केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: टैक्स में कटौती, 1 जून से लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ी राहत देने का फैसला किया है। 1 जून से लागू हुए नए प्रावधानों के तहत पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले करों में कमी की गई है। सरकार का यह कदम ऊर्जा क्षेत्र और निर्यात उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या बदला है?

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं डीजल पर यह टैक्स 16.50 रुपये से घटाकर 13.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर भी बड़ी राहत देते हुए कर को 16 रुपये से घटाकर 9.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला सड़क एवं आधारभूत संरचना उपकर शून्य कर दिया गया है।

आम उपभोक्ताओं पर क्या असर?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए इस फैसले का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के पेट्रोल-डीजल के दामों पर फिलहाल देखने को नहीं मिलेगा। यह राहत मुख्य रूप से निर्यात करने वाली कंपनियों को मिलेगी।

क्यों घटाया गया टैक्स?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार समय-समय पर विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। यह टैक्स हर 15 दिन में संशोधित किया जा सकता है। वर्तमान परिस्थितियों में निर्यातकों को राहत देने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से कर दरों में कटौती की गई है।

क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स वह कर होता है जो किसी कंपनी को बाजार की विशेष परिस्थितियों के कारण होने वाले अतिरिक्त या अप्रत्याशित लाभ पर लगाया जाता है। भारत में इसकी शुरुआत जुलाई 2022 में की गई थी, जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था और ऊर्जा कंपनियों को असामान्य लाभ होने लगा था।

किन कंपनियों को मिलेगा फायदा?

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाली कंपनियों को मिलने की संभावना है। निजी क्षेत्र की रिफाइनिंग कंपनियां, विशेष रूप से बड़ी निर्यातक इकाइयां, टैक्स बोझ कम होने से अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों को भी इससे राहत मिल सकती है।

अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात पर टैक्स में कमी से भारतीय रिफाइनरियों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे निर्यात को प्रोत्साहन मिल सकता है, विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि हो सकती है और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को भी बल मिल सकता है।

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