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बिहार के लिए खुशखबरी! इस जिले में लगेगा लिथियम-आयन बैटरी प्लांट, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

पटना: बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ाने की कोशिशों को एक और बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत गोपालगंज जिले में लिथियम-आयन बैटरी निर्माण संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह परियोजना न केवल आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

हथुआ औद्योगिक क्षेत्र में मिलेगी फैक्ट्री को जगह

प्रस्तावित बैटरी प्लांट के लिए हथुआ औद्योगिक क्षेत्र के तीसरे चरण में पांच एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। जमीन आवंटित होने के बाद कंपनी अब परियोजना की अगली तैयारियों में जुट गई है। प्रशासन का कहना है कि आवश्यक स्वीकृतियां समय पर पूरी कराकर निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा उत्पादन

इस परियोजना को एक साथ नहीं बल्कि चार चरणों में विकसित किया जाएगा। प्रत्येक चरण पूरा होने के साथ उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी की जाएगी। अंतिम चरण के बाद प्रतिदिन हजारों लिथियम-आयन बैटरियों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो निर्माण कार्य इस वर्ष शुरू हो सकता है और वर्ष 2027 में उत्पादन शुरू होने की संभावना है।

कई क्षेत्रों की जरूरतें होंगी पूरी

इस इकाई में तैयार होने वाली बैटरियों का उपयोग केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। मोबाइल फोन, इनवर्टर, ऊर्जा भंडारण प्रणाली और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी यहां बैटरियां बनाई जाएंगी। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए इस परियोजना को रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

युवाओं को मिलेगा रोजगार

फैक्ट्री के निर्माण और संचालन के दौरान बड़ी संख्या में तकनीकी और गैर-तकनीकी नौकरियों के अवसर बनने की संभावना है। इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग, मशीनों की देखरेख, सप्लाई और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से गोपालगंज के व्यापारिक माहौल को भी मजबूती मिल सकती है।

सोने से पहले गर्म दूध पीने से शरीर को मिलते हैं ये 5 अहम फायदे

हेल्थ डेस्क: दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है, क्योंकि इसमें शरीर के लिए आवश्यक कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रात में सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध पीना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-डी (फोर्टिफाइड दूध में), विटामिन-बी12 और अन्य पोषक तत्व शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं।

1. अच्छी और सुकूनभरी नींद में मिल सकती है मदद

गर्म दूध पीने से शरीर को आराम महसूस हो सकता है। दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन नामक अमीनो एसिड और अन्य पोषक तत्व शरीर को रिलैक्स करने में भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि कई लोगों को रात में गर्म दूध पीने के बाद बेहतर नींद आने का अनुभव होता है।

2. हड्डियों और दांतों को मिलती है मजबूती

दूध कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों और दांतों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। यदि दूध विटामिन-डी से फोर्टिफाइड हो, तो कैल्शियम का अवशोषण और बेहतर हो सकता है। नियमित और संतुलित मात्रा में दूध का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

3. मांसपेशियों की रिकवरी में हो सकता है लाभ

दिनभर की शारीरिक गतिविधियों के बाद शरीर को प्रोटीन की आवश्यकता होती है। दूध में मौजूद उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और रिकवरी में मदद कर सकता है। यही कारण है कि कई फिटनेस विशेषज्ञ भी संतुलित आहार के हिस्से के रूप में दूध को शामिल करने की सलाह देते हैं।

4. पेट देर तक भरा हुआ महसूस हो सकता है

रात में गर्म दूध पीने से कुछ लोगों को देर तक भूख नहीं लगती। इसमें मौजूद प्रोटीन और प्राकृतिक वसा पेट भरा होने का एहसास दिलाने में मदद कर सकते हैं। इससे देर रात अनावश्यक स्नैकिंग की आदत पर भी नियंत्रण रखने में सहायता मिल सकती है।

5. शरीर को मिलते हैं जरूरी पोषक तत्व

दूध में कैल्शियम के अलावा प्रोटीन, पोटैशियम, फॉस्फोरस, विटामिन-बी12 और राइबोफ्लेविन जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में दूध का सेवन शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकता है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! जुलाई से 63% हो सकता है DA

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के लेबर ब्यूरो द्वारा मई 2026 का औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) जारी किए जाने के बाद जुलाई 2026 से महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना मजबूत होती दिखाई दे रही है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो वर्तमान 60 प्रतिशत डीए बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

63 प्रतिशत डीए मिलने की संभावना क्यों बढ़ी?

महंगाई भत्ते की गणना AICPI-IW के छह माह के औसत आंकड़ों के आधार पर की जाती है। अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 से डीए में लगभग 3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जून 2026 के सूचकांक के जारी होने के बाद ही अंतिम गणना पूरी होगी। यदि जून के आंकड़ों में बड़ी गिरावट नहीं आती है, तो 63 प्रतिशत डीए की संभावना और मजबूत हो सकती है।

सरकार कब करेगी आधिकारिक घोषणा?

केंद्र सरकार आमतौर पर जनवरी से लागू होने वाले महंगाई भत्ते की घोषणा मार्च या अप्रैल में करती है, जबकि जुलाई से लागू होने वाले डीए को सितंबर या अक्टूबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलती है। ऐसे में यदि जुलाई 2026 से डीए बढ़ाया जाता है, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को बढ़ी हुई दर का लाभ प्रभावी तिथि से मिलेगा। आधिकारिक घोषणा बाद में होने पर भी उन्हें बकाया राशि (एरियर) का भुगतान किया जाएगा।

करीब एक करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ

महंगाई भत्ते में संभावित बढ़ोतरी का लाभ केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स सहित लगभग एक करोड़ लाभार्थियों को मिल सकता है। डीए बढ़ने से कर्मचारियों के मासिक वेतन और पेंशनर्स की आय में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे महंगाई के बढ़ते प्रभाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

अंतिम फैसला अभी बाकी

फिलहाल उपलब्ध आर्थिक आंकड़े डीए में वृद्धि के पक्ष में संकेत दे रहे हैं, लेकिन इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। जून 2026 के CPI-IW आंकड़े जारी होने और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही नई दर आधिकारिक रूप से घोषित की जाएगी।

गुरु आदित्य राजयोग से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, धन और सफलता के बनेंगे योग

Guru Aditya Rajyog 2026: ज्योतिष के अनुसार जब ग्रहों के राजा सूर्य और देवगुरु बृहस्पति एक ही राशि में विराजमान होते हैं, तब गुरु आदित्य राजयोग का निर्माण होता है। इस वर्ष 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से गुरु स्थित हैं। इस युति को ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह राजयोग कई राशियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि चार राशियों के लिए इसका प्रभाव विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। आइए जानते हैं किन राशियों को इस योग से अधिक शुभ फल मिलने की संभावना है।

मेष राशि

गुरु आदित्य राजयोग मेष राशि के जातकों के लिए आर्थिक और पारिवारिक मामलों में शुभ संकेत दे सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है, जबकि कारोबारियों को नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और संपत्ति से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए यह योग आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा में वृद्धि का संकेत माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और मेहनत का अच्छा परिणाम प्राप्त होने की संभावना है। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभदायक सौदे मिल सकते हैं। सामाजिक सम्मान बढ़ेगा और आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हो सकती है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ मिलने वाला माना जा रहा है। करियर में उन्नति के नए अवसर मिल सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। विदेश यात्रा या लंबी दूरी की यात्रा के योग भी बन सकते हैं। निवेश से जुड़े मामलों में सोच-समझकर लिया गया निर्णय लाभकारी साबित हो सकता है।

मीन राशि

मीन राशि पर गुरु का विशेष प्रभाव होने के कारण यह राजयोग शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और लंबे समय से अटके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। व्यवसाय में विस्तार के अवसर मिलेंगे, जबकि नौकरी करने वालों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि का लाभ मिल सकता है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और दांपत्य जीवन भी सुखद बना रहेगा।

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी! 13 स्टेशनों पर लगेगा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे अपने सिग्नलिंग नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (SECR) के रायपुर मंडल के 13 रेलवे स्टेशनों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने की मंजूरी दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 226 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नई तकनीक लागू होने के बाद रेल संचालन अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल बनने की उम्मीद है।

13 स्टेशनों पर बदलेगा सिग्नलिंग सिस्टम

इस परियोजना के तहत दुर्ग-तारोकी रेलखंड के मारौडा, रिसमा, गुंडार्देही, लाटाबोर, बालोद, कुसुमकासा, दल्ली राजहरा, गुडम, भानुप्रतापुर, केवटी, अंतागढ़, तारोकी और रायपुर स्टोर डिपो में मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली को हटाकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य इन स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि ट्रेनों का संचालन बिना किसी बाधा के किया जा सके।

क्या है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम?

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग रेलवे की उन्नत सिग्नलिंग तकनीक है, जो ट्रेनों के लिए सुरक्षित मार्ग तय करने और सिग्नलों का स्वचालित नियंत्रण करने का काम करती है। यह प्रणाली विभिन्न ट्रैक और सिग्नलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करती है, जिससे किसी भी प्रकार की टकराव या संचालन संबंधी त्रुटि की संभावना काफी कम हो जाती है। इस तकनीक में अधिकांश प्रक्रियाएं स्वचालित होती हैं, जिससे मानवीय गलती की आशंका भी घटती है और पूरे नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ती है।

यात्रियों को मिलेगा सुरक्षित और सुगम सफर

नई प्रणाली लागू होने के बाद ट्रेनों के समय पर संचालन में सुधार होने की संभावना है। यदि किसी कारणवश सिग्नलिंग सिस्टम में तकनीकी समस्या आती है, तो इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की मदद से उसका पता तेजी से लगाया जा सकेगा और मरम्मत भी पहले की तुलना में कम समय में संभव होगी। इसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि ट्रेनों के अनावश्यक विलंब और परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी आने की उम्मीद है।

बिहार सरकार का फैसला, 12 जिलों के किसानों के लिए खुशखबरी

पटना: बिहार सरकार ने बागवानी फसलों की बेहतर सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राज्य में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार करने के लिए सरकार 12 जिलों में विशेष योजना लागू कर रही है। इस योजना के तहत नए कोल्ड स्टोरेज के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा इकाइयों को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

50 प्रतिशत तक मिलेगा सरकारी अनुदान

कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय की ओर से संचालित राज्य कोल्ड स्टोरेज योजना के तहत इच्छुक किसान, उद्यमी, कंपनियां और फर्में अनुदान का लाभ उठा सकती हैं। योजना के अंतर्गत कोल्ड स्टोरेज में सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने की लागत पर 50 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना में अधिकतम 35 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 17.50 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।

सौर ऊर्जा से संचालित होंगे 50 कोल्ड स्टोरेज

राज्य सरकार का लक्ष्य मौजूदा लगभग 50 कोल्ड स्टोरेज इकाइयों को सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली से जोड़ना है। इससे बिजली पर निर्भरता कम होगी और भंडारण की लागत घटेगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि अनुदान प्राप्त करने वाले कोल्ड स्टोरेज संचालकों को किसानों को वर्तमान दरों की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत कम शुल्क पर भंडारण सुविधा उपलब्ध करानी होगी।

इन 12 जिलों को मिलेगा प्राथमिकता का लाभ

यह योजना फिलहाल उन जिलों के लिए लागू की गई है, जहां कोल्ड स्टोरेज की सुविधा अपेक्षाकृत कम है। चयनित जिलों में मधुबनी, नवादा, औरंगाबाद, बांका, सहरसा, जमुई, मुंगेर, जहानाबाद, लखीसराय, शेखपुरा, अरवल और शिवहर शामिल हैं।

सीएम सम्राट का बड़ा फैसला: बिहार के 12 जिलों के लिए खुशखबरी

पटना: बिहार में शहरी विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी पहल की है। सरकार ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना को आगे बढ़ाते हुए एक अहम वित्तीय समझौता किया है। इस परियोजना का उद्देश्य तेजी से बढ़ती शहरी आबादी के लिए बेहतर आवास, आधुनिक बुनियादी सुविधाएं और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

एक लाख करोड़ रुपये के वित्तपोषण का किया गया समझौता

राज्य सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग तथा हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HUDCO) के बीच एक लाख करोड़ रुपये तक के दीर्घकालिक वित्तपोषण को लेकर समझौता हुआ है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में दोनों संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने एमओयू का आदान-प्रदान किया।

तीन लाख एकड़ से अधिक भूमि पर विकसित होंगे नए शहर

प्रस्तावित योजना के तहत राज्य में तीन लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में 12 आधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इन टाउनशिप को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाएगा, जहां चौड़ी सड़कें, बेहतर परिवहन व्यवस्था, हरित क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण आवास और आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

किसानों की सहमति और भागीदारी पर रहेगा जोर

इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता लैंड पुलिंग मॉडल को अपनाना है। इसके माध्यम से किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का कहना है कि जिन किसानों द्वारा मुआवजे का विकल्प चुना जाएगा, उन्हें तय समयसीमा के भीतर भुगतान करने का प्रयास किया जाएगा।

विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होंगी नई टाउनशिप

सरकार के अनुसार इन आधुनिक टाउनशिप में नागरिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्रस्तावित योजनाओं में आधुनिक सड़क नेटवर्क, पेयजल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम, निर्बाध बिजली, पार्क और हरित क्षेत्र, स्कूल, अस्पताल, व्यावसायिक केंद्र तथा सामाजिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास शामिल होगा।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। आयोग ने मंत्रालयों, विभागों और अन्य संबंधित संस्थाओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम सभी पक्षों से विस्तृत और सटीक आंकड़े जुटाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अब 31 जुलाई तक देना होगा जरूरी डेटा

आठवें वेतन आयोग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित संस्थानों को अब 31 जुलाई 2026 तक आवश्यक जानकारी आयोग के ऑनलाइन कलेक्शन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। 

आयोग के लिए क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?

वेतन आयोग किसी भी नई सिफारिश को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न विभागों से कर्मचारियों की संख्या, वेतन संरचना, भत्तों, पेंशन और अन्य प्रशासनिक पहलुओं से जुड़ा विस्तृत डेटा जुटाता है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आयोग वित्तीय प्रभाव का आकलन करता है और उसके बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करता है। इसलिए डेटा संग्रह की प्रक्रिया को आयोग के काम का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

केवल ऑनलाइन पोर्टल पर ही स्वीकार होगा डेटा

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी विभागों को निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही जानकारी भेजनी होगी। ई-मेल, पीडीएफ, हार्ड कॉपी या किसी अन्य माध्यम से भेजे गए दस्तावेजों पर विचार नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी सूचनाओं को एक समान प्रारूप में एकत्र करना और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

जल्दबाजी नहीं, सटीक रिपोर्ट पर है आयोग का फोकस

जानकारों का मानना है कि समय सीमा बढ़ाए जाने का मतलब यह नहीं है कि आयोग का काम रुक गया है, बल्कि आयोग चाहता है कि सभी विभागों से पूरी और सही जानकारी प्राप्त हो। अधूरी जानकारी के आधार पर तैयार रिपोर्ट भविष्य में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि आयोग किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले सभी संबंधित संस्थानों का डेटा एकत्र करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

बिहार सरकार का नया आदेश, जमीन मालिकों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

Patna: बिहार सरकार ने राज्य के लाखों जमीन मालिकों और किसानों के हित में एक अहम निर्णय लिया है। अब जमाबंदी में किसी भी प्रकार की त्रुटि को ठीक कराने के लिए लोगों को ऑनलाइन आवेदन कराने के नाम पर अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों और अंचल कार्यालयों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि RTPS काउंटर पर जमाबंदी सुधार की पूरी प्रक्रिया निशुल्क होगी और किसी भी आवेदक को निजी साइबर कैफे भेजना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

RTPS काउंटर पर बिना शुल्क होगा आवेदन

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के नए निर्देश के बाद RTPS केंद्रों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। यदि कोई व्यक्ति जमाबंदी में सुधार के लिए आवेदन लेकर पहुंचता है तो संबंधित कर्मी वहीं उसका ऑनलाइन आवेदन दर्ज करेंगे और जरूरी दस्तावेज भी अपलोड करेंगे। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि सरकारी सेवाएं आम लोगों को बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के उपलब्ध होनी चाहिए।

इन मामलों में कराया जा सकेगा सुधार

जमाबंदी से जुड़े कई प्रकार के सुधार अब पहले की तरह आवेदन के माध्यम से कराए जा सकेंगे। यदि किसी व्यक्ति के नाम में त्रुटि है, खाता या खेसरा संख्या गलत दर्ज है, भूमि विवरण में गलती है या कोई पुरानी जमाबंदी ऑनलाइन रिकॉर्ड में शामिल नहीं हुई है, तो उसके लिए आवेदन किया जा सकता है। आवश्यकतानुसार अन्य राजस्व अभिलेखों में भी संशोधन कराया जा सकेगा।

साइबर कैफे भेजना पड़ेगा महंगा

विभाग ने साफ कर दिया है कि RTPS केंद्र पर मौजूद कर्मचारी यदि किसी आवेदक को निजी साइबर कैफे भेजते हैं या आवेदन लेने से मना करते हैं तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। सरकार चाहती है कि नागरिकों को एक ही स्थान पर पूरी सुविधा मिले और उन्हें अनावश्यक खर्च या परेशानियों का सामना न करना पड़े।

ग्रामीण इलाकों के लोगों को राहत

अब तक गांवों से आने वाले कई लोगों को आवेदन भरने के लिए साइबर कैफे का सहारा लेना पड़ता था, जहां उन्हें अतिरिक्त पैसे देने पड़ते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह खर्च पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों का समय भी बचेगा और सरकारी सेवा प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगा।

बिहार में बनेगी अंडरग्राउंड रेल लाइन , इन जिलों के लिए खुशखबरी

Patna: बिहार के लिए एक बड़ी और रणनीतिक महत्व की परियोजना पर काम तेज होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील चिकन नेक कॉरिडोर को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए अंडरग्राउंड डबल रेलवे लाइन विकसित करने की योजना बनाई है। 

करीब 51 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार के कटिहार और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा। इससे राज्य में बेहतर रेल संपर्क के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।

कटिहार और किशनगंज को मिलेगा सीधा लाभ

प्रस्तावित रेलवे लाइन की कुल लंबाई लगभग 170 किलोमीटर होगी। इसमें करीब 45.68 किलोमीटर हिस्सा बिहार में और शेष पश्चिम बंगाल में विकसित किया जाएगा। यह रेल मार्ग पश्चिम बंगाल के कुमेदपुर से शुरू होकर आमबाड़ी फालाकाटा तक जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है चिकन नेक कॉरिडोर

चिकन नेक कॉरिडोर, जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है, देश के पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भारत से जोड़ने वाला बेहद संकरा भूभाग है। इसकी चौड़ाई कई स्थानों पर केवल 20 से 25 किलोमीटर तक है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के निकट होने के कारण यह इलाका सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

बिहार में निवेश को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना के पूरा होने से किशनगंज, ठाकुरगंज, गलगलिया और आसपास के क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। बेहतर रेल नेटवर्क से माल ढुलाई आसान होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

2033 तक पूरा करने का लक्ष्य

परियोजना के लिए डिजाइन और भू-तकनीकी सर्वेक्षण का कार्य पहले ही शुरू किया जा चुका है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को वर्ष 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय आधारभूत ढांचे को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

बिहार के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर! प्रमोशन को लेकर आया नया अपडेट

Bihar Teacher Promotion Update 2026: बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए प्रोन्नति (प्रमोशन) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण किए बिना शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ नहीं मिल सकेगा। शिक्षा विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत सभी शिक्षकों की टीईटी योग्यता का सत्यापन कराया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी कार्रवाई

जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) की ओर से सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के शिक्षकों की टीईटी से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पालन के तहत की जा रही है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रमोशन केवल उन्हीं शिक्षकों को मिले जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।

प्रमोशन के लिए TET होगा अनिवार्य

नए निर्देश के अनुसार, शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए बिना अब प्रोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। विशेष रूप से 1 सितंबर 2025 के बाद जिन शिक्षकों को प्रमोशन मिला है या आगे मिलेगा, उनके टीईटी प्रमाणपत्र और पात्रता की जांच की जाएगी। यदि कोई शिक्षक प्रमोशन चाहता है, तो उसे टीईटी उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा। विभाग इसी आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।

पांच वर्ष से कम सेवा बचे शिक्षकों को राहत

शिक्षा विभाग ने सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों को कुछ राहत भी दी है। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय बचा है, वे टीईटी पास किए बिना अपनी सेवा जारी रख सकते हैं। हालांकि यदि ऐसे शिक्षक प्रमोशन का लाभ लेना चाहते हैं, तो उनके लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा।

पांच वर्ष से अधिक सेवा वाले शिक्षकों के लिए सख्त नियम

जिन शिक्षकों की सेवा अवधि अभी पांच वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें न्यायालय के निर्देशों के अनुसार निर्धारित समय के भीतर टीईटी पास करना होगा। यदि कोई शिक्षक तय अवधि में टीईटी उत्तीर्ण नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में संबंधित शिक्षकों को समय रहते परीक्षा की तैयारी करने की सलाह दी जा रही है।

14 जुलाई को गुरु होंगे अस्त, 3 राशियों के जीवन में आएंगे शुभ बदलाव, रुके काम होंगे पूरे

Guru Asta 2026: वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति (गुरु) को ज्ञान, भाग्य, धन, विवाह, संतान और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। जब गुरु की स्थिति में परिवर्तन होता है तो इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर किसी न किसी रूप में देखने को मिलता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 14 जुलाई 2026 को गुरु अस्त होने जा रहे हैं। कुछ राशियों के लिए यह समय नए अवसर, अधूरे कार्यों की पूर्ति और आर्थिक मजबूती के संकेत लेकर आ सकता है।

मेष राशि

गुरु अस्त का प्रभाव मेष राशि के जातकों के लिए कई सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आने के संकेत हैं। यदि किसी सरकारी काम, कानूनी प्रक्रिया या महत्वपूर्ण योजना में देरी हो रही थी, तो उसमें आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है और नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना रहेगी। व्यापारियों के लिए नए ग्राहकों और लाभदायक सौदों के योग बन सकते हैं।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम देने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से चली आ रही परेशानियों में कमी आएगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। यदि आप नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो अच्छे अवसर मिल सकते हैं। व्यवसाय करने वालों को निवेश का लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर लिए गए निर्णय भविष्य में फायदा पहुंचा सकते हैं।

धनु राशि

धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु ग्रह हैं, इसलिए गुरु से जुड़े परिवर्तन इस राशि पर विशेष प्रभाव डालते हैं। 14 जुलाई के बाद धनु राशि के जातकों के लिए कई क्षेत्रों में प्रगति के संकेत मिल सकते हैं। करियर में नई संभावनाएं बनेंगी और लंबे समय से रुका प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है। व्यापार में विस्तार की योजना सफल हो सकती है और आय में वृद्धि के योग बनेंगे।

शनि का चलेगा जादू! 4 जुलाई को 4 राशियों पर बरसेगी किस्मत, धन और तरक्की

Shani Rashifal 4 July 2026: ज्योतिष में शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। जब शनि की स्थिति और दृष्टि शुभ होती है तो व्यक्ति को मेहनत का पूरा फल मिलने लगता है। 4 जुलाई का दिन भी कुछ राशियों के लिए विशेष माना जा रहा है। इस दिन शनि के शुभ प्रभाव से चार राशियों के जातकों को करियर, धन, कारोबार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

वृषभ राशि

4 जुलाई का दिन वृषभ राशि के जातकों के लिए आर्थिक दृष्टि से शुभ संकेत लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने की संभावना बनेगी। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और कार्यस्थल पर उनकी मेहनत की सराहना हो सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों को किसी नई डील या निवेश से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा और किसी शुभ समाचार से घर का वातावरण खुशहाल हो सकता है। 

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए शनि का शुभ प्रभाव आत्मविश्वास और सफलता लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ पदोन्नति या वेतन वृद्धि से जुड़ी सकारात्मक खबर मिल सकती है। व्यापारियों के लिए भी लाभ का समय रहेगा। पुराने ग्राहकों से अच्छा सहयोग मिलेगा और आय में वृद्धि के संकेत हैं।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए 4 जुलाई नए अवसरों का दिन साबित हो सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। यदि आप नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं तो अच्छी खबर मिलने के योग हैं। आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी और निवेश से लाभ मिलने की संभावना रहेगी। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी और रिश्तों में चल रही गलतफहमियां दूर हो सकती हैं।

मकर राशि

मकर राशि शनि की अपनी राशि मानी जाती है, इसलिए 4 जुलाई का दिन इस राशि के लोगों के लिए विशेष लाभदायक रह सकता है। नौकरीपेशा लोगों को मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा और अधिकारियों का विश्वास बढ़ेगा। रुके हुए सरकारी कार्य पूरे होने की संभावना है। व्यापार में अच्छा मुनाफा मिल सकता है और नई साझेदारी लाभदायक साबित हो सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा बचत करने के नए अवसर मिलेंगे।

खुशखबरी पर खुशखबरी, यूपी में आई 3 नई भर्ती, युवाओं के लिए मौका

UP Government Jobs 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य में एक साथ तीन महत्वपूर्ण भर्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने जहां पीसीएस 2026 परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी किया है, वहीं वन विभाग में 708 पदों पर फॉरेस्ट गार्ड भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसके अलावा फूड सेफ्टी ऑफिसर के पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

1. UPPSC PCS 2026: करीब 500 पदों पर होगी भर्ती

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने संयुक्त राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (PCS) परीक्षा 2026 के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के माध्यम से विभिन्न विभागों के ग्रुप-ए और ग्रुप-बी राजपत्रित पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। आयोग के अनुसार लगभग 500 पदों पर भर्ती की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया 25 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। आवेदन में संशोधन की सुविधा 3 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना जरूरी है। आयु सीमा 1 जुलाई 2026 के अनुसार 21 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु में छूट मिलेगी।

2. वन विभाग में 708 फॉरेस्ट गार्ड पदों पर भर्ती

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए भी अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने 708 फॉरेस्ट गार्ड पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 30 जून 2026 से शुरू हो चुके हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।  वन विभाग की यह भर्ती उन युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर मानी जा रही है जो कम शैक्षणिक योग्यता के साथ सरकारी नौकरी हासिल करना चाहते हैं। चयन प्रक्रिया आयोग द्वारा तय नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।

3. फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती भी शुरू

यूपीपीएससी ने फूड सेफ्टी ऑफिसर के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। खाद्य सुरक्षा विभाग में नौकरी करने के इच्छुक उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन 25 जून 2026 से शुरू हो चुके हैं और 27 जुलाई 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं। इस पद के लिए संबंधित विषय में निर्धारित तकनीकी योग्यता, जैसे बी.टेक/बी.ई. या आयोग द्वारा तय अन्य पात्रता होना आवश्यक है।

8वें वेतन आयोग को लेकर हलचल, नए वेतनमान से पहले सामने आईं 5 बड़ी मांगें

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी गतिविधियां तेज हो गई हैं। आयोग विभिन्न राज्यों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों, संस्थानों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर रहा है ताकि नई वेतन संरचना और सेवा संबंधी सुधारों पर व्यापक विचार किया जा सके। इसी क्रम में कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने कई अहम मांगें रखी हैं।

आयोग के सामने रखी गईं 5 प्रमुख मांगें

1. पुरानी पेंशन योजना की बहाली

कर्मचारी संगठनों ने नई पेंशन व्यवस्था के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अधिक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

2. हाउस रेंट अलाउंस में संशोधन

महंगाई और बढ़ते आवास खर्च को देखते हुए विभिन्न श्रेणी के शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में बढ़ोतरी की मांग की गई है। साथ ही कर्मचारियों के लिए आवास और अन्य कल्याणकारी ऋण सुविधाओं को दोबारा शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है।

3. वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अलग-अलग विभागों और पे लेवल में मौजूद वेतन संबंधी असमानताओं को समाप्त किया जाए। इसके अलावा पूरे सेवा काल में अधिक वित्तीय उन्नयन (Financial Upgradation) की व्यवस्था करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

4. स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाने पर जोर

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। संगठनों का मानना है कि चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और बेहतर कवरेज कर्मचारियों के हित में होगा।

5. संविदा कर्मचारियों के लिए ठोस नीति बनाने की मांग

कर्मचारी संगठनों ने संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण, सामाजिक सुरक्षा और सेवा लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी आयोग के सामने रखी है।

लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर आयोग पर

8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ने की संभावना है। ऐसे में कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को मजबूती से आयोग के सामने रख रहे हैं, जबकि सरकार सभी सुझावों का अध्ययन करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

बिहार के छात्रों को बड़ी खुशखबरी, छात्रवृत्ति के लिए 15 से आवेदन

पटना: बिहार में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हजारों छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य के शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन की तारीख घोषित कर दी है। विभाग के अनुसार, पात्र विद्यार्थी 15 जुलाई 2026 से पीएमएस (Post Matric Scholarship) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

इन छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए किए जा सकेंगे आवेदन

इस वर्ष कई श्रेणियों के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इनमें शामिल हैं अनुसूचित जाति (SC) पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, अनुसूचित जनजाति (ST) पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री एससी-एसटी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, पिछड़ा वर्ग (BC) पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति। इन सभी योजनाओं के लिए पात्र अभ्यर्थी निर्धारित समय से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

आवेदन से पहले तैयार रखें ये जरूरी दस्तावेज

शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को सलाह दी है कि आवेदन शुरू होने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें, जिससे आवेदन प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सके। आवेदन के लिए मुख्य दस्तावेज इस प्रकार हैं आय प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, आवासीय प्रमाण-पत्र, बोनाफाइड (शैक्षणिक संस्थान का प्रमाण-पत्र),

पूरी आवेदन प्रक्रिया रहेगी ऑनलाइन

छात्रवृत्ति के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। विद्यार्थियों को पीएमएस पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करना होगा, आवश्यक जानकारी भरनी होगी और निर्धारित प्रारूप में सभी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। आवेदन जमा करने से पहले सभी विवरणों की अच्छी तरह जांच करना भी जरूरी होगा।

शनि देव बदलेंगे इन 5 राशियों का भाग्य, धन और तरक्की के शुभ संकेत

Shani Rashifal: वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्म, न्याय और अनुशासन का ग्रह माना जाता है। जब शनि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुभ प्रभाव देते हैं तो मेहनत का पूरा फल मिलने लगता है, करियर में नई ऊंचाइयां हासिल होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आने वाला दिन कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से अनुकूल रहने के संकेत दे रहा है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रह सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बनेगी। नौकरी करने वालों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है, जबकि व्यापारियों को नए ग्राहकों से लाभ मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ भविष्य की योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए शनि का प्रभाव आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन रहे हैं। व्यापार में लाभदायक सौदे हो सकते हैं और निवेश से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों को करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। व्यवसाय में विस्तार की योजना सफल हो सकती है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए यह समय उन्नति के संकेत लेकर आ सकता है। नौकरी में अच्छे अवसर मिल सकते हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभदायक निर्णय लेने का मौका मिलेगा। सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हो सकती है।

मकर राशि

मकर राशि पर शनि का विशेष प्रभाव माना जाता है। इस राशि के लोगों को मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है। करियर में स्थिरता आएगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। नए प्रोजेक्ट या व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो परिस्थितियां अनुकूल रह सकती हैं। परिवार के साथ संबंध भी मधुर बने रहेंगे।

यूपी में ये 3 हाईवे होंगे सिक्सलेन, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में तेजी से बढ़ रहे यातायात दबाव को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण की तैयारी शुरू कर दी है। इस योजना के तहत तीन फोर लेन हाईवे को सिक्स लेन में बदला जाएगा, जबकि एक दो लेन मार्ग को फोर लेन बनाया जाएगा।

इन तीन हाईवे को बनाया जाएगा सिक्स लेन

एनएचएआई की योजना के अनुसार निम्नलिखित तीन प्रमुख मार्गों का विस्तार किया जाएगा:

लखनऊ-सीतापुर हाईवे (लगभग 65 किलोमीटर)

झांसी-उरई हाईवे (लगभग 135 किलोमीटर)

उरई-बारा हाईवे (लगभग 70 किलोमीटर)

इन मार्गों पर लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक को देखते हुए इन्हें छह लेन में विकसित किया जाएगा, जिससे वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और यात्रा का समय कम लगेगा।

बाराबंकी-बहराइच हाईवे होगा फोर लेन

इसके अलावा बाराबंकी-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग का भी विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में दो लेन वाले इस करीब 102 किलोमीटर लंबे मार्ग को चार लेन में बदला जाएगा। यह सड़क उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण कस्बों और शहरों को जोड़ती है और भविष्य में क्षेत्रीय संपर्क को और बेहतर बनाएगी।

जाम से मिलेगी राहत, सफर होगा आसान

हाईवे चौड़े होने से सबसे बड़ा फायदा ट्रैफिक जाम में कमी के रूप में देखने को मिलेगा। भारी वाहनों और लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी। सड़क क्षमता बढ़ने से दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी और माल परिवहन की गति में सुधार आएगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?

इस योजना का सीधा लाभ लखनऊ, सीतापुर, झांसी, जालौन, कानपुर देहात, बाराबंकी और बहराइच सहित कई जिलों के लोगों को मिलेगा। साथ ही इन मार्गों से जुड़े व्यापारिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ प्राप्त होगा।

यूपी सरकार ने दी बड़ी खुशखबरी, अब इन्हे मिलेंगे ₹3000 प्रतिमाह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित लोगों के हित में एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों और हाफ वे होम में रहने वाले मानसिक दिव्यांग संवासियों के भरण-पोषण के लिए मिलने वाली मासिक अनुदान राशि में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। अब तक मिलने वाले ₹2,000 प्रतिमाह की जगह ₹3,000 प्रतिमाह की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पौष्टिक भोजन और बेहतर देखभाल पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन दिव्यांगजनों का जीवन पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर निर्भर है, उनके लिए गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बढ़ी हुई अनुदान राशि का उद्देश्य इन संस्थानों में रहने वाले लोगों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना है।

हर जिले में लगेंगे सहायक उपकरण वितरण शिविर

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में नियमित रूप से सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि पात्र दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र सहित अन्य आवश्यक उपकरण समय पर उपलब्ध कराए जाएं ताकि उन्हें दैनिक जीवन में सुविधा मिल सके।

श्रवण बाधित बच्चों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान

बैठक में श्रवण बाधित बच्चों की पहचान और उपचार प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कॉक्लियर इंप्लांट कराने वाले बच्चों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे वे सामान्य जीवन की ओर तेजी से आगे बढ़ सकें।

विशेष विद्यालयों में बेहतर शिक्षा की तैयारी

सरकार ने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष विद्यालयों में समयबद्ध तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति पर भी बल दिया है। उद्देश्य यह है कि दिव्यांग विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर प्रशिक्षण और विकास के अवसर मिल सकें।

अन्य कल्याणकारी योजनाएं भी जारी

राज्य सरकार दिव्यांगजनों के लिए कई अन्य योजनाएं भी संचालित कर रही है। इनमें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल का निःशुल्क वितरण, विवाह प्रोत्साहन सहायता, स्वरोजगार के लिए दुकान संचालन योजना तथा राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

LPG सिलेंडर को लेकर बड़ा अपडेट: रसोई गैस उपभोक्ता तुरंत करें ये काम

नई दिल्ली। देशभर के एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के लिए जुलाई महीने की शुरुआत के साथ एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। सरकार और तेल विपणन कंपनियों द्वारा सब्सिडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कुछ नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं ने निर्धारित औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं, उन्हें आने वाले समय में एलपीजी सब्सिडी का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है।

e-KYC की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी

सरकार की ओर से एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए e-KYC को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना और फर्जी या डुप्लीकेट कनेक्शनों पर रोक लगाना है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक आधार आधारित e-KYC नहीं कराया है, उनकी सब्सिडी अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है। इसलिए सभी उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है।

किन लोगों को नहीं मिलती LPG सब्सिडी?

सरकारी नियमों के अनुसार सभी एलपीजी उपभोक्ता सब्सिडी के पात्र नहीं हैं। निम्नलिखित श्रेणियों के लोगों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता:

जिन परिवारों की वार्षिक आय 10 लाख रुपये से अधिक है।

जिन्होंने स्वेच्छा से "गिव इट अप" अभियान के तहत सब्सिडी छोड़ दी है।

जिन उपभोक्ताओं ने आधार लिंकिंग या e-KYC जैसी अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी नहीं की हैं।

यदि कोई उपभोक्ता इन शर्तों के दायरे में आता है, तो उसे सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा।

सरकार ने नियम सख्त क्यों किए?

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी केवल पात्र और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। e-KYC और आधार सत्यापन के माध्यम से फर्जी लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा, जिससे सरकारी सहायता का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे एलपीजी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रति एलपीजी सिलेंडर निर्धारित सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है। यह सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रसोई गैस की बढ़ती लागत से राहत देने के उद्देश्य से दी जाती है।

उपभोक्ता क्या करें?

यदि आप चाहते हैं कि आपकी एलपीजी सब्सिडी बिना किसी रुकावट के मिलती रहे, तो कुछ जरूरी कदम समय रहते पूरे कर लें। सबसे पहले e-KYC की प्रक्रिया पूरी करें। अपने एलपीजी कनेक्शन को आधार और बैंक खाते से लिंक कराएं। नजदीकी गैस एजेंसी या अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से अपने दस्तावेजों का सत्यापन सुनिश्चित करें।

ग्रहों का बड़ा खेल! चंद्रमा-शनि युति से 4 राशियों की बदलेगी तकदीर

ज्योतिष डेस्क: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 7 जुलाई 2026 की देर रात से 8 जुलाई 2026 की सुबह तक एक महत्वपूर्ण खगोलीय संयोग बनने जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा और शनि की युति का प्रभाव देखने को मिलेगा। यह ग्रहों का संयोजन कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है, जबकि अन्य राशियों को संयम और सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

कब बनेगा चंद्रमा-शनि का संयोग?

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार यह विशेष युति 7 जुलाई 2026 की देर रात से 8 जुलाई 2026 की तड़के सुबह तक सक्रिय रहेगी। इस अवधि में चंद्रमा और शनि एक ही राशि क्षेत्र में आकर विशेष ऊर्जा प्रभाव उत्पन्न करेंगे। इसे भावनाओं (चंद्रमा) और कर्म (शनि) के संतुलन का समय माना जाता है।

इन 4 राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

1. वृषभ राशि

इस राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में स्थिरता मिल सकती है। रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं और आय के नए स्रोत बन सकते हैं।

2. कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए यह समय करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

3. मकर राशि

शनि की स्वयं की राशि होने के कारण मकर राशि पर इसका सकारात्मक असर माना जा रहा है। लंबे समय से चली आ रही समस्याओं में राहत मिल सकती है।

4. मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए यह समय मानसिक शांति और नए अवसर लेकर आ सकता है। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है।

UP Weather Alert: यूपी के 44 जिलों में बारिश का अलर्ट, इन इलाकों में जमकर बरसेंगे बादल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने के बाद मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है, जबकि मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए 44 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के कुछ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी भी दी गई है।

इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार महोबा, झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट और सोनभद्र जैसे जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में अगले कुछ घंटों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने और आंधी-तूफान की स्थिति भी बन सकती है।

44 जिलों में येलो अलर्ट जारी

मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के कुल 44 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, फतेहपुर, कौशांबी, भदोही, मिर्जापुर, जौनपुर, गाजीपुर, रायबरेली, फर्रुखाबाद, सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, आगरा, मथुरा, एटा, हाथरस और फिरोजाबाद जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने और खुले स्थानों पर न जाने की सलाह दी है।

कई जिलों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज

पिछले 24 घंटों में कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मिर्जापुर में सबसे अधिक 120 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि आजमगढ़ में 114.6 मिमी, संभल में 104 मिमी, बिजनौर में 62 मिमी, वाराणसी में 54.6 मिमी और बाराबंकी में 50 मिमी बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को बारिश का असर खास तौर पर बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में अधिक रहेगा। इसके बाद 5 जुलाई से पूरे प्रदेश में एक बार फिर व्यापक बारिश की संभावना जताई गई है। इस वर्ष मानसून उत्तर प्रदेश में लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचा, लेकिन अब यह तेजी से सक्रिय हो गया है।

केंद्र सरकार का फैसला: देशभर में फ्री राशन के नए नियम, 80 करोड़ लोगों पर होगा असर

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना में एक अहम बदलाव को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मुफ्त राशन प्राप्त करने वाले 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को अब पहले से बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराया जाएगा।

टूटे चावल की मात्रा में बड़ा बदलाव

नई व्यवस्था के तहत राशन में मिलने वाले चावल में टूटे हुए दानों (Broken Rice) की सीमा काफी कम कर दी गई है। कच्चे चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25% से घटाकर 10% कर दी गई है। जबकि उबले चावल में यह सीमा 16% से घटाकर 5% कर दी गई है। यानी अब लाभार्थियों को पहले की तुलना में अधिक साबुत दानों वाला चावल मिलेगा, जबकि राशन की मात्रा में कोई कटौती नहीं होगी।

2027-28 तक पूरे देश में लागू होगी व्यवस्था

नई गुणवत्ता नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। धान खरीद करने वाले राज्यों में नए मानकों के अनुरूप खरीद शुरू की जाएगी और खरीफ विपणन सीजन (KMS) 2027-28 तक इसे पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद सभी राज्यों में बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का वितरण नियमित रूप से किया जाएगा।

कई राज्यों में पहले ही सफल रहा प्रयोग

नई व्यवस्था लागू करने से पहले इसे कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में परखा गया। परीक्षण के दौरान बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद, प्रसंस्करण और वितरण की प्रक्रिया सफल रही। इसी अनुभव के आधार पर अब इस मॉडल को पूरे देश में लागू किया जा रहा है।

QR कोड से होगी पूरी निगरानी

राशन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। चावल के प्रत्येक बैग पर QR कोड लगाया जाएगा, जिससे उसकी पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखी जा सकेगी। इससे अनाज की आवाजाही, भंडारण और वितरण की निगरानी आसान होगी तथा गड़बड़ी और लीकेज पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।

सरकार को होगी बड़ी बचत

नई व्यवस्था से केवल गुणवत्ता ही नहीं सुधरेगी, बल्कि राशन वितरण प्रणाली की लागत भी कम होगी। मिलिंग के दौरान अलग किए गए टूटे हुए चावल का उपयोग अन्य औद्योगिक और उत्पादक कार्यों में किया जाएगा। वहीं, उसके परिवहन, भंडारण और पैकेजिंग की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी।

बिहार में हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट, जानें क्या है पूरा मामला?

पटना: बिहार में शिक्षक नियुक्ति से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिससे हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उनकी नियुक्ति समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) से 18 महीने का डीएलएड (D.El.Ed.) कोर्स किया है और उसी आधार पर नियुक्ति हासिल की है।

क्यों उठाया गया यह कदम?

शिक्षा विभाग का कहना है कि संबंधित शिक्षक ऐसे प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्त हुए हैं, जिसे विभाग पहले ही भर्ती के लिए मान्य नहीं मान चुका था। विभागीय जांच में सामने आया कि नियमों के बावजूद कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो गई। अब इस त्रुटि को सुधारने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

विज्ञापन में पहले से था स्पष्ट

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान जारी विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि NIOS का 18 महीने का डीएलएड प्रमाणपत्र निर्धारित श्रेणी की नियुक्तियों के लिए स्वीकार्य नहीं होगा। इसके अलावा शिक्षा विभाग ने वर्ष 2023 में भी इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। इसके बावजूद कुछ अभ्यर्थियों का चयन हो गया, जिसे अब विभाग नियमों के अनुरूप ठीक करने की तैयारी में है।

TRE-3 भर्ती के बाद बढ़ा विवाद

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से आयोजित तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों के लिए हुई इस भर्ती के बाद दस्तावेजों की जांच में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें अभ्यर्थियों ने 18 महीने के डीएलएड प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। इसी के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित नियुक्तियों की समीक्षा शुरू की।

करीब तीन हजार शिक्षकों पर असर की आशंका

हालांकि अभी तक आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार लगभग तीन हजार शिक्षक इस कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। यदि जांच में उनकी नियुक्ति नियमों के विरुद्ध पाई जाती है, तो उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। इससे संबंधित शिक्षकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

आगे की भर्ती और तबादलों पर भी पड़ेगा असर

शिक्षा विभाग का मानना है कि नियमों के अनुरूप कार्रवाई पूरी होने के बाद आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और तबादलों को अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी होगी, वहां भविष्य की नियुक्तियों के माध्यम से रिक्त पद भरे जाने की योजना है।

बिहार में सरकारी कर्मचारियों को नया फरमान, पूरे राज्य में लागू

पटना: बिहार सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में 1 जुलाई से छुट्टी लेने की पुरानी कागजी व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब सभी सरकारी कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की छुट्टी के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल कामकाज में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कर्मचारियों को भी पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिलेगी।

अब ऑनलाइन ही होगी पूरी प्रक्रिया

सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार अब कैजुअल लीव (सीएल), अर्न्ड लीव (ईएल) समेत सभी प्रकार की छुट्टियों के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HMRS) पोर्टल या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। आवेदन करने से लेकर छुट्टी स्वीकृत या अस्वीकृत होने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ऑफलाइन या कागजी आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

पहले करना होगा रजिस्ट्रेशन

नई व्यवस्था का लाभ लेने के लिए सभी सरकारी कर्मचारियों को अपने मोबाइल फोन में HMRS ऐप डाउनलोड कर उसमें पंजीकरण करना होगा। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद कर्मचारी किसी भी समय मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे। संबंधित अधिकारी भी इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आवेदन की समीक्षा कर मंजूरी देंगे या आवश्यक होने पर उसे अस्वीकार करेंगे।

कर्मचारियों को मिलेंगी कई सुविधाएं

सरकार का कहना है कि नई प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों को छुट्टी के आवेदन के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। घर, कार्यालय या किसी भी स्थान से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। इससे समय की बचत होगी और कागजी कार्यवाही भी काफी कम हो जाएगी। साथ ही कर्मचारी अपने आवेदन की स्थिति भी रियल टाइम में देख सकेंगे कि छुट्टी स्वीकृत हुई है या अभी लंबित है।

छुट्टियों का रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक कर्मचारी की छुट्टियों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। इससे यह जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी कि कर्मचारी ने कितनी छुट्टियां ली हैं, कितनी छुट्टियां शेष हैं और कौन-कौन से आवेदन लंबित हैं। इससे विभागीय अधिकारियों को भी कर्मचारियों की छुट्टियों की निगरानी करने और आवश्यक निर्णय लेने में आसानी होगी।

पूरे राज्य में लागू हुआ नया नियम

सामान्य प्रशासन विभाग ने यह व्यवस्था पूरे बिहार में लागू कर दी है। 1 जुलाई से सभी सरकारी कार्यालयों में छुट्टी के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होंगे। विभाग ने कर्मचारियों से जल्द से जल्द HMRS ऐप डाउनलोड कर अपना पंजीकरण पूरा करने की अपील की है, ताकि भविष्य में छुट्टी लेने के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कल आयुष्मान योग में 'शनि', इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते

राशिफल। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कल बनने वाला आयुष्मान योग कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। इस दिन शनि देव का प्रभाव भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा। ज्योतिष में आयुष्मान योग को दीर्घायु, उन्नति, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला योग माना जाता है, जबकि शनि देव कर्म, अनुशासन, न्याय और मेहनत के फल के कारक हैं। ऐसे में इन दोनों का शुभ संयोग कुछ राशियों के लिए करियर, धन और पारिवारिक जीवन में अच्छे अवसर लेकर आ सकता है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग आर्थिक दृष्टि से शुभ संकेत दे रहा है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा, जबकि व्यापारियों को लाभदायक सौदे मिलने के योग बन रहे हैं। निवेश से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए यह समय नई शुरुआत का संकेत दे सकता है। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और नई जिम्मेदारियां आपके भविष्य को मजबूत कर सकती हैं। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने की संभावना रहेगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों पर शनि का शुभ प्रभाव मेहनत का अच्छा फल दिला सकता है। नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि के संकेत हैं। व्यापार का विस्तार करने की योजना सफल हो सकती है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और प्रभावशाली लोगों से संपर्क भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर रहने की संभावना है।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए यह योग भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और पुराने निवेश से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। यदि आप नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो समय अनुकूल माना जा रहा है। दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी और परिवार का सहयोग मिलेगा।

मकर राशि

मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए यह योग इस राशि के लिए विशेष शुभ माना जा रहा है। करियर में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं और लंबे समय से चल रही आर्थिक परेशानियों में राहत मिलने के संकेत हैं। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं। व्यापार में लाभ और धन संचय के अच्छे योग बनेंगे।

यूपी में 65 नगर पंचायतें सरकार के रडार पर, जारी हुए कड़े निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के कर एवं गैर-कर राजस्व वसूली का विवरण समय पर उपलब्ध न कराने वाली 65 नगर पंचायतों के खिलाफ शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। संबंधित अधिकारियों को तत्काल रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं लापरवाही बरतने वालों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

बार-बार याद दिलाने के बाद भी नहीं भेजी गई जानकारी

नगरीय निकाय निदेशालय की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 की राजस्व वसूली का विवरण सबसे पहले अप्रैल में मांगा गया था। इसके बाद कई बार अनुस्मारक (रिमाइंडर) जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद 65 नगर पंचायतों ने निर्धारित प्रारूप में अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की। शासन ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

तत्काल रिपोर्ट भेजने के निर्देश

निदेशालय ने सभी संबंधित अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले हुई कर एवं गैर-कर राजस्व वसूली का पूरा विवरण बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाए। अधिकारियों से कहा गया है कि निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार कर ई-मेल के माध्यम से निदेशालय को तत्काल भेजी जाए।

संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर होगी कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल रिपोर्ट भेजना ही पर्याप्त नहीं होगा। जिन अधिकारियों ने समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, उनसे कारण बताओ नोटिस के माध्यम से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को भी दिए गए निर्देश

पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भेजे गए हैं। शासन चाहता है कि नगर निकायों में राजस्व वसूली से जुड़े सभी आंकड़े समय पर उपलब्ध हों, ताकि विकास योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन की सही समीक्षा की जा सके।

यूपी में बिजली दरों को लेकर फैसला, नागरिकों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी बिजली की मौजूदा दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही लगातार सातवें वर्ष ऐसा होगा जब प्रदेश में बिजली की कीमतों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

उपभोक्ताओं को मिलेगी आर्थिक राहत

बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं होने से लाखों परिवारों के मासिक बिजली बिल पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। महंगाई के दौर में सरकार के इस फैसले को आम लोगों के लिए राहत देने वाला कदम माना जा रहा है। छोटे कारोबारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े उपभोक्ताओं को भी स्थिर बिजली दरों का फायदा मिलेगा, जिससे उनकी लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर

राज्य सरकार का कहना है कि केवल बिजली दरों को स्थिर रखना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता है। पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया गया है। इसका परिणाम यह है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बिजली आपूर्ति की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

हर क्षेत्र तक गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाने का लक्ष्य

सरकार प्रदेश के हर शहर, गांव और कस्बे तक बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है। बिजली आपूर्ति में बाधा कम करने, नई लाइनें बिछाने और बिजली ढांचे को आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा मिल सके।

सरकार के फैसले से आम जनता को मिलेगा सीधा फायदा

बिजली दरें स्थिर रहने से घरेलू बजट पर राहत मिलेगी, जबकि उद्योग, व्यापार और कृषि क्षेत्र को भी उत्पादन लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। ऐसे में सरकार का यह फैसला प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

केंद्र सरकार का फैसला, प्राइवेट कर्मचारियों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि (PF) पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बरकरार रखी गई है। अब कर्मचारी अपने पीएफ खाते में ब्याज की राशि जमा होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की मंजूरी के बाद ईपीएफओ जल्द ही करोड़ों खातों में ब्याज जमा करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

लगातार तीसरे साल नहीं बदली ब्याज दर

ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने 28 फरवरी 2026 की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर की सिफारिश की थी। इससे पहले वित्त वर्ष 2022-23 में ब्याज दर 8.15 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत की गई थी। इसके बाद लगातार तीसरे वर्ष भी यही दर बरकरार रखी गई है।

अगले कुछ दिनों में शुरू हो सकती है प्रक्रिया

पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सरकार की मंजूरी मिलने के बाद खातों को अपडेट करने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में ब्याज क्रेडिट करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जबकि करीब 15 दिनों के भीतर देशभर के लगभग 7 करोड़ सक्रिय पीएफ खातों में ब्याज की राशि जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

पासबुक में ऐसे दिखाई देगा ब्याज

जब आपके खाते में ब्याज जमा हो जाएगा, तो उसकी जानकारी ईपीएफओ की पासबुक में स्वतः दिखाई देने लगेगी। यदि किसी सदस्य के खाते में तुरंत ब्याज नजर नहीं आता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। करोड़ों खातों को अपडेट करने का काम एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाता है।

कर्मचारियों के लिए राहत की खबर

8.25 प्रतिशत की ब्याज दर बरकरार रहने से निजी क्षेत्र में कार्यरत लाखों कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट बचत पर बेहतर रिटर्न मिलता रहेगा। जिन सदस्यों के खाते में अभी तक ब्याज नहीं दिखा है, उन्हें समय-समय पर अपनी पीएफ पासबुक जांचते रहने की सलाह दी जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ब्याज की राशि स्वतः उनके खाते में जुड़ जाएगी।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, ग्रामीण मजदूरों को सुपर खुशखबरी

पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले अकुशल मजदूरों को बड़ी राहत देते हुए उनकी मजदूरी में बढ़ोतरी का फैसला किया है। राज्य मंत्रिमंडल ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) 2026 के तहत नई मजदूरी दर को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना और रोजगार योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।

सात घंटे के कार्य पर मिलेगी 300 रुपये मजदूरी

नई व्यवस्था के तहत योजना में कार्यरत अकुशल मजदूरों को सात घंटे के कार्यदिवस के बदले 300 रुपये की मजदूरी मिलेगी। यह दर मिट्टी कटाई जैसे कार्यों के लिए निर्धारित की गई है, जिसमें लीड और लिफ्ट का कार्य भी शामिल रहेगा। इससे पहले इसी प्रकार के कार्य के लिए मजदूरों को 256 रुपये का भुगतान किया जाता था। नई दर लागू होने के बाद प्रत्येक कार्यदिवस पर मजदूरों की आय में 44 रुपये की बढ़ोतरी होगी।

ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर

सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए मजदूरी दर में संशोधन किया गया है। नई दर लागू होने से लाखों ग्रामीण श्रमिकों की आय में सुधार होगा और उन्हें सरकारी रोजगार योजनाओं में काम करने के लिए बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा।

रोजगार योजनाओं के संचालन में आएगी पारदर्शिता

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, नई मजदूरी व्यवस्था का उद्देश्य केवल भुगतान बढ़ाना नहीं है, बल्कि रोजगार योजनाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है। इससे मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी समय पर मिल सकेगी और कार्यों के क्रियान्वयन में भी सुधार होने की उम्मीद है।

बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी बनेगी नोडल एजेंसी

मंत्रिमंडल ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के संचालन के लिए बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (BRDS) को नोडल एजेंसी बनाने की मंजूरी भी दी है। यह संस्था योजना के संचालन, निगरानी, समन्वय और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेगी।

नई व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण विकास कार्यों को मिलेगी नई गति

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, जल संरक्षण, मिट्टी कार्य और अन्य विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि बेहतर मजदूरी मिलने से श्रमिकों की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे विकास योजनाओं का लाभ गांवों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

बिहार में टोल वसूली के 6 नए नियम, ये रोड रहेंगे टैक्स फ्री

पटना: बिहार सरकार ने राज्य की सड़कों पर टोल व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई टोल नीति के तहत अब टोल टैक्स की दरें सड़क की चौड़ाई और श्रेणी के आधार पर तय की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य बेहतर सड़क नेटवर्क के लिए संसाधन जुटाने के साथ-साथ आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़ने देना है।

50 सड़कों को किया गया चिह्नित

राज्य कैबिनेट के निर्णय के बाद पथ निर्माण विभाग ने राज्य उच्च पथ और प्रमुख पुलों पर टोल वसूली की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। शुरुआती चरण में करीब 50 सड़कों की पहचान की गई है, जबकि अन्य मार्गों का सर्वेक्षण अभी जारी है। सर्वे पूरा होने के बाद जरूरत के अनुसार और मार्गों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।

सड़क की चौड़ाई से तय होगी टोल दर

नई नीति के अनुसार, टोल की दरें सभी सड़कों पर एक जैसी नहीं होंगी। सड़क जितनी चौड़ी होगी, उसके निर्माण और रखरखाव की लागत को ध्यान में रखते हुए उसी अनुपात में टोल निर्धारित किया जाएगा। 5.5 मीटर से कम चौड़ाई वाली सड़कों पर किसी भी प्रकार का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा, जिससे ग्रामीण और कम चौड़ाई वाले मार्गों पर चलने वाले लोगों को राहत मिलेगी।

शहर के भीतर की सड़कें रहेंगी टोल मुक्त

सरकार ने स्पष्ट किया है कि शहर की सीमा के भीतर आने वाली राज्य सड़कों पर टोल नहीं लगाया जाएगा। इसी वजह से पटना सहित अन्य शहरों के अंदर स्थित कई प्रमुख मार्ग इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे। मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (MDR) श्रेणी की सड़कों को भी टोल वसूली के दायरे में शामिल नहीं किया गया है।

इन प्रमुख परियोजनाओं पर देना होगा टोल

पटना क्षेत्र में जेपी गंगा पथ और कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल को टोल वसूली वाली परियोजनाओं में शामिल किया गया है। चूंकि ये आधुनिक और अधिक चौड़ाई वाले मार्ग हैं, इसलिए इन पर अन्य सड़कों की तुलना में अधिक टोल लग सकता है। वहीं पाटलिपथ और अटल पथ को फिलहाल टोल मुक्त रखा गया है। इसके अलावा पटना-बख्तियारपुर पुराने एनएच-30 को भी भविष्य में टोल व्यवस्था में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

सड़कों के लेन बढ़ने के साथ बढ़ेगा टोल टैक्स 

नई व्यवस्था में सड़क की लेन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। छह लेन वाले हाईवे पर टोल की दर सबसे अधिक होगी, जबकि कम लेन वाली सड़कों पर यह राशि अपेक्षाकृत कम रहेगी। कई मामलों में कम चौड़ाई वाली सड़कों पर टोल दर छह लेन मार्गों की तुलना में काफी कम हो सकती है।

बिहार में खनन क्षेत्र के वाहनों पर अलग नियम

खनन क्षेत्रों से गुजरने वाले भारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। ऐसे वाहनों पर सड़क की चौड़ाई के आधार पर मिलने वाली राहत लागू नहीं होगी। उनसे निर्धारित नियमों के अनुसार प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल वसूला जाएगा, क्योंकि इन वाहनों से सड़कों पर अधिक दबाव पड़ता है।

8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट! हर केंद्रीय कर्मचारी को जाननी चाहिए ये 10 बातें

नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें टिकी हुई हैं। आयोग ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और पेंशनर्स एसोसिएशनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ऐसे में वेतन, पेंशन, भत्तों और फिटमेंट फैक्टर को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। आइए जानते हैं 8वें वेतन आयोग से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें, जिनकी जानकारी हर केंद्रीय कर्मचारी के लिए जरूरी है।

1. आयोग का गठन हो चुका, रिपोर्ट पर जारी है काम

केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग का गठन कर चुकी है। आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिलहाल विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव एकत्र किए जा रहे हैं।

2. कब आ सकती है अंतिम रिपोर्ट?

मौजूदा प्रक्रिया को देखते हुए आयोग की अंतिम सिफारिशें अगस्त से दिसंबर 2026 के बीच सरकार को सौंपी जा सकती हैं। इसके बाद सरकार रिपोर्ट की समीक्षा कर अंतिम निर्णय लेगी।

3. फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा नजर

वेतन वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण आधार फिटमेंट फैक्टर माना जा रहा है। कर्मचारी संगठन अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं ताकि बेसिक वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सके। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिश और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।

4. न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाने की मांग

विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा 18,000 रुपये के न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 69,000 रुपये तक करने का सुझाव दिया है। हालांकि यह कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है, इस पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है।

5. डीए को लेकर क्या है स्थिति?

महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में शामिल किए जाने की चर्चाएं लगातार चल रही हैं, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया है। इसलिए अभी DA और बेसिक पे को लेकर कोई बदलाव घोषित नहीं हुआ है।

6. कई भत्तों में भी हो सकती है समीक्षा

आयोग केवल वेतन तक सीमित नहीं है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस, जोखिम भत्ता और अन्य विशेष भत्तों की भी समीक्षा की जा रही है। कर्मचारी संगठन इन भत्तों में समयानुकूल संशोधन की मांग कर रहे हैं।

7. पेंशन व्यवस्था पर भी हो रहा मंथन

पेंशनर्स संगठनों ने आयोग के समक्ष पुरानी पेंशन योजना (OPS), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से जुड़े कई सुझाव दिए हैं। इसके साथ ही न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और पेंशन नियमों को सरल बनाने की भी मांग उठाई गई है।

8. देशभर में कर्मचारियों से हो रही बातचीत

आयोग केवल दस्तावेजों के आधार पर निर्णय नहीं ले रहा है। विभिन्न राज्यों और शहरों में कर्मचारी संगठनों तथा विभागीय प्रतिनिधियों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि जमीनी स्तर की समस्याओं और अपेक्षाओं को समझा जा सके।

9. लागू होने की संभावित तारीख

कर्मचारी संगठनों का मानना है कि नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा सकता है। हालांकि इसका अंतिम निर्णय केंद्र सरकार आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही करेगी।

10. वेतन ढांचे में भी हो सकता है बदलाव

8वें वेतन आयोग का उद्देश्य केवल वेतन बढ़ाना नहीं है। आयोग भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पे मैट्रिक्स को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने पर भी विचार कर रहा है, ताकि कर्मचारियों को वेतन निर्धारण और पदोन्नति से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट हो सकें।

बिहार में किसानों को बड़ी खुशखबरी, SC-ST और EBC को मिलेगी 50% छूट

पटना: बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए गन्ना किसानों को राहत देने के उद्देश्य से दो नई योजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाना, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना और किसानों की उत्पादन लागत कम करना है। बीज उत्पादन से लेकर आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद तक सरकार विभिन्न स्तरों पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

बीज उत्पादन पर मिलेगा आकर्षक अनुदान

नई बीज विकास योजना के तहत सत्यापित गन्ना बीज तैयार करने वाले किसानों को अनुदान दिया जाएगा। सामान्य वर्ग के किसानों को प्रति क्विंटल 260 रुपये, जबकि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) के किसानों को 310 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता मिलेगी। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों को बेहतर पैदावार के लिए प्रोत्साहित करना है।

आधार और प्रजनक बीज उत्पादन को बढ़ावा

सरकार ने आधार बीज उत्पादन के लिए भी विशेष सहायता का प्रावधान किया है। किसानों को अधिकतम 70 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक आर्थिक सहायता मिल सकेगी। वहीं प्रजनक बीज उत्पादन का कार्य कृषि अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से कराया जाएगा, जिसके लिए 2.50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गई है।

कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान

गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत खेती की तैयारी, बुवाई, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और कटाई जैसे कार्यों में उपयोग होने वाले आधुनिक कृषि यंत्रों पर भी अनुदान मिलेगा। इस योजना का कुल बजट 34.60 करोड़ रुपये रखा गया है। वर्ष 2026-27 में 3,218 कृषि यंत्रों के वितरण और 80 यंत्र बैंकों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सामान्य वर्ग के किसानों को कृषि यंत्रों पर 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जबकि SC-ST और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी।

ऑनलाइन आवेदन और सीधे खाते में अनुदान

सरकार ने दोनों योजनाओं की आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा है। बीज विकास योजना के लिए किसान केन केयर पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे, जबकि यंत्रीकरण योजना के लिए कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल का उपयोग करना होगा। पात्र किसानों को स्वीकृत अनुदान की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।