केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: ये कर्मचारी ग्रेच्युटी के हकदार नहीं

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अपने नवीनतम ऑफिस मेमोरेंडम के माध्यम से ग्रेच्युटी के नियमों में स्पष्टता प्रदान की है। पेंशन और पेंशनर्स कल्याण विभाग (DoPPW) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत ग्रेच्युटी की रकम और पूर्व मिलिट्री या सिविल सर्विस के बाद दोबारा नौकरी पर रखे गए कर्मचारियों के हक के बारे में अहम निर्देश जारी किए हैं।

क्या है नया आदेश?

DoPPW ने स्पष्ट किया है कि ग्रेच्युटी अब “वन टाइम टर्मिनल बेनिफिट” मानी जाएगी। यानी, रिटायरमेंट, अनिवार्य सेवानिवृत्ति या कंपैशन के आधार पर यदि किसी कर्मचारी को एक बार ग्रेच्युटी मिल चुकी है, तो दोबारा सरकारी नौकरी में शामिल होने पर दूसरी बार ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी। विभाग का कहना है कि ग्रेच्युटी किसी कर्मचारी की सर्विस खत्म होने के बाद मिलने वाला अंतिम लाभ है और इसे हर सर्विस पीरियड के लिए अलग नहीं दिया जा सकता।

कब मिल सकती है दूसरी ग्रेच्युटी?

हालांकि, कुछ विशेष मामलों में दूसरी बार ग्रेच्युटी दी जा सकती है। यदि कोई कर्मचारी पहले किसी PSU या ऑटोनॉमस बॉडी में काम कर चुका है और वहां से ग्रेच्युटी ले चुका है, फिर वह केंद्र सरकार में आवश्यक मंजूरी के साथ शामिल होता है, तो उसे केंद्र सरकार की सेवा के लिए अलग से ग्रेच्युटी मिल सकती है। इस मामले में कुल ग्रेच्युटी की राशि उतनी ही होगी, जितनी पूरे समय केंद्र सरकार में सेवा करने पर मिलती।

ग्रेच्युटी में पिछली सेवाओं को कैसे जोड़ा जाएगा

DoPPW ने यह भी स्पष्ट किया कि NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए पिछली सरकारी सेवाओं की ग्रेच्युटी को किस सीमा तक जोड़ा जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी पहले राज्य सरकार में काम कर चुका है और वहां की ग्रेच्युटी ले चुका है, फिर केंद्र सरकार में शामिल होता है और अतिरिक्त ग्रेच्युटी चाहता है, तो उसे दोनों सेवाओं की ग्रेच्युटी सीमित राशि के भीतर मिल सकती है।

इस फैसले से उन कर्मचारियों को स्पष्टता मिली है जो रिटायरमेंट के बाद दोबारा सरकारी नौकरी में शामिल हुए हैं या PSU से केंद्र में शामिल हुए हैं। सरकार ने यह कदम पिछली सेवाओं और नई नियुक्तियों के बीच दिक्कतों को खत्म करने और कर्मचारियों के लिए नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाया है।

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