इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पटना, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा, सीतामढ़ी और सोनपुर जैसे शहरों के आसपास नए टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। खास बात यह है कि इन टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण पारंपरिक तरीके से नहीं किया जाएगा, बल्कि जमीन मालिकों को ही इस विकास प्रक्रिया का भागीदार बनाया जाएगा।
जमीन मालिकों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि किसानों और भू-स्वामियों को उनकी जमीन का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा विकसित रूप में वापस मिलेगा। यानी वे सिर्फ जमीन देने वाले नहीं, बल्कि विकसित टाउनशिप के हिस्सेदार भी बनेंगे। इससे उनकी संपत्ति का मूल्य कई गुना बढ़ने की संभावना है और उन्हें लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलता रहेगा।
जमीन खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक
परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए सरकार ने कुछ शहरों में जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक भी लगाई है। पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में यह रोक मार्च 2027 तक लागू रहेगी, जबकि भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में यह अवधि जून 2027 तक तय की गई है। इसका उद्देश्य परियोजना के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित भूमि सुनिश्चित करना है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए शहर
प्रस्तावित टाउनशिप पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे। इनमें बेहतर आवासीय व्यवस्था, स्कूल, अस्पताल, क्लब, जिम, स्विमिंग पूल और हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। साथ ही स्वच्छ पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। इन क्षेत्रों को मुख्य शहरों से बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी के जरिए जोड़ा जाएगा।
जमीन की कीमतों में उछाल की उम्मीद
जानकारों का मानना है कि इस मॉडल के जरिए जमीन की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। जहां पारंपरिक अधिग्रहण में बाजार मूल्य का चार गुना तक भुगतान किया जाता है, वहीं इस योजना में जमीन का मूल्य 10 गुना तक बढ़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में, जैसे पुनपुन के आसपास, यह वृद्धि 20 गुना तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

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