खेती में बदलाव की नई पहल
राज्य में कई क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने किसानों तक 'कम खाद, सही खाद और सही सलाह' का संदेश पहुंचाने का निर्णय लिया है। अभियान के दौरान किसानों को मिट्टी की जांच कराने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
हरी खाद और जैविक खेती को बढ़ावा
अभियान के दौरान हरी खाद, जैविक खेती और बायो-प्रोडक्ट्स के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि विभाग का लक्ष्य है कि किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
किसानों तक पहुंचेगी वैज्ञानिक सलाह
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ सीधे गांवों और खेतों में पहुंचकर किसानों को सलाह देंगे। उन्हें कम पानी में होने वाली फसलों, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ किसानों को यह भी बताएंगे कि बदलते मौसम में कौन-सी फसलें अधिक लाभदायक हो सकती हैं और जोखिम को कैसे कम किया जा सकता है।
वंचित किसानों को मिलेगा योजनाओं का लाभ
अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य उन किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है जो अब तक इससे वंचित हैं। इसके तहत पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), पीएम किसान सम्मान निधि योजना, कृषि यांत्रिकीकरण योजनाओं तथा राष्ट्रीय दलहन-तिलहन मिशन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सरकार चाहती है कि किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सुविधाएं गांव स्तर पर ही उपलब्ध हों।

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