रील कल्चर पर शिक्षा विभाग की नाराजगी
आज के डिजिटल दौर में रील बनाना केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहा। नेता, अधिकारी और अब शिक्षक भी इस ट्रेंड का हिस्सा बनते दिख रहे हैं। कई सरकारी स्कूलों के शिक्षक नियमित रूप से इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर रील अपलोड कर रहे हैं। शिक्षा विभाग ने इसे अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही माना है और इस पर कड़ा रुख अपनाया है।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने साफ कहा है कि यह मामला गंभीर है। जो भी शिक्षक या कर्मचारी इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इतना ही नहीं, यदि किसी जिले के अधिकारी ऐसे मामलों में लापरवाही बरतते हैं तो उन पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इससे साफ है कि सरकार इस मुद्दे पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने के मूड में है।
स्थानांतरण के बाद भी भटक रहे शिक्षक
एक ओर जहां अनुशासन को लेकर सख्ती बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर अव्यवस्थाएं भी सामने आ रही हैं। जिले के भीतर स्थानांतरित किए गए शिक्षकों को छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक प्रखंड और स्कूल आवंटन नहीं हो पाया है।
पटना जिले की बात करें तो करीब 1200 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं, जिनका जिला स्थानांतरण तो हो चुका है, लेकिन उन्हें अभी तक कार्यस्थल नहीं मिला है। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, इन शिक्षकों का प्रखंड और स्कूल आवंटन कर सूची ई-शिक्षा कोष पर अपलोड किया जाना चाहिए था, जो अब तक नहीं हो सका है।
दिव्यांग शिक्षकों के स्थानांतरण में गड़बड़ी के आरोप
स्थानांतरण प्रक्रिया में एक और गंभीर मामला दिव्यांग शिक्षकों को लेकर सामने आया है। नियम के अनुसार 45 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरण का लाभ दिया जाना चाहिए। लेकिन जांच में सामने आया है कि कुछ जिलों में 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले शिक्षकों को अनुशंसित कर दिया गया, जबकि 45 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले शिक्षकों के नाम के आगे “अनुशंसित नहीं” लिखा गया है।
इस सूची में करीब आधा दर्जन शिक्षक शामिल बताए जा रहे हैं। इस पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि स्थानांतरण से जुड़ा अंतिम निर्णय जिला समाहरणालय की कमेटी द्वारा लिया जाता है और वही इस पर स्थिति स्पष्ट करेगी।

0 comments:
Post a Comment