फिटमेंट फैक्टर बना सबसे बड़ा मुद्दा
वेतन आयोग में सैलरी तय करने का सबसे अहम आधार फिटमेंट फैक्टर होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 8वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। इसी के अनुसार मूल वेतन (Basic Pay) को गुणा कर नया वेतन तय किया जाएगा। जबकि एंबिट कैपिटल और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज जैसी संस्थाओं का अनुमान है कि प्रभावी वेतन वृद्धि 13% से लेकर 34% या उससे अधिक तक हो सकती है। कुछ स्थितियों में यह बढ़ोतरी 50% से ऊपर भी जा सकती है।
तीन संभावित परिदृश्य
विशेषज्ञों ने वेतन वृद्धि को तीन श्रेणियों में बांटकर समझाया है.
बेस केस: फिटमेंट फैक्टर 1.83 रहा तो सैलरी में लगभग 14% की बढ़ोतरी
मीडियन केस: फिटमेंट फैक्टर 2.15 हुआ तो करीब 34% तक की वृद्धि
अपर केस: फिटमेंट फैक्टर 2.46 होने पर सैलरी में 50% से ज्यादा उछाल
50 हजार बेसिक सैलरी वालों का पूरा गणित
मान लीजिए किसी कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन 50,000 रुपये है और DA 55% चल रहा है। अभी उसकी कुल सैलरी लगभग 91,660 रुपये बनती है। अगर फिटमेंट फैक्टर 1.82 रहा तो नया बेसिक करीब 91,000 रुपये होगा। HRA और अन्य भत्तों के साथ कुल सैलरी लगभग 1.15 लाख रुपये यानी करीब 25% की बढ़ोतरी। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 रहा तो नया बेसिक करीब 1.07 लाख रुपये, कुल सैलरी लगभग 1.35 लाख रुपये यानी करीब 48% की बढ़ोतरी
अलग-अलग लेवल पर कितना बढ़ेगा बेसिक?
अगर फिटमेंट फैक्टर 2.46 माना जाए, तो 7वें वेतन आयोग के तहत 18,000 रुपये पाने वाले कर्मचारी का बेसिक बढ़कर करीब 44,000 रुपये हो सकता है। वहीं लेवल-10 पर 56,100 रुपये का बेसिक सीधे 1.37 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकता है। ऊंचे लेवल पर यह बढ़ोतरी और ज्यादा दिखाई देगी।

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