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सम्राट कैबिनेट के 10 बड़े फैसले, बिहारवासियों के लिए आई खुशखबरी

पटना। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में कुल 10 फैसलों को मंजूरी दी गई। इनमें कुशल युवा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने, निजी आईटीआई में संयुक्त प्रवेश और निजी बीएड संस्थानों को बहुविषयक कॉलेज के रूप में विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।

पांच साल और चलेगा कुशल युवा कार्यक्रम

सरकार ने कुशल युवा कार्यक्रम को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए 2026-27 में करीब 430.08 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार करना है।

AI, ड्रोन और डिजिटल क्षेत्र में प्रशिक्षण

समय के साथ रोजगार के बदलते स्वरूप को देखते हुए प्रशिक्षण में नए क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सोलर, नेटवर्किंग, डिजिटल मार्केटिंग और वेब टेक्नोलॉजी के साथ होम नर्सिंग और मेडिकल से जुड़े कौशल भी सिखाए जाएंगे। सरकार की योजना के मुताबिक करीब 6,436 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से हर साल लगभग 2.57 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है।

निजी बीएड कॉलेजों को नए विकल्प

एकल निजी बीएड संस्थानों को बहुविषयक डिग्री कॉलेज के रूप में विकसित करने का रास्ता भी साफ किया गया है। पात्र संस्थानों में बीएड के अलावा कला, विज्ञान और वाणिज्य जैसे स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय, यूजीसी, एनसीटीई और राज्य सरकार के नियमों का पालन करना होगा।

निजी ITI में प्रवेश व्यवस्था बदलेगी

कैबिनेट ने निजी आईटीआई में दाखिले को लेकर भी अहम फैसला लिया है। निजी संस्थानों की 50 प्रतिशत सीटों पर संयुक्त प्रवेश प्रक्रिया के जरिए नामांकन कराने का प्रावधान किया गया है। इससे प्रवेश प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

युवाओं और छात्रों पर फोकस

कैबिनेट के फैसलों से साफ है कि सरकार का जोर युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने पर है। आधुनिक कौशल प्रशिक्षण से युवाओं को नौकरी के साथ अपना काम शुरू करने का अवसर भी मिल सकता है। वहीं बहुविषयक कॉलेजों के विस्तार से विद्यार्थियों को अपने आसपास ही उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है।

बिहार के स्कूलों में शिक्षकों का होगा ‘रोटेशन’ जानें पूरी डिटेल्स!

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से एक ही विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है। शिक्षा विभाग की प्रस्तावित सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया में पांच साल या उससे अधिक समय से एक ही स्कूल में पदस्थापित शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जा सकता है। इससे ऐसे शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ी है।

लंबे समय से तैनात शिक्षकों पर नजर

बताया जा रहा है कि निर्धारित श्रेणी में आने वाले शिक्षकों के लिए स्थानांतरण प्रक्रिया में आवेदन करना जरूरी किया जा सकता है। यदि कोई पात्र शिक्षक आवेदन नहीं करता है तो विभागीय स्तर से उसका स्थानांतरण किए जाने की संभावना भी है। हालांकि, अंतिम प्रक्रिया विभागीय नियम और गठित कमेटी के निर्णय के आधार पर तय होगी।

सरप्लस शिक्षकों को भी किया जा सकता है शिफ्ट

शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को संतुलित करना है। जिन विद्यालयों में जरूरत से अधिक शिक्षक हैं, वहां से सरप्लस शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजा जा सकता है जहां किसी विषय के शिक्षकों की कमी है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विषयवार शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकें।

सिर्फ कुल संख्या से नहीं तय हो जरूरत

शिक्षकों का कहना है कि किसी स्कूल में शिक्षकों की जरूरत का आकलन केवल छात्र और शिक्षक की कुल संख्या देखकर नहीं किया जाना चाहिए। कई विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक पर्याप्त हैं, जबकि छठी से आठवीं तक हिंदी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

स्पष्ट नियम की मांग

स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों के बीच आवेदन और नियमों को लेकर असमंजस भी है। शिक्षक चाहते हैं कि विभाग स्थानांतरण की पूरी नीति, पात्रता और प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करे। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से कहा गया है कि शिक्षकों का स्थानांतरण विभागीय नियमों के अनुसार ही होगा और इस संबंध में गठित कमेटी निर्णय लेगी। अगर यह प्रक्रिया लागू होती है तो इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों का समान वितरण और विषयवार कमी को दूर करना होगा, ताकि जरूरत वाले विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हो सकें।

बिहार सरकार की बड़ी तैयारी, जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी!

पटना। बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को व्यवस्थित और डिजिटल बनाने के लिए चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण को लेकर सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने पांच जिलों में चल रहे सर्वे कार्य की समीक्षा की। शिवहर, अरवल, जहानाबाद, लखीसराय और शेखपुरा में सर्वे का काम अब अंतिम चरण में बताया गया है।

जल्द दूसरे जिलों में भी बढ़ेगी रफ्तार

समीक्षा के दौरान अधिकारियों को सर्वे प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इन पांच जिलों में काम पूरा होने के बाद अगले चरण के जिलों का चयन कर वहां सर्वेक्षण को गति देने की तैयारी है। सरकार ने पूरे विशेष भूमि सर्वेक्षण को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?

सर्वे पूरा होने के बाद जमीन से जुड़े नक्शे, खतियान और अधिकार अभिलेख डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी और फर्जीवाड़े, अवैध कब्जे तथा एक ही जमीन की कई बार बिक्री जैसे विवादों पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी। दाखिल-खारिज और पारिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है।

रैयतों को नहीं देना होगा कोई शुल्क

विशेष भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया सरकार की ओर से पूरी तरह निशुल्क रखी गई है। जमीन मालिकों को अमीन, कानूनगो या शिविर प्रभारी को इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना है। सर्वे के दौरान अमीन मौके पर पहुंचकर जमीन की सीमाओं की जांच करेंगे और आधुनिक उपकरणों की मदद से प्लॉट का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

बिहार के लोगों की बल्ले-बल्ले! केंद्र सरकार ने दिया बड़ा तोहफा

पटना। बिहार के शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजना के तहत राज्य में 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) और 434 अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWC) के संचालन को मंजूरी दी गई है। यानी कुल 598 स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए लोगों तक प्राथमिक इलाज की सुविधा पहुंचाने की तैयारी है।

₹2 में ओपीडी, कई सुविधाएं मुफ्त

इन स्वास्थ्य केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीजों को डॉक्टर से परामर्श के लिए सिर्फ 2 रुपये का ओपीडी पर्चा लेना होगा। इसके अलावा जरूरी दवाएं और कई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। यहां बीपी और शुगर की जांच, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

तय समय पर चलेगी ओपीडी

UPHC में मरीजों के लिए ओपीडी सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी। वहीं UHWC का संचालन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। इससे खासकर शहरी गरीब और स्लम इलाकों में रहने वाले लोगों को नजदीक ही प्राथमिक उपचार मिल सकेगा।

पटना के 11 केंद्र होंगे अपग्रेड

राजधानी पटना में पहले से संचालित 11 जन सेवा केंद्रों को आधुनिक शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी स्वास्थ्य केंद्र शुरू किए जाने की योजना है। इससे छात्रों और आसपास की आबादी को भी नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

बिहार में बनेगा रिंग रोड, इन 3 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार की राजधानी पटना को जाम से राहत देने और उत्तर व दक्षिण बिहार के बीच आवागमन आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। पटना रिंग रोड के कन्हौली-शेरपुर हिस्से में छह लेन ग्रीनफील्ड सड़क का निर्माण अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। करीब 9 किलोमीटर लंबी इस सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है।

इस परियोजना पर करीब 778 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्र और राज्य सरकार इस लागत को आधा-आधा वहन कर रही हैं। परियोजना के लिए लगभग 177 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। इसमें करीब 71 एकड़ बिहटा और 105 एकड़ मनेर अंचल में है। संबंधित गांवों के रैयतों के दस्तावेजों की जांच के साथ मुआवजा देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

पटना शहर को मिलेगी जाम से राहत

कन्हौली के पास बनने वाला जंक्शन कन्हौली-रामनगर, दानापुर-बिहटा और शेरपुर-कन्हौली मार्ग से जुड़ेगा। कन्हौली गोलंबर की ओर जाने के लिए करीब 1.5 किलोमीटर लंबा रैंप भी बनाया जाएगा। इसके बाद भारी वाहनों को पटना शहर में प्रवेश करने की जरूरत कम हो जाएगी।

छपरा, सीवान और मुजफ्फरपुर की तरफ से आने वाले मालवाहक वाहन शेरपुर-कन्हौली मार्ग के जरिए सीधे दक्षिण बिहार और झारखंड की ओर जा सकेंगे। इससे दानापुर, खगौल, सगुना मोड़ और बेली रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।

बिहटा और मनेर के लोगों को भी फायदा

छह लेन सड़क के बिहटा-दानापुर एलिवेटेड रोड से जुड़ने के बाद बिहटा एयरपोर्ट, आईआईटी पटना और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है। मनेर और बिहटा क्षेत्र के कई गांवों को भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी।

पटना, सारण और वैशाली से जुड़ेगा नेटवर्क

शेरपुर-कन्हौली सड़क का नेटवर्क पटना, सारण और वैशाली जिलों को जोड़ेगा। शेरपुर-दिघवारा के बीच बन रहे गंगा पुल से भी इसका संपर्क होगा। आगे यह मार्ग बिहटा-सरमेरा रोड और कच्ची दरगाह-बिदुपुर गंगा पुल से जुड़ेगा। दिघवारा से बिदुपुर के बीच चल रहा सड़क निर्माण पूरा होने के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

बिहार के शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी! 1 नवंबर से लागू होगा नया सिस्टम

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। अब छुट्टी लेने के लिए शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। राज्य सरकार 1 नवंबर से छुट्टी की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षक घर बैठे छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे।

सरकार की योजना के मुताबिक, छुट्टी के आवेदन पर अधिकतम 48 घंटे के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था की जाएगी। इससे शिक्षकों को आवेदन के बाद लंबे समय तक जवाब का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

ऑनलाइन होगी छुट्टी की पूरी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को छुट्टी के लिए डिजिटल माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित अधिकारी के पास ऑनलाइन पहुंचेगा और वहीं से उसकी जांच के बाद मंजूरी या अस्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे कागजी आवेदन और कार्यालयों में अनावश्यक भागदौड़ कम होने की उम्मीद है। साथ ही छुट्टी के आवेदनों की निगरानी भी आसान हो सकेगी।

देरी हुई तो अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने छुट्टी के आवेदन को समय पर निपटाने पर भी जोर दिया है। तय समय सीमा के भीतर आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने या अनावश्यक देरी करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पटना कॉलेजिएट स्कूल के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिक्षकों की सुविधाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी दी।

मॉडल स्कूलों में मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

वहीं, राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ छात्रों के लिए भी नई पहल की जा रही है। मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों को मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने की व्यवस्था की गई है। इन स्कूलों में छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर तैयारी का अवसर देना है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल का प्रभाव अगले दो-तीन वर्षों में बेहतर तरीके से दिखाई देगा।

बिहारवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जन्म-मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाना आसान!

पटना। बिहार में जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने इन प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों में नोटरी पब्लिक के शपथपत्र को मान्यता देने को लेकर अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इससे प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान लोगों को होने वाली अनावश्यक परेशानी कम हो सकती है।

सरकार के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि नियम के अनुसार नोटरी पब्लिक द्वारा तैयार किए गए शपथपत्र को स्वीकार करने में बेवजह अड़चन न आए। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जिन्हें प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अंचल कार्यालयों में प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

नोटरी के शपथपत्र को लेकर निर्देश

राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में पहले दिए गए प्रशासनिक निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अधिकृत नोटरी के समक्ष तैयार और दर्ज किए गए शपथपत्र को कानूनी प्रावधानों के अनुसार मान्यता दी जानी चाहिए। इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटरी पब्लिक से शपथपत्र तैयार कराया है, तो केवल नोटरी के सामने बनाए जाने के आधार पर उसे अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

लोगों को बार-बार कार्यालय जाने से राहत

जन्म, मृत्यु या वंशावली प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वाले लोगों को दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया में कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर शपथपत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर उन्हें दोबारा कार्यालय जाना पड़ सकता है। सरकार के निर्देश से ऐसी दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। यदि शपथपत्र नियमों के अनुरूप है, तो उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

आवेदन के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी

सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही, यदि किसी स्तर पर नोटरी पब्लिक के वैध शपथपत्र को लेकर समस्या सामने आती है, तो उसे दूर करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है। इस व्यवस्था से प्रमाण पत्र बनवाने वाले आम लोगों को प्रक्रिया समझने और दस्तावेज जमा करने में पहले की तुलना में आसानी होने की उम्मीद है।

बिहार में गरीबों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी सौगात

पटना। बिहार के शहरी इलाकों में रहने वाले गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने शहरों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 598 नए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को मंजूरी दी है। इन केंद्रों का खास फायदा स्लम बस्तियों और जरूरतमंद लोगों को मिलेगा। इन 598 केंद्रों में 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWC) शामिल हैं।

सिर्फ 2 रुपये में ओपीडी की सुविधा

नए स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ काफी कम खर्च में मिलेगा। ओपीडी में इलाज के लिए केवल 2 रुपये का पर्चा शुल्क लिया जाएगा। केंद्रों पर मुफ्त दवाओं और जांच समेत कई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी। UPHC का संचालन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक, जबकि UHWC सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित किए जाएंगे।

एक ही जगह मिलेंगी कई सुविधाएं

इन केंद्रों पर सामान्य बीमारियों के इलाज के अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वास्थ्य परामर्श और संचारी रोगों की जांच जैसी सुविधाएं मिलेंगी। गैर-संचारी रोगों की जांच और दवा वितरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

स्लम इलाकों पर रहेगा विशेष फोकस

सरकार की योजना शहरी गरीबों तक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंचाने की है। जरूरत वाले स्लम क्षेत्रों में किराये के भवनों में स्वास्थ्य केंद्र चलाने के साथ स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जा सकेंगे। इससे लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी।

गरीब परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा

598 नए केंद्रों के जरिए शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक इलाज लोगों के करीब पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। खासकर कम आय वाले परिवारों के लिए कम शुल्क में ओपीडी इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बड़ी राहत साबित हो सकती है।

बिहार में राशन कार्ड को लेकर अपडेट, लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के उन परिवारों के लिए राहत की खबर है, जिनका नाम किसी कारण से राशन कार्ड की सूची से बाहर हो गया है। ऐसे पात्र परिवार अब दोबारा राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की व्यवस्था के तहत पात्रता पूरी करने वाले परिवारों को फिर से आवेदन का अवसर दिया जा रहा है।

आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। विभाग आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित परिवार की जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन करेगा। जांच में यदि परिवार सरकारी खाद्यान्न योजना के लिए पात्र पाया जाता है, तो उसका नाम दोबारा राशन कार्ड में शामिल किया जा सकता है।

ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

राशन कार्ड के लिए दोबारा आवेदन करने वाले लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन लोगों को खुद ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी है, वे नजदीकी साइबर कैफे या वसुधा केंद्र की सहायता ले सकते हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी आवेदन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। लाभुकों के लिए माय राशन ऐप भी एक विकल्प है, जिसके माध्यम से पात्र परिवार घर बैठे आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

आवेदन से पहले दस्तावेज रखें तैयार

आवेदन करते समय जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। परिवार के मुखिया के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड की जानकारी मांगी जा सकती है। इसके अलावा परिवार की फोटो और निवास से संबंधित प्रमाण भी तैयार रखना चाहिए। जरूरत के अनुसार आय प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी भी देनी पड़ सकती है। आवेदन से पहले संबंधित पोर्टल या विभाग की ओर से मांगे गए दस्तावेजों की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि बाद में आवेदन में कोई कमी न रह जाए।

फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान

ऑनलाइन आवेदन में परिवार के सदस्यों का नाम, आधार से जुड़ी जानकारी और अन्य विवरण सावधानी से भरना चाहिए। किसी दस्तावेज में नाम या दूसरी जानकारी अलग होने पर सत्यापन के दौरान परेशानी आ सकती है। इसलिए आवेदन जमा करने से पहले पूरे फॉर्म को दोबारा जांचना बेहतर होगा। सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करने के बाद ही आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट करें।

बिहार में मुखिया बनने की तैयारी में हैं? पहले जान लें पूरी पात्रता

पटना। बिहार में अगले पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में राजनीतिक हलचल धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल वर्ष 2026 के आखिर में पूरा होने की संभावना के बीच संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई गांवों में संभावित दावेदार लोगों से संपर्क साधने और अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।

हालांकि मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों को केवल जनसंपर्क और राजनीतिक समीकरण पर ध्यान देने के बजाय कानूनी पात्रता और अयोग्यता के नियमों को भी समझना जरूरी है। नियमों पर खरा नहीं उतरने की स्थिति में नामांकन के स्तर पर ही परेशानी हो सकती है।

परिसीमन के बाद बदल सकता है चुनावी समीकरण

आगामी पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाना है। आबादी और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार पंचायतों और वार्डों की संरचना में बदलाव हो सकता है। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या और आरक्षण व्यवस्था में भी बदलाव संभव है। इसका सीधा असर मुखिया पद के संभावित दावेदारों पर पड़ेगा। किसी पंचायत की सीट आरक्षित होने या सामान्य होने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

मुखिया चुनाव के लिए 21 साल उम्र जरूरी

मुखिया पद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र का व्यक्ति पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए उम्मीदवार नहीं बन सकता। इसके साथ ही मतदाता सूची से जुड़ी पात्रता भी महत्वपूर्ण है। चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को संबंधित चुनाव क्षेत्र से जुड़े मतदाता संबंधी नियमों का पालन करना होगा। इसलिए नामांकन से पहले मतदाता सूची में अपने नाम और अन्य विवरण की जांच करना समझदारी होगी।

सरकारी नौकरी करने वालों को ध्यान

सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों के लिए चुनाव लड़ने को लेकर अलग नियम लागू होते हैं। केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी सामान्य तौर पर अपने पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते। इसी तरह स्थानीय निकाय या ऐसे पदों पर काम करने वाले लोगों की पात्रता भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होती है। संभावित उम्मीदवारों को नामांकन से पहले अपनी नौकरी या पद की स्थिति की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए।

लाभ के पद से जुड़ा नियम भी अहम

यदि कोई व्यक्ति पंचायत के अधीन ऐसा पद रखता है जिससे उसे वेतन या अन्य लाभ प्राप्त होता है, तो यह चुनाव लड़ने की पात्रता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उम्मीदवार को यह देखना होगा कि उसके पास ऐसा कोई पद तो नहीं है, जिसे कानून के तहत चुनावी अयोग्यता का आधार माना जा सकता है।

नागरिकता और मानसिक स्वास्थ्य

मुखिया पद के लिए उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना आवश्यक है। इसके अलावा कानून में कुछ ऐसी परिस्थितियों का भी उल्लेख है, जिनमें व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकता है। उदाहरण के तौर पर सक्षम न्यायिक प्राधिकरण द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किए जाने की स्थिति में चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए नामांकन के समय उम्मीदवार की कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।

सजा और बर्खास्तगी का भी असर

सरकारी सेवा से गंभीर कदाचार के कारण बर्खास्त किए गए व्यक्ति के मामले में भी चुनावी अयोग्यता के प्रावधान लागू हो सकते हैं। वहीं आपराधिक मामले में अदालत से हुई दोषसिद्धि और सजा की प्रकृति के आधार पर भी चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना एक जैसी स्थिति नहीं है। इसलिए आपराधिक मामलों से जुड़े संभावित उम्मीदवारों को अपने मामले की कानूनी स्थिति के आधार पर नियमों की जांच करनी चाहिए।

दस्तावेजों की तैयारी पहले से रखें पूरी

चुनाव की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद दस्तावेज तैयार करने के लिए समय कम मिल सकता है। ऐसे में संभावित उम्मीदवारों को अपनी उम्र से जुड़े प्रमाण, मतदाता सूची में विवरण, नागरिकता और आरक्षण श्रेणी से संबंधित जरूरी दस्तावेजों की स्थिति पहले ही जांच लेनी चाहिए। साथ ही नामांकन के समय निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा मांगे जाने वाले दस्तावेज और शपथपत्र से जुड़ी आवश्यकताओं को भी ध्यान से समझना होगा।

अंतिम नियमों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से लें

बिहार पंचायत चुनाव को लेकर परिसीमन, आरक्षण, चुनाव कार्यक्रम और नामांकन की अंतिम शर्तें संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और निर्वाचन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार ही लागू होंगी। इसलिए संभावित उम्मीदवारों को किसी भी दावे या स्थानीय चर्चा के आधार पर अंतिम निर्णय लेने के बजाय आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

ग्रेजुएट्स युवाओं के लिए खुशखबरी, बिहार में 2 नई भर्ती शुरू, ऐसे करें अप्लाई

पटना। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बिहार के युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में अलग-अलग विभागों में दो नई भर्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। इनमें बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) की ओर से टेक्नीशियन (बेंच केमिस्ट) और असिस्टेंट बैक्टीरियोलॉजिस्ट के पद शामिल हैं। वहीं बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC) ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पदों पर भर्ती निकाली है।

1 .BTSC में 13 पदों पर मौका

BTSC ने टेक्नीशियन (बेंच केमिस्ट) और असिस्टेंट बैक्टीरियोलॉजिस्ट के कुल 13 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 24 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार इस भर्ती के लिए 23 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन BTSC की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

2 .BPSSC फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 16 पद

बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 16 पदों पर भर्ती का अवसर दिया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 16 जुलाई 2026 से शुरू किए गए हैं। इस भर्ती में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार 16 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन पूरी करनी होगी।

युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का अच्छा मौका

दोनों भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्ति का अवसर मिलेगा। खासतौर पर संबंधित विषयों में पढ़ाई कर चुके और सरकारी सेवा में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये भर्तियां महत्वपूर्ण हैं। अभ्यर्थियों को सलाह है कि आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार न करें। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय नाम, जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता और अन्य विवरण सावधानी से दर्ज करें। आवेदन शुल्क, जरूरी दस्तावेज और चयन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी संबंधित आयोग की अधिसूचना के अनुसार ही देखें।

बिहार में जमीन रजिस्ट्री की नई व्यवस्था, सभी जिलों में होंगे लागू

पटना। बिहार में जमीन, प्लॉट और फ्लैट की रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले ज्यादा डिजिटल होने जा रही है। राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों में 17 अगस्त से पेपरलेस रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसके बाद दस्तावेज तैयार करने से लेकर शुल्क भुगतान, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल साइन जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएंगी।

निबंधन पूरा होने के बाद संबंधित व्यक्ति को दस्तावेज की डिजिटल कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। इसे व्हाट्सऐप या ई-मेल के जरिए भेजने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से लोगों को कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी और रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

141 निबंधन कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था

बिहार में कुल 141 निबंधन कार्यालय हैं। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में 11 जुलाई से 10 कार्यालयों में इस व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। इसके बाद 30 जुलाई को दूसरे चरण में 40 अन्य निबंधन कार्यालयों को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया। अब बाकी कार्यालयों में भी 17 अगस्त से पेपरलेस निबंधन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

रजिस्ट्री की प्रक्रिया में आएगी तेजी

मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव नवीन कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन की तैयारियों और इसकी प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि नई व्यवस्था को समय पर लागू करने के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। विभाग के मुताबिक डिजिटल प्रक्रिया से दस्तावेजों की सुरक्षा बेहतर होगी और रजिस्ट्री में लगने वाला समय भी कम किया जा सकेगा।

GIS तकनीक से होगा स्थल निरीक्षण

नई रजिस्ट्रेशन व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ दस्तावेज तक सीमित नहीं रहेगा। संपत्ति के स्थल निरीक्षण के लिए GIS तकनीक का उपयोग करने की तैयारी है। विभाग की ओर से सभी जिला निबंधन कार्यालयों को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। GIS आधारित निरीक्षण से संपत्ति की स्थिति और स्थल संबंधी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से जांचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक सब ऑनलाइन

निबंधन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए भी डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। विभाग ने पब्लिक ग्रीवेंस मॉड्यूल लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे। शिकायत की जांच, संबंधित विभाग की कार्रवाई और उसके निस्तारण की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बिहार में इन शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी सौगात

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि बिहार में नौकरी कर रहे उत्तर प्रदेश के मूल निवासी शिक्षकों के साथ तबादले के दौरान किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। उनका स्थानांतरण भी राज्य में लागू शिक्षक स्थानांतरण नियमावली के तहत ही किया जाएगा।

पोर्टल के जरिए होगा शिक्षकों का तबादला

सरकार की योजना के मुताबिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी। शिक्षक निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन करेंगे और उसी के आधार पर स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ इसमें पारदर्शिता बनाए रखना है। इससे शिक्षकों को अपनी स्थिति और आवेदन से जुड़ी जानकारी हासिल करने में भी आसानी होगी।

यूपी के शिक्षकों के साथ नहीं होगा भेदभाव

शिक्षा मंत्री ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मूल निवासी शिक्षकों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बिहार के विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक किसी भी राज्य से हों, उनके साथ समान व्यवहार किया जाएगा। मंत्री के मुताबिक यूपी से आए शिक्षक भी बिहार के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं। इसलिए तबादले के दौरान उनके साथ किसी भी प्रकार का पक्षपात करने का सवाल ही नहीं उठता।

सिफारिश और पैरवी से नहीं होगा फैसला

स्थानांतरण प्रक्रिया में राजनीतिक या व्यक्तिगत सिफारिशों की संभावना को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि किसी शिक्षक का तबादला किसी की पैरवी के आधार पर नहीं किया जाएगा। सभी शिक्षकों के आवेदन का निपटारा निर्धारित नियमों और तय प्रक्रिया के अनुसार होगा। इससे योग्य शिक्षकों को समान अवसर मिलने और पूरी प्रक्रिया पर भरोसा कायम रखने में मदद मिलेगी।

पारदर्शिता पर शिक्षा विभाग का जोर

शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। विभाग का उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिसमें किसी शिक्षक को यह शिकायत करने का मौका न मिले कि उसके साथ राज्य, क्षेत्र या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किया गया। ऑनलाइन पोर्टल और नियमावली के आधार पर होने वाले स्थानांतरण से प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है। इससे तबादले को लेकर उठने वाले विवादों और शिकायतों में भी कमी आ सकती है।

बिहार में जमीन खरीद रहे हैं तो सावधान! इन 5 चीजों की जांच किए बिना न करें सौदा

पटना। बिहार में जमीन या प्लॉट खरीदना बड़ी रकम से जुड़ा फैसला होता है। ऐसे में सिर्फ जमीन देखकर या विक्रेता की बात पर भरोसा करके सौदा करना भारी पड़ सकता है। जमीन खरीदने से पहले कागजात और सरकारी रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है। बिहार सरकार के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर जमाबंदी सहित कई जरूरी जानकारियां ऑनलाइन देखी जा सकती हैं।

1. जमाबंदी जरूर जांचें

सबसे पहले जमीन की जमाबंदी देखें। इसमें रैयत का नाम, खाता संख्या, खेसरा संख्या, जमीन का रकबा और चौहद्दी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है। बिहार भूमि पोर्टल पर जिला, अंचल और मौजा चुनकर रैयत के नाम, खाता या खेसरा नंबर से जमाबंदी खोजी जा सकती है।

2. जमीन के मालिकाना हक की करें जांच

जिस व्यक्ति से जमीन खरीद रहे हैं, उसके नाम और उपलब्ध जमीन के रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। पुराने दस्तावेजों और वर्तमान जमाबंदी में कोई अंतर हो तो उसे स्पष्ट किए बिना पैसा देना जोखिम भरा हो सकता है।

3. दाखिल-खारिज का रिकॉर्ड देखें

जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन की जानकारी भी जांचना जरूरी है। बिहार भूमि पोर्टल पर जमाबंदी के साथ नामांतरण से संबंधित विवरण उपलब्ध हो सकता है।

4. जमीन पर विवाद या बंधक तो नहीं?

सौदा पक्का करने से पहले यह भी पता करें कि जमीन किसी विवाद, मुकदमे या बंधक से जुड़ी तो नहीं है। बिहार के भूमि रिकॉर्ड में कुछ मामलों में जमीन से जुड़े मुकदमे और बंधक की जानकारी देखने के विकल्प भी उपलब्ध हैं।

5. खेसरा, रकबा और जमीन की स्थिति मिलाएं

कागजों में दर्ज खाता, खेसरा, रकबा और चौहद्दी को मौके पर मौजूद जमीन से मिलाना बेहद जरूरी है। सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर तुरंत सौदा न करें। जरूरत पड़ने पर संबंधित अंचल कार्यालय से रिकॉर्ड की पुष्टि कराएं।

CM सम्राट का बड़ा फैसला, बिहार में इन पुलिस अधिकारियों की बढ़ी ताकत

पटना। बिहार में पर्व-त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। मेले और जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्रदान की गई हैं। 

सरकार के इस फैसले से संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही निवारक कार्रवाई करने में अधिक अधिकार मिल सकेंगे। गृह विभाग की आरक्षी शाखा की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन मौकों पर प्रभावी होगी, जब बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों, जुलूसों और मेलों में शामिल होते हैं।

किन पुलिस अधिकारियों को मिला अधिकार?

सरकार की ओर से दी गई शक्तियां रेंज और प्रक्षेत्र में तैनात आईजी और डीआईजी के अलावा जिलों में कार्यरत एसएसपी, एसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी को दी गई हैं। हालांकि, इस व्यवस्था में रेलवे से जुड़े ग्रामीण एसपी को शामिल नहीं किया गया है। इन अधिकारियों को अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी के तौर पर कुछ कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

त्योहारों के दौरान कर सकेंगे कार्रवाई

यह अधिकार प्रमुख पर्व-त्योहारों के दौरान आयोजित होने वाले जुलूस और मेलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इनमें सरस्वती पूजा, होली, रामनवमी, दुर्गापूजा, दीपावली, ईद, बकरीद, मुहर्रम, काली पूजा, छठ पूजा और शब-ए-बरात जैसे आयोजन शामिल हैं। इन मौकों पर भीड़ अधिक होने के कारण कई बार तनाव या विवाद की स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों को पहले से निवारक कदम उठाने में यह अधिकार मददगार हो सकता है।

BNSS की धाराओं के तहत मिलेगी शक्ति

पुलिस अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अध्याय 9 के तहत विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां दी गई हैं। यह प्रावधान धारा 125 से 143 तक लागू होता है। इन धाराओं के तहत किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड या मुचलका भरवाने जैसी निवारक कार्रवाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य किसी संभावित विवाद या शांति भंग की स्थिति को गंभीर रूप लेने से पहले नियंत्रित करना है।

शांति भंग की आशंका पर पहले से कार्रवाई

नए अधिकार का एक अहम पहलू यह है कि पुलिस अधिकारी केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने की आशंका है या उसके दोबारा अपराध करने की संभावना मानी जाती है, तो कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निवारक कदम उठाए जा सकते हैं। विशेष रूप से धारा 126 से 129 के तहत शांति भंग की आशंका वाले व्यक्तियों, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों या आदतन अपराधियों से मुचलका अथवा बांड लेने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।

दोषसिद्ध व्यक्ति के मामले में भी प्रावधान

किसी व्यक्ति को अपराध में दोषी ठहराए जाने की स्थिति में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बांड की मांग से संबंधित अधिकार भी कानून में निर्धारित हैं। धारा 125 के तहत इस तरह की कार्रवाई का अधिकार संबंधित न्यायिक प्राधिकारी को दिया गया है। वहीं, अन्य परिस्थितियों में कार्यपालक दंडाधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सरकार के नए फैसले से पुलिस और दंडाधिकारी स्तर की कार्रवाई के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।

बिहार में बिछेगी नई रेल लाइन, इन जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में रेल यात्रियों की बढ़ती संख्या और मौजूदा रेल नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। पटना और आसपास के रेल क्षेत्रों में ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए कई स्तर पर नई रेल लाइनें विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजनाओं पर करीब 1323 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। नई और अतिरिक्त रेल पटरियां बनने के बाद मौजूदा रेल मार्गों पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी। इसका सीधा लाभ पटना और आसपास के क्षेत्रों से सफर करने वाले यात्रियों को मिलने की उम्मीद है।

बख्तियारपुर से फतुहा तक बढ़ेगी रेल क्षमता

परियोजना के शुरुआती चरण में बख्तियारपुर से फतुहा के बीच करीब 24 किलोमीटर नई रेल लाइन विकसित करने की योजना है। इस काम के लिए लगभग 931 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च बताया गया है। इस रेलखंड पर पहले से ट्रेनों की आवाजाही काफी अधिक है। अतिरिक्त लाइन उपलब्ध होने से रेलवे को ट्रेनों के संचालन के लिए नया विकल्प मिलेगा और मौजूदा पटरियों पर निर्भरता कम हो सकेगी। परियोजना के लिए करीब 6.6 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इसके अधिग्रहण से संबंधित मंजूरी भी रेलवे स्तर पर मिल चुकी है।

बख्तियारपुर-पुनारख के बीच भी बनेगी नई लाइन

दूसरे चरण में बख्तियारपुर और पुनारख के बीच रेल संपर्क को मजबूत किया जाएगा। इस हिस्से में लगभग 30 किलोमीटर लंबी रेल लाइन प्रस्तावित है। इसके निर्माण पर करीब 392 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। रेलवे बोर्ड की ओर से इस हिस्से के लिए आवश्यक जमीन अधिग्रहण को मंजूरी दिए जाने की जानकारी है। नई लाइन बनने के बाद पटना-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

राजेंद्र नगर से पटना साहिब तक बढ़ेगा ट्रैक नेटवर्क

परियोजना के तीसरे चरण में पटना शहर के महत्वपूर्ण रेलवे मार्गों पर अतिरिक्त पटरियां उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसके तहत राजेंद्र नगर टर्मिनल से पटना साहिब तक रेल क्षमता बढ़ाने की योजना है। इसके साथ ही दानापुर से पटना जंक्शन के बीच तीसरी और चौथी लाइन विकसित करने का प्रस्ताव है। आगे राजेंद्र नगर टर्मिनल से पटना साहिब के बीच तीसरी लाइन तथा पटना साहिब से फतुहा के बीच तीसरी और चौथी लाइन तैयार किए जाने की योजना बताई गई है। इससे पटना के प्रमुख रेल स्टेशनों के बीच ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध हो सकेगा।

बिहार में जमीन सर्वे को लेकर 5 बड़ी खुशखबरी, विवाद होंगे कम!

पटना। बिहार में जमीन के पुराने रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और भूमि विवादों पर लगाम लगाने के लिए चल रहा विशेष भूमि सर्वे अब तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि सर्वे के बाद जमीन से संबंधित दस्तावेज स्पष्ट और सुरक्षित हों, जिससे भविष्य में मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों को कम किया जा सके।

1. पांच छोटे जिलों में काम पूरा करने पर जोर

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने क्षेत्रफल के लिहाज से छोटे पांच जिलों में चल रहे सर्वे की प्रगति की समीक्षा की। इनमें जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर, अरवल और शेखपुरा शामिल हैं। इन जिलों में सर्वे का काम तय समय में पूरा कराने के लिए कर्मचारियों को अन्य अभियानों से अलग रखा गया है। सरकार ने इन क्षेत्रों में 15 अगस्त तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

2. लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही

सर्वे के दौरान जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। समीक्षा में कुछ मौजों के आवश्यक रिकॉर्ड नहीं मिलने पर अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्वे कार्य में अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिकॉर्ड तैयार होने के साथ ही उसे संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने और सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए लेवल-7 के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। सर्वे की प्रगति की अगली समीक्षा भी निर्धारित अंतराल के बाद की जाएगी।

3. बंटवारा नहीं हुआ तो भी नहीं रुकेगा सर्वे

परिवार की जमीन का अभी तक आपसी बंटवारा नहीं हुआ है तो इससे सर्वे की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। ऐसी स्थिति में जमीन का रिकॉर्ड उस व्यक्ति के नाम पर जारी रह सकता है, जिसके नाम पर संबंधित भूमि पहले से दर्ज है। यानी केवल पारिवारिक बंटवारा नहीं होने की वजह से जमीन का सर्वे रोकने की जरूरत नहीं होगी। बाद में नियमानुसार बंटवारे की स्थिति के आधार पर रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

4. चार चरणों में तैयार होगा जमीन का रिकॉर्ड

विशेष भूमि सर्वे एक साथ पूरा होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसे अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जाता है। शुरुआत में गांव की सीमा और जमीन का नक्शा तैयार किया जाता है। इसके बाद भूमि के वास्तविक दावेदारों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड तैयार करने का काम होता है। अगले चरण में तैयार दस्तावेजों और नक्शे को संबंधित लोगों के सामने रखा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को रिकॉर्ड में आपत्ति होती है तो उसे अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। जांच और सुनवाई के बाद अंतिम रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।

5. पुराने रिकॉर्ड की कमी के बावजूद आगे बढ़ रहा काम

बिहार में जमीन के पुराने दस्तावेजों की उपलब्धता भी सर्वे के सामने बड़ी चुनौती है। कई गांवों में दशकों पुराने कैडेस्ट्रल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण जमीन मालिकों से उनकी भूमि से संबंधित जानकारी और दस्तावेज लिए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में रैयत अपनी जमीन का विवरण स्वघोषणा के माध्यम से उपलब्ध करा सकते हैं। विभाग की ओर से जमीन से संबंधित जानकारी जमा करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।

करीब 90 साल बाद बड़े स्तर पर भूमि सर्वे

बिहार में लंबे अंतराल के बाद व्यापक स्तर पर जमीन का सर्वे कराया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत पहले चरण में वर्ष 2019 के आसपास हुई थी और अलग-अलग कारणों से इसकी समयसीमा में बदलाव होता रहा है। अब राज्यभर में भूमि सर्वे को पूरा करने के लिए दिसंबर 2027 तक का लक्ष्य रखा गया है। बिहार में बड़ी संख्या में रैयतों की जमीन का रिकॉर्ड इस प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

बिहार में 2 हजार मुखियाओं पर शिकंजा, 12 की कुर्सी खतरे में, मचा हड़कंप

पटना। बिहार की पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। गांवों में योजनाओं के लिए जारी होने वाली सरकारी रकम के इस्तेमाल में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका जांची जा रही है। अलग-अलग स्तर पर हुई पड़ताल के बाद 2 हजार से अधिक मुखिया विभाग की निगरानी में हैं।

मामला केवल कागजी जांच तक सीमित नहीं है। जिन पंचायतों में अनियमितताओं के गंभीर संकेत मिले हैं, वहां जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। 12 मुखियाओं पर पद गंवाने का खतरा मंडरा रहा है और इनके मामलों में विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

विकास योजनाओं के खर्च का हो रहा हिसाब

पंचायतों में सड़क, नाली, पानी, रोशनी और स्वच्छता से जुड़े कई काम सरकारी योजनाओं के जरिए कराए जाते हैं। इन्हीं योजनाओं के क्रियान्वयन में नियमों के पालन और खर्च की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। अधिकारियों की जांच में यह देखा गया कि स्वीकृत योजना के मुताबिक काम हुआ या नहीं, भुगतान सही तरीके से किया गया या नहीं और संबंधित पंचायत के रिकॉर्ड में सभी जरूरी जानकारी दर्ज है या नहीं। इसी जांच के आधार पर कई पंचायतों को सवालों के घेरे में लिया गया है।

सोलर लाइट बनी जांच का बड़ा मुद्दा

गांवों की गलियों को रोशन करने के लिए लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइट भी जांच में महत्वपूर्ण बिंदु बनी है। कुछ पंचायतों में उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी कार्यक्षमता को लेकर शिकायतें मिलीं। कहीं लाइटें जल्द खराब होने की बात सामने आई तो कहीं खरीद और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जरूरत महसूस हुई। अब अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि योजना के लिए जारी रकम का इस्तेमाल तय नियमों के मुताबिक हुआ था या नहीं।

कागजों में काम और जमीन पर स्थिति की होगी तुलना

जांच के दौरान केवल फाइलों को देखने के बजाय रिकॉर्ड और वास्तविक काम के बीच मिलान पर भी जोर दिया गया। पंचायतों से जुड़े कई मामलों में काम का अनुमान, माप से संबंधित रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित योजना वास्तव में कितनी पूरी हुई और उसके बदले कितनी रकम जारी की गई। इसी आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

बिहार डीएलएड में नामांकन के लिए आवेदन शुरू, युवाओं के लिए खुशखबरी, ऐसे करें अप्लाई

पटना। बिहार में डीएलएड करने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने डीएलएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य के मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले के इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा।

नामांकन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी 16 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी पसंद के प्रशिक्षण संस्थानों का विकल्प भी देना होगा। इसी विकल्प और प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर आगे संस्थान का आवंटन किया जाएगा।

ऑनलाइन आवेदन करते समय देना होगा संस्थानों का विकल्प

डीएलएड में दाखिले के लिए अभ्यर्थियों को बिहार बोर्ड के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन पूरा करना होगा। आवेदन प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के साथ पसंद के प्रशिक्षण संस्थानों का चयन करना जरूरी होगा। अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए विकल्पों और प्रवेश परीक्षा में हासिल किए गए अंकों को ध्यान में रखते हुए समिति चयन सूची तैयार करेगी। इसलिए आवेदन करते समय संस्थानों का विकल्प सावधानी से भरने की सलाह दी गई है।

20 अगस्त को आएगी पहली चयन सूची

बिहार बोर्ड की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक डीएलएड नामांकन की पहली चयन सूची 20 अगस्त को जारी की जाएगी। इस सूची में जगह बनाने वाले अभ्यर्थियों को आवंटित संस्थान में जाकर दाखिला पूरा करने के लिए 20 से 24 अगस्त तक का समय मिलेगा। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों को 25 अगस्त तक पोर्टल पर उपलब्ध सीटों और नामांकन से जुड़ी जानकारी अपडेट करनी होगी।

दूसरी मेरिट लिस्ट 29 अगस्त को

पहली चयन प्रक्रिया के बाद बोर्ड दूसरी चयन सूची जारी करेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 अगस्त को दूसरी चयन सूची प्रकाशित होगी। इसमें चयनित अभ्यर्थियों को 29 अगस्त से 1 सितंबर तक संबंधित संस्थान में नामांकन कराने का अवसर दिया जाएगा। दूसरी सूची के बाद भी यदि कुछ प्रशिक्षण संस्थानों में सीटें खाली रह जाती हैं तो उन सीटों को भरने के लिए बोर्ड की ओर से आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

5 सितंबर को जारी होगी तीसरी सूची

डीएलएड नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में तीसरी चयन सूची 5 सितंबर को जारी की जाएगी। इस सूची में चयनित अभ्यर्थी 5 से 7 सितंबर के बीच आवंटित प्रशिक्षण संस्थान में दाखिला ले सकेंगे। इस तरह अभ्यर्थियों को आवेदन की अंतिम तारीख से लेकर चयन सूची और नामांकन की सभी तारीखों पर विशेष ध्यान देना होगा।

बिहार के पेंशनधारियों को खुशखबरी! सरकार ने खाते में भेजे पेंशन के पैसे

पटना। बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ लेने वाले बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने तय कार्यक्रम के अनुसार 10 अगस्त को पेंशन की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी है। इस बार बड़ी संख्या में पेंशनधारियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से भुगतान किया गया है।

सरकार ने पेंशन भुगतान के लिए हर महीने की 10 तारीख निर्धारित की है। इसी व्यवस्था के तहत 10 अगस्त को पात्र लाभार्थियों के खातों में 1100 रुपये की मासिक पेंशन भेजी गई। भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की गई, जिससे राशि सीधे बैंक खाते तक पहुंचती है।

1 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को भुगतान

राज्य में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में लोग आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 1 करोड़ 1 लाख 33 हजार पेंशनधारियों के खातों में इस चरण की राशि भेजी गई है। डीबीटी व्यवस्था के जरिए भुगतान होने से लाभार्थियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। राशि सीधे बैंक खाते में भेजे जाने के कारण भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

पहले 400 रुपये मिलते थे, अब 1100 रुपये

बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत पहले लाभार्थियों को हर महीने 400 रुपये की आर्थिक सहायता मिलती थी। राज्य सरकार ने पेंशन राशि में बढ़ोतरी करते हुए इसे 1100 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इस बढ़ी हुई राशि का उद्देश्य बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है।

बैंक खाते में पैसा आया या नहीं, ऐसे करें पता

पेंशन की रकम खाते में पहुंची है या नहीं, यह जानने के लिए सबसे पहले बैंक से जुड़े मोबाइल नंबर पर आया SMS चेक किया जा सकता है। भुगतान होने पर बैंक की ओर से खाते में राशि जमा होने की सूचना मिल सकती है। इसके अलावा लाभार्थी बैंक शाखा, ATM या नजदीकी ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) पर जाकर भी खाते का बैलेंस जांच सकते हैं। जिन लोगों के पास ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा है, वे उसके माध्यम से भी खाते में जमा राशि की जानकारी ले सकते हैं।