बिहार में शिक्षा विभाग सभी स्कूलों की करेगी जांच

पटना: बिहार राज्य के शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसमें राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में लगे सोलर पैनल की जांच की जाएगी। यह निर्णय खासतौर पर उन विद्यालयों के लिए लिया गया है जिनमें वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान सोलर पैनल लगाए गए थे। 

सरकार का उद्देश्य ऊर्जा की बचत करना और पर्यावरण की रक्षा के लिए इस तकनीकी उपाय को और अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, हाल ही में यह जानकारी सामने आई है कि इनमें से लगभग 500 स्कूलों में सोलर पैनल खराब या बंद पड़े हैं, जिससे विभाग ने अब इनकी जांच करवाने का निर्णय लिया है।

सोलर पैनल की स्थापना का उद्देश्य:

वित्तीय वर्ष 2022-23 में बिहार राज्य के 8,965 सरकारी विद्यालयों में सोलर पैनल लगाए गए थे। इन सोलर पैनल्स का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में ऊर्जा की खपत को कम करना था। राज्य सरकार ने इस परियोजना के माध्यम से न केवल बिजली की बचत करने का प्रयास किया, बल्कि इसके साथ ही, पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाने वाले पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल घटाना था। साथ ही, यह सौर ऊर्जा प्रणाली विद्यालयों को बिजली संकट से राहत देने के लिए भी स्थापित की गई थी।

सोलर पैनल के बंद होने के कारण:

सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य के लगभग 500 स्कूलों में लगाए गए सोलर पैनल बंद हैं, जिसके कारण ऊर्जा बचत का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। सोलर पैनल के बंद होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि तकनीकी खामी, मेंटेनेंस की कमी, या खराब मौसम के प्रभाव के कारण सिस्टम में गड़बड़ी। इसके अलावा, कुछ मामलों में स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों को इन पैनल्स के सही उपयोग और देखरेख की जानकारी की कमी भी हो सकती है।

विभाग ने जांच के आदेश जारी किए:

अब शिक्षा विभाग ने इस समस्या का समाधान ढूंढ़ने के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में लगे सोलर पैनल की स्थिति की जांच करें। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी सोलर पैनल सही तरीके से कार्य कर रहे हैं और अगर किसी स्कूल में कोई तकनीकी समस्या या खराबी है, तो उसे शीघ्र ठीक किया जाए। इस जांच के बाद, विभाग यह योजना तैयार करेगा कि कैसे स्कूलों में सोलर पैनल के रख-रखाव और संचालन में सुधार किया जा सकता है।

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