अब इतने रुपये प्रति क्विंटल होगी खरीद
उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 30 जुलाई से महाराष्ट्र में प्याज का न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य (MAPP) बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। यानी किसानों को अब 23.35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब सरकारी खरीद में केवल ग्रेड-ए गुणवत्ता वाले प्याज को ही शामिल किया जाएगा। पहले खरीदे जाने वाले ग्रेड-यूआरएस प्याज की खरीद बंद कर दी गई है।
लक्ष्य से कम हुई खरीद, बढ़ाए गए प्रयास
सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 3 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अब तक लगभग 1.05 लाख टन प्याज ही खरीदा जा सका है। लक्ष्य पूरा करने के लिए खरीद अभियान को और तेज किया जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद की अंतिम तिथि 15 अगस्त तक बढ़ाई जा सकती है, जिससे अधिक किसानों को सरकारी खरीद का लाभ मिल सके।
क्यों बनाया जाता है बफर स्टॉक?
केंद्र सरकार प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड के तहत प्याज का बफर स्टॉक तैयार करती है। जब सितंबर से नवंबर के बीच बाजार में प्याज की आपूर्ति घटती है और कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं, तब इसी स्टॉक से बाजार में प्याज उपलब्ध कराया जाता है। इससे कीमतों को नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद मिलती है।
बाजार में बढ़ रही हैं प्याज की कीमतें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 29 जुलाई तक देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 35 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। यह एक महीने पहले की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक है। वहीं, थोक बाजार में प्याज का औसत भाव 2,760 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहा।
उपलब्धता को लेकर सरकार आश्वस्त
कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि देश में प्याज की उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त है। प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और फिलहाल आपूर्ति में किसी बड़ी कमी की आशंका नहीं है

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