पेट्रोल, डीजल और ATF पर अब कितना लगेगा टैक्स?
नई व्यवस्था के तहत तीनों ईंधन पर निर्यात शुल्क की दरों में बदलाव किया गया है।
पेट्रोल: निर्यात शुल्क 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
डीजल: ड्यूटी 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।
हवाई ईंधन (ATF): शुल्क 10.50 रुपये से बढ़कर 11 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
इससे पहले 16 अक्टूबर को इन उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा की गई थी। अब नई दरों के लागू होने से पेट्रोल निर्यातकों को शुल्क में राहत मिली है, जबकि डीजल और ATF का निर्यात करने वाली कंपनियों पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
क्या देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
इस फैसले को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल घरेलू कीमतों का है। निर्यात शुल्क में किए गए बदलाव का देश के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ता है। घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती हैं। इसलिए केवल निर्यात शुल्क हटने के आधार पर पेट्रोल सस्ता होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
सरकार ने क्यों बदलीं निर्यात शुल्क की दरें?
सरकार ने मार्च 2026 में ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया के संकट के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लगाने की व्यवस्था शुरू की थी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और रिफाइंड ईंधन के मुनाफे में बदलाव को देखते हुए सरकार समय-समय पर इन दरों की समीक्षा करती है। इस बार पेट्रोल पर शुल्क खत्म किया गया है, जबकि डीजल और हवाई ईंधन पर ड्यूटी बढ़ाई गई है।
तेल कंपनियों पर क्या पड़ेगा इसका असर?
पेट्रोल निर्यात पर शुल्क समाप्त होने से निर्यात करने वाली कंपनियों को राहत मिल सकती है। इसके उलट, डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ने से इन उत्पादों के निर्यात की लागत बढ़ेगी।

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