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चंद्रमा-राहु की युति से 5 राशियों को लाभ: खुलेंगे तरक्की के दरवाजे, रुके हुए कार्य होंगे पूरे

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा और राहु की युति को एक महत्वपूर्ण ग्रह योग माना जाता है, जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलता है। हालांकि इस बार यह संयोग कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ संकेत लेकर आया है। 

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 5 राशियों के जीवन में इस युति के प्रभाव से तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं और लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है। खासकर करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए यह समय प्रगति और नए अवसरों से जुड़ा हो सकता है। नौकरी और व्यापार में रुके हुए कार्य पूरे होने के संकेत मिल रहे हैं। किसी पुराने प्रयास से अचानक लाभ मिलने की संभावना है। आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ निर्णय क्षमता भी मजबूत होगी।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के लिए यह युति आर्थिक दृष्टि से लाभकारी मानी जा रही है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और पहले किए गए निवेश से फायदा मिलने के संकेत हैं। करियर में नए अवसर मिलने की संभावना है, विशेषकर कम्युनिकेशन और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय अनुकूल रह सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह ग्रह योग सम्मान और सफलता लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति और मान-सम्मान बढ़ने की संभावना है। नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी और अधूरे कार्यों में तेजी देखने को मिल सकती है। सामाजिक स्तर पर भी प्रतिष्ठा बढ़ने के संकेत हैं।

तुला राशि

तुला राशि के लिए यह समय आर्थिक मजबूती और संतुलन का संकेत दे रहा है। व्यापार में लाभ और रुके हुए कार्यों में प्रगति हो सकती है। पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में सुधार देखने को मिलेगा। सोच-समझकर लिए गए निर्णय लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए यह युति नए अवसरों के द्वार खोल सकती है। करियर में नई शुरुआत और दूर स्थान या विदेश से जुड़े लाभ मिलने की संभावना है। मानसिक तनाव में कमी आएगी और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होगा। रुके हुए कार्यों में तेजी आने के संकेत हैं।

बिहार सरकार का बड़ा कदम, बुजुर्गों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल सामने आई है। केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के तहत राज्य में आयुष्मान वय वंदन कार्ड के माध्यम से लाखों वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है।

लाखों बुजुर्ग होंगे लाभान्वित

राज्य स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत बिहार में करीब 30 से 35 लाख बुजुर्गों को कार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में इस आयु वर्ग की कुल आबादी 50 लाख से अधिक बताई जा रही है, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से योजना से जोड़ा जा रहा है।

लाखों को मिल चुका लाभ

योजना के क्रियान्वयन के बाद अब तक लगभग 3.90 लाख से अधिक बुजुर्गों को आयुष्मान वय वंदन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इन कार्डधारकों को सरकार द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस और मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ से बड़ी राहत मिली है।

जिलों में लगेंगे विशेष शिविर

राज्य सरकार ने योजना के विस्तार के लिए नई रणनीति बनाई है। आने वाले समय में सभी जिलों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में मौके पर ही रजिस्ट्रेशन और कार्ड वितरण की सुविधा दी जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्र बुजुर्ग इस योजना से जुड़ सकें।

लक्ष्य बढ़ने की भी संभावना

सरकार ने फिलहाल 30 से 35 लाख लाभार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन जरूरत और मांग को देखते हुए इस संख्या को आगे बढ़ाने की भी संभावना जताई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से राज्य के अधिकांश बुजुर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी और इलाज के खर्च की चिंता काफी हद तक खत्म होगी।

बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत

यह योजना खासकर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आई है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। सरकार का उद्देश्य है कि हर पात्र बुजुर्ग को समय पर और निःशुल्क इलाज मिल सके, ताकि वे सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जी सकें।

बिहार में 'कर्मचारियों' के लिए सख्त फरमान, सभी जान लें!

पटना। बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल गतिविधियों को लेकर नए और सख्त नियम लागू किए हैं। इन नियमों का मकसद प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना और सरकारी सिस्टम से जुड़ी गोपनीयता को सुरक्षित रखना बताया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले ने कर्मचारियों के बीच डिजिटल स्वतंत्रता को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है।

नई नियमावली में क्या बदलाव हुआ?

नई ‘सरकारी सेवक आचार नियमावली 2026’ के तहत अब बिहार सरकार के कर्मचारी सोशल मीडिया पर सरकारी नीतियों, योजनाओं या प्रशासनिक फैसलों पर व्यक्तिगत राय सार्वजनिक रूप से साझा नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं, अदालतों के फैसलों पर टिप्पणी करना भी अब नियमों के दायरे में आएगा और इसे अनुशासनहीनता माना जा सकता है।

सोशल मीडिया पर बढ़ी सख्ती

नए आदेश के अनुसार, कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। कोई भी सरकारी कर्मचारी अब अपने प्रोफाइल पिक्चर या डीपी के जरिए किसी राजनीतिक विचार या विरोध का संकेत भी नहीं दे सकेगा। किसी पार्टी या संगठन के समर्थन में प्रतीक लगाना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

ट्रोलिंग और ऑनलाइन पर रोक

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी कर्मचारी ऑनलाइन किसी व्यक्ति को ट्रोल या परेशान नहीं कर सकता। महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी या किसी भी प्रकार की साइबर बदसलूकी पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, सरकारी दस्तावेजों की तस्वीरें लेना या गोपनीय जानकारी साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

डिजिटल गतिविधियों पर नियंत्रण

सरकारी कर्मचारियों को अब किसी भी डिजिटल कार्यक्रम या ऑनलाइन गतिविधि में भाग लेने से पहले विभागीय अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति सोशल मीडिया गतिविधि या सार्वजनिक डिजिटल मंच पर भागीदारी को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

अनुशासन और गोपनीयता पर फोकस

सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी गोपनीयता को मजबूत करने के लिए जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी फैलने और संवेदनशील डाटा लीक होने की आशंका को देखते हुए यह नियम लागू किए गए हैं।

सम्राट चौधरी या कोई और? बिहार में CM फेस पर सस्पेंस, क्या BJP खेलेगी ‘सरप्राइज कार्ड’?

पटना। बिहार की राजनीति इन दिनों बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। खबरें हैं कि नीतीश कुमार जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। ऐसे में सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी, इस पर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बीजेपी के खाते में जा सकता है मुख्यमंत्री पद

राजनीतिक संकेतों के अनुसार, इस बार मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में जा सकता है, जबकि जेडीयू को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे चेहरे का चयन करना होगा जो सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साध सके।

सम्राट चौधरी आगे, लेकिन सस्पेंस बरकरार

सीएम पद की रेस में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उन्हें पार्टी का मजबूत ओबीसी चेहरा माना जाता है और संगठन में उनकी पकड़ भी अच्छी है। लेकिन बीजेपी की कार्यशैली को देखते हुए यह कहना जल्दबाजी होगी कि फैसला तय हो चुका है।

मुख्यमंत्री के रेस में कई दावेदार

सम्राट चौधरी के अलावा नित्यानंद राय, विजय सिन्हा और रेणु देवी जैसे नाम भी चर्चा में हैं। ये सभी नेता अपने-अपने सामाजिक आधार और राजनीतिक अनुभव के कारण मजबूत दावेदारी रखते हैं। ऐसे में अंतिम फैसला कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगा जैसे जातीय समीकरण, संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति।

‘सरप्राइज कार्ड’ की संभावना

बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से चौंकाने के लिए जानी जाती है। कई राज्यों में पार्टी ने आखिरी समय में ऐसे चेहरे को आगे किया है, जो पहले चर्चा में नहीं था। यही कारण है कि बिहार में भी ‘सरप्राइज कार्ड’ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

दिल्ली की भूमिका होगी अहम

अंतिम निर्णय में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका अहम मानी जा रही है। पार्टी के शीर्ष नेताओं की सहमति के बाद ही मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में ‘दिल्ली से आने वाले फैसले’ पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

ईरान-US शांति वार्ता हुई फेल? 4 शर्तों पर अटका मामला, गुस्से में ट्रंप

न्यूज डेस्क। ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता आखिरकार बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। करीब 15 से 21 घंटे तक चली मैराथन बातचीत में दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे, जिससे समझौते की कोई जमीन तैयार नहीं हो सकी। इस विफलता ने एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका को गहरा कर दिया है।

बातचीत क्यों टूटी?

अमेरिकी पक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि लंबी बातचीत के बावजूद ईरान ने प्रस्तावित शर्तों को स्वीकार नहीं किया। वहीं ईरानी मीडिया ने भी पुष्टि की कि वार्ता का पहला चरण बेनतीजा रहा और आगे की बातचीत भी ठप पड़ गई।

1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा विवाद

सबसे अहम मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण रहा। अमेरिका चाहता है कि यह जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहे और किसी तरह का शुल्क या बाधा न हो। दूसरी ओर, ईरान इस पर अपने नियंत्रण या कम से कम आंशिक अधिकार बनाए रखना चाहता है। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया के तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसका महत्व बेहद संवेदनशील है।

2. लेबनान में सीजफायर पर टकराव 

ईरान ने लेबनान में संघर्षविराम को वार्ता की पूर्व-शर्त बना दिया। उसका कहना था कि Hezbollah और इजरायल के बीच सीजफायर जरूरी है। अमेरिका और इजरायल ने इसे खारिज कर दिया, जिससे वार्ता में गतिरोध और गहरा गया।

3. प्रतिबंध और परमाणु कार्यक्रम

ईरान की प्रमुख मांगों में आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, विदेशों में फंसी संपत्तियों को वापस करना और अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की अनुमति शामिल थी। अमेरिका ने खास तौर पर परमाणु हथियार क्षमता से जुड़े किसी भी समझौते से इनकार कर दिया। यही मतभेद समझौते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना।

4. मुआवजा और व्यापक सीजफायर

ईरान ने हालिया संघर्ष में हुए नुकसान के लिए मुआवजा और पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्धविराम की मांग भी रखी। अमेरिका ने इन शर्तों को अव्यावहारिक बताते हुए ठुकरा दिया।

ट्रंप का सख्त रुख

वार्ता से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। वार्ता विफल होने के बाद भी उनका रुख नरम नहीं पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों के ल‍िए बड़ी खुशखबरी, ये 3 नए नियम लागू

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 8वें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच सरकार ने चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस (CEA) को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। डाक विभाग द्वारा जारी इन बदलावों का सीधा फायदा कर्मचारियों को बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च में मिलने वाला है।

आपको बता दें की इस नियम का लाभ उठाने के लिए सरकार ने क्लेम प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। अब केवल स्कूल के प्रिंसिपल का सर्टिफिकेट ही पर्याप्त होगा, जिसमें बच्चे की पढ़ाई की पुष्टि हो। हॉस्टल सब्सिडी के लिए रहने और खाने के खर्च का प्रमाण देना जरूरी होगा।

शिक्षा भत्ते में बढ़ोतरी, फिक्स्ड रकम का फायदा

नए नियमों के अनुसार अब केंद्रीय कर्मचारियों को प्रति बच्चा ₹2,812.5 प्रति माह शिक्षा भत्ता मिलेगा। वहीं, हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए ₹8,437.5 प्रति माह की सब्सिडी तय की गई है। खास बात यह है कि यह राशि फिक्स्ड रहेगी, यानी वास्तविक खर्च कम हो या ज्यादा, कर्मचारियों को यह पूरी रकम मिलेगी।

महंगाई भत्ते से जुड़ा नया सिस्टम

सरकार ने इस भत्ते को महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ दिया है। जैसे ही DA 50% से ऊपर जाएगा, CEA में अपने आप 25% की बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के साथ अतिरिक्त राहत मिलती रहेगी।

प्री-स्कूल पर भी मिलेगा लाभ

नई शिक्षा नीति के तहत अब नर्सरी, LKG और UKG जैसी प्री-स्कूल कक्षाओं को भी इस भत्ते में शामिल किया गया है। यानी अब छोटे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई का खर्च भी कवर होगा। इसके अलावा, यदि शिक्षा नीति में बदलाव के कारण किसी बच्चे को एक क्लास दोबारा पढ़नी पड़े, तो इसके लिए भी एक बार की छूट दी गई है।

किन शर्तों पर मिलेगा फायदा

अधिकतम दो बच्चों के लिए ही CEA मिलेगा। 

पति-पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी होने पर केवल एक ही क्लेम कर सकता है। 

रिइम्बर्समेंट का दावा साल में एक बार, वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद किया जाएगा। 

अगर कोई कर्मचारी छुट्टी पर है या सस्पेंड है, तब भी उसे यह भत्ता मिलता रहेगा। 

रिटायरमेंट या नौकरी समाप्त होने की स्थिति में भी उस शैक्षणिक वर्ष के अंत तक यह सुविधा जारी रहेगी।

अमित शाह का बंगाल में बड़ा दांव, ममता के वोट बैंक पर सीधा वार

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह ने कोलकाता में बीजेपी का ‘संकल्प पत्र’ जारी कर राजनीतिक माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है। इस घोषणापत्र में किए गए वादे सीधे तौर पर ममता बनर्जी और उनकी सरकार की प्रमुख योजनाओं को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।

महिलाओं और गरीब वर्ग पर फोकस

बीजेपी ने सबसे बड़ा दांव महिलाओं पर खेला है। ममता सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के मुकाबले पार्टी ने हर महिला को ₹3000 प्रति माह देने का वादा किया है। यह घोषणा खासतौर पर महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति मानी जा रही है, जो बंगाल की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

युवाओं और किसानों के लिए बड़े वादे

घोषणापत्र में बेरोजगार युवाओं को ₹1500 मासिक भत्ता देने की बात कही गई है। वहीं किसानों को सालाना ₹9000 की आर्थिक सहायता देने का वादा भी शामिल है। इन घोषणाओं के जरिए बीजेपी ने ग्रामीण और युवा वोट बैंक में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है।

UCC और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख

अमित शाह ने साफ किया कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो छह महीने के भीतर यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया जाएगा। साथ ही, राजनीतिक हिंसा की जांच के लिए एक विशेष आयोग बनाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी वादा किया गया है। यह मुद्दे लंबे समय से बंगाल की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

‘बंगाल का बेटा’ और स्थानीय नेतृत्व

बीजेपी ने यह भी संकेत दिया है कि राज्य का मुख्यमंत्री कोई स्थानीय चेहरा ही होगा, जिसे ‘बंगाल का बेटा’ कहा जा रहा है। यह कदम क्षेत्रीय अस्मिता को ध्यान में रखकर उठाया गया माना जा रहा है, ताकि बाहरी बनाम स्थानीय की बहस को संतुलित किया जा सके।

महिला आरक्षण और रोजगार

सरकारी नौकरियों में 33% महिला आरक्षण का वादा भी घोषणापत्र का अहम हिस्सा है। इसके जरिए पार्टी ने महिला सशक्तिकरण और रोजगार के मुद्दे को एक साथ साधने की कोशिश की है।

क्या ममता का किला हिलेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये वादे ममता बनर्जी के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे? पिछले चुनावों में टीएमसी ने महिला वोटर्स और ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ बनाई थी। ऐसे में बीजेपी का यह आक्रामक घोषणापत्र सीधे उसी आधार को चुनौती देता है।

हालांकि, चुनावी वादों का असर जमीन पर कितना दिखेगा, यह कई फैक्टरों पर निर्भर करेगा जैसे संगठन की मजबूती, स्थानीय उम्मीदवारों की छवि और चुनावी माहौल। लेकिन इतना तय है कि अमित शाह के इस ‘चुनावी दांव’ ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है।

कमजोरी को कहें बाय-बाय! ये 4 ड्राईफ्रूट्स देंगे जबरदस्त एनर्जी

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान और कमजोरी एक आम समस्या बनती जा रही है। गलत खानपान और पोषण की कमी के कारण शरीर को जरूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती। ऐसे में कुछ प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर ड्राईफ्रूट्स आपकी सेहत को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

अखरोट:

अखरोट ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होता है, जो दिमाग को तेज करने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के साथ-साथ थकान को भी कम करता है। रोजाना थोड़ी मात्रा में अखरोट खाने से मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की ताकत मिलती है।

बादाम:

बादाम को सुपरफूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। सुबह भिगोकर बादाम खाने से दिनभर एनर्जी बनी रहती है।

ब्राजील नट्स: 

ब्राजील नट्स में सेलेनियम जैसे जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं। यह थायरॉयड फंक्शन को बेहतर बनाता है और शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करता है। कम मात्रा में भी यह शरीर को भरपूर पोषण देता है।

चिलगोजा: 

चिलगोजा प्रोटीन, हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ स्टैमिना बढ़ाने में भी मदद करता है। खासकर सर्दियों में इसका सेवन बेहद लाभकारी माना जाता है।

कैसे करें सेवन?

इन सभी ड्राईफ्रूट्स को सीमित मात्रा में रोजाना डाइट में शामिल करना चाहिए। सुबह या शाम के समय इन्हें खाने से शरीर को ज्यादा फायदा मिलता है।

RCFL Recruitment 2026: 188 पदों पर भर्ती, 12वीं से ग्रेजुएट तक के लिए मौका

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। Rashtriya Chemicals and Fertilizers Limited (RCFL) ने ऑपरेटर ट्रेनी के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 188 पद भरे जाएंगे, जिनके लिए योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 11 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 27 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

कौन कर सकता है आवेदन?

इन पदों के लिए 12वीं पास, डिप्लोमा और बी.एससी. योग्यता रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए अवसर प्रदान करती है।

आवेदन शुल्क

सामान्य / ईडब्ल्यूएस / ओबीसी (एनसीएल) के लिए आवेदन शुल्क ₹700, एससी / एसटी / महिला / भूतपूर्व सैनिक के लिए कोई शुल्क नहीं।

आयु सीमा

1 फरवरी 2026 के अनुसार आयु सीमा निर्धारित की गई है। सामान्य वर्ग अधिकतम 30 वर्ष, ओबीसी (एनसीएल) अधिकतम 33 वर्ष, एससी / एसटी अधिकतम 35 वर्ष, भूतपूर्व सैनिक और विशेष श्रेणियों के लिए अतिरिक्त 5 वर्ष की छूट दी गई है। 

चयन प्रक्रिया। 

उम्मीदवारों का चयन विभिन्न चरणों के आधार पर किया जाएगा, जिसमें लिखित परीक्षा और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। चयनित उम्मीदवारों को कंपनी में ऑपरेटर ट्रेनी के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

क्यों खास है यह भर्ती?

यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास मौका है जो केमिकल और उर्वरक क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। RCFL एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जहां काम करने का अवसर करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

बिहार सरकार की नई पहल: 25 जिलों के किसानों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गन्ना आधारित उद्योग को फिर से गति देने के उद्देश्य से बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करने के साथ-साथ 25 जिलों में नई चीनी मिलें स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही उन क्षेत्रों पर भी फोकस किया जा रहा है, जहां अब तक यह उद्योग नहीं पहुंच पाया था।

चीनी मिलों के साथ गुड़ उद्योग पर भी जोर

सरकार केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि गुड़ उद्योग को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। जिन इलाकों में चीनी मिलें नहीं हैं, वहां गुड़ उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए विशेष योजना के तहत किसानों को सहायता और प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

गन्ना खेती के विस्तार की शुरुआत

राज्य में गन्ना फसल क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम लागू किया गया है, जिसका मकसद गैर-परंपरागत क्षेत्रों में भी गन्ना खेती को बढ़ावा देना है। अब तक सैकड़ों एकड़ भूमि पर गन्ने की खेती शुरू हो चुकी है। भागलपुर, भोजपुर, दरभंगा, गया, जमुई, मुजफ्फरपुर, पटना, पूर्णिया, सहरसा और सीतामढ़ी जैसे जिलों में किसान इस पहल से जुड़ रहे हैं।

किसानों को मुफ्त बीज की सुविधा

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को गन्ने का बीज निःशुल्क दिया जा रहा है। छोटे और मध्यम किसान, जो 0.25 एकड़ से लेकर 5 एकड़ तक खेती करते हैं, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को इस योजना से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

आय बढ़ाने के साथ रोजगार

गन्ना खेती को लाभकारी फसल माना जाता है, क्योंकि एक बार बोने के बाद इससे कई बार कटाई की जा सकती है। इसके अलावा गन्ने से गुड़, जूस और अन्य उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है। इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारी शुरू, 15 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन

नई दिल्ली। आस्था के सबसे बड़े पर्वों में से एक अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। साल 2026 की इस पवित्र यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इस बार व्यवस्था को और सरल व व्यवस्थित बनाने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

बता दें की इस बार भी रजिस्ट्रेशन और परमिट जारी करने की प्रक्रिया “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर होगी। यानी जो पहले आवेदन करेगा, उसे प्राथमिकता मिलेगी। हर दिन सीमित संख्या में ही परमिट जारी किए जाएंगे, जिससे भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।

देशभर में 554 बैंक शाखाओं में सुविधा

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देशभर की 554 बैंक शाखाओं में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है। इससे अलग-अलग राज्यों के लोग आसानी से नजदीकी शाखा में जाकर अपना पंजीकरण करा सकेंगे।

आधार आधारित ई-केवाईसी से रजिस्ट्रेशन

इस बार पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। श्रद्धालुओं को आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी के जरिए रजिस्ट्रेशन करना होगा। अगर बायोमेट्रिक में कोई समस्या आती है, तो वेबकैम के माध्यम से फोटो लेकर भी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे तकनीकी दिक्कतों के बावजूद रजिस्ट्रेशन बाधित नहीं होगा।

यात्रा के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट होगा अनिवार्य

यात्रा पर जाने के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (हेल्थ सर्टिफिकेट) जरूरी है। यह सर्टिफिकेट 8 अप्रैल 2026 या उसके बाद का होना चाहिए और अधिकृत डॉक्टर या मेडिकल सेंटर से ही बनवाना होगा। श्राइन बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त डॉक्टरों और अस्पतालों की सूची भी जारी की गई है।

इस यात्रा के लिए फीस और जरूरी दस्तावेज

हर यात्री को परमिट के लिए 150 रुपये शुल्क देना होगा। रजिस्ट्रेशन के समय आधार कार्ड और सही मोबाइल नंबर देना अनिवार्य है, ताकि आगे की प्रक्रिया में कोई समस्या न आए। Shri Amarnath Shrine Board ने इस बार पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से तैयार किया है।

कल बनेगा महालक्ष्मी योग! 5 राशियों पर बरसेगा धन और भाग्य

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कल का दिन बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस दिन “महालक्ष्मी योग” का निर्माण हो रहा है। यह योग धन, समृद्धि और सौभाग्य से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में कई राशियों के लिए यह समय आर्थिक उन्नति और सफलता के नए अवसर लेकर आ सकता है।

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग धन लाभ के प्रबल संकेत दे रहा है। लंबे समय से अटके हुए पैसे वापस मिल सकते हैं। निवेश से अच्छा फायदा होगा और आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। नौकरीपेशा लोगों को वेतन वृद्धि या बोनस मिलने के योग हैं।

2. सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय करियर में उन्नति लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और वरिष्ठों से प्रशंसा मिलेगी। बिजनेस करने वालों को नई डील या बड़ा ऑर्डर मिलने की संभावना है, जिससे आय में बढ़ोतरी होगी।

3. कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए यह योग नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। नौकरी में बदलाव या प्रमोशन के योग बन सकते हैं। आर्थिक मामलों में सुधार होगा और खर्चों पर नियंत्रण बनेगा। परिवार में भी सुख-शांति बनी रहेगी।

4. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों को इस योग से अचानक धन लाभ मिल सकता है। कहीं से अप्रत्याशित लाभ मिलने के योग हैं। व्यापार में विस्तार के अवसर मिलेंगे और पुराने निवेश से भी फायदा हो सकता है।

5. मकर राशि

मकर राशि के लिए यह योग बेहद शुभ साबित हो सकता है। करियर में नई ऊंचाइयों को छूने के मौके मिलेंगे। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और आर्थिक स्थिरता आएगी। साथ ही, सामाजिक मान-सम्मान में भी वृद्धि होगी।

यूपी में बिछेगा हाई स्पीड रेल ट्रैक, अब मिनटों में तय होगा सफर!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मुरादाबाद से बरेली होते हुए शाहजहांपुर तक रेलवे अब हाई स्पीड ट्रैक बिछाने की तैयारी में है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों को तेज, सुगम और समय बचाने वाला सफर मिल सकेगा।

नई तकनीक से बदलेगा रेल ट्रैक

रेलवे इस रूट पर पुरानी लाइन को हटाकर आधुनिक तकनीक से लैस नई रेल पटरी बिछाने जा रहा है। इस ट्रैक को इस तरह तैयार किया जाएगा कि उस पर हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन आसानी से हो सके। खासतौर पर वंदे भारत ट्रेन की रफ्तार को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।

160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का लक्ष्य

अभी इस मार्ग पर ट्रेनें लगभग 110 से 120 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही हैं। लेकिन नए ट्रैक के बनने के बाद यह रफ्तार बढ़कर करीब 160 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इससे मुरादाबाद से शाहजहांपुर के बीच का सफर काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा।

पहले चरण में मुरादाबाद-बरेली पर फोकस

इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। पहले चरण में मुरादाबाद से बरेली के बीच नई लाइन बिछाने का काम शुरू होगा। लगभग 150 किलोमीटर लंबे इस हिस्से पर काम के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसे चालू वित्तीय वर्ष में ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आधुनिक सिग्नल सिस्टम भी होगा शामिल

सिर्फ ट्रैक ही नहीं, बल्कि इस रूट पर आधुनिक सिग्नल प्रणाली भी लगाई जाएगी। इससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होगा, साथ ही हाई स्पीड पर भी बेहतर नियंत्रण बना रहेगा।

दूसरे चरण में लखनऊ तक विस्तार किया जायेगा

रेलवे की योजना इस परियोजना को आगे बढ़ाते हुए शाहजहांपुर से लखनऊ तक विस्तार देने की भी है। इससे पूरे क्षेत्र में तेज रफ्तार रेल नेटवर्क तैयार होगा और लंबी दूरी के यात्रियों को भी सीधा फायदा मिलेगा। इस हाई स्पीड ट्रैक के बनने से यात्रियों का समय बचेगा, ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी और सफर अधिक आरामदायक बनेगा।

8वें वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग उम्मीदों की नई किरण लेकर आया है। लंबे समय से इसकी सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है, और अब इसके काम में तेजी आने से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में कर्मचारियों को कई बड़ी राहत मिल सकती है। आइए जानते हैं इस आयोग से जुड़ी 4 अहम खुशखबरियां।

1. बैकडेट से लागू होने की उम्मीद, एरियर का लाभ

माना जा रहा है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें अगले साल तक सरकार को सौंप सकता है। यदि इन्हें 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को पिछली अवधि का एरियर भी मिलेगा। यह एरियर एकमुश्त बड़ी रकम के रूप में मिल सकता है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी।

2. सैलरी, भत्तों और पेंशन में संभावित बढ़ोतरी

वेतन आयोग का मुख्य काम कर्मचारियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करना है। ऐसे में उम्मीद है कि नई सिफारिशों के बाद सैलरी में अच्छा इजाफा देखने को मिल सकता है। इसका फायदा न केवल कार्यरत कर्मचारियों को बल्कि पेंशनभोगियों को भी मिलेगा।

3. प्रक्रिया में तेजी, कंसल्टेंट्स की भर्ती शुरू

आयोग ने अपने काम को तेज करने के लिए विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। अलग-अलग श्रेणियों में कंसल्टेंट, सीनियर कंसल्टेंट और यंग प्रोफेशनल्स को शामिल किया जा रहा है। इन विशेषज्ञों की मदद से वेतन संरचना का विश्लेषण, डेटा अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करने का काम तेजी से पूरा किया जाएगा, जिससे सिफारिशें समय पर आ सकें।

4. बड़े स्तर पर विचार-विमर्श और परामर्श

आयोग विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगियों से सुझाव ले रहा है। इसके तहत कई परामर्श बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इस प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नई सिफारिशें सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाएं।

5 .आयोग की टीम और कामकाज

8वें वेतन आयोग की कमान अनुभवी लोगों के हाथ में है। इसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश कर रही हैं, जबकि वित्त और प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञ इसमें शामिल हैं। आयोग का काम सिर्फ वेतन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव का संतुलन भी बनाए रखना है।

बिहार में अब BJP का सीएम: सबकुछ फाइनल, इस नाम पर मुहर तय

पटना। बिहार की राजनीति इन दिनों तेज उठापटक के दौर से गुजर रही है। पिछले डेढ़ महीने से जारी अटकलों के बीच अब तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है। संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में नई सरकार का स्वरूप तय हो चुका है और सत्ता की कमान एक बार फिर NDA के हाथ में ही रहने वाली है। खास बात यह है कि इस बार मुख्यमंत्री पद भाजपा के खाते में जाने की चर्चा तेज हो गई है।

नीतीश कुमार के फैसले से बदली सियासी दिशा

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दिया। मार्च की शुरुआत में इस फैसले का संकेत मिलने के बाद से ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। अब माना जा रहा है कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, जबकि बिहार की कमान किसी नए चेहरे को सौंपी जा सकती है।

BJP के खाते में जा सकता है मुख्यमंत्री पद

सियासी सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार में मुख्यमंत्री पद बीजेपी को मिल सकता है। इसके साथ ही गृह विभाग भी भाजपा के पास रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि मंत्रिमंडल में सहयोगी दलों की हिस्सेदारी को लेकर ज्यादा विवाद नहीं है, लेकिन उपमुख्यमंत्री पद को लेकर अभी चर्चा जारी है।

डिप्टी सीएम को लेकर असमंजस

जेडीयू के भीतर इस बात पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है कि डिप्टी सीएम के रूप में किसे आगे किया जाए। कुछ हलकों में नीतीश कुमार के बेटे के नाम की चर्चा भी चल रही है, लेकिन इस पर आधिकारिक मुहर अभी बाकी है।

अगले कुछ दिन बेहद अहम

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आने वाले 3-4 दिन बेहद निर्णायक साबित होंगे। इसी दौरान मुख्यमंत्री के नाम और नई सरकार के गठन पर अंतिम फैसला सामने आ सकता है।

बिहार में सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर रोक, आदेश जारी

पटना। बिहार सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अहम और दूरगामी फैसला लेते हुए सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लिया गया, जिसे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या है नया आदेश?

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी संकल्प के अनुसार अब राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर निजी तौर पर मरीजों का इलाज कर शुल्क नहीं ले सकेंगे। यह नियम बिहार स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा सेवा तथा Indira Gandhi Institute of Medical Sciences से जुड़े चिकित्सकों पर भी लागू होगा। यदि कोई डॉक्टर इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का मानना है कि इस कदम से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। अक्सर यह शिकायत सामने आती थी कि डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में कम समय देते हैं और निजी क्लीनिक में अधिक सक्रिय रहते हैं। इस नई व्यवस्था से इस समस्या पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जा रही है।

डॉक्टरों के लिए क्या प्रावधान?

सरकार ने डॉक्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें “गैर-व्यावसायिक भत्ता” देने का निर्णय लिया है। यह भत्ता उन्हें निजी प्रैक्टिस से होने वाली आय के बदले प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

सात निश्चय-3 के तहत पहल

बिहार में यह निर्णय राज्य सरकार के 'सात निश्चय-3' कार्यक्रम के अंतर्गत लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जन-केन्द्रित बनाना है। सरकार चाहती है कि गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं आसानी से मिल सकें।

बंगाल चुनाव में बदलती हवा? मोदी की रैलियों के बाद BJP खुश

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से देश की सबसे दिलचस्प चुनावी लड़ाइयों में रही है। एक तरफ सत्ताधारी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस है, तो दूसरी ओर बीजेपी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के बाद यह सवाल फिर जोर पकड़ रहा है की क्या बंगाल में चुनावी तस्वीर बदल रही है?

रैलियों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

हल्दिया, बीरभूम और आसनसोल में हुई रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। आम तौर पर चुनावी सभाओं में समर्थकों की भीड़ होती है, लेकिन यहां लोगों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह को बीजेपी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

क्या ओपिनियन पोल अधूरे हैं?

अब तक आए ज्यादातर ओपिनियन पोल तृणमूल कांग्रेस की बढ़त दिखाते रहे हैं। हालांकि, ये सर्वे अधिकतर उन रैलियों से पहले के हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे जनता से संवाद किया। ऐसे में कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी माहौल में बदलाव को नए सिरे से आंकने की जरूरत है।

मुद्दों की राजनीति बनाम भावनात्मक

रैलियों में विकास, रोजगार और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। यह भी देखा गया कि इन विषयों पर जनता की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही। खासकर महिलाओं और युवाओं में कुछ नई उम्मीदें दिखने की बात कही जा रही है।

बीजेपी के घोषणाओं का असर दीखता असर

गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए संभावित वादों जैसे महिलाओं और युवाओं को आर्थिक सहायता ने भी चर्चा को और तेज किया है। हालांकि, इन वादों का वास्तविक असर चुनाव परिणामों में कितना दिखेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

क्या सच में बदल रही है बंगाल चुनाव की हवा?

यह कहना जल्दबाजी होगी कि बंगाल की राजनीति पूरी तरह पलट रही है, लेकिन इतना जरूर है कि मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प होता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस अभी भी मजबूत स्थिति में मानी जाती है, पर बीजेपी की बढ़ती सक्रियता ने चुनाव को एकतरफा नहीं रहने दिया है।

यूपी के बनेंगी नई सड़कें और पुलिया, सभी जिलों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति देने के लिए सरकार ने सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। लोक निर्माण विभाग इस वित्तीय वर्ष में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करने जा रहा है, जिससे प्रदेश के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।

बड़े स्तर पर शुरू होंगी परियोजनाएं

इस वर्ष 12 हजार करोड़ रुपये के बजट से लगभग 36 हजार करोड़ रुपये लागत की नई परियोजनाओं को शुरू करने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य कम बजट में अधिक से अधिक विकास कार्यों को मंजूरी देकर उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा करना है।

जिलों से मांगे गए प्रस्ताव

प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर नई सड़कों और पुल-पुलियों के प्रस्ताव भेजें। प्रस्ताव मिलने के बाद उन्हें मंजूरी दी जाएगी और अगले महीने से निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि निर्माण कार्य में देरी न हो।

पुराने कार्यों पर पूरा ध्यान

विभागाध्यक्ष ए.के. द्विवेदी के अनुसार कुल बजट में से बड़ा हिस्सा पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने में खर्च किया जाएगा। इससे लंबे समय से अधूरे पड़े काम जल्द पूरे हो सकेंगे।

धन जारी करने की व्यवस्था

नई परियोजनाओं के लिए शुरुआत में 20 से 30 प्रतिशत तक धनराशि जारी की जाएगी, ताकि निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो सके और समय पर पूरा किया जा सके। पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार सरकार ने बेहतर योजना और समयबद्ध प्रक्रिया के जरिए हर रुपये का सही इस्तेमाल करने की तैयारी की है।

आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?

गांव और शहरों के बीच बेहतर संपर्क

यात्रा में समय की बचत

व्यापार और परिवहन को बढ़ावा

रोजगार के नए अवसर

भारत को भर-भर कर तेल भेज रहा ये देश, खत्म हुई टेंशन

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय बाद ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति फिर शुरू हो गई है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

सात साल बाद बदली स्थिति

साल 2019 में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरान से तेल आयात बंद करना पड़ा था। उस समय कई देशों को दी गई अस्थायी छूट भी आगे नहीं बढ़ाई गई, जिससे यह व्यापार पूरी तरह रुक गया था। अब हालात में बदलाव के बाद पहली बार फिर से तेल की खेप भारत पहुंची है।

बड़ी मात्रा में पहुंचा कच्चा तेल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर एक जहाज भारत पहुंच चुका है। यह आपूर्ति ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है और कई देश तेल की कमी का सामना कर रहे हैं।

अमेरिका ने दी है अनुमति

बताया जा रहा है कि 20 मार्च को अमेरिकी प्रशासन की ओर से एक विशेष अनुमति जारी की गई, जिसके तहत पहले से लोड किए गए ईरानी तेल को गंतव्य तक पहुंचाने की छूट दी गई। इस फैसले से उन शिपमेंट्स को पूरा करने का रास्ता खुल गया, जो पहले प्रतिबंधों के कारण अटके हुए थे।

भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?

ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आएगी

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भरता कुछ कम होगी

बढ़ती कीमतों के दबाव से राहत मिल सकती है

रणनीतिक संबंधों को मजबूती मिलेगी

क्या आगे भी जारी रहेगा आयात?

हालांकि यह खेप विशेष अनुमति के तहत आई है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि आने वाले समय में भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग फिर से मजबूत हो सकता है। यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा।

सूर्य के प्रचंड प्रभाव से चमकेंगे 5 राशियों के सितारे, करियर और धन में जबरदस्त उछाल के संकेत

राशिफल। आज का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्य की प्रबल स्थिति कई राशियों के लिए सफलता, उन्नति और आर्थिक लाभ के द्वार खोल रही है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ऊर्जा, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना गया है। ऐसे में इसका सकारात्मक प्रभाव कुछ राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन उन्नति का संकेत दे रहा है। नौकरी और व्यापार दोनों क्षेत्रों में लाभ के अवसर मिल सकते हैं। कार्यस्थल पर आपके कार्य की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और धन आगमन के योग बन रहे हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि पर सूर्य का विशेष प्रभाव रहता है, इसलिए आज का दिन इनके लिए अत्यंत शुभ है। पदोन्नति के योग बन रहे हैं और उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और रुका हुआ धन वापस मिल सकता है।

धनु राशि

धनु राशि के लिए आज भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। व्यापार में लाभ होगा और दूर स्थानों से शुभ समाचार मिल सकते हैं। आय में वृद्धि के संकेत हैं।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए आज मेहनत का फल मिलने का दिन है। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होंगे और व्यापार में विस्तार के अवसर मिलेंगे। परिवार का सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए आज नए अवसरों के द्वार खुलेंगे। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और कार्यक्षेत्र में बदलाव लाभकारी रहेगा। मित्रों और सहयोगियों से सहायता मिलेगी, जिससे काम में तेजी आएगी।

सीएम योगी का निर्देश: बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का शीघ्र और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद बिजली निगम ने व्यवस्था सुधार के लिए व्यापक कदम उठाए हैं।

सात दिन का विशेष अभियान शुरू

उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए पूरे प्रदेश में सात दिनों का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य लोगों की शिकायतों को सीधे सुनकर उनका तत्काल निस्तारण करना है।

घर-घर पहुंचेंगे अधिकारी

अभियान के तहत अधिकारी उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर उनकी समस्याएं जानेंगे। मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद निगम स्तर पर बैठक आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि हर दिन शिकायतों का निस्तारण किया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। मीटर से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

गलत बिल पर कार्रवाई

निगम के अध्यक्ष आशीष गोयल ने अधिक बिल या गलत बिल की शिकायतों को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और उपभोक्ताओं को तुरंत राहत दी जाए।

सहायता केंद्र पर भी नजर

उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था पर भी लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि हर शिकायत का समय पर समाधान हो सके।

तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी

अभियान के दौरान हर अधिकारी को निश्चित संख्या में उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी दी जाएगी। समस्याओं का समाधान करना उनकी जवाबदेही होगी। साथ ही सभी कर्मचारियों की इसमें सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

भारत ने कर दिया खेल, बढ़ी कमाई, किसानों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय हालात में आए अचानक बदलाव का असर अब भारत के कृषि बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। बीते दो दिनों में थोक स्तर पर चावल की कीमतों में करीब 7% तक की तेजी दर्ज की गई है। इस उछाल के पीछे वैश्विक स्तर पर बदली परिस्थितियां और भारत की नई निर्यात नीतियां अहम भूमिका निभा रही हैं। इसका सीधा फायदा किसानों और निर्यातकों को मिलने की उम्मीद है।

सीजफायर से बदला बाजार का माहौल

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) की खबर ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई दिशा दी है। पहले जहां युद्ध के कारण समुद्री मार्ग बाधित हो रहे थे और कीमतों में गिरावट आई थी, वहीं अब हालात सुधरने से निर्यात ऑर्डर तेजी से बढ़ने लगे हैं। मिडिल ईस्ट और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों से मांग बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे भारतीय चावल की कीमतों में उछाल आया है।

निर्यात ऑर्डर में आई तेजी

चावल निर्यातकों के अनुसार, सीजफायर के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। बासमती और गैर-बासमती दोनों प्रकार के चावल की मांग में तेजी आई है। कई निर्यातकों ने बंदरगाहों पर पहले से ही कंटेनर तैयार कर रखे हैं और अब शिपमेंट दोबारा शुरू होने की तैयारी में है।

निर्यात नियमों में ढील से बढ़ेगा व्यापार

भारत सरकार ने चावल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल (EIC) का सर्टिफिकेट केवल यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे चुनिंदा देशों के लिए अनिवार्य रहेगा। अन्य यूरोपीय देशों को छह महीने के लिए इस प्रक्रिया से छूट दी गई है। इस कदम से निर्यात प्रक्रिया आसान होगी और भारतीय चावल को नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

चीन के बाद अब भारत को नुकसान, US मार्केट में गिरा टेक्सटाइल एक्सपोर्ट

नई दिल्ली। अमेरिकी बाजार में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है। फरवरी 2026 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत से कपड़ा और परिधान निर्यात में करीब 28% से ज्यादा की गिरावट आई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है और खरीदार तेजी से विकल्प तलाश रहे हैं।

वियतनाम ने मजबूत की पकड़

जहां भारत को नुकसान झेलना पड़ा है, वहीं वियतनाम ने अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। आंकड़ों के अनुसार, वियतनाम से अमेरिका को निर्यात में लगभग 5% की बढ़ोतरी हुई है। इसके उलट, भारत और बांग्लादेश दोनों के निर्यात में गिरावट देखने को मिली है।

टैरिफ राहत का नहीं मिला तुरंत फायदा

अमेरिका द्वारा टैरिफ में राहत दिए जाने के बावजूद भारत के निर्यात में अभी तक सुधार नहीं दिखा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि कई अमेरिकी खरीदार पहले ही अपने ऑर्डर अन्य देशों में शिफ्ट कर चुके हैं। इसके अलावा, ऑर्डर मिलने से लेकर शिपमेंट तक 3-4 महीने का समय लग जाता है, इसलिए टैरिफ में बदलाव का असर आंकड़ों में दिखने में देरी हो रही है।

कमजोर मांग और महंगाई का असर

2025 के दौरान अमेरिकी बाजार में मांग कमजोर रही और महंगाई के चलते उपभोक्ता खर्च भी प्रभावित हुआ। इसका सीधा असर कपड़ा उद्योग पर पड़ा, क्योंकि यह सेक्टर उपभोक्ता मांग पर काफी हद तक निर्भर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि भारत जैसे निर्यातक देशों को अधिक नुकसान झेलना पड़ा।

कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! सैलरी में बंपर इजाफा, एरियर भी!

न्यूज डेस्क। महंगाई के दौर में सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जहां एक ओर केंद्र सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का इंतजार है, वहीं एक राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को बड़ी सौगात देकर सबका ध्यान खींच लिया है।

तेलंगाना में कर्मचारियों को सीधा फायदा

तेलंगाना सरकार ने राज्य सड़क परिवहन निगम (TGSRTC) के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस बढ़ोतरी के बाद कुल डीए 50.7% से बढ़कर 52.8% हो गया है। इस फैसले का लाभ करीब 38 हजार कर्मचारियों को मिलेगा, जिससे उनकी टेक-होम सैलरी में सीधा इजाफा होगा।

जनवरी 2026 से लागू, मिलेगा एरियर भी

सरकार ने यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू की है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया (एरियर) भी दिया जाएगा। हालांकि, एकमुश्त भुगतान के बजाय इसे चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा, ताकि निगम पर वित्तीय दबाव न बढ़े। वहीं, एरियर का भुगतान किस्तों में होगा।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इंतजार

जहां तेलंगाना के कर्मचारियों को राहत मिल गई है, वहीं केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी अब भी डीए बढ़ोतरी के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग भी की जा रही है। पिछले वर्षों के रुझान को देखें तो आमतौर पर मार्च या अप्रैल में डीए बढ़ोतरी की घोषणा हो जाती है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी जल्द ही केंद्र सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

यूपी में ये रेल लाइन होगी डबल, इन जिलों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार रेलवे ने बरेली से चंदौसी होते हुए अलीगढ़ तक रेल लाइन के दोहरीकरण की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इस परियोजना के लिए सर्वे कार्य शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे आने वाले समय में इस पूरे रूट पर यात्रा और अधिक सुगम हो जाएगी।

दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट

रेलवे की योजना के अनुसार इस महत्वपूर्ण परियोजना को दो हिस्सों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में बरेली से चंदौसी तक और दूसरे चरण में चंदौसी से अलीगढ़ के बीच विस्तृत सर्वे किया जाएगा। सर्वे के लिए करोड़ों रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया है, जिससे काम में तेजी आने की उम्मीद है।

सफर का समय होगा कम

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बरेली और शाहजहांपुर से अलीगढ़ की ओर जाने वाली ट्रेनों को मुरादाबाद होकर नहीं जाना पड़ेगा। इससे यात्रा समय में करीब डेढ़ से दो घंटे की कमी आ सकती है। साथ ही, लखनऊ-दिल्ली मुख्य रूट पर ट्रैफिक दबाव भी कम होगा और एक वैकल्पिक हाई-स्पीड मार्ग तैयार होगा।

रोजा जंक्शन पर फ्लाईओवर

रेल संचालन को और बेहतर बनाने के लिए रोजा जंक्शन के आसपास डबल फ्लाईओवर बनाने की योजना भी तैयार की गई है। इसके सर्वे के लिए अलग से बजट निर्धारित किया गया है। इस फ्लाईओवर के बनने से ट्रेनों की आवाजाही और सुचारू होगी।

अन्य रूट पर भी फोकस

मुरादाबाद से चंदौसी के बीच ट्रैक दोहरीकरण की योजना पर भी काम तेज किया जा रहा है। इस रूट के सर्वे के लिए भी बजट का प्रावधान किया गया है। इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ट्रेनें बिना रुके तेज गति से अपने गंतव्य की ओर बढ़ सकेंगी। 

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सभी परियोजनाओं के सर्वे कार्य जल्द पूरे कर लिए जाएंगे और रिपोर्ट तैयार कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस पूरे मास्टरप्लान के लागू होने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा और रेल नेटवर्क पहले से अधिक आधुनिक और तेज हो जाएगा।

खुशखबरी का ट्रिपल डोज! यूपी में 3 बंपर भर्ती, युवाओं के चेहरे पर खुशी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका सामने आया है। एक साथ तीन बड़ी भर्तियों के ऐलान ने रोजगार की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगा दी है। खास बात यह है कि इन भर्तियों में 10वीं और 12वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को फायदा मिलने वाला है।

1. फायरमैन भर्ती: 12वीं पास के लिए मौका

Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission ने फायरमैन के 170 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 9 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और 29 जून 2026 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास अवसर है जो कम योग्यता में सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं।

2. GIMS में नॉन-टीचिंग पदों पर भर्ती

Government Institute of Medical Sciences ने नॉन-टीचिंग स्टाफ के तहत लैब टेक्नीशियन और ओटी टेक्नीशियन के 50 पदों पर भर्ती निकाली है। इसका नोटिफिकेशन 10 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। हेल्थ सेक्टर में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक अच्छा मौका माना जा रहा है।

3. आबकारी सिपाही के 700+ पद

एक और बड़ी भर्ती के तहत Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission ने 722 आबकारी सिपाही (Excise Constable) पदों पर आवेदन मांगे हैं। इस भर्ती के लिए आवेदन 4 जून 2026 से शुरू होकर 24 जून 2026 तक किए जा सकेंगे। इसमें 10वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा।

खुशखबरी का धमाका! बिहार में 4 बड़ी भर्तियां शुरू, नौकरी का सुनहरा मौका

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक साथ कई बड़े मौके सामने आए हैं। अलग-अलग विभागों में निकली भर्तियों ने हजारों उम्मीदवारों के लिए रोजगार के दरवाजे खोल दिए हैं। खास बात यह है कि इन भर्तियों में मेडिकल, तकनीकी और न्यायिक क्षेत्र तक के अवसर शामिल हैं, जिससे हर वर्ग के अभ्यर्थियों को फायदा मिल सकता है।

1. IGIMS में जूनियर रेजिडेंट के पद

Indira Gandhi Institute of Medical Sciences में जूनियर रेजिडेंट (नॉन-एकेडमिक) के पदों पर भर्ती निकाली गई है। कुल 18 पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तारीख पर सीधे इंटरव्यू में शामिल हो सकते हैं। यह मौका मेडिकल क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए खास है।

2. BTSC में लैबोरेटरी असिस्टेंट की बंपर वैकेंसी

Bihar Technical Service Commission ने 1091 लैबोरेटरी असिस्टेंट पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और तय तिथि तक आवेदन किए जा सकते हैं। टेक्निकल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों के लिए यह बड़ी भर्ती मानी जा रही है।

3. पटना हाईकोर्ट में टेक्निकल असिस्टेंट भर्ती

Patna High Court ने टेक्निकल असिस्टेंट (ग्रुप-सी) के 53 पदों पर भर्ती का ऐलान किया है। यह पद 7वें वेतन आयोग के लेवल-5 के तहत आते हैं, जिसमें अच्छा वेतन और भत्ते मिलते हैं। आईटी और तकनीकी क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए यह शानदार अवसर है।

4. BPSC सिविल जज भर्ती

Bihar Public Service Commission ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 173 पदों पर भर्ती निकाली है। यह भर्ती न्यायिक सेवा में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। आवेदन प्रक्रिया पहले से जारी है और निर्धारित तिथि तक अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं।