हेल्थ डेस्क: मेडिकल साइंस के एक अध्ययन के अनुसार सेक्स के वक्त वजाइना में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इन बदलाव के बारे में सभी महिलाओं को सही जानकारी होनी चाहिए ताकि महिलाएं अपने वजाइना का ख्याल रख सकें। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे वजाइना में होने वाले बदलाव के बारे में की सेक्स के वक्त वजाइना में कौन कौन से बदलाव होते हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
वजाइना पीनिस को खींचती है :
मेडिकल साइंस के एक अध्ययन के अनुसार वजाइना का संरचना इस तरह का होता हैं की वो सेक्स के वक्त पीनिस को अंदर की ओर खींचती हैं। यह स्थिति ना केवल सेक्स के वक्त उत्तेजना बढ़ाती है बल्कि ऑर्गेज़म तक पहुंचाने में भी मदद करती हैं।
वजाइना का रंग बदलता है :
वजाइना का रंग लाइट होता है लेकिन उत्तेजना के दौरान ब्लड फ्लो बढ़ जाने के कारण इसके आउटर एरिया का रंग पहले से डार्क होने लगता है। जैसे-जैसे महिलाएं उत्तेजना के शिखर पर पहुंचती हैं। वजाइना में बदलाव होने लगते हैं। यह बदलाव महिलाओं के हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता हैं।
वजाइना अपनी सफाई खुद करती है :
आपको बता दें की सेक्स के वक्त वजाइना से जो वाइट डिस्चार्ज होता हैं जो वजाइना की सफाई करने में मददगार साबित होता हैं। ऐसा वाइट डिस्चार्ज हानिकारक बैक्टीरिया को यूट्रस तक जाने से रोकता है। जिससे वजाइना साफ़ और सेहतमंद रहता हैं।
वजाइना में होता है इरेक्शन:
सेक्स के वक्त पीनिस की तरह वजाइना में भी इरेक्शन होता है। ये और बात है कि वजाइना का इरेक्शन हम देख नहीं पाते लेकिन उत्तेजना के उन पलो में वजाइना भी वैसे ही रिऐक्ट करती है जैसे पीनिस। हालांकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को इरेक्शन की स्टेज तक आने में वक्त लगता है।
कॉन्डम से सुरक्षा :
अगर आपको लगता हैं की सेक्स के वक्त कॉन्डम अंदर जाकर आपके यूट्रस या दूसरे बॉडी पार्ट को हर्ट कर सकता है तो परेशान ना हों। क्योंकि वजाइना और यूट्रस के बीच सर्विक्स (गर्भाश्य ग्रीवा) एक बैरियर की तरह काम का करती है। इसके कॉन्डोम बाहर आ जाता हैं। वजाइना इसकी सुरक्षा खुद करती हैं।

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