बिहार में जमीन सर्वे को लेकर आया बड़ा अपडेट

पटना: बिहार सरकार ने हाल ही में भूमि सर्वेक्षण के संबंध में एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। राजस्व विभाग ने घोषणा की है कि बिहार में भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया फरवरी के अंत से तेज़ी से शुरू हो जाएगी। इस सर्वेक्षण के अंतर्गत जमीन की सीमाओं का माप, भूमि विवादों का समाधान, और खानापूर्ति की प्रक्रिया भी शुरू होगी। बिहार सरकार का लक्ष्य 2026 तक इस सर्वेक्षण को पूरा करने का है।

सर्वेक्षण का उद्देश्य और महत्व

यह सर्वेक्षण बिहार में भूमि से संबंधित मुद्दों को हल करने और भूमि रिकॉर्ड को सही और अपडेट करने के लिए किया जा रहा है। अक्सर देखा गया है कि भूमि विवादों के कारण लोगों को न्याय प्राप्त करने में कठिनाई होती है, और इस सर्वेक्षण के माध्यम से इन विवादों को सुलझाया जाएगा। सर्वेक्षण में जमीन की सीमाएं नापी जाएंगी, और दस्तावेजों का सही रूप में रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भी विवाद उत्पन्न न हो।

ऑनलाइन कागजात जमा करने की प्रक्रिया

इस सर्वेक्षण के तहत पिछले कुछ महीनों में लगभग एक करोड़ लोगों ने अपनी जमीन से संबंधित कागजात जमा किए हैं। ये कागजात ऑनलाइन माध्यम से और ब्लॉक कार्यालयों में जमा किए गए हैं। राजस्व और भूमि सुधार विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के अनुसार, अब तक एक मजबूत डेटा तैयार किया जा चुका है, और अब इस डेटा का विश्लेषण और सर्वेक्षण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सर्वेक्षण के लिए विशेष अभियान की शुरूआत

राजस्व विभाग लोगों को सर्वेक्षण के बारे में जानकारी देने के लिए एक अभियान शुरू किया हैं। यह अभियान 1 फरवरी से शुरू होगा और सभी 534 सर्किलों में नुक्कड़ नाटकों के जरिए चलाया जाएगा। ताकि सभी लोग अपने जमीन के सर्वे को करा सकें।

लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान

राजस्व विभाग ने लोगों को इस सर्वेक्षण के बारे में जानकारी देने और उन्हें जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का नाम "चली सरकार जनता के द्वार" और "आपकी जमीन आपके नाम" रखा गया है। 1 फरवरी से शुरू हुआ यह अभियान बिहार के सभी 534 सर्किलों में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से चलाया जाएगा। इस अभियान में करीब 4 दर्जन नुक्कड़ नाटक समूह हिस्सा लेंगे, जो लोगों को सर्वेक्षण की प्रक्रिया, उसके महत्व और उससे जुड़ी जानकारी देंगे।

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