बिहार में पंचायतों की लग गई लॉटरी! मुखिया को मिली बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार की ग्राम पंचायतों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी भरी खबर सामने आई है। राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय सहायता के नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नए प्रस्तावित फॉर्मूले के तहत अब बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा, जिससे गांवों के विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब पंचायतों को केवल निर्धारित अनुदान ही नहीं मिलेगा, बल्कि अच्छा काम करने और अपनी आय बढ़ाने के प्रयासों के आधार पर अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी। इससे पंचायतों के बीच विकास और पारदर्शिता को लेकर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

बिहार के ग्राम पंचायतों की हिस्सेदारी में बड़ा इजाफा

नई व्यवस्था के अनुसार विकास योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि में ग्राम पंचायतों का हिस्सा पहले की तुलना में बढ़ा दिया गया है। अब कुल फंड का 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे ग्राम पंचायतों को मिलेगा। पहले यह हिस्सा 70 प्रतिशत था। वहीं पंचायत समितियों और जिला परिषदों के हिस्से में कमी की गई है। पहले दोनों संस्थाओं को 15-15 प्रतिशत राशि मिलती थी, लेकिन नए फॉर्मूले में इसे घटाकर 10-10 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे गांव स्तर पर विकास कार्यों के लिए अधिक धन उपलब्ध हो सकेगा।

अच्छा काम करने वाली पंचायतों को अतिरिक्त लाभ

नई नीति की सबसे खास बात प्रदर्शन आधारित फंडिंग है। पंचायतों को मिलने वाली मूल राशि तो तय मानकों के अनुसार मिलेगी, लेकिन जो पंचायतें अपने संसाधनों को बढ़ाने, राजस्व संग्रह करने और बेहतर विकास कार्य करने में सफल होंगी, उन्हें अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस व्यवस्था के तहत पंचायतों को 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त राशि मिलने का रास्ता खुल सकता है। इससे मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को गांव के विकास के लिए और अधिक सक्रिय होने का प्रोत्साहन मिलेगा।

स्वच्छता और जल प्रबंधन पर रहेगा विशेष जोर

नई व्यवस्था में फंड के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। कुल राशि का आधा हिस्सा विशेष उद्देश्यों के लिए आरक्षित रहेगा। इस धनराशि का उपयोग स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण और पेयजल सुविधाओं के विकास पर किया जाएगा। बाकी राशि का उपयोग सड़क, नाली, पेयजल, सोलर स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, खेल और व्यायाम सुविधाओं जैसी योजनाओं पर तेजी से काम हो सकेगा।

मुखिया के लिए बड़ी खुशखबरी?

नई व्यवस्था से मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को अधिक संसाधन मिलेंगे, वहीं ग्रामीणों को बेहतर सुविधाओं का लाभ मिलेगा। पंचायतों को अब केवल अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय बेहतर प्रदर्शन के जरिए अतिरिक्त धन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे गांवों में विकास की रफ्तार बढ़ने और स्थानीय समस्याओं के समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।

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