इसी बीच ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉई फेडरेशन ने सरकार के सामने कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी पांच अहम मांगें रखी हैं, जिनका सीधा असर करीब 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख से अधिक पेंशनर्स पर पड़ेगा। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल के अनुसार, ये मांगें कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों और मौजूदा आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं।
1 .फैमिली यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव
कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग फिटमेंट फैक्टर से जुड़ी है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान में फैमिली यूनिट को तीन मानकर गणना की जाती है, जबकि आज के समय में यह संख्या वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं करती। मांग है कि फैमिली यूनिट को तीन से बढ़ाकर पांच किया जाए, जिससे फिटमेंट फैक्टर अपने आप बेहतर होगा और कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
2 .बीमा राशि में बड़ा इजाफा
कर्मचारियों के बीमा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अभी बीमा कटौती के मुकाबले मिलने वाली राशि बेहद कम बताई जा रही है। फेडरेशन का कहना है कि मौजूदा बीमा कवर आपात स्थिति या मृत्यु के बाद परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। मांग की गई है कि बीमा राशि को न्यूनतम 25 से 50 लाख रुपये, मध्यम स्तर पर 60 लाख से 1 करोड़ रुपये और उच्च पदों पर 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जाए।
3 .मेडिकल सुविधाओं में सुधार
मेडिकल सुविधाओं को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी है। जहां CGHS सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां सरकार की ओर से दिया जाने वाला ₹1000 का फिक्स मेडिकल अलाउंस अपर्याप्त माना जा रहा है। फेडरेशन ने इसे 15 से 20 गुना बढ़ाने और आयुष्मान भारत योजना की तरह अच्छे निजी अस्पतालों को भी सरकारी पैनल में शामिल करने की मांग की है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतर इलाज मिल सके।
4 .पूरे देश में समान बेसिक सैलरी
वेतन विसंगतियों को लेकर फेडरेशन ने बड़ा मुद्दा उठाया है। समान पद और समान लेवल के बावजूद राज्यों में बेसिक सैलरी में भारी अंतर देखा जा रहा है। मांग की गई है कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के तहत पूरे देश में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) समान हो, जबकि भत्तों में क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किया जा सकता है।
5 .दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए विकल्प
दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को लेकर एक विशेष मांग रखी गई है। रिटायरमेंट के बाद कई कर्मचारियों को इलाज के लिए दोबारा दिल्ली आना पड़ता है, जिससे परेशानी बढ़ती है। मांग है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को CGHS या DGHS में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए, ताकि वे अपने निवास स्थान के अनुसार सुविधा ले सकें।
क्या सरकार मानेगी मांगें?
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि अगर 8वें वेतन आयोग में इन मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया, तो कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और कामकाज का माहौल बेहतर बनेगा। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इन मांगों को किस हद तक स्वीकार करती है और आठवां वेतन आयोग कर्मचारियों को कितनी बड़ी राहत देता है।
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