इस योजना के तहत मैथिली, भोजपुरी, सुरजापुरी, बज्जिका, अंगिका और मगही भाषाओं में किताबें तैयार की जाएंगी। शिक्षा विभाग ने पाठ्यक्रम बनाने और पुस्तकों की छपाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
1.20 करोड़ किताबों की छपाई की तैयारी
योजना के तहत करीब 1.20 करोड़ किताबें छापने का लक्ष्य रखा गया है। इन पर लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पुस्तकों में हिंदी, अंग्रेजी और गणित विषय शामिल होंगे। अंग्रेजी और गणित की पढ़ाई का मौजूदा आधार बरकरार रहेगा, जबकि हिंदी के साथ स्थानीय भाषा का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
बच्चों को अपनी भाषा में समझ आएगी पढ़ाई
ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से बच्चे घर पर स्थानीय भाषाएं बोलते हैं। स्कूल पहुंचने पर उन्हें मानक हिंदी में पढ़ाई समझने में शुरुआती कठिनाई हो सकती है। ऐसे में परिचित भाषा में पाठ मिलने से बच्चों को विषय समझने और कक्षा में भाग लेने में मदद मिल सकती है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों की भाषा और उनके आसपास के परिवेश को शुरुआती शिक्षा से जोड़ना है। किताबों में स्थानीय लोककथाओं, बालगीतों, पहेलियों और सांस्कृतिक परंपराओं को भी जगह देने की योजना है।
इलाके के हिसाब से तैयार होगी पाठ्य सामग्री
अलग-अलग क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाओं को ध्यान में रखकर पुस्तकें तैयार की जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, मिथिलांचल के बच्चों के लिए मैथिली और भोजपुर क्षेत्र के बच्चों के लिए भोजपुरी से जुड़ी सामग्री उपयोगी होगी। इसी तरह मगध, अंग क्षेत्र और बज्जिका भाषी इलाकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। किताबों में रंगीन चित्रों और खेल-आधारित गतिविधियों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बच्चे पढ़ाई को बोझ समझने के बजाय रुचि के साथ सीख सकें।
कब मिलेंगी बच्चों को किताबें?
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से पाठ्यक्रम तैयार करने और छपाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। किताबों के वितरण की तारीख और पूरी कार्ययोजना से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

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