AAP या BJP? वोटिंग से पहले इस सर्वे ने चौंकाया

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए कुछ ही दिन शेष हैं, और इस बार मुकाबला न केवल दो प्रमुख दलों, बल्कि एक नए त्रिकोणीय संघर्ष में तब्दील हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच इस चुनावी दौड़ में सभी की अपनी-अपनी ताकत और रणनीतियाँ हैं। 

एक हालिया ओपिनियन पोल में दिल्ली की राजनीतिक स्थिति पर जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे यह साफ हो गया है कि दिल्ली की जनता का रुझान मुख्यत: आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर बढ़ रहा है। आइए, हम इस सर्वे के निष्कर्षों और चुनावी परिदृश्य का विस्तृत विश्लेषण करें।

आम आदमी पार्टी (AAP) की बढ़ती लोकप्रियता

सर्वे के अनुसार, आम आदमी पार्टी को दिल्ली में जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। पार्टी की प्रमुख योजनाओं— जैसे मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और जनहित की अन्य योजनाओं— ने दिल्लीवासियों के बीच गहरी पैठ बनाई है। दिल्ली सरकार द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधार, विशेषकर मोहल्ला क्लिनिक और सरकारी स्कूलों में सुधार, लोगों के बीच सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

AAP के नेता अरविंद केजरीवाल की छवि भी एक प्रमुख आकर्षण है। उनके नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने नागरिकों के कल्याण के लिए कई नई योजनाओं की शुरुआत की है, जिसने पार्टी को मजबूत बनाया है। इसके साथ ही, पार्टी के कार्यकर्ताओं का नेटवर्क भी मजबूत है, जो चुनावी जमीनी स्तर पर सटीक और प्रभावी तरीके से काम कर रहा है। सर्वे में अनुमान है कि AAP इस बार 50 से 55 सीटों तक पहुंच सकती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) का संघर्ष

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। ओपिनियन पोल में भाजपा को 15 से 20 सीटों का अनुमानित समर्थन मिला है, जो 2015 और 2020 के चुनावों के मुकाबले कम है। BJP ने दिल्ली में विकास कार्यों के नाम पर प्रचार किया है, लेकिन पार्टी के चुनावी अभियान में उतनी उत्साही प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है, जितनी AAP को मिल रही है।

BJP के लिए एक और समस्या यह है कि दिल्ली में कई विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे और दिल्ली के मुद्दे ही प्रधान रहते हैं, और केंद्र सरकार की नीतियाँ हर क्षेत्र में प्रभावी नहीं हो पाती हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति इस बार कुछ नई दिशा में बढ़ती नजर आ रही है, लेकिन सर्वे के परिणाम से यह स्पष्ट है कि दिल्लीवासियों का रुझान AAP की योजनाओं और नीतियों की ओर ज्यादा है। हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नकारा नहीं जा सकता, जो दिल्ली में पार्टी को एक उम्मीद की किरण प्रदान करती है।

कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस की स्थिति इस चुनाव में बहुत कमजोर नजर आ रही है। ओपिनियन पोल में कांग्रेस को केवल 4% वोट मिलने की संभावना जताई गई है, और उसे एक भी सीट मिलने का अनुमान नहीं है। पार्टी के भीतर नेतृत्व संकट और विचारधारा का संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसका सीधा असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है। दिल्ली में कांग्रेस की पुरानी सत्ता को फिर से हासिल करने की उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी हैं, और पार्टी का मुख्य ध्यान केवल अपनी जमीन बचाने पर केंद्रित हो सकता है।

अन्य दलों का प्रभाव

सर्वे के मुताबिक, अन्य दलों को भी 2.9% वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि, इन दलों का दिल्ली विधानसभा चुनाव पर कोई बड़ा प्रभाव डालने की संभावना कम ही है, लेकिन चुनावी माहौल में इनका भी अपना छोटा-सा स्थान हो सकता है। इन दलों की गतिविधियाँ और चुनावी रणनीतियाँ भी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

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