मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना की शुरुआत की। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को हुनर सिखाकर उन्हें नौकरी के अवसरों से जोड़ा जाए।
पहले 5 जिलों में बनेंगे रोजगार जोन
योजना को शुरुआती दौर में प्रदेश के पांच जिलों में लागू किया जाएगा। इसके बाद इसका विस्तार धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों तक करने की तैयारी है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले या आसपास के क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण हासिल करने का मौका मिल सकेगा।
हालांकि, पहले चरण में चुने गए पांच जिलों के नाम अभी घोषित नहीं किए गए हैं। इसी तरह केंद्रों की शुरुआत और आवेदन प्रक्रिया को लेकर भी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
युवाओं को मिलेगी रोजगारपरक ट्रेनिंग
इस योजना का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार के योग्य बनाना भी है। इसके लिए ऐसे कौशल पर ध्यान दिया जाएगा, जिनकी कंपनियों और उद्योगों में मांग है।
प्रशिक्षण संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर रहेगा, ताकि ट्रेनिंग पूरी करने वाले युवाओं को नौकरी तलाशने में सहायता मिल सके। हालांकि, कौन-कौन से कोर्स चलेंगे और प्रवेश के लिए क्या योग्यता होगी, इसकी जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
क्या ट्रेनिंग के बाद मिलेगी नौकरी?
योजना को लेकर युवाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल नौकरी को लेकर है। फिलहाल सरकार की ओर से प्रशिक्षण के बाद नौकरी की गारंटी या चयन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में कंपनियों के साथ साझेदारी, प्लेसमेंट और रोजगार मेलों की व्यवस्था इस योजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
सभी 75 जिलों तक होगा विस्तार
कुल 1,725 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने की उम्मीद है। पांच जिलों से शुरुआत के बाद सभी 75 जिलों तक रोजगार जोन पहुंचाने की योजना है।
अब युवाओं की नजर इस बात पर रहेगी कि पहले चरण के जिलों की घोषणा कब होती है और प्रशिक्षण के लिए आवेदन कब शुरू किए जाते हैं। अगर योजना तय लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो प्रदेश के युवाओं को अपने आसपास ही रोजगारपरक हुनर सीखने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

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