भी इसे तैनात करने की योजना है। इससे वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

तेज रफ्तार और लंबी दूरी

ब्रह्मोस-NG अपनी सुपरसोनिक गति के लिए जानी जाती है। यह ध्वनि की गति से कई गुना तेज उड़ान भर सकती है, जिससे दुश्मन के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसकी मारक क्षमता सैकड़ों किलोमीटर तक मानी जा रही है, जो इसे दूर से सटीक प्रहार करने में सक्षम बनाती है।

स्टेल्थ और स्मार्ट तकनीक

इस मिसाइल में आधुनिक स्टेल्थ तकनीक और उन्नत सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बचते हुए लक्ष्य तक पहुंच सकती है। साथ ही इसकी सटीकता भी बेहद उच्च स्तर की बताई जा रही है, जिससे लक्ष्य को चूकने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

हर मोर्चे पर तैनाती की क्षमता

ब्रह्मोस-NG की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुमुखी तैनाती है। इसे जमीन, समुद्र, हवा और यहां तक कि पनडुब्बियों से भी दागा जा सकता है। यह विशेषता इसे आधुनिक युद्ध के हर मोर्चे पर प्रभावी बनाती है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

इस मिसाइल का विकास भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में इसके परीक्षण और तैनाती से देश की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।

रवि योग में शनि का प्रभाव! 5 राशियों का चमकेगा भाग्य और बढ़ेगा तेज

राशिफल। ज्योतिषीय दृष्टि से 25 अप्रैल 2026 का दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुबह 5:54 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 5:53 बजे तक रवि योग रहेगा। माना जाता है कि रवि योग नकारात्मक प्रभावों को कम कर शुभ परिणामों को बढ़ाने वाला होता है। इस बार खास बात यह है कि इस योग पर शनि का प्रभाव भी रहेगा, जो कुछ राशियों के लिए विशेष लाभकारी संकेत दे रहा है।

इन 5 राशियों को मिलेगा खास लाभ

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह योग आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ाने वाला रहेगा। लंबे समय से रुके कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए यह समय बुद्धिमत्ता और निर्णय क्षमता को मजबूत करेगा। व्यापार में लाभ मिलने की संभावना है। पुराने निवेश से फायदा हो सकता है और नए संपर्क भी बनेंगे।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने के योग हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत को सराहना मिलेगी। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी और कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

4. तुला राशि

तुला राशि के लिए यह समय संतुलन और सफलता का रहेगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। आर्थिक मामलों में लाभ होगा और किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है।

5. मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए शनि का प्रभाव विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। करियर में तरक्की के योग बन रहे हैं। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और नई योजनाओं में सफलता मिल सकती है।

यूपी में बनेगा 403 किलोमीटर रेल लाइन, इन जिलों को खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। गाजियाबाद से सीतापुर के बीच 403 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की मंजूरी दी गई है। करीब ₹14,926 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।

किन जिलों को मिलेगा फायदा

यह रेल परियोजना कई प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी, जिनमें हापुड़, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर और लखीमपुर खीरी शामिल हैं। इसके अलावा यह लाइन अमरोहा, रामपुर और अन्य क्षेत्रों को भी जोड़ेगी, जिससे पूरे रूट की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

ट्रैफिक दबाव होगा कम

फिलहाल इस रूट पर रेल ट्रैफिक अपनी क्षमता से कहीं अधिक चल रहा है। नई लाइन बनने के बाद ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी और जाम की समस्या कम होगी। इससे यात्रियों को समय पर ट्रेन मिलने और यात्रा में सुविधा का लाभ मिलेगा।

6 नए स्टेशनों का निर्माण

इस परियोजना के तहत भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को बाईपास करने के लिए छह नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे ट्रेन संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और प्रमुख स्टेशनों पर दबाव कम पड़ेगा।

माल ढुलाई को बढ़ावा

नई रेल लाइन से मालगाड़ियों के संचालन में भी सुधार होगा। इससे खासकर औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को फायदा मिलेगा। लखीमपुर खीरी जैसे इलाकों में व्यापार बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

तेज और बेहतर सुविधा

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और यात्रा का समय घटेगा। साथ ही, यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा, जिससे बड़े शहरों तक पहुंचना आसान होगा।

चार साल में पूरा होने की उम्मीद

सरकार ने इस परियोजना को अगले चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके पूरा होने के बाद यह रूट देश के हाई डेंसिटी नेटवर्क का एक मजबूत हिस्सा बन जाएगा।

भाग्य का साथ मिलेगा! 24 से 28 अप्रैल तक 5 राशियों पर बरसेगी किस्मत

राशिफल। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 24 से 28 अप्रैल के बीच ग्रहों की विशेष स्थिति कई राशियों के लिए शुभ संकेत दे रही है। इस दौरान बन रहे योग करियर, धन और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय खासतौर पर पांच राशियों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है और करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों का सहयोग मिलेगा, वहीं व्यापार में लाभ के योग बन रहे हैं।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि के लिए आर्थिक दृष्टि से यह समय बेहद शुभ है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा और कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

3. कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पारिवारिक जीवन में भी तालमेल बेहतर रहेगा।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों को इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिल सकता है। लंबे समय से रुके काम पूरे होंगे और व्यापार में नए अवसर मिलेंगे। रिश्तों में मधुरता आएगी और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

5. मकर राशि

मकर राशि के लिए यह समय मेहनत का फल देने वाला साबित हो सकता है। करियर में तरक्की के योग बन रहे हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कोई बड़ा निर्णय लेने के लिए यह समय अनुकूल माना जा रहा है।

CM सम्राट चौधरी के 5 बड़े फैसले, कर्मचारियों में मचा हड़कंप

पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार अब सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली में सुधार को प्राथमिकता दे रही है। इसी कड़ी में कर्मचारियों की समयपालन और कार्यनिष्ठा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

1 .समय पर उपस्थिति को लेकर सख्ती

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचें और निर्धारित समय तक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। पत्र में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में कर्मचारी देर से आते हैं या समय से पहले कार्यालय छोड़ देते हैं, जो प्रशासनिक अनुशासन के खिलाफ है।

2 .ड्यूटी में लापरवाही पर कार्रवाई

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि केवल उपस्थित रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्य के प्रति गंभीरता और जिम्मेदारी भी जरूरी है। कुछ मामलों में यह पाया गया है कि कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहते हुए भी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

3 .कार्यालय समय का सख्ती से पालन

राज्य में सचिवालय और उससे जुड़े कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, जहां सुबह 9:30 बजे से शाम तक काम का समय तय है। वहीं क्षेत्रीय कार्यालयों में छह दिन का कार्य सप्ताह लागू है, जिसमें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम होता है। सरकार ने निर्देश दिया है कि इन समय-सारिणी का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

4 .बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य

सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली पहले से लागू है, लेकिन अब इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि कर्मचारी नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करें।

5 .देरी पर वेतन कटौती का प्रावधान

सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी लगातार देर से आता है, तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई होगी। इसमें छुट्टी काटने से लेकर वेतन कटौती तक शामिल है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी रखा गया है।

प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि इन सख्त निर्देशों से सरकारी दफ्तरों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

यूपी में शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट, सरकार ने दी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शिक्षकों के लिए एक अहम और राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में वर्षों पहले नियुक्त शिक्षकों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षकों को फायदा मिलेगा।

पुराने शिक्षकों को मिला टीईटी आवेदन का मौका

आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1990 से 1992 के बीच मृतक आश्रित श्रेणी के तहत नियुक्त किए गए शिक्षक, जो अब तक तकनीकी कारणों से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का फॉर्म नहीं भर पा रहे थे, उन्हें अब आवेदन का अवसर दिया जाएगा। पहले ऐसे शिक्षकों को इसलिए परेशानी हो रही थी क्योंकि उनके पास 10वीं और 12वीं की योग्यता तो थी, लेकिन स्नातक या बीटीसी/बीएड जैसी आवश्यक डिग्रियों का विवरण नहीं था, जिसके कारण ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती थी।

पोर्टल पर नई सुविधा शुरू

अब आयोग ने पोर्टल पर जरूरी अपडेट जारी कर दिया है। इसके बाद ऐसे शिक्षक बिना अतिरिक्त शैक्षणिक विवरण भरे आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। उन्हें केवल दिए गए चेक बॉक्स पर क्लिक करना होगा और आगे बढ़ने का विकल्प मिल जाएगा। इस बदलाव से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से तकनीकी बाधाओं के कारण टीईटी आवेदन से वंचित रह जा रहे थे।

प्राथमिक से उच्च प्राथमिक टीईटी तक विकल्प

इसके अलावा, जिन शिक्षकों ने कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक स्तर) के लिए आवेदन किया था, उन्हें अब कक्षा 6 से 8 (उच्च प्राथमिक स्तर) की टीईटी के लिए भी आवेदन करने का विकल्प दिया गया है। लॉगिन करने के बाद अभ्यर्थी 'एग्जाम ऑप्शन' में जाकर अपनी पसंद के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता दोबारा भरने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया और सरल हो गई है।

आयोग के इस फैसले से शिक्षकों को मिली बड़ी राहत

आयोग के इस फैसले से हजारों शिक्षकों को फायदा होने की उम्मीद है। वर्षों से लंबित मामलों में यह कदम एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जिससे न केवल प्रक्रिया आसान होगी बल्कि पुराने मामलों का समाधान भी तेजी से हो सकेगा।

यूपी बनेंगे 5 नए स्पोर्ट्स स्टेडियम, इन जिलों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खेलों के विकास को नई गति देने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के पांच जिलों गाजीपुर, चंदौली, हापुड़, संभल और शामली में नए और आधुनिक स्पोर्ट्स स्टेडियमों का निर्माण किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर ही अंतरराष्ट्रीय मानकों की सुविधाएं मिल सकेंगी।

प्रदेश में बढ़ेगा खेल ढांचा

फिलहाल उत्तर प्रदेश के 71 जिलों में 84 स्टेडियम पहले से ही संचालित हैं, लेकिन बढ़ती खेल प्रतिभा और सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए नए स्टेडियमों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इन नए स्टेडियमों का उद्देश्य ग्रामीण और छोटे शहरों के खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराना है।

कुछ जिलों में तेजी से चल रहा काम

इन परियोजनाओं में सबसे आगे गाजीपुर का स्टेडियम है, जिसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। वहीं हापुड़ में करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। संभल में निर्माण कार्य लगभग एक चौथाई पूरा हुआ है, जबकि शामली में हाल ही में काम की शुरुआत की गई है। चंदौली में अभी टेंडर प्रक्रिया जारी है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

2025-26 तक मिल सकती है नई सुविधाएं

सरकारी जानकारी के अनुसार, गाजीपुर को छोड़कर बाकी सभी स्टेडियमों को वर्ष 2025-26 में स्वीकृति मिली है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में ये सभी परियोजनाएं तेजी से पूरी होकर खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध हो जाएंगी।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्टेडियम

इन नए स्पोर्ट्स स्टेडियमों को सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि इन्हें पूरी तरह मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें मल्टीपर्पज हॉल, स्विमिंग पूल, जिम, बैडमिंटन और टेनिस कोर्ट, वॉलीबॉल ग्राउंड, हॉकी-फुटबॉल मैदान और एथलेटिक्स ट्रैक जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा फायदा

खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह के अनुसार, इन स्टेडियमों के निर्माण से स्थानीय खिलाड़ियों को बड़े शहरों में जाए बिना ही बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे न केवल खेल प्रतिभाओं को पहचान मिलेगी, बल्कि राज्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

सुपर खुशखबरी! यूपी में एक नई भर्ती का ऐलान, युवाओं के चेहरे खिले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने वन रक्षक और वन्य जीव रक्षक के कुल 709 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर मुख्य परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन की तारीखों की घोषणा कर दी है।

आवेदन प्रक्रिया कब से शुरू होगी?

आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया 30 जून से शुरू होगी। इच्छुक अभ्यर्थी 20 जुलाई तक अपना आवेदन और फीस जमा कर सकेंगे। इसके बाद आवेदन में किसी प्रकार का सुधार करने या शुल्क समायोजन करने की अंतिम तिथि 27 जुलाई तय की गई है।

सिर्फ PET पास अभ्यर्थियों को मौका

इस भर्ती प्रक्रिया में केवल वे उम्मीदवार ही शामिल हो पाएंगे, जिन्होंने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET-2025) में सफल होकर निर्धारित कटऑफ के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया गया है। यानी बिना PET स्कोर के इस भर्ती में आवेदन संभव नहीं होगा।

चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

वन रक्षक और वन्य जीव रक्षक पदों के लिए चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें पहले लिखित परीक्षा आयोजित होगी, जिसके बाद चयनित उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) से गुजरना होगा। दोनों चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार की जाएगी।

युवाओं के लिए बड़ा अवसर

वन विभाग में यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मौका मानी जा रही है, जो सरकारी नौकरी के साथ-साथ प्रकृति और वन्य जीवन से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। 709 पदों पर भर्ती होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलेगा।

जानकारी कहां मिलेगी?

भर्ती से जुड़ी सभी विस्तृत जानकारी और अपडेट आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, जहां अभ्यर्थी समय-समय पर अपडेट चेक कर सकते हैं।

बिहार के किसानों के लिए बड़ी सौगात: सरकार ने दी 3 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी कड़ी में बीज अनुदान योजना किसानों के लिए एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है। इस योजना का उद्देश्य कम लागत में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

1. उन्नत बीज पर मिल रहा भारी अनुदान

इस योजना के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज बेहद कम कीमत पर या कई मामलों में पूरी तरह अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यानी कुछ फसलों के लिए किसानों को 100% तक सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। इससे खेती की लागत में बड़ी कमी आई है और किसानों को बेहतर फसल उत्पादन का मौका मिल रहा है।

2. आवेदन की अंतिम तारीख तय, प्रक्रिया आसान

सरकार ने इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है। किसान 15 मई तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आवेदन करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध हैं, जिससे अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ सकें। सरकार ने किसानों से समय पर आवेदन करने की अपील की है ताकि वे इस लाभ से वंचित न रहें।

3. इस योजना से लाखों किसानों को पहले ही मिला फायदा

यह योजना पहले से ही राज्य में बड़े स्तर पर लागू की जा रही है। बीज निगम और जिला स्तर के वितरकों के माध्यम से अब तक लाखों किसानों तक बीज पहुंचाया जा चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 7.99 लाख किसानों को बीज उपलब्ध कराए जा चुके हैं और बड़ी मात्रा में बीज वितरण किया गया है। इससे कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

इस योजना के लिए किसानों का पात्रता की शर्तें भी तय किया गया 

इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो बिहार के स्थायी निवासी हैं और जिनके पास कृषि योग्य भूमि है। साथ ही किसानों का भूमि और डीबीटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। सही दस्तावेजों के बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बिहार में इन "कर्मचारियों" पर गिरेगी गाज, वेतन में होगी कटौती

पटना। बिहार में प्रशासनिक कामकाज को लेकर सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। पिछले कई दिनों से हड़ताल पर चल रहे अंचल एवं राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यों में बाधा डालने को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वेतन से होगी कटौती, 624 अधिकारियों की सूची तैयार

सरकारी आदेश के अनुसार, हड़ताल में शामिल अधिकारियों के वेतन से एक हजार रुपये की कटौती की जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारियों को कुल 624 अधिकारियों की सूची भेज दी गई है, जिन पर यह कार्रवाई लागू होगी। यह कदम विशेष रूप से जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा को देखते हुए उठाया गया है।

जनगणना कार्य में बाधा बना कारण

राज्य सरकार के अनुसार, जनगणना कार्य में सहयोग न करना इस कार्रवाई का मुख्य आधार है। बिहार में वर्तमान में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है, जिसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। हड़ताल के कारण इस महत्वपूर्ण कार्य पर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।

विभाग का सख्त रुख

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि जनगणना कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएं। इसी के तहत यह जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया है।

संगठन की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर कर्मचारी संगठन बिरसा यूनाइटेड के अध्यक्ष आदित्य शिवमशंकर ने सरकार से बातचीत की अपील की है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की मांगें न्यायसंगत हैं और सरकार को संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विकास और सुशासन के लिए सरकार और कर्मचारियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।

CM सम्राट का बड़ा फैसला: राशनकार्ड धारकों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर उत्पन्न हुई चुनौतियों के बीच राज्य सरकार ने वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था पर गंभीर कदम उठाए हैं। सरकार अब रसोई गैस पर निर्भरता कम करने और आम लोगों को राहत देने के लिए नए विकल्पों पर काम कर रही है।

कोयला बन सकता है नया कुकिंग फ्यूल विकल्प

राज्य सरकार की योजना के अनुसार, अब खाना पकाने के लिए कोयले को एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा सकता है। यह फैसला खासकर उन ग्रामीण और गरीब परिवारों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो एलपीजी की बढ़ती कीमतों और कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सुबह की चाय से लेकर भोजन तक, रोजमर्रा की जरूरतों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

राशन प्रणाली के जरिए होगी आपूर्ति

सरकार की योजना है कि इस व्यवस्था को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जोड़ा जाए। इसके तहत राज्य के करीब 2 करोड़ राशन कार्ड धारकों को इसका लाभ मिल सकता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य है कि जरूरतमंद परिवारों तक सस्ता और आसानी से उपलब्ध ईंधन पहुंच सके।

वैश्विक संकट का असर

बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं का असर एलपीजी उपलब्धता पर पड़ा है। इसी वजह से सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था की ओर ध्यान देना पड़ा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिवार को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।

कालाबाजारी पर नियंत्रण

कोयले की मांग बढ़ने के साथ ही इसके दामों में अस्थिरता और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। सरकार का मानना है कि यदि इसे PDS के माध्यम से वितरित किया जाएगा, तो कीमतों पर नियंत्रण रहेगा और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।

प्रस्तावित वितरण योजना

प्रस्ताव के अनुसार, हर राशन कार्ड धारक को हर महीने लगभग 100 किलो तक कोयला उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए राज्य खनन निगम और जिला स्तर के आपूर्ति तंत्र को जिम्मेदारी दी जाएगी। 

केंद्र सरकार लाई नया ड्राफ्ट! देशभर के किसानों को बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देश के करोड़ों गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने Sugarcane (Control) Order, 1966 में संशोधन के लिए नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसका उद्देश्य पुराने नियमों को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाना है।

पुराने नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

यह ड्राफ्ट चीनी उद्योग से जुड़े कई अहम नियमों में सुधार का प्रस्ताव लेकर आया है। इसमें भुगतान प्रणाली, नई चीनी मिलों की स्थापना, एथेनॉल उत्पादन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों और मिलों के बीच लंबे समय से चल रहे विवादों को कम किया जाए और व्यवस्था को अधिक सुचारु बनाया जाए।

किसानों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी

प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम बात यह है कि गन्ना आपूर्ति के बाद किसानों को 14 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। यह नियम किसानों के नकदी प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करेगा। यदि कोई चीनी मिल समय पर भुगतान नहीं करती है, तो उस पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज लगाने का प्रावधान रखा गया है। इससे भुगतान में देरी की समस्या पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

बकाया राशि की वसूली होगी आसान

सरकार ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यदि किसी मिल द्वारा किसानों का भुगतान रोका जाता है, तो बकाया राशि की वसूली जिला प्रशासन द्वारा भू-राजस्व की तरह की जा सकेगी। इससे किसानों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

FRP व्यवस्था रहेगी जारी

वहीं, न्यूनतम गन्ना मूल्य यानी Fair and Remunerative Price (FRP) प्रणाली को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसका मतलब है कि किसानों को उनके गन्ने का एक निश्चित न्यूनतम मूल्य मिलता रहेगा, जिससे उनकी आय की सुरक्षा बनी रहेगी।

नई चीनी मिलों के लिए नए नियम

ड्राफ्ट के अनुसार, अब कोई भी नई चीनी मिल पहले से मौजूद मिल के 25 किलोमीटर के दायरे में स्थापित नहीं की जा सकेगी। इसका उद्देश्य कच्चे माल की अनावश्यक प्रतिस्पर्धा को रोकना और उद्योग में संतुलन बनाए रखना है। हालांकि, राज्य सरकारें केंद्र की अनुमति से इस दूरी में बदलाव का प्रस्ताव भी रख सकती हैं।

एथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

नई नीति में एथेनॉल उत्पादन को भी चीनी उद्योग प्रणाली में शामिल करने की दिशा दिखाई गई है। इससे चीनी मिलों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और गन्ने की मांग में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। यह कदम ऊर्जा मिश्रण नीति के अनुरूप भी माना जा रहा है।

सुझाव देने की अंतिम तारीख भी तय

सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 20 मई तक आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद अंतिम नियमों को लागू किया जाएगा।