पेंशन बढ़ाने की मांग हुई तेज
कर्मचारी प्रतिनिधियों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से पेंशन को वर्तमान 50 प्रतिशत से बढ़ाकर अंतिम प्राप्त वेतन या अंतिम 10 महीनों के औसत वेतन में से जो अधिक हो, उसका 67 प्रतिशत करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिटायरमेंट के बाद भी कर्मचारी और उनका परिवार सम्मानजनक जीवन जी सकें तथा आय में अचानक बड़ी गिरावट का सामना न करना पड़े।
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकती है पेंशन
पेंशन सुधार को लेकर एक अन्य महत्वपूर्ण सुझाव यह भी है कि वरिष्ठ नागरिकों को उम्र बढ़ने के साथ अतिरिक्त पेंशन का लाभ दिया जाए। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 65 वर्ष की आयु से शुरू होकर प्रत्येक पांच वर्ष पर पेंशन में 5 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि दी जा सकती है।
यदि ऐसा होता है तो 90 वर्ष की आयु तक पहुंचने वाले पेंशनभोगियों को उनके अंतिम वेतन के बराबर यानी 100 प्रतिशत तक पेंशन मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि यह अभी केवल सुझाव के स्तर पर है और इस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
OPS, NPS और UPS में विकल्प की मांग
पेंशन सुधार पर चर्चा का एक अहम पहलू कर्मचारियों को पेंशन योजना चुनने की स्वतंत्रता देने का भी है। कई कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि कर्मचारियों को अपनी आवश्यकता और भविष्य की योजना के अनुसार ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से किसी एक का चयन करने का विकल्प मिले।
OPS में निश्चित पेंशन की गारंटी होती है, जबकि NPS बाजार आधारित निवेश मॉडल पर काम करता है। वहीं UPS को दोनों व्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाने वाली योजना के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें अंशदान के साथ न्यूनतम पेंशन सुरक्षा भी शामिल है।
करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है असर
8वां वेतन आयोग केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसके निर्णयों का प्रभाव केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रित परिवारों सहित 1.1 करोड़ से अधिक लोगों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि आयोग से जुड़ी हर चर्चा पर कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स की विशेष नजर बनी हुई है।

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