इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि पटना से पश्चिमी बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर यात्रा भी काफी आसान हो जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक इस परियोजना को पूरा कर यातायात के लिए खोल दिया जाए।
लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर में होगा शामिल
दानापुर से बिहटा तक बनने वाला यह फोरलेन एलिवेटेड कॉरिडोर लगभग 25 किलोमीटर लंबा होगा। इसे देश के सबसे लंबे शहरी एलिवेटेड राजमार्गों में से एक माना जा रहा है। करीब 1,969 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना का उद्देश्य राजधानी क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और तेज आवागमन सुनिश्चित करना है।
4 प्रमुख स्थानों पर बनेंगे बाइपास
यातायात को अधिक सुगम और बाधारहित बनाने के लिए इस मार्ग पर चार महत्वपूर्ण बाइपास भी विकसित किए जाएंगे। इनमें शामिल हैं नेऊरागंज बाइपास, पैनाल बाइपास, कन्हौली बाइपास, विशुनपुरा बाइपास। इन बाइपासों के बनने से स्थानीय और लंबी दूरी के वाहनों का दबाव अलग-अलग हो सकेगा, जिससे जाम की समस्या में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
बिहटा एयरपोर्ट तक सीधा संपर्क
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भविष्य में बनने वाले बिहटा सिविल एन्क्लेव (एयरपोर्ट) को मिलेगा। एलिवेटेड रोड के माध्यम से पटना शहर से एयरपोर्ट तक बिना ट्रैफिक बाधा के सीधा संपर्क स्थापित हो सकेगा। इसके अलावा दानापुर रेलवे स्टेशन, शिवाला मोड़, बिहटा एयरपोर्ट लिंक और बिहटा-सरमेरा बाइपास पर विशेष रैंप एवं लूप बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय यातायात भी आसानी से संचालित हो सके।
पटना से दिल्ली मार्ग पर समय की बचत
यह परियोजना पटना-बक्सर फोरलेन परियोजना (एनएच-922) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सड़क चालू होने के बाद पटना से उत्तर प्रदेश और दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यात्रा समय में करीब दो घंटे तक की कमी आ सकती है, जिससे व्यापार, परिवहन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
छात्रों और शिक्षण संस्थानों को भी होगा लाभ
बिहटा क्षेत्र में स्थित प्रमुख शिक्षण संस्थानों जैसे आईआईटी पटना और एनआईटी पटना के नए परिसरों तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को तेज और सुगम परिवहन सुविधा का लाभ मिलेगा, जिससे शिक्षा क्षेत्र को भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

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