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खुशखबरी पर खुशखबरी! यूपी के 2 संस्थानों में बंपर भर्ती, करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी है। राज्य के दो प्रतिष्ठित संस्थानों ने अपने संस्थानों में भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन अवसरों का लाभ उठाकर योग्य अभ्यर्थी अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं।

संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (SGPGIMS)

चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए SGPGIMS ने 98 फैकल्टी पदों के लिए भर्ती की घोषणा की है। इस भर्ती के लिए DNB, MS/MD, M.Ch, DM जैसी योग्यताएं रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन होगी। इच्छुक अभ्यर्थी SGPGIMS की आधिकारिक वेबसाइट https://sgpgims.org.in/ से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। 

आवेदन की प्रक्रिया 29 जनवरी 2026 से शुरू होगी और 28 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस भर्ती के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। इसलिए फटाफट आवेदन को पूरा करें।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने 27 गैर-शिक्षण पदों (Non-Teaching) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसके लिए पात्रता रखने वाले उम्मीदवार हैं: B.Ed, किसी भी मास्टर्स डिग्री, M.Sc, M.Lib, MS/MD, M.P.Ed। इस भर्ती के लिए आवेदन ऑनलाइन करना अनिवार्य है। उम्मीदवार https://api.amu.ac.in/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। 

आवेदन प्रक्रिया 19 फरवरी 2026 से शुरू होगी और 4 मार्च 2026 तक चलेगी। AMU में चयनित उम्मीदवारों को प्रशासनिक और अकादमिक क्षेत्रों में अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। दोनों संस्थानों के लिए अंतिम तिथियों का पालन करना बेहद आवश्यक है।

अमेरिका ने बनाया 'सीक्रेट' हथियार, चीन के उड़े होश, रूस सन्न!

न्यूज डेस्क। अमेरिका ने एक नया गुप्त हथियार विकसित किया है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ‘डिसकॉम्बोबुलेटर’ नाम दिया। इस हथियार का मकसद दुश्मन के राडार और सुरक्षा सिस्टम को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करना है। ट्रंप ने बताया कि जनवरी में वेनेजुएला के ऑपरेशन के दौरान इसका इस्तेमाल किया गया, जिससे वहां के डिफेंस सिस्टम काम नहीं कर पाए और रूसी व चीनी तकनीक भी निष्क्रिय रही।

हथियार की खासियत

‘डिसकॉम्बोबुलेटर’ कोई सामान्य मिसाइल या बम नहीं है। यह तकनीक विशेष रूप से साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और ऊर्जा आधारित तकनीकों का मिश्रण हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रमुख तत्व हो सकते हैं:

ऊर्जा-आधारित हमले: हाई-पावर माइक्रोवेव या सोनिक तरंगें, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को काम न करने लायक बना देती हैं।

साइबर हस्तक्षेप: दुश्मन के कंप्यूटर नेटवर्क और कम्युनिकेशन सिस्टम को अस्थायी रूप से बाधित करना।

ध्वनि और भ्रम तकनीक: ऑपरेटर और उपकरण दोनों को भ्रमित करने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल।

इन तकनीकों का संयोजन दुश्मन को बिना किसी गोली के काम न करने लायक बना देता है।

वेनेजुएला में इसका उपयोग

3 जनवरी को अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला की राजधानी में एक ऑपरेशन किया। ट्रंप ने बताया कि इस मिशन में डिसकॉम्बोबुलेटर का इस्तेमाल किया गया, जिससे दुश्मन के सुरक्षा उपकरण सक्रिय नहीं हो सके। इससे ऑपरेशन सफल रहा और अमेरिकी सेना को किसी बड़े नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा।

रणनीतिक महत्व

यह हथियार दिखाता है कि भविष्य में युद्ध सिर्फ पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक और ऊर्जा आधारित तकनीक दुश्मन की ताकत को बिना विनाश के बेकार कर सकती है। अमेरिका की यह नई तकनीक उसकी सैन्य क्षमता को मजबूती देती है और वैश्विक रणनीतिक संतुलन में बदलाव ला सकती है।

भारत तैयार कर रहा 2 घातक मिसाइलें, पाक के उड़े होश, चीन सन्न!

नई दिल्ली। भारत की वायु शक्ति एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। स्वदेशी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DRDO दो उन्नत एयर-टू-एयर मिसाइलों को परिचालन भूमिका में लाने की दिशा में काम कर रही है, Astra Mk-III और STAR missile। इन दोनों को एक साथ तैनात करने की रणनीति भारतीय वायुसेना को बहु-स्तरीय (लेयर्ड) बढ़त दे सकती है, खासकर तब जब इन्हें HAL Tejas जैसे हल्के लड़ाकू विमान से जोड़ा जाए।

Astra Mk-III: लंबी दूरी की शक्ति

Astra Mk-III भारत की पहली ऐसी मिसाइल है जो सॉलिड-फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक पर आधारित है। यह लंबी दूरी तक दुश्मन के बड़े लक्ष्यों को तबाह करने में सक्षम है। युद्ध की स्थिति में, यह मिसाइल दुश्मन के जहाजों या हाई-वैल्यू टारगेट पर निशाना साधकर उन्हें दूर से ही नष्ट कर सकती है।

STAR मिसाइल: रफ्तार की ताकत

STAR मिसाइल पहले केवल अभ्यास के लिए इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन अब इसे वास्तविक लड़ाकू मिसाइल में परिवर्तित किया जा रहा है। यह लिक्विड-फ्यूल रैमजेट तकनीक पर आधारित है। उड़ान के दौरान अपनी रफ्तार बदलने की क्षमता इसे नजदीकी और मध्यम दूरी के मुकाबलों (55-175 किमी) में अत्यंत प्रभावी बनाती है। STAR मिसाइल दुश्मन के राडार को चकमा देकर अचानक हमला कर सकती है और एंटी-रेडिएशन क्षमता के कारण दुश्मन के राडार संकेतों को भी निशाना बना सकती है।

यह ‘किलर जोड़ी’ कैसे काम करेगी?

संभावित युद्ध परिदृश्य में पहले चरण में अस्त्र Mk-III दूर से लक्ष्य पर दबाव बनाएगी। विरोधी बचाव में उलझेगा, तभी STAR अलग मार्ग और परिवर्तनीय गति के साथ अचानक प्रहार कर सकती है। दो भिन्न तकनीक और प्रोफाइल का एक साथ सामना करना किसी भी वायु रक्षा के लिए कठिन होगा।

CM नीतीश का ऐलान: इन जिलों की बल्ले-बल्ले!

पटना। बिहार में औद्योगिक पुनरुत्थान और ग्रामीण विकास को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अहम निर्देश दिए हैं। ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ के लक्ष्य के तहत राज्य की सभी बंद पड़ी चीनी मिलों को जल्द शुरू करने का आदेश दिया गया है। यह निर्णय एक अणे मार्ग स्थित संकल्प सभागार में समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया।

इन जिलों में बंद हैं चीनी मिलें

राज्य के कई जिलों में वर्षों से चीनी मिलें बंद पड़ी हैं। इनमें पश्चिम चंपारण (चनपटिया), पूर्वी चंपारण (बाराचकिया और मोतिहारी), गोपालगंज (सासामूसा), सारण (मढ़ौरा), मुजफ्फरपुर (मोतीपुर), समस्तीपुर, दरभंगा (सकरी और रैयाम) शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, बिहार के गोपालगंज की सासामूसा चीनी मिल को जल्द शुरू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बाकी मिलों को भी प्राथमिकता के आधार पर पुनः चालू करने का निर्देश दिया है। इससे किसानों को काफी फायदा होगा।

किसानों और युवाओं को होगा लाभ

चीनी मिलों के फिर से चालू होने से गन्ना किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।

गन्ने की खरीद में तेजी आएगी

बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी

खेती के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ेगा

इसके अलावा मिलों के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। परिवहन, श्रम, लघु उद्योग और स्थानीय बाजारों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

कमल सा खिलेगा भाग्य: 5 राशियों पर बरसेगी लक्ष्मी की विशेष कृपा

राशिफल। इस समय ग्रहों की स्थिति आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है। ज्योतिष के अनुसार कुछ राशियों के लिए आने वाला समय विशेष रूप से लाभकारी रहने वाला है। इन राशियों के लोग न सिर्फ आर्थिक मामलों में तरक्की देखेंगे बल्कि करियर, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में भी सुधार महसूस करेंगे।

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय धन और करियर में उन्नति लाएगा। व्यापारियों के लिए नई डील्स और अनुबंध लाभकारी साबित होंगे। नौकरीपेशा लोग पदोन्नति या बोनस के अवसर पा सकते हैं। निवेश में सोच-समझकर कदम रखने से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। परिवार में सुख और सौहार्द भी बढ़ेगा।

2. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ाने वाला है। आपके प्रयासों की सराहना होगी और वरिष्ठों या समाज में आपका स्थान मजबूत होगा। आर्थिक मामलों में छोटे-छोटे निवेश लाभ देंगे। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना जरूरी है, लेकिन सामान्य रूप से समय शुभ है।

3. धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए यह समय यात्रा और नए अवसरों का है। विदेश या दूरस्थ परियोजनाओं में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। नौकरी और व्यवसाय में नए प्रोजेक्ट्स फायदेमंद रहेंगे। आर्थिक लाभ के साथ-साथ घर और परिवार में खुशहाली बढ़ेगी।

4. कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को शिक्षा, कौशल विकास और पेशेवर जीवन में लाभ मिलेगा। नई नौकरी, प्रमोशन या व्यापार में विस्तार के अवसर इस समय प्रबल हैं। निवेश और वित्तीय मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने से अच्छा लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति में सुधार होगा, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा।

5. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय धन लाभ और व्यक्तिगत विकास का है। आपके पुराने प्रयासों का फल मिलेगा। करियर में नई जिम्मेदारियों के अवसर आएंगे। व्यापारियों के लिए लाभकारी सौदे बनेंगे। पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी सुखद वातावरण रहेगा।

यूपी में खुलेंगे 3 बड़े एक्सप्रेसवे, इन जिलों के लिए खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़कों का जाल तेजी से फैल रहा है। राज्य सरकार 22 एक्सप्रेसवे का नेटवर्क तैयार कर रही है, जिससे प्रदेश के हर क्षेत्र को तेज और आधुनिक कनेक्टिविटी मिले। आने वाले महीनों में दो बड़े एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिए जाएंगे, जिससे सफर आसान और समय की बचत होगी। वहीं एक नए एक्सप्रेसवे का काम शुरू होगा।

1. Ganga Expressway:

गंगा एक्सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है। मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला यह मार्ग पश्चिमी और मध्य यूपी के कई जिलों को जोड़ेगा, जिनमें हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ शामिल हैं। मुख्य कैरिजवे का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है और टोल सिस्टम का परीक्षण भी सफल रहा है। संभावना है कि इसे जल्द ही आम यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। इसके चालू होने से औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।

2. Lucknow–Kanpur Expressway: 

करीब 63 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। वर्तमान में लखनऊ से कानपुर का सफर ढाई से तीन घंटे लेता है, लेकिन इस मार्ग के शुरू होने के बाद यह दूरी लगभग 40 मिनट में तय हो सकेगी। इस परियोजना में लगभग 18-19 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है, जो इसे प्रदेश के प्रमुख आधुनिक मार्गों में से एक बनाता है। अंतिम चरण का काम जारी है और इसे जल्द शुरू करने की तैयारी है।

3. Gorakhpur–Shamli Expressway:

लगभग 750 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे प्रदेश का सबसे बड़ा सड़क प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह 22 जिलों से होकर गुजरेगा और पश्चिमी यूपी को सीधे पूर्वांचल से जोड़ेगा। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्य निर्माण कार्य 2026-27 में शुरू होने की संभावना है। यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को नई दिशा देगा।

बिहार में ग्रामीणों को खुशखबरी: केंद्र ने पंचायतों को भेजे 803.79 करोड़ रुपये

पटना। बिहार के ग्रामीण विकास को नई ऊर्जा देने के लिए केंद्र सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को बड़ी वित्तीय सहायता जारी की है। 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत अनटाइड अनुदान की दूसरी किस्त में राज्य को कुल 803.79 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। इससे त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था जिला परिषद, प्रखंड समिति और ग्राम पंचायत को मजबूती मिलेगी।

दूसरी किस्त में क्या मिला?

दूसरी किस्त के रूप में बिहार को 802.40 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त, तीन प्रखंड समितियों और सात ग्राम पंचायतों को पहली किस्त में रोकी गई राशि में से 1.39 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर 803.79 करोड़ रुपये राज्य को मिले हैं। यह अनटाइड अनुदान होने के कारण पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार इस राशि का उपयोग कर सकेंगी।

विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

इस फंड से पंचायत स्तर पर बुनियादी सुविधाओं सड़क, जल निकासी, पेयजल, स्वच्छता और सामुदायिक भवन जैसे कार्यों में तेजी आएगी। ग्राम पंचायतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार योजनाएं बनाकर उन्हें धरातल पर लागू कर सकेंगी। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए शेष 2622.65 करोड़ रुपये की हेल्थ सेक्टर ग्रांट तथा पंचायत सरकार भवनों के संचालन व रखरखाव के लिए वार्षिक वित्तीय सहायता की भी मांग की है।

ई-गवर्नेंस और डिजिटल सशक्तिकरण पर जोर

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत 83 करोड़ रुपये के लंबित केंद्रांश को जारी करने का आग्रह भी किया गया है। साथ ही जिला पंचायत संसाधन केंद्रों में कंप्यूटर लैब को मजबूत करने और पंचायत स्तर पर आईटी आधारित सेवाओं को सुचारु रूप से लागू करने के लिए बजट बढ़ाने की अपेक्षा जताई गई है।

बिहार में बंपर भर्ती की तैयारी, युवा रहें तैयार: मिशन मोड में सरकार

पटना। बिहार में आने वाला वित्तीय वर्ष रोजगार के लिहाज से अहम साबित हो सकता है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि विभिन्न आयोगों और चयन संस्थाओं में लंबे समय से खाली पड़े पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। इसके साथ ही नई नियुक्तियों के लिए परीक्षा कैलेंडर और प्रशिक्षण ढांचे पर भी काम शुरू हो चुका है।

युवा आयोग से लेकर लोकायुक्त तक नियुक्तियां

राज्य में गठित किए गए युवा आयोग में शीर्ष पदों पर चयन होना है। अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और सात सदस्यों की नियुक्ति प्रस्तावित है। यह नियुक्ति सीधे सरकार के स्तर से की जाएगी। इसके अलावा सूचना आयोग, तकनीकी सेवा आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति आयोग और लोकायुक्त संस्थान में भी रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कई संस्थाओं में अध्यक्ष और सदस्य स्तर के पद खाली हैं, जिन पर निर्णय नए वित्तीय वर्ष में लिया जाना है।

प्रतियोगी परीक्षाओं का बड़ा कैलेंडर

सिर्फ आयोगों में मनोनयन ही नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से भी व्यापक भर्ती की तैयारी है। न्यायिक सेवा में सिविल जज के पदों पर चयन की प्रक्रिया जारी है। कर्मचारी चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से बड़ी संख्या में पदों पर परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। तकनीकी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पदों पर भी नियुक्तियों का लक्ष्य तय किया गया है। इससे प्रशासनिक, तकनीकी और न्यायिक क्षेत्रों में मानव संसाधन की कमी दूर करने की कोशिश होगी।

प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए बड़ी संख्या में भर्ती

न्यायिक सेवा के तहत असैनिक न्यायाधीश (कनीय कोटि) के 173 पदों पर प्रक्रिया जारी है।

कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से 31 हजार से अधिक पदों पर परीक्षा आयोजित की जानी है।

लोक सेवा आयोग द्वारा 18 हजार से ज्यादा पदों के लिए चयन प्रक्रिया प्रस्तावित है।

तकनीकी सेवा आयोग ने 43 हजार से अधिक पदों पर अनुशंसा भेजने का लक्ष्य रखा है।

मोदी सरकार का तोहफा, बिहारवाशियों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य में 19 नए केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 से इन विद्यालयों के निर्माण और संचालन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस परियोजना के लिए 2135.85 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस फैसले से अनुमान है कि करीब 30 हजार विद्यार्थियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।

जिलों में तैयारियां तेज

राज्य प्रशासन ने विद्यालयों के लिए जमीन की पहचान का काम पूरा कर लिया है। कई जिलों में चार से पांच एकड़ तक भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव संबंधित विभागों को भेजे जा चुके हैं। मधुबनी में दो विद्यालय स्थापित करने की योजना है, जहां शुरुआती स्तर पर ही बाल शिक्षा कक्षाएं भी शुरू की जाएंगी।

अस्थायी से स्थायी ढांचे तक

स्थायी भवन तैयार होने तक नए विद्यालय अस्थायी रूप से सरकारी परिसरों में संचालित किए जाएंगे। जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि चयनित भवनों में बिजली, पेयजल, शौचालय और पहुंच मार्ग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों।

ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम पांच एकड़ भूमि की व्यवस्था अनिवार्य है, जबकि शहरी क्षेत्रों में कम क्षेत्रफल में भी विद्यालय स्थापित किए जा सकते हैं। राज्य सरकार यह भूमि केंद्रीय विद्यालय संगठन को बिना शुल्क उपलब्ध कराएगी, जबकि भवन और अन्य ढांचागत निर्माण पर खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।

प्रवेश और सीटों की रूपरेखा

हर नए विद्यालय में लगभग 1520 छात्रों के लिए सीटें निर्धारित की जाएंगी। प्रारंभिक कक्षाओं में प्रति सेक्शन 40 विद्यार्थियों का नामांकन होगा, जिसमें 25 प्रतिशत सीटें शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आरक्षित रहेंगी। वरिष्ठ कक्षाओं में विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकाय उपलब्ध होंगे। सामाजिक न्याय के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए नियमानुसार आरक्षण लागू रहेगा।

राज्य में बढ़ेगी संख्या

इन नए विद्यालयों के शुरू होने के बाद बिहार में केंद्रीय विद्यालयों की कुल संख्या 35 तक पहुंच जाएगी। इससे राज्य के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की पाठ्यचर्या और बेहतर शैक्षणिक वातावरण का लाभ मिलेगा। यह पहल न केवल केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों के लिए उपयोगी होगी, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर देगी।

बिहार सरकार ने दिया तोहफा, जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में जमीन मालिकों के लिए बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब पुराने जमीन दस्तावेज और रजिस्ट्री पेपर्स को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को लंबा इंतजार और रजिस्ट्रेशन कार्यालय के चक्कर से मुक्ति दिलाना है। सरकार ने 2027 तक पूरे राज्य का जमीन सर्वे और दस्तावेजों का ऑनलाइन पोर्टल तैयार करने का लक्ष्य रखा है।

दस्तावेज ऑनलाइन कैसे होंगे

अब जमीन मालिक अपने दस्तावेज घर बैठे ही डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए सभी पुराने पेपर्स को स्कैन किया जा रहा है और जून महीने से यह सुविधा पूरी तरह से शुरू हो जाएगी। डाउनलोड करने के लिए 600 रुपए की ऑनलाइन फीस जमा करनी होगी।

आवेदन की आसान प्रक्रिया

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए बिहार सरकार ने https://nibandhan.bihar.gov.in वेबसाइट पर आवेदन फॉर्म तैयार किया है। आवेदन में खाता नंबर, प्लॉट नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद शुल्क जमा कर सीधे दस्तावेज डाउनलोड किए जा सकेंगे।

अब तक कितने दस्तावेज स्कैन हुए

अधिकारियों के अनुसार, 141 रजिस्ट्रेशन कार्यालयों में 1990 से 2005 तक के करीब 4 करोड़ दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है। इन्हें वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया गया है। वहीं 1908 से 1990 तक के दस्तावेजों की स्कैनिंग अप्रैल तक पूरी करने का लक्ष्य है।

पुराने सिस्टम की परेशानी से मुक्ति

पहले पुराने दस्तावेज लेने के लिए रजिस्ट्रेशन ऑफिस जाना पड़ता था और महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार दस्तावेज ढूँढने में ही काफी समय लग जाता था। अब ऑनलाइन सुविधा से यह पूरी प्रक्रिया सरल और तेज हो जाएगी। 2026 से नए रजिस्ट्री दस्तावेज पूरी तरह डिजिटल होंगे। इस पहल से न केवल समय की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। बिहार सरकार की यह पहल जमीन मालिकों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी।

महाशिवरात्रि पर रवि योग: इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार

राशिफल। महाशिवरात्रि का पर्व न केवल शिवभक्तों के लिए पावन अवसर लेकर आता है, बल्कि इस बार का रवि योग कुछ विशेष राशियों के लिए भाग्य और सफलता के द्वार खोलने वाला है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन सूर्य ग्रह की विशेष स्थिति इन राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अवसर लाएगी। इस दिन सुबह 07:00 बजे से दोपहर 01:49 बजे तक रवि योग का प्रभाव रहेगा

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसरों की शुरुआत का है। विशेष रूप से करियर और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना है। निवेश या नई परियोजनाओं में हाथ आजमाना लाभकारी हो सकता है। परिवार और घर में भी सुख-शांति का वातावरण रहेगा।

2. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए महाशिवरात्रि का रवि योग विशेष रूप से आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में लाभकारी है। पुराने निवेश या लंबित योजनाओं से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही, इस अवधि में स्वास्थ्य का ध्यान रखने से दीर्घकालिक फायदा मिलेगा।

3. धनु राशि

धनु राशि के जातकों को इस अवसर पर करियर में उन्नति के संकेत मिल रहे हैं। अधिकारी और वरिष्ठ व्यक्तियों से सहयोग मिलने की संभावना है। नए कार्य या प्रोजेक्ट की शुरुआत लाभदायक साबित हो सकती है। सामाजिक जीवन में भी प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

4. वृषभ राशि

वृषभ राशि के लिए यह समय विशेष रूप से वित्तीय लाभ और संपत्ति संबंधी मामलों में अनुकूल है। कोई लंबित लेन-देन या निवेश इस अवधि में फलीभूत हो सकता है। परिवारिक जीवन में सुख और सहयोग का माहौल रहेगा।

5. तुला राशि

तुला राशि के जातकों को इस दिन संबंधों और व्यवसाय में लाभ मिलने की संभावना है। किसी नए व्यापारिक प्रस्ताव या करियर अवसर से सफलता हाथ लग सकती है। विद्यार्थियों के लिए भी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभकारी परिणाम का योग है।

अमेरिका से खुशखबरी, रिलायंस की बल्ले-बल्ले, मिला लाइसेंस!

नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार ने कंपनी को विशेष लाइसेंस प्रदान किया है, जिससे अब वह वेनेजुएला से क्रूड ऑयल खरीद सकती है, और यह पूरी तरह से अमेरिकी नियमों के अनुरूप होगा।

वेनेजुएला से तेल आपूर्ति में नया रास्ता

इस लाइसेंस के जरिए रिलायंस को वेनेजुएला में पहले से निकाले गए क्रूड ऑयल को खरीदने, रिफाइन करने और बेचने की अनुमति मिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील का हिस्सा है। इससे कंपनी की रिफाइनिंग लागत घट सकती है और तेल की सप्लाई में स्थिरता आएगी।

रूस के विकल्प के रूप में वेनेजुएला

हाल ही में रिलायंस ने Vitol से वेनेजुएला का तेल खरीदा है। यह कदम भारत की रूस से आने वाली तेल सप्लाई पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत देखा जा रहा है। इसके अलावा, इस तरह का सौदा भारत और अमेरिका के बीच संभावित ऊर्जा और व्यापार संबंधों को मजबूत करने में भी मदद कर सकता है।

किफायती विकल्प और रिफाइनिंग लाभ

वेनेजुएला का क्रूड ऑयल अक्सर बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक कीमत पर उपलब्ध होता है। इसका मतलब है कि रिलायंस इसे अन्य स्रोतों की तुलना में सस्ते में खरीद सकती है, जिससे रिफाइनिंग खर्च में कमी आएगी और उत्पादन में लाभ बढ़ेगा।

रिलायंस की क्षमता और रणनीतिक फायदा

रिलायंस के पास दो रिफाइनरियां हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कंपनी को 2025 की शुरुआत में वेनेजुएला से तेल खरीदने में रुकावट आई थी, लेकिन अब लाइसेंस मिलने से यह बाधा खत्म हो जाएगी। यह न केवल कंपनी के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम है।

यूपी में तीसरी रेल लाइन की मंजूरी, इन जिलों को खुशखबरी!

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से को रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ी राहत मिली है। रेल मंत्रालय ने पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के अंतर्गत औंड़िहार–वाराणसी (31.36 किमी) खंड पर तीसरी रेल लाइन बिछाने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के लिए लगभग 497.07 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह परियोजना वाराणसी और गाजीपुर जिलों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाएगी और पूरे पूर्वांचल की रेल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।

पहले से जारी दोहरीकरण कार्य

इस रेलमार्ग पर भटनी से औंड़िहार के बीच दोहरीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। कीड़िहरापुर–इन्दारा, सादात–औंड़िहार, भटनी–पिवकोल, बेलथरा रोड–कीड़िहरापुर, दुल्लहपुर–सादात और मऊ–दुल्लहपुर समेत लगभग 89.47 किमी का काम पूरा हो चुका है।

पिवकोल से बेलथरा रोड (27.53 किमी) खंड का कार्य अंतिम चरण में है, जिसमें सरयू नदी पर तुर्तीपार रेल पुल का निर्माण भी शामिल है। उम्मीद है कि दिसंबर तक दोहरीकरण का कार्य पूर्ण हो जाएगा। पूरे भटनी–औंड़िहार खंड का विद्युतीकरण और दोहरीकरण लगभग 1177.96 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।

बढ़ेगी रेल लाइन की क्षमता

तीसरी लाइन बिछने से गोरखपुर–वाराणसी–प्रयागराज रेलमार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही और सुगम हो जाएगी। यात्रियों की बढ़ती मांग के अनुसार अधिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। औंड़िहार जंक्शन, जो कि पूर्वोत्तर रेलवे का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है, यहां से मऊ, गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर समेत देशभर के अन्य कई प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनें संचालित होती हैं। तीसरी लाइन बनने से इस पूरे नेटवर्क को मजबूती मिलेगी।

इतना ही नहीं रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही विद्युतीकरण के कारण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे प्रदेश के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।

रूस से खुशखबरी: भारत को मिलेगा शक्तिशाली 'सुदर्शन चक्र'

नई दिल्ली। भारत की हवाई सुरक्षा व्यवस्था को आने वाले महीनों में और मजबूती मिलने जा रही है। रूस के साथ 2018 में हुए लगभग 5.43 अरब डॉलर के समझौते के तहत खरीदे गए S-400 Triumf सिस्टम की शेष डिलीवरी अब तय समयसीमा में पूरी की जाएगी।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, कुल पांच स्क्वाड्रन में से चौथा सिस्टम जून 2026 तक और अंतिम सिस्टम नवंबर 2026 तक भारत पहुंच जाएगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई चेन में आई बाधाओं से पहले देरी हुई थी, लेकिन अब शेड्यूल स्पष्ट कर दिया गया है।

क्यों खास है S-400?

S-400 को दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों में गिना जाता है। यह 400 किलोमीटर तक की दूरी पर लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है। इसकी खासियत है कि यह एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय कर सकता है।

भारत की सुरक्षा में क्या बदलेगा?

पांचों सिस्टम पूरी तरह तैनात होने के बाद भारत की बहु-स्तरीय (लेयर्ड) एयर डिफेंस संरचना काफी मजबूत हो जाएगी। S-400 को स्वदेशी Akash missile system और MRSAM जैसी प्रणालियों के साथ जोड़कर एक समेकित सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। इससे उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर संभावित हवाई खतरों का सामना करना अधिक प्रभावी होगा। एक साथ कई दिशाओं से होने वाले हमलों के खिलाफ जवाबी क्षमता बेहतर होगी।

क्या हैं इसके रणनीतिक संदेश?

यह डिलीवरी केवल सैन्य सुदृढ़ीकरण नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत भी है। अमेरिका के CAATSA कानून के संभावित दबावों के बावजूद भारत ने इस सौदे को आगे बढ़ाया। इससे यह संदेश जाता है कि भारत अपनी रक्षा आवश्यकताओं को प्राथमिकता देता है और स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम है।

इसे लेकर क्या है आगे की तैयारी?

रूस के साथ मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाओं के सहयोग पर भी काम किया जा रहा है, जिन्हें 2028 तक भारत में स्थापित किया जा सकता है। इससे सिस्टम के दीर्घकालिक रखरखाव में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। साथ ही भारत स्वदेशी ‘प्रोजेक्ट कुशा’ पर भी काम कर रहा है, जिससे भारत के आसमान पूरी तरह से सेफ होंगे।

यूपी में मौसम बदलेगा, 17 फरवरी से बारिश और तेज हवाओं के आसार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। India Meteorological Department (आईएमडी) के अनुसार एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 17 फरवरी से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

17–18 फरवरी को बारिश और तेज हवाएं

मौसम विभाग का अनुमान है कि 17 और 18 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान बादलों की गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज और धूलभरी हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि 17 फरवरी से पहले बड़े बदलाव के आसार कम बताए गए हैं।

किन जिलों में असर?

बारिश और तेज हवाओं का असर मुख्य रूप से पश्चिमी यूपी के जिलों में दिख सकता है। इनमें गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, मेरठ, अलीगढ़, एटा, हाथरस, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, कासगंज, मैनपुरी और संभल जैसे जिले शामिल हैं। किसानों और राहगीरों को इस दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

तापमान में होगी बढ़ोतरी

बारिश के पूर्वानुमान के साथ ही प्रदेश में गर्मी की आहट भी महसूस होने लगी है। अगले चार दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि दर्ज की जा सकती है। इससे सुबह और रात की ठंड में कमी आएगी, जबकि दिन के समय धूप का असर तेज रहेगा।

क्या रखें सावधानियां?

तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों पर सावधानी बरतें।

किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

गरज-चमक के समय पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें।

AIIMS में नर्सिंग ऑफिसर की बंपर भर्ती, 24 से करें आवेदन

नई दिल्ली। देश की अग्रणी स्वास्थ्य संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) ने 2026 में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक सुनहरा अवसर है। योग्य उम्मीदवार इस भर्ती के माध्यम से न केवल सरकारी नौकरी हासिल करेंगे, बल्कि देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थाओं में अपने पेशेवर अनुभव को भी बढ़ा सकते हैं।

पद और वेतन

इस भर्ती के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर नियुक्ति होगी। उम्मीदवारों को मासिक वेतन 9,300 रुपये से 34,800 रुपये के बीच मिलेगा, साथ ही ग्रेड पे 4,600 रुपये भी प्रदान किया जाएगा। पदों की कुल संख्या विज्ञापन में स्पष्ट नहीं की गई है।

योग्यता और आयु सीमा

इस भर्ती के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता B.Sc (Hons) Nursing, B.Sc Nursing या General Nursing Midwifery (GNM) डिप्लोमा निर्धारित की गई है। आयु सीमा 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। योग्य उम्मीदवारों को आयु प्रमाण पत्र और शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज ऑनलाइन आवेदन के दौरान अपलोड करने होंगे।

आवेदन प्रक्रिया

AIIMS की आधिकारिक वेबसाइट www.aiimsexams.ac.in पर 24 फरवरी 2026 से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार 16 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, इसलिए उम्मीदवारों को सभी जरूरी दस्तावेज स्कैन करके तैयार रखने चाहिए।

भर्ती की खास बातें

इस भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों को पूर्णकालिक नौकरी दी जाएगी। वे AIIMS के विभिन्न अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में कार्य करेंगे। यह न केवल एक स्थिर सरकारी नौकरी है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुभव और करियर विकास का भी अवसर प्रदान करती है।

10वीं पास महिलाओं के लिए खुशखबरी, 304 पदों पर भर्ती!

शिमला। हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। मिशन शक्ति के अंतर्गत संचालित पालना योजना के तहत क्रेच केंद्रों में 304 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों में 152 क्रेच वर्कर और 152 क्रेच हेल्पर शामिल हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी गई है।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस भर्ती में केवल महिला अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकेंगी। आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही आवेदक की वार्षिक पारिवारिक आय 50,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। संबंधित क्षेत्र की स्थायी निवासी महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और अनुभव रखने वाली उम्मीदवारों को वरीयता मिलेगी।

शैक्षणिक योग्यता और मानदेय

क्रेच वर्कर: न्यूनतम योग्यता जमा दो (12वीं पास), मासिक मानदेय 3900 रुपये।

क्रेच हेल्पर: न्यूनतम योग्यता 10वीं पास (आवश्यकता पड़ने पर 7वीं तक छूट), मासिक मानदेय 2250 रुपये।

यदि चयनित महिला पहले से आंगनबाड़ी से जुड़ी है, तो अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाएगा। आंगनबाड़ी वर्कर को 1500 रुपये और आंगनबाड़ी हेल्पर को 750 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।

योजना का उद्देश्य

पालना योजना का मुख्य मकसद कामकाजी माताओं के छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और पोषणयुक्त डे-केयर सुविधा उपलब्ध कराना है। 15वें वित्त आयोग के तहत प्रदेश में नए क्रेच केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। अधिकांश केंद्र आंगनबाड़ी से जुड़े होंगे, जहां बच्चों को दिन में तीन बार पौष्टिक भोजन दिया जाएगा। साथ ही बच्चों का आधार पंजीकरण और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।

चयन प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से मेरिट के आधार पर होगी। चयन समिति के अध्यक्ष एसडीएम होंगे। बाल विकास परियोजना अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। कुल 25 अंकों के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। आवेदन के लिए 20 दिन का समय दिया जाएगा।

भारत के लिए खुशखबरी: अब देश में ही बनेगा जेट इंजन, तैयारी शुरू

नई दिल्ली। भारत में जेट इंजन निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। लंबे समय से स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहा भारत अब उस मुकाम के करीब दिखाई दे रहा है, जहां न केवल इंजन असेंबली बल्कि डिज़ाइन, डेवलपमेंट और तकनीकी स्वामित्व भी देश के पास हो सकता है। इस दिशा में ब्रिटेन की दिग्गज कंपनी Rolls-Royce की नई रणनीति बेहद अहम मानी जा रही है।

भारत बनेगा दूसरा होम बेस?

रोल्स-रॉयस पहले से ही भारतीय रक्षा बलों के साथ लंबे समय से जुड़ी रही है। भारतीय वायुसेना के जगुआर और हॉक जैसे विमानों में कंपनी के इंजन इस्तेमाल होते रहे हैं। लेकिन अब कंपनी का फोकस केवल सप्लाई तक सीमित नहीं है। वह भारत को केवल ग्राहक नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में देख रही है।

कंपनी के सीईओ Tufan Erginbilgic ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत में उन्नत प्रोपल्शन तकनीक विकसित करने, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारतीय उद्योग को जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। यदि यह योजना जमीन पर उतरती है, तो भारत कंपनी का एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र बन सकता है।

AMCA के लिए बड़ा प्रस्ताव

भारत का महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) एक शक्तिशाली और अत्याधुनिक इंजन की मांग करता है। अभी तक भारत इस क्षेत्र में विदेशी तकनीक पर निर्भर रहा है, लेकिन अब स्थिति बदल सकती है।

रोल्स-रॉयस ने भारत को इंजन का “को-डेवलपर” बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसका अर्थ यह है कि इंजन की बौद्धिक संपदा (IP) में भारत की हिस्सेदारी हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह केवल एक इंजन डील नहीं होगी, बल्कि दीर्घकालिक तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। भविष्य में यही इंजन अन्य स्वदेशी लड़ाकू विमानों के लिए भी आधार बन सकता है।

आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

यह साझेदारी भारत के ‘आत्मनिर्भर’ रक्षा क्षेत्र के लक्ष्य को मजबूत कर सकती है। अब तक भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में रहा है, लेकिन इंजन तकनीक में महारत हासिल करना गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यदि तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त विकास और स्थानीय निर्माण वास्तव में लागू होते हैं, तो भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर पाएगा, बल्कि भविष्य में निर्यातक देश भी बन सकता है।

भारत खरीद रहा 114 राफेल, कांप रहा पाकिस्तान, चीन चुप!

नई दिल्ली। भारत ने अपनी वायु क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। यह केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि सैन्य आधुनिकीकरण और स्वदेशी उत्पादन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

वायुसेना को क्यों है जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या में कमी आई है। ऐसे में नए लड़ाकू विमानों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। 114 नए राफेल विमान शामिल होने से कई नई स्क्वाड्रन तैयार की जा सकेंगी, जिससे देश की हवाई सुरक्षा मजबूत होगी और सीमाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ेगी।

स्वदेशी निर्माण पर जोर

इस प्रस्ताव की खास बात यह है कि अधिकांश विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation भारतीय साझेदार के साथ मिलकर उत्पादन इकाई स्थापित कर सकती है। इससे तकनीक हस्तांतरण, रोजगार सृजन और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। यदि इसमें लगभग 60 प्रतिशत तक उपकरण और हथियार स्वदेशी लगाए जाते हैं, तो यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

पहले के सौदों का अनुभव

साल 2016 में भारत ने 36 राफेल विमान खरीदे थे। उन विमानों ने वायुसेना की मारक क्षमता को काफी बढ़ाया। इसके अलावा नौसेना के लिए भी 26 राफेल मरीन वर्जन विमान खरीदने का समझौता हो चुका है, जिन्हें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant पर तैनात किया जाना है।

क्या है इसके रणनीतिक महत्व

यह कदम केवल सैन्य मजबूती तक सीमित नहीं है। यह दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए तेजी से आधुनिक तकनीक अपना रहा है। फ्रांस के साथ बढ़ती साझेदारी से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे। इस विमान खरीद की खबर से पाकिस्तान के होश उड़ गए हैं, वहीं चीन भी इसपर नजर बनाये हुए है।

CM योगी का बड़ा ऐलान: बुजुर्गों को खुशखबरी, बढ़ा पेंशन!

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के करोड़ों सामाजिक पेंशनधारकों के लिए बड़ी घोषणा की है। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 1.06 करोड़ लाभार्थियों की सामाजिक पेंशन बढ़ाई जाएगी। इसके लिए बजट में आवश्यक धनराशि का प्रावधान कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेंशन बढ़ोतरी से संबंधित विस्तृत जानकारी बजट चर्चा के दौरान सामने आएगी। हालांकि, इस घोषणा के बाद प्रदेश के बुजुर्गों, दिव्यांगों और निराश्रित महिलाओं में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। क्यों की इनकी पेंशन में वृद्धि होनी वाली हैं।

पेंशन राशि का सफर

2017 से पहले दिव्यांग पेंशन 300 रुपये और अन्य श्रेणियों में 500 रुपये प्रतिमाह दी जाती थी। योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद इसे बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति माह कर दिया था। 2022 के चुनावी घोषणापत्र में पेंशन राशि को 1500 रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने का वादा किया गया था। अब मुख्यमंत्री ने इस दिशा में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है।

किन्हें मिलेगा लाभ?

सामाजिक पेंशन योजना के अंतर्गत तीन प्रमुख वर्ग शामिल हैं-

वृद्धावस्था पेंशनधारक

निराश्रित महिलाएं

दिव्यांगजन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में लगभग 67.50 लाख बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है। वहीं 38.50 लाख निराश्रित महिलाओं और करीब 11 लाख दिव्यांगजनों को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है।

सामाजिक सुरक्षा को मजबूती

लोगों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के बीच पेंशन राशि में वृद्धि से जरूरतमंद वर्ग को राहत मिलेगी। यह कदम सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और कमजोर वर्गों को आर्थिक सहारा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

भारत के 4 फ्यूचर हथियार: चीन की बढ़ाएंगे बेचैनी, पाकिस्तान हैरान!

नई दिल्ली। भारत तेजी से अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बना रहा है। स्वदेशी तकनीक और उन्नत रक्षा अनुसंधान के बल पर देश ऐसे हथियार विकसित कर रहा है, जो भविष्य के युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के सफल होने पर एशिया में सामरिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।

1. BrahMos-NG: हल्का, तेज और अधिक घातक

ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का उन्नत संस्करण है। यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की और अधिक कॉम्पैक्ट होगी, जिससे इसे लड़ाकू विमानों, जहाजों और पनडुब्बियों पर आसानी से तैनात किया जा सकेगा। इसकी तेज गति और सटीक निशानेबाजी क्षमता इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है।

2. BrahMos-II: हाइपरसोनिक युग की ओर कदम

ब्रह्मोस-2 को हाइपरसोनिक तकनीक पर विकसित किया जा रहा है। अनुमान है कि यह ध्वनि की गति से कई गुना तेज उड़ान भर सकेगी। इतनी अधिक गति के कारण दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना और रोकना बेहद कठिन होगा। यह परियोजना भारत को हाइपरसोनिक हथियारों की दौड़ में अग्रणी देशों की कतार में ला सकती है।

3.  AMCA: पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी लड़ाकू विमान

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) भारत का महत्वाकांक्षी स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है। इसे अत्याधुनिक एवियोनिक्स, स्टेल्थ तकनीक और मल्टी-रोल क्षमताओं से लैस बनाया जा रहा है। इसके शामिल होने से भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा और लंबी दूरी के मिशनों में बढ़त मिलेगी।

4. HAL Tejas Mark 2: नई पीढ़ी का बहु-भूमिका लड़ाकू

तेजस मार्क-2, मौजूदा तेजस का उन्नत संस्करण है। इसमें अधिक शक्तिशाली इंजन, बेहतर रडार और आधुनिक हथियार प्रणाली शामिल की जा रही है। यह विमान वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है और आने वाले वर्षों में पुराने विमानों की जगह ले सकता है।

बिहार में "डेयरी फील्ड ऑफिसर" की बंपर भर्ती, युवाओं को मौका!

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। Bihar Technical Service Commission (बीटीएससी) ने डेयरी फील्ड ऑफिसर और डेयरी टेक्निकल ऑफिसर के कुल 92 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

पदों का विवरण

इस भर्ती अभियान के तहत डेयरी क्षेत्र से जुड़े कुल 92 रिक्त पद भरे जाएंगे। यह अवसर खासतौर पर डेयरी टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर चुके उम्मीदवारों के लिए है।

योग्यता

आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास निम्न में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए: बी.टेक (डेयरी टेक्नोलॉजी), बी.ई. (डेयरी टेक्नोलॉजी), बी.एससी. (डेयरी टेक्नोलॉजी), आईडीडी (डीटी/डीएच) के साथ कम से कम 2 वर्ष का अनुभव।

वेतनमान

चयनित उम्मीदवारों को 9,300 रुपये से 34,800 रुपये प्रति माह का वेतन मिलेगा। इसके अलावा 4,200 रुपये का ग्रेड पे (लेवल-6) भी दिया जाएगा। सरकारी सेवा के अन्य भत्ते और सुविधाएं भी नियमानुसार मिलेंगी।

आयु सीमा

न्यूनतम आयु: 21 वर्ष, अधिकतम आयु: 37 वर्ष, (आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी।)

आवेदन प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 13 फरवरी 2026 से शुरू होगी और 13 मार्च 2026 तक चलेगी। इच्छुक अभ्यर्थी बीटीएससी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि पर घर लाएं ये 4 शुभ चीजें, दूर होगी हर बाधा!

धर्म डेस्क। महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व है। इस दिन किए गए पूजन और उपायों का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यदि इस पावन अवसर पर कुछ शुभ वस्तुएं घर लाई जाएं, तो जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है। आइए जानते हैं वे 4 खास चीजें, जिन्हें महाशिवरात्रि पर घर लाना शुभ माना जाता है।

1. रुद्राक्ष

रुद्राक्ष को भगवान शिव का आशीर्वाद माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह शिव के आंसुओं से उत्पन्न हुआ है। घर में रुद्राक्ष रखने या धारण करने से मानसिक शांति मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। पूजा स्थान में एक पवित्र रुद्राक्ष रखना शुभ फल देता है।

2. नंदी की मूर्ति

भगवान शिव के वाहन नंदी को समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। तांबे या पीतल की नंदी प्रतिमा घर में स्थापित करना शुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक परेशानियां कम होने लगती हैं।

3. गंगाजल

गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन यदि घर में गंगाजल लाकर पूजा घर या रसोई में रखा जाए, तो यह शुद्धता और उन्नति का प्रतीक बनता है। शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

4. चांदी का नाग-नागिन जोड़ा या डमरू

चांदी का नाग-नागिन जोड़ा घर में रखने से पारिवारिक कलह कम होने और आपसी प्रेम बढ़ने की मान्यता है। वहीं डमरू भगवान शिव का प्रिय वाद्य है, जिसे सकारात्मक ऊर्जा और शुभ ध्वनि का प्रतीक माना जाता है। महाशिवरात्रि पर इसे घर लाना मंगलकारी माना जाता है।

इजरायल ने बनाया 'Arrow 4', ईरान की बढ़ी टेंशन!

न्यूज डेस्क। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Arrow 4 (एरो-4) इंटरसेप्टर सिस्टम विकसित किया है। यह अत्याधुनिक प्रणाली हाइपरसोनिक मिसाइलों और ग्लाइड व्हीकल्स को रोकने में सक्षम है, जो रडार को चकमा देने की क्षमता रखते हैं। इस कदम से खासकर ईरान के खिलाफ इजरायल की रक्षा प्रणाली और भी मजबूत हो जाएगी।

Arrow 4 क्या है?

Arrow 4 को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और अमेरिकी मिसाइल डिफेंस एजेंसी ने मिलकर विकसित किया है। यह सिस्टम विशेष रूप से उन हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है, जो पारंपरिक रडार सिस्टम के लिए पकड़ना मुश्किल होती हैं। Arrow 4 अब 30 साल पुराने एरो-2 सिस्टम की जगह लेगा और इजरायल के आकाश में सुरक्षा की एक नई परत जोड़ देगा। यह सिस्टम अंतरिक्ष और कम ऊँचाई दोनों पर दुश्मन की मिसाइलों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है।

हाइपरसोनिक मिसाइलों का जवाब

ईरान ने हाल ही में 'फतह-1' जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों का दावा किया था। इन मिसाइलों की रफ्तार और दिशा बदलने की क्षमता के कारण इजरायल के पुराने सिस्टम चुनौती का सामना कर सकते थे। Arrow 4 ने इस चुनौती का जवाब देते हुए एक नई तकनीक पेश की है, जो हाइपरसोनिक मिसाइलों का मुकाबला करने में सक्षम है।

इजरायल के Arrow 4 की क्या है ताकत?

Arrow 4 का सबसे बड़ा फ़ायदा इसका AI आधारित सेंसर और "शूट-लुक-शूट" तकनीक है। इसका मतलब है कि मिसाइल दागे जाने के बाद भी टारगेट को ट्रैक करती है, देखती है कि हमला सफल हुआ या नहीं, और जरूरत पड़ने पर फिर से वार करती है। इसके विंगलेट्स इसे हवा में तेज़ी से मोड़ने की क्षमता देते हैं, जिससे यह उन मिसाइलों का भी पीछा कर सकती है जो उड़ान के दौरान दिशा बदलती हैं। Arrow 4 की टेस्टिंग आने वाले महीनों में शुरू हो सकती है।

यात्रियों के लिए खुशखबरी, यूपी होकर चलेगी 3 होली स्पेशल ट्रेन

प्रयागराज। होली के त्योहार के अवसर पर देश भर में यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि होती है। इस भीड़ को देखते हुए रेलवे ने तीन प्रमुख स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है। ये ट्रेनें प्रयागराज और सूबेदारगंज मार्ग से अपनी मंजिल तक जाएंगी और घर लौटने वाले यात्रियों के सफर को आसान बनाएंगी।

1. मालदा टाउन – आनंद विहार टर्मिनल होली स्पेशल

मालदा से आनंद विहार के लिए चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन (03435/36) होली के समय शुरू होगी। मालदा से यह ट्रेन हर सोमवार रवाना होगी, जबकि आनंद विहार से हर मंगलवार को प्रस्थान करेगी। इस ट्रेन के माध्यम से पश्चिम बंगाल और उत्तर भारत के बीच सफर करना आसान होगा।

2. आनंद विहार – खुर्दा रोड एक्सप्रेस

यह ट्रेन (04066/65) 27 फरवरी से 4 मार्च तक संचालित होगी। इसके रास्ते में सुबह 10:20 बजे सूबेदारगंज स्टेशन आएगी। इस ट्रेन से विशेषकर ओड़िशा और आसपास के यात्रियों को होली पर घर लौटने में सुविधा मिलेगी।

3. आनंद विहार – शेखपुरा स्पेशल

तीसरी ट्रेन (04070/69) प्रयागराज जंक्शन मार्ग से चलेगी। यह 20 फरवरी से 6 मार्च तक पाँच फेरे लगाएगी। इसके अलावा, झांसी-खुर्दा रोड ट्रेन भी सूबेदारगंज होकर गुजरेगी, जिससे बिहार और बंगाल के मुसाफिरों को कन्फर्म टिकट के लिए परेशानी नहीं होगी।

यात्रियों के लिए लाभ

इन स्पेशल ट्रेनों के चलते होली के समय टिकट की मारामारी कम होगी और यात्रियों को घर जाने का आसान विकल्प मिलेगा। रेलवे अधिकारियों ने सभी यात्रियों से अपील की है कि समय पर रिज़र्वेशन कर लें और यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें।

क्या परमाणु बम भी खराब हो जाते हैं? कितनी होती है उम्र

न्यूज डेस्क। परमाणु बम केवल खतरनाक हथियार ही नहीं हैं, बल्कि इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित और कार्यशील बनाए रखना बेहद जटिल प्रक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाँ, परमाणु बम भी समय के साथ खराब हो सकते हैं और उनकी एक निश्चित उम्र होती है। 

1. ट्रिटियम का क्षय

आधुनिक परमाणु हथियारों में विस्फोट की क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रिटियम गैस का इस्तेमाल होता है। ट्रिटियम का आधा जीवन केवल 12.3 साल होता है। यदि इसे समय-समय पर बदला न जाए, तो बम पूरी ताकत से फटने की क्षमता खो देता है और केवल “फिज़ल” यानी कमजोर विस्फोट करता है।

2. प्लूटोनियम का उम्र बढ़ना

बम के मुख्य हिस्से में प्लूटोनियम होता है, जिसे 'पिट' कहा जाता है। रेडियोधर्मी विकिरण के कारण यह लगातार गर्म रहता है, जिससे छोटे-छोटे दरारें और हीलियम बुलबुले बन सकते हैं। हालांकि प्लूटोनियम सैकड़ों साल तक रेडियोधर्मी रहता है, फिर भी इसकी नियमित जांच और रख-रखाव जरूरी है।

3. इलेक्ट्रॉनिक और रासायनिक खराबी

परमाणु बम में जटिल सर्किट, बैटरी और सेंसर होते हैं। समय के साथ ये घटक खराब हो सकते हैं। इसके अलावा, विस्फोटक सामग्री, जो परमाणु विस्फोट को शुरू करती है, भी उम्र और विकिरण के कारण अपनी स्थिरता और शक्ति खो सकती है।

4. परमाणु बम का अनुमानित कार्यकाल कितना

एक परमाणु बम सामान्यतः 30 से 50 साल तक पूरी तरह कार्यशील रहता है। इसी वजह से अमेरिका और अन्य परमाणु संपन्न देश “लाइफ एक्सटेंशन प्रोग्राम” (LEP) चलाते हैं। इस कार्यक्रम के तहत पुराने बमों के घटक बदलकर उन्हें नया जैसा बनाया जाता है और उनकी शक्ति सुनिश्चित की जाती है।

8वें वेतन आयोग: पेंशन को लेकर सरकार का बड़ा अपडेट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उम्मीदें बढ़ा दी हैं। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से संबंधित सिफारिशें तैयार करना है। आयोग को इन सिफारिशों को तैयार करने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया गया है।

पेंशनभोगियों के लिए स्थिति साफ़

हाल ही में राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पेंशन से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जो कर्मचारी या पेंशनभोगी 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर हुए हैं, उन्हें स्वतः संशोधित पेंशन का अधिकार नहीं मिलेगा।  इसका मतलब यह है कि पेंशन में बदलाव केवल तभी संभव है, जब सरकार आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर ले और इसके क्रियान्वयन के लिए आदेश जारी करे।

बता दें की मौजूदा समय में पेंशनभोगियों के लिए केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2021 और असाधारण पेंशन नियम, 2023 लागू हैं। इसके अलावा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देश भी पेंशनभोगियों पर प्रभाव डालते हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पेंशन संशोधन सीधे किसी वित्तीय कानून या अधिनियम से उत्पन्न नहीं होता।

वेतन आयोग का कार्य और समयसीमा

आठवें वेतन आयोग की घोषणा जनवरी 2025 में हुई थी और इसका गठन नवंबर 2025 को अधिसूचित किया गया। आयोग को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि यदि सबकुछ निर्धारित समय अनुसार हुआ, तो अगले सालों में आयोग की सिफारिशें लागू होने की संभावना है।

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए संदेश

सरकार की तरफ से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बिना पेंशन में कोई बदलाव नहीं होगा। इस अवधि तक पेंशनभोगियों को वर्तमान नियमों और प्रावधानों के अनुसार ही पेंशन मिलेगी।