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चीन तेजी से बढ़ा रहा परमाणु ताकत, अमेरिका को टेंशन, भारत अलर्ट!

नई दिल्ली। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन तेजी से बदल रहा है। हाल के वर्षों में चीन ने अपनी परमाणु-संचालित पनडुब्बी क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में चीन ने न केवल अधिक पनडुब्बियां तैयार कीं, बल्कि उन्हें सेवा में शामिल करने की गति भी तेज रखी। इस घटनाक्रम ने अमेरिका की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ाया है, वहीं भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति गंभीर मानी जा रही है।

क्या कहती है रिपोर्ट?

लंदन स्थित थिंक टैंक International Institute for Strategic Studies की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच चीन ने 10 परमाणु-संचालित पनडुब्बियां लॉन्च कीं, जबकि अमेरिका इस अवधि में 7 ही तैयार कर सका। कुल टन भार के हिसाब से भी चीन आगे बताया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि People's Liberation Army Navy ने अपने परमाणु बेड़े में बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों और युद्धक (अटैक) पनडुब्बियों दोनों को शामिल किया है। हालांकि सक्रिय सेवा में मौजूद कुल पनडुब्बियों की संख्या में अमेरिका अभी भी आगे है।

दोनों देशों की मौजूदा स्थिति

2025 की शुरुआत तक चीन के पास 12 सक्रिय परमाणु-संचालित पनडुब्बियां बताई गई हैं, जिनमें 6 बैलिस्टिक मिसाइल और 6 गाइडेड या अटैक श्रेणी की हैं। इसके अलावा चीन के पास बड़ी संख्या में पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां भी हैं। दूसरी ओर, अमेरिका के पास कुल 65 परमाणु पनडुब्बियां हैं, जिनमें 14 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं। अमेरिका पारंपरिक पनडुब्बियों का उपयोग नहीं करता और पूरी तरह परमाणु-संचालित बेड़े पर निर्भर है।

वैश्विक नौसैनिक संतुलन पर असर

ब्रिटिश प्रसारक BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्धपोतों की कुल संख्या के मामले में चीनी नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है। जहाजों की संख्या और उत्पादन क्षमता में तेजी से हो रही बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि चीन समुद्री शक्ति को अपनी रणनीतिक प्राथमिकता बना चुका है।

भारत के लिए क्या मायने?

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए यह घटनाक्रम अहम है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी पहले से ही चर्चा में रही है। ऐसे में परमाणु-संचालित पनडुब्बियों की संख्या और क्षमता में इजाफा क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

जानकार मानते हैं कि आने वाले वर्षों में समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और पनडुब्बी रोधी प्रणालियों पर भारत को और अधिक ध्यान देना पड़ सकता है। चीन की बढ़ती नौसैनिक और परमाणु ताकत ने वैश्विक शक्ति संतुलन को नए दौर में पहुंचा दिया है। अमेरिका जहां अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं एशिया के अन्य देश भी बदलते हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

भारत बनाम पाकिस्तान: कौन है बड़ी परमाणु ताकत?

नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में दो परमाणु ताकतों — भारत और पाकिस्तान — के बीच सामरिक संतुलन पर दुनिया की नजरें हमेशा टिकी रहती हैं। हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास 172 परमाणु हथियार, जबकि पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं। हालांकि संख्या के मामूली अंतर से ज्यादा अहम है तकनीकी श्रेष्ठता और सामरिक क्षमता, जिसमें भारत स्पष्ट रूप से आगे नजर आता है।

न्यूक्लियर ट्रायड: भारत की सबसे बड़ी बढ़त

भारत को परमाणु रणनीति के क्षेत्र में सबसे बड़ी बढ़त उसके न्यूक्लियर ट्रायड से मिलती है। न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है — थल (भूमि आधारित मिसाइल), जल (पनडुब्बी से लॉन्च) और वायु (लड़ाकू विमानों से) — तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार दागने की क्षमता। भारत यह क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान के पास अभी तक पूर्ण न्यूक्लियर ट्रायड नहीं है। उसकी परमाणु क्षमताएं मुख्यतः भूमि और कुछ हद तक हवाई हमलों तक सीमित हैं। जल के जरिए परमाणु हमला करने की उसकी क्षमता बेहद सीमित है, जिससे युद्ध के हालात में उसकी रणनीतिक लचीलापन कमजोर पड़ सकता है।

तकनीकी और सामरिक श्रेष्ठता

भारत द्वारा विकसित मिसाइल सिस्टम — अग्नि, पृथ्वी, और ब्रह्मोस — उसे लंबी दूरी की मारक क्षमता के साथ-साथ सटीक निशानेबाज़ी में भी बढ़त दिलाते हैं। वहीं, INS Arihant जैसी न्यूक्लियर पनडुब्बी भारत को "सेकंड स्ट्राइक" की विश्वसनीय क्षमता प्रदान करती है।

पाकिस्तान ने भी शॉर्ट-रेंज न्यूक्लियर मिसाइल के जरिए रणनीतिक जवाब देने की कोशिश की है, लेकिन यह क्षमता अब तक भारत की ट्रायड क्षमता के सामने काफी सीमित मानी जाती है। हालांकि भारत की "No First Use" (NFU) नीति यानी ‘पहले हमला न करने’ की नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार परमाणु शक्ति की छवि बनाती है।

बिहार में लेखाकार, कार्यकारी अधिकारी की बंपर भर्ती

पटना। बिहार के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा अवसर आया है। बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (BRLPS) ने लेखाकार (Accountant) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) के कुल 89 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इन पदों के लिए बी.एससी (B.Sc) और इंटरमीडिएट (Intermediate) योग्यता रखने वाले उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पद, रिक्तियां: 

लेखाकार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी: 89 पद।

आयु सीमा:

इन पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए प्रकाशित नोटिफिकेशन को पढ़ें।

योग्यता: 

इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से बी.एससी या इंटरमीडिएट पास होनी चाहिए।

कैसे करें आवेदन:

सबसे पहले BRLPS की आधिकारिक वेबसाइट brlps.in पर जाएं। 'Recruitment' सेक्शन में जाएं। संबंधित भर्ती लिंक पर क्लिक करें और आवेदन पत्र भरें। सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करें। फॉर्म को सबमिट करें और उसकी एक प्रति प्रिंट करके सुरक्षित रखें।

आवेदन शुल्क: सभी श्रेणी के उम्मीदवार ₹300/- (गैर-वापसीयोग्य)

महत्वपूर्ण तारीखें:

ऑनलाइन आवेदन शुरू: पहले से चालू

आवेदन की अंतिम तिथि: 24 अप्रैल 2025

दिल्ली चुनाव: केजरीवाल-सिसोदिया हारे पर आतिशी जीती

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने राजधानी की राजनीतिक तस्वीर को एक बार फिर से बदल दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए यह चुनाव कई मोर्चों पर मिश्रित परिणाम लेकर आया। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुछ अन्य बड़े चेहरे चुनाव हार गए हैं, लेकिन कालकाजी विधानसभा सीट से आतिशी ने जीत दर्ज की है, जो आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी राहत साबित हुई है।

आतिशी की जीत: आम आदमी पार्टी का संघर्ष जारी

आतिशी ने कालकाजी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी को करीब 3521 वोटों के अंतर से हराया। इस जीत ने यह साबित कर दिया कि आम आदमी पार्टी दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखे हुए है।

केजरीवाल और सिसोदिया की हार, यह एक बड़ी झटका

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की हार ने पार्टी के भीतर और बाहर कई सवाल खड़े किए हैं। खासकर जब केजरीवाल खुद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे, उनकी हार को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में चर्चा है कि क्या पार्टी की लोकप्रियता अब पहले जैसी नहीं रही। दिल्ली में केजरीवाल की छवि एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में बन चुकी थी, लेकिन चुनावी परिणामों ने इस छवि को थोड़ी धूमिल किया है। वहीं, मनीष सिसोदिया की हार ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान पर सवाल खड़े किए हैं।

मतदान और जनादेश: 60.54% मतदान का महत्व

इस बार दिल्ली में कुल 60.54 फीसदी मतदान हुआ था, जो पिछली बार (62.60%) से कम है। यह थोड़ा कम मतदान प्रतिशत दिल्ली के मतदाताओं की राजनीतिक संलग्नता में कमी को दर्शाता है। हालांकि, दिल्ली के चुनावों में मतदान प्रतिशत का उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह भी संकेत करता है कि दिल्ली के लोग अब और अधिक सूझबूझ से अपना वोट डाल रहे हैं।

AAP या BJP: दो एग्जिट पोल AAP को दे रहे बंपर सीटें

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में मतदान के बाद के एग्जिट पोल ने राजनीति की तस्वीर को फिर से नया मोड़ दिया है। जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी (AAP) को कई एग्जिट पोल दिल्ली में पिछड़ती हुई दिखाई दे रही हैं तो वहीं दो एग्जिट पोल भारी बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या ये एग्जिट पोल केवल अनुमान हैं या फिर दिल्ली की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?

एग्जिट पोल की तस्वीर

वी-प्रीसाइड और माइंड ब्रिंक द्वारा किए गए एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी को बहुत बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। वी-प्रीसाइड सर्वे के मुताबिक, आम आदमी पार्टी को 46 से 52 सीटें मिल सकती हैं, जो दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से बहुमत से कहीं अधिक हैं। वहीं, बीजेपी को इस सर्वे में 18 से 23 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। कांग्रेस को इस सर्वे में एक सीट मिलने की संभावना है, जो इस चुनावी रेस में ज्यादा प्रभावित नहीं कर रही है।

वहीं माइंड ब्रिंक सर्वे में भी आम आदमी पार्टी को 44 से 49 सीटों का अनुमान जताया गया है, जबकि बीजेपी को 21 से 25 सीटें मिलने का दावा किया गया है। इसमें भी कांग्रेस के खाते में एक सीट आ सकती है। इन दोनों एग्जिट पोल में बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जहां एक तरफ बीजेपी के लिए यह नतीजे एक झटका साबित हो सकते हैं, वहीं आम आदमी पार्टी के लिए यह आत्मविश्वास को बढ़ाने वाले संकेत हो सकते हैं।

एग्जिट पोल: केवल अनुमान या कुछ और?

यहां पर यह समझना जरूरी है कि एग्जिट पोल कभी भी 100% सही नहीं होते। ये सिर्फ अनुमान होते हैं, जिनमें विभिन्न आंकड़ों और जानकारी के आधार पर राजनीतिक माहौल का जायजा लिया जाता है। एग्जिट पोल में उठाए गए आंकड़े अक्सर वास्तविक नतीजों से भिन्न हो सकते हैं, क्योंकि ये चुनावी मतदान के बाद के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, न कि अंतिम परिणामों पर।

कुछ मामलों में, एग्जिट पोल चुनावी रुझानों के बारे में सही भविष्यवाणी करते हैं, लेकिन कभी-कभी वे नतीजों से मेल नहीं खाते। इसलिए, इन आंकड़ों को चश्मदीद गवाह के रूप में नहीं देखा जा सकता। दिल्ली विधानसभा चुनाव के अंतिम नतीजे 8 फरवरी 2025 को सामने आएंगे, और तब स्पष्ट होगा कि दिल्ली की सत्ता पर किस पार्टी का कब्जा होगा।

AAP को धक्का, BJP को बहुमत: दिल्ली चुनाव एग्जिट पोल

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल्स के परिणाम सामने आ चुके हैं और इन नतीजों ने एक बड़ा सियासी भूचाल पैदा कर दिया है। अब तक 7 प्रमुख एग्जिट पोल्स सामने आए हैं और सभी में भाजपा (BJP) को बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) की सीटों में भारी कमी का अनुमान लगाया गया है।

एग्जिट पोल्स का कुल अनुमान

रिपब्लिक भारत के एग्जिट पोल के अनुसार, भाजपा को 35 से 40 सीटें मिल सकती हैं, जबकि आम आदमी पार्टी को 32 से 37 सीटों तक सिमटने का अनुमान है।

चाणक्य स्ट्रॅटेजीस का अनुमान है कि भाजपा को 39 से 44 सीटें मिल सकती हैं, जबकि आम आदमी पार्टी की सीटों की संख्या घटकर 25 से 28 के बीच रह सकती है।

ये आंकड़े दिल्ली के चुनावी मैदान में भाजपा के मजबूत पुनर्निर्माण का संकेत देते हैं, और आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखे जा रहे हैं।

भाजपा का बढ़ता प्रभाव

दिल्ली में भाजपा का प्रभाव कई वर्षों से बढ़ता जा रहा है, और एग्जिट पोल्स में इसका स्पष्ट रूप से प्रतिबिंब दिखाई दे रहा है। एक समय था जब दिल्ली में भाजपा की सत्ता काफी कमजोर हो गई थी, लेकिन भाजपा के प्रचार, उनके केंद्रीय नेतृत्व का जोर और मोदी सरकार की योजनाओं ने दिल्ली के मतदाताओं में एक नया उत्साह भर दिया है।

पार्टी ने 'विकास' और 'आत्मनिर्भर भारत' के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है, जिससे दिल्ली में भाजपा का ग्राफ ऊंचा हुआ है। इसके साथ ही भाजपा ने अपनी जड़ें दिल्ली में मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर कैंपेन चलाया है, जिसका असर एग्जिट पोल्स में नजर आ रहा है।

आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के लिए एग्जिट पोल्स में राहत की कोई बात नहीं है। 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था और 70 में से 62 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन अब एग्जिट पोल्स के मुताबिक, उनकी सीटें आधी से भी कम होने की संभावना है।

आम आदमी पार्टी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को बढ़-चढ़कर पेश किया था, लेकिन इन चुनावों में दिल्लीवासियों की प्राथमिकताएं बदलती हुई दिखाई दी हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की राजनीति और कामकाजी मॉडल पर सवाल उठाए गए हैं, विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली के मुद्दों पर। इसके साथ ही भाजपा ने राज्य सरकार के कामकाज को लेकर कई आक्रामक आरोप लगाए, जो अब तक उनके खिलाफ साबित हो रहे हैं।

AAP या BJP? दिल्ली की 70 सीटों का पलट गया सर्वे, सब हैरान!

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एग्जिट पोल्स ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। एग्जिट पोल्स में इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बहुमत मिलने का अनुमान है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए सीटों में गिरावट की भविष्यवाणी की गई है। 

बता दें की एक बार फिर दिल्ली में बीजेपी और AAP के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। वहीं, अगर एग्जिट पोल्स के नतीजे सही साबित होते हैं, तो दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी हो सकती है। बीजेपी के लिए यह चुनाव जीतना न केवल दिल्ली में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि यह पार्टी के लिए भी एक मजबूती का संकेत हो सकता है।

दरअसल, दिल्ली विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स ने भारतीय राजनीति में एक नई दिशा का संकेत दिया है। बीजेपी की जीत के नतीजे आने से दिल्ली की राजनीति में फिर से हलचल मच सकती है, और AAP को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। कांग्रेस की स्थिति भी कमजोर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एग्जिट पोल्स के नतीजे चुनाव परिणामों से कितना मेल खाते हैं।

एग्जिट पोल्स के नतीजे:

पीपुल्स इनसाइट एग्जिट पोल:

बीजेपी: 40-44 सीटें

AAP: 25-29 सीटें

कांग्रेस: 0-2 सीटें

पीपुल्स इनसाइट के अनुसार, बीजेपी को बहुमत मिल सकता है, और AAP की सीटों में गिरावट आ सकती है। कांग्रेस को इस बार भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में कोई बड़ी सफलता नहीं मिलने का अनुमान है।

मैट्रिज एग्जिट पोल:

बीजेपी+: 35-40 सीटें (46%)

AAP: 32-37 सीटें (44%)

कांग्रेस: 0-1 सीटें (8%)

मैट्रिज एग्जिट पोल ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर का अनुमान लगाया है, लेकिन बीजेपी को बढ़त मिलने की संभावना जताई है। AAP को भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है, लेकिन उन्हें बहुमत मिलने में मुश्किलें हो सकती हैं।

पल्स और कोडमो एग्जिट पोल:

बीजेपी: 51-60 सीटें

AAP: 20 सीटें से कम

इस पोल ने तो बीजेपी की जबरदस्त जीत का अनुमान जताया है। 27 साल बाद दिल्ली में बीजेपी को इतनी बड़ी जीत मिल सकती है, जबकि AAP की सीटों में भारी गिरावट हो सकती है।

Delhi Election 2025: इन 12 दस्तावेजों से भी कर सकेंगे वोटिंग

न्यूज डेस्क: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक हैं, और चुनाव आयोग ने वोटिंग प्रक्रिया को सरल और समावेशी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अगर आपके पास पारंपरिक मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नहीं है, तो भी आप अन्य दस्तावेजों के माध्यम से वोट दे सकते हैं। चुनाव आयोग ने मतदान के लिए 12 अन्य दस्तावेजों को भी पहचान पत्र के रूप में मान्यता दी है, जिससे उन नागरिकों को वोट देने में कोई कठिनाई नहीं होगी जिनके पास EPIC नहीं है।

इन 12 दस्तावेजों की सूची में से कोई एक भी दस्तावेज़ अपने साथ लाकर आप अपनी पहचान साबित कर सकते हैं और चुनाव में भाग ले सकते हैं। यह पहल यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी नागरिक का वोट देने का अधिकार न छिन सके, चाहे उनके पास मतदाता पहचान पत्र हो या नहीं।

12 दस्तावेज जो वोटिंग के लिए मान्य होंगे:

1 .पासपोर्ट

यदि आपके पास पासपोर्ट है, तो यह एक वैध पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह दस्तावेज़ विदेश यात्रा करने वालों के लिए सामान्य होता है, लेकिन यह मतदान के दौरान भी स्वीकार्य होगा।

2 .आधार कार्ड

आधार कार्ड अब एक बहुत ही सामान्य पहचान प्रमाण बन चुका है, जिसे विभिन्न सेवाओं और प्रक्रियाओं में स्वीकार किया जाता है। चुनाव आयोग ने इसे वोटिंग के लिए एक वैध दस्तावेज़ के रूप में मान्यता दी है।

3 .पैन कार्ड

पैन कार्ड को भी एक वैध पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया गया है। यह एक अन्य दस्तावेज़ है जो वित्तीय और टैक्स संबंधी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन अब यह चुनावी पहचान के लिए भी मान्य होगा।

4 .मनरेगा कार्ड

मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों को जारी किया गया कार्ड भी वोटिंग के लिए स्वीकार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मनरेगा कार्यकर्ता भी बिना किसी परेशानी के वोट डाल सकें।

5 .ड्राइविंग लाइसेंस

ड्राइविंग लाइसेंस एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है जिसे मतदान के लिए वैध माना गया है। यह दस्तावेज़ आमतौर पर पहचान प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाता है और अब इसे मतदान में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 .फोटो युक्त पेंशन दस्तावेज़

पेंशनधारियों के लिए, उनके द्वारा प्राप्त फोटो युक्त पेंशन दस्तावेज़ को भी पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 .श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड

श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किया गया स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड भी अब एक वैध वोटिंग पहचान पत्र बन गया है, जिससे कर्मचारी वर्ग को राहत मिलेगी।

8 .बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी फोटो युक्त पासबुक

यदि आपके पास बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी की गई फोटो युक्त पासबुक है, तो आप इसका इस्तेमाल पहचान पत्र के रूप में कर सकते हैं।

9 .विधायक व संसद सदस्यों द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र

विधायकों और सांसदों द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र को भी मतदान के दौरान पहचान पत्र के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।

10 .आरजीआई (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा जारी किया गया स्मार्ट कार्ड भी एक वैध दस्तावेज़ है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जिनके पास अन्य पहचान पत्र नहीं हैं।

11 .सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी विशेष दिव्यांग पहचान पत्र

दिव्यांग नागरिकों के लिए जारी किए गए विशेष पहचान पत्र भी एक वैध दस्तावेज़ के रूप में मतदान में इस्तेमाल हो सकते हैं। यह कदम दिव्यांग व्यक्तियों को चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित करता है।

12 .केंद्र व राज्य, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को जारी फोटो युक्त पहचान पत्र

सरकारी कर्मचारियों को उनके संबंधित विभागों द्वारा जारी फोटो युक्त पहचान पत्र अब चुनाव में पहचान के लिए मान्य होंगे।

AAP या BJP? वोटिंग से पहले आया 70 सीटों का सर्वे

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अब कुछ ही दिन बाकी हैं, और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आगामी चुनावों में दिल्ली की सियासत को लेकर कई तरह के अनुमानों और भविष्यवाणियों ने चर्चा का माहौल बना दिया है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट और कई राजनीतिक एक्सपर्ट्स के अनुमानों के मुताबिक, इस बार चुनावी नतीजों में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है। यह चुनाव दिल्ली की राजनीति में एक नई दिशा दिखा सकता है, खासकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधी टक्कर को लेकर।

आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थिति

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में पिछले कुछ सालों से अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। साल 2015 और 2020 में बेमिसाल जीत हासिल करने के बाद, पार्टी का प्रभाव पूरे दिल्ली में गहराया। हालांकि, इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी को 10 साल की एंटी-इंकार्मेंसी (अधिकारियों और सरकार के खिलाफ नकारात्मक भावना) और पार्टी के अंदर की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ कुछ मोर्चों पर असंतोष और पार्टी के भीतर विद्रोह की खबरें आ रही हैं। इसका असर वोटों पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी को 43 से 47 सीटों के बीच जीतने का अनुमान है, जो कि उनकी सरकार बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है, लेकिन यह 2015 और 2020 की जीत की तुलना में कम है। पार्टी के भीतर की नाराजगी, सरकार की नीतियों पर सवाल और कुछ विवादित फैसले AAP के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

भाजपा का रुख

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है। भाजपा ने दिल्ली की राजनीति में एक नई दिशा अपनाई है और अपने चुनाव प्रचार में जोरदार तरीके से जुट गई है। पार्टी के नेतृत्व में बदलाव, नये चेहरे और नई योजनाओं के साथ भाजपा इस बार अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

भाजपा ने अपनी पार्टी के भीतर और राज्य में कई बड़े नेताओं को तवज्जो दी है, जो दिल्ली की जनता के बीच मजबूत पहचान रखते हैं। भाजपा ने दिल्ली में अपने पुराने रणनीतिकारों को कम कर नए चेहरों को तवज्जो दी है, जिससे दिल्ली में नया माहौल पैदा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा को 23 से 27 सीटों तक जीतने का अनुमान है। यह भाजपा के लिए एक बड़ी छलांग हो सकती है, खासकर अगर हम पिछले चुनावों के परिणामों को देखें।

एंटी-इनकंबेंसी और चुनावी समीकरण

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में एंटी-इनकंबेंसी (सरकार के खिलाफ नकारात्मक भावना) का बड़ा असर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी की सरकार के सामने एक प्रमुख चुनौती ये है कि पिछले दस सालों में कई मुद्दों पर लोगों में निराशा और असंतोष पनपा है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और कानून-व्यवस्था प्रमुख हैं। वहीं, दिल्ली में भाजपा की स्थिरता और राष्ट्रीय मुद्दों के आधार पर भाजपा अपने आप को एक मजबूत विकल्प के तौर पर प्रस्तुत कर रही है।

चुनावी लड़ाई: AAP बनाम BJP

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AAP और BJP के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। आम आदमी पार्टी और भाजपा दोनों ही अपने-अपने तरीकों से दिल्ली के वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं। जहाँ आम आदमी पार्टी अपनी सफलताओं को प्रमुखता दे रही है, वहीं भाजपा अपने चुनावी मुद्दों और संगठनात्मक ताकत पर जोर दे रही है।

इस बार का चुनाव दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए लगातार बढ़ती चुनौतियाँ और भाजपा के नए रुख के बीच दिल्ली का भविष्य तय होगा। आगामी चुनाव में वोटरों का मूड क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर जरूर होगी।

दिल्ली के दिल में कौन? आप या बीजपी, C-वोटर सर्वे

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तारीख नजदीक आ चुकी है और यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि दिल्ली के दिल में कौन है – आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), या फिर कांग्रेस? आगामी 8 फरवरी को दिल्ली की जनता इस सवाल का जवाब देगी और यह तय होगा कि अगले पांच साल तक सत्ता का ताज किसके सिर होगा। 

हालांकि, सी-वोटर सर्वे ने दिल्ली की जनता का मूड भांपने का प्रयास किया है और यह सर्वे कुछ दिलचस्प तथ्य सामने लाया है। इस ट्रैकर के अनुसार, दिल्ली की जनता के बीच बदलाव की इच्छा और मौजूदा सरकार के प्रति असंतोष के स्तर को लेकर कई संकेत मिल रहे हैं।

बदलाव की ख्वाहिश – असंतुष्टों की बढ़ती संख्या

सी-वोटर ट्रैकर के मुताबिक, 1 फरवरी तक 43.9% लोगों ने कहा कि वे मौजूदा सरकार के कामकाज से नाखुश हैं और इस बार बदलाव चाहते हैं। ये आंकड़ा बताता है कि एक बड़ी संख्या दिल्ली की मौजूदा सरकार से असंतुष्ट है और किसी नए नेतृत्व की ओर देख रही है। 

यह आंकड़ा खासतौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि इसी पार्टी ने पिछले कई सालों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज है और अगर असंतुष्टों का यह वर्ग किसी दूसरे दल के पक्ष में चला जाता है तो चुनावी परिणाम पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसके विपरीत, 10.9% लोगों का कहना था कि वे तो सरकार से नाखुश हैं, लेकिन बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। यानी वे मौजूदा सरकार को फिर से मौका देने के पक्ष में हैं, भले ही वे कुछ नाखुश हों।

संतुष्ट लोग और बदलाव नहीं चाहने की प्रवृत्ति

दिल्ली के करीब 38.3% लोग ऐसे हैं जो न तो सरकार के कामकाज से असंतुष्ट हैं, न ही वे बदलाव चाहते हैं। ये लोग वर्तमान सरकार की स्थिरता को बनाए रखने के पक्ष में हैं और आगामी चुनाव में अपनी संतुष्टि के साथ इस सरकार को ही सत्ता में देखना चाहते हैं। इस आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि आम आदमी पार्टी अभी भी एक स्थिर आधार पर खड़ी हुई है, जो उसे दिल्ली की सत्ता में बनाए रखने के लिए मददगार हो सकता है, हालांकि यह समर्थन उतना ज्यादा नहीं है जितना पहले था।

समय के साथ आया बदलाव – एक महीने में फर्क

दिलचस्प बात यह है कि सी-वोटर के पहले ट्रैकर (6 जनवरी) और वर्तमान ट्रैकर में असंतुष्टों की संख्या में कुछ गिरावट आई है। जनवरी में 46.2% लोग बदलाव चाहते थे, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 43.9% हो गया। इसी तरह, नाराज होते हुए भी बदलाव नहीं चाहने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो यह बताता है कि आम आदमी पार्टी को उन लोगों का समर्थन मिलने की संभावना है जो किसी नए नेतृत्व के बजाय स्थिरता चाहते हैं।

त्रिकोणीय चुनाव – कांग्रेस की भूमिका

कांग्रेस ने भी पूरी ताकत के साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका निभाने का निर्णय लिया है। अगर कांग्रेस उन 43.9% नाराज लोगों को अपनी ओर खींचने में सफल रहती है, जो बदलाव चाहते हैं, तो यह दिल्ली में मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है। कांग्रेस के नेता अपने अभियान के दौरान यह दावे कर रहे हैं कि वे दिल्ली की समस्याओं को सही तरीके से हल करने के लिए तैयार हैं और इस बार दिल्लीवासियों को एक सशक्त विकल्प देंगे।

दिल्ली में BJP मजबूत, AAP की घट सकती हैं सीटें

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की घड़ी नजदीक आ गई है, और इस बार चुनावी मैदान में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधी लड़ाई देखने को मिल रही है। दिल्ली की राजनीति में हर बार दिलचस्प मोड़ देखने को मिलता है, और इस बार भी स्थिति काफी रोचक लग रही है। दिल्ली के राजनीतिक समीकरण और जनता की भावना में कुछ बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक विशेषज्ञ और आम नागरिक दोनों ही अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

AAP की सत्ता पर संकट: एंटी-इंकम्बेंसी का असर

दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने पिछले 10 सालों से सत्ता पर काबिज होने के बावजूद इस बार एंटी-इंकम्बेंसी का असर महसूस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ईमानीदारी और सादगी की छवि पर भी सवाल उठने लगे हैं। शीशमहल घोटाला, भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव से ठीक पहले आठ विधायकों का पार्टी छोड़ना, ये सभी घटनाएं पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं। इन कारणों से पार्टी को नुकसान हो सकता है, और यही एंटी-इंकम्बेंसी का प्रभाव इस बार चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, AAP सरकार बनने की संभावना बरकरार है, लेकिन 2015 और 2020 के मुकाबले इस बार जीत की कहानी थोड़ी अलग हो सकती है।

BJP की मजबूत स्थिति: वोट शेयर में बढ़ोतरी

भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में अपनी स्थिति मजबूत करती नजर आ रही है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है। जहां पहले पार्टी ने सांप्रदायिक मुद्दों पर जोर दिया था, वहीं अब पार्टी संगठन-प्रकोष्ठ पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। BJP ने सभी वर्गों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की है, जिससे उसका वोट शेयर इस बार 40% से ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा को AAP से होने वाले नुकसान का सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, और इस बार बीजेपी की सीटों में भी इजाफा हो सकता है। अनुमान है कि BJP को 23-27 सीटें मिल सकती हैं, जो पिछले चुनावों से ज्यादा हैं।

AAP की मुफ्त योजनाओं के खिलाफ BJP की स्ट्रैटेजी

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता को मुफ्त सुविधाएं देने की योजना बनाई है, जैसे मुफ्त पानी, बिजली, और स्वास्थ्य सेवाएं, लेकिन इस बार BJP ने इसका विरोध करते हुए एक नया नैरेटिव बनाने की कोशिश की है। BJP का कहना है कि दिल्ली सरकार की फ्रीबीज की नीति के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति खराब हो गई है और ये योजनाएं केवल वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा हैं। BJP ने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि AAP सरकार, खुद ही आर्थिक तंगी का शिकार हो गई है और दूसरों की मदद करने में सक्षम नहीं है। उदाहरण के तौर पर पंजाब में महिला सम्मान राशि को लेकर AAP की सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, जो BJP के पक्ष में जा सकता है।

कांग्रेस का प्रभाव: AAP का वोट कटने की संभावना

कांग्रेस भले ही दिल्ली में सत्ता हासिल करने में नाकाम हो, लेकिन इस बार पार्टी का वोट शेयर बढ़ सकता है। कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य आम आदमी पार्टी के वोट को काटना है, और इसके लिए वह अपनी पूरी ताकत झोंक सकती है। पिछले चुनावों में कांग्रेस का वोट शेयर केवल 4.3% था, लेकिन इस बार पार्टी का वोट शेयर 6-7% तक बढ़ सकता है। इस स्थिति में, कांग्रेस भले ही सीधे तौर पर सीटें न जीते, लेकिन उसका वोट शेयर AAP के लिए खतरे की घंटी बन सकता है।

AAP या BJP? वोटिंग से पहले इस सर्वे ने चौंकाया

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए कुछ ही दिन शेष हैं, और इस बार मुकाबला न केवल दो प्रमुख दलों, बल्कि एक नए त्रिकोणीय संघर्ष में तब्दील हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच इस चुनावी दौड़ में सभी की अपनी-अपनी ताकत और रणनीतियाँ हैं। 

एक हालिया ओपिनियन पोल में दिल्ली की राजनीतिक स्थिति पर जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे यह साफ हो गया है कि दिल्ली की जनता का रुझान मुख्यत: आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर बढ़ रहा है। आइए, हम इस सर्वे के निष्कर्षों और चुनावी परिदृश्य का विस्तृत विश्लेषण करें।

आम आदमी पार्टी (AAP) की बढ़ती लोकप्रियता

सर्वे के अनुसार, आम आदमी पार्टी को दिल्ली में जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। पार्टी की प्रमुख योजनाओं— जैसे मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और जनहित की अन्य योजनाओं— ने दिल्लीवासियों के बीच गहरी पैठ बनाई है। दिल्ली सरकार द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधार, विशेषकर मोहल्ला क्लिनिक और सरकारी स्कूलों में सुधार, लोगों के बीच सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

AAP के नेता अरविंद केजरीवाल की छवि भी एक प्रमुख आकर्षण है। उनके नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने नागरिकों के कल्याण के लिए कई नई योजनाओं की शुरुआत की है, जिसने पार्टी को मजबूत बनाया है। इसके साथ ही, पार्टी के कार्यकर्ताओं का नेटवर्क भी मजबूत है, जो चुनावी जमीनी स्तर पर सटीक और प्रभावी तरीके से काम कर रहा है। सर्वे में अनुमान है कि AAP इस बार 50 से 55 सीटों तक पहुंच सकती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) का संघर्ष

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। ओपिनियन पोल में भाजपा को 15 से 20 सीटों का अनुमानित समर्थन मिला है, जो 2015 और 2020 के चुनावों के मुकाबले कम है। BJP ने दिल्ली में विकास कार्यों के नाम पर प्रचार किया है, लेकिन पार्टी के चुनावी अभियान में उतनी उत्साही प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है, जितनी AAP को मिल रही है।

BJP के लिए एक और समस्या यह है कि दिल्ली में कई विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे और दिल्ली के मुद्दे ही प्रधान रहते हैं, और केंद्र सरकार की नीतियाँ हर क्षेत्र में प्रभावी नहीं हो पाती हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति इस बार कुछ नई दिशा में बढ़ती नजर आ रही है, लेकिन सर्वे के परिणाम से यह स्पष्ट है कि दिल्लीवासियों का रुझान AAP की योजनाओं और नीतियों की ओर ज्यादा है। हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नकारा नहीं जा सकता, जो दिल्ली में पार्टी को एक उम्मीद की किरण प्रदान करती है।

कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस की स्थिति इस चुनाव में बहुत कमजोर नजर आ रही है। ओपिनियन पोल में कांग्रेस को केवल 4% वोट मिलने की संभावना जताई गई है, और उसे एक भी सीट मिलने का अनुमान नहीं है। पार्टी के भीतर नेतृत्व संकट और विचारधारा का संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसका सीधा असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है। दिल्ली में कांग्रेस की पुरानी सत्ता को फिर से हासिल करने की उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी हैं, और पार्टी का मुख्य ध्यान केवल अपनी जमीन बचाने पर केंद्रित हो सकता है।

अन्य दलों का प्रभाव

सर्वे के मुताबिक, अन्य दलों को भी 2.9% वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि, इन दलों का दिल्ली विधानसभा चुनाव पर कोई बड़ा प्रभाव डालने की संभावना कम ही है, लेकिन चुनावी माहौल में इनका भी अपना छोटा-सा स्थान हो सकता है। इन दलों की गतिविधियाँ और चुनावी रणनीतियाँ भी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

दिल्ली चुनाव में AAP और BJP में कांटे की टक्कर, नई सर्वे

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव की हलचल अब तेज हो चुकी है। 5 फरवरी को मतदान होने जा रहे हैं, और 8 फरवरी को परिणामों का ऐलान होगा। इस बार चुनावी मुकाबला आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कांटे की टक्कर का है। साथ ही, कांग्रेस भी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए प्रयासरत है।

बीजेपी इस चुनाव में सत्ता वापसी के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। 26 सालों बाद दिल्ली में सत्ता हासिल करने की अपनी उम्मीद को साकार करने के लिए भाजपा ने 'परिवर्तन' का नारा दिया है और अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है।

नई सर्वे में क्या है स्थिति?

जहां तक चुनावी सर्वे का सवाल है, बाजार की स्थिति में हल्का सा फेरबदल देखने को मिला है। फिलहाल, आम आदमी पार्टी दिल्ली चुनाव में फेवरेट मानी जा रही है और 38 से 40 सीटों तक जीतने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। कुछ समय पहले बाजार में अनुमान था कि AAP को 37 से 39 सीटें मिल सकती हैं, लेकिन अब यह आंकड़ा थोड़ा बढ़ गया है, जिससे आम आदमी पार्टी को एक अतिरिक्त सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की स्थिति भी अच्छी कही जा रही हैं। भाजपा के लिए ताजा सर्वे अपडेट के अनुसार, 30 से 32 सीटों तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, ये सभी सिर्फ अनुमानों पर आधारित हैं और असल तस्वीर चुनाव परिणाम के बाद ही साफ होगी। 

बहुमत के लिए चाहिए 36 सीट

दिल्ली विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटों की आवश्यकता है, और फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी इस आंकड़े के पास पहुंच पाती है। अब इंतजार केवल 5 फरवरी के मतदान और 8 फरवरी को आने वाले नतीजों का है, जो तय करेंगे कि दिल्ली की सत्ता पर किसका कब्जा होगा।

AAP या BJP? दिल्ली चुनाव पर नए सर्वे ने उड़ाए होश

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान 5 फरवरी को एक चरण में होने जा रहे हैं और परिणाम 8 फरवरी को आएंगे। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच करीबी मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है। पिछले कुछ दिनों में आए सर्वेक्षणों ने यह स्पष्ट किया है कि इस बार दिल्ली में चुनावी परिणाम बहुत रोचक हो सकते हैं। विशेष रूप से, आम आदमी पार्टी की सीटों में कमी और भारतीय जनता पार्टी की सीटों में इजाफे का अनुमान जताया गया है।

2020 दिल्ली चुनाव का परिणाम और 2025 के मुकाबले की स्थिति

2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 53.57% था। हालांकि, इस बार पार्टी को अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान बढ़ते एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर का सामना करना पड़ सकता है, जो उसके लिए चिंता का विषय बन सकता है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के शासनकाल को लेकर कुछ मुद्दों पर सवाल उठ रहे हैं, जिनमें दिल्ली के बुनियादी ढांचे और जनहित के मुद्दे शामिल हैं। यदि पार्टी के वोट शेयर में 6 से 7 फीसदी की कमी आती है, तो इसके सीधे असर सीटों पर पड़ेगा।

AAP और BJP के बीच कांटे की टक्कर

सर्वेक्षणों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी को इस बार 36 से 38 सीटों के बीच जीत मिल सकती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी का आंकड़ा 31 से 33 सीटों के बीच रहने का अनुमान है। इसका मतलब यह है कि बीजेपी को भी कुछ सीटों में इजाफा हो सकता है, जबकि AAP को पहले के मुकाबले थोड़ा नुकसान हो सकता है। हालांकि, AAP का नेतृत्व पूरी तरह से चुनावी मैदान में मजबूत नजर आ रहा है, लेकिन 2020 के मुकाबले यह स्थिति कुछ बदल सकती है।

कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस के लिए दिल्ली विधानसभा चुनावों में कोई खास उम्मीद नहीं जताई जा रही है। पार्टी के हाथ में केवल एक सीट आने का अनुमान है, जो कि दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस के कमजोर होने की ओर इशारा करता है। पार्टी के लिए दिल्ली में वापसी करना अब और भी कठिन होता जा रहा है।

सामान्य तस्वीर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर हो सकती है। दिल्ली के मतदाता इस बार ज्यादा सतर्क और जागरूक हैं, और उनके वोट्स पूरी तरह से पार्टी के कामकाज और नीतियों पर आधारित होंगे। दिल्ली में 10 साल से सत्ता में रहने के बाद AAP को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है, वहीं भाजपा अपनी मेहनत और प्रचार-प्रसार से सीटों में इजाफा करने की कोशिश कर रही है।

AAP या BJP? नए सर्वे में कौन जीत रहा है दिल्ली?

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर विभिन्न सर्वे रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का कारण बन रही हैं। इनमें से टाइम्स नाउ जेवीसी पोल, सी-वोटर सर्वे और NACDOR सर्वे का विश्लेषण सबसे अहम है। इन सर्वे रिपोर्ट्स में दिल्ली में आगामी चुनावों के परिणाम को लेकर कई दिलचस्प बिंदुओं पर चर्चा की गई है।

टाइम्स नाउ जेवीसी पोल: करीबी मुकाबला

टाइम्स नाउ जेवीसी पोल के मुताबिक, दिल्ली में इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच एक कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। इस सर्वे में यह अनुमान जताया गया है कि आम आदमी पार्टी की सीटों में गिरावट हो सकती है। हालांकि, सर्वे में यह भी बताया गया है कि महिला वोटर्स इस बार चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

महिला वोटर्स के लिए किए गए वादे, जैसे मुफ्त सेवाएं और कल्याणकारी योजनाएं, खासकर दिल्ली के वोटर्स को आकर्षित कर रही हैं। सर्वे का निष्कर्ष यह है कि इस बार आम आदमी पार्टी की सीटों में गिरावट हो सकती है, लेकिन चुनाव परिणाम पूरी तरह से अनिश्चित है और महिला वोटरों का रुझान महत्वपूर्ण होगा।

सी-वोटर सर्वे: फिर से AAP की सरकार?

सी-वोटर सर्वे के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को फिर से सत्ता में आने की संभावना है। इस सर्वे में 51 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी एक बार फिर सत्ता में आ सकती है। वहीं, 42 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इस बार सत्ता परिवर्तन हो सकता है और भाजपा दिल्ली की सरकार बना सकती है।

दिल्ली में भाजपा के पक्ष में रुझान बढ़ने का कारण यह है कि जिन लोगों ने सत्ता बदलने की इच्छा जताई, वे कांग्रेस की जगह भाजपा को अपना समर्थन दे सकते हैं। सर्वे में यह भी कहा गया है कि इस बार विधानसभा चुनावों में भाजपा की सीटें बढ़ सकती हैं। हालांकि, करीब 10 से 15 प्रतिशत लोगों ने कहा कि चुनाव परिणाम काफी असमंजस में रह सकते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह चुनाव कांटे की टक्कर वाला हो सकता है।

NACDOR सर्वे: दलित वोटर्स का महत्व ज्यादा 

राष्ट्रीय दलित संगठनों के परिसंघ (NACDOR) ने दलित समुदाय के वोटर्स पर आधारित एक सर्वे किया, जिसमें दिल्ली के 6,256 लोगों को शामिल किया गया। इस सर्वे के अनुसार, दलित वोटर्स का झुकाव इस बार आम आदमी पार्टी की ओर अधिक है।

सर्वे में पाया गया कि 44 प्रतिशत दलित वोटर आम आदमी पार्टी को वोट देने की योजना बना रहे हैं, जबकि 32 प्रतिशत भाजपा और 21 प्रतिशत कांग्रेस के पक्ष में हैं। NACDOR सर्वे के अनुसार, दलित समुदाय की तरफ से आम आदमी पार्टी को 35 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा को 28 और कांग्रेस को सात सीटों का समर्थन मिल सकता है।

फलोदी सट्टा बाजार ने लगाया AAP के हार-जीत का अनुमान?

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के सट्टा बाजार में इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। फलोदी सट्टा बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है, हालांकि दिल्ली चुनाव 2025 की कुछ प्रमुख सीटों पर खासा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

आम आदमी पार्टी की संभावित वापसी

फलोदी सट्टा बाजार के अनुसार, इस बार आम आदमी पार्टी की वापसी की उम्मीद जताई जा रही है। अनुमानित तौर पर AAP को 36 से 38 सीटों तक मिल सकती हैं, हालांकि सट्टा बाजार में यह भी माना जा रहा है कि भाजपा को 31 से 33 सीटों के बीच हार का सामना करना पड़ सकता है। इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर प्रतीत हो रहा है और उसे केवल एक सीट मिलने का अनुमान है।

नई दिल्ली सीट पर जीत की संभावना

दिल्ली की नई दिल्ली सीट पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मुकाबला भाजपा के प्रवेश वर्मा और कांग्रेस के संदीप दीक्षित से है। सट्टा बाजार में अरविंद केजरीवाल की जीत को लेकर 65/85 पैसे तक के भाव लगाए गए हैं, जो उनकी जीत की संभावना को दर्शाते हैं। प्रवेश वर्मा, जो पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं, और संदीप दीक्षित, जो शीला दीक्षित के बेटे हैं, इन दोनों के खिलाफ केजरीवाल की स्थिति मजबूत बताई जा रही है।

जंगपुरा सीट पर मनीष सिसोदिया की चुनौती

जंगपुरा सीट पर इस बार आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जीत की उम्मीद जताई जा रही है। सिसोदिया ने पटपड़गंज सीट को छोड़कर जंगपुरा से चुनाव लड़ा है। उनके खिलाफ भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाह और कांग्रेस के फरहाद सूरी की चुनौती होगी। सट्टा बाजार में मनीष सिसोदिया की जीत के भाव 55/70 पैसे तक हैं, जो उनकी जीत की संभावना को दर्शाते हैं।

पटपड़गंज सीट पर अवध ओझा की उम्मीद

पटपड़गंज सीट पर आम आदमी पार्टी ने चर्चित शिक्षक अवध ओझा को उम्मीदवार बनाया है। ओझा का मुकाबला भाजपा के रविंदर सिंह नेगी और कांग्रेस के अनिल चौधरी से होगा। सट्टा बाजार में अवध ओझा की जीत के लिए 37/47 पैसे तक के भाव लगाए गए हैं, जो इस सीट पर उनकी स्थिति को मजबूत बताते हैं।

कालकाजी सीट पर आतिशी मार्लेना की उम्मीद

दिल्ली की प्रमुख सीटों में से एक कालकाजी पर भी सट्टा बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं। आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार और दिल्ली की मौजूदा शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना इस सीट पर भाजपा के रमेश बिधूड़ी और कांग्रेस की अलका लांबा से मुकाबला करेंगी। सट्टा बाजार में आतिशी की जीत के भाव 25/33 पैसे हैं, जो उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं।

AAP या BJP: दिल्ली की 70 सीटों के सर्वे ने सबको चौंकाया

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों को लेकर अब तक के किए गए सर्वे और सट्टा बाजार के अनुमानों ने राजनीति के हर प्रशंसक को चौंका दिया है। आगामी 5 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), और कांग्रेस सहित प्रमुख दलों ने दिल्ली के मतदाताओं को लुभाने के लिए अनगिनत लोकलुभावन वादे किए हैं। दिल्ली की 70 सीटों पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि सभी पार्टियां अपनी पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP): तीसरी बार सत्ता में आने की चुनौती

AAP के लिए यह चुनाव बहुत अहम साबित हो सकता है। पार्टी ने पिछले दो कार्यकालों में दिल्ली की सत्ता पर अपना कब्जा जमाया, लेकिन अब उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में AAP लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की उम्मीद कर रही है, लेकिन इस बार उसे कई चुनौतियाँ झेलनी पड़ रही हैं। पार्टी की सबसे बड़ी समस्या है मतदाताओं की उदासीनता और सत्ता विरोधी भावना। दिल्ली में रहने वाले लोग अब कुछ खास बदलाव महसूस नहीं कर रहे, और यही बात पार्टी के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।

इसके अलावा, भ्रष्टाचार के आरोप और नागरिक सेवाओं में सुधार की कमी ने भी AAP की छवि को प्रभावित किया है। हालांकि, AAP की कल्याणकारी योजनाएं जैसे मुफ्त बिजली, पानी, और शिक्षा की क्षेत्र में किए गए सुधारों ने पार्टी की लोकप्रियता को बनाए रखा है, लेकिन सवाल ये है कि क्या ये योजनाएं इस बार भी पार्टी को फायदा पहुंचाएंगी?

भारतीय जनता पार्टी (BJP): सत्ता पर फिर से कब्जा करने की रणनीति

दिल्ली में करीब तीन दशकों से सत्ता से बाहर चल रही बीजेपी ने इस बार AAP और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। बीजेपी ने जोर शोर से AAP के खिलाफ भ्रष्टाचार और शासन के आरोप लगाए हैं, और उसने चुनावी प्रचार में 'केजरीवाल सरकार' की नाकामियों को उजागर किया है। बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के नागरिकों के लिए कोई विशेष कार्य नहीं किया और केवल अपनी छवि सुधारने के लिए योजनाएं लागू की हैं।

हालांकि, बीजेपी की मुश्किल यह है कि दिल्ली में कोई विश्वसनीय चेहरा नहीं है जो पार्टी के पक्ष में काम कर सके। अरविंद केजरीवाल ने अपने प्रभावशाली नेतृत्व और कार्यों से दिल्लीवासियों के दिलों में अपनी जगह बनाई है, जिससे बीजेपी को परेशानी हो रही है। फिर भी, पार्टी ने उम्मीद जताई है कि इस बार उसे बीजेपी की तिकड़ी के रूप में समर्थन मिलेगा, और यदि वह इस बार सत्ता में आती है, तो दिल्ली के विकास को तेज करेगी।

कांग्रेस: खोने को कुछ नहीं, लेकिन विरोध में मजबूती

कांग्रेस पार्टी, जो पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली में सक्रिय नहीं रही है, ने अब चुनावी मैदान में एंट्री ली है। कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, और शायद यही वजह है कि उसने चुनावी अभियान में देर से भाग लिया। पार्टी का मुख्य उद्देश्य AAP को सत्ता से हटाना और केजरीवाल की नीतियों का विरोध करना है। कांग्रेस ने अपने पुराने वादों को दोहराते हुए दिल्ली के विकास की बात की है, और केजरीवाल के खिलाफ आंदोलन छेड़ा है।

कांग्रेस के पास इस चुनाव में एक मौका हो सकता है, क्योंकि अगर उसे लोगों का थोड़ा भी समर्थन मिल गया, तो वह दिल्ली की सत्ता में अपनी वापसी कर सकती है। हालांकि, पार्टी के पास न तो मजबूत चेहरा है, न ही स्पष्ट चुनावी रणनीति, फिर भी कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार है।

सट्टा बाजार और ओपिनियन पोल्स: AAP की वापसी की संभावना

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से पहले किए गए ऑपिनियन पोल्स और सट्टा बाजार के अनुमानों ने AAP को बढ़त दी है। हालांकि, चुनावों से पहले दो हफ्ते में सट्टा बाजार ने कुछ बदलाव दिखाए हैं, लेकिन फिर भी AAP को 70 सदस्यीय विधानसभा में 36 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार करने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपनी ताकत से AAP को चुनौती दे रही हैं, ऐसे में दिल्ली के मतदाताओं की इच्छा और उनकी प्राथमिकताएं चुनावों के नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं।

AAP या BJP? नई सर्वे, योगी ने पलट दिया पूरा खेल

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर हाल ही में आए एक नए सर्वे ने राजनीति के मैदान में हलचल मचा दी है। यह सर्वे सी-वोटर द्वारा किया गया है, जिसमें दिल्ली के आगामी चुनाव परिणामों को लेकर दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे में पाया गया कि 51% लोगों का मानना है कि इस बार फिर से आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बन सकती है, जबकि 42% लोगों ने कहा है कि दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हो सकता है।

बता दें की इन राजनीतिक समीकरणों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन दिल्ली में एक नया मोड़ ला सकता है। योगी आदित्यनाथ आगामी दिनों में दिल्ली में कई जनसभाओं को संबोधित करेंगे, जो शायद बीजेपी को फायदा पहुंचा सकती हैं। 

सीएम योगी मंगलवार को गाजियाबाद से विमान द्वारा नई दिल्ली पहुंचने के बाद, मंगोलपुरी, जेजे कॉलोनी और इंदिरापुरी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। यह जनसभाएं बीजेपी के लिए एक मजबूत रणनीतिक कदम हो सकती हैं, खासकर तब जब दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है।

वहीं, राजस्थान के फलौदी सट्टा बाजार की मानें तो आम आदमी पार्टी को 39 से 41 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि बीजेपी को 29 से 31 सीटें मिल सकती हैं। इस सर्वे के मुताबिक कांग्रेस का कोई ठोस आधार नजर नहीं आ रहा है, और सट्टा बाजार में कांग्रेस के लिए कोई अच्छी उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।

ऐसे में सवाल ये है कि क्या योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति बीजेपी को चुनावी बढ़त दिला पाएगी, या फिर आम आदमी पार्टी अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखेगी। दिल्ली विधानसभा चुनाव की घड़ी करीब आ रही है, और राजनीतिक माहौल बेहद दिलचस्प हो चुका है।

जबकि, कांग्रेस के लिए इस बार भी स्थिति चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है, क्योंकि उसे लगातार दिल्ली की राजनीति में पिछड़ते हुए देखा गया है। वहीं बीजेपी और आप के बीच तीव्र संघर्ष नजर आ रहा है, जिसमें दोनों पार्टियां दिल्ली की सत्ता पर कब्जा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं।

AAP या BJP? दिल्ली में किसकी होगी जीत: सर्वे

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के लिए सियासी माहौल गर्मा गया है। 5 फरवरी को दिल्ली में मतदान होगा, और 8 फरवरी को परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस बार दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच जोरदार मुकाबला हो रहा है। हालांकि परिणाम क्या होंगे, इसका पक्का अनुमान तो परिणामों के बाद ही मिलेगा, लेकिन ताजा सर्वे और राजनीतिक विश्लेषण से यह साफ है कि महिलाओं का वोट इस चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाला है।

महिलाओं की अहम भूमिका

सी वोटर के के मुताबिक, इस चुनाव में महिलाएं निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के वोटरों के बीच सबसे ज्यादा झुकाव आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर देखा जा रहा है। दिल्ली में AAP की सरकार की प्रमुख योजनाएं, जैसे कि मोहल्ला क्लीनिक, मुफ्त बिजली, पानी और शिक्षा जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच अपनी पकड़ बनाई है। इससे पार्टी को एक बड़ा फायदा हो सकता है। यदि यह लीड बनी रही, तो भले ही AAP की सीटों में कमी आए, फिर भी वह सरकार बनाने में सक्षम हो सकती है।

भाजपा के लिए चुनौती

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस चुनाव में महिलाओं को लुभाने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया है। BJP ने महिलाओं के लिए अपने प्रचार में ताकत डाली है, और साथ ही पार्टी की ओर से हिंदुत्व के एजेंडे, जातिगत समीकरणों और अपने स्टार प्रचारकों के जरिए बीजेपी ने चुनावी मैदान में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। हालांकि, महिलाओं के बीच AAP के मुकाबले BJP को लगभग 8-10 प्रतिशत कम समर्थन मिलता हुआ दिखाई दे रहा है, जो भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

वोटिंग के आंकड़े और सर्वे

सी वोटर के 15 जनवरी के सर्वे के मुताबिक, 51 प्रतिशत वोटर AAP के पक्ष में खड़े हैं, जबकि 45 प्रतिशत वोटर सरकार में बदलाव की मांग कर रहे हैं। बदलाव की बात करने वाले लोग, विशेष रूप से कांग्रेस के मुकाबले BJP को प्राथमिकता दे रहे हैं। सी वोटर के आंकड़ों में यह भी सामने आया कि BJP की सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर अगर वोटों का ध्रुवीकरण हुआ तो। भाजपा ने अपनी प्रचार रणनीति में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अफजल गुरु के मुद्दे को भी उठाया है, जो समाज के एक वर्ग में अपनी छाप छोड़ सकता है।

पिछले चुनावों के मुकाबले स्थिति

पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार आम आदमी पार्टी को कुछ हद तक फायदा हुआ है। 2020 में AAP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी, और अब पार्टी को इसी जीत को बरकरार रखने की चुनौती है। जबकि भाजपा भी अपनी पूरी ताकत से मैदान में उतरी है, और इस बार सीटों की संख्या में बढ़ोतरी का दावा कर रही है।

दिल्ली चुनाव में सीएम योगी करेंगे 14 जनसभाएं

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति को और तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए अपनी धुआंधार चुनावी प्रचार शुरुआत कर दी है। 

योगी आदित्यनाथ गुरुवार, 23 जनवरी से दिल्ली में चुनाव प्रचार करेंगे। उनके नेतृत्व में पार्टी पूरे जोर-शोर से आगामी चुनावी लड़ाई में उतरने के लिए तैयार है। सीएम योगी दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में 14 जनसभाएं करेंगे। इन जनसभाओं के माध्यम से मुख्यमंत्री भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगेंगे। 

बता दें की उनकी पहली जनसभा 23 जनवरी को किराड़ी विधानसभा के दुर्गा चौक प्रेम नगर में होगी, जो साढ़े तीन बजे से शुरू होगी। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के उम्मीदवार बजरंग शुक्ला के पक्ष में प्रचार करेंगे। बजरंग शुक्ला सुलतानपुर के निवासी हैं और इस क्षेत्र में पूर्वांचल के लोगों की बड़ी संख्या है।

इसके बाद, मुख्यमंत्री की दूसरी जनसभा 23 जनवरी को ही शाम 4:50 बजे करोल बाग विधानसभा के देवनगर में होगी, जहां भाजपा प्रत्याशी दुष्यंत गौतम के लिए मुख्यमंत्री वोट मांगेंगे। जनकपुरी विधानसभा के 40 फुटा रोड पंखा रोड पर योगी आदित्यनाथ की तीसरी जनसभा होगी, जो शाम 6 बजे से आयोजित होगी। यहां भाजपा के उम्मीदवार आशीष सूद के समर्थन में योगी प्रचार करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 जनवरी से 1 फरवरी तक 14 जनसभाएं करने वाले हैं, जिनमें 28 और 30 जनवरी तथा 1 फरवरी को भी योगी दिल्ली में होंगे। चुनावी प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करेंगे, जिनमें घोंडा, शाहदरा, उत्तम नगर, द्वारका, बिजवासन, पालम, राजेंद्र नगर और पटपड़गंज जैसे क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगेंगे।