हालांकि, सी-वोटर सर्वे ने दिल्ली की जनता का मूड भांपने का प्रयास किया है और यह सर्वे कुछ दिलचस्प तथ्य सामने लाया है। इस ट्रैकर के अनुसार, दिल्ली की जनता के बीच बदलाव की इच्छा और मौजूदा सरकार के प्रति असंतोष के स्तर को लेकर कई संकेत मिल रहे हैं।
बदलाव की ख्वाहिश – असंतुष्टों की बढ़ती संख्या
सी-वोटर ट्रैकर के मुताबिक, 1 फरवरी तक 43.9% लोगों ने कहा कि वे मौजूदा सरकार के कामकाज से नाखुश हैं और इस बार बदलाव चाहते हैं। ये आंकड़ा बताता है कि एक बड़ी संख्या दिल्ली की मौजूदा सरकार से असंतुष्ट है और किसी नए नेतृत्व की ओर देख रही है।
यह आंकड़ा खासतौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि इसी पार्टी ने पिछले कई सालों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज है और अगर असंतुष्टों का यह वर्ग किसी दूसरे दल के पक्ष में चला जाता है तो चुनावी परिणाम पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसके विपरीत, 10.9% लोगों का कहना था कि वे तो सरकार से नाखुश हैं, लेकिन बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। यानी वे मौजूदा सरकार को फिर से मौका देने के पक्ष में हैं, भले ही वे कुछ नाखुश हों।
संतुष्ट लोग और बदलाव नहीं चाहने की प्रवृत्ति
दिल्ली के करीब 38.3% लोग ऐसे हैं जो न तो सरकार के कामकाज से असंतुष्ट हैं, न ही वे बदलाव चाहते हैं। ये लोग वर्तमान सरकार की स्थिरता को बनाए रखने के पक्ष में हैं और आगामी चुनाव में अपनी संतुष्टि के साथ इस सरकार को ही सत्ता में देखना चाहते हैं। इस आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि आम आदमी पार्टी अभी भी एक स्थिर आधार पर खड़ी हुई है, जो उसे दिल्ली की सत्ता में बनाए रखने के लिए मददगार हो सकता है, हालांकि यह समर्थन उतना ज्यादा नहीं है जितना पहले था।
समय के साथ आया बदलाव – एक महीने में फर्क
दिलचस्प बात यह है कि सी-वोटर के पहले ट्रैकर (6 जनवरी) और वर्तमान ट्रैकर में असंतुष्टों की संख्या में कुछ गिरावट आई है। जनवरी में 46.2% लोग बदलाव चाहते थे, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 43.9% हो गया। इसी तरह, नाराज होते हुए भी बदलाव नहीं चाहने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो यह बताता है कि आम आदमी पार्टी को उन लोगों का समर्थन मिलने की संभावना है जो किसी नए नेतृत्व के बजाय स्थिरता चाहते हैं।
त्रिकोणीय चुनाव – कांग्रेस की भूमिका
कांग्रेस ने भी पूरी ताकत के साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका निभाने का निर्णय लिया है। अगर कांग्रेस उन 43.9% नाराज लोगों को अपनी ओर खींचने में सफल रहती है, जो बदलाव चाहते हैं, तो यह दिल्ली में मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है। कांग्रेस के नेता अपने अभियान के दौरान यह दावे कर रहे हैं कि वे दिल्ली की समस्याओं को सही तरीके से हल करने के लिए तैयार हैं और इस बार दिल्लीवासियों को एक सशक्त विकल्प देंगे।
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