बिहार के शिक्षा क्षेत्र में खुशखबरी: हर प्रखंड में मॉडल स्कूल बनेगा

पटना। बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है। नई सरकार के गठन के बाद वर्ष 2025 से 2030 तक के लिए सभी विभागों में दीर्घकालिक योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने राज्य की शैक्षणिक तस्वीर बदलने का संकल्प लिया है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार द्वारा घोषित योजना के अनुसार, आने वाले वर्षों में बिहार के हर प्रखंड में एक मॉडल स्कूल की स्थापना की जाएगी।

इन मॉडल स्कूलों का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होगा, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक, बौद्धिक और रचनात्मक क्षमताओं को निखारने के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खेल, कला, विज्ञान प्रयोगशाला, डिजिटल शिक्षा और परामर्श जैसी व्यवस्थाएं इन स्कूलों की पहचान होंगी, ताकि छात्र-छात्राएं आत्मविश्वास के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।

राज्य सरकार का फोकस केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ पुरानी शैक्षणिक संस्थाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें।

हाल ही में कैबिनेट द्वारा पारित सात निश्चय-3 कार्यक्रम में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत वर्ष 2025-26 के लिए शिक्षा बजट को 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक रखा गया है। यह बजट इस बात का संकेत है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर गंभीर है और भविष्य में भी इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाएगा।

बिहार में वर्तमान में लगभग 78 हजार सरकारी विद्यालय हैं, जिनमें करीब 1 करोड़ 76 लाख छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार का दावा है कि शिक्षा की गुणवत्ता में आने वाली हर कमी को दूर किया जाएगा। शिक्षकों की भूमिका, स्कूलों की आधारभूत संरचना और पढ़ाई के स्तर में निरंतर सुधार किया जाएगा।

इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को आर्थिक रूप से सहयोग देने के लिए स्कॉलरशिप योजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में टीपीटी (डायरेक्ट ट्रांसफर) के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों के खातों में छात्रवृत्ति की राशि भेजी गई है, जिससे उनकी पढ़ाई में आर्थिक बाधाएं कम हों।

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