आवश्यकता और उद्देश्य:
आज के समय में तकनीकी विकास की गति इतनी तेज हो गई है कि लगभग हर क्षेत्र में कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ चुका है। रोजगार के अवसर भी अब तकनीकी दक्षता पर आधारित होते जा रहे हैं, जिससे कंप्यूटर शिक्षा का महत्व और भी बढ़ गया है। बिहार जैसे राज्य में जहां शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच में सुधार की आवश्यकता है, वहाँ कंप्यूटर शिक्षा एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
क्या है योजना:
राज्य शिक्षा शोध प्रशिक्षण परिषद के निदेशक की ओर से जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें कक्षा 6 से 8 तक के सभी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए एक शिक्षक को नामित करने का निर्देश दिया गया है। इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सभी विद्यालयों को सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
कंप्यूटर शिक्षा के लिए उन शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें कंप्यूटर के प्रति रुचि हो और जो इस विषय में दक्ष हों। इसके अलावा, शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे छात्रों को अच्छे तरीके से कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान कर सकें।
शिक्षकों का चयन और प्रशिक्षण:
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिक्षकों का चयन और उनका प्रशिक्षण है। ऐसे शिक्षकों का चयन किया जाएगा, जिनमें पहले से कंप्यूटर के प्रति रुचि और समझ हो। साथ ही, उन्हें अतिरिक्त प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे छात्रों को सही तरीके से कंप्यूटर की शिक्षा दे सकें।
शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें उन्हें कंप्यूटर के विभिन्न पहलुओं जैसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट का उपयोग, और डिजिटल साक्षरता के बारे में सिखाया जाएगा। इससे न केवल छात्रों को लाभ होगा, बल्कि शिक्षक भी खुद को अपडेट कर पाएंगे और शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी बदलाव के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे।
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