रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार वित्त वर्ष 2021-22 में दो सरकारी बैंकों का निजीकरण करने का फैसला ले सकती हैं। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इसके बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया हैं।
खबर के मुताबिक बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को निजीकरण किया जा सकता हैं। मोदी सरकार बैंकों के निजीकरण करने की शुरुआत छोटे बैंकों से कर सकती हैं। ताकि बैंकों के निजीकरण से होने वाली परेशानियों का पता चल सके।
बता दें की बैंकों के निजीकरण होने से आज लोगों पर इसका कोई असर नहीं होगा। लेकिन बैंक यूनियन लोगों की नौकरियां जानें का खतरा बताकर इस निजीकरण का विरोध कर रहे हैं तथा बैंकों के निजीकरण को गलत बता रहे हैं।

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