बिहार के सभी जिलों में सरकारी जमीन की खोज!

पटना: बिहार राज्य के राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इसके सही तरीके से उपयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विभाग द्वारा हाल ही में किए गए सर्वेक्षण में राज्य के विभिन्न जिलों में 17.86 लाख एकड़ सरकारी भूमि की पहचान की गई है। इस काम को लेकर विभाग ने एक डिजिटल प्रक्रिया भी शुरू की है, जिससे भूमि की जानकारी और उसकी सुरक्षा के उपायों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

राजस्व विभाग की पहल

राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने राज्य भर में सरकारी भूमि का सत्यापन करने की जिम्मेदारी राजस्व कर्मचारियों, अधिकारियों और अंचल अधिकारियों को सौंपी है। इस कार्य में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी, क्योंकि विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी भूमि की सुरक्षा में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए। विभाग के मुताबिक, इस कदम से सरकारी भूमि का कुप्रयोग रोका जा सकेगा और यह सुनिश्चित होगा कि भूमि का सही उपयोग हो।

जमीन का उपयोग और विभागों को आवंटन

सरकारी भूमि का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग विभिन्न सरकारी विभागों को भूमि प्रदान करेगा, ताकि वे भवन निर्माण, परियोजनाओं या अन्य आवश्यकताओं के लिए इसका उपयोग कर सकें। यह प्रक्रिया कानून के तहत की जाएगी, जिससे भूमि का आवंटन सही तरीके से किया जा सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचा जा सके।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन पोर्टल

सरकारी भूमि की जानकारी को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया गया है, जिससे नागरिकों और संबंधित अधिकारियों को भूमि की स्थिति का पता चल सके। विभाग ने एक सत्यापन मॉड्यूल भी तैयार किया है, जिसमें राजस्व कर्मचारी, अधिकारी और अंचल अधिकारी तीन स्तरों पर भूमि की जांच करेंगे। हालांकि, राज्य के 45,859 मौजा में से 1,355 मौजा में अभी तक ऑनलाइन इंट्री का काम पूरा नहीं हुआ है, लेकिन यह काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

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