न्यूज डेस्क: भारत का आईआईटी पूरी दुनिया में अपनी बड़ी कामयाबी के लिए जाना जाता हैं। यहां से पढ़ाई करने वाले बच्चे भारत के साथ साथ दुनिया के तमाम देशों में बड़ी बड़ी जिम्मेदारी को संभालते हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे भारत के एक ऐसे गांव के बारे में जहां से कई बच्चे हर साल आईआईटी इंजिनियर बनते हैं। अभी वर्तमान समय में 12 देशों में यहां के लोग नौकरी कर रहें हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
बिहार का एक ऐसा गांव जो किसी आईने की तरह है। पिछड़ा होने के बावजूद पिछले 24 सालों से इस गांव के लड़के कुछ ऐसा कमाल कर रहे हैं जो देश ही नहीं पूरी दुनिया के एक एक मिसाल हैं। यहां से हर साल दर्जनों छात्र IIT जैसी बड़ी सफलता को आसानी से प्राप्त करते हैं और देश दुनिया में बड़ी बड़ी जिम्मेदारी को संभालते हैं।
ये है बिहार के गया जिले में आने वाला पटवा टोली गांव। आज यहां के आईआईटियन 12 देशों में जॉब कर रहे हैं। सबसे ज्यादा 22 इंजीनियर अमेरिका में हैं, जबकि गांव के कई इंजीनियर सिंगापुर, कनाडा, स्विट्जरलैंड, जापान और दुबई में काम करते हैं।
ये गांव कभी नक्सल और जातीय हिंसा से प्रभावित था। यहां के पटवा, बुनकरी का काम करते हैं। ये अन्य पिछड़ी जाति में आते हैं। पहली बार 1992 में इस गांव से एक छात्र जितेन्द्र ने आईआईटी में दाखिला पाया था। इसके बाद जैसी आईआईटियन बनते की होड़ लग गई। ये गांव भारत का पहला ऐसा गांव हैं जहां से सबसे ज्यादा आईआईटी इंजिनियर बनते हैं।

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