इसके अलावा, परीक्षा के ऑनलाइन अंक निर्धारण के साथ, बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि अंक सही तरीके से दिए जा रहे हैं और किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हो रही है। यदि किसी केंद्र पर प्रयोगशाला की क्षमता से अधिक परीक्षार्थियों को परीक्षा दी जाती है, तो संबंधित प्रधानाचार्य और परीक्षक को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
प्रायोगिक परीक्षा में संशोधित प्रक्रिया
पहली बार यूपी बोर्ड ने प्रायोगिक परीक्षा के अंकों को ऑनलाइन अंकन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त करने की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य परीक्षा में पारदर्शिता और सटीकता को बढ़ाना है। बोर्ड इस प्रणाली के माध्यम से यह आंकड़ा निकाल सकेगा कि एक दिन में अधिक परीक्षार्थियों को परीक्षा देने का अवसर तो नहीं दिया गया। इसके बाद, संबंधित केंद्र के प्रधानाचार्य को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा यदि परीक्षा में किसी प्रकार का उल्लंघन पाया गया।
केंद्रों का ऑडिट
यूपी बोर्ड ने निर्णय लिया है कि हर जिले के करीब पांच प्रतिशत परीक्षा केंद्रों का ऑडिट किया जाएगा। इस ऑडिट में यह देखा जाएगा कि केंद्रों पर मानक के अनुरूप प्रायोगिक परीक्षा हो रही है या नहीं, और वहां कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही। इसमें उन केंद्रों को भी शामिल किया जाएगा, जहां अधिक संख्या में परीक्षार्थियों को अंक दिए गए हैं। यह पहल बोर्ड की शुचिता बनाए रखने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए की गई है।
शिक्षकों का चयन और परीक्षा व्यवस्था
यूपी बोर्ड ने उन शिक्षकों को परीक्षक नियुक्त किया है, जिनके विद्यालयों की शैक्षणिक उपलब्धियां अच्छी रही हैं। इन शिक्षकों के तहत परीक्षा को शुचितापूर्वक संपन्न कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रयोगशाला की क्षमता का भी ध्यान रखा गया है, ताकि अधिकतम तीन-चार चक्र में परीक्षा संपन्न कराई जा सके। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक दिन में मानक के अनुसार परीक्षार्थियों को परीक्षा का मौका मिले।
बड़े विद्यालयों और प्रयोगशालाओं में परीक्षा
जिन विद्यालयों में दो या अधिक प्रयोगशालाएं हैं, वहां अधिक संख्या में परीक्षार्थियों की परीक्षा लेना संभव हो सकेगा। इन विद्यालयों में भी बोर्ड का ऑडिट किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परीक्षा मानक के अनुसार हो रही है और शुचितापूर्वक संपन्न की जा रही है।

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