क्यों जरूरी हुआ यह अभियान?
पिछले कई वर्षों से लखनऊ विकास प्राधिकरण में संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े, अधूरे रिकॉर्ड, गायब फाइलें और गलत दस्तावेजों के आधार पर खरीद-फरोख्त के मामले सामने आते रहे हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए अब प्राधिकरण ने सभी संपत्तियों का एक प्रमाणित और डिजिटल डेटाबेस बनाने का फैसला किया है।
हर संपत्ति के लिए KYC अनिवार्य
नई व्यवस्था के अनुसार, एलडीए से जुड़ी सभी आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के मालिकों को KYC कराना जरूरी होगा। इसके तहत निम्न जानकारी ली जाएगी आधार कार्ड और पहचान दस्तावेज, मोबाइल नंबर और पता, संपत्ति से संबंधित रजिस्ट्री विवरण, स्वामित्व की स्थिति। इस प्रक्रिया के बाद हर संपत्ति को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी जानकारी को आसानी से सत्यापित किया जा सकेगा।
घर-घर जाकर होगा सत्यापन
एलडीए ने इस अभियान को तेजी से लागू करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। जिन लोगों के संपर्क विवरण उपलब्ध हैं, उन्हें मैसेज के जरिए सूचना भेजी जा रही है। इसके अलावा प्राधिकरण की टीमें घर-घर जाकर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन भी करेंगी, ताकि कोई भी जानकारी अधूरी या गलत न रहे।
डिजिटल रिकॉर्ड से खत्म होंगे विवाद
KYC प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी संपत्तियों का एक डिजिटल और अपडेटेड रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे: डुप्लीकेट मालिकाना हक की समस्या कम होगी, फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगेगी, ट्रांसफर और नामांतरण प्रक्रिया आसान होगी, पुरानी और गायब फाइलों का रिकॉर्ड भी दोबारा तैयार होगा। एलडीए इस KYC अभियान को भविष्य में संपत्ति से जुड़ी सभी सेवाओं जैसे नामांतरण, नक्शा पास कराने और ट्रांसफर प्रक्रिया से जोड़ने की भी तैयारी कर रहा है।
























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