AI अफसरों की कार्यक्षमता:
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, ये AI अफसर पहले बैच के सिविल सेवक हैं जिन्हें शेन्जेन प्रांत के फुटियन जिले में तैनात किया गया है। इन अफसरों को सबसे पहले सरकारी परिपत्र तैयार करने का काम सौंपा गया था, जो आमतौर पर 5 दिन में पूरा होता था। हालांकि, AI अफसरों ने यह कार्य महज 5 मिनट में पूरा कर दिया और यह भी देखा गया कि इनकी कार्यक्षमता में कोई कमी नहीं आई। उनकी सटीकता को देखकर वहां के मानव अफसर भी हैरान रह गए।
AI अफसरों ने केवल दस्तावेज तैयार करने का ही काम नहीं किया, बल्कि सार्वजनिक सेवा अनुरोधों पर प्रतिक्रिया देने, निवेश परियोजनाओं को मंजूरी देने और कॉर्पोरेट विश्लेषण जैसी ज़िम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया। इस तरह से ये AI अफसर न केवल गति में तेज़ हैं, बल्कि उनकी कार्यप्रणाली में भी बेहद सटीकता है, जो सरकारी कार्यों में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
AI अफसरों के आने से सरकारी भर्तियाँ रुकेगी?
चीन का यह प्रयोग यदि सफल होता है, तो यह संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में सरकारी भर्तियाँ रुक सकती हैं, खासकर उन पदों पर जहां तकनीकी काम हो। चीन में सिविल सेवक वे लोग होते हैं जो भारत में कलेक्टर की भूमिका निभाते हैं, और इनकी संख्या लगभग 3 करोड़ 20 लाख है। लेकिन AI अफसरों के आने से सरकारी कार्यों के स्वचालन और दक्षता में वृद्धि हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप मानव कर्मचारियों की संख्या में कमी आ सकती है।
भ्रष्टाचार पर भी पूरी तरह से लग जायेगा लगाम।
चीन के लिए एक और बड़ा उद्देश्य AI अफसरों की तैनाती के माध्यम से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना है। माना जा रहा है कि जब कामों को AI सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा, तो उनमें पारदर्शिता अधिक होगी, और अफसरों के व्यक्तिगत प्रभाव का दायरा कम होगा। यही नहीं, AI सिस्टम दस्तावेज़ों की सटीकता और प्रक्रिया में ईमानदारी बनाए रखेगा, जिससे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता की संभावना कम हो जाएगी।

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