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यूपी में सभी महिलाओं के लिए ये 7 योजनाएं लागू

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सशक्तिकरण, सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाएं न केवल सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से मजबूत बन रही हैं, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों का एहसास भी हो रहा है। यूपी सरकार की इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाना और उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करना है।

1 .मिशन शक्ति योजना

उत्तर प्रदेश सरकार की मिशन शक्ति योजना महिला सुरक्षा, गरिमा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख कदम है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। मिशन शक्ति योजना के तहत महिलाओं के लिए सुरक्षा कार्यक्रम, प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और नारी सम्मान की दिशा में कई पहल की जाती हैं। यह योजना महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए काम करती है।

2 .181 महिला हेल्पलाइन

महिला हेल्पलाइन (181) एक महत्वपूर्ण योजना है, जो महिलाओं को हिंसा, शोषण, और अन्य समस्याओं से निपटने में सहायता प्रदान करती है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को तत्काल मदद मिलती है, चाहे वे घरेलू हिंसा, शारीरिक या मानसिक शोषण का शिकार हों। इसके अलावा, यह योजना महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं, कानूनी सहायता, और सेवाओं के बारे में जानकारी भी देती है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।

3 .मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का उद्देश्य उन बच्चों की सहायता करना है जो पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं। इस योजना के तहत, बाल कल्याण समिति के आदेश से बच्चों को बाल्य देखभाल संस्थाओं में आवासित कराया जाता है। इस योजना के द्वारा बच्चों को सही पोषण, शिक्षा और मानसिक व शारीरिक विकास के लिए उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और उज्जवल बन सके।

4 .महिला समृद्धि योजना

महिला समृद्धि योजना के तहत, महिलाओं को 1,40,000 रुपये तक की लागत वाली इकाइयों के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए है। इसके माध्यम से महिलाएं अपने छोटे व्यवसायों को स्थापित कर सकती हैं और अपने परिवार की वित्तीय स्थिति को बेहतर बना सकती हैं। इस योजना से महिलाओं को अपने हुनर को बढ़ावा देने और आर्थिक समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने का मौका मिलता है।

5 .मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य कन्याओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मदद प्रदान करना है। इस योजना के तहत, कन्या के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा तक विभिन्न चरणों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यदि किसी परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम हो और वह यूपी का स्थायी निवासी हो, तो वह इस योजना का लाभ उठा सकता है। इस योजना के अंतर्गत कन्या के जन्म पर 5 हज़ार रुपये, टीकाकरण पर 2 हज़ार रुपये, पहली कक्षा में प्रवेश पर 3 हज़ार रुपये, छठी कक्षा में प्रवेश पर 3 हज़ार रुपये, और नौंवी कक्षा में प्रवेश पर 5 हज़ार रुपये प्रदान किए जाते हैं। यह योजना विशेष रूप से गरीब परिवारों की कन्याओं को बेहतर भविष्य देने के लिए बनाई गई है।

6 .मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना

यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के सामूहिक विवाह कराने के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत सरकार गरीब परिवारों की बेटियों का सामूहिक विवाह कराती है और विवाह के लिए आवश्यक सामान, जैसे कि कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी चीजें प्रदान करती है। इसके अलावा, इस योजना के तहत शादी के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाती है, ताकि गरीब परिवारों को शादी के भारी खर्च से राहत मिल सके। इस योजना से बेटियों को सम्मानजनक जीवन मिल सके, साथ ही परिवारों की वित्तीय स्थिति पर भी कम असर पड़ेगा।

7 .रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष योजना

यह योजना उन महिलाओं के लिए है जो जघन्य हिंसा की शिकार हुई हैं। इस योजना के तहत, महिलाओं को तत्काल आर्थिक और चिकित्सा सहायता दी जाती है, ताकि वे हिंसा से उबर सकें और अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें। रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष योजना महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना से प्रभावित महिलाएं न केवल आर्थिक सहायता प्राप्त करती हैं, बल्कि उन्हें चिकित्सा सेवाओं और कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।

क्या है गर्भवती होने का आदर्श समय? जानें विशेषज्ञों की टिप्स

हेल्थ डेस्क: गर्भवती होने का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आपके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय आपके शरीर की स्थिति, मासिक चक्र और मानसिक तैयारी पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं गर्भवती होने का आदर्श समय और कुछ विशेषज्ञों की टिप्स:

1 .मासिक चक्र का सही समय

गर्भवती होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है आपके मासिक चक्र को समझना। महिलाओं का ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्जन) मासिक चक्र के मध्य में होता है, यानी जब आपके मासिक धर्म का पहला दिन से लगभग 14 दिन बाद। इस समय में महिला का शरीर गर्भाधारण के लिए सबसे उपयुक्त होता है। ओव्यूलेशन के समय अंडाणु गर्भधारण के लिए तैयार रहता है, इसलिए इस समय पर संभोग करने से गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।

2 .उम्र का ध्यान रखें

महिलाओं की प्रजनन क्षमता उम्र के साथ बदलती है। 20 से 30 साल की उम्र में गर्भवती होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। 30 के बाद यह संभावना धीरे-धीरे घटने लगती है, और 35 के बाद गर्भवती होने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए, यदि आप परिवार बढ़ाने का सोच रही हैं, तो उम्र का ध्यान रखते हुए समय से पहले गर्भधारण की योजना बनाना बेहतर होता है।

3 .स्वास्थ्य की स्थिति

गर्भवती होने के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आप किसी प्रकार की बीमारी (जैसे डायबिटीज, थायराइड, या उच्च रक्तचाप) से जूझ रही हैं, तो पहले इनका इलाज करवाना और सामान्य स्वास्थ्य प्राप्त करना आवश्यक है। इसके अलावा, सही आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक तनाव को कम करने के उपाय अपनाने से आपकी प्रजनन क्षमता में वृद्धि हो सकती है।

4 .मनोबल और मानसिक तैयारी

गर्भवती होने का सही समय सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी निर्भर करता है। यदि आप और आपके साथी दोनों मानसिक रूप से तैयार हैं और बच्चे के लिए जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं, तो यह समय आपके लिए आदर्श हो सकता है। तनाव और चिंता से दूर रहना और मानसिक शांति बनाए रखना गर्भधारण की प्रक्रिया को आसान बना सकता है।

5 .विशेषज्ञ से परामर्श

यदि आप गर्भवती होने की योजना बना रही हैं, तो किसी विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना बहुत महत्वपूर्ण है। डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करेंगे और आपको गर्भवती होने के लिए सही समय, आहार, और जीवनशैली के बारे में मार्गदर्शन देंगे। इसके साथ ही, वे आपको किसी भी संभावित मेडिकल समस्याओं से बचने के उपाय भी बताएंगे।

यूपी में महिलाओं को 50 हजार से 10 लाख तक लोन

लखनऊ: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) भारतीय सरकार द्वारा 2015 में शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य देश में छोटे और मझोले व्यवसायों को प्रोत्साहित करना है। विशेष रूप से इस योजना का ध्यान महिला उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें उनके व्यवसायों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने पर है। मुद्रा लोन योजना के तहत, महिलाओं को उनके छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए 50,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन प्राप्त होता है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में लोन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: 

1 .शिशु योजना: इस योजना के तहत व्यवसाय शुरू करने के लिए 50,000 रुपये तक का लोन दिया जाता है। 

2 .किशोर योजना: इस योजना के तहत 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, जो व्यवसाय को विस्तार देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 

3 .तरुण योजना: इस योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, जिसका उपयोग व्यवसाय को तेजी से बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

मुद्रा लोन की विशेषताएँ:

महिला को ब्याज दरों पर छूट: महिला उद्यमियों को विशेष रूप से ब्याज दरों में छूट दी जाती है, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम होता है और वे आसानी से अपने व्यवसाय के लिए लोन प्राप्त कर सकती हैं। यह सुविधा उन्हें वित्तीय दृष्टिकोण से सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

कॉलैटरल-फ्री लोन: मुद्रा योजना के तहत महिला उद्यमियों को बिना किसी संपत्ति (सिक्योरिटी) के लोन दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि महिलाओं को अपने घर, ज़मीन या किसी अन्य संपत्ति को गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती। यह सुविधा छोटे व्यवसायियों के लिए एक बड़ी राहत है।

भुगतान अवधि: मुद्रा लोन के तहत दी गई राशि का भुगतान अधिकतम 5 वर्षों तक किया जा सकता है, जिससे महिला उद्यमियों को समय मिलता है और वे अपनी आमदनी के हिसाब से किस्तों का भुगतान कर सकती हैं। मुद्रा लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस मंज़ूर हुई लोन राशि की 0.50% तक होती है, जो अपेक्षाकृत कम है और यह महिला उद्यमियों के लिए एक और राहत है।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्धता: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत महिला उद्यमियों को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोन प्रदान किया जाता है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिला व्यवसायियों के लिए एक बड़ा अवसर है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा कर सकती हैं।

बिहार में बेटियों को 25 से 50 हजार दे रही सरकार

पटना: आज के समय में शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार माना जाता है, और बिहार सरकार ने बेटियों के उज्जवल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, राज्य सरकार लड़कियों को उनके शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके उच्च शिक्षा के रास्ते को आसान बनाना है।

योजना का उद्देश्य

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में लड़कियों के शिक्षा स्तर को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, यह योजना उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है और उनके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी एक कदम है। यह योजना बिहार सरकार द्वारा महिलाओं की स्थिति में सुधार और उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि

12वीं पास करने पर 25 हज़ार रुपये

बिहार में जो लड़कियां 12वीं कक्षा पास करती हैं, उन्हें सरकार के द्वारा 25,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस राशि का उद्देश्य लड़कियों को उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह राशि उनकी आगे की पढ़ाई के लिए सहायक साबित होती है।

ग्रेजुएशन पास करने पर 50 हज़ार रुपये

बिहार सरकार के इस योजना के अंतर्गत, जिन लड़कियों ने स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री प्राप्त की है, उन्हें 50,000 रुपये की मदद दी जाती है। यह राशि उनकी उच्च शिक्षा को और अधिक सुलभ और सशक्त बनाने में मदद करती है और लड़कियों को आगे बढ़ने का मौका मिलता हैं।

बिहार सरकार के इस योजना की सफलता

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना ने बिहार में शिक्षा के स्तर को बेहतर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस योजना के तहत कई लड़कियों ने अपनी शिक्षा पूरी की और विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त की। सरकार के इस कदम से न केवल लड़कियों की स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि उन्होंने समाज में अपनी पहचान भी बनाई है।

बिहार में महिलाओं को बिना ब्याज 10 लाख तक लोन

पटना: बिहार सरकार ने राज्य में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना की शुरुआत की है। यह योजना खासकर महिलाओं के लिए है, जो अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहती हैं या पहले से चलाए जा रहे छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता महसूस करती हैं। मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना का उद्देश्य महिलाओं में उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित करना और उन्हें स्वरोज़गार के अवसर प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना की प्रमुख विशेषताएँ:

वित्तीय सहायता का पैमाना

इस योजना के तहत, महिला आवेदकों को 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसमें से 5 लाख रुपये ब्याज़ मुक्त ऋण के रूप में दिए जाते हैं, जबकि बाकी 5 लाख रुपये अनुदान के तौर पर उपलब्ध होते हैं। इसका मतलब यह है कि महिलाओं को सिर्फ 5 लाख रुपये का लोन चुकाना होता है, और बाकी 5 लाख रुपये सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिए जाते हैं।

50 प्रतिशत अनुदान और 50 प्रतिशत ब्याज़ मुक्त ऋण

मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के तहत महिलाओं को 50 प्रतिशत अनुदान और 50 प्रतिशत ब्याज़ मुक्त ऋण दिया जाता है। यह योजना महिलाओं को बिना किसी वित्तीय बोझ के अपना कारोबार शुरू करने और उसे चलाने में सहायता प्रदान करती है। ब्याज़ मुक्त लोन का फायदा यह है कि महिला उद्यमियों को कम समय में लोन चुकाने में सहूलियत होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहती है।

महिलाओं को प्रशिक्षण और परियोजना की मदद भी दी जाती हैं

महिलाओं को योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक कौशल और जानकारी प्रदान करने के लिए, योजना के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा, परियोजना अनुश्रवण समिति की मदद से महिलाएं अपने व्यापार के संचालन में सही दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकती हैं। इसके लिए, 25 हज़ार रुपये की राशि भी खर्च की जाती है, जो महिलाओं के प्रशिक्षण और अन्य सहायता कार्यों के लिए निर्धारित है।

यूपी में महिलाओं को 1 लाख से लेकर 5 लाख तक का लोन

लखनऊ: सरकार अपने नागरिकों के लिए समय-समय पर कई योजनाओं का संचालन करती है, जो विभिन्न वर्गों और समुदायों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण योजना है लखपति दीदी योजना, जिसे विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शुरू किया गया है।

लखपति दीदी योजना का उद्देश्य

लखपति दीदी योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में बढ़ावा देना है। यह योजना विशेष रूप से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के लिए शुरू की गई है, जो पहले से किसी न किसी रूप में अपने समूह के साथ मिलकर काम करती हैं। इस योजना के माध्यम से सरकार महिलाओं को बिना ब्याज के ऋण प्रदान करती है, ताकि वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें। यह ऋण राशि 1 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक हो सकती है, जो महिलाओं को उनके आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने में सहायता करती है।

महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

लखपति दीदी योजना के अंतर्गत महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण उन्हें अपनी क्षमताओं को निखारने, व्यापार की बारीकियों को समझने और व्यवसाय को सही दिशा में संचालित करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करेगा। इस योजना के तहत, महिलाओं को न केवल आर्थिक सहायता मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने व्यापार को संचालित करने के लिए जरूरी ज्ञान और प्रशिक्षण भी मिलेगा।

इस योजना के लिए पात्रता और शर्तें

1 .सरकारी नौकरी की शर्त: आवेदन करने वाली महिला के परिवार में कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को इस योजना से बाहर रखना है।

2 .वार्षिक आय सीमा: महिला के परिवार की सालाना आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। 3 लाख रुपये से अधिक आय वाले परिवारों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। यह शर्त गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से रखी गई है।

3 .स्वयं सहायता समूह: यह योजना केवल उन्हीं महिलाओं के लिए है जो स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी हुई हैं। इसका उद्देश्य छोटे-छोटे समूहों को आर्थिक सहायता देना और उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार लाना है।

यूपी में महिलाओं को जमीन रजिस्ट्री पर बंपर छूट!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में महिलाओं को जमीन रजिस्ट्री पर दी जा रही बंपर छूट एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल महिलाओं के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से फायदेमंद होगा, बल्कि समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने का भी एक रास्ता खोलेगा। हाल ही में, बजट सत्र के दौरान स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ने घोषणा की कि अब महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर एक करोड़ रुपये तक की संपत्तियों पर 1 फीसदी अतिरिक्त छूट मिलेगी।

क्या है यह छूट और इसका महत्व?

यूपी में अब तक महिलाओं को केवल 10 लाख रुपये तक की संपत्तियों पर 1 फीसदी की छूट मिलती थी, लेकिन इस नए फैसले के बाद यह छूट अब 1 करोड़ रुपये तक की संपत्तियों पर लागू की जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि महिलाओं के नाम पर अब बड़ी और महंगी संपत्तियों की रजिस्ट्री भी सस्ती हो जाएगी। इस बदलाव से न केवल महिलाओं को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि संपत्ति मालिक बनने का उनका सपना भी साकार होगा।

महिलाओं के लिए बढ़ी हुई आर्थिक स्वतंत्रता

संपत्ति का मालिकाना हक महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। जब महिलाओं के पास संपत्ति होती है, तो न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वे परिवार और समाज में एक मजबूत भूमिका निभाने में सक्षम होती हैं। यह कदम महिलाओं को न सिर्फ संपत्ति का अधिकार देता है, बल्कि उनका आर्थिक सशक्तिकरण भी करता है, जो लंबे समय में समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

परिवारों में निर्णय लेने की क्षमता में होगी वृद्धि

जब महिलाएं संपत्ति की मालिक बनती हैं, तो उनके पास परिवार में निर्णय लेने की शक्ति बढ़ जाती है। यह निर्णय लेने की क्षमता महिलाओं को पारिवारिक मामलों में अपनी आवाज उठाने और सही निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। एक संपत्ति मालिक महिला न केवल अपने परिवार के कल्याण के लिए काम करती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक मामलों में भी अपनी भूमिका निभाती है।

महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का एक और कदम

सरकार द्वारा दिया गया यह छूट केवल एक वित्तीय राहत नहीं, बल्कि एक प्रेरणा भी है। यह महिलाओं को यह अहसास दिलाती है कि वे संपत्ति के मालिक होने के हकदार हैं और उनके पास वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करने के अवसर हैं। इसके साथ ही, यह सरकारी नीतियों की सफलता का भी प्रतीक है जो महिलाओं को उनके अधिकार देने के लिए काम कर रही हैं।

यूपी में महिलाओं को बिना ब्याज 5 लाख देगी सरकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं और खासकर महिलाओं के लिए एक नई योजना शुरू की है, जिसका नाम मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में रोजगार को बढ़ावा देना और युवाओं तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार बिना ब्याज के 5 लाख रुपये तक का लोन देगी, जिससे वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें।

महिलाओं के लिए विशेष अवसर

इस योजना में महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए इस योजना को एक अहम अवसर मानती है, जिससे वे अपनी उद्यमिता को बढ़ावा दे सकें। महिलाओं को स्व-निर्भर बनने का मौका मिलता है और वे अपने पैरों पर खड़ा होकर समाज में अपनी पहचान बना सकती हैं।

योजना के लाभ

1 .बिना ब्याज लोन: इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी ब्याज के दिया जाएगा, जिससे लाभार्थियों को वित्तीय बोझ से मुक्ति मिलेगी।

2 .गारंटी की आवश्यकता नहीं: इस लोन के लिए कोई गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे खासकर छोटे उद्यमियों और महिलाओं के लिए इसे प्राप्त करना सरल होगा।

3 .स्वनिर्भरता को बढ़ावा: इस लोन के माध्यम से महिलाएं और युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाता है।

4 .न्यूनतम शैक्षिक योग्यता: इस योजना के लिए आवेदन करने के लिए शैक्षिक योग्यता के रूप में केवल 8वीं कक्षा पास होना आवश्यक है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

5 .उद्योग शुरू करने का अवसर: इस लोन के माध्यम से राज्य में विभिन्न प्रकार के उद्योग और व्यवसाय स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

आवेदन की प्रक्रिया

ख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत आवेदन करने के लिए आपको उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा: https://msme.up.gov.in, वेबसाइट पर जाकर आपको आवेदन फॉर्म भरने होंगे और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

आवेदन के साथ कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पहचान पत्र, शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र आदि अपलोड करने होंगे। आवेदन के बाद, एमएसएमई विभाग द्वारा आपकी योग्यता और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि आवेदन सही पाया गया, तो ऋण मंजूर किया जाएगा।

महिलाएं खुद करें प्रेग्नेंसी टेस्ट: 7 उपाय जो हैं 100% कारगर!

हेल्थ डेस्क: महिलाएं अपने प्रेग्नेंसी के बारे में जानने के लिए डॉक्टर के पास जाने से पहले कुछ घरेलू उपायों का सहारा ले सकती हैं। हालांकि, ये घरेलू उपाय पूरी तरह से मेडिकल टेस्ट के समान नहीं होते, लेकिन ये संकेत दे सकते हैं कि आप गर्भवती हैं या नहीं। यदि आपको लगता है कि आप प्रेग्नेंट हैं, तो इन उपायों से आप अपने शरीर में बदलावों का पता लगा सकती हैं।

हालांकि, इन घरेलू उपायों से मिलने वाले संकेत 100% सही नहीं होते और इनका परिणाम अक्सर गलत भी हो सकता है। यदि आप इन टेस्टों में से कोई भी टेस्ट करते हैं और परिणाम सकारात्मक दिखाई देता है, तो यह सलाह दी जाती है कि आप डॉक्टर से सलाह लें और एक मेडिकल प्रेग्नेंसी टेस्ट कराएं।

1. विनेगर (Vinegar) से टेस्ट

विनेगर का उपयोग प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए एक पुराने और आसान तरीके के रूप में किया जाता है। इस प्रक्रिया में आपको विनेगर में थोड़ा सा यूरिन मिलाना होता है। अगर विनेगर और यूरिन के मिश्रण में रंग में बदलाव होता है, तो यह प्रेग्नेंसी के संकेत हो सकते हैं। अगर विनेगर का रंग बदल जाता है, तो यह आपके गर्भवती होने का संकेत हो सकता है।

2. कांच के ग्लास (Glass Test)

यह एक सरल और प्रभावी तरीका है। एक साफ कांच के ग्लास में थोड़ी सी पेशाब डालें। अगर आप गर्भवती हैं तो कुछ समय बाद इस ग्लास पर सफेद परत दिखाई देगी। यह परत आपके प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकती है। यदि यह परत न दिखे तो इसका मतलब आप प्रेग्नेंट नहीं हैं।

3. ब्लीच का प्रयोग (Bleach Test)

ब्लीच के साथ यूरिन मिलाकर प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जा सकता है। एक बर्तन में थोड़ी ब्लीच लें और इसमें अपनी पेशाब मिलाएं। अगर इस मिश्रण में बुलबुले दिखाई देते हैं तो यह संकेत हो सकता है कि आप गर्भवती हैं। अगर बुलबुले न बनें तो इसका मतलब आप प्रेग्नेंट नहीं हैं।

4. चीनी से टेस्ट (Sugar Test)

चीनी का प्रयोग भी प्रेग्नेंसी का पता लगाने का एक घरेलू तरीका है। किसी बर्तन में चीनी डालें और इसमें थोड़ी सी पेशाब मिलाएं। अगर चीनी आपस में चिपक जाती है तो यह गर्भवती होने का संकेत हो सकता है। दूसरी ओर, अगर चीनी घुल जाती है तो आप प्रेग्नेंट नहीं हैं।

5. साबुन टेस्ट (Soap Test)

साबुन का उपयोग यूरिन के साथ मिलाकर किया जाता है। एक साबुन का टुकड़ा लें और उसमें यूरिन डालें। अगर इससे बुलबुले बनते हैं तो यह प्रेग्नेंसी के पॉजिटिव होने का संकेत हो सकता है। यह तरीका भी आसान है और घर पर किया जा सकता है।

6. डेटॉल टेस्ट (Dettol Test)

डेटॉल का उपयोग प्रेग्नेंसी टेस्ट करने के लिए भी किया जा सकता है। एक कांच के बर्तन में डेटॉल और यूरिन मिला लें। अगर यूरिन और डेटॉल मिलकर घुल जाते हैं तो इसका मतलब आप प्रेग्नेंट नहीं हैं। लेकिन अगर यूरिन की परत ऊपर तैरने लगती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आप गर्भवती हैं।

7. टूथपेस्ट टेस्ट (Toothpaste Test)

इसमें आपको सफेद टूथपेस्ट का उपयोग करना होता है। थोड़ी सी पेशाब को सफेद टूथपेस्ट में डालें। अगर टूथपेस्ट का रंग नीला हो जाता है, तो यह गर्भवती होने का संकेत हो सकता है। यह एक बहुत ही सरल और आसान तरीका है, जिसे आप घर पर कर सकती हैं।

यूपी में महिलाओं के लिए 3 नई योजनाओं का ऐलान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाओं का ऐलान किया है, जो राज्य में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन योजनाओं की घोषणा करते हुए महिलाओं के जीवन को और बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है।

1. रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना

उत्तर प्रदेश सरकार ने मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शुरू की है, जिसे 'रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना' नाम दिया गया है। इस योजना के तहत, राज्य की मेधावी छात्राओं को शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए स्कूटी प्रदान की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य न केवल छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करना है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना से छात्राओं को पढ़ाई में और भी अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका जीवन बेहतर होगा। इससे एक ओर जहां छात्राओं को भविष्य की दिशा में सही मार्गदर्शन मिलेगा, वहीं वे अपनी शिक्षा पूरी करने के साथ-साथ समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन का हिस्सा बनेंगी।

2. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का विस्तार

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक और बड़ा बदलाव किया गया है। इस योजना के तहत पहले 51 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती थी, जिसे अब बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। यह राशि गरीब परिवारों की लड़कियों के विवाह में मदद के लिए दी जाती है, ताकि उनकी शादी का खर्च कम किया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

बता दें की इस योजना के तहत, राज्य सरकार द्वारा गरीब परिवारों में विवाह योग्य लड़कियों की शादी कराने का प्रयास किया जाता है, जिससे समाज में शादी से जुड़े खर्चे को कम किया जा सके और निर्धन परिवारों के लिए एक राहत प्रदान की जा सके।

3. विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना और विवाह सहायता

यूपी सरकार ने विधवाओं के पुनर्विवाह को बढ़ावा देने के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने विधवा पुनर्विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, विधवाओं की पुत्रियों के विवाह के लिए भी अनुमन्य सहायता राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अनुमन्य अनुदान के बराबर एक लाख रुपये की जाएगी।

बता दें की यह कदम विधवाओं के सामाजिक और आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए अहम साबित होगा। इससे विधवाओं को न केवल आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी बढ़ावा मिलेगा। इसको लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिया गया हैं। 

भारत की 10 महिला वैज्ञानिक जिन्होंने विज्ञान में अपनी छाप छोड़ी

नई दिल्ली: भारत में विज्ञान के क्षेत्र में महिला वैज्ञानिकों का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। कई महिलाओं ने अपने अद्वितीय शोध और कार्य से न केवल भारतीय विज्ञान को नया दिशा दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। यहां हम उन भारतीय महिला वैज्ञानिकों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है और देश का नाम रोशन किया है।

1. दर्शन रंगनाथन

दर्शन रंगनाथन भारत की मशहूर रसायन वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 4 जून, 1941 को दिल्ली में हुआ था। दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली दर्शन रंगनाथन ने यूरिया चक्र और प्रोटीन संरचना पर कई महत्वपूर्ण खोजें की। वे मिरांडा कॉलेज में रसायन विज्ञान विभाग की अध्यक्ष रही। उनका योगदान भारतीय रसायन विज्ञान में महत्वपूर्ण रहा, और उनका निधन 2001 में हुआ।

2. आसिमा चटर्जी

आसिमा चटर्जी भारतीय रसायन विज्ञान की प्रमुख वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 23 सितंबर, 1917 को कलकत्ता में हुआ था। वे विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाली पहली महिला थीं। मलेरिया की रोकथाम करने वाली दवाओं पर किए गए उनके शोध को पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। 22 नवंबर, 2006 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका योगदान आज भी जीवित है।

3. डॉक्टर कादम्बिनी गांगुली

डॉक्टर कादम्बिनी गांगुली भारत की दूसरी महिला चिकित्सक थीं। उनका जन्म 18 जुलाई, 1861 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। उन्होंने इंग्लैंड से मेडिसिन की उच्च शिक्षा प्राप्त की और वापस लौटने के बाद डफरिन अस्पताल में कार्य किया। उनकी खोजें भारतीय चिकित्सा विज्ञान में योगदान देती रहीं। उनका निधन 3 अक्टूबर, 1923 को हुआ।

4. जानकी अम्माल

जानकी अम्माल वनस्पति विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाली भारत की पहली महिला थीं। उनका जन्म 4 नवंबर, 1897 को केरल में हुआ था। वे अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय से बॉटनी में एम.एससी. और पीएचडी. की डिग्री प्राप्त करने के बाद गन्नों की हाइब्रिड प्रजातियों पर शोध करती रही। उनकी खोजों को दुनिया भर में सराहा गया। उनका निधन 7 फरवरी, 1984 को हुआ।

5. अन्ना मणि

अन्ना मणि भारत की प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 23 अगस्त, 1918 को केरल में हुआ था। वे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग में काम करने के दौरान सौर विकिरण, ओजोन परत और वायु ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही थीं। उन्होंने मौसम के अध्ययन में कई महत्वपूर्ण खोजें कीं और भारतीय विज्ञान को एक नई दिशा दी। उनका निधन 16 अगस्त 2001 को हुआ।

6. रमन परिमाला

रमन परिमाला गणित की प्रमुख वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 21 नवंबर, 1948 को तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने मद्रास और बॉम्बे विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में प्रोफेसर रहीं। उनके कार्यों को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और श्रीनिवास रामानुजन जन्म शताब्दी पुरस्कार जैसे सम्मान मिले।

7. राजेश्वरी चटर्जी

राजेश्वरी चटर्जी कर्नाटक की पहली महिला इंजीनियर थीं। उनका जन्म 24 जनवरी, 1922 को हुआ था। उन्होंने माइक्रोवेव तकनीक में महत्वपूर्ण शोध कार्य किए और भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर के तौर पर काम किया। उनका योगदान इलेक्ट्रिकल और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय था। उनका निधन 3 सितंबर, 2010 को हुआ।

8. इरावती कर्वे

इरावती कर्वे भारतीय समाजशास्त्र और मानव विज्ञान की प्रमुख वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म म्यांमार में हुआ था। वे पुणे के डेक्कन कॉलेज में समाजशास्त्र और मानव विज्ञान विभाग की अध्यक्ष रही। उन्होंने समाजशास्त्र और मानव विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण शोध किए, जो भारतीय समाज और संस्कृति के अध्ययन में अहम माने जाते हैं। उनका निधन 11 अगस्त 1970 को हुआ।

9. बिभा चौधरी

बिभा चौधरी भारतीय भौतिक विज्ञानी थीं, जिनका जन्म 1913 में कलकत्ता में हुआ था। वे भौतिक विज्ञान में एम.एससी. करने वाली पहली महिला थीं और उन्होंने होमी भाभा और विक्रम साराभाई के साथ कार्य किया। उनके शोध पत्रों को प्रमुख जर्नल्स में प्रकाशित किया गया, और उन्होंने बोसोन कण की खोज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन 2 जून, 1991 को हुआ।

10. वीरा पंडिता

वीरा पंडिता भारतीय भूविज्ञानी थीं, जिन्होंने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया। विशेष रूप से उन्होंने प्राचीन भारतीय भूविज्ञान के अध्ययन में अपनी पूरी जिंदगी समर्पित की। वे भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर रहीं और उनका योगदान भूविज्ञान के क्षेत्र में अनमोल रहा।

यूपी में लड़क‍ियों को 25000 रुपये दे रही सरकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' एक क्रांतिकारी पहल है, जो बेटियों के स्वास्थ्य, शिक्षा, और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश में रहने वाले परिवारों को आर्थिक लाभ प्रदान किया जाता है, ताकि वे अपनी बेटियों का अच्छे से पालन-पोषण कर सकें, उन्हें शिक्षा दिला सकें और समाज में उनके अधिकारों को सशक्त बना सकें।

योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश में 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' की शुरुआत 1 अप्रैल 2019 को की गई थी। यह योजना खास तौर पर प्रदेश में लिंग अनुपात में सुधार करने, कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करने, बाल विवाह की रोकथाम करने और बेटियों को अपने पैरों पर खड़ा करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस योजना के तहत सरकार बेटियों के जन्म से लेकर 12वीं कक्षा पास करने तक विभिन्न स्तरों पर आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

कन्या सुमंगला योजना के तहत मिलने वाली राशि

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत सरकार द्वारा निर्धारित 6 श्रेणियों में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इससे प्रदेश के परिवारों को कुल 25,000 रुपये तक की राशि मिलती है। पहले यह राशि 15,000 रुपये थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है।

1. बेटी के जन्म पर 5000 रुपये मिलते हैं।

2. 1 साल तक का टीकाकरण होने पर 2000 रुपये

3. स्कूल में पहली कक्षा में दाखिला होने पर 3000 रुपये

4. किसी भी स्कूल में छठी कक्षा में दाखिला होने पर 3000 रुपये

5. किसी भी स्कूल में नवीं कक्षा में दाखिला होने पर 5000 रुपये

6. 12वीं पास करने के बाद उच्च शिक्षा में दाखिला के लिए 7000 रुपये

कन्या सुमंगला योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया काफी सरल है। आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं। सबसे पहले आप उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट mksy.up.gov.in पर जाएं और दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें।

Women's Day: यूपी में इन महिलाओं के लिए पेंशन योजना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट 2024-25 में निराश्रित महिलाओं के लिए पेंशन राशि में वृद्धि करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब निराश्रित महिलाएं हर महीने 1000 रुपये पेंशन प्राप्त करेंगी, जो पहले 500 रुपये हुआ करती थी। इस कदम से राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह समाज के कमजोर वर्ग, विशेषकर महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।

निराश्रित महिला पेंशन योजना 

निराश्रित महिला पेंशन योजना का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, जो अपने जीवनसाथी की मृत्यु के बाद अकेली और आर्थिक रूप से कमजोर हो जाती हैं। पति की मृत्यु के बाद महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें मानसिक और शारीरिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक तंगी भी शामिल होती है। इस योजना के तहत, सरकार इन महिलाओं को हर महीने पेंशन प्रदान करती है ताकि वे अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें और जीवन में कुछ आत्मनिर्भरता महसूस कर सकें।

पेंशन राशि में वृद्धि

अब तक, उत्तर प्रदेश सरकार की निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह की पेंशन दी जाती थी, जो अधिकांश महिलाओं के लिए अपर्याप्त थी। लेकिन बजट 2024-25 के तहत, राज्य सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति माह कर दिया है। यह वृद्धि निराश्रित महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। पेंशन राशि में यह वृद्धि एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल महिलाओं की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति पर भी सकारात्मक असर डालेगा।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम

निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत मिलने वाली पेंशन राशि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत प्रदान की जाती है। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती है, और राज्य सरकारें इसे लागू करती हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन वृद्ध और निराश्रित नागरिकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जो किसी भी तरह की सरकारी सहायता से वंचित हैं और जिनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है।

Womens' Day 2025: बेटियों का पिता की संपत्ति में अधिकार

नई दिल्ली: पिता की संपत्ति में बेटियों का अधिकार, भारतीय समाज में एक लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। पहले, समाज में यह धारणा रही कि केवल बेटे ही पिता की संपत्ति के वारिस होते हैं, जबकि बेटियाँ इस अधिकार से वंचित रहती थीं। लेकिन साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार कानून, 1956 में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया गया, जिसने बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार प्रदान किया।

हिंदू उत्तराधिकार कानून

साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन ने बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार दिया। इसके तहत बेटियाँ न केवल पिता की संपत्ति की सह-स्वामी बनती हैं, बल्कि उन्हें समान अधिकार प्राप्त होता है जैसे कि उनके भाई को मिलता है। इस संशोधन ने पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के अधिकार को बल दिया और उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता के रास्ते खोलने में मदद की।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

सुप्रीम कोर्ट का 11 अगस्त 2020 का फैसला, विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा के मामले में, एक ऐतिहासिक कदम था। इस निर्णय में न्यायालय ने कहा कि बेटी को जन्म से ही अपने पिता की पैतृक संपत्ति में अधिकार होता है, चाहे वह शादीशुदा हो या अविवाहित। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पिता की मृत्यु हो जाती है, तो बेटी को संपत्ति में अधिकार मिलना बंद नहीं होता, और शादी के बाद भी वह अपने अधिकार का उपयोग कर सकती है।

बेटियों के अधिकार: संपत्ति पर नियंत्रण

बेटियाँ अब न केवल अपनी हिस्सेदारी का दावा कर सकती हैं, बल्कि अपनी हिस्सेदारी को बेचने, दान करने या बंटवारे की मांग भी कर सकती हैं। इसका मतलब यह है कि अगर बेटी चाहती है, तो वह अपनी संपत्ति को स्वतंत्र रूप से प्रबंधित कर सकती है, जैसे कि कोई भी अन्य मालिक अपनी संपत्ति पर अधिकार करता है। यह बदलाव न केवल बेटी के अधिकार को सुनिश्चित करता है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

यूपी में इन महिलाओं को 25-25 हजार देगी सरकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के भरण-पोषण और कल्याण के लिए एक अहम योजना की शुरुआत की है, जिसे मातृत्व शिशु और बालिका मदद योजना नाम दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को बेहतर जीवन प्रदान करना, उनकी सेहत का ध्यान रखना और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, सरकार द्वारा महिला श्रमिकों और उनके बच्चों को कई प्रकार की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें और अपने परिवार की देखभाल कर सकें।

1. गर्भवती महिलाओं के लिए आर्थिक मदद

मातृत्व शिशु और बालिका मदद योजना के तहत, गर्भवती महिलाओं को 25,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि महिलाओं के स्वास्थ्य और गर्भावस्था की देखभाल के लिए दी जाती है, जिससे वे बेहतर चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठा सकें। इसके साथ ही, महिला के पहले और दूसरे बच्चे के लिए भी 25,000 रुपए की सहायता राशि मिलेगी। यह पहल उन परिवारों के लिए बहुत फायदेमंद है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और गर्भावस्था के दौरान मेडिकल खर्चों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

2. श्रमिकों के लिए आर्थिक लाभ

योजना के अंतर्गत, श्रमिकों को भी विभिन्न प्रकार की आर्थिक मदद दी जाती है। पंजीकृत पुरुष श्रमिकों को एकमुश्त 6,000 रुपए की मदद दी जाती है। इसके अलावा, महिला श्रमिकों को संस्थागत प्रसव के दौरान चिकित्सा बोनस के रूप में 3 माह के न्यूनतम वेतन के बराबर राशि 1,000 रुपए दी जाती है। यह सहायता महिला श्रमिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रसव के समय उन्हें न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और आर्थिक समर्थन की भी आवश्यकता होती है।

3. शिशु की देखभाल में सहायता

इस योजना के तहत, नवजात शिशुओं को भी वित्तीय मदद दी जाती है। अगर शिशु लड़का होता है तो 20,000 रुपए की सहायता दी जाएगी, वहीं अगर शिशु लड़की होती है तो उसे 25,000 रुपए की राशि दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य लड़कियों को विशेष रूप से सहायता प्रदान करना है, क्योंकि समाज में अक्सर लड़कियों को उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास में कम प्राथमिकता दी जाती है।

4. बालिका मदद योजना

बालिका मदद योजना के तहत, पहली या दूसरी बालिका संतान के जन्म पर 25,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। यह राशि बालिका के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा, यदि बालिका जन्म से दिव्यांग होती है, तो उसे 50,000 रुपए की सावधि जमा दी जाएगी, जो 18 साल की उम्र तक अविवाहित रहने पर उसके नाम पर रखी जाएगी। यह कदम दिव्यांग बच्चों के लिए भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

5. कुल मिलाकर योजना का प्रभाव

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना की शुरुआत से प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर एक नई उम्मीद जागी है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। इससे महिलाओं को गर्भावस्था, प्रसव और शिशु के पालन-पोषण के दौरान जरूरी आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे उनका मानसिक दबाव कम होता है और वे अपने बच्चों को बेहतर तरीके से पालने में सक्षम होती हैं।

Women,s Day: मात्र 22 साल की उम्र में IAS टॉपर बनी ये महिला, जानिए

न्यूज डेस्क: आज के वर्तमान समय में महिलाएं हर कार्य में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं और दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे एक ऐसी महिला के बारे में जिन्होंने मात्र 22 साल की उम्र में आईएएस टॉपर बनी और देश दुनिया में अपनी एक पहचान बनाई। तो आइये जानते हैं विस्तार से। 
दिल्ली की टीना डाबी ने लोक सेवा परीक्षा में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। टीना डीयू के एलएसआर कॉलेज से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक हैं और अपने पहले ही प्रयास में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। टीना मात्र 22 साल की उम्र में आईएएस टॉपर बनने वाली देश की पहली भारतीय महिला हैं। 

ग्यारहवीं में पहले साइंस स्ट्रीम और फिर आर्ट्स स्ट्रीम चुनने वाली टीना ने अपनी मां को मोटिवेशन का सोर्स बताती हैं। टीना डाबी, धैर्य और अनुशासन को इस बड़ी सफलता की कुंजी मानती हैं। इतना ही नहीं उनका मानना है कि परीक्षा की तैयारियों के दौरान सफलता हासिल करने के लिए आपको कई चीजों का बलिदान देना होता है। उन युवाओं के लिए जिन्हें इस बार सफलता नहीं मिली या जो तैयारी करना चाहते हैं उनके लिए टीना कहती हैं,  "जब आपका प्रदर्शन वैसा नहीं हो पाया जैसा कि आप उम्मीद करते थे तो धैर्य रखिए और हार मत मानिए।" 

टीना के मुताबिक सकारात्मक सोच और कठिन परिश्रम से ना सिर्फ इस परीक्षा में सफल हुआ जा सकता है बल्कि अच्छे स्थान भी हासिल किए जा सकते हैं।

Women,s Day: शादी के 15 दिन बाद ही पति ने छोड़, अब बनी IAS अफसर

न्यूज डेस्क: जब महिलाएं किसी मुकाम को हॉल करती हैं तो उनकी मेहनत और लगन ही उनको बुलंदिओं तक पहुंचाती है. ऐसी ही एक कहानी है, कोमल गणात्रा के आईएएस अफसर बनने की. सपने पूरे करने के लिए कोमल ने जी जान लगा दिया. कई कठिनाइयों का सामना करने के बाद कोमल IAS बनी है और देश की सेवा कर रही हैं। इनकी कहानी आज के महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। 
आपको बता दें की कोमल गणात्रा की शादी 26 साल की उम्र में हुई थी. शादी के बाद एक लड़की जो सपने देखती हैं कोमल ने वैसे ही सपने अपने लिए देखे थे, लेकिन जरूरी नहीं हर सपना पूरा हो. शादी के दो हफ्ते बाद  पति उन्हें छोड़कर चला गया. पति के छोड़कर चले जाने पर कोई भी इंसान टूट जाता है,  लेकिन कोमल ने हिम्मत नहीं हारी. जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी. कोमल ने एक इंटरव्यू में कहा "हम सोचते हैं कि शादी हमें परिपूर्ण बनाती है'. मैं भी ऐसा ही सोचती थी, जब तक मेरी शादी नहीं हुई थी. पति के छोड़कर चले जाने के बाद मुझे समझ आ गया था कि जीवन में एक लड़की के लिए शादी ही सबकुछ नहीं है. उसका जीवन इससे भी आगे हैं."

कोमल गणात्रा आज रक्षा मंत्रलालय में एडमिनिस्‍ट्रेट‍िव ऑफिसर की हैसियत से काम कर रही हैं. कोमल की पढ़ाई गुजराती मीडियम में हुई है. जिस साल उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की थी उसी साल वह गुजराती लिटरेचर की टॉपर थी. कोमल ने बताया मेरे पिता ने हमेशा मुझे हिम्मत दी है. उन्होंने मुझे समझाया तुम श्रेष्ठ हो.  उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है.  जिसके बाद उन्होंने  तीन भाषाओं में अलग- अलग यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया.

शादी से पहले कोमल ने 1000 की सैलरी से अपने करियर की शुरुआत की थी. वह स्कूल में पढ़ाने जाती थी. उन्होंने गुजरात लोक सेवा आयोग (GPSC) का मेंस भी क्लियर कर लिया था. ऐसे में मेरी शादी एक NRI से हुई. लेकिन उस समय मेरे पति नहीं चाहते थे कि मैं GPSC का इंटरव्यू दूं.  क्योंकि उन्हें न्यूजीलैंड रहना था. मैंने हालात के साथ समझौते किए और पति की बात मान ली. मेरा मन इंटरव्यू देने का था, लेकिन नहीं दिया. क्योंकि मैं उनसे प्यार करती थी. ऐसे में उनकी बात मान ली. कोमल ने बताया 'मैं ये नहीं जानती थी कि जिससे मैं प्यार करती हूं, वो मुझे छोड़ कर चला जाएगा, वो भी शादी के 15 दिन बाद'.

सबसे ज्यादा डॉक्टर बनती है इन 5 राज्यों की लड़कियां, पढ़ें रिपोट

न्यूज डेस्क: आज के वर्तमान समय में डॉक्टर बनने का क्रेज लड़कियों में लड़कों से ज्यादा हैं। लड़कियां काफी मात्रा में मेडिकल की तैयारी करती हैं और डॉक्टर बनती हैं। आज इसी विषय में एक रिपोट के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे उस राज्य की लड़कियों के बारे में जिस राज्य की लड़कियां सबसे ज्यादा डॉक्टर बनती हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से। 
CBSE के द्वारा जारी पिछले 10 साल की रिपोट देखें तो महाराष्ट्र की लड़कियां इस मामले में सबसे आगे हैं। यहां  की लड़कियों में डॉक्टर बनने का प्रतिशत 24 फीसदी से ज्यादा हैं। दूसरे नंबर पर कर्णाटक और उत्तर प्रदेश की लड़कियां हैं। 
सबसे ज्यादा डॉक्टर बनती है इन 5 राज्यों की लड़कियां। 
1 .महाराष्ट्र। 
इस लिस्ट में पहले नंबर पर महाराष्ट्र हैं जहां की लड़कियां सबसे ज्यादा डॉक्टर बनती हैं। 

2 .राजस्थान 
यहां की लड़कियां पढ़ाई के मामले में और राज्यों के मुकाबले काफी आगे हैं। डॉक्टर बनने की लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं। 

3 .उत्तर प्रदेश 
आज के समय में उत्तर प्रदेश की लड़कियां पढ़ाई के मामले में और राज्यों के लड़कियों को टक्कर दे रही हैं। इस लिस्ट में इनका स्थान तीसरा हैं। 

4 .कर्णाटक
डॉक्टर बनने की श्रेणी में कर्णाटक राज्य की की लड़कियां चौथे नंबर पर हैं। 

5 .बिहार 
आज के समय में बिहार की लड़कियां काफी मात्रा में मेडिकल पास कर रही हैं और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर रही हैं। 

Women,s Day 2020, नेत्रहीन महिला बनी IAS ऑफिसर, पढ़ें पूरी डिटेल्स

न्यूज डेस्क: भारत की महिलाएं आज दुनिया में ऐसी ऐसी मुकाम हासिल कर रही हैं जो देश के लिए गर्व की बात हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे एक ऐसे नेत्रहीन महिला के बारे में जो महिला देश की फली आईएएस ऑफिसर बनी। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से। 
देश की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस अफसर का नाम प्रांजल पाटिल हैं। पाटिल की दृष्टि जन्‍म से ही कमजोर थीं, लेकिन छह वर्ष की उम्र में उनकी दृष्टि पूरी तरह से खत्‍म हो गई। लेकिन उन्‍होंने अपनी हिम्‍मत नहीं हारी और जीवन में कुछ करने की लगन लेकर वे आगे बढ़ती रहीं। उन्‍होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 773वां रैंक हासिल किया है। जो देश के लिए एक गर्व का विषय हैं। 

आपको बता दें की प्रांजल ने मुबंई के दादर स्थित श्रीमति कमला मेहता स्कूल से पढ़ाई की है। यह स्कूल प्रांजल जैसे खास बच्चों के लिए था। यहां पढ़ाई ब्रेल लिपि में होती थी। प्रांजल ने यहां से 10वीं तक की पढ़ाई की। फिर चंदाबाई कॉलेज से आर्ट्स में 12वीं की, जिसमें प्रांजल के 85 फीसदी अंक आए। बीए की पढ़ाई के लिए उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज का रुख किया।

ग्रैजुएशन के दौरान प्रांजल और उनके एक दोस्त ने पहली दफा यूपीएससी के बारे में एक लेख पढ़ा। प्रांजल ने यूपीएससी की परीक्षा से संबंधित जानकारियां जुटानी शुरू कर दीं। उस वक्त प्रांजल ने किसी से जाहिर तो नहीं किया लेकिन मन ही मन आईएएस बनने की ठान ली। बीए करने के बाद वह दिल्ली पहुंचीं और जेएनयू से एमए किया।

अभी वर्तमान समय में प्रांजल पाटिल तिरुवनंतपुरम में सब कलेक्‍टर के तौर पर पदभार संभाल रही हैं। महाराष्‍ट्र के उल्‍हासनगर की निवासी प्रांजल केरल कैडर में नियुक्‍त होने वाली पहली दृष्टि बाधित आईएएस अफसर हैं।

बिहार की रहने वाली है यह 3 हॉट अभिनेत्रियां, बॉलीवुड पर करती है राज

न्यूज डेस्क: आज के वर्तमान समय में बिहार उन राज्यों में से एक साथ जिस राज्य के लोग देश के हर छेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे उन हॉट अभिनेत्रियों के बारे में जो बिहार की रहने वाली हैं। लेकिन बॉलीवुड पर राज करती हैं। इनकी खूबसूरती का कायल पूरी दुनिया हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार। 
1 .नेहा शर्मा। 
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री नेहा शर्मा को कौन नहीं जानता होगा आज के समय में वो बॉलीवुड पर राज करती हैं। वो पिछले 12 सालों से बॉलीवुड में काम कर रही है । वह बिहार की रहने वाली है और उनका जन्म बिहार के भागलपुर में हुआ था ।

2 .सृति झा। 
कुमकुम भाग्य सीरियल जिसने सृति झा की पहचान बनाई । आज सृति झा इस सीरियल के कारण काफी ज्यादा मशहूर हो चुकी है । इनका जन्म बिहार के बेगूसराय में हुआ था और वह काफी खूबसूरत दिखती है ।

3 .सोनाक्षी सिन्हा। 
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा आज के समय में बॉलीवुड पर राज करती हैं। उन्होंने फिल्म दबंग से डेब्यू किया था और आज बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती है । वह बिहार की रहने वाली है ।