भारत और रूस के बीच बड़ी डील: चीन-पाक के उड़े होश

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग एक बार फिर सुर्खियों में है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच करीब 1.2 बिलियन डॉलर (लगभग 10 हजार करोड़ रुपये) का एक बड़ा सैन्य समझौता हुआ है। इस डील को भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

वायु शक्ति बढ़ाने की रणनीति

भारत लंबे समय से अपनी हवाई ताकत को आधुनिक बनाने पर ध्यान दे रहा है। इसी रणनीति के तहत यह नया समझौता सामने आया है, जिसके जरिए भारत को लंबी दूरी तक मार करने वाली आधुनिक हवा से हवा में दागी जाने वाली मिसाइलें मिलने की संभावना है। इसका उद्देश्य दुश्मन की हवाई क्षमताओं को दूर से ही निष्क्रिय करना बताया जा रहा है।

R-37M मिसाइल की खासियत

इस डील में जिस मिसाइल का सबसे ज्यादा जिक्र हो रहा है, वह R-37M मानी जा रही है। यह एक अत्याधुनिक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर से भी अधिक बताई जाती है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी पर लक्ष्य भेदने की क्षमता और तेज गति है, जिससे यह दुश्मन के विमान को काफी दूर से ही निशाना बना सकती है।

रणनीतिक लक्ष्यों पर फोकस

यह मिसाइल केवल आम लड़ाकू विमानों के लिए नहीं, बल्कि उन अहम हवाई संसाधनों के लिए भी खतरा मानी जाती है जो पूरे युद्ध संचालन को नियंत्रित करते हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

इस समझौते को दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बदलने वाला कदम माना जा रहा है। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की वायुसेना रणनीतियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

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