फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में तेजी
पहले कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद अपना फाइनल पेमेंट पाने के लिए कई महीनों का इंतजार करना पड़ता था। नए लेबर कोड में इस प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज़ बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। डिजिटल रिकॉर्ड और निर्धारित प्रोसेस की वजह से अब कंपनियों के लिए फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में अनावश्यक देरी करना मुश्किल हो जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को अपने बकाया, जैसे सैलरी, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट, जल्द मिलना शुरू होगा।
ग्रेच्युटी के नियमों में बड़ा फायदा
सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्युटी के नियमों में आया है। पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कर्मचारियों को कम से कम पांच साल लगातार सेवा पूरी करनी होती थी। इसका नतीजा यह होता था कि फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा इस लाभ से वंचित रह जाता था। लेकिन नए कोड के अनुसार, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को सिर्फ एक साल की सेवा पूरी करने के बाद भी ग्रेच्युटी देने का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब है कि बार-बार कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को अब सीधा फायदा मिलेगा।
नौकरी छोड़ते ही ग्रेच्युटी
सबसे अहम बदलाव यह है कि अब कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए लंबे इंतजार की आवश्यकता नहीं होगी। नए नियमों के तहत नौकरी छोड़ते ही फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तुरंत किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को नौकरी समाप्त होने के बाद भी अपने हक का भुगतान तुरंत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

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