चीन की बड़ी तैयारी, अमेरिका को टक्कर, भारत के लिए क्या?

नई दिल्ली। वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा अब हथियारों या तेल तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेमीकंडक्टर यानी चिप्स इसके केंद्र में आ चुके हैं। इसी रणनीतिक लड़ाई में चीन ने एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों के लिए नया नियम तय कर दिया गया है, जिसके तहत उन्हें नई फैक्ट्रियां लगाने या पुरानी इकाइयों का विस्तार करने पर कम से कम 50 प्रतिशत उपकरण देश में बने हुए इस्तेमाल करने होंगे।

विदेशी तकनीक से दूरी की रणनीति

चीन लंबे समय से सेमीकंडक्टर सेक्टर में विदेशी तकनीक पर निर्भर रहा है। लेकिन अमेरिका द्वारा एडवांस्ड एआई चिप्स और अत्याधुनिक चिप निर्माण उपकरणों के निर्यात पर रोक लगाए जाने के बाद हालात तेजी से बदले हैं। साल 2023 के बाद से अमेरिकी प्रतिबंध और सख्त हुए, जिससे चीन को यह एहसास हुआ कि तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर होना अब विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी है।

कंपनियों पर तेजी से बढ़ा दबाव

हालांकि चीन ने यह नियम औपचारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सरकारी मंजूरी चाहने वाली कंपनियों को यह साबित करना पड़ रहा है कि उनके उपकरणों का बड़ा हिस्सा चीनी निर्माताओं से आया है। इससे अमेरिकी, जापानी, यूरोपीय और दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ गई है, क्योंकि अब उन क्षेत्रों में भी चीनी उपकरणों को तरजीह दी जा रही है जहां विदेशी विकल्प उपलब्ध हैं।

एडवांस्ड चिप्स में फिलहाल नरमी

हालांकि चीन यह भी जानता है कि अत्याधुनिक चिप निर्माण के लिए जरूरी कई मशीनें अभी देश में पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई हैं। इसी वजह से एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग लाइनों के लिए नियम को कुछ हद तक लचीला रखा गया है। अगर जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकार कंपनियों को सीमित राहत देती है। लेकिन दीर्घकालिक लक्ष्य साफ है भविष्य में 100 प्रतिशत घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल।

भारत के लिए क्या है इसका संदेश?

चीन की इस रणनीति से भारत के लिए कई सबक निकलते हैं। भारत भी तेजी से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है, लेकिन अभी मशीनों, केमिकल्स और वेफर्स के लिए वह ताइवान, अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया पर निर्भर है। हालांकि ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के जरिए भारत घरेलू क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चीन का उदाहरण दिखाता है कि सिर्फ फैब लगाने से काम पूरा नहीं होता। पूरी सप्लाई चेन उपकरण, कच्चा माल और रिसर्च देश के भीतर विकसित करनी पड़ती है।

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