सोमवार से शुरू हुए ये कैंप बच्चों को खेल-खेल में भाषा और गणित की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेंगे। राज्यभर में लगभग 80 हजार स्थानों पर लगाए जा रहे इन समर कैंपों का मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणना करने की क्षमता को मजबूत करना है।
80 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे जिम्मेदारी
समर कैंप के संचालन के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक कैंप में एक स्वयंसेवक बच्चों को पढ़ाने का कार्य करेगा। एक स्वयंसेवक के जिम्मे 10 से 15 बच्चों का समूह रहेगा, जिससे हर बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जा सके। इन स्वयंसेवकों में शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज से जुड़े कर्मी तथा विभिन्न विद्यालयों से चयनित प्रशिक्षित शिक्षक और सहयोगी शामिल हैं।
खेल और कहानियों के जरिए होगी पढ़ाई
समर कैंप की सबसे खास बात यह है कि यहां पारंपरिक कक्षा की तरह केवल किताबों पर जोर नहीं होगा। बच्चों को खेल, कहानी, समूह गतिविधियों और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। प्रतिदिन आयोजित होने वाले सत्रों में खेलकूद, कहानी सुनाना, शब्द भंडार बढ़ाने वाले अभ्यास, ध्वनि पहचान और गणितीय प्रश्नों का समाधान शामिल रहेगा। इससे बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे बिना दबाव के नई चीजें सीख सकेंगे।
बच्चों को मिलेगा सीखने का नया अनुभव
समर कैंप बच्चों के लिए केवल पढ़ाई का माध्यम नहीं, बल्कि नए मित्र बनाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर भी होगा। छुट्टियों के दौरान शिक्षा और मनोरंजन का यह अनोखा संगम बच्चों को सीखने का नया अनुभव देगा और उनकी बुनियादी शैक्षणिक क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

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