अब कौन करेगा मिड डे मील खाते का संचालन?
नई व्यवस्था के अनुसार विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष, जो आमतौर पर किसी छात्र के अभिभावक होते हैं, और विद्यालय के प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से मिड डे मील खाते का संचालन करेंगे। भोजन तैयार कराने के लिए मिलने वाली सरकारी राशि का उपयोग और रसोइयों के मानदेय का भुगतान भी यही दोनों मिलकर करेंगे। पहले यह जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से निभाई जाती थी, लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा जोर
बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से पीएम पोषण योजना के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और भोजन की गुणवत्ता पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी। हाल के समय में सरकार ने बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की नियमित जांच और निगरानी के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी क्रम में पहले छात्रों की माताओं को भोजन की गुणवत्ता की निगरानी में शामिल किया गया था और अब खाते के संचालन की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है।
ग्राम प्रधानों ने जताई नाराजगी
सरकार के इस फैसले के बाद ग्राम प्रधान संगठनों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जब पंचायत चुनाव होने तक ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है, तब मिड डे मील योजना के संचालन से उन्हें अलग करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि इससे ग्राम पंचायतों की भूमिका कमजोर होगी और स्थानीय स्तर पर समन्वय प्रभावित हो सकता है।
विद्यालय प्रबंध समिति की जिम्मेदारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यालय प्रबंध समिति की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। समिति के अध्यक्ष को अब योजना के वित्तीय संचालन, भोजन व्यवस्था की निगरानी और निर्धारित मानकों के पालन में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे अभिभावकों की भागीदारी भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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